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                <title>municipal corporation's - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कंडम वाहन भी दे गए निगम को डेढ़ करोड़ रुपए, 12 साल बाद हुई निगम के कंडम वाहनों व स्क्रेप की नीलामी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कंडम वाहनों की रखवाली पर हर साल निगम को लाखों रुपए खर्च करने पड़ रहे थे।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/obsolete-vehicles-also-cost-the-corporation-1-5-crore-rupees/article-146234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के गैराज अनुभाग में एक ओर जहां बड़ी संख्या में नए वाहन व मशीनरी आई हैं। वहीं बरसों पुराने वाहन कंडम भी हो गए हैं। ये कंडम वाहन निगम के लिए परेशानी का कारण बने हुए थे। अब उन्हीं कंडम वाहनों व स्क्रेप की नीलामी से निगम को करीब डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की आय हुई है।</p>
<p>नगर निगम का गैराज पहले किशोरपुरा में था। बरसों पुराना होने से वहां नए-नए वाहन आने पर वह गैराज छोटा पडे लगा। निगम के गैराज में पिछली कांग्रेस सरकार के समय सफाई की बड़ी-बड़ी मशीनरी से लेकर छोटी वाहन तक आए हैं। जिससे उन वाहनों को गैराज में खड़ा करने में समस्या आ रही थी। उसके समाधान के लिए नगर निगम की ओर से हाल ही में रामतलाई में नया गैराज बनाया गया है। अब वहीं से वाहनों का संचालन हो रहा है। साथ ही गैराज अनुभाग का पूरा आॅफिस भी वहीं शिफ्ट हो गया है।</p>
<p><strong>पुराने व कंडम वाहनों से हो रही थी समस्या</strong><br />पुराने गैराज में नए वाहन आने के साथ ही कई पुराने वाहन भी थे। जिसके कारण उन्हें रखने में समस्या आ रही थी। ऐसे में पहले तो पुराने वाहनों को हटाया गया था। जिससे कुछ जगह बनी लेकिन वह भी छोटी पड़ी तो नया गैराज बनाना पड़ा। अब पुराने गैराज का उपयोग किशोरपुरा मुक्तिधाम के विस्तार के रूप में किया जाएगा।</p>
<p><strong>दशहरा मैदान फेज एक व दो में रखे वाहन</strong><br />नगर निगम के पुराने व कंडम वाहनों को पहले तो दशहरा मैदान के फेज एक में रखा गया था। लेकिन दशहरा मेले के समय उन्हें वहां से हटाकर फेज दो में पुराना पशु मेला स्थल के पीछे की तरफ रखा गया था। जिससे जगह भी रूकी हुई थी और उन कंडम वाहनों की रखवाली भी निगम को करनी पड़ रही थी। जिस पर हर साल लाखों रुपए खर्च करने पड़ रहे थे।</p>
<p><strong>12 साल बाद हुई नीलामी</strong><br />नगर निगम के सफाई से लेकर मशीनरी तक हर साल कंडम हो रही थी। लेकिन उन कंडम वाहनों की नीलामी नहीं होने से उनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही थी। हालांकि निगम के अधिकारियों ने कई बार प्रयास किए लेकिन किसी ने किसी कारण से नीलामी नहीं हो सकी थी। अब करीब 12 साल बाद निगम के कंडम व पुराने वाहनों के साथ ही स्क्रेप, टायर, बैटरी व एल्यूमीनियम की नीलामी हुई है।</p>
<p><strong>1.60 करोड़ की हुई आय</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता(गैराज) रविन्द्र कुमार सैनी ने बताया कि निगम के कंडम व पुराने वाहनों व स्क्रेप की नीलामी की गई है। जिनमें वाहनों से निगम को 1 करोड़ 1 लाख 59 हजार रुपए और इसके अलावा टायर, स्क्रेप, बैटरी व एल्यूमीनियम से कुल 1 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक की आय हुई है। उन्होंने बताया कि नीलामी तो हो गई है लेकिन कायार्देश जारी होने के बाद वाहनों को दशहरा मैदान फेज दो से हटाया जाएगा। अभी सभी वाहन वहीं रखे हुए हैं।</p>
<p><strong>रद्दी की भी होगी नीलामी</strong><br />नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि निगम के गैराज में बरसों से कंडम वाहन पड़े हुए थे। फिलहाल उन्हें दशहरा मैदान में पीछे की तरफ रखा गया था। जहां उनकी रखवाली पर ही काफी खर्चा करना पड़ रहा था। उसके बाद भी उन वाहनों में से आए दिन चोरी हो रही थी। ऐसे में कमेटी के माध्यम से पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए अलग-अलग चार कैटेगरी में नीलामी की गई। बरसों बाद कंडम वाहनों की नीलामी हुई है। जिससे निगम को आय भी हुई और जहग भी खाली हो गई है। अब बरसों से जमा अखबार व अन्य रद्दी की भी नीलामी की जाएगी। सूत्रों के अनुसार रद्दी की करीब 20 साल से नीलामी नहीं हुई है। वर्ष 2006 में नीलामी हुई थी।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:22:49 +0530</pubDate>
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                <title>सांप मारने को लाठी पीट  रहे, वह भी आधी अधूरी</title>
