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                <title>plastic - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अलवर में भीषण हादसा: प्लास्टिक फैक्ट्री में आग लगने से करोड़ों का नुकसान, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी फेज-1 स्थित प्लास्टिक दाना निर्माण फैक्ट्री में शनिवार रात भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि बुझाने के लिए खुशखेड़ा और तिजारा से कई दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ीं। घटना में करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/horrific-accident-in-alwar-due-to-fire-in-plastic-factory/article-154859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/fire.png" alt=""></a><br /><p>अलवर। राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित गिरधर रोलरेप प्राइवेट लिमिटेड में शनिवार को रात में भीषण आग लग गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार आग रात करीब साढ़े बजे लगी और कुछ ही समय में पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयावह थी कि इसकी लपटें शहर में दूर-दूर तक दिखाई दे रही थीं। कंपनी में प्लास्टिक दाना निर्माण का काम होता है। आग की सूचना मिलते ही भिवाड़ी नगर परिषद और रीको फायर विभाग की दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हालांकि आग की तीव्रता अधिक होने के कारण शुरुआती प्रयासों में आग पर काबू नहीं पाया जा सका।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि स्थिति गंभीर होने पर तिजारा, खैरथल और खुशखेड़ा सहित आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से अतिरिक्त दमकल वाहन बुलाए गए। कई फायर ब्रिगेड की गाड़ियां देर रात तक आग बुझाने में जुटी रही। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आग पर पूरी तरह नियंत्रण मिलने के बाद ही घटना की जांच शुरू की जाएगी। अब तक किसी प्रकार की जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है। सू्त्रों ने बताया कि फैक्ट्री में लगी आग से करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा आग बुझने के बाद ही सामने आ सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 18:40:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>असर खबर का - पॉलिथीन पर सख्ती शुरू, निगम ने पहले ही दिन दो दुकानों पर ताला जड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिबंधित के बाद भी शहर में पॉलिथीन का धडल्ले से उपयोग जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---strict-action-begins-against-those-using-and-selling-polythene--municipal-corporation-team-seizes-two-shops-on-the-first-day/article-129372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित करने के बाद भी शहर में धडल्ले से सिंगल यूज प्लास्टिक (पॉलिथीन)  का उपयोग व बिक्री करने वालों पर नगर निगम ने सख्ती करना शुरु कर दिया है। निगम टीम ने शुक्रवार को पहले ही दिन दो दुकानों को सीज किया है। नगर निगम कोटा दक्षिण के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा के आदेश की पालना में शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने शहर में दुकानों का सर्वे किया।  </p>
<p>इस दौरान  सूचना मिली कि धानमंडी स्थित दो दुकानों में प्लास्टिक का अवैध माल भरा हुआ है। इसकी पुष्टि करने के बाद दुकान के किराएदार को मौके पर बुलाया गया लेकिन वह नहीं आए। जबकि उन दुकानों के मालिक मौके पर पहुंच गए थे। वहां अवैध रूप से पॉलिथीन का माल भरा हुआ था। जिसे देखते हुए दोनों दुकानों को सीज किया गया है। सीएफओ व्यास ने बताया कि शहर में जहां भी सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा। वहां उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  इस मौके पर सहायक अभियंता तौसिफ खान स्वास्थ्य निरीक्षक नासिर व अतिक्रमण की टीम मौजूद रही।</p>
