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                <title>Ayurveda - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>डिजिटल पेमेंट और सेमीकंडक्टर तक...भारत–मलेशिया संबंधों को मिली नई मजबूती, इन छह अहम समझौतों पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की उपस्थिति में भारत और मलेशिया के बीच छह महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-malaysia-relations-get-new-strength-from-digital-payments-to-semiconductors/article-142322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की उपस्थिति में भारत और मलेशिया के बीच छह महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी के मलेशिया दौरे पर सेक्रेटरी (ईस्ट) पी. कुमारन ने कहा, दोनों प्रधानमंत्रियों ने हमारी पार्टनरशिप के पूरे दायरे में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी, फिनटेक, रिन्यूएबल एनर्जी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान शामिल हैं। उन्हें प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का भी मौका मिला। प्रधानमंत्री मोदी की दो दिवसीय मलेशिया यात्रा को भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है।</p>
<p>इसके बाद द्विपक्षीय समझौतों और MoU का आदान-प्रदान हुआ। इनमें सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और चिकित्सा, सुरक्षा और तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर नोड्स का आदान-प्रदान शामिल है। इसके अलावा मलेशिया के भ्रष्टाचार विरोधी आयोग और भारत के केंद्रीय जांच ब्यूरो, CBI के बीच भ्रष्टाचार से लड़ने और उसे रोकने पर MoU पर हस्ताक्षर किए गए। हमारे पास आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर भी एक MoU था। भारत में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, ESIC और मलेशिया में पेरकेसो के बीच सामाजिक सुरक्षा पर एक सहयोग ज्ञापन। हमारे पास ऑडियोविजुअल सहयोग पर भी एक समझौता था, इन सभी का आदान-प्रदान किया गया। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना सहयोग पर द्विपक्षीय MoU के नवीनीकरण पर पत्रों के आदान-प्रदान को भी देखा। मलेशिया ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट्स एलायंस में शामिल होने का दस्तावेज भी सौंपा।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, रक्षा, सुरक्षा, समुद्री सहयोग, ऊर्जा, नवीकरणीय संसाधन, पर्यटन, डिजिटल तकनीक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने पारंपरिक और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।</p>
<p>इस यात्रा में सुरक्षा सहयोग, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भागीदारी, सेमीकंडक्टर विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, आपदा प्रबंधन और भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों से जुड़े समझौते किए गए। इसके अलावा ऑडियो-विजुअल सह-निर्माण, व्यावसायिक शिक्षा और मलेशिया में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सहमति पत्रों का भी आदान-प्रदान हुआ। इनका उद्देश्य संस्थागत ढांचे को मजबूत कर व्यावहारिक सहयोग को बढ़ाना है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने यूनिवर्सिटी मलाया में थिरुवल्लुवर केंद्र की स्थापना और थिरुवल्लुवर छात्रवृत्तियों की घोषणा की। यह पहल तमिल दार्शनिक थिरुवल्लुवर की शिक्षाओं के प्रचार के साथ भारत-मलेशिया के सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों को प्रगाढ़ करेगी। साथ ही भारत ने मलेशिया में अपना पहला वाणिज्य दूतावास खोलने का निर्णय लिया, जिससे राजनयिक और कांसुलर सेवाएं सुदृढ़ होंगी।</p>
<p>आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग हेतु यूनिवर्सिटी ऑफ साइबरजया और आईटीआरए जामनगर के बीच साझेदारी पर सहमति बनी। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एनपीसीआई इंटरनेशनल और मलेशिया की PayNet के बीच UPI आधारित भुगतान प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया, जिससे यात्रियों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण के तहत मलेशिया ने इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस में शामिल होने की औपचारिकताएं भी पूरी कीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 11:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>असर खबर का - आयुर्वेद कॉलेज अब तलवंडी में बने नए भवन में शिफ्ट, कलक्टर के हस्तक्षेप से छात्रों की समस्या का किया समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[अनुमति के अभाव में कॉलेज को नहीं किया था शिफ्ट । