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                <title>oil plant - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सरकारी कोकस के चलते तिलम संघ ले रहा अंतिम सांसें,167 करोड़ के घाटे में चल रहा तिलम संघ, 151 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया</title>
                                    <description><![CDATA[ डेढ़ दशक पहले तक किसानों की लिए वरदान साबित हो रहा तिलम संघ अधिकारियों, कर्मचारियों और सरकारी उदासीनता के चलते मरणासन्न होकर अपनी अंतिम सांसे ले रहा है। स्थिति यह है कि संघ 167 करोड़ के घाटे में है। इस पर 151 करोड़ रुपए की देनदारियां बकाया है। अकेले कोटा में ही बीज उत्पादक किसानों का लगभग 50 लाख रुपए संघ पर बकाया चल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tilam-sangh-is-breathing-its-last-due-to-government-caucus--tilam-sangh-is-running-in-loss-of-167-crores--dues-of-rs-151-crore-are-outstanding/article-11536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/31.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डेढ़ दशक पहले तक किसानों की लिए वरदान साबित हो रहा तिलम संघ अधिकारियों, कर्मचारियों और सरकारी उदासीनता के चलते मरणासन्न होकर अपनी अंतिम सांसे ले रहा है। स्थिति यह है कि संघ 167 करोड़ के घाटे में है। इस पर 151 करोड़ रुपए की देनदारियां बकाया है। अकेले कोटा में ही बीज उत्पादक किसानों का लगभग 50 लाख रुपए संघ पर बकाया चल रहा है। 15 साल पहले हाड़ौती संभाग की पहली |यल मिल से तिलम संघ को अच्छा प्रतिसाद मिला था। किसानों को तिलहनी फसलों के अच्छे दाम मिल रहे थे। एक दशक पहले तक खाद्य तेलों में शुद्धता में अपनी अलग पहचान बना चुका कोटा तिलम संघ अब अंतिम सांसें गिन रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने समय के साथ ना तो मशीनों को अपग्रेट किया ना ही व्यवसाय के तरीकों को। धीरे-धीरे तिलम संघ पर 167 करोड़ घाटा हो गया । अब यह बंद होने के कागार पर है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>किसानों के एक करोड़ रुपए अब भी तिलम संघ में अटके</strong></span> <br />किसान नेता व भाजपा देहात जिला अध्यक्ष मुकट नागर ने बताया कि तिलम संघ अपने को बाजार के अनुरूप ढालने में ना कामयाब रहा है। किसानों  के साथ रिश्ते बेहतर नहीं रखने बीज उत्पादन किसानों प्रीमियम राशि समय पर नहीं लौटाने किसानों में तिलम संघ के प्रति रूझान घट रहा है।  2017 से 19 के बीच करीब 50 लाख रुपए बाकी चल रहे है।  इसके अलावा खरीफ के बीज उत्पादन किसानों के वर्ष 2020-21 के करीब 50 लाख रुपए का भुगतान अटका पड़ा है। दोनों भुगतान मिलाकर करीब एक करोड के आसपास किसानों अभी भुगतान बाकी चल रहा है। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>तिलम संघ बीज उत्पादन और ग्रेडिंग में नहीं हुआ सफल</strong></span><br />किसान नेता अब्दुल हामिद गौड ने बताया कि तिलम संघ ने अपने वजूद को बचाने के लिए 2008 के बाद से बीज ग्रेडिंग में अपने हाथ अजमाए लेकिन यहां भी कर्मचारियों और किसानों के बीच समन्वय नहीं करने से फेल हो गया।  वर्ष 2016-17 में किसानों ने बीज उत्पादित करके तिलम संघ में 20 हजार क्विंटल गेहूं बीज जमा करवाया था। किसानों को सरकार  प्रति क्विंटल 250 रुपए की प्रीमियम राशि देती है। ऐसे में करीब 5 करोड़ रुपए की राशि नवंबर 2017 में किसानों को दी जानी थी। लंबे समय तक चक्कर कटाने के बाद कुछ किसानों को प्रीमयम राशि दी तो कुछ के अब भी अटकी हुई है। ऐसे में किसानों का तिलम संघ से विश्वास कम होता गया। वर्तमान में तिलम संघ बीजों की ग्रेडिंग कर गेहूं, चना, सरसों, सोयाबीन, उडद का बीज उपलब्ध करा रहा है। लेकिन बाजार में चल रही गला काट प्रतिस्पर्द्वा के आगे तिलम संघ के गुणवत्ता वाले बीज किसानों में गहरी पेठ नहीं बना सके। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>दो साल पहले राजफेड में विलय की घोषणा भी अमल नहीं आई</strong></span> <br />काफी समय से घाटे में चल रहे तिलम संघ को 2020 में राजफैड में विलय किए जाने की घोषणा की थी लेकिन उसके बाद ये घोषणा तकनीकी कारणों से मुर्त रूप नहीं ले सकी। उल्लेखनीय है कि 2020 में तिलम संघ को  विलय करने की राज्य सरकार ने मुहर लगा दी थी।  सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने यह घोषणा की थी। लेकिन बाद में कोरोना और कई तकनीकी कारणों से घोषणा मूर्तरूप नहीं ले पार्ई। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>1990 में हुई थी स्थापना</strong></span><br /> तिलम संघ की स्थापना 1990 में हुई थी। इसका कार्य सोयाबीन, सरसों, मंूगफली आदि का संग्रहण और प्रोसेसिंग कर विपणन करना है। तिलम संघ के अधीन आठ तेल मिल कोटा, बीकानेर, फतेहनगर, श्रीगंगानगर, जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुर सिटी, झुंझुनू में स्थापित की गई थीं। संघ की जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुरसिटी, झुंझुनू और बीकानेर इकाईयां लगातार घाटे में चलने के कारण बंद कर दी गई। झुंझुनू और जालौर परियोजना को बेच दिया गया।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>1991 से पहले तक  तिलम संघ राजफैड का रहा था अंग</strong></span><br />वर्ष 1991 से पहले तिलम संघ राजफैड का ही अंग था लेकिन विश्व बैंक की शर्तो के आधार पर 1991 में राजफैड से अलग होकर तिलम संघ की स्थापना की गई थी । 18 साल तक तिलम संघ किसानों के उत्पादन का बड़ा खरीदार था। कोटा,श्रीगंगानगर और फतेहनगर आॅयल संयंत्रों से खाद्य तेल का अच्छा उत्पादन होता था । अधिकारियों और कर्मचारियों ने संयंत्रों को अपग्रेट  नहीं किया और बाजार के अनुसार अपने को नहीं ढालने के कारण प्रतिस्पर्द्वा में पिछड़ता गया।  आज प्लांट बंद होने पर पहुंच गया है। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>2008 से तीनों ऑयल प्लांट बंद</strong></span> <br />तिलम संघ के वर्ष 2008 से तीनों खाद्य तेल उत्पादन संयत्र कोटा, श्रीगंगानगर एवं फतेहनगर बंद हैं। इन संयत्रों की मशीनरी भी पुरानी हो चुकी है। कोटा के तेल संयत्र को बंद हुए करीब 15 साल हो गए है। कोटा में तेल का पहला प्लांट तिलम संघ का था उसके बाद एक- एक कर आज 12 से अधिक खाद्य तेल उत्पादक प्लांट लगे हुए जो प्रतिदिन 2500 टन खाद्य तेल का उत्पदान कर रहे है ऐसे में सवाल उठता है कि तिलम संघ का अच्छा खास चलता प्लांट अधिकारियों की उदासिनता से आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। जहां अन्य आॅयल मिले प्रतिदिन 2500 टन उत्पादन कर रहे वहीं तिलम संघ 200 टन उत्पादन ही करता रहा जिससे बाजार में पिछड़ता गया। मशीनों को अपग्रेट नहीं किया। किसानों के बीच समन्वय और पेठ नहीं बना सका जिससे प्लांट बंद हो गया। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>84 कर्मचारियों का होना था समायोजन अब 33 बचे</strong></span> <br />तिलम संघ का 2020 में राजफैड में विलय की प्रक्रिया शुरू हुई तब तिलम संघ के कर्मचारियों का भी राजफैड में ही विलय करना था। तिलम संघ में 2020  में 113 कार्मिक कार्यरत थे। जिसमें से 2021 में  40 कार्मिक  रिटायर हो  गए। ऐसे में शेष बचे 84 कार्मिकों का राजफैड में समायोजन किया जाना था लेकिन दो साल में  तिलम संघ के राजफैड में विलय नहीं हुआ और वर्तमान में जीएम सहित 33 कर्मचारी रह गए है।  