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                <title>mbs hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला</title>
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                        <![CDATA[17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर के सरकारी आवासीय कॉलोनी की बदहाल स्थिति ने स्थानीय निवासियों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा में गंभीर समस्या पैदा कर दी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान न दिए जाने के कारण यह सरकारी आवास खण्डहरों में तब्दील हो चुके है। यहाँ रहने वाले परिवारों ने इन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया  है। एक समय ये आवास चिकित्सकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इनमें रहने की संभावना न के बराबर है। कर्मचारयों के यहां से जाने के बाद इन्हे तुड़वाने का एस्टीमेट बनाने के लिये सार्वजनिक निर्माण विभाग को कहा गया लेकिन तभी से यह खाली घर और भी जानलेवा हो चुके हे।</p>
<p><strong>खण्डहर में तब्दील आवासों की खौफनाक तस्वीर</strong><br />अस्पताल परिसर में 64 सरकारी आवासों में से 35 आवासों की संख्या आवंटित की गई थी। हालांकि, इनमें से 17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं और 7 ही ऐसे हैं जो किसी तरह रहने योग्य माने जा सकते हैं। इन खण्डहरों के अंदर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारें, छतें और अन्य संरचनाएं गिरने का खतरा बनी रहती हैं। अस्पताल प्रशासन ने इन आवासों को पूरी तरह छोड़ दिया है, जिससे न केवल आवासीय कॉलोनी, बल्कि आसपास के लोग भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नशेड़ियों से सुरक्षा को गम्भीर खतरा</strong><br />नशा मुक्ति केन्द्र के पास स्थित खाली आवासीय ढांचे दिन भर दवाई लेने आने वाले लोगों से भरे रहते हैं, लेकिन रात के समय ये खाली मकान नशे के आदि लोगों के आश्रय स्थल में बदल जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्मैक और इंजेक्शन से नशा करने वाले नशेड़ियों की टोलियां यहाँ मंडराती रहती हैं और कभी-कभी अपने साथ महिलाओं को भी लेकर आती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन खंडहरों में नशेड़ी गैंग के जमा होने से कई सुरक्षा खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। खाली मकानों की दीवारें गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, साथ ही इन जगहों पर चोरी और अन्य अपराध की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसके चलते अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खंडहरों को नशेड़ी और स्मैकचियों का अड्डा बनने से न केवल चोरी और अव्यवस्था बढ़ी है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p><strong>झाड़ियां और पेड़ों से बढ़ता जंगली जानवरों का खतरा</strong><br />परिसर में स्थित इस क्षेत्र में काफी घनी झाड़ियाँ उग आई है यहां पुराने पेड़ होने से घना जंगल बन गया है अभाी हाल ही में यहां सांभर नजर आ रहा है ।साथ ही जहरीले सांप, बिच्छू और गिरगिट जैसे खतरनाक जानवरों की उपस्थिति से क्षेत्र के निवासियों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर बरसात के मौसम में इस समस्या में वृद्धि हो जाती है। इन जानवरों के कारण, न केवल अस्पताल परिसर में रहने वाले लोग, बल्कि आसपास के नागरिक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी की टूटी सड़क पर फैला सीवरेज का पानी</strong><br />इन्ही खाली पड़े आवासों के पास नयी मोर्चरी भवन की शुरूआत की गयी थी । ऐसे में यहां आने वाले परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इस सड़क के दोनों और मिट्टी और कंस्ट्रक्शन का मलबा पड़ा हुआ है । साथ ही नयी क्वार्टरर्स के पास सड़क पर ही सीवरेज का पानी जमा हुआ रहता है।</p>
<p><strong>चुप्पी तुड़वाने  में ही लग गये 2 साल</strong><br />अस्पताल प्रशासन भले ही खण्डहर हो चुके आवासों की जगह नये आवास बनाने के लिये प्रक्रिया प्रारम्भ करने की बात कह रहा है लेकिन पिछले ढ़ाई सालों से अव्यवस्थाओं के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अन्य डुप्लेक्स आवासों में रह रहे स्टाफ इस स्थिति से परेशान हैं और उनका कहना है कि अगर प्रशासन जल्द ही इस पर ध्यान नहीं देता, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। खण्डहर आवासों की मरम्मत और रख-रखाव की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई की व्यवस्था, और जहरीले जानवरों से सुरक्षा के लिए यहां की जंगली झाड़ियां कटवाकर सफाई हेतु कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p> साल 2012 से इन क्वार्टरर्स में रह रहा था, करीब 14 पैड़ अमरूद 3 पेड़ आम के लगायें थे । जबसे यहां पर नशामुक्ति केन्द्र चालू हुआ तब से एक एक करके सारे आवास खाली हो गये। सारी रौनक खत्म हो गयी।<br /><strong>-कमलेश, निवासी के आर 221</strong></p>
<p> मै यहां सालों से नौकरी करता हूँ, यहां सबकुछ ठीक ठाक था सुख दु:ख में साथ देते थे। अब केवल दिन में मोर्चरी को आने वाले लोग नजर आते है रात के समय चारो तरफ अनजान नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है ।<br /><strong>-अफजल इलेक्ट्रिशियन पीएचड़ी पम्प हाउस</strong></p>
<p>इन क्वार्टर्स को नये सिरे से तैयार करवाने की और हमारा ध्यान हे इसके लिये पी डब्ल्यूडी से एस्टीमेट के लिये कहा गया है,इसके बाद ही बताया जा सकता है कि इस जगह का क्या उपयोग हो सकता है ।<br /><strong>-डा. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>
