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                <title>waste - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>असर खबर का : नगर परिषद बैठक में  डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण समय-सारणी बदली, घर-घर जाकर दी जा रही जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ करने के लिए सख्ती बढाई, वार्डों एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में समय निर्धारित किया ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/-impact-of-the-news--door-to-door-waste-collection-schedule-revised-during-municipal-council-meeting/article-151447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)34.png" alt=""></a><br /><p>बूंदी। शहर के विभिन्न वार्डों में बदहाल सफाई व्यवस्था और कचरा संग्रहण की अनियमितता को लेकर प्रकाशित समाचारों के बाद नगर परिषद प्रशासन सक्रिय हो गया है। जनहित में उठाए गए मुद्दों का संज्ञान लेते हुए परिषद ने स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विशेष बैठक आयोजित कर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की समय-सारणी में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।</p>
<p>नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) टीम को मैदान में उतारा गया है। आईईसी एक्सपर्ट कपिल गुप्ता के निर्देशन में टीम सदस्य अमन और विष्णु वार्डों में घर-घर जाकर नागरिकों को नई समय-सारणी की जानकारी दे रहे हैं। पंपलेट वितरित कर लोगों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की जा रही है। परिषद ने शहर को विभिन्न समूहों में बांटकर कचरा संग्रहण का समय निर्धारित किया है। समूह-1 के वार्डों में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक, समूह-2 के वार्डों में सुबह 7 बजे से 11 बजे तक तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक कचरा संग्रहण किया जाएगा। नगर परिषद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कचरा संग्रहण वाहन आने पर ही कचरा दिया जाए तथा गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डिब्बों में रखना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। जो नागरिक निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं रह पाते, वे कचरे को बंद डिब्बे में सुरक्षित बाहर रख सकते हैं।सफाई व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के लिए परिषद ने हेल्पलाइन नंबर 9251654739 जारी किया है, जिस पर नागरिक संपर्क कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:59:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूखी घास व कचरा, गर्मी में आग का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[हर साल हो रही आग लगने की घटनाएं,शहर में ट्रांसफार्मरों के पास लगा है कचरे का अम्बार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dry-grass-and-waste-pose-fire-hazard-during-summer/article-147989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)41.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा। आने वाले तीन महीने अप्रैल से जून में तापमान अधिक होने पर गर्मी भी भीषण पड़ती है। ऐसे में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं भी अधिक होती है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों में लगने वाली आग से आमजन अधिक प्रभावित होते हैं। हालत यह है कि ट्रांसफार्मरों के आस-पास कचरा व सूखी घास आग का बढ़ना कारण बनते हैं। शहर में आमजन की सुविधा के लिए बिजली कम्पनी ने एक निर्धारित दूरी पर ट्रांसफार्मर लगाए हुए हैं। वहीं आमजन को इसके खतरे से बचाने के लिए सभी ट्रांसफार्मर को जमीन से काफी ऊंचाई पर रखा गया है। साथ ही इनकी सुरक्षा के लिए उनके चारों तरफ लोहे की जाली की फेसिंग भी की हुई है। लेकिन हालत यह है कि अधिकतर ट्रांसफार्मर के आस-पास लोगों द्वारा कचरा डालने व वहां उगी सूखी घास गर्मी में आग लगने का बड़ा कारण बन रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">यहां है बुरी स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">शहर में वैसे तो सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर हैं। उनमें से कई जगह ऐसी हैं जहां ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरा व सूखी घास है। जिनमें थोक फल सब्जीमंडी के बाहर हो या फर्नीचर मार्केट शॉपिंग सेंटर, नई धानमंडी के पास मोटर मार्केट हो या किशोर सागर तालाब की पाल। बंगाली कॉलोनी छावनी समेत कई अन्य स्थानों पर यही हालत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">मुख्य मार्गों पर लगा रही सीमेंट जाली</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों पर लगे ट्रांसफार्मरों पर तो सीमेंट की जाली लगाई जा रही है। जिससे न तो कोई उनमें आसानी से घुस सकेगा। साथ ही उन जालियों से कचरा भी अंदर नहीं फेका जा सकता। जिससे आग लगने का खतरा भी कम हो गया है। लेकिन कॉलोनियों व अंदरूनी क्षेत्रों के ट्रांसफार्मरों के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सभी जगह सुरक्षा, सफाई निगम का जिम्मा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निजी बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि सभी ट्रांसफार्मरों पर कम्पनी की ओर से लोहे की रैलिंग से सुरक्षा की हुई है। ट्रांसफार्मर भी जमीन से ऊपर हैं। जिससे करंट का खतरा भी नहीं है। लेकिन इनके आस-पास सूखी घास व कचरा लोग ही डाल रहे हैं। कई बार कचरे में आग लगने पर वह पैनल के माध्यम से ट्रांसफार्मर तक पहुंच जाती है। जिससे नुकसान का खतरा रहता है। कचरा व घास की सफाई का जिम्मा निगम कर्मचारियों का है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सफाई होने के बाद डाला जाता है कचरा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी मोतीलाल चौधरी ने बताया कि बरसात के समय में ट्रांसफार्मर के आस-पास घास उग जाती है। साथ ही कचरा भी लोग डाल देते हैं। हालांकि निगम की ओर से उसकी सफाई की जाती है। लेकिन कई बार तारों में करंट के चलते सफाई कर्मी ट्रांसफार्मर के नजदीक सफाई नहीं कर पाते। प्रयास करेंगे कि ट्रांसफार्मर के आस-पास भी अच्छी तरह सफाई हो और वहां कचरा एकत्र ही नहीं हो जिससे आग का खतरा बने।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">तापमान अधिक होने से लगती है आग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि अप्रैल से जून के तीन महीने में तापमान अधिक होने से गर्मी पड़ती है। ऐसे में कई बार सूखी घास व कचरे में आग लग जाती है। घास व कचरा ट्रांसफार्मर के नजदीक होने से उससे ट्रांसफार्मर में आग लग जाती है। जिससे लाइट बंद कर आग बुझाने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार लोग जलती वस्तु डाल देते हैं। जिससे भी आग लग जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:21:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>टोंक बना पानी का टांका, जयपुर में दोपहर बाद बारिश, अन्य जिलों में भी मानसून मेहरबान</title>