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                        <![CDATA[ एक बार फिर नोटिस देकर की इतिश्री-हादसों के कुछ दिन तक ही नजर आती है अधिकारियों की सक्रियता।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-re-using-sticks-to-kill-a-snake--and-that-too-is-half-hearted/article-144681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस एक :</strong> जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में एक तीन मंजिला रेस्टोरेंट के ढहने से दो लोगों की मौत के बाद नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आया। अवैध निर्माण के नोटिस भी दिए गए। लेकिन उसके बाद केडीए ने तो किसी के भी खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई तक नहीं की। जबकि निगम ने की चार अवैध निर्माण भवनों को सीज करने के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं की।</p>
<p><strong>केस दो : </strong>रेस्टोरेंट हादसे के बाद नगर निगम का फायर अनुभाग भी सक्रिय हुआ। फायर टीम ने नए कोटा शहर के कोचिंग इलाकों में तीन से चार दिन तक तो अभियान चलाकर करीब डेढ़ सौ से अधिक नोटिस जारी किए। लेकिन उसके बाद उन नोटिसों की पालना हुई या नहीं। किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>स्कूल हादसे के बाद भी चेते थे अधिकारी:</strong> इसी तरह बरसात के समय में झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत ढहने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद सरकार व प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में सभी जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया गया। उनमें बच्चों को बैठने से रोका गया। सरकार ने जर्जर स्कूल भवनों के लिए बजट भी पारित कर दिया। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। अभी तक भी किसी स्कूल की मरम्मत तक नहीं हुई है। ये तो उदाहरण मात्र हैं उस स्थिति को बताने के लिए जो कुछ दिन पहले शहर में उत्पन्न हुई थी। हालत यह है कि हर बार किसी भी तरह का बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासन उस समय या कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आता है लेकिन उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति हो जाती है।</p>
<p><strong>केडीए ने दिए सौ से अधिक नोटिस</strong><br />रेस्टोरेंट हादसा होने के बाद जांच में पता चला कि जो रेस्टोरेंट ध्वस्त हुआ था उसका निर्माण अवैध था। उसके पास के अन्य 5 भवन भी अवैध निर्माण की बुनियाद पर खड़े हुए थे। उसे देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से नए कोटा शहर के कोचिंग एरिया जवाहर नगर, इंद्र विहार, तलवंडी, महावीर नगर, के अलावा कुन्हाड़ी लैंड मार्क और बोरखेड़ा स्थित नयानोहरा समेत कई जगह पर बहुमंजिला इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए। जानकारी के अनुसार करीब 100 से 125 नोटिस जारी किए। लेकिन उन नोटिसों को देने के बाद उन पर आगे क्या कार्रवाई की गई। इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार ही नहीं है।</p>
<p><strong>अग्नि सुरक्षा नहीं होने पर दिए नोटिस</strong><br />इसी तरह नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से हॉस्टलों व रेस्टोरेंट समेत अन्य बहुमंजिला उमारतों में आग से सुरक्षा की जांच की गई। उनमें से कहीं फायर सिस्टम नहीं था तो कहीं कार्यशील अवस्था में नहीं थे। कहीं आग से सुरक्षा के नाम पर मात्र दिखावे के छोटे उपकरण रखे हुए थे। ऐसे में नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से अभियान चलाकर करीब 150 से अधिक नोटिस दिए गए। उन नोटिसों के बाद उनकी पालना हुई या नहीं। भवन मालिकों ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए या नहीं। इसकी कोई जानकारी अभी तक नहीं है।</p>
<p><strong>फिर किसी हादसे का इंतजार</strong><br />शहर में किसी तरह का हादसा होने के कुछ दिन बाद तक तो सभी विभाग व जिला प्रशासन सक्रिय रहता है। फिर चाहे संभागीय आयुक्त हो या जिला कलक्टर। सभी ने बैठकें लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं हो। इसके लिए जो भी संभव हो कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के निर्देश के बाद संबंधित विभाग हरकत में आए और कुछ दिन तक ऐसा लगा मानो अब शहर में ऐसी कार्रवाई होगी जिससे अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों को सबक मिलेगा। जबकि ऐसा लगता है कि प्रशासन व संबंधित विभाग फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही सख्त कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>17 दिन हुए हादसे को</strong><br />दिल्ली स्पाइसी रेस्टोरेंट को ध्वस्त हुए 17 दिन का समय हो गया है। 