<p>इन खण्डहर आवासों जो बिल्कुुल भी रहने योग्य नहीं है इनके ध्वस्तीकरण के लिये हमनें एस्टीमेट बना दिया है, निर्णय पर आने की कार्यवाही हमारे स्तर पर की जायेगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खंड पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - एमबीएस एवं जे.के.लोन परिसर में ड्रेनेज समस्या का होगा समाधान, संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में दिए निर्देश</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति में पांच फरवरी को प्रमुखता से उठाया था मामला ।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---drainage-problems-in-the-mbs-and-jk-lon-complexes-will-be-resolved/article-143016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को सीएडी सभागार में आयोजित बैठक में एमबीएस हास्पीटल एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में वर्षा जल भराव की समस्या के समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण तथा एक एमएलडी के एसटीपी के निर्माण के लिए आरयूआईडीपी से डिजाईन बनवाने के निर्देश दिए गए। बैठक में संभागीय आयुक्त ने निर्देश दिए कि एमबीएस एवं जेके लोन हॉस्पिटल परिसर की क्षतिग्रस्त दीवार का शीघ्र निर्माण कराया जाए। उन्होंने एमबीएस एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में स्थित पुराने, अनुपयोगी, जर्जर एवं नकारा घोषित स्ट्रक्चर को नियमानुसार गिराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन आईपीडी के मॉड्यूलर आॅपरेशन थियेटर में पानी के लीकेज, सीपेज एवं टाइल्स उखडने से मरीजों एवं अस्पताल स्टाफ को हो रही समस्या के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को मौका निरीक्षण करने एवं समस्या का स्थाई समाधान निकालने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>आरएमआरएस में उपलब्ध फंड की भी समीक्षा</strong><br />उन्होंने नवीन आईपीडी एवं पुराने भवन को जोड़ने के लिए कनेक्टिंग कोरिडोर का कार्य शीघ्र पूरा करने तथा चिकित्सालय परिसर में लगी हुई खराब लाइटों का ठीक करने के भी निर्देश दिए। बैठक में आरएमआरएस में उपलब्ध फंड एवं प्रगतिरत कार्यों के बारे में भी समीक्षा की गई। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, केडीए आयुक्त ममता तिवारी, केडीए सचिव मुकेश चौधरी, मेडिकल कॉलेज कोटा की प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना,एमबीएस हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा, जेके लोन हॉस्पिटल की अधीक्षक निर्मला शर्मा, निदेशक अभियात्रिंकी केडीए रविन्द्र माथुर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी अशोक सनाढय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में गत पांच फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 15:06:41 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
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                        <![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का संकट, मरीज हो रहे परेशान</title>
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                        <![CDATA[संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बदहाल ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-trolleys--stretchers--and-wheelchairs-at-mbs-hospital--causing-distress-to-patients/article-138578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमबीएस में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बिगड़ती जा रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में शहर के बाहर से आने वाले मरीज भी शामिल हैं, जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>परिजन खुद करते मशक्कत</strong><br />अस्पताल में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इमरजेंसी और ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाने में परिजनों को खुद मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार मरीजों को सहारे से या गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों का कहना</strong><br />एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नहीं किया गया। पहले भी कई बार व्यवस्थाओं की लापरवाही सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए। शहरवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में तत्काल पर्याप्त संख्या में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही अस्पताल प्रबंधन की नियमित निगरानी हो, ताकि संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को सम्मानजनक और सुचारु स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।</p>
<p><strong>घर से लाना पड़ रहा स्ट्रेचर</strong><br />सरकारी अस्पताल अब सिर्फ नाम का रह गया है। समय पर इलाज नहीं मिल पाता और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सुविधाओं की कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहा पर ट्रॉली, स्ट्रेचर की व्यवस्था नही होने के कारण घर से ही लाना पड़ रहा है।<br /><strong>-जीतू ,संजय नगर निवासी</strong></p>
<p><strong>ढूंढने पर भी नहीं मिली व्हीलचेयर</strong><br />मैनें पूरे अस्पताल परिसर में ट्रॉली और व्हीलचेयर ढूंढी, लेकिन कहीं भी उपलब्ध नहीं हुई। में मरीज चलने की हालत में नहीं था, ऐसे में परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।  ऐसी स्थिति में मरीज की जान पर भी खतरा बन सकता है।<br /><strong>- रमेश, नया नौहरा</strong></p>
