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                <title>strategic - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एर्दोगन और रूसी राजदूत वर्शिनिन ने की मुलाकात : तुर्किये-रूस सहयोग के वर्तमान मुद्दों पर हुई चर्चा, लोगों की समृद्धि और कल्याण की कामना की</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन ने रूसी राजदूत सर्गेई वर्शिनिन से मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने और साझा हितों के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। एर्दोगन ने राजदूत को नई नियुक्ति पर बधाई भी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/erdogan-and-russian-ambassador-vershinin-met-discussed-current-issues-of/article-152285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/turkey.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने गुरुवार को रूसी राजदूत सर्गेई वर्शिनिन से मुलाकात की और रूस और तुर्किये के बीच सहयोग के वर्तमान मुद्दों पर चर्चा की। यह जानकारी तुर्किये में रूसी दूतावास ने गुरुवार को दी। दूतावास ने टेलीग्राम पर कहा- एर्दोगन ने वर्शिनिन को तुर्किये में रूसी राजदूत के रूप में नियुक्ति पर बधाई दी और उनके काम में सफलता की कामना की।</p>
<p>"बातचीत के दौरान, रूस-तुर्किये सहयोग के वर्तमान मुद्दों पर चर्चा की गई और रूस तथा तुर्किये के लोगों की समृद्धि और कल्याण के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों को मजबूत करने के प्रति रूस और तुर्किये की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:03:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>चीन के मुकाबले क्षेत्र में बेहतर रणनीतिक स्थिति में पहुंचा भारत, सीमा सड़क संगठन ने बना दी डोकलाम तक सड़क</title>
                                    <description><![CDATA[सेना की गतिवधियों को बेहतर बनाने और उनकी वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सीमा सड़क संगठन लगातार काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-border-roads-organization-reached-doklam-in-a-better-strategic/article-122457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/photo-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>तेजपुर। सेना की गतिवधियों को बेहतर बनाने और उनकी वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सीमा सड़क संगठन लगातार काम कर रहा है। ऐसे इलाकों में पिछले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर किया जा रहा है। भारत में यह काम लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक लगातार चल रहा है। इसी कड़ी में बीआरओ ने पड़ोसी मुल्क भूटान में डोकलाम के नजदीक तक सामरिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण सड़क बना दी है। यह वही क्षेत्र है, जहां 2017 में भारत और चीन के बीच भीषण संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई थी। बीआरओ ने जिस नई सड़क का निर्माण किया है, वह भूटान की हा वैली में है और डोकलाम से मात्र 21 किलोमीटर की दूरी पर है। इस सड़क के बन जाने से उस सेक्टर में भारत की स्थिति चीन से बेहतर हो गई है। </p>
<p>बीआरओ ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जिस सड़क का निर्माण किया है, वह करीब 254 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई है। इस रोड का उद्घाटन शुक्रवार को जापान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने किया है। यूं तो इस सड़क के निर्माण से भूटान के आम लोगों को आवाजाही में सुविधा होगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बलों को भी इससे बड़ी मदद मिलेगी। यह सड़क तिब्बत की चुंबी घाटी तक जाती है, जहां चीन की सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी तैनात है। यह सड़क भूटानी सेना को चुंबी घाटी के पास बॉर्डर तक पहुंचने में सहायता करेगी। इससे उनके लिए रसद पहुंचाने में भी आसानी रहेगी। यूं तो अभी भूटान इस सड़क का लाभ उठाएगा, लेकिन अगर भविष्य में कभी आवश्यता पड़ी तो भारत को भी इसका लाभ बड़ा लाभ मिल सकता है।</p>
<p>भारत का मित्र राष्ट्र भूटान, भारत और चीन के बीच एक बफर स्टेट की तरह है। चीन की विस्तारवादी मानसिकता की वजह से इसे कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। भारत के लिए हमेशा से इस क्षेत्र में भूटान के साथ साझेदारी काफी मायने रखती है। दोनों देश सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी आदिकाल से जुड़े हुए हैं। डोकलाम भौगोलिक रूप से भारत (सिक्किम), तिब्बत (चीन) और भूटान के ट्राई-जंक्शन पर स्थित है। 2017 में चीन ने इसकी जाफेरी रिज में एक सड़क बनाने की कोशिश की थी। लेकिन, भारतीय सेना ने आॅपरेशन जुनिपर लॉन्च करके चीन के सड़क निर्माण को रोक दिया था। भारतीय सेना डोकलाम में घुसी और चीनी सैनिकों का काम बंद करा दिया। 72 घंटे तक भयंकर संघर्ष की स्थिति बनी रही और तब जाकर चीनी सैनिक पीछे हटने को मजबूर हुए।</p>
