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                <title>अब स्टेपनी डीलर नहीं कर सकेगा राशन वितरण, गेहूं वितरण में फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने पोस मशीनों को अपडेट करने का निर्णय किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now--substitute-dealers-will-not-be-able-to-distribute-rations--fraud-in-wheat-distribution-will-be-curbed/article-132065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने जिले में राशन वितरण व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए नई तकनीक लागू करने का निर्णय लिया है। अब उचित मूल्य दुकानों (राशन डिपो) पर पॉइंट आॅफ सेल (पोस) मशीनें केवल संबंधित डीलर के अंगूठे से ही संचालित होंगी। इससे किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा फर्जी वितरण, हेराफेरी या मशीन के गलत इस्तेमाल की संभावना खत्म हो जाएगी। सरकार के पास पूरे प्रदेश में गेहूं वितरण में गड़बड़ी होने की शिकायत पहुंच रही थी। ऐसे में सरकार ने पोस मशीनों को अपडेट करने का निर्णय किया था। इसके लिए गत दिनों पोस मशीनों ने नया साफ्टवेयर अपलोड किया गया है। ऐसे में अधिकृत राशन डीलर के फिंगरप्रिंट से पोस मशीन का संचालन हो सकेगा। जिससे अब राशन डीलर की जगह स्टेशनी डीलन राशन का वितरण नहीं कर पाएगा। </p>
<p><strong>ऐसे काम करेगा नया सिस्टम</strong><br />विभागीय सूत्रों के अनुसार पहले पोस मशीनें किसी भी व्यक्ति के लॉगिन से खुल जाती थीं, जिससे कई बार अनियमितताएं सामने आती थीं। जैसे राशन का वितरण किसी सहायक या अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाना, लाभार्थियों से अनाज की कटौती या फर्जी एंट्री करना। अब नई व्यवस्था में मशीन तभी एक्टिव होगी जब संबंधित डीलर स्वयं बायोमेट्रिक स्कैनर पर अंगूठा लगाएगा। एक बार लॉगिन के बाद भी मशीन कुछ समय बाद आॅटो लॉक हो जाएगी, ताकि कोई और व्यक्ति इसका उपयोग न कर सके। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली राजस्थान राज्य खाद्य विभाग के सर्वर से सीधे जुड़ी होगी, जिससे हर लेन-देन का रिकॉर्ड रियल टाइम में अपडेट होगा। इससे राशन वितरण की व्यवस्था में कोई गड़बड़ी नहीं हो पाएगी।</p>
<p><strong>पायलट प्रोजेक्ट सफल, अब सभी जगह लागू</strong><br />रसद विभाग की ओर से गत दिनों कुछ जिलों में इस नई व्यवस्था का परीक्षण किया था। परीक्षण के दौरान पाया गया कि जहां पहले वितरण में औसतन 5-7 मिनट लगते थे, अब नई प्रणाली में यह प्रक्रिया अधिक सटीक और सुरक्षित हो गई है। वहीं राशन वितरण में गड़बड़ी की संभावना भी समाप्त हो गई। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। कोटा जिले की सभी राशन की दुकानों पर अपडेट पोस मशीनों से गेहूं का वितरण शुरू हो गया है। जिले में अधिकृत राशन डीलरों के माध्यम से ही लाभार्थियों को गेहूं का वितरण किया जा रहा है।</p>
<p><strong>संभावित लाभ</strong><br />- फर्जी वितरण पर रोक<br />- डीलर की जवाबदेही सुनिश्चित<br />- उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा<br />- शिकायतों का त्वरित निस्तारण संभव</p>
<p>पहले कभी-कभी राशन डीलर द्वारा कहा जाता था कि नाम कट गया या राशन निकल गया। अब अगर डीलर खुद अंगूठा लगाएगा तो गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी।<br /><strong>- पुष्पा देवी, राशन लाभार्थी</strong></p>
<p>अब तक डीलर या उसके कर्मचारी द्वारा की जा रही फर्जी एंट्री की शिकायतें आती थीं। नई प्रणाली में जब तक डीलर स्वयं उपस्थित नहीं होगा, मशीन नहीं खुलेगी। इससे जवाबदेही तय होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।<br /><strong>- कुशाल बिलाला, जिला रसद अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 14:54:37 +0530</pubDate>
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                <title>ई-मित्र प्लस मशीनें बनीं शो-पीस, देख-रेख के अभाव में ठप पड़ी हाइटेक सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[संचालन न होने के कारण अधिकांश मशीनें धूल फांक रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-mitra-plus-machines-have-become-showpieces--high-tech-facilities-stalled-due-to-lack-of-maintenance/article-129009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सरकारी कार्यालयों में लगी ई-मित्र प्लस मशीनें अब शो-पीस बनकर रह गई है। देखरेख के अभाव में अब मशीनें जाम व खराब हो रही है। प्रशासन की अनदेखी के चलते आमजन परेशान हो रहे है। आए दिन सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के बावजूद भी काम नहीं हो पा रहे है। बता दें कि आमजन को आधुनिक तकनीक के माध्यम से एक ही स्थान पर करीब 400 प्रकार की सरकारी और निजी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-मित्र प्लस मशीनें अब शो-पीस बन चुकी हैं। बड़े दावों और उम्मीदों के साथ इन मशीनों की शुरूआत हुई थी ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़े और सुविधा एक क्लिक पर मिल सके। लेकिन हकीकत यह है कि इनकी ठीक से देखरेख और संचालन न होने के कारण आज अधिकांश मशीनें धूल फांक रही हैं। शुरूआत के कुछ महीनों तक इनसे सेवाएं दी गईं, पर उसके बाद लापरवाही और तकनीकी खामियों के चलते ये ठप हो गईं। न तो नियमित अपडेट मिले और न ही जिम्मेदार विभाग ने इनकी निगरानी की। नतीजतन, आमजन की सुविधा के लिए शुरू की गई यह पहल आज केवल सरकारी दफ्तरों में एक शो-पीस की तरह खड़ी है, जो सिस्टम की उदासीनता और तकनीकी योजनाओं की असफलता को दशार्ती है।</p>
<p><strong>लोगों को लगाने पड़ रहे हैं दफ्तरों के चक्कर</strong><br />सरकारी दफ्तरों में जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ सालों पहले ई-मित्र प्लस मशीनें लगाई गई थीं। उद्देश्य यह था कि आम आदमी को सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अधिकतर काम एक ही मशीन के माध्यम से आसानी से निपट सकें। यह सुविधा शुरू होते ही लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें लंबी कतारों और कर्मचारियों की मिन्नतों से छुटकारा मिलेगा। लेकिन अफसोस, शुरूआत के कुछ महीनों तक सुचारु रूप से चलने वाली यह सुविधा अब पूरी तरह से ठप हो गई है।</p>
