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                <title>smart city project - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>साइकिल शेयरिंग योजना बंद, कबाड़ हुई साइकिलें</title>
                                    <description><![CDATA[कम्पनी द्वारा निगम को राशि नहीं देने पर एक बार कम्पनी की साइकिलों को भी जब्त किया गया था। यह योजना नगर निगम के पिछले बोर्ड के समय शुरु की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cycle-sharing-scheme-stopped--bicycles-became-junk/article-115956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(1)39.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में शुरु की गई साइकिल शेयरिंग योजना के बंद होते ही योजना के तहत उपयोग ली जा रही साइकिलें कबाड़ हो गई हैं। वर्तमान में उनमें से कई साइकिलें दशहरा मैदान में ढेर में धूल खा रही हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में साइकिल शेयरिंग योजना शुरु की गई थी। इस योजना के तहत नगर निगम की ओर से शहर में विशेष रूप से नए कोटा क्षेत्र में साइकिल स्टैंडों के लिए शेड तैयार करवाए गए थे। जहां निजी कम्पनी के माध्यम से किराए पर साइकिलें दी जाती थी।  कोचिंग स्टूडेंट व आमजन इन स्टैंडों से साइकिल निर्धारित समय के लिए किराए पर लेकर उनका उपयोग कर रहे थे। जानकारी के अनुसार शहर में निगम की ओर से करीब 14 केन्द्र बनाए गए थे। जिनमें तलवंडी व जवाहर नगर समेत कई जगह शामिल थी। इस योजना के तहत निजी कम्पनी द्वारा निगम को राजस्व दिया जाता था। लेकिन पूर्व में कम्पनी द्वारा निगम को राशि नहीं देने पर एक बार कम्पनी की साइकिलों को भी जब्त किया गया था। यह योजना नगर निगम के पिछले बोर्ड के समय शुरु की गई थी। </p>
<p><strong>योजना का समय हुआ पूरा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के राजस्व अधिकारी विजय अग्निहोत्री ने बताया कि साइकिल शेयरिंग योजना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शुरु की गई थी। यह योजना दस साल के लिए थी। योजना का समय पूरा होते ही यह बंद हो गई।  योजना के तहत किराए पर देने वाली साइकिलें निजी कम्पनी की थी। लेकिन जगह नगर निगम ने दी रखी थी। जब योजना का समय पूरा हो गया  तो निगम ने उन जगहों को खाली कराया। उन जगहों का अन्य कार्य में उपयोग किया जाना है। ऐसे में कम्पनी द्वारा जब साइकिलें नहीं उठाई गई तो उन्हें निगम ने एक निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखवा दिया। दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच के पीछे ये वही साइकिलें रखी हुई है। पिछले कई महीने से रखी होने से उन साइकिलों पर धूल जम गई होगी। इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि यह योजना निगम के माध्यम से संचालित की गई थी। निजी कम्पनी द्वारा निगम को निर्धारित राशि नहीं देने पर निगम ने साइकिलें जब्त की थी। संभावना है कि ये वही जब्त साइकिलें होंगी। ये साइकिलें नगर निगम की नहीं कम्पनी की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 16:24:46 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा बना कागजों में स्मार्ट सिटी, हकीकत में कौसों दूर</title>
                                    <description><![CDATA[8 साल से चल रहा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट मार्च में होगा पूरा 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-became-a-smart-city-on-paper--miles-away-from-reality/article-95945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/kota-bana-kagjon-mein-smart-city,-hakitkat-se-kauson-dur...kota-news-26.11.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। केन्द्र सरकार द्वारा शुरु किए गए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कोटा में भी करोड़ों रुपए के विकास कार्य तो करवाए गए लेकिन उसके बाद भी कोटा सिर्फ कागजों में ही स्मार्ट बन सका हकीकत में नहीं। 8 साल से चल रहा प्रोजेक्ट 4 माह बाद मार्च में पूरा हो जाएगा। उसके बाद भी अभी 83 करोड़ के 5 काम बाकी है। केन्द्र सरकार द्वारा देश के कई प्रमुख शहरों का स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चयन किया गया था। जिनमें वर्ष 2016 में राजस्थान के 4 जिलों जयपुर, उदयपुर, अजमेर के अलावा कोटा का भी चयन किया गया था। जिसके तहत कोटा को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए बजट भी दिया गया। उस बजट से कोटा में काम भी हुए। जिसमें से अधिकतर काम तो पूरे  हो गए। अब प्रोजेक्ट पूरा होने वाला है। लेकिन अभी भी कुछ काम बाकी है और कोटा शहर स्मार्ट सिटी नहीं बन सका है। </p>
<p><strong>1113 करोड़ के 70 काम थे</strong><br />स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कोटा में विकास कार्य करवाने के लिए अलग से एक  विभाग बनाया गया। जिसमें अधिकारी व कर्मचारी भी नियुक्त किए गए। वर्ष 2016 से इस मिशन के तहत काम किए जा रहे है। मिशन के तहत विभिन्न चरणों में 1113 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे। जिसमें 70 काम करवाए जाने थे। उनमें से 65 काम पूरे हो चुके है। जबकि 83 करोड़ के 5 काम बाकी रह गए। </p>
<p><strong>मिशन के तहत हुए ये काम</strong><br />स्मार्ट सिटी मिशन के तहत भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकारों के समय में काम करवाए गए। दशहरा मैदान के फेज एक का काम भी स्मार्ट सिटी के तहत हुआ था। जिसमें इस मैदान को दिल्ली की तर्ज पर बनाने का प्रयास किया गया था। वहीं पिछली कांग्रेस सरकार के समय में शहर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत सैकड़ों करोड़ रुपए से अंडरपास व फ्लाईओवर तो बनाए गए। साथ ही एमबीएस  व जे.के. लोन अस्पताल की नए ओपीडी  ब्लॉक का निर्माण कार्य कराया गया। नयापुरा विवेकानंद चौराहा व अदालत चौराहा  समेत अन्य चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण कार्य कराए गए। कचरा ट्रांसफर स्टेशन व जलदाय विभाग के काम भी हुए। सर्किट हाउस की किचन व हॉल को भी नया रूप दिया गया। </p>
<p><strong>ये काम भी होने है</strong><br />स्मार्ट सिटी मिशन के तहत ही दशहरा मैदान के फेज दो पुराने पशु मेला स्थल, एमबीएस अस्पताल की नई मोर्चरी, जलदाय विभाग टंकी का काम, साइंस सेंटर व अभय कमांड सेंटर के विस्तार का काम किया जाना है। इसमें से एमबीएस मोर्चरी व पानी की टंकी का काम चल रहा है। साइंस सेटर का काम कुछ समय पहले ही शुरु  हुआ है। अभय कमांड के विस्तार का और दशहरा मैदान के फेज दो का काम अभी तक शुरू नहीं हुए है। </p>
<p><strong>जून में पूरा होना था, मार्च तक बढ़ाया कार्यकाल</strong><br />केन्द्र सरकार द्वारा शुरू किए गए स्मार्ट सिटी मिशन का कार्यकाल गत वर्ष जून में ही पूरा होना था। लेकिन कोटा समेत कई अन्य जिलों में काम शेष रहने पर केन्द्र सरकार द्वारा इसका कार्यकाल 9 माह के लिए बढ़ा दिया गया। जिससे अब इसका कार्यकाल चार माह बाद मार्च 2025 में पूरा होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा में स्मार्ट सिटी के तहत 1113 करोड़ के 70 काम स्वीकृत हुए थे। जिनमें से 65 काम पूर्व में ही पूरे हो चुके है। शेष 5 में से एक साइंस सेंटर का काम कुछ समय पहले शुरु हुआ है जिसे पूरा होने में दो से ढाई साल का समय लगेगा। जबकि मोर्चरी व पानी की टंकी का काम चल रहा है। जिसके मार्च तक पृरा होने की संभावना है। शेष दो काम अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। उन्हें संबंधित विभाग देख रहे है। प्रोजेक्ट पूरा होते ही विभाग में लगे अधिकारी व कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में भेज दिया जाएगा। <br /><strong>-के.एम. शर्मा, अधिशाषी अभियंता स्मार्ट सिटी मिशन कोटा </strong></p>