8 फरवरी की रात को हुए हादसे में एक कोचिंग छात्र व एक युवक की मौत हो गई थी। जबकि एक महिला के मलबे में दबने से उनका पैर इतना जख्मी हो गया था कि उसे काटना ही पड़ा। विभागीय व भवन मालिकों की लापरवाही का खामियाया बेगुनाहों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इंद्र विहार में जिस रेस्टोरेंट का अवैध निर्माण था। उस समेत आस-पास के 5 भवनों को नोटिस दिया गया था। जिनमें से एक जर्जर भवन के मालिक ने तो स्वयं ही उसे ढहा दिया था। जबकि अन्य 4 को सीज कर दिया है। वहीं फायर के नोटिसों की पालना करवाई जाएगी। पालना नहीं करने वालों के खिलाफ निर्धारित समय के बाद कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:24:55 +0530</pubDate>
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                <title>निगम के सामुदायिक भवनों का उपयोग हो रहा न कमाई,  सुविधाओं का अभाव </title>
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                        <![CDATA[भवनों का बढ़ा किराया बोर्ड बैठक में किया कम, कागजों में नहीं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-corporation-s-community-buildings-are-not-being-used--nor-are-they-generating-revenue--and-lacking-amenities/article-134955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में नगर निगम के सामुदायिक भवन तो बने हुए हैं लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते अधिकतर भवन दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। साथ ही बोर्ड बैठक में भवनों का बढ़ा किराया कम करने का निर्णय तो कर दिया लेकिन कागजों में अभी भी बढ़ा हुआ किराया ही लिया जा रहा है। जिससे न तो इन भवनों का उपयोग हो रहा है और न ही निगम को कमाई। शहर में जहां प्राइवेट सेक्टर में बड़े-बड़े मैरिज गार्डन व सामुदायिक भवन बने हुए हैं। वहीं कोटा विकास प्राधिकरण के सामुदायिक भवन भी काफी बड़े व वैवाहिक आयोजनों के हिसाब से बने हुए हैं। वहां हॉल से लेकर गार्डन तक और जन सुविधा से लेकर बिजली- पानी तक की सभी सुविधाएं हैं। सुविधाएं पर्याप्त होने से इनका किराया भी उसी हिसाब से वसूल किया जा रहा है। वहीं शहर में नगर निगम के सामुदायिक भवन तो बने हुए हैं। ये अधिकतर क्षेत्रों में है। फिर चाहे भीमगंजमंडी क्षेत्र हो या खेड़ली फाटक, नयापुरा हो या विज्ञान नगर। किशोरपुरा हो या छावनी क्षेत्र। सभी जगह पर सामुदायिक भवन हैं लेकिन उनमें से अधिकतर में सुविधाओं का अभाव है।</p>
<p><strong>बाहर से ही देखने पर पता चल रही स्थिति</strong><br />शहर में नगर निगम के सामुदायिक भवनों की हालत बाहर से ही देखने पर पला चल रही है। बाहर की तरफ ही कचरे का इतना अधिक अम्बार लगा हुआ है कि उसे देखते हुए ही आयोजन के लिए लोग इनका उपयोग करने से कतराने लगे। वहीं अंदर जाने पर न तो उनमें लाइटें हैं और न ही पानी की सुविधा। इतना ही नहीं स्नानघर से लेकर जन सुविधाएं तक की इतनी दुर्दशा कि उन्हें देखकर ही लोग आयोजन करना तो दूर वहां कुछ देर तक टिक भी नहीं पाते। यह स्थिति किसी एक भवन की नहीं अधिकतर की है।</p>
<p><strong>अधिकतर बस्तियों में भवन</strong><br />निगम के अधिकतर सामुदायिक भवन बस्तियों में बने हुए हैं। जिनका निगम के स्तर पर संचालन तो किया जा रहा है लेकिन उनका उपयोग बिना निगम की जानकारी के ही स्थानीय लोगों द्वारा किया जा रहा है। पूर्व में ऐसा ही एक मामला छावनी सामुदायिक भवन का आया था। जिस पर निगम अधिकारियों ने उस भवन को खाली करवाकर उस पर अपना ताला लगाया था। वहीं किशोरपुरा मुख्य मार्ग पर स्थित सामुदायिक भवन की स्थिति यह है कि उसके बाहर कबाड़ का ढेर लगा हुआ है। हैंडपम्प लगा है लेकिन उसमें पानी ही नहीं आता। भवन के अंदर गंदगी हो रही है। धूल मिट्टी इतनी अधिक हो रही है जिसे देखकर लगता है कि इसका काफी समय से उपयोग ही नहीं हुआ होगा। जिस तरह से इस भवन के बाहर आयुक्त की आज्ञा से चेतावनी लिखी हुई है उसे देखते हुए लगता है कि इसका उपयोग भी बिना निगम की अनुमति के ही किया जा रहा होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सामुदायिक भवन का किराया पहले से सात गुना अधिक बढ़ा दिया है। पहले एक हजार रुपए किराया था लेकनि अब यह 7 हजार से अधिक कर दिया है। ऐसे में गरीब परिवार के लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<p><strong>बिजली का बिल चढ़ा तो कटवा दी लाइट</strong><br />सूत्रों के अनुसार पूर्व में सभी सामुदायिक भवनों में बिजली कनेक् शन चालू थे। लेकिन उनका बिजली का बिल काफी बढ़ गया था। उसे चुकाने के लिए निगम के पास बजट नहीं था। ऐसे में कोटा दक्षिण के तत्कालीन आयुक्त कीर्ति राठौड़ के समय में सभी सामुदायिक भवनों का बिजली कनेक् शन कटवा दिया था। उसके बाद से जो भी इन भवनों को किराए पर लेता है। उसे निगमर की ओर से विशेष मोहर लगाकर दी जाती है। जिसमें लिखा हुआ है कि बिजली व पानी की व्यवस्था आयोजक को स्वयं के स्तर पर ही करनी होगी।