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                <title>mosquitoes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हो सकता है लार्वा विस्फोट, डेंगू का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[अस्तपालों की ओपीडी मौसमी बीमारियों को लेकर डेढ़ गुना बढ़ गई है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-can-be-larva-explosion--risk-of-dengue/article-123463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा क्षेत्र संक्रमण की दहलीज पर खड़ा है। क्षेत्र की सड़कों से लेकर कॉलोनियों के हर कोनों तक, जहां जमीन खाली है और बारिश की बूंदे जम गई या जलभराव है, वहां डेंगू के लार्वा पनपने का खतरा भी बढ़ने लगा है। क्षेत्र के कई खाली भूखंड लार्वा हॉटस्पॉट बन रहे है। क्षेत्र की महावीर नगर, दक्षिण विहार, बलिता रोड, संगोद रोड, रामनगर, छावनी व कृष्णा नगर, सुन्दर नगर, कैलाश विहार, चंचल विहार समेत क्षेत्र की कई ऐसी कॉलोनियां है जिनमें खाली पड़े भूखंडों में गंदगी व जलभराव हो रखा है। ऐसे भूखंडों में लार्वा बनने के साथ मच्छर भी तेजी से पनप रहे हैं। डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि शहर में खाली पड़े भूखण्डों, क्षतिग्रस्त सड़कों पर बारिश का जमा पानी, छतों पर रखे सामान में इकट्ठा हुआ पानी में भी लार्वा पनप जाता है। जिससे मलेरिया व डेंगू के मच्छर पनपने का खतरा रहता है। यह कम पानी में भी पनप जाता है। समय रहते इन नियंत्रित करना जरूरी है। अस्तपालों की ओपीडी मौसमी बीमारियों को लेकर डेढ़ गुना बढ़ गई है। बता दें कि शहर में मौसमी बीमारियां डेंगू, मलेरिया, चिगनगुनिया, स्क्रबटायफस की रोकथाम के लिए संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था।</p>
<p><strong>ऐसे होता है लार्वा विस्फोट</strong><br />बारिश के बाद खाली भूखंडों, गड्ढों या अनुपयोगी वस्तुओं में पानी जमा हो जाता है। जमा हुआ पानी एडीज एजिप्टाई मच्छर पनपने का खतरा बना रहता है। इनसे डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस फैलता है। उसके सपंर्क में आने से बीमारी बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है।</p>
<p><strong>संभावित खतरे</strong><br />- लार्वा विस्फोट से मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि<br />- एक संक्रमित मच्छर सैकड़ों को कर सकता है संक्रमित<br />- क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप बढ़ने का खतरा भी बना रहता है</p>
<p><strong>प्रशासन की आमजन को सलाह</strong><br />- अपने खाली प्लॉट की तुरंत सफाई करें<br />- घर के आसपास पानी न जमने दें<br />- टंकी, कूलर, गमले की नियमित सफाई करें<br />- फुल बाजू कपड़े पहनें, मच्छरदानी का उपयोग करें<br />- बुखार, शरीर दर्द हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें</p>
<p><strong>खाली पड़े प्लॉटों की नहीं हो रही सार-संभाल</strong><br />कई कॉलोनियों में कई प्लॉट खाली है तथा बरसात के दिनों में प्लॉटों में जमा गंदगी व बारिश के पानी से जलभराव हो गया है। लोग अपने प्लॉटों की सार-संभाल नहीं करने से वहां जमा पानी व गंदगी से लार्वा पनपने का खतरा भी बढ़ गया है। वहां निवास कर रहे लोगों में डेंगू व मलेरिया होने का डर भी सता रहा है।<br /><strong>- मनीश उपाध्याय निवासी आकाशवाणी कॉलोनी </strong></p>
<p><strong>स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें</strong><br />बरसात रूकने के बाद जहां पानी ठहर गया है या जमा हो गया है वहां लार्वा पनपने का खतरा बना रहता है। डेंगू का मच्छर साफ ठहरने हुए कम पानी में भी पनप जाता है। इसके लिए घरों  में आस-पास एवं कंटेनरों में पानी 5 से 7 दिन से ज्यादा जमा न होने देना चाहिए। कूलर, पक्षियों के परिंडे, फ्रिज के पीछे की ट्रे, गमले की ट्रे एवं अन्य पानी के पात्रों की सप्ताह में एक बार रगड़ कर सफाई अवश्य करें। पानी से भरे बर्तनों को ढक कर रखे, छत पर पड़े कबाड़, टीन, कनस्तर, टायर, मटके डिब्बे बोतल को हटा देना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. सुधीर उपाध्याय, चिकित्सक</strong></p>
<p>साउथ और नॉर्थ से संबंधित काम निगम के अधीन है। शहर में अभी फोगिंग का कार्य चल रहा है। सेक्रेटरी व स्टेट के आॅर्डर अनुसार फोगिंग का काम, नालियों में तेल डालना ये सभी कार्य नगर निगम करवाता है। नगर निगम हमें कॉलोनीवाइज प्लान देता है, जिसकी हम मॉनिटरिंग भी करते है। कोई पॉजिटिव मरीज आता है तो उससे संबंधित हम देखते है।<br /><strong>- डॉ. घनश्याम मीणा, डिप्टी सीएमएचओ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 15:20:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रोज 720 टीमें कर रही सर्वे, नहीं दिख रहा असर, पनप रहे मच्छर </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के  खाली प्लॉट, पार्क के फव्वारों व ब्लैक स्पोट में पनप रहे मच्छर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/720-teams-are-conducting-surveys-every-day--no-effect-is-visible--mosquitoes-are-breeding/article-119819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मानसून पूर्व  मलेरिया डेंगू, स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए जो कमर कसी थी उसकी पेटी अब खुल गई है। बारिश पूर्व विभाग ने खाली प्लॉट, गड्ढो की जो कवायद की थी वो पूरी नहीं होने से शहर में कई जगह बारिश का पानी जमा हो गया उसमें अब मच्छर पनप रहे जिससे लोग अब इसकी चपेट में आना शुरू हो गए है। विभाग की ओर से  व्यापक प्रचार प्रसार और सर्वे के बावजूद भी लोग डेंगू की चपेट में आ रहे है।  