<p><strong>ये सुविधा है ई-मित्र प्लस में</strong><br />ई-मित्र प्लम मशीन दिखने में एटीएम की तरह दिखाई देती इसमें एलईडी के साथ मॉनिटर डिवाइस, वेब कैमरा, डेरा असेप्टर, कार्ड रीडर, मिटलिक की बोर्ड, रसीद के लिए नार्मल प्रिंटर लेजर प्रिंटर आदि मोजूद है। </p>
<p><strong>नियमित मेंटेनेंस का अभाव</strong><br />सरकारी कार्यालयों के गलियारों में इन मशीनों की स्थिति अब बेहद दयनीय है। कई जगहों पर मशीनें धूल फांक रही हैं, तो कहीं इनके स्क्रीन खराब हो चुके हैं। देखरेख और नियमित मेंटेनेंस के अभाव में ये आधुनिक मशीनें अब शोपीस बनकर रह गई हैं। जिन उद्देश्यों के लिए इन्हें लगाया गया था, वे अब पूरी तरह अधूरे रह गए हैं। इन मशीनों पर करोड़ो खर्च करने के बजाय सरकार को शहर में लगे ठेका कर्मियों के मानदेय के बारे में सोचना चाहिए।<br /><strong>-दिलिप सिंगोर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नवज्योति टीम ने जब समस्या पर सम्बंधित अधिकारी से बात की तो उन्हें शहर में कितनी मशीनों लगी हुई है इसकी  सही संख्या तक नहीं बता सके। उन्होंने केवल इतना कहा कि शहर में कई स्थानों पर मशीनें लगी हैं, यदि समस्या आ रही है तो जांच कर समाधान किया जाएगा।<br /><strong>-महेन्दÑ पाल सिंह, एडिशनल डायरेक्टर डिओआईटी </strong></p>
<p><strong>नहीं मिल रहा सेवाओं का लाभ</strong><br />ई-मित्र प्लस मशीनों का मुख्य उद्देश्य लोगों को सरकारी सेवाएं जैसे—बिल जमा करना, प्रमाण पत्र लेना, सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना और विभिन्न प्रकार की आवेदन सेवाएं उपलब्ध कराना था। इसके अलावा निजी क्षेत्र की कुछ सुविधाएं भी इससे जोड़ी गई थीं, ताकि आम नागरिक को किसी भी सेवा के लिए अलग-अलग दफ्तर न भटकना पड़े। लेकिन आज हालत यह है कि नागरिकों को फिर से उन्हीं दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिनसे छुटकारा दिलाने के लिए यह योजना लाई गई थी।<br /><strong>-राहुल शर्मा</strong></p>
<p><strong>योजना धराशायी</strong><br />मशीनें शुरू होते समय काफी उपयोगी साबित हो रही थीं। कई लोग छोटे-छोटे काम कुछ ही मिनटों में निपटा लेते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, तकनीकी खराबी आई और उसकी मरम्मत नहीं हुई। न ही कर्मचारियों को इसके सही संचालन की जिम्मेदारी दी गई। परिणामस्वरूप यह योजना धराशायी हो गई।<br /><strong>-एड. बीटा स्वामी</strong></p>
<p><strong>जनता के विश्वास से खिलवाड़</strong><br /> इन मशीनों की नियमित सर्विसिंग और तकनीकी सुधार किया जाता, तो आज भी यह जनता के लिए बड़ी राहत बन सकती थीं। परंतु सरकारी लापरवाही और जिम्मेदार विभागों की अनदेखी ने इस सुविधा को पूरी तरह से बेकार कर दिया। आज के डिजिटल युग में जब सरकार "डिजिटल इंडिया" और "ई-गवर्नेंस" की बात करती है, तब ऐसी तकनीकी सुविधाओं का बंद हो जाना सवाल खड़े करता है। यह सिर्फ सरकारी धन की बबार्दी नहीं बल्कि जनता के विश्वास से भी खिलवाड़ है। सरकार को चाहिए कि इन मशीनों की फिर से मरम्मत कराकर इन्हें चालू किया जाए और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी जाए। <br /><strong>-शादाब खान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:11:29 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - मोहल्लेवासियों को जलभराव से मिली राहत </title>
                                    <description><![CDATA[ दो जेसीबी मशीनों से रोड कटिंग कर डाले पाइप, हुई पानी की निकासी  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/effect-of-the-news---residents-of-the-locality-got-relief-from-waterlogging/article-122368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>सीसवाली।  सीसवाली क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से क्षेत्रवासियों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। वहीं शुक्रवार को मौसम साफ रहा। वहीं बादल छाये रहे। कई दिनों से लगातार  हो रही बरसात से कस्बे के आसन मौहल्ले में पानी की निकासी नहीं होने के कारण मकानों व बाडियो में पानी भर गया है। इस समस्या को लेकर 31 जुलाई को प्रमुखता से खबर को दैनिक नवज्योति में प्रकाशित किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को प्रशासन हरकत में आया। जिसके बाद शुक्रवार को दो जेसीबी मशीनों से रोड कटिंग करके पाइप डालकर पानी की निकासी की गई। कुछ महिने पहले भैरुपुरा रोड से कालूपुरा खाडी पुलिया तक लगभग दो करोड रुपए की लागत से  सीसी रोड का निर्माण  किया गया था। जहां राजनैतिक पेंच फंसने के कारण आसन मोहल्ले अन्ता रोड पर बरसाती पानी निकासी के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने  पानी निकासी के लिए पाइप नहीं डाले थे जबकि आसन मोहल्ले के लोगो ने पाईप डालने की मांग की थी वहीं धरना प्रदर्शन भी किया गया था। सार्वजनिक निर्माण विभाग की हठधर्मिता  का नतीजा आसन बस्ती के लोगो को भुगतना पड़ रहा था।  बारिश का  पानी कई महीनों तक भरा रहता है। आसन बस्ती बरसात के दिनों में जल मग्न रहती थी। वही मकानों में पानी भर जाने से खाने पीने के सामान तक खराब हो जाते है। खेत में पानी भरा रहने से मकान तक जाना भी भारी पड  रहा था। वहीं कई महिनों तक बरसात का पानी भरा रहने से परिवार के लोग बीमार तक रहते थे। </p>
<p><strong>समस्या से कई बार जिम्मेदारों को करवाया था अवगत </strong><br />सुरेश खण्डेलवाल व्यापार संघ अध्यक्ष ने आसान बस्ती में भरे हुए बारिश के पानी की निकासी के लिए  मुख्यमंत्री ,मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी मंत्रीÑ, राजस्थान सरकार तथा सांसद, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर ,पीडब्लूडी अधिशासी अभियंता तथा नगर पालिका अधिशासी अभियंता सभी को पत्र स्पीड पोस्ट द्वारा दिए गए थे। साथ ही राजस्थान संपर्क में दो बार परिवाद दर्ज करवाया गया था।वहीं पूर्व भाजपा जिला संगठन महामंत्री रामशंकर वैष्णव के अथक प्रयासों के बाद शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में रोड कटिंग करके दो मशीनों की सहायता से पाइप डालकर पानी की निकासी की गई। वहीं आसन मौहल्ले के लोगो ने पानी कम होने पर अपनों मकानों की सार संभाल ली। वहीं प्रशासन व भाजपा नेताओं का आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>वाटर पम्प से अन्य बस्तियों का भी निकाला जा रहा पानी </strong><br />वहीं कस्बे  के गढ़ के पीछे की बस्तियों में जल भराव को वाटर पम्प की सहायता से निकाला जा रहा है।  इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रामशंकर वैष्णव, लक्ष्मण सिंह हाड़ा, किशनबिहारी यादव, श्याम सोनी, व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुरेश खंडेलवाल, दिनेश दाधीच रायथल, लक्ष्मीचंद सुमन, युवा मोर्चा के सत्यनारायण सोनी, महावीर कहार, राहुल कोड़प,आयुष नागर  समेत अनेक कार्यकर्ता बचाव राहत कार्य में जुटे रहे और मौके पर उपखण्ड अधिकारी सौरभ भांबू मांगरोल, तहसीलदार मांगरोल नरोत्तम  मीणा,नायब तहसीलदार लोकेन्द ्रसिंह सोलंकी,काननूगो दिलशेर, पटवारी भारत भूषण शर्मा, हिमांशु वैष्णव, पीडब्ल्यूडी कनिष्ठ अभियंता नितेश मीणा,नगर पालिका सहायक अभियन्ता महेन्द्र सिंह जाटव, थानाधिकारी बाबूलाल मीणा जाप्ते के साथ मौके पर मौजूद रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 14:45:41 +0530</pubDate>
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                <title>उद्घाटन के इंतजार में आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम का कचरा ट्रांसफर स्टेशन स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/modern-garbage-transfer-station-waiting-for-inauguration/article-108177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)71.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से दो आधुििनक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनकर तैयार होने के बाद भी शुरु नहीं किए जा रहे है। उद्घाटन के इंतजार में इनके शुरु नहीं होने से थेगड़ा के कचरा ट्रांसफर  स्टेशन को यहां शिफ्ट नहीं किया जा रहा। जिससे जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम कोटा दक्षिण की तर्ज पर कोटा उत्तर में भी स्टेशन रोड पर जिन बाबा के पीछे खेड़ली फाटक में और उम्मेदगंज में करीब 15 करोड़ की लागत से दो आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए है। इनकी बिल्डिंग बनने के साथ ही यहां मशीनें भी लग चुकी है। हालांकि दोनों ट्रांसफर स्टेशन बार-बार आपत्तियों के कारण काम में देरी होने से इनके तैयार होने में भी समय लगा। लेकिन अब ये लगभग बनकर तैयार हैं। उसके बाद भी अभी तक इन्हें शुरु नहीं किया गया है। जबकि नगर निगम कोटा उत्तर के आयुक्त व महापौर इनका निरीक्षण कर चुके है। </p>
<p><strong>यहां टूटी चार दीवारी का कचरा</strong><br />इधर थेगड़ा रोड स्थित नगर निगम का कचरा ट्रांसफर स्टेशन स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बीच रास्ते में है। इसकी चार दीवारी भी टूटी हुई है। यहां डम्पर व ट्रेक्टर ट्रॉलियों से कचरा डाला जा रहा है। दिनभर कचरा सड़ता रहता है। कई दिन से इसकी चार दीवारी टूटी होने से उसका कचरा सड़क पर आ रहा है। जिससे वहां से रायपुरा, शिवपुरी धाम समेत अन्य स्थानों पर जाने वाले लोगों को गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>आयुक्त को ज्ञापन देने के बाद समाधान नहीं</strong><br />स्थानीय लोगों ने बताया कि थेगड़ा ट्रांसफर स्टेशन को यहां से शिफ्ट करने की मांग को लेकर कई बार कोटा उत्तर आयुक्त को ज्ञापन दिया जा चुका है। उसके बाद भी अभी तक इसका समाधान नहीं हुआ है। जबकि लोग इसके विरोध में प्रदर्शन तक की चेतावनी दे चुके हैं। </p>
<p><strong>शीघ्र सही होगी चार दीवारी</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के स्वास्थ्य अधिकारी व सहायक अभियंता मोतीलाल चौधरी ने बताया कि आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन शुरु नहीं होने का कारण तो पता नहीं है। लेकिन थेगड़ा स्थित ट्रांसफर स्टेशन की टूटी चार दीवारी को सही करवाने के टेंडर हो चुके है। इसका काम शीघ्र ही शुरु हो जाएगा। जिसमें चार दीवारी को ऊंचा करने व टूटी को सही किया जाएगा। जिससे कचरा सड़क पर नहीं फेलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 15:40:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>खराब पोश मशीनों से राशन अटकने का मामला सदन में गूंजा : 10 प्रतिशत लाभार्थियों को नहीं मिला राशन, सुमित गोदारा ने बढ़ाई तिथि</title>
                                    <description><![CDATA[जवाब में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि मैं सदन में घोषणा करता हूं कि 31 मार्च तक तिथि बढ़ाई जाती है, ताकि इन जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/case-of-rationing-ration-from-bad-posu-machines-10-percent/article-106604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy78.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने विधानसभा में पर्ची के माध्यम से राशन की पोश मशीन खराबी का मामला उठाया। कृपलानी ने कहा कि पिछले एक महीने से पोश मशीन खराब होने के चलते 10 प्रतिशत लाभार्थियों को राशन नहीं मिला। सरकार से मांग है कि 31 मार्च तक समय सीमा बढ़ाए, ताकि इन जरूरतमंदों को राशन मिल सकें।</p>
<p>जवाब में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि मैं सदन में घोषणा करता हूं कि 31 मार्च तक तिथि बढ़ाई जाती है, ताकि इन जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 16:00:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दो माह से बंद है आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन का काम </title>
                                    <description><![CDATA[उम्मेदगंज ट्रांसफर स्टेशन का काम एक माह में होगा पूृरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-work-of-modern-garbage-transfer-station-is-closed-for-two-months/article-87958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र में बन रहे एक आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन का काम करीब दो माह से बंद है। जबकि मौके पर मशीनें भी पहुंच चुकी हैं। वहीं दूसरा ट्रांसफर स्टेशन करीब एक माह में बनकर तैयार हो जाएगा। नगर निगम कोटा उत्तर के अधीक्षण अभियंता कुलदीप प्रेमी ने बताया कि उत्तर क्षेत्र में दो आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बन रहे हैं। एक स्टेशन रोड पर जिन बाबा के पीछे और दूसरा उम्मेदगंज में। उनमें से जिन बाबा के पीछे निर्माणाधीन आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन का सिविल काम काफी अधिक हो गयाप था। शेड डलना बाकी है। साथ ही मौके पर मशीनें भी पहुंच चुकी है। लेकिन इसी बीच स्थानीय विधायक द्वारा इस ट्रांसफर स्टेशन के निर्माण पर आपत्ती जताते हुए जिला कलक्टर को शिकायत दी थी। जिस पर जिला कलक्टर के निर्देश से जून के अंतिम सप्ताह में इसका काम  रोक दिया था। उन्होंने बताया कि विधायक ने इसे ट्रेचिंग ग्राउंड बताते हुए आपत्ती की। साथ ही बस्ती के बीच व वन विभाग की जमीन पर निर्माण होने को गलत बताया है। </p>
