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                <title>drinking water - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>drinking water RSS Feed</description>
                
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                <title>विद्यालय में पेयजल, बिजली और स्वच्छता में हुआ सुधार </title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति में ख्रबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/improvements-made-to-drinking-water--electricity--and-sanitation-facilities-at-school/article-148238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)25.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal;color:#000000;background:#F6F6F6;" xml:lang="en-us">भंवरगढ़।<span>  </span>कस्बे के प्रकाशपुरा के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पेयजल बिजली एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओें में उल्लेखनीय सुधार किया गया है।<span>  </span>गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित कर इस मामले को उठाया था। व्यवस्थाओं में सुधार से विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को बड़ी राहत मिली है। विद्यालय में छात्रों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति को सुचारू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। जिससे अब विद्यार्थियों की पढाई एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा नहीं आएगी। स्वच्छता के क्षेत्र में भी विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और छात्रों को स्वस्थ बातावरण मिले सकेगा।</span></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:52:22 +0530</pubDate>
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                <title>अजमेर में जल संकट पर महिलाओं का प्रदर्शन: जलदाय विभाग पर अनियमित जलापूर्ति का आरोप</title>
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                        <![CDATA[अजमेर के गुलाबबाड़ी क्षेत्र में पेयजल संकट से आक्रोशित महिलाओं ने जलदाय विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप है कि होली जैसे त्योहार पर भी पानी की सप्लाई नहीं हुई। अनियमित जलापूर्ति और कम प्रेशर से परेशान निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या नहीं सुलझी, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/women-protest-over-water-crisis-in-ajmer-alleging-irregular-water/article-145525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ajmer1.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वार्ड 56 के गुलाबबाड़ी संजय नगर व धानका बस्ती में पानी की समस्या को लेकर शुक्रवार को महिलाओं ने जलदाय विभाग दफ्तर पर जमकर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। होली पर्व के अवसर पर सप्लाई नहीं होने से लोग पेयजल को तरस गए। इधर विभाग के दफ्तर में इंजीनियर के नहीं मिलने से लोगों में गुस्सा दिखाई दिया।</p>
<p>क्षेत्रवासी लता देवी ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र में अनियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। निर्धारित एक घंटा भी पानी नहीं दिया जाता है। प्रेशर कम होने से क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है। कई बार विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। होली के दिन क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं होने से लोग परेशान रहे। जबकि होली पर्व के अवसर पर पानी की ज्यादा जरूरत होती है।</p>
<p>महिलाओं ने विभाग पर तंज कस्ते हुए कहा कि अगर विभाग पानी नहीं पिला सकता है तो कह दे, हम इसकी व्यवस्था अपने स्तर पर कर लेंगे। महिलाओं ने बताया कि पानी की सप्लाई का समय भी निश्चित नहीं है। कई बार रात में पानी दिया जाता है, ऐसे में महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। महिलाओं ने जल्द ही समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:57:21 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : भूतल जल संग्राहक की टूटी छत को अस्थायी रूप से ढ़का, टैंक से 1 लाख से अधिक की आबादी को मिलता है पेयजल </title>
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                        <![CDATA[लापरवाही पर लीपापोती का पैबन्द, खबर के बाद आनन फानन में ढ़की, टूटी हुई छत ।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-broken-roof-of-the-groundwater-reservoir-has-been-temporarily-covered/article-143492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस परिसर में बने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा शुद्ध पानी के स्टोरेज टेंक को विभाग ने ढकवा दिया है। एमबीएस मुर्दाघर के पास संचालित इस टेंक से नयापुरा से लेकर स्टेशन तक के घरों में पेयजल की सप्लाई की जाती है। दैनिक नवज्योंति के 13 फरवरी को कोटा सिटी अंक के पेज नम्बर 5 पर खतरा बैठा ग्राउंड वाटर टैंक में शीर्षक से टैंक के टूटे हुये ढ़कान से होने वाली संभावित हानियों की ओर सम्बन्धित विभाग व प्रशासन का ध्यान दिलाने की खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था।</p>
<p>जलदाय विभाग के अधकारियों को जैसे ही मामले की जानकारी लगी तो पूरे महकमें में हड़कम्प मच गया। खबर प्रकाशन के बाद छत के टूटे हुये हिस्से को लोहे की नालीदार चद्दरों से ढ़क दिया गया। हालांकि जानकार मानते है कि इससे भी पानी शुद्धता पर प्रभाव पड़ने की संभावनायें है। जानकार बताते है कि किसी भी पानी के स्त्रोत को प्लेन चद्दर से ही पूरी तरह ढ़ाका जाना चाहिये जिससे  इसमें किसी भी बाहरी चीज का प्रवेश ही ना हो सके तभी जल की शुद्धता बनी रह सकती है । इस तरह से टूटे हुये हिस्से को ढकान करने से पानी की पूरी तरह सुरक्षा नहीं हो पायेंगी ।</p>
