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                <title>botanical garden - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बॉटनीकल गार्डन में फायर लाइन के नाम पर 38 लाख का घोटाला, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा वनमंडल के अधिकारियों ने मिलीभगत से सरकारी धन का किया गबन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/38-lakh-scam-in-botanical-garden-under-the-guise-of--fire-lines/article-155836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/8888.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वन मंडल द्वारा 40 हैक्टेयर में बनाए गए बॉटनिकल गार्डन में फायर लाइन के नाम पर 38 लाख रुपए खर्च का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जमीन पर फायर लाइन बनी ही नहीं लेकिन कागजों में बनाकर बजट उठा लिया गया। इतना ही नहीं ठेकेदारों को भुगतान करना भी बता दिया गया।दरअसल, बॉटनिकल गार्डन लाडपुरा रेंज की सकतपुरा वनखंड में आता है, जो पूर्णत: पठारी पथरीला क्षेत्र है। यहां कुछेक ही ऊंचे वृक्ष मौजूद हैं, शेष संपूर्ण क्षेत्र नंगी चट्टानें और घास फूस और कंटीली झाड़ियां ही है। हालांकि, यहां बिजली पावर ग्रिड भी हैं, जिनके नीचे व आसपास पाथ-वे बने हुए, जिन पर गिट्टियां व ग्रेवल बिछा हुआ है। यदि, पावर ग्रिड से चिंगारी भी गिरे तो आग लगने की संभावना नहीं रहती है। वहीं, पूर्व में बड़ी आगजनी घटना की कोई हिस्ट्री भी नहीं रही है। वन विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे पठारी नंगी चट्टानी क्षेत्र में फायर लाइन का निर्माण करने का निर्णय ही तकनीकी मापदंडों का उल्लंघन है। जबकि, पूरे गार्डन में लंबे चौड़े निरीक्षण पथ बने हुए हैं, जो स्वत: ही फायर लाइन का काम करते हैं।</p>
<p><strong>कागजों में फायर लाइन, धरातल से गायब</strong><br />नवज्योति के हाथ लगे दस्तावेजों के अनुसार, वन मंडल की लाडपुरा रेंज के सकतपुरा वनखंड में 134.50 लाख की लागत से बोटनीकल गार्डन का निर्माण किया गया। जिसमें 28 प्रकार के कार्य करवाए जाना बताया गया है। गार्डन में मौजूद पेड़-पौधों को आग से बचाने के लिए झाड़-झाड़ियां साफ कर फायर लाइन (अग्नि रोक मार्ग) बनाया जाना बताया गया है। जबकि, बॉटनीकल गार्डन में पीछे व चौकीदार रूम की तरफ बड़ी मात्रा में सूखी झाड़ियां है, जिन्हें न तो साफ करवाया गया और न ही उनके बीच फायर लाइन बनाई गई। जबकि, यहां 6 निरीक्षण पथ यानी पाथ-वे (रास्ते) 3 मीटर चौड़े बने हुए हैं। जिस पर कई जगहों पर ग्रेवल तो कहीं जगहों पर गिट्टियां बिछी है। असल, में फायर लाइन सिर्फ कागजों में है और धरातल से गायब है।</p>
<p><strong>इस तरह से हुआ 38 लाख का गबन</strong><br />वित्तिय वर्ष 2025-26 की समाप्ति तक कोटा डीएफओ द्वारा सीसीएफ को लिखे पत्र में कागजों में बॉटनीकल गार्डन में कुल 38 लाख की लागत से तीन स्तर पर फायर लाइन बनवाना बताया है। इनमें झाड़-झाड़ियों की सफाई कर फायर लाइन बनाने के लिए कुल 28 लाख रुपए चार्ज किए हैं। जिसमें से मार्च माह तक 20 लाख 24 हजार 264 रुपए का भुगतान संवेदक को किया जाना बताया है। जबकि, शेष 7 लाख 75 हजार 736 रुपए का भुगतान करने के लिए विभाग से बजट मांगा है। वहीं, कंट्रेक्शन आॅफ फायर लाइन-1 वर्क-करवाने के नाम पर 5 लाख रुपए का भुगतान करना भी दर्शाया है। जबकि, कंट्रेक्शन आॅफ फायर लाइन-2 वर्क करवाने के 5 लाख का भुगतान करना शेष बताया है। इस तरह से फायर लाइन के नाम पर दो माह पहले तक कुल 25,24264 रुपए का भुगतान कर दिया और शेष 12 लाख 75 हजार 736 रुपए का भुगतान के लिए बजट मांगा।</p>
