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                <title>भारत हमेशा एक करीबी सहयोगी और बहुमूल्य साझेदार रहा है: मोहम्मद मुइज्जू</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और खासकर पीएम मोदी का धन्यवाद, मालदीव के साथ सुधरने लगे संबंध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-has-always-been-a-close-ally-and-valued-partner/article-87528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>माले। मालदीव और भारत के बीच पिछले कुछ समय से तनाव देखा गया है। लेकिन संबंधों में एक बार फिर सुधार देखा जा रहा है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत हमेशा एक करीबी सहयोगी और बहुमूल्य साझेदार रहा है। तथा उनके देश को जब भी जरूरत पड़ी है तो भारत की ओर से सहायता प्रदान की गई। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की मालदीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ मुलाकात हुई। मुलाकात की तस्वीर शेयर करते हुए राष्ट्रपति ने लिखा कि डॉ. जयशंकर से मिलकर खुशी हुई। मैं हमेशा मालदीव का समर्थन करने के लिए भारत सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद देता हूं। सुरक्षा, विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग के माध्यम से हमारे देशों को करीब लाते हुए हमारी स्थायी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। साथ मिलकर, हम इस क्षेत्र के लिए एक उज्जवल, अधिक समृद्ध भविष्य का निर्माण करते हैं।</p>
<p><strong>क्या बोले मोहम्मद मुइज्जू</strong><br />इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुइज्जू से मुलाकात कर दोनों देशों की जनता और क्षेत्र के लाभ के लिए भारत-मालदीव संबंधों को मजबूत बनाने की नई दिल्ली की प्रतिबद्धता दोहराई। मालदीव में 28 द्वीप क्षेत्रों में जलापूर्ति व सीवर सुविधाएं शुरू किए जाने से जुड़े कार्यक्रम को मुइज्जू ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ होंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कुल मिलाकर देश की समृद्धि में योगदान होगा। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मालदीव के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से ये परियोजनाएं महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। समारोह के दौरान राष्ट्रपति मुइज्जू ने एक बार फिर मालदीव और भारत के बीच ऐतिहासिक एवं निकट संबंधों को मजबूत बनाने की अपने प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत सरकार ने भारतीय एक्जिम बैंक के माध्यम से ऋण सुविधा के तहत इन परियोजनाओं का वित्तपोषण किया है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 12 Aug 2024 12:20:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>भारत में मालदीव चला रहा वेलकम इंडिया अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[ विजिट मालदीव के चेयरमैन और एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल्ला गियास ने भारतीय पर्यटकों को मालदीव आने का निमंत्रण दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/maldives-running-welcome-india-campaign-in-india/article-86363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>माले। मालदीव के जहरीले राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू जब पिछले साल राष्ट्रपति बने थे तो उन्होंने आते ही भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया था। इंडिया आउट अभियान चलाने वाले मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव की मदद के लिए मौजूद भारतीय सैनिकों को वापस भेजा। लेकिन 8 महीने से भी कम समय में अब उन्हीं की सरकार का प्रचार विभाग भारत में आकर भारतीयों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। </p>