<p><strong> एक दिन पहले गठित की टीम </strong><br /> जिला कलक्टर द्वारा शहर में किए गए औचक  निरीक्षण के दौरान कोटा दक्षिण निगम आयुक्त को सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उन निर्देशों की पालना में आयुक्त ने गुरुवार को ही टीम गठित कर दी। जिसमें सीएफओ राकेश व्यास, सहायक अभियंता तौसिफ खान, स्वास्थ्य अधिकारी रिचा गौतम, संबंधित कनिष्ठ अभियंता क्षेत्र के अनुसार, फायरमैन मुकेश तंवर, संबंधित स्वास्थ्य निरीक्षक और अतिक्रमण दस्ता को शामिल किया गया है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />सरकार द्वारा प्रतिबंधित करने के बाद भी शहर में पॉलिथीन का धडल्ले से उपयोग होने के बारे में दैनिक नव’योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 9 सितम्बर को पेज 4 पर‘ बाजार में धडल्ले से हो रहा पॉलिथीन का उपयोग’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस समाचार में शहर की हकीकत दिखाई गई थी। उस समय निगम अधिकारियों ने शीघ्र ही कार्यवाही का दावा किया था।  अब जिला कलक्टर ने जब सख्ती से कार्यवाही करने का आदेश दिया तो निगम अधिकारी हरकत में आए और कार्यवाही के लिए न केवल टीम गठित की वरन् कार्रवाई भी तुरंत शुरू कर दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 15:24:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्लास्टिक और पृथ्वी की शादी नाटक ने जीता प्रथम पुरस्कार, देवांश, हनु , निलाक्ष, रक्षित के अभिनय ने खूब तालियां बटोरी</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों का आयोजन किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/plastic-and-prithvis-wedding-drama-won-the-first-prize-devansh/article-116660"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित नाटक प्रतियोगिता में देवांश गोधा, नीलाक्ष अधीकारी, हनु चौहान और रक्षित शर्मा की टीम ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त  हासिल किया। </p>
<p>इस प्रतियोगिता का उद्देश्य समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। देवांश की टीम द्वारा प्रस्तुत किए गए नाटक का विषय था प्लास्टिक और पृथ्वी की शादी, जिसमें यह दर्शाया गया कि किस प्रकार प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पृथ्वी के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। इस भावनात्मक और प्रभावशाली प्रस्तुति में प्लास्टिक से होने वाले दुष्परिणामों को नाटकीय अंदाज़ में दिखाया गया, जिसने दर्शकों के साथ-साथ निर्णायकों को भी अत्यंत प्रभावित किया। नाटक में प्लास्टिक का किरदार निभाया देवांश ने धरती का नीलाक्ष ने हनु चौहान ने सूत्रधार का और रक्षित ने शादी करने वाले पंडित का। यह आयोजन एक सशक्त संदेश के साथ संपन्न हुआ कि "प्लास्टिक से नाता तोड़ो, प्रकृति से रिश्ता जोड़ो।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jun 2025 13:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चबाते-चबाते प्लास्टिक निगल रहे हैं हम!</title>
                                    <description><![CDATA[सुपरमार्केट से लेकर सड़क किनारे की छोटी दुकानों तक, रंग-बिरंगे पैकेट्स में सजी यह छोटी-सी चीज हर किसी को अपनी ओर खींच रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/we-are-swallowing-plastic-chewing-plastic/article-109514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>भारत में च्युइंग गम का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग तक, हर कोई इसे चबाने में मशगूल है। सुपरमार्केट से लेकर सड़क किनारे की छोटी दुकानों तक, रंग-बिरंगे पैकेट्स में सजी यह छोटी-सी चीज हर किसी को अपनी ओर खींच रही है। कोई इसे तनाव दूर करने के लिए चबाता है, कोई मुंह की ताजगी के लिए, तो कोई बस आदतन इसका इस्तेमाल करता है। भारत में इसकी लोकप्रियता का कारण इसकी सस्ती कीमत, आसान उपलब्धता और शहरी जीवन की भागदौड़ में तुरंत राहत का वादा है। टीवी विज्ञापन इसे कूल और ट्रेंडी बनाकर पेश करते हैं, जिससे युवा इसे स्टाइल का हिस्सा मानने लगे हैं, लेकिन इस मासूम-सी दिखने वाली चीज के पीछे चौंकाने वाला सच छिपा है, जिसे हाल ही में सैन डिएगो में अमेरिकन केमिकल सोसाइटी की मीटिंग में पेश की गई एक स्टडी ने उजागर किया। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजिल्स के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में च्युइंग गम के प्रभाव को गहराई से जांचा। नतीजे हैरान करने वाले थे। एक ग्राम च्युइंग गम में औसतन 100 माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए और कुछ में तो यह संख्या 600 से भी ज्यादा थी। एक औसत च्युइंग गम स्टिक का वजन करीब 1.5 ग्राम होता है। अगर इसे नियमित रूप से चबाया जाए, तो हर साल लगभग 30,000 माइक्रोप्लास्टिक कण हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यह आंकड़ा सोचने पर मजबूर करता है कि हम अनजाने में अपनी सेहत के साथ क्या कर रहे हैं। </p>