<p><strong>40 हैक्टेयर को ही फायर लाइन बना दें तो भी खर्च नहीं होते 38 लाख</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर आईएफएस ऑफिसर्स ने बताया कि हर काम के लिए सरकार ने बीएसआर दर तय की हुई है। जिसमें फायर लाइन की दर 4.55 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर है। यदि, पूरे 40 हैक्टेयर के बॉटनीकल गार्डन को सपाट मैदान बना दिया जाए तो भी 38 लाख रुपए की लागत से फायर लाइन नहीं बन सकती। क्योंकि, 40 हैक्टेयर में 4 लाख स्क्वायर मीटर होता हैं, जिसे बीसीआर रेट 4.55 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर से गुणा करें तो 18 लाख 20 हजार रुपए का ही खर्चा होगा, तब भी 38 लाख रुपए खर्च नहीं होंगे।</p>
<p><strong>क्या होती है फायर लाइन</strong><br />जंगल में फायर लाइन एक चौड़ा कच्चा रास्ता या बड़ी पगडंडी को कहते हैं, जो आग रोकने के लिए बनाई जाती है। वन भूमि पर मौजूद सभी वनस्पतियों, झाड़ियों को साफ करके जमीन को खुला छोड़ दिया जाता है। इस लाइन के दो फायदे होते हैं, पहला ये कि जंगल में भीषण आग लगने के दौरान ये एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आग फैलने नहीं देती और दूसरा ये कि इसी चौड़े रास्ते (फायर लाइन) के सहारे दमकल विभाग और वनकर्मी आग बुझाने वाले उपकरणों के साथ अंदर प्रवेश कर सकते हैं।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ</strong><br />फायर लाइन घने जंगल में पेड़ों को आग से बचाव के लिए बनाया जाता है। यदि बॉटनीकल गार्डन में पहले से ही निरीक्षण पथ बने हुए हैं तो यहां फायर लाइन बनाने की आवश्यकता नहीं होती। क्योंकि, निरीक्षण पथ (रास्ते) ही फायर लाइन का ही काम कर रहे होते हैं।<br /><strong>-सतीश कुमार, रिटायर्ड एसीएफ वन विभाग</strong></p>
<p>अभेड़ा बॉटनिकल गार्डन में वैसे तो फायर लाइन बनाई ही नहीं गई, केवल कागजों में बताकर 38 लाख का भुगतान उठाया गया है। जबकि, वन अफसर 1200 रनिंग मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी फायर लाइन बनाने की बात कह रहे हैं, जिसे भी मान लिया जाए तो भी यह अधिकतम 3600 स्क्वायर मीटर की होगी, जिसकी लागत लागू बीएसआर दर 4.55 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से 20 हजार रुपए से अधिक की नहीं हैं। इसके बावजूद सरकार की आंखों में धूल झौंक लाखों का गबन कर दिया गया। आश्चर्य तो यह है, यहां पहले से ही पाथ-वे बने हुए हैं, जो सम्पूर्ण 40 हैक्टेयर के क्षेत्र को कई भागों में विभाजित करने के साथ फायर लाइन का काम भी करते हैं। असल में खेल पाथ-वे को ही फायर लाइन बताकर 38 लाख रुपए का राजकोष से भुगतान कर गबन किया गया, यह राशि संबधित अधिकारियो से वसूलनीय हैं।<br /><strong>-तपेश्वर सिंह भाटी, पर्यावरणविद् एवं एडवोकेट</strong></p>
<p>मेरे समय वित्तिय वर्ष 23-24 में ही बॉटनिकल गार्डन में निरीक्षण पथ, पौधे लगाने के लिए ब्लॉक व इको टेल बना लिए गए थे।<br /><strong>- कुंदन सिंह, तत्कालीन रेंजर लाडपुरा रेंज</strong></p>
<p>बोटनीकल गार्डन 40 हैक्टेयर में बनाया गया है। जहां 1200 रनिंग मीटर लंबी फायर लाइन बनाई गई है। इसकी लागत के बारे में तो डीएफओ की परमिशन के बिना नहीं बता सकते। यहां पाथ-वे भी बने हुए हैं, जिसका उपयोग पौधों को पानी पिलाने के लिए वाहनों के आने-जाने के लिए होता है।<br /><strong>-अनिरुद्ध कुमार, सहायक वन संरक्षक, कोटा वनमंडल</strong></p>
<p>गार्डन में 1200 रनिंग मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी फायर लाइन बनाई गई है, जो करीब 5 लाख रुपए की लागत से बीएसआर रेट के अनुसार बनाई गई है। पाथे-वे यानी निरीक्षण पथ भी फायर लाइन का ही काम करते हैं। हालांकि, पहले 2100 से 2200 रनिंग मीटर बनानी थी लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण जितना बजट उपलब्ध था, उतने में ही यह फायर लाइन बनाई।<br /><strong>-इंदे्रश सिंह यादव, क्षेत्रिय वन अधिकारी रेंज लाडपुरा</strong></p>