<p>मालदीव मार्केटिंग एंड पब्लिक रिलेशंस कॉपोर्रेशन भारत के तीन शहरों में वेलकम इंडिया के नाम से रोड शो निकाल रहा है। इसका उद्येश्य भारतीयों को मालदीव के पर्यटन के लिए आकर्षित करना है। इसके लिए मालदीव के पर्यटन मंत्री इब्राहिम फैसल भारत पहुंच चुके हैं। उन्होंने मंगलवार को भारत के पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की। भारत में मालदीव का ये रोड शो ऐसे समय में हो रहा है जब द्वीपीय देश में भारतीय पर्यटकों की संख्या में तेजी से कमी आई है। पिछले दो साल से मालदीव के लिए भारत शीर्ष पर्यटन बाजार रहा है लेकिन इस साल इसमें तेजी से कमी आई है। इस साल पहले चार महीने में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में भारतीय पर्यटकों की संख्या में 42 फीसदी की कमी आई है। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाले मालदीव के लिए ये बड़ा झटका है। खासतौर पर जब साल 2023 में मालदीव पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की ही थी। यही वजह है कि मालदीव ने भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पहल की है।</p>
<p><strong>पांच दिनों तक चलेगा रोड शो<br /></strong>मालदीव के मीडिया पोर्टल अधाधू की रिपोर्ट के अनुसार, रोड शो नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू में पांच दिनों तक चलने वाले हैं। एमएमपीआरसी ने कहा कि इन कार्यक्रमों से संबंधित पर्यटन उद्योगों के हितधारकों के बीच संबंधों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। रोड शो के दौरान मालदीव के बीच, रिजॉर्ट, गेस्ट हाउस और सांस्कृतिक इतिहास का प्रचार किया जाएगा। इस रोड शो को मालदीव के व्यापारिक प्रतिष्ठान स्पॉन्सर कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मालदीव को 2 लाख भारतीय पर्यटकों की उम्मीद</strong><br />रोड शो का आयोजन मालदीव एसोसिएशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स एंट टूर ऑपरेटर और नेशनल होटल एंड गेस्टहाउस एसोसिएशन ऑफ मालदीव के सहयोग से किया जा रहा है। विजिट मालदीव के चेयरमैन और एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल्ला गियास ने भारतीय पर्यटकों को मालदीव आने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि साल के अंत तक 200,000 भारतीय पर्यटक मालदीव आएंगे। पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाले निलंबित मंत्रियों की घटना पर उन्होंने कहा, हम सुधार करने को तैयार हैं, भारतीयों का स्वागत करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 12:03:45 +0530</pubDate>
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                <title>China, म्यांमार से मालदीव तक भारत को घेरने में लगा हुआ है </title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान, मालदीव, बांग्लादेश और म्यांमार के सहारे भारत को चीन घेरने में लगा है। उसके सिविल की तरह दिखने वाले मिलिट्री बेस लगातार भारत के पड़ोसी देशों में बन रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-is-busy-encircling-india-from-myanmar-to-maldives/article-76845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/6633-copy14.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत दुनिया का ऐसा देश है, जो चारों ओर से शत्रुओं से घिरा है। अपना पड़ोसी चीन लगातार उसके लिए एक मुसीबत बनता जा रहा है। चीन भारत के साथ व्यापार कर रहा है, तो उसे ही चारों ओर से घेरता भी जा रहा है। पाकिस्तान, मालदीव, बांग्लादेश और म्यांमार के सहारे भारत को चीन घेरने में लगा है। उसके सिविल की तरह दिखने वाले मिलिट्री बेस लगातार भारत के पड़ोसी देशों में बन रहे हैं। इसके अलावा भारतीय सीमा के करीब चीन का इनफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एक बड़ा खतरा है। इसके बारे में एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं। रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी ने हाल में मीडिया को बताया है कि भारत को चीन के खिलाफ कितना एक्टिव होना होगा।</p>