<p><strong>क्यों था अहम</strong><br />21 लाख लीटर क्षमता वाला यह टेंक शहर के दो बड़े अस्पतालों एमबीएस जेके लोन के अलावा सम्पूर्ण नयापुरा,दोस्तपुरा गांवड़ी, खेड़ली फाटक, भीममण्ड़ी,सहित करीब 1 लाख से अधिक की आबादी के घरों तक पेयजल की उपलब्धता करवाने का साधन है । ऐसे में इसके ढ़कान का जर्जर होकर टुट जाने के इसमें रखा जल खुला हो गया था। उपर से जमींन के पास होने के कारण इसमें किसी भी जानवर या उपर से भी किसी प्रकार के बाहरी पदार्थ के गिरने की पूरी पूरी संभावना थी।</p>
<p><strong>खबर के बाद विभाग में मचा हडकम्प लोग सांसत में</strong><br />शहर के बड़े क्षेत्र को पानी की आपूर्ति करने वाले इस वाटर टेंक की हालात की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली लोगों के हलक सुख गये। अस्पताल परिसर के भीतर जलदाय विभाग के कर्मचारयों द्वारा इती बड़ी लापरवाही की खबर को पढ़ने के बाद लोगों ने इसे आम जन के जीवन से खिलवाड़ करने वाला संगीन मामला बताया।</p>
<p>लापरवाही का बड़ा मामला है, विभाग द्वारा जनता के स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे कार्यों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिये।<br /><strong>-शुभम मेहरा, खेड़ली फाटक</strong></p>
<p>हमारें घरों तक आने वाला पानी शुद्ध् हो सरकारें इसके लियें प्रयासरत है,लेकिन सरकारी कर्मचारियों की अनदेखी का इतना बडा मामला सामने आने के बाद हमारे तो हलक से पानी उतरता भी मुश्किल हो गया।<br /><strong>- रोहित कुमार, दोस्तपुरा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 14:55:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चंबल के किनारे बसी आबादी को नहीं मिल रहा पेयजल </title>
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                        <![CDATA[अवैध कनेक्शन से मोटर  जलने  और केबल चोरी की घटनाएं आम हो गई है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/population-living-along-the-chambal-river-banks-not-receiving-drinking-water/article-138584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px13.png" alt=""></a><br /><p>भैंसरोड़गढ़। राणा प्रताप सागर बांध से पूरे प्रदेश में जलापूर्ति होने के बावजूद रावतभाटा नगरपालिका क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ोलिया में कई वर्षां से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणें का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और अवैध नल कनेक्शन के चलते पीने के पानी की आपूर्ति बूंद-बूंद तक सीमित हो गई है। जबकि निजी कनेक्शन के माध्यम से पानी की बबार्दी जारी है। ग्रामवासियों ने बताया कि नगर पालिका में विलय के बाद से उन्हें पानी के लिए लगातार टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अवैध कनेक्शन से मोटर पर अत्यधिक लोड पड़ता है। जिसके बार-बार मोटर जल जाती है और केबल चोरी की घटनाएं आम बात हो गई है। इसके चलते न केवल पीने का पानी प्रभावित हुआ है,बल्कि ग्रामीणों पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ गया है।     </p>
<p><strong>मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग लगने से बढी परेशानी </strong><br />ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि  मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग और चोरी की घटनाएं हो रही है, बावजूद इसके पुलिस और नगर पालिका द्वारा कोई ठेोस कार्रवाई नहीं की जा रही। तहसीलदार और नगरपालिका प्रशासन द्वारा टेक्स्ट संदेश के माध्यम से शिकायतें तो प्राप्त हुई, लेकिन समाधान अब तक नहीं हो पाया। </p>
<p>कई स्थानों पर कर्मचारी अपने घर पर पानी का उपयोग खेती के लिए कर रहे है, जबकि निजी वाहन धोने के लिए भी पानी का उपयोग किया जा रहा है। <br /><strong>-अंजलि, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे घरों में तो पीने का पानी नहीं आ रहा, वहीं नगर पालिका द्वारा नियुक्त कर्मचारी चार महीने से भुगतान न मिलने के कारण समय पर नहीं खोलते।                                                             <br /><strong>-ममता, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे यहां जिस मोटर से पानी आता है वहां की कभी केबल चोरी हो जाती है तो कभी केबल में आग लगा दी जाती है।  पूर्व में ना तो किसी सचिव ने और वर्तमान में किसी कर्मचारी या नगर पालिका ने केबल चोरी की शिकायत पुलिस थाने में नहीं की।  जिसे चोरों के हौसले बुलंद है। <br /><strong>-मयंक, ग्रामवासी। </strong></p>
<p>समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाएगा। जलापूर्ति की व्यवस्था सुचारू करने के लिए कदम उठाए जा रहे है। <br /><strong>- विवेक गरासिया, तहसीलदार। </strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 16:00:38 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड नं. 34 - कच्ची बस्तियों में नहीं हो रही साफ-सफाई, नाले की टूटी रेलिंग बनी कचरा प्वांइट</title>
