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                <title>संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रहा देईखेड़ा राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एक चिकित्सक के भरोसे अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[हाईवे किनारे स्थित होने से यहां सेमी ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/deikheda-government-community-health-center-crumbling-under-a-shortage-of-resources/article-150789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)15.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा । कोटा-दौसा मेगा हाईवे के किनारे स्थित देईखेड़ा राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों के अभाव के चलते गंभीर घायलों का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। हालात यह हैं कि सड़क हादसों में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल रेफर करना पड़ता है। अस्पताल में छह चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल दो ही कार्यरत हैं, जबकि चार पद रिक्त हैं। इनमें से एक महिला चिकित्सक लंबे समय से अवकाश पर हैं और दूसरे चिकित्सक अस्पताल प्रभारी होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। मेगा हाईवे एवं दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते यातायात के कारण दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है, लेकिन अस्पताल में ईसीजी मशीन का ऑपरेटर नहीं है तथा फ्रैक्चर के उपचार हेतु प्लास्टर की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को अन्यन्त्र रेफर करना मजबूरी बनी हुई है।</p>
<p><strong>सेमी ट्रॉमा सेंटर की जरूरत </strong><br />हाईवे किनारे स्थित होने के कारण यहां सेमी ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि हादसों में घायलों को त्वरित उपचार मिल सके। इस संबंध में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ओ पी सामर ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>मोर्चरी का अभाव</strong><br />अस्पताल में मोर्चरी सुविधा नहीं होने से दुर्घटनाओं में मृत व्यक्तियों के शवों को सुरक्षित रखने में दिक्कत आती है। कई बार शवों को लाखेरी अस्पताल भेजना पड़ता है, जिससे परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>रिक्त पदों की स्थिति</strong><br />इस अस्चापताल में चार चिकित्सकों के पद रिक्त, एक एलएचवी का पद रिक्त और तीन वार्ड बॉय के पद खाली है।</p>
<p><strong>पेयजल संकट</strong><br />अस्पताल में उपलब्ध बोरिंग का पानी पीने योग्य नहीं है। पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p>अस्पताल की स्थिति से लोकसभा अध्यक्ष को अवगत करवा कर क्षेत्र के दो दर्जन गांवों की इलाज के लिये निर्भरता को देखते हुए जल्द समाधान की मांग की है।<br /><strong>- दिनेश व्यास, अध्यक्ष, देईखेड़ा व्यापार मंडल</strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों व कर्मिको के साथ बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास रहता है। स्वयं विगत चार महीनों से 24 घण्टे उपलब्ध रहता हूं। सड़क हादसों में गम्भीर घायलों के लिये ईसीजी मशीन ऑपरेटर व हड्डियों के चिकित्सक ओर सन्साधन उपलब्ध करवाने के लिये समय समय बैठकों में उच्चाधिकारियों को अवगत रखा है और अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार के लिये उच्चाधिकारियों को पस्ताव भी भिजवा रखे है.<br /><strong>- नरेंद्र गुर्जर, कार्यवाहक प्रभारी, राजकीय अस्पताल, देईखेड़ा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:56:28 +0530</pubDate>
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                <title>डेढ़ दशक बाद भी बदहाली में देईखेड़ा पशु चिकित्सालय, न भवन, न चिकित्सक, एक कंपाउंडर के भरोसे चल रहा अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय पंचायत द्वारा भूमि पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/deikheda-veterinary-hospital-remains-in-a-dilapidated-state-even-after-a-decade-and-a-half--with-no-building--no-doctor--and-a-single-compounder/article-132165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय इन दिनों बदहाली की स्थिति में है। स्थापना के डेढ़ दशक बीत जाने के बावजूद न तो अस्पताल को स्थाई भवन मिल पाया है, न ही पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध हैं। हालात यह हैं कि पूरा चिकित्सालय इन दिनों केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है, जबकि इस अस्पताल से करीब दर्जनभर गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में यह अस्पताल पूर्व में बंद हो चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन में अस्थायी रूप से चल रहा है। अब पंचायत प्रशासन इसे खाली पड़े पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में स्थानांतरित करने की तैयारी में है, जो करीब तीन दशक पुराना और जर्जर अवस्था में है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत द्वारा भूमि पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है।</p>
