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                <title>भारत-साइप्रस सम्बन्ध रणनीतिक साझेदारी में बदले : भारत में निवेश को दोगुना करेगा साइप्रस, मोदी ने कहा- वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के साथ भारत के रिश्तों को नई मजबूती देते हुए उन्हें रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने की घोषणा की। पीएम ने कहा कि पिछले दशक में साइप्रस का भारत में निवेश दोगुना हुआ है और अगले 5 वर्षों में इसे फिर दोगुना करने का लक्ष्य है। दोनों देशों ने शांति, संप्रभुता और वैश्विक संस्थानों में सुधार पर सहमति जताई।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-cyprus-relations-will-turn-into-a-strategic-partnership-cyprus-will/article-154688"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/6622-copy76.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के साथ भारत के संबंधों को मजबूत और भविष्य की दृष्टि पर आधारित बताते हुए कहा है कि दोनों देशों ने इन्हें नई गति देने के लिए अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने का निर्णय लिया है। दोनों देशों ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की जरूरत पर भी बल दिया है। मोदी ने भारत की तीन दिन की यात्रा पर आए साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ शुक्रवार को यहां द्विपक्षीय बातचीत के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य में यह बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि<span>  </span>पिछले एक दशक में, साइप्रस से भारत में निवेश बढ़कर लगभग दोगुना हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास बढऩे और भारत - यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से तमाम नई संभावनाएं बनी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका लाभ उठाते हुए , हम अगले 5 वर्षों में इस<span>  </span>निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य रख रहे हैं। और इस संकल्प को साकार करने के लिए, आज हम अपने विश्वसनीय संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं। मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस की मित्रता मजबूत<span>  </span>और भविष्य की दृष्टि पर आधारित है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र और कानून के शासन जैसे मूल्यों में साझा विश्वास, हमारी साझेदारी के आधार हैं। हम सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हैं। भारत इन सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आगे भी रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-साइप्रस, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों की शीघ्र समाप्ति के प्रयासों का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, आज हमने वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे। हम इस बात पर भी एकमत हैं कि बढ़ती हुई वैश्विक चुनौतियां के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार महत्वपूर्ण है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:50:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला ने की मोदी से मुलाकात, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोम में इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर अहम बातचीत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/italian-president-sergio-mattarella-met-modi-and-discussed-various-aspects/article-154492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/italy.png" alt=""></a><br /><p>रोम। इटली की दो दिन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को यहां इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के बारे में बातचीत की। उन्होंने कहा ,"मैंने रोम में राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात की। हमने भारत और इटली के बीच मित्रता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।</p>
<p>हमने इस बारे में बात की कि हमारे देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रो में सहयोग कैसे बढा सकते हैं। "राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मोदी इटली की राष्ट्रपति जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद उनका स्वदेश लौटने का कार्यक्रम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:34:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दक्षिण कोरिया के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत, रक्षा मंत्री के साथ बैठक के बाद बोले राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[सिंह ने दक्षिण कोरिया दौरे में रक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दी। सियोल में दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री आह्न ग्यु बैक से मुलाकात के दौरान कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। राजनाथ ने क्षेत्रीय शांति, तकनीकी सहयोग और रक्षा संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-will-be-a-special-strategic-partnership-with-south-korea/article-154453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh2.