                                    <description><![CDATA[जिले के डिग्गी थाना क्षेत्र के भीपुर गांव में 10 कच्चे घर ढह गए। यहां बाढ़ से हालात हो गए। मालपुरा में सहोदरा नदी में अचानक पानी बढ़ने से तीन युवक फंस गए, जिन्हें मुश्किल से बाहर निकाला गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tonk-becomes-water-tank/article-83805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मानसून अब लगभग सभी जिलों में छा गया है। मानसून की सक्रियता के बीच जयपुर, टोंक-सवाई माधोपुर, बीकानेर सहित कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हुई। इस कारण नदी-नाले उफान पर हैं और जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। टोंक में सुबह से ही तेज बारिश का दौर शुरू हुआ जो कई घंटों तक चला। इसके चलते सड़कों, घरों और स्कूलों तक में पानी भर गया। जिले के डिग्गी थाना क्षेत्र के भीपुर गांव में 10 कच्चे घर ढह गए। यहां बाढ़ से हालात हो गए। मालपुरा में सहोदरा नदी में अचानक पानी बढ़ने से तीन युवक फंस गए, जिन्हें मुश्किल से बाहर निकाला गया। </p>
<p><strong>बीकानेर में फैक्ट्री की दीवार ढही, तीन की मौत</strong><br />बीकानेर में शाम को आए अंधड़ बारिश के शोभासर में एक फैक्ट्री की दीवार ढहने से एक बच्चे समेत तीन जनों की मौत हो गई। ये सभी आंधी-बारिश से बचने के लिए दीवार का सहारा लेकर बैठे थे तभी ये हादसा हो गया। जयपुर में झोटवाड़ा इलाके में मुख्य सड़कों को जोड़ने वाली 80 फीट लिंक रोड का कुछ हिस्सा धंस गया। शास्त्री नगर थाने के पास राणा कॉलोनी में बारिश के कारण बिजली का ट्रांसफर्मर नाले पर गिर गया जिससे नाला ढह गया। नाला ढहने से आसपास रहने वाले करीब 100 मकानों पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है। <br /><strong>टोंक में कक्षा 1 से 12 तक की स्कूलों में छुट्टी<br /></strong>जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा ने टोंक जिले में अत्यधिक भारी बारिश एवं बाढ़ की सम्भावनाओं को देखते हुए रेड़ अलर्ट जारी कर दिया है, साथ ही कक्षा 1 से 12 तक के समस्त विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। </p>
<p><strong>अब आगे क्या?</strong><br />मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को भी पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने व कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं 7-8 जुलाई को भारी बारिश की गतिविधियों में कमी होने और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में बारिश दर्ज होने की संभावना है। इसके बाद 9-10 जुलाई से फिर पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर संभाग में आगामी 2-3 दिन दोपहर बाद मेघगर्जन, आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है। जोधपुर संभाग के पूर्वी व उत्तरी भागों में कहीं-कहीं बारिश की संभावना है।</p>
<p><strong>यहां बरसे मेघ</strong><br />पिछले 24 घंटे के दौरान राजस्थान के जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, नागौर, चित्तौड़गढ़, बारां, कोटा, बूंदी के अलावा पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, चूरू और दक्षिण राजस्थान के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ के एरिया में बारिश हुई। मौसम विभाग ने अगले दो सप्ताह का पूर्वानुमान जारी करते हुए प्रदेश में 18 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 10:28:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नालों में डल रहा हॉस्टल-मैस का कचरा</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात से पहले नालों की सफाई पर फिर खर्च होंगे लाखों रुपए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hostel-mess-waste-being-dumped-in-drains/article-74368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/naalo-me-dal-rha--hostel-mess-ka-khrcha...kota-news-03-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> दृश्य-1</strong> किशोरपुरा स्थित साजी देहड़ा नाला। जिसकी सफाई पर दो साल पहले कई दिन का समय लगा और इसके मोखों को साफ किया गया था। वर्तमान में हालत यह है कि सभी मोखे फिर से कचरे से अट गए हैं। जिससे पानी की निकासी सही ढ़ंग से नहीं हो पा रही है।</p>
<p><strong>दृश्य-2</strong> जवाहर नगर मेन रोड का नाला। इस नाले की सफाई पर हर बार सबसे अधिक समय लगता है। उसके बाद भी इस नाले में वर्तमान में इतना अधिक कचरा है कि देखकर लगता ही नहीं कि इसकी हर साफ सफाई हो रही है। यहां आस-पास के हॉस्टल व मैस का कचरा डाला जा रहा है। </p>
<p><strong>दृश्य-3</strong> तलवंडी मेन रोड का नाला। इस नाले में कचरे से लेकर मैस व होटल और हॉस्टलों से निकलने वाला कचरा बड़ी मात्रा में डाला जा रहा है। जिससे बरसात के समय यहां पानी भरने से जाम नाले के कारण सारा गंदा पानी क्षेत्र के मकानों की तरफ जाएगा। यह तो उदाहरण मात्र है शहर के उन  बरसाती नालों की दशा व हालत बताने के लिए जिनकी सफाई पर नगर निगम हर साल लाखों रुपए खर्च करता है। शहर के नए कोटा से लेकर कोचिंग एरिया और पुराने शहर से लेकर रेलवे स्टेशन तक के क्षेत्र में ऐसे कई बड़े बरसाती नाले हैं जिनमें डलने वाले कचरो को रोकने के लिए कोई मॉनिटरिंग तक नहीं हो रही है। ऐसे में उन नालों की सफाई पर हर साल होने वाले जनता के लाखों रुपए बर्बाद ही हो रहे हैं। एयरपोर्ट के पास से गुजर रहा नाला हो या संतोषी नगर से निकलने वाला नाला। एसी वाले गणेशजी  के पास का नाला हो या धोकड़े वाले हनुमान मंदिर के पास का नाला। दादाबाड़ी का नाला हो या जवाहर नगर  में मैरिज गार्डन के पास का नाला। सभी नालों की हालत एक जैसी बनी हुई है। </p>
