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                <title>procedure - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>कर्नाटक राज्यपाल ने स्वीकार किया सिद्दारमैया का इस्तीफा: मंत्रिपरिषद भंग, जानें कब शपथ लेंगे डीके शिवकुमार ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राजभवन के आदेशानुसार वर्तमान मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। नई वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सिद्दारमैया ही राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-governor-accepts-siddaramaiahs-resignation-council-of-ministers-dissolved-know/article-155347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)27.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। सिद्दारमैया के अपना इस्तीफा सौंपे जाने के एक दिन बाद राज्यपाल ने यह कदम उठाया। यहां लोक भवन से जारी एक आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, राज्यपाल ने सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक सिद्दारमैया मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते रहेंगे।</p>
<p>सिद्दारमैया ने गुरूवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उनकी जगह किसे मुख्यमंत्री पद सौंपा जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:24:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रदेश में पहली बार जयपुर के राजस्थान अस्पताल में  जेनिक्यूलर आर्टरी एम्बोलिजेशन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। प्रदेश में पहली बार जयपुर के राजस्थान अस्पताल में घुटनों के ऑस्टियो आर्थराइटिस के लिए जेनिक्यूलर आर्टरी एम्बोलिजेशन किया। मरीज 63 वर्षीय महिला को दोनों घुटनों के ऑस्टियो आर्थराइटिस की समस्या थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/for-the-first-time-in-the-state-janicular-artery-embolization/article-11983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/rajastha-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में पहली बार जयपुर के राजस्थान अस्पताल में घुटनों के ऑस्टियो आर्थराइटिस के लिए जेनिक्यूलर आर्टरी एम्बोलिजेशन किया। मरीज 63 वर्षीय महिला को दोनों घुटनों के ऑस्टियो आर्थराइटिस की समस्या थी। उन्हें रोजाना सुबह दोनों घुटने के जोड़ में अकड़न साहनी पड़ रही थी। एक बार में खड़े होने में वे असमर्थ थीं और सहायता के बिना दैनिक दिनचर्या आगे नहीं बढ़ रही थी। आर्थराइटिस वर्गीकरण के अनुसार उनका केस केएल ग्रेड-3 का था, उन्हें दोनों घुटनों का टोटल नी रिप्लेसमेंट करवाने की सलाह दी थी।</p>
<p>इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी टीम के मुख्य डॉ. रघुनाथ नागवेकर एवं डॉ. मनीष राजपूत ने जेनिक्यूलर आर्टरी एम्बोलिजेशन का विकल्प बताया। डॉ. राजपूत ने बताया कि मरीज ऑपरेशन नहीं चाहती थी। जांच में जब यह देखा की महिला की हड्डी में कोई विकृति नहीं है तब इस क्रिया को योग्य माना गया। डॉ नागवेकर ने कहा कि एम्बोलिजेशन प्रोसीजर में घुटने के सायनोवियम को रक्त पहुंचाने वाली जेनिक्युलर आर्टरी से रक्त पहुंचाना कम कर दिया है। ऐसा करने पर घुटने के जोड़ की सूजन कम हो जाती है, जिससे दर्द में लम्बे समय तक आराम मिलता है। यद्यपि कई सावधानियां रखनी होती हैं, लेकिन नियम से यदि घुटनों की फिजियोथैरपी करें तो मरीज एक अच्छे अरसे तक ऑपरेशन को टाल सकता है। इस मरीज का यह मिनिमल इन्वेसिव प्रोसीजर किया। इसके बाद मरीज दूसरे दिन बिना किसी दर्द के अपने आप चलकर घर गई। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. एसएस अग्रवाल ने बताया कि हमारे यहां युवा डॉक्टरों की टीम नवाचार करने में आत्मविश्वास नहीं खोती है। मैनेजमेंट भी अपनी अफॉर्डेबल ट्रीटमेन्ट पॉलिसी के तहत उन्हें प्रोत्साहित करता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 11:25:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑफथेल्मिक आर्टरी कीमोइंफ्यूजन प्रोसीजर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान अस्पताल में ऑफथेल्मिक आर्टरी कीमोइंफ्यूजन या ओएसी प्रोसीजर से चार वर्षीय एक बालक के आंखों के परदे के कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा का इलाज किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/jaipur-ophthalmic-artery-chemoinfusion-procedure-in-hospital/article-10374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/654654564.