सूत्रों के अनुसार कोटा दक्षिण क्षेत्र में भीतरिया कुंड समेत कुल १२ सामुदायिक भवन हैं। उनमें से भीतरिया कुंड के अलावा विज्ञान नगर व गोविंद नगर के ही भवनों की बुकिंग होती है। वह भी बढ़ी हुई दर से ही की जा रही है।</p>
<p><strong>कोटा दक्षिण आयुक्त ने बढ़ाया था किराया</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के सामुदायिक भवनों का किराया तो अभी भी पुराना ही बना हुआ है। जबकि कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र के भवनों का किताया निगम के तत्कालीन आयुुक्त द्वारा महापौर की जानकारी के बिना ही कई गुना बढ़ा दिया था। जिसका स्थानीय लोगों व पार्षदों ने विरोध किया था। उसके बाद निगम की बोर्ड बैठक में सामुदायिक भवनों का बढ़ा किराया विड्रो करते हुए फिर से पुराना किराया ही लागू कर दिया था। लेकिन हालत यह है कि अभी भी सिर्फ भीतरिया कुंड का ही किराया कम हुआ है। जबकि अन्य सामुदायिक भवनों का किराया अभी भी बढ़ी हुई दर से ही लिया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा उत्तर व दक्षिण निगम एक होने के बाद सामुदायिक भवनों की सूची संधारित करवाई जा रही है। साथ ही निर्माण अनुभाग से इनकी मरम्मत व अन्य आवश्यक कार्य करवाए जाएंगे। बढ़ा हुआ किराया कम करने के संबंध में अलग से आदेश जारी किया जाएगा। शीघ्र ही किराया तो कम कर दिया जाएगा। जिससे अधिकतर लोग इनका उपयोग कर सके। हालांकि पिछले कुछ समय से सामुदायिक भवनों की बकिंग ही नहीं हुई है।<br /><strong>-धीरज कुमार सोनी, उपायुक्त राजस्व, नगर निगम कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 15:45:15 +0530</pubDate>
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                <title>थेगड़ा से नांता तक दुर्गंध फैला रहे डम्पर, रास्ते में कई जगह सड़क पर गिर रहा कचरा</title>
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                        <![CDATA[लगातार भारी बारिश से पूरा कचरा गीला हो गया जिसे निगम के डम्परों से ट्रेचिंग ग्राउंड बिना ढके पहुंचाया जा रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dumpers-spreading-foul-odor-from-thegda-to-nanta--garbage-falling-on-the-road-in-many-places-along-the-way/article-130951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/11137.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शहर को एक तरफ तो गंदगी व कचरे से मुक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे है। वहीं दूसरी तरफ नगर निगम के कर्मचारी ही शहर में गंदगी व दुर्गंध फेला रहे है। वह भी थेगड़ा स्थित ट्रांसफर स्टेशन से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड तक। नगर निगम कोटा उत्तर का कचरा ट्रांसफर स्टेशन शिवपुरी धाम के पास थेगड़ा में बना हुआ है। जहां घर-घर कचरा संग्रहण में लगे टिपर व ट्रेक्टर ट्रॉलियों से क्षेत्र का कचरा यहां लाकर डाला जा रहा है। उसके बाद उस कचरे को जेसीबी की सहायता से डम्परों में भरकर नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। हालत यह है कि शहर में पिछले दो दिन तक लगातार भारी बारिश हुई। जिससे पूरा कचरा गीला हो गया। ऐसे में निगम के डम्परों से उस गीले कचरे को ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है वह भी बिना ढके हुए। जबकि नियमानुसार कचरे की चाहे ट्रेक्टर ट्रॉली हो या डम्पर उसे तिरपाल से ढककर ही ले जाने का प्रावधान है। जिससे न तो उनका कचरा सड़क पर बिखरे और न ही उसकी दुर्गंध का लोगों को सामना करना पड़े। लेकिन हालत यह है कि पिछले कई दिन से निगम के डम्परों में थेगड़ा से नांता ट्रेचिंग ग्राउंड तक बिना तिरपाल ढके ही कचरे का परिवहन किया जा रहा है। जिससे पूरे रास्ते में उस  गीले कचरे की दुर्गंध फेल रही है। साथ ही कचरा ओवर लोड होने से सड़क पर बिखरता जा रहा है। जिससे उस डम्पर के पीछे व साइड से गुजर रहे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>वाहन चालकों का कहना है कि इस तरह से  बिना ढके कचरा