<p>माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के सूक्ष्म कण होते हैं, जो आज पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। च्युइंग गम में यह कहां से आता है, इसका जवाब है गम बेस, जो इसे चबाने योग्य और लचीला बनाता है। गम बेस में पॉलीविनाइल एसीटेट और पॉलीइथाइलीन जैसे सिंथेटिक प्लास्टिक यौगिक होते हैं, जिनका इस्तेमाल प्लास्टिक की बोतलों और पैकेजिंग में भी होता है। जब हम गम चबाते हैं, तो ये यौगिक छोटे-छोटे कणों में टूट जाते हैं, लार के साथ मिलते हैं और पाचन तंत्र में पहुंच जाते हैं। यह सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। इन माइक्रोप्लास्टिक कणों का सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। ये पाचन तंत्र में सूजन और गैस्ट्रिक समस्याएं पैदा कर सकते हैं। शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित कर हार्मोन असंतुलन का कारण बन सकते हैं। टॉक्सिन्स को बढ़ाकर मोटापा और मेटाबॉलिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। कुछ शोध यह भी संकेत देते हैं कि ये कण रक्तप्रवाह में मिलकर मस्तिष्क और हृदय के कार्यों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, च्युइंग गम में मौजूद कृत्रिम मिठास और प्रिजर्वेटिव्स भी लंबे समय तक इस्तेमाल से नुकसानदेह हो सकते हैं। ज्यादा चबाने से जबड़े में दर्द और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी आम हैं। </p>
<p>भारत में स्थिति और चिंताजनक है, क्योंकि यहां इसके नुकसानों को लेकर जागरूकता बेहद कम है। सरकार ने भी इस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया है। ग्रामीण इलाकों में तो लोग इसके खतरों से पूरी तरह अनजान हैं। शहरी युवा इसे फैशन मानते हैं, बच्चे इसे खिलौने की तरह इस्तेमाल करते हैं और व्यस्त प्रोफेशनल्स इसे तनाव कम करने का शॉर्टकट समझते हैं। लेकिन इसकी कीमत हमारी सेहत को चुकानी पड़ रही है। पर्यावरण पर भी इसका असर कम खतरनाक नहीं है। चबाने के बाद लोग इसे सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर थूक देते हैं। प्लास्टिक होने की वजह से यह आसानी से विघटित नहीं होता, जिससे कचरे की समस्या बढ़ती है। जानवर इसे निगलकर बीमार पड़ सकते हैं। भारत जैसे देश में जहां कचरा प्रबंधन पहले ही चुनौती है, यह एक और बोझ बन रहा है। क्या इसका कोई विकल्प है पूरी तरह छोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सावधानी और समझदारी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ कंपनियां अब प्राकृतिक राल से बने च्युइंग गम बना रही हैं, जिनमें प्लास्टिक नहीं होता। </p>
<p>भारत में पारंपरिक रूप से सुपारी, इलायची या लौंग चबाने की आदत रही है, जो सेहत के लिए बेहतर है। इसे रोज की आदत बनाने के बजाय कभी-कभार इस्तेमाल करना चाहिए। बच्चों और युवाओं को इसके जोखिमों के बारे में बताना जरूरी है। सरकार को चाहिए कि च्युइंग गम के पैकेट्स पर इसके घटकों और खतरों की जानकारी देना अनिवार्य करे। च्युइंग गम का बढ़ता चलन एक ओर आधुनिकता का प्रतीक है, तो दूसरी ओर यह हमारी सेहत और पर्यावरण के लिए चेतावनी है। यह समय है कि हम इसकी चमक-दमक से बाहर निकलें और इसके असल प्रभावों पर नजर डालें। अगली बार जब आप इसे चबाने के लिए हाथ बढ़ाएं, तो सोचें क्या यह छोटी-सी आदत लंबे समय में बड़ा नुकसान तो नहीं पहुंचा रही है, जागरूकता और संयम ही इस क्रेज को संतुलित करने का रास्ता है।</p>
<p><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Apr 2025 11:39:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए कार्य योजना तैयार, पहले चरण में एक हजार ग्राम पंचायतों का चयन</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीण क्षेत्र में लगने वाले मेलों, पदयात्राओं. धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए सरकार ने कार्य योजना तैयार की है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/action-plan-to-reduce-the-use-of-plastic-prepared-selection/article-105370"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/55.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ग्रामीण क्षेत्र में लगने वाले मेलों, पदयात्राओं. धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए सरकार ने कार्य योजना तैयार की है। योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत मे बर्तन बैंक स्थापित किया जाएगा। प्रथम चरण में एक हजार ग्राम पंचायतों को एक-एक लाख रूपए के बर्तन उपलब्ध करवाए जाएंगे।</p>