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                        <![CDATA[प्रवेश द्वार पर स्थित नाला राहगीरों और निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-no--34---slums-are-not-being-cleaned--broken-drain-railings-have-become-garbage-dumps/article-129620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम दक्षिण के वार्ड 34 में पार्षद द्वारा समय-समय पर विकास कार्य जरूर करवाए गए हैं, लेकिन वार्ड के आधे हिस्से में ही सफाई हो रही है। कचरा गाड़ियां आकर कचरा उठाती हैं और सफाई करती हैं, वहीं वार्ड की अनंतपुरा कच्ची बस्तियों की हालत अब भी बदतर बनी हुई है। सुभाष विहार में रहने वाले दीपक और जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में प्रतिदिन सफाई होती है और कचरा गाड़ी भी आती है। लेकिन सुभाष विहार के प्रवेश द्वार पर स्थित नाला राहगीरों और निवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। नाले की रेलिंग एक तरफ टूटी हुई है, और लोग इसमें कचरा डालते हैं जिससे बदबू फैलती है। बारिश के समय इस नाले से जलीय जंतु भी घरों तक पहुंच जाते हैं, जिससे डर और असुरक्षा का माहौल बना रहता है। वार्ड निवासी मोईन ने कहा कि बच्चों के खेलने के लिए पार्क नहीं है। वहीं कच्ची बस्ती के श्यामलाल और दिनेश कुमार ने बताया कि उनके इलाके में न तो कचरा गाड़ी आती है और न ही कोई सफाई होती है। साथ ही पानी की लाइन नहीं होने के कारण पेयजल के लिए उन्हें दूर से पानी लाना पड़ता है।</p>
<p><strong>सुभाष विहार में नालियों की गहराई कम</strong><br />सुभाष विहार में रहने वाली रजिया, सुल्ताना और अशोक कुमार ने बताया कि हमारी तरफ कचरा गाड़ी आती है और सफाई भी होती है, पर नालियों की कम गहराई होने व कुछ क्षेत्र में आधी-अधूरी नालियां बनी हुई हैं। जिससे नालियों का पानी मकानों के आसपास ही जमा रहता है, जो निवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।</p>
<p><strong>पानी के लिए भटकना  पड़ रहा</strong><br />वार्ड की अनंतपुरा कच्ची बस्ती दुर्दशा का शिकार है। बस्ती में रहने वाले राजेंद्र कुमार व सीता बाई सहित अन्य ने बताया कि हमारी तरफ न तो कचरा गाड़ी आती है, न ही साफ-सफाई होती है। साथ ही पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, क्योंकि यहां पानी की लाइन नहीं होने के कारण निजी ट्यूबवेल वालों के यहां से पानी लाना पड़ता है। वहीं कच्ची बस्ती में लोगों द्वारा प्लॉट की नींव भरने के बाद उन्हें खाली छोड़ दिया गया है, जो आसपास रहने वालों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />संपूर्ण तालाब गांव, संपूर्ण सुभाष विहार, सुभाष विहार के पास अनंतपुरा कच्ची बस्ती इत्यादि क्षेत्र।</p>
<p> सुभाष विहार में नालियों की गहराई कम होने व आधे-अधूरे क्षेत्र में नालियां नहीं होने के कारण नालियों का पानी सड़क के ऊपर बहता है, जिससे परेशानी का सामना करना पड़ता है।<br /><strong> -मेहरूनिशा</strong></p>
<p>हमारी तरफ कचरा गाड़ी प्रतिदिन नहीं आने के कारण कचरा इधर-उधर फेंकना पड़ता है। साथ ही रात में आवारा कुत्ते बाइक सवारों को परेशान करते हैं।<strong> -सीयाराम</strong></p>
<p>कच्ची बस्ती में न तो सफाई होती है और न ही कचरा गाड़ी आती है, जिससे लोगों को मजबूरन घरों के सामने खुद ही सफाई करनी पड़ती है।<br /><strong>- मांगीलाल</strong></p>
<p>अनंतपुरा कच्ची बस्ती में पानी की लाइन नहीं होने के कारण पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। निजी ट्यूबवेल वालों के यहां से पानी लाना पड़ता है। <br /><strong>- श्याम कुमार</strong></p>
<p>हमारी तरफ न तो कचरा गाड़ी आती है और न ही सफाई होती है। पानी की लाइन नहीं होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। अभी भी साइकिल से पानी लाना पड़ता है। <br /><strong>- राजेंद्र कुमार</strong></p>
<p>वार्ड पार्षद से बात करने के लिए उन्हें कॉल किया, पर न ही तो कॉल रिसीव किया और न ही रिप्लाई दिया।<br /><strong>- आसमा खान, वार्ड पार्षद</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 14:06:42 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान के अंतिम गांव के हालात : 78 साल बाद भी बिस्लाई गांव में नहीं पहुंचा नल का पानी, ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर</title>
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                        <![CDATA[जहां मवेशी स्नान करते हैं वहीं मृत जानवरों को किनारे फेंक देते है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-situation-in-rajasthan-s-last-village--even-after-78-years--bislai-village-has-not-received-tap-water/article-127339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(31).png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र की सहजनपुर ग्राम पंचायत का बिस्लाई गांव आज भी बदहाली की दास्तां कह रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां पेयजल की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को अब भी नदी से पानी ढोकर लाना पड़ता है। महिलाएं हर रोज कई किलोमीटर दूर नदी तक जाती हैं और सिर पर मटकी रखकर परिवार के लिए पानी लाती हैं। वही नदी, जहां मवेशी स्नान करते हैं और मृत जानवरों को किनारे फेंक दिया जाता है। मजबूरी में ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना, ट्यूबवेल और टैंकर की घोषणाएं केवल कागजों में सिमट गईं। सरपंच से लेकर विधायक-सांसद तक गुहार लगाने के बावजूद हालात जस के तस हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि हर चुनाव में नेताओं ने वादे किए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई इस गांव की सुध लेने तक नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।</p>
<p><strong>नेता व प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong><br />बिस्लाई गांव की तस्वीरें साफ दिखा रही हैं कि सरकार और प्रशासन ने यहां की समस्याओं की अनदेखी की है। 78 साल बाद भी अगर ग्रामीणों को नदी से पानी ढोना पड़ रहा है तो यह सरकार की नाकामी है।<br /><strong>-  प्रेम सिंह मीणा, कांग्रेस नेता</strong></p>
<p>इस मामले का जल्द संज्ञान लिया जाएगा। <br /><strong>- अभिमन्यु सिंह कुंतल, उपखंड अधिकारी छीपाबड़ौद।</strong></p>