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण में मंगलवार को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री के साथ बैठक के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री के साथ उनकी बैठक अत्यंत सफल रही और इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, साइबर सहयोग और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर किये। बैठक के बाद सिंह ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, सियोल में मेरे दक्षिण कोरियाई समकक्ष आह्न ग्यु बैक के साथ उत्कृष्ट बैठक हुई। हमने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और तकनीकी सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता के साथ भारत-कोरिया गणराज्य रक्षा, रक्षा उद्योग और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सफल बैठक रही, क्योंकि भारत और कोरिया ने रक्षा साइबर सहयोग को बढ़ावा देने, भारत के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय और कोरिया गणराज्य के कोरिया राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच तथा संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना सहयोग से संबंधित समझौतों का आदान-प्रदान किया, जिससे हमारी साझेदारी और अधिक मजबूत तथा बहुआयामी बनी। रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के और मजबूत करने की दिशा में आगे बढऩे की अपेक्षा है। सिंह ने कोरिया में वीर सैनिकों के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि भी अर्पित की। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने कहा, कोरिया के राष्ट्रीय समाधि स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने अपने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस, समर्पण और देशभक्ति की भावना सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। भारत, कोरिया गणराज्य के वीरों की विरासत का सम्मान करने में उसके साथ एकजुटता से खड़ा है। इससे पहले सोल पहुंचने पर सिंह ने कहा था कि उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत-कोरिया रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 17:06:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का वियतनाम-कोरिया दौरा: द्विपक्षीय सहभागिता के दायरे का होगा विस्तार, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों पर चर्चा संभव </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करना, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है। वह दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/defense-minister-rajnath-singhs-visit-to-vietnam-korea-will-expand-the/article-154197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों को मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया की यात्रा पर रवाना हुए। रक्षा मंत्रालय ने आज बताया कि राजनाथ सिंह 18 से 19 मई तक वियतनाम की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जिसके बाद वह 19 से 21 मई तक दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। राजनाथ सिंह ने दोनों देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले सोशल मीडिया में एक पोस्ट में दोनों एशियाई देशों की यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त किया ताकि द्विपक्षीय सहभागिता के दायरे का और विस्तार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस दौरान मुख्य ध्यान रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों को मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने पर होगा, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्री की वियतनाम यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है, जिसे पांच से सात मई तक वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित किया गया था। राजनाथ सिंह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी के लिए 2030 तक के संयुक्त दृष्टि वक्तव्य पर रक्षा मंत्री की 2022 की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। यह दृष्टि वक्तव्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित करता है। दोनों लोकतांत्रिक देशों की क्षेत्र में शांति और समृद्धि में समान रुचि है।</p>
<p>राजनाथ सिंह की यह यात्रा 19 मई को वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती के अवसर के साथ भी मेल खाती है। रक्षा मंत्री हो ची मिन्ह समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और सम्मान प्रकट करेंगे। दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आह्न ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। मंत्रीगण दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे और द्विपक्षीय सहभागिता को और मजबूत करने के लिए नई पहलों पर विचार करेंगे। वे साझा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</p>
