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                <title>mbs hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा मेडिकल कॉलेज हादसा : 15 दिन में आनी थी रिपोर्ट, 3 माह से इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[कैथेटर सहित 6 मेडिकल डिवाइसों की जांच रिपोर्ट अटकी, अस्पतालों में  हो रही किल्लत, भेजा रिमाइंडर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-medical-college-incident--report-due-in-15-days--wait-stretches-to-3-months/article-162941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)67.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।मेडिकल कॉलेज में मई माह के दौरान हुई प्रसूताओं की मौत और उसके बाद मरीजों में ठंड लगकर बुखार  आने के मामलों में चल रही विभागीय व कानूनी जांच प्रक्रिया अब तक अधूरी है। घटना के बाद 8 और 9 मई को विभिन्न दवाओं और सर्जिकल आइटम्स (मेडिकल डिवाइसेज) की सैंपलिंग कर 12 मई को सेंट्रल लेबोरेटरी, कोलकाता भेजी गई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट घटना के तीन महीने बीत जाने के बाद भी नहीं आ सकी है। इस देरी को लेकर कोटा ड्रग कंट्रोल विभाग द्वारा कोलकाता स्थित प्रयोगशाला को रिमाइंडर पत्र भी जारी किया गया है, ताकि नमूनों की जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द प्राप्त हो सके।</p>
<p><strong>दवाओं की आ चुकी है 'स्टैंडर्ड' रिपोर्ट</strong><br />सहायक औषधि नियंत्रक (अऊउ) प्रहलाद कुमार मीणा ने बताया कि घटना के बाद टीम द्वारा कुल 22 प्रकार की दवाओं व 7 सर्जिकल सामानों के सैंपल लिए गए थे। इनमें से लगभग सभी दवाओं की जांच रिपोर्ट आ चुकी है, जिन्हें लैब द्वारा 'स्टैंडर्ड' (मानक) घोषित किया गया है।</p>
<p><strong>7 सर्जिकल डिवाइसेज की रिपोर्ट बकाया,</strong><br />कोलकत्ता से 7 प्रकार के मेडिकल डिवाइसेज (सर्जिकल आइटम्स) की जांच रिपोर्ट अभी भी कोलकाता लैब से प्राप्त होना बाकी है। जांच के लिए भेजे गए सर्जिकल सामानों में मुख्य रूप से कैथेटर (बैच संख्या: ५‘2510284) और आईवी ड्रिप सेट (बैच संख्या: 0725 ्र५ ि७09 / ७07) शामिल हैं।</p>
<p><strong>अस्पतालों में हो रही किल्लत</strong><br />5 मई को दैनिक नवज्योति मे प्रमुखता से मेडिकल कॉलेज में हो रही प्रसुताओं की मौत व किडनी फैल्योर की खबर के बाद प्रशासनीक स्तर पर हुई कार्यवाही व जांचों में संदिग्ध पाये गई दवाइयों व सर्जिकल आईटम के स्टोक को होल्ड पर रखा गया था। जिसके बाद से अस्पतालों में नई सप्लाई नही मिल पा रही है। जिसके चलते शहर के अन्य अस्पतालों में केनुला, आई वी सेट, डिस्पोजल सीरिंज सहित सभी प्रकार के सर्जीकल की भारी किल्लत खडी हो गई है। जिसके चलते मरीजों को एमबीएस जैसे अस्पताल में भी कई काउन्टरों पर चक्कर काटने पड़ रहे है।</p>
<p><strong>केस नं 1- जेके लोन में फ्ल्यूड का बैच होल्ड पर</strong><br />10 अगस्त को प्रसुता की मौत व एक साथ कई प्रसुताओं को ड्रिप लगाने के बाद कपंकपी लगने की शिकायत के बाद, सस्पेक्टेड लिस्ट में रखे गए आरएल (फछ) के ढ5050791 बैच की पूर्व में हुई जांच भी मानक पाई गई थी, जिसे बाद में विभाग द्वारा प्रयोग से होल्ड पर रखवा कर अन्य कंपनी पेन्कीटागन की दवा सप्लाई करवाई गई है। अधीक्षक जेके लोन निर्मला शर्मा ने मेडिकल कॉलेज के दवा व औषधि भण्डार को पत्र भी लिखा है।</p>
<p><strong>केस नं 2- सुल्तानपुर में 3 दवाओं के बैच किये थे होल्ड</strong><br />गौरतलब है कि सुल्तानपुर सीएचसी में भर्ती मरीजों जिनमें दस्त की शिकायत पर भर्ती दिनेश गोचर व अन्य शामिल थे। को आईवी फ्लूड चढ़ाते ही अचानक तेज कंपकंपी, घबराहट और चक्कर आने लगे थे। इसके बाद हरकत में आए चिकित्सा विभाग ने फछ (बैच नंबर 2514017233), ऊठर (बैच नंबर ररइ95) और ठर (बैच नंबर र1इ179) की सप्लाई व इस्तेमाल पर पूरे राजस्थान में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। यह संदिग्ध स्टॉक कोटा संभाग के 193 पीएचसी और 77 सीएचसी सहित जेकेलोन व एमबीएस जैसे बड़े अस्पतालों में भी सप्लाई हो चुका था, जिसे अब सील कर दिया गया है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आरएमसीएल की सप्लाई की ज्यादातर सप्लाई के आईटम अभी उपलब्ध नही हो पा रहे है। वहीं कुछ अभी जांच रिर्पोट नहीं आने के कारण होल्ड पर है ऐसे में हमारी आवश्यकताओं के अनुसार लोकल परचेस के जरीये मरीजों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जा रही है।<br /><strong>- डॉ. राकेश कुमार शर्मा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल </strong></p>
<p>कोलकाता लैब भेजे गए 7 मेडिकल डिवाइसेज (सर्जिकल आइटम्स) को छोड़कर बाकी सभी दवाओं के नमूनों की रिपोर्ट आ चुकी है, जो मानक पाई गई हैं। बकाया रिपोर्ट के लिए कोलकाता प्रयोगशाला को रिमाइंडर भेजा गया है।<br /><strong>-प्रहलाद कुमार मीणा, सहायक औषधि नियंत्रक (अऊउ), कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 15:12:00 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : 10 महीने बाद एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी में गूंजा 'पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम', पूछताछ केंद्र पर भीड़ घटी</title>