<p>ट्रॉली व स्ट्रेचर की कमी होने पर तुरंत स्टॉक से उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि उपचार के दौरान मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।<br /><strong>- कुंज बिहारी मीणा, नर्सिंग इंचार्ज एवं इमरजेंसी प्रभारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:10:01 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - एमबीएस अस्पताल की ओपीडी अब नीचे हुई शिफ्ट, अब मरीजों को पर्ची बनवाने दवा लेने में होगी सुविधा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नई व्यवस्था होने से मरीजों कों अब नहीं होगी सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---mbs-hospital-s-opd-has-now-been-shifted-downstairs/article-127342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत दी गई है। अब इन रोगियों को दूसरी मंजिल तक चढ़ने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। अस्पताल प्रशासन ने भीड़ और अव्यवस्था के चलते गुरुवार को मौसमी बीमारियों की सामान्य ओपीडी को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया है। नई ओपीडी अब इमरजेंसी वार्ड के पास कमरा नंबर 11 में संचालित की जा रही है। दैनिक नवज्योति में बेकाबू हुई ओपीडी, डॉक्टरों को कमरा छोड़ना पड़ा शीर्षक हैडिंग से प्रकाशित की थी, उसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मौसमी बीमारियों की ओपीडी को ग्राउण्ड फ्लोर पर शिफ्ट करने के निर्देश जारी किए। बता दें कि  मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे दूसरी मंजिल स्थित कमरा नंबर 201 में हालात अचानक बिगड़ गए थे। मौसमी बीमारियों की ओपीडी में मरीजों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि हालात काबू से बाहर हो गए। डॉक्टरों को दिखाने की जल्दी में कई मरीज और परिजन एक साथ कमरे में घुसने लगे। हालात बेकाबू  होने पर भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि डॉक्टरों को नाराज होकर कमरा छोड़ना पड़ा। इस दौरान डॉक्टरों ने परिजनों से शांति बनाए रखने की अपील भी की थी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा के निर्देश पर ओपीडी प्रभारी व दो गार्डों ने व्यवस्थाओं को संभाला था।</p>
<p><strong>ओपीडी पर्ची और दवा काउंटर भी पास</strong><br />सामान्य ओपीडी को इमरजेंसी वार्ड के पास कमरा नंबर 11 में शिफ्ट किया गया है। इस बदलाव से एक और बड़ी सुविधा यह होगी कि मरीजों को पर्ची बनवाने और दवा लेने के लिए अलग से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा। पर्ची काउंटर और दवा वितरण केंद्र पास ही हैं, जिससे मरीजों का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।</p>
<p><strong>मौसमी बीमारियों का बढ़ता दबाव</strong><br />सितंबर के महीने में बदलते मौसम के कारण अस्पताल में बुखार, वायरल, डेंगू, मलेरिया, सर्दी-खांसी और गले के संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर दिन सैकड़ों मरीज एमबीएस की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इस बढ़ती भीड़ को संभालना दूसरी मंजिल पर संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट करना मरीजों और परिजनों दोनों के लिए राहत का कदम साबित होगा। नई व्यवस्था से अब मरीजों को सीढ़ियां चढ़ने की परेशानी नहीं होगी, वहीं डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन भी व्यवस्थित तरीके से लग सकेगी।</p>
<p><strong>मरीजों को मिलेगी राहत</strong><br />नई व्यवस्था से मरीजों और परिजनों ने राहत महसूस की है। परिजनों का कहना है कि पहले दूसरी मंजिल तक बुजुर्गों और बच्चों को ले जाना बहुत मुश्किल होता था। साथ ही ओपीडी के बाहर भीड़ और धक्का-मुक्की की वजह से परेशानियां झेलनी पड़ती थीं। लिफ्ट के लिए भी इंतजार करना पड़ता था। अब ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी होने से इलाज के लिए पहुंचना और कागजी प्रक्रिया पूरी करना पहले से कहीं आसान हो गया है।</p>
<p>ओपीडी ग्राउण्ड फ्लोर इमरजेंसी के पास कमरा नं. 11 में शिफ्ट कर दी है। सामान्य ओपीडी के मरीजों को अब दूसरी मंजिल पर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं व्यवस्था के रूप में गार्ड भी तैनात है। मंगलवार को बेकाबू होने से कुछ समय के लिए व्यवधान आया था। बाद में सब सामान्य हो गया था। अभी मौसमी बीमारियों के चलते मरीज की ओपीडी बढ़ी है। मरीजों की सुविधा के लिए इस ओपीडी को नीचे शिफ्ट किया है।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अस्पताल अधीक्षक, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:54:10 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल: मरीजों को सीढ़ियों से जाना पड़ रहा तीसरी मंजिल पर,  नई ओपीडी की 7 में से 5 लिफ्ट बंद</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[शहर के एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लिफ्ट का इस्तेमाल बढ़ गया है। 