<p>मैं अभी छुट्टी पर हूं, बिना देखे कुछ कह नहीं सकता। इस संबंध में आप सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) से बात करते हैं, अभी उनके पास चार्ज है।<br /><strong>-अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, डीएफओ कोटा वन मंडल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:27:37 +0530</pubDate>
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                <title>बौटेनिकल गार्डन में लगे हजारों पौधे सूखे</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग की लापरवाही से पौधे नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-plants-planted-in-the-botanical-garden-dried-up/article-81049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/botanical-garden-me-lge-hazrao-podhe-sukhe...kota-news-10-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के अभेड़ा स्थित बायलॉजिकल पार्क के पास स्थित बौटेनिकल गार्डन के आधे से ज्यादा पौधे सूख चुके हैं। वन विभाग की तरफ से अनदेखी और देखभाग में कमी के चलते लाखों रुपए लागत से लगाए पौधे अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं। साल 2022 में वन विभाग की 50 हेक्टेयर जमीन पर बौटोनिकल गार्डन विकसित करने के उद्देश्य से से सभी पौधे लगाए थे। जिनसे बोटनी विषय के विद्यार्थियों को उच्च स्तर की रिसर्च करने का मौका मिलता और आमजन को भी विभिन्न किस्मों के पौधे यहां देखने को मिलते। लेकिन वन विभाग की उदासीनता के चलते ये पौधे सूखकर खत्म होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।</p>
<p><strong>3 हजार पौधे लगाए थे बचे सौ से दो सौ</strong><br />साल 2022 में राज्य सरकार की ओर से वन विभाग की इस भूमि पर करीब 80 लाख रुपए की लागत से 50 हेक्टेयर जमीन पर 3 हजार से अधिक पौधे लगाए गए थे। जिसमें देश विदेश की विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों के साथ पौधे भी शामिल थे। लेकिन पिछले एक साल से वन विभाग की अनदेखी के चलते इनमें से लगभग दो सौ पौधे ही सही सलामत बचे हैं। इसके अलावा बाकि पौधे या तो सूख चुके हैं या सूखकर कर मर चुके हैं। गार्डन की जमीन पथरीली होने के कारण पौधारोपण के बाद पौधों को बड़े होने तक देखभाल की आवश्यकता होती है। लेकिन विभाग की लापरवाही से पौधे नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।</p>
<p><strong>एक दिन में सिर्फ 3 से 4 टैंकर फेरे</strong><br />अभेड़ा बौटोनिकल गार्डन में लगाए गए लगभग 3 हाजर पौधों के लिए एक दिन में कम से कम 6 टैंकर पानी जरुरत है। लेकिन वर्तमान में इस स्थान पर पानी टैंकर के केवल 3 से 4 टैंकर के चक्कर लग रहे हैं। जिससे पूरे इलाके में पानी की सिंचाई पर्याप्त रूप से नहीं हो पा रही है। जो पौधों के सूखने का सबसे बड़ा कारण है। </p>
<p><strong>पौधों से उच्च स्तर की रिसर्च करने में मिलती मदद</strong><br />अभेड़ा बौटोनिकल गार्डन में देश विदेश के कई किस्मों के पौधे लगाए गए थे। जिनसे वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को उन पर रिसर्च करने का लाभ मिलता। साथ ही कोटा के वातावरण में किस किस तरह के पौधे चल सकते हैं ये भी जानने को मिलता लेकिन पौधों के सूखने के कारण उनपर रिसर्च करना भी मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में रहने वाले जानवरों के लिए भी गार्डन एक आशियाने के रूप में साबित होता क्योंकि इस क्षेत्र में वन्य जीवों की अधिकता मिलती है। लेकिन पौधों की कमी के चलते उन्हें भी भीषण गर्मी में धूप के बीच रहना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />बौटोनिकल गार्डन में विभाग ने हजारों पेड़ पौधे लगाए थे लेकिन उनमें से अधिकतर या तो सूख चुके हैं या सूखने की कगार पर हैं केवल 200 पौधे ही ठीकठाक स्थिति में मौजूद हैं। विभाग के अधिकारियों से इसके लिए कई बार बोला भी है लेकिन कोई ध्यान देते अगर कोशिश करें तो इसे बचाया जा सकता है। क्योंकि इनकी ना देखभाल ठीक से हो रही और ना सिंचाई।