                                    <description><![CDATA[खबर के प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने सुधारा सिस्टम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---public-announcement-system--operational-again-in-mbs-hospital-s-new-opd-after-10-months--congestion-at-the-inquiry-counter-reduced/article-161274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(1)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी में पिछले 10 महीने से बंद पड़ा 'पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम' आखिरकार फिर से चालू हो गया है। सिस्टम शुरू होने से अब अस्पताल आने वाले हजारों मरीजों और उनके परिजनों सहित ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी राहत मिल रही है। पहले जहां हर नये आगन्तुकों को अस्पताल के काउन्टरों की जानकारी लेने के लिए पूछताछ केन्द्र पर बैठे व्यक्ति के सामने कतार में लगना पडता था। वही अब लोगों को सामान्य जानकारीयांं यहां से प्रसारित होने लगी है।</p>
<p><strong>मेन हाल में भीड़ न लगाए,जेब कतरों से सावधान</strong><br />भीड़ में अपने कीमती सामान पर्स व मोबाइल का ध्यान रखें, प्रवेश हॉल में बेवजह भीड़ न लगाए जैसी उद्घोषणाएं अब यहां से शुरू हो गई है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क करने के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p><strong>सिस्टम बंद होने से मरीजों को हो रही थी भारी परेशानी</strong><br />पिछले 10 महीने से पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम बंद रहने के कारण दूर-दराज से आने वाले और पहली बार पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। पर्ची कटवाने से लेकर डॉक्टर का कमरा ढुंढने, एक्स-रे, जांच लैब की जानकारी के लिए भी परेशानी होती थी। साथ ही सामान्य जानकारी के लिए भी हर व्यक्ति को पूछताछ कक्ष के बाहर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था।</p>
<p><strong>सिस्टम चालू होने से मिला यह फायदा</strong><br />जानकारी के अभाव व अस्पताल में होने वाले इलाज के विभिन्न चरणों के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। आम तौर पर डॉ. की उपलब्धता व कमरा नम्बर, विभिन्न काउन्टरों की जानकारी के अलावा ओपीडी के बाहर होने वाली जांचों व दवा की उपलब्धता के लिए भी लोग कई बार एक दुसरे से पूछते रहते थे। ऐसे में इससे प्रसारित सामान्य जानकारीयों से काफी हद तक लोगों को लाभ मिलने लगा है।</p>
<p><strong>खबर का हुआ असर</strong><br />अस्पताल में बंद पडे उद्घोषणा केन्द्र के माईक व आमजन को हो रही परेशानी के विषय पर 10 जुलाई को ''पूछते पूछते गंगा जी जाने जैसे हालात'' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने सोमवार को इसे ठीक करवाया गया है।<br />पहले यहां हर छोटी जानकारी के लिए पूछताछ केन्द्र पर जाना पडता था। आज अनाउसमेंट सेवा बहाल होने से अब काउंटरों पर सही कतार जुटाना बेहद आसान हो गया है। साथ ही, लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार प्रसारित हो रही सामान्य जानकारियों और पूछताछ के कारण मरीजों को बार-बार पूछताछ केंद्र पर भटकना नहीं पड़ रहा है।<br /><strong>-दीपक परिजन नान्ता</strong></p>
<p><strong>प्रशासन का पक्ष</strong><br />मामला जानकारी में आने के तुरंत बाद संबंधित को निर्देशित कर सिस्टम को ठीक करवा दिया गया है। यह अब पूरी तरह कार्य कर रहा है। इससे अस्पताल आने वाले हर मरीज को सही व स्पष्ट जानकारी मिल पा रही है। पूछताछ केंद्र के अलावा अन्य आवश्यक जानकारी देने में भी यह बहुत उपयोगी है।<br /><strong>— डॉ. राकेश सिंह, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:57:12 +0530</pubDate>
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                <title>20 बार नोटिस, पांच साल पूरे फिर भी नहीं बन पाया लेक्चर थियेटर</title>
                                    <description><![CDATA[कंपनी ने अब तक महज 87 लाख 53 हजार 821 रुपये का ही काम किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lecture-theatre-remains-unbuilt-despite-20-notices-and-five-years-passing/article-159706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एम.बी.एस. अस्पताल में 300 छात्रों की क्षमता वाले लेक्चर थियेटर के निर्माण कार्य में सार्वजनिक निर्माण विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक और जहां विभाग के आला अधिकारी ठेका देकर प्रगति रिपोर्ट के नाम पर खानापुर्ति करते रहें। जिसके चलते यहां बनने वाला लेक्चर थियेटर पुरे 5 साल तक पुरा ही नहीं हो पाया। पी डब्ल्यू ड़ी के प्रोजेक्ट उपखण्ड द्वितीय-भवन के सहायक अभियंता ने निर्माण कंपनी 'मैसर्स के-2 इन्फ्राजेन प्राइवेट लिमिटेड' (गुड़गांव, हरियाणा) को नोटिस जारी कर 15 जुलाई 2026 तक हर हाल में काम पूरा करने की अंतिम चेतावनी दी है।</p>
