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                <title>bhamashah mandi - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पानी और छांव के लिए यार्डों के चक्कर काट रहा धरती पुत्र</title>
                                    <description><![CDATA[सुलभ कॉम्प्लेक्स गंदगी से अटे, टोटियां और पाइप गायब, किसान कलेवा योजना में ठंडे पानी की दरकार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the--son-of-the-soil--roams-the-yards-in-search-of-water-and-shade/article-155471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)72.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एशिया की सबसे बड़ी भामाशाह कृषि उपज मंडी में इन दिनों हाड़ौती सहित विभिन्न क्षेत्रों से किसान जिंस बेचने के लिए आ रहे हैं। लेकिन भीषण गर्मी के चलते किसानों को न तो पर्याप्त मात्रा में छांव मिल पा रही है और न ही पीने के पानी के लिए उन्हें एक यार्ड से दूसरे यार्ड के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण किसान मजबूरन पास की कैंटीन से पानी की बोतलें खरीदकर पी रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।</p>
<p>बूढ़ादीत से मंडी में जिंस बेचने आए किसान श्यामलाल ने बताया, मैं शुक्रवार तड़के ही मंडी आ गया था, लेकिन इतनी भीषण गर्मी में भी दोपहर तीन बजे जाकर मेरा नंबर आया। इस दौरान मैंने प्याऊ से कभी पानी ठंडा आ रहा तो कभी गर्म इस कारण एक-दो बार बोतल खरीदनी पड़ी। दिनभर धूप से बचने के लिए इधर-उधर भटकता रहा और दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नीचे सोकर तथा पेड़ों की छांव में बैठकर अपनी जिंस की रखवाली की।</p>
<p>रामगंजमंडी से आए राजू लाल ने बताया कि प्याऊ में कभी गर्म तो कभी ठंडा पानी आता है। मंडी में छांव वाले स्थान (टीन शेड) बेहद कम हैं। किसान मुकेश ने बताया कि कलेवा योजना में किसानों के लिए ठंडे पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं हैं, एक ड्रम पर कपड़ा बांधकर रखकर हैं। जिससे में भी नाममात्र का गर्म पानी आ रहा हैं। करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाली इस मंडी का आलम यह है कि प्यास बुझाने के लिए किसानों को एक यार्ड से दूसरे यार्ड के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>पर्याप्त मात्रा में प्याऊ और टीनशेड हो </strong><br /> देखा जाएं तो मंडी में प्याऊ की संख्या कम होने की वजह से किसानों को एक यार्ड से दूसरे यार्ड में पानी लेने जाना पड़ा रहा हैं। जिसकी वजह से उनको कई बार फसल की सुरक्षा की चिंता रहती हैं। किसान रंगलाल, विजय कुमार, विशाल कुमार ने बताया कि मंडी प्रशासन को चलती -फिरती प्याऊ की व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे किसानों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पडेÞ। वहीं किसान विजय कुमार ने बताया कि प्याऊ से नाममात्र का ठंडा पानी आ रहा जिसके चलते मैंने करीब दो से तीन बोतल पानी खरीदकर पिया हैं। जिससे किसानों के जेब पर दोहरी आर्थिक मार पड़ा रही। वहीं जिंसों की नीलामी भी खुले में हो रही जिसके चलते हमे इधर-उधर बैठकर ही धूप में इनकी निगरानी करनी पड़ती हैं। वहीं किसान भवन में किसानों के सोने के लिए बेड लगा रखे, हवा के लिए पंखे लगा रखे हैं, पर भवन में दिन में सन्नाटा पसरा हुआ था।</p>
<p><strong>सुलभ कॉम्प्लेक्स में गंदगी का अंबार </strong><br />भामाशाह मंडी स्थित कॉम्प्लेक्स व टॉयलेट में गंदगी का अंबार लगा हुआ। कॉम्पलेक्स क्रमांक एक में तो शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं, इनके नल से टोटियां गायब हो चुकी है, कुछ गेट क्षतिग्रस्त है, गेट से कुंडी भी गायब हो चुकी हैं। इनके यूरीनल से भी पाइप गायब है साथ ही क्षतिग्रस्त भी हो रहे हैं। इसी से थोड़ी दूरी पर स्थित टॉयलेट भी बदतर स्थिति में हैं। वहीं इसी के पास स्थिति टॉयलेट में पानी डालने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और ना ही गेट लगाएं हुए हैं, कुछ यूरीनल तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।</p>
<p><strong>किसान कलेवा भवन में वाटर कूलर की दरकार </strong><br /> किसान कलेवा योजना भवन में यदि देख जाएं तो करीब देखा जाएं तो पचास से सौ किसान प्रतिदिन दो बजे तक खाना खाते हैं। किसानों ने बताया कि यहां पर पानी पीने के लिए एक ड्रम रखा हुआ। जिसमें कपड़ा बांध रखा है। ड्रम भी गंदगी के बीच में रखा हुआ। जिसमें भी पानी नाममात्र का ठंडा है जिसके चलते किसानों को पानी खरीदकर पीना पड़ा रहा हैं।किसान संदीप कुमार ने बताया कि किसान कलेवा का समय अभी 10 से 5 बजे तक उसको बढ़ाया जाना चाहिये।</p>
<p><strong>ये बोले किसान</strong></p>
<p><strong>धर्मकांटे पर ही हो तुलाई <br /> मैं रात को ही घर से रवाना होकर तड़के मंडी पहुंच गया था। दोपहर बाद जिंस बिकी और उसे तुलाने के बाद अब पैसे लेकर घर जाऊंगा। यदि मंडी में ट्रैक्टर-ट्रॉली खाली कराने के बजाय सीधे धर्मकांटे पर ही जिंस की तुलाई हो जाए, तो किसानों का काफी समय बच सकता है।<br />- महावीर, किसान</strong></p>
<p><strong>प्रतिदिन हो कॉम्प्लेक्स की सफाई</strong><br /> मैं पहली बार मंडी में अपनी जिंस बेचने आया हूँ। रात को ही ट्रैक्टर लेकर रवाना हुआ था और यहाँ आने के बाद माल खाली करवाया। नीलामी में दोपहर बाद मेरा नंबर आया।पानी लेने के लिए एक यार्ड से दूसरे यार्ड में जाना पड़ता है, जिसके चलते परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। मंडी में पानी के प्याऊ की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और सुलभ कॉम्प्लेक्स की प्रतिदिन सफाई होनी चाहिए।<br /><strong>- रामचरण मीणा,</strong> किसान</p>
<p><strong>भाड़े के नुकसान से बचेंगे किसान </strong><br /> मंडी में जिंस तुलाई के लिए धर्मकांटा होना बेहद जरूरी है। इससे किसानों को माल खाली नहीं करना पड़ेगा और जल्दी नंबर आने से ट्रैक्टर-ट्रॉली के अतिरिक्त भाड़े की मार से किसान बच सकेंगे। इससे किसानों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।<br /><strong>- पप्पू लाल,</strong> किसान</p>
<p><strong>तड़के से शाम हो गई </strong><br /> मैं मंडी में लहसुन बेचने आया हूँ। रात को ही किराए की ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर रवाना हुआ था। जिंस की नीलामी होने और पैसे मिलने तक शाम हो गई। इस दौरान प्याऊ से कभी गर्म तो कभी ठंडा पानी आया, जिसके कारण मुझे 3-4 बार पानी की बोतल खरीदनी पड़ी। किसान कलेवा योजना में भोजन करने के बाद भी ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए वहाँ भी बोतल खरीदकर ही प्यास बुझानी पड़ी।<br /><strong>- त्रिलोक कुमार,</strong> किसान</p>