<br /><strong>- नितिन कुमार, नांता</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभेड़ा बौटोनिकल गार्डन में सभी पौधे ठीक ठाक अवस्था में हैं कुछ पौधे हो सकते हैं जो सूख गए हों बाकि पौधों की देखभाल की जा रही है। वहीं ये सभी पौधे जंगली प्रजाती के हैं जिन्हें पानी की ज्यादा आवश्यकता नहीं है। अगर देखभाल में लापरवाही होगी तो उसे दिखकर ठीक कराएंगे।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीसीएफ, वन विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 16:05:14 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्लभ वनस्पतियों पर शौध कर सकेंगे रिसर्चर</title>
                                    <description><![CDATA[बॉटनिकल गार्डन में हाड़ौती क्षेत्र की ऐसी वनस्पतियां लगाई जाएंगी, जो संकटग्रस्त हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्हें संरक्षित किया जाएगा। वनस्पति उद्यान वैज्ञानिकों, वनस्पति शास्त्रियों, स्टूडेंट्स, रिसर्चर, बागवानों या ऐसे लोगों के लिए शैक्षणिक संस्थान है जो पौधों के जीवन में जागृत और प्रबुद्ध रुचि रखते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/researchers-will-be-able-to-do-research-on-rare-plants/article-41698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/durlabh-vanaspatiyo-par-shodh-kar-sakege-researchers..kota-news..4.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आभेड़ा में बन रहे बॉटनीकल गार्डन में कैक्टस, फ्रूट, बटर फ्लाई, मेडिसिनल गार्डन सहित अलग-अलग थीम के कई गार्डन विकसित किए जाएंगे। यहां शहरवासियों को वनस्पतियों की जानकारी मिल सकेंगी, वहीं रिसर्चर को शोध के लिए दुलर्भ वनस्पतियों की खोज आसान होगी। साथ ही टयूरिज्म स्पॉट विकसित होगा। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कोटा वन मंडल की ओर से 5 करोड़ की लागत से बॉटनिकल पार्क का निर्माण करवाया जा रहा है। यह पार्क अभेड़ा महल के पास तालाब के पीछे 50 हैक्टेयर में तैयार किया जा रहा है। प्रथम चरण में 1.13 करोड़ की लागत से 30 से 35 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। 6 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार खड़ी हो चुकी है। साथ ही दीवारों पर 4-4 फीट उंची तार फैंसिंग का काम भी पूरा हो गया है।   </p>
<p><strong>संकटग्रस्त पौधों की तैयार होगी नर्सरियां</strong><br />बॉटनिकल गार्डन में हाड़ौती क्षेत्र की ऐसी वनस्पतियां लगाई जाएंगी, जो संकटग्रस्त हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्हें संरक्षित किया जाएगा। इसके अलावा पलाश, खेजड़ी, अमलताश, बोरड़ी, कैर, जाल, रोहिड़ा, गोरख इमली, झरबेला, फोग, नीम, ऐलोविरा, कुमटा, गौंद, औषधीय पौधे, बम्बू, फल-फूल अश्वगंधा, प्रायोगिक तौर पर शहतूत व अन्य पौधे लगाकर नर्सरियां तैयार की जाएगी। </p>
<p><strong>पहले चरण में गार्डन में यह हुए काम</strong><br />फोरेस्टर रामस्वरूप गोचर ने बताया कि बॉटनीकल गार्डन का निर्माण कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रथम चरण में 1.13 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं। जिनमें 80 लाख की लगात से 50 हैक्टेयर में सुरक्षा दीवार, तार फेंसिंग, गेट, बोरिंग, सौलर प्लांट, 1200 मीटर इको टेल बना है, हालांकि 3500 मीटर बनाया जाना है। सुरक्षा के लिए चौकियां बनाई है। ज्यूलीफ्लोरा झाड़ियों को साफ किया है। अब दूसरे चरण में यहां प्लांटेशन का कार्य किया जाएगा। </p>
