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                <title>national civil services day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हमारा लक्ष्य राजस्थान की तस्वीर और तकदीर बदलना : भजनलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मयोगी कौशल विकास सप्ताह की शुरूआत लोक सेवकों को मिला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता और राजस्थान संपर्क पोर्टल पुरस्कार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/our-goal-change-rajasthans-picture-and-destiny-bhajan-lal-sharma/article-111580"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाए रखने में लोक सेवकों की अहम भूमिका होती है। विकसित भारत व विकसित राजस्थान के निर्माण के लिए अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को विकास की योजनाओं से लाभान्वित करना बेहद जरूरी है। इस कार्य के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लोक सेवकों की है। वे सोमवार को झालाना डूंगरी स्थित हरिशचन्द्र माथुर राज्य लोक प्रशासन संस्थान में लोक सेवा दिवस पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कहा कि जरूरतमंद व्यक्ति जब लोक सेवक के पास आता है तो पूर्ण जिम्मेदारी से उसकी हरसंभव मदद करनी चाहिए। गृह मंत्री रहे सरदार वल्लभभाई पटेल ने वर्ष 1947 में आज ही के दिन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया था। कहा था कि लोक सेवक स्टील फ्रेम यानी देश की शासन व्यवस्था की रीढ़ होता है।</p>
<p>सीएम ने अफसरों से कहा कि लोक प्रशासन में तकनीक और डिजिटल सेवाओं का अधिकतम उपयोग कर जनता को त्वरित राहत दें। हमने ग्राम स्तर तक ई-फाइल प्रणाली को लागू कर दिया गया है तथा सभी विभागों में ऑनलाइन पेपर लेस कार्य हो रहा है। संपर्क पोर्टल से डेढ़ करोड़ से अधिक शिकायतों का निस्तारण हुआ है। 33 लाख मामलों में से 99 प्रतिशत से अधिक निस्तारित हो चुके हैं। सुशासन के तहत किए गए नवाचारों, उत्कृष्ट कार्यों, संपर्क पोर्टल पर लोक शिकायतों के निस्तारण की विभाग, व्यक्तिगत, जिला श्रेणी में विभिन्न अधिकारियों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार-2025 एवं राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पुरस्कार प्रदान किए। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने रिमोट का बटन दबाकर कर्मयोगी कौशल विकास सप्ताह की शुरूआत की। ओटीएस परिसर में फोटो गैलरी एवं सिविल सेवा अधिकारी संस्थान के मॉडल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव सुधांश पंत, पुलिस महानिदेशक उत्कल रंजन साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरिजीत बनर्जी सहित वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे। वहीं सभी जिलों से लोक सेवक वीसी के माध्यम से जुड़े।</p>
<p><strong>राइजिंग राजस्थान समिट से प्रदेश मजबूत बनेगा</strong><br />सीएम ने कहा कि राज्य में राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित किया जिसमें निवेशकों द्वारा लगभग 35 लाख करोड़ रुपए के एमओयू किए हैं। 3 लाख करोड़ रुपए के एमओयू की ग्राउंड ब्रेकिंग भी की जा चुकी है। रामजल सेतु और यमुना जल समझौते जैसे प्रोजेक्ट्स से पेयजल व सिंचाई के लिए भरपूर जल मिलेगा। आईजीएनपी के लिए 3 हजार 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। </p>
