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                <title>ग्राउंड रिपोर्ट: क्या हादसाें के बाद ही जागने की रीत कभी तोड़ी जाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[ बिना जांच 'अवैध टैंकरों' से सप्लाई हो रहा हजारों लीटर पानी,नई कॉलोनियों में मंडराया संकट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ground-report--will-the-pattern-of-waking-up-only-after-a-tragedy-occurs-ever-be-broken/article-156433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्तर पर संकट से निपटने के लिए कोटा शहर में 12 हाइड्रेंट/बोरिंग पॉइंट्स अनुबंधित (पूरी तरह टेस्टेड) किए गए हैं। इसी तरह रामगंजमंडी में 16 कुएं और सांगोद में 3 से 4 ट्यूबवेल रिजर्व रखे गए हैं, जहां से पूरी तरह जांचा हुआ पानी ही टैंकरों में भरा जाता है।<br />शिक्षा नगरी कोटा में भीषण गर्मी के बीच एक बड़ा जल-संकट और छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की कोटा लैब सरकारी स्तर पर लक्ष्य से आगे बढ़कर पानी की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के पॉश और घने कोचिंग इलाकों सहित बाहरी कॉलोनियों में अवैध और बिना जांचे पानी के टैंकरों का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। रोजाना हजारों छात्र और स्थानीय नागरिक इस अनियंत्रित पानी को पीने और इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे किसी बड़ी महामारी के फैलने का अंदेशा पैदा हो गया है।</p>
<p><strong>जवाहर नगर हादसे' की याद हुई ताजा</strong><br />शहर में पानी की मॉनिटरिंग को लेकर बरती जा रही यह लापरवाही सीधे तौर पर मासूमों की जान से खिलवाड़ है। विज्ञान नगर इलाके में दुषित पानी की सप्लाई के बाद वर्तमान स्थिति को देखकर कुछ साल पहले जवाहर नगर क्षेत्र में एक साथ फैली उस महामारी की याद ताजा हो जाती है, जब दूषित पानी की समस्या के चलते 70 से अधिक कोचिंग छात्रों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़ा था।<br /><strong>-मनू सोलंकी निवासी जवाहर नगर</strong></p>
<p><strong>निजी वाटर सप्लाई पर नहीं है कोई निगरानी</strong><br />उस बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। आज भी स्थिति यह है कि केवल कच्ची बस्तियां ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े कोचिंग इलाकों और हॉस्टल्स में भी पानी की मॉनिटरिंग या उसकी नियमित जांच करवाने की कोई कानूनी बाध्यता तय नहीं की गई है। आखिर पानी जैसी बेहद बुनियादी लेकिन सबसे जरूरी चीज के लिए कोटा में एक 'प्रोपर और जिम्मेदार' सिस्टम आज तक क्यों नहीं बन पाया?<br /><strong>-सीता प्रजापित निवासी कोरल पार्क</strong></p>
<p><strong>बिना जांच सीधे पेट तक पहुंच रहा पानी</strong><br />आवासीय और कोचिंग जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में बिना किसी केमिकल या बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट के पानी की लगातार सप्लाई हो रही है, लेकिन इन टैंकरों पर विभाग की कोई मॉनिटरिंग नहीं है। यह पानी बस्ती वासियों के रोजमर्रा के काम से लेकर उनके पेट तक पहुंच रहा है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि न तो चिकित्सा विभाग (CMHO) के पास और न ही जलदाय विभाग के पास इन हॉस्टल्स और निजी स्रोतों की पूरी स्क्रीनिंग का कोई डेटा उपलब्ध है।</p>
<p><strong>हॉस्टल्स और घनी आबादी 'टैंकर माफिया' के भरोसे</strong><br />जिन क्षेत्रों में जलदाय विभाग की सीधी पाइपलाइन नहीं है, वहां निजी स्रोतों के नाम पर टैंकर माफियाओं का राज चल रहा है। शहर के सबसे संवेदनशील और वीआईपी माने जाने वाले कोचिंग हब इस समय पूरी तरह निजी टैंकरों के जाल में हैं। कोरल पार्क और लैंडमार्क सिटी जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले हॉस्टल क्षेत्रों में हजारों कोचिंग छात्र रह रहे हैं। यहां रोजाना बिना किसी शुद्धता जांच के धड़ल्ले से टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है।</p>