उल्लेखनीय है कि  इस बार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने घरों में सर्वे करने के साथ ही गली मोहल्लों के गड्ढो जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है उनको चिहिंत करने का काम शुरू किया है।  लेकिन वो पूरी तरह मूर्तरूप नहीं ले सका। शहर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की 720 टीमें प्रतिदिन शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर मौसमी बीमारियों का तो सर्वे लेकिन उसका असर धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। </p>
<p><strong>शहर में मच्छरों की उत्पत्ति के 50 से अधिक ब्लैक स्पॉट </strong><br />मानूसन जल्दी सक्रिय होने से विभाग को गड्ढे भरने का समय ही नहीं मिला जिससे शहर में करीब 50 से अधिक ऐस ब्लैक स्पॉट है जहां डेंगू मलेरिया के मच्छर पनप रहे है। एमबीएस अस्पताल के पीछे बने क्वॉटर पीछे पानी का तालाब बना हुआ है। वहीं शहर के विभिन्न कॉलोनियों में भी खाली प्लाट व गड्ढों में पानी जमा हो रहा है। शहर के विभिन्न पार्क में बने जलाशय और फव्वारों जमा पानी में मच्छर पनप रहे है।  इस बार  डेंगू, मलेरिया के मरीज बढ़ने  की संभावनों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कागजों में तो अलर्ट मोड पर चल रहा है।  लेकिन वास्तव में शहर में तेजी से मच्छर पनप रहे है। प्रतिदिन 12 हजार से अधिक घरों का सर्वे कर एंटी लार्वा गतिविधियां की जा रही है। उसके बावजूद मच्छर का आंतक बढ़ रहा है।  कोटा शहर में करीब 50 से अधिक ब्लैक स्पॉट चिहिंत किए  जहां सबसे ज्यादा मच्छर पनपते है। कोटा में पिछले साल कोटा में डेंगू काफी फैला था जिसके कारण कई लोगों की जान पर बन आई थी। इस बार इसके फैलाव से पहले विभाग इसकी रोकथाम में जुटा है।  </p>
<p><strong> जगह जगह गड्ढों में  पनप रहे लार्वा</strong><br />शहर में जगह जगह बने गड्ढो खाली प्लाट में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर तेजी से पनप रहे है। वहीं नालों व नदियों की सफाई बेहतर तरीके से नहीं हुई जिसके कारण मच्छरों के लार्वा इनमें पनप रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग की टीमे घरों का तो सर्वे कर कूलर, परिडों में एंटी लार्वा गतिविधियां कर रही है लेकिन शहर में कई ऐसे स्थान है जहां जहां मच्छरों का अड्डा बना हुआ है।   पिछले साल महावीर नगर, विज्ञान नगर, नया कोटा में डेंगू बेलगाम हो गया था। नगर निगम को नालों की सफाई कराकर यहां एंटी लार्वा गतिविधियां करानी चाहिए। नदी- नालों की सफाई के नाम कचरा निकालकर ढेर बना दिया जाता है।  वहां से संबंधित कचरे को हटाया नहीं जाता।  जिसकी वजह से मच्छरों के पनपने के अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो गई। <br /><strong>-अजय पानेरी, विज्ञान नगर </strong></p>
<p><strong>इन इलाकों में सबसे ज्यादा आए डेंगू के मरीज</strong><br />पिछले साल मच्छर जनित बीमारियों के सबसे ज्यादा मरीज जवाहर नगर, इंद्रा विहार, तलवंडी सेक्टर ए ,सी,एसएफएस सहित महावीर नगर सैकंड से आए। इसके अलावा अनंतपुरा,भीमगंजमंडी, नयागांव,रंगबाड़ी, महावीर नगर,केशवपुरा  पुरोहित जी की टापरी, डीसीएम, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी, बोरखेड़ा, नयापुरा, स्टेशन, काला तालाब, डकनिया, शॉपिंग सेंटर,छावनी, कुन्हाडी, नांता सहित करीब 50 से अधिक ब्लैक स्टॉप है यहां अधिक मच्छर के लार्वा पनप रहे है। इन इलाकों से पिछले साल ज्यादा लोग बीमार हुए थे। <br /><strong>-रामनारायण गुर्जर, निवासी नांता</strong></p>
<p><strong>मलेरिया और डेंगू के लक्षण</strong><br /><strong>डॉ. संजय शायर ने बताया</strong> कि  मलेरिया में सर्दी के साथ एक दिन छोड़कर बुखार आना है। उल्टी, सिरदर्द, बुखार उतरने के बाद पसीना निकलना, कमजोरी होना आदि मलेरिया के लक्षण है। वहीं, डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल दाने, चकत्ते पड़ जाना, खून की उल्टी, पेशाब और मल में खून आना, अत्याधिक घबराहट होना आदि डेंगू के लक्षण हैं।</p>
<p><strong>पानी भराव स्थानों कोकर रहे चिंहित </strong><br />शहर में रोज टीमें घरों में कूलर पानी टंकी में पनपने वाले लार्वा को नष्ट करा रही है।  साथ प्रतिदिन 720 टीमें 12 हजार घरों के साथ ही मोहल्लों में बारिश के दौरान पानी जमा होने वाले खाली प्लाट, गड्ढों को चिंहित कर उन्हें भरवाया जा रहा है। जिससे डेंगू के लार्वा नहीं पनपे। इस लार्वा मिलने पर लोगों नोटिस भी दिए जा रहे है। <strong>-डॉ. नरेंद्र नागर, सीएमएचओं</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Jul 2025 14:58:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बारिश में मच्छरों का प्रकोप, मलेरिया डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[एक जनवरी से अब तक डेंगू के 1451, मलेरिया 604, चिकनगुनिया 95 और स्क्रब टायफस के 511 रोगी मिले, स्वाइन फ्लू के 1026 केस पॉजिटिव मिले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mosquito-outbreak-in-rain-increases-the-risk-of-malaria-dengue/article-88448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में इन दिनों मानसून का सीजन है। हाल ही में राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश का दौर कई दिनों तक लगातार जारी रहा। हालांकि बीते करीब एक सप्ताह से बारिश का दौर कम हो गया है और धूप भी खिलने लगी है। ऐसे में बारिश के दौरान हुए गड्ढ़ों और नालों में भरे पानी में अब खतरनाक मच्छर पनपने लगे हैं। धूप खिलने और मौसम खुलने के साथ ही ये मच्छर अब हर घर में परेशानी का सबब बन गए हैं।</p>
