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                            <item>
                <title>अवैध पैटा काश्त : ड्रोन करें पहरेदारी और तारबंदी बने ढाल,  जलस्रोतों का दम घोंट रही अवैध खेती </title>
                                    <description><![CDATA[बरसाती नदियों और तालाबों में पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक रहा है। परिणाम स्वरूप तालाब आधे भी नहीं भर पा रहे और भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/illegal-patta-cultivation--drones-should-monitor-and-fences-become-a-shield--illegal-farming-is-choking-water-sources/article-128343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1111of-news-(1).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र में जलस्रोतों पर अवैध पैटा काश्त (कब्जा कर खेती) का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। तालाब और नदियों की जमीन पर ग्रामीण व प्रभावशाली लोग खुलेआम खेती कर रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से चना, सोयाबीन और मौसमी सब्जियां उगाई जा रही हैं। पानी की उपलब्धता और उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां खेती आसानी से हो जाती है, लेकिन इसकी कीमत जलस्रोतों को चुकानी पड़ रही है। बरसाती नदियों और तालाबों में पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक रहा है। परिणामस्वरूप तालाब आधे भी नहीं भर पा रहे और भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में इन जलस्रोतों को सुरक्षा कवच की दरकार है। पर्यावरणविदें का कहन है कि जलस्रोतों की जमीन पर अवैध खेती से इनके अस्तित्व पर संकट आने लगा है। इसलिए अब इनकी सुरक्षा के लिए तारबंदी सहित अन्य उपाय करने जरूरी है। अन्यथा आगामी वर्षों में जलस्रोतों का नामोनिशान मिट जाएगा।<br /> <br /><strong>पैटा काश्त के नाम पर कर रहे कब्जा:</strong> तालाबों और नदियों के किनारे की जमीन को कानूनी रूप से संरक्षित माना जाता है, ताकि बारिश का पानी संग्रहित हो सके और भूजल स्तर बना रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इन जलाशयों की जमीन पर खेती कर अवैध कब्जा किया जा रहा है, जिसे "पैटा काश्त" कहा जाता है। हाड़ौती अंचल में जलस्रोतों की जमीनों पर तेजी से हो रही अवैध पैटा काश्त (अस्थायी खेती) ने पर्यावरणविदों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई तालाब, नदियों की सीमाएं और बरसाती नालों की जमीनें किसानों और भूमाफियाओं द्वारा जोत ली गई हैं, जिससे भविष्य में जलसंकट और जल भराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सरकार और प्रशासन की ओर से इनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता उपाय नहीं करने से अवैध पैटा काश्त का दायरा बढ़ता ही जा रहा है।</p>
<p><strong>कमाई के लिए कब्जे की होड़</strong><br />जानकारी के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में इन जमीनों को तालाब और नदी की भूमि बताया गया है। बावजूद इसके कब्जाधारी ट्रैक्टर से जुताई कर फसल बो देते हैं। प्रशासन की कई बार की कार्रवाई भी टिकाऊ साबित नहीं हुई। अधिकांश मामलों में खेत खाली करवाने के कुछ समय बाद फिर कब्जा हो जाता है। तालाबों और नदियों की जमीनों पर खेती करने के लिए किसानों और ग्रामीणों ज्यादा खर्चा नहीं करना पड़ता है। वहीं मुफ्त में सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध हो जाती है। इसलिए अब इस भूमि को अधिकांश किसानों ने अच्छी कमाई का जरिया बना लिया है। प्रशासन की ओर से प्रभावी नहीं होने से अवैध कब्जा काश्त के मामले बढ़ते जा रहे हैं।</p>
<p><strong>यह हो सकती है कार्रवाई?</strong><br />- ड्रोन सर्वे व सीमांकन: तालाब-नदी की जमीन का ड्रोन से सर्वे करवा कर सीमांकन किया जाए।<br />- तारबंदी और पिलर: जलस्रोतों की परिधि तारबंदी कर या फिर पिलर लगाकर सुरक्षित की जाए।<br />- अतिक्रमण हटाने का स्थायी अभियान: केवल अस्थायी नहीं, बल्कि बार-बार निगरानी करते हुए कार्रवाई हो।<br />- जुर्माना व कानूनी कार्रवाई: कब्जाधारियों पर आर्थिक दंड और राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने पर एफआईआर करवाई जाए।<br />- ग्राम पंचायत निगरानी समिति: स्थानीय स्तर पर चौकसी बढ़ाई जाए और पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।</p>
<p><strong>हाड़ौती क्षेत्र में अवैध पैटा काश्त के अनुमानित आंकड़े (2024-25)</strong><br /><strong>जिला जल स्रोतों की संख्या अवैध पैटा काश्त प्रभावित क्षेत्र (हैक्टेयर में)</strong><br />कोटा    1,200    700-800 हैक्टेयर<br />बूंदी    950    600-700 हैक्टेयर                 <br />बारां    800    500-600 हैक्टेयर                       <br />झालावाड़    1,100    750-850 हैक्टेयर   </p>