<p><strong>आवासीय बस्तियों व निजी कॉलोनियों मेेें बडा खेल</strong><br />नयागांव, आंवली, रोजड़ी, नांता के करणी नगर,बरड़ा, अनन्तपुरा के भीतरी इलाके,क्रेशर बस्ती, बृज धाम, मान सरोवर, प्रताप नगर पुनम कॉलोनी, श्री विहार, रायपुर की कॉलोनियां, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, बूंदी रोड और बालिता की कॉलोनियां पूरी तरह इन निजी टैंकरों के भरोसे चल रही हैं। यहां निजी काॅलोनियां ताे विकसीत हो गयी लेकिन पानी जैसी बुनियादि जरूरत के लिये या तो घर के भीतर बने बोरिंग या फिर महंगे बोरिग सप्लाई के साथ टेन्करों की सप्लाई पर निर्भर है। यही नही इनके बदले पानी के इन सौदागरों की मोटी कमाई भी बडी है।</p>
<p><strong>पीएचईडी लाचार, गेंद सीएमएचओ के पाले में</strong><br />पीएचईडी के सीनियर केमिस्ट तरुण कुमार जैन ने बताया कि विभाग निजी स्रोतों और टैंकरों के पानी की जांच के लिए मात्र 297:रूपये की नॉमिनल फीस लेता है, जिसमें 48 घंटे में बैक्टीरियोलॉजिकल और केमिकल टेस्ट की रिपोर्ट आ जाती है। लेकिन सबसे बड़ा पेंच नियमों का है PHED लैब के पास प्राइवेट ट्यूबवेल या अवैध रूप से चल रहे टैंकर्स पर सीधे कानूनी कार्रवाई या जब्ती का अधिकार नहीं है। यदि पानी दूषित भी पाया जाता है, तो उस पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार केवल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के पास होता है। ऐसे में दोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी का फायदा टैंकर संचालक उठा रहे हैं।</p>
<p><strong>हर 6 महीने में जांच है जरूरी</strong><br />जलदाय विभाग के जानकारों के अनुसार, आमतौर पर लोग एक बार पानी की जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए हर 6 महीने में दोबारा जांच करवानी चाहिए। विशेषकर प्री-मानसून (बारिश से पहले) और पोस्ट-मानसून (बारिश के बाद) जांच अनिवार्य है, क्योंकि बारिश के दिनों में भूजल में खतरनाक बैक्टीरिया पनपने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।</p>
<p><strong>यह है कोटा में पानी की कहानी</strong><br />कोटा शहर में चंबल नदी से पानी लिफ्ट कर सकतपुर (130 व 70 MLD), अकेलगढ़ (64 MLD की 3 और 75 MLD की 1 यूनिट) तथा श्रीनाथपुरम (50 MLD) प्लांट्स से शुद्ध पानी सप्लाई किया जा रहा है। हमारे पास पानी की पयार्प्त व्यवस्था है। जहां कमी हो वहां टैंकर भेजते हैं।<br /><strong>-दीपक झा, अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता पीएचईडी</strong></p>
<p>यदि आपके क्षेत्र में नल से बदबूदार या गंदा पानी आ रहा है, तो बीमारी फैलने का इंतजार न करे। तुरंत संबंधित अधिकारीयों को सूचित करें। निजी स्रोतों का उपयोग करने वाले नागरिक बीमारी को न्योता न दें और नजदीकी पीएचईडी लैब में अपने पानी के सैंपल की जांच अवश्य करवाएं।<br /><strong>-तरूण कुमार जैन ,सीनीयर केमिस्ट पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:14:20 +0530</pubDate>