<p><strong>जेसीबी के अलावा चैन माउंटेंड से सफाई</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से हर साल बरसात से पहले सभी बड़े बरसाती नालों की दो तरह से सफाई करवाई जाती है। एक तो नगर निगम की जेसीबी मशीनों से। जेसीबी से अधिकतर छोटे नालों की सफाई करवाई जाती है। जबकि बड़े व अधिक कचरे वाले नालों की सफाई चैन माउंटेंड मशीनों से करवाई जाती है। इसके लिए नगर निगम अलग से टेंडर करता है। जिसमें प्रति घंटे के हिसाब से मशीन का भुगतान होता है। नालों की सफाई का काम बरसात से पहले अप्रैल-मई में शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार इस अवधि में लोकसभा चुनाव होने से सभी अधिकारी चुनाव कार्य में व्यस्त हैं। जिससे नालों की सफाई के काम में देरी होने की संभावना है। </p>
<p><strong>तत्कालीन आयुक्त व उपायुक्त ने की थी सख्ती</strong><br />शहर के बरसाती नालों में सफाई करवाने के बाद भी उनमें कचरा डालने वालों के खिलाफ नगर निगम कोटा दक्षिण की तत्कालीन आयुक्त कीर्ति राठौड़ और तत्कालीन उपायुक्त राजेश डागा ने सख्ती की थी। वे स्वयं व जनता के सहयोग से उना नालों में डलने वाले कचरे के मॉनिटरिंग कर रहे थे। नालों में कचरा डालने वालों के फोटो खिचवाकर उसके आधार पर उन पर हजारों रुपए जुर्माना किया। जिससे उस समय काफी हद तक इसमें कमी आई थी। दोनों अधिकारियों ने स्वयं भी कई बार मैस व हॉस्टल कर्मचारियों को नाले में कचरा डालते हुए पकड़ा  था। डागा के समय तो लाखों रुपए जुर्माना वसूल किया गया था।  लेकिन उन अधिकारियों के जाने के बाद वर्तमान में निगम अधिकािरयों की तरफ से नालों में कचरा डालने वालों की न तो कोई मॉनिटरिंगम की जा रही है और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई। </p>
<p><strong>जनता के धन की बर्बादी</strong><br />जवाहर नगर निवासी अजय शर्मा ने बताया कि नगर निगम की ओर से हर साल  नालों की सफाई करवाई जाती है। जिन पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। फिर भी गंदगी व कचरे से नाले अटे हुए हैं। ऐसे में जनता के धन की बर्बादी हो रही है। अभी भी अक्सर लोगों को सुबह जल्दी व रात के अंधेरे में नालों में कचरा डालते हुए देखा जा सकता है। </p>
<p>दादाबाड़ी निवासी मोहम्मद असलम का कहना है कि नगर निगम की ओर से पिछले साल भी चैना माउंटेंड मशीन लगाकर नाले की सफाई करवाई गई थी। उसके बाद फिर से आस-पास के दुकानदार व फल के ठेले वाले नाले में ही कचरा डाल रहे हैं। नगर निगम के सफाई निरीक्षक, जमादार आंखें मूंदे बैठे हैं। जिससे जनता के धन की बर्बादी हो रही है। इस बार फिर से नालों की सफाई के टेंडर होकर लाखों रुपए खर्च किए जाएंगे। उनका कहना है कि बरसात आने वाली है। लेकिन अभी तक तो सफाई शुरू भी नहीं हुई है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम बरसात से पहले हर साल बड़े नालों की सफाई करवाता है। इस बार सभी अधिकारी चुनाव में व्यस्त हैं। पूर्व में अधिकारियों ने जिस तरह से नालों में कचरा डालने वालों पर सख्ती की थी। उसका असर दिखाई दिया था। लेकिन उनके जाते ही अब अधिकारियों का ऐसा कोई मानस ही नहीं लगता। जिससे अभी भी मैस व हॉस्टलों का कचरा नए कोटा क्षेत्र के नालों में डल रहा है। नालों के ढकान की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि प्रयास है कि कोटा में मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नालों की सफाई करवाने के बारे में अधिकारियों से कहा जाएगा। <br /><strong>- पवन मीणा, अध्यक्ष सफाई समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 18:35:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डॉक्टर साब कस्यां होवेगो उपचार! अस्पताल खुद बीमार...  </title>
                                    <description><![CDATA[ाूरे अस्पताल में दुर्गंध से मरीज को गंदगी की दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है, इससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/doctor-saab-kasyan-hovego-treatment--the-hospital-itself-is-sick/article-59523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kopjfgvjlgikhn.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। वैसे से अस्पतालों में लोग अपनी बीमारी को ठीक करवाने आते है । चिकित्सक मरीजों की जान को बचाते है लेकिन खानपुर उपखंड में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में तो आने वाले मरीजों का उपचार होना तो दूर, यहां अस्पताल में अव्यवस्थाओं के  चलते मरीजों की जान पर बन आई है।  इन दिनों कुछ समय से खानपुर में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों गंदगी अपना पैर पसारे हुए हैं, यहां फैली गंदगी रोगियों व उनके परिजनों के लिए भारी परेशानी का सबब बनी हुई है। अस्पताल परिसर में स्थित आॅक्सीजन प्लांट के समीप भारी गंदगी फैली हुई है, पूरे अस्पताल में दुर्गंध से मरीज को गंदगी की दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है, इससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है। रोगियों और उनके परिजनों ने बताया कि अस्पताल के जनरल वार्ड में स्थित सुविधाघर में ताला लगा होने से मजबूरी में मरीज को शौच बाहर करना पड़ता है। अस्पताल से निकलने वाले मेडीकल वेस्ट को आॅक्सीजन प्लांट और स्टोर रूम से सटे पिट में डाला जाता है। कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा है। मवेशी फैली गंदगी में अपना मुंह मार रहे हैं ऐसे में कचरा जोकि प्लास्टिक से परिपूर्ण है जानवरों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले रोगियों, परिजनों ओर अस्पताल स्टाफ को संक्रामक बीमारियां होने का भय बना रहता है। जानकारी अनुसार अस्पताल में खानपुर ब्लॉक सहित आसपास से जुड़े हुए छोटे गांव के रोगी प्रतिदिन उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडीकल वेस्ट के निस्तारण के लिए गाड़ी आती है। शेष गंदगी को परिसर में स्थित पिट में डाला जा रहा है, इस कचरे के साथ-साथ ऐसा देखा गया है कि परिसर में जो कचरापात्र रखा हुआ है, वह भी पूरा गंदगी से भरपूर हो चुका है लेकिन किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। अस्पतालों में तंबाकू व गुटखा वर्जित है, लेकिन यहां पर इतना अधिक तंबाकू व गुटखा खाकर दीवारे गंदी हो रही है। दिनों दिन मौसमी बीमारियों के चलते वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया से अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ने से सारे बेड फुल हैं और लगभग करीब 5 वर्ष से यहां पर दंत चिकित्सक नहीं होने के कारण दांतों के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सारे उपकरण होते हुए भी दांतों का डॉक्टर नहीं है, जिससे मरीजों को उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। खानपुर उपखंड में यह बहुत बड़ा चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र है जहां पर दूर-दूर से मरीज आते हैं अत: यहां पर सभी सुविधाएं होना चाहिए ताकि मरीजों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। </p>