<p>अफसर  सम्मानित: उद्योग विभाग के प्रमुख शासन सचिव अजिताभ शर्मा, पेंशन विभाग निदेशक देवराज, आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल विपिन माथुर को सीएम एक्सीलेंस अवार्ड दिया गया। व्यक्तिगत श्रेणी मेंसंभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी, आईएएस शुभम चौधरी, जोधपुर जिला परिषद सीईओ धीरज कुमार सिंह, अनिल बेनीवाल, भरतपुर उपवन सरंक्षक मानस सिंह, बीकानेर जेल अधीक्षक सुमन मालीवाल को सम्मानित किया। राजस्थान संपर्क पोर्टल में योगदान के लिए आईएएस वैभव गालरिया, नगर निगम ग्रेटर आयुक्त रूकमणी रियार, सुरेश कुमार ओला, प्रियंका गोस्वामी सम्मानित हुई। झालावाड़ कलक्टर अजय सिंह राठौड़, जोधपुर कलक्टर गौरव अग्रवाल, आईएएस कमर उल जमाल चौधरी,  बालमुकंद असावा, बाडमेर के तत्कालीन कलक्टर निशांत जैन, प्रतापगढ़ कलक्टर अंजलि राजौरिया, इन्द्रजीत यादव को सम्मानित किया गया। </p>
<p><strong>राजस्थान संपर्क पोर्टल में उत्कृष्ट कार्य करने पर कृषि आयुक्त सम्मानित</strong><br />लोक सेवा दिवस-2025 के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान सम्पर्क पोर्टल सम्मान पुरस्कार के तहत कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल को यह सम्मान वर्ष 2024 में राज्य सरकार के संपर्क पोर्टल पर प्राप्त जन शिकायतों को  प्रभावी रूप से निस्तारण करने के उपलक्ष में दिया गया हैं। चिन्मयी गोपाल वर्ष 2014 बैच की आईएएस अधिकारी है। उन्होंने कलक्टर झुंझुनूं, टोंक, संयुक्त सचिव उद्योग विभाग, आयुक्त नगर निगम अजमेर सहित अन्य पदों पर रहते हुए प्रशासनिक सेवाएं दी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Apr 2025 10:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिविल सर्विसेज डे : आईएएस बनने का क्रेज पांच गुना बढ़ा, 1% का ही होता है चयन</title>
                                    <description><![CDATA[परीक्षा के जरिये शेष उम्मीदवारों में से 18 अन्य सेवाओं जिनमें आईपीएस, आईएफएस, भारतीय विदेश सेवा, आईआरएस सहित अन्य का चयन होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-craze-to-become-civil-services-day-ias-increases-by/article-111459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश में सरकारी मशीनरी के मुख्य किरदार आईएएस अधिकारी होते हैं। सरकार की गुड गर्वनेंस, प्लानिंग, जनता के काम, विकास और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने काम इनके कंधो पर ही होता है।  देश में सीधे यूपीएससी से चयनित होकर वर्तमान में 3511 आईएएस काम कर रहे हैं। राजस्थान में इनकी संख्या मात्र 197 हैं। आईएएस के रूप में ब्यूरोक्रेसी के मुख्य स्तम्भ बनने के लिए यूपीएससी हर साल सिविल परीक्षा का आयोजन करता है, जो देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। लेकिन आईएएस बनने का क्रेज बीते डेढ़ दशक में पांच गुना बढ़ा है। यूपीएससी के रिकॉर्ड के मुताबिक 2007 में जहां 3,33,680 उम्मीदवारों ने आवेदन किए। लेकिन परीक्षा केवल 1,61, 469 लोगों ने ही दी। वहीं 2023 में आवेदन करने वालों की संख्या 13 लाख हो गई, जबकि करीब 7 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा अटेंड की। चयन का औसत केवल 1 से अधिकतम 1.5 फीसदी ही रहता है।</p>