<p><strong>5 साल बाद भी महज 87 लाख का काम, विभाग ने जताई नाराजगी</strong><br />विभाग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, 1 करोड़ 35 लाख 55 हजार 717 रुपये की लागत का यह प्रोजेक्ट कंपनी को 7 अप्रैल 2021 को आवंटित किया गया था। नियमानुसार यह कार्य 16 अप्रैल 2021 को शुरू होकर 15 अप्रैल 2022 को ही समाप्त हो जाना चाहिए था। हालांकि, कार्य समाप्ति की समय-सीमा निकले 4 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कंपनी ने अब तक महज 87 लाख 53 हजार 821 रुपये का ही काम किया है।</p>
<p><strong>20 पत्रों और मौखिक आश्वासनों का भी नहीं हुआ असर</strong><br />सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता और सहायक अभियंता कार्यालय द्वारा वर्ष 2021 से लेकर अब तक कंपनी को काम में तेजी लाने के लिए 20 से अधिक आधिकारिक पत्र और नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा कई बार मौखिक व दूरभाष पर भी निर्देश दिए गए। कंपनी ने पूर्व में लिखित आश्वासन देकर 30 अप्रैल 2026 तक काम पूरा करने का वादा किया था। लेकिन वह भी झूठा साबित हुआ। विभाग ने नोटिस में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि कंपनी की प्रवृत्ति जानबूझकर कार्य को अटकाने और लेट करने की प्रतीत होती है।</p>
<p>शुक्रवार को एमबीएस परिसर में निर्माण साईड़ पर पहुंचे सार्वजनिक निर्माण विभाग प्रोजेक्ट खण्ड़ के कनिष्ठ अभियन्ता कपिल मेवाडा ने बताया कि हमारी तरफ से लगातार काम की समीक्षा की जा रही है। जिससे इसका निर्माण जल्दी किया जा सकें।</p>
<p><strong>मेडिकल कॉलेज की बैठकों में उठ रहा मुद्दा</strong><br />अस्पताल में लेक्चर थियेटर का निर्माण अटकने के कारण चिकित्सा महाविद्यालय (कोटा मेडिकल कॉलेज) प्रशासन में भी भारी आक्रोश है। मेडिकल कॉलेज की ओर से आयोजित होने वाली प्रत्येक समीक्षा बैठक में इस कार्य की धीमी प्रगति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। विभाग ने साफ किया है कि यदि 15 जुलाई तक काम पूरा नहीं हुआ, तो होने वाले सभी नुकसान और दंडात्मक कार्रवाई की जिम्मेदार स्वयं निर्माण कंपनी होगी।<br />ठेकेदार को काम के लिये पाबन्द किया गया है, हमारे अधिकारी लगातार देखने जाते है। काम लगभग फाइनल स्टेज पर है बाहर की पुताई काम चल रहा है। जैसे ही निर्देश होगें हमारी तरफ से हैण्डओवर की प्रकिया कर दी जायेगी।<br /><strong>- अशोक सनाढ़य , अधिशाषी अभियन्ता पी डब्ल्यू ड़ी प्रोजेक्ट उपखण्ड 2-भवन</strong></p>
<p><strong>फाइनल फिनिशिंग का काम</strong><br />निर्माण तेजी से किया जा रहा है। केवल फाइनल फिनिशिंग का काम बाकि रह गया है। बाथरूम में सेनेटरी फिटिंग का काम होना बाकि है,ठेकेदार 8-10 दिन में काम पुरा करने की कह रहा है। सेनेटरी व पर्दे जैसी छोटी मोटी चीजें हैण्डओवर के बाद ही लगवाई जायेगी। यहां चोरी हो जाने की संभावना रहती है। इसीलिये थोड़ा काम बाकी है।<br /><strong>-रोहित शर्मा , एरिया मैनेजर केजी 2 इंफ्रा लिमिटेड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 15:07:48 +0530</pubDate>
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                <title>पूछते-पूछते गंगाजी जाने जैसे हालात, एक दूसरे से पूछ कर चला रहे काम</title>
                                    <description><![CDATA[न्यू ओपीडी में 10 माह से बंद पड़ा  'पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम'।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/navigating-by-asking-others%E2%80%94much-like-the-saying-%22one-can-reach-the-ganges-just-by-asking-the-way%22%E2%80%94is-the-reality-here--people-manage-by-inquiring-of-one-another/article-159430"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कहते हैं पूछते पूछते तो आदमी गंगाजी पहुंच जाता है। संभाग के सबसे बड़े एम.बी.एस. अस्पताल में यहीं हालात हैं। यहां मरीजों और उनके परिजनों को मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं है। 'पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम' पिछले 10 महीनों से खराब पड़ा है। पहले यह सिस्टम पुरानी बिल्डिंग की पुलिस चौकी में लगा हुआ था, जिसे बाद में न्यू ओपीडी में स्थानांतरित किया गया था। देखरेख के अभाव में अब यह नकारा हो चुका है और आलम यह है कि उद्घोषणा करने वाला यह सिस्टम फिलहाल एक कुर्सी पर पड़ा धूल चाट रहा है।अनाउंसमेंट सिस्टम बंद होने से रोजाना अस्पताल आने वाले हजारों मरीजों को पर्ची कटवाने, डॉक्टर का कमरा ढूंढने और एक्स-रे व अन्य जांचों की जानकारी के लिए एक-दूसरे से पूछताछ करनी पड़ रही है। दूर-दराज से आने वाले या पहली बार अस्पताल पहुंचे लोगों को सही जानकारी न मिलने के कारण पूरे परिसर के चक्कर काटने पड़ते हैं।</p>
