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                <title>government order - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान में पुलिसकर्मियों को तोहफा: मेस भत्ते में बढ़ोतरी, 1 अप्रैल 2026 से मिलेगा मिलेगा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने पुलिस विभाग के कर्मचारियों को आर्थिक राहत देते हुए मेस भत्ते में बढ़ोतरी की है। कॉन्स्टेबल से इंस्पेक्टर रैंक तक का मासिक भत्ता ₹2700 से बढ़ाकर ₹2850 कर दिया गया है। वित्त विभाग के अनुसार, यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी, जिससे प्रदेश के हजारों पुलिसकर्मियों को लाभ मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mess-allowance-of-policemen-increased-in-rajasthan-benefit-will-be/article-146267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/police.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने पुलिस विभाग के कर्मचारियों के मेस भत्ते में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर को मिलने वाला मासिक मेस भत्ता बढ़ा दिया गया है।</p>
<p>आदेश के मुताबिक अभी तक इन पदों पर कार्यरत पुलिसकर्मियों को प्रति माह 2700 रुपये मेस भत्ता दिया जा रहा था, जिसे बढ़ाकर 2850 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। वित्त विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।</p>
<p>वित्त विभाग के सचिव (बजट) कुमार पाल गौतम द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि मेस भत्ते की यह संशोधित दर 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मेस भत्ते का भुगतान वित्त विभाग की पूर्व में जारी अधिसूचनाओं और नियमों के अनुसार ही विनियमित किया जाएगा। राज्य सरकार के इस निर्णय से पुलिस विभाग के कर्मचारियों को आर्थिक राहत</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 18:10:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पीजी बॉन्ड की नई शर्तों से भविष्य के सुपरस्पेशलिस्ट संकट में, जार्ड ने जताया कड़ा विरोध, जानें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में राजस्थान के PG डॉक्टरों के सामने संकट, नए आदेश के अनुसार सुपरस्पेशलिटी प्रवेश के लिए 25 लाख से 1.5 करोड़ की बैंक गारंटी अनिवार्य। JARD ने विरोध जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jard-expressed-strong-opposition-to-the-future-superspecialist-crisis-due/article-141780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) कर चुके उन मेधावी डॉक्टरों के सामने करियर का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने अपनी मेहनत से नीट एसएस (सुपरस्पेशलिटी) की कठिन परीक्षा पास की है। 28 जनवरी 2025 को सचिवालय से संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी नए आदेशों ने प्रदेश के रेजिडेंट्स की चिंता बढ़ा दी है। नए नियमों के अनुसार, अब सुपरस्पेशलिटी कोर्स में प्रवेश पाने के लिए रिलीव होने से पहले रेजिडेंट्स को बॉन्ड राशि के बराबर की बैंक गारंटी सरकार के पास जमा करानी होगी।</p>
<p><strong>क्या है विवाद की मुख्य जड़?</strong></p>
<p>पूर्व में नियम यह था कि यदि किसी रेजिडेंट का चयन पीजी के दौरान या बाद में सुपरस्पेशलिटी के लिए होता था, तो सरकार उनसे 25 लाख रुपये का एफिडेविट (शपथ पत्र) लेकर उन्हें रिलीव कर देती थी। छात्र अपना कोर्स पूरा करने के बाद वापस राज्य में आकर बॉन्ड की सेवा शर्तें पूरी करते थे।<br />लेकिन नए आदेशों ने इस प्रक्रिया को अत्यंत जटिल बना दिया है:</p>
<p>बैंक गारंटी की अनिवार्यता: अब एफिडेविट के स्थान पर बैंक गारंटी मांगी जा रही है।</p>
<p>भारी भरकम राशि: पीजी बैच 2023 और 2024 के लिए यह राशि 25 लाख रुपये है, जबकि बैच 2025 के लिए बॉन्ड राशि को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।</p>
<p>वित्तीय बोझ: किसी भी मध्यमवर्गीय या मेधावी छात्र के लिए 25 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की बैंक गारंटी देना व्यावहारिक रूप से असंभव है।<br />जार्ड का विरोध और डॉक्टरों की मांग</p>