<p><strong>आजादी के पहले लंदन में ब्रिटिश लोग चुने जाते थे</strong><br />आजादी से पहले 1854 में ब्रिटिश हुकूमत ने देश में ब्रिटिश प्रशासन को योग्य अधिकारी चुनने के लिए इस परीक्षा की शुरूआत की थी। लॉर्ड मैकाले कमेटी ने लंदन में ही परीक्षा आयोजित करवाई। तब केवल ब्रिटिश नागरिक ही इसमें पात्र थे। बाद में भारतीय युवाओं को भी मौका मिलने लगा। 1922 में पहली बार दिल्ली में भी इसकी परीक्षा हुई। 1947 में यूपीएससी का गठन हुआ। 1950 में परीक्षा का आधुनिकीकरण किया गया। आजादी के बाद पद का नाम आईसीएस से बदलकर आईएएस किया गया। 1979 में परीक्षा को त्रिस्तरीय किया गया। पहले एक ही परीक्षा हुआ करती थी।  पहले अंग्रेजी में होती थी। 1979 से हिन्दी सहित 22 भाषाओं में होती है। </p>
<p><strong>प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ी, लेकिन पद नहीं बढ़े</strong><br />यूपीएससी हर साल सिविल सेवा परीक्षा के जरिये देश को नए आईएएस अफसर देती है। लेकिन जनसंख्या बढ़ोतरी, आवश्यकता के मुताबिक पदों में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। उलट पद 2014 के बाद घटे हैं। वर्ष 2007 में जहां 734 नए आईएएस बने। वर्ष 2008 में 881, 2009 में 989, 2010 में 965, 2011 में 999, 2012 में 998, 2013 में 1122, 2014 में 1236 आईएएस बने। इसके बाद पदों की संख्या घटी। वर्ष 2015 में 1078, 2016 में 1099, 2017 में 1056, 2018 में 759, 2019 में 829, 2020 में 833, 2021 में 761, 2022 में 933 और 2023 में 1016 नए आईएएस बने। परीक्षा त्रिस्तरीय होती है। प्रारम्भिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं। क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के पात्र होते हैं। नौ पेपर होते हैं। औसतन 1 से 1.5 फीसदी यानी 10-15 हजार का का चयन इंटरव्यू, पर्सनलिटी टेस्ट के लिए होता है। इनमें से पद मुताबिक चयन होता है। परीक्षा के जरिये शेष उम्मीदवारों में से 18 अन्य सेवाओं जिनमें आईपीएस, आईएफएस, भारतीय विदेश सेवा, आईआरएस सहित अन्य का चयन होता है। </p>
<p><strong>राजस्थान के पापुलर रहे आईएएस</strong><br /><strong>नरेश चन्द्रा</strong><br />1956 बैच के अफसर थे। अमेरिका में भारतीय राजदूत भी रहे। बेहतर कार्यप्रबन्धन के चलते 2007 में पदम विभूषण से सम्मानित हुए। <br /><strong>टीएन चतुर्वेदी</strong><br />1950 बैच के अफसर थे। केन्द्रीय गृह सचिव, प्रदेश से पहले देश के सीएजी बने। बोर्फोस डील अनियमितता का खुलासा किया था। पदम विभूषण से सम्मानित हुए। 2002-2007 तक कर्नाटक के राज्यपाल भी बने। <br /><strong>राजीव महर्षि</strong><br />पूर्व मुख्य सचिव रहे। भारत के दूसरे राजस्थान कैडर से सीएजी बने। <br /><strong>सुनील अरोड़ा</strong><br />सीएम सचिव रहे, गुड गर्वनेंस और प्रशासनिक कुशलता के लिए जाने जाते थे। बाद में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। <br /><strong>रोहित कुमार सिंह</strong><br />कोरोनाकाल में कोविड स्क्रीनिंग, वायरस चैन ब्रेकिंग प्लानिंग, ट्रीटमेंट प्रबन्धन के लिए मशहूर हुए। कोविड में उनका भीलवाड़ा मॉडल देशभर में चर्चित रहा।  <br /><strong>अरविंद मायाराम</strong><br />केन्द्रीय वित्त सचिव रहे। पूर्व सरकार के आर्थिक सलाहकार रहे। <br /><strong>संजय मल्होत्रा</strong><br />1990 बैच के आईएएस हैं। वर्तमान में आरबीआई के गर्वनर हैं। आईआईटी कानुपर से पढ़े हैं।</p>