<p><strong>कतार में लगने के बाद पता चलता है गलत लाइन</strong><br />अनाउंसमेंट न होने के कारण काउंटर पर लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद जब मरीज खिड़की पर पहुंचते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि वे गलत लाइन में लगे थे। इस कारण पहले से ही बीमारी से जूझ रहे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। । दवाइयों की कमी होने पर मरीजों को पुरानी ओपीडी के काउंटर संख्या 121 पर भेज दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को दवा पाने के लिए न्यू ओपीडी से पुरानी बिल्डिंग तक भटकना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>जेबतराशी और सतर्कता की सूचना देने वाला सिस्टम खामोश</strong><br />ओपीडी पर तैनात होम गार्ड ने बताया कि यहां आने वाले ज्यादातर मरीज बाहर के जिलों से होते हैं, जिन्हें पूछताछ की सख्त जरूरत होती है। मरीज के साथ आये परिजन हर्ष गौत्तम ने बताया कि मेरा अक्सर यहां आना रहता है,पहले अनाउंसमेंट सिस्टम चालू था, तब माइक के माध्यम से मरीजों को डॉक्टरों के कमरों, जांच केंद्रों की स्पष्ट जानकारी के साथ-साथ जेबतराशों से सावधान रहने की हिदायतें लगातार दी जाती थीं। इसे चालू किया जाना चाहिये।</p>
<p><strong>बाहरी जिलों से आए अभ्यर्थियों खासी परेशानी</strong><br />विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने आ रहे युवाओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंगानगर और हनुमानगढ़ की रहने वाली दो महिला अभ्यर्थियों का चयन कोटा में हुआ था। आँख का मेडिकल कराने आई दो महिला अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्हें 15 तारीख से पहले अपना मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराना है। अस्पताल में पहली बार आने और पूछताछ केंद्र पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण उन्हें सही कमरा ढूंढने में घंटों भटकना पड़ा।</p>
<p><strong>स्टाफ का कहना—ठीक होने के लिए कहा गया है</strong><br />पूछताछ केंद्र पर एक कुर्सी पर ढके पड़े सिस्टम के बारे में जब पूछताछ कक्ष के प्रभारी राहुल कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि यह लंबे समय से खराब है। इसे ठीक कराने के लिए संबंधित विभाग को सूचित कर दिया गया है।</p>
<p> मेरी जानकारी में नहीं था यह जरूरी चीज है इसे कल ही चैक करवाते है। यदि रिपेयर होने की स्थिति में है तो जल्द ही रिपेयर करवाकर शुरू करवा दी जायेगी। अस्पताल में आने वाले हर मरीज के समय की बचत व सुविधा से जुड़ी हर बात के लिये काम किया जायेगा।<br /><strong>- डॉ. राकेश सिंह अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p>यहां आने वाली महिलाऐं हो या आदमी सभी को सतर्क करने के लिये लगातार बोलते रहना पडता है। काफी दिनों से माईक खराब है ऐसे में कतारों में लगें परिजनों को घुम-घुम कर सुरक्षा व काउन्टरों की जानकारियां देते रहते है। अभी खराब है तो हमें ही लोगों के बीच खडा रह कर बार बार हिदायतें देनी पडती है।<br /><strong>- हेमराज , ओपीडी पर तैनात गार्ड</strong><br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 14:37:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एमबीएस अस्पताल में बवाल : दो मरीजों की मौत के बाद तोड़फोड़, रेजीडेंट डॉक्टरों से मारपीट</title>
                                    <description><![CDATA[फिर संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में दो मरीजों की मौत। दोनों मरीजों के परिजनों ने डाक्टर्स पर लापरवाही का आरोप लगा अस्पताल में जमकर हंगामा। अपनों की मौत से गुस्साए परिजनों ने इमरजेंसी मेडिसीन वार्ड में जमकर तोड़फोड़ के साथ रेजीडेंट डॉक्टरों से साथ मारपीट। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chaos-in-mbs-hospital-after-the-death-of-two-patients/article-153990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)66.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रसुताओं की मौत का मामला अबी ठंडा भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार को फिर संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में दो मरीजों की मौत हो गई। दोनों मरीजों के परिजनों ने डाक्टर्स पर लापरवाही का आरोप लगा अस्पताल में जमकर हंगामा किया। अपनों की मौत से गुस्साए परिजनों ने इमरजेंसी मेडिसीन वार्ड में जमकर तोड़फोड़ के साथ रेजीडेंट डॉक्टरों से साथ मारपीट की। डॉक्टर जान बचाने के लिए बाथरूम में जाकर छिपे तो लोगों ने बाथरुम का गेट तोड़ दिया और मारपीट की। इसके बाद मृतकों के परिजन बेड सहित दोनों शव अस्पताल के बाहर सड़क पर ले गए और धरने पर बैठ गए। इस दौरान पुलिस उन्हें वहां से हटाने के प्रयास करती रही। हंगामे के बीच मरीजों के परिजनों में शामिल महिलाएं बेहोश होकर सड़क पर गिर गई। पुलिस जबरन स्ट्रेचर को खीच कर मोर्चरी तक ले गई। हाईवोल्टेज हंगामा  करीब दो से ढाई से तीन घंटे तक चला। </p>