<p>गौरतलब है कि चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक कंपाउंडर और एक पशु परिचर के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल कंपाउंडर के सहारे ही अस्पताल संचालित हो रहा है। पशुपालकों ने बताया कि स्थाई भवन और संसाधनों के अभाव में मवेशियों के इलाज के लिए समुचित सुविधा नहीं मिल पाती। ग्रामीणों ने मांग की है कि शीघ्र ही स्थाई भवन हेतु भूमि पट्टा जारी कर निर्माण बजट स्वीकृत किया जाए तथा रिक्त पदों पर नियुक्ति की जाए।</p>
<p>अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों  के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव  उपचार किया जा रहा है भूमि आवंटन के लिये पँचायत को लिखा जा चुका है पँचायत द्वारा भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक तोर बोला गया  है समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है <br /><strong>- ओमप्रकाश नागर, पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा।</strong><br /> <br />पशु चिकित्सालय के अहाते में ही संचालित राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय में कमरों की कमी के कारण उसकी कुछ कक्षाओं को वँहा संचालित करने के लिये व्य्वस्था की निर्देश दिए गए है राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन में शिफ्ट होने से पुराना भवन खाली है पशु चिकित्सालय को वँहा संचालित करने के लिये लिखा है जल्द ही भूमि आवंटन कर दिया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा।</strong></p>
<p>ग्रामीण में पशुपालकों को सुविधाये मुहाये करना मात्र चुनावी वादा ही रहा है देईखेड़ा पशु चिकित्सालय को स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी क्रमोन्नत होना दूर स्थायी भवन संसाधन व पर्याप्त क्रमिक तक उपलब्ध नही करवाये जा रहे यह क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की संवेदन हीनता को दर्शता है। <br /><strong>- दिनेश व्यास, देईखेड़ा व्यापार मंडल,अध्यक्ष। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 16:14:36 +0530</pubDate>
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                <title>नौकरी छोड़ सम्भाली खेती की कमान, ड्रोन दीदी के नाम से बनी पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रैक्टर चलाने वाले हाथ अब उड़ा रहे ड्रोन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/left-the-job-to-take-charge-of-farming--became-known-as-drone-didi/article-92499"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की, वो खुद तय करते हैं मंजिल आसमां की...किसी शायर की यह पंक्तियां कोटा के प्रेमपुरा गांव निवासी महिला किसान रिम्पी सिंह पर सटीक बैठती है। एसएससी आईटी पास आउट रिम्पी सिंह ने पिता की मौत के बाद परिस्थितियों के चलते सरकारी नौकरी छोड़ खेती की तरफ कदम बढ़ाए और अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उसने खेती-किसानी में सफलता की नई इबारत लिख दी। खेती में नवाचार करते हुए रिम्पी अब ड्रोन दीदी बनकर कामयाबी की ऊंची उड़ान भर रही है। अब तक रिम्पी राज्य स्तरीय समारोह में प्रगतिशील महिला किसान सम्मान के साथ कई पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं।</p>
<p><strong>परिस्थितियां बदली तो छोड़नी पड़ी नौकरी</strong><br />साल 2007 में पिता दर्शन सिंह के असामयिक निधन के बाद घर की जिम्मेदारी रिम्पी के कंधों पर आ गई। उसने सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद कुछ समय एक निजी कंपनी में काम किया, लेकिन खेती नहीं संभल रही थी। इस वजह से उसने यह नौकरी भी छोड़ने का फैसला लिया। पिता के रहते कभी खेती का काम देखा तक नहीं, लेकिन परिस्थितियों के चलते रिंपी सिंह ने खेती की कमान संभाली। उसने आधुनिक कृषि की जानकारी लेने के लिए दुर्गापुरा जयपुर स्थित आईएचआईटी केन्द्र पपर ग्रीन हाउस प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद खेती में नवाचार करते हुए वह सफलता की राह पर बढ़ती चली गई। </p>
<p><strong>पिता की डायरी बनी कामयाबी की सीढ़ी</strong><br />रिम्पी ने बताया कि पिता दर्शन सिंह की डायरी उसके लिए कामयाबी की सीढ़ी बन गई, जिसमें वो खेती-किसानी के हर रोज के कामकाज को लिखा करते थे। बेटी ने पिता की डायरी को ऐसे आत्मसात किया कि खेती किसानी में उसने क्षेत्र के पुरुष किसानों को भी पीछे छोड़ दिया। कभी हाथों में कंप्यूटर माउस होता था, लेकिन बाद ट्रैक्टर का स्टीयरिंग संभालना पड़ा। अब वह खेती बाड़ी की नई-नई तकनीक को हासिल कर हर साल मुनाफे को बढ़ाने और क्षेत्र की महिलाओं को खेती किसानी में पारंगत करने का काम कर रही हैं। उसकी छोटी बहन भी खेती-किसानी में हाथ बंटाती हैं।</p>
<p><strong>खेतों में लगाए आधुनिक संसाधन</strong><br />खेती किसानी में दिनों दिन मिली शोहरत और मेहनत ने रिंपी सिंह को जिले की ड्रोन दीदी भी बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल प्रदेश घर में महिला किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने की श्रृंखला में कोटा की ड्रोन दीदी बनने का सौभाग्य भी रिम्पी को हासिल हुआ। कंप्यूटर में पहले से जानकार रिम्पी ने ट्रेनिंग की और फिर आधुनिक खेती में ड्रोन की मदद और उन्नत किसान बन गई। रिम्पी ने बताया कि वह परम्परागत फसलों के साथ बागवानी की भी खेती करती है। इसके लिए खेत में ड्रिप सिस्टम सहित अन्य संसाधन लगा रखे हैं। इससे खेतों में उत्पादन क्षमता दो गुनी हो चुकी है।  </p>