<p><strong>7.50 करोड़ की लागत से हो रहा तैयार</strong><br />कुलदीप प्रेमी ने बताया कि जिन बाबा के पीछे और उम्मेदगंज में दोनों जगह 7.50-7.50 करोड़ की लागत से ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं।  स्टेशन रोड वाले ट्रांसफर स्टेशन का काम बनद होने से वहां मशीनों का उपयोग नहीं हो रहा है। संवेदक का 70 लाख से अधिक का भुगतान भी हो चुका है। वहीं उम्मेदगंज वाला ट्रांसफर स्टेशन का काम एक माह में पूरा हो जाएगा। उसके बाद  वह कार्यशील अवस्था में आ जाएगा।  </p>
<p><strong>निगम ने यह दिया स्पष्टीकरण</strong><br />कुलदीप प्रेमी ने बताया कि इस संबंध में  नगर निगम की ओर से जिला कलक्टर व विधायक को अवगत करवा दिया है कि यह जमीन नगर निगम के नाम है। फायर स्टेशन के नाम से स्वीकृत जमीन है। यहां ट्रेचिंग ग्राउंड नहीं बनाया जा रहा है। यहां ट्रांसफर स्टेशन बनने से आस-पास के वार्डों का कचरा आएगा। जिसे  मशीनों से कंटेनरों में भरकर ट्रेचिंग ग्राउंड भेजा जाएगा। ट्रांसफर स्टेशन नजदीक होने से टिपर वार्ड में अधिक चक्कर लगा सकेंगे। साथ ही यहां गंदगी भी नहीं होगेी। ट्रांसफर स्टेशन के साथ ही यहां गैराज का निर्माण भी किया जा रहा है। लेकिन अभी तक काम शुरु करने के संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं मिलने से दो माह से काम बंद है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Aug 2024 17:12:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आए दिन मशीन खराब, थायराइड, विटामिन बी-12 व डी की जांच का टोटा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच के नाम पर चुनिंदा जांचे ही इन दिनों सेंट्रल लैब में हो रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/machines-are-breaking-down-every-day--there-is-a-shortage-of-tests-for-thyroid--vitamin-b-12-and-d/article-86860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/aye-din-machine-khrab,-thyroid,-vitamin-b-12-va-d-ki-janch-ka-tota...kota-news-05-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में बीमारियों की जांच व्यवस्था पूरी तरहत चरमाई हुई है। लोगों को समय पर जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से इलाज में देरी हो रही है। अस्पताल की अधिकांश महंगी जांचे नहीं हो रही जिससे मरीजों को बाहर से जांच कराना पड़ रहा है। थाइराइड, विटामिन, आयरन और विटामिन डी जैसी जांचे नहीं हो रही है। कांउटर पर जाने पर संविधा कर्मी मशीन खराब होकर सैंपल ही नहीं ले रहे है जिनके सैंपल ले रहे उनकी जांच नहीं आ रही है। रिपोर्ट दो भी आठ से दस दिन में मिल रही है। सीटी स्केन मशीन पहले ही बंद पड़ी है। एमआरआई के लिए लोगों को एक एक माह की वेटिंग मिल रही है। मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच के नाम पर चुनिंदा जांचे ही इन दिनों सेंट्रल लैब में हो रही है। जिससे मरीजों को महंगी जांचे बाहर से करानी पड़ रही है। </p>
<p><strong>थाइराइड, विटामिन-12 व डी की जांच नहीं हो रही</strong><br />एमबीएस अस्पताल की सेंटर लेब में कई महंगी जांचे नहीं हो रही है। थाइराइड, विटामिन-12 व डी की जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे लेकिन जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही है। मेडिकल कॉलेज में महंगी जांच के किट खत्म होने से इनकी जांच नहीं हो पा रही है। मरीज रिपोर्ट के लिए मरीज को 12 से 15 दिन का समय दिया जा रहा है। 15 दिन बाद रिपोर्ट लेने जाने पर बताते अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। कभी सैंपल खराब होने की बात कहते कभी मशीन खराब होने की बात कहकर लोगों को परेशान कर रहे है। पिछले एक माह से जांच व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ी हुई है। <br /><strong>- रामचंद्र मीणा, निवासी नांता</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में जांच व्यवस्था में कहां गड़बडी हो रही है इसके बारे में अधीक्षक से बात कर व्यवस्थाओं सुधारा जाएगा। <br /><strong>- डॉ संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>8 दिन पहले दिया था सैंपल रिपोर्ट आज तक नहीं मिली</strong><br />अस्पताल में जांचे गिनी चुनी हो रही है। समय पर रिपोर्ट नहीं मिल रही है। आठ दिन पहले थाइराइड और विटामिन की जांच के लिए सैंपल लिया था आज तक रिपोर्ट नहीं आई है। आज कहा कि जेकेलोन में जांच करा ले। आठ दिन से बिना जांच के इलाज भी शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल में जांच व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। <br /><strong>- आशा शर्मा, निवासी सुभाष नगर</strong></p>
<p><strong>लीवर प्रोफाइल की जांच रिपोर्ट नहीं मिली</strong><br />पांच दिन पहले लीवर प्रोफाइल, लिकविड प्रोफाइल की की जांच कराई थी एक रिपोर्ट मिली दूसरी मिली ही नहीं अस्पताल सेंट्रल लेब में पांच जांच कराए तो रिपोर्ट तीन की ही मिलती है। एक दो रिपोर्ट हमेशा मिस हो जाती है। <br /><strong>- किशल लाल कहार, निवासी बोरखेडा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 16:13:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>डीएनए फिंगर प्रिंट लैब 8 माह से चालू होने के इंतजार में</title>
