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                <title>drinking water - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>drinking water RSS Feed</description>
                
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                <title>भीषण गर्मी के बावजूद नहीं लगाई अस्थायी प्याऊ, 18 स्थानों को किया था चिन्हित </title>
                                    <description><![CDATA[निगम आयुक्त के आदेश की 22 दिन बाद भी नहीं हुई पालना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-temporary-drinking-water-kiosks-set-up-despite-scorching-heat/article-154547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-2222.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक तरफ तो भीषण गर्मी पड़ रही है और पारा 45 डिग्री के करीब पहुंच गया है। वहीं निगम आयुक्त द्वारा शहर में अस्थायी प्याऊ शुरु करने के 22 दिन पहले दिए आदेश की अभी तक भी पालना नहीं हुई है। नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने 28 अप्रैल को आदेश जारी किया था। जिसमें कहा था कि कोटा शहर में भीषण गर्मी व लू की स्थिति को देखते हुए राहगीरों व आमजन को राहत प्रदान करने के लिए नगर निगम क्षेत्राधिकार में अस्थायी प्याऊ(पेयजल केन्द्र) स्थापित किए जाने आवश्यक हैं। इसे देखते हुए शहर में 18 स्थानों को चिन्हित कर वहां अस्थायी प्याऊ शुरु करने के आदेश दिए थे। साथ ही जोन वाइज व्यवस्था करने के बाद इनके प्रभारी भी नियुक्त किए गए थे। लेकिन हालत यह है कि आयुक्त के आदेश व भीषण गर्मी के बावजूद भी बुधवार तक अधिकतर स्थानों पर प्याऊ शुरु नहीं हो सकी है।</p>
<p><strong>इन स्थानों पर होनी थी प्याऊ शुरु</strong><br />आयुक्त के आदेशानुसार शहर में 18 स्थानों पर प्याऊ शुरु की जानी थी। जिनमें जे.के. लोन हॉस्पिटल, एमबीएस हॉस्पिटल, अदालत परिसर, रेलवे स्टेशन भीमगंजमंडी थाना, प्राइवेट बस स्टैंड किशोर सागर तालाब, अग्रसेन चौराहा, सकतपुरा जहाज के पास, झालीपुरा फोरलेन के पास, घोड़े वाले बाबा चौराहा रावतभाटा बस स्टैंड, सीएडी चौराहा रावतभाटा बस स्टॉप के पास, चम्बल गार्डन के सामने, नयागांव हाइवेब्रिज के पास, कोटड़ी ब्रिज के नीचे अस्थायी आश्रय स्थल के स्थान पर, एरोड्राम चौराहा, सुधा हॉस्पिटल के पास, अनंतपुरा फ्लाई ओवर के नीचे, डीसीएम रोड पर पॉलिटेक् नीक कॉलेज के सामने व 80 फीट रोड बस स्टैंड के अंदर की तरफ ये प्याऊ शुरु की जानी है।</p>
<p>इधर पूर्व पार्षद सुरेन्द्र राठौर ने बताया कि उन्होंने 29 अप्रैल को निगम आयुक्त को ज्ञापन देकर शहर में अस्थायी प्यारू शुरु करने की मांग की थी। उस समय आयुक्त ने कहा था कि उन्होंने क दिन पहले ही प्याऊ लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। राठौर ने बताया कि आयुक्त के आदेश के बाद भी अभी तक अधिकतर जगहों पर प्याऊ शुरु नहीं हो सकी है जबकि शहर में गर्मी भीषण पड़ रही है। जबकि कई समाजसेवी संस्थाओं व संगठनों की ओर से अपने स्तर पर पानी के कैम्पर रखवाए गए हैं। घोड़े वाले बाबा चौराहे पर पुलिस की गुमटी के पास पानी के कई कैम्पर रखे हुए हैं। लेकिन वहां आम आदमी पानी नहीं पी पा रहा है। इधर निगम अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर जगहों पर प्याऊ के लिए पानी के कैम्पर रखे जाएंगे। उनके लिए टेबल व टेंट लगाए गए हैं। जल्दी ही प्याऊ शुरु कर दी जाएंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:54:06 +0530</pubDate>
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                <title>नाम का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, सूखे खिलाड़ियों के कंठ</title>
                                    <description><![CDATA[खिलाड़ी व कोच करीब एक दर्जन खेलों का अभ्यास करने के लिए आते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/an--international-stadium--in-name-only--players--throats-run-dry/article-153128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में पिछले कई दिन से जिस तरह की भीषण गर्मी पड़ रही है उस समय में प्रशासन द्वारा एक तरफ तो आमजन के लिए पीने के पानी और छाया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम में जहां अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी आ रहे हैं। वहां उनके पीने के लिए पानी की सुविधा तक नहीं है। यह हालत है नयापुरा स्थित अंतरराष्ट्रीय इनडोर स्टेडियम की। जे.के. पवेलियन स्थित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में बने इस स्टेडियम में सुबह-शाम बड़ी संख्या में खिलाड़ी व कोच करीब एक दर्जन तरह के खेलों का अभ्यास करने के लिए आ रहे हैं। सामान्य दिनों में ही थोड़ी देर में खेलते समय पसीना आने पर बार-बार पानी की प्यास लगने लगती है। ऐसे में वर्तमान में 45 डिग्री से अधिक तापमान बना हुआ है। उसमें तो बार-बार गला सूख रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बने इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भीषण गर्मी में भी खिलाडिय़ों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><strong>घर से ला रहे वह भी पर्याप्त नहीं</strong><br />खिलाडिय़ों ने बताया कि सर्दी और बरसात के समय तो पानी की इतनी जरूरत नहीं पड़ती जितनी इस भीषण गर्मी में पड़ रही है। स्टेडियम में न तो नल है और न ही वाटर कूलर। ऐसे में घर से बोतल में जितना पानी ला रहे हैं वह पर्याप्त नहीं हो रहा। कुछ ही देर में बोतल खाली हो रही है।</p>
