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                <title>peoples diabetes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत में डायबिटीज का नया चेहरा : सिर्फ शुगर नहीं, हार्ट, किडनी, लिवर की बीमारी भी है</title>
                                    <description><![CDATA[मोटापा और डायबिटीज जब साथ आते हैं तो यह हार्ट, किडनी, लिवर, आंखों और नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-new-face-of-diabetes-in-india-is-not-just/article-119043"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत को एक समय डायबिटीज की राजधानी कहा जाता था, लेकिन आज यह बीमारी कहीं ज्यादा खतरनाक रूप में हमारे सामने है। <br />अब डायबिटीज सिर्फ शुगर की बीमारी नहीं रह गई, बल्कि ये हार्ट, किडनी और लिवर को भी नुकसान पहुंचाती है। आज जरूरत है कि हम डायबिटीज को सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित न रखें, बल्कि एक मल्टीऑर्गन डिजीज की तरह देखें और उसका समग्र इलाज करें। वरिष्ठ डायबिटीज रोग विशेषज्ञ और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर डॉ. सुधीर भंडारी ने बताया कि भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और पांच प्रतिशत से अधिक लोग प्री-डायबिटिक अवस्था में हैं। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि 40 प्रतिशत डायबिटिक मरीज मोटापे से भी जूझ रहे हैं और 90 प्रतिशत टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों का वजन सामान्य से अधिक है। मोटापा और डायबिटीज जब साथ आते हैं तो यह हार्ट, किडनी, लिवर, आंखों और नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।</p>
<p><strong>भारतीयों में डायबिटीज जल्दी और ज्यादा क्यों होती है</strong><br />भारतीयों में इंसुलिन रेसिस्टेंस अधिक होता है यानी शरीर में इंसुलिन तो होता है लेकिन वह अपना कार्य ठीक से नहीं कर पाता। तनाव, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और अनियमित खानपान डायबिटीज को और बढ़ाते हैं। एक और गंभीर बात यह है कि भारत में डायबिटीज से जुड़ी हार्ट डिजीज पश्चिमी देशों की तुलना में 10 साल पहले शुरू हो जाती है। इसके अलावा डायबिटीज भारत में कम उम्र में शुरू होती है जिससे शरीर को ज्यादा वर्षों तक उसका बोझ झेलना पड़ता है। इसका अर्थ है लंबे समय तक हार्ट, किडनी और लिवर पर असर।</p>
<p><br /><strong>हर 6 से 12 महीने में ये जांचें करवाना जरूरी</strong><br />हार्टचेकअप: ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी, लिपिडप्रोफाइल<br />किडनी की जांच: क्रीएटिनिन, ईजीएफआर, यूरीन एल्बुमिन<br />लिवर की जांच: एसजीओटी, एसजीपीटी, लिवर अल्ट्रासाउंड<br />आंखों की जांच: सालाना रेटिना स्क्रीनिंग<br />नर्वससिस्टम: न्यूरोपैथी जांच, मोनोफिलामेंट टेस्ट<br />साथ ही एचबीएवनसी, ब्लडप्रेशर, वजन और कोलेस्ट्रॉल की नियमित मॉनिटरिंग भी जरूरी है। </p>
<p><strong>ये सावधानी बरतनी जरूरी</strong><br />वजन नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।<br />हर डायबिटिक व्यक्ति को सालाना हार्ट, किडनी और लिवर की स्क्रीनिंग करानी चाहिए।<br />बचपन का मोटापा भविष्य की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। बच्चों की सेहत पर ध्यान दें।<br />अपने डॉक्टर से सम्पूर्ण इलाज और नई वैज्ञानिक दवाओं की जानकारी लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 10:21:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>डायबिटीज से अब संभव होगी मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[देश में डायबिटीज के करीब 7.42 करोड़ मरीज है। डायबिटीज दो प्रकार का होता है, टाइप वन और टाइप टू। अब तक धारणा थी कि एक बार डायबिटीज होने के बाद उसका इलाज संभव नहीं है, लेकिन एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन लोगों में डायबिटीज को डायग्नोज हुए एक से डेढ़ साल हुआ है उन्हें आने वाले समय में इस खतरनाक समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/discovery-of-diabetes-hormones/article-8177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/dibites-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश में डायबिटीज के करीब 7.42 करोड़ मरीज है। डायबिटीज दो प्रकार का होता है, टाइप वन और टाइप टू। अब तक धारणा थी कि एक बार डायबिटीज होने के बाद उसका इलाज संभव नहीं है, लेकिन एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन लोगों में डायबिटीज को डायग्नोज हुए एक से डेढ़ साल हुआ है उन्हें आने वाले समय में इस खतरनाक समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी। जिस हार्मोन के कारण डायबिटीज होती है। उसकी खोज कर ली गई है। इसके साथ ही रिसर्च में यह भी स्पष्ट हो गया है कि शरीर में से उस हार्मोन को कम कर दिया जाए तो मरीज में से डायबिटीज पूरी तरह से खत्म हो सकती है। फैबकिन नामक इस हार्मोन के कारण लोग डायबिटीज से ग्रसित हो जाते है।</p>
<p><strong>क्या और कैसे काम करता है फैबकिन हार्मोन</strong><br />सीनियर डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. पीपी पाटीदार ने बताया कि मोटापा जितना अधिक होगा डायबिटीज होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। शरीर के एडिपोज टिश्यू में जमा यह फैट जब पिघलता है तब एफएबीपी-4 नामक एक प्रोटीन निकलता है जो कि पैनक्रियाज में पहुंचता है। यहां आने के बाद दो अन्य एंजाइम, एडीके और एनडीपीके के साथ मिलकर यह फैबकिन हार्मोन बन जाता है जो पैनक्रियाज में मौजूद बीटा सेल्स को तेजी से खत्म करने लगता है। इसके कारण बीटी सेल्स में इंसुलिन का निर्माण बंद या कम हो जाता है। इससे कारण उस व्यक्ति को डायबिटीज हो जाती है। फैबकिन हार्मोन को एंटीडॉट से नष्ट करने से डायबिटीज को हमेशा के लिए समाप्त किया और रोका जा सकता है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 10:23:16 +0530</pubDate>
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