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                <title>असर खबर का.... मिली सौगात: भामाशाह मंडी विस्तार का रास्ता हुआ साफ, 96 हैक्टेयर में विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को  परेशानियां आ रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-reporting----a-welcome-boon--path-cleared-for-bhamashah-mandi-expansion--national-board-for-wildlife-approves-expansion-across-96-hectares/article-147031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियों में शामिल भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। वर्षों से लंबित मंडी के विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 89वीं स्थायी समिति की बैठक में महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निरन्तर प्रयासों से मिली सफलता से हाड़ौती क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। भामाशाह मंडी के विस्तार से भंडारण, विपणन और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और व्यापारियों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>जाम और लम्बे इंतजार से मिलेगी निजात</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही आवक के मुकाबले मंडी में पर्याप्त शेड नहीं होने से बारिश के समय किसानों की उपज खराब होने का खतरा रहता है। विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी, राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से भी मंडी सीधी जुड़ जाएगी, इससे जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी और किसानों को उपज बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>अरसे से अटका था मामला</strong></p>
<p>मंडी से जुड़े वन भूमि के कारण विस्तार का मामला वर्षो से लम्बित था। विस्तार की स्वीकृति मिली तो फिर वन क्षेत्र से गुजर रहे राजमार्ग के किनारे एक किमी तक पौधारोपण से जुड़े नियमों के कारण विस्तार फिर से अटक गया। दिल्ली में स्पीकर बिरला और केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच हुई बैठकों के बाद नियम में शिथिलता के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) में आवेदन किया गया था। इसके बाद समिति द्वारा वर्ष 2007 में कोटा बाइपास निर्माण के दौरान निर्धारित ग्रीन बेल्ट से जुड़ी शर्तों में संशोधन कर स्वीकृति दे दी गई है, जिससे लगभग 96 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लैंड डायवर्जन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong></p>
<p>एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को आ रही परेशानियों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसमें बताया था कि सीजन में मंडी अनाज से ठसाठस भर जाती है। मंडी गेट से दो-तीन किलोमीटर लम्बी अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लग जाती है। काफी समय से मंडी के विस्तार की दरकार है। भामाशाहमंडी में खरीफ व रबी सीजन के पीक टाइम में रोजाना 2 लाख से 5 लाख बोरी कृषि जिंसों की आवक होती है। मंडी में राजस्थान ही नहीं देश के कई राज्यों से यहां अनाज आ रहा है। ऐसे में मंडी छोटी पड़ने के साथ ही मंडी प्रशासन की व्यवस्थाएं भी अब छोटी हो चुकी हैं। यार्ड फुल होने के बाद अब खुले में व सड़कों पर नीलामी करनी पड़ रही है।</p>
<p>भामाशाह मंडी का विस्तार हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंडी के विस्तार से किसानों को सुविधा के साथ व्यापार सुगम होगा साथ ही क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में कोटा की भामाशाह मंडी देश की सबसे आधुनिक कृषि मंडियों में शामिल होगी और हाड़ौती के लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>- ओम बिरला, अध्यक्ष लोकसभा</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी को विस्तार मिलने के बाद अब इसकी सुविधाओं में भी इजाफा होगा। जिसके चलते अब इसके टर्नओवर में करीब दो से तीन गुना वृद्धि होगी। वहीं अब मंडी एयरकनेक्टिीविटी से जुड़ने के साथ ही एटलेन व फोरलेन से सीधे जुड़ेगी। वहीं मंडी परिसर में रेल्वे ट्रैक का निर्माण होगा। जिससे अब माल का लदान यही से होगा। 20 टन के कांटे लगाने की योजना हैं जिससे लेबर लेस तुलाई होगी।</p>
<p><strong>-महेश खंडेलवाल, महामंत्री भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>मंडी का विस्तार होने से जो सीजन के समय पर कतारें लगती थी। वह अब खत्म होगी। किसान दो से तीन दिन तक इंतजार करते थे। अब वह इंतजार खत्म होगा। साथ ही किसानों के माल की तुरंत नीलामी होगी। जिससे अब किसानों को नीलामी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंडी का विस्तार होने से विभिन्न सुविधाओं का विस्तार होगा।</p>
<p><strong>-मनोज मीणा, सचिव, भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>भामाशाहमंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। अब विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>-जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 14:09:12 +0530</pubDate>
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                <title>बजट होते हुए भी विकास कार्यों में खर्च नहीं कर पा रहे कॉलेज, प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के सरकारी कॉलेजों में लेखाधिकारी नहीं, बजट लेप्स होने का मंडराया खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-having-a-budget--colleges-are-unable-to-spend-on-development-projects/article-144941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(5).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र के अधिकांश सरकारी महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी (डबलएओ) के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिसका असर कॉलेजों की वित्तीय व्यवस्था और शैक्षणिक सुविधाओं पर पड़ रहा है। जरूरी सामान की खरीद से लेकर बिल भुगतान तक के काम अटक रहे हैं, जिससे महाविद्यालय प्रशासन को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि 10 हजार रुपए से अधिक की किसी भी वस्तु की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया जरूरी होती है, जो सहायक लेखाधिकारी के अभाव में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। नतीजन फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां, कंप्यूटर और अन्य आवश्यक उपकरण की बजट होते हुए भी कॉलेज प्रशासन खरीद नहीं कर पा रहे हैं। इससे कॉलेजों की मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p><strong>प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</strong><br />शिक्षकों ने बताया कि कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों के एक दर्जन से अधिक सरकारी कॉलेजों में सहायक लेखाधिकारी का पद भरा नहीं है। जिसकी वजह से सिर्फ वित्तीय संबंधित कार्य ही नहीं बल्कि शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। लेखा संबंधित छोटे मोटे कार्यों का जिम्मा जिन शिक्षकों को दिया जाता है, उनका शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा दैनिक कैशबुक का रख-रखाव, नोटशीट पर टिप्पणियां व ट्रेजरी से जुड़े बिलों का निपटान जैसे कार्यों में तकनीकी और लेखा संबंधी समझ की आवश्यकता होती है, जो सामान्यत: शिक्षकों के कार्यक्षेत्र से अलग है। ऐसे में प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>फर्नीचर का बजट लेप्स होने का खतरा</strong><br />सुकेत कॉलेज के छात्रों का कहना है, महाविद्यालय में फर्नीचर खरीद के लिए 4 लाख का बजट आया हुआ है लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं होने के कारण अब तक खरीद नहीं हो पाई, जबकि अगले माह वित्तीय वर्ष समाप्त होने के साथ बजट भी लेप्स होने का खतरा मंडरा रहा है । जरूरी संसाधनों की समय पर खरीद न होने और वित्तीय प्रक्रियाओं के लंबित रहने का सीधा असर विद्यार्थियों की सुविधाओं और पढ़ाई पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>हाड़ौती के इन कॉलेजों में नहीं डबल एओ</strong><br />कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर हाड़ौती के एक दर्जन से अधिक राजकीय महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी के पद खाली पड़े हैं। जिनमें राजकीय महाविद्यालय इटावा, कनवास, सांगोद, रामगंजमंडी, सुकेत, चेचट, दीगोद, बारां जिले में राजकीय महाविद्यालय छिपाबडौद, अटरु, बूंदी जिले के गवर्नमेंट कॉलेज तालेड़ा, हिंडोली, डाबी सहित कई कॉलेज शामिल हैं। इन कॉलेजों को विकास सामग्री खरीदने के लिए या तो नोडल महाविद्यालय या फिर रे-सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है।</p>