<p> मंडी के पुराने कॉम्प्लेक्स की शीघ्र ही मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही तीन नये कॉम्प्लेक्टस बनाने के लिए बजट बनाने व मरम्मत के लिए बजट का आवंटन हो चुका हैं। और जो भी समस्या है उनका निराकरण किया जाएगा।<br /><strong>-मनोज कुमार मीणा, </strong>सचिव भामाशाह मंडी </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 15:11:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का.... मिली सौगात: भामाशाह मंडी विस्तार का रास्ता हुआ साफ, 96 हैक्टेयर में विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को  परेशानियां आ रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-reporting----a-welcome-boon--path-cleared-for-bhamashah-mandi-expansion--national-board-for-wildlife-approves-expansion-across-96-hectares/article-147031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियों में शामिल भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। वर्षों से लंबित मंडी के विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 89वीं स्थायी समिति की बैठक में महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निरन्तर प्रयासों से मिली सफलता से हाड़ौती क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। भामाशाह मंडी के विस्तार से भंडारण, विपणन और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और व्यापारियों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>जाम और लम्बे इंतजार से मिलेगी निजात</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही आवक के मुकाबले मंडी में पर्याप्त शेड नहीं होने से बारिश के समय किसानों की उपज खराब होने का खतरा रहता है। विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी, राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से भी मंडी सीधी जुड़ जाएगी, इससे जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी और किसानों को उपज बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>अरसे से अटका था मामला</strong></p>
<p>मंडी से जुड़े वन भूमि के कारण विस्तार का मामला वर्षो से लम्बित था। विस्तार की स्वीकृति मिली तो फिर वन क्षेत्र से गुजर रहे राजमार्ग के किनारे एक किमी तक पौधारोपण से जुड़े नियमों के कारण विस्तार फिर से अटक गया। दिल्ली में स्पीकर बिरला और केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच हुई बैठकों के बाद नियम में शिथिलता के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) में आवेदन किया गया था। इसके बाद समिति द्वारा वर्ष 2007 में कोटा बाइपास निर्माण के दौरान निर्धारित ग्रीन बेल्ट से जुड़ी शर्तों में संशोधन कर स्वीकृति दे दी गई है, जिससे लगभग 96 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लैंड डायवर्जन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong></p>
<p>एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को आ रही परेशानियों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसमें बताया था कि सीजन में मंडी अनाज से ठसाठस भर जाती है। मंडी गेट से दो-तीन किलोमीटर लम्बी अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लग जाती है। काफी समय से मंडी के विस्तार की दरकार है। भामाशाहमंडी में खरीफ व रबी सीजन के पीक टाइम में रोजाना 2 लाख से 5 लाख बोरी कृषि जिंसों की आवक होती है। मंडी में राजस्थान ही नहीं देश के कई राज्यों से यहां अनाज आ रहा है। ऐसे में मंडी छोटी पड़ने के साथ ही मंडी प्रशासन की व्यवस्थाएं भी अब छोटी हो चुकी हैं। यार्ड फुल होने के बाद अब खुले में व सड़कों पर नीलामी करनी पड़ रही है।</p>
<p>भामाशाह मंडी का विस्तार हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंडी के विस्तार से किसानों को सुविधा के साथ व्यापार सुगम होगा साथ ही क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में कोटा की भामाशाह मंडी देश की सबसे आधुनिक कृषि मंडियों में शामिल होगी और हाड़ौती के लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>- ओम बिरला, अध्यक्ष लोकसभा</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी को विस्तार मिलने के बाद अब इसकी सुविधाओं में भी इजाफा होगा। जिसके चलते अब इसके टर्नओवर में करीब दो से तीन गुना वृद्धि होगी। वहीं अब मंडी एयरकनेक्टिीविटी से जुड़ने के साथ ही एटलेन व फोरलेन से सीधे जुड़ेगी। वहीं मंडी परिसर में रेल्वे ट्रैक का निर्माण होगा। जिससे अब माल का लदान यही से होगा। 20 टन के कांटे लगाने की योजना हैं जिससे लेबर लेस तुलाई होगी।</p>
<p><strong>-महेश खंडेलवाल, महामंत्री भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>मंडी का विस्तार होने से जो सीजन के समय पर कतारें लगती थी। वह अब खत्म होगी। किसान दो से तीन दिन तक इंतजार करते थे। अब वह इंतजार खत्म होगा। साथ ही किसानों के माल की तुरंत नीलामी होगी। जिससे अब किसानों को नीलामी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंडी का विस्तार होने से विभिन्न सुविधाओं का विस्तार होगा।</p>
<p><strong>-मनोज मीणा, सचिव, भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>भामाशाहमंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। अब विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>-जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 14:09:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नेपाल व भूटान के रास्ते घुसपैठ कर रहा चाइनीज लहसुन</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के लहसुन के दाम 10 हजार रुपए प्रति क्विं. तक टूटे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chinese-garlic-is-infiltrating-through-nepal-and-bhutan/article-97891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि मंडियों में चाइनीज लहसुन की घुसपैठ ने हाड़ौती के लहसुन उत्पादक किसानों की परेशानी को बढ़ा दिया है। प्रतिबंधित होने के बावजूद चाइनीज लहसुन तस्करी के जरिए यहां पहुंच रहा है। हाड़ौती में लहसुन का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। वर्तमान में लहसुन उत्पादक किसानों को दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। इसी बीच प्रदेश की कृषि मंडियों में चाइनीज लहसुन की बिक्री होने लगी है। जिससे हाड़ौती में उत्पादित लहसुन के दामों में गिरावट आ रही है। अभी हाड़ौती की मंडियों में चाइनीज लहसुन नहीं आया है, लेकिन राजस्थान की अन्य मंडियों में यह पहुंच रहा है। इसका असर यहां भी देखने को मिल रहा है। पिछले एक पखवाड़े में ही लहसुन के भाव 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक कम हो गए हैं। यानी किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>तस्करी के जरिए आ रहा चाइनीज लहसुन :</strong> भामाशाहमंडी के व्यापारियों के अनुसार केन्द्र सरकार ने चाइनीज लहसुन पर बैन लगा रखा है। इसके बावजूद नेपाल, भूटान और बर्मा के म्यांमार से तस्करी के जरिए भारतीय बाजारों में यह लहसुन पहुंच रहा है। यह माल राजस्थान के हाड़ौती सहित मध्य प्रदेश और गुजरात के किसानों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। अच्छे दाम मिलने की उम्मीद में किसानों ने बड़ी मात्रा में अपना माल रोक रखा है। वर्तमान में भामाशाहमंडी और थोक फलसब्जी मंडी में स्थानीय किसान लहसुन बेचने आ रहे हैं। भामाशामंडी में करीब 2 हजार क्विंटल और थोक मंडी में एक हजार क्विंटल माल रोजाना आ रहा है। एक सप्ताह में ही भाव में 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल की कमी होने से किसानों को नुकसान होने लगा है।</p>