<p>इन मच्छरों से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बार-बार बदल रहे मौसम के चलते लोग काफी संख्या में मौसमी बीमारी के मरीज भी बढ़ गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के सीजन में मच्छरों से बचाव करके ही इन बीमारियों से बचा जा सकता है।</p>
<p><strong>तेजी से फैल रहा डेंगू, सरकारी आंकड़ों में मौतें नहीं</strong></p>
<p>चिकित्सा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस साल एक जनवरी 2024 से 22 अगस्त 2024 तक डेंगू के 1451 पॉजिटिव मरीज मिले चुके हैं। मलेरिया के 604, चिकनगुनिया के 95 और स्क्रब टायफस के 551 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। इन बीमारियों से इस साल अब तक कोई मौत चिकित्सा विभाग के आंकड़ों में दर्ज नहीं है। स्वाइन फ्लू के अब तक 1026 पॉजिटिव केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें से 12 लोगों की मौत भी हुई है। स्वाइन फ्लू के सबसे ज्यादा केस 528 जयपुर में दर्ज हुए हैं लेकिन मौत एक भी दर्ज नहीं है। जबकि मौतें सबसे ज्यादा उदयपुर में 4 हुई हैं। वहीं स्क्रब टायफस के सबसे ज्यादा 120 पॉजिटव उदयपुर में, डेंगू के सबसे ज्यादा 218 बीकानेर में, मलेरिया के 151 बाड़मेर में और चिकनगुनिया के सबसे ज्यादा 18 केस उदयपुर में दर्ज हुए हैं। </p>
<p><strong>स्वाइन फ्लू से किस जिले में कितनी मौतें</strong></p>
<p>जिला            मौतें</p>
<p>उदयपुर         4<br />भीलवाड़ा       3<br />कोटा            2<br />बीकानेर        2<br />चित्तौड़गढ़     1</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Aug 2024 10:19:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर में मच्छरों की उत्पत्ति के पांच दर्जन से अधिक ब्लैक स्पॉट !</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश को दौर शुरू होते ही सरकारी से लेकर निजी अस्पताल में डेंगू के संदिग्ध मरीजों का आना शुरू हो गया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-five-dozen-black-spots-of-mosquitoes--origin-in-the-city/article-87198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(7)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मानसून सक्रिय होने के साथ ही मच्छरों के पनपने के अनुकूल स्थान तैयार हो गए है। शहर में  बारिश जगह जगह गड्ढो में पानी जमा होने से मच्छर के लार्वा पनप रहे है। हालांकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग हर रोज 12 हजार से अधिक घरों प्रतिदिन सर्वे कर लार्वा को नष्ट करने का अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन यह अभियान धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। शहर की कई बस्तियों में इन दिनों मच्छरों के लार्वा पनप रहे है।  कोटा शहर में करीब पांच दर्जन से अधिक ब्लैक स्पॉट है जहां सबसे ज्यादा मच्छर पनपते है। कोटा में पिछले साल कोटा में डेंगू काफी फैला था जिसके कारण कई लोगों की जान पर बन आई थी। इस बार इसके फैलाव से पहले विभाग इसकी रोकथाम में जुटा है। इसके लिए जिला प्रशासन से लेकर हर विभाग को मच्छर को पनपने से रोकने के लिए जिम्मेदारियां दी गई। करीब 17 से अधिक विभाग  को हर रविवार अपने अपने कार्यालायों में एंटी लार्वा गतिविधियां करने की जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि मच्छर जनित बीमारी मलेरिया से बचाव, रोकथाम व जागरुकता के लिए प्रतिदिन प्रचार प्रसार किया जा रहा उसके बावजूद डेंगू के संदिग्ध मरीज अस्पतालों में आ रहे है। हालांकि एलाइजा जांच में तो नेगिटव आ रहे लेकिन मरीजों के लक्षण सारे डेंगू वाले है। </p>
<p><strong>मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से होता है मलेरिया  </strong><br />डिप्टी सीएमएचओ हैल्थ डॉ. घनश्याम मीना ने बताया कि मलेरिया रोग मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर साफ पानी में अण्डे देता है और रात के समय काटता है। अचानक तेज संर्दी लगकर बुखार आना, पसीना आकर बुखार कम होना, सिर दर्द मलेरिया रोग के प्रमुख लक्षण हैं। </p>