<p>जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (JARD) ने इस आदेश को प्रतिभा विरोधी करार दिया है। जार्ड अध्यक्ष डॉ. राजपाल सिंह मीना का कहना है कि सरकार का यह कदम प्रदेश के सबसे होनहार डॉक्टरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पीजी के बाद बॉन्ड की अनिवार्यता और इतनी बड़ी राशि की बैंक गारंटी के कारण मेधावी डॉक्टर सुपरस्पेशलिटी कोर्स करने से वंचित रह जाएंगे। हम सेवा करने से मना नहीं कर रहे, लेकिन बैंक गारंटी की शर्त हटाकर पुरानी एफिडेविट व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 18:37:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राज्य सरकार की ओर से जारी किये गये एक आदेश ने भू-मालिकों की बढ़ा दी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[आम जनता को राहत प्रदान करने के नाम पर  राज्य सरकार की ओर से जारी किये गये एक आदेश ने भू-मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस आदेश के बाद भू माफियाओं में खुशी की लहर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/an-order-issued-by-government-increased-concern-of-land-owners/article-8103"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/bu-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। आम जनता को राहत प्रदान करने के नाम पर राज्य सरकार की ओर से जारी किये गये एक आदेश ने भू-मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस आदेश के बाद भू माफियाओं में खुशी की लहर है। आरोप है कि अधिकारियों ने बिना गुण-दोष का आंकलन किये राज्य सरकार से यह आदेश पारित करवा दिया जिसमें कहा गया है कि अब आम सूचना प्रकाशन का खर्च जेडीए और हाउसिंग बोर्ड व निकाय वहन करेंगे। सुनने में जरूर यह आदेश आमजन को राहत प्रदान करने जैसा है लेकिन इस आदेश की गंभीरता को समझे तो इससे ना केवल जमीनों के गलत नामांकन की आशंकाएं बलवती हो गई है अपितु इसमें जरा सी ढील से आमजन की अपनी खरी कमाई से खरीदी गई जमीन किसी और के नाम हस्तांतरित हो जाने के भी सारे दरवाजे खुल गये हैं। खास बात यह है कि असली मालिक के हाथ से कब उसकी जमीन खिसकेगी उसे इसका पता ही कई दिनों तक नहीं चल पायेगा।</p>
<p><strong>इसे यूं समझे</strong><br />अब तक आम सूचना जिस प्रारूप में प्रकाशित होती थी उसमें जमीन का खसरा नंबर और पूरा डॉक्यूमेंट चैनल का प्रकाशन किया जाता था और प्रकाशन की साइज भी स्वायत्त शासन विभाग की ओर से तय की गई थी। इसलिए समाचार पत्रों में प्रकाशन के बाद सहजता से इसे हर कोई देख, समझ और पढ़ सकता था। भले ही इसके लिए संबंधित पार्टियों को दो से पांच हजार रुपए व्यय करने पड़ते थे। और वैसे भी दस से पचास लाख की तक की प्रोपर्टी के लिहाज से यह रकम आम आदमी की जेब पर कोई ज्यादा असर नहीं डाल रही थी। सब कुछ सहज, सामान्य और अच्छे से चल रहा था।  अब आम सूचना प्र्रकाशन का जो नया फॉरमेट तैयार किया गया है उसमें केवल भूखंड संख्या, उसका नाप और आवेदक का नाम ही दिया जाना तय किया है। शेष जानकारी ऑन लाइन उपलब्ध करवाने का भरोसा दिया गया है। सवाल यह है कि जब प्रदेश के अधिकांश घरों में बिजली और पानी ही पूरा नहीं पहुंच पा रहा वहां कितने लोग आॅन लाइन भूखंड के बारे में जानकारी हासिल कर पायेंगे? सवाल यह भी है कि नये फारमेट में आवेदक का ही नाम प्रकाशित होगा, भूखंड किसका है यह पता ही नहीं चल पायेगा। ऐसे में कोई भी अधिकारियों और कर्मचारियों से सांठ गांठ कर किसी का भी भूखंड अपने नाम करवाने की आम सूचना आसानी से प्रकाशित कर लेगा। इससे भू माफियाओं की राह तो आसान होगी ही साथ ही पुलिस और कोर्ट कचहरी के मामले भी बढ़ जायेंगे।</p>
<p><strong>जो चल रहा था उसमें दिक्कत क्या थी</strong><br />सवाल यह है कि जो व्यवस्था वर्तमान में चल रही थी उसमें दिक्कत किसको थी? ना ही यह मांग कभी सरकार के समक्ष खड़ी हुई और ना ही किसी एक ने भी आम सूचना प्रकाशन की राशि कम करने को लेकर सरकार से कोई मांग ही कभी की। फिर भी अधिकारियों ने केवल चुनिंदा लोगों के इशारे पर व्यवस्थित रूप से चल रही पूरी परिपाटी बदल कर भू माफियाओं की राह प्रशस्त कर दी? क्यों? जांच की जानी चाहिए। सरकार को गुमराह कर सीधे तौर पर इससे उसकी साख पर संकट खड़ा करने की कोशिश की गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बढ़ती लोकप्रियता को ध्वस्त करने के लिए कहीं यह विपक्षी दलों की कोई साजिश का हिस्सा तो नहीं। इस पर भी सरकार को मनन अवश्य करना चाहिए।</p>
<p><strong>जेब पर भार तो अभी भी पड़ेगा</strong><br />राज्य सरकार की ओर से जो आदेश जारी किया गया है उसमें जेडीए, हाउसिंग बोर्ड और निकायों को अपनी ओर से आम सूचना प्रकाशन का अधिकार दिया गया है, लेकिन ये सभी इसके लिए एक निश्चित राशि भू मालिकों से ही वसूलेंगे। तो इससे आम लोगों को राहत कैसे मिलेगी? यह सरकार समझ नहीं पाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 11:10:04 +0530</pubDate>
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