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                <title>drinking water - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चार दिन से जलापूर्ति ठप, गहराया पेयजल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-supply-halted-for-four-days/article-155647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/char-din-se-jalapurti-thap.-gahraya-peyjal-sankat.-ramganjmandi.-dist.-kota.--01may2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। क्षेत्र के सातलखेड़ी कस्बे में पिछले चार दिनों से पेयजल आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहराने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने शीघ्र समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।सातलखेड़ी कस्बे में पिछले चार दिनों से नलों में पानी नहीं आने से जनजीवन प्रभावित हो गया है। घरों की टंकियां और मटके खाली हो चुके हैं तथा लोगों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य सड़क के आसपास रहने वाले कुछ लोग निजी टैंकरों से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन कस्बे के अंदरूनी मोहल्लों में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है। कई परिवारों को दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>समस्या का नहीं हो रहा स्थायी समाधान</strong><br />पानी की कमी के कारण घरेलू कार्य, साफ-सफाई और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई घरों में पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>चार दिनों से जलापूर्ति बंद होने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।<br /><strong>- ललित सिसोदिया, ग्रामीण</strong></p>
<p> तेज हवाओं के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे पानी की टंकी नहीं भर सकी और जलापूर्ति बाधित रही। समस्या के समाधान के लिए सभी वार्डों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है तथा जलापूर्ति को जल्द सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, कनिष्ठ अभियंता, पीएचईडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:38:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पानी और छांव के लिए यार्डों के चक्कर काट रहा धरती पुत्र</title>
                                    <description><![CDATA[सुलभ कॉम्प्लेक्स गंदगी से अटे, टोटियां और पाइप गायब, किसान कलेवा योजना में ठंडे पानी की दरकार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the--son-of-the-soil--roams-the-yards-in-search-of-water-and-shade/article-155471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)72.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एशिया की सबसे बड़ी भामाशाह कृषि उपज मंडी में इन दिनों हाड़ौती सहित विभिन्न क्षेत्रों से किसान जिंस बेचने के लिए आ रहे हैं। लेकिन भीषण गर्मी के चलते किसानों को न तो पर्याप्त मात्रा में छांव मिल पा रही है और न ही पीने के पानी के लिए उन्हें एक यार्ड से दूसरे यार्ड के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण किसान मजबूरन पास की कैंटीन से पानी की बोतलें खरीदकर पी रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।</p>
<p>बूढ़ादीत से मंडी में जिंस बेचने आए किसान श्यामलाल ने बताया, मैं शुक्रवार तड़के ही मंडी आ गया था, लेकिन इतनी भीषण गर्मी में भी दोपहर तीन बजे जाकर मेरा नंबर आया। इस दौरान मैंने प्याऊ से कभी पानी ठंडा आ रहा तो कभी गर्म इस कारण एक-दो बार बोतल खरीदनी पड़ी। दिनभर धूप से बचने के लिए इधर-उधर भटकता रहा और दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नीचे सोकर तथा पेड़ों की छांव में बैठकर अपनी जिंस की रखवाली की।</p>
<p>रामगंजमंडी से आए राजू लाल ने बताया कि प्याऊ में कभी गर्म तो कभी ठंडा पानी आता है। मंडी में छांव वाले स्थान (टीन शेड) बेहद कम हैं। किसान मुकेश ने बताया कि कलेवा योजना में किसानों के लिए ठंडे पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं हैं, एक ड्रम पर कपड़ा बांधकर रखकर हैं। जिससे में भी नाममात्र का गर्म पानी आ रहा हैं। करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाली इस मंडी का आलम यह है कि प्यास बुझाने के लिए किसानों को एक यार्ड से दूसरे यार्ड के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>पर्याप्त मात्रा में प्याऊ और टीनशेड हो </strong><br /> देखा जाएं तो मंडी में प्याऊ की संख्या कम होने की वजह से किसानों को एक यार्ड से दूसरे यार्ड में पानी लेने जाना पड़ा रहा हैं। जिसकी वजह से उनको कई बार फसल की सुरक्षा की चिंता रहती हैं। किसान रंगलाल, विजय कुमार, विशाल कुमार ने बताया कि मंडी प्रशासन को चलती -फिरती प्याऊ की व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे किसानों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पडेÞ। वहीं किसान विजय कुमार ने बताया कि प्याऊ से नाममात्र का ठंडा पानी आ रहा जिसके चलते मैंने करीब दो से तीन बोतल पानी खरीदकर पिया हैं। जिससे किसानों के जेब पर दोहरी आर्थिक मार पड़ा रही। वहीं जिंसों की नीलामी भी खुले में हो रही जिसके चलते हमे इधर-उधर बैठकर ही धूप में इनकी निगरानी करनी पड़ती हैं। वहीं किसान भवन में किसानों के सोने के लिए बेड लगा रखे, हवा के लिए पंखे लगा रखे हैं, पर भवन में दिन में सन्नाटा पसरा हुआ था।</p>