<p><strong>तरणताल व क्लब में जाना पड़ रहा</strong><br />खिलाड़ी जय वर्धन व पुप्पेन्द्र ने बताया कि पानी की प्यास लगने पर पानी ही नहीं मिल रहा। ऐसे में या तो तरणताल या उम्मेद क्लब में वाटर कृूलर की तरफ जाना पड़ रहा है। लेकिन कई बार क्लब में भी बार-बार जाने से रोक दिया जाता है। जिससे खिलाडिय़ों के लिए पीने के पानी की समस्या बनी हुई है।</p>
<p><strong>पानी की सुविधा तो होनी ही चाहिए</strong><br />स्टेडियम में आने वाले खिलाड़ी श्याम नाहर ने बताया कि स्टेडियम जैसी जगह जहां रोजाना बड़ी संख्या में खिलाड़ी आ रहे हैं वहां पानी की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए। लेकिन स्टेडियम में टंकी का गर्म उबलता हुआ पानी आ रहा है। जिसे पीना तो दूर हाथ लगाना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में खिलाड़ी व कोच परेशान हो रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्टेडियम में जितनी संख्या में सुबह-शाम खिलाड़ी आ रहे हैं। उनके लिए फिलहाल पीने के पानी की सुविधा नहीं है। जे.के. पवेलियन में वाटर कूलर है लेकिन वह काम नहीं कर रहा है। जिससे ठंडा पानी नहीं मिल रहा। नल दूर है जिसमें भी गर्म पानी आ रहा है। इस संबंध में पूर्व में जिला प्रशासन व केडीए अषिकारियों से बात की थी। उन्होंने पानी की व्यवस्था करवाने का आश्वासन तो दिया था लेकिन अभी तक सुविधा नहीं हुई है। जिससे इस भीषण गर्मी में खिलाडिय़ों को परेशान होना पड़ रहा है।<br /><strong>- वाई.बी. सिंह, खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:29:51 +0530</pubDate>
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                <title>धरती आभा योजना के बावजूद 100 घरों में पानी का संकट, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[दावे फेल, योजनाएं कागजों तक सीमित, निजी नलकूप पर लंबी कतारें 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-crisis-grips-100-households-despite--dharti-abha--scheme/article-151088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। रायथल तहसील के नंदपुरा गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावे धरातल पर फेल होते नजर आ रहे हैं। ह्यधरती आभाह्ण योजना में शामिल होने के बावजूद करीब 100 घरों की आबादी आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रही है। स्थिति यह है कि पूरे गांव की निर्भरता एक निजी नलकूप पर है,जहां सुबह-शाम लंबी कतारें लग रही हैं।</p>
<p><strong>एक कुआं, 25 मोटरें और गिरता जलस्तर</strong><br />गांव में पेयजल का मुख्य स्रोत एक पुराना कुआं है, जिसमें 25 से अधिक मोटरें लगी हुई हैं। अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर लगातार गिर रहा है और कुआं भी जवाब देने की स्थिति में पहुंच गया है। ऐसे में एकमात्र निजी नलकूप ही पीने योग्य पानी का सहारा बना हुआ है। <br />यहां पानी भरने के लिए महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>10 वर्षों से बंद पड़ा आरओ प्लांट</strong><br />पीएचईडी विभाग की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण गांव में स्थापित आरओ प्लांट है, जो पिछले 10 वर्षों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार शिकायत के बावजूद इसे चालू नहीं किया गया। पूर्व में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>अधिकारियों की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष</strong><br />ग्रामीण बनवारी लाल, दीनदयाल, मुकेश कुमार, सत्यनारायण, शिवराज और कैलाश ने बताया कि योजनाएं केवल कागजों में सीमित हैं। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।</p>