<p><br />विंग कमांडर बख्शी ने सबसे पहले चेतावनी देते हुए कहा था कि चीन करगिल के दूसरी तरफ सड़क का निर्माण कर रहा है। इसके अलावा उसे पाकिस्तान से शक्सगान घाटी मिल गई है। जहां चीन रोड बना रहा है, वह सियाचिन ग्लेशियर के करीब है। यह चीन की ओर से एक बड़ा खतरा है। वहीं यहां की सड़क चीन को ग्वादार तक जोड़ेगी। चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के नाम पर चीन पीओके से लेकर अफगानिस्तान तक कंट्रोल चाहता है। अक्साई चिन पहले से चीन के पास है। ऐसे में उसके रोड निर्माण से हमें जाग जाना चाहिए। कमांडर ने आगे कहा, हम सिर्फ मीटिंग कर रहे हैं। कैलाश हाइट्स हमने वापस कर दी। हमारी नीतियों में अब बदलाव आना चाहिए।</p>
<p><br />विंग कमांडर बख्शी ने बातचीत में कहा कि हमारी ब्यूरोक्रेसी सरकार को ठीक एडवाइस नहीं करती है। इसीलिए आर्मी की बात सुनी नहीं जाती। हमारे यहां असैनिक अधिकारियों और सेना में इस बात की बहस होती है कि कौन गृह मंत्रालय से है और कौन रक्षा मंत्रालय से। हमारी यह लड़ाई देख चीन हंसता है। यही देख अब चीन ज्यादा आक्रामक रवैया अपना रहा है। उन्होंने आगे कहा, मालदीव में चीन आ गया है। म्यांमार के कोको आइलैंड में चीन बैठा है। जबकि वह हमारा था। श्रीलंका के हंबनटोटा के साथ उसे बांग्लादेश में भी बेस मिल गए हैं। यहां वह अपनी पनडुब्बी के मेंटीनेंस और रिपेयर का बेस बनाएगा, ताकि उसकी पनडुब्बियों को मरम्मत के लिए वापस चीन न जाना पड़े।</p>
<p>विंग कमांडर बख्शी ने आगे कहा कि चीन अपनी हर कमजोरी को खत्म करने में लगा है। मलक्का स्ट्रेट का वह विकल्प बनाने में लगा है। वह थाईलैंड के साथ मिलकर एक नहर बना रहा है। यह पूछे जाने पर कि आखिर सियाचिन पर चीन की नजर क्यों है, इसे लेकर विंग कमांडर बख्शी ने कहा, इसकी स्ट्रैटेजिक वैल्यू बहुत है। वहां से पीओके डायरेक्ट कनेक्ट हो सकता है। लद्दाख से पीओके तक उसके लिए यह एक फ्रंट बन जाएगा। इसके बाद पाकिस्तान पर कंट्रोल आसान होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 May 2024 11:25:39 +0530</pubDate>
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                <title>मालदीव में बढ़ सकती है कूटनीतिक चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[‘इंडिया-आउट’ अभियान के सहारे चुनावी कैंपेन चलाने वाले डॉ. मुइजू ने अपनी रैलियों में राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को भारत समर्थक बताते हुए उन पर हमला किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/diplomatic-challenge-may-increase-in-maldives/article-62780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/111-(8).png" alt=""></a><br /><p>मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजू ने अपने देश के मतदाताओं से किए वादे को पुरा करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पिछले दिनों यहां हुए राष्ट्रपति चुनाव में चीन समर्थक डॉ. मुइजू ने अपने चुनावी कैंपेन में अपने नागरिकों से देश की संप्रभुता के लिए भारतीय सैनिकों को वापस भेजने का वादा किया था। मालदीव के लोगों ने मुइजू की बात पर भरोसा किया। चुनाव परिणाम डा. मुइजू के पक्ष में रहा। चुनाव परिणामों के तत्काल बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा मुइजू ने कहा था कि वे अपने कार्यकाल के पहले ही दिन से भारतीय सैनिकों को वापस भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। अब, 17 नवंबर को पद ग्रहण करने के बाद उन्होंने भारतीय सैनिकों की वापस के प्रयास शुरू कर दिए है। मुइजू के शपथ ग्रहण समारोह भाग लेने के लिए मालदीव गए भारत के केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से औपचारिक मुलाकत के दौरान भी भारतीय सैनिकों की वापसी का मुद्दा उठा। इतना ही नहीं चीन समर्थक मुइजू ने पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शासनकाल में भारत और मालदीव के बीच हुए एक सौ से अधिक समझौतों की समीक्षा करने की बात भी कही है। हालांकि, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें जीत की बधाई देते हुए कहा था कि भारत मालदीव के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगा।<br /><br />‘इंडिया-आउट’ अभियान के सहारे चुनावी कैंपेन चलाने वाले डॉ. मुइजू ने अपनी रैलियों में राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को भारत समर्थक बताते हुए उन पर हमला किया था। मुइजू का कहना था कि उनकी सरकार मालदीव की संप्रभुता की संप्रभुता से समझौता कर किसी देश से करीबी नहीं बढ़ाएगी। दूसरी ओर मोहम्मद सोलिह मुइजू पर चीन समर्थक होने का आरोप लगा रहे थे। कुल मिलाकर कहा जाए तो इस बार मालदीव का राष्टÑपति चुनाव भारत और चीन के इर्द-गिर्द घुम रहा था। परिणाम चीन समर्थक मुइजू के पक्ष में रहा है। मुइजू के जीत के बाद भारत के भीतर यह  सवाल लगातार उठ रहा था कि मुइजू राष्टÑीय हितों को प्रथामिकता देते हुए भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ेंगे या अपने मतदाताओं के फैसले का सम्मान करते हुए चीन के पाले में खडेÞ होंगे। अब मुइजू के सैनिकों की वापस के निर्णय से लगता है कि वे दूसरे विकल्प पर ही आगे बढ़ेंगे।<br /><br />दरअसल, पिछले एक डेढ़-दशक से मालदीव हिन्द महासागर की प्रमुख शक्तियों भारत और चीन के बीच भू-राजनीतिक खींचतान का केन्द्र रहा है। साल 2013 में चीन समर्थक अब्दुल्ला यामीन के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत-मालदीव संबंधों में लगातार गिरावट आई। भारत के पारंपरिक शत्रु पाकिस्तान के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में किया गया समझौता हो या सैन्य हेलिकॉप्टर को वापस लौटाने का फरमान हो यामीन का हर एक फैसला भारत को असहज करने वाला था। भारत ने मालदीव को यह हेलिकॉप्टर राहत और बचाव कार्य के लिए दिए थे। यामीन ने ना सिर्फ चीनी की कंपनियों को पूरी छूट दे दी थी बल्कि मालदीव में कार्यरत भारतीय कंपनियों को वर्क परमिट जारी करना बंद दिया था जिसकी वजह से वहां उन परियोजनाओं का काम प्रभावित हुआ जिसमें भारत की भागीदारी थी। यामीन के बारे में तो यहां तक कहा जाता था कि वे अपने देश में भारत की किसी तरह की भागीदारी पंसद नहीं करते हैं। चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भी उनके कार्यकाल में किया गया था। हालांकि, 2018 में सत्ता पविर्तन के बाद राष्टÑपति मोहम्मद सोलिह ने इसे लागू नहीं किया। हो सकता है, अब मुइजू इसे लागू करवाने की दिशा में आगे बढ़े । चुनावी केम्पैन में वे इसे लागू करने की बात कह भी चुके है।<br /><br />लेकिन साल 2018 के राष्टÑपति चुनाव में भारत समर्थक इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के सत्ता में आने के बाद भारत-मालदीव संबंध फिर परवान चढ़ने लगे। सोलिह ने अपने कालखंड के दौरान ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति को लागू करते हुए भारत के लिए निवेश व कनेक्टिविटी के द्वार खोल दिए। नवंबर, 2018 में अपने शपथ ग्रहण समारोह मे हिस्सा लेने के लिए मोहम्मद सोलिह ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित कर भारत की ’नेबर फर्स्ट ’ नीति का समर्थन किया था। सोलिह दिसंबर 2018 में अपने पहले विदेशी दौरे पर भारत आए। अगस्त 2022 में मोदी और सोलिह ने 50 करोड़ डालर की लागत से तैयार होने वाली मालदीव की सबसे बडी कनेक्टिविटी परियोजना की नींव रखी थी। इसके अलावा आज भी मालदीव में पेयजल, अस्पताल, क्रिकेट स्टेडियम व सामुदायिक भवनों के निर्माण जैसी दर्जनों परियोजनाएं भारत की मदद से चल रही है। लेकिन अब सोलिह के सत्ता से रूखसत होने के बाद सवाल यह उठ रहा है कि सोलिह के कार्यकाल के दौरान बनी ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति समाप्त हो जाएगी जिसके संकेत मुइजू ने चुनाव परिणाम के तत्काल बाद अपने बयान में दिए है। अगर ऐसा होता है, तो निसंदेह हिन्द महासागर में भारत की पकड़ कमजोर हो सकती है।<br /><br />-डॉ. एन. के. सोमानी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Nov 2023 12:58:38 +0530</pubDate>
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                <title>मालदीव में मुइज्जू ने जीता राष्ट्रपति पद का चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[नौ सितंबर को राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में किसी भी उम्मीदवार ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले थे। उस दौरान मुइज्जू ने 46 प्रतिशत से अधिक और सोलिह 39 फीसदी मत हासिल किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/muizzu-wins-presidential-election-in-maldives/article-58486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/maldives-president.png" alt=""></a><br /><p>माले। मालदीव में प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम) और पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) गठबंधन के उम्मीदवार मोहम्मद मुइज्जू ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत दर्ज की है।</p>