<p><strong>बीआरओ के प्रोजेक्ट दंतक का हिस्सा है ये सड़क</strong><br />भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में भूटान का दौरा किया था। उन्हें वहां पर हा वैली रोड के बारे में बताया गया। इस रोड पर 5 पुल बनाए गए हैं। इस सड़क पर सभी मौसमों में गाड़ियां चल सकती हैं। यह सड़क बीआरओ के प्रोजेक्ट दंतक का हिस्सा है। बीआरओ के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन भी भूटान गए हैं, जहां वे प्रोजेक्ट दंतक का जायजा ले रहे हैं। बीआरओ 1960 के दशक से ही भूटान में अपना योगदान दे रहा है। डोकलाम विवाद के बाद इसकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह वहां मुख्य रूप से सड़कों और पुलों का ही निर्माण करता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 11:06:57 +0530</pubDate>
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                <title>अनिश्चित समय में भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझीदार</title>
                                    <description><![CDATA[ यह पहली बार होगा जब ब्रिटेन का कोई प्रधानमंत्री भारत के पांचवे सबसे बड़े राज्य और आधे से ज्यादा ब्रिटिश-भारतीयों के घर गुजरात का दौरा करेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-an-important-strategic-partner-in-uncertain-times--prime-minister-johnson-will-visit-india-on-21st-on-a-two-day-visit/article-8073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/modi-boris-johnson-on-.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन/नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से कीव में मुलाकात के कुछ दिनों बाद एक प्रमुख आर्थिक शक्ति और अनिश्चित समय में ब्रिटेन के एक अत्यधिक मूल्यवान रणनीतिक भागीदार के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भारत यात्रा पर आ रहे हैं। ब्रितानी प्रधानमंत्री के कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट ने एक बयान में कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और  निरंकुश देशों से खतरों की स्थिति में एक प्रमुख साथी लोकतंत्र  के साथ शांति एवं समृद्धि के लिए हमारी दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा करने के वास्ते प्रधानमंत्री जॉनसन इस सप्ताह भारत का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री जॉनसन 21 अप्रैल को अहमदाबाद से अपनी भारत यात्रा की शुरुआत करेंगे, जहां वह प्रमुख व्यवसाइयों से मिलकर प्रमुख उद्योगों में बड़े निवेश की घोषणा कर सकते हैं। यह पहली बार होगा जब ब्रिटेन का कोई प्रधानमंत्री भारत के पांचवे सबसे बड़े राज्य और आधे से ज्यादा ब्रिटिश-भारतीयों के घर गुजरात का दौरा करेगा।</p>
<p>वह इस यात्रा में इस साल शुरू हुई मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता में प्रगति को आगे बढ़ाएंगे। भारत के साथ एक समझौता 2035 तक हमारे कुल व्यापार को सालाना 28 अरब पाउंड तक बढ़ा सकता है, जिससे पूरे ब्रिटेन में आय में तीन अरब पाउंड तक की वृद्धि होगी। जॉनसन शुक्रवार 22 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए नयी दिल्ली की यात्रा करेंगे, जहां दोनों नेता द्विपक्षीय सामरिक रक्षा, राजनयिक और आर्थिक साझेदारी पर गहन बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री जॉनसन ने एक बयान में कहा कि ऐसे समय में जब निरंकुश देश हमारी शांति और समृद्धि के लिए खतरा बने हुए हैं, यह महत्वपूर्ण है कि लोकतांत्रिक और मित्र देश एकजुट होकर रहें। एक प्रमुख आर्थिक शक्ति और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत इस अनिश्चित समय में ब्रिटेन के लिए एक अत्यधिक मूल्यवान रणनीतिक भागीदार है। उन्होंने कहा कि मेरी भारत यात्रा के दौरान  रोजगार सृजन और आर्थिक विकास से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा तक उन सभी मुद्दों पर काम किया जायेगा, जो दोनों देशों के लोगों के लिए वास्तव में महत्वपूर्ण हैं। पिछले साल, दोनों प्रधानमंत्रियों ने ब्रिटेन-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर सहमति व्यक्त की थी, जिसमें ब्रिटेन में 53 करोड़ पाउंड से अधिक के निवेश की घोषणा की गई तथा व्यापार, स्वास्थ्य, जलवायु, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बयान में कहा गया कि भारतीय कंपनियों की ओर से किए गए निवेश से पहले से ही ब्रिटेन में 95,000 नौकरियों का समर्थन होता है, जिसे आगामी घोषणाओं और भविष्य के मुक्त व्यापार सौदे से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 14:56:26 +0530</pubDate>
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