<p>जलस्रोतों की जमीन पर अवैध पैटा काश्त के कारण न केवल जलभराव और बाढ़ जैसी समस्या बढ़ रही है, बल्कि आने वाले समय में पीने के पानी की किल्लत और सिंचाई संकट भी गहरा सकता है। अब इसे रोकने के लिए तारबंदी और सीमांकन जरूरी है।<br /><strong>- राजू गुप्ता, पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>तालाबों के कैचमेंट एरिया पर खेती होने से जलभराव रुक जाता है। पहले जहां पानी महीनों रहता था, अब कुछ ही दिनों में सूख जाता है। कुछ लोग थोड़े फायदे के लिए आने वाली पीढ़ियों के जलस्रोत नष्ट कर रहे हैं। प्रशासन को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- रघुवीर सिंह, पूर्व उपसरपंच</strong></p>
<p>जहां भी जलस्रोतों की जमीन पर पैटा काश्त करने की शिकायत मिलती है तो वहां पर टीम भेजकर सीमांकन करवाया जाता है। मौके पर अवैध कब्जा काश्त मिलने पर उसे हटाने की कार्रवाई की जाती है। सुरक्षा के लिए तारबंदी सहित अन्य उपाय करने का मामला सरकार के स्तर का है। <strong> - जुगल कुमार, नायब तहसीलदार</strong></p>
<p>विभाग के अधीन जलस्रोतों पर अवैध कब्जा काश्त को रोकने के लिए नियमित रूप से निगरानी की जाती है। यदि कहीं से कोई शिकायत मिलती है तो इस सम्बंध में कार्रवाई भी करते हैं। वहीं किसानों और ग्रामीणों से समझाइश भी की जाती है।<br /><strong>- संजय कुमार, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग</strong></p>
<p>आलनिया तालाब पक्षियों के लिए बेतरीन वैटलेंड है। लेकिन, पेटाकाश्त करने वालों ने अतिक्रमण कर नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग व सिंचाई विभाग को इनके खिलाफ कार्रवाई कर गश्त बढ़ानी चाहिए।  ताकि, दोबारा पेटाकश्त न हो सके। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 17:24:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किशोर सागर तालाब में एक साथ 9 कॉर्मोरेंट पक्षी मिले अचेत, 1 की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[बोट आॅपरेटर ने रेस्क्यू कर पक्षियों को चिड़ियाघर पहुंचाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/9-cormorant-birds-found-unconscious-in-kishor-sagar-pond--1-dead/article-109033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer116.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। किशोर सागर तालाब में एक साथ 9 कॉर्मोरेंट पक्षियों के अचेतावस्था में मिलने से वन्यजीव प्रेमियों में सनसनी फैल गई। इनमें से एक पक्षी की संदिग्ध मौत हो गई। घटना से तालाब में पेस्टीसाइड की मौजूदगी की आशंका से जलीय जीवों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। बोट आॅपरेटर ने सभी अचेत पक्षियों का रेस्क्यू कर वन्यजीव विभाग के चिड़ियाघर लेकर पहुंचे। जहां उनका इलाज करवाया। हालांकि, इनमें से एक पक्षी का दम टूट चुका था।  जिसका वन्यजीव चिकित्सक ने पोस्टमार्टम कर सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजे। पोस्टमार्टम में मौत के कारणों का ठीक से पता नहीं चल सका।  लेकिन, बर्ड्स की हालत देखते हुए वन अधिकारियों द्वारा तालाब के पानी में पेस्टीसाइड की मौजूदगी से घटना घटित होने की आशंका जताई जा रही है। </p>
<p><strong>एक साथ पानी में बहते हुए मिले </strong><br />बायोलॉजिस्ट उर्वशी शर्मा ने बताया कि घटना शाम  4 से 5 बजे की है। सेवन वंडर्स की तरफ किशोर सागर तालाब में 9 कॉर्मोरेंट पक्षी एक साथ अचेतावस्था में बहते हुए आ रहे थे, शरीर में मूवमेंट नजर नहीं आया तो अनहोनी का शक हुआ। बोट ले जाकर पास जाकर देखा तो वह अचेतावस्था में थी। जिनका रेस्क्यू कर तुरंत चिड़ियाघर रेस्क्यू सेंटर लेकर पहुंचे। जिनमें एक पक्षी की मौत हो गई। शेष का चिकित्सक से इलाज करवाया। </p>
<p><strong>बोट पास आने पर भी नहीं उड़ी तो हुआ शक </strong><br />बोट आॅपरेटर बनवारी यदुवंशी ने बताया कि कॉर्मोरेंट पक्षी एक साथ एक ही लाइन में आकाश में उड़ते हैं। पानी में मछलियों का शिकार करते हैं। जब यह पक्षी पानी के बहाव में बहते हुए नजर आए और शरीर में कोई मूवमेंट नहीं हुआ तो बोट ले जाकर पास पहुंचे तो भी नहीं उड़े। जबकि, यह पक्षी अपने आसपास कोई नांव या बोट आने पर तुरंत उड़ जाती है। लेकिन, तालाब में ऐसा नजर नहीं आया, उनकी स्थिति पर गौर किया तो मामला संदिग्ध लगा और सभी पक्षियों का रेस्क्यू कर चिड़िया घर पहुंचाया। वहीं, तालाब में और पक्षियों के अचेतावस्था में होने की आशंका के चलते पूरे तालाब में सर्च किया। कुछ कॉर्मोरेंट पक्षी कुछ इसी अवस्था में नजर आए थे लेकिन उनकी स्थिति इनके मुकाबले बेहतर थी, ऐसे में वह उड़ गई। </p>
<p><strong>पेस्टीसाइड की आशंका</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि कॉर्मोरेंट पक्षियों के अचेतावस्था में मिलना और एक ही संदिग्ध मौत से किशोर सागर तालाब में पेस्टीसाइड की मौजूदगी की आशंका बढ़ गई है। जिससे जलीय जीवों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। वन्यजीव प्रेमियों  का कहना है कि किशोर सागर तालाब में किसी ने जहरीला पदार्थ या पेस्टसाइड दवाइयां पानी में फेंकी हो, जिसे मछलियों ने खा लिया और उन मछलियों को इन पक्षियों के खाने से उनकी हालात ऐसी हो गई हो, ऐसी आशंका जताई जा रही है।  