<p><strong>ग्रामीणों का दर्द उनके ही शब्दों में</strong></p>
<p>आजादी को 78 साल हो गए, लेकिन हमारे गांव में आज तक नल का पानी नहीं आया। जानवर जिस नदी में नहाते हैं, उसी से हमें पीने का पानी भरना पड़ता है। .<br /><strong>- घनश्याम बैरवा, ग्रामीण</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सबको कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना। गंदा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां फैल रही हैं। <br /><strong>- राम भरोस, ग्रामीण</strong></p>
<p>सुबह से दोपहर तक नदी से पानी लाना हमारी मजबूरी है। बारिश में स्थिति और भी विकट हो जाती है। <br /><strong>- नीलू बाई, महिला ग्रामीण </strong></p>
<p>बरसों से सुन रहे हैं कि नल-जल योजना आएगी, पाइप लाइन डलेगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- सूखना बाई, महिला ग्रामीण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:48:34 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्र पर आना है तो बच्चों को बोतल घर से लाना होगा </title>
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                        <![CDATA[आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-children-have-to-come-to-the-centre--they-will-have-to-bring-bottles-from-home/article-121297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित शहर के विभिन्न वार्डों में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के पास ना तो अपने भवन और ना ही उनके पास सरकार ने किसी प्रकार की सुविधा केंद्र पर विकसित कर रखी हैं। केंद्र पर आने वाले बच्चे घर से ही पीने के पानी की बोतल लेकर आते हैं। वहीं अधिकतर केंद्र जर्जर हैं। जिससे बच्चों के साथ कभी भी हादसा हो सकता हैं। घोड़े वाले बाबा चौराहे बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में कार्यरत कार्यकर्ता माया नायक ने बताया कि केंद्र में वर्तमान में कुल 55 बच्चे नांमाकित है। जिनसे तीन से छह वर्ष तक के 20 बच्चे व जीरों से लेकर तीन वर्ष तक के 35 बच्चे हैं। आंगनबाड़ी  केंद्र एक किराये एक कमरे में चली रहे हैं। बच्चें पीने के लिए पानी की बोतल भी घर से साथ लेकर आते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। साथ ही जब कभी भी केंद्र की लाइट जाती है अंधेरा हो जाता है। बच्चों को अंधेरे में ही बैठा का पढ़ाई करनी पढ़ती है।</p>
<p><strong>आंगनबाड़ी केंद्र किराए के एक कमरें में संचालित</strong><br />शहर की अधिकतर आंगनबाड़ी किराये के घरों में मात्र एक या दो कमरों में संचालित होती हंै। जिसमें बच्चों को दिया जाने वाला खाना बनता हैं। और इसी कमरे में बच्चों को बैठकर पोषाहर खाना पड़ता  व  पोषाहर वितरण भी उसी में करना पड़ता हंै। <br /> <br /><strong>केंद्र के भवन जर्जर स्थिति में</strong><br />केंद्रों के भवन अधिकतर जर्जर व पुराने है जिससे बारिश के समय पर पानी टपकता हैं। और कमरों में सीलन आ रही हैं। साथ ही बारिश में कई बार केंद्र का रिकार्ड व पोषाहार भी बारिश में भीग जाता हैं। केंद्र की छातों से प्लास्टिक गिरता रहता हैं। बच्चों को बैठने में भी परेशानी आती है। साथ ही केंद्रों के भवनों में दरारें व सीलन आ रही है। </p>
<p><strong>बच्चों के खिलौने के नाम पर कुछ नहीं</strong><br />चाहे राज्य सरकार आंगनबाड़ी केंद्र पर खेल सुविधा के नाम पर कितनी वाहीं - वाही लूटे पर आंगनबाड़ी केंद्रों खेलने के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं हैं। वहीं खिलौने के नाम पर ना तो किचन सेट, रिंग, लेसिंग फे्रम, रंगीन मोम, पेंसिल, बड़ी गेंद, रस्सी, सब्जी फल, जानवरों के चित्र, राउंड टेबल, फिसलन पट्टी, सहित विभिन्न खिलौने होने चाहिए पर अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र मेें कुछ भी नहीं है। बच्चों को बैठने के लिए टेबल -कुर्सी की भी व्यवस्था नहीं है।</p>
<p><strong>बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड की व्यवस्था नहीं</strong><br />केंद्र की दिवारों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को पढ़ने के लिए पहाड़ व गिनती लिख रखी है।  साथ ही केंद्र पर केंद्र पर बच्चों को पढ़ने के लिए विभिन्न चार्ट होने चाहिए जो कि नहीं हैं। दुर्गा बस्ती आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र में कुल 28 बच्चें है जिसमें अभी एक से तीन वर्ष के 17 व तीन से छह वर्ष के 11 बजे नामांकित है किराये के एक कमरें चलता है। पिछले दिनों बारिश से उसमें रखी किताबें व स्टेशनरी भीग गई है। कार्यकर्ता सायरा मंसूरी ने बताया कि हम एक ही रूम में पोषाहर, बच्चों की पढ़ाई, खेल खेलना, टीकाकरण सहित सभी कार्य एक ही कमरें में करना पड़ता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि केंद्र पर जो सरकारी स्कूल में जो आंगनबाड़ी संचालित की जाती है उनको जो फर्नीचर, खेल के सामान, सुव्यवस्थित रूम सहित अन्य जो सुविधा दी जाती है वहां अन्य केंद्र को भी दी जानी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br /> जो आंगनबाड़ी केंद्र किरायें  के भवन में चले रहे उनके लिए सरकारी भवन देख रहे हैं।  जो केंद्र जर्जर  हैं उनको अन्य जगह पर शिफ्ट कर दिया जायेंगा। <br /><strong>- सीता शर्मा, उपनिदेशक बाल विकास विभाग कोटा </strong></p>
<p>वर्तमान में एक हजार रूपए जो किराया दिया जाता है उसको बढ़ाकर करीब तीन या चार हजार रूपए किए। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र पर सुविधाओं का विस्तार किया जाएं।<br /><strong>- शाहिदा खान, राज. आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी महासंघ</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 18:13:04 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 24 घंटे में पेयजल समस्या से मिली निजात, मिलेगा स्वच्छ पानी </title>