<p>दशहरा मैदान के फेज दो का काम पूर्व में ही होना था। लेकिन उस पर कई बार बदलाव हो चुका है। गत दिनों लोकसभा अध्यक्ष ने कोटा प्रवास के दौरान दशहरा मैदान का निरीक्षण कर वहां विकास की प्रोजेक्ड डिजाइन तैयार करवाई जा रही है। दिल्ली की फर्म द्वारा डिजाइन बनाने का काम किया जा रहा है। उसके बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएग़ी। <br /><strong>-ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 16:04:16 +0530</pubDate>
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                <title>टाट में पैबंद की तरह हैं चारदीवारी के सहारे अतिक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[ नगर निगम की ओर से हर साल दशहरा मेले के अवसर पर अतिक्रमियों को यहां से हटा भी दिया जाता है। लेकिन कुछ दिन बाद फिर से वही पुरानी स्थिति हो जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/encroachments-along-the-boundary-wall-are-like-a-patch-on-a-sack/article-88173"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/taat-mein-paiband-ki-tarh-hai-chardiwari-k-sahare-atikraman...kota-news-20.08.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हुए दशहरा मैदान की चार दीवारी के सहारे हो रहा अतिक्रमण टाट में पेबंद की तरह लग रहा है। दशहरा मेले के दौरान हर साल अतिक्रमण हटाने के बाद अतिक्रमी फिर से वहां आ धमकते हैं। जिनमें से कई ने तो स्थायी डेरा तक डाला हुआ है।  दशहरा मैदान को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर बनाने का प्रयास किया गया था। जिस पर करीब 80 करोड़  रुपए से अधिक का खर्चा भी हुआ । पिछले कई सालों से इस मैदान में दशहरा मेला भर रहा है। हालांकि लोगों का कहना है कि जिस तरह से पहले वाले खुले मैदान में मेला भरता था तो उससे मेले का अहसास होता था लेकिन चार दीवारी में कैद होने के बाद मेले का स्वरूप ही बिगड़ गया है। वहीं दूसरी तरफ दशहरा मैदान के चारों तरफ हो रहा अतिक्रमण टाट में पेबंद की तरह से चुभ रहा है। नगर निगम की ओर से हर साल दशहरा मेले के अवसर पर अतिक्रमियों को यहां से हटा भी दिया जाता है। लेकिन कुछ दिन बाद फिर से वही पुरानी स्थिति हो जाती है। चार दीवारी के सहारे हो रहे अतिक्रमण से दशहरा मेले के दौरान लगने वाली दुकानों, लोगों के आवागमन और कानून व्यवस्था बनाए रखने तक में समस्या का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>कबाड़ी ने भी किया स्थायी कब्जा</strong><br />इसी तरह से आशापुरा माताजी मंदिर के पास दशहरा मैदान की चार दीवारी के सहारे खाली जगह पर पिछले कई सालों से एक कबाड़ी ने कब्जा किया हुआ है। वह यहां ताल ठोककर अपना व्यवसाय कर रहा है। जिसे पूर्व में निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने हटाने का प्रयास किया था तो विवाद हो गया था। मारपीट तक की नौबत आ गई थी। उसके बाद उसे किसी ने छेड़ा तक नहीं। जिससे उसके हौंसले इतने अधिक बुलंद हैं कि वह धीरे-धीरे अपना काम फेलाता जा रहा है। जिससे उस जगह पर गंदगी भी फेली रहती है। मैदान की दुर्दशा भी हो रही है। लेकिन निगम अधिकारी उसे हटा तक नहीं पा रहे हैं। वही छप्पन भोग के सामने व कबाड़ी के पास सीवरेज के सीमेंट के पाइप भी डाले हुए हैं। </p>
<p><strong>खाना बदोश परिवारों की स्थायी टापरियां</strong><br />नगर निगम और कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से वैसे तो शहर में हो रहे अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन नगर निगम की नाक के नीचे निगम कार्यालय के नजदीक ही दशहरा मैदान की चार दीवारी के सहारे हो रहा स्थायी अतिक्रमण अधिकािरयों को नजर नहीं आ रहा। सीएडी चौराहे पर निगम कार्यालय के गेट के पास से अम्बेडकर भवन के सामने की तरफ फुटपाथ पर व दशहरा मैदान की चार दीवारी के सहारे कई खाना बदोश परिवार रह रहे हैं। शुरुआत में तो ये सिर्फ टेंट लगाकर ही रह रहे थे। लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते इन परिवारों ने स्थायी टापरियां बना ली हैं। बांस बल्लियों व तिरपाल से स्थायी टापरियां बना ली हैं। साथ ही उनमें खाना बनाने से लेकर पूरा घर सा बसा रखा है। यह स्थिति एक दो परिवारों की नहीं वरन् करीब एक दर्जन परिवार यहां इसी तरह से रह रहे हैं।  अम्बेडकर भवन के सामने से किशोरपुरा थाने के सामने तक इन परिवारों के अतिक्रमण की हालत यह है कि फुटपाथ पर तो टापरियां बनाई हुई हैं। जबकि सड़क के रास्ते में पलंग डालकर रात ही नहीं दिन के समय भी सोते रहते हैं। जिससे रास्ता बाधित होने के साथ ही गंदगी भी फेली रहती है। इतना ही नहीं इन परिवारों के लोग अपने कपड़े डिवाइडर के प्लांटर व लोहे की रैलिंग पर सुखा रहे हैं। जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों तक को शर्म महसूस होने लगती है। साथ ही ये बुरे भी लगते हैं। लेकिन निगम अधिकारियों की अनदेखी से इन खाना बदोश परिवारों को हौंसले इतने अधिक बुलंद हैं कि आम व्यक्ति तो इनके खिलाफ बोल तक नहीं सकता। यदि कोई बोलता है तो ये उससे झगड़ा करने तक पर उतारू हो जाते हैं। </p>
<p><strong>फुटकर से लेकर थड़ियों तक का अतिक्रमण</strong><br />इनके अलावा चार दीवारी के सहारे किशोरपुरा थाने के सामने, तुलसी माता मंदिर के पास,  छप्पन भोग के सामने और शक्ति नगर की तरफ भी बड़ी संख्या में  फुटकर सामान बेचने वालों और थड़ी वालों ने अतिक्रमण किया हुआ है। उनमें भी कई ने तो स्थायी निर्माण तक कर रखा है। जिससे पूरे मैदान की दुर्दशा हो रही है। हालत यह है कि जिस रास्ते से भगवान लक्ष्मी नारायण की सवारी मैदान में प्रवेश करती है।  उस गेट तक पर अतिक्रमण हो रहा है। </p>
<p><strong>यही हाल फेज दो पुराना पशु मेला स्थल का</strong><br />दशहरा मैदान फेज एक की तरह ही फेज दो पुराना पशु मेला स्थल के बाहर भी फुटपाथ पर ही नहीं सर्विस रोड तक पर अतिक्रमण हो रहा है। यहां सामान बेचने वाले टापरियां बनाकर रह रहे हैं। कई लोगों ने तो मैदान के अंदर ही अतिक्रमण किया हुआ है। कुछ समय पहले इस मैदान के बाहर सर्विस रोड को पैदल व दो पहिया वाहनों के लिए खाली कराया गया था। लेकिन वहां हालत यह है कि अब वहां से दो पहिया वाहन तो दूर पैदल तक निकलना मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>चार पहिया वाहनों की पार्किंग</strong><br />चार दीवारी के सहारे चारों तरफ चार पहिया वाहनों ने पार्किंग तक बना रखाी है। आस-पास के लोग सड़क पर चार दीवारी के सहारे अपने वाहन खड़े कर रहे हैं। जिससे कई बार रास्ता तक बाधित हो जाता है। </p>
<p><strong>इस बार फिर करनी पड़ेगी मशक्कत</strong><br />नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते को इस  बार फिर से अतिक्रमण हटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी। इस बार 3 से 28 अक्टूबर तक दशहरा मेले का आयोजन होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> झूला मार्केट की तरफ से चार दीवारी को आगे बढ़ाया जा रहा है। जिस जगह पर कबाड़ी का अतिक्रमण  है  वहां दीवार बनने से उसे स्थायी रूप से हटाया जाएगा।  वहीं मेले से पहले दशहरा मैदान के आस-पास से सारा अतिक्रमण हटाया जाएगा। जिससे दुकानदारों व आमजन को किसी तरह की कोई समस्या नहीं होगी। खाना बदोश परिवारोंको जगह नहीं मिलने से वे मेले के बाद वापस आकर डट जाते हैं। इसका स्थायी समाधान नहीं है। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, अध्यक्ष दशहरा मेला व अन्य उत्सव आयोजन समिति </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Aug 2024 17:55:49 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों के निर्माण में कमी का खामियाजा भुगत रही जनता</title>