<p><strong>राजस्थान में आईएएस वैंकटाचार्य सीएम भी रहे</strong><br />राजस्थान में 1922 बैच के आईएएस सीएस वैंकटाचार्य 6 जनवरी 1951 से 26 अप्रैल 1951 तक 110 दिन के लिए सीएम भी रहे। वे मूलत: मैसूर के पास कोलार के रहने वाले थे। तब लंदन में आयोजित यूपीएससी सिविल परीक्षा में चयनित 19 आईएएस में से एक थे। 1931 में देश की जनगणना में अहम भूमिका निभाई थी। 1947 में संविधान सभा के सदस्य भी रहे।   </p>
<p><strong>चयन की चुनौती पर बोले अफसर</strong><br />आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई के वक्त कई जन समस्याएं देखते थे, तब तय किया की आईएएस बनना है। दो सीनियर्स भी इसकी तैयारी में जुटे थे। वे भी वर्तमान में आईएएस है। पहले आईएएस के साक्षात्कार में रह गया था, कैट एग्जाम से आईआईएम अहमदाबद में चला गया। तैयारी दोबारा शुरू की और आईआईएम को बीच में ही छोड़ दिया। जब तक चयन नहीं हुआ तब तक का समय मुश्किल से निकला। कोचिंग नहीं की और घर पर ही तैयारी की। सलेक्शन को विश्वास, मेहनत, फोकस और स्टडी प्लानिंग सबसे जरूरी हैं। <br />-संदीप वर्मा, सीएमडी, <br />राजस्थान स्टेट वेयरहाऊसिंग कॉरपोरेशन।</p>
<p>चुनौतियां मेहनत से हार जाती है। मैंने पढ़ाई पर फोकस किया। सफलता मिल गई। आईएएस की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को यही सलाह है कि मेहनत का कोई सबस्ट्यिूट नहीं है। परीक्षा का सिलेबस अच्छे से हर एंगल से पढ़ें। रोजाना की जनरल नॉलेज से भी अपडेट रहें। मेहनत करेंगे तो निश्चित सफलता मिलेगी।<br />-आनंद कुमार, <br />अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग</p>
<p>मैंने बीटेक में स्नातक किया। लेकिन आईएएस परीक्षा हिस्ट्री और समाज शास्त्र विषय लेकर दी। मेरे लिए दोनो विषय नए थे। मेरे लिए इन नई विषयों की गहराई से स्टड़ी ही चुनौती जैसी थी। विषय के हर पहलू को गंभीरता से पढ़ा। सफलता मिली। जो युवा तैयारी कर रहे हैं, उनसे यही कहूंगा कि आईएएस में चयन मेहनत मांगती है। अगर करते हैं तो चयन तय है।<br />-वी.सरवन कुमार, सचिव, <br />साइंस एंड टैक्नोलॉजी विभाग।</p>
<p>मैंने आईआईटी बोम्बे से बीटेक किया। फिर यूएस में नौकरी की। मेरी कोई आईएएस बनने की इच्छा नहीं थी। लेकिन पिताजी का सपना था। 1996 में बीटेक किया। फिर सात साल बाद 2003 में तैयारी कर आईएएस बना। जीवन में कोई कोचिंग पढ़ने नहीं गया। मां से फिजिक्स-कैमिस्ट्री पढ़ी। खैर, सभी की अलग परिस्थितियां होती है। उसके अनुकूल लक्ष्य प्राप्त करने का प्लान बनाना चाहिए। यह भी तय करना होगा कि आईएएस किस लक्ष्य से बन रहे हैं।<br />-अम्बरीश कुमार, <br />सचिव, मेडिकल शिक्षा विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 09:19:13 +0530</pubDate>
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                <title>आज नेशनल सिविल सर्विसेज डे: प्रशासनिक दक्षता के साथ खेल मैदान पर भी चमके हैं कई अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना महामारी के चलते महाजन पिछले दो साल से किसी टूर्नामेंट में तो नहीं उतरे लेकिन खेल के मैदान से उनका जुड़ाव नियमित रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/today-national-civil-services-day--many-officers-have-shined-on-the-playing-field-with-administrative-efficiency--ias-naveen-mahajan-is-the-champion-of-civil-services-tennis--irs-shivpuri-has-taken-over-the-command-of-rajasthan-tennis-association/article-8275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/tennis1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय प्रशासनिक सेवा के कई ऐसे अधिकारी राजस्थान में तैनात हैं, जिन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता के साथ खेल के मैदान पर भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। 