<p><strong>रामगंजमंडी में आया चाइनीज लहसुन तो मचा हड़कंप</strong><br />अभी तक हाड़ौती की कृषि उपज मंडियों में चाइनीज लहसुन की आवक नहीं हुई है। जबकि राजस्थान की अन्य मंडियों में यह धड़ल्ले से बिक रहा है। गत दिनों रामगंजमंडी की थोक सब्जीमंडी में करीब दस कट्टे चाइनीज लहसुन के बिक्री के लिए आए तो हड़कंप मच गया। कोई अज्ञात व्यक्ति इस लहसुन को नीलामी करने के लिए सब्जीमंडी में लाया था। जांच करने पर वह लहसुन चाइनीज निकला। ऐसे में वहां मौजूद किसानों ने हंगामा करते हुए चाइनीज लहसुन की नीलामी की विरोध किया। इस पर मंडी के व्यापारियों ने इस लहसुन को नीलामी में शामिल नहीं किया। व्यापारियों का कहना है कि चाइनीज लहसुन की बिक्री से हाड़ौती के किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।</p>
<p><strong>बड़े शहरों में अधिक हो रही खपत</strong><br />भामाशाह कृषि उपज मंडी में लहसुन के प्रमुख व्यापारी भूपेन्द्र सोनी का कहना है कि देश की बड़ी मंडियां कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और नेपाल बॉर्डर के नजदीक स्थित गोरखपुर, भुवनेश्वर सहित अन्य जगहों पर बड़ी मात्रा में चाइनीज लहसुन की खपत हो रही है। इसके चलते हाड़ौती की  कृषि मंडियों में दाम टूट रहे हैं। भारत में 1.5 लाख कट्टे लहसुन की रोज मांग रहती है। कोटा संभाग में कोटा भामाशाह कृषि उपज मंडी, थोक सब्जी मंडी, बारां कृषि उपज मंडी और छीपाबड़ौद की लहसुन की विशिष्ट मंडी में बड़ी संख्या में लहसुन आता है। व्यापारी यहां से लहसुन की ट्रेडिंग करते हैं और उसके बाद बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी यहां से माल भेजा जाता है। </p>
<p><strong>चाइनीज लहसुन की ऐसे करें पहचान</strong><br />उद्यान विभाग के उपनिदेशक नंदबिहारी के अनुसार भारत और चीन में पैदा होने वाले लहसुन को पहचानना काफी आसान है। चाइनीज लहसुन दिखने में शुद्ध सफेद होता है। उसकी तुलना में भारतीय लहसुन पीले सफेद रंग का होता है। चाइनीज लहसुन में बहुत कम लहसुन की कलियां होती हैं, लेकिन इसका आकार बहुत बड़ा है, दूसरी ओर भारतीय स्थानीय लहसुन में कई कलियां होती हैं, जिसका आकार चाइनीज लहसुन से कई गुना छोटा होता है। भारतीय लहसुन की जड़ वाला भाग काला पड़ता हुआ देखा जा सकता है, जबकि चीन से निर्मित लहसुन पूरी तरह से सफेद पाया जाता है। चाइनीज लहसुन की कली छीलने के बाद एकदम सफेद रंग की निकलती है, लेकिन भारतीय लहसुन में अंकुर निकलने के बाद इसका रंग पीला दिखाई देता है। </p>
<p><strong>दिसंबर माह में ऐसे टूटे दाम</strong><br />1 दिसंबर-7000 से 34000<br />2 दिसंबर-7000 से 32000<br />3 दिसंबर-7000 से 30000<br />5 दिसंबर-7000 से 29000<br />6 दिसंबर-7000 से 28000<br />7 दिसंबर-7000 से 28500<br />8 दिसंबर-7000 से 25400<br />9 दिसंबर-5000 से 24000<br /><strong>-भाव रुपए प्रति क्विंटल में</strong></p>
<p>पिछले दो सालों से लहसुन की कीमत अच्छी मिल रही थी। पूरी फसल की लागत निकलने के बाद भी बढ़िया मुनाफा हो रहा था। अच्छे दाम की आस में पांच बीघा का माल रोक रखा था। जिसे अब मंडी में बेचा तो कम दाम मिला। सरकार को चाइनीज लहसुन की बिक्री पर रोक लगाना चाहिए।<br /><strong>-बिरधीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>प्रदेश की कृषि मंडियों में चाइनीज लहसुन की बिक्री होने लगी है। इसका असर हाड़ौती की मंडियों में भी देखने को मिल रहा है। पिछले एक पखवाड़े में ही लहसुन के भाव 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक कम हो गए हैं। इससे कई किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।<br /><strong>-भूपेन्द्र सोनी, प्रमुख लहसुन व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Dec 2024 14:41:52 +0530</pubDate>
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                <title>खाड़ी देशों में युद्ध से हाड़ौती के चावल का अटका निर्यात</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती का 90 फीसदी चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है, लेकिन इस साल खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/export-of-hadoti-rice-stuck-due-to-war-in-gulf-countries/article-97417"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध और केन्द्र सरकार की ओर से एक्सपोर्ट डयूटी पर टैक्स लगाने का खामियाजा हाड़ौती के धान (चावल) उत्पादक किसानों को उठाना पड़ रहा है। पिछले साल धान का भाव 3700 से 4500 रुपए प्रति क्विंटल था, जो इस साल घटकर 2300 से 3400 रुपए प्रति क्विंटल पर ठहर गया है। हाड़ौती का 90 फीसदी चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है, लेकिन इस साल खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। जो देश भारत से चावल से आयात करते थे उन सभी देशों ने इस बार दूसरे देशों से चावल खरीद लिया है।  इस कारण हाड़ौती का चावल बाहर विदेशों में नहीं जा रहा है। इससे यहां के चावल उत्पादक किसानों को फसल का अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा है। </p>
<p><strong>मंडियों में बम्पर आवक, लेकिन दाम काफी कम</strong><br />कोटा की भामाशाहमंडी सहित हाड़ौती की मंडियों में वर्तमान में करीब एक लाख से क्विंटल से अधिक चावल रोज बिकने आ रहा है, लेकिन इस साल दाम कम मिलने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल विदेशों में माल का एक्सपोर्ट अच्छा होने से धान का दाम 4500 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया था। इस साल स्थिति बिलकुल विपरित है। इजराइल व हमास के बीच काफी समय से युद्ध चलने के कारण धान का एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है। इससे किसानों को धान की अलग-अलग किस्मों में 1000 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान पहुंच रहा है। इसी तरह का नुकसान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी किसानों को हो रहा है।</p>
<p><strong>एक्सपोर्ट डयूटी टैक्स ने भी बिगाड़ा गणित</strong><br />चावल निर्यातक विशाल गुप्ता ने बताया कि दिसंबर 2023 में केन्द्र सरकार ने 20 फीसदी एक्सपोर्ट डयूटी लगाई थी। इसमें एक किलो चावल पर 10 रुपए की एक्सपोर्ट डयूटी लगी थी। इस पर अधिक टैक्स लगाने से चावल का निर्यात बंद कर दिया गया। इससे दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 तक विदेशी देशों ने दूसरे देशों से चावल लेना शुरू कर दिया। जिससे यहां के किसानों को चावल के भाव कम मिलने लगे। हालांकि एक्सपोर्ट डयूटी इसी साल केन्द्र सरकार ने वापस ले ली है। इसके बाद नवंबर में विदेशों में चावल का एक्सपोर्ट होना शुरू हो गया है। ऐसे में आगामी दिनों में चावल के भावों में तेजी होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>जहाजों पर हुए हमले तो बदला रूट</strong><br />भामाशाहमंडी में चावल के व्यापारी योगेश कुमार ने बताया कि धान की दाम में कमी का मुख्य कारण इजरायल के साथ ईरान व हमास का युद्ध है। युद्ध के चलते समुद्री रास्तों में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ने लगी है। बंदरगाहों पर जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं। ऐसे में दूसरे समुद्री रास्तों से लंबा फेरा लगाकर जहाजों से चावल पहुंचाया जा रहा है। इससे ज्यादा रेट होने के कारण वहां के अधिकांश देश पड़ौसी देशों से चावल का आयात करने लगे हैं। भारत से करीब 150 देशों में चावल का निर्यात किया जाता है। इनमें से प्रमुख रूप से पांच देश अमेरिका, इटली, थाइलैंड, स्पेन और श्रीलंका सबसे  बड़े आयातक देश हैं। इसके अलावा अन्य देशों में सिंगापुर, फिलीपिंस, हांगकांग, मलेशिया जैसे देश भी शामिल हैं। युद्ध के कारण अब इन देशों में चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है।</p>