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                        <![CDATA[खानपुर कस्बे में दूषित जलापूर्ति की समस्या काफी दिनों से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/effect-of-news---got-rid-of-drinking-water-problem-in-24-hours--will-get-clean-water/article-120409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर कस्बे में दूषित जलापूर्ति की समस्या काफी दिनों से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी और लगातार गंदा पानी नलों में आ रहा था, जिसके बाद दैनिक नवज्योति टीम ने इस मुद्दे को उठाया तो तुरंत प्रशासन 24 घंटे में हरकत आ गया। प्रशासन के आला अधिकारियों ने दूषित जलापूर्ति की समस्या के बारे में जलदाय विभाग से जानकारी प्राप्त कर तुरंत प्रभाव से दूषित जलापूर्ति की समस्या से निजात दिलाकर कर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई। जिससे ग्रामीणों को दूषित जलापूर्ति की समस्या से राहत मिली। कस्बेवासी अभिषेक वर्मा, त्रिलोक राठौर, केशव लक्षकार, राहुल राठौर, सोनू पारीक, मुकेश सेन आदि ने बताया कि खानपुर कस्बे में दूषित जलापूर्ति की समस्या कई समय से बनी हुई थी जिसके चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, वहीं कई दिनों से नलों में पानी नहीं आने की समस्या भी बनी हुई थी।</p>
<p>दूषित जलापूर्ति को लेकर ग्रामीणों में गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा था, जिसके बाद नवज्योति टीम ने पेयजल समस्या का मुद्दा उठाया, तो 24 घंटे में ही प्रशासन हरकत में आया और पानी की समस्या का निराकरण हो गया। जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। मुस्ताक पठान एईएन जलदाय विभाग खानपुर ने बताया कि दूषित जलापूर्ति की समस्या का निराकरण कर दिया गया है। अब ग्रामीणों को स्वच्छ जल पीने को मिलेगा। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Jul 2025 15:17:09 +0530</pubDate>
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                <title>5 साल में पहली बार 612 एनटीयू लेवल पर पहुंची टर्बिडिटी</title>
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                        <![CDATA[घरों में पहुंचा मटमेला पानी लेकिन बैक्टीरिया मुक्त। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/turbidity-reached-612-ntu-level-for-the-first-time-in-5-years/article-119425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राणा सागर व जवाहर सागर डेम के गेट खोले जाने से चंबल में टर्बिडिटी (गंदलापन) का लेवल 612 एनटीयू लेवल तक पहुंच गया। जिससे शहर की जलापूर्ति गड़बड़ा गई। अत्यधिक मात्रा में पानी में मिट्टी आने से अकेलगढ़, मिनी अकेलगढ़-सकतपुरा और श्रीनाथपुरम फिल्टर प्लांट से जल शोधन उत्पादन 50%  कम हो गया। ऐसे में शहर में प्रतिदिन होने वाली 51.50 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई घटकर 26 करोड़ लीटर ही रह गई। हालांकि, जलदाय विभाग के अधिकारी गुरुवार को दिनभर स्थिति नियंत्रित करने में जुटे रहे। शाम 4.30 बजे के बाद से टर्बिडिटी घटकर 3.50 से 400 एनटीयू पहुंच गया था। ऐसे में शुक्रवार सुबह तक जलापूर्ति समान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। इधर, राणा सागर के गेट खुलने पर टर्बिडिटी 612 एनटीयू आंकड़ा पिछले 5 साल में पहली बार बढ़ा है।</p>
<p><strong>तड़के 453 तो दोपहर को 612 एनटीयू पहुंची टर्बिडिटी </strong><br />अधिशाषी अभियंता नगर खंड प्रथम प्रकाशवीर नथानी ने बताया कि बुधवार तक स्थिति समान्य थी लेकिन गुरुवार को राणा सागर व जवाहर सागर बांध के गेट खोले जाने पर तड़के पांच बजे चंबल में टर्बिडिटी का लेवल अत्यधिक मात्रा में बढ़ गया। इस वक्त टर्बिडिटी का लेवल 453 एनटीयू था। जिसका असर शहर के मुख्य जल शोधन केंद्र अकलेगढ़ पर पड़ा। इससे शुद्ध पेयजल उत्पादन क्षमता लगभग 50% कम हो गई है। हालांकि, लोगों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए लगातार 24 घंटे प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>घरों में आया पीला-चिकना पानी</strong><br />चंबल में अचानक टर्बिडिटी का लेवल बढ़ने से जल उत्पादन केंद्रों की जलशोधन प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हुई। जिसके कारण घरों में मटमेला पानी आया। बजरंग नगर निवासी सत्येंद्र राजावत, आकाशवाणी के फिरोज अहमद, सरस्वती कॉलोनी के फयाज खान व लोकेश मेहरा ने बताया कि सुबह नलों में गंदा पानी आया। पानी में चिकनापन था। पीने के पानी के लिए भी परेशान हो गए। </p>
<p><strong>प्लांट के फिल्टर बेड हो रहे चौक</strong><br />चंबल में अत्यधिक मिट्टी आने से जल शोधन केंद्रों के फिल्टर बेड चौक हो रहे हैं। जिन्हें बार-बार साफ करने के लिए प्लांट बंद करना पड़ रहा। ऐसे में दो से तीन घंटे के अंतराल में एक-एक फीडर पर जलापूर्ति करनी पड़ी। विज्ञान नगर, तलवंडी व महावीर नगर फीडर पर गुरुवार सुबह 10.30 बजे सप्लाई की गई। इसके बाद दोपहर 1 बजे से दादाबाड़ी फीडर पर सप्लाई की गई। </p>
<p><strong>42 फिल्टर बेड, साफ करने में खर्च हुआ 6.30 लाख  लीटर पानी</strong><br />अधिकारियों के अनुसार, जल शोधन केंद्र पर कुल 42 फिल्टर बेड हैं। जिनमें रॉ वाटर को ट्रीटमेंट डोज देकर फिल्टर किया जाता है। लेकिन, गुरुवार को पानी में अधिक मात्रा में मिट्टी आने से फिल्टर बेड चौक हो गए। पानी छन भी नहीं पा रहा था।  जिन्हें साफ करने के लिए 3 से 4 बार फिल्टर बेड साफ करने पड़े। इसकी सफाई के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है। प्रत्येक बेड की सफाई के लिए औसतन 10 से 15 हजार लीटर पानी खर्च होता है। ऐसे में 42 बेड की एक बार सफाई करने पर ही 6.30 लाख लीटर पानी खर्च हो रहा है। टर्बिडिटी का लेवल देखते हुए इस पानी को दोबारा रिसाइकिलिंग भी करना संभव नहीं होता। ऐसे में लाखों लीटर पानी को फिर से चंबल में बहाना पड़ता है। </p>