ले जाना गलत है। इससे लोगों को दुर्गंध का सामना करने के साथ ही गंदगी उन पर  गिरने का खतरा बना हुआ है। निगम को चाहिए कि वह कचरे को ढककर ही परिवहन करे। गौरतलब है कि  नगर निगम कोटा उत्तर में आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन शुरु नहीं होने से कचरे का  बंद कंटेनरों में हाइजनिक तरीके से परिवहन नहीं हो पा रहा है। जिसका खामियाजा शहर वासियों को भुगतना पड़ रहा है। कोटा उत्तर में स्टेशन रोड खेड़ली फाटक व उम्मेदगंज में ट्रांसफर स्टेशन बनकर तैयार हो गए हैं लेकिन उन्हें शुरु नहीं किया जा रहा है। जबकि कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशनों से बंद कंटेनरों में ही कचरे का परिवहन होने से पता ही नहीं चलता कि उनमें कचरा जा रहा है। इधर नगर निगम कोटा उत्तर के स्वास्थ्य अधिकारी मोतीलाल चौधरी का कहना है कि ट्रांसफर स्टेशन के कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि डम्परों में कचरे का परिवहन तिरपाल ढककर ही किया जाएगा। बिना ढके कचरा नहीं ले जा सकते है।  यदि थेगड़ा से बिना तिरपाल ढके कचरे का परिवहन हो रहा है तो वह गलत है। इस संबंध में संबंधित को फिर से पाबंद किया जाएगा। जिससे भविष्य में ऐसा नहीं हो सके। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 16:21:37 +0530</pubDate>
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                <title>दिया तले ही अंधेरा....जे.के. लोन अस्पताल में फिर मिली अग्निशमन संबंधित अनियमितताएं , न फायर अलार्म सिस्टम काम कर रहा और न ही प्रशिक्षित कर्मचारी हैं</title>
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                        <![CDATA[कोटा के जे.के. लोन अस्पताल में फायर टीम निरीक्षण के दौरान आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं पाए गए। फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी उजागर हुई। जिला प्रशासन ने 7 दिन में सुधार के निर्देश दिए हैं। जयपुर की ट्रोमा सेंटर आग की घटना के बाद जांच की गई थी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/darkness-under-the-lamp----fire-related-irregularities-were-again-found-at-j-k--lon-hospital--the-fire-alarm-system-is-not-working--nor-are-there-trained-personnel/article-129849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/63987.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिया तले ही अंधेरा...यह कहावत तो सभी ने सुनी है लेकिन इसका साक्षात उदाहरण है शहर का प्रमुख जे.के. लोन अस्पताल। सरकारी अस्पताल होने के बावजूद वहां ही आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। इसका खुलासा निगम की फायर टीम द्वारा पिछले दिनों किए गए निरीक्षण में हुआ। जयपुर के एसएमएस अस्पताल स्थित ट्रोमा सेंटर में गत दिनों हुई आग लगने की घटना के बाद कोटा में भी जिला प्रशासन व निगम का फायर अनुभाग सक्रिय हुआ है। घटना के अगले ही दिन की गई अस्पतालों की जांच में मिली कमियां अभी तक नहीं सुधरी है। </p>
<p>निगम की फायर टीम ने अस्पताल की पुरानी व नई ओपीडी बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के इंतजामों को देखा तो वहां अनियमितताएं पाई गई। नगर निगम कोटा उत्तर दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास के नेतृत्व में अग्निशमन अधिकारी अमजद  खान, अजहर मोहम्मद व सहायक अग्निशमन अधिकारी सीता चौपदार व अन्य कर्मचारियों ने जे.के. लोन अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की जांच की। सीएफओ व्यास ने बताया कि अस्पताल में फायर अलार्म सिस्टम कार्यशील अवस्था में नहीं पाया गया।  हॉज बॉक्स के सामने कर्मचारी के बैठने की सीट लगा रखी है लेकिन वहां प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। निकास द्वार पर अनावश्यक सामान एकत्र किया हुआ है। वहीं स्मॉक डिटेक्टर भी सही ढंग से काम नहीं कर रहा है।</p>
<p><strong>7 दिन में सुधार के लिए सुझाव</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि तीनों अस्पतालों में निरीक्षण के दौरान अग् िनशमन से संबंधित अनियमितताएं पाई गई। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को 7 दिन में फायर उपकरण कार्यशील अवस्था में रखने के सुझाव दिए गए। गौरतलब है कि जयपुर की घटना के बाद गत दिनों जिला कलक्टर ने शहर के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों की बैठक ली थी। जिसमें उन्हें अपने यहां अग्निशमन सुरक्षा संबंधी पुख्ता इंतजार रखने और फायर टीम को निरीक्षण के निर्देश दिए थे। निर्देशों की पालना नहीं करने वालों पर सख्त कार्रवाई को भी कहा था। उसी के तहत यह कार्रवाई की गई।     </p>