<p><strong>अपनी ताकत समझें और आगे बढ़ें</strong><br />रिम्पी के अनुसार ऐसा नहीं है कि महिला है तो उनके लिए कार्य का दायरा सीमित है। महिलाओं को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। महिलाएं अपनी ताकत समझें और आगे बढ़कर चुनौतियों सामना करें। फिर उन्हें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। रिम्पी ने बताया कि जब पहली बार ट्रैक्टर चलाया तो लोगों ने कहा कि ये पुरुषों का काम है, रसोई संभालो। बस यही बात मुझे चुभ गई और उसने खेती में सफल होने की ठान ली। ट्रैक्टर चलाने वाले हाथ  आज ड्रोन उड़ा रहे हैं। ऐसा कोई काम नहीं है जो महिलाएं नहीं कर सकती। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Oct 2024 17:21:15 +0530</pubDate>
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                <title>खड़े-खड़े धूल खा रहे करोड़ों के सफाई संसाधन</title>
                                    <description><![CDATA[पूरे पांच साल निगम के पार्षद व जनप्रतिनिधि सफाई वाहनों की डिमांड करते ही रहते थे लेकिन उन्हें पूरे संसाधन तक नहीं मिल पाते थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cleaning-resources-worth-crores-are-standing-and-gathering-dust/article-92144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले नगर निगम में सफाई संसाधनों की हालत यह है कि यहां आवश्यकता से अधिक वाहन खरीद तो लिए है। लेकिन उनका पूरा उपयोग तक नहीं हो पा रहा। जिससे वे गैराज में खड़े-खड़े धूल खा रहे हैं।  पिछले भाजपा बोर्ड में जब एक नगर निगम थी। उस समय निगम में सफाई संसाधनों की काफी कमी थी। पूरे पांच साल निगम के पार्षद व जनप्रतिनिधि सफाई वाहनों की डिमांड करते ही रहते थे लेकिन उन्हें पूरे संसाधन तक नहीं मिल पाते थे। वहीं वर्तमान कांग्रेस बोर्ड में दो निगम बना दिए गए। पूर्व वर्ती कांग्रेस सरकार के समय में दोनों निगमों में सफाई संसाधनों की इतनी अधिक भरमार कर दी कि उन्हें रखने के लिए गैराज में जगह तक नहीं बची थी। </p>
<p><strong>सीवरेज मशीनों की संख्या काफी अधिक</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में करीब दो दर्जन से अधिक सीवरेज मशीनें है। छोटी-बड़ी इन मशीनों का उपयोग सीवरेज चैम्बरों की सफाई के लिए किया जाता है। हालांकि इनका उपयोग रोजाना होता है। लेकिन गिनती की ही मशीनें काम  में आती है। अधिकतर मशीनें धूल खा रही है। इसी तरह से सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए जेटिंग मशीनें है। आॅटो जेटिग मशीनों की संख्या भी आवश्यकता से अधिक है। </p>
<p><strong>सफाई संसाधनों का उपयोग हो</strong><br />कांग्रेस पार्षद इसरार मोहम्मद का कहना है कि जब निगम में सफाई के पर्याप्त संसाधन है। तो उनका पूरा उपयोग किया जाना चाहिए। लेकिन कई बार हालत यह होती है कि पार्षद संसाधनों की डिमांड करते है लेकिन अधिकारियों की अनुमति के बिना उन संसाधनों को वार्डों में नहीं भेजा जाता। ऐसे में उन संसाधनों की उपयोगिता ही नहीं रह जाती है।  भाजपा पार्षद नवल हाड़ा का कहना है कि कई संसाधन तो अनावश्यक रूप से अधिक संख्या में क्रय कर लिए। जिससे सरकार के धन की बर्बादी की गई है। </p>
<p><strong>एक बार में करीब 20 हजार का खर्चा</strong><br />जानकारों के अनुसार रोड स्वीपर व सुपर सकर मशीनें महंगी होने के साथ ही काफी बड़ी व भारी भरकम है। जिनका उपयोग करने  में एक बार में करीब 8 घंटे में 150 लीटर से अधिक डीजल का खर्चा होता है। चालक का खर्चा समेत एक बार में गैराज से निकलने पर एक मशीन का खर्चा 20 हजार रुपए आता है। यही हालत सुपर सकर मशीन की है। ऐसे में इन मशीनों का उपयोग बहुत कम होता है। </p>
<p><strong>सीवरेज सफाई के रोबोट</strong><br />शहर में सीवरेज सफाई के लिए आरयूआईडीपी की ओर से लाखों रुपए के दो रोबोट भी खरीदे गए थे। सीवरेज सफाई की आधुनिक व तकनीक का उपयोग करने के लिए इन्हें क्रय किया गया था। लेकिन जानकारों के अनुसार अभी तक इन रोबोट का एक दो बार ही उपयोग हुआ है। हालांकि अभी तक ये आरयूआईडीपी के अधिकार क्षेत्र में ही है। नगर निगमों को हैंडओवर नहीं हुए हैं।   </p>
<p><strong>रोड स्वीपर व सुपर सकर मशीनें</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में सफाई के लिए भारी भरकम व करोड़ों रुपए की रोड स्वीपर मशीनें खरीदी गई है। स्वायत्त शासन विभग द्वारा दोनों निगमों को शुरुआत में दो-दो और बाद में इनकी संख्या बढाकर मशीनें दी गई। लेकिन हालत यह है कि इन मशीनों के आने के बाद बहुत कम समय के लिए ही इनका उपयोग हुआ है। इन मशीनों से मेन रोड व डिवाइडर साइड की सड़कों की ही सफाई की जाती है। हालांकि शहर में इन मशीनों का लम्बे समय से उपयोग नहीं होने से ये गैराज में खड़ी धूल खा रही है।  इसी तरह से सुपर सकर मशीन भी है। दोनों निगमों में ये एक-एक मशीनें है। लेकिन इनका  भी उपयोग बहुत कम हो रहा है।  जानकारों के अनुसार बरसात से पहले उन मशीनों को चलाना बंद किया था जो अभी तक बंद ही है। </p>
<p><strong>एंटी स्मॉग गन भी बंद</strong><br />दोनों नगर निगमों  में प्रदूषण नियंत्रण मंडल के बजट से लाखों रुपए की एंटी स्मॉग गन मशीनें खरीदी गई थी। जिनका उपयोग प्रदूषण अधिक होने पर पानी का छिड़काव करने के लिए किया जाता है। गर्मी के समय में तो इनमें से कुछ मशीनों का उपयोग हुआ था लेकिन न तो बरसात के सीजन में इनकी जरू रत पड़ी और न ही अब सर्दी के सीजन में उपयोग हो पाएगा। ऐसे में ये अधिकर समय गैराज में खड़ी धूल खाती रहेंगी।</p>