<p><strong>फ्लोराइड युक्त पानी से युवाओं के रिश्तों पर असर </strong><br />फ्लोराइड युक्त पानी पीने से ग्रामीणों के दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं इसका असर हड्डियों और जोड़ों पर पड़ रहा हैं जिससे युवाओं के रिश्ते करने में भी प्रभाव पड़ रहा हैं पीले दांतों को देखकर रिश्ते करने से कतराते हैं।<br /><strong>- बनवारी लाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>दफ्तर के लगाए चक्ककर, मिला केवल आवश्वासन, अब प्रदर्शन </strong><br />कई बार विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस प्लांट को चालू कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे #<br /><strong>- दिनदयाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong><br /> हऌड के अनुसार पीने के पानी मे फ्लोराइड की मात्रा 1.0-1.5 टॅ प्रतिलिटर होनी चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा वाला पानी पिने से बच्चों के दांतो मे सफ़ेद और भूरे रंग के धब्बे बन जाते है। दाँत कमजोर और ख़राब हो जाते है जिसे डेंटल फ्लूरोसीस कहते है। अगर फ्लोराइड युक्त पानी पिने से इसका असर हड्डियों और जोड़ो मे आ जाये तो उसे स्केलटल फ्लोरोसीस कहते है। इससे बचने के लिए आरओ का पानी पिए या डिफेंलोरीडेशन फ़िल्टर का उपयोग करें और कुएं और हैंडपम्प या बोर वेल के पानी की टेस्टिंग समय समय पर करवाएं। समय समय पर दंत रोग विशेषज्ञ से अपने दांतो का चेकअप करवाए।<br /><strong>- डॉ निर्मला मीणा, दंत रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बूंदी</strong><br /> <br />पूर्व एजेंसी का टेंडर 31 जनवरी 2026 में समाप्त हो गया था। आरओ पुनः चालू कराने हेतु स्वीकृति जयपुर भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही प्लांट चालू करवाया जाएगा, धरती आभा में ग्राम पंचायत ने कोई प्रस्ताव लेकर नहीं भेजा हैं इसकी जानकारी भी नहीं है और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए टीम भेज पानी के सैंपल लेकर पानी की व्यवस्था करवाते हैं ।<br /><strong>- सुनील शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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                <title>कुंडला गांव में पेयजल संकट, कैसे बुझेगी प्यास</title>
                                    <description><![CDATA[गागरिन परियोजना का पानी आधे से अधिक घरों में नहीं पहुंचा, दूर दराज से लाना पड़ रहा पानी ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/3-%09drinking-water-crisis-in-kundla-village--how-will-thirst-be-quenched/article-150788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)17.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला । चौमहला ग्राम पंचायत मुख्यालय कुंडला के निवासी इन दिनों पेयजल समस्या से जूझ रहे है। ग्रामीण पेयजल दूर कुओं से ला रहे है, जनता जल योजना के कुएं में पानी नहीं होने से गर्मी में यह योजना फेल हो जाती है, घर घर नल, घर घर जल योजना में गागरिन परियोजना का पानी आधे से अधिक घरों में  नहीं पहुंच रहा है जिससे ग्रामीण परेशान हो रहे है। कुंडला गांव में जनता जल योजना में बस स्टेंड पर पानी की बड़ी टंकी बनी हुई है लेकिन जिस कुएं से यह टंकी भरी जाती है गर्मी के दिनों में कुएं में पानी रीत जाता है कुएं में पानी नहीं होने के कारण जनता जल योजना करीब डेढ़ माह से बंद है। गागरिन परियोजना का पानी पूरे गांव में नहीं आने से लोगों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है।</p>
<p> इन दिनों मुख्य रूप से सुरेश कोठारी के निवास से बस स्टेंड तक तथा मेहर मोहल्ला, कुम्हार मोहल्ला, बैरागी मोहल्ला, राजपूत मोहल्ला में पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीण महिपाल सिंह, योकेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, प्रदीप सिंह, प्रेम सिंह ने बताया कि गर्मी की शुरुवात के साथ ही गांव में पेयजल समस्या शुरू हो जाती पेयजल दूर दूर कुओं से लाना पड़ रहा कई ग्रामीण टैंकर मंगवाकर पानी की पूर्ति करते है उन्हें अतिरिक्त आर्थिक संकट झेलना पड़ता है। गागरिन परियोजना का पानी सुरेश कोठारी के निवास से बस स्टेंड तक नहीं पहुंच रहा है, तथा बस स्टेंड क्षेत्र में तो अभी गागरिन योजना की पाइप लाइन भी नहीं डल पाई है। ग्रामीणों इस समस्या को लेकर कई बार विभाग के अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों को अवगत कराया लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं होने से लोगों मेंरोष है। </p>
<p>सुरेश कोठारी के निवास से बस स्टेंड तक गागरिन परियोजना का पानी अभी तक नहीं पहुंचा, आठ साल से समस्या को प्रमुखता से रखा लेकिन समस्या है, हर बार शिवरों में इस समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- ओम प्रकाश बैरागी, कस्बेवासी</strong><br /> <br />पानी की बहुत समस्या है दूर दूर से पानी लाना पड़ रहा है, समस्या का स्थाई समाधान हो, जनता जल योजना की टंकी भी बंद है, गागरिन का तो पानी ही नहीं आता<br /><strong>- विजय सिंह झाला, कस्बेवासी </strong></p>
<p>गांव में पानी की समस्या है इसका समाधान होना चाहिए । ग्रमीण दूरदराज से पानी लाने को मजबूर हैं। गर्मी में पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- रमेश चंद बैरागी, कस्बेवासी </strong></p>