]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/five-out-of-seven-lifts-of-the-new-opd-are-closed--only-two-lifts-are-working/article-103798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(8)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी को आधी अधुरी सुविधाओं के साथ शुरू करने का खामियाजा यहां इलाज कराने आए मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल की नई ओपीडी में कहने को तो सात लिफ्ट लगी है लेकिन वर्तमान में दो ही लिफ्ट चालू कर रखी है। एक लिफ्ट गंभीर मरीजों को लाने ले जाने के लिए काम में ले रहे है। जो दो लिफ्ट चल रही है वो भी आए दिन बीच में अटक जाती है। मजबूरी मरीजों को कभी पहली मंजील से दूसरी तक सीढ़ी जाना पड़ता है तो कभी  दूसरी मंजील पर अटकने पर तीसरी पर जाने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। दो ही लिफ्ट चलने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग व दुर्घटना में घायल व्यक्तियों आ रही है। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है सभी लिफ्ट चालू ओपीडी में भीड़ को देखते हुए लिफ्ट का संचालन किया जाता है। अनावश्यक लिफ्ट चलाने से विद्युत भार बढ़ता ।  उल्लेखनीय है कि तीमारदारों के ऊपर नीचे आने जाने के लिए 7 लिफ्ट लगी है। जिनमें 3 फ्रंट व 3 बेक व 1 बीच में लगी है।  वैसे तो 7 लिफ्ट पर 7 लिफ्टमैन लगा रखे हंै। लेकिन काम में दो ही ली जाती हैं।</p>
<p><strong>सात में से दो लिफ्टही चल रही है</strong><br />ओपीडी में जांच कराने आए विशाल वर्मा ने बताया कि कहने को यहां सात लिफ्ट लगी हुई है। लेकिन यहां मुश्किल से एक से दो लिफ्ट ही चलती है। जो भी आए दिन बंद हो जाती जिससे मरीजों को सीढ़ियों से दूसरी व तीसरी मंजील पर जाना पड़ता है। लिफ्ट एक, दो और तीन ही चल रही है। जिसमें दो व तीन पर तीमारदार आ जा रहे है एक से गंभीर मरीज ले जाते है। </p>
<p><strong>नेत्र विभाग में जाना किसी सजा से कम नहीं</strong><br />नई ओपीडी में सारे डॉक्टरों चैबंर पहली दूसरी व तीसरी मंजील पर है। आंख दिखाने जाना हो लिफ्ट नहीं चले तो तीसरी मंजील पर चढ़ना किसी सजा से कम नहीं है। यहां आए दिन लिफ्ट अटकती एक लिफ्ट अटकने के बाद दोबारा शुरू नहीं होती है। </p>
<p><strong>बिजली गुल होते ही अटक जाती है लिफ्ट</strong><br />शहर के एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लिफ्ट का इस्तेमाल बढ़ गया है। जिससे लिफ्ट आए दिन खराब हो रही है। अस्पताल में लिफ्ट मरीजों का भार नहीं उठा पा रही जिससे दूसरी मंजिल पर जाने के लिए मरीजों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। जब भी बिजली गुल होती है, झटके से लिफ्ट अटक जाती है। </p>
<p><strong>आए दिन खराब होती लिफ्ट</strong><br />तीन मंजिला इमारत पर अलग अलग फ्लोर पर ओपीडी संचालित हो रही है। आए दिन लिफ्ट खराब होने से मरीजों को आए दिन सीढ़ियों से जाना पड़ता है।  सबसे ज्यादा दुर्घटना में घायल मरीजों को अस्थि रोग विभाग में जाने में परेशानी होती है। मरीजों को सीढ़ियों के द्वारा ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने जाना पड़ा। मौसमी बीमारियों के प्रकोप बढ़ने के साथ अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके साथ अस्पताल में लगी लिफ्ट मरीजों के बोझ से हाफने लगी है। जिससे गंभीर मरीजों को भी सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।<br /><strong>- रामनारायण बैरवा, कुन्हाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ओपीडी सारी लिफ्ट चालू है। मरीजों की ओपीडी में संख्या कम होने पर एक दो तीन नंबर लिफ्ट चालू रखी जाती है। ओपीडी में मरीज बढ़ने पर सभी लिफ्टों को चालू कर दिया जाता है। लोग अनावश्यक पूर नीचे घूमते इसलिए आवश्यकता के अनुसार इनका प्रयोग किया जा रहा है। <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 18:27:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मरीजों के पलंग से घर ले जा रहे बीमारियां, पलंग पर बैठने से मरीज को परेशानी</title>
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                        <![CDATA[तीमारदारों के बैठने की सुविधा नहीं होने से जमीन पर ही चादर बिछाकर बैठना पड़ रहा है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/taking-diseases-home-from-the-patient-s-bed/article-101940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer41.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के इनडोर वार्डों में मरीजों के लिए तो पलंग है। लेकिन उनके तीमारदारों के बैठने की कोई सुविधा नहीं है। जिससे अधिकतर तीमारदारों को मजबूरन मरीजों के पलंग पर ही बैठना पड़ रहा है। जिससे वे अस्पताल से अपने घर तक बीमारियों को ले जा रहे है। एमबीएस अस्पताल में जहां कोटा शहर ही नहीं दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों व रा’य  की सीमा से लगे मध्य प्रदेश के श्योपुर समेत अन्य जगहों तक के मरीज उपचार के लिए आ रहे है। उस अस्पताल में मरीजों को उनकी बीमारी के हिसाब से व ऑपरेशन के बाद भर्ती करने के लिए अलग-अलग इनडोर वार्ड बने हुए है। फिर चाहे पोस्ट आॅपरेटिव वार्ड हो या महिला सर्जीकल वार्ड। मेल सर्जिकल वार्ड हो या अस्थि वार्ड। ईएनटी वार्ड हो मेडिसिन वार्ड। इन वार्डों में मरीजों के लिए तो पर्याप्त संख्या में बैड लगे हुए है। लेकिन उन मरीजों की देखभाल के वहां रहने वाले परिजनों और तीमारदारों के बैठने के लिए वार्ड में बैंच या स्टूल तक नहीं है। ऐसे में या तो उन्हें घंटो तक खड़े रहना पड़ रहा हैया मजबूरन मरीज के पलंग पर बैठना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>पलंग पर बैठने से मरीज को परेशानी</strong><br />मरीज के पलंग पर तीमारदारों के बैठने से जहां मरीजों को तो परेशानी होती ही है। वहीं उनका उपचार करने वाले मेडिकल स्टाफ को भी समस्या होती है।  