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                <title>warmer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में वार्मर की होती है अहम भूमिका </title>
                                    <description><![CDATA[नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में वार्मर की अहम भूमिका होती है। यह वार्मर नवजात बच्चों के शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/warmer-control-temperature-of-childerns/article-8204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46546546546527.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में वार्मर की अहम भूमिका होती है। यह वार्मर नवजात बच्चों के शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है। विशेषज्ञों की मानें, तो नवजात शिशुओं के शरीर का तापमान 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए। अगर तापमान इससे कम होता है तो शिशु का शरीर ठंडा पड़ जाता है। कई बार शरीर नीला पड़ने से उसकी मृत्यु भी हो जाती है। इस समस्या को हाइपोथर्मिया कहा जाता है। नवजात शिशुओं को हाइपोथर्मिया से बचाने के लिए एनआईसीयू में वार्मर मशीन लगाई जाती है। वार्मर के बारे में कुछ ऐसी ही जानकारियां दी जयपुर में बच्चों के सबसे बड़े जेके लोन अस्पताल के पूर्व अधीक्षक और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक गुप्ता ने। उन्होंने बताया कि वार्मर अगर अच्छी क्वालिटी का नहीं हो तो ये बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।</p>
<p><strong>क्या है वार्मर और कैसे करता है काम</strong><br />डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि वार्मर एनआईसीयू में लगाया जाता है। यह ऐसे बच्चों के शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है, जो कमजोर और समय से पहले जन्म लेने के कारण हाइपोथर्मिया के शिकार होते हैं। इसमें शरीर का तापमान कम होने से शरीर ठंडा या कभी नीला भी पड़ जाता है। वार्मर एक ऐसा मॉनिटर है, जिसमें सेंसर लगे होते हैं। इसकी मदद से शिशु के शरीर में आॅक्सीजन की मात्रा, उसकी घड़कन, उसकी सांस की रफ्तार आदि पर नियंत्रण रखा जाता है। तय सीमा से कम या ज्यादा होने पर इसमें लगा अलार्म उपस्थित नर्सिंग स्टाफ को अलर्ट कर देता है।</p>
<p><strong>वार्मर को लेकर सावधानी</strong><br />डॉ. गुप्ता ने बताया कि जो उपकरण जीवन रक्षक होते हैं उनको खरीदने में पैसों और क्वालिटी को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहिए। वार्मर हमेशा अच्छी क्वालिटी स्टेंडर्ड का होना चाहिए। इसमें लगे स्विच और इलेक्ट्रिकल उपकरण अच्छी क्वालिटी के होने चाहिए। अधिकांश हादसे उपकरणों के फेलियर से होते हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि एक अच्छी क्वालिटी का स्टेंडर्ड वॉर्मर करीब 30 से 40 हजार के बीच आ जाता है। अगर वार्मर में गड़बड़ी हो तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 12:58:25 +0530</pubDate>
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                <title>ब्यावर के अमृतकौर अस्पताल की नर्सरी में हादसा: वार्मर में हीट बढ़ने से दो नवजात की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ हादसे की वजह तकनीकी फॉल्ट बताई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-news--accident-in-the-nursery-of-amritkaur-hospital--beawar--two-newborns-died-due-to-increase-in-heat-in-the-warmer/article-8132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/hospitals.jpg" alt=""></a><br /><p> ब्यावर। राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय की मदर एंड चाइल्ड विंग की नर्सरी में सोमवार शाम बड़ा हादसा हो गया। नर्सरी में वार्मर की हीट बढ़ने से दो नवजात की मौत हो गई। हादसे से चिकित्सालय प्रबंधन में हड़कम्प मच गया। हादसे की वजह तकनीकी फॉल्ट बताई जा रही है। बताया जाता है कि नर्सरी के एक वार्मर में सोमवार शाम 7.30 बजे अचानक हीट बढ़ गई जिससे वार्मर पर भर्ती दो नवजात शिशुओं की हालत बिगड़ गई। सूचना पर पीएमओ डॉ.एसएस चौहान, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.पीएम बोहरा, डॉ.एमएस चांदावत, डॉ.अशोक जांगिड़ मौके पर पहुंचे। शिशुरोग विशेषज्ञों ने दोनों नवजात बचाने का प्रयास किया लेकिन बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों ने नर्सरी में भर्ती अन्य शिशुओं की भी जांच की जिनका स्वास्थ्य सामान्य मिला।</p>
<p><br /><strong>इनकी हुई मौत</strong>: हादसे के समय नर्सरी में 20 नवजात भर्ती थे। जिसमें बक्ता का बाड़िया सुरड़िया निवासी पूजा पत्नी ओमप्रकाश की नवजात पुत्री की मृत्यु हो गई। रामपुरा खरवा निवासी माया पत्नी सुरेन्द्रसिंह ने 14 अप्रैल को बेटे को जन्म दिया था। दोनों नवजात एक ही वार्मर पर भर्ती थे। दोनों प्रसूताएं कुछ समय पहले ही अपने-अपने शिशु को दूध पिलाकर गई थी।</p>
<p><br /><strong>अन्य परिजन भी हुए व्याकुल</strong>: हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए चिकित्सालय परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया। नर्सरी में चिकित्सक सहित स्टाफ पहुंच गया। जैसे ही हादसे की जानकारी वार्ड में भर्ती अन्य शिशुओं के परिजन को मिली तो वे भी व्याकुल हो उठे। सभी की धात्री माताएं एवं उनके परिजन शिशुओं को देखने के लिए नर्सरी के बाहर एकत्रित हो गए और हंगामा कर दिया। अपने जिगर को टुकड़े को सही सलामत देखने के बाद परिजन की जान में जान आई। </p>
<p>तकनीकी खामी के चलते वार्मर की हीट बढ़ने के कारण हादसा हो गया। मामले की जांच कराई जाएगी। -<strong>डॉ.एसएस चौहान, पीएमओ एकेएच ब्यावर</strong><br /><br />हादसा की सूचना पर मौके पर पहुंचकर जानकारी ली है तथा चिकित्सकों को निर्देशित किया कि अन्य शिशुओं के स्वास्थ्य की जांच की जाए। अन्य शिशुओं का स्वास्थ्य सामान्य है। -<strong>राहुल जैन, उपखण्ड अधिकारी, ब्यावर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 14:05:56 +0530</pubDate>
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