हालांकि,  वास्तविक कारणों का पता फोरेंसिक साइंस को भेजे गए मृत पक्षी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग पाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बोट ऑपरेटर्स कॉर्मोरेंट पक्षियों को रेस्क्यू कर लाए थे। सभी पक्षी अचेतावस्था में थे। इनमें से एक की   मौत हो गई थी, जो संदिग्ध होने पर पोस्टमार्टम कर सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब को भेजे गए हैं। वहीं, शेष बर्ड्स का इलाज किया गया है। जिनकी स्थिति पहले से ठीक है। आशंका ऐसी भी है कि किशोर सागर तालाब में पेस्टीसाइड फेंकी गई हो, जिसे मछलियों ने खा लिया और उन मछलियों का कॉर्मोरेंट पक्षियों ने शिकार किया हो। हालांकि, पक्षी की मौत के वास्तविक कारणों का पता एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद ही लग पाएगा। <br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 15:42:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अरे! भाई, जरा देखो...भेरूपुरा सड़क बनी तालाब   </title>
                                    <description><![CDATA[ गांव में फैली गंदगी और कीचड़ से राहगीरों, वाहन चालकों और ग्रामीणों को हो रही परेशानी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/hey--brother--see-the-roots---bherupura-road-becomes-pond/article-98927"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(3)20.png" alt=""></a><br /><p>सूमर। सूमर कस्बे के कंवरपुरा मंडवालान ग्राम पंचायत के भेरूपुरा गांव में नालियों की नियमित सफाई और पानी की निकासी की व्यवस्था न होने के कारण पूरा गांव गंदगी और कीचड़ से भर चुका है। जाम पड़ी नालियों के कारण गांव की मुख्य सड़कों का अवरुद्ध होना, स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। गांव में फैली गंदगी और कीचड़ ने न सिर्फ राहगीरों और वाहन चालकों के लिए, बल्कि पूरे गांव के निवासियों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। गांव के निवासी लेखराज नागर, रामभरोस नागर, चंद्रप्रकाश नागर, हरिशंकर नागर, प्रेमबिहारी नागर और रामचंद नागर ने कई बार ग्राम पंचायत प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई की कमी से बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है, क्योंकि कई छोटे बच्चे कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। गंदगी और पानी की निकासी की समस्या के कारण गांव में बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत से इस समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।</p>
<p>नालियों की समय पर सफाई नहीं होने से कीचड़ व गंदगी फैली हुई है जिससे राहगीरों व ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। <br /><strong>-दुर्गाशंकर नागर, ग्रामीण </strong></p>
<p> सड़क मार्ग पर कीचड़ फैलने से राहगीर फिसलकर चोटिल हो रहे है। <br /><strong>- महावीर नागर, ग्रामीण </strong></p>
<p>कीचड़ व गंदगी से मच्छर तथा अन्य कीड़े होने से गंभीर बीमारी का खतरा मंडरा रहा है।<br /><strong>- रामनाथ नागर, ग्रामीण</strong></p>
<p>सड़क पर कीचड़ जमा होने से ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है, जल्द से जल्द समस्या का समाधान होना चाहिए। <br /><strong>- रामबिलास, ग्रामीण </strong></p>
<p>यह समस्या उनके ध्यान में नहीं है, नालियों को लेकर जो भी साफ सफाई समस्या है उसका जल्द से जल्द समाधान कर दिया जाएगा। <br /><strong>-सतीश चंदेल, ग्राम विकास अधिकारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2024 15:57:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बनेठिया तालाब की पाल के मरम्मत कार्य में लापरवाही </title>
                                    <description><![CDATA[तालाब की पाल की मरम्मत, जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत हुए हैं 70 लाख।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/negligence-in-the-repair-work-of-the-banethia-pond-s-embankment/article-82547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/bnethiya-talab-ki-pal-k-marammt-karya-me-laprwahi...budhadhit,-kota-news-24-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>बूढ़ादीत। सांसद ओम बिरला की पहल पर 0.70 करोड़ की राशि से करवाए जा रहे बनेठिया तालाब की पाल के मरम्मत कार्य ग्रामीणों ने गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री का आरोप लगाकर विरोध जताया है। जानकारी के अनुसार सांसद ओम बिरला की पहल पर वर्षों से अनदेखी और दुर्दशा का शिकार हो रहे क्षेत्र के प्राचीन तालाबों का करोडों रुपए की लागत से विकास और जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है। जिनके कार्यों का उन्होंने 10 मार्च 2024 को वर्चुअल शिलान्यास किया था। इसी के तहत बनेठिया के प्राचीन तालाब का भी जीर्णोद्धार होना है। इस के लिए 0.70 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही तालाब की पाल पर मरम्मत, जीर्णोद्धार और सौंदर्यी करण कार्य का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन वार्ड पंच प्रतिनिधि तेजराज नायक, रामचरण बैरवा, रामेश्वर बैरवा सहित अन्य कई ग्रामीणों ने इसके मरम्मत कार्य में गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री का आरोप लगाते हुए विरोध जताया है। साथ ही ठेकेदार से गुणवत्तापूर्ण कार्य करने की मांग की है।</p>