<p><strong>हाइड्रोलिक लेडर दमकल </strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में करीब 15 करोड़ की लागत की हाईड्रोलिक लेडर दमकल क्रय की गई है। फिनलैंड से मंगवाई गई इस दमकल का उपयोग बहुमंजिला इमारतों में आग लगने पर करने के लिए किया जाएगा। हालत यह है कि इस दमकल के आने के बाद से एक दो बार ही इसका उपयोग हुआ है। हालांकि इसके एक बार खराब होने  पर ठीक होने में ही लाखों रुपए का खर्चा आता है। ऐसे में इसे श्रीनाथपुरम् स्थित अग्निशमन केन्द्र में समय-समय पर चलाकर देखा जाता है। जिससे यह सही बनी रहे। जबकि इससे पहले भी 2012 में करीब 6 करोड़ रुपए की एक छोटी हाइड्रोलिक दमकल भी खरीदी गई थी। वह भी फायर स्टेशन में खड़ी है। </p>
<p><strong>आयुक्त ने दिए निर्देश</strong><br />निगम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गैराज के सफाई संसाधनों को काम में लिया जाए। आगामी दिनों में त्योहारों को देखते हुए शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू किया जाए। <br /><strong>- अशोक त्यागी, आयुक्त, कोटा उत्तर निगम</strong></p>
<p>नगर निगम के गैराज में सफाई के पर्याप्त संसाधन है। आवश्यकता होने  पर  उप संसाधनों का उपयोग किया जाता है। रोड स्वीपर मशीनें पहले चल रही थी। बरसात के समय उन्हें बंद किया था। इसी तरह से एंटी स्मॉग गन भी बरसात में बंद की है। सीवरेज मशीनों को रोटेशन के हिसाब से भेजते रहते है। सफाई संसाधनों की खरीद डीएलबी के स्तर पर हुई है। अधिक व कम के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।             <br /><strong>  - अजय बब्बर, सहायक अभियंता, प्रभारी गैराज, कोटा उत्तर निगम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 17:58:40 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों के साधन भरमार, काम के उपकरण बस दो चार</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की हालत यह है कि उनके गैराज में मात्र 5 जेसीबी है। जिनमें से भी 1 खराब पड़ी हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/resources-worth-crores-are-plentiful--only-two-or-four-tools-for-work/article-50910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/krodo-ka-saadhan-bharmar-lekin-kaam-k-upkaran-2-4...kota-news-05-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ करोड़ों के साधनों की भरमार, लेकिन काम के उपकरण बस दो चार, यह हालात हैं कोटा नगर निगम के। निगम के पास करोड़ों रुपए की ऐसी मशीनें हैं जो कभी काम ही नहीं आई, लेकिन रोज मर्रा काम आने वाली जेसीबी और अन्य छोटे उपकरण तक काफी कम हैं। इस पर कर्मचारियों का सरकारी रवैया कोढ़ में खाज साबित हो रहा है। परिसीमन के बाद कोटा में दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण बनाए गए। कोटा उत्तर में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड हो गए। हर वार्ड में एक निर्वाचित पार्षद है। इनके अलावा दोनों निगमों में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत 12-12 पार्षद भी है। ऐसे में कोटा उत्तर में 82 व कोटा दक्षिण में 92 पार्षद हैं। हर पार्षद को अपने वार्ड में सफाई के लिए रोजाना आवश्यक संसाधन चाहिए। वर्तमान में बरसात का सीजन चल रहा है। ऐसे में सबसे अधिक आवश्यकता नालों की सफाई व कचरा उठाने के लिए जेसीबी की पड़ रही है। लेकिन निगम की हालत यह है कि उनके गैराज में मात्र 5 जेसीबी है। जिनमें से भी 1 खराब पड़ी हुई है। 4 जेसीबी को 80 में से रोजाना एक चौथाई वार्डों में भी जरूरत पड़ रही है तो एक मशीन को रोजाना 20 वार्डो में जाना पड़ रहा है। ऐसे में मशीन किस तरह से काम कर रही है।</p>
<p><strong>हर जगह आधा काम छोड़ना पड़ रहा</strong><br />जेसीबी चालकों का कहना है कि जेसीबी की संख्या तो कम है और उसकी डिमांड करने वाले अधिक। ऐसे में जिस पार्षद या अधिकारी का फोन पहले आ जाता है वहां भेज देते हैं। कुछ देर वहां काम करने के बाद फिर दूसरी जगह चल जाते हैं। दिन में कई जगह एक साथ जाने पर खींचतान में अधिकतर जगह पर काम अधूरा छोड़ना पड़ रहा है। बचे हुए काम को अगले दिन जाकर पूरा कर रहे हैं। </p>
<p><strong>तालमेल की भी कमी, जनता परेशान</strong><br />निगम के विभिन्न अनुभागों में आपसी तालमेल का भी अभाव है। किसी जगह पर नाला सफाई के लिए जेसीबी गई। वहां पेड़ सफाई में बाधक बनने पर उसकी छटाई  करवाने के लिए उद्यान अनुभाग से कर्मचारी भेजने पड़ते हैं। जेसीबी वाला पेड़ कटिंग वाले का इंतजार करना नहीं चाहता। एक दूसरे के आने में देरी होने पर वे काम अधूरा छोड़कर जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे काम के लिए अधिकारियों को बार-बार कहना पड़ रहा है। उसके बाद भी काम नहीं हो रहे हैं। लोगों ने बताया कि नाला सफाई के साथ पेड़ की छंटनी करनी थी। उसके लिए  जेसीबी पहुंच गई तो टिपर नहीं पहुंचा। पेड़ काटने वाला आया तो कैंची लेकर नहीं पहुंचा। जो काम एक से डेढ़ घंटे का था उसमें पूरा दिन खराब हो गया। लोगों का कहना है कि निगम के विभिन्न अनुभागों में आपसी तालमेल व अधिकारियों की कमी के चलते जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>करोड़ों की मशीनें गैराज में </strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर और दक्षिण में जहां सीवरेज सफाई से लेकर रोड स्वीपर मशीनों समेत कई संसाधनों की भरमार है।रोड स्वीपर ट्रायल के अलावा कभी चलती हुई नहीं दिखी। सीवरेज सफाई की एक चौथाई मशीनें भी काम नहीं आई। सुपर सकर का उपयोग बहुत कम हो रहा है। ये संसाधन निगम के गैराज में धूल खा रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निगम के पास जेसीबी 5 ही है। उनमें से 1 खराब है। वार्ड में सफाई में सबसे अधिक इसी की जरूरत होती है। समिति की बैठक में नई 6 जेसीबी व अन्य जरूरी संसाधन खरीदने का प्रस्ताव लिया हुआ है। अधिकारियों को भी कहा जा चुका है। 80 पार्षदों की मांग पूरी नहीं होने से सभी के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। <br /><strong>- कपिल शर्मा, अध्यक्ष, गैराज व्यवस्था समिति </strong></p>