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान अस्पताल में ऑफथेल्मिक आर्टरी कीमोइंफ्यूजन या ओएसी प्रोसीजर से चार वर्षीय एक बालक के आंखों के परदे के कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा का इलाज किया गया। इसके लिए मरीज को जनरल एनेस्थेसीया दिया गया था। उसे केवल एक दिन के एडमिशन के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई। इस बच्चे में कैंसर का पताए तीन महीने पहले ही चला था। राजस्थान अस्पताल के इंटेरवेनशनल रेडियॉलॉजी विशेषज्ञ डॉ मनीष राजपूत और डॉ रघुनाथ नागवेकर की टीम ने यह प्रोसीजर किया। इसके साथ ही राजस्थान अस्पताल देश के उन चुनिंदा केंद्रों के नक्शे में जुड़ गया है, जहां यह इलाज उपलब्ध है। गौरतलब है कि रेटिनोब्लास्टोमा का यह  इलाज बिना चीरफाड़ से होता है। इस तकनीक का प्रणेता यद्यपि जापान है, लेकिन इसको और विकसित करने में अमेरिका का बड़ा योगदान है। मरीज के डिस्चार्ज के समय इस सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए सीईओ डॉ सर्वेश अग्रवाल के नेतृत्व में अस्पताल की नर्सिंग ऐड्मिन टेक्निशन स्टाफ ने बालक का उत्साहवर्धन किया। डॉ मनीष राजपूत ने बताया कि सामान्यत: इस इलाज का खर्च तीन से चार लाख रुपये होता है, लेकिन सम्यक संकल्प फाउंडेशन व राजस्थान अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में इस बालक का इलाज निशुल्क किया गया।</p>
<p>डॉ. रघुनाथ नागवेकर ने बताया कि परफेक्ट मात्रा में कीमो की दवाइयां योग्य स्थान पर पहुंचें ये एक अनुभवी टीम ही कर पाती है, क्योंकि यह आवश्यक है कि दवाई दिमाग, कपाल अथवा नाक आदि हिस्सों मे नहीं जाए। केरोटिड आर्टरी के जरिए ऑफथेल्मिक आर्टरी तक पहुंचा गया और वहां सुनिश्चित स्थान पर दवाइयां पूर्व निर्धारित मात्रा में इंफ्यूज की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अब इस बच्चे का रेग्युलर फॉलोअप जरूरी है। इस तरह के बच्चों में आंखों की विशेष देखभाल करनी होती है, जिससे कि कोई जटिल स्थिति विकसित हो इससे पहले ही उसे नियंत्रित किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 12:02:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक पर संसद ने लगाई मुहर </title>
                                    <description><![CDATA[विधेयक के जरिए अदालत द्वारा सजायाफ्ता अपराधियों की बॉयोमेट्रीक पहचान को 75 साल तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/parliament-approved-the-criminal-procedure-identity-bill/article-7539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/parliament-new-7.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने बुधवार को दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक- 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही संसद ने इस बहुचर्चित विधेयक पर अपनी मुहर लगा दी। लोकसभा द्वारा इस विधेयक को इसी सप्ताह पारित किया गया है।</p>
<p><br />इससे पहले दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक- 2022 को विपक्षी दलों द्वारा विस्तार से विचार-विमर्श एवं चर्चा करने के लिए प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग की। जिसे सदन ने 97 के मुकाबले 59 मतों से खारिज कर दिया गया। वहीं, डीएमके टी. शिवा एवं अन्य सांसदों विनय विश्वम एवं जॉन ब्रिटिश द्वारा रखे गए संशोधनों को भी सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने विधेयक को अस्पष्ट, मौलिक अधिकारों एवं मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया गया। जिसे केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपराधियों एवं  आतंकवादियों के मानवाधिकारों की तो चिंता है। लेकिन अपराध के कारण पीड़ितों के मानवाधिकारों की नहीं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के प्रावधानों से अपराधियों को सजा दिलाने की दर बढ़ेगी। जो अभी 45 फीसदी से भी कम है। शाह ने सदन को विश्वास दिलाया कि विधेयक का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा और न ही राजनीतिक बदले की भावना से काम किया जाएगा। सरकार की मंशा अपराधियों के खिलाफ थर्ड डिग्री के उपयोग के बजाए वैज्ञानिक तरीकों से अपराध की जांच करवाना है। ताकि अपराधी पकड़े जा सकें और उन्हें जल्द सजा मिल सके। शाह ने भरोसा दिया कि राजनीतिक आंदोलनों को इससे दूर रखा जाएगा और इसके लिए सरकार नियम बनाएगी। गौरतलब है कि इस विधेयक के जरिए अदालत द्वारा सजायाफ्ता अपराधियों की बॉयोमेट्रीक पहचान को 75 साल तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 13:18:08 +0530</pubDate>
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