<p>स्थानीय मीडिया द्वारा संकलित प्रारंभिक परिणाम में यह जानकारी दी गयी है। राष्ट्रपति पद के चुनाव में निवर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और मुइज्•ाू के बीच आमने-सामने की प्रतिस्पर्धा थी। गौरतलब है कि मुइज्जू , राजधानी शहर माले के मेयर भी हैं। प्रारंभिक परिणाम के अनुसार मुइज्जू ने मतगणना प्रक्रिया के दौरान बढ़त बना ली और अंत में 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए।</p>
<p>प्रारंभिक परिणाम के आधार पर मुइज्जू पांच साल के लिए मालदीव के नए राष्ट्रपति के रूप में काम करेंगे। उल्लेखनीय है कि नौ सितंबर को राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में किसी भी उम्मीदवार ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले थे। उस दौरान मुइज्जू ने 46 प्रतिशत से अधिक और सोलिह 39 फीसदी मत हासिल किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Oct 2023 14:28:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मालदीव से संबंध मजबूत हो, सतर्कता जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा बलों को 24 वाहन और एक नौ सैनिक पोत देने, इकसठ द्वीपों में स्थानीय पुलिस के बुनियादी ढांचे को विकसित करने जिनमें माले के कुछ स्थानीय द्वीपों को जोड़ने के लिए 6 Þ74 किलोमीटर लंबे पुल और सेतु लिंक निर्माण की परियोजना, ग्रेटर माले में चार हजार आवास इकाइयों के निर्माण के अलावा भारत दो हजार और आवासों के निर्माण के लिए उसकी वित्तीय सहायता देगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/maldives-should-be-strong-vigilance-is-necessary/article-18508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/p-6-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत-मालदीव संबंधों को और मजबूती देने के उद्देश् से पिछले सप्ताह मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद भारत आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई द्विपक्षीय बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए छह महत्वपूर्ण समझौते हुए। इस क्रम में भारत ने मालदीव में ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए दस करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है। सुरक्षा बलों को 24 वाहन और एक नौ सैनिक पोत देने, इकसठ द्वीपों में स्थानीय पुलिस के बुनियादी ढांचे को विकसित करने जिनमें माले के कुछ स्थानीय द्वीपों को जोड़ने के लिए 6 Þ74 किलोमीटर लंबे पुल और सेतु लिंक निर्माण की परियोजना, ग्रेटर माले में चार हजार आवास इकाइयों के निर्माण के अलावा भारत दो हजार और आवासों के निर्माण के लिए उसकी वित्तीय सहायता देगा। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता से बन रहे चिंताजनक हालात को देखते हुए दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की मजबूती अब अहम हो गई है। भारत की यह खासियत रही है कि वह आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी ‘पड़ोस पहले’ वाली विदेश नीति पर कायम है। इसके तहत वह क्षेत्र में बतौर बड़े भाई की भूमिका का बखूबी निर्वहन भी कर रहा है। गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की उसने हर संभव मदद की और आगे भी कर रहा है।</p>
<p>जहां तक सवाल है मालदीव की मदद करने का, तो भारत आजादी के बाद से निरंतर और कुशलता के साथ अपने पड़ोसी धर्म का निर्वहन करता आया है, लेकिन उसे यह भी समझना होगा कि सोलिह की यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब वहां की अंदरूनी सियासत में काफी खींचतान चल रही है। अगले साल वहां चुनाव भी होने वाले हैं। यह भी तय है कि इन चुनावों में मुख्य मुद्दा भारत और चीन के साथ संबंधों को लेकर बनने वाला है। ऐसे में भारत को मदद देने के साथ पूरी तरह से सतर्क रहना भी जरूरी है।</p>