<p><strong>बारिश में पाल हो सकती है क्षतिग्रस्त</strong><br />बनेठिया वार्ड के पंच प्रतिनिधि तेजराज नायक ने बताया कि पत्थर से तालाब की पाल की पिचिंग का कार्य किया जा रहा है। पिचिंग निर्माण में अनियमितता बरती जा रही है। जिससे ठेकेदार के खिलाफ ग्रामीणों में रोष है। ऐसे गुणवत्ताहीन कार्य से बारिश में तालाब की पाल क्षतिग्रस्त हो सकती है।</p>
<p>बनेठिया तालाब के मरम्मत कार्य में लापरवाही करने की शिकायत आते ही मौके पर जेईएन को भेजकर ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश प्रदान किए। यदि ठेकेदार गुणवत्तापूर्ण कार्य में लापरवाही करता है तो विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- भारत रत्न गौड, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, चंबल परियोजना, संभाग कोटा</strong></p>
<p>तालाब पाल पिचिंग निर्माण कार्य में अनियमितता की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का जायजा लिया। ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के लिए पाबंद किया। <br /><strong>- रवि प्रताप सिंह चंदा, सरपंच प्रतिनिधि, बनेठिया</strong></p>
<p>पहले भी दो बार बारिश में तालाब क्षतिग्रस्त हो चुका है। जिससे बारिश में ग्रामीणों के मकानों में पानी भर गया था। इस प्रकार के कार्य से लोगों को जानमाल का खतरा हमेशा बना रहेगा।<br /><strong>- तेजराज नायक, वार्ड पंच प्रतिनिधि, बनेठिया</strong></p>
<p>लंबे समय से तालाब के सौंदर्य करण और मरम्मत की मांग की जा रही थी। जिस पर इस वर्ष मरम्मत कार्य शुरू हुआ। परंतु ठेकेदार ने मनमाने तरीके से काम चला रखा है। गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा। तालाब क्षतिग्रस्त होता है तो गांव में पानी भरने का संकट पैदा हो जाएगा। पेयजल और सिंचाई सहित अन्य कार्यों में इस तालाब का पानी काम आता है। <br /><strong>- रामचरण बैरवा, ग्रामीण</strong></p>
<p>बनेठिया के प्राचीन तालाब में मरम्मत, नवीनीकरण, जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। ग्रामीणों से मिली शिकायत के आधार पर मौके पर पहुंचकर ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश प्रदान किए गए। ताकि तालाब की पाल का सही तरीके से मरम्मत कार्य हो सके।<br /><strong>- गरिमा बैरवा, जेईएन, जल संसाधन विभाग, चंबल परियोजना, संभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 15:25:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोटा में तीन बच्चे नदी में और सावर में दो तालाब में डूबे </title>
                                    <description><![CDATA[होली की खुशियों पर उस समय ग्रहण लग गया जब प्रदेश में दो अलग-अलग हादसों में पांच बच्चों की डूबने से मौत हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-children-drowned-in-the-river-in-kota-and-two/article-73770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer8.png" alt=""></a><br /><p>बपावर कलां/सावर। होली की खुशियों पर उस समय ग्रहण लग गया जब प्रदेश में दो अलग-अलग हादसों में पांच बच्चों की डूबने से मौत हो गई। कोटा के बपावर कलां में होली खेलने के बाद नदी में नहाने उतरे सगे भाई-बहन सहित तीन बच्चे काल का ग्रास बने और कोटा के बपावर थाना क्षेत्र के उमरदा गांव में नदी में नहाने गए दो सगे भाई वह एक बहन की नदी में डूबने से मौत हो गई।  बपावर के उमरदा गांव का रहने वाला लखन (11), वंशिका (8) तथा अभिषेक (14) होली खेलने के बाद नदी पर नहाने गए।  नदी  किनारे पर चप्पल व कपड़े मिलने से बच्चों के डूबने का पता लगा। ग्रामीणों ने तलाश शुरू कर दी और एक घंटे की मशक्कत के बाद सबको बाहर निकाला गया।  इसी प्रकार केकड़ी के सावर कस्बे में तालाब के किनारे खेलते समय दो स्कूली बच्चों जीसान शेख (15) और मोहम्मद तालिब (17) की डूबने से मौत हो गई। दोनों अपनी गेंद लेने तालाब में गए थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Mar 2024 09:46:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झपायता गांव की मुख्य तलाई बनी कूड़ादान, ग्रामीण परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[जागरूक ग्रामीणों ने इस तलाई की चार दिवारी बनाने की मांग कर है लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/-jhapayata-village-s-main-pond-becomes-dustbin--villagers-worried/article-69694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/japayata-gav-ki-mukya-talai-bani-kudadan,gramin-paresan...deikheda,-bundi-news-10-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। ग्राम पंचायत घाट का बराना के गांव झपायता की 50 साल पुरानी मुख्य तलाई की कच्ची दीवार ढहने से तलाई से पानी खाली हो गया है। वर्तमान में इस तलाई कुड़ा-कचरा से अटी हुई है। इस वजह से इस तलाई में दुर्गंध आसपास सटी आबादी में फैलने से बीमारियों का खतरा बना हुआ है। यहीं नहीं कीर बस्ती के सामने तलाई के किनारे बरसात का पानी निकलने