                                    <description><![CDATA[5.85 करोड़ की लागत से बन कर तैयार हुई इस लैब में 18 तरह की मशीनें स्थापित हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dna-finger-print-lab-is-waiting-to-be-started-since-8-months/article-86697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/dna-fingerprint-lab-8-mah-s-chalu-hone-k-intezar-me...kota-news-03-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल में आठ माह पहले बनकर तैयार हुई डीएनए फिंगर प्रिंट लैब पर अभी भी ताला लटका हुआ है। करोड़ों रुपए की लागत से बनकर तैयार हुई इस लैब में कई तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन साइंटिफिक आॅफिसर की नियुक्ति नहीं होने से दिसंबर माह में तैयार हो चुकी यह लैब किसी काम नहीं आ पा रही है। वहीं लैब के संचालन के लिए जिन वैज्ञानिकों को ट्रेनिंग दी जानी थी। उनकी ट्रेनिंग पर भी अभी तक कोई फैसल नहीं हो पाया है। </p>
<p><strong> कोटा में ही हो सकेंगी डीएनए से संबंधित जांचें</strong><br />1. लैब खुलने के बाद रेप, मर्डर या अन्य मामलों में कोटा में ही डीएनए टेस्ट हो जाएंगे।<br />2. गुमशुदगी में दो पक्षों द्वारा दावा करने की स्थिति पर भी डीएनए से पता लगाया जा सकेगा।<br />3. डीएनए फिंगर प्रिंटिंग का उपयोग आपराधिक जांच में साक्ष्य के लिए किया जा सकेगा।<br />4. अपराध स्थल से लिए गए डीएनए नमूने की तुलना संदिग्ध व्यक्ति के डीएनए से करने में आसानी होगी।<br />5. इसका उपयोग पितृत्व साबित करने के लिए भी किया जाता है।</p>
<p><strong>अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस है लैब</strong><br />5.85 करोड़ की लागत से बन कर तैयार हुई इस लैब में 18 तरह की मशीनें स्थापित हैं। जो इंसानी डीएनए से संबंधित कई तरह की जांच करने में सक्षम हैं। इस तरह की जांचों के लिए पहले सैंपल जयपुर एफएसएल भेजे जाते थे जहां से रिपोर्ट आने में कई दिनों का समय लग जाता था। लैब के शुरू होने के बाद ये जांचें कोटा में ही की जा सकेंगी। साइंटिफिक आॅफिसर की नियुक्ति के कारण बंद पड़ी है: पिछली सरकार की ओर से साल 2022 के बजट में प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में ऐसी लैब बनाने की घोषणा की गई थी। इस दौरान एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी बन जाने से पुरानी ओपीडी की जगह खाली हो गई थी। जिसके बाद लैब को इसी खाली पड़े कमरों में बनाकर तैयार किया गया था। वहीं लैब के संचालन के लिए मेडिकल कॉलेज ने साइंटिस्ट की मांग भी की थी। अन्य तीन जिलों के साथ ही कोटा में इस लैब को शुरू करना था लेकिन इनके लिए जरूरी साइंटिफिक आॅफिसर की ट्रेनिंग देनी थी। जिसके लिए 4 साइंटिफिक आॅफिसर की नियुक्ति प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। </p>
<p><strong>लैब की अभी यह है स्थिति</strong><br />वर्तमान में यह लैब एमबीएस अस्पताल के पुराने ओपीडी ब्लॉक के 8 कमरों में बनकर तैयार है। जिसमें सभी निर्माण कार्य और उपकरणों को स्थापित करने का कार्य पूरा हो चुका है। जिसे शुरू करने के लिए साइंटिफिक आॅफिसर, सूचना सहायक, स्टॉफ और सुरक्षा गार्ड नियुक्त करने की आवश्यकता है।</p>
<p>डीएनए फिंगर प्रिंट लैब बनकर तैयार है जिसके सांइटिफिक आॅफिसर और स्टॉफ की आवश्यकता है। ये कार्य सरकार के स्तर का है जिसके लिए चिकित्सा विभाग को अवगत कराया हुआ है। आॅफिसर की ट्रेनिंग के बाद ही इसे शुरू किया जा सकता है।<br /><strong>-संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Aug 2024 15:48:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तीन माह से धूल खा रहे 88 लाख के दो रोबोट</title>
                                    <description><![CDATA[अभी तक आरयूआईडीपी ने नहीं किए निगम को हैंडओवर। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/two-robots-worth-88-lakhs-are-gathering-dust-since-last-three-months/article-82788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/3-maah-s-dhool-kha-rhe-88-lakh-k-do-robot...kota-news-26-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बरसों पुरानी सीवरेज लाइनों को तो बदल दिया गया है। लेकिन अब उनकी नियमित साफ सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। सीवरेज मेन हॉल की सफाई के लिए आरयूआईडीपी ने लाखों रुपए के रोबोट तो खरीद लिए लेकिन करीब तीन माह से उनका उपयोग नहीं होने से  वे धूल खा रहे हैं। शहर में सीवरेज सफाई का कार्य नगर निगम द्वारा किया जा रहा है। अभी तक यह कार्य सीवरेज की छोटी बड़ी व जेटिंग मशीनों से किया जा रहा है। कई जगह पर मेन हॉल की सफाई का कार्य सफाई श्रमिकों के माध्यम से किया जा रहा है। लेकिन सफाई श्रमिकों के मेन हॉल में जाकर सफाई करने से आए दिन जहरीली गैस के कारण श्रमिकों की तबीयत खराब होने व मौत तक होने के मामले हो चुके हैं। ऐसे में अब श्रमिकों की जगह मेन हॉल की सफाई का काम रोबोट से किया जाएगा। </p>
<p><strong>निगम को नहीं हुए हैंडओवर</strong><br />मुख्यालय द्वारा रोबोट खरीदकर रा’य की हर  नगर निगमों को भेजे गए थे। जिसके तहत कोटा कीदोनों निगमों के लिए भी ये रोबोट तो भेज दिए। लेकिन अभी तक ये दोनों रोबोट आरयूआईडीपी के पास ही है। इन रोबोट का उपयोग नगर निगम द्वारा सीवरेज मेन हॉल सफाई के लिए किया जाएगा। लेकिन आरयूआईडीपी ने अभी तक इन्हें निगम को हैंड ओवर ही नहीं किया। जिससे इनका उपयोग ही नहीं हो सका। </p>
<p><strong>8 मीटर गहराई तक 20 मिनट में करेगा सफाई</strong><br />आंध प्रदेश के युवा इंजीनियरों द्वारा स्टार्टअप के तहत बनाए गए ये रोबोट कम्प्यूटराइ सिस्टम से सचालत होते हैं। सीवरेज के मेन हॉल पर  इस रोबोट को रखने पर यह 8 मीटर गहराई तक जाकर 20 मिनट में सफाई करता है। इसमें पाइप के जरिये मशीन के साथ कैमरा भी अंदर जाता है। जिससे ऊपर लगे रोबोट की स्क्रीन पर अंदर की सफाई का काम नजर आता रहता है। जबकि श्रमिकों द्वारा सफाई का काम करने में 4 से 5 घंटे का समय लगता है। </p>
<p><strong>निगम में मशीनों का अंबार</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के गैराज में सीवरेज सफाई के लिए मशीनों का अम्बार है। छोटी-बड़ी करीब 25 से अधिक मशीनें हैं। जिन्हें कुछ समय पहले कांग्रेस के बोर्ड में ही निगम मुख्यालय द्वारा क्रय किया गया है। निगम  द्वारा छोटी मशीन से सफाई के प्रति चक्कर 750 व बड़ी मशीन से 1 हजार रुपए लिए जाते हैं। </p>