<p>रक्षा मंत्री रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चोल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। कोरियाई युद्ध में भारत का योगदान इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से परिभाषित होता है। भारत द्वारा इस युद्ध का समर्थन करने का निर्णय भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस इकाई को तैनात करके युद्ध में मानवीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया था। तीन वर्षों से अधिक समय तक सेवा देते हुए इस इकाई ने दो लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया और लगभग 2,500 शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएं संपन्न कीं, साथ ही अनेक नागरिकों का भी उपचार किया। भारत का दूसरा प्रमुख योगदान तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग की अध्यक्षता था, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रस्ताव था और जिसे बहुमत से स्वीकार किया गया। इसके अनुसार भारत की संरक्षक सेना, भारतीय सेना की 5,230 सैनिकों वाली टुकड़ी ने युद्धोत्तर चरण में लगभग 2,000 युद्धबंदियों की शांतिपूर्ण वापसी सुनिश्चित की।</p>
<p>शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए 21 मई को देशभक्त एवं पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल के साथ भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन प्रस्तावित है। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' और कोरिया की 'हिंद-प्रशांत रणनीति' के बीच स्वाभाविक सामंजस्य तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा मूल्यों ने दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय खोला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 13:10:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी का यूएई का दौरा: राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद से की बात, पांच अरब डॉलर का होगा निवेश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ऐतिहासिक रही, जहाँ यूएई ने भारत में $5 बिलियन के निवेश की घोषणा की। ऊर्जा, रक्षा, शिपिंग और सुपर कंप्यूटर समेत 6 प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। यह निवेश भारतीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और ऊर्जा सुरक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-visit-to-uae-president-mohammed-bin-zayeds-talk/article-153956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi4.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत में पांच अरब डालर के निवेश की घोषणा की है इसके अलावा दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा, जहाजरानी और सुपर कंप्यूटर सहित छह क्षेत्रों में सहयोग के समझौते किये हैं। शुक्रवार सुबह अमीरात की संक्षिप्त यात्रा पर पहुंचे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद अल नहयान के साथ शिष्टमंडल स्तर की और द्विपक्षीय वार्ता की जिसके बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये ।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने ऊर्जा, व्यापार और निवेश, समुद्री अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षेत्र जिसमें फिनटेक शामिल है, रक्षा और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी अपने दृष्टिकोण साझा किए। प्रधान मंत्री मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों और इसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>दोनों पक्षों ने ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना जिसमें जहाजरानी भी शामिल है, और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों का भी आदान-प्रदान किया। इससे भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को और गति मिलेगी। एक महत्वपूर्ण कदम में यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है जिससे भारतीय बाजारों और अवसंरचना को मजबूती मिलेगी तथा देश में रोजगार के अवसर बढेंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:55:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी:  राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद ने किया एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत, मिला गार्ड ऑफ ऑनर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी चार यूरोपीय देशों की यात्रा के पहले पड़ाव पर अबू धाबी पहुंचे। हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच शिष्टमंडल स्तर की वार्ता हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की गई। पीएम आज शाम ही नीदरलैंड के लिए रवाना होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-arrived-in-abu-dhabi-mohammed-bin-zayed-received/article-153922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pm-modi-uae.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। चार यूरोपीय देशों की यात्रा से पहले शुक्रवार को संक्षिप्त यात्रा पर यहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नहयान ने हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी का बाद में पारंपरिक स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों देश के बीच शिष्टमंडल स्तर की वार्ता शुरू हुई। शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति अल नहयान के साथ अलग से वार्ता का भी कार्यक्रम है।</p>