<p>हमारे घरों के नलों में पानी ही नहीं आ रहा है दूर कुएं से पानी लाना पड़ रहा है।<br /><strong>- जुझार सिंह झाला,कस्बेवासी </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कुंडला गांव में गागरिन परियोजना का कार्य अभी अधूरा है, अभी तक 30% ही कार्य हो पाया है, 30 जून तक कार्य पूर्ण होने की संभावना है, कार्य पूर्ण होने के बाद पूरे गांव में गागरिन का पानी पहुंचना शुरूहोगा। <br /><strong>- वीरेंद्र छिपा, सहायक अभियंता, गागरिन परियोजना</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:32:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विद्यालय में पेयजल, बिजली और स्वच्छता में हुआ सुधार </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में ख्रबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/improvements-made-to-drinking-water--electricity--and-sanitation-facilities-at-school/article-148238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)25.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal;color:#000000;background:#F6F6F6;" xml:lang="en-us">भंवरगढ़।<span>  </span>कस्बे के प्रकाशपुरा के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पेयजल बिजली एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओें में उल्लेखनीय सुधार किया गया है।<span>  </span>गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित कर इस मामले को उठाया था। व्यवस्थाओं में सुधार से विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को बड़ी राहत मिली है। विद्यालय में छात्रों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति को सुचारू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। जिससे अब विद्यार्थियों की पढाई एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा नहीं आएगी। स्वच्छता के क्षेत्र में भी विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और छात्रों को स्वस्थ बातावरण मिले सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजमेर में जल संकट पर महिलाओं का प्रदर्शन: जलदाय विभाग पर अनियमित जलापूर्ति का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर के गुलाबबाड़ी क्षेत्र में पेयजल संकट से आक्रोशित महिलाओं ने जलदाय विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप है कि होली जैसे त्योहार पर भी पानी की सप्लाई नहीं हुई। अनियमित जलापूर्ति और कम प्रेशर से परेशान निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या नहीं सुलझी, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/women-protest-over-water-crisis-in-ajmer-alleging-irregular-water/article-145525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ajmer1.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वार्ड 56 के गुलाबबाड़ी संजय नगर व धानका बस्ती में पानी की समस्या को लेकर शुक्रवार को महिलाओं ने जलदाय विभाग दफ्तर पर जमकर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। होली पर्व के अवसर पर सप्लाई नहीं होने से लोग पेयजल को तरस गए। इधर विभाग के दफ्तर में इंजीनियर के नहीं मिलने से लोगों में गुस्सा दिखाई दिया।</p>
<p>क्षेत्रवासी लता देवी ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र में अनियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। निर्धारित एक घंटा भी पानी नहीं दिया जाता है। प्रेशर कम होने से क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है। कई बार विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। होली के दिन क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं होने से लोग परेशान रहे। जबकि होली पर्व के अवसर पर पानी की ज्यादा जरूरत होती है।</p>
<p>महिलाओं ने विभाग पर तंज कस्ते हुए कहा कि अगर विभाग पानी नहीं पिला सकता है तो कह दे, हम इसकी व्यवस्था अपने स्तर पर कर लेंगे। महिलाओं ने बताया कि पानी की सप्लाई का समय भी निश्चित नहीं है। कई बार रात में पानी दिया जाता है, ऐसे में महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। महिलाओं ने जल्द ही समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:57:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : भूतल जल संग्राहक की टूटी छत को अस्थायी रूप से ढ़का, टैंक से 1 लाख से अधिक की आबादी को मिलता है पेयजल </title>
                                    <description><![CDATA[लापरवाही पर लीपापोती का पैबन्द, खबर के बाद आनन फानन में ढ़की, टूटी हुई छत ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-broken-roof-of-the-groundwater-reservoir-has-been-temporarily-covered/article-143492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस परिसर में बने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा शुद्ध पानी के स्टोरेज टेंक को विभाग ने ढकवा दिया है। एमबीएस मुर्दाघर के पास संचालित इस टेंक से नयापुरा से लेकर स्टेशन तक के घरों में पेयजल की सप्लाई की जाती है। दैनिक नवज्योंति के 13 फरवरी को कोटा सिटी अंक के पेज नम्बर 5 पर खतरा बैठा ग्राउंड वाटर टैंक में शीर्षक से टैंक के टूटे हुये ढ़कान से होने वाली संभावित हानियों की ओर सम्बन्धित विभाग व प्रशासन का ध्यान दिलाने की खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था।</p>