<p><strong>इन समस्याओं से जूझ रहे कॉलेज प्रशासन</strong><br />शिक्षकों का कहना है, महाविद्यालयों में फर्नीचर, कम्यूटर, इनवर्टर, कूलर-पंखें, टेबल-कुर्सियां खरीद व संविदा पर लगे शिक्षकों का वेतन संबंधित, विद्यार्थियों का फीस स्ट्रक्चर, स्टेशनरी क्रय, एडमिशन के दौरान आने वाली फीस को विभिन्न मदों में विभाजित करना, कक्षा-कक्ष मेंटिनेंस, अनुमानित बजट बनाना, लाइब्रेरी का सेटअप तैयार करना व किताबें खरीदने सहित सम्पूर्ण वित्तीय कार्य सहायक लेखाधिकारी द्वारा किए जाते हैं। जिनके अभाव में महाविद्यालय प्रशासन आवश्यक साधन संसाधनों की खरीद नहीं कर पाते। संभाग में कई महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य व प्रोफेसर</strong><br />लाइब्रेरी के लिए अलग-अलग मद में बजट आया हुआ है। लाइब्रेरी सेटअप, कताबें वह अन्य सामानों के लिए 75 - 75 हजार का बजट मिला है। इनमें मात्र 20 हजार रुपए की ही खरीद हो पाई है। जबकि 55 हजाररुपए यूं ही पड़े हैं, क्योंकि एसपीपीपी पोर्टल पर खरीद प्रकिया के लिए टेंडर किए जाने होते हैं, जो वित्त संबंधी नियमों की जानकारी के बगैर नहीं हो सकते। ऐसे में सहायक लेखा अधिकारी नहीं होने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- ललित कुमार, प्रोफेसर राजकीय महाविद्यालय कनवास</strong></p>
<p>सहायक लेखाधिकारी नहीं होने से वित्तीय संबंधी कार्यों के लिए काफी परेशानी हो रही है। वर्तमान में कॉलेज में 600 स्टूडेंट है जिसके मुकाबले टेबल कुर्सियां 300 ही है। ऐसे सहायक लेखाधिकारी के अभाव में आवश्यक सामग्री की खरीद समय पर नहीं हो पाती। टेंडर संबंधित कार्य नियमों के अभाव में शिक्षक नहीं कर पाते हैं। अनावश्यक देरी से बजट लेप्स होने का खतरा बना रहता है।<br /><strong>- रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय इटावा</strong></p>
<p>सुकेत कॉलेज में फर्नीचर के लिए 4 लाख का बजट मिला हुआ है। लेकिन खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं होने से बजट लेप्स का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में आयुक्तालय को भी लिखा है। इस बजट से 200 से टेबल कुर्सी खरीदनी है। हालांकि बजट लेफ्ट ना हो इसके लिए खादी ग्रामोद्योग से फर्नीचर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन हर कॉलेज सहायक लेखाधिकारी होना चाहिए।<br /><strong>- संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी</strong></p>
<p>कॉलेज में डबल एओ का पद रिक्त है। ऐसे में आवश्यक संसाधनों की खरीद के लिए या तो नोडल कॉलेज या फिर रे- सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। पिछले साल भी डबल एओ के अभाव में टेंडर प्रक्रिया समय पर नहीं हो पाने से बजट लैप्स हो गया। वित्तिय संबंधी कार्यों में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>- डॉ. बुद्धिप्रकाश मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय अटरु</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बड़े कॉलेजों में लेखाधिकारी कार्यरत हैं, संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा मांग करने पर दूसरे नोडल महाविद्यालयों या रे- सेंटर से व्यवस्था की जाती है।<br /><strong>- प्रो. विजय पंचोली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> हाड़ौती के दो बड़े कॉलेजों में 37 शिक्षकों के पद रिक्त, दो सेशन के विद्यार्थियों को एक साथ बिठाकर लगानी पड़ती है क्लास</title>
                                    <description><![CDATA[सेमेस्टर के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thirty-seven-teaching-positions-are-vacant-in-two-major-colleges-in-hadoti--forcing-students-from-two-semesters-to-sit-together-for-classes/article-129639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(25).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के दो बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में स्टूडेंट्स ही नहीं फैकल्टीज की भी आधी से ज्यादा सीटें खाली हैं। वाणिज्य महाविद्यालयों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों  के मुकाबले आधे से ज्यादा पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। जिससे विद्यार्थियों पढ़ाई में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय पर कक्षाएं नहीं लगने सहित अन्य समस्याओं के कारण विद्यार्थियों का भी नियमित कॉलेज आने में रुझान घटने लगा है। इधर, विशेषज्ञों का तर्क है कि वर्तमान दौर आर्टिफिशल इंटेलीजेंस से रुबरू हो रहा है लेकिन कॉमर्स के पाठ्यक्रम में एआई की उपयोगिता को शामिल नहीं किया गया। साथ ही महाविद्यालयों में थ्यौरी के अलावा प्रेक्टिकली नॉलेज का अभाव भी घटते रुझान का बड़ा कारण है। क्योंकि, कॉमर्स पढ़ने वाले छात्रों की कमी का असर आगामी वर्षों में फैकल्टीज के रूप में नजर आएगा।  यही वजह है कि कॉलेजों में आज स्वीकृत पदों के विपरीत  रिक्त पदों की संख्या अधिक है। </p>
<p><strong>बॉयज में 7.50 तो गर्ल्स कॉलेज में 5.50 सौ स्टूडेंट्स ने एडमिशन नहीं लिया  </strong><br />वाणिज्य उच्च शिक्षा में घटते रुझान का सबसे बड़ा उदारहण  बयॉज व गर्ल्स कॉमर्स कॉलेज की प्रथम वर्ष की सीटों के आंकड़ों से स्पष्ट होते हैं। गवर्नमेंट कॉमर्स में बीकॉम फर्स्ट ईयर में 1400 सीटें हैं, जिन पर 6.50 ही एडमिशन हुए हैं। शेष 7.50 सौ विद्यार्थियों ने दाखिला लेने में ही रुचि नहीं दिखाई। इसी तरह गर्ल्स कॉलेज में 800 सीटों के मुकाबले 250 छात्राओं ने ही एडमिशन लिया है और 5.50 सौ सीटें खाली रह गई। </p>
<p><strong>शिक्षा से दूर हो रही क्वालिटी</strong><br />विषयवार प्रोफेसरों के पद रिक्त होने का विपरीत असर कॉलेज शिक्षा में देखने को मिल रहा है। उच्च शिक्षा से क्वालिटी दूर होती जा रही है। हालात यह है, यहां बच्चे सालभर में बहुत ही कम समय कॉलेज आते हैं। जिसमें पहली बार कॉलेज में नामांकन कराने, दूसरी बार परीक्षा फार्म भरने व तीसरी बार परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड लेने और चौथी बार परीक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। क्योंकि, कॉलेज में विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित रहती है।  विद्यार्थी अखिलेश नागर, दीपांशु मेहरा ने बताया कि सेमेस्टर प्रणाली के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है। ऐसे में शिक्षकों की कमी से कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता। </p>
<p><strong>दोनों कॉलेजों में 67 में से 37 शिक्षकों के पद रिक्त </strong><br />आयुक्तालय के क्षेत्रिय सहायक निदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बयॉज व गर्ल्स कॉलेजों में  शिक्षकों के कुल 67 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 30 ही कार्यरत हैं। ऐसे में 37 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इनमें अकाउंटिंग, अर्थशास्त्र तथा बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्ल्स कॉलेज में अकाउंटिंग में शिक्षकों के 8 पद स्वीकृत हैं, जिसके मुकाबले 2 , बीएडीएम में 8 के विपरीत 4 तथा इकोनोमिक्स में 7 के मुकाबले 4 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।</p>
<p><strong>कॉमर्स के प्रति घटते रुझानके प्रमुख कारण</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय में वाणिज्य एवं प्रबंध विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मीनू माहेश्वरी बतातीं हैं, कोटा सहित प्रदेश में लगातार कॉमर्स के प्रति रुझान घट रहा है। जिसका विपरीत असर फैकल्टीज की उपलब्धता में कमी के रूप में भी देखे जा रहे हैं। हालांकि, रुझान घटने के कई प्रमुख कारण हैं,जो इस प्रकार हैं। <br />- वर्तमान में विद्यार्थी 11वीं-12वीं में कॉमर्स विषय का चयन करते हैं, जबकि कई वर्षों पहले 9वीं कक्षा से ही वाणिज्य शिक्षा शुरू हो जाती थी और सीनियर सैकंडरी तक विद्यार्थी कॉमर्स में कॅरियर के विकल्पों से परिचित हो जाते और उच्च शिक्षा में स्पेशलाइजेशन कर किस क्षेत्र में कॅरियर बनाना है, इससे भलीभांती परिचित हो सकते हैं।  <br />- स्कूल शिक्षा में कॉमर्स अभ्यर्थियों को केवल फर्स्ट ग्रेड शिक्षक बनने का आॅप्शन रहता है। हालांकि, थर्ड ग्रेड में भी शिक्षक बन सकते हैं लेकिन सैकंड ग्रेड में कॉमर्स विषय नहीं मिलता।<br />- जूनियर अकाउंटेंट परीक्षा के लिए साइंस-आर्ट्स के अभ्यर्थी भी पात्र होते हैं, जबकि यह क्षेत्र कॉमर्स का है फिर भी वरियता नहीं है। </p>
<p><strong>यूं बढ़ सकता है वाणिज्य के प्रति रुझान</strong><br />- लेखांकन, वित्त, अंकेक्षण, बीमा, इनकम टैक्स, इंश्योरेंस के अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए स्कूली शिक्षा में कक्षा-6 से ही हिन्दी, अंगे्रजी, सामाजिक विज्ञान सहित अन्य विषयों के साथ वाणिज्य शिक्षा को भी शुरू किया जाना चाहिए।