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                <title>sariska tiger reserve - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जंगल सफारी अब होगी महंगी : प्रदेश में वाइल्डलाइफ सफारी के शुल्क में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी, एक अप्रैल से लागू होगी नई दरें</title>
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                        <![CDATA[प्रदेश में वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खबर। अब जंगल सफारी का रोमांच पहले से ज्यादा महंगा होने जा रहा। वन्यजीव पर्यटन से जुड़े शुल्कों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jungle-safari-will-now-be-expensive-10-percent-increase-in/article-148560"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/aranya-bhawan.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खबर है। अब जंगल सफारी का रोमांच पहले से ज्यादा महंगा होने जा रहा है। वन्यजीव पर्यटन से जुड़े शुल्कों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। नई दरें रणथंभौर टाइगर रिजर्व और सरिस्का टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के सभी वाइल्डलाइफ सफारी स्थलों पर लागू होंगी।</p>
<p>आदेश के अनुसार, यह बढ़ी हुई दरें 31 मार्च 2028 तक प्रभावी रहेंगी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरुण प्रसाद की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। पर्यटकों को अब जिप्सी और कैंटर सफारी के लिए पहले से अधिक शुल्क देना होगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:23:39 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur PS]]>
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                <title>सरिस्का में मीडिया कार्यशाला और सफारी का आयोजन : टाइगर रिजर्व की चुनौतियों पर होगी चर्चा, मीडिया को प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण की गतिविधियों से रूबरू कराने की पहल</title>
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                        <![CDATA[अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में मीडिया कार्यशाला और सफारी आयोजित। मीडिया प्रतिनिधियों को बाघ संरक्षण, वन प्रबंधन और वन्यजीव गतिविधियों की जानकारी। कार्यशाला के बाद जंगल सफारी कराई जाएगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/media-workshop-and-safari-will-be-organized-in-sariska-challenges/article-145945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अलवर स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों को लेकर विशेष मीडिया कार्यशाला और सफारी का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मीडिया प्रतिनिधियों को सरिस्का टाइगर रिजर्व में चल रही विभिन्न गतिविधियों, संरक्षण प्रयासों और सामने आ रही चुनौतियों से अवगत कराना है।</p>
<p>कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से सरिस्का टाइगर रिजर्व परिसर में होगा। इसमें मीडिया कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ और अधिकारी सरिस्का में बाघ संरक्षण, वन प्रबंधन और वन्यजीवों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।</p>
<p>इसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों को सरिस्का टाइगर रिजर्व में सफारी कराई जाएगी, जिसमें उन्हें जंगल के प्राकृतिक वातावरण, वन्यजीवों और संरक्षण कार्यों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>फील्ड डायरेक्टर संग्राम सिंह कटियार ने कहा कि इस पहल से मीडिया के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सरिस्का की चुनौतियों व उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद मिलेगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 12:45:45 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                <title>सरिस्का में सैलानियों को लगातार हो रहे हैं बाघ-बाघिन के दीदार</title>
