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                <title>wild animals - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>121 साल पुराने पिंजरों में रखे जा रहे रेस्क्यू जंगली जानवर</title>
                                    <description><![CDATA[1905 में बना था रियासतकालीन चिड़ियाघर, तब के पिंजरों का हो रहा उपयोग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rescued-wild-animals-are-being-kept-in-121-year-old-cages/article-165099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। 121 साल पुराने रियासतकालीन चिड़ियाघर से पिंजरा तोड़ सैंकड़ों मॉर्निंग वाकर्स के बीच पहुंचा लेपर्ड ने वन्यजीव प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी। घटना के एक घंटे बाद विभाग को जानकारी लगना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है, चिड़ियाघर में रखे पिंजरे 1905 के बने हुए हैं, जो 100 साल से ज्यादा पुराने होने व जंग लगे होने से जगह-जगह से गल रहे हैं। जंगली वन्यजीवों को ऐसे पिंजरों में रखने से पहले अधिकारियों को इन संभावनाओं पर पिंजरे की जांच करनी चाहिए थी, जो घटना से स्पष्ट होता है कि न तो पिंजरे की मरम्मत करवाई गई और न ही कैज मजबूती परखी गई। हालांकि, सीसीएफ ने मामले की जांच शुरू करवा दी है। इधर, डीएफओ प्रमोद धाकड़ का कहना है कि इस पिंजरे में पिछले एक साल में करीब 8 से 10 रेस्क्यू लेपर्ड रख चुके हैं लेकिन इस तरह की घटना नहीं हुई।</p>
<p><strong>वन्यजीव प्रेमियों ने उठाए सवाल</strong><br />-चिड़ियाघर में मौजूद वन्यजीवों की देखरेख के लिए 6 से ज्यादा स्टाफ नियुक्त हैं, तो घटना का पता एक घंटे बाद क्योें लगा?<br />-बरसों पुराने पिंजरे वाइल्ड एनिमल को रखने लायक है या नहीं, इसकी जांच क्यों नहीं की गई?<br />-सीवी गार्डन में यदि कोई जनहानी हो जाती तो जवाबदेही किसकी होती।<br />-चिड़ियाघर में पिछले एक साल से 6 वर्षीय भालू रखा है, उसका पिंजरा नहीं टूटा तो इसका कैसे?</p>
<p><strong>केयर टेकर को किया एपीओ</strong><br />रियासतकालीन चिड़ियाघर से पिंजरा तोड़ सीवी गार्डन में पहुंची लेपर्ड के मामले में संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक डॉ. टी.मोहनराज ने केयर टेकर वसीम को एपीओ किया है।यह जानकारी डीएफओ प्रमोद कुमार धाकड़ ने दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 14:31:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - नवज्योति इम्पेक्ट : राजस्थान में पहली बार अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को मिली स्पोंसरशिप, कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम में कोटा को मिली सफलता </title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित कर वन विभाग को ध्यान इस ओर आकर्षित किया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---navjyoti-impact--for-the-first-time-in-rajasthan--abheda-biological-park-receives-sponsorship--kota-achieves-success-in-the-captive-animal-sponsorship-scheme/article-132704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क के लिए रविवार का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। राजस्थान में पहली बार किसी औद्योगिक संस्थान ने 5 प्रजातियों के एक दर्जन वन्यजीवों की सम्पूर्ण पालन-पोषण की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए एनटीपीसी ने टाइगर, लैपर्ड व हायना सहित 12 वन्यजीवों को 17 लाख रुपए में गौद लिया है। जिनके भोजन, दवाइयां, वैक्सीनेशन व एनक्लोजर मेंटिनेंस सहित देखभाल का सम्पूर्ण खर्चा उठाएगी। औद्योगिक संस्थान ने यह पहल वन विभाग की कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम के तहत की है। इस स्कीम को यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस कदम से न केवल वन्यजीवों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि पार्क के रखरखाव और वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।</p>