<br />- प्राथमिक कक्षाओं से ही वाणिज्य पढ़ाया जाए  तो न केवल विद्यार्थियों का रुझान बढ़ेगा बल्कि शिक्षकों की आवश्यकता भी बढ़ेगी। जिससे नए पद सजृन होंगे और आगे जाकर विद्यार्थी शिक्षक बन कॅरियर बना सकेंगे। <br />- प्रतियोगी परीक्षा जूनियर अकाउंटेंट, अकाउंटेंट जैसी परीक्षाओं में कॉमर्स अभ्यर्थियों को वरियता दी जानी चाहिए। इन परीक्षाओं के सिलेबस में 80% प्रश्न वाणिज्य से संबंधित होने चाहिए। <br />- यूजीसी की नेट परीक्षा कॉमर्स से संबंधित अन्य विषयों में भी करवाई जानी चाहिए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />कॉलेजों में अकाउंट्स, अर्थशास्त्र व बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन के शिक्षकों के पद पिछले चार-पांच सालों से चल रहे हैं। जो टीचर्स कार्यरत हैं, उनमें से कुछ को गैर शैक्षणिक कार्य एनएसएस, छात्रवृति, स्पोर्ट्स कई गतिविधियों में लगा रखा है। ऐसे में यह शिक्षक अपनी क्लास नहीं ले पाते। नतीजन, पढ़ाई का नुकसान होता है। <br /><strong>-अर्पित जैन, निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>कॉलेजों में पहले ही सब्जेक्ट टीचर्स की कमी है और प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर भी बना दिया जाता है। जिससे पढ़ाई ठप हो जाती है। क्योंकि, पेपर तक महाविद्यालय में छुट्टियां लगी होती है। वहीं, दो-दो सेशन के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाना मजबूरी बन जाती है। <br /><strong>-सतीश कुमार, बलवीर, छात्र कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>कॉमर्स कॉलेजों में फैकल्टीज के पद व प्रथम वर्ष की सीटें आधी से ज्यादा खाली हैं। वर्तमान में आरपीएससी से शिक्षकों की चयन प्रक्रिया चल रही है। आर्ट्स-साइंस के शिक्षक मिल चुके हैं। जल्द ही कॉमर्स के भी मिलने की संभावना है। सरकार रिक्त पदों को भरने की पूरा प्रयास कर रही है। वहीं, विद्यार्थियों में रुझान बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में जॉब आॅरियंटेड टॉपिक को शामिल किए जा रहे हैं। <br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 16:48:53 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प ट्रैरिफ : हाड़ौती में 500 करोड़ का निर्यात गड़बड़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय, टैरिफ बढ़ने से महंगे मिलेंगे उत्पाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trump-tariff--exports-worth-rs-500-crore-in-hadoti-affected/article-125257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 फीसदी ट्रैरिफ लगाने से जहां देशभर से अमेरिका को होने वाले भारतीय उत्पादों का निर्यात प्रभावित होगा। वहीं इसका हाड़ौती संभाग पर भी सीधा असर पड़ेगा। यहां से अमेरिका को भेजे जाने वाले उत्पादों का निर्यात कम होगा। जिससे करीब 500 करोड़  का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। हाड़ौती संभाग के चारों जिलों में कई उत्पाद ऐसे हैं जिनकी अमेरिका में काफी डिमांड रहती है। अमेरिका में रहने वाले करीब 50 लाख से अधिक भारतीय उन स्थानीय उत्पादों का उपयोग भी करते हैं। उन उत्पादों को भारत सरकार के माध्यम से अमेरिका में निर्यात किया जाता है। लेकिन हालत यह है कि पहले जहां अमिरिका द्वारा भारत पर 25 फीसदी ही टैरिफ लगाया हुआ था। वहीं उसे बढ़ाकर अब 50 फीसदी कर दिया है। इससे अमेरिका में निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों की जहां कीमत तो अधिक होगी ही साथ ही महंगी होने से वहां इन उत्पादों की मांग कम होने से निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ेगा।  हालांकि भारत सरकार द्वारा टैरिफ का तोड़ निकालते हुए स्थानीय बाजार व अन्य देशों को निर्यात करने की योजना बनाई गई है। लेकिन उसमें समय लगने से निर्यात कम होने से हर उत्पाद का बाजार प्रभावित हुआ है। </p>
<p><strong>सबसे अधिक कोटा स्टोन व सेंड स्टोन उद्योग पर असर</strong><br />कोटा का कोटा स्टोन व डाबी का सेंड स्टोन उच्च क्वा लिटी का होने से इसकी डिमांड अमेरिका समेत अन्य देशो में अधिक है। ऐसे में अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से न तो कोटा स्टोन का निर्यात हो सकेगा और न ही सेंड स्टोन का। उद्यमियों के अनुसार इससे दोनों का सालाना निर्यात करीब 100-100 करोड़ का होता है। जिससे कोटा संभाग से करीब 200 करोड़ का पत्थर उद्योग प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>मसाले व चावल उद्योग प्रभावित</strong><br />बूंदी व रामगंजमंडी में सबसे अधिक उच्च क्वालिटी का चावल पैदा होता है। जिसकी अमेरिका में सबसे अधिक डिमांड है। वहीं झालावाड़ व मंडी के धनिया की अमेरिका में अधिक खपत होती है। इसी तरह से कोटा में बनने वाला आशीर्वाद आटा भी सबसे अधिक अमेरिका में रहने वाले भारतीयों द्वारा उपयोग किया जाता है। ऐसे में करीब 100 करोड़ से अधिक के इन कृषि उत्पादों का हाड़ौती संभाग से निर्यात प्रभावित होगा।</p>
<p><strong>कैमिकल का निर्यात भी होगा कम</strong><br />हाड़ौती में करीब आधा दर्जन से अधिक कैमिकल उद्योग है। इन उद्योगों में तैयार होने वाला कैमिकल भी काफी मात्रा में अमेरिका में निर्यात होता है। अमेरिका के ट्रम्प टैरिफ का संभाग के कैमिकल उद्योग पर भी असर पडेÞगा। उद्यमियों के अनुसार करीब 100 करोड़ से अधिक का कैमिकल यहां से हर साल निर्यात किया जाता है। इनके अलावा भी कई ऐसे उत्पाद हैं जिनका हाड़ौती के चारों जिलों से कम मात्रा में ही सही निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से ये सभी चीजें अमेरिका में तो महंगी होंगी ही। साथ ही इनका निर्यात करना भी महंगा हो जाएगा। ऐसे में यहां से होने वाला निर्यात प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय निवास कर रहे है। वे सभी अधिकतर भारत में तैयार सामानों का ही उपयोग करते हैं। हाड़ौती से कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, धनिया,मसाले व आटा निर्यात किया जाता है। टैरिफ बढ़ाने से ये सभी वस्तुएं महंगी होने से वहां उनकी खपत कम होगी। साथ ही निर्यात भी प्रभावित होगी। सभी उद्योगों  का 400 से 500 करोड़ का निर्यात प्रभावित होने का अनुमान है।  <br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>अमेरिका द्वारा भारत पर दो गुना टैरिफ लगाना गलत है। इससे कोटा संभाग ही नहीं पूरे देश का निर्यात उद्योग प्रभावित होगा। हाड़ौती से भी कई उत्पादों का अमेरिका में निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से निर्यात करना महंगा होगा। साथ ही वहां रहनगे वाले भारतीयों को भी अधिक महंगे दाम में वस्तुएं मिलेंगी तो लोग भारत की वस्तुओं को कम खरीदेंगे। हालांकि भारत सरकार के स्तर पर इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन उसमें समय लगेगा।<br /><strong>- अंकुर गुप्ता, अध्यक्षलघु उद्योग भारती</strong></p>
<p>हाड़ौती से केवल कोटा स्टोन व सेंड स्टोन ही अमेरिका को निर्यात नहीं होता है। यहां के मसाले, चावल व आटा समेत कई ऐसे उत्पाद हैं जिनकी  अमेरिका में काफी अधिक खपत है। कोटा संभाग से भी बड़ी संख्या में लोग वहां रहते है। वे केवल यहां के चावल व आटे का ही उपयोग करते है। टैरिफ अधिक होने से अब वे अन्य देशों के सामान खरीदेंगे तो हाड़ौती के उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।<br /><strong>- राजेन्द्र जैन, अध्यक्ष हाड़ौती ग्रामीण उद्योग संघ </strong></p>
<p>कोटा स्टोन व सेंड स्टोन सबसे अधिक निर्यात होता है। इनकी क्वालिटी व फिनिशिंग बेहतर होने से इनकी अमेरिका में डिमांड रहती है। हाड़।ती के कई अन्य उत्पाद भी टैरिफ अधिक होने से अमेरिका को भेजना महंगा होगा। साथ ही वहां रहने वालों के  लिए खरीदना भी महंगा होगा। ऐसे में ये वस्तुएं जिन देशों की सस्ती होंगी वहां की खरीदी जाएंगी। अमेरिका में डिमांड व खपत कम होने का सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिका में निर्यात कम होने से भारत में उनकी खपत का प्रयास तो किया जा रहा है लेकिन टैरिफ बढ़ाने से निर्यात पर तो सीधा असर पड़ेगा। <br /><strong>- राकेश पाटौदी, अध्यक्ष स्टोन मर्चेंट विकास समिति</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 17:20:05 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व ब्राजील में सीखेंगे हाइटेक खेती</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों के विदेश भ्रमण व प्रशिक्षण को सरकार ने दी हरी झंडी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---will-learn-high-tech-farming-in-netherlands--australia--new-zealand-and-brazil/article-123233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती सहित प्रदेश के 100 किसान नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत विदेशों में खेती के गुर सीखेंगे। नवंबर से भ्रमण शुरू होगा। सात दिवसीय भ्रमण के लिए प्रदेश के दस कृषि संभागों से दस-दस किसानों का चयन किया गया। भ्रमण के दौरान किसान कम भूमि और कम पानी में पॉलीहाउस व ऑफ सीजन में बेहतर खेती व पशुपालन करने के तरीके सीखेंगे। सरकार ने नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत प्रदेश के 100 किसानों के विदेश भ्रमण और प्रशिक्षण की स्वीकृति दे दी है। प्रोग्राम के तहत एफपीओ के किसान नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ब्राजील का भ्रमण करेंगे। इस एक्सपोजर विजिट में किसान नवीनतम तकनीकों एवं नवाचार के बारे में जानकारी लेंगे। चयनित किसानों को नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच अलग-अलग बैच में कराया जाएगा।</p>
<p>- अलग-अलग बैच में कराएंगे भ्रमण<br />- नवीनतम तकनीकों के बारे में लेंगे जानकारी<br />- 7 दिन का रहेगा नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम</p>
<p><strong>हाड़ौती के 10 किसानों का किया चयन</strong><br />उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रोग्राम के तहत किसान विदेशों में जाकर उन्नत कृषि तकनीकों और वैश्विक नवाचारों के बारे में जानकारी हासिल कर उसका लाभ अपनी खेती में कर सकें। इस प्रोगाम के अंतर्गत किसान न केवल तकनीकी दृष्टि से समृद्ध होंगे, बल्कि वे यह भी जान सकेंगे कि कैसे सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। विदेश की कृषि सहकारी समितियों की कार्यशैली और संगठनात्मक ढांचे का अध्ययन करके राज्य के एफपीओ (फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑगेर्नाइजेशन) भी अपने स्तर पर मजबूती हासिल कर सकेंगे। उद्यान आयुक्तालय के निर्देशों के बाद कोटा संभाग से दस किसानों का भ्रमण के लिए चयन किया जा चुका है।गौरतलब है कि इससे पूर्व राजस्थान के किसानों का दल इजराइल में तकनीकी प्रशिक्षण हासिल करने गया था।</p>