<p>जेसीबी की कमी है। जिससे इस बार नालों की सफाई का भी शिड्यूल बिगड़ गया है। जहां अधिक जरूरत होती है। वहां प्राथमिकता से भेजी जाती है। सेक्टर 4 समेत कई जगह पर नाला सफाई के लिए जेसीबी नहीं पहुंचने से वहां परेशानी है। इसका समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। <br /><strong>- पवन मीणा, उप महापौर नगर निगम दक्षिण</strong></p>
<p>निगम का क्षेत्र व दायरा काफी बढ़ा है। सफाई के लिए जेसीबी की सबसे अधिक जरूरत होती है। इसकी जानकारी की जाएगी कि अभी तक जेसीबी क्यों नहीं खरीदी गई। सीमित संसाधनों से सभी भी संतुष्ट करने व शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने का प्रयास किया जा रहा है। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jul 2023 17:31:48 +0530</pubDate>
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                <title>नैनवां का सबसे बड़ा पशुचिकित्सालय नोडल केन्द्र खुद बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[पशुओं के उपचार के लिए लोगों को अपने मवेशियों को लेकर जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े इसको लेकर नैनवां चिकित्सालय नोडल केन्द्र में अलग से वेटरनरी पॉलीक्लिनिक खोले जाना चाहिए। जिसमें आधुनिक मशीनों के साथ पशुओं के ऑपरेशन की भी सुविधा मिल सकेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/nainwa%E2%80%99s-largest-veterinary-hospital-nodal-center-itself-ill/article-45890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/nainavan-ka-sabase-bada-pashuchikitsalya-nodal-kenra-khud-bimar...nainva,-bundi-news-18-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>नैनवां। नैनवां कस्बे के गढ़ चौैक में ब्लॉक क्षेत्र का सबसे बड़ा पशु चिकित्सालय नोडल केन्द्र है। जो आजादी के समय से एक जर्जर भवन में संचालित है। यह पशु चिकित्सालय नोडल केन्द्र कहने मात्र का है। यहां संसाधनों का अभाव है। यह चिकित्सालय कस्बे के बीच में आ जाने से पशुपालक अपने मवेशियों को बाजार से लेकर आना जाना पड़ता है। इस वजह से पशु पालक भी अपने बीमार पशुओं लेकर आने में कतराते है। बेजुबान मवेशियो के इलाज के लिए यहां पिछले 6 माह से चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। गौवंश की बीमारियों के समय यहां एक मोबाईल यूनिट संचालित है। उसमें एक पशुचिकित्सक का पद सृजित है लेकिन इस मोबाईल यूनिट में भी कभी वेटनरी डॉक्टर को नहीं लगाया। यहा का पश ुचिकित्सालय केवल वीए एवं पशुधन सहायक के भरोसे संचालित है। इतना ही नहीं ब्लॉक क्षेत्र के जजावर,समिधि,  देई,दूगारी,जरखोदा,करवर में भी वेटेनरी चिकित्सक के पद सृजित है लेकिन यहां भी कई वर्षों से पशुचिकित्सक के पद रिक्त चल रहे है। यहां पर भी एलएस के भरोसे पशुचिकित्सालय संचालित है।</p>
<p><strong>पशुपालक बोले कस्बे से बाहर बने पशु चिकित्सालय</strong><br />पशुपालक कजोड़ धाकड़ ने बताया कि पशु चिकित्सालय कस्बे के गढ़ चौक में स्थित होने से यहां मवेशियों को बाजार में से होकर लाना संभव नहीं होता है। ऐसे में वे बीमार मवेशियों का इलाज घर पर ही करवाना पड़ता है। इसके लिए उनको पैसा देना पड़ता है। दवाईया भी बाजार से ही खरीद करना पड़ता है। ऐसे में नैनवां गढ़ चौक में संचालित पशुचिकित्सालय को भी उपजिला चिकित्सालय की तर्ज पर हाईवे के किनारे संचालित किया जाना चाहिए जिससे पशुपालकों को अपने मवेशियो को लेकर आने में कोई परेशानी नहीं हो।  किसान महापंचायत के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने पशुचिकित्सालय के लिए भूमि आवंटन किया जाने के लिए कई बार ज्ञापन भी दिये गये लेकिन सरकार ने बेजुबान गौवंश को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई।  </p>
<p><strong>वेटरनरी पॉली क्लिनिक खोले जाए</strong><br />पशु पालक प्रकाश धाकड़ और भरत राज मीणा का कहना है कि पशुओं के उपचार के लिए लोगों को अपने मवेशियों को लेकर जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े इसको लेकर नैनवां चिकित्सालय नोडल केन्द्र में अलग से वेटरनरी पॉलीक्लिनिक खोले जाना चाहिए। जिसमें आधुनिक मशीनों के साथ पशुओं के आॅपरेशन की भी सुविधा मिल सकेगी। साथ वेटरनरी पॉलीक्लिनिक में छोटे से लेकर बड़े सभी जानवरों का उपचार किया जा सकेगा। यह खुल जाने पर पालतु कुत्ते,घोड़े.-घोड़िया सहित गौवंश के जटिल आॅपरेशन किया जाना भी संभव हो सकेगा। जानकार सूत्रों की माने तो राज्य मंत्री अशोक चांदना ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को नैनवां पशु चिकित्सालय में भी संसाधनों एवं नई यूनिट खोले जाने के लिए प्रपोजल बनाये जाने के निर्देश दिए गये थे।</p>
<p>नैनवां पश ुचिकित्सालय नोडल केन्द्र पर वेटरनरी चिकित्सक लगाया जाना सरकार का कार्य है। उन्होंने रिक्त चल रहे वेटरनरी चिकित्सकों की सूची विभाग के उच्चाधिकारियों को भेज रखी है।<br /><strong>- वी के युगल जोइंट डायरेक्टर, पशु पालन विभाग बून्दी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 14:28:37 +0530</pubDate>