तिलम संघ के पास बाजार दर से लगभग 500 करोड़ की संपत्तियां हैं, जो राजफैड में तिलम संघ के विलय होने पर राजफैड के पास आ आएगी। <br /><br />तिलम संघ की ओर से अभी बीज ग्रेडिंग और समर्थन मूल्य पर जिंसों की खरीद का कार्य किया जाता है। तेल प्लांट करीब 15 साल से बंद पड़ा है। मशीने पुरानी होने और अपग्रेट नहीं होने से उत्पादन बंद हो गया था। हमारी लैब तेल का टेस्टिंग कर तिलम संघ ब्रांड नाम से बाजार में सरसों, मूंगफली और सोयाबीन का तेल बिक रहा है। इसके अलावा किसानों से बीज उत्पादन कराकर उसकी ग्रेडिंग का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में 33 कर्मचारी कार्यरत है। नई भर्ती नहीं हुई है।<strong>- सुनील अग्रवाल, जीएम तिलम संघ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 15:37:56 +0530</pubDate>
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                <title>कसार में गोयल प्रोटीन्स ऑयल प्लांट के प्रदूषण से लोग हो रहे बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[कसार में गोयल प्रोटीन्स आॅयल प्लांट से निकलने वाले धुएं से कस्बे में काफी प्रदूषण फैल रहा है। जिस कारण कई लोग बीमारियों के शिकार हो रहे है। साथ ही प्लांट से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी भी नहरों में जाकर मिल कर लोगों की फसलों में जा रहा है व लोगों को नुकसान कर रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-are-getting-sick-due-to-pollution-of-goyal-protein-oil-plant-in-kasar/article-7609"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/654654645.jpg" alt=""></a><br /><p>कसार। कसार में गोयल प्रोटीन्स ऑयल प्लांट से निकलने वाले धुएं से कस्बे में काफी प्रदूषण फैल रहा है। जिस कारण कई लोग बीमारियों के शिकार हो रहे है। गोयल प्रोटीन्स ऑयल प्लांट से रात के समय पूरे कसार कस्बे में धूएं के साथ साथ राख भी उड़कर आती है जिससे भारी वायु प्रदूषण हो रहा है और लोगों गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे है। राख लोगों के आवास पर जमने के साथ आस-पास मौजूद लोगों के खेतों की फसल पर भी जम जाती है। साथ ही प्लांट से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी भी नहरों में जाकर मिल कर लोगों की फसलों में जा रहा है व लोगों को नुकसान कर रहा। इसके साथ ही कई जानवर इस गंदे केमिकल युक्त पानी को पीकर मर रहे है। इस पानी से लोगों को घातक बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे है। कस्बों के बीच व्यापारियों ने छोटे छोटे उद्योग से अब बड़े बड़े ऑयल प्लांट चला दिए हैं और एक जगह अब प्लांट मालिकों ने तीन तीन बाईलर चलाना शुरू कर दिया हैं जिस कारण रात के समय पूरे कसार कस्बे में धूएं के साथ साथ राख भी उड़कर आती है जिससे वायु प्रदूषण हो रहा है। <br /><br />कसार के रहने वाले राकेश परिहा का कहना है ऑयल प्लांट से होने वाले प्रदूषण के कारण आए दिन लोग बीमार हो रहे है। प्लांट से उड़ने वाली राख से लोगों को अस्थमा,श्वास सहित अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे है। जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। कालू गुर्जर का कहना है कि ऑयल प्लांट से निकलने वाले केमिलल वाला पानी पीने से हमारे मवेशी मर रहे है। गत वर्ष भी यह केमिकल का पानी पीने से मवेशी तड़फने लगे और आखिरकार मर गए। मवेशियों के मरने का मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा। <br /><br />हमारे प्लांट का वेस्ट पानी बाहर नहीं आता है। उस पानी का अंदर ही ट्रीटमेंट किया जाता है। केवल सिवरेज का पानी है जो गटर से बाहर जाता है। केवल सिवरेज का पानी है जो गटर से बाहर जाता है।  प्लांट के आसपास कोई खेतीबाड़ी नहीं हो रही है। जिससे की प्लांट के धूएं से फसल को नुकसान हो। <br /><strong>- ताराचंद गोयल, डायरेक्टर गोयल प्रोटीन्स</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Apr 2022 14:54:44 +0530</pubDate>
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