<p>जलदाय विभाग के अधकारियों को जैसे ही मामले की जानकारी लगी तो पूरे महकमें में हड़कम्प मच गया। खबर प्रकाशन के बाद छत के टूटे हुये हिस्से को लोहे की नालीदार चद्दरों से ढ़क दिया गया। हालांकि जानकार मानते है कि इससे भी पानी शुद्धता पर प्रभाव पड़ने की संभावनायें है। जानकार बताते है कि किसी भी पानी के स्त्रोत को प्लेन चद्दर से ही पूरी तरह ढ़ाका जाना चाहिये जिससे  इसमें किसी भी बाहरी चीज का प्रवेश ही ना हो सके तभी जल की शुद्धता बनी रह सकती है । इस तरह से टूटे हुये हिस्से को ढकान करने से पानी की पूरी तरह सुरक्षा नहीं हो पायेंगी ।</p>
<p><strong>क्यों था अहम</strong><br />21 लाख लीटर क्षमता वाला यह टेंक शहर के दो बड़े अस्पतालों एमबीएस जेके लोन के अलावा सम्पूर्ण नयापुरा,दोस्तपुरा गांवड़ी, खेड़ली फाटक, भीममण्ड़ी,सहित करीब 1 लाख से अधिक की आबादी के घरों तक पेयजल की उपलब्धता करवाने का साधन है । ऐसे में इसके ढ़कान का जर्जर होकर टुट जाने के इसमें रखा जल खुला हो गया था। उपर से जमींन के पास होने के कारण इसमें किसी भी जानवर या उपर से भी किसी प्रकार के बाहरी पदार्थ के गिरने की पूरी पूरी संभावना थी।</p>
<p><strong>खबर के बाद विभाग में मचा हडकम्प लोग सांसत में</strong><br />शहर के बड़े क्षेत्र को पानी की आपूर्ति करने वाले इस वाटर टेंक की हालात की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली लोगों के हलक सुख गये। अस्पताल परिसर के भीतर जलदाय विभाग के कर्मचारयों द्वारा इती बड़ी लापरवाही की खबर को पढ़ने के बाद लोगों ने इसे आम जन के जीवन से खिलवाड़ करने वाला संगीन मामला बताया।</p>
<p>लापरवाही का बड़ा मामला है, विभाग द्वारा जनता के स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे कार्यों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिये।<br /><strong>-शुभम मेहरा, खेड़ली फाटक</strong></p>
<p>हमारें घरों तक आने वाला पानी शुद्ध् हो सरकारें इसके लियें प्रयासरत है,लेकिन सरकारी कर्मचारियों की अनदेखी का इतना बडा मामला सामने आने के बाद हमारे तो हलक से पानी उतरता भी मुश्किल हो गया।<br /><strong>- रोहित कुमार, दोस्तपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 14:55:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंबल के किनारे बसी आबादी को नहीं मिल रहा पेयजल </title>
                                    <description><![CDATA[अवैध कनेक्शन से मोटर  जलने  और केबल चोरी की घटनाएं आम हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/population-living-along-the-chambal-river-banks-not-receiving-drinking-water/article-138584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px13.png" alt=""></a><br /><p>भैंसरोड़गढ़। राणा प्रताप सागर बांध से पूरे प्रदेश में जलापूर्ति होने के बावजूद रावतभाटा नगरपालिका क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ोलिया में कई वर्षां से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणें का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और अवैध नल कनेक्शन के चलते पीने के पानी की आपूर्ति बूंद-बूंद तक सीमित हो गई है। जबकि निजी कनेक्शन के माध्यम से पानी की बबार्दी जारी है। ग्रामवासियों ने बताया कि नगर पालिका में विलय के बाद से उन्हें पानी के लिए लगातार टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अवैध कनेक्शन से मोटर पर अत्यधिक लोड पड़ता है। जिसके बार-बार मोटर जल जाती है और केबल चोरी की घटनाएं आम बात हो गई है। इसके चलते न केवल पीने का पानी प्रभावित हुआ है,बल्कि ग्रामीणों पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ गया है।     </p>
<p><strong>मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग लगने से बढी परेशानी </strong><br />ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि  मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग और चोरी की घटनाएं हो रही है, बावजूद इसके पुलिस और नगर पालिका द्वारा कोई ठेोस कार्रवाई नहीं की जा रही। तहसीलदार और नगरपालिका प्रशासन द्वारा टेक्स्ट संदेश के माध्यम से शिकायतें तो प्राप्त हुई, लेकिन समाधान अब तक नहीं हो पाया। </p>
<p>कई स्थानों पर कर्मचारी अपने घर पर पानी का उपयोग खेती के लिए कर रहे है, जबकि निजी वाहन धोने के लिए भी पानी का उपयोग किया जा रहा है। <br /><strong>-अंजलि, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे घरों में तो पीने का पानी नहीं आ रहा, वहीं नगर पालिका द्वारा नियुक्त कर्मचारी चार महीने से भुगतान न मिलने के कारण समय पर नहीं खोलते।                                                             <br /><strong>-ममता, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे यहां जिस मोटर से पानी आता है वहां की कभी केबल चोरी हो जाती है तो कभी केबल में आग लगा दी जाती है।  पूर्व में ना तो किसी सचिव ने और वर्तमान में किसी कर्मचारी या नगर पालिका ने केबल चोरी की शिकायत पुलिस थाने में नहीं की।  जिसे चोरों के हौसले बुलंद है। <br /><strong>-मयंक, ग्रामवासी। </strong></p>