से सात फीट गहरा गड्ढा हो गया है। जिससे बच्चों और ग्रामीणों के गिरने से जनहानि का खतरा भी बना हुआ है। इस गड्ढे में मवेशी भी गिर जाते है। इस संबंध में ग्राम पंचायत को अवगत कराया लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण परेशान है। जागरूक ग्रामीणों ने इस तलाई की चार दिवारी बनाने की मांग कर है लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार गांव झपायता के बीच में सरकारी तलाई बनी हुई है। ग्रामीणों ने मवेशियों के पीने के पानी के लिए 3 बीघा जमीन पर इस तलाई का निर्माण 50 साल पूर्व किया था। तब तलाई के चारों तरफ ईंट की दीवार बनाई गई थी। तलाई के चारों गांव की आबादी से गिरी हुई है। बस्ती के आने जाने वाली सारी गलियां तलाई से होकर निकलती है। ग्राम झपायता की पुरानी बस्ती को छोड़कर नई बस्ती निर्माण 50 वर्ष पूर्व किया गया था। जो तलाई आज कचरे के देर में तब्दील हो रही है। ग्राम पंचायत द्वारा 6-7 वर्ष पूर्व नरेगा द्वारा तलाई के चारों ओर मिट्टी खुदाई कर फाल निर्माण मजदूरों द्वारा करवाया गया था। उसके बाद ग्राम पंचायत द्वारा 1 वर्ष पूर्व महात्मा गांधी नरेगा द्वारा पक्का निर्माण तलाई की पाल ढहने से तलाई में नीम खुदाई कर पत्थर डालकर कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। </p>
<p><strong>ग्रामीणों का क्या है कहना</strong><br />ग्राम वासी नंदकिशोर केवट बताते हैं कि जब नई आबादी बसाई गई थी तब ग्रामवासियों द्वारा मवेशियों और गांव वासियों की सुविधा को देखकर ग्रामीणों ने तलाई निर्माण कर बनाई गई थी। लेकिन वर्तमान में तलाई की चारदिवारी नहीं होने से तलाई में पानी नहीं ठहरता है। तलाई में गंदगी फैली हुई है। जिससे ग्रामीण परेशान है।<br /> <br />राकेश केवट बताते हैं कि तलाई की दीवार ढहने से पानी का रूकाव नहीं होने से तलाई अनुपयोगी हो गई है। इससे आने जाने वाले रास्ते भी बस्ती वालों के लिए खतरनाक घटना होने का डर लगा रहता है। ग्रामीणों द्वारा कचरा डालने यह तलाई सिकुड़ती जा रही है। कतिपय लोगों द्वारा तलाई के आसपास अतिक्रमण भी किया जा रहा है। </p>
<p>ओमप्रकाश केवट बताते हैं कि पूरे गांव के आने जाने वाले रास्ते की गलियों से आने वाला पानी तलाई में गिरता है। इससे कीचड़ ओर दुर्गंध हो रही है। गंदगी से बीमािरयों का खतरा बढ़ गया है। मच्छर मक्खी बढ़ रहे हैं। इससे बीमार होते जा रहे हैं। इससे महिला बच्चे बुजुर्ग वह प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए आने जाने में परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है। </p>
<p>वार्ड पंच मोनू मेहरा वार्ड नंबर 11 ग्रामवासी घाट का बराना बताते हैं कि बस्ती वाले ग्राम पंचायत में आवाज उठाते आ रहे हैं। जनप्रतिनिधि और उच्चाधिकारियों को अवगत करवाते रहे है। कोई पूछ परख लेने वाला नहीं है। हमारी कोई नहीं सुनता है।</p>
<p>वार्ड पंच ग्राम झपायता मायाराम केवट बताते हैं कि यह तलाई वार्ड नंबर 10 ,11 में स्थित है। ग्राम पंचायत द्वारा महात्मा गांधी नरेगा द्वारा मिट्टी खुदाई तलाई की फाल दीवार को दुरुस्त करवाने के लिए नीवं खुदाई का कार्य रुका हुआ है। बजट नहीं होना बताया जा रहा है ।  </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />तलाई की दीवार को बनाने के लिए  बजट  स्वीकृ हो गया हैं। ठेकेदार को टेंडर कर दिया गया है। फसल काटने के बाद तलाई की दीवार बनाने के लिए मटेरियल पहुंच जाएगा। निर्माण कार्य जल्द पूरा करवा कर ग्रामवासियों की समस्या का समाधान किया जाएगा। <br /><strong>- कमला शंकर मीणा, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत घाट का बराना  </strong></p>
<p>वर्तमान में रास्ता नहीं होने से तलाई निर्माण के लिए निर्माण सामग्री नहीं लाई जा सकती है। फसल कटते ही रास्ता खुलने पर सामग्री लाई जा सकेगी। चारदिवारी निर्माण के लिए पत्थर भरने की तैयारी पूरी कर ली गई है। तलाई की चारदिवारी के लिए विधायक कोष से 5 लाख का बजट आ गया है। <br /><strong>- कृष्णमुरारी मीणा, सरपंच ग्राम पंचायत घाट का बराना</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Feb 2024 18:39:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश: बस तालाब में गिरी, 17 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ दक्षिण पश्चिम बांग्लादेश में शनिवार को यात्री बस सड़क किनारे एक बड़े तालाब में गिर गई। इस हादसे में 17 लोगों की जानें चली गईं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bangladesh-bus-falls-into-pond-17-killed/article-52518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/4154154.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। दक्षिण पश्चिम बांग्लादेश में शनिवार को यात्री बस सड़क किनारे एक बड़े तालाब में गिर गई। इस हादसे में 17 लोगों की जानें चली गईं। वहीं एक दर्जन से ज्यादा घायल हो गए हैं।  <br />पुलिस ने बताया कि हादसा झलकाठी जिले में उस समय हुआ जब बस 60 से ज्यादा यात्रियों को लेकर भंडरिया उप जिले से दक्षिण पश्चिम संभागीय मुख्यालय बरिशाल जा रही थी। चालक के वाहन से नियंत्रण खो देने के कारण बस तालाब में गिर गई।