<p>अभी बीमारियों का सीजन चल रहा है, सर्दी जुकाम व खांसी के मरीज लगातार आ रहे हैं, लेकिन खानपुर चिकित्सालय परिसर में गंदगी का अंबार लग रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। <br /><strong>- परमेश गौत्तम, ग्रामीण  </strong></p>
<p>खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इतनी गंदगी फैली हुई है कि मरीज ठीक होने के स्थान पर उसकी दुर्गंध से ही बीमार हो जाए, जल्द से जल्द गंदगी को हटाया जाए। <br /><strong>- गोलू सुमन, छात्र  </strong></p>
<p>खानपुर का अस्पताल एक बहुत बड़ा अस्पताल है जहां पर अधिक डॉक्टर होने के स्थान पर डॉक्टर कम मरीज अधिक है, जिसकी वजह से मरीज परेशान रहते हैं और यहां से झालावाड़ जाना पड़ता है। <br /><strong>- केशव लक्ष्कार, ग्रामीण  </strong></p>
<p>खानपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कई वर्षों से दांतों के चिकित्सक का पद रिक्त है, जिसके कारण दांतों के मरीजों को खानपुर से बाहर जाना पड़ता है और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करना पड़ता है। <br /><strong>- विशाल गोस्वामी, ग्रामीण </strong> </p>
<p>लगभग दो-चार दिन में सोनोग्राफी मशीन आ जाएगी और यहां पर दंत चिकित्सक की कमी है। जल्द से जल्द समस्या का समाधान करवाने का प्रयास करेंगे।  <br /><strong>- डॉ. धीरेंद्रगोपाल मिश्रा, चिकित्सा प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खानपुर ।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Oct 2023 18:41:19 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर: शीघ्र मिलेंगे आधुनिक कचरा स्टेशन</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर में एक आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन स्टेशन रोड पर जिन बाबा के पीछे बनेगा। जबकि दूसरा ट्रांसफर स्टेशन उम्मेदगंज में बनेगा। यहां दोनों जगह काम शुरू हो गए हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north--modern-garbage-station-will-be-available-soon/article-34226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/khedlifatak-traching-ground.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम कोटा दक्षिण के बाद अब कोटा उत्तर नगर निगम में भी शीघ्र ही दो आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन की सौगात मिलेगी। साथ ही कोटा उत्तर में गैराज भी बनेगा। नगर निगम कोटा उत्तर में अभी तक एक भी आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन नहीं था। जिसके लिए काफी समय से नगर निगम के अधिकारी जमीन की तलाश में थे। लेकिन जहां भी जमीन मिल रही थी। वहां किसी न किसी बाधा के कारण काम शुरू नहीं हो सका था। लेकिन कहावत है कि अंत भला तो सब भला। उसी के तहत अब कोटा उत्तर नगर निगम में भी एक साथ दो आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए जाएंगे। जिनके लिए जमीन तय होने के साथ ही काम भी शुरू हो गए हैं। </p>
<p><strong>स्टेशन रोड जिन बाबा के पीछे व उम्मेदगंज में बनेंगे</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर में एक आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन स्टेशन रोड पर जिन बाबा के पीछे बनेगा। जबकि दूसरा ट्रांसफर स्टेशन उम्मेदगंज में बनेगा। यहां दोनों जगह काम शुरू हो गए हैं। जिन बाबा के पीछे वाली जगह पर कोटा उत्तर निगम का गैराज भी बनाया जाएगा। जिसका भी काम शुरू हो गया है। </p>
<p><strong>6 माह में तैयार होने की संभावना</strong><br />जिन बाबा के पीछे व उम्मेदगंज में आधुनिक  कचरा ट्रांसफर स्टेशन का काम 6 माह में पूरा होने की संभावना है। स्टेशन रोड पर करीब 4 बीघा में ट्रांसफर स्टेशन व गैराज बनाया जा रहा है। जबकि उम्मेदगंज में साढ़े पांच बीघा जमीन में ट्रांसफर स्टेशन बन रहा है। जिन बाबा के पीछे जेसीबी मशीनों से गड्ढ़ों को भरने व जमीन को समतल करने का काम किया जा रहा है। नगर निगम के मुख्य अभियंता प्रेम शंकर शर्मा ने बुधवार को ही उम्मेदगंज में शुरू हुए काम का मौका देखा। </p>
<p><strong>प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के बजट से हो रहे तैयार</strong><br />प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा 15 वें वित्त आयोग के तहत कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण निगम को कीब 27-27 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। उसी बजट से कोटा उत्तर में ट्रांसफर स्टेशन व गैराज बनाया जा रहा है। स्टेशन रोड  पर करीब 7 करोड़ की लागत से व उम्मेदगंज में साढ़े सात करोड़ की लागत से ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। स्टेशन रोड पर जिन बाबा के पीछे 2 करोड़ की लागत से गैराज का भी निर्माण किया जा रहा है। </p>
<p><strong>कोटा दक्षिण में चालू हुए दोनों ट्रांसफर स्टेशन</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में तो दो आधुुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनकर तैयार हो गए हैं। उन दोनों स ही कचरे का परिवहन किया जा रहा है। एक ट्रांसफर स्टेशन पूर्व में ही किशोरपुरा क्षेत्र में धार का अखाड़ा के पास बनकर तैयार हो गया था। जबकि विश्वकर्मा नगर में कुछ समय पहले हीबनकर तैयार हुआ है। इन दोनों ट्रांसफर स्टेशनों में कोखा दक्षिण के 80 वार्डों का कचरा जा रहा है। वहां से उस कचरे को कैप्सूल के जरिये ट्रेचिंग ग्राुंड भेजा जारहा है। </p>
<p><strong>70 वार्डों का कचरा पहुंचेगा दोनों जगह</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर में 70 वार्ड हैं। उन वार्डों के कचरे को टिपरों व ट्रैक्टर ट्रॉलियों से दोनों आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर पहुंचाया जाएगा। जिनमें से आधे वार्डों का कचरा जिन बाबा के पीछे व आधे वार्डों का कचरा उम्मेदगंज जाएगा। वहां से उस कचरे को कैम्सूल में भरकर हाईजनिक तरीके से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जाएगा। <br /> <br /><strong>इनका कहना</strong><br />कोटा उत्तर में भी जिन बाबा के पीछे व उम्मेदगंज में एक साथ आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाने का काम शुरू हो गया है। जिन बाबा के पीछे तो निगम का गैराज कम निगम के वाहन खड़े करने का शेड बनाया जा रहा है। दोनों जगह के काम 6 माह में पूरे होने की संभावना है। कोटा उत्तर में भी आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनने से कचरे का हाइजनिक तरीक से परिवहन किया जा सकगा। <br /><strong>-प्रेम शंकर शर्मा, मुख्य अभियंता, नगर निगम कोटा उत्तर/दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jan 2023 15:03:51 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर में वार्ड कम फिर भी सफाईकर्मी अधिक </title>
