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                <title>इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग की यात्रा के विरोध में सिडनी में झड़प, पुलिस ने कार्रवाई का किया बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग की यात्रा के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/clashes-in-sydney-during-protest-against-israeli-president-isaac-herzogs/article-142674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(17)3.png" alt=""></a><br /><p>सिडनी। ऑस्ट्रेलिया में इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग की यात्रा के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गयी। सिडनी में सोमवार रात हुये इस विरोध प्रदर्शन में पुलिस द्वारा बल प्रयोग किये जाने के वीडियो सामने आने के बाद विवाद गहराता जा रहा है।</p>
<p>न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन में 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से नौ पर आरोप तय किए गए हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि झड़प के दौरान 10 पुलिसकर्मी घायल हुए। एनएसडब्ल्यू पुलिस आयुक्त माल लेनन ने कहा कि अधिकारियों ने असाधारण संयम बरता और जो आवश्यक था, वही किया।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन सिडनी टाउन हॉल के बाहर आयोजित किया गया था। पुलिस के अनुसार करीब 6,000 लोग मौजूद थे, जबकि आयोजकों ने संख्या 50,000 बताई। वीडियो फुटेज में पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों को धक्का देते, मुक्के मारते और कुछ मुस्लिम प्रदर्शनकारियों को नमाज के दौरान खींचकर ले जाते देखा गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि यदि सरकार ने उन्हें टाउन हॉल से संसद भवन या हाइड पार्क तक मार्च की अनुमति दी होती तो स्थिति टाली जा सकती थी। अदालत ने प्रदर्शन से ठीक पहले पुलिस द्वारा लागू मेजर इवेंट शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इन शक्तियों के तहत लोगों को एकत्र होने की अनुमति थी, लेकिन मार्च निकालने पर रोक थी।</p>
<p>एनएसडब्ल्यू  प्रशासन ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि अधिकारियों को असंभव स्थिति का सामना करना पड़ा। वहीं सहायक आयुक्त पीटर मैकेना ने दावा किया कि पुलिस को धमकाया गया और उन पर हमला किया गया तथा हालात कई बार हाथापाई में बदल गये। इस बीच,ऑस्ट्रेलियाई नेशनल इमाम्स काउंसिल ने नमाज पढ़ रहे मुस्लिम पुरुषों को खींचे जाने के दृश्य को चौंकाने वाला और अस्वीकार्य बताया है। ग्रीन्स पार्टी की सांसद एबिगेल बॉयड ने भी आरोप लगाया कि उन्हें सांसद होने की जानकारी देने के बावजूद पुलिस ने धक्का दिया, जिससे उन्हें चोट लगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इन घटनाओं को दुखद बताया, लेकिन राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग को आमंत्रित करने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपने ही उद्देश्य को कमजोर किया है। गौरतलब है कि दिसंबर में बॉन्डी बीच पर यहूदी त्योहार हनुक्का के दौरान हुए हमले में 15 लोगों की मौत के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इसहाक हर्ज़ोग को आमंत्रित किया था। सरकार का कहना है कि इससे यहूदी समुदाय को सांत्वना मिलेगी, जबकि फिलिस्तीन समर्थक समूहों ने इस आमंत्रण का विरोध किया है।</p>
<p>इसहाक हर्ज़ोग पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में उन पर फिलिस्तीनियों के खिलाफ उकसाने का आरोप लगाया गया था, जिसे उन्होंने खारिज किया है। इजराइल सरकार ने भी रिपोर्ट को भ्रामक और गलत बताया है। इस बीच, पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार शाम एक और प्रदर्शन की घोषणा की गयी है, जिसमें गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आरोप वापस लेने और पुलिस की भूमिका की जांच की मांग की जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:46:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायल की मांग के बावजूद अपने हथियार नहीं डालेंगे फिलिस्तीन के विरोधी गुट, इजरायली पीएम ने दोहराई हमास के निरस्त्रीकरण की बात</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल की चेतावनी के बावजूद फिलिस्तीनी विरोधी गुटों ने हथियार न छोड़ने का फैसला किया। पीआईजे ने कहा, सभी गुट इस पर एकमत हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-israels-demand-palestines-opposition-groups-will-not-lay-down/article-142089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(14)4.png" alt=""></a><br /><p>गाजा। फिलिस्तीन के विरोधी गुटों ने इजरायल की मांग के बावजूद अपने हथियार अपने पास रखने का फैसला किया है। फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) ने बुधवार को यह जानकारी देते कहा सभी विरोधी गुटों के बीच सहमति है कि वे फिलिस्तीनी लोगों के हथियार अपने पास ही रखेंगे। </p>