<p><strong>सुलभ कॉम्प्लेक्स में गंदगी का अंबार </strong><br />भामाशाह मंडी स्थित कॉम्प्लेक्स व टॉयलेट में गंदगी का अंबार लगा हुआ। कॉम्पलेक्स क्रमांक एक में तो शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं, इनके नल से टोटियां गायब हो चुकी है, कुछ गेट क्षतिग्रस्त है, गेट से कुंडी भी गायब हो चुकी हैं। इनके यूरीनल से भी पाइप गायब है साथ ही क्षतिग्रस्त भी हो रहे हैं। इसी से थोड़ी दूरी पर स्थित टॉयलेट भी बदतर स्थिति में हैं। वहीं इसी के पास स्थिति टॉयलेट में पानी डालने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और ना ही गेट लगाएं हुए हैं, कुछ यूरीनल तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।</p>
<p><strong>किसान कलेवा भवन में वाटर कूलर की दरकार </strong><br /> किसान कलेवा योजना भवन में यदि देख जाएं तो करीब देखा जाएं तो पचास से सौ किसान प्रतिदिन दो बजे तक खाना खाते हैं। किसानों ने बताया कि यहां पर पानी पीने के लिए एक ड्रम रखा हुआ। जिसमें कपड़ा बांध रखा है। ड्रम भी गंदगी के बीच में रखा हुआ। जिसमें भी पानी नाममात्र का ठंडा है जिसके चलते किसानों को पानी खरीदकर पीना पड़ा रहा हैं।किसान संदीप कुमार ने बताया कि किसान कलेवा का समय अभी 10 से 5 बजे तक उसको बढ़ाया जाना चाहिये।</p>
<p><strong>ये बोले किसान</strong></p>
<p><strong>धर्मकांटे पर ही हो तुलाई <br /> मैं रात को ही घर से रवाना होकर तड़के मंडी पहुंच गया था। दोपहर बाद जिंस बिकी और उसे तुलाने के बाद अब पैसे लेकर घर जाऊंगा। यदि मंडी में ट्रैक्टर-ट्रॉली खाली कराने के बजाय सीधे धर्मकांटे पर ही जिंस की तुलाई हो जाए, तो किसानों का काफी समय बच सकता है।<br />- महावीर, किसान</strong></p>
<p><strong>प्रतिदिन हो कॉम्प्लेक्स की सफाई</strong><br /> मैं पहली बार मंडी में अपनी जिंस बेचने आया हूँ। रात को ही ट्रैक्टर लेकर रवाना हुआ था और यहाँ आने के बाद माल खाली करवाया। नीलामी में दोपहर बाद मेरा नंबर आया।पानी लेने के लिए एक यार्ड से दूसरे यार्ड में जाना पड़ता है, जिसके चलते परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। मंडी में पानी के प्याऊ की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और सुलभ कॉम्प्लेक्स की प्रतिदिन सफाई होनी चाहिए।<br /><strong>- रामचरण मीणा,</strong> किसान</p>
<p><strong>भाड़े के नुकसान से बचेंगे किसान </strong><br /> मंडी में जिंस तुलाई के लिए धर्मकांटा होना बेहद जरूरी है। इससे किसानों को माल खाली नहीं करना पड़ेगा और जल्दी नंबर आने से ट्रैक्टर-ट्रॉली के अतिरिक्त भाड़े की मार से किसान बच सकेंगे। इससे किसानों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।<br /><strong>- पप्पू लाल,</strong> किसान</p>
<p><strong>तड़के से शाम हो गई </strong><br /> मैं मंडी में लहसुन बेचने आया हूँ। रात को ही किराए की ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर रवाना हुआ था। जिंस की नीलामी होने और पैसे मिलने तक शाम हो गई। इस दौरान प्याऊ से कभी गर्म तो कभी ठंडा पानी आया, जिसके कारण मुझे 3-4 बार पानी की बोतल खरीदनी पड़ी। किसान कलेवा योजना में भोजन करने के बाद भी ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए वहाँ भी बोतल खरीदकर ही प्यास बुझानी पड़ी।<br /><strong>- त्रिलोक कुमार,</strong> किसान</p>
<p> मंडी के पुराने कॉम्प्लेक्स की शीघ्र ही मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही तीन नये कॉम्प्लेक्टस बनाने के लिए बजट बनाने व मरम्मत के लिए बजट का आवंटन हो चुका हैं। और जो भी समस्या है उनका निराकरण किया जाएगा।<br /><strong>-मनोज कुमार मीणा, </strong>सचिव भामाशाह मंडी </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 15:11:05 +0530</pubDate>
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                <title>भीषण गर्मी में पेयजल को तरसे ग्रामीण, गहराया संकट</title>
                                    <description><![CDATA[कई मोहल्लों में जलापूर्ति बाधित, महिलाओं-बच्चों को दूर से लाना पड़ रहा पानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/villagers-thirsty-for-drinking-water-amidst-scorching-heat--crisis-deepens/article-154954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(8)12.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। सातलखेड़ी क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने से ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि पशुओं के लिए भी पानी की किल्लत र्मिक होने लगी है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।  क्षेत्र में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान के बीच गांव में पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। कई मोहल्लों में दिनों तक पानी की सप्लाई नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /> <br />ग्रामीणों का कहना है कि नलों में पानी नहीं आने के कारण उन्हें दूर-दूर से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से ही पानी तलाश में निकल जाते हैं, जिससे उनके दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे की हैं। <br />कई स्थानों पर हैंडपंप भी सूख चुके हैं या पर्याप्त पानी नहीं दे रहे, जिससे समस्या और विकट हो गई है।</p>
