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                <title>West Bengal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला, कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[एसआईआर ट्रिब्यूनल ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुर्शिदाबाद के कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में जोड़ने का आदेश दिया है। दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने चुनाव आयोग को रविवार शाम तक नाम शामिल करने का निर्देश दिया। इस फैसले से शेख के लिए 6 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-tribunal-order-to-restore-the-name-of/article-149182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एसआईआर ट्रिब्यूनल ने अपने गठन के बाद पहले ही फैसले में कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का निर्देश दिया है। यह मामला मुर्शिदाबाद के फरक्का विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान शेख का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिसके चलते वह नामांकन दाखिल नहीं कर पा रहे थे, जबकि उन्हें कांग्रेस का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया जा चुका था। एसआईआर ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष. एस. शिवग्नानम , ने आदेश दिया कि शेख का नाम तुरंत प्रभाव से मतदाता सूची में फिर से जोड़ा जाए।</p>
<p>चुनाव आयोग ने 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें 60 लाख से अधिक मतदाताओं को शामिल किया गया था। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों ने विवादित प्रविष्टियों की जांच और समाधान की प्रक्रिया शुरू की थी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे राहत के लिए ट्रिब्यूनल का रुख कर सकते हैं। मतदाता सूची से नाम हटने और ट्रिब्यूनल के कामकाज में देरी के कारण शुरुआत में वहां नहीं जा पाने पर, शेख ने तुरंत राहत के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत के निर्देश पर उन्होंने बाद में बिजन भवन स्थित ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की।</p>
<p>सुनवाई के दौरान शेख ने आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें उनका नाम दर्ज था। उनके वकील फिरदौस शमीम और सुश्री गोपा बिस्वास ने पक्ष रखा, जबकि सुश्री दिव्या मुरुगेसन ने निर्वाचन आयोग की ओर से दलीलें पेश कीं। ट्रिब्यूनल ने पाया कि शेख के पिता के विवरण से संबंधित विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किया गया था, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इससे शेख की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि रविवार शाम 8 बजे तक उनका नाम पूरक मतदाता सूची में शामिल किया जाए।</p>
<p>इससे पहले शेख ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन अदालत ने एसआईआर से जुड़े मामलों पर उच्चतम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें ट्रिब्यूनल जाने की अनुमति दी और निर्वाचन आयोग को सहयोग करने का निर्देश दिया। फरक्का में मतदान के पहले चरण की तारीख नजदीक होने और नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय होने के बीच, ट्रिब्यूनल के इस आदेश से श्री शेख के लिए नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 15:59:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: न्यायिक अधिकारियों पर हमले को लेकर हाईकोर्ट ने लगाई अधिकारियों को फ़टकार, एसआईआर से जुड़ा है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[मालदा में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश ने इसे कोर्ट के अधिकार को चुनौती और मनोबल गिराने वाला 'दुस्साहसिक प्रयास' बताया। अदालत ने निर्वाचन आयोग को भविष्य में अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-election-high-court-reprimands-officials-for-attack/article-148835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले और घेराव की घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए गुरुवार को इसे ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित करने का एक 'दुस्साहसिक प्रयास' और न्यायालय के अधिकार को चुनौती करार दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक गाँव में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हमले के बाद इस मामले पर तत्काल सुनवाई की, हालांकि यह मामला आज की कार्यसूची में सूचीबद्ध नहीं था।</p>
<p>न्यायालय ने राज्य में कल हुई घटनाओं के संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मिले खत के आधार पर इस मामले को बेहद जरूरी बताते हुए संज्ञान में लिया। पत्र के अनुसार, तीन महिला अधिकारियों सहित 7 न्यायिक अधिकारी मालदा जिले के एक गाँव में एसआईआर न्यायिक-निर्णय संबंधी कार्यों को पूरा कर रहे थे, तभी ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। इन अधिकारियों को दोपहर 3:30 बजे से आधी रात तक बंधक बनाकर रखा गया और कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा राज्य प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील किए जाने के बाद ही उन्हें मुक्त कराया जा सका।</p>