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                <title>जल संसाधनों के सटीक प्रबंधन पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[भारत जल सप्ताह कार्यक्रम को अभिनव विचारों और समाधानों के लिए एक ज्ञान केंद्र के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जल संसाधनों के अधिकतम सटीक प्रबंधन के लिए समस्त प्रतिभागियों के बीच विचार-विमर्श और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/brainstorming-on-the-proper-management-of-water-resources/article-28356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-5.jpg" alt=""></a><br /><p>जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार 1-5 नवंबर 2022 के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली के निकट स्थित ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में 7वें भारत जल सप्ताह-2022 (आईडब्ल्यूडब्ल्यू-2022) का आयोजन कर रहा है। यह वर्ष 2012 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक का लगातार सातवां आयोजन होगा।जीवन के सभी पहलुओं में जल की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए और इसके साथ ही अर्थव्यवस्था का विकास सुनिश्चित करने के लिए जल संसाधन मंत्रालय ने वर्ष 2011 में यह निर्णय लिया कि भारत जल सप्ताह (आईडब्ल्यूडब्ल्यू), जो कि एक बहु-विषयक फोरम है, को मंत्रालय के एक प्रमुख आयोजन के रूप में शुरू किया जा सकता है। इस तरह से सार्थक विचार-विमर्श करने और बहुमूल्य सिफारिशें एवं कार्रवाई बिंदु तैयार करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म का मार्ग प्रशस्त हुआ। <br /><br />भारत जल सप्ताह कार्यक्रम को अभिनव विचारों और समाधानों के लिए एक ज्ञान केंद्र के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जल संसाधनों के अधिकतम सटीक प्रबंधन के लिए समस्त प्रतिभागियों के बीच विचार-विमर्श और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। <br />भारत जल सप्ताह दरअसल नीति- निर्माताओं, जल प्रबंधकों, प्रोफेशनलों, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों के उपयोगकर्ता समूहों सहित विभिन्न हितधारकों के लिए एक फोरम प्रदान करता है, जहां जल से संबंधित सभी मुद्दों पर चर्चा की जाती है और जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का स्थायी समाधान करने के लिए विभिन्नु उपायों की रूपरेखा तैयार की जाती है। पहला कार्यक्रम वर्ष 2012 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसका विषय जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा समाधान के लिए आह्वान था। इसके बाद वर्ष 2013, 2015, 2016, 2017 एवं 2019 में पांच और कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिस दौरान कुशल जल प्रबंधन, सतत विकास के लिए जल प्रबंधन, जल सहयोग, जल और ऊर्जा जैसे जल संबंधी विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया। इन कार्यक्रमों में जल संसाधन के विकास और प्रबंधन से संबंधित प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया और इस तरह से जल संसाधन से जुड़े समुदाय को उन्हें सुलझाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां बनाने का अवसर प्रदान किया गया। इन समस्त <br />आयोजनों को दुनियाभर के जल संसाधन समुदाय की ओर से उत्साहजनक समर्थन मिला है। <br /><br />संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2021 बताती है कि दुनिया में ताजे पानी की वार्षिक निकासी कई गुना बढ़ गई है। निकासी की यह मात्रा वर्ष 1900 में 500 बीसीएम थी, जो अब बढ़कर 4,000 बीसीएम से अधिक हो गई है। इस रिपोर्ट में एक अध्ययन का हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है कि पानी की गंभीर कमी का सामना करने वाली वैश्विक आबादी, जो वर्ष 1900 में 32 मिलियन थी, वह 2050 तक बढ़कर 3.1 बिलियन हो जाएगी। यह तथ्य जल संसाधनों के स्थायी प्रबंधन और उनकी समान पहुंच की जरूरत को सामने लाता है।<br /><br />सातवें भारत जल सप्ताह का आयोजन समानता के साथ सतत विकास के लिए जल सुरक्षा विषय के साथ किया जा रहा है, जिसमें निम्नलिखित तीन उप योजनाओं के साथ जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं और समान विकास से संबंधित चुनौतियों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है:-<br />जल सुरक्षा के पहलू और उनका प्रभाव, जल सहयोग के माध्यम से पानी की बढ़ती मांग की चुनौतियों का समाधान, जल प्रशासन-नीतियां, कार्य योजना और संस्थान।<br /><br />भारत जल सप्ताह- 2022 में विभिन्न कार्यक्रम होंगे, जिनमें सेमिनार, पैनल परिचर्चा और विशेष सत्र शामिल होंगे, जो विभिन्न हितधारकों विशेष रूप से राज्य सरकारों, केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों, अंतरराष्टÑीय संगठनों, भागीदार देशों और संबंधित संस्थानों एवं देश के गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से आयोजित किए जाएंगे। आईडब्ल्यूडब्ल्यू के तहत इस थीम का समर्थन करने वाली एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। जिसमें जल सुरक्षा से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध प्रौद्योगिकियों, नवीनतम विकास क्रम तथा समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी लगभग 3,500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में आयोजित की जाएगी और यह ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में आईडब्ल्यूडब्ल्यू-2022 के निकट स्थित होगी।