<p><strong>इन शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों को लिया गोद</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि एनटीपीसी औद्योगिक संस्थान ने अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क के 5 प्रजातियों के 12 वन्यजीवों को गोद लिया है। जिसमें 1 टाइग्रेस, 4 लेपर्ड, 3 हायना, 1 चिंकारा और 1 सांभर शामिल है। कम्पनी द्वारा इन वन्यजीवों के पालन-पोषण सहित सम्पूर्ण देखभाल के लिए 17 रुपए वन विभाग को दिए हैं। राजस्थान में पहली बार कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम के तहत अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को यह सफलता मिली है। </p>
<p><strong>1500 पौधे लगाने के लिए 10.50 लाख रु.की सहमति</strong><br />डीएफओ भटनागर ने बताया कि एनटीपीसी द्वारा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 1500 पौधे लगाने और तीन साल के मेंटिनेंस के लिए 10.50 लाख रुपए दिए जाने की सैदांतिक सहमति दी गई है। इससे पार्क में घना जंगल विकसित हो सकेगा। इससे पहले यहां 7 हजार पौधे लगाए गए थे, जो अब पेड़ में बदल गए हैं। वहीं, साढ़े तीन किमी के परिसर में हजारों की तादात में बड़े वृक्ष जड़े फैला चुके हैं। जिन पर बड़ी संख्या में देशी विदेशी परिंदों का बसेरा बसा हुआ है। वनकर्मियों के परिश्रम से यहां पर्यटकों के लिए खूबसूरत जंगल विकसित किया गया है। </p>
<p><strong>वन्यजीव विभाग को आज सौंपा जाएगा 17 लाख का चैक</strong><br />डीएफओ भटनागर ने बताया कि सोमवार शाम 4 बजे अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें मुख्य अतिथि एनटीपीसी औद्योगिक संस्थान के डायरेक्टर(आॅपरेशनल) रविंद्र कुमार द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभाग को 17 लाख रुपए का चैक सौंपा जाएगा। इस दौरान परिसर में पौधरोपण भी किया जाएगा। </p>
<p><strong>नवज्योति के प्रयास लाए रंग, जताया आभार  </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क प्रदेश का सबसे बड़ा पार्क होने के बावजूद बजट की कमी से जूझता है। जिसकी वजह से वन्यजीवों की देखभाल में कमी महसूस होती थी। जिसे देखते हुए दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित कर वन विभाग को ध्यान इस ओर आकर्षित किया। इसके बाद विभाग ने प्रदेशभर में कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम शुरू कर वन्यजीवों को गोद दिए जाने की सकारात्मक पहल की। जिसका लगातार फॉलो-अप किया गया। नवज्योति के प्रयासों का असर इतना गहरा रहा कि प्रदेश में पहली बार किसी कॉपोर्रेट जगत ने अभेड़ा के वन्यजीवों को पालन-पोषण की जिम्मेदारी सामाजिक सरोकार में अपने कंधों पर उठा ली।</p>