                                    <description><![CDATA[मरम्मत कार्य के लिए कई दिन तक रास्ता बंद करने से ट्रैफिक हो रहा बाधित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/public-is-bearing-the-brunt-of-the-deficiency-in-the-construction-of-crores/article-83740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर को ट्रैफिक सिग्नल फ्री  बनाने और यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पिछली कांग्रेस सरकार में नगर विकास न्यास द्वारा बनाए गए  करोड़ों रुपए के अंडरपास में रही कमियों का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। बार-बार जाली टूटने व बरसात में पानी भरने की समस्या का आमजन को सामना करना पड़ रहा है। वहीं कमियों को सही करने के दौरान कई दिन तक रास्ता बंद रहने से ट्रैफिक बाधित होने व जाम की समस्या से भी लोगों को दो चार होना पड़ रहा है। नगर विकास न्यास की ओर से शहर में तीन बड़े अंडरपास बनवाए गए। जिनमें गोबरिया बावड़ी चौराहा, एयरोड्राम चौराहा व अंटाघर चौराहे के अंडरपास शामिल हैं। तीनों अंडरपास निर्माण पर करीब सौ करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है। उसके बाद भी उनमें सड़क से लेकर पानी निकासी में तकनीकी व निर्माण खामियां रह गई। जिससे बार-बार सीपेज का पानी आने, नाली की जालियां टूटने की समस्या तीनों अंडरोपास में रही है। तोनों अंडरपास को करीब डेढ़ से दो साल में बनाकर तैयार तो कर दिया गया लेकिन जनता को राहत मिलने के साथ ही परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>एयरोड्राम अंडरपास की हो रही मरम्मत</strong><br />एयरोड्राम अंडरपास के नाली की जाली टूटने पर उसकी मरम्मत का काम किया जा रहा है। जिसके लिए कई दिन से एक तरफ का रास्ता बंद किया हुआ है। इसके बाद दूसरी तरफ का काम करने पर वहां का रास्ता बंद किया जाएगा। जिससे करीब एक महीने तक जनता को ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ेगा।  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 50 करोड़ की लागत से इस अंडरपास का निर्माण कराया गया है। साथ ही सिके सौन्दर्यीकरण पर भी 20 करोड़ रुपए खर्च किए गए। उसके बाद भी यहां से ट्रैफिक बिना किसी समस्या के नहीं निकल पा रहा है। यहां बार-बार जाली टूटने पर उसकी कई बार मरम्मत करवाई गई लेकिन स्थायी समाधान नही  हो सका था।  जिससे अब उसका स्थायी समाधान किया जा रहा है।</p>
<p><strong>गोबरिया बावड़ी अंडरपास में भी आई थी समस्या</strong><br />सीपेज और पानी निकासी की सही व्यवस्था नहीं होने से जाली टूटने की समस्या इससे पहले गोबरिया बावड़ी अंडरपास में भी हो चुकी है।  करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से बने इस अंडरपास का उद्घाटन होने के बाद ही यहां नाली की जालियां टूटने, सड़क में गड्ढ़े होने समेत कई समस्या होने लगी थी। जिसे सही करने के लिए यहां पूरी सीसी रोड को खोदकर दोबारा से बनाया और जालियों व सीपेज को सही किया गया। झालावाड़ रोड हाइवे होने के बावजूद यहां अंडरपास से ट्रैफिक को कई दिन तक बंद रखा गया था। </p>
<p><strong>अंटाघर अंडरपास में भी है समस्या</strong><br />नयापुरा स्थित अंटाघर अंडरपास में भी इसी तरह की समस्या बनी हुई है। यहां भी अंडरपास के बीच पानी निकासी की नाली की जाली टूटी हुई है। साथ ही बरसात के समय यहां पानी भरने की समस्या रहती है। जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 25 करोड़  रुपए की लागत से इस अंडरपास का निर्माण कराया गया है। हालांकि शुरुआत में यहां ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने व नाला जाम होने से मोटर लगाकर पानी की निकासी की गई थी।   बारां रोड का व्यस्त अंडरपास होने से आने वाले समय में यहां भी मरम्मत के लिए रास्ता बंद किए जाने की संभावना है। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।  </p>
<p><strong>गलती किसी की खामियाजा भुगत रही जनता</strong><br />पिछली सरकार में शहर में निर्माण व विकास कार्य तो हुए। लेकिन अंडरपास ट्रैफिक की समस्या के समाधान के लिए बनाए गए थे। उस समय करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी इनमें इंजीनियरिंग की कमी रही या निर्माण दोष रहा। संबंधित संवेदक व अधिकारियों की गलती का खामियाजा जनता को तो भुगतना पड़ ही रहा है। साथ ही इनकी मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट भी खर्च करना पड़ रहा है। जिससे जनता के धन की बर्बादी हो रही है। <br /><strong>- गिरीराज महावर, डीसीएम</strong></p>
<p>अंडरपास निर्माण संबंधी कार्य करने में अधिकारियों व इंजीनियरों की गलती है। काम होने के दौरान उसकी सही ढंग से मॉनिटरिंग नहीं की गई। जिससे जल्दबाजी में किए गए काम के कारण अब समस्या हो रही है। उस समस्या से जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। काम स्थायी हो साथ ही जनता के धन की बर्बादी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। <br /><strong>- महिपाल सिंह, कंसुआ</strong></p>
<p><strong>चीज बनी है तो अब मरम्मत तो करानी पड़ेगी-धारीवाल</strong><br />गोबरिया बावड़ी अंडरपास हो या एयरोड्राम अंडरपास। सभी अंडरपास का निर्माण ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए किया गया था। कई बार जगह की स्थिति के कारण निर्माण करते समय तो उसका पता नहीं चलता बाद में ट्रैफिक निकलने पर समस्या का पता चला। बेस्ट कम्पनी द्वारा निर्माण किया गया है। फिर भी जो कमी  सामने आई उसे सही कर स्थायी समाधान गोबरिया बावड़ी में किया गया है। अब एयरोड्राम अंडरपास में भीे किया जा रहा है। पक्का काम करने में समय लगता है। ऐसे में कुछ दिन परेशानी हो सकती है लेकिन बार-बार की समस्या से निजात  मिल जाएगी। <br /><strong>- शैलेन्द्र जैऩ एक्सईएन, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>
<p>अंडरपास निर्माण में कोई कमी नहीं रही। अच्छे से अच्छा काम करवाया गया है। अंडरपास  से भारी वाहन निकलने व लगातार वाहनों के निकलने से हो सकता है कोई टूटफूट हो गई होगी। कोई भी चीज बनती है तो एक समय बाद उसकी मरम्मत भी करनी पड़ती है। अंडरपास निर्माण में तकनीकी खामी भी नहीं रही। एक समय बाद मरम्मत तो करनी पड़ती है। संबंधित विभाग व सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। <br /><strong>- शांति धारीवाल, पूर्व मंत्री व विधायक कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 17:17:39 +0530</pubDate>