<p><strong>नई बिल्डिंग में भी कमियां</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि वहीं जे.के. लोन न्यू आईपीडी हॉस्टिपल में अग्ेिनशमन उपकरण तो स्थापित हैं लेकिन यहां भी प्रशिक्षित अग्ेिनशमन कर्मचारी नहीं लगाए गए हैं। साथ ही स्मॉकडिटेक्टर भी सही ढंग से काम नहीं कर रहा है।  हाईडेंट सिस्टम में पानी का प्रेशर कमजोर है। इसी तरह डीलक्स, न्यू कॉटेज वार्ड  व फीमेल मेडिकल वार्ड कुछ उपकरण कार्यशील अवस्था में नहीं पाए गए। लिफ्ट के अंदर रोशनी अपर्याप्त है।  एक जगह पर फायर हाईडेंट सिस्टम को रस्सी से बांधा हुआ है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 16:12:49 +0530</pubDate>
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                <title>घर-घर कचरा संग्रहण, फिर भी सड़कों पर लगा कचरे का ढेर</title>
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                        <![CDATA[शहर में सुबह-शाम सफाई होने के बाद भी गंदगी नजर आ रही है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-door-to-door-garbage-collection--but-still-heaps-of-garbage-on-the-roads/article-111622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य 1-</strong> छावनी चौराहे पर एलआईसी बिल्डिंग के सामने नगर निगम का घोषित कचरा पॉइंट बना हुआ है। जबकि यहां एलआईसी व बैंक समेत कई कार्यालय व होटल होने से यहां दिनभर लोगों को कचरे का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>दृश्य 2-</strong> गुमानपुरा मल्टी परपज स्कूल के मुख्य द्वार के पास ही निगम का कचरा पाइंट बना हुआ है। जहां निगम का डस्टीन भी रखा हुआ है। इस जगह पर दिनभर कचरे का ढेर लगा रहता है। जिससे गुमानपुरा जैसे मुख्य बाजार में आने वालों को उसका सामना करना पड़ तहा है। </p>
<p><strong>दृश्य 3-</strong> पुरानी सब्जीमंडी में न्यू क्लॉथ मार्केट के सामने मेन रोड पर ही कचरा पॉइंट  बना हुआ है। हालांकि पूर्व  में इसे यहां से साफ कर दिया था। लेकिन फिर से यहां कचरा पॉइंट बनने से दिनभर कचरे का ढेर लगा रहता है। जिससे इस व्यस्त बाजार में आने वालों को कचरे के ढेर से दोचार होना पड़ रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण है शहर की उस स्थिति को बताने के लिए जो सड़क पर कचरा पड़ा रहने से बन रही है। ऐसे कई स्थान हैं जहां निगम ने घोषित कचरा पॉइंट बनाए हुए हैं। वहां दिनभर कचरे के ढेर देखे जा सकते है। जो लोगों के लिए बीमारी फेलाने का कारण तो न ही रहे हैं साथ ही शहर की सुंदरता में भी ग्रहण लगा रहे हैं। शहर में दो-दो नगर निगम होने और घर-घर कचरा संग्रहण करने के बाद भी सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। जिससे सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सफाई नजर नहीं आ रही है। शहर में यह कचरा मेन रोड पर तो नजर आ ही रहा है। साथ ही अधिकतर नगर निगम की ओर से बनाए गए कचरा पॉइंट पर भी नजर आ रहा है। वर्तमान में गर्मी के सीजन में तेज हवा चलने से यह कचरा पूरी जगह पर फेल रहा है। ऐसे में शहर में सुबह-शाम सफाई होने के बाद भी गंदगी नजर आ रही है। </p>
<p><strong>हर वार्ड में दो टिपरों से हो रहा कचरा संग्रहण</strong><br />शहर में कोटा उत्तर व दक्षिण नगर निगम है। दोनों निगमों में स्थायी सफाई कर्मचारियों के अलावा संविदा पर भी सफाई कर्मचारी हर वार्ड में लगाए हुए हैं। इसके अलावा घर-घर कचरा संग्रहण का काम टिपरों के माध्यम से किया जा रहा है। दोनों निगमों के हर वार्ड में दो-दो टिपर लगे हुए हैं। ये टिपर-घर-घर घूमकर कचरा एकत्र कर रहे है। इन टिपरों के माध्यम से कचरे को सीधे ट्रांसफर स्टेशन पहुंचाया जा रहा है। लेकिन उसके बाद भी नगर निगम की ओर से हर वार्ड में 3 से 4 जगहों पर घोषित कचरा पॉइंट बनाए हुए हैं। जहां निगम कर्मियों के साथ ही आमजन भी कचरा डाल रहे है। हालांकि उन कचरा पॉइंट से कचरा उठाने का निगम ने ठेका दिया हुआ है। यह कचरा समय पर नहीं उठने से दिनभर कचरा पॉइंट पर पड़ा रहने से हवा के साथ चारों तरफ फेल रहा है। जिससे गंदगी और अधिक नजर आ रही है। </p>
<p><strong>गिनती के ही कचरा पॉइंट किए कम</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि निगम के स्तर पर  मेन रोड से कचरा पॉइंट कम तो किए हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। कोटा उत्तर  में नयापुरा और नदी पार क्षेत्र में दो कचरा पॉइंट खत्म किए हैं। वहीं कोटा दक्षिण में महावीर नगर स्थित सम्राट चौराहे का कचरा पॉइंट खत्म किया है। वहीं इस क्षेत्र के चार-पांच कचरा पाइंट को एक करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कोटा दक्षिण में मेन रोड लम्बे होने से कचरा पॉइंट कम करने में समस्या आ रही है। </p>