<p><strong>पिछले साल मांगे थे आवेदन</strong><br />जानकारी के अनुसार किसानों को विदेशों में भेजने की घोषणा राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में की थी। इस सम्बंध में किसानों से दस सितम्बर तक आवेदन मांगे गए थे। विदेशों यात्रा को देखते हुए कोटा संभाग से काफी संख्या में किसानों ने आवेदन किए थे। प्रत्येक संभाग स्तर पर विभिन्न मापदंडों के आधार पर चयनित होने वाले किसानों में एसटी, एससी, महिला कृषक के साथ-साथ बीस प्रतिशत पशुपालकों को शामिल किया गया। पूरे प्रदेश में कुल अस्सी किसानों व बीस पशुपालकों का चयन किया गया है। इस योजना के तहत प्रथम चरण में कुल सौ किसान विदेश जाएंगे। वहां नई तकनीक सीखकर राजस्थान में अन्य किसानों को सिखाएंगे व खुद भी उसका उपयोग करेंगे। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />एक साल पहले आवेदन करने के बाद भी विदेश भ्र्रमण की अनुमति नहीं मिलने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 10 जुलाई के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि नीदरलैंड जाकर आधुनिक खेती तकनीक सीखने के लिए कोटा संभाग सहित प्रदेश के 100 प्रगतिशील व युवा किसानों को पिछले दस माह से अपनी उड़ान का इंतजार है। विदेश यात्रा के लिए किसानों के चयन सहित अन्य प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक उनकी उड़ान को सरकार की हरी झंडी नहीं मिली है। चयनित किसान विदेश जाकर उन्नत कृषि तकनीक से रूबरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राज्य सरकार ने नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत प्रदेश के प्रगतिशील और युवाओं को विदेशों की उन्नत कृषि तकनीक के गुर सिखाने का निर्णय किया था,  ताकि वहां की हाईटेक कृषि तकनीक का यहां की धरा पर भी उपयोग हो सके।  </p>
<p>हाड़ौती सहित प्रदेश के 100 किसान नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत विदेशों में खेती के गुर सीखेंगे। नवंबर से भ्रमण शुरू होगा। सात दिवसीय भ्रमण के लिए प्रदेश के दस कृषि संभागों से दस-दस किसानों का चयन किया गया। सरकार ने अब किसानों के विदेश भ्रमण और प्रशिक्षण की स्वीकृति दे दी है।<br /><strong>- आर.के. जैन, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Aug 2025 15:55:56 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा से पहले ही खाली हो गए हाड़ौती के राजसेस कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[राजसेस कॉलेजों में विद्या संबल फैकल्टी का मामला। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rajses-colleges-of-hadoti-vacated-before-the-examination/article-105617"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer101.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित हो रहे हाड़ौती के सभी राजसेस कॉलेज परीक्षा से पहले ही खाली हो गए। कोटा-बूंदी, बारां-झालावाड़ को मिलाकर यहां कुल 18 राजसेस कॉलेज हैं, जिनमें अध्यापन कार्य के लिए लगे विद्या संबल शिक्षकों को कार्य मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, चेचट व दीगोद ही ऐसे कॉलेज है, जिसमें फैकल्टी अभी कार्यरत हैं। लेकिन, उन्हें भी दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। जबकि, अभी तक कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा एग्जाम तिथि घोषित नहीं की गई है। इसके बावजूद  शिक्षकों को हटाए जाने से शैक्षणिक व्यवस्थाएं बेपटरी हो गई। एक ओर जहां शिक्षकों का रोजगार छीन गया वहीं, दूसरी ओर विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया। क्योंकि, इस वर्ष नए खुले राजसेस कॉलेजों में तो 12 नवम्बर तक एडमिशन हुए हैं और 21 फरवरी तक शिक्षक हटा दिए गए। कोर्स अधूरे होने से विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है। ऐसे में विद्यार्थी और शिक्षक दोनों ही मझधार में फंस गए। दरअसल, कोटा संभाग में 18 राजसेस कॉलेज हैं। जिनमें प्राचार्य के अलावा सभी सहायक आचार्यों की नियुक्ति विद्या संबल योजना  के तहत की गई है। इनका वर्किंग-डे 28 फरवरी को पूरा होता है, लेकिन आयुक्तालय के नियम विसंगतियों के कारण अधिकतर कॉलेजों में 90 वर्किंग डेज होने पर शिक्षकों को हटा दिया गया।  शेष रहे मात्र दो कॉलेज चेचट व दीगोद के शिक्षक 28 फरवरी को कार्यमुक्त होने से बेरोजगार हो जाएंगे। </p>
<p><strong>मंझधार में हजारों विद्यार्थी </strong><br />हाड़ौती के चारों जिलों में 18 राजसेस कॉलेजों में हजारों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से यूजी प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं इसी माह में होने की संभावना है, हालांकि अभी तक परीक्षा का शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। पहली बार सेमेस्टर एग्जाम देने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा पैटर्न समझाने वाला भी कोई नहीं है। </p>
<p><strong>शिक्षक-विद्यार्थी दोनों तनाव में </strong><br />कोटा संभाग में राजसेस के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक बेरोजगार होने से तनाव में हैं, वहीं पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों को परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है। अभी तक कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा एग्जाम तिथि घोषित नहीं की गई है, इससे पहले ही शिक्षक हटाने से कोर्स अधूरे रह गए। जिससे परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में इन दिनों गुरु-शिष्य दोनों ही तनाव से गुजर रहे हैं। </p>
<p><strong>नवम्बर तक एडमिशन, फरवरी में शिक्षक हटा दिए</strong><br />हाड़ौती में हाल ही में तीन नए राजसेस कॉलेज खुले हैं। जिनमें कोटा में चेचट व दीगोद और बूंदी में लाखेरी और एक झालावाड़ के असनावर में खुला है। लाखेरी कॉलेज में तो 12 नवम्बर 2024 तक एडमिशन हुए हैं और 21 फरवरी 2025 तक सभी विद्या संबल शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया। ऐसे में कोर्स पूरा नहीं हो पाने से विद्यार्थी परेशान हैं। हालांकि, नए कॉलेजों में से दीगोद व चेचट में कक्षाएं चल रहीं हैं जो दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को बंद हो जाएगी।</p>
<p><strong>यह हैं राजेसस कॉलेज </strong><br />कोटा जिले में राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा, चेचट, दीगोद, बूंदी में तालेड़ा, हिंडौली, लाखेरी, नैनवां, झालावाड़ में असनावर और बारां जिले में राजकीय गर्ल्स कॉलेज छबड़ा, नाहरगढ़, शाहबाद, गर्ल्स अटरू, गर्ल्स केलवाड़ा, कृषि महाविद्यालय बारां व शाहबाद सहित 18 कॉलेज शामिल हैं। इनमें कृषि को छोड़कर सभी आर्ट्स कॉलेज हैं, जिनमें सात-सात विषय संचालित हैं। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br /><strong>परिणाम बिगड़ने का सता रहा डर</strong><br />अभी तक प्रथम सेमेस्टर का करीब 25% कोर्स अधूरा है। यूनिवर्सिटी के एग्जाम शेड्यूल जारी करने से पहले ही शिक्षक हटा दिए गए। ऐसे में अधूरा कोर्स पूरा कराने वाला भी कॉलेज में नहीं है। छात्रों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सरकार क्वालिटी एजुकेशन देने का दवा करती है और दूसरी तरफ शिक्षकों को हटाने पर तुली है। शिक्षकों के बिना पास होने के भी लाले पड़ जाएंगे।<br /><strong>- उपेंद्र कुमार, तस्यम नेग, छात्र, लाखेरी व तालेड़ा कॉलेज</strong></p>
<p><strong>प्रायोगिक परीक्षाओं पर भी संकट </strong><br />प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के बाद प्रेक्टिकल एग्जाम होने हैं, जिसकी तैयारी शिक्षकों के बिना नहीं हो पाएगी। गत वर्ष भी विद्या संबल शिक्षकों को बीच सत्र में ही हटा दिया था। उस समय पढ़ाई बेपटरी हो गई थी। सरकार राजसेस कॉलेजों में स्थाई शिक्षक तो लगाती नहीं, विद्या संबल पर लगे शिक्षकों को भी बीच सत्र में ही हटा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।  <br /><strong>- पुष्पेंद्र सिंह, हितेश नंदवाना, छात्र, प्रथम वर्ष अटरू कॉलेज </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं शिक्षक</strong><br />विद्या संबल पर लगे सभी शिक्षक वेल क्वालिफाइड हैं। यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार ही नियुक्ति होती है। इसके बावजूद बीच सत्र में हटा दिया। यह व्यवस्था विद्यार्थियों व शिक्षकों दोनों के हित में नहीं है। शिक्षक बेरोजगार हो गए वहीं स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हो गई। ऐसे में सरकार योजना के नियमों में बदलाव कर हमें सैकंड सेमेस्टर तक लगाए रखें। <br /><strong>- डॉ. हनीफ खान, सहायक आचार्य विद्या संबल, राज.महा. रामपुरा कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>नियमों में हो एकरूपता</strong><br />जब तक राजसेस कॉलेजों में स्थाई फैकल्टी की व्यवस्था न हो तब तक विद्या संबल को संविदा के समकक्ष ही लगाया जाना चाहिए। साथ ही शैक्षणिक के साथ गैर शैक्षणिक कार्यों की भी जिम्मेदारी देनी चाहिए। जिससे छात्रों को अन्य अशैक्षणिक कार्यों का लाभ मिल सकेगा। इन दिनों कॉलेजों में एग्जाम फॉर्म की हार्ड कॉपी जमा करवाई जा रही है। वहीं, स्कॉलर शिप सहित अन्य कार्यों के लिए शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थी परेशान है। ऐसे में सरकार, राजसेस कॉलेजों में नियमों की विसंगतियों को दूर कर एकरूपता अपनाई जानी चाहिए। <br /><strong>- डॉ. रवि कुमार नागर, प्रतिनिधि विद्या संबल योजना राजस्थान</strong></p>