<p><strong>पांच साल में निर्यात</strong><br />2020-21: 1600 से 1650 <br />2021-21:  1700 से 1800 <br />2021-22:  1900 से 2000 <br />2022-23: 2000 से 2100 <br />2023-24: एक्सपोर्ट डयूटी टैक्स से निर्यात नहीं</p>
<p>पिछले साल 4500 रुपए प्रति क्विंटल तक का चावल बिका और अच्छा मुनाफा भी हुआ था। इस बार चावल घाटे का सौदा है। 1000 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। दो से तीन साल तक चावल रखने के बाद भाव नहीं मिलने से मजबूरी में बेचकर जाना पड़ रहा है।<br /><strong>- मांगीलाल, किसान, माधोराजपुरा</strong></p>
<p>धान के भाव गिरने का मुख्य कारण खाड़ी देशों में युद्ध और केन्द्र सरकार द्वारा एक्सपोर्ट डयूटी पर टैक्स लगाना है। ऐसे में विदेशी देशों में निर्यातक का  भारत से चावल के आयात के लिए सम्पर्क कम हो गया है। अक्टूबर में टैक्स हटा दिया है। अब धीरे-धीरे भाव तेज होने की संभावना है।<br /><strong>- भानु कुमार, चावल निर्यातक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 18:47:22 +0530</pubDate>
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                <title>धरतीपुत्र लाचार, बम्पर आवक से किसान हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[भामाशाह मंडी परिसर के विस्तार की दरकार । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sons-of-the-soil-are-helpless--farmers-are-troubled-by-bumper-arrivals/article-95849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भामाशाहमंडी में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा प्रदेश की अन्य मंडियों के मुकाबले यहां किसानों को जिंस का दाम ज्यादा मिलने के कारण माल की आवक लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में प्रतिदिन दो लाख बोरी से अधिक माल मंडी में बिक्री के लिए आ रहा है। कृषि जिंसों की तुलना में मंडी परिसर छोटा पड़ने से किसानों को परेशान होना पड़ता है। भामाशाहमंडी में हाड़ौती के अलावा मध्यप्रदेश के किसान भी माल बेचने आते हैं। राज्य बजट में भामाशाहमंडी के विस्तार की घोषणा की गई थी, लेकिन अभी तक सुस्ती के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया है। कृषि विपणन विभाग ने भामाशाहमंडी के विस्तार के लिए 96 हैक्टेयर वन भूमि का प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से केन्द्र को भेज रखा है। वहां पर अभी तक मामला आगे नहीं बढ़ा है। इस कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। </p>
<p><strong>96 हैक्टेयर जमीन हस्तान्तरण का भेजा प्रस्ताव</strong><br />भामाशाहमंडी में कुल माल की आवक का तीस फीसदी माल मध्यप्रदेश से आ रहा है। मंडी प्रशासन ने आगामी 40 साल की सभावनाओं को देखते हुए विस्तार के लिए 96 हैक्टेयर जमीन हस्तान्तरण का प्रस्ताव तैयार कर केन्द्र को भेजा है। मंडी विस्तार होने के बाद जिंसों की आवक भी दोगुनी बढ़ जाएगी और जाम से भी मुक्ति मिल जाएगी। विस्तार होने के बाद मंडी परिसर में ही रेलवे यार्ड, माल गोदाम बनाए जाएंगे, ताकि मंडी में कृषि जिंसों को परिसर में ही स्टोर किया जा सके और यहीं मालगाड़ी में लदान कर बाहर भेजा जा सके। पिछले डेढ़ दशक में कोटा कृषि विपणन के मामले में राजस्थान का हब बन गया है।  भामाशाहमंडी का सालाना टर्नओवर 6000 करोड़ रुपए है, जो कोटा में सबसे बड़ा व्यवसाय है।</p>
<p><strong>फॉरेस्ट लैंड डायवर्जन के चलते अटकी फाइल </strong><br />मंडी प्रशासन के अनुसार मंडी एक्सटेंशन के लिए प्रस्ताव साल 2016 से सरकार के पास है। इसमें वन विभाग की जमीन का लैंड डायवर्जन होगा। इसके बाद यह जमीन मंडी प्रशासन को मिल पाएगी, तब एक्सटेंशन होना है. वन विभाग की जमीन मिलने में अभी समस्या आ रही है और फाइल अटकी हुई है। मंडी का एक्सटेंशन हो जाने के बाद 4 से 6 लाख बोरी रोज की आवक मंडी में हो सकेगी। फिलहाल यह दो से ढाई लाख बोरी तक ही सीमित है। इसी के चलते किसानों को माल बेचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। क्षमता बढ़ने पर शेड बढ़ाए जाएंगे। इससे किसानों को फायदा मिलेगा और उन्हें माल बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। </p>
<p><strong>प्रोसेसिंग इकाइयां लगे तो खुले समृद्धि के द्वार </strong><br />हाड़ौती अंचल में कृषि जिंसों का बपर उत्पादन होता है, लेकिन यहां प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से दूसरे राज्यों के व्यापारी यहां से कच्चा माल ले जाकर अपने राज्यों में प्रोसेसिंग कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं। हाड़ौती में ही प्रोसेसिंग इकाइयां लगे तो समृद्धि के द्वार खुल सकते हैं और सरकार का खजाना भी भर सकता है। बंपर कृषि उत्पादन के चलते भामाशाहमंडी भी अब छोटी पड़ने लबी है। प्रदेश में अकेले हाड़ौती में ही 95 फीसदी धनिया की बुवाई होती है, लेकिन प्रोसेसिंग यूनिट्स नहीं होने के कारण नामी मसाला कपनियां यहां से धनिया खरीद कर ले जाती हैं और मसाला बनाकर बेचती हैं। गुजरात और मध्यप्रदेश एग्रो प्रोसेसिंग के बड़े हब बन गए हैं। </p>
<p><strong>सोयाबीन उत्पादन में हाड़ौती अव्वल</strong><br />केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में भी हाड़ौती की धरती को पीला सोना यानी सोयाबीन उत्पादन के लिए अग्रिम पंक्ति में माना है। मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र के बाद राजस्थान देश का तीसरा बड़ा सोयाबीन उत्पादक है। कुल सोयाबीन उत्पादन में राजस्थान की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सोयाबीन फसल उत्पादन की दृष्टि से कोटा का राजस्थान में प्रथम स्थान है। खरीफ सीजन की सोयाबीन प्रमुख फसल है। हर साल करीब 6 से 7 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई होती है। उत्पादन पांच से साढ़े छह लाख मीट्रिक टन होता है। इस बार कोटा संभाग में धान की बुवाई एक लाख 70 हजार हैक्टेयर में हुई थी। अभी धान से मंडी अटी हुई है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />भामाशाहमंडी परिसर का जल्द से जल्द विस्तार होना चाहिए। इस समय किसानों को उपज बेचने के लिए काफी परेशान होना पड़ रहा है। सर्दी के मौसम में दो से तीन दिन तक मंडी के बाहर इंतजार करना पड़ता है। परिसर का विस्तान होने के बाद किसानों को काफी राहत मिलेगी।<br /><strong>- सुल्तान गुर्जर, किसान</strong></p>