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                        <![CDATA[सरिस्का बाघ अभयारण्य में बाघिन ST-9 और उसके शावक ST-15 के एक साथ दिखने से पर्यटक रोमांचित हैं। नए साल के जश्न के लिए भारी संख्या में सैलानी सफारी का आनंद ले रहे हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/tourists-are-continuously-seeing-tigers-and-tigresses-in-sariska/article-137826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sariska.png" alt=""></a><br /><p>अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभयारण्य में 'बाघ-बाघिन' का कुनबा बढऩे से पर्यटकों को लगातार उनके दीदार हो रहे हैं। वन विभाग के सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि इसी आकर्षण में पर्यटक सरिस्का में सफारी करने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा विदेशी पर्यटक भी काफी संख्या में सफारी का लुफ्त उठाने के लिए सरिस्का आ रहे हैं। </p>
<p>आज सफारी के दौरान सरिस्का घानका तिराहा जॉन नंबर एक में बाघ-बाघिन यानी 'मां-बेटे' एक साथ नजर आये। इनको देखकर पर्यटक काफी उत्साहित नजर आये। पर्यटकों ने 'मां-बेटे' एक संग होने के इस अछ्वुत दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया। मां एसटी-9 बाघिन घास पर बैठी रही तो वहीं सामने झाड़यिों से निकलकर बेटा बाघ एसटी-15 आया। वह कुछ पल की झलक दिखाकर वापस झाड़यिों की तरफ चला गया, उसके पीछे पीछे  बाघिन भी झाड़यिों के बीच चली गयी। एसटी-15 और एसटी- 21 युवराज बाघिन एसटी-9 के शावक हैं। मां-बेटे को एक साथ देख पर्यटकों में काफी उत्साह नजर आया। </p>
<p>इन दिनों नये वर्ष को लेकर सरिस्का में पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। लोग अपना नया वर्ष सरिस्का में मनाने पहुंच रहे हैं। पर्यटकों की संख्या सरिस्का में बढऩे से सभी होटल और सफारी करने वाली जिप्सी सैलानियों से भरी रहती हैं। जिप्सी दो पारियों में चल रही हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 19:25:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>सरिस्का टाइगर रिजर्व : बाघों की संख्या बढ़कर 50, पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों का मन मोह रही शावकों की अठखेलियां </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 50 हो गई। वन मंत्री संजय शर्मा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का परिचय दे रही। इसका अलौकिक उदाहरण है सरिस्का बाघ परियोजना, जिसने राज्य को गौरवान्वित किया।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sariska-tiger-reserve-number-of-tigers-increased-to-50-the/article-134841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/111-(1200-x-600-px)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है। वन मंत्री संजय शर्मा ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी साझा की है। उन्होंने लिखा कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का परिचय दे रही है। इसका अलौकिक उदाहरण है सरिस्का बाघ परियोजना, जिसने राज्य को गौरवान्वित किया है।</p>
<p>एक समय सरिस्का पूरी तरह बाघविहीन हो गया था, लेकिन सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से यहां बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने लिखा कि वर्तमान में सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़कर 50 पहुंच चुकी है। जंगल में बाघिनों के साथ उनके शावकों की अठखेलियां पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों का मन मोह रही हैं। यह उपलब्धि राजस्थान में सफल वन संरक्षण की मिसाल बन चुकी है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 16:24:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur PS]]>
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            <item>
                <title>सरिस्का में बाघों को देखकर पर्यटक रोमांचित, बाघिनों ने मोहा पर्यटकों का मन </title>
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                        <![CDATA[जिले के सरिस्का बाघ परियोजना में सफारी के दौरान अलग-अलग जगहों पर बाघिनों ने पर्यटकों का मन मोह लिया, जिसमें टहल रेंज बाघिन एसटी-30 और सरिस्का रेंज में बाघिन एसटी-नौ का दीदार करके पर्यटक रोमांचित नजर आये। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि सरिस्का बाघ परियोजना में इन दिनों बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ पर्यटकों को बाघ आसानी से नजर आ रहे हैं, जिन्हें देखकर पर्यटक भी काफी खुश दिखाई देते हैं। ]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/tourists-thrilled-after-seeing-tigers-in-sariska-tigresses-captivated-the/article-131178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/_4500-px)2.png" alt=""></a><br /><p>अलवर। जिले के सरिस्का बाघ परियोजना में सफारी के दौरान अलग-अलग जगहों पर बाघिनों ने पर्यटकों का मन मोह लिया, जिसमें टहल रेंज बाघिन एसटी-30 और सरिस्का रेंज में बाघिन एसटी-नौ का दीदार करके पर्यटक रोमांचित नजर आये। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि सरिस्का बाघ परियोजना में इन दिनों बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ पर्यटकों को बाघ आसानी से नजर आ रहे हैं, जिन्हें देखकर पर्यटक भी काफी खुश दिखाई देते हैं। उनको देखकर पर्यटक रोमांचित हो जाते हैं। पर्यटक सरिस्का जंगल में बाघों को देखने के लिए विशेष तौर पर आते हैं, और बाघ दिख जाने पर उनकी खुशियों का ठिकाना नहीं रहता। </p>
<p>एक गाइड ने बताया कि टहला रेंज में एसटी-30 बाघिन टहला द्वार से दोपहर सफारी के दौरान नजर आयी, जहां करीब 15 मिनट तक वह पानी में बैठी रही। पर्यटक उसे देखकर काफी खुश हुए। सरिस्का बाघ परियोजना के सरिस्का रेंज के सदर द्वार से आगे बाघिन एसटी- नौ को सड़क से निकलता देखकर पर्यटक रोमांचित हो गये। सरिस्का में दोपहर की सफारी के दौरान दो-दो बाघिनों ने पर्यटकों का मन मोह लिया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/tourists-thrilled-after-seeing-tigers-in-sariska-tigresses-captivated-the/article-131178</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 17:26:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur PS]]>
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                <title>सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास खनन पर रोक</title>
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                        <![CDATA[जनवरी 2022 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने भी सरिस्का टाईगर रिजर्व में अवैध बालू के खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ban-on-mining-around-sariska-tiger-reserve/article-78151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास खनन की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी है। जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने क्रिटिकल टाईगर हैबिटैट के एक किलोमीटर के दायरे में सभी खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने क्रिटिकल टाइगर हैबिटैट के उस एरिया मे राज्य सरकार को भविष्य में अवैध खनन को रोकने के लिए एक्शन प्लान भी तैयार करने को कहा है। </p>
<p><strong>याचिका में यह कहा गया</strong><br />दरअसल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया था कि कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन कर कई कंपनियों में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की मंजूरी के बिना ही क्रिटिकल टाइगर हैबिटैट और उसके आसपास गैरकानूनी खनन की गतिविधियों में लगी हुई है।</p>
<p><strong>एनजीटी ने भी बालू खनन पर लगाई थी रोक</strong><br />बता दें कि जनवरी 2022 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने भी सरिस्का टाईगर रिजर्व में अवैध बालू के खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। एनजीटी ने एक अखबार की उस खबर पर संज्ञान लिया था जिसमें बालू माफिया द्वारा एक वनरक्षक को कुचल देने की खबर छपी थी। खबर के मुताबिक संदिग्ध खनन माफिया के एक ट्रैक्टर को जब वनरक्षक और उसके कुछ साथियों ने सरिस्का टाईगर रिजर्व में रोकने की कोशिश की तो उसे ट्रैक्टर से कुचल दिया गया। वनरक्षक केवल सिंह घायल हो गया था जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई थी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 10:28:43 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में सरिस्का ऐसा पहला टाइगर रिज़र्व बना जहां भालुओं को भी मिला नम्बर</title>