<p><strong>कॉपोर्रेट सेक्टर में बढ़ेगी वन्यजीवों के प्रति संरक्षण की भावना</strong><br />उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा कैप्टिव एनिमल स्पॉन्सरशिप स्कीम को वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। लगातार किए जा रहे प्रचार-प्रसार के बाद पहली बार किसी बड़ी कंपनी ने इस दिशा में पहल करते हुए वन्यजीवों को गोद लेने में रुचि दिखाई। एनटीपीसी को सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत इस योजना की जानकारी दी गई थी, जिस पर कंपनी प्रशासन ने सकारात्मक कदम बढ़ाते हुए तत्काल सहमति दी। यह पहल न केवल अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क बल्कि राजस्थान के समग्र वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक मिसाल बनेगी। कॉपोर्रेट सेक्टर की इस भागीदारी से अन्य संस्थाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 15:41:14 +0530</pubDate>
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                <title>6 दिन दबाकर खा रहे और 1 दिन उपवास कर रहे जंगली जानवर </title>
                                    <description><![CDATA[चिड़ियाघर व बायोलॉजिकल पार्क के वन्यजीवों को मिलेगी बूस्टर डोज।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wild-animals-are-eating-heavily-for-6-days-and-fasting-for-1-day/article-96231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/saat-din-dba-k-kha-rhe-or-ek-din-upvas-kr-rhe-jangli-janwar...kota-news-29-11-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दियां तेज होते ही अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क व चिड़िया घर के जंगली जानवरों की मौज हो गई।  सप्ताह में 6 दिन दबाकर भोजन कर रहे और 1 दिन उपवास कर अपने पाचन तंत्र मजबूत कर रहे हैं।  दरअसल, सर्दी की दस्तक के साथ ही 20 नवम्बर से वन्यजीवों का डाइट प्लान पूरी तरह से बदल दिया गया है, जो फरवरी तक जारी रहेगा। इन दिनों उनकी खुराक बढ़ाने के साथ डाइट में मल्टी विटामिन, कैल्शियम, मिनरल्स व लीवर टॉनिक शामिल की गई है। वहीं, इंफेक्शन से बचाने के लिए पिंजरों में हल्दी का छिड़काव किया गया और शीत लहरों से बचाव के लिए पिंजरों के बाहर हीटर लगााए गए हैं।  साथ ही नाइट शेल्टर में चावल की पराल बिछाई गई है।  सप्ताह में एक दिन हर मंगलवार को मांसाहारी वन्यजीवों को भूखा रख उपवास कराया जा रहा है। ताकि, जिससे उनकी पाचन तंत्र मजबूत बनी रहे और पेट से संबंधित बीमारियां न हो। </p>
<p><strong>नाइट शेल्टर में लगे हीटर व पर्दे </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. विलास राव गुल्हाने ने बताया कि सर्दी से बचाव के लिए शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सभी वन्यजीवों के नाइट शेल्टरों में पर्दे लगाए गए हैं। लॉयन, टाइगर, जरख, सियार, भेडिया व भालू के नाइट शेल्टर से 10 फीट की दूरी पर हीटर लगा दिए गए हैं। साथ ही पिंजरों का फर्श न गले इसके लिए चावल की पराल बिछाई गई है।  </p>
<p><strong>हर मंगलवार को मांसाहारी वन्यजीवों का व्रत</strong><br />वन्यजीव चिकित्सक गुल्हाने ने बताया कि बायोलॉजिकल पार्क में मौजूद सभी मांसाहारी वन्यजीवों को सप्ताह में हर मंगलवार को निराहार रखा जाता है। एक टाइम भूखे रहने से उनका हाजमा सही रहता है। इसीलिए चिड़ियाघरों में रहने वाले मांसाहारी वन्यजीवों को सप्ताह में एक दिन फास्टिंग कराई जाती है ताकि डाइजेशन और एक्टिवनेस बनी रहे।</p>
<p><strong>टाइगर-लॉयन 12 किलो  मांस, मल्टी विटामिन </strong><br />डॉ. गुल्हाने ने बताया कि डाइट प्लान के हिसाब से लॉयनेस व बाघिन को 8-8 किलो पाड़ा मांस के साथ 4-4 किलो मुर्गा (प्रति एनिमल) दिया जाएगा। इसके अलावा मल्टी विटामिन, मल्टी मिनरल्स, कैल्शियम के अलावा लीवर टॉनिक भी दिया जाएगा। यह मिनरल मिक्चर (सप्लीमेंट्स) 20 एमएल हर दिन मांस के टुकड़ों पर मिलाकर देंगे। जिससे इनके शरीर में ऊर्जा का संचार बेहतर होने के साथ पाचन तंत्र भी मजबूत होगा। </p>