<p>भामाशाहमंडी परिसर के विस्तार के मामले में कृषि विपणन विभाग और वन विभाग के स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। जमीन के सम्बंध में वन विभाग कई तरह की फॉर्मेलिटी को पूरा करता है। इस प्रक्रिया में समय लगता है। जो भी जानकारी निदेशालय मांगता है हम वो भिजवाते रहते हैं। मंडी का विस्तार होने से किसानों को काफी सुविधाएं मिलेंगी।<br /><strong>- शशिशेखर शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विपणन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Nov 2024 15:14:01 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर कृषि जिंसों के ढेर, मंडी में लगा जाम</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में सबसे ज्यादा आवक धान की हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/piles-of-agricultural-commodities-on-the-roads--jam-in-the-market/article-62703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/111-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भामाशाहमंडी में कृषि जिंसों की बम्पर आवक का सिलसिला जारी है। इससे व्यवस्थाएं गड़बड़ा रही है। बम्पर आवक के कारण बुधवार को मंडी परिसर में सड़क पर कृषि जिसों की नीलामी करनी पड़ी। इसके बावजूद दिनभर में केवल 3 लाख बोरी कृषि जिंसों की ही नीलामी हो पाई। इतना ही माल मंडी के बाहर वाहनों में भरा पड़ा है। इस दौरान हम्मालों और मजदूरों की कमी से भी व्यवस्थाएं बिगड़ रही है। वर्तमान में सबसे ज्यादा आवक धान की हो रही है। यहां पर मध्यप्रदेश के किसान भी अपना माल ला रहे हैं। इससे धान की बम्पर आवक हो रही है।</p>
<p><strong>पर्याप्त लदान नहीं होने से दिक्कत</strong><br />कृषि उपज मंडी में उपज का पर्याप्त लदान नहीं होने के चलते बुधवार को मंडी अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई। मंडी में माल का संपूर्ण लदान नहीं होने के चलते यहां पर उपज बेचने आए किसानों को दिनभर धक्के खाने पड़े। मंडी में आवक के अनुरूप खरीद किए गए माल का लदान नहीं होने से यहां पर हालात बेकाबू रहे। मंडी में रात को अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों को प्रवेश के लिए इंतजार करना पड़ा। हम्मालों ने बताया कि यहां पर सभी सडकों पर जाम के हालात पैदा होने के बाद यहां से मंडी लदान किए जाने वाले माल के वाहनों की निकासी नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>तीन दिन बंद रहेगी भामाशाहमंडी</strong><br />भामाशाहमंडी में मतदान दिवस व कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर तीन दिन का अवकाश रहेगा। सचिव जवाहर लाल नागर ने बताया कि 25 नवम्बर शनिवार को मतदान दिवस, 26 को रविवार व सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा पर अवकाश घोषित किए जाने के कारम मंडी में तीन दिन 25 से 27 नवम्बर तक अवकाश रहेगा। उन्होंने बताया कि गुरुवार व शुक्रवार को मंडी खुलेगी। अभी मंडी के बाहर जिंस से भरे वाहनों की लम्बी कतार के चलते अवकाश के दिनों में किसान अपनी कृषि जिंस लेकर मंडी में नहीं आएं।</p>
<p><strong>प्रवेश की यह रहेगी व्यवस्था</strong><br />सचिव नागर ने बताया कि 27 नवम्बर सोमवार रात 11 बजे से 3 बजे तक गेट नं. 2 व 28 नवम्बर को तडके 3 बजे से सुबह 6 बजे तक गेट नं. 1 से ट्रक व बड़े वाहनों को प्रवेश दिया जाएगा। इस समय कृषि जिंसों की बम्पर आवक हो रही है। इस कारण व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए यह समय निर्धारित किया गया है। </p>
<p><strong>धान की सर्वाधिक आवक </strong><br />मंडी के व्यापारियों ने बताया कि मंडी में बुधवार को 3 लाख बोरी कृषि जिंसों की आवक हुई जिसमें धान की आवक सर्वाधिक रही। इसी तरह मंडी में प्रवेश नहीं मिल पाने से करीब 3 लाख बोरी से अधिक कृषि जिंस से भरे वाहन मंडी के बाहर कतार में खड़े रहे। गुरुवार को इससे भी ज्यादा कृषि जिंस आने की सम्भावना है। इसलिए शनिवार से तीन दिन का अवकाश रहने से मंडी परिसर में जमा माल का पूरी तरह उठाव हो जाएगा।</p>
<p>भामाशाहमंडी में तीन दिन 25 से 27 नवम्बर तक अवकाश रहेगा।  गुरुवार व शुक्रवार को मंडी खुलेगी। अभी मंडी के बाहर जिंस से भरे वाहनों की लम्बी कतार के चलते अवकाश के दिनों में किसान अपनी कृषि जिंस लेकर मंडी में नहीं आएं।<br /><strong>- जवाहरलाल नागर, सचिव भामाशाहमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Nov 2023 14:05:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> भामाशाहमंडी में कृषि जिंसों की बम्पर आवक से बिगड़ी व्यवस्थाएं</title>
                                    <description><![CDATA[मंडी में भारी आवक के कारण कतार में खड़े जिंसों से भरे वाहनों को तीन से चार दिन में भी मंडी में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/arrangements-deteriorated-due-to-bumper-arrival-of-agricultural-commodities-in-bhamashahmandi/article-61627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/gan-(7).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दीपावली का त्यौहार नजदीक आने से कोटा संभाग की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी में कृषि जिंसों की आवक बढ़ती जा रही है। बम्पर आवक से मंडी परिसर फुल हो गया। इस कारण व्यवस्थाएं गड़बड़ाने लगी है। भामाशाहमंडी में मंगलवार को करीब 2 लाख 20 हजार कट्टे जिन्स की आवक हुई। कृषि जिन्स की भारी आवक से मंडी ठसाठस भर गई है। लगातार आवक होने से मंडी से अनाज का उठाव नहीं हो रहा है। ऐसे में किसानों को अपनी जिंस बेचने के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। दिनों-दिन धरतीपुत्रों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।</p>
<p><strong>फिर कैसे मनाएंगे दिवाली का त्यौहार</strong><br />दीपावली का त्यौहार कुछ दिन बाद है। इस कारण कोटा, बारां व झालावाड़ जिले सहित मध्यप्रदेश के किसान काफी संख्या में अपनी कृषि जिंस बेचने के लिए भामाशाहमंडी आ रहे हैं। कई किसान कृषि जिन्स से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व ट्रक लेकर कई दिन से मंडी के बाहर खड़े हैं, लेकिन उनका नम्बर नहीं आ पा रहा है। दीपावली की खरीदारी के लिए किसान जल्द से जल्द मंडी में अपनी कृषि जिन्स बेचना चाहते हैं। इसके बावजूद मंडी में प्रवेश नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है। ऐसे में किसानों को चिंता सता रही है कि वे इस बार दीपावली की खुशियां कैसे मनाएंगे।</p>
<p><strong>मंडी में केवल रात में ही प्रवेश</strong><br />कृषि जिंस की बम्पर आवक के कारण मंडी प्रशासन ने वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित कर रखा है। माल का उठाव करने के लिए मंडी में कृषि जिंसों से भरे वाहनों की एंट्री केवल देर रात 3 से 6 बजे तक ही दी जा रही है। मंडी में भारी आवक के कारण कतार में खड़े जिंसों से भरे वाहनों को तीन से चार दिन में भी मंडी में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इस समय सबसे ज्यादा धान की आवक हो रही है। मंगलवार को मंडी में करीब 1.75 लाख बोरी धान की नीलामी हुई। इतना ही धान मंडी के बाहर ट्रकों व ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरा हुआ था। वर्तमान में 70 प्रतिशत धान मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आ रहा है। हाड़ौती अंचल से अभी मात्र 30 प्रतिशत ही आवक हो रही है।</p>