<p>बीजेपी विधायक अजय सिंह के एक सवाल के जवाब में सरकार की ओर से ये जानकारी दी गई है। सरकार की ओर से बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्र में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए प्लास्टिक के स्थान पर स्टील के बरतनों का प्रयोग करने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत मे बर्तन बैंक स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए प्रथम चरण में एक हजार ग्राम पंचायतों को एक-एक लाख रूपये के बर्तन उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटान हेतु पंचायत समिति स्तर पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेन्ट यूनिट स्थापित की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 14:20:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानव शृंखला बनाकर बच्चों ने प्लास्टिक फ्री सिटी बनाने का दिया संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[सिटी में मॉर्निंग वाक के लिए आए मॉर्निंग वाकर्स सहित स्थानीय लोगों ने मानव शृंखला बनाकर प्लास्टिक फ्री सिटी एवं जयपुर शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने का संकल्प लिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/childrens-give-the-message-of-plastic-free/article-91672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर को साफ एवं स्वच्छ बनाने की मुहिम में आमजन को जोड़ने के लिए नगर निगम जयपुर ग्रेटर की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छता ही सेवा अभियान के दौरान मानसरोवर स्थित सिटी में दस से भी अधिक स्कूलों के बच्चों के साथ ही स्थानीय लोगों ने मानव शृंखला बनाई। मानसरोवर जोन क्षेत्र के वार्ड 75 स्थित सिटी पार्क में मानव शृंखला कार्यक्रम स्कूलों के बच्चों, समितियों के अध्यक्ष, पार्षदों, सिटी में मॉर्निंग वाक के लिए आए मॉर्निंग वाकर्स सहित स्थानीय लोगों ने मानव शृंखला बनाकर प्लास्टिक फ्री सिटी एवं जयपुर शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने का संकल्प लिया। </p>
<p>स्कूली बच्चों ने मानव शृंखला के माध्यम से एसएमएस एवं  स्वच्छता ही सेवा का प्रतिरूप बनाया। कार्यक्रम में महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने स्वच्छता के संबंध में स्कूली बच्चों से सवाल जवाब भी किए तथा वहां मौजूद स्कूली बच्चों एवं आमजन से करीब एक हजार फार्म भरवाए गए, जिसमें सभी को स्वच्छता संबंधी एक बुरी आदत छोड़ने और एक अच्छी आदत अपनाने का संकल्प लिया जाना था। महापौर डॉ. सौम्या ने सभी को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। महापौर ने इस अवसर पर पर कहा कि नगर निगम ग्रेटर द्वारा स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े के तहत प्रतिदिन नवाचार किया जा रहा है और आम जन को कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। शहर को स्वच्छ रखने में शहर वासियों का अहम योगदान है इसलिए प्रत्येक शहर वासी स्वच्छता के लिए अपना योगदान अवश्य दें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2024 11:24:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> अमेरिका में एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध, उल्लंघन करने पर जुर्माना </title>
                                    <description><![CDATA[नए नियमों के तहत शहर में रेस्तरां और डिलीवरी सेवाओं को टेकआउट और डिलीवरी ऑर्डर में प्लास्टिक के पैकेट या अतिरिक्त कंटेनर प्रदान करने की अनुमति नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ban-at-the-plastic-in-america--fine-at-violations/article-53282"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/news-(1).png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका के सबसे अधिक आबादी वाले शहर न्यूयॉर्क में टेकआउट ऑर्डर में एकल उपयोग प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। नए नियमों के तहत शहर में रेस्तरां और डिलीवरी सेवाओं को टेकआउट और डिलीवरी ऑर्डर में प्लास्टिक के पैकेट या अतिरिक्त कंटेनर प्रदान करने की अनुमति नहीं है। </p>