<p><strong>मांसाहारी वन्यजीवों का डाइट प्लान</strong><br /><strong>भालू की मौज, पिंडखजूर व फलों की उड़ा रहा मौज </strong><br />सर्दियों में सबसे ज्यादा मजे भालू के हैं। यहां 2 भालू है, जिसे डाइट में प्रतिदिन 3-3 किलो मौसमी फल, 1.5 किलो दलिया, 2 लीटर दूध, 20 ग्राम शहद, 100 ग्राम पिंड खजूर, 50-50 ग्राम पिंड खजूर प्रतिदिन डाइट में शामिल किए गए हैं। साथ ही मल्टीविटामिन, कैल्शियम व मिनरल्स भी दिए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>पिंजरों में हल्दी का छिड़काव व बिछाई पराल</strong><br />बायॉलोजिकल पार्क में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों को सर्दी के साथ इंफेक्शन से बचाव के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। उनके एनक्लोजर और नाइट शेल्टरों व एनक्लोजर में हल्दी का छिड़काव किया है ताकि, उनके शरीर पर कोई चोट लग जाए तो हल्दी लगने से इंफेक्शन नहीं होगा।    </p>
<p><strong>3 किलो मांस के साथ कैल्शियम खाएगा पैंथर </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों की डाइट में हैल्दी पोषक तत्व शामिल किए गए हैं। यहां 4 लेपर्ड हैं। जिन्हें प्रति लेपर्ड को प्रतिदिन 3 किलो पाड़ा मांस, सियार को एक किलो मांस, 2 भेड़िए को 2 किलो के हिसाब से रोजाना 8 किलो तथा 3 हायना को भी 2 किलो के हिसाब से 6  किलो तथा 4 सियार को 4 किलो मीट प्रतिदिन खिलाया जा रहा है। साथ ही सप्लीमेंट में मल्टी विटामिन, कैल्शियम, लीवर टॉनिक भी दिए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>फरवरी तक रहेगा शेड्यूल</strong><br />शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों का डाइट प्लान तैयार कर लिया गया है। जिसे 20 नवम्बर से लागू कर दिया गया है। सर्दियों में वन्यजीवों की खुराक बढ़ जाती है। ऐसे में डाइट में जरूरी पोषक तत्वों को शामिल किया गया है।  सर्दी का यह शेड्यूल फरवरी तक जारी रहेगा।  <br /><strong>- डॉ. विलास राव गुल्हाने, वन्यजीव चिकित्सक अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2024 14:38:31 +0530</pubDate>
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                <title>सेंचुरी में एक भी घड़ियाल नहीं, चिड़ियाघर में नजरबंद पड़े</title>
                                    <description><![CDATA[ चिड़ियाघर में दो दर्जन से अधिक वन्यजीव, पर्यटकों के लिए खोले तो राजस्व में हो बढ़ोतरी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-not-a-single-gharial-in-the-sanctuary--they-are-under-house-arrest-in-the-zoo/article-91058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की चंबल घड़ियाल सेंचुरी में एक भी घड़ियाल नहीं है, लेकिन कोटा रियासतकालीन चिड़ियाघर में दो घड़ियाल हैं जो पिछले तीन साल से नजरबंद हैं। वन्यजीव विभाग न तो इन्हें अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट कर रहा और न ही चिड़ियाघर को पर्यटकों के लिए खोल रहा। नतीजन, कोटा में घड़ियाल होने के बावजूद कोटावासी देख नहीं पा रहे। वहीं, बायोलॉजिकल पार्क शहर से करीब 7-8 किमी दूर हैं,जबकि चिड़ियाघर बीच सिटी में होने से लोगों की पहुंच आसान है। यहां मगरमच्छ से लेकर अजगर तक चार दर्जन से अधिक वन्यजीव हैं।  यदि, चिड़ियाघर को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए तो वन्यजीव विभाग के राजस्व में इजाफा होगा। </p>