<p>पीआईजे के उप-महासचिव मोहम्मद अल-हिन्दी ने एक बयान में कहा, विरोधी गुटों के बीच आम सहमति है कि हम फिलिस्तीनी लोगों के हथियार अपने पास रखेंगे। हमने इन हथियारों के इस्तेमाल के संबंध में मध्यस्थों के साथ अपना लचीलापन साझा किया है।</p>
<p>पीआईजी के इस बयान से पहले इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने गाजा में एक बार फिर सैन्य कार्रवाई करने का अंदेशा देते हुए कहा था कि अगर हमास अपने हथियार नहीं छोड़ता, तो वे उसे खत्म करेंगे। </p>
<p>इससे पूर्व, इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जमिन नेतन्याहू ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात के दौरान हमास के निरस्त्रीकरण की बात दोहराई थी और कहा था कि गाजा के पुनर्निर्माण से पहले युद्ध के उद्देश्यों को पूरा किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि पीआईजे गाजा का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य समूह है। इससे पहले हमास भी कह चुका है कि अगर इजरायल अपना कब्जा खत्म कर देता है तो वह भी अपने हथियार डाल देगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 18:35:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दक्षिणी गाजा में इजरायली गोलीबारी में 3 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत, बचाव राहत कार्य जारी </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी गाजा के खान यूनिस और राफा में इजरायली सेना की गोलीबारी में एक किशोर और मछुआरे सहित तीन लोगों की जान चली गई। यह घटना युद्धविराम के बीच संघर्ष वाले इलाकों में हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/3-palestinian-civilians-killed-in-israeli-firing-in-southern-gaza/article-138440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/gaza.png" alt=""></a><br /><p>गाजा। दक्षिणी गाजा में इजरायली गोलीबारी में रविवार को तीन फिलिस्तीनियों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है। इस बात की पुष्टि फिलिस्तीनी चिकित्सा ने की। सूत्रों ने बताया कि 15 वर्षीय अला अल-दीन अशरफ खान यूनिस के दक्षिण में जोरात अल-लुत इलाके में इजरायली गोलीबारी में मारे गए।</p>
<p>उन्होंने आगे बताया कि फादी सलाह राफा के उत्तर-पश्चिम में इजरायली गोलीबारी में मारे गए और उनके शव को खान यूनिस के नासिर अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इजरायली ड्रोन ने उस क्षेत्र पर गोलीबारी की, जहां से इजरायली सेना युद्धविराम समझौते के तहत पीछे हट गई थी, जिससे सलाह की मौत हो गई।</p>
<p>इससे पहले राफा तट पर मछली पकड़ते समय इजरायली नौसेना बलों द्वारा चलाई गई गोली से 32 वर्षीय मछुआरे अब्दुल रहमान अल-कान की मौत हो गई। सूत्रों ने बताया कि गोली उनके सिर में लगी और उनके शव को नासिर अस्पताल ले जाया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 14:38:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायली सेना प्रमुख अमीर की चेतावनी, बोलें-पीली रेखा है गाजा-इजरायल की नई सीमा, भूल से भी मत करना पार वरना.... </title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली सेना प्रमुख आयल अमीर ने ‘येलो लाइन’ को गाजा की नई सीमा रेखा बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल गाजा के हिस्सों पर नियंत्रण बनाए रखेगा और हमास को दोबारा संगठित नहीं होने देगा। संघर्ष विराम के बावजूद हिंसा जारी रहने की रिपोर्ट सामने आई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israeli-army-chief-amirs-warning-says-yellow-line-is/article-135199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/israalllll.png" alt=""></a><br /><p>यरुशलम। इजरायली सेना प्रमुख आयल अमीर ने रविवार को कहा कि नयी बनायी गयी 'येलो लाइन' इजरायली गाजा पट्टी की नयी सीमा रेखा है। हाल ही में दो माह पहले 10 अक्टूबर को संघर्ष विराम के बावजूद इजरायली सेना ने गाजा के कुछ हिस्से पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है। इस हिस्से की सीमा को ही 'पीली रेखा' कहा जा रहा है। आयल अमीर ने गाजा में बैत हनून और जबलिया के दौरे के दौरान कहा, पीली रेखा एक नयी सीमा रेखा है, जो हमारे समुदायों के लिए एक रक्षा पंक्ति और परिचालन गतिविधि की रेखा के तौर पर काम करती है।</p>