<br /><br />भारत की राष्ट्रपति इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगी और उनकी गरिमामयी उपस्थिति, जल क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का समाधान करने के प्रयासों को एक मंच पर लाने में प्रेरणा और प्रोत्साहन प्रदान करेगी। जल के सन्दर्भ में सुरक्षित भविष्य के लिए हम सभी को एक साथ आना होगा। इस सम्मेलन के सत्रों में हुए विचार-विमर्श और इस मेगा आयोजन के दौरान ज्ञान का प्रसार, हमें स्थायी रूप से जल संसाधन के विकास के मार्ग पर आगे ले जाएगा। <br /><br />-पंकज कुमार, सचिव, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Nov 2022 10:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>ओलंपिक में भागीदारी के लिए लड़कियां टेनिस का कर रही अभ्यास</title>
                                    <description><![CDATA[ 
कोटा को आमतौर पर खेलों के मामले में पिछड़ा जिला माना जाता है। यहां प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें संसाधन और मंच मिलना मुश्किल है। ऐसे हालातों में कोटा जिले की बेटियां अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम की बदौलत राष्टÑीय और अंतरराष्टÑीय स्तर पर पहचान बनाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-practicing-tennis-to-participate-in-the-olympics/article-21129"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/collector.jpeg-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा को आमतौर पर खेलों के मामले में पिछड़ा जिला माना जाता है। यहां प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें संसाधन और मंच मिलना मुश्किल है। ऐसे हालातों में कोटा जिले की बेटियां अपनी प्रतिभ और कठिन परिश्रम की बदौलत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। टेनिस में राज्य स्तरीय टीम से लेकर राष्ट्रीय स्तर की टीम में कोटा जिले की इन बेटियों ने प्रतिनिधित्व किया है। इनकों मिले अनेक पदकों की वजह से जिले को मान सम्मान मिला है। कोटा की इन महिला खिलाड़ियों को खेल दिवस पर हर साल सम्मानित किया जाता है। इसके साथ ही खेल प्रतिभा की बल पर इन महिला खिलाड़ियों को रेलवे और सेना में सरकारी नौकरी प्राप्त कर देश के विकास और सुरक्षा में योगदान दे रही है। पिछले कुछ वर्षों से कोटा की महिला खिलाड़ियों का रुझान टेनिस की ओर बढ़ा है। कोटा की बेटियां टेनिस में लगातार परचम लहरा रही है। </p>
<p><strong>100 से अधिक महिला खिलाड़ी</strong><br />कोटा में टेनिस खेलने वाली महिला खिलाड़ियों की संख्या एक 100 से अधिक है। यह महिला खिलाड़ी कोटा के अलग-अलग टेनिय के क्लबों में  प्रतिदिन अभ्यास कर रही है। टेनिस के अंकित का कहना है की महिला खिलाड़ियों में टेनिस खेलने का एक जज्बा है, जिसके भूते पर वह लगाातार आगे बढ़कर कोटा का नाम रोशन कर रही है। कोटा में पहले टेनिस के कोर्ट नहीं थे, लेकिन अब अनेक जगह इसके कोर्ट बन गए है। जिसका लाभ यहां की महिला खिलाड़ियों को मिला है। इस बार टेनिस खेलने के ग्रामीण क्षेत्र से भी बेटियां निकलकर सामने आ रही है।</p>
<p><strong>होनहार महिला खिलाड़ी</strong><br />कोटा की सिमरन होरा ने 4 बार राष्टÑीय स्तर प्रतियोगिता में भाग लेकर कोटा को गोल्ड मेडल दिलाया है। इसके साथ ही वह स्टेट लेवल प्रतियोगिताओं में 5 बार खेल चुकी है और मेडल हासिल किए है। इसके साथ ही कोटा की कोमल वर्मा,गर्विता दत्ता, इशिता यादव, कनिष्का शर्मा, लीला झा, मीशिका चौधरी सहित अनेक बेटियां लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाने के लिए लगातार अभ्यास कर रही है। </p>
<p><strong>10 क्लब कोटा में </strong><br />कोटा में टेनिस के 10 क्लब है। जिनमें युवा व पेशेवर लोग रोजान टेनिस खेलते है और अभ्यास करते है। पिछले 2 वर्षों से कोरोनाकाल के कारण यह क्लब बंद थे। लेकिन अब कोटा के सारे क्लब खुल गए है। इन क्लबों में खिलाड़ियों के साथ-साथ शोंकियां तौर पर खेलने वाले खिलाड़ियों का जमावड़ा भी लगा रहता है। इन क्लब में टेनिस की अनेक प्रतियोगिताएं भी करवाई जाती है।</p>
<p>कोटा की बेटियां अनेक खेलों में नित नए आयाम स्थापित कर रही है। लगातार अनेक खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। चाहे वो टेनिस का खेल हो या कोई अन्य खेल। बेटियां हर तरफ आगे है। खेलों के माध्यम से कोटा की सैंकड़ों बेटियों ने अपना मुकाम हासिल किया है। लेकिन अगर टेनिस में सरकार द्वारा कोई मदद मिले तो निश्चित तौर पर अंतरराष्टÑीय स्तर पर भी मेडल ले आएगीं।<br /><strong>- कमलदीप, सचिव उम्मेद क्लब कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Aug 2022 15:20:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गहलोत की पीड़ा.... राज्य सरकार के सीमित संसाधनों से तो ERCP परियोजना को पूरा होने में 15 साल लग जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार के सीमित संसाधनों से इस परियोजना को पूरा होने में 15 साल लग जाएंगे एवं परियोजना की लागत भी बढ़ती जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gehlot-s-pain-----with-limited-resources-of-the-state-government--the-ercp-project-will-take-15-years-to-complete/article-7754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok-g-011.jpg" alt=""></a><br /><p>जयापुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर कहा कि हमारी मंशा है कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) का काम शीघ्र पूरा हो, जिससे पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों को पेयजल व सिंचाई का पानी मिल सके। प्रदेश सरकार ने ERCP पर अभी तक करीब 1000 करोड़ का व्यय किए हैं एवं इस बजट में 9600 करोड़ प्रस्तावित किए हैं।