<p>विद्या संबल योजना में कई खामियां है। इस योजना में कार्यरत शिक्षकों को राजकीय व साप्ताहिक अवकाश का भी पैसा नहीं मिलता। इसके बावजूद पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाते हैं। भले ही हमें परमानेंट न करो लेकिन कम से कम 10 महीने तक तो रोजगार दो। सरकार, हमारे परिवार के बारे में भी सोचे, बीच सत्र में हम शिक्षक कहां जाएंगे।<br /><strong>- डॉ. शर्मिला कुमारी, सहायक अचार्य, राजकीय महाविद्यालय दीगोद </strong></p>
<p>शाहबाद गर्ल्स कॉलेज में 15 फरवरी को ही शिक्षकों को रिलीव कर दिया गया। जबकि, कई कॉलेजों में तो कोर्स भी अधूरे हैं। विद्या संबल के शिक्षकों को 3-4 माह में ही हटा दिया जाता है, जो गलत है। सरकार को अपनी पॉलिसी में बदलाव कर एक साल तक के लिए स्थाई रखना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. ज्योति गुप्ता, सहायक आचार्य शाहबाद गर्ल्स कॉलेज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यदि पाठ्यक्रम अधूरे हैं और संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य की मांग होती है  तो रेस सेंटर से फेकल्टी लगाकर कोर्स पूरा करवाया जाएगा। रही बात आॅफिशियल कार्यों की तो इसकी व्यवस्था नोडल कॉलेज द्वारा की जा रही है। यदि कोई परेशानी होती है तो उसके समाधान के लिए नोडल महाविद्यालय अधिकृत है। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 15:41:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाड़ौती के 6 कॉलेजों ने आयुक्तालय से मांगा 20 करोड़ रुपए का बजट</title>
                                    <description><![CDATA[आयुक्तालय ने कॉलेजों से तकमिना सहित मांगे थे विकास कार्यों के प्रस्ताव।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/6-colleges-of-hadoti-sought-a-budget-of-rs-20-crore-from-the-commissionerate/article-100608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(21)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के 6 सरकारी महाविद्यालयों ने विकास कार्य करवाने के लिए कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय से करीब 20 करोड़ का बजट मांगा है। इसके लिए महाविद्यालयों ने पीडब्ल्यूडी से विकास कार्यों का एस्टीमेट बनवाकर प्रस्ताव भेजे हैं। आयुक्तालय से बजट स्वीकृत होने पर कॉलेजों की दशा सुधर सकेगी और काया कलप हो सकेगा। दरअसल, संभाग के कई सरकारी महाविद्यालय जीर्णशीर्ण अवस्था में हैं। यहां बजट के अभाव में विकास कार्यों नहीं हो पा रहे। विद्यार्थी व शिक्षकों को कई तरह की पेरशानियों से जूझना पड़ता है। ऐसे में आयुक्तालय द्वारा प्रस्ताव मांगे जाने पर हाड़ौती के इन 6 कॉलेजों ने अपने-अपने यहां प्रस्तावित कार्यों का तकमीना बनाकर प्रस्ताव भेजे हैं। </p>
<p><strong>बजट के अभाव में सुविधाओं को तरस रहे महाविद्यालय</strong><br />कोटा संभाग के चारों जिलों में करीब 48 सरकारी महाविद्यालय हैं। इनमें से कई महाविद्यालय ऐसे हैं जो बजट के अभाव में जीर्णशीर्ण अवस्था में है। कहीं छात्रों की संख्या के अनुपात में कक्षा-कक्षों की कमी है तो कहीं छतें टपकना, चार दीवारी न होना, दीवारों, छतें व फर्श में सीलन, कैम्पस में झाड़-झंकाड़ का जंगल सहित कई समस्याएं हैं। ऐसे में विद्यार्थियों व शिक्षकों को विभिन्न परेशानियों से जूझना पड़ता है। बजट नहीं होने से कॉलेज प्रशासन आवश्यक विकास कार्य नहीं करवा पा रहे। जिसकी वजह से शिक्षकों को अभिभावकों व क्षेत्रवासियों की नाराजगी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>कैम्पस में जंगल, बारिश में कट जाता सम्पर्क</strong><br />झालावाड़ जिले के राजकीय महाविद्यालय मनोहरथाना    के कार्यवाहक प्राचार्य ब्रजमोहन बलाई ने बताया कि कॉलेज कस्बे से करीब 2 किमी दूर है। परिसर में झाड़-झंकाड़ का जंगल हो रहा है। वहीं, चारदीवारी नहीं होने से कई तरह की आशंकाएं रहती हैं। ऐसे में महाविद्यालय की चार दीवारी के लिए 2.7 करोड़ और खेल मैदान के समतलीकरण के लिए 1 करोड़ का एस्टीमेट बनाकर प्रस्ताव आयुक्तालय को भेजा है। कैम्पस के पास नाले व खाळे हैं, जो बरसात में उफन जाते हैं। जिससे कस्बे का कॉलेज से सम्पर्क कट जाता है। ऐसे में विद्यार्थी कॉलेज नहीं पहुंच पाते। बजट मिलने पर कॉलेज की दशा सुधर सकेगी। </p>
<p><strong>3500 से ज्यादा विद्यार्थियों पर 15 क्लास रूम</strong><br />क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार राजकीय महाविद्यालय बारां में साइंस, आर्ट्स व कॉमर्स को मिलाकर कुल 3500 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिनके मुकाबले 15 कक्षा कक्ष हैं। जिसमें लैब भी शामिल है। जिसकी वजह से विद्यार्थियों को बैठने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन ने 10 नए क्लास रूम बनवाने के लिए 3 करोड़ 38 लाख रुपए का प्रस्ताव भेज बजट मांगा है। </p>
<p><strong>खतरे की जद में बारां गर्ल्स कॉलेज, भवन जर्जर</strong><br />जानकारी के अनुसार, बारां जिला का एकमात्र राजकीय गर्ल्स कॉलेज जर्जर अवस्था में है। यहां छात्राएं व शिक्षक खतरे की जद में हैं। कक्षा-कक्ष, बरामदे, दीवारें क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। कॉलेज प्रशासन ने दो मद में बजट मांगा है। बिल्डिंग मरम्मत के लिए 85.19  तथा छत मरम्मत के लिए 17.37 लाख रुपए के एस्टीमेट बनाकर बजट का प्रस्ताव भेजा है। बारिश में कक्षा-कक्षों की छतें टपकती है। जिसकी वजह से कमरों का प्लास्टर उखड़ गए हैं। सभी कमरों की दीवारे क्षतिग्रस्त है। वहीं, कई कमरे ऐसे हैं जिन्हें पीडब्ल्यूडी ने असुरक्षित घोषित कर दिए हैं। ऐसे में छात्राओं व शिक्षक खतरे की जद में रहते हैं। </p>
<p><strong>बरसों पुरानी जेल में चल रहा बूंदी गर्ल्स कॉलेज</strong><br />राजकीय कन्या महाविद्यालय बूंदी, जिले का सबसे बड़ा एकमात्र गर्ल्स कॉलेज है, जो बरसों पुराना जर्जर जेल भवन में संचालित हो रहा है। जिसमें तीन संकाय कला, विज्ञान और कॉमर्स संचालित हो रहा है। यहां तीनों संकाय की कुल 1100 से ज्यादा छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिनके मुकाबले मात्र 7 कक्षा-कक्ष और 2 ही लैब हैं। ऐसे में छात्राओं को बिठाने के लिए क्लास रूम की तंगी है। जबकि, कॉलेज परिसर में पुराने जेल बैरक, जेलर आवास, ऑफिस खण्डर स्थिति में बने हुए हैं। जिन्हें ध्वस्त कर नए कक्षा-कक्ष बनाने की जरूरत है। ऐसे में कॉलेज प्राचार्य द्वारा 8 कक्षा-कक्ष और 4 लैब बनाने के लिए 5 करोड़ 14 लाख का पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट बनवाकर आयुक्तालय को प्रस्ताव भेज बजट मांगा है। </p>
<p><strong>अंता कॉलेज ने मांगा 7.50 करोड़ का बजट</strong><br />बारां जिले के राजकीय महाविद्यालय अंता ने 4 कक्षा-कक्ष, 4 लैब, पुस्कालय और केंटीन बनाने के लिए  एस्टीमेट में 7 करोड़ 50 लाख का प्रस्ताव बनाकर आयुक्तालय को भेजा है। इस कॉलेज में तीन संकाय आर्ट्स, साइंस व कॉमर्स संचालित है। वर्तमान में 12 कमरे हैं, जिसके मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या 500 है। यहां साइंस व आर्ट्स में ड्राइंग के लिए लैब नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि, आयुक्तालय बजट स्वीकृत करता है तो कॉलेज में विद्यार्थियों की सुविधाओं में विस्तार हो सकेगा।</p>
<p><strong>सांगोद कॉलेज में ये होने हैं काम</strong><br />हाड़ौती से आयुक्तालय को बजट प्रस्ताव भेजने वाले कॉलेजों में कोटा जिले का एकमात्र राजकीय महाविद्यालय सांगोद है। कॉलेज प्रशासन ने चार दीवारी निर्माण  के लिए 24.60 लाख, मुख्य गेट व पार्किंग के लिए 10 लाख तथा बिल्डिंग की रंगाई-पुताई व छत सहित अन्य कार्यों के लिए 20.60 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाकर बजट की मांग की है। वर्तमान में कॉलेज में करीब 548 विद्यार्थियों का नामांकन है। </p>
<p>कोटा संभाग के 6 राजकीय महाविद्यालयों ने भवन विस्तार, कक्षा-कक्ष रिपेयर, बाउंड्रीवाल, खेल मैदान, एवं जीणशीर्ण भवनों की मरम्मत सहित अन्य कार्यों के लिए तकमिना सहित प्रस्ताव आयुक्तालय को भेज गए हैं। जिनका मैरे द्वारा छात्र संख्या, भवन की वर्तमान स्थिति और मांग का औचित्य का परिक्षण कर आयुक्तालय को अनुशंसा भेजी गई है। जहां से स्वीकृति प्राप्त होने पर निर्देशानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा संभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 14:33:18 +0530</pubDate>