<p>इसके आगे उन्होंने कहा कि सेना ने गाजा पट्टी के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया है और इजरायली सेना उन इलाकों में बनी रहेगी। आयल अमीर ने कहा कि सेना हमास को खुद को फिर से स्थापित करने की अनुमति नहीं देगी और अचानक हमले के परिदृश्यों के लिये तैयारी कर रही है। इसे उन्होंने सेना की आने वाली कई वर्षाें  की योजना का एक मुख्य आधार बताया। </p>
<p>इसके आगे इजरायली सेना प्रमुख आयल अमीर ने कहा, जब तक गाजा में आखिरी मृत बंधक, पुलिस अधिकारी रैन ग्विली के अवशेषों को घर नहीं लाया जाता, तब तक मिशन पूरा नहीं होगा। हमास ने ग्विली के अलावा सभी 20 जीवित बंधकों और 27 मृत बंधकों के शवों को लौटा दिया है। इस दौरान इसरायली सैनिकों ने दर्जनों फिलिस्तीनियों की गोली मारकर यह कहते हुए हत्या की है कि वे संदिग्ध थे जिन्होंने पीली रेखा पार की थी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष विराम के बावजूद 11 अक्टूबर से इजरायली गोलीबारी में 370 से अधिक लोग मारे गये हैं। इससे अक्टूबर 2023 में इजरायल-हमास संघर्ष की शुरुआत के बाद से मरने वालों फिलिस्तीनियों की संख्या 70,360 हो गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 16:01:46 +0530</pubDate>
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                <title>इजरायली सेना ने पश्चिम तट चौकी पर दो फिलस्तीनियों को किया ढ़ेर</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली सेना ने हेब्रोन में चेकपॉइंट पर एक वाहन के तेज़ी से बढ़ने पर फायरिंग की, जिसमें दो फिलस्तीनी मारे गए और एक सैनिक घायल हुआ। फिलस्तीनी एजेंसियों ने एम्बुलेंस रोके जाने का भी आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israeli-army-kills-two-palestinians-at-west-bank-checkpoint/article-135077"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isral-newsw.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलम। इजरायली सेना ने शनिवार को कहा कि उसके सैनिकों ने दक्षिणी पश्चिमी तट शहर हेब्रोन में दो फिलस्तीनियों की गोली मारकर हत्या कर दी, जब दोनों ने एक चेकपॉइंट पर सैनिकों की ओर एक वाहन चढ़ा दिया। इजरायली रक्षा बलों ने एक बयान में कहा कि एक ऑपरेशनल गतिविधि के दौरान वाहन की गति बढऩे पर सैनिकों ने गोलीबारी की।</p>
<p>इजरायली के सार्वजनिक प्रसारक 'कान के अनुसार, एक सैनिक मामूली रूप से घायल हुआ है, जिसने बताया कि सैनिक पैराट्रूपर्स ब्रिगेड की 202वीं बटालियन के थे। फिलस्तीनी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएफए ने एक अलग बयान दिया, जिसमें बताया गया कि इजरायली बलों ने मध्य हेब्रोन के बाब अल-वाविया क्षेत्र में फिलस्तीनी नागरिकों को ले जा रहे एक वाहन पर गोलीबारी की और फिर फिलस्तीनी रेड क्रिसेंट एम्बुलेंस को घटनास्थल तक पहुँचने से रोक दिया।</p>
<p>फिलस्तीनी आँकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर, 2023 से पश्चिमी तट पर हिंसा में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 1,000 फिलस्तीनी मारे गए हैं, सैकड़ों घायल हुए हैं और दर्जनों घर ध्वस्त हो गए हैं। इजरायल ने 1967 के मध्य पूर्व युद्ध में पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया था। वहाँ उसके द्वारा बनाई गई बस्तियाँ और उसका सैन्य कब्जा, अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 18:07:51 +0530</pubDate>
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                <title>फिलिस्तीन में भयंकर भूखमरी से जूझ रहे है लाखों लोग : नाकाबंदी के कारण 57 बच्चों की भूख से मौत, डब्ल्यूएचओ ने कहा-  71  हजार बच्चे हो सकते है कुपोषण का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[फिलिस्तीनी आंदोलन हमास द्वारा युद्ध विराम को बढ़ाने की अमेरिकी योजना को अस्वीकार किये जाने के बाद 18 मार्च को, इजरायल ने गाजा पर हमले फिर से शुरू कर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/millions-of-people-are-struggling-with-fierce-hunger-in-palestine/article-114025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/who.jpg" alt=""></a><br /><p>गाजा सिटी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया कि गाजा में लगभग 5 लाख लोग भयंकर भूखमरी से जूझ रहे हैं और दो मार्च से शुरू हुई इजरायली नाकाबंदी के बाद से अब तक 57 बच्चों की कुपोषण से मौत हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि दो मार्च 2025 से  शुरू हुई नाकाबंदी के बाद अब तक कुपोषण से 57 बच्चों की मौत हो चुकी है और यह संख्या वास्तविक आंकड़े से कम हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अगर हालात नहीं बदले तो अगले 11 महीनों में पांच साल से कम उम्र के करीब 71 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं।</p>