<p>पीठ ने इस घटना पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का सभी पक्षों द्वारा स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि वे तटस्थ एजेंट के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन अब उन्हें भी हमलों से नहीं बख्शा जा रहा है। न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की मांग करे। मुख्य न्यायाधीश ने पूर्व में यह भी टिप्पणी की थी कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रूप से संपन्न हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 17:46:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: हटाए गए मतदाताओं के लिए ट्रिब्यूनल पोर्टल शुरू, चुनाव आयोग ने ऑनलाइन पोर्टल किया शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से कटे नामों की बहाली हेतु 23 जिलों में स्पेशल ट्रिब्यूनल गठित किए हैं। प्रभावित 14 लाख मतदाता अब ऑनलाइन पोर्टल या ऑफलाइन माध्यम से अपील कर सकेंगे। आयोग ने तीसरी अनुपूरक सूची जारी कर 2 लाख नए नाम जोड़े हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-tribunal-portal-launched-for-deleted-voters/article-148331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ec.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतों के समाधान के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद एक विशेष ट्रिब्यूनल प्रणाली और ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है, जिसके तहत प्रभावित मतदाता रविवार से अपील दर्ज कर सकेंगे। ट्रिब्यूनल जल्द ही काम करना शुरू करेंगे, जिससे जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराने और निवारण का अवसर मिलेगा। इससे पहले आयोग ने राज्य के 23 जिलों में ट्रिब्यूनल गठित किए थे, जिनकी देखरेख के लिए 19 पूर्व न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है।</p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे अब ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से राहत के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए संबंधित व्यक्ति को निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर "व्यक्तियों के लिए अपील प्रस्तुत करें (निर्णयाधीन)" विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर या एपिक नंबर के माध्यम से लॉगिन कर हटाए गए मतदाता का विवरण, पूर्ण पता, अपील का संक्षिप्त विवरण और अपील के आधार भरकर आवेदन जमा करना होगा।</p>
<p>इसके अलावा, ऑफलाइन आवेदन के लिए जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडल अधिकारी के कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, ट्रिब्यूनल की कार्यवाही शीघ्र शुरू होगी और शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच उठाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दूसरी अनुपूरक सूची से करीब 45 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं जो लगभग 14 लाख मतदाताओं के बराबर है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और अल्पसंख्यक वर्ग की बताई जा रही है।हालांकि, आयोग ने अभी तक अंतिम मतदाता सूची के कुल विस्तृत आंकड़े जारी नहीं किए हैं।</p>
<p>इस बीच, शनिवार देर रात आयोग ने तीसरी अनुपूरक मतदाता सूची जारी की, जिसमें दो लाख से अधिक नए नाम जोड़े जाने की जानकारी है। इसके साथ ही प्रतिदिन अनुपूरक सूची जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और चौथी सूची रविवार को जारी किए जाने की संभावना है। तीसरी सूची में शामिल और हटाए गए नामों के विस्तृत आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 15:02:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : भाजपा और टीएमसी ने 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर युवाओं को दिया टिकट; युवाओं पर दांव लगा रही पार्टियां, पूर्व सैनिक से लेकर पत्रकार तक मैदान में</title>
                                    <description><![CDATA[बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी ने युवाओं पर बड़ा दांव खेला है। टीएमसी ने 60 वर्ष से कम उम्र के 219 उम्मीदवारों को उतारकर 'न्यू तृणमूल' विजन पेश किया, वहीं भाजपा के 196 प्रत्याशी 55 वर्ष से कम आयु के हैं। यह बदलाव दशकों पुरानी 'सीनियरिटी' की राजनीति को पीछे छोड़ युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-bjp-and-tmc-gave-tickets-to/article-147779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)20.png" alt=""></a><br /><div>कोलकाता। बंगाल की राजनीति इस बार केवल विचारधारा और नारों की जंग नहीं है, बल्कि यह एक बड़े जनरेशन चेंज (पीढ़ीगत बदलाव) की भी गवाह बन रही है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल और भाजपा दोनों ने टिकट बंटवारे में युवाओं पर बड़ा दांव खेलकर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाला दौर नई पीढ़ी का हो सकता है। दोनों दलों के उम्मीदवारों की सूचियों का विश्लेषण करें तो साफ झलकता है कि अनुभव के साथ युवा ऊर्जा का संतुलन बिठाने की पुरजोर कोशिश की गई है। तृणमूल ने एक व्यक्ति, एक पद और उम्र की अनौपचारिक सीमा को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>टीएमसी के 219 उम्मीदवार 60 वर्ष से कम उम्र के</strong></div>
<div> </div>