<p>समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाएगा। जलापूर्ति की व्यवस्था सुचारू करने के लिए कदम उठाए जा रहे है। <br /><strong>- विवेक गरासिया, तहसीलदार। </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 16:00:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड नं. 34 - कच्ची बस्तियों में नहीं हो रही साफ-सफाई, नाले की टूटी रेलिंग बनी कचरा प्वांइट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवेश द्वार पर स्थित नाला राहगीरों और निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-no--34---slums-are-not-being-cleaned--broken-drain-railings-have-become-garbage-dumps/article-129620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम दक्षिण के वार्ड 34 में पार्षद द्वारा समय-समय पर विकास कार्य जरूर करवाए गए हैं, लेकिन वार्ड के आधे हिस्से में ही सफाई हो रही है। कचरा गाड़ियां आकर कचरा उठाती हैं और सफाई करती हैं, वहीं वार्ड की अनंतपुरा कच्ची बस्तियों की हालत अब भी बदतर बनी हुई है। सुभाष विहार में रहने वाले दीपक और जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में प्रतिदिन सफाई होती है और कचरा गाड़ी भी आती है। लेकिन सुभाष विहार के प्रवेश द्वार पर स्थित नाला राहगीरों और निवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। नाले की रेलिंग एक तरफ टूटी हुई है, और लोग इसमें कचरा डालते हैं जिससे बदबू फैलती है। बारिश के समय इस नाले से जलीय जंतु भी घरों तक पहुंच जाते हैं, जिससे डर और असुरक्षा का माहौल बना रहता है। वार्ड निवासी मोईन ने कहा कि बच्चों के खेलने के लिए पार्क नहीं है। वहीं कच्ची बस्ती के श्यामलाल और दिनेश कुमार ने बताया कि उनके इलाके में न तो कचरा गाड़ी आती है और न ही कोई सफाई होती है। साथ ही पानी की लाइन नहीं होने के कारण पेयजल के लिए उन्हें दूर से पानी लाना पड़ता है।</p>
<p><strong>सुभाष विहार में नालियों की गहराई कम</strong><br />सुभाष विहार में रहने वाली रजिया, सुल्ताना और अशोक कुमार ने बताया कि हमारी तरफ कचरा गाड़ी आती है और सफाई भी होती है, पर नालियों की कम गहराई होने व कुछ क्षेत्र में आधी-अधूरी नालियां बनी हुई हैं। जिससे नालियों का पानी मकानों के आसपास ही जमा रहता है, जो निवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।</p>
<p><strong>पानी के लिए भटकना  पड़ रहा</strong><br />वार्ड की अनंतपुरा कच्ची बस्ती दुर्दशा का शिकार है। बस्ती में रहने वाले राजेंद्र कुमार व सीता बाई सहित अन्य ने बताया कि हमारी तरफ न तो कचरा गाड़ी आती है, न ही साफ-सफाई होती है। साथ ही पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, क्योंकि यहां पानी की लाइन नहीं होने के कारण निजी ट्यूबवेल वालों के यहां से पानी लाना पड़ता है। वहीं कच्ची बस्ती में लोगों द्वारा प्लॉट की नींव भरने के बाद उन्हें खाली छोड़ दिया गया है, जो आसपास रहने वालों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />संपूर्ण तालाब गांव, संपूर्ण सुभाष विहार, सुभाष विहार के पास अनंतपुरा कच्ची बस्ती इत्यादि क्षेत्र।</p>
<p> सुभाष विहार में नालियों की गहराई कम होने व आधे-अधूरे क्षेत्र में नालियां नहीं होने के कारण नालियों का पानी सड़क के ऊपर बहता है, जिससे परेशानी का सामना करना पड़ता है।<br /><strong> -मेहरूनिशा</strong></p>
<p>हमारी तरफ कचरा गाड़ी प्रतिदिन नहीं आने के कारण कचरा इधर-उधर फेंकना पड़ता है। साथ ही रात में आवारा कुत्ते बाइक सवारों को परेशान करते हैं।<strong> -सीयाराम</strong></p>
<p>कच्ची बस्ती में न तो सफाई होती है और न ही कचरा गाड़ी आती है, जिससे लोगों को मजबूरन घरों के सामने खुद ही सफाई करनी पड़ती है।<br /><strong>- मांगीलाल</strong></p>
<p>अनंतपुरा कच्ची बस्ती में पानी की लाइन नहीं होने के कारण पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। निजी ट्यूबवेल वालों के यहां से पानी लाना पड़ता है। <br /><strong>- श्याम कुमार</strong></p>
<p>हमारी तरफ न तो कचरा गाड़ी आती है और न ही सफाई होती है। पानी की लाइन नहीं होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। अभी भी साइकिल से पानी लाना पड़ता है। <br /><strong>- राजेंद्र कुमार</strong></p>