<p>पीएम मोदी आज सुबह संयुक्त अरब अमीरात रवाना हुए थे। अबू धाबी से उनका आज शाम ही नीदरलैंड जाने का कार्यक्रम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 14:17:02 +0530</pubDate>
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                <title>भारत और अल्जीरिया ने रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति: भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी होगी प्रगाढ़, परस्पर सहयोग से दोनों बनेंगे विकसित राष्ट्र </title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लम ने 'विकसित राष्ट्र' बनने के साझा लक्ष्य के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया है। वहीं, भारत और अल्जीरिया ने सैन्य प्रशिक्षण और उद्योगों में सहयोग बढ़ाने हेतु रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-and-algeria-agreed-to-increase-defense-cooperation-india-vietnam-will/article-152932"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत और वियतनाम ने अपनी समग्र रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का निर्णय लिया है और दोनों देश एक-दूसरे के विजन तथा लक्ष्यों में सहयोग करते हुए, विकसित राष्ट्र बनने की अपनी आकांक्षाओं को मिलकर साकार करेंगे। पीएम मोदी ने भारत यात्रा पर आये वियतनाम के राष्ट्रपति तो लम के साथ बुधवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता में परस्पर संबंधों के पहलुओं पर व्यापक बातचीत की । इसके बाद पीएम मोदी ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि तो लम ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बोध गया से की है। उन्होंने कहा," यह हमारे दोनों देशों की साझा सभ्यतागत और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाता है। उनकी इस यात्रा और सार्थक चर्चाओं से, हम अपनी सद्भावना को कई ठोस परिणामों में बदल रहे हैं।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक दशक से समग्र रणनीतिक साझेदारी है और इस दौरान संबंधों में व्यापक प्रगति हुई है । दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन संबंध मजबूत हुए हैं। इस मजबूत नींव पर आगे बढते हुए " आज हम अपने संबंधों को और अधिक मजबूत समग्र रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जा रहे हैं। अब हम अपनी साझेदारी को और ऊँचे लक्ष्यों की ओर अग्रसर करेंगे। संस्कृति, संपर्क, क्षमता निर्माण के साथ-साथ, सुरक्षा, सततता और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला हर क्षेत्र में हमारा सहयोग नए स्तर पर पहुँचेगा।" उन्होंने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल और आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में अपनी प्रतिभा, सुशासन और आर्थिक सुधार के बल पर, भारत और वियतनाम दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में उभर रहे हैं। अब हमारी प्रगाढ़ रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से, हम एक-दूसरे के तेज विकास के सहायक बनेंगे।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में परस्पर सहयोग पर सहमति व्यक्त की है और यह बुद्ध की शिक्षाओं की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा ," जैसा कि बुद्ध की शिक्षाओं की भावना है कि यदि आप किसी और के लिए दीप जलाते हैं, तो वह आपके अपने मार्ग को भी प्रकाशमान करता है। इसी भावना के साथ, हम एक-दूसरे के विजन और लक्ष्यों में सहयोग करते हुए, विकसित राष्ट्र बनने की अपनी आकांक्षाओं को मिलकर साकार करेंगे। हम साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे, और साथ जीतेंगे।"</p>
<p>भारत और अल्जीरिया ने रक्षा सहयोग का दायरा बढाने तथा इसे और प्रगाढ बनाने पर सहमति जतायी है। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को यहां बताया कि भारत-अल्जीरिया संयुक्त आयोग की मंगलवार को यहां हुई पहली बैठक में यह सहमति बनी। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, चिकित्सा सहयोग और रक्षा उद्योगों के क्षेत्र में पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग गतिविधियों को और अधिक विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>दोनों देशों ने भारत-अल्जीरिया रक्षा सहयोग के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए उत्तरदायी कार्यप्रणाली नियमों पर हस्ताक्षर किए, यह संयुक्त आयोग की बैठकों के लिए मार्गदर्शक प्रारूप के रूप में कार्य करेंगे। बैठक की सह-अध्यक्षता संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद और अल्जीरिया की नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल कायद नूर एड्डिन ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं, मुख्यालय, एकीकृत रक्षा स्टाफ, रक्षा उत्पादन विभाग, डीआरडीओ, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे।</p>