<p>एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक कचरे को कम करने के उद्देश्य से नए उपाय इस साल की शुरुआत में न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स द्वारा हस्ताक्षरित स्किप द स्टफ कानून के तहत लागू हुए हैं। प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों को दंड के तौर पर पहले अपराधी के लिए 50 अमेरिकी डॉलर, दूसरे के लिए 150 डॉलर और तीसरे के लिए 250 डॉलर जुर्माना देना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2023 12:00:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्लास्टिक से हो रहा पर्यावरण निरंतर बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[वास्तव में सच तो यह है कि आजकल पहाड़ प्रदूषण मुक्त क्षेत्र नहीं रह गए हैं और समय के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप बहुत अधिक होने के  कारण प्रदूषण भी बढ़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/environment-getting-sick-due-to-plastic/article-48721"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(7)4.png" alt=""></a><br /><p>बढ़ती आबादी और विकास के बीच अब धीरे-धीरे पहाड़ों के स्वास्थ्य को लगातार खतरा बढ़ता चला जा रहा है। पहाड़ों में अंधाधुंध कटान, जंगलों की आग (दावानल) और शहरों में बढ़ता प्रदूषण पर्यावरण की सेहत के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। मिट्टी, पानी और हवा पर इसका बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है। कटते पहाड़ों से जहां भूस्खलन जोन बढ़ रहे हैं। वहीं प्रदूषण से धरती की आबोहवा दूषित होने के साथ ही आग भी हमारे ईको सिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) को लगातार प्रभावित कर रही है। प्लास्टिक कचरा पहाड़ों के लिए एक अन्य बड़े खतरे के रूप में उभर रहा है। पहाड़ी क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के कारण यहां बहुत से लोग हर साल घूमने-फिरने के लिए आते हैं। विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद हिल स्टेशन ही होते हैं।</p>
<p>वास्तव में सच तो यह है कि आजकल पहाड़ प्रदूषण मुक्त क्षेत्र नहीं रह गए हैं और समय के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप बहुत अधिक होने के  कारण प्रदूषण भी बढ़ा है। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर भी कचरा जमा होने लगा है। आज यदि देश के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर नजर दौड़ाएं तो हम यह पाएंगे कि पर्यटन स्थलों पर आज सबसे अधिक प्लास्टिक कचरा है। हैरत यह है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए आज कोई भी गंभीर नजर नहीं आता हैं। हिमाचल सरकार ने प्रदेश में पॉलीथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, उत्तराखंड में भी प्लास्टिक पर प्रतिबंध है, लेकिन गंभीर है कि प्लास्टिक का कचरा पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है। यहां जानकारी देना चाहूंगा कि देश में 1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक की चीजों को बनाने, बेचने और इस्तेमाल करने पर सरकार द्वारा पाबंदी लगाई गई है। इस पाबंदी का मतलब इन चीजों को बनाना, आयात करना, जमा करना, इनका डिस्ट्रिब्यूशन करना, इनकी सेल करना, इस्तेमाल करने आदि पर रोक है। वास्तव में इन सामानों की उपयोगिता कम है और तुरंत फेंक दिया जाता है। प्लास्टिक को अमूमन लोग इस्तेमाल के बाद यत्र यत्र यूं ही खुले में फैंक देते हैं और इससे शहरों की नालियां, सीवरेज व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। जब बारिश होती है तो यह पानी के साथ बहकर नदी-नालों में जमा हो जाता है। इससे जल प्रदूषण होता है। प्लास्टिक की विघटन प्रक्रिया में सैकड़ों साल लग जाते हैं। इसलिए जब प्लास्टिक हो भूमि के अंदर दबा दिया जाता है तो यह विघटित नहीं हो पाता है और जहरीली गैसें और पदार्थ छोड़ता रहता है। इस कारण वहां की भूमि बंजर हो जाती है। वहां अगर कोई फसल पैदा भी होती है तो उसमें जहरीले पदार्थ मिले होने से यह मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। प्लास्टिक से ज्यादातर वस्तुएं ऐसी बनाई जाती हैं, जो मानव द्वारा इस्तेमाल करने के बाद फैंक दी जाती हैं। इनमें पानी की बोतलें, खिलौने, टूथ ब्रश, पैकिंग का सामान, पॉलीथीन बैग और प्लास्टिक के बॉक्स आदि।</p>
<p>प्लास्टिक को खुले में फैंकने पर इसमें आवारा कुत्तों व अन्य जानवरों, पशुओं द्वारा मुंह मारा जाता है और वे भूखे होने के कारण खाद्य वस्तुओं के साथ प्लास्टिक की थैलियों आदि को यूं ही निगल जाते हैं और उनकी असमय मौत हो जाती है। जानकारी देना चाहूंगा कि प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक की कुल 19 चीजों पर सरकार ने पाबंदी लगा दी है। यह सामान यानी वह प्लास्टिक का सामान जो फैंकने से पहले या रिसाइकल करने से पहले सिर्फ  एक बार ही अमूमन इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल, सरकार चाहती है कि सिंगल यूज प्लास्टिक को धीरे-धीरे करके कई चरणों में लोगों की जिन्दगी से हटाया जाए। इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। सरकार का यह कदम वास्तव में अत्यंत काबिले तारिफ  कहा जा सकता है, क्योंकि प्लास्टिक हजारों सालों तक भी गलता सड़ता नहीं है और मानव समेत धरती के प्राणियों को बहुत नुकसान पहुंचाता है। </p>