<p><strong>सर्वेक्षण टीम ने दिया था सुझाव</strong><br />स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत शहर में सफाई का भौतिक सत्यापन करने आई केन्द्रीय टीम ने इस बार दोनों निगम क्षेत्रों में 4 से 5 दिन का सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण के बाद वापस लौटने से पहले टीम के सदस्यों ने निगम अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान टीम सदस्यों ने निगम आयुक्तों को सुझाव दिया था कि जब निगम की ओर से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है तो फिर कचरा सड़क पर डलना ही नहीं चाहिए। लेकिन हालत यह है कि टीम के सुझाव देने के बाद भी अभी तक निगम ने कचरा पॉइंट कम करने का कोई प्रयास नहीं किया। </p>
<p><strong>उत्तर-दक्षिण में 150 वार्ड</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर में 70 और दक्षिण में 80 वार्ड हैं। इन सभी वार्डों में नगर निगम की ओर से 3 से 4 कचरा पॉइंट बनाए हुए हैं। जहां लोग कचरा डाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार उत्तर में कम से कम 300 और दक्षिण में करीब 200 से अधिक कचरा पॉइंट है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कचरा पॉइंट कम करने का काम निगम अधिकारियों का है। अधिकारी ही सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग करते है। आदेश भी अधिकारी ही जारी करते है। वैसे कचरा पॉइंट कम होंगे तो सड़क पर कचरा कम दिखेगा। कचरा कम आने से सफाई भी अधिक नजर आएगी। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>शहर में कचरा पॉइंट कम से कम होने चाहिए।  जिससे सड़क पर कचरा डले ही नहीं। लेकिन  सड़क पर व कचरा पॉइंट पर अधिकतर कचरा कमर्शियल वेस्ट का डल रहा है। दुकानदारों व मैस होटल वालों के कचरे को देखकर ही कई लोग भी सड़क पर कचरा डाल देते है। यदि निगम की ओर से कमर्शियल वेस्ट को संग्रह करने का काम शुरु किया जाए तो कचरा सड़क पर ही डलेगा ही नहीं।  <br /><strong>- पवन मीणा, उप महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>कचरा पॉइंट तो होने ही नहीं चाहिए। लेकिन कई जगह पर वार्ड में दूरी अधिक होने पर निगम की ओर से एक निर्धारित स्थान चिन्हित कियाजाता है। जहां कचरा डलने पर निगम द्वारा संवेदक के माध्यम से उसे उठवाया भी जाता है। लेकिन कचरा पॉइंट से कचरा समय पर नहीं उठने से गंदगी अधिक नजर आती है। यदि समय पर कचरा उठता रहे तो गंदगी नजर ही नहीं आएगी। <br /><strong>- लव शर्मा, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Apr 2025 15:50:43 +0530</pubDate>
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                <title>लिफ्टिंग मशीन से हर महीने बचा रहे 100 गौवंश की जान</title>
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                        <![CDATA[गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/100-cows-are-being-saved-every-month-with-the-help-of-cow-lifting-machine/article-98764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(4)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला व किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में बैठक लेने वाली करीब 100 गौवंश को हर महीने बचाया जा रहा है। यह संभव हुआ है काऊ लिफ्टिंग मशीन से। गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं। जिनमें भी बीमार व घायल और कमजोर गौवंश अधिक है। उनमें गाय हो या बछड़े या फिर सांड अधिकतर प्लास्टिक की पॉलिथीन खाई हुई है। जिससे गौशाला में आने पर वे भूसा व चारा कम खा पाती है।  जिससे कई कमजोर व बीमार गाय बैठक ले लेती है। एक बार बैठक लेने के बाद उन्हें प्रयास करने पर भी  खड़ा करना मुश्किल होता है। जिससे उनकी मौत निश्चित होती है। ऐसा पिछले कई सालों से हो रहा था। लेकिन कुछ समय से बैठक लेने वाले गौवंश की मृत्यु दर में कमी आई है।</p>
<p><strong>आधा दर्जन मशीनों का कर रहे उपयोग</strong><br />सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने के बाद अधिकतर गायों कीमौत  हो जाती थी। अब कुछ समय पहले कॉऊ लिफ्टिंग मशीनोंका उपयोग कर उनकी मुत्यु दर को कम किया गया है। गौशाला व कायन हाउस में ऐसी करीब आधा दर्जन मशीनें बनवाई गई है। पहले इनकी संख्या दो ही थी और पुरानी होने से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा था। अब इनकी संख्या बढ़ाई गई है। कुछ निगम के स्तर पर और कुछ दान दाताओं के सहयोग से ली गई है। सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने वाली गौवंश की अधिक मुत्यु हो रही थी। वहीं वर्तमान में यह घटकर 4 से 5 ही प्रतिदिन हो पा रही है। </p>