<br /><br />गहलोत ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार के सीमित संसाधनों से इस परियोजना को पूरा होने में 15 साल लग जाएंगे एवं परियोजना की लागत भी बढ़ती जाएगी। केन्द्र सरकार इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देती है तो वहां से ग्रांट मिलने पर काम भी तेजी से पूरा होगा एवं कम लागत में काम हो सकेगा। यह समझ के परे है कि राजस्थान जैसे रेगिस्तानी एवं जल अभावग्रस्त राज्य को पानी की परियोजना को नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा नहीं मिलेगा तो किस राज्य को मिलेगा? यह स्थिति तो तब है जब यहां के सांसद ही जलशक्ति मंत्री हैं पर वो प्रदेश के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 16:10:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड हेल्थ डे पर विशेष: संसाधनों की कमी के साथ युवा डॉक्टर कर रहे हैं अपनी पारी की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[रिटायरमेंट के नजदीक पहुंचे डॉक्टर कर रहे अगली पारी की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--health--news--special-on-world-health-day--young-doctors-are-starting-their-innings-with-lack-of-resources-doctors-approaching-retirement-are-preparing-for-the-next-shift/article-7546"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/young-doctors.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में मेडिकल के क्षेत्र में जाने के लिए युवाओं में रूचि काफी बढ़ी है। सरकारी सेवा में भी युवा डॉक्टर काफी जोश के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि युवा डॉक्टरों का कहना है कि इस दौरान उन्हें सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी और मरीजों के भार से जूझना पड़ता है, लेकिन इससे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलता है। वहीं रिटायर्ड हो चुके या रिटायरमेंट के नजदीक पहुंच चुके डॉक्टर इन चुनौतियों को पार कर आज भी पूरी शिद्दत से मरीजों की सेवा में लगे हैं।</p>
<p><br />वर्ल्ड हेल्थ डे के मौके पर ऐसे ही शहर के कुछ युवा और सीनियर डॉक्टर से नवज्योति ने यह जाना कि उनके सामने क्या चुनौतियां पेश आ रही हैं और आगे इन चुनौतियों का कैसे सामना करेंगे। <br /><br />सरकारी हेल्थ सिस्टम ने हमें समाज सेवा करने का सुनहरा मौका दिया है, जहां हम गरीब और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क व अच्छा इलाज दे पाते हैं। साथ ही चिकित्सक और मरीज के बीच विश्वास कायम रखने की हरसंभव कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार अधिक मरीज होने के कारण हमे संसाधनों की कमी का सामना भी करना पड़ता है।<br />-<strong>डॉ. सुचित्रा, गढ़वाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन एसएमएस अस्पताल</strong> <br /><br />मुझे गवर्नमेंट सर्विस ज्वाइन करके अच्छा लग रहा है। सरकारी क्षेत्र में अपने कौशल को दिखाने का पूरा अवसर मिलता है। हां कुछ दिक्कतें जरूर हैं, जिनमें ओपीडी में बहुत व्यस्त होने के कारण कभी-कभी हमें मरीजों की काउंसलिंग के लिए कम समय मिल पाता है।<br />-<strong>डॉ. अंबिका शर्मा, सहायक आचार्य, श्वसन रोग संस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर</strong> <br /><br />आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का अहसास सुखद लगता है। बड़े अस्पतालों में मरीजों का भार कम करने और गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए पेरिफेरल हेल्थ सर्विसेज को और मजबूत करने की जरूरत है। वहीं स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करना, मजबूत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा भी मुख्य पहलू हैं।<br />-<strong>डॉ. योगेश स्वामी, असिस्टेंट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन, एसएमएस अस्पताल</strong> <br /><br />मेरी 40 साल की सर्विस हो चुकी है। इस दौरान मुझे कभी भी सरकारी सेवा से दिक्कतें नहीं हुई। हमेशा मरीजों को भगवान और अस्पताल को मंदिर समझकर सेवा की है। इस पेशे की खासियत है कि सरकारी सेवा से तो हम रिटायर हो जाते हैं, लेकिन मरीजों की सेवा से नहीं होते। मैं अगस्त में रिटायर होने वाला हूं पर आगे भी मरीजों का इलाज इसी तरह करता रहूंगा।<br />-<strong>डॉ. आरके सोलंकी, सीनियर प्रोफेसर एंड यूनिट हैड, मनोचिकित्सा विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज</strong> <br /><br />मैं आज जो कुछ भी हूं वो सब इस सरकारी सेवा और मरीजों के प्यार के कारण ही हूं। मुझे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन सभी चुनौतियों को अवसर के तौर पर लिया और आगे बढ़े। वर्तमान समय में मरीजों और डॉक्टरों के बीच बेहतर रिलेशनशिप जरूरी है। रिटायरमेंट में करीब डेढ़ साल का वक्त है। मेरी कोशिश रहेगी कि इस रिलेशनशिप को कायम रखकर मरीजों की सेवा करूं।<br />-<strong>डॉ. डीएस मीणा, सीनियर प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स, एसएमएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 14:10:28 +0530</pubDate>
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