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                <title>आज आएगी राहत की रेल, डीएपी व यूरिया की होगी आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा सहित हाड़ौती क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की डिमांड बढ़ने लगी है। ऐसे में अब किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/relief-train-will-arrive-today--dap-and-urea-will-be-supplied/article-125244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws110.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले में गत वर्ष की तुलना में इस बार लगभग दोगुने क्षेत्रफल में धान एवं मक्का फसल की बुवाई होने से डीएपी और यूरिया की मांग निरन्तर बनी हुई है। अब फसलों की बढ़वार का दौर होने से किसान खाद के लिए भागदौड़ करने में लगे हुए हैं। कोटा सहित हाड़ौती क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की डिमांड बढ़ने लगी है। ऐसे में अब किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। शनिवार को नर्मदा बायो केम की यूरिया, कृभको की डीएपी और इफको की यूरिया की नई रैक पहुंचेगी। इससे कोटा जिले को करीब 2600-2600 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया और डीएपी मिल सकेगा। रैक आने के बाद यूरिया और डीएपी को ग्राम सेवा सहकारी समितियों के पास पहुंचाया जाएगा। इसके बाद वहां से किसानों को वितरित किया जाएगा। वितरण की पूरी तैयारी कर ली गई है।  </p>
<p><strong>उर्वरक उपलब्धता के कर रहे निरन्तर प्रयास</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में अभी लगभग 7014 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। 1910 मीट्रिक टन यूरिया सहकारी संस्थाओं यथा ग्राम सेवा सहकारी समितियों, क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में तथा 5104 मीट्रिक टन यूरिया प्राइवेट उर्वरक विक्रेताआें के पास उपलब्ध है। साथ ही, निजी डीलरों एवं सरकारी संस्थाओं के पास अब तक 4399 मीट्रिक टन डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) उपलब्ध है। चम्बल फर्टिलाईजर एण्ड केमिकल्स लिमिटेड, गढेपान द्वारा प्रतिदिन 400 मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति निरन्तर की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्धता के प्रयास निरन्तर किए जा रहे हैं। साथ ही, विभाग द्वारा धान की खेती करने वाले किसानों को यूरिया के स्थान पर बहुउपयोगी एवं गुणकारी अमोनियम सल्फेट उपयोग में लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />हाड़ौती अंचल में खरीफ सीजन के बीच डीएपी खाद की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। जार्डन, मोरक्को, सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाली डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की आपूर्ति में बाधा पड़ने के कारण किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। डीएपी की कमी से अमोनिया और अन्य तत्वों की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जो मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर, ओमान और रूस से आयात होते हैं। स्थिति यह है कि डीएपी की कमी ने अब यूरिया की खपत पर भी दबाव बढ़ा दिया है। किसान विकल्प के तौर पर यूरिया पर अधिक निर्भर होने लगे हैं। इससे स्थानीय गोदामों और सहकारी समितियों पर यूरिया की मांग अचानक बढ़ गई है। मांग बढ़ने से कई स्थानों पर यूरिया का स्टॉक कम पड़ने लगा है, जिससे किसानों को लंबी कतारों में लगकर खाद लेने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नर्मदा बायो केम की यूरिया, कृभको की डीएपी और इफको की यूरिया की नई रैक शनिवार को पहुंचेगी। इससे कोटा जिले को करीब 2600-2600 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया और डीएपी मिल सकेगा।  जिले में निरन्तर यूरिया एवं डीएपी की आपूर्ति हो रही है। विभाग द्वारा धान की खेती करने वाले किसानों को यूरिया के स्थान पर बहुउपयोगी एवं गुणकारी अमोनियम सल्फेट उपयोग में लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।<br /><strong>-अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:09:33 +0530</pubDate>