<p>भारत और अल्जीरिया के बीच रक्षा संबंध 2024 में रक्षा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद से निरंतर आगे बढ रहे हैं और दोनों पक्षों की उच्च स्तरीय यात्राओं से संबंध और मजबूत हो रहे हैं। अल्जीरिया के नौसेना प्रमुख की यह यात्रा भारत-अल्जीरिया रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण पहल है और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य करने की दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। बैठक से पहले मेजर जनरल कायद नूर एड्डिन ने यहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। अल्जीरिया का प्रतिनिधिमंडल इस यात्रा के दौरान रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधियों से भी वार्तालाप करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:34:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एर्दोगन और रूसी राजदूत वर्शिनिन ने की मुलाकात : तुर्किये-रूस सहयोग के वर्तमान मुद्दों पर हुई चर्चा, लोगों की समृद्धि और कल्याण की कामना की</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन ने रूसी राजदूत सर्गेई वर्शिनिन से मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने और साझा हितों के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। एर्दोगन ने राजदूत को नई नियुक्ति पर बधाई भी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/erdogan-and-russian-ambassador-vershinin-met-discussed-current-issues-of/article-152285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/turkey.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने गुरुवार को रूसी राजदूत सर्गेई वर्शिनिन से मुलाकात की और रूस और तुर्किये के बीच सहयोग के वर्तमान मुद्दों पर चर्चा की। यह जानकारी तुर्किये में रूसी दूतावास ने गुरुवार को दी। दूतावास ने टेलीग्राम पर कहा- एर्दोगन ने वर्शिनिन को तुर्किये में रूसी राजदूत के रूप में नियुक्ति पर बधाई दी और उनके काम में सफलता की कामना की।</p>
<p>"बातचीत के दौरान, रूस-तुर्किये सहयोग के वर्तमान मुद्दों पर चर्चा की गई और रूस तथा तुर्किये के लोगों की समृद्धि और कल्याण के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों को मजबूत करने के प्रति रूस और तुर्किये की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:03:45 +0530</pubDate>
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                <title>चीन के मुकाबले क्षेत्र में बेहतर रणनीतिक स्थिति में पहुंचा भारत, सीमा सड़क संगठन ने बना दी डोकलाम तक सड़क</title>
                                    <description><![CDATA[सेना की गतिवधियों को बेहतर बनाने और उनकी वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सीमा सड़क संगठन लगातार काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-border-roads-organization-reached-doklam-in-a-better-strategic/article-122457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/photo-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>तेजपुर। सेना की गतिवधियों को बेहतर बनाने और उनकी वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सीमा सड़क संगठन लगातार काम कर रहा है। ऐसे इलाकों में पिछले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर किया जा रहा है। भारत में यह काम लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक लगातार चल रहा है। इसी कड़ी में बीआरओ ने पड़ोसी मुल्क भूटान में डोकलाम के नजदीक तक सामरिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण सड़क बना दी है। यह वही क्षेत्र है, जहां 2017 में भारत और चीन के बीच भीषण संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई थी। बीआरओ ने जिस नई सड़क का निर्माण किया है, वह भूटान की हा वैली में है और डोकलाम से मात्र 21 किलोमीटर की दूरी पर है। इस सड़क के बन जाने से उस सेक्टर में भारत की स्थिति चीन से बेहतर हो गई है। </p>
<p>बीआरओ ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जिस सड़क का निर्माण किया है, वह करीब 254 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई है। इस रोड का उद्घाटन शुक्रवार को जापान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने किया है। यूं तो इस सड़क के निर्माण से भूटान के आम लोगों को आवाजाही में सुविधा होगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बलों को भी इससे बड़ी मदद मिलेगी। यह सड़क तिब्बत की चुंबी घाटी तक जाती है, जहां चीन की सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी तैनात है। यह सड़क भूटानी सेना को चुंबी घाटी के पास बॉर्डर तक पहुंचने में सहायता करेगी। इससे उनके लिए रसद पहुंचाने में भी आसानी रहेगी। यूं तो अभी भूटान इस सड़क का लाभ उठाएगा, लेकिन अगर भविष्य में कभी आवश्यता पड़ी तो भारत को भी इसका लाभ बड़ा लाभ मिल सकता है।</p>