<p><strong>किसानों ने यूं बताई पीड़ा</strong><br />पांच दिन पहले भामाशाहमंडी से करीब एक किमी दूर वाहनों के पीछे कतार में अपना ट्रक खड़ा किया था। इसके बाद रोजाना रेंग-रेंग कर ही आगे बढ़ रहे हैं। मंगलवार को मंडी गेट से कुछ दूरी पर ही पहुंच पाए हैं। इतने दिन में भी केवल एक किमी की खिसक पाए हैं। अब मंडी मेें प्रवेश कब मिलेगा यह तो भगवान ही जाने। <br /><strong>- जौहरीलाल, किसान नीमच</strong></p>
<p>देर रात को मंडी गेट खोलते है और 5.30 व 6 बजे ही बंद कर देते है। कुछ गाडियां ही अन्दर लेते है। 5-6 दिन से ज्यादा हो गया कतार में लगे हुए। चालक व किसान परेशान हो रहा है। जब गेट खोलते है तो गाड़ी आगे लेने के चक्कर में झगड़े हो रहे और गाडिय़ों में भी नुकसान हो रहा है। भूखे प्यासे यहां बैठे हैं।  <br /><strong>-भरोसी जाटव, किसान मंदसौर</strong></p>
<p>वर्तमान में भामाशाहमंडी में कृषि जिंसों की ज्यादा आवक हो रही है। इससे मंडी की व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाती है। सबसे ज्यादा आवक धान की हो रही है। वहीं मध्यप्रदेश से भी काफी माल आ रहा है। इसलिए माल के ज्यादा से ज्यादा उठाव करने के लिए वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित किया है। किसानों की समस्या के समाधान का प्रयास करेंगे। <br /><strong>- महेश खंडेलवाल, महासचिव, कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्ट एसोसिएशन </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Nov 2023 16:53:27 +0530</pubDate>
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                <title>लहसुन का निर्यात जेब को दे रहा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[जिले भर के किसानों का लहसुन जिले भर में ही नहीं देश के विभिन्न भागों में पसंद किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/export-of-garlic-is-giving-a-blow-to-the-pocket/article-53423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/lahasun-ka-niryaat-jeb-par-bhare-pad-raha-hai...kota-news-02-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। महंगाई के चलते बेहाल आमजन को अब लहसुन भी झटका देने लगा है। अदरक और टमाटर के बाद इस साल लहसुन के दाम भी काफी उछल गए हैं। विदेशी मांग के कारण कोटा में लहसुन के भाव 150 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गए हैं, जो अब तक सर्वाधिक बताए जा रहे हैं। कोटा से रोजाना चार हजार क्विंटल से अधिक लहसुन बांग्लादेश भेजा जा रहा है। ऐसे में मांग के अनुरूप मंडियों में आवक कम होने के कारण दाम में तेजी बनी हुई है। इससे आमजन को हर तरफ से महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>आखिर क्यों बढ़े लहसुन के दाम</strong><br />शहर के लहसुन व्यापारियों के अनुसार पिछले वर्ष लहसुन का भाव नहीं मिलने से जिले भर के किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था। जिले में लहसुन की बम्पर पैदावार के कारण किसानों को मंडियों में खरीदार नहीं मिले और एक समय दाम 4 रुपए प्रति किलो पर आ गए थे। इससे किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था। इस कारण पिछले साल की तुलना में लहसुन का रकबा इस साल कम हो गया है। ऐसे में मंडियो में माल की आवक कम हो रही है। वहीं काफी मात्रा में बांग्लादेश लहसुन भेजा जा रहा है। ऐसे में वर्तमान में लहसुन का दाम 150 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है।</p>
<p><strong>ग्रेडिंग यूनिट से कर रहे छंटाई</strong><br />भामाशाह मंडी के लहसुन व्यापारी हरीश कुमार ने बताया कि मंडी में करीब दर्जन ग्रेडिंग यूनिट से लहसुन की छंटाई कर देश के विभिन्न प्रदेशों में भिजवाया जा रहा है। इसमें दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्से समेत महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और गुजरात के विभिन्न हिस्सों में यहां से लहसुन की छंटाई करके पैक कर भिजवाया जा रहा है। स्टॉकिट्स और बड़े व्यापारियों में कोटा के लहसुन की खासी मांग रहती है। वहीं बांग्लादेश भी काफी मात्रा में यहां के लहसुन की खरीद कर रहा है। प्रतिदिन चार क्विंटल से अधिक लहसुन बांग्लादेश निर्यात किया जा रहा है। </p>
<p><strong>भाव अच्छा मिलने से किसान खुश</strong><br />पिछले वर्ष लहसुन का भाव नहीं मिलने से जिले भर के किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था। वहीं इस वर्ष भाव में बढ़ोतरी होने से किसान खासे खुश नजर आ रहे हैं। किसानों का मानना है कि पिछले वर्ष हुए नुकसान की भरपाई इस वर्ष हो रही है। जिले भर के किसानों का लहसुन जिले भर में ही नहीं देश के विभिन्न भागों में पसंद किया जा रहा है। वहीं यही लहसुन कई अन्य देशों में भी भेजा जा रहा है। यह सुनकर भी किसान खासे खुश नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>इसलिए बढ़े लहसुन के दाम</strong><br />- लहसुन का रकबा कम रहने से इस बार प्रोडक्शन भी कम<br />- डिमांड और सप्लाई के अंतर के चलते बढ़े दाम<br />- लहसुन का एक्सपोर्ट भी हो रहा, जिसके चलते भी डिमांड बढ़ी<br />- सब्जी की श्रेणी में आने से लंबे समय तक नहीं कर सकते स्टोर<br />- किसान दूसरी फसल की तैयारी नहीं में, इसलिए मंडी में आवक कम<br />- बारिश के मौसम में लहसुन में खराबे की आशंका<br />-  माल की उपलब्धता नहीं होने से लगातार बढ़ रहे दाम<br />-  विदेशों में मांग के चलते भी दाम में आ रही तेजी</p>
<p><strong>कोटा संभाग में लहसुन उत्पादन का गणित</strong><br />-  पिछले साल से करीब 30 फीसदी कम उत्पादन<br />- पिछले साल 7.28 लाख मीट्रिक टन तो इस साल 5 लाख मीट्रिक टन उत्पादन<br />- मांग कम होने से लहसुन के दाम 4 रुपए किलो तक गिरे थे<br />- तीन माल पहले मंडियों में 30 से 40 रुपए प्रति किलो था दाम<br />- अब आवक कम होने से 150 रुपए किलो पहुंचे दाम</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पहले अदरक फिर टमाटर और अब लहसुन के दाम ने रसोई का बजट ही गड़बड़ा कर रख दिया है। सब्जियों के दाम भी तेज बने हुए हैं। तीन माह पहले लहसुन 30 से 40 रुपए किलो मिल रहा था, जो अब 150 रुपए किलो पर पहुंच गया है। इसके दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। अब तो इसे खरीदना ही बंद कर दिया है।<br /><strong>-आरती देवी, गृहिणी बंगाली कॉलोनी छावनी</strong></p>
<p>इस बार देश में सभी जगह लहसुन का उत्पादन कम हुआ था। इसलिए दाम लगातार बढ़ रहे हैं। लहसुन सब्जी की श्रेणी में आने के कारण 2 से 3 महीने तक ही इसे रखा जा सकता है। इसलिए स्टॉक भी ज्यादा नहीं रख सकते हैं।  वहीं लहसुन का सबसे ज्यादा निर्यात बांग्लादेश को किया जा रहा है। विदेशों में डिमांड होने के चलते भी लहसुन के दाम भी बढ़ रहे हैं।<br /><strong>-भूपेन्द्र सोनी, प्रमुख लहसुन व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2023 17:38:43 +0530</pubDate>