<p>वार्ड पार्षद से बात करने के लिए उन्हें कॉल किया, पर न ही तो कॉल रिसीव किया और न ही रिप्लाई दिया।<br /><strong>- आसमा खान, वार्ड पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 14:06:42 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान के अंतिम गांव के हालात : 78 साल बाद भी बिस्लाई गांव में नहीं पहुंचा नल का पानी, ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[जहां मवेशी स्नान करते हैं वहीं मृत जानवरों को किनारे फेंक देते है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-situation-in-rajasthan-s-last-village--even-after-78-years--bislai-village-has-not-received-tap-water/article-127339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(31).png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र की सहजनपुर ग्राम पंचायत का बिस्लाई गांव आज भी बदहाली की दास्तां कह रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां पेयजल की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को अब भी नदी से पानी ढोकर लाना पड़ता है। महिलाएं हर रोज कई किलोमीटर दूर नदी तक जाती हैं और सिर पर मटकी रखकर परिवार के लिए पानी लाती हैं। वही नदी, जहां मवेशी स्नान करते हैं और मृत जानवरों को किनारे फेंक दिया जाता है। मजबूरी में ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना, ट्यूबवेल और टैंकर की घोषणाएं केवल कागजों में सिमट गईं। सरपंच से लेकर विधायक-सांसद तक गुहार लगाने के बावजूद हालात जस के तस हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि हर चुनाव में नेताओं ने वादे किए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई इस गांव की सुध लेने तक नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।</p>
<p><strong>नेता व प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong><br />बिस्लाई गांव की तस्वीरें साफ दिखा रही हैं कि सरकार और प्रशासन ने यहां की समस्याओं की अनदेखी की है। 78 साल बाद भी अगर ग्रामीणों को नदी से पानी ढोना पड़ रहा है तो यह सरकार की नाकामी है।<br /><strong>-  प्रेम सिंह मीणा, कांग्रेस नेता</strong></p>
<p>इस मामले का जल्द संज्ञान लिया जाएगा। <br /><strong>- अभिमन्यु सिंह कुंतल, उपखंड अधिकारी छीपाबड़ौद।</strong></p>
<p><strong>ग्रामीणों का दर्द उनके ही शब्दों में</strong></p>
<p>आजादी को 78 साल हो गए, लेकिन हमारे गांव में आज तक नल का पानी नहीं आया। जानवर जिस नदी में नहाते हैं, उसी से हमें पीने का पानी भरना पड़ता है। .<br /><strong>- घनश्याम बैरवा, ग्रामीण</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सबको कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना। गंदा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां फैल रही हैं। <br /><strong>- राम भरोस, ग्रामीण</strong></p>
<p>सुबह से दोपहर तक नदी से पानी लाना हमारी मजबूरी है। बारिश में स्थिति और भी विकट हो जाती है। <br /><strong>- नीलू बाई, महिला ग्रामीण </strong></p>
<p>बरसों से सुन रहे हैं कि नल-जल योजना आएगी, पाइप लाइन डलेगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- सूखना बाई, महिला ग्रामीण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:48:34 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्र पर आना है तो बच्चों को बोतल घर से लाना होगा </title>
                                    <description><![CDATA[आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-children-have-to-come-to-the-centre--they-will-have-to-bring-bottles-from-home/article-121297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित शहर के विभिन्न वार्डों में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के पास ना तो अपने भवन और ना ही उनके पास सरकार ने किसी प्रकार की सुविधा केंद्र पर विकसित कर रखी हैं। केंद्र पर आने वाले बच्चे घर से ही पीने के पानी की बोतल लेकर आते हैं। वहीं अधिकतर केंद्र जर्जर हैं। जिससे बच्चों के साथ कभी भी हादसा हो सकता हैं। घोड़े वाले बाबा चौराहे बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में कार्यरत कार्यकर्ता माया नायक ने बताया कि केंद्र में वर्तमान में कुल 55 बच्चे नांमाकित है। जिनसे तीन से छह वर्ष तक के 20 बच्चे व जीरों से लेकर तीन वर्ष तक के 35 बच्चे हैं। आंगनबाड़ी  केंद्र एक किराये एक कमरे में चली रहे हैं। बच्चें पीने के लिए पानी की बोतल भी घर से साथ लेकर आते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। साथ ही जब कभी भी केंद्र की लाइट जाती है अंधेरा हो जाता है। बच्चों को अंधेरे में ही बैठा का पढ़ाई करनी पढ़ती है।</p>
<p><strong>आंगनबाड़ी केंद्र किराए के एक कमरें में संचालित</strong><br />शहर की अधिकतर आंगनबाड़ी किराये के घरों में मात्र एक या दो कमरों में संचालित होती हंै। जिसमें बच्चों को दिया जाने वाला खाना बनता हैं। और इसी कमरे में बच्चों को बैठकर पोषाहर खाना पड़ता  व  पोषाहर वितरण भी उसी में करना पड़ता हंै। <br /> <br /><strong>केंद्र के भवन जर्जर स्थिति में</strong><br />केंद्रों के भवन अधिकतर जर्जर व पुराने है जिससे बारिश के समय पर पानी टपकता हैं। और कमरों में सीलन आ रही हैं। साथ ही बारिश में कई बार केंद्र का रिकार्ड व पोषाहार भी बारिश में भीग जाता हैं। केंद्र की छातों से प्लास्टिक गिरता रहता हैं। बच्चों को बैठने में भी परेशानी आती है। साथ ही केंद्रों के भवनों में दरारें व सीलन आ रही है। </p>