<p>भारत का मित्र राष्ट्र भूटान, भारत और चीन के बीच एक बफर स्टेट की तरह है। चीन की विस्तारवादी मानसिकता की वजह से इसे कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। भारत के लिए हमेशा से इस क्षेत्र में भूटान के साथ साझेदारी काफी मायने रखती है। दोनों देश सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी आदिकाल से जुड़े हुए हैं। डोकलाम भौगोलिक रूप से भारत (सिक्किम), तिब्बत (चीन) और भूटान के ट्राई-जंक्शन पर स्थित है। 2017 में चीन ने इसकी जाफेरी रिज में एक सड़क बनाने की कोशिश की थी। लेकिन, भारतीय सेना ने आॅपरेशन जुनिपर लॉन्च करके चीन के सड़क निर्माण को रोक दिया था। भारतीय सेना डोकलाम में घुसी और चीनी सैनिकों का काम बंद करा दिया। 72 घंटे तक भयंकर संघर्ष की स्थिति बनी रही और तब जाकर चीनी सैनिक पीछे हटने को मजबूर हुए।</p>
<p><strong>बीआरओ के प्रोजेक्ट दंतक का हिस्सा है ये सड़क</strong><br />भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में भूटान का दौरा किया था। उन्हें वहां पर हा वैली रोड के बारे में बताया गया। इस रोड पर 5 पुल बनाए गए हैं। इस सड़क पर सभी मौसमों में गाड़ियां चल सकती हैं। यह सड़क बीआरओ के प्रोजेक्ट दंतक का हिस्सा है। बीआरओ के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन भी भूटान गए हैं, जहां वे प्रोजेक्ट दंतक का जायजा ले रहे हैं। बीआरओ 1960 के दशक से ही भूटान में अपना योगदान दे रहा है। डोकलाम विवाद के बाद इसकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह वहां मुख्य रूप से सड़कों और पुलों का ही निर्माण करता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 11:06:57 +0530</pubDate>
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                <title>अनिश्चित समय में भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझीदार</title>
                                    <description><![CDATA[ यह पहली बार होगा जब ब्रिटेन का कोई प्रधानमंत्री भारत के पांचवे सबसे बड़े राज्य और आधे से ज्यादा ब्रिटिश-भारतीयों के घर गुजरात का दौरा करेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-an-important-strategic-partner-in-uncertain-times--prime-minister-johnson-will-visit-india-on-21st-on-a-two-day-visit/article-8073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/modi-boris-johnson-on-.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन/नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से कीव में मुलाकात के कुछ दिनों बाद एक प्रमुख आर्थिक शक्ति और अनिश्चित समय में ब्रिटेन के एक अत्यधिक मूल्यवान रणनीतिक भागीदार के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भारत यात्रा पर आ रहे हैं। ब्रितानी प्रधानमंत्री के कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट ने एक बयान में कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और  निरंकुश देशों से खतरों की स्थिति में एक प्रमुख साथी लोकतंत्र  के साथ शांति एवं समृद्धि के लिए हमारी दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा करने के वास्ते प्रधानमंत्री जॉनसन इस सप्ताह भारत का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री जॉनसन 21 अप्रैल को अहमदाबाद से अपनी भारत यात्रा की शुरुआत करेंगे, जहां वह प्रमुख व्यवसाइयों से मिलकर प्रमुख उद्योगों में बड़े निवेश की घोषणा कर सकते हैं। यह पहली बार होगा जब ब्रिटेन का कोई प्रधानमंत्री भारत के पांचवे सबसे बड़े राज्य और आधे से ज्यादा ब्रिटिश-भारतीयों के घर गुजरात का दौरा करेगा।</p>
<p>वह इस यात्रा में इस साल शुरू हुई मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता में प्रगति को आगे बढ़ाएंगे। भारत के साथ एक समझौता 2035 तक हमारे कुल व्यापार को सालाना 28 अरब पाउंड तक बढ़ा सकता है, जिससे पूरे ब्रिटेन में आय में तीन अरब पाउंड तक की वृद्धि होगी। जॉनसन शुक्रवार 22 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए नयी दिल्ली की यात्रा करेंगे, जहां दोनों नेता द्विपक्षीय सामरिक रक्षा, राजनयिक और आर्थिक साझेदारी पर गहन बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री जॉनसन ने एक बयान में कहा कि ऐसे समय में जब निरंकुश देश हमारी शांति और समृद्धि के लिए खतरा बने हुए हैं, यह महत्वपूर्ण है कि लोकतांत्रिक और मित्र देश एकजुट होकर रहें। एक प्रमुख आर्थिक शक्ति और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत इस अनिश्चित समय में ब्रिटेन के लिए एक अत्यधिक मूल्यवान रणनीतिक भागीदार है। उन्होंने कहा कि मेरी भारत यात्रा के दौरान  रोजगार सृजन और आर्थिक विकास से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा तक उन सभी मुद्दों पर काम किया जायेगा, जो दोनों देशों के लोगों के लिए वास्तव में महत्वपूर्ण हैं। पिछले साल, दोनों प्रधानमंत्रियों ने ब्रिटेन-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर सहमति व्यक्त की थी, जिसमें ब्रिटेन में 53 करोड़ पाउंड से अधिक के निवेश की घोषणा की गई तथा व्यापार, स्वास्थ्य, जलवायु, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बयान में कहा गया कि भारतीय कंपनियों की ओर से किए गए निवेश से पहले से ही ब्रिटेन में 95,000 नौकरियों का समर्थन होता है, जिसे आगामी घोषणाओं और भविष्य के मुक्त व्यापार सौदे से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 14:56:26 +0530</pubDate>
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