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                <title>पहली बार भामाशाह मंडी में सुगंधा धान की आवक</title>
                                    <description><![CDATA[भामाशाह मंडी में इस साल पहली बार सुगंधा धान की आवक हुई है। मंडी में लगभग 100 बोरी धान बिकने के लिए आया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/arrivals-of-sugandha-paddy-in-bhamashah-mandi-for-the-first-time/article-13746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/new.jpg4.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। भामाशाह मंडी में इस साल पहली बार सुगंधा धान की आवक हुई है। मंडी में लगभग 100 बोरी धान बिकने के लिए आया। इस धान के दाम अच्छे मिलने से किसान का चेहरा खिल उठा। आमतौर पर धान की फसल बरसात के मौसम में तैयार की जाती है। इस साल रावतभाटा क्षेत्र के किसान ने नवाचार करते हुए पहली बार बरसात के पहले ही धान सुगंधा की फसल तैयार की। अब उसे बेचने के लिए मंडी में लाया है।<br /><br /> फसल चक्र को कृषि विभाग में 2 श्रेणियों में बांट रखा है। जिन्हें रबी व खरीफ की श्रेणी माना जाता है। इस किसान ने जो धान सुगंधा की फसल की है वह न तो रबि में आती है नहीं खरीफ श्रेणी में। रावतभाटा क्षेत्र के धावद कला निवासी रामभरोसे ने बताया कि राणा प्रताप सागर के डूब क्षेत्र में इस बार गर्मी के मौसम भी पर्याप्त पानी था इस कारण उसने धान की फसल करने का निर्णय किया था। धान की फसल में पानी की ज्यादा जरूरत होती है। भरपूर पानी होने से धान की फसल अच्छी हो गई। मंडी में फसल के दाम भी अच्छे मिल गए। इस फसल से उसे 340000 की कमाई हो गई। रावतभाटा क्षेत्र के किसान ने गर्मी के मौसम में इस फसल को बोया था। राणा प्रताप सागर बांध के डूब क्षेत्र में किसान ने इस फसल को तैयार किया। करीब 2 माह तक भरपूर पानी के बीच इसमें सिंचाई की। यह फसल मात्र 60 दिन की अवधि में ही तैयार हो जाती है। भामाशाह मंडी में करीब 100 बोरी बेचने के लिए लाए किसान को अच्छे दाम मिलने से उसका चेहरा खिल उठा। मंडी में 3401 प्रति क्विंटल की बोली लगाई। मंडी के प्रमुख व्यापारी महेश खंडेलवाल ने बताया कि इस फसल को बरसात के मौसम में तैयार किया जाता है लेकिन इस किसान ने गर्मी में ही इस फसल को तैयार कर लिया।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 15:41:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उदघाटन के इंतजार में ग्रेडिंग मशीन </title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की सबसे बड़ी मंडी भामाशाह मंडी में ग्रेडिंग मशीन खराब होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 300000 की लागत से यह मशीन तैयार करवाई गई थी। 6 माह बाद भी इसका उद्घाटन नहीं होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/grading-machine-waiting-to-be-inaugurated/article-11811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/132.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एशिया की सबसे बड़ी मंडी भामाशाह मंडी में ग्रेडिंग मशीन खराब होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 300000 की लागत से यह मशीन तैयार करवाई गई थी। 6 माह बाद भी इसका उद्घाटन नहीं होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस कारण किसानों को अपनी फसल की साफ सफाई करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><br />किसानों ने बताया कि मंडी में ग्रेडिंग मशीन तैयार है। इसके बावजूद उसे चलाया नहीं जा रहा है। जिससे किसानों को मंडी के बाहर जाकर अपनी फसल की साफ सफाई करवानी पड़ रही है। इसके लिए किसानों को प्रति क्विंटल डेढ़ सौ रुपए का भुगतान करना पड़ता है। यदि मंडी परिसर में स्थित ग्रेडिंग मशीन को चालू कर दिया जाता है तो किसानों को फायदा ही मिलेगा। इस मशीन के माध्यम से 50 रुपए प्रति क्विंटल में ही फसल की साफ सफाई हो जाएगी। अभी किसान को 1 क्विंटल पर 100 का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी प्रशासन को इस संबंध में कई बार अवगत करवाया लेकिन किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 14:30:58 +0530</pubDate>
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                <title> किसानों के अरमानों पर बारिश ने फेरा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[भामाशाहमंडी परिसर में बने टीनशेडो में स्थानीय व्यापारियों की ओर से किए गए कब्जोंं के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि टीनेशेडो पर कब्जों के कारण प्राकृतिक आपदा होने पर किसानों को नुकसान हो सकता है। यदि समय रहते टीनशेड खाली हो जाते तो किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-rain-threw-water-on-aspirations-of-the-farmers/article-10420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/kissano-ke-arman-par-barish-fera-paani.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पश्चिमी विक्षोभ के चलते बदले मौसम ने सोमवार शाम को कहर बरपा दिया। शाम को तेज अंधड़ के साथ हुई बारिश ने भामाशाहमंडी में किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम के कारण किसानों को अपनी फसल बचाने का मौका ही नहीं मिल पाया है। खुले में रखी कई किसानों की फसल पानी से भीग गई। बाद में किसानों ने मंडी प्रशासन से तिरपाल की व्यवस्था कर अपनी फसल को बचाने का प्रयास किया है। <br /><br />भामाशाह कृषि उपजमंडी में विभिन्न प्रकार की कृषि जिंसों की रोजाना करीब 40 हजार बोरी की आवक हो रही है। इनमें गेहूं, सरसों, चना व लहसुन शामिल हैं। लहसुन के भी प्रतिदिन करीब आठ हजार कट्टों की आवक बनी हुई है। सोमवार को भी विभिन्न स्थानों से किसान अपनी कृषि जिसों को बेचने के लिए लाए थे। दिन में धूप में तेजी के चलते कई किसान शाम को अपन जिंस बेचने आए थे। शाम को करीब छह बजे बाद अचानक मौसम बदला और तेज अंधड़ के साथ बारिश शुरू हो गई। अचानक मौसम बदलने से किसान सम्भल नहीं पाए। बाद में मंडी प्रशासन से तिरपाल लेकर आए और अपनी फसलों को बचाने का प्रयास किया।<br /><br /><strong>इसलिए आई परेशानी</strong><br />किसानों की फसलों को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए मंडी परिसर में प्रशासन ने अलग-अलग यार्डों में टीनशेड लगवा रखे हैं। इनमें से कुछ यार्डों में स्थानीय व्यापारियों ने  कब्जा जमा रखा है। व्यापारी, किसानों से कृषि जिंस खरीदकर इन टीनशेडों के नीचे जमाकर  कब्जा कर लेते हैं। ऐसे में किसानों को अपनी कृषि जिंस के ढेर खुले में ही करने पड़ते हैं।  टीनशेड के नीचे जगह नहीं मिलने से कुछ किसानों ने अपनी जिंस के ढेर सड़क पर कर रखे थे। इस कारण इन किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।