<br />एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गोताखोरों ने 17 शवों को निकाला है और पुलिस क्रेन भारी बारिश के बाद पानी से भरे तालाब से बस को निकालने की कोशिश कर रही है। पुलिस उप निरीक्षक गौतम कुमार घोष ने बताया कि मृतकों में आठ महिलाएं और तीन बच्चे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बस के अंदर और शव फंसे होने की आशंका है।  20 अन्य यात्रियों का इलाज झलकथी के मुख्य सरकारी अस्पताल में चल रहा है। बताया जा रहा है कि बस के अंदर 65 यात्री सवार थे। दुर्घटना में घायल हुए यात्री रसेल मोल्लाह (35 वर्ष) ने कहा, मैं ड्राइवर की सीट के ठीक बगल में बैठा था। चालक ने बस चलाते समय सावधानी नहीं बरती। उन्होंने कहा कि चालक लगातार अपने सहायक से बात कर रहा था और उसे अधिक यात्रियों को बैठाने के लिए कह रहा था। </p>
<p>मोल्लाह ने दुर्घटना में अपने पिता को खो दियाए जबकि उनके बड़े भाई अभी भी लापता हैं।<br />स्वास्थ्य केंद्र के एक डॉक्टर ने कहाए हम जिन मरीजों का इलाज कर रहे हैं, उनके पेट में अत्यधिक पानी है क्योंकि बस तालाब में गिर गई थी। दुर्घटना में बच निकले लोगों ने लगभग एक ही बात कही है कि वाहन में अधिक यात्री होने और क्षमता से अधिक लोगों को बैठा लेने के लालच के कारण बस दुर्घटना हुई। साथ ही बांग्लादेश की टूटी फूटी सड़क और अत्यधिक वर्षा के कारण सड़क के कमजोर हो जाने के कारण भी दुर्घटना घटित हुई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Jul 2023 11:33:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ता जा रहा है तालाब के सौंदर्यकरण का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[तालाब को नगर के आकर्षण का मुख्य केन्द्र बनाने के लिए तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हो गया था, जो बारिश से पहले पूरा होना था। इस बड़े तालाब का सौन्दर्यकरण डूंगरज्या के कमल सरोवर की तर्ज पर किया जाना था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-the-beautification-of-the-pond-is-increasing/article-29303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/badhta-jaa-raha-hai-talab-ke-saundarykaran-ka-intazar...sultanpur-news-kota-11.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर।नगर में रक्तया भैरूजी मन्दिर के पास स्थित प्राचीन तालाब की सूरत बदलने की आस अब लंबी होती जा रही है। इसके सौंदर्यकरण का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। जबकि इसे बारिश के पूर्व ही डूंगरज्या के कमल सरोवर की तर्ज पर विकसित होना था। जानकारी के अनुसार 8 लाइन के कार्य में तालाब की मिट्टी का सैंपल फेल हो जाने के कारण तालाब की खुदाई ग्राम पंचायत द्वारा ही करवाई गई और तालाब की पाल बनवा कर जन सहयोग से पौधारोपण करा कर पूर्व नायब तहसीलदार भरत यादव की प्रेरणा पर नगर के व्यापारियों ने तालाब की पाल पर लोगों के आराम करने व बैठने के लिए बैन्चें लगवा दी थीं। तालाब को नगर के आकर्षण का मुख्य केन्द्र बनाने के लिए तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हो गया था, जो बारिश से पहले पूरा होना था। इस बड़े तालाब का सौन्दर्यकरण डूंगरज्या के कमल सरोवर की तर्ज पर किया जाना था। जिसके के बीच में एक टापू बनाया जाएगा। चारों तरफ घूमने के लिए पाल, सड़क, लाइटें व बैठने के लिए बेंच लगाई जानी थी। इसे पर्यटक स्थल की तर्ज पर विकसित किया जाना था। कस्बे वासियों के लिए पाल बना कर उस पर बेंच लगा दी गई हैं। पौधारोपण का कार्य आगे भी जारी रहेगा। पाल पर एवं बीच में टापू पर खजूर के पौधे लगाए जाएंगे। अतिवृष्टि के चलते समय के अभाव में यह कार्य रुके हुए हैं। बीच के टापू में लाइट लगाकर आगे भी सौंदर्यकरण का कार्य जारी रहेगा। इसके लिए नगर पालिका एवं जन सहयोग से कार्य कराए जाएंगे। </p>
<p><strong>तालाब की पाल पर विकसित होगी हरियाली</strong><br />तालाब की पाल को भी भ्रमण के लिए चौड़ी कर इंटरलॉकिंग करवाई जाएगी। सुन्दर विद्युत लाइटें व हरियाली विकसित की जाएगी। यदि ऐसा होता है तो  तालाब कस्बे का एकमात्र प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बनेगा। </p>
<p><strong>लोगों की आस्था का केंद्र है रक्तया भैरूजी</strong><br />रक्तया भैरूजी का तालाब पूरे क्षेत्र की आस्था का केन्द्र है। इस मन्दिर पर कस्बा समेत क्षेत्र के साथ मध्यप्रदेश तक के श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। हर वर्ष 2 दिवसीय मेले का भी आयोजन होता है। तालाब का सौन्दर्यीकरण होने से पूरे कस्बे के विकास को चार चांद लगेंगे। </p>