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                <title>28 करोड़ का बजट लाल फीते में, पशु मेला मैदान अब भी वीरान</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने पशु मेला स्थल के विकास के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब पांच साल पहले 28 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया था। जिसमें थियेटर, पूल समेत कई विकास करवाए जाने थे। लेकिन इसी बीच सरकार बदल गई और विकास की योजना अधर झूल में अटक गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/28-crore-budget-in-red-tape--animal-fair-grounds-still-deserted/article-42332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/laal-feete-mein-28-crore-ka-bajat,-pashu-mela-maidan-ab-bhi-suna...kota-news-10-04-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दशहरा मैदान का तो विकास किया जा चुका है। लेकिन दशहरा मैदान के ही द्वितीय फेज पुराने पशु मेला स्थल के लिए 28 करोड़ का बजट होने के बावजूद उसका विकास नहीं हो पा रहा है। जिससे उस पर बार-बार अतिक्रमण हो रहा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दशहरा मैदान का करीब 88 करोड़ रुपए की लागत से विकास किया गया है। जिसे दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर विकसित किया गया है। पहले यह मैदान कच्चा था जिसे पूरा पक्का कर दिया गया है। दुकानें भी पक्की बना दी गई है। यहां हर साल दशहरा मेले का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही दशहरा मैदान का हिस्सा है पुराना पशु मेला स्थल। जिसका भी विकास किया जाना है। फेज एक में तो दशहरा मैदान का विकास हुआ जबकि फेज दो में पुराने पशु मेला स्थल का विकास किया जाना है। इस मैदान में दशहरा मेले के दौरान पशु मेला लगता था। लेकिन पिछले कई साल से पशु मेला तो नहीं लग रहा। जिसे यह मैदान खाली पड़ा हुआ है। हालत यह है कि कई साल बाद भी अभी तक न तो इस मैदान का विकास किया गया और न ही इसका कोई उपयोग हो रहा है। नतीजा इस मैदान पर बार-बार अतिक्रमण हो रहा है।  कभी घुमंतु जाति के लोग यहां टापरियां बनाकर रहने लगते हैं तो कभी पशु पालक पशुओं का बाड़ा बना लेते हैं। </p>
<p><strong>सीवरेज पाइप डालकर किया कब्जा</strong><br />वर्तमान में यहां कुछ जगह पर तो टापरियां बनाकर अतिक्रमण किया हुआ है। जबकि अधिकतर खाली जगह पर सीवरेज के पाइप डालकर कब्जा किया हुआ है। दशहरा मेला आयोजन से पहले भी यहां इसी तरह से पाइप पड़े हुए थे जिन्हें हटवाकर खाली करवा दिया था। लेकिन एक बार फिर से यहां पाइप डालकर कब्जा किया हुआ है। </p>
<p><strong>चार दीवारी और पार्किंंग स्थल</strong><br />पुराने पशु मेला स्थल के विकास के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब पांच साल पहले 28 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया था। जिसमें थियेटर, पूल समेत कई विकास करवाए जाने थे। लेकिन इसी बीच सरकार बदल गई और विकास की योजना अधर झूल में अटक गई। हालत यह है कि करीब पांच साल बाद भी इस मैदान का न तो विकास हो सका है और न ही उपयोग। सिर्फ उस समय में मैदान की चार दीवारी की गई और पीछे की तरफ पार्किंग बनाई गई थी। हालांकि उस पार्किंग का उपयोग नगर निगम के वाहन खड़े करने में किया जा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दशहरा मैदान के पुराने पशु मेला स्थल का विकास द्वितीय फेज के तहत किया जाना है। इसके लिए  पिछली सरकार के समय में योजना बनी थी। जिसका 28 करोड़ रुपए का बजट भी प्रस्तावित किया गया था। वह बजट अभी तक भी रखा हुआ है। साथ ही विकास की योजना भी होल्ड की हुई है। पशु मेला स्थल पर अस्थायी अतिक्रमण है। जिसे बार-बार हटाया भी जाता है। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईन, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Apr 2023 14:46:04 +0530</pubDate>
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                <title>अपने ही शहर की सुंदरता पर लोग लगा रहे ग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[स्मार्ट सिटी कोटा शहर को  पर्यटन नगरी बनाने के लिए नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत  करीब 45 सौ  करोड़ रुपए से विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। लेकिन उन विकास कायों की सुंदरता को असामाजिक तत्व ग्रहण भी लगा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-are-eclipse-on-the-beauty-of-their-own-city/article-40177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/apne-hi-shahar-ki-sundarta-par-log-laga-rahe-grahan...kota-news..18.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> दृश्य 1</strong>- जेडीबी कॉलेज से बड़ तिराहे के बीच सड़क किनारे फुटपाथ पर नगर विकास न्यास ने आमजन की सुविधा के लिए लकड़ी की बैंचें लगाई हैं। लेकिन असामाजिक तत्वों ने उन बैचों को लगते ही तोड़ना शुरू कर दिया है।  कई बैंचों की लकड़यों को उखाड़ना शुरू कर दिया है। लेकिन इसकी जानकारी आमजन द्वारा न्यास अधिकारियों को देने की फिलहाल कोई सुविधा नहीं है। यदि न्यास को समय पर जानकारी मिलती तो वह इनकी सुरक्षा के इंतजाम भी करता। </p>
<p><strong>दृश्य 2 </strong>- नगर विकास न्यास ने शहर को स्मार्ट बनाने के साथ ही सड़कें रोशन हो सके। इसके लिए आकर्षक लाइटें लगाई हैं। लेकिन हालत यह है कि नशेड़ियों ने अपनी 50 रुपए की एक पुड़िया के लिए उन लाइटों के खम्बों के पैनल ही तोड़कर चोरी करना शुरू कर दिया है। लेकिन इसकी जानकारी न्यास अधिकारियों तक नहीं पहुंच पा रही है। </p>
<p><strong>दृश्य 3</strong> - न्यास ने करोड़ों  रुपए की लागत से गोबरिया बावड़ी समेत कई अंडरपास तो बना दिए। उनमें वाहन चालकों की सुविधा के लिए लाइटें भी लगाई। लेकिन अनदेखी के चलते उनमें से अधिकतर लाइटें बंद हैं। जिससे लोगों को अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है। कई दिन से बंद इन लाइटों की जानकारी भी अधिकारियों को नहीं है। इसका कारण अधिकारियों तक सूचना पहुचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। </p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं। शहर में ऐसे कई विकास कार्य हैं जिन्हें न्यास ने हाल ही में कराया है। इन विकास कार्यों की देश भर में ब्रांडिंग बी की जा रही है। उन पर हजारों करोड़ रुपए भी खर्च किए हैं। लेकिन उन विकास कार्यों में ही रही छोटी-छोटी कमियों व टूट-फूट की समय पर सूचना अधिकारियों को नहीं मिल पा रही है। साथ ही समय पर उनकी मरम्मत नहीं होने से वे दुर्दशा का शिकार भी हो रहे हैं। समयानुरूप मेंटीनेंस नहीं होने से यह कुछ ही समय में भंगार हो जाएंगी। इतना ही नहीं शहर में ऐसे कई अन्य विकास कार्य हैं जहां छोटी-छोटी कमियां हैं। जिनकी जानकारी तो आमजन को है लेकिन वे उन कमियों को अधिकारियों तक समय पर नहीं पहुंचा पा रहे हैं। जिससे जनप्रतिनिधियों या समाचार पत्रों के माध्यम से ही अधिकारियों को उन कमियों की जानकारी मिल पा रही है। जिससे उन्हें सही करवाने में समय भी लग रहा है। एरोड्राम अंडरपास  की जाली कई दिन तक खराब रहने से सीपेज का गंदा पानी अंडरपास में भरा रहा। अधिकारियों की जानकारी में आने पर उसे कई दिन बाद सही कराया गया। जबकि सैकड़ों लोग रोजाना उस कमी को देख रहे थे लेकिन उनके पास उस सूचना को अधिकारियों तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में आमजन की भागीदारी विकास कार्य में होना आवश्यक है। जिससे ये लम्बे समय तक सुरक्षित रह सके। सीबी गार्डन से जेडीबी कॉलेज तक रोड लाइटें तो लगा दी लेकिन उनमें से अधिकतर रात के समय बंद रहने से वहां अंधेरा रहता है। धानमंडी के सामने  मेन रोड पर अधिकतर लाइटें बंद हैं जिससे वहां रात के समय अंधेरा रहता है। </p>