<div>मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच लंबे मंथन के बाद, तृणमूल ने इस बार केवल 25 प्रतिशत वरिष्ठ उम्मीदवारों (60 वर्ष से ऊपर) को मैदान में उतारा है। 2021 में यह आंकड़ा 42.4 प्रतिशत था। तृणमूल की रणनीति अब उन 219 उम्मीदवारों पर टिकी है जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम है। हालांकि, पार्टी ने समर मुखर्जी (83) और शोभनदेव चट्टोपाध्याय (82) जैसे दिग्गजों को बरकरार रखकर यह भी स्पष्ट किया है कि अनुभव और विरासत को पूरी तरह दरकिनार नहीं किया जा सकता। </div>
<div> </div>
<div><strong>नई पीढ़ी का नया विजन</strong></div>
<div> </div>
<div>भाजपा में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखती है। उदाहरण के तौर पर नितिन नवीन जैसे अपेक्षाकृत युवा नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने संकेत दिया है कि संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की नीति केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण है। वहीं, तृणमूल में ममता बनर्जी के साथ-साथ अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका भी इसी बदलाव का प्रतीक है। अभिषेक का संगठनात्मक विस्तार और युवा कार्यकतार्ओं के बीच उनकी पकड़, पार्टी के भविष्य की दिशा को इंगित करती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>बदलता राजनीतिक मिजाज</strong></div>
<div> </div>
<div>दशकों तक बंगाल की राजनीति पर काबिज वामपंथी दल अपनी सीनियरिटी के लिए जाने जाते थे, जहां नेतृत्व की सीढ़ी चढ़ने में उम्र बीत जाती थी। आज भाजपा और तृणमूल ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है। तृणमूल के लिए यह बदलाव अभिषेक बनर्जी के न्यू तृणमूल विजन को मजबूती देता है, वहीं भाजपा के लिए यह जेन-जेड और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से जुड़ने का जरिया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>आंकड़ों में युवा झुकाव</strong></div>
<div> </div>
<div>भाजपा: 255 में से 196 उम्मीदवार 55 वर्ष से कम आयु के।</div>
<div>भाजपा: 65 उम्मीदवार हैं 40 वर्ष से कम उम्र के।</div>
<div>तृणमूल: 291 में से 176 उम्मीदवार 31 से 50 वर्ष आयु वर्ग के।</div>
<div>तृणमूल: 60 से अधिक आयु वर्ग की हिस्सेदारी घटकर लगभग 25 प्रतिशत हुई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-bjp-and-tmc-gave-tickets-to/article-147779</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:23:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बंगाल चुनाव: अपनों के विरोध से बेहाल तृणमूल और भाजपा, कहीं भूमिपुत्र की मांग तो कहीं चरित्र पर वार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और टीएमसी दोनों ही आंतरिक कलह से जूझ रही हैं। टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने बांकुड़ा से हावड़ा तक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे हैं, जिससे बागी नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने का खतरा बढ़ गया है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-and-bjp-are-troubled-by-the-opposition-of-their/article-147631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए बाहरी शत्रुओं से ज्यादा घर के विभीषण चुनौती बन गए हैं। टिकट बंटवारे से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर पोस्टर, नारेबाजी और सामूहिक इस्तीफे के रूप में फूट रहा है। बांकुड़ा से लेकर हावड़ा तक, दोनों ही दल उम्मीदवार-कांटे से लहूलुहान नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>तृणमूल: भीतरघात और पुराने चेहरों पर अविश्वास</strong></p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की ज्वाला भड़क रही है। पूर्व बर्द्धमान जिले के खंडघोष और मंतेश्वर में पुराने बनाम नए की लड़ाई सड़क पर आ गई है। कई क्षेत्रों में नेताओं के करीबियों को टिकट मिलने से स्थानीय नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उत्तर 24 परगना और हुगली के कुछ क्षेत्रों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है। कार्यकतार्ओं का तर्क है कि जो नेता पिछले पांच वर्षों में जमीन पर सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर से थोपना हार को निमंत्रण देना है। </p>
<p>हालांकि, पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि ये छोटे-मोटे मतभेद हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। तृणमूल ने इस बार पिछले चुनाव में जीते 74 विधायकों को टिकट नहीं दिया है। वे लोग अब निर्दलीय या फिर अन्य किसी दल से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। बांकुड़ा जिले की छातना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान विधायक सत्यनारायण मुखोपाध्याय को दोबारा टिकट दिए जाने से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक पर तृणमूल का राज्यसभा से बहिर्गमन: डेरेक ओ' ब्रायन का केंद्र सरकार पर कटाक्ष, बोले-सरकार पश्चिम बंगाल में कुछ ज्यादा ही व्यस्त</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 की प्रतियां समय पर न मिलने के विरोध में सोमवार को राज्यसभा से बहिर्गमन किया। डेरेक ओ'ब्रायन ने सरकार पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि सदस्यों को 48 घंटे पहले दस्तावेज मिलने चाहिए थे। टीएमसी नेताओं ने तंज कसा कि सरकार पश्चिम बंगाल में अत्यधिक व्यस्त है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trinamools-walkout-from-rajya-sabha-on-central-armed-police-forces/article-147514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tmc-mp-derek-obrien.