                                    <description><![CDATA[दो साल पहले कोटा में दो नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण बना दिए।  दोनों निगमों के हिसाब से सफाई कर्मचारियों से लेकर सभी व्यवस्थाओं का बंटवारा किया गया। लेकिन बंटवारे में समानता का ध्यान नहीं रखा  गया। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति व टिपर संचालन। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wards-less-in-kota-north-yet-more-sweepers/article-29584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/kota-utter-mei-ward-kum-fir-bhi-safaikarmi-adhik...kota-news..14.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा में दो नगर निगम तो बना दिए जिससे शहर की सफाई अधिक बेहतर हो सके। लेकिन दोनों निगमों में सफाई  संसाधनों के मामले में भेदभाव बरता जा रहा है। कोटा उत्तर निगम में वार्ड कम होने के बाद भी स्थायी सफाई कर्मचारी अधिक हैं। यहां तक कि घर-घर कचरा संग्रहण में लगे टिपर भी उत्तर में अधिक हैं। कोटा में पहले जहां एक ही निगम था उस समय वार्डों की संख्या कुल 65 थी। उस समय हर वार्ड में दो दो टिपर घर-घर कचरा संग्रहण कर रहे थे। लेकिन दो साल पहले कोटा में दो नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण बना दिए। वार्डों की संख्या भी करीब ढाई गुना अधिक 150 कर दी गई। परिसीमन के बाद कोटा उत्तर में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड बनाए गए हैं। दोनों निगमों के हिसाब से सफाई कर्मचारियों से लेकर सभी व्यवस्थाओं का बंटवारा किया गया। लेकिन बंटवारे में समानता का ध्यान नहीं रखा  गया। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति व टिपर संचालन। </p>
<p><strong>उत्तर के 70 वार्ड, सफाई कर्मचारी 14 सौ</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर में वार्ड तो 70 हैं जबकि यहां स्थायी सफाई कर्मचारियों की संख्या 14 सौ है। इसके अलावा 400 बीट श्रमिक है जो  संविदा पर विभिन्न स्थान व मुख्य मार्गों की सफाई में लगे हुए हैं।  इसी तरह से घर-घर कचरा संग्रहण कार्य के लिए हर वार्ड में 3-3 टिपर लगे हुए हैं। वहीं हर दो वार्ड के बीच एक ट्रेक्टर ट्रॉली लगाई गई है। इस तरह से 70 वार्ड में कुल 35 ट्रेक्टर ट्रॉली लगी हुई हैं। जिसके माध्यम से कचरा पाइंट से नियमित कचरा उठाया जा रहा है। निगम द्वारा नयापुरा स्थित बृज टॉकीज परिसर के अस्थायी कचरा ट्रांसफर स्टेशन को शिफ्ट करने के साथ ही मेन रोड व वार्डों के 39 कचरा पाइंट को बंद कर उन्हें कचरा मुक्त किया गया है। </p>
<p><strong>दक्षिण में वार्ड 80, सफाई कर्मचारी 1250</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण  में परिसेीमन के बद 80 वार्ड बनाए गए हैं। यह क्षेत्र बड़ा होने व वार्ड अधिक होने के बाद भी यहां सफाई कर्मचारी कोटा उत्तर से कम 1250 हैं। वहीं हर वार्ड में 5 संविदा ठेका श्रमिकों समेत कुल 450 श्रमिक मुख्य मार्गों की सफाई में लगे हैं।  इसके साथ ही यहां 39 वार्ड में 23 व 41 वार्ड में 27 समेत कुल 50 ट्रेक्ट्रर ट्रॉलियों से कचरा पाइंट से कचरा उठाया जा रहा है। यहां घर-घर कचरा संग्रहण के लिए हर वार्ड में मात्र 2-2 टिपर ही संचालित किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दो निगम बनने के बाद निगम के सफाई कर्मचारियों का समान रूप से बंटवारा किया गया है। व्यवस्था की दृष्टि से कहीं अधिक व कम कर्मचारी हो सकते हैं। लेकिन सफाई व्यवस्था में इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। सफाई पहले से बेहतर हुई है। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>कोटा दक्षिण का क्षेत्र और वार्ड बड़े होने के बावजूद भी सफाई में कोई कमी नहीं है। सभी पार्षद नियमित रूप से वार्ड में घूमकर सफाई कार्य की मॉनिटरिंग करते हैं। टिपरों से दो समय कचरा संग्रहण कराया जा रहा है। जहां कचरा नहीं उठने की शिकायत आती है वहां तुरंत कार्रवाई की जा रही है। स्थायी के अलावा अस्थायी व संविदा पर भी सफाई कर्मचारी लगाए हुए हैं। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Nov 2022 15:26:22 +0530</pubDate>
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                <title>अब विश्वकर्मा नगर से होगा कचरे का हाइजनिक परिवहन</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में अब शीघ्र ही विश्वकर्मा नगर से भी कचरे का हाइजनिक तरीके से परिवहन किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम कोटा दक्षिण का दूसरा आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन भी बनकर तैयार हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-there-will-be-hygienic-transportation-of-waste-from-vishwakarma-nagar/article-21779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/ab-vishvkarma-nagar-hygenic-parivahan..kota-news-5.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में अब शीघ्र ही विश्वकर्मा नगर से भी कचरे का हाइजनिक तरीके से परिवहन किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम कोटा दक्षिण का दूसरा आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन भी बनकर तैयार हो गया है। शहर में एक ओर जहां प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ खुले में कचरा जाने से गंदगी व दुर्गंध का भी लोगों को सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अब कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में इन दोनों ही समस्याओं से लोगों को निजात व राहत मिलने वाली है। नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से विश्वकर्मा नगर में दूसरा आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाया गया है। करीब 5.50 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए इस ट्रांसफर स्टेशन का अधिकतर काम पूरा हो गया है। मशीनरी भी फिटिंग भी हो चुकी है। ट्रायल के बाद इसी महीने इसके शुरू होने की संभावना है। </p>