<p><strong>45 से ज्यादा वन्यजीव नजरों से दूर</strong><br />चिड़ियाघर में 45 से अधिक अधिक वन्यजीव हैं। यहां, घड़ियाल के अलावा मगरमच्छ, अजगर, 3 फीट उंचे पेलिकन हवासिल सहित लव बडर्स के साथ विविध पक्षियों का संसार बसा है। कोटावासियों को न तो इन पक्षियों का दीदार करने दिया जा रहा और न ही चिड़िया घर के दरवाजे खोले जा रहे। नतीजन, बंदरों की विशेष प्रजाति बोनट, पहाड़ी कछुए और हवा में कालाबाजी दिखाते नाइट हेरोन व विसलिंग टिल पक्षी कद्रदानों की झलक पाने को तरस गए। </p>
<p><strong>वन्यजीवों की कमी, पर्यटकों का रुझान कम</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर की मौत के बाद कोई बड़ा एनीमल नहीं लाया गया। यहां विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी ऐमू, फॉक्स, लॉयन, टाइगर जैसे बड़े वन्यजीवों की कमी है। जबकि, चिड़ियाघर में करीब 8 फीट लंबे घड़ियाल का जोड़ा, मगरमच्छ,  अजगर, पहाड़ी कछुए सहित तीन दर्जन से अधिक वन्यजीव होने के बावजूद न तो उन्हें शिफ्ट कर रहे और न ही उन्हें देखने के लिए चिड़ियाघर के दरवाजे खोले। नतीजन, बायोलॉजिकल पार्क में विजिर्ट्स का रुझान घटता जा रहा है। </p>
<p><strong>चिड़ियाघर में यह हैं वन्यजीव</strong><br />कोटा चिड़ियाघर में वर्तमान में बंदरों की विशेष प्रजाति के 2 बोनट, 18 पहाड़ी कछुए, पानी के 5 कुछए, तीन फीट ऊंचे पेलिकन हवासिल, 8 से 10 फीट लंबे 4 अजगर जोड़े में, 2 घड़ियाल, 2 मगरमच्छ तथा पक्षियों में इग्रेट, स्पॉट बिल्ड डक, विसलिंग टिल, कोम्ब डक, नाइट हेरोन, पोण्ड हेरोन, बारहेडेड गूज, राजहंस बतख, तोता, लवबर्ड्स सहित कुल 48 तरह के वन्यजीव हैं, जो तीन साल से पर्यटकों के लिए नजर बंद हैं। </p>
<p><strong>क्या है कारण</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण का निर्माण कार्य वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। 1 जनवरी 2022 को पर्यटकों के लिए खोला गया। निर्माण के दौरान यहां 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जायका प्रोजेक्ट के तहत 25 करोड़ का बजट मिलना था, जो नहीं मिल सका। इसकी वजह से द्वितीय चरण के तहत  होने वाले निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाए। ऐसे में जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, घड़ियाल सहित अन्य वन्यप्राणी बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक </strong><br />आकाशवाणी निवासी आरिफ खान, वियज सिंह, बजरंग नगर के पुष्पेंद्र सिंह, नवाजिश अहमद, रघुवीर कुमार कहते हैं, बायोलॉजिकल पार्क नयापुरा से करीब 5 से 6 किमी दूर है। जबकि, चिड़ियाघर एक से डेढ़ किमी की दूरी पर ही है। ऐसे में चिड़ियाघर के दरवाजे पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए तो न केवल विभाग का राजस्व बढ़ेगा बल्कि पर्यटन भी बढ़ेगा। इधर, दादाबाड़ी निवासी संतोष, शंभू यादव कहते हैं, बायोलॉजिकल पार्क में बड़े एनीमल तो है नहीं, चिड़ियाघर में है तो जाने की परमिशन नहीं। वन विभाग को जू फिर से खोलना चाहिए।</p>