<p><strong>जल संकट को लेकर पूर्व में कर चुके हैं प्रदर्शन</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि इससे पूर्व भी जल संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन कर सड़क जाम किया गया था, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>पशुपालकों को भी हो रही परेशानी</strong><br />भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है, जिससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /> <br />कस्बे के मलवे क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। मुख्य सड़क के किनारे रहने वाले लोग टैंकरों से आसानी से पानी भर लेते हैं, लेकिन उनके क्षेत्र तक बाइक तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में उन्हें दूर से पानी भरकर लाना पड़ता है, जिससे काफी कठिनाई होती है। <br /><strong>- सफी खान, ग्रामीण, सातलखेड़ी</strong><br /> <br />सातलखेड़ी में पेयजल समस्या उत्पन्न हो रही है तो ग्राम पंचायत की ओर सेइस संबंध में संबंधित विभाग को अवगत कराया जाएगा। ताकि समस्या का शीघ्र समाधान हो सके।<br /><strong>- पुष्पेंद्र शर्मा, वीडीओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:38:10 +0530</pubDate>
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                <title>एक हैंडपंप के सहारे पूरा गांव, पेयजल संकट से जूझ रहे झोटोली के ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[एक किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा पीने का, फ्लोराइडयुक्त जल से बढ़ी परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/entire-village-relies-on-a-single-handpump--villagers-in-jhotoli-grapple-with-drinking-water-crisis/article-154949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)23.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। क्षेत्र के झोटोली गांव में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। गांव के लोगों को पीने लिए करीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पूरे गांव की ननिर्भरता एकमात्र हैंडपंप पर होने के कारण ग्रामीणों को घंटों लाइन में खड़े रहकर पानी भरने  का इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल एसमस्या को लेकर पिछले विधानसभा चुनाव में गांव के लोगों ने मतदान - बहिष्कार का निर्णय लिया था। उस समय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की की ओर से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद कुछ लोगों ने मतदान किया। लेकिन कर करीब पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद या गांव में पेयजल संकट का स्थायी कर समाधान नहीं हो सका।</p>
<p><strong>दस वर्षों से बनी हुई है समस्या </strong><br />ग्रामीण मायाराम गोचर ने बताया कि गांव के अधिकांश हैंडपंपों का पानी फ्लोराइडयुक्त है, जो न तो पीने योग्य है और न ही भोजन बनाने के लिए मान उपयोगी। इसके चलते ग्रामीणों को बाबा शाह वली की दरगाह के समीप स्थित हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह समस्या पिछले करीब दस वर्षों से बनी हुई है।</p>
<p><strong>समय रहते समाधान जरूरी</strong><br />ग्रामीण रामप्रताप गोस्वामी ने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। एक ही हैंडपंप होने से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा दरगाह पर आनें वाले यात्रियों को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर</strong><br />ग्रामीण महिला रेनू गोचर ने बताया कि घर-परिवार के दैनिक कार्यों में पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में महिलाओं को रोजाना गांव से बाहर जाकर पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका काफी समय और श्रम खर्च होता है। उन्होंने कहा कि दिनभर की चिंता यही रहती है कि पीने के पानी की व्यवस्था कैसे होगी।</p>
<p><strong>कुआं भी नहीं रहा उपयोगी</strong><br />ग्रामीण परमानंद गोचर ने बताया कि पहले गांव के कुएं और हैंडपंपों का पानी पीने योग्य था, लेकिन समय के साथ पानी की गुणवत्ता खराब होती गई। फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से पानी पीने लायक नहीं रहा। गांव का पुराना कुआं भी गंदगी के कारण पेयजल के उपयोग में नहीं लिया जा सकता।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र समाधान के प्रयास किए जाएंगे।<br /><strong>- दीपक महावर, उपखंड अधिकारी, दीगोद </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:36:55 +0530</pubDate>