<p>गाजा की पूरी 21 लाख आबादी  लंबे समय से खाद्य संकट का सामना कर रही है, जिसमें करीब पांच लाख लोग  कुपोषण, भुखमरी, बीमारी और मौत की स्थिति में हैं। यह दुनिया के सबसे गंभीर  भूख संकटों में से एक है, जो इस समय सामने आ रहा है। फिलिस्तीनी आंदोलन हमास द्वारा युद्ध विराम को बढ़ाने की अमेरिकी योजना को अस्वीकार किये जाने के बाद 18 मार्च को, इजरायल ने गाजा पर हमले फिर से शुरू कर दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 16:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>फिलिस्तीन को तीन यूरोपीय देशों के समर्थन के मायने</title>
                                    <description><![CDATA[ हाल ही संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद की बैठकों में 143 देशों ने फिलिस्तीन की मान्यता के प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/meaning-of-support-of-three-european-countries-to-palestine/article-79588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(8)17.png" alt=""></a><br /><p>हाल ही यूरोपीय महाद्वीप के तीन देशों-नार्वे, आयरलैंड और स्पेन ने फिलिस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता देने का फैसला किया, जो कि अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है। बताया जा रहा है कि इस पर 28 मई को औपचारिक मुहर लगा दी जाएगी। अब यह जाहिर होने लगा है कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर अब दुनिया की सोच में बदलाव आ रहा है। ऐसे में इजरायल का नाराज होना स्वाभाविक है। लिहाजा उसने इसका कड़ा विरोध जताया है। इसके पीछे यह प्रमुख वजह रही है कि अब तक यह देश, इजरायल के करीबी मित्र रहे हैं। इजरायल ने इन देशों से अपने राजदूतों को बुला लिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन देशों के राजदूतों को बुलाकर अपना विरोध जताया है।</p>
<p>इजरायली  विदेश मंत्री इजरायल कैट्ज ने ट्विीट कर कहा कि-‘मैं आयरलैंड और नॉर्वे को स्पष्ट संदेश भेज रहा हूं। इजरायल उन लोगों के आगे नहीं झुकेगा जो उसकी संप्रभुता को कमजोर कर रहे हैं। हम चुप नहीं बैठेंगे। इस फैसले से दुनिया में यह संदेश गया है कि आतंकवाद को इनाम मिलता है। दूसरी ओर फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इसका स्वागत करते हुए अन्य देशों से भी ऐसे ही समर्थन देने की अपील की है। वहीं, हमास के एक वरिष्ठ नेता बारोम नईम ने इस फैसले को एक निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि फिलिस्तीनी लोगों के कड़े प्रतिरोध की वजह से ही ऐसा हो पाया है। नार्वे के प्रधानमंत्री जानस गारस्तर के अनुसार-‘फिलिस्तीन देश को मान्यता देकर अरब क्षेत्र में शांति स्थापित हो सकती है। आयरलैंड के प्रधानमंत्री साइमन हैरिस ने कहा कि यह स्पेन और नॉर्वे के साथ उठाया गया कदम है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा-‘उनका देश 28 मई को फिलिस्तीन को देश के तौर पर मान्यता देगा। वे यह भी मानते हैं कि इससे इजरायल के साथ राजनयिक तनाव पैदा होने की आशंका है। यहां बता दें कि सत्ताईस देशों वाले यूरोपीय संघ के सात सदस्य देश ऐसे हैं जो आधिकारिक तौर पर पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता देते हैं। इनमें पांच वे हैं जिन्होंने इस संघ में शामिल होने से पहले वर्ष 1988 में ही मान्यता देने की घोषणा कर दी थी, जैसे कि साइप्रस ने। वर्ष 2014 में स्वीडन ने मान्यता दी थी। वर्ष 1988 दौरान ही पूर्व चैकोस्लोवाकिया ने भी इसे मान्यता दी थी। लेकिन अब चेक गणराज्य के गठन के बाद उसका कहना है कि यह फैसला उस पर लागू नहीं होता। इसी तरह स्लोवाकिया ने भी अभी नहीं बताया है कि वह पूर्व मान्यता का हिस्सा है या नहीं। माल्टा और स्लोवेनिया का कहना है कि वे इसका अनुसरण कर सकते हैं। लेकिन किसी भी प्रमुख पश्चिमी शक्ति ने अभी ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं। दरअसल, यूरोप के अनेक देश आज भी इजरायल के इतने बड़े समर्थक हैं कि उन्होंने अभी तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं दी है। कहीं न कहीं इन देशों का यह विश्वास रहा है कि एक न एक दिन फिलिस्तीन या गाजा की जमीन पर इजरायल का पूरा कब्जा हो जाएगा।</p>