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधायक 2026 की प्रति सदस्यों को समय से उपलब्ध नहीं कराए जाने के विरोध में सोमवार को सदन से बहिर्गमन किया। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ' ब्रायन ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद शून्यकाल शुरू होने से पहले यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सदन की आज की कार्य सूची में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधयेक 2026 सूचीबद्ध है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार सदन में पेश किए जाने वाले किसी भी विधायक की प्रति सदस्यों को कम से कम 48 घंटे पहले उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार पश्चिम बंगाल में कुछ ज्यादा ही व्यस्त है।</p>
<p>ब्रायन ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक की प्रति समय से उपलब्ध नहीं कराए जाने के विरोध में सदन सबसे बहिर्गमन कर रही है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सदन से उठकर बाहर चले गए। सशस्त्र पुलिस बल विधेयक सदन में पेश किए जाने के लिए राज्यसभा की आज की कार्य सूची में शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 14:03:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: चुनाव आयोग आज जारी करेगा संशोधित मतदाता सूची, 28.06 लाख लंबित मतदाताओं के डेटा का हो चुका है निपटारा, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आज</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग आज पश्चिम बंगाल के लिए अद्यतन मतदाता सूची का दूसरा चरण जारी करेगा। इसमें 28.06 लाख लंबित प्रविष्टियों का निपटारा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, पारदर्शी प्रक्रिया हेतु 19 न्यायाधिकरण गठित किए गए हैं। साथ ही, 31 मार्च तक केंद्रीय बलों की 300 अतिरिक्त कंपनियां तैनात होंगी ताकि निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-election-commission-will-release-revised-voter/article-147492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-election-2026.png" alt=""></a><br /><p>काेलकाता। चुनाव आयोग आज अद्यतन मतदाता सूची के दूसरे चरण को जारी करेगा, जिसमें अब तक संसाधित किए गए सभी लंबित मतदाता प्रविष्टियों का विवरण प्रकाशित किया जाएगा। आयोग के सूत्रों के अनुसार, रविवार शाम तक राज्य भर में 28.06 लाख लंबित मतदाताओं के डेटा का निपटारा किया जा चुका था। अद्यतन सूचियां आज दोपहर तक जिला चुनाव अधिकारियों तक पहुंचने की उम्मीद है। शाम से मतदाता आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पूरक सूची ऑनलाइन देख सकेंगे।</p>
<p>इसके अलावा सूचियां पूरे पश्चिम बंगाल के बूथों, बीडीओ कार्यालयों, एसडीओ कार्यालयों और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों में भी प्रदर्शित की जाएंगी। आयोग को पहले ही लगभग 40,000 बूथों से अद्यतन रिकॉर्ड प्राप्त हो चुके हैं, जो शुक्रवार तक हुई प्रगति को दर्शाते हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि यह प्रकाशन उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में किया जा रहा है।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी दायरे के भीतर की जा रही है, जिससे सूची जारी होने के बाद विवाद की बहुत कम आशंका रहेगी। अदालत के दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन व्यक्तियों के नाम सूची में नहीं दिखेंगे, उन्हें न्यायाधिकरण में अपील करने का विकल्प मिलेगा। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले ही 23 जिलों के लिए 19 न्यायाधिकरण गठित किए हैं और इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए 19 सेवानिवृत्त न्यायाधीश नियुक्त किए हैं। इससे पहले 28 फरवरी को आयोग ने एक अधूरी मतदाता सूची जारी की थी, जिसमें 60.06 लाख लंबित नाम शामिल थे। अदालत के निर्देशों के बाद, सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए 700 से अधिक कार्यरत और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया है।</p>
<p>इस बीच, रविवार को सीईओ कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती पर चर्चा करने हेतु संयुक्त बल तैनाती समिति से मुलाकात की। बैठक में बलों की संख्या, उनकी तैनाती के स्थान और संचालन रणनीतियों पर विचार किया गया। बैठक में राज्य पुलिस नोडल अधिकारी आनंद कुमार, विशेष पर्यवेक्षक एन.के. मिश्रा तथा केंद्रीय बलों के नोडल अधिकारी शलभ माथुर और गौरव शर्मा उपस्थित रहे।</p>
<p>सूची जारी होने के बाद आयोग ने पुलिस और केंद्रीय बलों दोनों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया है।<br />सूत्रों के अनुसार, 31 मार्च तक राज्य में केंद्रीय बलों की अतिरिक्त 300 कंपनियां पहुंचने की उम्मीद है। आयोग आज राष्ट्रीय राजधानी से शाम चार बजे जिला चुनाव अधिकारियों, जिला मजिस्ट्रेटों, पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों के साथ एक वर्चुअल समीक्षा बैठक भी करेगा। करीब दो घंटे चलने वाली इस बैठक की अध्यक्षता उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग करेंगे।</p>