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                <title>भीषण गर्मी के बावजूद नहीं लगाई अस्थायी प्याऊ, 18 स्थानों को किया था चिन्हित </title>
                                    <description><![CDATA[निगम आयुक्त के आदेश की 22 दिन बाद भी नहीं हुई पालना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-temporary-drinking-water-kiosks-set-up-despite-scorching-heat/article-154547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-2222.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक तरफ तो भीषण गर्मी पड़ रही है और पारा 45 डिग्री के करीब पहुंच गया है। वहीं निगम आयुक्त द्वारा शहर में अस्थायी प्याऊ शुरु करने के 22 दिन पहले दिए आदेश की अभी तक भी पालना नहीं हुई है। नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने 28 अप्रैल को आदेश जारी किया था। जिसमें कहा था कि कोटा शहर में भीषण गर्मी व लू की स्थिति को देखते हुए राहगीरों व आमजन को राहत प्रदान करने के लिए नगर निगम क्षेत्राधिकार में अस्थायी प्याऊ(पेयजल केन्द्र) स्थापित किए जाने आवश्यक हैं। इसे देखते हुए शहर में 18 स्थानों को चिन्हित कर वहां अस्थायी प्याऊ शुरु करने के आदेश दिए थे। साथ ही जोन वाइज व्यवस्था करने के बाद इनके प्रभारी भी नियुक्त किए गए थे। लेकिन हालत यह है कि आयुक्त के आदेश व भीषण गर्मी के बावजूद भी बुधवार तक अधिकतर स्थानों पर प्याऊ शुरु नहीं हो सकी है।</p>
<p><strong>इन स्थानों पर होनी थी प्याऊ शुरु</strong><br />आयुक्त के आदेशानुसार शहर में 18 स्थानों पर प्याऊ शुरु की जानी थी। जिनमें जे.के. लोन हॉस्पिटल, एमबीएस हॉस्पिटल, अदालत परिसर, रेलवे स्टेशन भीमगंजमंडी थाना, प्राइवेट बस स्टैंड किशोर सागर तालाब, अग्रसेन चौराहा, सकतपुरा जहाज के पास, झालीपुरा फोरलेन के पास, घोड़े वाले बाबा चौराहा रावतभाटा बस स्टैंड, सीएडी चौराहा रावतभाटा बस स्टॉप के पास, चम्बल गार्डन के सामने, नयागांव हाइवेब्रिज के पास, कोटड़ी ब्रिज के नीचे अस्थायी आश्रय स्थल के स्थान पर, एरोड्राम चौराहा, सुधा हॉस्पिटल के पास, अनंतपुरा फ्लाई ओवर के नीचे, डीसीएम रोड पर पॉलिटेक् नीक कॉलेज के सामने व 80 फीट रोड बस स्टैंड के अंदर की तरफ ये प्याऊ शुरु की जानी है।</p>
<p>इधर पूर्व पार्षद सुरेन्द्र राठौर ने बताया कि उन्होंने 29 अप्रैल को निगम आयुक्त को ज्ञापन देकर शहर में अस्थायी प्यारू शुरु करने की मांग की थी। उस समय आयुक्त ने कहा था कि उन्होंने क दिन पहले ही प्याऊ लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। राठौर ने बताया कि आयुक्त के आदेश के बाद भी अभी तक अधिकतर जगहों पर प्याऊ शुरु नहीं हो सकी है जबकि शहर में गर्मी भीषण पड़ रही है। जबकि कई समाजसेवी संस्थाओं व संगठनों की ओर से अपने स्तर पर पानी के कैम्पर रखवाए गए हैं। घोड़े वाले बाबा चौराहे पर पुलिस की गुमटी के पास पानी के कई कैम्पर रखे हुए हैं। लेकिन वहां आम आदमी पानी नहीं पी पा रहा है। इधर निगम अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर जगहों पर प्याऊ के लिए पानी के कैम्पर रखे जाएंगे। उनके लिए टेबल व टेंट लगाए गए हैं। जल्दी ही प्याऊ शुरु कर दी जाएंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:54:06 +0530</pubDate>
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                <title>नाम का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, सूखे खिलाड़ियों के कंठ</title>
                                    <description><![CDATA[खिलाड़ी व कोच करीब एक दर्जन खेलों का अभ्यास करने के लिए आते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/an--international-stadium--in-name-only--players--throats-run-dry/article-153128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में पिछले कई दिन से जिस तरह की भीषण गर्मी पड़ रही है उस समय में प्रशासन द्वारा एक तरफ तो आमजन के लिए पीने के पानी और छाया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम में जहां अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी आ रहे हैं। वहां उनके पीने के लिए पानी की सुविधा तक नहीं है। यह हालत है नयापुरा स्थित अंतरराष्ट्रीय इनडोर स्टेडियम की। जे.के. पवेलियन स्थित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में बने इस स्टेडियम में सुबह-शाम बड़ी संख्या में खिलाड़ी व कोच करीब एक दर्जन तरह के खेलों का अभ्यास करने के लिए आ रहे हैं। सामान्य दिनों में ही थोड़ी देर में खेलते समय पसीना आने पर बार-बार पानी की प्यास लगने लगती है। ऐसे में वर्तमान में 45 डिग्री से अधिक तापमान बना हुआ है। उसमें तो बार-बार गला सूख रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बने इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भीषण गर्मी में भी खिलाडिय़ों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><strong>घर से ला रहे वह भी पर्याप्त नहीं</strong><br />खिलाडिय़ों ने बताया कि सर्दी और बरसात के समय तो पानी की इतनी जरूरत नहीं पड़ती जितनी इस भीषण गर्मी में पड़ रही है। स्टेडियम में न तो नल है और न ही वाटर कूलर। ऐसे में घर से बोतल में जितना पानी ला रहे हैं वह पर्याप्त नहीं हो रहा। कुछ ही देर में बोतल खाली हो रही है।</p>