<p><strong>वनस्पतियों में अनुसंधान का बढ़ेगा दायरा</strong><br />वनस्पति उद्यान वैज्ञानिकों, वनस्पति शास्त्रियों, स्टूडेंट्स, रिसर्चर, बागवानों या ऐसे लोगों के लिए शैक्षणिक संस्थान है जो पौधों के जीवन में जागृत और प्रबुद्ध रुचि रखते हैं। वहीं, बॉटनिकल गार्डन की स्थापना पुस्तकालयों, जड़ी-बूटियों, प्रयोगशालाओं के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान के उद्देश्य से की जाती है। यहां पर विभिन्न पौधों के अलग-अलग ब्लॉक बनाएं जाएंगे। साथ ही किन पौधों का क्या फायदा है, विद्यार्थियों व शोधार्थियों को इसकी जानकारियां मिल सकेगी। </p>
<p><strong>दुलर्भ प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण</strong><br />बॉटनिकल पार्क में वनस्पतियां सहेजी जाएंगी। रिसर्चर को यहां आने पर विभिन्न प्रजातियों की वनस्पतियों के बारे में जानकारी मिलेगी। कैक्टस से लेकर अन्य कई दुर्लभ प्रजातियों के पौधे लगेंगे। यहां एक नया जंगल विकसित हो सकेगा। लोकल दुर्लभ प्रजातियों के पौधों का संरक्षण होगा। बायोलॉजिकल पार्क विजिट के साथ अभेड़ा महल देखने और बॉटनिकल गार्डन विजिट के साथ-साथ करणी माता मंदिर के दर्शन करने का मौका भी मिलेगा।</p>
<p><strong>द्वितीय चरण में ये होंगे काम </strong><br />डीएफओ जयराम पांडे्य ने बताया कि द्वितीय चरण में दुलर्भ वनस्पतियों व विभिन्न किस्मों के फूलों की नर्सरियां तैयार की जाएंगी। इंटरपिटेक्शन सेंटर, थीम पार्क, इको टेल, बर्ड्स व्यू पाइंट्स बनाए जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न किस्मों के फल, फूल, औषधीय, सुगंधित पौधे, टिम्बर व गोंद सहित कई वैराइटी के पौधों की नर्सरी विकसित की जाएगी। शहरवासियों को पौधों व वनस्पतियों से संबंधित जानकारी मिल सके। गार्डन तैयार होने पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p><strong>क्या है बॉटनिकल गार्डन </strong><br />वन मंडल के डीएफओ जयराम पांडय ने बताया कि बॉटनिकल गार्डन एक ऐसा स्थान होता है, जहां लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों के संरक्षण के साथ ही उनका प्रदर्शन किया जाता है। बॉटनिकल गार्डन में पेड़ पौधों पर उनके वानस्पतिक नाम का भी उल्लेख किया जाता है ताकि गार्डन में घूमने आने वाले बच्चे व लोगों को पेड़ पौधों और वनस्पतियों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मिल सके। इस गार्डन को टूरिज्म से जोड़ा जाएगा। ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोग भी यहां पहुंचकर दुलर्भ वनस्पतियां, पेड़-पौधों की जानकारी हासिल कर सके। </p>
<p><strong>बार कोड से मिलेगी पौधों की जानकारी </strong><br />पर्यटकों को बॉटनिकल पार्क में लगे फल, फूल, औषधीय पेड़-पौधों की जानकारी देने के लिए इंटरपिटेक्शन हॉल भी बनाया जाना है। यहां हर पौधों की तस्वीर के नीचे बार कोड होगा, जिसे मोबाइल पर स्केन करते ही पौधे से संबंधित सभी जानकारियां प्राप्त की जा सकेगी। </p>
<p>अभेड़ा महल के पास वन मंडल की 50 हैक्टेयर भूमि पर 5 करोड़ की लागत से बॉटनिकल पार्क का निर्माण करवाया जा रहा है। जहां हाड़ौती क्षेत्र में पाए जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की वनस्पतियां, पेड-पौधे व औषधीय लगाकर संरक्षित किए जाएंगे। इस गार्डन के अंदर कैक्टस, फ्रूट, बटर फ्लाई, मेडिसिनल गार्डन सहित अलग-अलग पेड़-पौधों की वाटिकाएं बनाई जाएंगी। कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में 1 करोड़ 13 लाख की लागत से विभिन्न काम पूरे हो गए हैं। अब द्वितीय चरण में कार्य जारी रखने के लिए बजट की आवश्यकता है, जिसके लिए सरकार को लिखा है।  जल्द ही बजट मिलने पर काम शुरू हो जाएंगे। इस गार्डन का निर्माण मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत किया जा रहा है। बजट का इश्यू नहीं है, वो जल्द मिल जाएगा। फिलहाल, कार्य प्रगृति पर है।  <br /><strong>- जयराम पांडेय, डीएफओ वन मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Apr 2023 15:53:11 +0530</pubDate>