<p>यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्लास्टिक के कैरी बैग्स या प्लास्टिक (पालीथीन) की थैलियों को इन 19 चीजों में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन पिछले साल ही यानी कि वर्ष 2022 में ही इनकी मोटाई को बढ़ाकर 50 माइक्रोन्स से 75 माइक्रोन्स कर दिया गया था। सरकार के अनुसार प्लास्टिक युक्त ईयर बड, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक डंडियां, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम की डंडियां, पॉली स्टाइरीन की सजावटी सामग्री पर रोक रहेगी। इसके अलावा प्लास्टिक प्लेटें, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रा, जैसी कटलरी, मिठाई के डब्बों को लपेटने वाली प्लास्टिक फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैक, 100 माइक्रोन से कम मोटे प्लास्टिक के बने बैनरों पर रोक लगाई गई है। वास्तव में आज प्लास्टिक पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन है और इससे हमारी धरती पर उपलब्ध पहाड़ों को काफी नुकसान पहुंच रहा है, क्योंकि पहाड़ हमारी धरती के प्राकृतिक सौंदर्य को, हमारे पर्यावरण को, हमारी धरती के पारिस्थितिकी तंत्र को सुंदर व अच्छा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। आज प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है।              </p>
<p><strong>-सुनील कुमार महला</strong><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2023 10:19:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में कोई उद्योग नहीं, फिर भी धड़ल्ले से प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग के अनुसार स्थानीय निकायों की ओर से दिसंबर 2022 तक 415.10 टन प्लास्टिक कैरी बैग्स की जब्ती कर 4.09 करोड़ राशि का जुर्माना वसूला गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-no-industry-in-rajasthan-yet-plastic-bags-are/article-40841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(9)2.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक के कैरी बैग्स पर पूरी तरह से पाबंदी होने के बाद भी खुलेआम थैलियों का उपयोग हो रहा है। सरकार का तर्क है कि पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, यूपी, एमपी एवं गुजरात से प्लास्टिक के कैरी बैग्स का राज्य में अवैध परिवहन हो रहा है। प्रदेश में अवैध रूप से संचालित जयपुर, बीकानेर एवं अलवर जिलों में स्थित 38 इकाइयों को पुन: बंद कर दिया गया है, अब कोई कैरी बैग का उद्योग नहीं है।<br /><br /><strong>कब लगी रोक</strong><br />केन्द्र सरकार ने 12 अगस्त, 2021 को 19 सिंगल यूज प्लास्टिक आईटम पर प्रतिबंध लगाया, जिसमें 50 माइक्रोन से मोटे प्लास्टिक बैग्स के उपयोग की छूट दी गई। केन्द्र ने इस अधिसूचना को फिर संशोधित करते हुए 75 माइक्रोन तथा दूबारा संशोधन कर 120 माइक्रोन से मौटे प्लास्टिक बैग्स के उपयोग की छूट दी गई है। इन नियमों के तहत प्लास्टिक बैग के उपयोग करने पर 2019 से अब तक 35 अभियोजन पेश किए गए, जबकि पूर्ववती सरकार के समय 16 अभियोजन पेश किए गए। 35 लोगों पर अभियोजन का मामला न्यायालय में लंबित है। <br /><br />पशुपालन विभाग के अनुसार पॉलिथीन अन्तर्गतहित होने से पशुओं में कुपोषण तथा रूमन ओवरलोड से एसपीक्सिया के कारण पशुओं की मृत्यु हो जाती है। पॉलिथीन अंतर्ग्रहित किए गए पशुओं का शल्य चिकित्सा से उपचार किया जाता है। फिर भी हर साल हजारों पशुओं की मौत होती है। राज्य में पॉलिथीन खाने से गौवंश एवं अन्य पशुधन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों के बारे में पशुपालकों को पशुचिकित्सा संस्थाओं में एवं जन चेतना अथवा पशुचिकित्सा शिविरों अथवा गोष्ठियों के माध्यम से नियमित एवं लगातार अवगत करवाया जा रहा है। <br /><br /><strong>अब तक 415.10 टन प्लास्टिक जब्त</strong><br />विभाग के अनुसार स्थानीय निकायों की ओर से दिसंबर 2022 तक 415.10 टन प्लास्टिक कैरी बैग्स की जब्ती कर 4.09 करोड़ राशि का जुर्माना वसूला गया है। प्लास्टिक बैग्स के परिवहन एवं आयातित प्लास्टिक कैरी बैग्स के उपयोग को रोकने के लिए समय-समय पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।<br /><br />प्रदेश में पॉलिथीन पर पूर्ण तरह से प्रतिबंध होने के बावजूद खुलेआम उपयोग हो रहा है। इससे गौवंश व अन्य पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। हर साल हजारों पशुओं की इस पॉलिथीन के कारण मौत हो जाती है।<br />- कालीचरण सराफ, विधायक</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Mar 2023 09:54:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंगल यूज प्लास्टिक की रोकथाम के लिए टीम का गठन</title>