<p><strong>पंजे में घाव पर लगे टांके पकने पर कराया था भर्ती</strong><br />टोंक जिले के उनियारा तहसील के कोटड़ी गांव निवासी लाडला ने बताया कि मृतक किशन ढोल बजाने का काम करता था। 2 मई को सवाई माधोपुर में उसका एक्सीडेंट हुआ था, जिससे पैर के पंजे में चोट लगी थी, इस पर टांके लगवाए लगे थे। लेकिन, टीटनेस का इंजेक्शन नहीं लगने से कुछ दिन बाद टांके पक गए। इसके बाद उसे सवाई माधोपुर के निजी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था। गुरुवार रात करीब 12.30 बजे यहां लाकर भर्ती कराया। सुबह तक किशन की तबीयत ठीक थी। वह बात कर रहा था। फिर किशन को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया। लगभग 11 बजे के बाद उसे ड्रिप चढ़ाई गई, जिसमें इंजेक्शन लगाए गए। तबीयत बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने बोला तुम बाहर जाओ हम इलाज करेंगे। हम बाहर आ गए। इस दौरान सूचना मिली की किशन की मौत हो गई। हम वहां पहुंचे तो डॉक्टर अपना सामान छोड़कर भाग गया।</p>
<p><strong>इंजेक्शन लगते ही मौत हो गई</strong><br />बूंदी के बड़नयागांव निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि मेरे साले मदनलाल को कब्ज व दस्त की शिकायत थी। पहले बूंदी अस्पताल में भर्ती थे, वहां से गुरुवार रात एमबीएस रैफर किया था। वह बातचीत कर रहे थे, सीरियस कंडीशन में नहीं थे। डॉक्टरों ने ड्रिप चढ़ाकर इंजेक्शन लगाए। तबीयत बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने कहा, घबराने की बात नहीं है। यह सुनकर हम संतुष्ट हो गए। सुबह फिर ड्रिप व इंजेक्शन दिए गए। इसके  बाद शुक्रवार दोपहर 12 बजे  करीब मदनलाल की तबीयत गंभीर  हो गई और थोड़ी देर में ही उनकी मृत्यु हो गई। </p>
<p><strong>फिलहाल किसी ने रिपोर्ट नहीं दी है</strong><br />हंगामें के बाद पुलिस को दोनों ही पक्षों ने अब तक कोई रिपोर्ट नहीं दी है। यदि रिपोर्ट देंगे तो कार्रवाई करेंगे। <br />-डा. पूनम चौहान, डिप्टी एसपीु </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 10:02:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गलत इंजेक्शन लगाने के बाद एमबीएस अस्पताल में दो मरीजों की एक साथ मौत, शवों को सड़क पर लाकर परिजनों ने किया प्रदर्शन </title>
                                    <description><![CDATA[ पुलिस औैर प्रशासन के लोगों ने पीड़ितों को समझाइश देकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए रखवाया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/simultaneous-deaths-of-two-patients-at-mbs-hospital-following-administration-of-wrong--injection/article-153947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)82.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल व जेकेलोन में प्रसूताओं की मौत का मामला अभी खत्म भी नहीं हुआ कि शुक्रवार को संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगाने से दो लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार सुबह हुए इस हादसे के बाद मृतकों के परिजन आक्रोशित हो गए। जानकारी के अनुसार, लोगों ने अस्पातल में तोड़फोड़ भी की और एक रेजीडेंट के साथ मारपीट भी की बताते हैं। परिजन स्ट्रेचर पर रखे शवों को एमबीएस अस्पताल मुख्य मार्ग पर खींच लाए और शवों को रखकर जोरदार प्रदर्शन किया। परिजन इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई व मुआवजे की मांग कर रहेथे।  इस दौरान सड़क के दोनों तरफ जाम लग गया। लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। थोड़ी देर बाद पुलिस औैर प्रशासन के लोगों ने पीड़ितों को समझाइश देकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए रखवाया है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, टोंक जिले की उनियारा तहसील के एक गांव निवासी किशन तथा बड़गांव बूंदी निवासी मदन की इस घटना में मौत हुई है। उनियारा निवासी मरीज के पाव में संक्रमण फैला था जब कि बूंदी बड़गांव निवासी मरीज को पेट में कब्ज के चलते सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। दोनों को एमबीएस अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि ड्र्पि  में इंजेक्शन लगने से पहले दोनों मरीज गंभीर नहीं थे। इंजेक्शन लगते ही दोनों की हालत खराब होने लगी और थोड़ी ही देर में दोनों की मौत हो गई। घटना की विस्तृत जानकारी फिलहाल नहीं मिली।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:33:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दवा से मुश्किल ठंडा पानी, रात होने से पहले पानी स्टाक की फिक्र</title>
                                    <description><![CDATA[रीते कंठ इलाज कराने की मजबूरी, दवा खाने के पानी की जुगत में तीमारदार ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/finding-water%E2%80%94especially-cold-water%E2%80%94is-harder-than-finding-medicine--a-race-to-stock-up-before-nightfall/article-152720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में इन दिनों तीमारदारों को मरीज की देखभाल से ज्यादा चिंता एक बोतल पानी की है। अस्पताल परिसर में पहले जहां हर जगह शीतल जल उपलब्ध हो जाता था वहां पानी के लिये 100 मीटर तक की दूरी तय करनी पड रही है। कहने को परिसर में 28 वाटर कूलर लगे हैं, लेकिन धरातल पर केवल 18 ही जैसे-तैसे चल रहे हैं। बाकी या तो कबाड़ हो चुके हैं या प्रशासन की लापरवाही के कारण तालों में बंद हैं। एक बार जहां से पानी की सुविधा बंद हुई फिर वो चालू की ही नहीं गयी। ऐसे में परिजनों के लिये के लिये बोतलें हाथ में लेकर घुमने की मजबूरी इलाज का हिस्सा बन चुकी है।</p>