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                        <![CDATA[ माउंट आबू से लाई मादा  भालू को एसबी-1, नर भालू को एसबी-2 और जालोर से लाए नर भालू को एसबी-3 नाम दिया गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sariska-became-the-first-tiger-reserve-in-the-state-where/article-55872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/tiger-reserve-sariska.png" alt=""></a><br /><p>सरिस्का टाइगर रिज़र्व में पहली बार भालुओं को भी अधिकारिक नम्बर दिए गए हैं। माउंट आबू से लाई मादा  भालू को एसबी-1, नर भालू को एसबी-2 और जालोर से लाए नर भालू को एसबी-3 नाम दिया गया है। ऐसे में सरिस्का प्रदेश का पहला ऐसा टाइगर रिज़र्व बन गया है, जहां बाघों के बाद अब भालू भी नम्बरो से पहचाने जाएँगे। सरिस्का सीसीएफ़ एवं क्षेत्र निदेशक आरएन मीना ने बताया कि सघन मॉनिटरिंग की दृष्टि से ऐसा किया गया है।  वहीं सरिस्का टाइगर रिज़र्व के फ़ाउंडर सेक्रेटरी दिनेश दुर्रानी का कहना है कि वन विभाग की ओर से ये अच्छा कदम उठाया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 14:13:35 +0530</pubDate>
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                <title>सरिस्का मॉडल से बदल सकती है मुकुंदरा की तकदीर</title>
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                        <![CDATA[वर्ष 2005 में सरिस्का को बाघ विहिन घोषित किए जाने के बाद 2008 से यहां बाघों के पुनर्वास का दौर शुरू हुआ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sariska-model-can-change-the-fate-of-mukundra/article-44838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/mukundara-ke-lie-sariska-ka-modal-badal-sakata-hai...kota-news-06-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरिस्का टाइगर रिजर्व ने बाघ पुनर्वास व संरक्षण को लेकर प्रदेश में मिसाल कायम की है। बाघ विहिन होने के बाद 15 साल में ही फिर से 28 बाघों से आबाद हो गया और पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभरकर सामने आया। सरिस्का की सफलता में वाइल्ड पॉपुलेशन मील का पत्थर साबित हुई है। विशेषज्ञों का मत है कि सरिस्का मॉडल अपनाकर मुकुंदरा की तकदीर बदली जा सकती है। इसके लिए जरूरी है, जिस तरह रणथम्भौर से पांच बाघिनों को एक साथ शिफट किया गया था, उसी तरह मुकुंदरा में भी एक से अधिक बाघ-बाघिनों का पुनर्वास किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>2008 से शुरू हुआ बाघों के पुनर्वास का दौर</strong><br />वर्ष 2005 में सरिस्का को बाघ विहिन घोषित किए जाने के बाद 2008 से यहां बाघों के पुनर्वास का दौर शुरू हुआ। करीब 15 साल पहले रणथंभौर से बाघ लाने का सिलसिला शुरू हुआ था, यह दौर अभी जारी है। डेढ़ दशक में 11 बाघ- बाघिन रणथंभौर से सरिस्का लाए गए। इनके लिए प्रे-बेस, गांवों का विस्थापन, सुरक्षा व मॉनिटरिंग को लेकर गंभीरता से कार्य किया गया। यही कारण है कि साल दर साल सरिस्का में बाघ-बाघिन और शावकों का कुनबा बढ़ता चला गया। </p>
<p><strong>मुकुंदरा में बढ़ाई जाए वाइल्ड पॉपुलेशन</strong><br />बाघिन एमटी-4 की मौत के बाद मुकुंदरा में अब एकमात्र बाघ एमटी-5 ही बचा है। ऐसे में जल्द से जल्द रणथम्भौर से दो बाघिन लाकर बसाया जाना चाहिए। साथ ही प्रे-बेस की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। इसके अलावा मुकुंदरा के दायरे में आ रहे गांवों के विस्थापन प्रक्रिया में तेजी लाते हुए बाघों के स्वछंद विचरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। वन्यजीव प्रेमियों ने दो बाघ और दो बाघिन लाकर जोड़ा बनाने की मांग की है। </p>
<p><strong>अब तक 99 चीतल ही आए</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में प्रे-बेस बढ़ाने के प्रयासों में तेजी लाने की जरूरत है। यहां 500 के करीब चीतल छोडेÞ जाने हैं। हालांकि, भरतपुर केवलादेव नेशनल पार्क से 20 दिसम्बर 2022 से 15 फरवरी 2023 तक कुल 99 चीतल लाए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार अब तक दो सौ से ज्यादा चीतल आ चुके हैं। शेष प्रे-बेस को भी जल्द लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि मुकुंदरा में प्रे-बेस की कमी है। ऐसे में जंगल से सटे गांवों से जंगल में चराई के लिए आने वाले मवेशियों का शिकार करते हैं और ग्रामीणों का जंगल में बढ़ते दखल से वन्यजीव और इंसानों के बीच टकराव की आशंका बनी रहती है। </p>