<p>अन्य अधिकारियों में उप आयुक्त ज्ञानेश भारती और पवन कुमार शर्मा के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल भी मौजूद रहेंगे। बैठक का एजेंडा चुनाव की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन की तैनाती की समीक्षा करना है। जिला अधिकारियों को अपने-अपने योजनाओं का विवरण देते हुए पावरपॉइंट प्रस्तुति संयुक्त रूप से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें आयोग द्वारा आंका जाएगा ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारू और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-election-commission-will-release-revised-voter/article-147492</link>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 13:00:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव के लिए चुनाव आयोग करेगा 2,400 केंद्रीय बल कंपनियों की तैनाती, मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायतें मिलने पर प्रभावित बूथों में दोबारा हो सकता है मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को निष्पक्ष बनाने के लिए 2,400 CAPF कंपनियों की ऐतिहासिक तैनाती का निर्णय लिया है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए सुरक्षा बल पहुंचना शुरू हो गए हैं। बूथ कैप्चरिंग और चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में रूट मार्च और कड़े सुरक्षा मानक लागू किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-election-commission-will-deploy-2400-central/article-147431"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-election1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 2,400 कंपनियों को तैनात करने का निर्णय लिया है। इस कदम को राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के चुनावों के दौरान और बाद में हिंसा को रोकना है।</p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, तैनाती पहले ही शुरू हो चुकी है और केंद्रीय बलों की 480 कंपनियां इस महीने की शुरुआत में राज्य में पहुंच चुकी हैं। शेष 1,920 कंपनियों को आने वाले हफ्तों में चरणबद्ध तरीके से भेजा जाएगा ताकि संवेदनशील और गैर-संवेदनशील दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत किया जा सके।</p>
<p>तैनाती कार्यक्रम के अनुसार, 300 कंपनियों का अगला बैच 31 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद सात, 10, 13 और 17 अप्रैल को और भी तैनाती की जाएंगी। सूत्रों ने कहा कि सात अप्रैल और 10 अप्रैल को 300-300 कंपनियां आएंगी, इसके बाद 13 अप्रैल को 277 कंपनियां और 17 अप्रैल को 743 कंपनियां आएंगी, जिससे मतदान शुरू होने से पहले कुल तैनाती पूरी हो जाएगी। सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने यह भी कहा कि चुनाव समाप्त होने के बाद भी केंद्रीय बलों की लगभग 500 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी।</p>
<p>चूंकि राज्य में चुनाव के बाद हिंसा की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं इसलिए यह कदम चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई अभूतपूर्व उपाय भी किए हैं। केंद्रीय बल केवल मतदान केंद्रों तक ही सीमित नहीं रहेंगे बल्कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की स्थिति में उन्हें मतदान केंद्र परिसर में कहीं भी हस्तक्षेप करने का अधिकार होगा।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं को डराने-धमकाने या धमकियों की शिकायतें मिलने पर प्रभावित बूथों में दोबारा मतदान भी कराया जा सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बूथ पर कब्जा करना, धांधली और हिंसा जैसी चुनावी अनियमितताओं को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इस बीच, सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य में संवेदनशील क्षेत्रों और तथाकथित उपद्रवी क्षेत्रों की पहचान की है। कोलकाता में करीब 30 कंपनियां पहले ही पहुंच चुकी हैं और मतदाताओं में विश्वास जगाने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में रूट मार्च शुरू हो गए हैं। पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए विस्तृत मार्ग मानचित्र तैयार किए हैं। अधिकारियों द्वारा सुचारू और हिंसा-मुक्त चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के प्रयासों को तेज करते हुए, आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी इसी तरह के मार्ग मार्च और सुरक्षा अभ्यास आयोजित किए जाने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-election-commission-will-deploy-2400-central/article-147431</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 16:01:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा से कसी कमर: चुनावी रणनीति तेज की, मोदी-शाह करेंगे चुनाव प्रचार का नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह राज्य भर में 10 से अधिक बड़ी रैलियां और मेगा रोड शो करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन खुद जमीनी तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। पार्टी कोलकाता, सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में