<p><strong>बदहाल सिस्टम से परिजनों की परिक्रमा</strong><br />300 फीट लम्बे गलियारों को पार करने के बाद परिसर में लगे वाटर कूलरों से पानी लेने जाने के बाद भी कई बार पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में एमबीएस परिसर की ओल्ड़ बिल्डिंग में पीने के पानी के लिये बाहर आने की मजबूरी से परिजनों की लम्बी परेड़ हाे जाती है। कई बार तो परिजन सड़क पार करके भी पानी लेकर जाते है। सबसे बड़े वार्ड मेडिकल के मरीज पानी के लिए ENT वार्ड की गैलरी तक दौड़ रहे हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में लगा कूलर का तो कनेक्शन ही काट कर हटा दिया है हांलाकि कूलर बाहर रखा है। बर्न वार्ड के रिनोवेशन के चलते महीनों से पानी की सुविधा पर ताला लगा है।</p>
<p><strong>पहले कहा मेन्टीनेन्स के बाद, अब जरूरत नहीं</strong><br />परिसर में लगे वाटर कूलरों की 19 अप्रेल को खबर प्रकाशित करने के दौरान अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि पुराने वाटर कूलरों को मेन्टीनेन्स के लिये हटाया गया है, जिन्हे वापस चालू कर दिया जायेगा। लेकिन भीषण गर्मी 15 दिन गुजर जाने के बाद भी सुविधायें बहाल नहीं हो पायी तब दैनिक नवज्योति ने जन उपयोगीता के मुद्देज पर अस्पताल प्रशासन से पक्ष लिया तब अस्पतान अधीक्षक ने ऐसी जगहों पर दुबारा से प्याऊ शुरू करने की जरूरत नही बताई। पहले दवा काउँटर नं 9, दवा काउन्टर 121 तथा सर्जीकल वार्ड के भीतर लगे प्याऊ बंद कर दिये गये है।</p>
<p><strong>जहां से हटे फिर नहीं लगे,अधीक्षक बोले हमारे पास एक्स्ट्रा</strong><br />लेखा शाखा के बाहर रखा वाटर कूलर कई महीनों से हटाया गया है। न्यू आईपीड़ी व पुराने कॉटेज वार्ड़ की तरफ से आने वाले परिजनाें व लेखा शाखा के कार्मिकों के लिये यही वाटर कूलर ठण्ड़े पानी के लिये काम आता है। अस्पताल सुत्रों ने बताया कि यह कण्ड़म होने के कारण हटा लिया गया है, वही अधीक्षक महोदय के बताये अनुसार अधीक्षक कार्यालय में वाटर कूलर रिजर्व में रखे हुये है।</p>
<p><strong>रखरखाव तो दूर गेट पर ही ताला</strong><br />मेडिकल यूनिट B व C में 2 साल पहले पानी के लिए बाटर कूलर काम कर रहा था पिछले साल से पार्क की तरफ जाने वाला गेट बंद कर दिया गया हांलाकि कूलर आज भी वहीं लगा हुआ है जाे अब कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है। </p>
<p><strong>जहां खाना खाने के साथ ठण्ड़े पानी की थी जगह, अब पीक व गंदगी</strong><br />आर्थोपैड़िक वार्ड़ के बाहर परिजनों के खाना खाने के लिये डाईनिंग हालनुमा केम्पस बनाया गया था यहीं पर एक वाटर कूलर भी लगा हुआ है। सीपेज की समस्या के कारण इसे बन्द कर के पुरे केम्पस पर ही ताला लगा दिया। अब यहां लगा कूलर कबाड़ बन गया वहीं गेट के भीतर गंदगी का ढ़ेर जमा हो गया। बची-खुची कसर यहां लोगो ने गुटके की पीक से पुरी कर दी।</p>
<p><strong>मरीज बोले- दवा से मुश्किल ठंडा पानी</strong><br />भैया के एक्सीडेंट के बाद 5 दिन से यहाँ हूँ। रात में अस्पताल में रोशनी कम रहती है, डर लगता है लेकिन पानी के लिए पूरे अस्पताल की परिक्रमा करनी पड़ती है। कोई मिलने वाला आ जाये तो पानी की पुछने में भी सोचना पड़ता है।<br /><strong>- वंदना, तीमारदार</strong></p>
<p>अभी थोडी देर पहले ही 30 रूपये की पानी की बोतल लेकर आयी हूँ यहां वाटर कूलर तो है लेकिन दूसरे वार्ड के भी यही से भरते है कभी भी पानी ठंडा नहीं मिलता। बाहर भी यही हाल है।<br /><strong>-पूजा ,मरीज की पत्नी</strong></p>
<p>जहां आवश्यकता है वहां के वाटर कूलर चालू है। सभी काे बिना जरूरत चालु करने से क्या फायदा। रिजर्व में रखवा रखें है। वाटर टेंक की सफाई करवाई जाती है। डेट भी रहती है।<br /><strong>-डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 13:30:20 +0530</pubDate>
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                <title>सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला</title>
                                    <description><![CDATA[17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर के सरकारी आवासीय कॉलोनी की बदहाल स्थिति ने स्थानीय निवासियों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा में गंभीर समस्या पैदा कर दी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान न दिए जाने के कारण यह सरकारी आवास खण्डहरों में तब्दील हो चुके है। यहाँ रहने वाले परिवारों ने इन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया  है। एक समय ये आवास चिकित्सकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इनमें रहने की संभावना न के बराबर है। कर्मचारयों के यहां से जाने के बाद इन्हे तुड़वाने का एस्टीमेट बनाने के लिये सार्वजनिक निर्माण विभाग को कहा गया लेकिन तभी से यह खाली घर और भी जानलेवा हो चुके हे।</p>