<p><strong>88 लाख के खरीदे दो रोबोट</strong><br />आरयूआईडीपी द्वारा पिछली कांग्रेस सरकार के समय में नगर निगमों से रोबोट के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। कोटा उत्तर व दक्षिण निगम से भी प्रस्ताव मांगे थे। लेकिन उस समय कोटा दक्षिण निगम के महापौर ने तो तो रोबोट की आवश्यकता ही नहीं होने से प्रस्ताव देने से इनकार कर दिया था। जबकि कोटा उत्तर निगम की ओर से प्रस्ताव सरकार को भेज दिए थे। मुख्यालय स्तर पर आरयूआईडीपी ने ये रोबोट खरीदे। जिनमें कोटा के भी दो रोबोट शामिल हैं। एक रोबोट की कीमत करीब 44 लाख है। इस तरह से करीब 88 लाख से अधिक की कीमत के ये रोबोट कोटा में मार्च में आ चुके हैं। लेकिन तीन माह बीतने पर भी अभी तक इनका उपयोग नहीं होने  से ये धूल खा रहे हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मुख्यालय द्वारा पिछली कांग्रेस सरकार में हर निगम के हिसाब से एक रोबोट क्रय किया गया था। कोटा के लिए करीब 88 लाख के दो रोबोट मार्च में आ गए थे। जब तक रोबोट आए तब तक सीवरेज की सफाई का काम पूरा हो गया था। रोबोट से बिना किसी खतरे के मेनहॉल की सफाई की जा सकेगी। अभी इनका उपयोग नहीं हुआ लेकिन भविष्य में ये कारगर साबित होंगे। उनका उपयोग नगर निगमों के माध्यम से किया जाएगा। फिलहाल यह आरयूआईडीपी के पास ही हैं। <br /><strong>- राकेश गर्ग, अधीक्षण अभियंता आरयूआईडीपी कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Jun 2024 14:25:58 +0530</pubDate>
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                <title>वेस्ट अफ्रीका के केशू से तैयार होता है कोटा में काजू</title>
                                    <description><![CDATA[धीरे-धीरे बढ़ते हुए वर्तमान में 4 से 5 करोड़ सालाना टर्नओवर पहुंच गया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cashew-is-prepared-in-kota-from-cashew-of-west-africa/article-80736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती का पहला ऑटोमेटिक प्लांट कोटा केशू प्रोसेसिंग। जहां वेस्ट अफ्रीका से केशू का फल आयात कर काजू निकाला जाता है। जो राजस्थान के अलावा देशभर में भेजा जा रहा है। अपने पापा जगदीश कुमार हरचंदानी से प्रेरित होकर पंकज हरचंदानी ने इस स्टार्टअप को नवंबर 2022 में शुरू किया था। इस प्लांट में करीब 22 से 25 मशीनें लगी हुई है, जिन पर डेली वेजेज पर 70 से अधिक श्रमिक काम कर हैं। इनके पास तीन सैलेरी वाले कर्मचारी भी है। जो प्रतिदिन 2 से 3 टन काजू का प्रोसेस कर रहे हैं। जबकि मशीनों की कुल क्षमता 8 टन है। कोटा केशू प्रोसेसिंग में तैयार हुआ काजू राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, मुंबई सहित देशभर की अनेक मंडियों में व्यापारियों को उनके आर्डर के अनुसार भेजा जाता है। पंकज बताते हैं कि प्लांट की शुरुआत में वे दो मशीन जिसमें एक की कीमत 2 करोड़ और दूसरी 1 करोड़ कीमत की तमिलनाडु और गुजरात से लेकर आए थे। वहीं करीब एक करोड़ का रा-मेटेरियल मंगवाकर प्लांट में प्रोडक्शन शुरू किया था। हालांकि शुरुआत दौर में बड़ा आॅर्डर नहीं मिला। पंकज बताते हैं कि फिर भी हौसलों की उड़ान से कदम आगे बढ़ाते गए और पापा की हिम्मत से अब ऊंचाई को छू रहे हैं। पहले साल टर्नओवर एक करोड़ रुपए रहा, जो कि बहुत कम था। धीरे-धीरे बढ़ते हुए वर्तमान में 4 से 5 करोड़ सालाना टर्नओवर पहुंच गया है। </p>
<p><strong>पिता ने ही दिया था पंकज को आइडिया</strong><br />पंकज हरचंदानी बताते हैं कि वे शुरु से ही व्यापार करना चाहते थे। हालांकि पढ़ाई के दौरान उन्होंने जॉब भी की। बाद में नवंबर 2022 में बिजनैस करने की सोची और अपने सपने को साकार करने के लिए कदम उठाए। बिजनैस करने का आइडिया उन्हें अपने पिता से मिला। पंकज बताते हैं कि उनके पिता जगदीश कुमार ने ही उनको केशू से काजू बनाने का आइडिया दिया था। इसके बाद उन्होंने वेस्ट अफ्रीका में इसको लेकर संपर्क किया और स्टार्टअप शुरू किया। </p>
<p><strong>इंदौर से किया था एमबीए, वहीं पर जॉब भी</strong><br />पंकज हरचंदानी ने इंदौर, मध्यप्रदेश से एमबीए की पढ़ाई 2011 में की थी। इसके बाद इंदौर में ही बीबीए और एमबीए की पढ़ाई के दौरान ही बजाज फाइनेंस में जॉब भी की। पढ़ाई पूरी होते ही घरवालों ने शादी कर दी। पंकज बताते हैं कि उनकी शादी को करीब 12 वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है। अब तो पापा के साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर अपने बिजनैस को ऊंचाईयों पर ले जाने में लगे हुए हैं। वे अपने इस बिजनैस को बढ़ाने के लिए हर समय नवाचार करते रहते हैं। दिनभर काम में व्यस्त रहने के बाद भी परिवार को भी वे पूरा समय देते हैं। इस बिजनैस में उनके पिता भी पूरा सहयोग कर रहे हैं। ताकि बेटा अपने कारोबार को ऊंचाईयों तक ले जा सके। उनका सपना देश ही नहीं विदेशों में भी कोटा केशू प्रोसेसिंग में तैयार हुए काजू का निर्यात करना है। ताकि कोटा की पहचान विदेशों तक काजू बनाने के उद्योग में भी बन सके।</p>
<p><strong>एक पेटी में होते हैं 20 किलो काजू</strong><br />कोटा केशू प्रोसेसिंग में तैयार किया गया काजू जयपुर, जोधपुर, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, बैंगलोर आदि मंडियों में भेजा जाता है। पंकज बताते हैं कि कम से कम 100 किलो का आॅर्डर होता है। इससे कम का आॅर्डर बुक नहीं करते हैं। क्योंकि फिर मुनाफा नहीं मिल पाता है। वे बताते हैं कि एक पेटी में 10-10 किलो के दो पैकेट रखे जाते हैं। ताकि वजन ज्यादा न हो। अभी तक ज्यादातर माल किसी एक ही मंडी में गया हो ऐसा नहीं है। </p>
<p><strong>सबसे कम अंक का काजू सबसे महंगा</strong><br />काजू के व्यापार में नंबर गेम चलता है। जिसमें सबसे अच्छे काजू की पहचान उसके अंक से की जाती है। काजू को व्यापारी अलग-अलग ग्रेड में बांटते हैं। काजू को नंबर से ही पहचाना जाता है। सबसे अच्छा काजू का अंक 150 है। जिसकी मोटाई और लंबाई सबसे अच्छी होती है। इसके अलावा 180, 210, 240, 320 और 400 नंबर के काजू बाजार में मिलते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 240 व 320 काजू की बिक्री होती है। क्योंकि यह कम कीमत का होता है। काजू की कीमत उसके अंकों के आधार पर ही तय होती है। 150 अंक का काजू सबसे महंगा होने के कारण बाजार में आम लोग कम ही खरीदते हैं। वहीं 240 व 320 अंक का काजू सबसे ज्यादा मार्केट में बिकता है, इसकी कीमत सामान्यतया 600 से 800 रुपए प्रतिकिलो होती है।</p>