                                    <description><![CDATA[ नगर निगम हैरिटेज के आयुक्त अवधेश मीना ने एक आदेश जारी कर प्रदेश सरकार की ओर से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के कारण सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग की रोकथाम के लिए निगम हैरिटेज मुख्यालय एवं जोन स्तर पर टीम का गठन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-team-formed-for-ban-of-single-use-plastic/article-13668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546523.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगर निगम हैरिटेज के आयुक्त अवधेश मीना ने एक आदेश जारी कर प्रदेश सरकार की ओर से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के कारण सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग की रोकथाम के लिए निगम हैरिटेज मुख्यालय एवं जोन स्तर पर टीम का गठन किया है। टीम में मुख्यालय स्तर के राजस्व अधिकारी चेतन कुमार जैन, रजिस्ट्रार, मुख्य स्वास्थ निरीक्षक और सहायक राजस्व निरीक्षक को शामिल किया गया है।</p>
<p>टीम राजस्व अधिकारी के निर्देशन में कार्य कर निगम हैरिटेज क्षेत्र में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग की रोकथाम को सुनिश्चित करेगी तथा उल्लंघन पाये जाने पर सामान को जप्त एवं चालान की कार्रवाई करेगी एवं राजस्व अधिकारी प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट उपायुक्त स्वास्थ को देंगे। प्रत्येक जोन स्तर भी राजस्व अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता, मुख्य स्वास्थ निरीक्षक संबंधित वार्ड और सहायक राजस्व निरीक्षक को टीम का सदस्य बनाया गया, जो जोन क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक की रोकथाम की कार्रवाई करेंगे। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jul 2022 16:35:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरण की सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक यानी सिर्फ एक बार इस्तेमाल करने के लिए निर्मित प्लास्टिक के 19 उत्पादकों पर प्रतिबंध लागू कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/security-of-environment/article-13557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546514.jpg" alt=""></a><br /><p>पर्यावरण और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक यानी सिर्फ एक बार इस्तेमाल करने के लिए निर्मित प्लास्टिक के 19 उत्पादकों पर प्रतिबंध लागू कर दिया है। यानी अब थर्मोकोल से बनी प्लेट, कप, ग्लास, कटलरी, ट्रे, प्लास्टिक के झण्डे और आइस्क्रीम पर लगाने वाली स्टिक आदि का उत्पादन, बिक्री और उपयोग अब दण्डनीय अपराध है। 75 माइक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक इस्तेमाल पर देश में पहले से ही प्रतिबंध है और सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के प्रयासों के तहत प्लास्टिक कैरी बैग की न्यूनतम 120 माइक्रोन का होगा। प्लास्टिक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। हर कोई मानता है और डॉक्टर भी कहते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है।</p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रदूषित माहौल में व्यायाम व टहलना का भी शरीर को कोई लाभ नहीं मिलता। पदूपद व्यायाम के फायदों को शरीर तक पहुंचने से रोक देता है। प्लास्टिक में व्याप्त रसायन तो कैंसर, मोटापा, डायबिटीज आदि की समस्या उत्पन्न करते हैं। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वेक्षण के अनुमान देश में रोजाना 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा निकलता है, जिसमें से सिर्फ 60 प्रतिशत का ही निस्तारण हो पाता है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण के लिए ज्यादा खतरनाक इसलिए है, क्योंकि न इसका निस्तारण संभव है, न इसे जलाया जा सकता है। इसके हवा में उड़ते टुकड़े पर्यावरण में जहरीले रसायन छोड़ते हैं। फिर इसका कचरा वर्षा के पानी को जमीन में जाने से रोकने का काम करता है। इसी वजह से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया है। कामयाबी तभी मिल पाएगी, जब पाबंदी पर सख्ती से कार्य हो। वैसे इस तरह के प्लास्टिक के सामान पर प्रतिबंध लगाने की कवायद तो काफी समय से चल रही है। अब सरकार ने दृढ़ संकल्प और सख्ती के साथ पाबंदी लगाई है, तो उम्मीद की जानी चाहिए पाबंदी सफल रहेगी और हमारा पर्यावरण सुरक्षित रह पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 12:43:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंगल यूज प्लास्टिक बैन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में जनरेट होने वाले 1100 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे पर करीब 12 साल बाद एक बार फिर से रोक लगाने की मुहिम शुरू हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-single-use-plastic-ban-in-state/article-13340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/465465465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जनरेट होने वाले 1100 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे पर करीब 12 साल बाद एक बार फिर से रोक लगाने की मुहिम शुरू हुई है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के बाद इस मुहिम के तहत शहरों क्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने की मुख्य जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को दी गई है। इसके लिए सभी निकायों को स्वायत्त शासन विभाग ने अन्य विभागों के कॉर्डिनेशन के साथ इस वेस्ट को रोकने के निर्देश दिए है। हालांकि राज्य में 2010 में भी प्लास्टिक को बैन किया गया था। इसके लिए प्लास्टिक कैरी बैग का इस्तेमाल करने वालों का चालान कर जुर्माना वसूलने और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, लेकिन फिर से उपयोग होने लगा।</p>
<p><strong>इन पर लगी रोक</strong><br />गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, थर्मोकोल, प्लास्टिक की प्लेट, कप, गिलास, कटलरी, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, मिठाई के डिब्बों को रैप या पैक करने वाली फिल्म, सिगरेट के पैकेट और 100 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक या पीवीसी बैनर।</p>
<p><strong>जुर्माना और जेल या दोनों होगी</strong><br />धारा 15 के तहत जुर्माना या जेल या दोनों की सजा हो सकती है। धारा 15 के तहत 7 साल तक की कैद और 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।</p>
<p><strong>कितना खतरनाक है प्लास्टिक</strong><br />पर्यावरण में जहरीले रसायन छोड़ते है, बारिश के पानी को भूमि के नीचे जाने से रोकता है, जिससे ग्राउंड वॉटर लेवल में कमी आती है।</p>
<p><strong>हर दिन निकलता है 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा</strong> <br />केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक सर्वे बताता है कि 60 फीसदी को ही इकट्ठा किया जाता है, बाकी कचरा नदी-नालों में मिल जाता है।</p>
<p><strong>जयपुर में 280 एमटी प्लास्टिक वेस्ट</strong><br />एलएसजी के अनुसार प्रदेश में हर दिन जनरेट होने वाले कचरे में 20 प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट शामिल हैं।</p>
<p><strong>शहर का कुल वेस्ट</strong><br />प्लास्टिक वेस्ट 280 मीट्रिक टन है। 300 मीट्रिक टन के लिए आरडीएफ और 300-300 मीट्रिक टन के एमआरएफ  का टेंडर लगा रखा है। इसके अलावा 700 मीट्रिक टन कचरा वेस्ट टू एनर्जी में इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>
<p><strong>क्या हैं सिंगल यूज प्लास्टिक</strong><br />40 माइक्रो मीटर या उससे कम स्तर के प्लास्टिक को सिंगल यूज प्लास्टिक में शामिल किया गया है। अर्थात प्लास्टिक से बनी वह चीजें जो एक बार ही उपयोग के बाद फेंक दी जाती हैं। इनमें पॉलीथिन, कैरीबैग, प्लास्टिक कप, प्लास्टिक प्लेट और पानी की बोतल आदि है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />निकायों ने सिंगल यूज प्लास्टिक को बंद करने के लिए काफी समय से जागरूकता अभियान चला रही थी। इसके लिए व्यापारियों से भी समझाइश की गई है। प्रतिबंध के बाद भी इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- डॉ. जोगाराम, सचिव एलएसजी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 10:31:19 +0530</pubDate>
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