आक्रामक प्रचार के जरिए सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य लेकर चल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-tightens-its-belt-regarding-west-bengal-elections-election-strategy/article-147432"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/amit-shah1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी प्रचार रणनीति तेज दी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पार्टी के जनसंपर्क अभियान में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। पार्टी के सूत्रों ने हालांकि, रविवार को यह भी संकेत दिया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पर्यवेक्षकों पर भरोसा करने के बजाय पार्टी के संगठन को सीधे तौर पर देखेंगे।</p>
<p>वर्ष 2021 के चुनावों के विपरीत जो कोविड-19 के कारण बीच में ही बाधित हो गए थे, पार्टी को इस बार शीर्ष केंद्रीय नेताओं द्वारा कई रैलियों और रोड शो सहित एक पूर्ण विकसित अभियान योजना को क्रियान्वित करने की उम्मीद है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी और अमित शाह पूरे राज्य में कई जनसभाओं और रोड शो को संबोधित करेंगे। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान, बढ़ते कोरोना संक्रमणों के कारण दोनों नेताओं ने तीसरे चरण के बाद अपना चुनाव प्रचार कम कर दिया था।</p>
<p>हालांकि, इस बार ऐसी कोई बाधा नहीं है और मतदान में समय भी कम है इसलिए भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि उनकी चुनावी योजना पूरी होंगेी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 24 से 27 अप्रैल के बीच कोलकाता में एक बड़े रोड शो की योजना बनाई जा रही है, जो मतदान के पहले और दूसरे चरण के बीच के अंतराल के अनुरूप है।</p>
<p>"कोलकाता के अलावा, सिलीगुड़ी, दुर्गापुर और आसनसोल जैसे शहरों में भी रोड शो करने का विचार किया जा रहा है। बशर्तें विशेष सुरक्षा समूह से सुरक्षा मंजूरी मिल जाये। भाजपा सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी आने वाले हफ्तों में पूरे राज्य में लगभग दस रैलियों को संबोधित कर सकते हैं और पार्टी द्वारा आक्रामक चुनावी अभियान की तैयारी के अंतर्गत प्रत्येक संगठनात्मक क्षेत्र में कम से कम एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है।</p>
<p>चुनाव प्रचार की गहमागहमी शुरू होने से पहले, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन के 24 से 26 मार्च के बीच पश्चिम बंगाल का दौरा करने की संभावना है। उनके इस दौरे में जनसभाओं के बजाय संगठनात्मक बैठकों को प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है। हालांकि, समय मिलने पर वह जनसभा को संबोधित भी कर सकते हैं।</p>
<p>भाजपा अध्यक्ष केंद्रीय पर्यवेक्षकों की रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी स्तर पर पार्टी की तैयारियों का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए इच्छुक हैं। अपनी यात्रा के दौरान, नबीन उत्तरी बंगाल, राढ़ बंगाल, नबद्वीप, कोलकाता और हावड़ा-हुगली-मेदिनीपुर क्षेत्र के सभी पांच प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्रों के नेताओं के साथ बैठक करने कर सकते हैं। परंपरागत रूप से, इस तरह की बैठकें सुनील बंसल या भूपेंद्र यादव जैसे केंद्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा संभाली जाती रही है। हालांकि, नवीन पार्टी की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए जमीनी स्तर के नेतृत्व के साथ सीधे जुड़कर अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने के लिए दृढ़ संकल्पित दिखाई देते हैं।</p>
<p>नवीन की यात्रा के बाद, संभवतः राम नवमी के बाद या 30 मार्च के बाद प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव प्रचार दौरा शुरू होने की उम्मीद है, हालांकि अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि अभी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा किया जाना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल​ विधानसभा चुनाव: अधिकारियों के तबादलों को हाईकोर्ट में चुनौती, चुनाव आयोग की शक्तियों पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग द्वारा बंगाल के IAS और IPS अधिकारियों के तबादलों को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए इसे राज्य प्रशासन में हस्तक्षेप बताया। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ अगले सप्ताह इस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी, जो चुनावी निष्पक्षता और शक्तियों की सीमा तय कर सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/transfers-of-west-bengal-assembly-election-officers-challenged-in-high/article-147222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-ec.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों का मामला अब कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंच गया है। एक याचिका में चुनाव आयोग के उस अधिकार को चुनौती दी गयी है, जिसके तहत अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने न्यायालय का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि आयोग के पास इस तरह से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों को राज्य से बाहर भेजने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इससे राज्य प्रशासन के सामान्य कामकाज पर असर पड़ता है।</p>