<p><strong>काढ़ा पिलाया जा रहा, हैलोजन लगाई</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि सर्दी में बीमार व कमजोर गायों के साथ ही छोटे बछड़ों को भूसे व चापड़ में पौष्टिक तत्वों का काढ़ा मिलाकर दिया जा रहा है। गौशाला व कायन हाउस में रोजाना यह काढ़ा बनाया जा रहा है।  इसके साथ ही बाड़ों में गर्माहट के लिए हैलोजन लाइटें लगाई गई है। हर 35 से 40 फुट की दूरी  पर लगाई गई है।</p>
<p><strong>कॉऊ लिफ्टिंग मशीन से कर रहे खड़ा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में अधिकतर बीमार व कमजोर गाय है। यहां आने के बाद किसीकारण से यदि वह बैठक ले लेती है तो श्रमिकों की मदद से उन्हें दोबारा से खड़ा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कुछ समय पहले प्रयास कर काऊ लिफ्टिंग मशीनें तैयार करवाई गई। जिनकी सहायता से बैठक लेने वाले गौवंश को खड़ा करने में सफलता मिली है। सिंह ने बताया कि लोहे की बनी इस मशीन को नीचे रखकर उस पर बैठक लेने वालीगाय या सांड को लिया जाता है। उसके बाद पट्टों  से बांधकर गिरारी की सहायता से उन्हें  उनके पैरों पर खड़ा किया  जाता है। उसके बाद उनके कमजोर पैरों पर सरसों के तेल की मालिश की जाती है। जिससे उनके पैरों में ताकत आने पर उन्हें कुछ दूरी पर चलाया जाता है। ऐसा करके रोजाना 3 से 4 यानि हर महीने करीब 100 गौवंश की जान बचाने में सफल हो रहे है। बुधवार को भी 3 से 4  बैठक ले चुकी गायों को खड़ा किया गया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/100-cows-are-being-saved-every-month-with-the-help-of-cow-lifting-machine/article-98764</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 17:25:12 +0530</pubDate>
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                <title>अजमेर नगर निगम की साधारण सभा या अखाड़ा? कांग्रेसी पार्षदों का हंगामा</title>
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                        <![CDATA[ पार्षद तीन सवालों की तख्तियां लेकर सदन में पहुंचे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-municipal-corporation-s-general-meeting-became-an-arena--congress-councilors-created-a-ruckus/article-8327"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ajmer-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजस्थान में अजमेर नगर निगम की साधारण सभा गुरूवार को स्थानीय जवाहर रंगमंच पर  आयोजित की गई जिसमें कांग्रेस पार्षदों ने जमकर हंगामा मचाया।  सभा में कांग्रेसी पार्षदों ने जनहित से जुड़े विकास के मुद्दों पर महापौर बृजलता हाडा को आसन पर पहुंच कर घेरा। इस कारण साधारण सभा महज 25 मिनटों में ही समाप्त कर दी गई। इस दौरान 11 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गये । निर्दलीय पार्षदों ने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए पारित प्रस्तावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं अपनाने का आरोप लगाया है।<br /><br /> इससे पहले पूर्वाह्न ग्यारह बजे शुरु हुई साधारण सभा में कांग्रेसी पार्षदों ने आसन को घेर हंगामा शुरू कर दिया । पार्षद तीन सवालों की तख्तियां लेकर सदन में पहुंचे। पहला, साधारण सभा के एजेंडे में पार्षदों के प्रस्तावों को शामिल नहीं करना। दूसरा, पार्षद क्या रबर स्टैंप हैं। तीसरा, सभा नियमित अवधि में आयोजित नहीं की गयी । इसके अलावा अवैध निर्माणों, डोर टू डोर कचरा संग्रहण शुल्क, स्मार्ट सिटी फंड में सौ करोड़ अंशदान देने के सम्बन्ध में विशेष साधारण सभा बुलाने की मांग को लेकर हंगामा किया गया । <br /><br />भाजपा पार्षदों ने महापौर के साथ कांग्रेसी पार्षदों द्वारा दुव्र्यवहार करने का आरोप भी लगाया। हालांकि पूरे हंगामे के दौरान महापौर मौन रही। साधारण सभा के बाद उपमहापौर नीरज जैन ने साधारण सभा में किये गये हंगामे को दुर्भाग्य पूर्ण बताया और कहा कि सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा होती तो शहर के विकास हित में अच्छा रहता ।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Apr 2022 18:37:25 +0530</pubDate>
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