<p><strong>11 गांवों का अब तक नहीं हुआ विस्थापन </strong><br />एमएचटीआर को विकसित करने के लिए जरूरी हैं कि यहां जंगल से सटे गांवों को जल्द से जल्द विस्थापित किया जाए। वन अधिकारी गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करें और उन्हें वन्यजीवों के महत्व से अवगत कराएं ताकि, बाघों व अन्य वन्यजीवों के स्वछंद विचरण की राह आसान हो सके। लेकिन, हालात यह है कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व घोषित होने के 11 साल बाद भी रिजर्व में बसे 11 गांवों का विस्थापन नहीं हो सका। यहां 14 गांवों में से अभी तक मात्र लक्ष्मीपुरा, घाटी जहांगीर व खरली बावड़ी का ही विस्थापन हो सका है, जबकि, 11 गांवों के बाशिंदे  अभी तक विस्थापन के इंतजार में हैं। हालांकि, वर्तमान में दामोदरपुरा का सर्व किया जा रहा है। वहीं, मशालपुरा गांव का विस्थापन कार्य जारी है।  जबकि, सरिस्का टाइगर रिजर्व में कुल 29 गांव बसे हैं, जिनमें से अब तक 11 गांव के 1151 परिवारों में से 848 परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है।</p>
<p><strong>मुकुंदरा में बसे ये 14 गांव </strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में कुल 14 गांव बसे हैं, जिनमें लक्ष्मीपुरा, खरली बावड़ी, घाटी जांगिर, मशालपुरा, गिरधरपुरा, दामोदरपुरा, दरा गांव, नारायणपुरा, कोलीपुरा, रूपपुरा, अखावा, रोजा का तालाब, अंबा रानी, नोसेरा शामिल हैं। </p>
<p>मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में सरिस्का की तर्ज पर एक से अधिक बाघ-बाघिन लाए जाना चाहिए। हाल ही में रणथम्भौर से एक बाघिन लाने की परमिशन मिली है, जिसे जल्द से जल्द मुकुंदरा में शिफ्ट किया जाए। वहीं, अभेड़ा में पल रहे बाघिन टी-114  के दोनों शावकों को भी मुकुंदरा के सॉफ्ट एनक्लोजर में छोड़ा जाना चाहिए। उनकी 24 घंटे मॉनिटरिंग के लिए डेडीकेट स्टाफ तैनात हो। <br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>बाघ एमटी-5 के लिए बाघिन लाने की सख्त आवश्यकता है। देरी होने पर वह भटक सकता है और कहीं निकल सकता है। पूर्व में बाघिन एमटी-4 करीब ढाई साल अकेली रही, उसके लिए नर बाघ लाने में देरी हुई। ऐसी स्थिति एमटी-5 के साथ न हो, इसलिए जल्द से जल्द बाघिन शिफ्ट की जानी चाहिए। <br /><strong>- दौलत सिंह शक्तावत, सदस्य, स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 May 2023 15:45:35 +0530</pubDate>
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                <title>सरिस्का बाघ अभ्यारण्य में घायल बूढ़ा बाघ एसटी 6 की मौत, करीब 16 साल की उम्र में ली अंतिम सांस</title>
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                        <![CDATA[पहले एसटी 4 और एसटी 6 के झगड़े के बाद टाइगर एसटी 4 की मौत हो गई थी। लेकिन बाद में एसटी 6 के पीठ पर घाव हो गए थे।  ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/alwar-news--injured-old-tiger-st-6-died-in-sariska-tiger-reserve--breathed-his-last-at-the-age-of-16/article-8165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/st-6.jpg" alt=""></a><br /><p>अलवर। राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का बाघ अभयारण्य के एनक्लोजर में करीब डेढ़ साल से बंद घायल बाघ एसटी 6 की सोमवार रात को मौत हो गई। एसटी 6 बाघ बूढ़ा हो गया था। जिसे 23 फरवरी 2011 को केवलादेव भरतपुर से अलवर लाया गया था। जिसकी करीब 16 साल की उम्र में मौत हुई है। पहले एसटी 4 और एसटी 6 के झगड़े के बाद टाइगर एसटी 4 की मौत हो गई थी। लेकिन बाद में एसटी 6 के पीठ पर घाव हो गए थे।  मंगलवार सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर उसकी मौत की पुष्टि हुई ।  बीमारी के कारण बाघ 3 दिन से भूखा बताया और खाना नहीं खा रहा था हालांकि सरिस्का प्रशासन की तरफ से उसके खाने पीने की व्यवस्था की जाती थी।    <br /><br />सरिस्का प्रशासन के मुताबिक बाघ की पूंछ के ऊपर घाव था।जिसका लंबे समय तक इलाज चल रहा था। डॉक्टर के इलाज के बाद बाघ ठीक हो गया लेकिन उसके बाद उसके शरीर में कई अन्य परेशानियां होने लगीं एसटी 6 के परीक्षण के लिए कई बार एनटीसीए और डब्लूआईआई देहरादून की टीम भी सरिस्का पहुंची थी। उसका इलाज कर बचाने की हरसंभव कोशिश की जा रही थी, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। जब टाइगर की हालत नाजुक होती गई तो उसे नवम्बर 2020 से एनक्लॉजर में रखा गया था। अलवर के सरिस्का बाघ अभ्यारण्य में सात बाघ, 11 बाघिन एवं सात शावक सहित सरिस्का में 25 टाइगर हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 17:39:52 +0530</pubDate>
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