<p><strong>दिनभर यूं घटा-बड़ा टर्बिडिटी का लेवल</strong><br />एक्सईएन नथानी बताते हैं, राणा सागर व जवाहर सागर का गेट खुलने से चंबल के कैचमेंट एरिया की मिट्टी भी बहकर नदी में आ गई। बुधवार सुबह तक 53 एनटीयू टर्बिडिटी थी, जो बांधों के गेट खुलने के साथ-साथ बढ़ती गई लेकिन स्थिति काबू में थी। गुरुवार तड़के 5 बजे अचानक 450 एनटीयू (पानी में मिट्टी की मात्रा) टर्बिडिटी बढ़ गई। ऐसे में सुबह 9.30 बजे तक फिल्टर प्लांट बंद करना पड़ा। बेड की सफाई व पम्पों का मेंटिनेंस कर साढ़े 10 बजे नए कोटा के तीन इलाकों का एक फीडर पर सप्लाई शुरू की। इसके बाद दोपहर 1 बजे टर्बिडिटी का लेवल 612 एनटीयू पर पहुंच गया। ऐसे में मुसीबत बढ़ती रही। लेकिन दोपहर बाद जैसे-जैसे बांधों के गेट बंद होते गए वैसे वैसे टर्बिडिटी का लेवल डाउन होता गया। शाम  4.30 बजे के बाद से पानी में मिट्टी की मात्रा कम होती गई। रात 9.30 बजे तक टर्बिडिटी का लेवल 3.50 से 400 के बीच रहा। </p>
<p><strong>कहीं सुबह तो कहीं दोपहर को सुचारू हुई जलापूर्ति</strong><br />मंगलवार देर रात हुई बारशि व कोटा बैराज के आठ गेट खोलकर की गई पानी की निकासी से शहर के कुछ हिस्सों में गुरुवार को पानी की सप्लाई करीब 8 घंटे तक बाधित रही।  एक्सईएन नथानी ने बताया कि सुबह जो सप्लाई 5.30 पर शुरू होनी थी पर डर्बिटिडी के कारण कुछ फीडर पर 10.30 बजे तो कुछ फीडर पर दोपहर 1 से 2 के बीच सप्लाई शुरू हुई,जो रात तक जारी रही। </p>
<p><strong>5 साल में पहली बार 612 एनटीयू पहुंचा टर्बिडिटी लेवल</strong><br />उन्होंने बताया कि राणा प्रताप सागर बांध के गेट खुलने पर गुरुवार को टर्बिडिटी का जो लेवल बढ़ा है, वह पिछले पांच साल में पहली बार देखने को मिला है। इससे पहले राणा सागर बांध के गेट खुलने पर टर्बिडिटी 600 के पार नहीं पहुंची। लेकिन, गांधी सागर के गेट खुलने पर टर्बिडिटी  का लेवल 700 से 1000 एनटीयू तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में जल शोधन करना बहुत मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>पानी शुद्ध छोड़ा, फिर घरों में मटमेला पानी, यह है कारण</strong><br />अधिकारियों के अनुसार, जल शोधन केंद्रों से प्रत्येक चरण में शुद्ध पानी ही सप्लाई किया गया है। इसके बावजूद घरों में मटमेला पानी आया तो उसका कारण  यह है कि केंद्रों से जुड़ी सप्लाई पाइप लाइनों में मिट्टी की परत जमी रहती है। ऐसे में जल शुद्ध पानी प्रेशर से छोड़ा जाता है तो पाइपों में जमी मिट्टी भी बहकर चली जाती है। जब घरों के नलों को पहली बार खोला जाता है तो थोड़ी देर मटमेला पानी आता है लेकिन कुछ देर बाद ही साफ पानी की आपूर्ति हो जाती है।  </p>
<p><strong>इन इलाकों में आई परेशानी</strong><br />अधिशाषी अभियंता नगर खंड द्वितीय श्याम माहेश्वरी ने बताया कि 130 एमएलडी जल शोधन संयत्र सकतपुरा से जलापूर्ति किए जाने वाले क्षेत्र नदी पार सम्पूर्ण सकतपुरा, नान्ता, बालिता, सम्पूर्ण कुन्हाडी, बड़गांव जोन, सम्पूर्ण बून्दी रोड़ क्षेत्र, शम्भूपुरा जोन, नयाखेड़ा, नयापुरा, सिविल लाइन्स, लाडपुरा, खाईरोड़, खण्ड गांवड़ी, दोस्तपुरा, आर्मी क्षेत्र, खेड़लीफाटक, नालारोड़, जनकपुरी, गुरूद्वारा रोड़, भीमगंजमण्डी, डडवाड़ा, सम्पूर्ण स्टेशन क्षेत्र, कैलाशपुरी जोन, भदाना जोन, काला तालाब जोन, सोगरिया जोन, आकाशवाणी कॉलोनी, सरस्वती कॉलोनी, पुलिस लाइन रोड की समस्त कॉलोनियां, आरके नगर, शिव नगर, बोरखेड़ा जोन, बारां रोड, नया नोहरा जोन, चन्द्रेसल जोन, रोटेदा, रायपुरा जोन के उपभोक्ताओं से अपील की है कि जल की गुणवत्ता में सुधार नहीं होने तक आवश्यक मात्रा में पेयजल का संग्रहण करके रखें।</p>
<p>अल सुबह से दोपहर तक टर्बिडिटी बढ़ जाने से जल शोधन गंभीर रूप से प्रभावित हुई। शाम से टर्बिडिटी  का लेवल घटा है। शुक्रवार सुबह तक जलापूर्ति समान्य होने की संभावना है। यदि, टर्बिडिटी  का लेवल नहीं घटता है तो सुबह-शाम की पारी में एक समय जलापूर्ति की जाएगी। वहीं, अकेलगढ़ प्लांट पर मॉनिटरिंग के लिए सोमवार से रविवार तक सभी जेईएन की ड्यूटी लगा दी गई है। घरों में मटमेला पानी आ सकता है लेकिन वह पानी पूरी तरह से शुद्ध होने के साथ बैक्ट्रेरिया मुक्त है। जलापूर्ति समान्य करने के हरसंभव प्रयास जारी हैं। ऐसे समय में शहरवासी जल संग्रहण करके रखें।   <br /><strong>- प्रकाशवीर नथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग </strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jul 2025 15:23:40 +0530</pubDate>
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                <title>विकराल होती जा रही है पेयजल समस्या</title>
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                        <![CDATA[दुनिया में पेयजल की समस्या दिनों दिन विकराल होती चली जा रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/drinking-water-problem-is-becoming-increasingly/article-117973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)68.png" alt=""></a><br /><p>दुनिया में पेयजल की समस्या दिनों दिन विकराल होती चली जा रही है। इसकी भयावहता का सबूत यह है कि दुनिया में आज लगभग 4-4 अरब लोग पीने के साफ पानी से महरूम हैं। यह भीषण खतरे का संकेत है। स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट आफ एक्वाटिक साइन्स एण्ड टेक्नोलाजी के अध्ययन कर्ता एस्टर ग्रीनबुड की मानें तो यह स्थिति बेहद भयावह और अस्वीकार्य है कि दुनिया में इतनी बड़ी आबादी की पीने के साफ पानी तक पहुंच नहीं है। इन हालात को तत्काल बदले जाने की जरूरत है। विडम्बना यह है कि इसके बावजूद दुनिया की सरकारें पेयजल को बचाने और जल संचय के प्रति क्यों गंभीर नहीं हैं, यह समझ से परे है। जबकि संयुक्त राष्ट्र बरसों से चेतावनी दे रहा है कि जल संकट समूची दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन जाएगा और अगर अभी से पानी की बढ़ती बर्बादी पर अंकुश नहीं लगाया गया तथा जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो हालात और खराब हो जाएंगे जिसकी भरपायी असंभव हो जाएगी। </p>