इससे भी अधिक खतरनाक तीमारदारों का मरीज के पलंग पर बैठने से बीमारियों को अपने साथ ले जाना है। कुन्हाड़ी निवासी अनीता शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी का आॅपरेशन होने से उसे महिला सर्जिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। वहां उसके पास किसी न किसी का रहना जरूरी है। बीमारी की सूचना मिलने पर उसे देखने भी रिश्तेदार व परिजन आ रहे है। लेकिन वहां उनके बैठने के लिए नतो स्टूल है और न ही बैंच। लोग अधिक देर तक खड़े भी नहीं रह सकते। ऐसे में उन्हें मजबूरन मरीज के पलंग पर ही बैठना पड़ रहा है। वहीं रात को या तो जमीन पर सोना पड़ा या बेटी के पास ही पलंग पर। जिससे अस्पताल की बीमारी घर लेकर जाने से कम नहीं है। भीमगंजमंडी निवासी राधश्याम बैरवा ने बताया कि उनके पिता के पैर में फ्रेक्चर होने पर उनका आॅपरेशन हुआ है। उन्हें अस्थि वार्ड में भर्ती किया गया। लेकिन वहां तीमारदारों के बैठने की सुविधा नहीं होने से जमीन पर ही चादर बिछाकर बैठना पड़ रहा है। जबकि पहले हर पलंग के साथ बैंच व स्टूल होता था। उन सभी को हटा दिया है। </p>
<p><strong>इमरजेंसी वार्ड में हर पलंग पर बैंच</strong><br />वहीं उसी अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में हर पलंग के साथ बैंच लगी हुई है। जिस पर तीमारदार आराम से कुछ देर बैठ भी सकते हैं और मरीज से संबंधित सामान भी रख सकते है। लोगों ने बताया कि इसी तरह की सुविधा इनडोर वार्ड में भी होनी चाहिए। जिससे मरीज के पलंग पर नहीं बैठना पड़े। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इनडोर वार्ड में मरीजों को देखने कई लोग आते है। वहां यदि बैठने की बैंच या स्टूल रखेंगे तो वे घंटी तक वहां से नहीं जाते है। जबकि वार्ड में मरीज के पास भीड़ लगाना गलत है। वार्ड के बाहर गैलेरी में बैंचे लगी हुई है। वहां बैठने की सुविधा है। जबकि इमरजेंसी में गम्भीर मरीज आते है। उनके साथ लोग भीअधिक रहते है। हालांकि वहां कुछ देर के लिए  ही मरीज रहते है। इस कारण से हवां बैंचे लगाई हुई है। हालांकि प्रयास कर रहे हैं कि अस्पताल में तीमारदारों के बैठने कीअलग से व्यवस्था की जाए। <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jan 2025 17:33:12 +0530</pubDate>
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                <title>नगर निगम कार्रवाई को ठेंगा दिखा रहे अतिक्रमी</title>
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                        <![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर का अतिक्रमण दस्ता यहां से कई बार अतिक्रमण हटा चुका है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/encroachers-pointing-to-municipal-action/article-98929"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554410.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । संभाग के दो सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमबीएस व जेके लोन के मुख्य द्वार पर बैठे अतिक्रमी नगर निगम की कार्रवाई को ठेंगा दिखा रहे है। नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते द्वारा गत दिनों कई बार कार्रवाई करते हुए एमबीएस अस्पताल व जे.के. लोन अस्पताल के मेन गेट के पास से अतिक्रमी दुकानदारों को हटाया जा चुका है। दोनों अस्पतालों के मुख्य द्वार पर चाय का ठेला लगाने वालों से लेकर अन्य सामान बेचने वाले और फुटकर दुकानदारों ने सामान रखे हुए हैं। वे  पूरे दिन यहां बैठकर अपना रोजगार कर रहे है। हालत यह है कि मेन गेट के बिल्कुल नजदीक ठेले लगने व अन्य वाहन खड़े होने से वहां से इमरजेंसी में मरीजों को लेकर आने वाली एम्बूलेंस को मुड़ने व निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा काफी समय से हो रहा है। जिसे देखते हुए पहले केडीए का और अब नगर निगम कोटा उत्तर का अतिक्रमण दस्ता यहां से कई बार अतिक्रमण हटा चुका है।  नगर निगम कोटा उत्तर के अतिक्रमण दस्ता प्रभारी पुलिस उप  अधीक्षक तरूण कांत सोमानीका कहना है कि इस क्षेत्र को नो वेंडिंग जोन घोषित किया गया  है। इन दोनों जगह पर किसी भी ठेले वाले को या अन्य सामान बेचने वालों को नहीं रहने  दिया जाएगा। निगम की बार-बार कार्रवाई के बाद भी शुक्रवार को दोनों अस्पतालों के  मेन गेट पर फुटकर सामान बेचने वालों का जमघट लगा हुआ था। </p>
<p><strong>जेके लोन से भी नहीं हटे अतिक्रमी</strong><br />इतना ही नहीं जे.के. लोन अस्पताल रोड पर मेन गेट के सामने की तरफ कई लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। अपनी दुकानों का सामान सड़क पर काफी आगे तक फेला कर रखा हुआ है। फिर चाहे वह कबाड़े का काम करने वाला हो या अन्य दुकानदार। जिससे यह सड़क काफी चौड़ी होने के बाद भी संकरी हो रही है। यहां से कई बार तो दिन के समय वाहनों को निकलने कीजगह तक नहीं मिल पाती। जिससे आए दिन एक्सीडेंट का खतरा बना हुआ है। नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते द्वारा दुकानदारों को कई बार सामान जब्त करने की चेतावनी के साथ ही जुर्माना तक वसूल किया जा  चुका है। उसके बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।   कार्रवाई कर निगम बार बार मशीनरी व मेन पावर का दुरुपयोग कर रहा है और अतिक्रमियों पर उसका कोईअसर ही नहीं हो रहा है। </p>
<p><strong>कार्रवाई लगातार जारी रहेगी</strong><br />जेके लोन व एमबीएस अस्पताल इमरजेंसीसेवाएं है। यहां के मुख्य द्वार साफ रहने चाहिए। जिससे यहांसे एम्बूलेंस आसानीसे निकल सके। यहांदोनोंजगह अतिक्रमण होने पर पूर्व में कई बार अतिक्रमण हटाए गए हैं। उसके बाद भी कई दुकानदार नहीं मान रहे है।ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। दुकानदारों का सामान जब्त करने व उनसे जुर्माना भी वसूल करने समेत सख्ती की जाएगी। <br /><strong>- तरूण कांत सोमानी, पुलिसउप अधीक्षक नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2024 15:29:02 +0530</pubDate>