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                <title>जगपुरा में बनाया जाएगा बॉटनीकल गार्डन</title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग द्वारा जगपुरा में बॉटनीकल गार्डन तैयार किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। ये करीब 40 हैक्टेयर तैयार में होगा। जिसमें विविध प्रकार के पौधे लगाएं जाएंगे।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/botanical-garden-to-be-built-in-jagapura/article-8071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/jagpura-botanical-garden-.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वन विभाग द्वारा जगपुरा में बॉटनीकल गार्डन तैयार किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। कार्यालय उपवन संरक्षक ने इसके प्रस्ताव तैयार संभागीय मुख्य वन संरक्षक को भेज दिए गए है। प्रस्तावों पर इम्पलीमेंट होने पर जल्द इसका काम शुरू हो जाएगा। ये करीब 40 हैक्टेयर तैयार में होगा। जिसमें विविध प्रकार के पौधे लगाएं जाएंगे। जो लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे। अधिकांश पौधे औषधि पौध रहेंगे। पौधों की संख्या एक लाख से भी अधिक होगी। विभाग ने इसका पूरा खाका तैयार कर लिया है। पार्क को तैयार करने में करीब 7 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्य बजट में इसकी घोषणा की थी। इसके साथ ही लवकुश वाटिका भी तैयार की जा रही है। लवकुश वाटिका की घोषणा भी मुख्यमंत्री बजट में की गई थी। <br /><br /><strong>पर्यटन क्षेत्र के तौर पर किया जाएगा विकसित</strong><br />अधिकारियों का कहना है कि बॉटनीकल गार्डन को तैयार करने के पीछे औषधि पौधों का ज्ञान तो है। साथ में इसको पर्यटन क्षेत्र के तौर पर भी विकसित किया जाएगा। क्योंकि, ये एन-76 हाइवे पर स्थित है। ऐसे में लोगों को जुड़ाव इससे होगा। अध्ययन के लिए विभिन्न प्रकार के औषधि पौधे रहेंगे। स्टूडेंट्स यहां घूमकर इनकी जानकारी हासिल कर सकेंगे। उनको पौधों को बचाने के लिए तैयार किया जाएगा। साथ ही कोविड के समय में इन औषधि पौधों की भूमिका रही थी। ये जानकारी भी स्टूडेंट्स शेयर की जाएगी। इनके अलावा लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता  लाएंगे।<br /><br /><strong>ये पौधे किए जाएंगे विकसित</strong><br />यूं तो बॉटनीकल गार्डन में पौधों की विविध प्रकार की प्रजातियां होगी, लेकिन इनमें से आकर्षण का केंद्र हर्बल प्लांट, कैक्टस प्लांट, एक्सोटिक प्लांट, आॅरनामेंट प्लांट, सुकुलेंट प्लांट, एंडेमिक प्लांट रहेंगे। इसके अलावा सिंचाई के लिए पूरी प्रणाली विकसित की जाएगी, जिसके माध्यम से प्रत्येक पौधों तक पानी से सिंचाई होगी। 1.8 मीटर की बाउंड्री वाल भी तैयार होगी। इनकी मॉनिटरिंग के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाएं जाएंगे। वर्मी कंपोस्ट के लिए इकाई भी स्थापित होगी। एक प्रशासनिक भवन भी होगा। इसके अलावा अन्य संसाधन विकसित किए जाएंगे।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />मुख्यमंत्री ने बजट में बॉटनीकल गार्डन की घोषणा की थी। इसको जगपुरा में तैयार किया जाएगा। इसके प्रस्ताव भेज दिए गए है<br />- <strong>सुबोध सिंह राजपूत, सहायक वन संरक्षक, वन विभाग, कोटा</strong><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 15:43:46 +0530</pubDate>
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