<p>हालांकि अभी इस बात का अधिक महत्व भी नहीं, लेकिन तीन यूरोपीय देशों से मिली फिलिस्तीन को मान्यता किसी अहम उपलब्धि से कम भी नहीं है। इस सोच को भी अब बल मिलने लगा है कि फिलिस्तीन के संघर्ष को अब अंतरराष्ट्रीय वैधता मिल जानी चाहिए। हाल ही संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद की बैठकों में 143 देशों ने फिलिस्तीन की मान्यता के प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है। धारणा यह भी है कि इस बदलाव को जमीनी स्तर पर लाने का बहुत कम प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल शांति वार्ता भी रूकी हुई है। इजरायल की कट्टरपंथी सरकार भी फिलिस्तीनी राज्य के दर्जे के खिलाफ अपनी कमर कसे हुए है। इस बीच इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामर वेज-गिर ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर का दौरा किया जिसे यहूदी अपना टेंपल कहते हैं। यह स्थल यहूदियों और मुस्लिमों के बीच सदैव विवाद की जड़ रहा है।</p>
<p>इन तीन देशों की ओर से लिए फैसलों से उम्मीद जगने लगी है कि आने वाले समय में यह जमीनी स्तर पर उतरकर हकीकत के रूप में दिखाई देगा। सिर्फ यही नहीं, इस फैसले से यह भी तो संभव है कि इजरायल, रफाह पर सैन्य कार्यवाही के फैसले पर अब पुनर्विचार करे। ताकि युद्धग्रस्त क्षेत्र में नागरिकों को होने वाली संभावित भारी क्षति को रोका जा सके। प्रभावित क्षेत्र में अधिक मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए इजरायल अनुमति देने को प्रेरित हो जाए। ऐसी स्थितियां बनती हैं, तो उनका स्वागत इसलिए होना चाहिए कि इससे युद्ध से उपजी अशांति और अनिश्चितता का दौर थमेगा। पश्चिमी एशिया में शांति की उम्मीद जगेगी। आवश्यकता इस बात की अधिक है कि पिछले आठ माह से जारी इजरायल -हमास के युद्ध को रोका जाए। पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध में अब तक 36 हजार के करीब लोग मारे जा चुके हैं। 80 हजार के करीब घायल हुए हैं। लाखों लोग विस्थापित हुए। भारी चिकित्सा सुविधाओं अभाव के बीच में लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हैं। </p>
<p>ऐसे में युद्ध रोकने के हर प्रयास का स्वागत करना चाहिए। जहां तक इजरायल की आक्रामकता का सवाल है तो उसमें नरमी लाने के लिए अमेरिका और प्रमुख यूरोपीय देशों को ही अधिक प्रयास करने होंगे। जहां तक फिलिस्तीन को लेकर भारत का सवाल है तो वह निरंतर इसकी मान्यता का पक्षधर रहा है। वर्ष 1988 से लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले 143 देशों में वह भी तो शामिल है। भारत का सदैव यहूदियों और फिलिस्तीनियों के साथ समान व्यवहार रहा है।</p>
<p><strong>-महेश चन्द्र शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 May 2024 11:09:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायल : जरूरी हुआ तो नाखूनों की मदद से लड़ेंगे !</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका  इजरायल को हर साल 3.8 अरब की सैन्य सहायता देता है। विशेष परिस्थितियों को देखकर उसने हाल ही 17 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता मंजूर की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/israel-will-fight-with-nails-if-necessary/article-78039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(1)40.png" alt=""></a><br /><p>इजरायल और हमास के बीच काहिरा में हुई बातचीत के विफल होने के बाद इजरायल ने गाजा पट्टी से लेकर राफा तक हमले तेज कर दिए हैं। इजरायल ने अपना यह आक्रामक रुख तब भी जारी रखा जब संयुक्त राष्ट्र ने उसे चेतावनी दी थी। यहां तक कि अमेरिका ने उसकी मदद को भेजी जा रही सैन्य सामग्री को बीच में ही रोक दिया है। अब मिस्र ने भी उससे पुराने संबंध तोड़ लेने की धमकी दी है।<br />अमेरिका के ताजा फैसले के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का यह बयान गौर करने लायक है। उन्होंने कहा है कि अगर हमें अकेले खड़े रहना होगा तो हम अकेले खड़े रहेंगे। मैंने पहले भी कहा है कि जरूरत पड़ी तो हम अपने नाखूनों की मदद से भी लड़ेंगे। बता दें अमेरिका  इजरायल को हर साल 3.8 अरब की सैन्य सहायता देता है। विशेष परिस्थितियों को देखकर उसने हाल ही 17 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता मंजूर की है। यही नहीं, संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलस्तीन को पूर्ण कालिक सदस्य बनाने के समर्थन में प्रस्ताव भी पारित हो चुका है। इस कार्यवाही दौरान इजरायली दूत ने विरोध स्वरूप चार्टर की कॉपी फाड़ते हुए जमकर दुनिया को सुनाया। बता दें कि भारत ने फिलस्तीन की सदस्यता के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि कुछ देशों ने विरोध जताया और अमेरिका सहित करीब पच्चीस देश मतदान दौरान अनुपस्थित रहे। खैर, तेजी से घट रही इन वैश्विक गतिविधियों के बीच  पिछले साल 7 अक्टूबर से इजरायल-हमास के बीच छिड़े संघर्ष में अब तक पैंतीस हजार फिलस्तीन लोग मारे जा चुके हैं। हजारों की संख्या में लोग घायल हुए से अलग हैं। गाजा पट्टी में मानवीय सहायता कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। इसके बावजूद सात माह से जारी संघर्ष है कि अब तक थमा नहीं।