<p><strong>खण्डहर में तब्दील आवासों की खौफनाक तस्वीर</strong><br />अस्पताल परिसर में 64 सरकारी आवासों में से 35 आवासों की संख्या आवंटित की गई थी। हालांकि, इनमें से 17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं और 7 ही ऐसे हैं जो किसी तरह रहने योग्य माने जा सकते हैं। इन खण्डहरों के अंदर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारें, छतें और अन्य संरचनाएं गिरने का खतरा बनी रहती हैं। अस्पताल प्रशासन ने इन आवासों को पूरी तरह छोड़ दिया है, जिससे न केवल आवासीय कॉलोनी, बल्कि आसपास के लोग भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नशेड़ियों से सुरक्षा को गम्भीर खतरा</strong><br />नशा मुक्ति केन्द्र के पास स्थित खाली आवासीय ढांचे दिन भर दवाई लेने आने वाले लोगों से भरे रहते हैं, लेकिन रात के समय ये खाली मकान नशे के आदि लोगों के आश्रय स्थल में बदल जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्मैक और इंजेक्शन से नशा करने वाले नशेड़ियों की टोलियां यहाँ मंडराती रहती हैं और कभी-कभी अपने साथ महिलाओं को भी लेकर आती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन खंडहरों में नशेड़ी गैंग के जमा होने से कई सुरक्षा खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। खाली मकानों की दीवारें गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, साथ ही इन जगहों पर चोरी और अन्य अपराध की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसके चलते अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खंडहरों को नशेड़ी और स्मैकचियों का अड्डा बनने से न केवल चोरी और अव्यवस्था बढ़ी है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p><strong>झाड़ियां और पेड़ों से बढ़ता जंगली जानवरों का खतरा</strong><br />परिसर में स्थित इस क्षेत्र में काफी घनी झाड़ियाँ उग आई है यहां पुराने पेड़ होने से घना जंगल बन गया है अभाी हाल ही में यहां सांभर नजर आ रहा है ।साथ ही जहरीले सांप, बिच्छू और गिरगिट जैसे खतरनाक जानवरों की उपस्थिति से क्षेत्र के निवासियों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर बरसात के मौसम में इस समस्या में वृद्धि हो जाती है। इन जानवरों के कारण, न केवल अस्पताल परिसर में रहने वाले लोग, बल्कि आसपास के नागरिक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी की टूटी सड़क पर फैला सीवरेज का पानी</strong><br />इन्ही खाली पड़े आवासों के पास नयी मोर्चरी भवन की शुरूआत की गयी थी । ऐसे में यहां आने वाले परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इस सड़क के दोनों और मिट्टी और कंस्ट्रक्शन का मलबा पड़ा हुआ है । साथ ही नयी क्वार्टरर्स के पास सड़क पर ही सीवरेज का पानी जमा हुआ रहता है।</p>
<p><strong>चुप्पी तुड़वाने  में ही लग गये 2 साल</strong><br />अस्पताल प्रशासन भले ही खण्डहर हो चुके आवासों की जगह नये आवास बनाने के लिये प्रक्रिया प्रारम्भ करने की बात कह रहा है लेकिन पिछले ढ़ाई सालों से अव्यवस्थाओं के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अन्य डुप्लेक्स आवासों में रह रहे स्टाफ इस स्थिति से परेशान हैं और उनका कहना है कि अगर प्रशासन जल्द ही इस पर ध्यान नहीं देता, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। खण्डहर आवासों की मरम्मत और रख-रखाव की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई की व्यवस्था, और जहरीले जानवरों से सुरक्षा के लिए यहां की जंगली झाड़ियां कटवाकर सफाई हेतु कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p> साल 2012 से इन क्वार्टरर्स में रह रहा था, करीब 14 पैड़ अमरूद 3 पेड़ आम के लगायें थे । जबसे यहां पर नशामुक्ति केन्द्र चालू हुआ तब से एक एक करके सारे आवास खाली हो गये। सारी रौनक खत्म हो गयी।<br /><strong>-कमलेश, निवासी के आर 221</strong></p>
<p> मै यहां सालों से नौकरी करता हूँ, यहां सबकुछ ठीक ठाक था सुख दु:ख में साथ देते थे। अब केवल दिन में मोर्चरी को आने वाले लोग नजर आते है रात के समय चारो तरफ अनजान नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है ।<br /><strong>-अफजल इलेक्ट्रिशियन पीएचड़ी पम्प हाउस</strong></p>
<p>इन क्वार्टर्स को नये सिरे से तैयार करवाने की और हमारा ध्यान हे इसके लिये पी डब्ल्यूडी से एस्टीमेट के लिये कहा गया है,इसके बाद ही बताया जा सकता है कि इस जगह का क्या उपयोग हो सकता है ।<br /><strong>-डा. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>