<p>इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के अधिवक्ता अर्क नाग जनहित याचिका दाखिल करेंगे। न्यायालय से याचिका दाखिल करने की अनुमति देने की मांग करते हुए बनर्जी ने तबादला आदेशों पर रोक लगाने का आग्रह किया है। मुख्य न्यायाधीश सुजोय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है और मामले की सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है।</p>
<p>यह विवाद चुनाव आयोग द्वारा रविवार आधी रात से लेकर गुरुवार तक किये गये बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद उत्पन्न हुआ है। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है। कई जिलों के जिलाधिकारियों का भी तबादला किया गया है और नये अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाये गये अधिकारियों को फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इनमें से कई अधिकारियों को अन्य राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में पहले ही प्रतिनियुक्त किया गया है।</p>
<p>तबादलों की इस कार्रवाई पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जतायी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आयोग के फैसलों पर सवाल उठाये हैं। अब इस मामले के उच्च न्यायालय में पहुंच जाने के बाद चुनाव आयोग की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र की सीमा का कानूनी परीक्षण होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 18:22:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बीजेपी ने बंगाल में जारी की 111 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट: रूपा गांगुली-निशीथ प्रमाणिक को टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 111 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में रूपा गांगुली, निशीथ प्रमाणिक और प्रियंका तिबरेवाल जैसे दिग्गज चेहरों के साथ पूर्व आईपीएस अधिकारियों और टॉलीवुड सितारों को भी मौका मिला है। टीएमसी को कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी ने अनुभवी और ग्लैमरस चेहरों का संतुलित दांव खेला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-released-second-list-of-111-candidates-in-bengal-ticket/article-147140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-bjp.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। बीजेपी ने अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी है और इस बार चुनावी मैदान में 111 उम्मीदवारों के नाम फाइनल किए गए हैं। इस लिस्ट को देखकर साफ लग रहा है कि पार्टी ने जीत के लिए पूरी जान झोंक दी है। लिस्ट में सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि नामी चेहरे, पूर्व सरकारी अफसर और बंगाली सिनेमा के सितारे भी शामिल हैं। बीजेपी का यह दांव बंगाल की सत्ता में सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।</p>
<p>इस बार की लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व लोकसभा सांसद रूपा गांगुली और निशीथ प्रमाणिक जैसे बड़े नामों की हो रही है। रूपा गांगुली को सोनारपुर दक्षिण से टिकट दिया गया है, जो वहां की राजनीति में एक बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय निशीथ प्रमाणिक को माथाभांगा सीट से चुनावी दंगल में उतारा गया है। इन चेहरों को उतारकर बीजेपी ने यह संदेश दे दिया है कि वह बंगाल के हर कोने में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और टीएमसी को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है।</p>
<p>दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भी मौका: दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में सिर्फ पुराने बीजेपी नेता ही नहीं, बल्कि हाल ही में दूसरी पार्टियों से आए चेहरों को भी जगह मिली है। पूर्व टीएमसी नेता तापस रॉय को मानिकतला से टिकट मिला है, तो वहीं बैरकपुर से कौस्तव बागची पर भरोसा जताया गया है। आईपीएस अधिकारी रहे डॉ. राजेश कुमार को जगतदल सीट से मैदान में उतारा गया है, जो बताता है कि पार्टी अनुभवी और पढ़े-लिखे चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<p><strong>चुनावी दंगल में उतरे फिल्मी सितारे और फायरब्रांड नेता</strong></p>
<p>बात करें ग्लैमर और तेवर की, तो टॉलीगंज सीट से अभिनेता पापिया अधिकारी को टिकट दिया गया है, जिससे वहां मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। इसके अलावा, बीजेपी की फायरब्रांड नेता प्रियंका तिबरेवाल को एंटाली से मैदान में उतारा गया है। प्रियंका हमेशा से अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं। वहीं अर्जुन सिंह को नोआपारा से टिकट देकर पार्टी ने अपने पुराने गढ़ को बचाने की कोशिश की है। बीजेपी की इस दूसरी लिस्ट ने बंगाल चुनाव के माहौल को और भी गरमा दिया है। एक तरफ जहां टीएमसी अपनी जीत का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी के इन 111 नामों ने विपक्ष के खेमे में भी खलबली मचा दी है। लोगों के बीच अब बस यही चर्चा है कि क्या ये बड़े चेहरे और पूर्व आईपीएस अधिकारी बंगाल की जनता का दिल जीत पाएंगे? या फिर ममता बनर्जी का किला भेदन इतना आसान नहीं होगा? </p>