<br />जहां तक संघर्ष विराम के विफल होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बना हुआ है इजरायली बंधकों की रिहाई। इसके लिए हमास युद्ध विराम चाहता है। इजरायल को यह शर्त मंजूर नहीं है। कारण नेतन्याहू को इस समय तिहरे दबाव से गुजरना पड़ रहा है। इजरायली लोगों का दबाव है कि बंधकों की रिहाई के लिए हमास से समझौता किया जाए। तो दूसरी ओर इस मसौदे को मंजूर कर ले तो उनकी सरकार खतरे में पड़ सकती है। इसके पीछे उनकी गठबंधन सरकार के सहयोगी दल के नेताओं-इटामर बेन-ग्विर और बेजेल स्मोट्रिच की दी गई चेतावनी है। अब तो उसके सबसे विश्वस्त अमेरिका ने भी उसे सैन्य मदद जो रोक दी है। फिर उनका यह संकल्प भी आड़े आ रहा कि वे हमास का पूरी तरह सफाया होने तक चैन की सांस नहीं लेंगे। सभी इजरायली बंधकों की बिना शर्त रिहाई कराएंगे। लेकिन सात माह से पूर्व छेड़े गए संघर्ष के बावजूद ना तो अब तक बंधक रिहा हो पाए और ना ही हमास का पूरी तरह से सफाया हो पाया। उनके आगे संकट यह भी है कि रफाह पर यदि बडा मोर्चा खोल देते हैं तो इसमें भारी संख्या में मानवीय संकट उठ खड़ा होगा।<br />इसके पीछे मुख्य कारण चूंकि रफाह क्षेत्र घनी आबादी वाला है। वहां की आबादी में शरणार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ पंद्रह लाख फिलस्तीनी आबादी है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर इजरायल के अलग-थलग होने का खतरा भी मंडरा रहा है। मिस्र, अमेरिका और कतर की मध्यस्थता में मिस्र की राजधानी काहिरा में हमास और इजरायल के बीच युद्ध विराम को लेकर जो समझौता हुआ उसकी पूरी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।<br />लेकिन विभिन्न स्रोतों से जुटाई  गई थोड़ी बहुत जानकारी के अनुसार समझौता तीन चरणों में है। इसमें हमास की ओर से बंधकों की रिहाई के लिए युद्ध विराम की बात की गई है। पहले चरण में इजरायल से उम्मीद जताई गई है कि वह चालीस दिन के लिए संघर्ष विराम लागू करे। इसके बदले तैतीस बंधकों की रिहाई के बदले फिलस्तीनी कैदियों की रिहाई की जाए। दूसरे चरण में 42 दिन का युद्ध विराम रखा जाए ताकि शेष जीवित बंधकों की रिहाई की जा सके। तीसरा चरण अरब सबसे विवादास्पद बना हुआ है। इजरायल चाहता है कि सभी बंधकों को हमास बिना शर्त रिहा करे। हमास की मांग है कि इजरायली सैन्य पूरी तरह से गाजा पट्टी को खाली करे। इजरायल को यह मांग मंजूर नहीं है। इजरायल ने अपने सैनिकों को उत्तरी और मध्य गाजा में तैनात कर रखा है। सेना हटती है, तो फिलस्तीनी और हमास आतंकवादी सीमा के करीब के क्षेत्रों में लौट आएंगे। यदि इजरायल स्थाई युद्ध विराम के लिए सहमत होता है तो शेष हमास जीवित रहेगा। वर्ष 1948 में फिलस्तीन क्षेत्र में इजरायल राज्य की स्थापना हुई थी। इसके बाद वर्ष 1967 के छह दिवसीय युद्ध दौरान संपूर्ण गाजा सहित रफाह क्षेत्र इजरायल के सैन्य कब्जे में आ गया था। इजरायल ने 7 अक्टूबर के बाद गाजा के उत्तर क्षेत्र में रहने वाले एक लाख से अधिक फिलस्तीनियों को खाली करने का आदेश दिया था। अधिकांश लोगों ने खान युनुस क्षेत्र में शरण ली।जब यहां हमला हुआ तो फिलस्तीनियों का पलायन रफाह क्षेत्र में हुआ।<br />जो समुद्री तट और सड़कों पर षिविरों में रह रहे हैं। गंदे माहौल के बीच उन्हें मुष्किल से दिन में डेढ़ से दो लीटर पानी भी मुष्किल से मिल पाता है। चिकित्सा सुविधा तो दूर भुखमरी की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। उस पर अब इस्राइली हमले का खौफ और मंडरा रहा है। पर अब इस्राइली सेना के हमले का खौफ अलग मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>-महेश चन्द्र शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 May 2024 12:02:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बंगलादेश ने युद्ध अपराधों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराने का किया आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[बंगलादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने फिलिस्तीनी-इजरायल  के बीच जारी संघर्ष की तत्काल समाप्ति और मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने तथा युद्ध अपराध एवं मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराने का आह्वान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/bangladesh-calls-for-holding-israel-responsible-for-war-crimes/article-76960"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/bangladesh-flag.