<p>इन खण्डहर आवासों जो बिल्कुुल भी रहने योग्य नहीं है इनके ध्वस्तीकरण के लिये हमनें एस्टीमेट बना दिया है, निर्णय पर आने की कार्यवाही हमारे स्तर पर की जायेगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खंड पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - एमबीएस एवं जे.के.लोन परिसर में ड्रेनेज समस्या का होगा समाधान, संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में पांच फरवरी को प्रमुखता से उठाया था मामला ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---drainage-problems-in-the-mbs-and-jk-lon-complexes-will-be-resolved/article-143016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को सीएडी सभागार में आयोजित बैठक में एमबीएस हास्पीटल एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में वर्षा जल भराव की समस्या के समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण तथा एक एमएलडी के एसटीपी के निर्माण के लिए आरयूआईडीपी से डिजाईन बनवाने के निर्देश दिए गए। बैठक में संभागीय आयुक्त ने निर्देश दिए कि एमबीएस एवं जेके लोन हॉस्पिटल परिसर की क्षतिग्रस्त दीवार का शीघ्र निर्माण कराया जाए। उन्होंने एमबीएस एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में स्थित पुराने, अनुपयोगी, जर्जर एवं नकारा घोषित स्ट्रक्चर को नियमानुसार गिराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन आईपीडी के मॉड्यूलर आॅपरेशन थियेटर में पानी के लीकेज, सीपेज एवं टाइल्स उखडने से मरीजों एवं अस्पताल स्टाफ को हो रही समस्या के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को मौका निरीक्षण करने एवं समस्या का स्थाई समाधान निकालने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>आरएमआरएस में उपलब्ध फंड की भी समीक्षा</strong><br />उन्होंने नवीन आईपीडी एवं पुराने भवन को जोड़ने के लिए कनेक्टिंग कोरिडोर का कार्य शीघ्र पूरा करने तथा चिकित्सालय परिसर में लगी हुई खराब लाइटों का ठीक करने के भी निर्देश दिए। बैठक में आरएमआरएस में उपलब्ध फंड एवं प्रगतिरत कार्यों के बारे में भी समीक्षा की गई। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, केडीए आयुक्त ममता तिवारी, केडीए सचिव मुकेश चौधरी, मेडिकल कॉलेज कोटा की प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना,एमबीएस हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा, जेके लोन हॉस्पिटल की अधीक्षक निर्मला शर्मा, निदेशक अभियात्रिंकी केडीए रविन्द्र माथुर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी अशोक सनाढय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में गत पांच फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 15:06:41 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का संकट, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बदहाल ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-trolleys--stretchers--and-wheelchairs-at-mbs-hospital--causing-distress-to-patients/article-138578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमबीएस में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बिगड़ती जा रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में शहर के बाहर से आने वाले मरीज भी शामिल हैं, जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>परिजन खुद करते मशक्कत</strong><br />अस्पताल में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इमरजेंसी और ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाने में परिजनों को खुद मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार मरीजों को सहारे से या गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों का कहना</strong><br />एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नहीं किया गया। पहले भी कई बार व्यवस्थाओं की लापरवाही सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए। शहरवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में तत्काल पर्याप्त संख्या में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही अस्पताल प्रबंधन की नियमित निगरानी हो, ताकि संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को सम्मानजनक और सुचारु स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।</p>
<p><strong>घर से लाना पड़ रहा स्ट्रेचर</strong><br />सरकारी अस्पताल अब सिर्फ नाम का रह गया है। समय पर इलाज नहीं मिल पाता और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सुविधाओं की कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहा पर ट्रॉली, स्ट्रेचर की व्यवस्था नही होने के कारण घर से ही लाना पड़ रहा है।<br /><strong>-जीतू ,संजय नगर निवासी</strong></p>
<p><strong>ढूंढने पर भी नहीं मिली व्हीलचेयर</strong><br />मैनें पूरे अस्पताल परिसर में ट्रॉली और व्हीलचेयर ढूंढी, लेकिन कहीं भी उपलब्ध नहीं हुई। में मरीज चलने की हालत में नहीं था, ऐसे में परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।  ऐसी स्थिति में मरीज की जान पर भी खतरा बन सकता है।<br /><strong>- रमेश, नया नौहरा</strong></p>
<p>ट्रॉली व स्ट्रेचर की कमी होने पर तुरंत स्टॉक से उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि उपचार के दौरान मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।<br /><strong>- कुंज बिहारी मीणा, नर्सिंग इंचार्ज एवं इमरजेंसी प्रभारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:10:01 +0530</pubDate>
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