<p><strong>विशेष अभियान चल रहा </strong><br />मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए चल रहा विशेष अभियान  सीएमएचओ डॉ. जगदीश सोनी ने बताया कि मौसमी बीमारियों और मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए अगस्त माह में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हर घर में दस्तक देकर लोगों को मौसमी बीमारियों के लिए जागरूक किया जा रहा है। वहीं सभी खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों व चिकित्सा अधिकारी प्रभारियों को इस संबध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। पिछले साल इन इलाकों में सबसे ज्यादा आए डेंगू के मरीज: पिछले साल मच्छर जनित बीमारियों के सबसे ज्यादा मरीज जवाहर नगर, इंद्रा विहार, तलवंडी सेक्टर ए ,सी,एसएफएस सहित महावीर नगर सैकंड से आए। इसके अलावा अनंतपुरा,भीमगंजमंडी, नयागांव,रंगबाड़ी, महावीर नगर,केशवपुरा  पुरोहित जी की टापरी, डीसीएम, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी, बोरखेड़ा, नयापुरा, स्टेशन, काला तालाब, डकनिया, शॉपिंग सेंटर,छावनी, कुन्हाडी, नांता सहित करीब 50 से अधिक ब्लैक स्टॉप है यहां अधिक मच्छर के लार्वा पनप रहे है। </p>
<p><strong>निजी अस्पतालों में आने लगे संदिग्ध मरीज</strong><br />बारिश को दौर शुरू होते ही सरकारी से लेकर निजी अस्पताल में डेंगू के संदिग्ध मरीजों का आना शुरू हो गया है। हालांकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का दावा है अभी डेंगू मरीज नहीं आ रहे है। लेकिन डेंगू लक्षण व संदिग्ध मरीजों की संख्या प्रतिदिन 150 से के आसपास चल रही है। इनकी रिपोर्ट तो नेगेटिव है लेकिन लक्षण डेंगू के है। इनका इलाज भी डेंगू समझ कर ही किया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मौसमी बीमारियों को नियंत्रण में रखने के लिए सोर्स रिडक्शन पर फोकस किया किया जा रहा है। घरों में कूलर, टंकियों एवं अन्य जल संग्रहण वाले जल पात्रों की सप्ताह में एक बार रगड़कर साफ-सफाई कराई जा रही है इससे मच्छरों के अण्डे लार्वा बनने से पूर्व ही खत्म हो जाएगें। पोस्टर स्टीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। हर घर में दस्तक देकर डेंगू मलेरिया के लिए जागरूक किया जा रहा है।अभी डेंगू मलेरिया के मरीज नहीं आ रहे लेकिन संदिग्ध मरीजों स्लाइड ली जा रही है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ</strong></p>
<p><strong>नालों व गड्ढों में पनप रहे लार्वा</strong><br />नालों व नदियों की सफाई बेहतर तरीके से नहीं हो रही है। जिसके कारण मच्छरों के लार्वा इनमें पनप रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग की टीमे घरों का तो सर्वे कर कूलर, परिडों में एंटी लार्वा गतिविधियां कर रही है लेकिन शहर में कई ऐसे स्थान है जहां जहां मच्छरों का अड्डा बना हुआ है।  समय रहते ब्लैक स्पॉट पर दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया तो मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों का प्रमाण बढ़ सकता है। महावीर नगर, विज्ञान नगर, नया कोटा ऐसे स्थान है जहां हर साल डेंगू के मच्छर पनपत है। नगर निगम को नालों की सफाई कराकर यहां एंटी लार्वा गतिविधियां करानी चाहिए। नागरिकों का आरोप है कि नदी- नालों की सफाई के नाम कचरा निकालकर ढेर बना दिया जाता है।  वहां से संबंधित कचरे को हटाया नहीं जाता।  जिसकी वजह से मच्छरों के पनपने के अनुकूल परिस्थितियां तैयार होती है। <br /><strong>- विशाल आचार्य, निवासी महावीर नगर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Aug 2024 17:20:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बढ़ते तापमान के साथ मच्छर सक्रिय, मलेरिया का खतरा बढ़ा, जनवरी से अब तक 116 मरीज मिले</title>
                                    <description><![CDATA[बाड़मेर जिले में 26, जैसलमेर में 22 और जयपुर में मिल चुके हैं 3 मरीज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/risk-of-mosquito-activated-malaria-increases-with-increasing-temperature-116-patients/article-75861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/trer-(2)11.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही मच्छर जनित बीमारियां भी काफी बढ़ गई है। मलेरिया इन्हीं गंभीर बीमारियों में से एक है जो मौत तक का कारण भी बन सकती है। मलेरिया के अलावा मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मलेरिया कुछ प्रकार के मच्छरों से मनुष्यों में फैलने वाली एक जानलेवा बीमारी है। इस बीमारी को रोका जा सकता है और इसका इलाज भी संभव है। मलेरिया मादा एनाफिलीज जाति के मच्छर के काटने से होता है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बाड़मेर जिले में 26, जैसलमेर में 22 और जयपुर में मिल चुके हैं 3 मरीज</strong><br />चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक जनवरी, 2024 से 24 अप्रैल, 2024 तक 116 मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। ये वे मरीज हैं जो सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज के लिए आए। वहीं निजी अस्पतालों में भी मलेरिया के काफी रोगी इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनकी संख्या भी सैकड़ों में है। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार जो 116 मरीज अब तक रजिस्टर्ड हुए हैं उनमें सबसे ज्यादा सरहदी जिलों में मलेरिया का असर देखा गया है। इनमें बाड़मेर में सबसे ज्यादा 26 मरीज और जैसलमेर में 22 मरीज मिले हैं। वहीं उदयपुर में 15 और श्रीगंगानगर में 11 मरीज मिले हैं। राजधानी जयपुर में सरकारी आंकड़ों के अनुसार महज तीन मरीज ही मलेरिया के मिले हैं। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong> ये हैं लक्षण</strong><br />बुखार, सिरदर्द और ठंड लगकर बुखार आना।  अत्यधिक थकान महसूस होना और कमजोरी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong> बचाव</strong><br />लंबी आस्तीन, लंबी पेंट और मोजे का इस्तेमाल करें।<br />मच्छर सुबह और शाम को ज्यादा सक्रिय होते हैं, इसलिए इस दौरान सुरक्षात्मक कपड़े पहनें।<br />मॉस्कीटो कॉयल या मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।<br />कूलर में या आसपास पानी जमा नहीं होने दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Apr 2024 10:25:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्ट्रेचर स्टैंड में गंदगी, संक्रमण के बारूद पर बैठे एमबीएस के मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल परिसर में जगह पानी जमा है जिससे मच्छर मरीजों को डंक मार रहे है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dirt-in-the-scaffold-stand--patients-of-mbs-sitting-on-the-ammo-of-infection/article-56525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/strechter-stand-me-gandagi,-sankraman-k-barood-pr-bethe-aspatak-j-mareez...kota-news-07-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल परिसर में इन दिनों सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई है। परिसर में चहुंओर गंदगी फैली है। नालियों की सफाई नहीं होने से यहां मच्छर पनप रहे है। एमबीएस अस्पताल की पुरानी ओपीडी के बाहर बना महिला टायलेट की सफाई नहीं होने से महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। एमबीएस अस्पताल के स्टेÑचर स्टैंड में नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी में स्ट्रेचर को रखा गया जिससे मरीजों को संक्रमण का खतरा हो सकता है। अस्पताल परिसर में जगह पानी जमा है जिससे मच्छर मरीजों को डंक मार रहे है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों को मच्छरों से बचाने के लिए महिला वार्ड में मच्छरदानी लगाई लेकिन अन्य वार्डो में अभी मच्छर मरीजों पर लगातार हमला कर रहे है। </p>
<p><strong>स्ट्रेचर स्टैंड पर फैली गंदगी</strong><br />एमबीएस अस्पताल के स्ट्रेचर स्टैंड में चहुंओर गंदगी फैली सारी ट्रालियां वहीं गंदगी में रखी हुई है। ऐसे में गंदी ट्राली में लेटाने से मरीजों को संक्रमण का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>महिला शौचालय में गंदगी होने से हो रही परेशानी</strong><br />एमबीएस अस्पताल परिसर में बने महिला टायलेट के बाहर व अंदर गंदगी का ढेर लगा होने से महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। </p>
<p><strong>पुराने दवाघर के बाहर लगे गंदगी ढेÞर</strong><br />एमबीएस अस्पताल के पुराने दवाघर की दुकानों और एमबीएस के पर्ची काउंटर के बाहर गंदगी ढेर लगे हुए जिससे मरीज परेशान हो रहे है। चहुंओर प्लास्टिक थैलियां, कचरे ढेर लगा रखे है। </p>
<p><strong>अस्पताल में व्यवस्थाए बेहतर हुई</strong><br />एमबीएस अस्पताल में पहले से व्यवस्थाओं में काफी सुधार हुआ है। अस्पताल को बेहतर सुविधा युक्त बनाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे है। अस्पताल में सफाई  नियमित हो रही है। अस्पताल परिसर में कहीं गंदगी फैली है तो संबंधित को कहकर वहां सफाई कराई जाएगी। मरीजों को अच्छा स्वास्थ्य के साथ स्वच्छ वातारण देने के लिए अस्ताल प्रशासन की ओर से अनवरत कार्य किए जा रहे है। <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 15:27:38 +0530</pubDate>
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                <title>हॉस्टल और दुकानों के आगे जमा पानी में पनप रहे मच्छर </title>
                                    <description><![CDATA[पानी में मच्छर पनप रहे लेकिन किसी का उस और ध्यान नहीं जा रहा है। जिससे लगातार मरीज आ रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mosquitoes-are-breeding-in-the-water-accumulated-in-front-of-hostels-and-shops/article-56360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/hostel-or-dukano-k-age-jma-pani-me-panap-rhe-machhar...kota-news-05-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में डेंगू स्क्रब टायफस के मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। चिकित्सा एंव स्वास्थ विभाग की 855 से अधिक टीमे घर घर जाकर एंटी लार्वा गतिविधियां कर रही लेकिन डेंगू का मच्छर है लोगों लगातार डंक मार रहा है। सोमवार को 27 मरीज डेंगू पॉजीटिव आए वहीं स्क्रब टायफस का एक मरीज सामने आया। रविवार को कलक्टर ने तलवंडी, इंद्रा विहार सहित कई इलाकों का दौरा किया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जहां जहां एंटी लार्वा गतिविधयां की उन्हीं इलाकों में सर्वे करा कर अपनी पीठ थप थपा ली लेकिन हकीकत ये है कि जहां सबसे ज्यादा डेंगू मरीज आ रहे उन इलाकों में अभी एंटी लार्वा गतिविधियां नहीं हुई है। राजीव गांधी नगर में कोचिंग व होस्टल के सामाने जमा पानी में मच्छर पनप रहे लेकिन किसी का उस और ध्यान नहीं जा रहा है। जिससे लगातार मरीज आ रहे है। </p>