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बंगलादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने फिलिस्तीनी-इजरायल  के बीच जारी संघर्ष की तत्काल समाप्ति और मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने तथा युद्ध अपराध एवं मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराने का आह्वान किया है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक गाम्बिया की राजधानी बंजुल में 15वें इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) शिखर सम्मेलन में बोलते हुए महमूद ने कहा कि हम, ओआईसी के सदस्य देशों को गाजा संकट को समाप्त करने के लिए एक बहु-ट्रैक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओआईसी को इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने और सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए सरकारों और संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अन्य संगठनों जैसे अंतर-सरकारी निकायों के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 14:28:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फिलिस्तीन में नई सरकार ने ली शपथ, 23 मंत्री शामिल </title>
                                    <description><![CDATA[इस बात पर जोर दिया कि सरकार के राजनीतिक संदर्भ फिलिस्तीन मुक्ति संगठन और उसके राजनीतिक कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ हैं, जैसा कि कार्यभार पत्र में अब्बास द्वारा रेखांकित किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-govt-take-oath-in-in-palestine-23-ministers-included/article-74180"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(8).png" alt=""></a><br /><p>रामल्ला। फिलिस्तीन में प्रधानमंत्री मोहम्मद मुस्तफा के नेतृत्व में की नई सरकार ने शपथ ली। नई सरकार में गाजा से कम से कम 6 मंत्रियों समेत 23 मंत्री पद शामिल हैं। मुस्तफा अनुभवी राजनयिक रियाद अल-मलिकी से विदेश मंत्री का पद भी संभालेंगे। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के सामने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुस्तफा ने प्रतिज्ञा की कि उनकी नई सरकार सभी फिलस्तिनियों की सेवा करेगी। </p>
<p>इस बात पर जोर दिया कि सरकार के राजनीतिक संदर्भ फिलिस्तीन मुक्ति संगठन और उसके राजनीतिक कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ हैं, जैसा कि कार्यभार पत्र में अब्बास द्वारा रेखांकित किया गया है। समारोह के बाद नई सरकार के साथ बैठक में अब्बास ने दोहराया कि गाजा में संघर्ष को रोकने के लिए अरब और अंतरराष्ट्रीय दलों के साथ समन्वय में काम चल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Apr 2024 12:24:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गाजा के अस्पतालों में मानवीय सहायता रोकने का मामला, संयुक्त राष्ट्र ने इजरायल की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[ उत्तर में सहायता मिशन की योजना बनाने के बाद, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा कि उनके काफिलों को इजरायल की ओर से आगे बढऩे से रोक दिया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/un-condemns-israel-for-stopping-humanitarian-aid-in-gaza-hospitals/article-66847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/united.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। इजरायल लगातार उत्तरी गाजा में मानवीय काफिलों को रोकने से यहां के अस्पतालों में जरूरी ईंधन और अन्य सहायता पहुंचाना मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र ने शनिवार को यह जानकारी दी। उत्तर में सहायता मिशन की योजना बनाने के बाद, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा कि उनके काफिलों को इजरायल की ओर से आगे बढऩे से रोक दिया गया है। फिलस्तीनी क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसी ओसीएचए के कार्यालय के प्रमुख एंड्रिया डी डोमेनिको ने कहा कि उत्तर में सहायता पहुंचाना लगभग मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा, हाल के दिनों में एजेंसी को 21 अनुरोधों में से तीन मिशनों को आंशिक रूप से मंजूरी मिल गई है। </p>
<p>फिलिस्तीनी क्षेत्रों में यूनिसेफ की विशेष प्रतिनिधि लूसिया एल्मी ने भी अफसोस जताया कि हमें पर्याप्त सहायता नहीं मिल सकती। निरीक्षण प्रक्रिया धीमी और अप्रत्याशित बनी हुई है और कुछ सामग्रियां जिनकी हमें सख्त जरूरत है, वे बिना किसी स्पष्ट औचित्य के प्रतिबंधित हैं।</p>