1997 बैच के आईएएस अधिकारी और सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव नवीन महाजन लम्बे समय से टेनिस से जुड़े हैं। नवीन महाजन ने 2018 और 2019 में लगातार दो बार ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज टेनिस में 45+ वर्ग में गोल्ड जीता, वहीं पुणे में 2019 में ओपन वर्ग में महाजन जयपुर के ही जगदीश तंवर के साथ रजत पदक विजेता रहे। महाजन ने बताया कि फाइनल में तब वे सूद ब्रदर्स की जोड़ी से हारे, जो यंग प्रोफेशनल खिलाड़ी हैं, और कई आईटीए खिताब जीत चुके हैं। कोरोना महामारी के चलते महाजन पिछले दो साल से किसी टूर्नामेंट में तो नहीं उतरे लेकिन खेल के मैदान से उनका जुड़ाव नियमित रहता है। सुबह पांच बजे उठना और टेनिस कोर्ट पर पहुंचना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बना है। उन्होंने कहा कि टेनिस खेलने से उन्हें थकान नहीं बल्कि मोटिवेशन मिलता है।<br /><br /><strong>शुरू कराया सीएस चैलेंज कप</strong><br />करीब दस-ग्यारह साल पहले महाजन जब जयपुर कलक्टर थे, तब ही उन्होंने जयपुर में शानदार आयोजन के साथ राजस्थान में सीएस चैलेंजर्स कप की शुरुआत कराई। तब टेनिस और बैडमिंटन में कुछ ही टीमें खेलती थीं, लेकिन अब इस टूर्नामेंट में विभिन्न विभागों की 16 से 18 टीमें शिरकत करती हैं। महाजन सीएस चैलेंज कप में शुरू से ही आईएएस टीम के कप्तान हैं और टेनिस के अब तक हर संस्करण में खिताब आईएस टीम के पास ही रहा है। इसके अलावा इंटर क्लब टेनिस में महाजन जय क्लब के लिए पिछले दस साल से खिताब जीतते रहे हैं।<br /><br /><strong>खिलाड़ियों के चहेते हैं विष्णु चरण</strong><br />ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज टेनिस की टीम स्पर्धा में इसी साल चंडीगढ़ में रजत और पिछले साल दिल्ली में कांस्य पदक विजेता विष्णु चरण मलिक अपने सरल स्वभाव के चलते खिलाड़ियों के चहेते अफसर हैं। 2007 बैच के आईएएस अधिकारी मलिक करौली, झालावाड़, जोधपुर और उदयपुर के कलक्टर रह चुके हैं और फिलहाल डेपुटेशन पर केन्द्र सरकार के गृहमंत्रालय में जनगणना निदेशक राजस्थान के पद पर तैनात हैं। सवाई मानसिंह स्टेडियम और जयक्लब टेनिस कोर्ट्स पर मलिक को खेलते और युवा खिलाड़ियों को खेल में मदद करते देखा जा सकता है। मलिक ने बताया कि वे राजस्थान से आईएएस टीम से खेले और अब केन्द्रीय सेवा के अधिकारियों की टीम में खेल रहे हैं। राजस्थान के सीएस चैलेंज कप में भी चैंपियन बनी आईएएस टीम के पांच बार हिस्सा रह चुके हैं।<br /><br /><strong>चार बार डेविस कप का आयोजन</strong><br />पूर्व मुख्य आयकर आयुक्त दिलीप शिवपुरी की पहचान खिलाड़ी से ज्यादा खेल प्रशासक के रूप में रही है। लम्बे समय से राजस्थान टेनिस एसोसिएशन की कमान संभाले शिवपुरी ने प्रतिष्ठित डेविस कप का आयोजन चार बार जयक्लब कोर्ट्स पर कराया। शिवपुरी ने 1991 में इंडोनेशिया, 1994 में हालैंड, 1996 में दक्षिण अफ्रीका और 2005 में उज्बेकिस्तान के खिलाफ भारत का डेविस कप मुकाबला जयपुर में कराया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Apr 2022 12:48:00 +0530</pubDate>
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