<p>नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि जिस जगह पर यह आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाया गया है। वहां पहले अस्थायी कचरा ट्रांसफर स्टेशन बना हुआ था। वहां से ट्रेक्टर-ट्रॉलियों के जरिये कचरा निगम के ट्रेचिंग ग्राउंड पर जा रहा था। लेकिन अब उसकी जगह पर आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाया गया है। जिससे वहां आने वाले कचरे को सीधे ही टिपरों से मशीन में डाला जाएगा। मशीनों से गीला व सूखा कचरा दो अलग-अलग कंटेनरों में भरा जाएगा। उसके बाद उन बंद कंटेनरों से कचरे को नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जाएगा। इससे एक तो कचरा बंद कंटेनर में जाने से वह नजर नहीं आएगा। उसकी  दुर्गंध नहीं फेलगी। कचरा जगह-जगह बिखरेगा नहीं। साथ ही हाइजनिक तरीके से कचरा परिवहन होने से लोगों को प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। कुरैशी ने बताया कि इसके साथ ही जहां कचरा ट्रांसफर स्टेशन से 50 ट्रेक्टर-ट्रॉलियों से कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड जाता था। वहीं अब उतना कचरा एक कंटेनर में जाने से परिवहन में भी सुविधा होगी और लोगों को भी अधिक वाहनों के कारण सड़क पर परेशानी नहीं होगी।  गौरतलब है कि शहर से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड पर पहुंचाया जा रहा है। </p>
<p><strong>किशोरपुरा में संचालित है एक कचरा ट्रांसफर स्टेशन</strong><br />विश्वकर्मा नगर से पहले नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में किशोरपुरा स्थित धार का अख़ाड़ा के पास  भी एक आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन काम कर रहा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण कराया गया था। यहां से वर्तमान में सैकड़ों टन कचरे का परिवहन हाईजनिक तरीके से किया जा रहा है। </p>
<p><strong>उत्तर में नहीं बना एक भी कचरा ट्रांसफर स्टेशन</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में दो आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बन गए हैं। जिनमें से एक में काम हो रहा है जबकि दूसरे में जल्दी ही काम शुरु हो जाएगा। लेकिन हालत यह है कि कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में अभी तक एक भी आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन नहीं बना है। इस कारण से इस निगम का कचरा थेगड़ा स्थित अस्थायी कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर जा रहा है। वहां से ट्रेक्टर-ट्रॉली से यह कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड जा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में एक आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन तो काम कर रहा है। वहीं दूसरा ट्रांसफर स्टेशन विश्वकर्मा नगर में बनकर तैयार हो गया है। उसे इसकी महीने शीघ्र ही चालू कर दिया जाएगा। जिससे कचरे का हाइजनिक तरीके से परिवहन होगा। लोगों को खुले कचरे की दुर्गंध से भी मुक्ति मिलेगी। पर्यावरण की दृष्टि से भी वह लाभदायक है। ट्रेचिंग ग्राउंड पर कंटेनर से कचरा डालने में शुरुआत में परेशानी हो रही थी। उसका समाधान करते हुए वहां सीसी रोड बना दी गई है। अब कंटेनर वहां आगे तक जा सकते हैं।  <br /><strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Sep 2022 16:55:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>घर से निकल रहे कचरे पर हो रहा सालाना 220 करोड़ से अधिक खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर की करीब 15 लाख से अधिक की आबादी वाले घरों से रोजाना निकलने वाला कचरा दिखने में तो थोड़ा लगता है। लेकिन उसका आंकलन किया गया तो पता चला कि शहर से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है जो ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। उस कचरे को साफ करने पर हर साल 220 करोड़ रुपए से अधिक का खर्चा हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-220-crores-is-being-spent-annually-on-the-waste-coming-out-of-the-house/article-12434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ghar-se-nikal-rahe-kachre-par-ho-raha-salana.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर की करीब 15 लाख से अधिक की आबादी वाले घरों से रोजाना निकलने वाला कचरा दिखने में तो थोड़ा लगता है। लेकिन उसका आंकलन किया गया तो पता चला कि शहर से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है जो ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। उस कचरे को साफ करने पर हर साल 220 करोड़ रुपए से अधिक का खर्चा हो रहा है। उसके बाद भी अभी तक उस कचरे का निस्तारण नहीं हो सका है। कोटा में पहले जहां एक ही नगर निगम था। उसे कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में बांट दिया है। वार्डों की संख्या भी 65 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है। नगर निगम द्वारा हर साल शहर से निकलने वाले कचरे को साफ करने पर होने वाले बजट को बढ़ाया जा रहा है। करीब तीन हजार से अधिक सफाई कर्मचारी रोजाना शहर की सड़कों और गली मौहल्लों में सुबह-शाम झाडू लगाते हुए देखे जा सकते हैं। हर वार्ड में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए घर-घर कचरा संग्रहण में हर वार्ड में दो-दो टिपर लगाए हुए हैं। उसके बाद भी शहर उतना साफ नजर नहीं आ रहा है। जितना होना चाहिए। कोटा में रोजाना करीब 400 टन कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड जा रहा है। उसके अलावा भी काफी कचरा ऐसा है जो सड़कों पर पड़ा हुआ है। <br /><br />कोटा शहर को सफाई के मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर की तर्ज पर बनाने की बातें तो खूब की जाती हैं। लेकिन उसे अभी तक भी अमली जामा नहीं पहनाया गया है। नगर निगम की जेसीबी व डम्परों के अलावा कचरा परिवहन का काम ठेके पर दिया हुआ है। सफाई कर्मचारियों के अलावा रोड स्वीपर मशीनों से भी मुख्य मार्गों की सफाई करवाई जा रही है।  कचरा पाइंट कम किए जा रहे हैं। कचरे के हाइजनिक तरीके से परिवहन के लिए आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इतना सब कुछ होने के बाद भी शहर से कचरे का निस्तारण नहीं हो पाया है।  