<p>इसमें कोई दोराय नहीं है कि सोलिह सरकार की ‘इंडिया फर्स्ट नीति’ द्विपक्षीय संबंधों में एक वास्तविक गेम चेंजर रही है। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि वहां ऐसे भी तत्व सक्रिय हैं, जो चीन के समर्थक हैं। इसके अलावा इस्लामी कट्टरवाद की आड़ लेकर विपक्षी दल अपने मंसूबों को पूरा करने में लगे हैं। जून माह में वहां भारतीय दूतावास की ओर से माले में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कुछ इस्लामी कट्टरवादियों ने व्यवधान पैदा किया। वे अपने इरादों को कामयाब बनाने में किसी भी हद तक जा सकते हैं। सोलिह सरकार और भारत के बीच हुए रक्षा संबंधों के खिलाफ  पूर्व राष्टÑपति अब्दुल्ला यामीन ने ‘इंडिया आउट अभियान’ छेड़ दिया था। जिस पर सोलिह सरकार ने भारत विरोधी प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है। उन्होंने इस अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। सरकार का कहना था कि संविधान के तहत हर किसी को विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली हुई है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि एक महत्वपूर्ण पड़ोसी के खिलाफ जहर उगला जाए और उसके खिलाफ षड़यंत्र किया जाए। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। लेकिन मालदीवियन पार्टी के भीतर चल रहे अंतर्द्वंद्व में इन दिनों सोलिह और नदीम आमने-सामने हैं। इस क्रम में एक ओर उठाया गया कदम, पूर्व राष्ट्रपति और भारत समर्थक नेता मोहम्मद नशीद ने ‘इंडिया आउट अभियान’ के उन बैनर्स को भी हटाने की मांग रखी थी जो कि पूर्व राष्ट्रपति यामीन के घर के बाहर लगे थे, जिन्हें बाद में मालदीव पुलिस ने हटा दिया था। इस भारत विरोधी ‘इंडिया आउट अभियान’ को पिछले साल के अंत में, जेल से छूटने के बाद पूर्व राष्ट्रपति यामीन ने छेड़ रखा था। वे अपने शासन में चीन समर्थक और ‘चाइना फर्स्ट की नीति’ के पोषक रहे हैं। वे इस अभियान के जरिए अपने समर्थन में माहौल बनाने की भरपूर कोशिशों में अब भी जुटे हुए हैं।</p>
<p>पिछले सप्ताह दोनों नेताओं के बीच हुए वार्ता के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंद महासागर क्षेत्र में अंतरराष्टÑीय अपराध, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के गंभीर खतरे की ओर ध्यान खींचा है। तो मालदीव के राष्ट्रपति सोलिह ने मालदीव को सदैव भारत का सच्चा दोस्त बताते हुए क्षेत्र में शांति और विकास में सहयोग में उसकी अहम भूमिका भूमिका बताई। वहीं उन्होंने कोविड संकट दौरान भारत की ओर से बरते गए उदार रवैये के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। यह भी बता दें कि कुछ माह पूर्व ही भारत के नए चीफ ऑफ नेवल स्टाफ  आर. हरी कुमार ने कार्यभार संभालते ही अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मालदीव को ही चुना था। यात्रा दौरान वे राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स से मिले थे।</p>
<p><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 10:44:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पीएम मोदी ने की मालदीव के राष्ट्रपति सोलिह से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बैठक के बाद कहा कि पीएम मोदी ने भारत की 'पड़ोस पहले' नीति में एक प्रमुख भागीदार  मालदीव के राष्ट्रपति का तहे दिल से स्वागत  किया। दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की व्यापक संभावनाओं के बीच प्रधानमंत्री और मालदीव के राष्ट्रपति की मुलाकात हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-meets-maldivian-president-solih/article-17447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/untitled-2-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने मंगलवार को हैदराबाद हाउस में मुलाकात करके  द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।सोलिह एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ सोमवार को भारत की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं।<br /><br />विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बैठक के बाद कहा कि पीएम मोदी ने भारत की 'पड़ोस पहले' नीति में एक प्रमुख भागीदार  मालदीव के राष्ट्रपति का तहे दिल से स्वागत  किया। दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की व्यापक संभावनाओं के बीच प्रधानमंत्री और मालदीव के राष्ट्रपति की मुलाकात हुई।</p>