<p>अब मुकाबला दिलचस्प हो गया है क्योंकि टिकट मिलने के बाद अब असली जंग जमीन पर शुरू होगी। कार्यकर्ताओं में उत्साह है और उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी सीटों पर घेराबंदी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में बंगाल की सड़कों पर चुनावी रैलियों और नारों का शोर और तेज होने वाला है। देखना होगा कि 111 उम्मीदवारों की ये फौज बीजेपी की नैया पार लगा पाती है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 12:01:39 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: सीएम ममता का चुनाव आयोग पर तीखा हमला, राज्य के खिलाफ अभूतपूर्व हस्तक्षेप और पक्षपात का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए 50 से अधिक अधिकारियों के तबादले को 'अघोषित आपातकाल' करार दिया है। उन्होंने आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने और संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया। ममता ने स्पष्ट किया कि बंगाल धमकियों के आगे नहीं झुकेगा और चुनावी शुचिता के लिए संघर्ष जारी रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-cm-mamatas-sharp-attack-on-the/article-147158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mamta-banerjee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए आगामी चुनावों से पहले राज्य के खिलाफ अभूतपूर्व हस्तक्षेप और पक्षपात का आरोप लगाया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट संदेश में बनर्जी ने दावा किया है कि आयोग ने पश्चिम बंगाल को चुन-चुनकर निशाना बनाया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कई अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों सहित 50 से अधिक वरिष् अधिकारियों को चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही मनमाने ढंग से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, यह कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप है। मुख्यमंत्री ने इन घटनाक्रमों को संस्थानों के बढ़ते राजनीतिकरण का हिस्सा बताया। बनर्जी ने कहा, जिन संस्थानों को निष्पक्ष रहना चाहिए, उनका व्यवस्थित राजनीतिकरण करना सीधे तौर पर संविधान पर हमला है। उन्होंने आगे कहा कि आयोग का यह आचरण स्पष्ट पक्षपात और राजनीतिक हितों के सामने आत्मसमर्पण को दर्शाता है। </p>
<p><strong>प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का आरोप  </strong></p>
<p>उनकी यह टिप्पणी राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आयी है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अक्सर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का आरोप लगाती रही है। बनर्जी ने मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी चिंता जतायी। उन्होंने इस प्रक्रिया को बेहद त्रुटिपूर्ण बताया और आरोप लगाया कि इससे जनता में घबराहट पैदा हुई है। उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना करते हुए अभी तक पूरक मतदाता सूची प्रकाशित नहीं की गयी है, जिससे नागरिक अनिश्चितता की स्थिति में हैं। </p>
<p><strong>उन्होंने सवाल किया, भाजपा इतनी बेताब क्यों है? </strong></p>
<p>बंगाल और यहां के लोगों को लगातार निशाना क्यों बनाया जा रहा है? बनर्जी ने पार्टी पर आरोप लगाया कि आजादी के दशकों बाद भी नागरिकों को कतारों में खड़े होने और अपनी नागरिकता साबित करने को मजबूर करने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने आयोग की कार्रवाइयों में विरोधाभासों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया था, उन्हें कुछ ही घंटों के भीतर फिर से चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात कर दिया गया। उन्होंने सिलीगुड़ी और बिधाननगर जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों का उदाहरण दिया, जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बिना किसी तत्काल विकल्प के पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया गया। उनके अनुसार, इससे महत्वपूर्ण शहरी केंद्र प्रभावी रूप से बिना मुखिया के रह गये हैं। बनर्जी ने कहा, यह शासन नहीं है। यह अराजकता, भ्रम और घोर अक्षमता को सत्ता के रूप में पेश करने जैसा है। बनर्जी ने स्थिति को अघोषित आपातकाल और राष्ट्रपति शासन का अघोषित रूप करार दिया। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि यह जबरदस्ती और संस्थानों के दुरुपयोग के जरिए पश्चिम बंगाल पर नियंत्रण करने की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ राज्य की सेवा करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। बंगाल कभी धमकियों के आगे नहीं झुका ममता ने जोर देकर कहा, बंगाल कभी धमकियों के आगे नहीं झुका है और न कभी झुकेगा। बंगाल लड़ेगा, बंगाल प्रतिरोध करेगा और अपनी धरती पर विभाजनकारी तथा विनाशकारी एजेंडा थोपने की हर कोशिश को निर्णायक रूप से शिकस्त देगा। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। राज्य जैसे-जैसे अगले चुनावी चक्र की ओर बढ़ रहा है, इस विवाद ने पहले से ही गर्म राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल इस बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:59:55 +0530</pubDate>
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