<p><strong>सुंदरता में ग्रहण लगा रहे असामाजिक तत्व</strong><br />स्मार्ट सिटी कोटा शहर को  पर्यटन नगरी बनाने के लिए नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत  करीब 45 सौ  करोड़ रुपए से विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। लेकिन उन विकास कायों की सुंदरता को असामाजिक तत्व ग्रहण भी लगा रहे हैं। ऐसे में विकास कार्यों की सुविधा में कमी होने पर अधिकारियों को जानकारी देने की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि विकास कार्यों की सुविधा में कमी की जानकारी ऐप के माध्यम से देने की व्यवस्था कर जन भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।</p>
<p><strong>एप या सोशल मीडिया ग्रुप बनाया जाए</strong><br />नगर विकास न्यास ने शहर में विकास के नए-नए काम करवाए हैं। लेकिन उनकी सही ढंग से मॉनिटरिंग व मेंटेनेंस भी होनी चाहिए। वरना कुछ समय बाद उनकी दुर्दशा हो जाएगी। विकास कार्यों में कमी होने पर उसकी जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए न्यास का एक ऐप या सोशल मीडिया ग्रुप होना चाहिए। जिस पर फोटो समेत सूचना दी जा सके। जिससे वह समय पर ठीक करवाई जा सके।<br /><strong>-राजेश गौतम, तलवंडी</strong></p>
<p>अभी तो अंडरपास, फ्लाई ओवर, चौराहे, पार्कों के काम हुए हैं। जबकि आने वाले समय में रिवर फ्रंट व आॅक्सीजोन जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी तैयार हो रहे हैं। वहां भी हजारों लोगों का आवागमन होने से वहां भी इस तरह की गड़बड़ियां होंगी। असामाजिक लोग इन्हें तोड़ फोड़ जाएंगे।  लेकिन इसकी  जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने का अभी कोई साधन नहीं है। <br /><strong>-पारस राज, एडवोकेट </strong></p>
<p><strong>न्यास का वाट्सअप ग्रुप बने</strong><br />बरसों बाद कोटा में इतने अधिक विकास कार्य हुए हैं। लेकिन कुछ असामाजिक तत्व उन विकास कार्यों को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं चूक रहे। विशेष तौर पर स्मैकची व चोर अधिक खतरनाक हो रहे हैं। साथ ही विकास कार्यों में कोई टूटफूट हो तो उसकी जानकारी आमजन अधिकारियों को देकर अपनी भागीदारी निभाए। इसके लिए  न्यास का वाट्सअप ग्रुप जारी कर उसे अधिक से अधिक प्रचारित किया जाए। उस ग्रुृप पर प्राप्त सूचनाओं पर कार्यवाही भी होगी तो जनता की भागीदारी बढ़ेगी। <br /><strong>-आनंद शर्मा, भीमगंजमंडी</strong></p>
<p><strong>जारी हों टोल फ्री नम्बर </strong><br />नगर विकास न्यास को भी अन्य विभागों की तरह ही टोल फ्री नम्बर जारी करना चाहिए। जिससे किसी भी तरह की सूचना लेनी व देनी हो तो आमजन उसपर फोन कर सके।  आमजन की भागीदारी विकास कार्यों में होगी तो वे लम्बे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं। <br /><strong>-सीमा खत्री, गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong>फिलहाल यह है न्यास की व्यवस्था</strong><br />शहर में न्यास द्वारा जितने भी विकास कार्य करवाए गए हैं चाहे चौराहे हों या अंडरपास व फ्लाई ओवर। उन सभी की मरम्मत व देखभाल के लिए निर्माणकर्ता कम्पनी व संवेदक से ओ एण्ड एम( किया हुआ है। 2 से 5 साल तक सबंधित फर्म व संवेदक को ही उनकी देखभाल करनी होती है।  </p>
<p>मेंटीनेंस में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए न्यास का एक वाट्सअप ग्रुप बनाया जाएगा। जिसका नम्बर शीघ्र ही सार्वजनिक किया जाएगा। साथ ही उस ग्रुप पर आने वाली सूचनाओं की मॉनिटरिंग के लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी भी लगाई जाएगी। जिससे वह संबंधित  इंजीनियर या अधिकारी तक उस सूचना को पहुंचा सके। जिस पर त्वरित र्कावाई कर उसे समय पर ठीक कराया जा सकेगा। <br /><strong>-राजेश जोशी, सचिव, नगर विकास न्यास</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-are-eclipse-on-the-beauty-of-their-own-city/article-40177</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Mar 2023 14:33:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्मार्ट सिटी की सूरत बिगाड़ रहे पोस्टर व विज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में स्थानों की जानकारी के लिए जगह-जगह पर संकेतक(गेंट्री बोर्ड) लगाए गए हैं।  हालत यह है कि उन गेंट्री बोर्ड तक विज्ञापनों से अटे हुए हैं। फिर चाहे वह जन्म दिन की बधाई के हो या किसी के स्वागत की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/posters-and-advertisements-spoiling-the-face-of-smart-city/article-38068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/smart-city-ki-surat-bigad-rahe-poster-aur-vigyapan..kota-news..23.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थानों व विकास व सौन्दर्यीकरण के कार्यों पर ही पोस्टर व विज्ञापन लगाकर शहर की सूरत बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। शहर में नगर विकास न्यास द्वारा व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जितने भी विकास कार्य करवाए गए हैं। उन सभी की सूरत पोस्टर व विज्ञापनों से बिगाड़ी जा रही है। दादाबाड़ी से केशवपुरा का फ्लाई ओवर हो या गुमानपुरा का फ्लाई ओवर। अनंतपुरा का फ्लाई ओवर हो या सिटी मॉल के सामने का एलिवेटेड रोड। छावनी की पुलिया हो या कोटड़ी का फ्लाई ओवर। शायद ही कोई सार्वजनिक जगह ऐसी होगी जहां किसी न किसी संस्था के पोस्टर व पम्पलेट चिपके हुए नहीं हो। फिर चाहे वह होटलों के विज्ञापन हो या कोचिंग संस्थान के, प्रतिष्ठान के हो या डॉक्टरों के। विज्ञापन लगाने वाले उन सार्वजनिक जगहों का उपयोग नि:शुल्क तो कर ही रह हैं। जबकि ऐसे स्थानों पर विज्ञापन लगाना गलत है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बने सिटी बस स्टॉप, तालाब की पाल, बिजली के पैनल बॉक्स और शहर के हर सार्वजनिक शौचालय व मूत्रालय में विज्ञापनों की भरमार है। यहां तक कि बोरखेड़ा  फ्लाई ओवर तो अभी निर्माणाधीन ही है। उसका निर्माण अभी चल ही है। उस तक के पिलर व दीवारों पर विज्ञापन चस्पा कर रखे हैं।  नगर निगम द्वारा सम्पती विरुपण अधिनिायम के तहत ऐसे लोगों व संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन निगम की ओर से अभी तक किसी के भी खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि निगम की ओर से पूर्व में कई संस्थाओं को नोटिस जरूर भेजे गए थे। साथ ही निगम ने ही अपने स्तर पर उन विज्ञापनों को हटवाया भी था।  लेकिन किसी भी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई नहीं  की। जिससे ऐसे लोगों के हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं। </p>
<p><strong>गेंट्री बोर्ड भी विज्ञापनों से अटे</strong><br />इतना ही नहीं शहर में स्थानों की जानकारी के लिए जगह-जगह पर संकेतक(गेंट्री बोर्ड) लगाए गए हैं। लेकिन हालत यह है कि उन गेंट्री बोर्ड तक विज्ञापनों से अटे हुए हैं। फिर चाहे वह जन्म दिन की बधाई के हो या किसी के स्वागत के।  इन बोर्ड पर विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ न्यास ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। वरन् स्वयं की टीम व मशीनरी लगाकर उन विज्ञापनों को हटाया जरूर था। जबकि न्यास में भी ऐसे लोगों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान है। </p>
<p><strong>कार्य योजना बनाई जा रही</strong><br />कोटा दक्षिण के उपायुक्त राजेश डागा ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाना गलत है। निगम द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही अनुमति लेकर विज्ञापन लगाए जा सकते हैं। बिना अनुमति के  और सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ निगम सख्त कार्रवाई करेगा। इसकी कार्ययोजना बनाई जा रही है।  </p>
