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                <title>slogan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राहुल गांधी ने अपनाया विरोध का नया तरीका, 'मोदी अडानी एक है' नारा लिखी टीशर्ट पहनकर पहुंचे संसद </title>
                                    <description><![CDATA[इस दौरान मानव श्रृंखला भी बनाई गई। गांधी ने एक सवाल पर कहा कि मोदी कभी अडानी मामले की जांच नहीं कर सकते क्योंकि वह खुद इस मामले के दायरे में आ रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-reached-parliament-wearing-a-t-shirt-with-slogan-modi-adani/article-96783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/capture3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा पार्टी के अन्य कई सदस्य 'मोदी अडानी एक है' नारा लिखे कपड़े पहनकर गुरुवार को संसद पहुंचे और उद्योगपति गौतम अडानी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इस मामले की जांच की मांग की। गांधी तथा पार्टी के अन्य सांसदों ने सांसद भवन परिसर में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अडानी की मदद करने का आरोप लगाते हुए इस मामले की व्यापक जांच की मांग की।</p>
<p>इस दौरान मानव श्रृंखला भी बनाई गई। गांधी ने एक सवाल पर कहा कि मोदी कभी अडानी मामले की जांच नहीं कर सकते क्योंकि वह खुद इस मामले के दायरे में आ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 14:49:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>‘भारत माता की जय’ नारा नफरती भाषण नहीं: कर्नाटक उच्च न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[यह फैसला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले भाषण की परिभाषा को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bharat-mata-ki-jai-slogan-is-not-hate-speech-karnataka/article-91790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच शत्रुता को रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधानों का दुरुपयोग करने की निंदा करते हुए भारत माता की जय नारा लगाने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को भी रद्द कर दिया है। कर्नाटक के उल्लाल तालुक के निवासियों पर भारत माता की जय के नारे लगाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने इस नारे को घृणा भाषण या धार्मिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त नहीं माना। यह फैसला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले भाषण की परिभाषा को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>यह मामला धारा 153ए का क्लासिक दुरुपयोग </strong><br />न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए का अभूतपूर्व दुरुपयोग है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 153ए के तहत आरोप साबित करने के लिए आवश्यक कोई भी तत्व इस मामले में मौजूद नहीं थे। यह मामला धारा 153ए का क्लासिक दुरुपयोग है, और यह केवल एक प्रतिकार के रूप में दर्ज किया गया था।</p>
<p><strong>यह तो राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है</strong><br />उन्होंने कहा कि ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाना किसी भी तरह से धार्मिक वैमनस्य को बढ़ावा नहीं देता है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा है ,‘भारत माता की जय के नारे की जांच की अनुमति देना यह गलत धारणा को बढ़ावा देने के समान होगा कि ऐसे नारे धार्मिक समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देते हैं।</p>
<p><strong>यह था मामला</strong><br />यह बयान एक महत्वपूर्ण मामले में आया है जहां पांच लोगों पर आरोप था कि उन्होंने भारत माता की जय का नारा लगाया था, जिसे अदालत ने घृणा भाषण या धार्मिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त नहीं माना। वरिष्ठ अधिवक्ता एम अरुणा श्याम और अधिवक्ता ई सुयोग हेराले याचिकाकर्ताओं की ओर से जबकि अतिरिक्त राज्य लोक अभियोजक बी एन जगदीश राज्य की ओर से पेश हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Sep 2024 14:31:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>जल जीवन मिशन के तोड़े नियम: पानी की गुणवत्ता जांच का पैसा स्लोगन-वॉल पेटिंग पर बहाया</title>