<p>चिड़ियाघर में सभी वन्यजीवों का विशेष ध्यान रखा जाता है। यहां के वन्यप्राणियों को बायोलॉजिकल में शिफ्ट किया जाना है, लेकिन बजट के अभाव में एनक्लोजर नहीं बन पाए। जिसकी वजह से इनकी शिफ्टिंग नहीं हो पा रही। हालांकि, बजट के लिए सरकार को लिखा जा चुका है। वहीं, बायोलॉजिकल पार्क में ऐमु, टाइगर व चिंकारा लाने के प्रयास जारी हैं।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-not-a-single-gharial-in-the-sanctuary--they-are-under-house-arrest-in-the-zoo/article-91058</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Sep 2024 15:49:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रदेश के वन क्षेत्रों सहित टाइगर रिजर्वो में शुरू हुई वन्यजीव गणना </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों सहित टाइगर रिजर्वो में सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है। इस दौरान इस गणना में बिग कैट्स, बर्डस सहित विभिन्न प्रजातियों के सांपो को शामिल किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-counting-of-wild-animals-started-in-tiger-reserves-in-state/article-9845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/446545465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों सहित टाइगर रिजर्वो में सुबह 8 बजे से वन्यजीवों की गणना शुरू हो गई है। इस दौरान इस गणना में बिग कैट्स, बर्डस सहित विभिन्न प्रजातियों के सांपो को शामिल किया गया है।</p>
<p>रेंजर जनेश्वर चौधरी ने बताया कि झालना और वन क्षेत्रों में वॉटर पोईंट के आसपास पेड़ पर मचान बनाई गई है, जहां वनकर्मी और स्वयंसेवी संस्थानों के सदस्य देखरेख कर रहे है। जैसे ही वन्यजीव दिखाई देंगे। वह उनकी जानकारी एकत्रित करते जाएंगे। इसके अतिरिक्त ट्रैप कैमरे भी लगाए गए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 12:27:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>एक हजार वन्य जीवों के अवशेष बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[स्पेन पुलिस ने एक हजार से अधिक वन्य जीवों के अवशेष बरामद किए हैं, जिनकी खाल के भीतर कोई अन्य सामान भर दिया गया था। इन्हें स्पेन के वैलेन्सिया नामक शहर में एक निजी संग्रहालय से बरामद किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/remains-of-one-thousand-wild-animals-recovered/article-7765"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मैड्रिड। स्पेन पुलिस ने एक हजार से अधिक वन्य जीवों के अवशेष बरामद किए हैं, जिनकी खाल के भीतर कोई अन्य सामान भर दिया गया था। इन्हें स्पेन के वैलेन्सिया नामक शहर में एक निजी संग्रहालय से बरामद किया गया है। इनकी कीमत लगभग 2.9 करोड़ यूरो या 2.4 करोड़ पौंड कूती गई है। इस संग्रहण में 198 हाथी दांत शामिल हैं। साथ ही चीते, सफेद हरिण और दुर्लभ प्रजाति एवं लुप्तप्राय प्राणियों के अवशेष एवं अन्य वस्तुएं भरी हुई खालें बरामद की गई हैं। ये चीजें जानवरों के खालों के परिधान का व्यवसाय करने वाले एक निजी संग्रहालय से बरामद की गई हैं।</p>
<p>एक हजार से अधिक इन अवशेषों में 405 संरक्षित वन्य जीवों के अवशेष हैं। जिनमें से कम से कम एक प्राणी तो अब विलुप्त हो चुका है। उल्लेखनीय है कि सफेद हरिण पहले अफ्रीका के अनेक भागों में पाए जाते थे। यह अत्यंत सुन्दर प्राणी चमड़े की कोमलता और चटक सफेद रंग के लिए मशहूर था। अत्यधिक शिकार के कारण अब यह लुप्तप्राय हो चुका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार संरक्षित जानवरों के अवशेष पाए जाने की यह स्पेन में अब तक की सबसे बड़ी घटना है। इनमें हाथी दांत, चीता एवं सफेद हरिण की खालें शामिल हैं। जिस व्यक्ति के यहां यह बरामदगी हुई है, उसके खिलाफ तस्करी और प्राणियों एवं वनस्पतियों के संरक्षण कानून के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Apr 2022 09:53:35 +0530</pubDate>
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