<br /><br /><strong>मंडी प्रशासन से लाने पड़े तिरपाल</strong><br />दूरदराज के गांवों से आए किसान बारिश से बचाव के लिए कोई इंतजाम करके नहीं लाए थे। अचानक बदले मौसम के कारण किसानों में अफरा तफरी मच गई। स्थानीय कर्मचारियों ने किसानों को मंडी प्रशासन के पास तिरपाल उपलब्ध होने की जानकारी दी। इसके बाद किसान मंडी समिति कार्यालय पहुंचे। वहां पर एक हजार रुपए सिक्योरिटी राशि जमा कराने के बाद किसानों को तिरपाल उपलब्ध करवाए गए। तिरपाल वापस जमा करवाने के बाद उक्त राशि किसानों को लौटा दी जाती है। <br /><br /><strong>यदि जगह मिल जाती तो</strong><br />मोरुकला के किसान रामजीलाल सेन व जाखडोंद के त्रिलोक नागर ने बताया कि टीनशेड में जगह नहीं होने से सड़क पर खुले में गेहूं के ढेर कर रखे थे। अचानक से मौसम बदला  और अंधड़ के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ समझ ही नहीं पाए। बाद में मंडी प्रशासन से तिरपाल लाकर गेहूं पर डाला। यदि टीनशेड में जगह मिल जाती तो परेशानी नहीं होती। <br /><br /><strong>दैनिक नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />भामाशाहमंडी परिसर में बने टीनशेडो में स्थानीय व्यापारियों की ओर से किए गए कब्जोंं के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि टीनेशेडो पर कब्जों के कारण प्राकृतिक आपदा होने पर किसानों को नुकसान हो सकता है। यदि समय रहते टीनशेड खाली हो जाते तो किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ता।<br /><br /> बारिश से फसलों को बचाने के लिए मंडी प्रशासन के पास तिरपाल की व्यवस्था की है, जो किसानों को बिना राशि के उपलब्ध करवाए जाते हैं। टीनशेड खाली करवाने के लिए भी समय-समय पर नोटिस दिए जाते हैं।<br /><strong>- जवाहरलाल नागर, सचिव भामाशाहमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 15:22:08 +0530</pubDate>
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                <title>टीनशेड पर व्यापारियों का कब्जा, किसानों का माल खुले में पड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की प्रमुख अनाज मंडी में शुमार भामाशाह कृषि उपजमंडी में अभी भी अव्यवस्था का आलम बना हुआ है। लम्बा चौड़ा परिसर और टीनशेड की व्यवस्था होने के बावजूद किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टीनशेड पर व्यापारियों ने कब्जा कर रखा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/traders-occupied-tinshed--farmers--goods-were-lying-in-the-open/article-10334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/teen-shed-par-vyapariyo-la-kabja.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एशिया की प्रमुख अनाज मंडी में शुमार भामाशाह कृषि उपजमंडी में अभी भी अव्यवस्था का आलम बना हुआ है। लम्बा चौड़ा परिसर और टीनशेड की व्यवस्था होने के बावजूद किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टीनशेड पर व्यापारियों ने कब्जा कर रखा है। जिससे भामाशाहमंडी में आने वाले किसानों को अपने माल का ढेर खुले आसमान के तले करना पड़ता है। यहीं पर व्यापारी वर्ग आकर किसान के माल की बोली लगाता है। इस दौरान कोई प्राकृतिक आपदा हो जाए तो इसका नुकसान किसान के खाते में डाल दिया जाता है। पूर्व के सालों में ऐसे कई घटनाक्रम हो चुके हैं, जिनमें किसानों को तेज हवा व बारिश से नुकसान उठाना पड़ा था। वर्तमान में भामाशाह मंडी मे रोजाना विभिन्न जिंसों की करीब 45 हजार बोरी की आवक हो रही है। इनमें लगभग 15 से 20 हजार बोरी गेहूं और लगभग 7 से 8 हजार कट्टे लहसुन की आवक है। इसके अलावा चना, मसूर व अन्य कृषि जिंस शामिल हैं। <br /><br /><strong>यह नजर आई स्थिति</strong><br />भामाशाहमंडी में शुक्रवार को चारों तरफ अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई थी। सुबह से ही गेहूं व लहसुन से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मंडी में प्रवेश कर रही थी। लहसुन और गेहूं यार्ड में बने टीनशेडो पर व्यापारियों ने अपना माल जमाकर कब्जा कर रखा था। ऐसे में किसानों को मजबूरी में अपने माल का ढेर टीनशेड के बाहर करना पड़ा। दोपहर के समय तो सड़कों पर जगह-जगह कृषि जिंस के ढेर लग गए थे। खुले में ढेर करने से किसान तपती दोपहरी में बेहाल हो गए। माल की नीलामी में समय लगता है ऐसे में किसान आसपास छांव की तलाश करते रहे। काफी समय बाद माल की बोली लगने पर किसानों को तेज धूप से राहत मिली।<br /><br /><strong>व्यापारियों के माल से अटे टीनशेड</strong><br />भामाशाहमंडी में रोजाना माल की आवक हो रही और रोजाना ही बोली लगाई जा रही है। इसके बावजूद टीनशेड खाली नहीं हो पा रहे हैं। इसका सबसे कारण यह सामने आया कि किसानों से खरीदे गए माल को व्यापारियों द्वारा टीनशेड के नीचे कब्जा करके जमा दिया जाता है। उसके बाद माल का समय पर उठाव नहीं किया जाता है।इस कारण टीनशेड कभी खाली ही नहीं हो पाते हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। टीनशेड के बाहर पड़ा माल यदि बारिश से खराब हो जाता है तो किसानों को ही इसका नुकसान वहन करना पड़ता है। <br /><br /><strong>अगर राम भी रुठ गए तो</strong><br />भामाशाहमंडी में माल बेचने आए किसानें ने बताया कि इस समय भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। वहीं मौसम विभाग ने आगामी दिनों में आंधी और प्री मानसून बारिश की चेतावनी जारी की है। <br />टीनशेड के अभाव में उनका पूरा माल खुले में पड़ा हुआ है। यदि अचानक से बारिश हो जाती है तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे। राज तो उनसे पहले ही रुठा हुआ और अगर राम भी रुठ गए तो उनका क्या होगा।<br /><br /><strong>गर्मी में यह प्यास है बड़ी</strong><br />भामाशाहमंडी परिसर काफी बड़ा होने से अलग-अलग कृषि जिंसों के लिए यार्ड बना रखे हैं। मंडी में कई जगह पर वाटर कूलर होने की बात बताई जा रही थी, लेकिन मौके पर अधिकांशों यार्डों में वाटर कूलर नजर नहीं आए। कई यार्डों में पक्की प्याऊ बनी हुई हैं। जिनमें रखी मटकियों से पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। तेज गर्मी के कारण मटकियों का पानी भी उबलने लगा है। ऐसे में गर्म पानी से ही किसानों व मंडी में काम करने वाले मजदूरों को प्यास बुझानी पड़ रही है। वहीं प्याऊ की दूरी भी किसानों व मजदूरों पर भारी पड़ रहा है। एक यार्ड में एक ही प्याऊ है। यार्ड काफी लम्बा होता है। इसलिए प्यास बुझाने के लिए किसानों व मजदूरों को काफी दूरी तय करनी पड़ती है।<br /><br /> भामाशाहमंडी परिसर में टीनशेड किसानों की सुविधा के लिए लगाए गए हैं। इन टीनशेडों में रखे माल को हटाने के लिए समय-समय पर व्यापारियों को नोटिस दिए जाते हैं। वहीं हर दिन माल उठाव के लिए मुनादी भी करवाई जाती है। यदि फिर भी व्यापारी अपना माल नहीं उठाता है तो उसे जब्त कर किसान भवन में रखवा दिया जाता है। मंडी में पेयजल की व्यवस्था के लिए यार्डों में प्याऊ लगी हुई। इनमें पर्याप्त मात्रा में मटकियां रखी हुई है। यदि परेशानी आ रही है तो मामले को दिखवाया जाएगा। <br /><strong>-जवाहरलाल नागर, सचिव भामाशाहमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 15:57:27 +0530</pubDate>
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