<p><strong>महापौर ने दिए एफआईआर के निर्देश</strong><br />कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल ने एक दिन पहले निगम अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक ली थी। जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ सम्पति विरुपण अधिनियम के तहत एफआईआर तक दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Feb 2023 14:40:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नया कोटा बना पुराना, पुराना बन गया नया, अधिकतर चौराहों का हुआ विकास व सौन्दर्यीकरण </title>
                                    <description><![CDATA[नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में करीब 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। साथ ही पुराने शहर के चौराहों को भी इस तरह से सजाया गया है कि पुराना शहर नया दिखने लगा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-kota-became-old--old-became-new--development-and-beautification-of-most-of-the-intersections/article-35565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/naya-kota-bana-purana,-purana-bana-gaya-naya..kota-news..23.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पहले जहां सिर्फ कोटा शहर ही था। वहीं अब कोटा दो भागों में बट गया है। एक पुराना कोटा व दूसरा नया कोटा। विधानसभा व नगर निगम भी उसी के अनुरूप दो बन गई हैं। लेकिन शहर में हुए विकास व सौर्न्दीकरण को देखने से नया कोटा तो पुराना लगने लगा है और  पुराना कोटा नया दिखने लगा है। नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण के काम करवाए जा रहे हैं। विशेष रूप से चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण जिस तरह से कराया गया है। उन्हें देखकर नए कोटा शहर के चौराहों को भी विकास व सौन्दर्यीकरण की दरकार है। नए कोटा के लोगों का कहना है कि उनके यहां के चौराहों का भी विकास किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>पुराने कोटा के चौराहे सजे</strong><br />नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में करीब 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। जिनमें अधिकतर बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। लेकिन उनके साथ ही पुराने शहर के चौराहों को भी इस तरह से सजाया गया है कि पुराना शहर नया दिखने लगा है। शहर के प्रवेश विवेकानंद चौराहे  पर जिस तरह से पैडस्टल पर स्वमी विवेकानंद की विशाल मूर्ति लगाई गई है। उसके साथ ही नीचे की तरफ चारों दिशाओं में अलग-अलग मुद्राओं में विवेकानंद की मूर्ति आकर्षण का केन्द्र है। उसके साथ ही चौराहे के आस-पास के भवनों का सौन्दर्यीकरण व लाइटिंग की गई है। वह बाहर से आने वालों के लिए नयापन है। उसी तरह से अदालत चौराहे पर विनतनाम के सफेद मार्बल से बनाए गए हाथी व चौराहे का विकास व सौन्दर्यीकरण आकर्षण का केन्द्र है। </p>
<p><strong>एलईडी चौराहा बना कुन्हाडी का नाका चुंगी </strong><br />नदी पार कुन्हाड़ी में नाका चुंगी चौराहे का विकास कर उसे एलईडी चौराहा बनाया गया है।  घोड़े वाले बाबा चौराहे पर हाथी घोड़े लगाकर व लाइटिंग से की गई सजावट से यह रात के समय भव्यता दिखा रहा है। उसी तरह से जेल के सामने सैनिक सर्किल में ग्लोब पर सैनिक व उन्हें फूल देती बालिका आकर्षण से कम नहीं है। हालांकि सीएडी चौराहे का भी विकास व सौन्दर्यीकरण कर वहां कीर्ति स्तम्भ बनाया जा रहा है। </p>
<p><strong>नए कोटा के चौराहे बरसों से विकास को तरह रहे</strong><br />कहने को भले ही एरोड्राम के आगे का शहर नया कोटा कहलाता है। लेकिन उस क्षेत्र के अधिकतर चौराहों को देखने से वह पुराने कोटा जैसा लगता है। यहां के अधिकतर चौराहे बरसों से विकास की राह तांक रहे हैं। महावीर नगर तृतीय चौराहा हो या दादाबाड़ी का मेन चौराहा। दादाबाड़ी का छोटा चौराहा हो या बसत विहार का तीन बत्ती चौराहा। महावीर नगर विस्तार योजना का संतोषी नगर चौराहा हो या महावीर नगर विस्तार का श्रीराम सर्किल। विश्कर्मा नगर का चौराहा हो या आर.के. पुरम् श्रीनाथपुम् का चौराहा। मेडिकल कॉलेज के आगे का चौराहा हो या रंगबाड़ी का चौराहा। इसी तरह से डीसीएम चौराहा हो या रायपुरा चौराहा। यहां  पिछले कई सालों से एक रुपए का भी विकास कार्य नहीं हुआ है। </p>
<p><strong>यहां अंडरपास व फ्लाई ओवर बनाए</strong><br />शहर में एक ओर जहां चौराहों का विकास व सौनदर्यीकरण किया गया है। वहीं कई चौराहों पर अंडरपास व फ्लाई ओवर बनाकर उन्हें भी विकसित गया है। करोड़ों रुपए की लागत से  गुमानपुरा स्थित इंदिरा गांधी सर्किल पर फ्लाई ओवर, अंटाघर चौराहे पर अंडरपास, एरोड्राम चौराहे पर अंडरपास, गोबरिया बावड़ी चौराहे पर अंडरपास और अनंतपुरा चौराहे पर फ्लाई ओवर बनाए गए हैं। नदी पार कुन्हाड़ी में महाराणा प्रताप चौराहे पर फ्लाई ओवर बनाया है। गुमानपुरा   तिराहे पर इंदिरा गांधी की मूर्ति लगाकर गार्डन व माउंट बनाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>ट्रैफिक का दवाव, छोटे बने चौराहे</strong><br />नए कोटा के चौराहों के विकास व सौन्दर्यीकरण की आवश्यकता के बारे में लोगों का कहना है कि जिस तरह से पुराने शहर के चौराहों का विकास किया गया है। उसी तरह से नए कोटा के चौराहों का भी विकास होना चाहिए। कोटा दक्षिण से भाजपा पार्षद गोपाल राम मंडा का कहना है कि महावीर नगर तृतीय चौराहे पर ट्रैलिक का दबाव अधिक रहता है। यहां भी विकास किया जाना चाहिए। नए कोटा के चौराहों का सौन्दर्यीकरण हो लेकिन चौराहों को छोटा बनाया जाए। जिससे ट्रैफिक में सुविधा हो। </p>
<p>पार्षद गिर्राज महावर का कहना है कि डीसीएम व रायपुरा चौराहे से भारी वाहन निकलते हैं। फ्ैक्ड्रियों के श्रमिक एक साथ निकलने से ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है। रायपुरा, कैथून व बोरखेड़ा तक का ट्रेफिक यहां से निकल रहा है। लेकिन डीसीएम चौराहे पर ट्रफिक लाइटें होने के बाद भी नहीं चलती हैं। ऐसे में इन चौराहों के साथ ही कंसुआ तिराहे का भी विकास किया जाना चाहिए। किशोरपुरा निवासी अनीस मोहम्मद का कहना है कि दादाबाड़ी में चौराहे तो बने हुए हैं लेकिन वे चराहे जैसे नजर नहीं आते हैं। छोटा चौराहा व दादाबाड़ी तिराहे के चौराहों का भी विकास व सौन्दर्यीकरण किया जाए। लेकिन उन्हें इस तरह से बनाया जाए जिससे वे छोटे भी हों और ट्रैफिक में बाधा भी नहीं हो। पुराने शहर के बड़े-बड़े चौराहों की तरह नहीं हों। इस संबंध में नगर विकास न्यास के अधिकारियों का कहना है कि सभी चौराहों का विकास किया जाएगा। कुछ का काम पूरा हो गया है और कुछ का चल रहा है। अगले चरण  में शेष रहे चौराहों को भी विकास में शामिल किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jan 2023 15:31:17 +0530</pubDate>
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                <title>अब तीसरी आंख की जद में रहेगा दशहरा मैदान</title>