<p><strong>तरणताल व क्लब में जाना पड़ रहा</strong><br />खिलाड़ी जय वर्धन व पुप्पेन्द्र ने बताया कि पानी की प्यास लगने पर पानी ही नहीं मिल रहा। ऐसे में या तो तरणताल या उम्मेद क्लब में वाटर कृूलर की तरफ जाना पड़ रहा है। लेकिन कई बार क्लब में भी बार-बार जाने से रोक दिया जाता है। जिससे खिलाडिय़ों के लिए पीने के पानी की समस्या बनी हुई है।</p>
<p><strong>पानी की सुविधा तो होनी ही चाहिए</strong><br />स्टेडियम में आने वाले खिलाड़ी श्याम नाहर ने बताया कि स्टेडियम जैसी जगह जहां रोजाना बड़ी संख्या में खिलाड़ी आ रहे हैं वहां पानी की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए। लेकिन स्टेडियम में टंकी का गर्म उबलता हुआ पानी आ रहा है। जिसे पीना तो दूर हाथ लगाना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में खिलाड़ी व कोच परेशान हो रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्टेडियम में जितनी संख्या में सुबह-शाम खिलाड़ी आ रहे हैं। उनके लिए फिलहाल पीने के पानी की सुविधा नहीं है। जे.के. पवेलियन में वाटर कूलर है लेकिन वह काम नहीं कर रहा है। जिससे ठंडा पानी नहीं मिल रहा। नल दूर है जिसमें भी गर्म पानी आ रहा है। इस संबंध में पूर्व में जिला प्रशासन व केडीए अषिकारियों से बात की थी। उन्होंने पानी की व्यवस्था करवाने का आश्वासन तो दिया था लेकिन अभी तक सुविधा नहीं हुई है। जिससे इस भीषण गर्मी में खिलाडिय़ों को परेशान होना पड़ रहा है।<br /><strong>- वाई.बी. सिंह, खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:29:51 +0530</pubDate>
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                <title>धरती आभा योजना के बावजूद 100 घरों में पानी का संकट, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[दावे फेल, योजनाएं कागजों तक सीमित, निजी नलकूप पर लंबी कतारें 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-crisis-grips-100-households-despite--dharti-abha--scheme/article-151088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। रायथल तहसील के नंदपुरा गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावे धरातल पर फेल होते नजर आ रहे हैं। ह्यधरती आभाह्ण योजना में शामिल होने के बावजूद करीब 100 घरों की आबादी आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रही है। स्थिति यह है कि पूरे गांव की निर्भरता एक निजी नलकूप पर है,जहां सुबह-शाम लंबी कतारें लग रही हैं।</p>
<p><strong>एक कुआं, 25 मोटरें और गिरता जलस्तर</strong><br />गांव में पेयजल का मुख्य स्रोत एक पुराना कुआं है, जिसमें 25 से अधिक मोटरें लगी हुई हैं। अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर लगातार गिर रहा है और कुआं भी जवाब देने की स्थिति में पहुंच गया है। ऐसे में एकमात्र निजी नलकूप ही पीने योग्य पानी का सहारा बना हुआ है। <br />यहां पानी भरने के लिए महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>10 वर्षों से बंद पड़ा आरओ प्लांट</strong><br />पीएचईडी विभाग की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण गांव में स्थापित आरओ प्लांट है, जो पिछले 10 वर्षों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार शिकायत के बावजूद इसे चालू नहीं किया गया। पूर्व में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>अधिकारियों की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष</strong><br />ग्रामीण बनवारी लाल, दीनदयाल, मुकेश कुमार, सत्यनारायण, शिवराज और कैलाश ने बताया कि योजनाएं केवल कागजों में सीमित हैं। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।</p>
<p><strong>फ्लोराइड युक्त पानी से युवाओं के रिश्तों पर असर </strong><br />फ्लोराइड युक्त पानी पीने से ग्रामीणों के दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं इसका असर हड्डियों और जोड़ों पर पड़ रहा हैं जिससे युवाओं के रिश्ते करने में भी प्रभाव पड़ रहा हैं पीले दांतों को देखकर रिश्ते करने से कतराते हैं।<br /><strong>- बनवारी लाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>दफ्तर के लगाए चक्ककर, मिला केवल आवश्वासन, अब प्रदर्शन </strong><br />कई बार विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस प्लांट को चालू कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे #<br /><strong>- दिनदयाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong><br /> हऌड के अनुसार पीने के पानी मे फ्लोराइड की मात्रा 1.0-1.5 टॅ प्रतिलिटर होनी चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा वाला पानी पिने से बच्चों के दांतो मे सफ़ेद और भूरे रंग के धब्बे बन जाते है। दाँत कमजोर और ख़राब हो जाते है जिसे डेंटल फ्लूरोसीस कहते है। अगर फ्लोराइड युक्त पानी पिने से इसका असर हड्डियों और जोड़ो मे आ जाये तो उसे स्केलटल फ्लोरोसीस कहते है। इससे बचने के लिए आरओ का पानी पिए या डिफेंलोरीडेशन फ़िल्टर का उपयोग करें और कुएं और हैंडपम्प या बोर वेल के पानी की टेस्टिंग समय समय पर करवाएं। समय समय पर दंत रोग विशेषज्ञ से अपने दांतो का चेकअप करवाए।