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                <title>सुबह भी नहीं हुई सप्लाई शाम को मिला पानी</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग ने सप्लाई की, लेकिन 15 से 20 मिनट तक कम प्रेशर से पानी आया। ऐसे में लोगों को तीन दिन की डिमांड के अनुपात में जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-was-not-supplied-even-in-the-morning-got-water/article-38530"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(14)5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बीसलपुर परियोजना से जयपुर को पानी बढ़ाने के लिए मेंटिनेंस कार्य समय पर पूरा नहीं होना और पंप हाउसों से शहर की टंकियों तक भी कई घंटों की देरी से पानी पहुंचने के कारण सोमवार सुबह भी शहरवासियों को पानी नहीं मिल पाया। हालांकि दोपहर में कुछ इलाकों में जलदाय विभाग ने सप्लाई की, लेकिन 15 से 20 मिनट तक कम प्रेशर से पानी आया। ऐसे में लोगों को तीन दिन की डिमांड के अनुपात में जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाया। वहीं शाम को सप्लाई सुचारू रही और जिन इलाकों में पानी शाम के समय सप्लाई होता है वहां लोगों ने राहत की सांस ली। सुबह सप्लाई वाले इलाकों में अब मंगलवार सुबह से ही पानी की सप्लाई सुचारू होने का जलदाय विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है। गौरतलब है कि जयपुर और आसपास के इलाकों में बीसलपुर परियोजना से 220 एमएलडी पानी बढ़ाया जाएगा, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की कमी शहरवासियों को नहीं झेलनी पड़ेगी।</p>
<p><strong>पानी ट्रांसफॉर्मेशन की प्रक्रिया में देरी</strong><br />बालावाला पंप हाउस से शहर के अमानीशाह नाला स्थित पंप हाउस को पानी के ट्रांसफॉर्मेशन का काम रविवार शाम को देरी से शुरू हुआ, जिसके बाद रामनिवास बाग पंप हाउस से शहर की टंकियों को पानी सप्लाई होता है। इस प्रक्रिया में भी कई घंटों का समय लगने से पेयजल सोमवार सुबह तक टंकियों में पहुंच पाया। इससे शहरवासियों को ना तो रविवार शाम को पानी मिला और ना ही सोमवार सुबह मिला पाया।</p>
<p><strong>800 से 1000 रुपए तक टैंकरों के दाम</strong><br />लोगों ने घरों में पानी सप्लाई के लिए निजी टैंकरों से महंगे दामों पर पानी मंगवाकर काम चलाया। इसके लिए टैंकरों के सप्लायरों को 800 से 1000 रुपए तक देने पड़े। इससे निजी टैंकर सप्लायरों ने दिनभर खूब चांदी कूटी। जयपुर और आसपास के इलाकों में बीसलपुर परियोजना से 220 एमएलडी पानी बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर मेंटिनेंस और लाइनों के मिलान का काम शुरू किया था, जो तय समय पर पूरा करने के बाद रविवार शाम को पेयजल सप्लाई सुचारू करने की उम्मीद थी।</p>
<p>-मेंटिनेंस कार्य में अतिरिक्त समय लगने से बालावाला से पंप हाउसों में पानी देरी पहुंचा। इसके बाद शहर की टंकियों में सोमवार सुबह तक पानी पहुंच पाया। ऐसे में सोमवार सुबह देरी से लोगों को पानी मिला, लेकिन शाम की सप्लाई तय समय पर सुचारू रही और मंगलवार सुबह से रूटीन सप्लाई की जाएगी।<br />-<strong>आरसी मीणा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Feb 2023 10:05:15 +0530</pubDate>
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                <title> कोटा दक्षिण वार्ड 65 : सीवरेज लीकेज की समस्या, घरों में सप्लाई हो रहा गंदा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर के कोटा दक्षिण वार्ड 65 में जगह-जगह से सीवरेज की पाइपलाइन लीकेज होने से गंदा पानी सड़को पर बिखरा हुआ हैं। जिसकी वजह से यहां से गुजरने वाले लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-65--sewerage-leakage-problem--dirty-water-being-supplied-in-homes/article-15260"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ward-65-sewerage-leakage-ki-samasya-kota-news-19.