                                    <description><![CDATA[दशहरा मैदान की दुर्दशा के मुददे को दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 28 दिसम्बर को पेज तीन पर ‘फिर लगे गंदगी के ढेर, रैलिंग तोड़ी, होने लगी टूटफूट’ शीर्षक से समाचार भी प्रकाशित किया था। जिसमें दशहरा मैदान के बाद वहां सीसीटीवी कैमरे व गार्ड नहीं होने से भी इस तरह की घटनाएं होने की आशंका जताई थी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dussehra-maidan-will-now-be-in-the-control-of-the-third-eye/article-34021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/ab-teesari-aakh-ki-zad-mei-rahega-dussehra-maidan..kota-news..3.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत निर्मित दशहरा मैदान अब तीसरी आंख की जद में रहेगा। मैदान की सुरक्षा के लिए यहां सीसीटीवी लगाने के साथ ही सुरक्षा गार्ड बढ़ाए जाएंगे। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 80 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से दशहरा मैदान को प्रगति मैदान की तर्ज पर विकसित किया गया था।  इस मैदान में वैसे तो साल में एक बार दशहरा मेले का ही आयोजन होता है। उसके अलावा अधिकतर समय यह खाली ही रहता है। मैदान में मेले के दौरान तो सुरक्षा की दृष्टि से नगर निगम द्वारा मैदान में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं। लेकिन उसके बाद मैदान को भगवान भरोसे ही छोड़ दिया जाता है। ऐसी ही इस बार मेला समाप्त होने के बाद भी हुआ। मेला खत्म होने के बाद  मैदान से सीसीटीवी कैमरे भी हटा दिए गए। साथ ही जो गार्ड हैं वे भी नगर निगम कार्यालय के पास स्थित दशहरा मैदान के गेट पर ही रहते हैं। जिससे यहां से प्रवेश करने वालों से तो गार्ड पूछताछ भी करते हैं और अनावश्यक लोगों को मैदान में जाने से रोकते भी हैं। जबकि मैदान  के पिछले हिस्से से लेकर अन्य गेटों पर न तो कोई गार्ड रहते हैं और न ही कैमरे। इसका फायदा नशा करने वाले व चोर उठा रहे हैं। हालत यह है कि मैदान से आए दिन सामान, रैलिंग, बिजली की डीपी के ढक्कन समेत काफी सामान चोरी हो गया है। यह चोरी अधिकतर किशोरपुरा थाने के सामने की तरफ व किशोरपुरा साइड से अधिक हो रही है। यहां से रात के अंधेरे का फायदा उठाकर लोग अंदर घुसते हैं और सामान चोरी कर ले जा रहे हैं। इस बारे मं कई बार तो निगम अधिकारियों को भनक तक नहीं लग पाती है। हालांकि इस बार हुई चोरी के बार में अधिकारियों को जानकारी मिली है। इसे देखते हुए अब नगर निगम द्वारा दशहरा मैदान में चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाने और सुरक्षा गार्डों को बढ़ाने की भी योजना है। जिससे मैदान की सुरक्षा की जा सके। साथ ही चोरी होने की स्थिति में सीसीटीवी फुटेज कारगर साबित हो सकेंगे। </p>
<p><strong>होने लगे हैं आयोजन</strong><br />दशहरा मैदान में अब दशहरा मैदान के अलावा भी साल में आए दिन आयोजन होने लगे हैं। कभी समाजों के कार्यक्रम हो रहे हैं तो कभी अन्य छोटे-छेटे मेले लगाए जा रहे हैं। साथ ही कई अन्य आयोजन होने से लोगों का आवामन रहता ही है। ऐसे में बार-बार मैदान में खर्चा करना पड़ रहा है। नगर निगम ने दशहरा मेले के आयोजन से पहले ही मैदान में लाखों रुपए खर्चा कर टूटफूट को सही कराया था। लेकिन देखेख के अभाव में फिर से मैदान की दुर्दशा होने लगी है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि दशहरा मैदान की दुर्दशा के मुददे को दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 28 दिसम्बर को पेज तीन पर ‘फिर लगे गंदगी के ढेर, रैलिंग तोड़ी, होने लगी टूटफूट’ शीर्षक से समाचार भी प्रकाशित किया था। जिसमें दशहरा मैदान के बाद वहां सीसीटीवी कैमरे व गार्ड नहीं होने से भी इस तरह की घटनाएं होने की आशंका जताई थी। जिसके बाद नगर निगम के अधिकारी हरकत में आए और उन्होंने पूरे साल मैदान की सुरक्षा के लिए कैमरे लगाने व गार्ड बढ़ाने का निर्णय किया है।  </p>
<p><strong>कैमरे भी लगाए जाएंगे, गार्ड होंगे दोगुने</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के आयुक्त राजपाल सिंह ने बताया कि दशहरा मैदान की सुरक्षा के लिए अभी जितने सुरक्षा गार्ड लगे हुए हैं उनकी संख्या दोगुनी की जाएगी। जिससे वे पूरे मैदान में थूम सकें। साथ ही उन्हें तीन अलग-अलग-शिफ्टों में लगाया जाएगा। जिससे 24 घंटे मैदान की सुरक्षा हो सकेगी। साथ ही मैदान में स्थायी तौर पर सीसी टीवी कैमरे लगाने की भी योजना है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर उसे शीघ्र ही मूर्त रूप दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jan 2023 16:01:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>49.5 किमी सीवर लाइन डालने का कार्य पूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[आनासागर जोन में 112 किलोमीटर सीवर लाइन का कार्य प्रस्तावित है। जिसमें से अब तक 85.5 किमी सीवर लाइन डालने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसी प्रकार सिटी जोन में 54.10 किलोमीटर सीवर लाइन डालने का कार्य प्रस्तावित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/495-km-sewer-line-laying-completed/article-27079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/whatsapp-image-2022-10-18-at-17.03.15.jpeg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आनासागर एवं सिटी जोन में सीवर लाइन डालने का कार्य प्रगतिरत है। आनासागर जोन में 85.5 किमी और सिटी जोन में 49.5 किमी सीवर लाइन डालने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। दोनों जोन में लगभग 11 हजार घरों को सीवर कनेक्शन से जोड़ दिया गया है। सीवर कनेक्शन के साथ-साथ ही रोड रेस्टोरेशन का कार्य भी समानान्तर चल रहा है। <br /><br />आनासागर जोन में 112 किलोमीटर सीवर लाइन का कार्य प्रस्तावित है। जिसमें से अब तक 85.5 किमी सीवर लाइन डालने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसी प्रकार सिटी जोन में 54.10 किलोमीटर सीवर लाइन डालने का कार्य प्रस्तावित है। जिसमें से 49.5 किलोमीटर सीवर लाइन डालने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। आनासागर जोन में वैशाली नगर स्थित मित्र नगर में कनेक्टीविटी का कार्य प्रगतिरत है।</p>
<p>रातीडांग में सीवर कनेक्शन का कार्य चल रहा है। इसी प्रकार यहां पर सीसी रोडका कार्य गुरूगोकूल धाम, रातीडांग, माधवनगर (वैशाली नगर ),  कोटड़ा स्थित सिसोदिया गार्डन व बैरवा बस्ती में चल रहा है। सिटी जोन में जादूगर क्षेत्र, हाथी भाटा में सीवर लाइन डालने के पश्चात मुख्य लाइन से जोड़ने का कार्य प्रगतिरत है। साथ ही आईसी और रोड रेस्टोरेशन का कार्य भी समानान्तर चल रहा है। आनासागर जोन में 5400 एवं सिटी जोन में 5600 सीवर कनेक्शर कर दिए गए हैं, वर्तमान में झलकारी नगर में धोलाभाटा, पहाड़गंज, साधु बस्ती में कनेक्शन का कार्य प्रगतिरत है। <br /><br /><strong>दीपावली से पूर्व रोड रेस्टोरेशन का कार्य होगा लगभग पूर्ण</strong><br />जिला कलक्टर एवं अजमेर स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अंश दीप व नगर निगम आयुक्त एवं अजमेर स्मार्ट सिटी के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुशील कुमार प्रोजेक्ट की नियमित मॉनीटरिंग कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आनासागर एवं सिटी जोन में 135 किमी सीवर लाइन डालने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। सिटी जोन में 0.5 किमी सीसी रोड एवं 0.5  किमी बीटी रोड रेस्टोरेशन का कार्य किया जाना शेष है। इसी प्रकार आनासागर जोन में 85.5 किमी क्षेत्र में सीवर लाइन डाली गई है।  दोनों जोन में रोड रेस्टोरेशन का कार्य दीपावली तक लगभग पूर्ण कर लिया गया है। <br /><br /><strong>सीवर कनेक्शन के लिए इस तरह करें आवेदन </strong><br />स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आनासागर एवं सिटी जोन में सीवर लाइन डालने का कार्य प्रगतिरत है। जिन क्षेत्रों में सीवर लाइन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है वहां पर आमजन सीवर कनेक्शन के लिए नगर निगम में आवेदन कर सकते हैं। आमजन से अपील की जाती है कि सीवर कनेक्शन के दौरान शौचालय ( सेफ्टी टैंक वाई पास ) एवं रसोई को भी जोड़ा जाए। ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं वर्षा जल को सीवर लाइन से नहीं जोड़ें, ताकि वर्षा ऋतु में सीवरेज लाइनों पर वर्षा जल का भार नहीं पड़े। वर्षा जल नालियों-नालों के माध्यम से आनासागर झील अथवा खानपुरा तालाब में अलग से पहुंचना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 18:23:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अजमेर में सड़क बनाने का काम प्रगति पर</title>