<p><strong>क्या है काजू का बनाने का तरीका</strong><br />पंकज हरचंदानी ने बताया कि काजू बनाने के लिए जो मशीनें लगाई गई है। उनके एक माह में 8 टन और एक साल में करीब 950 टन माल उत्पादित किया जा सकता है। वर्तमान में हम अभी इनसे एक माह में 80 टन माल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि काजू तैयार करने के लिए रा-मेटेरियल वेस्ट अफ्रीका से केशू का फल मंगाते हैं। जिसके नीचे एक नट होता है, उसको मशीन में डालकर काजू निकाला जाता है। यह फल दिखने में एप्पल जैसा होता है। हालांकि देश में भी इसके बगीचे आंध्रपेदश, गोवा और तमिलनाडु में है। मगर वेस्ट अफ्रीका का फल ज्यादा अच्छा होने के कारण वहीं से वर्तमान में आयात कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jun 2024 16:00:23 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों की ई मित्र प्लस मशीनें ना इधर की ना उधर की</title>
                                    <description><![CDATA[ शहरी क्षेत्र में मशीनों के बारे में जागरुकता की कमी के चलते नागरिक इनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-mitra-plus-machines-worth-crores-are-neither-here-nor-there/article-68534"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/croro-ki-e-mitr-plus-mashine-na-idhr-ki-na-udhr-ki...kota-news-29-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य में नागरिकों को डिजिटल भारत की ओर प्रोत्साहित करने और सरकारी कार्यों को आसान बनाने के लिए सरकार द्वारा सरकारी कार्यालयों सहित कई विभागों में ई मित्र प्लस मशीनों को लगाया गया था ताकी आमजन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाए अपने आप से सभी कार्यों को कर सकें। लेकिन करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ये मशीनों सरकारी कार्यालयों में बस धूल खा रही हैं। </p>
<p><strong>मशीनों में यह काम होता है </strong><br />सरकारी कार्यालयों में स्थापित इन ई मित्र प्लस मशीनों में कई प्रकार के कार्य नागरिकों द्वारा स्वयं किए जा सकते हैं। मशीनों में कई प्रकार के आवश्यक दस्तावेज जैसे जाति प्रमाण पत्र, मूल निवासी प्रमाण पत्र, गिरदवारी रिपोर्ट, जमाबंदी, जन्म, मृत्यु व विवाह प्रमाण पत्र प्रिंट करने के साथ ही पानी-बिजली के बिल भरने की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त जनआधार में मोबाइल नम्बर अपडेट, सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वार्षिक सत्यापन व जन सूचना संबंधी समस्त सूचनाएं की सुविधा भी ई-मित्र प्लस मशीन से प्राप्त की जा सकती हैं।</p>
<p><strong>सुविधाएं ई-मित्र प्लस में</strong><br />ई मित्र प्लस मशीन दिखने में एटीएम जैसी दिखाई देती है। इसमें 32 इंच एलईडी के साथ मॉनिटर डिवाइस, वेब कैमरा, कैश असेप्टर, कार्ड रीडर, मैटलिक की बोर्ड, रसीद के लिए नार्मल प्रिंटर, लेजर प्रिंटर आदि मौजूद हैं। सरकारी कार्यों के अलावा मशीन में मौजूद वेब कैमरे से आम नागरिक उच्चाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत भी कर सकते हैं। </p>
<p><strong>मशीनों की लागत करोड़ों में</strong><br />वर्ष 2018 में सूचना व प्रौद्योगिक विभाग द्वारा करीब 372 करोड़ रुपए खर्च करके पूरे 33 जिलों में लगभग 14 हजार 891 ई मित्र प्लस मशीनें लगाई गई थी। जहां प्रत्येक मशीन की अनुमानित कीमत 2.5 लाख रुपए थी। कोटा जिले में भी विभाग द्वारा प्रत्येक सरकारी दफ्तर, ग्राम पंचायत, चिकित्सालय और स्वास्थ्य केंद्र में करीब 10 करोड़ की लागत से 398 ई मित्र प्लस मशीनें लगाई थी। लेकिन जिले के कई स्थानों पर ये मशीनें आज भी धूल खा रही हैं। ना ही इन्हें नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है और ना ही ये मशीनें कार्यालयों के काम आ रही हैं। शहर के एमबीएस अस्पताल में 3, मेडिकल कॉलेज में 3, रामपुरा सैटेलाइट हॉस्पिटल में 1 समाज कल्याण विभाग में 1 सहित नगर निगम, नगर विकास न्यास, बस स्टैंडों, पंचायत समितियों और सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर 6 साल पहले ये मशीनें लगवाई गई थी। लेकिन इन सभी स्थानों पर ये मशीनें धूल खा रही हैं। वहीं दूसरी ओर जारुकता की कमी से नागरिक भी इन मशीनों में होने वाले कार्यों से अनजान हैं।</p>
<p><strong>गांव में चल रहीं मशीनें</strong><br />जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर स्थानों पर जहां एक ओर ये मशीनें संचालित हैं और नागरिकों द्वारा काम में ली जा रही हैं वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्र में ये मशीनें रखी हुई बस धूल खा रही हैं। शहरी क्षेत्र में मशीनों के बारे में जागरुकता की कमी के चलते नागरिक इनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जिले की लगभग सभी ई मित्र प्लस मशीनें संचालित हैं, जिन विभागों और दफ्तरों में मशीनें लगी हुई हैं उनमें नोडल अधिकारी नियुक्त करने के लिए भी नोटिस दिया जा चुका है। जहां मशीनें बंद पड़ी हैं उन्हें नोटिस देकर चालु करवाएंगे।<br /><strong>- मुकेश विजय, सहायक निदेशक, सूचना प्रोद्योगिक विभाग</strong></p>
<p>मशीनों को चलाने के लिए कोशिश की जा रही है, एक मशीन खराब थी उसके लिए संबंधित कंपनी को पत्र लिखा गया है। मशीन के संचालन के लिए संचालक लगाने की प्रक्रिया की जा रही है।<br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, महाराव भीम सिंह अस्पताल</strong></p>
<p>मशीनें सूचना प्रोद्यौगिक विभाग द्वारा संचालित की गई थी बाद में संचालन करने वाले कर्मचारी मशीनों को बंद करके चले गए तब से ये बंद हैं। इनके संचालन के लिए पत्र भी लिखे जा चुके हैं, आगे इन्हें चलाने की और कोशिश करेंगे।<br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 17:58:43 +0530</pubDate>