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                <title>देश की सबसे बड़ी वाटर टनल देगी खुशियों की सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[ नए साल में 8.70 किमी लम्बी टनल बनकर हुई तैयार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-country-s-largest-water-tunnel-will-give-the-gift-of-happiness/article-99503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(15).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती की महत्वाकांक्षी परवन वृहद सिंचाई परियोजना का काम तेज गति से चल रहा है। परियोजना के तहत नए साल में देश की सबसे बड़ी वाटर टनल का निर्माण पूरा हो गया है। कोटा संभाग के अकावदकलां गांव के पास 8.70 किलोमीटर लम्बी टनल करीब चार साल बाद बनकर तैयार हो गई है। इसी टनल के माध्यम से दायीं और बायीं नहर का निर्माण होगा। जिस रफ्तार से बांध का कार्य चल रहा है, इससे उम्मीद जताई जा रही है कि इसी साल बांध का निर्माण पूरा हो जाएगा। इससे हाड़ौती के तीन जिलों कोटा, झालावाड़ व बारां के लिए सिंचाई और पेयजल की सौगात मिल सकेगी।</p>
<p><strong>परवन बांध के पांच गेट बनकर तैयार</strong><br />परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस समय अकावद कलां में परवन नदी पर बांध का काम द्रुतगति से चल रहा है। वहीं दायीं और बायीं नहर के लिए बनाई गई देश की सबसे बड़ी वाटर टनल का काम पूरा हो चुका है। इस वाटर टनल की लंबाई 8.70 किलोमीटर है। इसी टनल से दायीं मुख्य नहर निकलेगी, जिससे बारां जिले में करीब 90 किमी एरिया में सिंचाई हो सकेगी। फिलहाल बांध के 5 गेट तैयार हो चुके हैं जबकि अन्य का निर्माण कार्य प्रगति पर है। परवन बांध 38 मीटर ऊंचा 490 मिलियन घन क्षमता का है।</p>
<p><strong>637 गांवों की 2 लाख हैक्टेयर भूमि होगी सिंचित</strong><br />इस परियोजना से कोटा, बारां व झालावाड़ जिलों के 637 गांवों में 2.02 लाख हैक्टेयर में स्काडा नियंत्रित प्रेशराइज्ड पाइप द्वारा फव्वारा पद्धति के माध्यम से सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही 1821 गांवों में पेयजल, विद्युत उत्पादन तथा वन्यजीवों के लिए जल उपलब्ध करवाया जाएगा। दायीं मुख्य नहर 8.75 किलोमीटर टनल से होती हुई बारां जिले में 89.40 किलोमीटर क्षेत्र में सिंचाई का पानी पहुंचाएगी। इसमें कुल 61 डिग्गियां बनेगी। इसमें 19 बायीं व 33 डिग्गियां दायीं क्षेत्र में रहेगी। 9 डिग्गियां से शेरगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में सिंचाई व पेयजल उपलब्ध करवाया जा सकेगा।</p>
<p><strong>इस तरह खेतों तक पहुंचेगा पानी</strong><br />जानकारी के अनुसार परवन बांध की बायीं मुख्य नहर 51.95 किलोमीटर की रहेगी। इसमें प्रथम चरण के अंतर्गत खुदाई का कार्य 90 फीसदी पूर्ण हो गया है। नहरों से पाइप के जरिए पानी डिग्गी पम्प हाउस पहुंचेगा जहां से क्षेत्रवार 3000 हैक्टेयर भूमि में पाइप लाइनों के जरिए सिंचाई होगी। खानपुर तहसील के 81 व सांगोद के 48 गांवों को प्रथम फेज में 43 हजार 159 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी मिल सकेगा। भराव क्षमता के मामले में यह राजस्थान का चौथा सबसे बड़ा बांध है जिसकी कुल भराव क्षमता 492 मिलियन क्यूबिक मीटर है। भराव क्षमता 490 मिलियन क्यूबिक मीटर रहेगी।</p>
<p><strong>परवन बांध - फैक्ट फाइल</strong><br />7 355.23 करोड़ की लागत<br />490 मिलियन घन मीटर क्षमता<br />05 गेट बनकर तैयार  <br />29 मई 2017 को शुरू हुआ था कार्य <br />2025 तक निर्माण पूर्ण होना प्रस्तावित</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />परवन बांध सिंचाई परियोजना के पूरा होने के बाद हाड़ौती के किसानों को काफी फायदा होगा। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की व्यवस्था नहीं है वहां पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। वहीं किसानों की आय में भी इजाफा होगा।<br /><strong>- लक्ष्मीचंद नागर, किसान नेता  </strong></p>
<p>परवन बांध क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी वाटर टनल का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसकी लंबाई 8.70 किमी है। अब दायीं व बायीं नहर का निर्माण कार्य शुरू होगा। इनके लिए खेत खाली होने का इंतजार किया जा रहा है। इसी वर्ष मानसून से पहले बांध बनकर तैयार होने की उम्मीद है। <br /><strong>- बीएस मीना, अधिशासी अभियंता, परवन वृहद सिंचाई परियोजना</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jan 2025 15:13:02 +0530</pubDate>
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                <title>खाड़ी देशों में युद्ध से हाड़ौती के चावल का अटका निर्यात</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती का 90 फीसदी चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है, लेकिन इस साल खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/export-of-hadoti-rice-stuck-due-to-war-in-gulf-countries/article-97417"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध और केन्द्र सरकार की ओर से एक्सपोर्ट डयूटी पर टैक्स लगाने का खामियाजा हाड़ौती के धान (चावल) उत्पादक किसानों को उठाना पड़ रहा है। पिछले साल धान का भाव 3700 से 4500 रुपए प्रति क्विंटल था, जो इस साल घटकर 2300 से 3400 रुपए प्रति क्विंटल पर ठहर गया है। हाड़ौती का 90 फीसदी चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है, लेकिन इस साल खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। जो देश भारत से चावल से आयात करते थे उन सभी देशों ने इस बार दूसरे देशों से चावल खरीद लिया है।  इस कारण हाड़ौती का चावल बाहर विदेशों में नहीं जा रहा है। इससे यहां के चावल उत्पादक किसानों को फसल का अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा है। </p>
<p><strong>मंडियों में बम्पर आवक, लेकिन दाम काफी कम</strong><br />कोटा की भामाशाहमंडी सहित हाड़ौती की मंडियों में वर्तमान में करीब एक लाख से क्विंटल से अधिक चावल रोज बिकने आ रहा है, लेकिन इस साल दाम कम मिलने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल विदेशों में माल का एक्सपोर्ट अच्छा होने से धान का दाम 4500 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया था। इस साल स्थिति बिलकुल विपरित है। इजराइल व हमास के बीच काफी समय से युद्ध चलने के कारण धान का एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है। इससे किसानों को धान की अलग-अलग किस्मों में 1000 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान पहुंच रहा है। इसी तरह का नुकसान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी किसानों को हो रहा है।</p>
<p><strong>एक्सपोर्ट डयूटी टैक्स ने भी बिगाड़ा गणित</strong><br />चावल निर्यातक विशाल गुप्ता ने बताया कि दिसंबर 2023 में केन्द्र सरकार ने 20 फीसदी एक्सपोर्ट डयूटी लगाई थी। इसमें एक किलो चावल पर 10 रुपए की एक्सपोर्ट डयूटी लगी थी। इस पर अधिक टैक्स लगाने से चावल का निर्यात बंद कर दिया गया। इससे दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 तक विदेशी देशों ने दूसरे देशों से चावल लेना शुरू कर दिया। जिससे यहां के किसानों को चावल के भाव कम मिलने लगे। हालांकि एक्सपोर्ट डयूटी इसी साल केन्द्र सरकार ने वापस ले ली है। इसके बाद नवंबर में विदेशों में चावल का एक्सपोर्ट होना शुरू हो गया है। ऐसे में आगामी दिनों में चावल के भावों में तेजी होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>जहाजों पर हुए हमले तो बदला रूट</strong><br />भामाशाहमंडी में चावल के व्यापारी योगेश कुमार ने बताया कि धान की दाम में कमी का मुख्य कारण इजरायल के साथ ईरान व हमास का युद्ध है। युद्ध के चलते समुद्री रास्तों में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ने लगी है। बंदरगाहों पर जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं। ऐसे में दूसरे समुद्री रास्तों से लंबा फेरा लगाकर जहाजों से चावल पहुंचाया जा रहा है। इससे ज्यादा रेट होने के कारण वहां के अधिकांश देश पड़ौसी देशों से चावल का आयात करने लगे हैं। भारत से करीब 150 देशों में चावल का निर्यात किया जाता है। इनमें से प्रमुख रूप से पांच देश अमेरिका, इटली, थाइलैंड, स्पेन और श्रीलंका सबसे  बड़े आयातक देश हैं। इसके अलावा अन्य देशों में सिंगापुर, फिलीपिंस, हांगकांग, मलेशिया जैसे देश भी शामिल हैं। युद्ध के कारण अब इन देशों में चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है।</p>
<p><strong>पांच साल में निर्यात</strong><br />2020-21: 1600 से 1650 <br />2021-21:  1700 से 1800 <br />2021-22:  1900 से 2000 <br />2022-23: 2000 से 2100 <br />2023-24: एक्सपोर्ट डयूटी टैक्स से निर्यात नहीं</p>
<p>पिछले साल 4500 रुपए प्रति क्विंटल तक का चावल बिका और अच्छा मुनाफा भी हुआ था। इस बार चावल घाटे का सौदा है। 1000 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। दो से तीन साल तक चावल रखने के बाद भाव नहीं मिलने से मजबूरी में बेचकर जाना पड़ रहा है।<br /><strong>- मांगीलाल, किसान, माधोराजपुरा</strong></p>