<p><strong>डेंगू का डी 2 स्ट्रेन सक्रिय फिर भी लोग नहीं हो रहे सावचेत</strong><br />मेडिकल कॉलेज कोटा के मेडिसिन विभाग के आचार्य डॉ. मनोज सालूजा ने बताया डेंगू के चार स्ट्रेन होते हैं 1,2,3 व चार इन चारों स्ट्रेन में डी 2 सबसे घातक होता है। बाकी तीनों स्ट्रेन से होने वाला फीवर सामान्य डेंगू फीवर होता है। कॉम्प्लिकेशन दर कम होता है। डी 2 स्ट्रेन में कॉम्प्लिकेशन की दर ज्यादा होती है। इसमें तेज बुखार आता है। पेट दर्द, उल्टी होती है। इस स्ट्रेन में डेंगू शॉक सिंड्रोम व डेंगू हेमेरिजक फीवर देखने को मिलता है। ऐसे में लोगों को ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है। डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। दिन में पूरी आस्तीन शर्ट पहने, घर में मच्छर भगाने के सभी उपाय दिन में करे। बुखार आने पर हल्के नहीं ले। </p>
<p><strong>इन इलाकों में पनप रहे मच्छर </strong><br />शहर के राजीव गांधी नगर, तलवंडी, जवाहर नगर में स्थित हॉस्टल व खाने पीने की दुकानों के सामान जमा पानी में मच्छर पनप रहे लेकिन उनको नष्ट नहीं करने से मच्छर लोगों के डंक मार रहे है। हॉस्टल व कोचिंग के सामने जमा पानी पनप रहे मच्छर: जवाहर नगर इलाके में स्थित कोचिंग सेंटर व हॉस्टल सामने जमा पानी में मच्छरों के लार्वा पनप रहे यहां एंटी लार्वा गतिविधियां नहीं हो रही है। </p>
<p><strong>27 डेंगू के नए  मरीज आए</strong><br />शहर में लगातार  डेंगू के मरीज आ रहे है। सोमवार को  डेंगू के 27 नए मामले व स्क्रब टाइफस के 1 नए मरीज मिले। जिले में इस साल अब तक डेंगू के 422 मामले सामने आ चुके हैं।जबकि स्क्रब टायफस के 76 मामले सामने आ चुके। सोमवार को जेकेलोन की आईपीडी में तीन मरीज आए। वहीं  एनएमसीएच  में ओपीडी में तीन मरीज आए। एमबीएस की ओपीडी में चार मरीज आए इसके अलावा अन्य बीमारियों का एक मरीज आया। वहीं निजी अस्पतालों की ओपीडी में 17 मरीज डेंगू पॉजीटिव के आए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में लगातार टीमों की ओर से एंटी लार्वा गतिविधियां की जा रही है। घरों में कूलर, फ्रीज की ट्रे और कबाड में जमा पानी का खाली कराकर एंटी लार्वा गतिविधियां की जा रही है। विभाग की ओर से फोगिंग भी कराई जा रही है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Sep 2023 19:17:02 +0530</pubDate>
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                <title>डेंगू मच्छर दिन में काट रहा, भगा रहे रात में</title>
                                    <description><![CDATA[लोग मच्छरों के बचाव समय उचित समय पर नहीं कर रहे जिससे डेंगू की चपेट में ज्यादा आ रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dengue-mosquito-biting-during-the-day--driving-away-at-night/article-55789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/dengue-machhar-din-me-kaat-rha,-bhga-rha-raat-me...kota-news-29-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इस बार रूक रूक हो रही बारिश के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ गया है। शहर में जगह जगह बारिश का पानी मच्छर पनपा रहा है। जिससे डेंगू मलेरिया के मरीज लगातार बढ़ रहे है। पिछले 28 दिन में 275 डेंगू व 60 स्क्रबटायफस मरीज आ चुके है। डेंगू इतना घातक हो रहा है कि शहर में दो लोगों को ब्रेन हेमरेज हो गया है। वहीं डेंगू से एक की मौत हो चुकी है। पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर थमते ही शहर में डेंगू के मच्छरों ने हमला बोलना शुरू कर कर दिया है। सरकारी से लेकर निजी अस्पताल में मच्छर जनित रोगों के मरीजों का लगातार अस्पताल में पहुंचना जारी है। शहर में चलाए जा रही एंटी लार्वा गतिविधियों बाद भी डेंगू पैर पसार रहा है। शहर में मौसमी एवं मच्छर जनित बीमारियों मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरों की रोकथाम की गतिविधियां लगातार की जा रही लेकिन लार्वा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लोग मच्छरों के बचाव समय उचित समय पर नहीं कर रहे जिससे डेंगू की चपेट में ज्यादा आ रहे है। </p>
<p><strong>कूलर में पनप रहा लार्वा</strong><br />मेडिकल अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. मनोज सलूजा ने बताया कि इस बार बारिश रूक रूक होने से खाली प्लांट, घरों के आसपास पानी जमा हो गया। इस बार बारिश के बाद भी कुलर चल रहे है।लोग कुलर पानी खाली नहीं करते ऐसे में लार्वा पनप रहा है। डेंगू फैलने का दूसरा सबसे बड़ा कारण डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। लोग इसके बचाव के उपचार रात में करते है। दिन के समय लोग घरों में बरबूडा, बनियान टी शर्ट में रहते इस दौरान ही मच्छर काट लेता है। लोग रात को सोते समय मच्छर भगाने की कॉयल, आॅडोमास और मच्छरदानी लगते है। जबकि डेंगू के शिकार तो सबसे ज्यादा दिन में ही होते है। इसलिए दिन में भी मच्छरों से बचाव का उपाय करना जरूरी है। घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने दे। </p>