<p>अब यह स्पष्ट है कि दुनिया अपने बुनियादी लक्ष्यों तक को पाने के मामले में बहुत पीछे है। यह अच्छे संकेत नहीं हैं। इन हालातों में 2015 में संयुक्त राष्ट्र का मानव कल्याण में सुधार के लिए सतत विकास लक्ष्य के तहत सभी के लिए 2030 तक सुरक्षित और किफायती पेयजल की आपूर्ति सपना ही रहेगा। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो साफ पानी की पहुंच से दूर देशों के मामले में दक्षिण एशिया शीर्ष पर है जहां 1200 मिलियन लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं उप सहारा अफ्रीकी देशों के 1000 मिलियन, दक्षिण पूर्व एशिया के 500 मिलियन और लैटिन अमेरिकी देशों के 400 मिलियन लोग आज भी साफ पानी से महरूम हैं। यह पानी के मामले में दुनिया की शर्मनाक स्थिति है। हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों में पानी में दूषित पदार्थों की मौजूदगी सबसे बड़ी समस्या है। गौर करने वाली बात यह है कि दुनिया में आज हालत यह है कि लगभग 61 फीसदी आबादी एशिया में साफ पानी के संकट से जूझ रही है। जहां तक भारत का सवाल है, यहां की 35 मिलियन से भी ज्यादा आबादी साफ पानी से दूर है। नीति आयोग ने तो यह तादाद 60 करोड़ से भी ज्यादा बताई है। </p>
<p>देश के दूरदराज के और ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दीगर है, देश की राजधानी दिल्ली के लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। जिसके पास घर में वाटर टैंक बना है वह अपना टैंक और जिनके पास पानी स्टोर करने का संसाधन नहीं है, वे ड्रम, बाल्टियों में जितना पानी भर सकते हैं, उतना भर लेते हैं। थोड़ा - थोड़ा करके पानी इस्तेमाल करते हैं। लोगों का कहना है कि बाकी पीने के लिए बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में तकरीबन 22,000 से ज्यादा अवैध सबमर्सिबल चल रहे हैं। इसके चलते दिल्ली के कई इलाकों में भूजल स्तर नीचे चला गया है। इस समस्या को देखते हुए एनजीटी भी दिल्ली सरकार और दिल्ली प्राधिकरण से लुप्त हो चुके जल निकायों की बहाली के तात्कालिक उपाय करने का निर्देश दे चुकी है। </p>
<p>जरूरत है विलुप्त हो चुके प्राकृतिक जल संसाधनों को पुनर्जीवित करने की और तालाब, पोखर समेत पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने की। फिर सरकारी संस्थाओं, निजी प्रतिष्ठानों, आवासीय समितियों व नागरिकों द्वारा वर्षा जल संचयन के उपायों को अनिवार्य किए जाने और जल की बर्बादी पर अंकुश से जल संकट में काफी हद तक राहत मिल सकती है। इस हेतु जनजागरण बेहद जरूरी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते जल संकट की जो तस्वीर पेश की है, वह जहां गंभीर खतरे का संकेत है, वहीं वह चेतावनी भी है कि अब भी समय है संभल जाओ। रिपोर्ट कहती है कि राजधानी में 34 में से 14 इलाके ऐसे हैं, जहां सालभर में जितना भूजल संचयन होता है, उससे ज्यादा निकाल लिया जाता है। </p>
<p>तात्पर्य यह कि भूजल निकासी की दर 100-77 फीसदी रही है। दिल्ली के इन 34 इलाकों में से सिर्फ 14 को अति दोहित क्षेत्र, 13 को गंभीर रूप से दोहित क्षेत्र, 2 को अर्द्ध गंभीर क्षेत्र में शामिल किया गया है। जबकि केवल 5 इलाके ऐसे हैं, जो सुरक्षित श्रेणी में शामिल हैं। घनी आबादी वाले इलाके भूजल के अत्यधिक दोहन और जल प्रदूषण के मामले में शीर्ष पर हैं। यह जगजाहिर है कि जल का हमारे जीवन पर प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से प्रभाव पड़ता है। यह भी कि जल संकट से एक ओर कृषि उत्पादकता प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर जैव विविधता, खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है। आखिरकार इस वैश्विक समस्या के लिए जिम्मेदार कौन है? जाहिर है इसके पीछे मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार हैं, जिसमें कहीं न कहीं उसके लोभ, स्वार्थ और भौतिकवादी जीवनशैली की अहम भूमिका है। वैश्विक स्तर पर देखें तो अभी तक यह स्थिति थी कि दुनिया में दो अरब लोगों को यानी 26 फीसदी आबादी को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं था। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते हालात और खराब होने की आशंका है।</p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jun 2025 12:06:36 +0530</pubDate>
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                <title> असर खबर का - सीनियर स्कूल के खेल मैदान में हैंडपंप लगाने का कार्य शुरू</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया जलदाय विभाग ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-the-news---work-started-to-install-a-hand-pump-in-the-playground-of-the-senior-school/article-117152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)36.png" alt=""></a><br /><p>छबड़ा। दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए जलदाय विभाग ने बुधवार को स्थानीय सीनियर हायर सैकंडरी विद्यालय के खेल मैदान पर बोरिंग मशीन से हैंडपंप लगाने का काम शुरू कर दिया है। जिससे अब यहां आने वाले खेल प्रेमियों, मोर्निंग वाक के लिए आने वाले लोगों एवं ग्रामीणों को पेयजल की कमी से परेशान नहीं होना पड़ेगा। गौरतलब