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                <title>स्टेरॉयड का सेवन शरीर को कर रहा डैमेज</title>
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                        <![CDATA[रोजाना स्टेरॉयड के सेवन के कारण 12 से 15 नए मरीज इस बीमारी का उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/steroid-consumption-is-damaging-the-body/article-96972"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शरीर को सुडौल बनाने की चाहत में अंधाधुंध स्टेरॉयड के प्रयोग ने युवाओं में हिप ज्वाइंट की समस्या को बढ़ा दिया है। इसके कारण कई बार तो हिप को प्रत्यारोपित करना पड़ जाता है। चिकित्सकों के अनुसार हिप ज्वाइंट डैमेज के नाम से जानी जाने वाली इस समस्या के चलते कुछ सालों पहले तक एमबीएस अस्पताल की ओपीडी में रोजाना महज एक या दो केस आते थे, लेकिन अब रोजाना स्टेरॉयड के सेवन के कारण 12 से 15 नए मरीज इस बीमारी का उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान में अस्पतालों में पचास फीसदी हिप रिप्लेसमेंट स्टेरॉयड सेवन के कारण हो रहे हैं।</p>
<p><strong>केल्शियम को अवशोषित नहीं कर पाता शरीर </strong><br />चिकित्सकों के अनुसार कूल्हे का जोड़ शरीर का वजन सहने वाले प्रमुख जोड़ों में से एक है। यह जांघ की हड्डी (फीमर) व कूल्हे की हड्डी (पेल्विस) से जुड़ा रहता है। यह पैरों या टांगों को मोड़ऩे, घुटनों के बल बैठने या घुमाने में सहायता करता है। आमतौर पर किसी भी कारण से 10 फीसदी भी वजन बढ़ने पर कूल्हे और पर दबाव पड़ने लगता है। चिकित्सकों के अनुसार स्टेरॉइड व ध्रूमपान के कारण शरीर केल्शियम अवशोषित नहीं कर पाता है। कूल्हों में खराबी आर्थराइटिस से भी हो सकती है। रूमेटाइड आर्थराइटिस होने पर जोड़ों में सूजन होती है। इसके बाद से धीरे-धीरे जोड़ खराब हो जाते हैं। कई बार स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है।</p>
<p><strong>बीमारी बढ़ी तो हिप रिप्लेसमेंट ही विकल्प</strong><br />चिकित्सकों के अनुसार हिप रिप्लेसमेंट या आॅर्थोप्लास्टी सर्जरी में डैमेज हुए कूल्हे के जोड़ों को हटा दिया जाता है और उसकी जगह आर्टिफिशियल आॅर्गन लगा दिए जाते हैं। इस तरह मरीज का दर्द भी दूर हो जाता है और वह फिर से एक सामान्य जीवन जी सकता है। ऐसे लोग जिनके कूल्हे के जोड़ किसी कारण से डैमेज हो गए हैं और इलाज के बावजूद उनका दर्द कम नहीं हो रहा है, उन्हें रोजमर्रा के कार्य करने में अत्यंत परेशानी होती है। ऐसे में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी इन व्यक्तियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।</p>
<p><strong>इतना घातक है स्टेरॉयड</strong><br />स्टेरॉयड के सेवन के कारण हड्डियों में रक्त संचरण प्रभावित हो जाता है, जिसके कारण हड्डियों को काफी नुकसान होने लगता है। इसके बाद समय पर उपचार नहीं मिलने से हड्डियों में गलने की समस्या होने लगती है। इसके अलावा स्टेरायड के कारण शरीर केल्शियम अवशोषित नहीं कर पाता है। जिससे स्टेरायड लेने वाले के हिप कमजोर होने लगते हैं। इसके लगातार सेवन के कारण स्थिति बिगड़ने लगती है। समस्या की जानकारी नहीं मिलने के कारण उपचार संभव नहीं हो पाता है। इसके बाद हिप रिप्लेसेमेंट ही अंतिम उपाय रह जाता है।  <br /><strong>- डॉ. महेंद्र मीणा, आर्थोपेडिक सर्जन</strong></p>
<p> स्टेरॉयड का चलन बढ़ने के कारण युवाओं में हिप ज्वाइंट की समस्या होने लगी है। इसके सेवन से कूल्हे की हड्डी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। कूल्हे के जोड़ में थोड़ी खराबी है तो दवा और फिजियोथैरेपी से आराम मिलता है, लेकिन परेशानी बढऩे पर कूल्हे का जोड़ बदलना पड़ता है। यही कारण है कि ओपीडी में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने वालों में अब युवा वर्ग की संख्या ज्यादा हो रही है।<br /><strong>- डॉ. अजय जौहरी, अस्थि रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 15:08:48 +0530</pubDate>
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                <title>68 करोड़ को सवा साल से उपयोग का इंतजार</title>
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                        <![CDATA[ अस्पताल में डीलक्स कॉटेज वार्ड चालू नहीं होने से यहां लोग आॅपरेशन कराने से कतराते है। 
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/68-crores-waiting-to-be-used-for-one-and-a-quarter-years/article-95328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p> कोटा । एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड और नया अस्पताल भवन का लोकार्पण हुए सवा साल  होने आया  लेकिन अभी तक इसके शिफ्टिंग का कार्य शुरू नहीं हुआ। कांग्रेस सरकार ने 27 अप्रेल 2023 को इसका  लोकार्पण तो कर दिया लेकिन उसके बाद भाजपा सरकार आने से इस भवन का शिफ्टिंग कार्य धीमा हो गया। अभी भवन में उपकरण से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाएं और स्टाफ लगाना बाकी है। ऐसे में  पिछले एक साथ से तैयार किए भवन पर अभी ताले लगे हुए है। सरकार की ओर से 68 करोड़ रुपए लगाकर भवन तो तैयार कर दिया लेकिन अभी इसको चालू करने में समय लग रहा है।  </p>