<p><strong>टापू से तालाब की पाल तक बनेगी पगडंडी</strong><br />जानकारी के अनुसार हाइवे निर्माण कंपनी व जनप्रतिनिधियों के सहयोग से तालाब के सौन्दर्यीकरण के विकास कार्य करवाए जाने थे। इसमे डूंगरज्या कमल सरोवर की तर्ज पर तालाब का सौन्दर्यीकरण किया जाएगा। जहां तालाब के बीच एक जलमन्दिर का भी निर्माण होगा। तालाब के बीच टापू से तालाब की पाल तक पगडंडी मार्ग विकसित किया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसे बारिश से पूर्व ही पूर्ण विकसित करने का लक्ष्य  था। जिससे लोगों को धार्मिक आस्था वाले तालाब को पर्यटन के हिसाब से भी विकसित किया जा सके। 8 लाइन कंपनी द्वारा मिट्टी को नापास कर देने से जनप्रतिनिधियों के सहयोग से तालाब के कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय विधायक एवं सांसद को अवगत करा दिया गया है। <br /><strong>-हेमलता शर्मा, चेयरमैन, नगर पालिका, सुल्तानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Nov 2022 16:02:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>तालाब में गए 5 नाबालिग दोस्त, 2 की डूबने से मौत </title>
                                    <description><![CDATA[घायल तीन को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। एसआई रामेश्वर खोखर ने बताया कि हादसे में मनीष गुप्ता और रोहित बुनकर की मौत हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/5--friends-went-to-the-pond-2-killed-due-to-drowing/article-15942"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/gsdgs-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दौलतपुरा थाना इलाके में तालाब में गए 5 नाबालिग डूब गए। मौके पर मौजूद लोगों की मदद से पांचों को तालाब से बाहर निकाला गया। इस दौरान 2 की मौत हो गई। घायल तीन को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। एसआई रामेश्वर खोखर ने बताया कि हादसे में मनीष गुप्ता और रोहित बुनकर की मौत हो गई। ईरशाद, निकिल और और अनिकेत यादव घायल है।</p>
<p><strong>तालाब पर गए थे पांचों दोस्त</strong><br />स्कूल की छुट्‌टी होने के कारण पांचों दोस्त तालाब पर गए थे। सुबह करीब 8 बजे पांचों दोस्त पैदल-पैदल घर से करीब 2 किलोमीटर दूर आंकेड़ा डूंगर पहुंचे। दो दिन से हो रही अच्छी बारिश के चलते तालाब में करीब 8 फीट पानी था। पांचों दोस्त तालाब में उतर गए। इस दौरान अचानक कीचड़ में पैर फंस गए। तालाब में डूबने लगने पर हंगामा करना शुरू किया। बच्चों की आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग मौके पर पहुंचे। लोगों ने तालाब किनारे फंसे तीन दोस्त ईरशाद, निकिल और अनिकेत को बाहर निकाल लिया। तालाब में मनीष और रोहित डूबने से मौत हो गई।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Jul 2022 12:32:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुर्णिया:  तालाब में गिरी स्कॉर्पियों, डूबने से 8 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के अनगढ़ थाना क्षेत्र में स्कार्पियो के तालाब में गिर जाने से बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया। तालाब में वाहन गिरने से सवार 8 लोगों की डूबने से मौत हो गई।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/purnia-scorpions-fall-into-the-pond-8-people-died/article-11884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bihar-accident.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">पूर्णिया</span>। </strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">बिहार के पूर्णिया जिले के अनगढ़ थाना क्षेत्र में</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> स्कार्पियो के तालाब में गिर जाने से बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया। तालाब में वाहन गिरने से सवार 8 लोगों की डूबने से मौत हो गई। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">हादसे के बारे में <span>पु</span>लिस ने बताया कि किशनगंज जिले के महीन गांव पंचायत के नुनिया गांव से कुछ लोग अपनी बेटी का तिलक चढ़ाने पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड के चनकी ताराबाड़ी जा रहे थे। शुक्रवार देर रात स्कार्पियो से लोग वापस लौट रहे थे तभी तीव्र मोड़ के समीप स्कार्पियो अनियंत्रित होकर तालाब में गिर गई। स्कार्पियो के पीछे बैठे दो लोग किसी तरह शीशा तोड़कर बाहर निकलकर जान बचाने में सफल हो गयें। लेकिन इस हादसे में आठ लोगों की तालाब में डूबने से मौत हो गई<span> ।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">मृतकों की पहचान गंगा प्रसाद यादव</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">तांडव लाल यादव</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">करण लाल यादव</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">अमरचंद यादव</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">कालीचरण यादव</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">रामकिशन यादव</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">गुलाबचंद यादव और माणिक लाल के रूप में की गई है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिये किशनगंज भेजा गया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 13:13:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेडीबी के सामने वाले घोड़े जल्द ही तालाब में दौड़ते दिखेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[ कुछ समय पहले तक जेडीबी कॉलेज के सामने लगे घोड़े शीघ्र ही किशोर सागर तालाब में दौड़ते नजर आएंगे। नगर विकास न्यास ने इसका काम भी शुरू कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/horses-in-front-of-jdb-will-soon-be-seen-running-across-the-pond/article-10306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/jdb-ke-saamne-wale-horse.