<br /><strong>- डॉ निर्मला मीणा, दंत रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बूंदी</strong><br /> <br />पूर्व एजेंसी का टेंडर 31 जनवरी 2026 में समाप्त हो गया था। आरओ पुनः चालू कराने हेतु स्वीकृति जयपुर भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही प्लांट चालू करवाया जाएगा, धरती आभा में ग्राम पंचायत ने कोई प्रस्ताव लेकर नहीं भेजा हैं इसकी जानकारी भी नहीं है और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए टीम भेज पानी के सैंपल लेकर पानी की व्यवस्था करवाते हैं ।<br /><strong>- सुनील शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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                <title>कुंडला गांव में पेयजल संकट, कैसे बुझेगी प्यास</title>
                                    <description><![CDATA[गागरिन परियोजना का पानी आधे से अधिक घरों में नहीं पहुंचा, दूर दराज से लाना पड़ रहा पानी ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/3-%09drinking-water-crisis-in-kundla-village--how-will-thirst-be-quenched/article-150788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)17.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला । चौमहला ग्राम पंचायत मुख्यालय कुंडला के निवासी इन दिनों पेयजल समस्या से जूझ रहे है। ग्रामीण पेयजल दूर कुओं से ला रहे है, जनता जल योजना के कुएं में पानी नहीं होने से गर्मी में यह योजना फेल हो जाती है, घर घर नल, घर घर जल योजना में गागरिन परियोजना का पानी आधे से अधिक घरों में  नहीं पहुंच रहा है जिससे ग्रामीण परेशान हो रहे है। कुंडला गांव में जनता जल योजना में बस स्टेंड पर पानी की बड़ी टंकी बनी हुई है लेकिन जिस कुएं से यह टंकी भरी जाती है गर्मी के दिनों में कुएं में पानी रीत जाता है कुएं में पानी नहीं होने के कारण जनता जल योजना करीब डेढ़ माह से बंद है। गागरिन परियोजना का पानी पूरे गांव में नहीं आने से लोगों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है।</p>
<p> इन दिनों मुख्य रूप से सुरेश कोठारी के निवास से बस स्टेंड तक तथा मेहर मोहल्ला, कुम्हार मोहल्ला, बैरागी मोहल्ला, राजपूत मोहल्ला में पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीण महिपाल सिंह, योकेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, प्रदीप सिंह, प्रेम सिंह ने बताया कि गर्मी की शुरुवात के साथ ही गांव में पेयजल समस्या शुरू हो जाती पेयजल दूर दूर कुओं से लाना पड़ रहा कई ग्रामीण टैंकर मंगवाकर पानी की पूर्ति करते है उन्हें अतिरिक्त आर्थिक संकट झेलना पड़ता है। गागरिन परियोजना का पानी सुरेश कोठारी के निवास से बस स्टेंड तक नहीं पहुंच रहा है, तथा बस स्टेंड क्षेत्र में तो अभी गागरिन योजना की पाइप लाइन भी नहीं डल पाई है। ग्रामीणों इस समस्या को लेकर कई बार विभाग के अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों को अवगत कराया लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं होने से लोगों मेंरोष है। </p>
<p>सुरेश कोठारी के निवास से बस स्टेंड तक गागरिन परियोजना का पानी अभी तक नहीं पहुंचा, आठ साल से समस्या को प्रमुखता से रखा लेकिन समस्या है, हर बार शिवरों में इस समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- ओम प्रकाश बैरागी, कस्बेवासी</strong><br /> <br />पानी की बहुत समस्या है दूर दूर से पानी लाना पड़ रहा है, समस्या का स्थाई समाधान हो, जनता जल योजना की टंकी भी बंद है, गागरिन का तो पानी ही नहीं आता<br /><strong>- विजय सिंह झाला, कस्बेवासी </strong></p>
<p>गांव में पानी की समस्या है इसका समाधान होना चाहिए । ग्रमीण दूरदराज से पानी लाने को मजबूर हैं। गर्मी में पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- रमेश चंद बैरागी, कस्बेवासी </strong></p>