<p>धान के भाव गिरने का मुख्य कारण खाड़ी देशों में युद्ध और केन्द्र सरकार द्वारा एक्सपोर्ट डयूटी पर टैक्स लगाना है। ऐसे में विदेशी देशों में निर्यातक का  भारत से चावल के आयात के लिए सम्पर्क कम हो गया है। अक्टूबर में टैक्स हटा दिया है। अब धीरे-धीरे भाव तेज होने की संभावना है।<br /><strong>- भानु कुमार, चावल निर्यातक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 18:47:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>छह दिन की चांदनी फिर दो महीने अंधेरी रात</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के आठ कॉलेजों में एक दर्जन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-days-of-moonlight-and-then-two-months-of-darkness/article-96453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6-din-ki-chandni-fr-do-mhine-andheri-raat...kota-news-02-12-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के आठ राजकीय महाविद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। सेमेस्टर परीक्षाएं दिसम्बर माह में होनी हैं लेकिन एक दर्जन से अधिक विषयों की कक्षाएं नियमित नहीं लग रही। महत्वपूर्ण विषयों के 60 प्रतिशत से अधिक कोर्स अधूरे हैं, जिनका परीक्षा से पहले पूरे होने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी रिजल्ट बिगड़ने के डर से तनाव से जूझ रह हैं। दरअसल, इन कॉलेजों में विषय विशेषज्ञ नहीं होने से अंगे्रजी से ज्योग्राफी तक एक दर्जन विषयों की कक्षाएं नहीं लग पाती। ऐसे में यहां 6-6 दिन के लिए कोटा गवर्नमेंट कॉलेज (रे-सेंटर) से फैकल्टी आती है, तब इन विषयों की कक्षाएं लग पाती है लेकिन 6 दिन बाद वापस कक्षाएं अगला राउंड आने तक खाली रहती हैं। </p>
<p><strong>65% से ज्यादा कोर्स अधूरा</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर सहायक आचार्य ने बताया कि कोटा जिले के इटावा, सांगोद व रामगंजमंडी में कॉलेज में अंग्रेजी, ज्योग्राफी, भूगोल विषय के शिक्षक नहीं है। जिसकी वजह से कक्षाएं खाली रहती हैं। ऐसे में इन विषयों को पढ़ाने के लिए रे-सेंटर कोटा से वैकल्पिक तौर पर 6 दिन के लिए शिक्षक भेजे जाते हैं। वर्तमान में 30 से 35 प्रतिशत कोर्स ही पूरा हो पाया है और 65% कोर्स अधूरा है। जबकि, अगले महीने दिसम्बर तक सेमेस्टर एग्जाम होने हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले कोर्स पूरा होना संभव प्रतित नहीं होता। </p>
<p><strong>क्या है रे-सेंटर</strong><br />आयुक्तालय ने वर्ष 2019 में रिसोर्स असिस्टेंट एंड कॉलेज विद एक्सीलेंस (रे-सेंटर) का गठन किया था। यह सेंटर  प्रदेशभर में जिले वाइज बनाया गया। कोटा में गवर्नमेंट साइंस कॉलेज रे-सेंटर का नोडल प्रभारी है। इस सेंटर से जिले के सभी सरकारी कॉलेज  जुड़े हुए हैं। सेंटर का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयों को साधन-संसाधन उपलब्ध करवाकर सहायता करना है। ऐसे में जहां फैकल्टी की कमी है, वहां रे-सेंटर की मदद से 6-6 दिन शिक्षक भेज शिक्षण कार्य करवाया जाता है। </p>
<p><strong>यहां इन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं</strong><br />इटावा में राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत, सांगोद में राजनेतिक विज्ञान,  भूगोल, राजगंजमंडी में इंग्लिश, अटरू में ज्योग्राफी, अंग्रेजी, बारां गवर्नमेंट कॉलेज में इतिहास, केलवाड़ा में इंग्लिश, शाहबाद में अर्थशास्त्र सहित अन्य विषयों के शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर अन्य जिलों में चले गए। जिसकी वजह से यहां शिक्षकों के पद खाली होने से कक्षाएं नहीं लग पाती।</p>
<p>जिन महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहां शैक्षणिक व्यवस्था के लिए  प्रत्येक जिले में रे-सेंटर बनाए हुए हैं। जहां से डिमांड के अनुसार संबंधित कॉलेजों को 6-6 दिन के लिए शिक्षक उपलब्ध करवाते हैं। आरपीएससी के माध्यम से सरकार जल्द ही कॉलेजों में शिक्षक लगाएगी। उच्च शिक्षा के प्रति सरकार गंभीर है। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, कॉलेज </strong></p>
<p>6-6 दिन के लिए फैकल्टी मिलना, समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। परमानेंट शिक्षक मिलने चाहिए या फिर प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की जगह विद्या संबल पर शिक्षक लगाने का प्रावधान किया जाना चाहिए। फैकल्टी के अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- अनिता वर्मा, प्राचार्य राजकीय सांगोद कॉलेज</strong></p>
<p>यहां शुरू से ही अंगे्रजी के शिक्षक नहीं है। बारां कॉलेज रे-सेंटर नोडल है, जिन्हें पत्र भी लिखे लेकिन वहां भी शिक्षकों की कमी के कारण फैकल्टी नहीं मिल पाती। ऐसे में विद्यार्थियों को सेल्फ स्टडी करनी पड़ती है।  <br /><strong>- बुद्धिप्रकाश मीणा, प्राचार्य राजकीय अटरू कॉलेज</strong></p>
<p>राजकीय महाविद्यालय इटावा में राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत विषय की कक्षाएं नहीं लग पाती। कोटा रे-सेंटर से 6-6 दिन के लिए शिक्षक आते हैं तब ही कक्षाएं लगती हैं। एक साल में 3 बार ही रे सेंटर से फैकल्टी मिल पाती है। ऐसे में इन विषयों की साल में मात्र 20 दिन ही क्लासें लग पाती है। ऐसे में कोर्स पूरा हो ही नहीं पाता। वहीं, बार-बार फैकल्टी न मांगनी पड़े, इसके लिए रे-सेंटर को नियमित शेड्यूल बनाना चाहिए। <br /><strong>- रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय इटावा कॉलेज</strong></p>
<p>पिछले साल भी राजनेतिक विज्ञान की परीक्षा बिना पढ़े देनी पड़ी थी। यही स्थिति इस बार द्वितीय वर्ष में भी बनी हुई है। 15 से 20 किमी दूर से कॉलेज आते हैं लेकिन यहां पॉलिटीकल साइंस व ज्योग्राफी की कक्षाएं ही नहीं लगती।  दिसम्बर में पेपर होने वाले हैं, परीक्षा की तैयारी कैसे करें।<br /><strong>- हिमांशु नागर द्वितीय वर्ष, सांगोद</strong></p>
<p>कॉलेज में ज्योग्राफी के शिक्षक नहीं होने से क्लासें नहीं लगती। ऐसे में कॉलेज जाने की जगह कोचिंग जाना मजबूरी हो गई। परीक्षा सिर पर है, पेपर पैटर्न क्या रहेगा, यह बताने वाले भी नहीं है। कोर्स पूरा करने के लिए कोचिंग का सहारा लेना पड़ रहा है।<br /><strong>- अंजली रेगर, छात्रा सांगोद </strong></p>
<p>कोटा से 6 दिन के लिए शिक्षक आए तो ज्योग्राफी के प्रेक्टिकल हो सके। सिलेबस पूरा होना तो दूर विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में पास होना ही चुनौती बनी हुई है। सरकार को विद्यार्थियों के हित में रिक्त सीटों पर विद्या संबल शिक्षक लगाना चाहिए। <br /><strong>- खुशी मीणा, छात्रा तृतीय वर्ष</strong></p>
<p>ग्रामीण इलाकों के कॉलेजों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से चली आ रही है। आयुक्तालय की लापरवाही का खामियाजा पिछले साल बीए के परिणाम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। कई विद्यार्थियों के सप्लीमेंट्री आई तो कुछ फेल हो गए। <br /><strong>- आशीष गोचर, अध्यक्ष, ग्रामीण छात्र संगठन सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 16:00:15 +0530</pubDate>
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                <title>बांग्लादेश में हिंसा की आंच में झुलसा हाड़ौती का लहसुन</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश में लहसुन का काफी मात्रा में निर्यात किया जाता है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-garlic-scorched-in-the-heat-of-violence-in-bangladesh/article-87199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में लहसुन का बम्पर उत्पादन होता है। अपने बेहतरीन स्वाद के चलते यहां का लहसुन काफी मात्रा में बांग्लादेश निर्यात किया जाता है। इससे स्थानीय किसानों को भाव भी अच्छा मिलता है। अब वहां की राजनीतिक अस्थिरता के कारण लहसुन उत्पादक किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। बांग्लादेश में हिंसा होने के कारण लहसुन का निर्यात बंद हो गया है। भारत-बांग्लादेश का घोजाबाड़ा बार्डर बंद हो गया है। इस कारण लहसुन सहित अन्य भारतीय उत्पादों का निर्यात नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति अगर लंबे समय तक कायम रही तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। निर्यात बंद होने से हाड़ौती की मंडियों में लहसुन के भाव प्रभावित होने लगे हैं। </p>
<p><strong>ऐसे पड़ेगा किसानों की कमाई पर असर</strong><br />लहसुन के थोक व्यापारियों के अनुसार बांग्लादेश में हिंसा का दौर जारी रहने और सरकार के तख्तापलट से भारत के लहसुन उत्पादक किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्योंकि बांग्लादेश भारतीय लहसुन सबसे बड़ा आयातक  देश है। विश्व के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश में लहसुन का काफी मात्रा में निर्यात किया जाता है। व्यापारियों के अनुसार हाड़ौती क्षेत्र से करीब 15 से 20 टन लहसुन बांग्लादेश में भेजा जाता है। ऐसे में यदि लम्बे समय तक निर्यात बंद रहा तो स्थानीय स्तर पर लहसुन के भाव कम हो जाएंगे। इससे किसानों की कमाई पर असर पड़ेगा। मांग नहीं होने से भावों में कमी होती चली जाएगी।</p>
