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                <title>सुभाष गर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव : विपक्ष का जमकर हंगामा और बहिर्गमन, प्रस्ताव को द्वेषतापूर्ण राजनीति का बताया उदाहरण </title>
                                    <description><![CDATA[सत्तापक्ष विधायकों ने गलत तथ्यों को पेश करने पर प्रस्ताव का समर्थन किया, वहीं विपक्षी दलों ने सरकार के प्रस्ताव को द्वेषतापूर्ण राजनीति का उदाहरण बताते हुए विरोध जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/examples-of-the-oppositions-fierce-uproar-and-externality-proposal-as/article-106188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/rajasthan-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार की तरफ से विधानसभा में भरतपुर विधायक डॉ. सुभाष गर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने पर सदन में हंगामा हो गया और सदन से बहिर्गमन किया। सत्तापक्ष विधायकों ने गलत तथ्यों को पेश करने पर प्रस्ताव का समर्थन किया, वहीं विपक्षी दलों ने सरकार के प्रस्ताव को द्वेषतापूर्ण राजनीति का उदाहरण बताते हुए विरोध जताया।</p>
<p>सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने शून्यकाल के दौरान विधायक डॉ. सुभाष गर्ग के बारे में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि गर्ग ने सदन के अंदर भरतपुर जिले में लोहागढ़ किले में सड़कें चौड़ी करने के नाम पर मकानों के टूटने की तथ्यहीन सूचना पेश की। इससे वंहा लोगों में गफलत बन गई और लोगों को मकान टूटने का डर सता रहा है। प्रस्ताव के बाद सत्तापक्ष विधायकों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी सहमति दी। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा करते हुए कहा कि विधायक जनता से मिले फीडबैक आधार पर मुद्दा उठाते हैं। जनहित के मामलों में अधिकांश विधायक तथ्यों के सबूत नहीं मांगते हैं, लिहाजा सरकार विपक्षी सदस्यों के खिलाफ गलत परंपरा डाल रही है। सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि विधायक ने गलत तथ्य देकर लोगों को गुमराह करने का काम किया है। सरकार ने सोच समझ कर यह प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि कोई विधायक इस तरह का प्रश्न लगाते हैं तो सरकार जवाब देकर सवाल निरस्त कर सकती है। </p>
<p>विधायक सुभाष गर्ग ने कहा कि प्रशासन में केवल नगर निगम या जिला प्रशासन नहीं आता। आर्कियोलॉजी विभाग भी आता है। इस मामले में बहुत बड़े बड़े लोग शामिल हैं, इसलिए जांच होने पर उनकी पोल खुल जाएगी। स्पीकर ने दोनों पक्षों की बातचीत सुनने के बाद प्रस्ताव को विशेषाधिकार हनन समिति को भेजने की अनुशंषा पर वोटिंग कराई और प्रस्ताव पास होने के बाद समिति को भेजने का निर्णय लिया गया। इस पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और सदन से बहिर्गमन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 15:02:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>चीन के सस्ते कर्ज-जाल में फंस खुद को बर्बाद न करें अन्य देश, श्रीलंका, मालदीव और पाकिस्तान हैं इसके उदाहरण</title>
                                    <description><![CDATA[आर्थिक विकास के लिए चीन पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/do-not-waste-yourself-trapped-in-china-s-cheap-debt-trap--other-countries-are-sri-lanka--maldives-and-pakistan--examples-of-this/article-7849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/china-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका ने विश्व के देशों को चीन के सस्ते कर्ज के जाल में न फंसने की चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा है कि मौजूदा समय में श्रीलंका और पाकिस्तान का संकट समूची दुनिया के सामने है। ये दोनों ही चीन के कर्ज के जाल में फंसे हैं। मालदीव भी चीन के कर्ज जाल में है। इसके अलावा ये दोनों ही पूरे विश्व के लिए एक साफ संकेत है कि इसका असर किस कदर बुरा हो सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक विकास के लिए चीन पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान और श्रीलंका है। दोनों ही देश आर्थिक तौर पर बदहाली का सामना कर रहे हैं।<br /><br /><strong>केवल संयोग नहीं</strong><br />ग्लोबल स्ट्रेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये केवल एक संयोग मात्र नहीं है कि इन दोनों ने ही आर्थिक विकास के नाम पर चीन से बड़ा कर्ज लिया था। इस दौरान ये पूरी तरह से खामोश रहे। इनकी नींद तब खुली जब पूरी दुनिया में आर्थिक संकट देखा जाने लगा। इसकी एक बड़ी वजह विश्व में फैली कोरोना महामारी थी, जिसकी शुरूआत चीन की लैब से हुई थी। चीन के कर्ज के जाल की यही नीति का ग्लोबल पैटर्न देखा जा सकता है।<br /><br /><strong>पाक को कर्ज का मकसद</strong><br />पाकिस्तान ने चीन से बड़ा कर्ज ले रखा है। चीन पाकिस्तान इकनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का एकमात्र मकसद पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट से शिंजियांग को जोड़ना था। इस रिपोर्ट में चीन के कर्ज के जाल पर कई जानकारों ने अपनी राय भी दी है कहा है कि इसका मकसद पाकिस्तान के रणनीति सस्थानों पर कब्जा जमाना भी था। चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को चाइनीज बैंक से फाइनेंस किया गया था।<br /><br /><strong>श्रीलंका का बुरा हाल</strong><br />हांगकांग पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बीच श्रीलंका की यदि बात की जाए तो कोरोना महामारी ने यहां के पर्यटन उद्योग की कमर तोड़ने का काम किया, जिसका यहां की अर्थव्यवस्था में एक अहम योगदान रहा है। पर्यटन यहां पर विदेशी मुद्रा कमाने का अहम जरिया रहा है। चीन के कर्ज के जाल में फंसकर श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार खाली होता चला गया। पाकिस्तान चीन का पुराना साझेदार है और साथ ही वो इस कर्ज के जाल में फंसे देश का एक उदाहरण भी है। रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान दुनिया के बड़े कर्जदारों में दसवें नंबर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 15:05:55 +0530</pubDate>
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