<p>हमारे घरों के नलों में पानी ही नहीं आ रहा है दूर कुएं से पानी लाना पड़ रहा है।<br /><strong>- जुझार सिंह झाला,कस्बेवासी </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कुंडला गांव में गागरिन परियोजना का कार्य अभी अधूरा है, अभी तक 30% ही कार्य हो पाया है, 30 जून तक कार्य पूर्ण होने की संभावना है, कार्य पूर्ण होने के बाद पूरे गांव में गागरिन का पानी पहुंचना शुरूहोगा। <br /><strong>- वीरेंद्र छिपा, सहायक अभियंता, गागरिन परियोजना</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:32:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विद्यालय में पेयजल, बिजली और स्वच्छता में हुआ सुधार </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में ख्रबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/improvements-made-to-drinking-water--electricity--and-sanitation-facilities-at-school/article-148238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)25.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal;color:#000000;background:#F6F6F6;" xml:lang="en-us">भंवरगढ़।<span>  </span>कस्बे के प्रकाशपुरा के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पेयजल बिजली एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओें में उल्लेखनीय सुधार किया गया है।<span>  </span>गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित कर इस मामले को उठाया था। व्यवस्थाओं में सुधार से विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को बड़ी राहत मिली है। विद्यालय में छात्रों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति को सुचारू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। जिससे अब विद्यार्थियों की पढाई एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा नहीं आएगी। स्वच्छता के क्षेत्र में भी विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और छात्रों को स्वस्थ बातावरण मिले सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजमेर में जल संकट पर महिलाओं का प्रदर्शन: जलदाय विभाग पर अनियमित जलापूर्ति का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर के गुलाबबाड़ी क्षेत्र में पेयजल संकट से आक्रोशित महिलाओं ने जलदाय विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप है कि होली जैसे त्योहार पर भी पानी की सप्लाई नहीं हुई। अनियमित जलापूर्ति और कम प्रेशर से परेशान निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या नहीं सुलझी, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/women-protest-over-water-crisis-in-ajmer-alleging-irregular-water/article-145525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ajmer1.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वार्ड 56 के गुलाबबाड़ी संजय नगर व धानका बस्ती में पानी की समस्या को लेकर शुक्रवार को महिलाओं ने जलदाय विभाग दफ्तर पर जमकर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। होली पर्व के अवसर पर सप्लाई नहीं होने से लोग पेयजल को तरस गए। इधर विभाग के दफ्तर में इंजीनियर के नहीं मिलने से लोगों में गुस्सा दिखाई दिया।</p>
<p>क्षेत्रवासी लता देवी ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र में अनियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। निर्धारित एक घंटा भी पानी नहीं दिया जाता है। प्रेशर कम होने से क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है। कई बार विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। होली के दिन क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं होने से लोग परेशान रहे। जबकि होली पर्व के अवसर पर पानी की ज्यादा जरूरत होती है।</p>
<p>महिलाओं ने विभाग पर तंज कस्ते हुए कहा कि अगर विभाग पानी नहीं पिला सकता है तो कह दे, हम इसकी व्यवस्था अपने स्तर पर कर लेंगे। महिलाओं ने बताया कि पानी की सप्लाई का समय भी निश्चित नहीं है। कई बार रात में पानी दिया जाता है, ऐसे में महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। महिलाओं ने जल्द ही समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:57:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : भूतल जल संग्राहक की टूटी छत को अस्थायी रूप से ढ़का, टैंक से 1 लाख से अधिक की आबादी को मिलता है पेयजल </title>
                                    <description><![CDATA[लापरवाही पर लीपापोती का पैबन्द, खबर के बाद आनन फानन में ढ़की, टूटी हुई छत ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-broken-roof-of-the-groundwater-reservoir-has-been-temporarily-covered/article-143492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस परिसर में बने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा शुद्ध पानी के स्टोरेज टेंक को विभाग ने ढकवा दिया है। एमबीएस मुर्दाघर के पास संचालित इस टेंक से नयापुरा से लेकर स्टेशन तक के घरों में पेयजल की सप्लाई की जाती है। दैनिक नवज्योंति के 13 फरवरी को कोटा सिटी अंक के पेज नम्बर 5 पर खतरा बैठा ग्राउंड वाटर टैंक में शीर्षक से टैंक के टूटे हुये ढ़कान से होने वाली संभावित हानियों की ओर सम्बन्धित विभाग व प्रशासन का ध्यान दिलाने की खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था।</p>
<p>जलदाय विभाग के अधकारियों को जैसे ही मामले की जानकारी लगी तो पूरे महकमें में हड़कम्प मच गया। खबर प्रकाशन के बाद छत के टूटे हुये हिस्से को लोहे की नालीदार चद्दरों से ढ़क दिया गया। हालांकि जानकार मानते है कि इससे भी पानी शुद्धता पर प्रभाव पड़ने की संभावनायें है। जानकार बताते है कि किसी भी पानी के स्त्रोत को प्लेन चद्दर से ही पूरी तरह ढ़ाका जाना चाहिये जिससे  इसमें किसी भी बाहरी चीज का प्रवेश ही ना हो सके तभी जल की शुद्धता बनी रह सकती है । इस तरह से टूटे हुये हिस्से को ढकान करने से पानी की पूरी तरह सुरक्षा नहीं हो पायेंगी ।</p>