<p><strong>68 करोड़ रुपए से तैयार भवन का नहीं हो रहा उपयोग</strong><br />68 करोड रुपए की लागत से तैयार नए अस्पताल भवन और डीलेक्स कॉटेज वार्ड का पिछले सवा साल से कोई उपयोग नहीं हो रहा है। अस्पताल में डीलक्स कॉटेज वार्ड चालू नहीं होने से यहां लोग आॅपरेशन कराने से कतराते है। जबकि एमबीएस अस्पताल में अच्छे डॉक्टर और संसाधन होने के बाद भी लोगों निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।  एमबीएस परिसर में तैयार हुए  नए अस्पताल में 340 बेड  है। अस्पताल का निर्माण कार्य यूआईटी द्वारा कराया गया है। जिसमें करीब 68 करोड़ खर्च किए गए है। एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने बताया कि डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब फर्नीचर और उपकरण लगाना बाकी है। इसमें सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होगी। इसके अलावा इसके पीछे प्रशासनिक भवन आकार ले चुका है। नया अस्पताल शुरू हो जाने से जगह की कमी नहीं रहेगी।</p>
<p><strong>मौसमी बीमारियों के सीजन में बेड की कमी से आती है परेशानी</strong><br />मौसमी बीमारियों के सीजन में सबसे ज्यादा बेड की कमी खलती है। नया अस्पताल शुरू हो जाए तो बेड की कमी से राहत मिलेगी।  अभी कई बार बेड की दिक्कत आती है।  खासकर मौसमी बीमारियों के सीजन में बेड का कम होने से मरीजों को भर्ती करने में परेशानी आती है। नया अस्पताल शुरू होने से  नया अस्पताल शुरू होने से परेशानी दूर हो जाएगी। बेड की कमी के कारण अभी मरीजों को अन्य जगह रैफर करना होता था। पिछले साल भी डेंगू के समय  मरीज अधिक आने से  मरीजों को मेडिकल कॉलेज और रामपुरा सैटेलाइट अस्पताल शिफ्ट  करना पड़ा था।  ऐसी परेशानियों से बचने के लिए अस्पताल का शुरू होना जरूरी है। लेकिन अभी तक इसमें कई छोटे बड़े तकनीकी कार्य बाकी होने से यह शुरू नहीं हो पा रहा है। </p>
<p><strong>पीजी हॉस्टल का काम अभी नहीं हुआ पूरा</strong><br />एमबीएस के पीछे पीजी स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का कार्य भी  धीमी गति से चल रहा है। अभी इसमें फिनिंशिग वर्क बाकी है।  एक दो फ्लॉर का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। इसमें 120 रुम है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में 150 रुम है। इस तरह से 270 रुम हो जाएंगे। यानि कि स्टूडेंट्स के लिए पर्याप्त रूम की व्यवस्था हो जाएगी। हॉस्टल का निर्माण कार्य तो पहले ही शुरू हो गया था। हॉस्टल भवन में फिनिशिंग वर्क चल रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल  को शीघ्र शुरू करने के प्रयास किए जा रहे है। अभी स्टाफ और उपकरण कुछ कार्य बाकी है उनको पूरा किया जा रहा है। इसमें छोटे छोटे कार्य बाकी उनको एक एक पूरा कराया जा रहा है। उसके बाद इसमें शिफ्टिंग की जाएगी।<br /><strong>-डॉ. संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 17:01:35 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस ओपीडी की लिफ्ट खराब </title>
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                        <![CDATA[संभाग के सबसे बड़े अस्पताल के हालात। 
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-opd-lift-is-out-of-order/article-86982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/mbs-opd-ki-lift-khrab...kota-news-06-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में आए दिन मरीजों को किसी ना किसी परेशानी से दोचार होना पड़ रहा है। कभी जांच नहीं होने तो कभी लंबी कतारों से। सोमवार को एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी की लिफ्ट खराब होने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। तीन मंजिला इमारत पर अलग अलग फ्लोर पर ओपीडी संचालित हो रही है। सबसे ज्यादा दुर्घटना में घायल मरीजों को अस्थि रोग विभाग में जाने में हुई। मरीजों को सीढ़ियों के द्वारा ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने जाना पड़ा। मौसमी बीमारियों के प्रकोप बढ़ने के साथ अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके साथ अस्पताल में लगी लिफ्ट मरीजों के बोझ से हाफने लगी है। जिससे गंभीर मरीजों को भी सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। शहर के एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लिफ्ट का इस्तेमाल बढ़ गया है। जिससे लिफ्ट आए दिन खराब हो रही है। अस्पताल में लिफ्ट मरीजों का भार नहीं उठा पा रही जिससे दूसरी मंजिल पर जाने के लिए मरीजों को सीढ़ियों का सहरा लेना पड़ रहा है।  सोमवार को मरीजों की संख्या ज्यादा होने से दो लिफ्ट बंद रही। </p>
<p><strong>लिफ्ट 2, 3,4,6 हुई खराब</strong><br />इलाज कराने आए अख्तर खान ने बताया कि अस्पताल में एक ही लिफ्ट चालू थी जिसमें मरीजों को स्ट्रेचर से ले जाया जा रहा था। अस्पताल की दो नंबर, तीन नंबर, चार नंबर और छह नंबर लिफ्ट सोमवार को काम नहीं कर रही थी। जिससे मरीजों को फर्स्ट, सैंकड, थर्ड फ्लोर पर जाने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ा कई बुजुर्गो को सीढ़िया चढ़ने में परेशानी हुई ।वहीं बीपी और हार्ट के मरीज सबसे ज्यादा परेशान हुए। अस्पताल की लिफ्ट आए दिन खराब हो जाती है। ऐसे में मरीजों को तीसरे माले तक जाने में भारी परेशानी होती है। </p>
<p><strong>पैर में चोट लगी थी बडी मुश्किल से ओपीडी में पहुंची</strong><br />कुन्हाडी से पैर का चोट का इलाज कराने आई तेजी बाई वर्मा ने बताया कि पैर में सिर में चोट लगी थी अस्थि व न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाने लिए जाना था लेकिन लिफ्ट खराब थी सीढ़ियों से जाना पड़ा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ओपीडी की लिफ्ट में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी उनको ठीक करा दिया है। अभी ओपीडी की सभी लिफ्ट काम करना शुरू कर दिया है। <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Aug 2024 15:17:28 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर बार-बार खराब क्यों होती हैं सरकारी मशीनें </title>