है कि कस्बे का एकमात्र खेल मैदान जन सुविधाओं से महरुम है। जिसके चलते यहां न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है और न साफ-सफाई की। जिससे चारों ओर गन्दगी फैली रहती है। जिससे स्वास्थ्य बनाने के लिए घूमने आने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर उल्टा असर पड़ता है। इसके चलते समाज सेवी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता संजय नामदेव ने खेल मैदान पर फैली अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई एवं विधायक एवं स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर खेल मैदान पर तत्काल प्रभाव से ट्यूबवेल खुदवाकर वाटर कूलर लगवाने की मांग की थी। जिससे यहां रोजाना सुबह शाम घूमने आने वाले लोगों, खिलाड़ियों एवं सरकारी नौकरी के लिए फिटनेस बनाने आने वाले बेरोजगारों को पानी की समस्या से जूझना न पड़े। नामदेव की इस मांग को दैनिक नवज्योति ने समाचार के माध्यम से पुरजोर तरीके से उठाते हुए 3 जून को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। अभी समाचार छपे दस दिन भी नहीं हुए थे कि खेल मैदान पर विधायक कोष से स्वीकृत होते ही जलदाय विभाग ने तत्काल प्रभाव से हैंडपंप लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके शुरू होने के बाद निश्चित ही यहां आकर सुस्ताने वाले ग्रामीणों को भी ठन्डी छांव के साथ पीने का पानी उपलब्ध हो सकेगा। बोरिंग के समय सीनियर हायर सैकंडरी स्कूल के प्रिंसिपल ओम प्रकाश गालव, जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता सोहन लाल शर्मा एवं पूर्व पार्षद रितेश शर्मा भी मौजूद थे।</p>
<p><strong>नामदेव ने की नवज्योति की सराहना</strong><br />समाजसेवी संजय नामदेव ने खेल मैदान पर पानी की समस्या का दैनिक नवज्योति द्वारा प्रमुखता से समाचार छपने पर आभार जताते हुए सराहना की। जिसके चलते अल्प समय में ही पानी की समस्या का समाधान हो गया। नामदेव ने जनहित में विधायक कोष से हैंडपंप स्वीकृत करने पर विधायक का आभार जताया। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Jun 2025 14:22:31 +0530</pubDate>
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                <title>देखरेख के अभाव में दम तोड़ रहे प्राचीन पेयजल स्रोत, ग्रामीणों ने पालिका प्रशासन से लगाई सफाई की गुहार</title>
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नगर पालिका प्रशासन सुकेत की अनदेखी के कारण किसी जमाने में पानी का स्रोत रही प्राचीन बावड़ी वर्तमान में गंदगी और कचरे के कारण मरणासन्न अवस्था में है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ancient-drinking-water-sources-dying-due-to-lack-of-maintenance/article-113886"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(3)20.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। नगर पालिका प्रशासन सुकेत की अनदेखी के कारण किसी जमाने में पानी का स्रोत रही प्राचीन बावड़ी वर्तमान में गंदगी और कचरे के कारण मरणासन्न अवस्था में है। पूर्व सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि बावड़ी में गंदगी और कचरे के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यहां स्थित देवस्थान आने वाले श्रद्धालुओं को भी गंदगी के कारण परेशानी होती है। नगर में दीवारों पर कई जगह स्वच्छता अभियान लिखा हुआ है, लेकिन उस पर अमल नहीं किया जा रहा है। नगर वासियों ने बताया कि यही हाल कस्बे के मुख्य चौराहे और मस्जिद रोड आदि जगह पर नालियों का है। नगर की नालियां कचरे और गंदगी से अटी पड़ी हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि बारिश आने वाली है। लेकिन नालियों की सफाई नहीं होने से कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। कई बार अधिशासी अधिकारी और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। नगर वासियों ने बावड़ी और नालियों की साफ-सफाई करने की मांग की। स्थानीय लोगों ने बावड़ी की साफ-सफाई की मांग की है। ताकि इसका पेयजल के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।</p>
<p><strong>पेयजल समस्या का हो सकता है समाधान </strong><br />प्राचीन समय से ही बावड़ियां जल प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। ये भूमिगत संरचनाएं हैं जो वर्षा जल को इकट्ठा करने और उपयोग करने के लिए बनाई जाती थीं। क्षेत्र में जल संकट की समस्या है। बावड़ी की सफाई होने के बाद इस समस्या का समाधान हो सकता है।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बावड़ी की सफाई करने की मांग की है। </p>
<p><strong>सात साल पहले हुई थी सफाई</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत समय में करीब 7 साल पहले जब अर्चना राठौर सुकेत की सरपंच थीं, उस वक्त बावड़ी का जीर्णोद्धार और सफाई करवाई गई थी। लेकिन पालिका बनने के बाद बावड़ी की सफाई को अनदेखा किया जाता रहा है। इसकी शिकायत पूर्व में रहे अधिशासी अधिकारी को की गई थी। लेकिन तब से आज तक सफाई नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />नगर पालिका क्षेत्र में विवाह स्थलों में नगरवासी बावड़ी स्थित मंदिर में गणेशजी को नोतने जाते हैं। लेकिन बावड़ी में अथाह गंदगी होने के कारण नगर वासी दूर दराज के मंदिर में जाने लगे हैं। <br /><strong>- राजकुमार राठौर, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि, सुकेत</strong></p>
<p>एक हफ्ते में इसकी सफाई पालिका द्वारा करवा दी जाएगी। इसकी सूचना पहले भी आ गई थी।<br /><strong>- हेमेंद्र सांखला, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, सुकेत</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 17:50:51 +0530</pubDate>
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