<p><strong>क्यों था अहम</strong><br />21 लाख लीटर क्षमता वाला यह टेंक शहर के दो बड़े अस्पतालों एमबीएस जेके लोन के अलावा सम्पूर्ण नयापुरा,दोस्तपुरा गांवड़ी, खेड़ली फाटक, भीममण्ड़ी,सहित करीब 1 लाख से अधिक की आबादी के घरों तक पेयजल की उपलब्धता करवाने का साधन है । ऐसे में इसके ढ़कान का जर्जर होकर टुट जाने के इसमें रखा जल खुला हो गया था। उपर से जमींन के पास होने के कारण इसमें किसी भी जानवर या उपर से भी किसी प्रकार के बाहरी पदार्थ के गिरने की पूरी पूरी संभावना थी।</p>
<p><strong>खबर के बाद विभाग में मचा हडकम्प लोग सांसत में</strong><br />शहर के बड़े क्षेत्र को पानी की आपूर्ति करने वाले इस वाटर टेंक की हालात की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली लोगों के हलक सुख गये। अस्पताल परिसर के भीतर जलदाय विभाग के कर्मचारयों द्वारा इती बड़ी लापरवाही की खबर को पढ़ने के बाद लोगों ने इसे आम जन के जीवन से खिलवाड़ करने वाला संगीन मामला बताया।</p>
<p>लापरवाही का बड़ा मामला है, विभाग द्वारा जनता के स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे कार्यों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिये।<br /><strong>-शुभम मेहरा, खेड़ली फाटक</strong></p>
<p>हमारें घरों तक आने वाला पानी शुद्ध् हो सरकारें इसके लियें प्रयासरत है,लेकिन सरकारी कर्मचारियों की अनदेखी का इतना बडा मामला सामने आने के बाद हमारे तो हलक से पानी उतरता भी मुश्किल हो गया।<br /><strong>- रोहित कुमार, दोस्तपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 14:55:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंबल के किनारे बसी आबादी को नहीं मिल रहा पेयजल </title>
                                    <description><![CDATA[अवैध कनेक्शन से मोटर  जलने  और केबल चोरी की घटनाएं आम हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/population-living-along-the-chambal-river-banks-not-receiving-drinking-water/article-138584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px13.png" alt=""></a><br /><p>भैंसरोड़गढ़। राणा प्रताप सागर बांध से पूरे प्रदेश में जलापूर्ति होने के बावजूद रावतभाटा नगरपालिका क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ोलिया में कई वर्षां से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणें का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और अवैध नल कनेक्शन के चलते पीने के पानी की आपूर्ति बूंद-बूंद तक सीमित हो गई है। जबकि निजी कनेक्शन के माध्यम से पानी की बबार्दी जारी है। ग्रामवासियों ने बताया कि नगर पालिका में विलय के बाद से उन्हें पानी के लिए लगातार टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अवैध कनेक्शन से मोटर पर अत्यधिक लोड पड़ता है। जिसके बार-बार मोटर जल जाती है और केबल चोरी की घटनाएं आम बात हो गई है। इसके चलते न केवल पीने का पानी प्रभावित हुआ है,बल्कि ग्रामीणों पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ गया है।     </p>
<p><strong>मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग लगने से बढी परेशानी </strong><br />ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि  मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग और चोरी की घटनाएं हो रही है, बावजूद इसके पुलिस और नगर पालिका द्वारा कोई ठेोस कार्रवाई नहीं की जा रही। तहसीलदार और नगरपालिका प्रशासन द्वारा टेक्स्ट संदेश के माध्यम से शिकायतें तो प्राप्त हुई, लेकिन समाधान अब तक नहीं हो पाया। </p>
<p>कई स्थानों पर कर्मचारी अपने घर पर पानी का उपयोग खेती के लिए कर रहे है, जबकि निजी वाहन धोने के लिए भी पानी का उपयोग किया जा रहा है। <br /><strong>-अंजलि, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे घरों में तो पीने का पानी नहीं आ रहा, वहीं नगर पालिका द्वारा नियुक्त कर्मचारी चार महीने से भुगतान न मिलने के कारण समय पर नहीं खोलते।                                                             <br /><strong>-ममता, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे यहां जिस मोटर से पानी आता है वहां की कभी केबल चोरी हो जाती है तो कभी केबल में आग लगा दी जाती है।  पूर्व में ना तो किसी सचिव ने और वर्तमान में किसी कर्मचारी या नगर पालिका ने केबल चोरी की शिकायत पुलिस थाने में नहीं की।  जिसे चोरों के हौसले बुलंद है। <br /><strong>-मयंक, ग्रामवासी। </strong></p>
<p>समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाएगा। जलापूर्ति की व्यवस्था सुचारू करने के लिए कदम उठाए जा रहे है। <br /><strong>- विवेक गरासिया, तहसीलदार। </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 16:00:38 +0530</pubDate>
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