<p>डोमेनिको ने कहा कि इजरायली सेना गाजा के अस्पतालों में ईंधन मुहैया नहीं कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि हमें अस्पतालों का समर्थन करने की इजाजत नहीं देने के लिए वे बहुत व्यवस्थित रहे हैं। कुछ ऐसा है जो अमानवीयता के स्तर तक पहुंच रहा है और मेरे लिए समझ से परे है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि उन्होंने सात असफल प्रयासों के बाद आखिरकार गुरुवार को दो सप्ताह से अधिक समय में पहली बार अल शिफा अस्पताल पहुंचने में कामयाब रहा। डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनोम घेबियस ने एक्स पर लिखा कि मिशन ने 9,300 लीटर ईंधन सहित बेहद जरूरी सहायता पहुंचाने की अनुमति दी है।</p>
<p>टेड्रोस ने कहा कि अस्पताल में अब 60 चिकित्सा कर्मचारी हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत संरक्षित अस्पताल, सात अक्टूबर को हमास के हमले के बाद से गाजा में इजरायली हमलों से बार-बार प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 15 आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने लंबे समय से उत्तर में बमुश्किल काम कर रहे कुछ अस्पतालों में भोजन, साफ पानी, दवा और ईंधन की कमी का सामना करने वाले निराशाजनक ²श्यों का वर्णन किया है जबकि अल शिफ़ा में सेवाओं की आंशिक बहाली अच्छी खबर है। टेड्रोस ने कहा कि ईंधन की खपत बहुत अधिक है और चिकित्सा आपूर्ति की आवश्यकता बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jan 2024 15:50:40 +0530</pubDate>
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                <title>इजरायल ने खारिज किया हमास के बंधक समझौते का प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल ने फिलिस्तीनी समूह हमास के पक्ष में कतर और मिस्र के मध्यस्थों के माध्यम से पेश एक नए बंधक समझौते सौदे को खारिज कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israel-rejects-hamas-hostage-deal-proposal/article-65763"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/israel-flag.png" alt=""></a><br /><p>यरुशलम। इजरायल ने फिलिस्तीनी समूह हमास के पक्ष में कतर और मिस्र के मध्यस्थों के माध्यम से पेश एक नए बंधक समझौते सौदे को खारिज कर दिया है। एक्सियोस न्यूज पोर्टल ने सोमवार को इजरायली अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि उसी समय, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि हमास की पेशकश से पता चलता है कि वह एक नए बंधक समझौते पर बातचीत करने के लिए तैयार है, भले ही गाजा पट्टी में लड़ाई जारी है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि एक प्रस्ताव में तीन चरणों वाली प्रक्रिया शामिल है। प्रत्येक चरण में बंधकों की रिहाई के बदले में एक महीने से अधिक समय तक संघर्ष को रोकने का प्रावधान किया गया। समझौते के पहले चरण के हिस्से के रूप में, इ•ारायल को लगभग 40 बंधकों की रिहाई के बदले में गाजा से अपने सैनिकों को वापस लेने के लिए कहा गया है। अंतिम चरण में गाजा पट्टी में आयोजित इजरायली सैनिकों की रिहाई के लिए और एन्क्लेव में युद्ध का खत्म करने की बात कही है।</p>
<p>समाचार पोर्टल ने इजरायली अधिकारी के हवाले से कहा, ''रविवार को हमें हमास से जो प्रस्ताव मिला वह पूरी तरह से आधारहीन था और हमने मध्यस्थों से अधिक स्वीकार्य प्रस्ताव पेश करने का प्रयास करने के लिए कहा है, इस पर काम कर रहे हैं और देखते हैं क्या होता है, लेकिन अभी तक कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई हैं।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि गत सात अक्टूबर को हमास ने गाजा पट्टी से इजरायल के खिलाफ बड़े पैमाने पर रॉकेट हमला किया, और उसके लड़ाकों ने सीमा का उल्लंघन किया एवं नागरिकों और सैन्य ठिकानों पर हमला किया। हमास के हमलों में इजरायल के 1,200 से अधिक लोग मारे गए और लगभग 240 लोगों को बंधक बनाकर अपने साथ ले गए थे।</p>
<p>स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि इजरायल ने जवाबी हमले शुरू किए और गाजा की पूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया तथा  हमास लड़ाकों को खत्म करने और बंधकों को बचाने के घोषित लक्ष्य के साथ फिलिस्तीनी इलाके में जमीनी घुसपैठ शुरू कर दी। इजरायली हमलों के कारण गाजा में अब तक 21,800 से अधिक लोग मारे गए हैं।</p>
<p>कतर ने 24 नवंबर को इजरायल और हमास के बीच एक अस्थायी संघर्ष विराम और कुछ कैदियों और बंधकों की अदला-बदली के साथ-साथ गाजा पट्टी में मानवीय सहायता के वितरण पर एक समझौते में मध्यस्थता की। युद्धविराम को कई बार बढ़ाया गया, जो एक दिसंबर को समाप्त हो गया। ऐसा माना जा रहा है कि गाजा में अभी भी 100 से अधिक बंधक हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/israel-rejects-hamas-hostage-deal-proposal/article-65763</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Jan 2024 21:07:45 +0530</pubDate>
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