                                    <description><![CDATA[जिलों में जांच लैब-किट बनाने के 1815.37 लाख रुपए की कर दी कटौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--breaking-rules-of-jal-jeevan-mission--money-for-water-quality-check-was-spent-on-slogan-wall-painting/article-9155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/water.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जल जीवन मिशन में एक करोड़ से ज्यादा घरों में हर घर नल का काम चल रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच की लैब्स और जागरूकता पर भी पैसे का अलग मद रखा है, लेकिन मिशन का पैसा अफरशाही की भेंट चढ़ रहा है। 2021-22 बजट में 2 फीसदी पैसा आईईसी गतिविधियों और पानी की गुणवत्ता पर खर्च करने का केन्द्र सरकार ने नियम को तोड़कर अफसरों ने 13.93 करोड़ की जगह 32.08 करोड़ रुपए का बजट करवा लिया।  हद तो तब हो गई जब इस पैसे को पानी की गुणवत्ता जांच पर 1815.37 करोड़ रुपए की भी कटौती कर दी। इस पैसे से पानी की जांच को जिलों में लैब्स को अपग्रेडेशन पर खर्च करना था। साथ ही पानी जांच के किट खरीदने थे ताकि गुणवत्ता युक्त पानी पिलाया जा सके। लैब्स अपग्रेडेशन के 1641.37 लाख और जांच किट खरीदने के 174.18 लाख बजट से कम कर दिए। अन्य मदों से भी पैसा काटा गया। 2.10 करोड़ की जगह 20.83 करोड़ तो केवल दीवारों पर स्लोगन-वॉल पेंटिंग में खर्च किए और अधिकारियों ने चहेती फर्मों को स्लोगन लिखने, सनबोर्ड, डिजिटल पेटिंग को ठेके दे दिए।<br /><br /><strong>घर तक जलापूर्ति में नहीं दिखी फुर्ती : 18500 करोड़ हर-घर नल में खर्च नहीं कर पाए</strong> <br />मिशन में अगस्त, 2019 से अब तक जलदाय विभाग को 22 हजार करोड़ रुपए केन्द्र से आवंटित हुए, लेकिन अफसरों ने हर घर नल कनेक्शन कर जलापूर्ति सुनिश्चित करने में फुर्ती नहीं दिखाई। केवल 3500 करोड़ रुपए ही खर्च किए, इसके चलते 18500 करोड़ रुपए का बजट लैप्स हो गया। <br /><br />मिशन के फंड से 2% पैसा इन कामों पर खर्च होने का ही नियम है। जलदाय विभाग की इकाई वॉटर सैनिटेशन सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के निदेशक स्तर से फाइल चली थी। अफसरों से निर्देश मिला तो बजट बढ़ाया। -<strong>दिनेश गोयल, चीफ इंजीनियर, जलजीवन मिशन, राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 13:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक बार फिर किसान नेता राकेश टिकैत ने भरी हुंकार, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए बड़े किसान आंदोलन की बताई जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[देश में एक बड़े किसान आन्दोलन की जरुरत :टिकैत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/farmer-leader-rakesh-tikait-once-again-uttered-a-slogan--a-big-farmer-movement-is-needed-to-solve-the-problems-of-the-farmers--209-villages-are-crime-free--314-are-located-in-the-police-station-area--these-1062-villages/article-7748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rakesh-tikait.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एक बार फिर देश में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या देश में किसान फिर धरने पर बैठेगा क्या। क्या एक बार देशभर में बड़े रूप में किसान आंदोलन होंगा। दरअसल भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने सोमवार को कहा कि देश के किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक बड़े किसान आन्दोलन की जरुरत है जिसकी सफलता के लिए विपक्षी दलों की एकजुटता जरुरी है। <br /><br /> टिकैत ने तेलंगना के किसानों से फसलों की खरीद को लेकर तेलंगना भावन पर जन प्रतिनिधियों के चल रहे धरना को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसानों के आन्दोलन के लिए स्थान और तिथि की घोषणा जल्दी ही की जायेगी। उन्होंने कहा कि देश के किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक की जानी चाहिए और ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि सत्तारुढ दल का मुकाबला करने के लिए विपक्ष के मदद की जरूरत है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए । <br /><br />किसान नेता ने कहा कि तेरह माह के आन्दोलन के बाद किसानों की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के निर्धारण के लिए केन्द्र सरकार ने एक समिति गठित करने की घोषणा की और बाद में संयुक्त किसान मोर्चा से इसके लिए दो तीन नाम मांगे गए। मोर्चा की ओर से सरकार को पत्र भेजा गया और और पूछा गया कि समिति में कितने लोग होंगे और उसकी शक्ति क्या होगी , इसका जवाब अब तक नहीं दिया गया है । <br /><br />उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनमाने ढंग से समिति का गठन करना चाहती है और उसके निर्णय को किसानों पर थोपना चाहती है जिसे किसान कभी सफल नहीं होने देंगे। किसानों को एमएसपी गारंटी कानून चाहिए और इससे कम कुछ उसे मंजूर नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 14:24:47 +0530</pubDate>
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