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा दक्षिण वार्ड 65 में जगह-जगह से सीवरेज की पाइपलाइन लीकेज होने से गंदा पानी सड़को पर बिखरा हुआ हैं। जिसकी वजह से यहां से गुजरने वाले लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता हैं। वार्ड के लोगों व स्थानीय पार्षद ने कई बार इस समस्या को लेकर अधिकारियों को भी अवगत करवाया हैं, इसके बावजूद भी आजतक इसकी और किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। गांव की गलियों सड़को में हर तरफ गहरे गड्ढें हो चुके हैं। इन गड्ढों में बारिश का पानी भर जाता हैं। जिसके कारण यहां हादसे भी होते रहते हैं। सड़क पर बिखरे पानी से दुर्गंध आने लग गई है और मोटरसाइकिल फिसलते हैं। इसके साथ ही वार्ड के लोग काला मटमेला पानी पीने को मजबूर हैं। पानी की पाइपलाइन में सीवरेज का गंदा पानी मिक्स होकर आ रहा हैं। स्थानीय लोगों का कहना हैं की वह बिना पानी फिल्टर किए पी ही नहीं सकते। <br /><br /><strong>दूषित पानी से बिमारियों का खतरा</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना हैं की यह काला मटमेला पानी पीने से उन्हें पेट से संबंधित अनेक बिमारियां हो रही हैं। लोगों का कहना है की वह लंबे समय से यह समस्या झेल रहे हैं। इलाके में पानी का संकट हैं। वार्ड में में पुरानी पाइपलाइन से जलापूर्ति हो रही हैं। यह पाइपलाइन जगह-जगह से टूट चुकी हैं। इसी टृूटी पाइपलाइन में सीवरेज का पानी मिक्स होकर घरों तक पहुंच रहा हैं। गंदे पानी की वजह से कई हजार लीटर पानी बर्बाद हो रहा हैं। इसके साथ ही पानी की समस्या के चलते लोगों के रोजमर्रा के कामों के लिए परेशान रहते हैं। इस वार्ड की महिलाएं और बच्चे साफ पानी के लिए दूसरे मोहल्लों में जाते हैं। स्थानीय लोग समस्या के लिए अनेक बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। <br /><br /><strong>यह है वार्ड का क्षेत्र</strong><br />महावीर नगर, विस्तार सेक्टर-03, संतोषी नगर ए-आधा को क्षेत्र इस वार्ड क्षेत्र में आता हैं। <br /><br /><strong>सड़कों पर बिखरे पानी से परेशानी</strong><br />पूरे वार्ड क्षेत्र में हर जगह सीवरेज का गंंदा पानी सड़को पर बिखरा हुआ हैं। जिसके कारण यहां से आने-जाने में परेशानी होती हैं। कई जगह वार्ड में सीवरेज का काम भी चल रहा हैं और रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं। सड़को पर बिखरे पानी पर वाहन फिसलते हैं जिसकी वजह से हादसे भी होते हैं। प्रशासन इसकी और कोई ध्यान नहीं दे रहा। <br /><strong>- मोहित मीणा, स्थानीय निवासी</strong><br /><br /><strong>मजबूरी में पी रहे हैं गंदा पानी</strong><br />वार्ड में लंबे समय से गंदा पानी सप्लाई हो रहा हैं। इस वार्ड के लोगों को गंदा पानी पीना मजबूरी बन गया हैं। साफ सुथरा पानी वार्ड में आता नहीं, जिसकी वजह से गंदा पानी पी रहे हैं। सीवरेज का काला मटमेला पानी पीने से बिमारियां भी हो रही हैं। इस समस्या के बारे में कई बार अधिकारियों को भी अवगत करवा दिया हैं, लेकिन इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।<br /><strong>-गर्वित शर्मा, स्थानीय निवासी</strong><br /><br /><strong>जगह-जगह से टूटी पाइप लाइन</strong><br />वार्ड में पानी की पाइपलाइन जगह-जगह से टूट चुकी हैं। जिसके कारण सीवरेज का गंदा पानी इस पाइजलाइन में मिक्स हो जाता हैं। यहीं गंदा पानी जलदाय विभाग द्वारा लोगों के घरों में सप्लाई किया जाता हैं। गंदा पानी पीने से लोगों को पेट से संंबंधित अनेक बिमारियां हो रही हैं। वार्ड में सीवरेज लीकेज से भी लोग परेशान हैं। <br /><strong> -शालिनी गौतम, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 15:26:04 +0530</pubDate>