                                    <description><![CDATA[ गौरव पथ स्थित देवनारायण मंदिर के सामने वन लेन रोड होने की वजह से पूर्व में वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/road-construction-work-in-progress-in-ajmer-under-smart-city/article-25646"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/whatsapp-image-2022-10-06-at-17.11.54.jpeg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में सड़क नवीनीकरण का काम प्रगतिरत है। शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए आनासागर सर्क्यूलर रोड वाया महावीर सर्किल, आनासागर पुलिस चौकी, रीजनल कॉलेज, वैशाली नगर पेट्रोल पंप, बजरंगढ़ सर्किल और नौसर घाटी तक निर्माण कार्य किया जा रहा है। कुल 16.93 करोड़ की लागत से 9.8 किमी सिक्स लेन में बिटुमिन कारपेटिंग करते हुए उपलब्ध भूमि के अनुसार सड़क का चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। <br /><br />बजरंगगढ़ सर्किल से वाया पुरानी आनासागर चौपाटी, वैशाली नगर पेट्रोल पंप, रीजनल कॉलेज तिराहा से नोसर घाटी तक बीसी व सीसी रोड का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। वहीं सड़क के दोनों ओर इंटरलोकिंग फुटपाथ का निर्माण किया जा रहा है। रीजनल कॉलेज तिराहा से राणा हॉस्पिटल तक सड़क के एक तरफ ड्रेन का काम पूरा कर लिया गया है। बांडी नदी से पुरानी विश्राम स्थली के आस पास तक ड्रेन का काम भी पूरा कर लिया गया है। <br /><br />इसी तरह रीजनल कॉलेज से नौसर घाटी तक एक तरफ की ड्रेन तैयार कर ली गई है। पुष्कर रोड स्थित चंडक अस्पताल से नोसर घाटी और रीजनल कॉलेज तिराहा से वैशाली नगर स्थित गुप्ता पान हाउस तक दोनों तरफ का इंटर लॉकिंग ब्लॉक का काम लगभग पूरा हो गया है। इसी तरह रीजनल कॉलेज तिराहा से पुष्कर रोड स्थित पुरानी विश्राम स्थली के बीच बीसी का काम प्रगतिरत है। <br /><br />उल्लेखनीय है कि गौरव पथ स्थित देवनारायण मंदिर के सामने वन लेन रोड होने की वजह से पूर्व में वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। साथ ही आए दिन जाम के हालात बन जाते थे। इसी परेशानी को देखते हुए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत देवनारायण मंदिर के पास उक्त सड़क को चौड़ा करते हुए यातायात अवरोध को समाप्त करते हुए इस रास्ते को सुगम बनाया गया है। उक्त सड़क के चौड़ीकरण के बाद वाहन चालकों को भी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है और आए दिन लगने वाले जाम से भी छुटकारा मिल गया है। पुष्कर रोड पुराना शिवजी के मंदिर को भी शिफ्ट कर दूसरी जगह स्थापित किया गया है। जिससे उक्त सड़क चौड़ीकरण में सुविधा होगी और यातायात सुगम होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Oct 2022 17:24:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 17 :  स्मार्ट सिटी का हिस्सा, फिर भी विकास को तरसा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में कोटा दक्षिण नगर निगम के वार्ड 17 की कई कॉलोनियां स्मार्ट सिटी का हिस्सा होने के बावजूद विकास को तरस रही हैं। इन कॉलोनियों में न तो सड़क है और न ही नालियां। पानी का संकट भी बरकरार है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-17--part-of-smart-city--still-craving-for-development/article-18421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/ward-17--smart-city-ka-hissa-vikas-ko-tarsa-kota-news-9.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपए के विकास कार्य चल रहे हैं वहीं दूसरी ओर शहर में कोटा दक्षिण नगर निगम के वार्ड 17 की कई कॉलोनियां स्मार्ट सिटी का हिस्सा होने के बावजूद विकास को तरस रही हैं। इन कॉलोनियों में न तो सड़क है और न ही नालियां। पानी का संकट भी बरकरार है। नगर विकास न्यास से अनुमोदित होने के बावजूद स्थानीय लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।बोरखेड़ा क्षेत्र की कई कॉलोनियां इस वार्ड का हिस्सा हैं। इन कॉलोनियों को बसे हुए बरसों हो गए हैं। इसके बावजूद विकास की बयार अभी तक यहां पर नहीं पहुंच पाई है। वार्ड की अधिकांश कॉलोनियों में स्थित मकानों के पट्टे बन चुके हैं। फिर भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। कॉलोनियों में सड़क का अभाव है। ऐसे में लोगों को जर्जर राह पर आवागमन करना पड़ता है। नालियोंं का निर्माण अभी तक नहीं करवाया गया है। इस कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर ही फैल रहा है। पानी के रिसाव से राह और जर्जर होती जा रही है। गंदा नाला दे रहा पीड़ा स्थानीय लोगों ने बताया कि बोरखेड़ा क्षेत्र में कई कॉलोनियों के बीच से एक नाला निकल रहा है। इस नाले की सफाई बरसों से नहीं हुई है। इस कारण पास की कॉलोनियों के लोग दुर्गंध से परेशान है। वहीं पूरा नाला कचरे से अटा हुआ है। तेज बरसात के दौरान नाला ओवरफ्लो हो जाता है और गंदा पानी कॉलोनियों में भर जाता है। जिससे लोगों को आवागमन में काफी दिक्कत होती है। वहीं कॉलोनियों में नियमित रूप से सफाई भी नहीं होती है। जिससे जगह-जगह पर कचरे के ढेर पड़े रहते हैं। कचरे को मवेशी चारों तरफ फैला देते हैं। पाइप लाइन डाल कर भूल गए वार्ड में स्थित फैंडस कॉलोनी में काफी समय से पेयजल संकट बना हुआ है। यहां पर करीब एक साल पहले पेयजल आपूर्ति के लिए पाइन लाइन डाली गई थी। उसके बाद इसकी सुध नही ली गई। अभी तक इस लाइन से कनेक्शन नहीं किए गए हैं। जिससे लोग शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। कई जगहों पर सीवरेज लाइन डालने के लिए सड़क मार्ग खोदा गया था, जिसे कार्य पूरा होने के बाद अभी तक ठीक नहीं करवाया गया है। फै्रन्डस कॉलोनी में पानी की पाइप लाइन डालने का काम अधूरा छोड़ दिया गया है। पुरानी पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। इससे बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। जलदाय विभाग व यूआईटी को कई बार समस्या बताई, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। - जयराज सिंह हाड़ा, जनप्रतिनिधि वार्ड की कई कॉलोनियों में समय पर कचरे का उठाव नहीं होता है। इससे चारों तरफ दुर्गंध फैलती रहती है। फै्रंडस कॉलोनी के मुख्य द्वार पर ही नगर निगम ने कचरा प्वाइंट बना रखा है, जिसकी शिकायत कई बार अधिकारियों की, लेकिन इस समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो पाया। इससे परेशानी हो रही है। - विनीत राय, निवासी फ्रैंडस कॉलोनी इस वार्ड की अधिकांश कॉलोनियां अनुमोदित हो चुकी है और लोगों ने पट्टे भी बनवा लिए हैं, इसके बावजूद यहां पर विकास कार्य नहीं करवाए जा रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है। फ्रैंडस कॉलोनी में पाइप लाइन डालने के बाद अभी तक कनेक्शन नहीं किए। वहीं कई कॉलोनियों में सड़क व नालियां तक नहीं बनवाई है। - बबलू कसाना, वार्ड पार्षद</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Aug 2022 14:46:00 +0530</pubDate>
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