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                        <![CDATA[एमबीएस अस्पताल में मौजूद सिटी स्कैन मशीन पिछले 7 महीनों से बंद पड़ी है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/why-do-government-machines-break-down-repeatedly/article-82028"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/akhir-br-br-kharab-kyu-hoti-h-sarkari-machine...kota-news-19-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले में संभाग के एमबीएस और मेडिकल कॉलेज दो सबसे बड़े अस्पताल हैं जिनमें से केवल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही एमआरआई और सिटी स्कैन की जांच की जा रही है। ऐसे में संभाग के सभी अस्पतालों को का भार एक ही अस्पताल पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज स्थित सिटी स्कैन मशीन में भी सोमवार को फॉल्ट हो गया जिसके चलते करीब दो घंटे जांच बंद रही। वहीं वर्तमान में भी अस्पताल में मरीजों की सिटी स्कैन की जांच नहीं हो पा रही है। जिस पर स्टाफ मशीन में खराबी होने के चलते जांच करने से मना कर रहा है। वहीं दूसरी ओर एमबीएस अस्पताल में मौजूद सिटी स्कैन मशीन पिछले 7 महीनों से बंद पड़ी है। जिससे मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है। </p>
<p><strong>बार बार हो रही मशीनें खराब</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संचालित सिटी स्कैन और एमआरआई मशीन पिछले कुछ महीनों में कई बार खराबी आ चुकी है जिसका खामियाजा मरीज को उठाना पड़ रहा है। पिछले महीने एमआरआई मशीन की बैटरियां लोड के चलते फ्यूज हो गई थी, जिन्हें अभी तक नहीं बदला जा सका है और एमआरआई जांच तब से धीमी हो रही है। इससे पहले भी एमआरआई मशीन दो बार खराब हो चुकी है। सिटी स्कैन मशीन भी गत 30 और 31 मई को फाल्ट हो जाने के चलते बंद हो गई थी और 15 जून को फाल्ट होने से मशीन 50 दिन में ही दो बार बंद पड़ गई। जिससे नियमित ओपीडी वाले मरीजों को जांच के लिए बाहरी लैब पर जाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>एमबीएस की सिटी स्कैन 7 माह से बंद</strong><br />संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में सबसे जरूरी जांच मशीन पिछले 7 माह से बंद पड़ी है। हालांकि अस्पताल प्रशासन के अनुसार इसके जुलाई में चलने की उम्मीद है। लेकिन वर्तमान में मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है या बाहर निजी लैब में कराना पड़ रहा है। वहीं मेडिकल कॉलेज में जाने पर भी लंबी कतारें और घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा एमबीएस में अस्पताल में आज भी एमआरआई जांच की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है जिसके लिए भी मरीजों को मेडिकल कॉलेज या निजी क्षेत्र पर निर्भर रहना पड़ता है। </p>
<p><strong>प्रधानाचार्य और अधीक्षक दोनों रेडियोलॉजी से फिर भी ये हालात</strong><br />प्रशासनिक स्तर की बात करें तो एमबीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा और मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ संगीता सक्सेना दोनों ही कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर हैं। बल्कि डॉ संगीता सक्सेना रेडियोलॉजी की विभागाध्यक्ष रह चुकी हैं और डॉ धर्मराज मीणा वर्तमान में विभागाध्यक्ष हैं। इसके बावजूद भी अस्पतालों में रेडियोलॉजी से जुड़े संसाधनों की निरंतर कमी देखने को मिल रही है। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />एमबीएस में सिटी स्कैन जांच नहीं होने से मेडिकल कॉलेज में जाना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के लोग ही इन्हें जानबूझकर खराब करते हैं ताकि निजी दुकानदारों की दुकान चलती रहे। <br /><strong>- दिपक शर्मा, रायपुरा</strong></p>
<p>मेरे भाई को एक्सीडेंट के कारण पैर की नस में दर्द रहता है, जिसके लिए डॉक्टर ने एमआरआई क जांच लिखी है। अब मेडिकल कॉलेज आए तो 15 दिन बाद की तारीख दी है। ऐसे में बाहर से जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है।<br /><strong>- दिनेश कुमार, नयापुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज में लोड होने के कारण सिटी स्कैन मशीन में फाल्ट हुआ है मशीन में कोई खराबी नहीं आई है। वहीं एमबीएस अस्पताल में सिटी स्कैन अगले महीने से शुरू हो जाएगी। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज पर से दबाव कम होगा। साथ ही एमबीएस अस्पताल में भी एमआरआई जांच शुरू कराने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा हुआ है।<br /><strong>- संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>एमआरआई मशीन की बैटरी के लिए आॅर्डर दे दिया है जो 10 से 15 दिन में आ जाएंगी। सिटी स्कैन को स्थानीय स्तर पर ठीक कराने की कोशिश लेकिन पार्टस खराब होने से नए लगेंगे जिनके लिए आॅर्डर दे दिया है। अभी एमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए बायपास कर सुविधा दी हुई है। इसके अलावा एक नई एमआरआई मशीन के लिए भी प्रस्ताव भेजा हुआ है।<br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jun 2024 16:44:24 +0530</pubDate>
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