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                <title>कृषि उपभोक्ताओं को 3 ब्लॉक में की जाएगी बिजली आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के किसानों को अब कृषि कार्य के लिए 4 घण्टे के 3 ब्लॉक में बिजली आपूर्ती की जाएगी। अब कृषि उपभोक्ताओं को रात में 2 बजे से सुबह 6 बजे तक, सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक एवं दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक 3 ब्लॉक में बिजली आपूर्ती की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-electricity-supplied-will-be-of-agriculture-in-3-block/article-8926"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/electricity-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के किसानों को अब कृषि कार्य के लिए 4 घण्टे के 3 ब्लॉक में बिजली आपूर्ती की जाएगी। अब कृषि उपभोक्ताओं को रात में 2 बजे से सुबह 6 बजे तक, सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक एवं दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक 3 ब्लॉक में बिजली आपूर्ती की जाएगी। इसके साथ ही 125 केवीए एवं अधिक मांग वाले बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए शाम 6 बजे से 10 बजे तक विद्युत उपभोग को 50 प्रतिशत तक सीमित करने के आदेश की पालना की प्रभावी देखरेख की जाएगी। तीन मई को सभी औद्योगिक इकाइयों को केवल सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ही बिजली आपूर्ति होगी।  </p>
<p>प्रदेश में बिजली की मांग व आपूर्ती की स्थिति की समीक्षा के लिए विद्युत भवन में डिस्कॉम अध्यक्ष भास्कर ए. सावंत की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सावंत ने यूडीएच व एलएसजी विभाग के प्रमुख शासन सचिवों से अनुरोध किया है कि रोड लाइट के लोड को यथासंभव कम करने का प्रयास करके सहयोग प्रदान करें। आमजन से भी उन्होंने अपील है कि वे बिजली की किफायत से उपयोग करते हुए बिजली आपूर्ती व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने में विद्युत निगमों का सहयोग करें। बैठक में ऊर्जा सलाहकार एके गुप्ता, जयपुर डिस्कॉम के प्रबन्ध निदेशक अजीत कुमार सक्सैना सहित डिस्कॉम्स एवं ऊर्जा विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 10:24:33 +0530</pubDate>
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                <title>ये अंग्रेजों के जमाने के कुए हैं साहब</title>
                                    <description><![CDATA[पानीपेच के पास स्थित 16 कोठी यानी सोलह कुए हैं। ये तकरीबन 1891 के आसपास में अंग्रेजों के बनवाए बताते हैं। उस समय चारदीवारी में यहीं से पानी की सप्लाई हुआ करती थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-was-supplied-from-well/article-8185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/know-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पानीपेच के पास स्थित 16 कोठी यानी सोलह कुए हैं। ये तकरीबन 1891 के आसपास में अंग्रेजों के बनवाए बताते हैं। उस समय चारदीवारी में यहीं से पानी की सप्लाई हुआ करती थी। कर्मचारी श्यामवीर सिंह ने बताया कि लगभग 1950 तक जयपुर के लोगों ने इन कुओं का पानी पिया, लेकिन बाद में जब इन कुओं में पानी खत्म हो गया, तो इनमें बोरिंग कर पानी सप्लाई किया गया।</p>
<p>वर्तमान में ये कुए पूरी तरह से सूख चुके है और इनके ऊपर जाली लगाकर बंद कर दिया गया है। यहां पानी संग्रहण के लिए एक खोल भी बना हुआ है, जिसमें पानी एकत्रित कर जरूरत के हिसाब से सप्लाई किया जाता था।    </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 10:59:21 +0530</pubDate>
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