<p>भारतीय प्रवक्ता ने कहा, ''यह कहने की जरूरत नहीं है कि मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का प्रमुख पड़ोसी देश है और भारत की 'पड़ोस पहले' नीति में एक विशेष स्थान रखता है।" उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच साझेदारी से सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 19:17:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीन के सस्ते कर्ज-जाल में फंस खुद को बर्बाद न करें अन्य देश, श्रीलंका, मालदीव और पाकिस्तान हैं इसके उदाहरण</title>
                                    <description><![CDATA[आर्थिक विकास के लिए चीन पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/do-not-waste-yourself-trapped-in-china-s-cheap-debt-trap--other-countries-are-sri-lanka--maldives-and-pakistan--examples-of-this/article-7849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/china-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका ने विश्व के देशों को चीन के सस्ते कर्ज के जाल में न फंसने की चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा है कि मौजूदा समय में श्रीलंका और पाकिस्तान का संकट समूची दुनिया के सामने है। ये दोनों ही चीन के कर्ज के जाल में फंसे हैं। मालदीव भी चीन के कर्ज जाल में है। इसके अलावा ये दोनों ही पूरे विश्व के लिए एक साफ संकेत है कि इसका असर किस कदर बुरा हो सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक विकास के लिए चीन पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान और श्रीलंका है। दोनों ही देश आर्थिक तौर पर बदहाली का सामना कर रहे हैं।<br /><br /><strong>केवल संयोग नहीं</strong><br />ग्लोबल स्ट्रेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये केवल एक संयोग मात्र नहीं है कि इन दोनों ने ही आर्थिक विकास के नाम पर चीन से बड़ा कर्ज लिया था। इस दौरान ये पूरी तरह से खामोश रहे। इनकी नींद तब खुली जब पूरी दुनिया में आर्थिक संकट देखा जाने लगा। इसकी एक बड़ी वजह विश्व में फैली कोरोना महामारी थी, जिसकी शुरूआत चीन की लैब से हुई थी। चीन के कर्ज के जाल की यही नीति का ग्लोबल पैटर्न देखा जा सकता है।<br /><br /><strong>पाक को कर्ज का मकसद</strong><br />पाकिस्तान ने चीन से बड़ा कर्ज ले रखा है। चीन पाकिस्तान इकनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का एकमात्र मकसद पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट से शिंजियांग को जोड़ना था। इस रिपोर्ट में चीन के कर्ज के जाल पर कई जानकारों ने अपनी राय भी दी है कहा है कि इसका मकसद पाकिस्तान के रणनीति सस्थानों पर कब्जा जमाना भी था। चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को चाइनीज बैंक से फाइनेंस किया गया था।<br /><br /><strong>श्रीलंका का बुरा हाल</strong><br />हांगकांग पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बीच श्रीलंका की यदि बात की जाए तो कोरोना महामारी ने यहां के पर्यटन उद्योग की कमर तोड़ने का काम किया, जिसका यहां की अर्थव्यवस्था में एक अहम योगदान रहा है। पर्यटन यहां पर विदेशी मुद्रा कमाने का अहम जरिया रहा है। चीन के कर्ज के जाल में फंसकर श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार खाली होता चला गया। पाकिस्तान चीन का पुराना साझेदार है और साथ ही वो इस कर्ज के जाल में फंसे देश का एक उदाहरण भी है। रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान दुनिया के बड़े कर्जदारों में दसवें नंबर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 15:05:55 +0530</pubDate>
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