<p><strong>डेंगू से बचाव के लिए दो स्तर पर करना होगा काम</strong><br />डॉ. मनोज सलूजा ने बताया कि डेंगू के मच्छर से बचने के लिए दो स्तर पर लोगों को  काम करना होगा। पहला तो जो वयस्क मच्छर पनप चुके उनकी फोगिंग और अन्य संसाधनों से इनको नष्ट करें। दूसरा डेंगू का मच्छर हमें नहीं काटे इसके लिए पूरी आस्तिन के शर्ट पहने, शरीर को पूरा ढक रखे। दूसरा मच्छर भगाने ने वाली कॉयल अगरबत्ती का प्रयोग दिन में करें। स्कूल, कार्यस्थल पर दिन में बचाव के करें। दूसरा लार्वा की रोकथाम के लिए कूलर को एक बार खाली करके उसमें क्रूड आयल डाले। जिससे मच्छर का लार्वा नष्ट हो जाएगा। पानी जहां पानी जमा उसको खाली करें। </p>
<p><strong>आठ माह में 275 मरीज</strong><br />कोटा शहर में 1 अगस्त से 28 अगस्त तक डेंगू के 275 मरीज आ चुके है। ये तो वो मरीज है जो सरकारी अस्पतालों में पहुंचे। निजी में भर्ती और इलाज करा रहे मरीजों की संख्या तो इससे दुगुनी है। </p>
<p><strong>तलवंडी क्षेत्र में सबसे ज्यादा आ रहे डेंगू के मरीज</strong><br />शहर में लंबे समय से बारिश नहीं होने से जमा पानी में मच्छर पनप रहे है। शहर के तलवंडी, जवाहरनगर, महावीर नगर, इंदिरा विहार, तलवंडी सेक्टर 1, 2, 3, 4 तथा महावीर नगर सैकंड में लगातार डेंगू के मरीज आ रहे हैं। मलेरिया, डेंगू एवं मौसम जनित बीमारियों से बचाव के लिए सावधनी बरतें तथा निवास स्थान पर स्थित कूलर, पानी की टंकियों में मच्छर पनपने की संभावना रहती है। </p>
<p><strong>लगातार करा रहे मॉनिटरिंग </strong><br />मौसमी बीमारियों को लेकर एंटी लार्वा गतिविधियां और घर सर्वे का कार्य किया जा रहा है। मरीजों को चिहिंत कर उनके ब्लड की स्लाइड ली जा रही है। कुलर पानी की टंकियों में पनप रहे लार्वा को नष्ट किया जा रहा है। डॉ एनएस राजावत, डॉ. अनिल मीना, एपिडेमियोलॉजिस्ट डा.ॅ विनोद प्रभाकर, एनटीपीसी के अमित शर्मा की टीम सुपरविजन कर रहे है। <br /><strong>- जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 16:12:23 +0530</pubDate>
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                <title>पार्कों के बंद फाउंटेन में पनप रहा बुखार</title>
                                    <description><![CDATA[पार्क में तीनों कॉर्नर में तीन फाउंटेन हैं और तीनों ही बंद है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fever-flourishing-in-the-closed-fountain-of-the-parks/article-47636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/parko-k-band-fountain-me-panap-rha-bukhar...kota-news-03-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। ये तो उदाहरण मात्र है। शहर में ऐसे कई पार्क हैं जहां इसी तरह के हालात हैं। चिकित्सा विभाग जहां शहर में रोजाना सैकड़ों घरों में सर्वे कर पानी में जमा लार्वा व मच्छरों को साफ करवाने में जुटा है। वहीं दूसरी तरफ नगर निगम के पार्कों पर किसी का ध्यान नहीं है। जहां बंद फाउंटेन के गंदे पानी में जमा लार्वा व मच्छर बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही स्कूलों में अवकाश हो गए हैं। ऐसे में अधिकतर परिवार सुबह-शाम बच्चों के मनोरंजन व सैर के लिए शहर के पार्कों में जा रहे हैं। जहां बच्चे झूला झूलने के साथ ही खेलने-कूदने का भी आनंद ले रहे हैं। पार्कों में चलने वाले रंग बिरंगे फाउंटेन देखने का भी लोगों में उत्साह रहता है। पार्कों मं बच्चों को झृले भी मिल रहे हैं और खेलने का आनंद थी। लेकिन हालत यह है कि अधिकतर पार्कों में फाउंटेन बंद हैं। उन्हें चालू करने पर तो किसी का ध्यान ही नहीं है। जिससे वहां आने वाले लोग उनका आनंद नहीं ले पा रहे हैं। वहीं फाउंटेन बंद होने से उनके पौंड में पानी भी गंदा हो रहा है। जिससे उनमें मच्छर व लार्वा पनप रहे हैं। उन फाउंटेन के पास ही सैर करने वाले लोगों का जमघट भी लगा रहता है। ऐसे में कई लोग वहां ठंडक होने पर बैठ भी रहे हैं। कुछ लोग वहां खाने-पीने का आनंद भी ले रहे हैं। लेकिन जाने-अनजाने में वहां से वे अपने साथ बीमारियां भी ले जा रहे हैं। </p>
<p><br />नयापुरा थाने के पास और पूर्व महापौर डॉॅ. रत्ना जैन के घर के सामने स्थित उम्मेद पार्क में  फाउंटेन तो काफी समय से बंद है। जिससे उसके पौंड में गंदा पानी जमा हो रहा है। उस पानी में मच्छर व लार्वा पनप रहे हैं। उस फाउंटेन के पास ही लोग बैठे हुए हैं और घूम रहे हैं। जिससे वे बीमारियों का कारण बन रहे हैं। </p>
<p><br />शहर के प्रमुख सीबी गार्डन में जहां रोजाना सैकड़ों लोग दूर दराज से घूमने और ताजी हवा लेने के लिए आ रहे हैं। उस पार्क के फाउंटेन के पानी में गंदा पानी जमा होने से उसमें मच्छर व लार्वा का अम्बार लगा हुआ है। उसके आस-पास लोग घूम रहे हैं और बीमारियों को अपने साथ ले जा रहे हैं। </p>
<p><strong>दुर्गंध व मच्छरों का आतंक</strong><br />नयापुरा स्थित उम्मेद पार्क भले ही छोटा है। लेकिन शहर के बीच होने से यहां आस-पास के ही नहीं दूर-दूर से भी लोग घूमने के लिए आ रहे हैं। यहां सुबह-शाम तो घूमने वालों की भीड़ रहती ही है। दिन के समय भी यहां सबसे अधिक लोग घूमते देखे जा सकते हैं। उस पार्क के बंद फाउंटेन लोगों को निराश तो कर ही रहे हैं। साथ ही उनमें जमा गंदा पानी दुर्गंध फेला रहा है। साथ ही उस पानी में जमा लार्वा बीमारियों को बढ़ा रहा है। आस-पास मच्छरों का आतंक होने से लोगों को परेशान कर रहे हैं।  इस पार्क में तीनों कॉर्नर में तीन फाउंटेन हैं और तीनों ही बंद है। जिनमें से एक तो सूखा है जबकि दो में पानी भरा हुआ है वह भी गंदा। </p>