कोटा में हर साल सफाई पर होने वाले खर्च से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर से निकलने वाला कचरा कितना महंगा पड़ रहा है। हर साल अरबों रुपए कचरे में जा रहे हैं। <br /><br /><strong>उत्तर-दक्षिण में अलग-अलग बजट</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में सफाई के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित है। हर साल बजट बढ़ाया भी जा रहा है। नगर निगम कोटा उत्तर का वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए सफाई पर खर्च होने वाला प्रस्तावित बजट 114.82 यानि 1 अरब 14 करोड़ 82 लाख रुपए है। उसी तरह से कोटा दक्षिण में वित्तीय वर्ष 2022-23 में सफाई पर खर्च होने वाला प्रस्तावित बजट 105.37 करोड़ यानि 1 अरब 5 करोड़ 37 लाख रुपए है। यह बजट कोटा उत्तर के 70 व कोटा दक्षिण के 80 वार्डों में खर्च किया जा रहा है। <br /><br /><strong>गत वर्ष हुआ 154 करोड़ रुपए से अधिक खर्च</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा गत वित्तीय वर्ष  2021-22  के लिए जो बजट प्रस्तावित किया गया है।  उसमें से दोनों निगमों में सफाई पर करीब 154 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए थे। जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में गत वर्ष 79 करोड़ 64 लाख रुपए और कोटा दक्षिण में 75 करोड़ 23 लाख रुपए खर्च किए गए थे। <br /><br /><strong>यह है सफाई व्यवस्था</strong><br />शहर में हर घर से जो कचरा निकल रहा है। उस कचरे को नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के माध्यम से टिपरों के जरिये एकत्र किया जा रहा है। उन टिपरों में एकत्र होने वाले कचरो को शहर में निर्धारित कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर डाला जा रहा है। टिपरों के अलावा जगह-जगह पर निर्धारित कचरा पाइंटों पर भी जो कचरा डल रहा है। उसे निगम व संवेदक की ट्रॉलियों के माध्यम से एकत्र कर कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर पहुचाजा जा रहा है। वहां से कचरा डम्परों के माध्यम से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर पहुंचाया जा रहा है। नगर निगम कोटा दक्षिण में किशोरपुरा में आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाया गया है। जहां से कचरे को कंटेनरों के जरिय ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। <br /><br /><strong>15.90 करोड़ का टेंडर</strong><br />निगम द्वारा नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर जमा पुराने कचरे के निस्तारण के लिए 20 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत कराया गया था। जिसमें से गत दिनों 15.90 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिस फर्म ने यह टेंडर लिया है। वह उस कचरे की छटनी कर उसमें से मिट्टी-गिट्टी, प्लास्टिक-पॉलिथन व कपड़े और अन्य सामान मशीनों से अलग-अलग कर उस कचरे के पहाड़ को वहां से हटाया जाएगा। हालांकि इस काम में करीब डेढ़ं साल का समय लगेगा। <br /><br /><strong>करवानी पड़ रही छंटनी</strong><br />वैसे तो घरों से निकलने वाले कचरे को गीला और सूखा अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था है। इसके लिए हर घर में दो-दो डस्टबीन होने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उसके बाद टिपरों में भी गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था है। लेकिन वहां भी ऐसा नहीं हो रहा है। इस कारण से कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर कचरे की छटनी और ट्रेचिंग ग्राइंड में कचरे की छटनी का अलग से टेंडर करना पड़ रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद भी नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे के पहाड़ लगे हुए हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />कचरा घरों से ही अलग-अलग निकले इसके लिए लोगों में जागरूकता होनी चाहिए। एक की जगह दो डस्टबीन रखने होंगे। साथ ही लोगों को सड़क पर कचरा नहीं डालने के लिए जागरूक किया जाएगा। शहर को साफ रखना ही प्राथमिकता है। उसके लिए मशीनरी व मेनुअल हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर</strong><br /><br /> लोगों में जागरूकता की कमी है। जिससे कचरा सड़कों पर ही डाला जा रहा है। शहर में सड़क किनारे जमे पुराने कचरे को साफ करने पर आधा शहर वैसे ही साफ हो जाएगा। कचरे को गीला-सूखा अलग-अलग करने के प्रयास किए जाएंगे।  जिससे कचरे की छटनी पर अलग से खर्चा नहीं करना पड़ेगा। शहर की सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 15:22:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मानसागर झील पर अभियान में इकट्ठा किया 57 किलो प्लास्टिक का कचरा</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण स्वच्छता अभियान के तहत वन विभाग और एवं जयपुर की स्वयंसेवी संस्था हॉप एण्ड बियोंड के तत्वाधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर उपलक्ष्य में मानसागर झील पर सफाई अभियान शुरू किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-plastic-waste-collected-in-campagin/article-11377"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cm-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पर्यावरण स्वच्छता अभियान के तहत वन विभाग और एवं जयपुर की स्वयंसेवी संस्था हॉप एण्ड बियोंड के तत्वाधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर उपलक्ष्य में मानसागर झील पर सफाई अभियान शुरू किया। सुबह 5 बजे से शुरू किए अभियान में 57 किलो प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा किया गया। यह कचरा जयपुर की सुन्दर झील मानसागर को न केवल सौन्दर्यविहीन कर रहा है, बल्कि जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट बना हुआ है।</p>
<p>इस अभियान का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इस अभियान से वन विभाग और स्वयंसेवी संस्था हॉप एण्ड बियोंड का उद्देश्य न केवल जयपुर बल्कि प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण एवं पारिस्थितिकी के संबंध में जागरूक करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jun 2022 13:01:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का: साजीदेहड़ा का आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन फिर हुआ शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[साजी देहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन के बंद होने का मुद्दा दैनिक नव’योति ने उठाया था। 