<p><strong>हिंसा से निर्यात को लगा झटका</strong><br />थोक फलसब्जी मंडी के प्रमुख व्यापारी भूपेन्द्र सोनी ने बताया कि बांग्लादेश में लहसुन के मीडियम क्वालिटी के माल की काफी डिमांड है। पूर्व में लहसुन के छोटे माल की डिमांड देश के कुछ राज्यों में ही बनी हुई थी। कुछ सालों से बांग्लादेश में भी इसकी मांग होने से निर्यात की मात्रा बढ़ा दी गई थी। अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश में सबसे ज्यादा लहसुन जा रहा था। अब बांग्लादेश में हिंसा के कारण सभी बार्डर सील कर दिए गए हैं। बांग्लादेश के कस्टम विभाग का सिस्टम काम नहीं कर पा रहा है। ऐसे में लहसुन और अन्य भारतीय उत्पादों का एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में सभी निर्यातक बांग्लादेश के हालात पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p><strong>मंडियों में भाव होने लगे प्रभावित</strong><br />थोक व्यापारियों के अनुसार वर्तमान में भामाशाहमंडी में लहसुन की 3500 से 4500 कट्टे और थोक फल सब्जी मंडी में 1500 से 2000 कट्टों की आवक हो रही है। पूर्व में लहसुन के भाव 12 हजार से 22 हजार के बीच चल रहे थे। कुछ दिनों से बांग्लादेश में निर्यात बंद होने के कारण भावों में कमी आई है। अभी मंडी में लहसुन के भाव 11 हजार से 20 हजार के बीच बोले जा रहे हैं। वहीं किलो के हिसाब से बात की जाए तो भाव 110 से 200 रुपए किलो के बीच हैं। कुछ माह पहले लहसुन के भाव तीन सौ से चार सौ रुपए किलो तक पहुंच गए थे। उस समय बांग्लादेश में काफी मात्रा में लहसुन का निर्यात हो रहा था।</p>
<p>पिछले साल की तुलना में इस साल किसानों को लहसुन के भाव अच्छे मिल रहे हैं। कई किसानों ने भावों में और बढ़ोतरी को लेकर माल का स्टोरेज कर रखा है। विदेश में निर्यात बंद होने से यहां पर भाव कम होने लगे हैं। आगामी दिनों में किसानों को नुकसान हो सकता है।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>हाड़ौती क्षेत्र से करीब 15 से 20 टन लहसुन बांग्लादेश में भेजा जाता है। ऐसे में यदि लम्बे समय तक निर्यात बंद रहा तो स्थानीय स्तर पर लहसुन के भाव कम हो जाएंगे। इससे किसानों को नुकसान होगा। बांग्लादेश में पूरी तरह से निर्यात बंद हो चुका है।<br /><strong>- शब्बीर वारसी, प्रमुख व्यापारी, थोक फलसब्जी मंडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Aug 2024 17:40:58 +0530</pubDate>
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                <title>20 साल से एलएलएम को तरस रहा कोटा संभाग</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के एक भी लॉ कॉलेज में कानून में स्पेशलाइजेशन नहीं होती  हैं।  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-division-has-been-yearning-for-llm-for-20-years/article-72852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के राजकीय विधि महाविद्यालय बरसों से सरकारी तंत्र की लापरवाही का दंश झेल रहे हैं। जिसका खामियाजा सैंकड़ों विद्यार्थी भुगत रहे हैं। संभाग में तीन गवर्नमेंट लॉ कॉलेज हैं, जो पिछले 20 साल से एलएलएम को तरस रहे हैं। हालात यह हैं, सभी कॉलेज यूजी हैं लेकिन पीजी एक में भी नहीं है। जिसकी वजह से भावी वकील कानूनी शिक्षा में स्पेशलाइजेशन नहीं कर पा रहे। वहीं, पीजी के अभाव में रिसर्च सेंटर तक नहीं खुल पाए। ऐसे परिवेश में क्वालिटी एजुकेशन तो छोड़िए कानून की बारीकियां तक सीखने को नहीं मिलती। निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में महंगी फीस होने से हर साल हजारों विद्यार्थी पोस्ट ग्रेज्युएशन करने से वंचित रह जाते हैं। </p>
<p><strong>हाड़ौती के एक भी लॉ कॉलेज में नहीं एलएलएम</strong><br />हाड़ौती में झालावाड़, बूंदी व कोटा में राजकीय विधि महाविद्यालय संचालित हैं। इनमें से एक भी कॉलेज में पीजी नहीं है। हर साल सैंकड़ों विद्यार्थी ग्रेज्युएशन करते हैं जो एलएलएम नहीं होने से कानूनी शिक्षा में स्पेशलाइजेशन नहीं कर पाते। जबकि, संभाग का सबसे बड़ा कॉलेज होने के बावजूद कोटा 20 साल से पीजी संकाय खुलवाने को संघर्ष कर रहा है। सरकारी तंत्र की उपेक्षा से विद्यार्थी न तो आपराधिक और सुरक्षा, बौद्धिक सम्पदा, अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार, सार्वजनिक नीति और सुशासन जैसे कानून के विशेषज्ञ बन पा रहे और न ही स्किल डवलप हो पा रही। </p>
<p><strong>छात्रों ने मंत्री से जनप्रतिनिधि तक लगाई गुहार</strong><br />छात्रों ने बताया कि कोटा विधि महाविद्यालय में एलएलएम खुलवाने के लिए मंत्री से जनप्रतिनिधि तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। गत सत्र में कॉलेज में 1.50 करोड़ की लागत से कई विकास कार्य हुए। 6 कक्षा कक्ष भी बने। शिक्षकों की उपलब्धता भी पर्याप्त है। इसके बावजूद पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका।  हालात यह हैं, पीजी के अभाव में रिसर्च सेंटर तक नहीं खुल पा रहा। एलएलएम खुले तो करियर को और आगे ले जाने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्राप्त हो सकेगा।</p>
<p><strong>भवन बदलते रहे, नहीं मिली पीजी</strong><br />कोटा में राजकीय विधि महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी, जो 2016 तक गवर्नमेंट कॉलेज में अस्थाई कॉलेज के रूप में संचालित रहा। इसके बाद फरवरी 2017 में रावतभाटा रोड स्थित टैगोर नगर में खुद की बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ। इसके बाद से लगातार पीजी संकाय शुरू करने  को लेकर प्रयास होते रहे लेकिन, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। नतीजन, 20 साल बाद भी विद्यार्थी एलएलएम को तरस रहे। </p>
<p><strong>निजी कॉलेजों में 2 लाख फीस</strong><br />हाड़ौती के तीनों कॉलेजों से हर साल दो हजार से ज्यादा विद्यार्थी ग्रेज्युएशन करते हैं। इसके बाद आपराधिक और सुरक्षा कानून, संवैधानिक और प्रशासनिक व बौद्धिक सम्पदा कानून में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए पीजी करनी होती है लेकिन निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में पर ईयर की फीस ही 1.50 से 2 लाख होती है। ऐसे में सैंकड़ों विद्यार्थी कानून में स्पेशलाइजेशन से वंचित रह जाते हैं और उनकी स्किल भी डवलप नहीं हो पाती। </p>
<p><strong>यह है बीसीआई की गाडइ लाइन</strong><br />- महाविद्यालय में 120 स्टूडेंट्स के दो सेशन होते हैं, जिस पर 10 शिक्षक होने चाहिए।<br />- आधुनिक लाइब्रेरी में न्यूनतम 10 हजार किताबें होना अनिवार्य है और प्रतिवर्ष न्यूनतम 1 लाख रुपए की किताबें खरीदना आवश्यक है।<br />- विधि महाविद्यालय में अशैक्षणिक कर्मचारियों का पदस्थापन जरूरी है। साथ ही कॉलेज में सेमीनार हॉल, आईसीटी रूम यानी कम्प्यूटर लैब होना जरूरी है।<br />- कॉलेज में विद्यार्थियों की पे्रक्टिस के लिए 50 गुना 60 साइज में मूट कोर्ट बना होना चाहिए। <br />- काल्पनिक न्यायलय का पूरा स्ट्रेक्चर जैसे जज की कुर्सी, टेबल यानी डाइज, दोनों तरफ कटघरे, रीडर की टेबल, क्लाइंट व पक्षकारों के बैठने के लिए 80 कुर्सियां और सॉफट फाइल वीडियो, आॅडियो के रूप में उपलब्ध सबूतों को सुनने व देखने के लिए कम्प्यूटर व प्रोजेक्टर होना चाहिए।  <br />- कॉलेज परिसर में करीब 100 गुणा 100 साइज का खेल मैदान होना जरूरी है। वहीं, बास्केट बॉल, टेबल टेनिस, वॉलीबॉल सहित अन्य सुविधाएं होने के साथ शारीरिक शिक्षक होना चाहिए।<br />विद्यार्थी बोले- रिसर्च सेंटर तक नहीं, कैसे बनेंगे कानून के विशेषज्ञ</p>
<p>वर्तमान में कोटा लॉ कॉलेज एलएलम पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए सभी मानको पर खरा उतरता है।  छात्र-छात्राओं को मोटी फीस देखकर निजी संस्थानों में प्रवेश लेना पड़ता है। <br /><strong>- गौरव मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, विधि महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>लॉ कॉलेज में पीजी शुरू होता है तो इसका लाभ पूरे हाड़ोती संभाग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा। साथ ही कानून के किसी एक विषय के विशेषज्ञ बन सकेंगे जो समाज की आवश्यकताओं के लिए जरूरी है। <br /><strong>- बुद्धराज मेरोठा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष </strong></p>
<p>मिंत्री-विधायकों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन, कहीं से भी सकारात्मक प्रयास नहीं हुए। जबकि, प्राइवेट कॉलेजों में लाखों फीस वसूली जाती है, जो मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए मुमकिन नहीं है। <br /><strong>- हरिओम मीणा,  छात्र विधि महाविद्यालय</strong></p>
<p>पोस्ट ग्रेज्युएशन डिग्री लॉ स्टूडेंट लिए बेहतर कॅरियर की शुरूआत बन सकती है, क्योंकि एलएलएम अंतरराष्ट्रीय कानून, कॉपोर्रेट कानून, श्रम कानून, मानवाधिकार कानून में स्पेशलाइजेशन प्रदान करती है।  छात्रहित में सरकार को जल्द से जल्द एलएलएम खोलना चाहिए।  <br /><strong>- लिपाशा वैष्णव, छात्रसंघ महासचिव </strong></p>
<p>पोस्ट ग्रेज्युएशन की सुविधा मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही समाज को कानून विशेषज्ञ मिल सकेंगे। मल्टीनेशनल कंपनियों, अंतरराष्टÑीय संस्थाओं या कई देशों से जुड़े मामलों से संबंधित विषय पर काम करने वाले कानूनी पेशावर तैयार हो सकेंगे। <br /><strong>- भीमराज मीणा, पूर्व छात्रसंघ महासचिव </strong></p>
<p><strong>सरकार को भेजे हैं प्रस्ताव</strong><br />एलएलएम को लेकर प्रस्ताव स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेज दिए हैं।  पहले हमारे पास एलएलएम के लिए जरूरी मापदंड के अनुरूप सुविधाएं नहीं थी लेकिन वर्तमान में वो सभी सुविधाएं विकसित कर ली गई हैं, जिसमें पर्याप्त कक्षा कक्ष, आधुनिक लाइब्रेरी, मूट कोर्ट, 8 से ज्यादा शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा और भी सुविधाएं विकसित करने के प्रयास जारी हैं। <br /><strong>- आरके उपाध्याय, प्राचार्य, राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 19:42:50 +0530</pubDate>
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