<p><strong>नेहरु पार्क में भी फाउंटेन बंद</strong><br />स्टेशन रोड स्थित नेहरु पार्क में भी दो जगह पर फाउंटेन लगे हुए हैं लेकिन हालत यह है कि ये दोनों ही फाउंटेन काफी समय से बंद हैं। उनका पानी तक सूख चुका है। जिससे उनमें मच्छर व लार्वा तो नहीं है लेकिन कचरे का ढेर लगा लगा हुआ है। जिससे यहां सिविल लाइंस व दोस्तपुरा से लेकर खेड़ली फाटक तक के लोग आते हैं। नगर निगम समेत कई  अन्य विभागों के सरकारी अधिकारी भी इस पार्क में आते हैं। </p>
<p><strong>अधिकतर पार्कों के यही हालात</strong><br />सिर्फ नेहरु पार्क या उम्मेद पार्क में ही ऐसी स्थिति नहीं है। भीमगंजमंडी स्थित शास्त्री पार्क हो या सीबी गार्डन। वहां भी यही हालत है। अधिकतर पार्क महापुरुषों के नाम पर बने हुए हैं लेकिन उनकी दुर्दशा लोगों को पीड़ा देने के साथ ही बीमारियों के वाहक भी बन रहे हैं। </p>
<p>उम्मेद पार्क शहर का पुराना पार्क है। यहां लोग घूमने व ताजा हवा के लिए आते हैं। गर्मी के सीजन में यहां अधिकतर परिवार अपने बच्चों को घुमाने के लिए ला रहे हैं। ऐसे में पार्क की दुर्दशा होना और बंद फव्वारों में गंदा पानी जमा होना सैर करने वालों के लिए कष्ट दायक है। संबंधित विभागों को पार्कों की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। <br /><strong>- राकेश  माथुर, नयापुरा </strong></p>
<p>शहर में जितने भी पार्क बने हुए हैं वह चाहे नगर निगम के अधीन हो या नगर विकास न्यास के। ये पार्क लोगों के घूमने व बीमारियों से बचाने के लिए शुद्ध हवा देने का काम करते हैं। इन पार्कों में बीमारियां बांटी जा रही है यह गलत है। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को इस व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। <br /><strong>- सुनील सिंह, दोस्तपुरा</strong></p>
<p>जयपुर से दोहिता और दोहिती गर्मी की छुट्टी में कोटा आए हुए हैं। उन्हें घुमाने के लिए पार्क में लेकर आए। लेकिन यहां स्प्रिंकलर तो चल रहे हैं। लेकिन फाउंटेन बंद है। उनमें भरा गंदा पानी दुर्गंध के साथ ही बीमारियों भी फेला रहे हैं। गर्मी की छुट्टी में अधिक लोग यहां घूमने आ रहे हैं। ऐसे में पार्कों  में साफ सफाई रखनी चाहिए। <br /><strong>- शालिनी नामदेव, वल्लभ नगर</strong></p>
<p>नगर निगम कोटा उत्तर में पार्कों का काम निगम और न्यास दोनों के ही पास है। पार्कों  में वैसे ही समय-समय पर काम करवाए जा रहे हैं। फिर भी यदि निगम के पार्कों में गंदगी है या गंदा पानी और मच्छर पनप रहे हैं तो उन्ें दिखवाकर साफ करवाया जाएगा। जिससे लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2023 16:07:53 +0530</pubDate>
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                <title>नि:शुल्क दवा योजना का सच: टिटनेस के इंजेक्शन बाजार से, सीरप में मिले मरे मच्छर</title>
                                    <description><![CDATA[गड़बड़ियों ने नि:शुल्क दवा योजना की पोल खोल दी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--tetanus-injections-from-market--mosquitoes-found-in-syrup--truth-of-free-medicine-plan/article-8209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ttt-injection-in-.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा एवं जांच योजना में सभी रोगियों को नि:शुल्क दवा एवं जांच सुविधा देने  संबंधी राज्य सरकार के निर्देश के बावजूद एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में कई रोगियों को सप्ताह भर से टिटनेस का इंजेक्शन तक बाजार से लाना पड़ रहा है, वहीं एक रोगी को हॉस्पिटल से दिए गए सीरप में मरे हुए दो मच्छर दिखे। इन गड़बड़ियों ने नि:शुल्क दवा योजना की पोल खोल दी है। गत सप्ताह भर से एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में कई जीवनरक्षक दवाइयों का टोटा है। सर्वाधिक उपयोग में आने वाले टिटनेस के इंजेक्शन का भी अभाव बना हुआ था। हॉस्पिटल प्रशासन ने सोमवार को इस इंजेक्शन की आपूर्ति की है। इसके अलावा इमरजेंसी में एंटीबायोटिक सिफेक्सीन, बीपी की दवा लोसारटन, दर्द निवारक आईबीप्रूफेन आदि दवाइयां नहीं है। ये दवाइयां अधिकतर रोगियों को लिखी जाती है। मंगलवार को एक रोगी को हॉस्पिटल से गले में संक्रमण पर सीरप ग्लोवर हैक्सीडीन दिया गया जिसमें मरे हुए दो मच्छर दिखाई देने पर रोगी के परिजनों ने अधीक्षक को शिकायत की। <br /><br /><br />सीरप सीलबंद है, जो डिट्रिक्ट डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (डीडीसी) के पास दवा भण्डार से आई है। ऐसे में हॉस्पिटल के दवा भण्डार में पूरा स्टॉक चैक कराएंगे। इस स्टॉक को विड्रॉल करने के निर्देश दे दिए हैं। टिटनेस के इंजेक्शन व कुछ दवाइयां आरएमसीएल से ही शॉर्ट सप्लाई है। इनकी वैकल्पिक दवाइयां है। टिटनेस के इंजेक्शन लोकल बाजार से भी खरीदे गए लेकिन बाजार में भी उन दिनों में इसकी किल्लत है। जिस डीडीसी पर दवाइयों की उपलब्धता नहीं है, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। <br />डॉ. आर.एल. सुमन, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 14:03:33 +0530</pubDate>
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