16 मई के अंक में पेज 5 पर ‘ एक को संभाल नहीं पा रहे, नया कर रहे तैयार, शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि निगम द्वारा 5 करोड़ के आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन को नहीं संभाल पाए। जिससे वह बंद हो गया है। जबकि निगम द्वारा दूसरा ट्रांसफर स्टेशन ट्रांसोर्ट नगर में भी बनाया जा रहा है। उसके शुरु होने पर भी वही समस्या होगी। उसके बाद निगम अधिकारी हरकत में आए और ट्रेचिंग ग्राउंड की व्यवस्था सुधारने के बाद इस ट्रांसफर स्टेशन को फिर से चालू कर दिया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/modern-waste-transfer-station-of-sajidehra-started-again/article-10465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/modern-waste-transfer-station.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में लम्बे समय से बंद पड़ा आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन एक बार फिर से चालू हो गया है। उससे कचरे का परिवहन होने लगा है। साजी देहड़ा स्थित धार का अखाड़ा के पास नगर निगम का आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन काफी समय से बंद था। वहां से कचरे का परिवहन नहीं हो रहा था। यहां आने वाले कचरा नयागांव में नगर विकास न्यास के खाली भूखंड पर डाला जा रहा था। यहां से कचरे का परिवहन ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा डालने में कंटेनर के सीसी रोड से आगे तक जने में आ रही परेशानी को देखते हुए बंद किया था। लेकिन अब फिर से उस आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर कोटा दक्षिण क्षेत्र का कचरा ट्रॉलियों व टिपरों से आ रहा है। साथ ही वहां से कचरा कंटेनरों के माध्यम से हाईजनिक तरीके से नांता स्थित निगम के ट्रेचिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है। ट्रेचिंग ग्राउंड में कंटेनरों से कचरा डालने में जो समस्या आ रही थी। नगर निगम ने उसका समाधान करते हुए कचरे को वहां से हटाने के लिए एक अतिरिकत जेसीबी मशीन लगा दी है। <br /><br /><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि साजी देहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन के बंद होने का मुद्दा दैनिक नव’योति ने उठाया था। 16 मई के अंक में पेज 5 पर ‘ एक को संभाल नहीं पा रहे, नया कर रहे तैयार, शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि निगम द्वारा 5 करोड़ के आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन को नहीं संभाल पाए। जिससे वह बंद हो गया है। जबकि निगम द्वारा दूसरा ट्रांसफर स्टेशन ट्रांसोर्ट नगर में भी बनाया जा रहा है। उसके शुरु होने पर भी वही समस्या होगी। उसके बाद निगम अधिकारी हरकत में आए और ट्रेचिंग ग्राउंड की व्यवस्था सुधारने के बाद इस ट्रांसफर स्टेशन को फिर से चालू कर दिया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br /> साजी देहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कचरे का परिवहन फिर से शुरू कर दिया है। इसके लिए ट्रेंिचंग ग्राउंड में आ रही समस्या का समाधान करते हुए वहां एक अतिरिक्त जेसीबी मशीन लगाई है। जब कंटेनर कचरा खाली करता है तो वहां से जेसीबी उसे पीछे की तरफ हटा देती है। साथ ही वहां 100 गुणा 100 मीटर का एक प्लेटफार्म भी बनाया जा रहा है। जिससे कंटेनर आसानी से मुड़ सके। <strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 11:57:29 +0530</pubDate>
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                <title>गाड़ियों को चमकाने में बर्बाद हो रहा है 7 लाख लीटर पानी</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में 7 लाख लीटर से अधिक पानी सिर्फ गाड़ियों को चमकाने में ही बर्बाद हो रहा है। यदि घरों में वाहनों की धुलाई का आंकड़ा भी शामिल किया जाए, तो यह संख्या आठ लाख लीटर प्रतिदिन से ज्यादा हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-7-lakh-liter-water-is-being-waste-in-vehicles/article-8481"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46545465465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में 7 लाख लीटर से अधिक पानी सिर्फ गाड़ियों को चमकाने में ही बर्बाद हो रहा है। यदि घरों में वाहनों की धुलाई का आंकड़ा भी शामिल किया जाए, तो यह संख्या आठ लाख लीटर प्रतिदिन से ज्यादा हो सकती है। इसके बावजूद सरकार का ध्यान इस ओर नहीं है। यदि इस पानी का पीने में उपयोग लिया जाए, तो प्रतिदिन एक लाख लोगों की प्यास बुझ सकती है।</p>
<p><strong>रोजाना एक लाख लोगों की बुझ सकती है प्यास</strong><br />विभाग की ओर से शहर में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति औसतन 150 लीटर पानी के हिसाब से सप्लाई होती है। वहीं एक स्वस्थ्य व्यक्ति प्रतिदिन सात लीटर पानी भी पिए तो एक दिन की गाड़ियों में खर्च होने वाले पानी से शहर के एक लाख से अधिक लोगों की प्यास बुझ सकती है। वहीं चार हजार लीटर क्षमता वाले 175 टैंकर्स से कई कॉलोनियों को यह पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।</p>
<p><strong>ड्राई वॉश तकनीक है समाधान</strong><br />ड्राई वॉश तकनीक से वाहन पर एक विशेष प्रकार का फोम लगाकर कपडेÞ से साफ कर दिया जाता है। इससे सफाई भी पानी से की गई धुलाई जैसी होती है। हालांकि इस तकनीक में पानी का उपयोग नहीं किया जाता है। कार कंपनी के कुछ अधिकृत सर्विस सेंटर अब इस तकनीक को अपनाने लगे हैं <br />पर प्राइवेट सेंटर संचालक पानी से ही गाड़ियों को धो रहे हैं।</p>
<p><strong>घरों में धुलाई का आंकड़ा अलग</strong><br />वैसे वास्तव में पानी खर्च होने का आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। आमतौर पर लोग सर्विस सेंटर पर सिर्फ वाहनों की सर्विस के समय ही गाड़ियां धुलाते हैं। बाकि समय गाड़ी गंदी होने पर घरों में धो ली जाती है। शहर के कई पॉश इलाकों में तो रोजाना पाइप के जरिए चौपहिया वाहनों को नहलाया जाता है।</p>
<p><strong>यह है आंकड़ा</strong><br />प्रदेश में कुल 2319 905 दुपहिया  और 862574 चौपहिया वाहन हैं। औसतन एक दुपहिया वाहन वर्ष में चार बार और चौपहिया वाहन की वर्ष में एक बार सर्विस होती है। इसमें वाहनों की धुलाई भी शामिल है। दुपहिया वाहन की एक सर्विस में करीब 20 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि चौपहिया वाहन में 80 लीटर। हर माह सर्विस में कुल दो करोड़ लीटर से अधिक पानी काम में लिया जा रहा है।</p>
<p>गाड़ियों की सफाई में पानी काम नहीं लेना चाहिए। यदि धुलाई की ज्यादा ही आवश्यकता है तो ट्रीटेड पानी काम में लेना चाहिए। एक तरफ तो शहर में पेयजल का संकट है और दूसरी ओर लाखों लीटर पानी गाड़ियों की धुलाई में व्यर्थ बहाया जा रहा है।<br /><strong>- राजेन्द्र सिंह</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Apr 2022 11:48:51 +0530</pubDate>
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