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कुछ समय पहले तक जेडीबी कॉलेज के सामने लगे घोड़े शीघ्र ही किशोर सागर तालाब में दौड़ते नजर आएंगे। नगर विकास न्यास ने इसका काम भी शुरू कर दिया है।  कांग्रेस के पिछले शासन काल में नगर विकास न्यास द्वारा जेडीबी कॉलेज के सामने घोड़े लगाए गए थे। उन घोड़ों के बीच-बीच में फव्वारे लगे हुए थे। रात के समय रोशनी से जगमग फव्वारों के बीच लगे घोड़े दौड़ते हुए नजर आते थे। लेकिन अब उन घोड़ों को वहां से हटा दिया है। उनकी जगह पर अब वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु व लोह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की आपस में बात करते हुए बैठी हुई मूर्तियां लगाई जाएंगी। जेडीबी कॉलेज के सामने से हटाए गए घोड़ों को अब किशोर सागर तालाब में लगाया जाएगा। न्यास ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। <br /><br /><strong>पानी के नीचे बनेगा पैडेस्टल</strong><br />नगर विकास न्यास के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सत्येश्वर महादेव मंदिर से कोटड़ी चौराहे के बीच तालाब की चार दीवारी से करीब 100 मीटर दूर पानी के अंदर पैडेस्टल बनाया जाएगा। पानी के अंदर करीब 8 मीटर नीचे तक पैडेस्टल बनेगा। वह तालाब में पानी की सतह तक होगा। उस पैडेस्टल पर घोड़ों कीे 9 मूर्तियां लगाई जाएगी। पैडेस्टल बनाने के लिए तालाब के बीच तक जाने का  अस्थायी रास्ता बनाने का काम शुरू हो गया है। लकड़ी की पाल बनाई जा रही है। जहां तक वह पाल है उसी जगह पर पैडेस्टल बनाया जाएगा। <br /><br /><strong>चार करोड़ से हो रहा काम</strong><br />नगर विकास न्यास द्वारा करीब 4 करोड़ रुपए से यह काम कराया जा रहा है। इस काम को शुरू कर दिया है। जिसके पूृरा होने में करीब दो माह का समय लगेगा। <br /><br /><strong>चार दीवारी हटाकर लोहे की रैलिंग लगना शुरू</strong><br />न्यास सूत्रों के अनुसार सत्येश्वर महादेव मंदिर से कोटड़ी चौराहे तक सड़क की साइड पर बनी करीब 3 फीट की चार दीवारी को हटाया जा रहा है। उसके स्थान पर करीब 4 फीट ऊंचाई कीे लोहे की रैलिंग लगाई जा रही है। जिससे उस रोड से गुजरने वालों को तालाब में घोड़े आसानी से नजर आ सकेंगे।  वहीं कुछ लोगों का कहना है कि तालाब की पाल की चार दीवारी सही बनी हुई है। उसे जबरन हटाकर जनता के धन का दुरूपयोग किया जा रहा है। जबकि लोहे की रैलिंग लगाने का कोई लाभ नहीं होगा। पहले भी स्मैकची लोहे की रैलिंग को चोरी कर ले जा चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 17:19:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गौरीशंकर तालाब की पाल टूटने के बाद नहीं दिया जा रहा है ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र व प्रदेश सरकार पुरातत्व विभाग व अन्य पुरानी इमारतों के तालाबों के अस्तित्व को बचाने का दावा कर रही है। गत एक वर्ष से नरैना के ऐतिहासिक गौरीशंकर तालाब की पाल टूटने के बाद भी स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-attention-not-being-given-after-breaking-sail-of-gaurishankar-pond/article-9039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/narena-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नरैना। केंद्र व प्रदेश सरकार पुरातत्व विभाग व अन्य पुरानी इमारतों के तालाबों के अस्तित्व को बचाने का दावा कर रही है। गत एक वर्ष से नरैना के ऐतिहासिक गौरीशंकर तालाब की पाल टूटने के बाद भी स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रूपचंद लाटा व सुनील पारीक ने बताया की गौरीशंकर तालाब की पाल पर 60 लाख की लागत से सीसी ब्लॉक सड़क बनाकर राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय सुगमता से पहुंचने के लिए बनाई गई थी, लेकिन बारिश के मौसम में पाल के ढ़हने से सीसी ब्लॉक सड़क लगातार उखड़ती जा रही है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों व पंचायत प्रशासन द्वारा ध्यान  नहीं दिया जा रहा, जिससे तालाब की पाल के साथ आसपास के मकानों को भी खतरा बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया 900 वर्ष पुराने गौरीशंकर तालाब की पाल के ढहने के बाद जयपुर ग्रामीण सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ व फुलेरा विधायक निर्मल कुमावत को कई बार शिकायत की, लेकिन सांसद व विधायक की उदासीनता के चलते एक साल बाद भी गौरीशंकर तालाब की पाल की मरम्मत नहीं हो सकी। बारिश के मौसम में पाल के आसपास के मकानों व माहेश्वरी धर्मशाला को खतरा हो सकता है। पर्यटन व पुरातत्व विभाग ने करोड़ों रुपए लगाकर गौरीशंकर तालाब की पाल ऐतिहासिक बावड़ी, कुओं की मरम्मत करवाई थी, लेकिन देखरेख के अभाव में पाल पूर्णतया जर्जर होती जा रही है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 15:29:25 +0530</pubDate>
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