<p><strong>बच्चों के खिलौने के नाम पर कुछ नहीं</strong><br />चाहे राज्य सरकार आंगनबाड़ी केंद्र पर खेल सुविधा के नाम पर कितनी वाहीं - वाही लूटे पर आंगनबाड़ी केंद्रों खेलने के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं हैं। वहीं खिलौने के नाम पर ना तो किचन सेट, रिंग, लेसिंग फे्रम, रंगीन मोम, पेंसिल, बड़ी गेंद, रस्सी, सब्जी फल, जानवरों के चित्र, राउंड टेबल, फिसलन पट्टी, सहित विभिन्न खिलौने होने चाहिए पर अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र मेें कुछ भी नहीं है। बच्चों को बैठने के लिए टेबल -कुर्सी की भी व्यवस्था नहीं है।</p>
<p><strong>बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड की व्यवस्था नहीं</strong><br />केंद्र की दिवारों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को पढ़ने के लिए पहाड़ व गिनती लिख रखी है।  साथ ही केंद्र पर केंद्र पर बच्चों को पढ़ने के लिए विभिन्न चार्ट होने चाहिए जो कि नहीं हैं। दुर्गा बस्ती आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र में कुल 28 बच्चें है जिसमें अभी एक से तीन वर्ष के 17 व तीन से छह वर्ष के 11 बजे नामांकित है किराये के एक कमरें चलता है। पिछले दिनों बारिश से उसमें रखी किताबें व स्टेशनरी भीग गई है। कार्यकर्ता सायरा मंसूरी ने बताया कि हम एक ही रूम में पोषाहर, बच्चों की पढ़ाई, खेल खेलना, टीकाकरण सहित सभी कार्य एक ही कमरें में करना पड़ता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि केंद्र पर जो सरकारी स्कूल में जो आंगनबाड़ी संचालित की जाती है उनको जो फर्नीचर, खेल के सामान, सुव्यवस्थित रूम सहित अन्य जो सुविधा दी जाती है वहां अन्य केंद्र को भी दी जानी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br /> जो आंगनबाड़ी केंद्र किरायें  के भवन में चले रहे उनके लिए सरकारी भवन देख रहे हैं।  जो केंद्र जर्जर  हैं उनको अन्य जगह पर शिफ्ट कर दिया जायेंगा। <br /><strong>- सीता शर्मा, उपनिदेशक बाल विकास विभाग कोटा </strong></p>
<p>वर्तमान में एक हजार रूपए जो किराया दिया जाता है उसको बढ़ाकर करीब तीन या चार हजार रूपए किए। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र पर सुविधाओं का विस्तार किया जाएं।<br /><strong>- शाहिदा खान, राज. आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी महासंघ</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 18:13:04 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 24 घंटे में पेयजल समस्या से मिली निजात, मिलेगा स्वच्छ पानी </title>
                                    <description><![CDATA[खानपुर कस्बे में दूषित जलापूर्ति की समस्या काफी दिनों से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/effect-of-news---got-rid-of-drinking-water-problem-in-24-hours--will-get-clean-water/article-120409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर कस्बे में दूषित जलापूर्ति की समस्या काफी दिनों से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी और लगातार गंदा पानी नलों में आ रहा था, जिसके बाद दैनिक नवज्योति टीम ने इस मुद्दे को उठाया तो तुरंत प्रशासन 24 घंटे में हरकत आ गया। प्रशासन के आला अधिकारियों ने दूषित जलापूर्ति की समस्या के बारे में जलदाय विभाग से जानकारी प्राप्त कर तुरंत प्रभाव से दूषित जलापूर्ति की समस्या से निजात दिलाकर कर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई। जिससे ग्रामीणों को दूषित जलापूर्ति की समस्या से राहत मिली। कस्बेवासी अभिषेक वर्मा, त्रिलोक राठौर, केशव लक्षकार, राहुल राठौर, सोनू पारीक, मुकेश सेन आदि ने बताया कि खानपुर कस्बे में दूषित जलापूर्ति की समस्या कई समय से बनी हुई थी जिसके चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, वहीं कई दिनों से नलों में पानी नहीं आने की समस्या भी बनी हुई थी।</p>
<p>दूषित जलापूर्ति को लेकर ग्रामीणों में गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा था, जिसके बाद नवज्योति टीम ने पेयजल समस्या का मुद्दा उठाया, तो 24 घंटे में ही प्रशासन हरकत में आया और पानी की समस्या का निराकरण हो गया। जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। मुस्ताक पठान एईएन जलदाय विभाग खानपुर ने बताया कि दूषित जलापूर्ति की समस्या का निराकरण कर दिया गया है। अब ग्रामीणों को स्वच्छ जल पीने को मिलेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Jul 2025 15:17:09 +0530</pubDate>
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