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                <title>तारीख पर तारीख, मरीजों को दर्द दे रहा मेडिकल कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[न्यू मेडिकल कॉलेज में एक ही मशीन होने से मरीजों को एक से डेढ़ माह आगे की तारीख मिल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/date-on-date--medical-college-giving-pain-to-patients/article-54124"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/kota-news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में मरीजों अभी एमआरआई के लिए और इंतजार करना पड़ेगा। कई बार जनप्रतिनिधियों से लेकर लोगों ने एमआरआई मशीन शीघ्र लगाने की मांग कर चुके उसके बाद भी मशीन मूर्तरूप नहीं ले रही है। मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य ने डॉ विजय सरदाना के समय डेढ़ साल पहले साढे बारह करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे टेंडर भी निकाले गए थे, लेकिन मशीन महंगी होने से किसी ने टेंडर नहीं लगाए ।  उसके बाद प्राचार्य और एमबीएस के अधीक्षक बदलने से ये काम ठंडे बस्ते में चला गया। जिससे मशीन की कीमत बढ गई। वर्तमान में एमआरआई मशीन करीब 21 से 22 करोड के बीच आ रही है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त बजट नहीं है। प्रशासन बैक से लोन के लिए भी प्रयास कर रहा है लेकिन अभी इसमें भी सफलता नहीं मिल रही है ऐसे में मरीजों को एमबीएस में एमआईआर कराने के लिए इंतजार लंबा हो सकता है।  अब अस्पताल प्रशासन बजट की जुगाड़ में लगा हुआ। इधर एमबीएस में भर्ती मरीजों को एमआरआई के लिए 12 किमी दूर न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाने की मजबूरी अभी जारी है। न्यू मेडिकल कॉलेज में एक ही मशीन होने से मरीजों को एक से डेढ़ माह आगे की तारीख मिल रही है।  इधर अस्पतालों में सभी तरह की जांचें नि:शुल्क होने से मरीजों संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो गई है।</p>
<p><strong> मेडिकल कॉलेज में स्थितियां बिगड़ने लगी</strong><br /> मेडिकल कॉलेज में स्थितियां बिगड़ने लगी हैं, क्योंकि यहां एमआरआई के लिए तो एक से डेढ महीनें की वेटिंग है। जबकि, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी की संख्या दोगुनी हो गई है। सोनोग्राफी के लिए 15 से 20 दिन व सीटी स्कैन के लिए 5 से 8 दिन की वेटिंग चल रही है। इसके लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक्सरे की भी ऐसी स्थिति है। इसमें 25 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि, ये तो पूर्व में नि:शुल्क हो रहा था। इसके बावजूद भी ग्राफ बढ़ा है। इसके अलावा स्पेशल एक्सरे और कलर डॉप्लर सोनोग्राफी करवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके चलते मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। साथ में कर्मिकों भी परेशानी बढ़ी है। इनको शाम 6 बजे तक काम करना पड़ रहा है। जबकि, ओपीडी सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक की है। क्योंकि, इमरजेंसी मामले एमबीएस से एमआरआई जांच के लिए 1 बजे बाद ही आते है। मरीजों के सिचुएशन को देखते हुए ऐसा करना पड़ता है। खास बात ये ही जांचों के मरीज मेडिकल कॉलेज ही नहीं एमबीएस और जेकेलोन में बढ़े है। सवाल यह है कि ऐसे में मरीजों का समय पर कैसे इलाज हो पाएगा। राज्य सरकार की ओर से 1 अप्रैल 2022 से सभी जांचों को नि:शुल्क कर दिया है। जांचों को नि:शुल्क करते ही एमआरआई के लिए मरीजों की लम्बी कतार लग गई है। हालात यह है कि नि:शुल्क करने से पहले मार्च 2022 तक रोजाना 25 से 30 एमआरआई होती थी। इसकी संख्या बढ़कर अब 40 से 55 पर पहुंच गई है। बावजूद इसके मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। 7 अगस्त को आए मरीज को सितंबर की 20 तारीख दी जा रही है।</p>
<p><strong>लिफाफे तक नहीं, फिल्म पर लग जाते हैं फिंगर प्रिंट</strong><br />मरीज रामभरण वर्मा ने बताया कि नए अस्पताल में पिछले कई माह से एमआरआई और सीटी स्कैन रिपोर्ट की फिल्म रखने के लिए लिफाफे तक नहीं हैं। मरीज के हाथ में फिल्म पकड़ा दी जाती है। फिल्म पर जगह-जगह हाथ लगने से उस पर फिंगर प्रिंट लग जाते हैं, इससे संबंधित डॉक्टर को फिल्म देखने में भी दिक्कत आती है। बिना लिफाफे फिल्म को ज्यादा दिन तक रखा भी नहीं जा सकता, महंगी जांच खराब होने का खतरा रहता है।</p>
<p><strong> पुराने और घिसे पिटे उपकरण  से हो रही जांच</strong><br />अस्पताल में  रेडियोलॉजी में घिसे पिटे उपकरणों पर अभी भी काम हो रहा है। जबकि, ये नकारा घोषित होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। एमआरआई 2012 में शुरू की गई थी। इसको 13 साल हो गए हैं। ऐसे में इसकी मियाद अवधि पूरी हो गई है।</p>
<p><strong>संसाधन नहीं बढ़ाने से हो रही परेशानी</strong><br />स्सरकार ने अस्पतालों में सभी तरह की जांच नि:शुल्क शुरू कर दी है, लेकिन मशीनें नहीं बढ़ाई है। स्थिति ये है कि पूरे कोटा जिले में एक मात्र एमआरआई केवल मेडिकल कॉलेज में है। अन्य किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है। इसी तरह सोनोग्राफी, एक्सरे और सीटी स्कैन की संख्या अपर्याप्त है। ऐसे में एमबीएस अस्पताल तक के मरीजों को एमआरआई के लिए मेडिकल कॉलेज आना पड़ता है।</p>
<p><strong>प्राइवेट सेंटरों में जाने को मजबूर</strong><br />एमबीएस अस्पताल में एमआरआई कराने आए मरीज किशनलाल गुर्जर ने बताया कि उसे 1 माह आगे की तारीख मिली है गर्दन में दर्द है। वेटिंग वजह से प्राइवेट में जांच कराई। मेरे जैसे कई लोग वेटिंग की वजह से गरीब होने के बावजूद प्राइवेट सेंटरों पर जाकर एमआरआई, सोनोग्राफी करा रहे है। जानकारी के अनुसार आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद करीब 15-20 मरीज रोजाना बाजार में एमआरआई कराने पहुंच रहे हैं।</p>
<p>एमआरआई मशीन के लिए बजट कम है। इसके लिए बैक से लोन लेने के प्रयास किए जा रहे है। इसके अलाव बजट को लेकर उच्च स्तर पर बात चल रही है। <br /><strong>-डॉ. संगीता सक्सेना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>एमबीएस अस्पताल एमआरआई मशीन के लिए डेढ साल पहले साढे बारह करोड रुपए बजट स्वीकृत हुआ था लेकिन ये बजट मशीन खरीदने के लिए अपर्याप्त होने से और बजट स्वीकृत के लिए लिखा है। डीएमएस को फंड के लिए लिखा है। इसके अलावा बैक से भी इसको लेकर प्रयास किया जा रहा है। प्रयास है कि जल्द से जल्द एमबीएस अस्पताल में मशीन लगे इसके  हर संभव प्रयास किए जा रहे है। फंड के लिए वार्ता चल रही है।<br /><strong>-डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 14:08:40 +0530</pubDate>
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