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---ayurveda-college-is-now-shifted-to-the-new-building-built-in-talwandi--students--problem-solved-with-the-intervention-of-the-collector/article-126753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। तलवंडी में स्थित राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय को आखिरकार पुरानी किराए वाली बिल्डिंग से निजात मिल गई। अब  महाविद्यालय को नये परिसर में शिफ्ट कर दिया गया है। 1 सितंबर से कॉलेज का संचालन नए भवन में शुरू हो चुका है। पुराने भवन पर कॉलेज प्रशासन को हर माह करीब सवा दो लाख रुपए किराए के रूप में चुकाने पड़ रहे थे। वहीं बारिश के दिनों में छात्रों को आवागमन और पढ़ाई दोनों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। दैनिक नवज्योति में 3 अगस्त को अध्ययनरत विद्यार्थियों को आने-जाने में हो रही परेशानी शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद कलक्टर पीयूष समारिया ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद डॉ. नित्यानंद शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कलक्टर से मिलकर छात्रों की समस्याएं रखीं। कलक्टर ने आरएसआरडीसी डायरेक्टर से चर्चा कर कॉलेज के लिए नए भवन में 10 कमरे आवंटित कर दिए। डॉ. नित्यानंद ने बताया कि नए भवन में कुछ कार्य अभी अधूरे हैं, जिन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि तलवंडी स्थित जिला आयुर्वेद महाविद्यालय का भवन पहले ही तैयार हो चुका था, लेकिन अनुमति के अभाव में कॉलेज को वहां शिफ्ट नहीं किया जा सका। उस दौरान प्राचार्य की ओर से छात्रों की सुविधा को देखते हुए या तो नए भवन में शिफ्ट करने अथवा 10 कमरे उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे डायरेक्टर अजमेर को भी भेजा गया था।</p>
<p><strong>काउंसलिंग में छात्रों की कोटा पहली च्वॉइस</strong><br />इस महाविद्यालय को 2021 में मान्यता मिली तथा 2022 से बैच लगना शुरू हुआ। काउंसलिंग के दौरान विभिन्न जिलों के छात्र कोटा को ही पहली च्वॉइस रख रहे हैं। इस महाविद्यालय की सीटें 1. बीएएमएस में 60 तथा बीएनवाइएस में 30 सीटें हैं। कुल 90 सीटें हैं, इसमें सेंट्रल की 5 सीटें भी शामिल है। इस महाविद्यालय में हाइरैंक वाले भी अपनी च्वॉइस कोटा रख रहे है। राजस्थान के अधिकांश महाविद्यालय की अपेक्षा कोटा की सीटें जल्द ही भर जाती है। कोटा शिक्षा नगरी के रूप  में विख्यात होने के कारण हाईरैंक वाले भी विद्यार्थी यहां आना पसंद करते है। इस परीक्षा में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं बैठते है।</p>
<p><strong>150 कर्मचारी रोजाना दे रहे अपनी सेवा</strong><br />इस महाविद्यालय में रोजाना 150 कर्मचारी अपनी सेवा दे रहे है। इस महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं को सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई है। अभी प्रशासन की ओर से 10 कमरे आवंटन हुए है। जिनमें विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है। इस नए भवन में सुव्यवस्थित लाइब्रेरी भी है। जिनमें विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए ज्ञानवर्धक पुस्तकों का भी समावेश है।</p>
<p><strong>ग्राहक पंचायत ने एडीएम को सौंपा ज्ञापन </strong><br />कोटा। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत कोटा महानगर ने शुक्रवार को न्यू मेडिकल कॉलेज परिसर में अवैध वाहन पार्किंग के नाम पर हो रही मनमानी वसूली को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। महानगर सचिव एडवोकेट सोनल विजयवर्गीय ने बताया कि पिछले 7 माह में मरीजों व तीमारदारों से पार्किंग के जरिये अवैध वसूली की गई। इस दौरान आमजन के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें भी सामने आईं। इस संबंध में पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त  जिला कलक्टर अनिल कुमार सिंघल को ज्ञापन सौंपा। इस पर एडीएम ने शीघ्र ही कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस अवसर पर प्रमोद राठौर, खुशाल गुप्ता, ज्ञानेश लोहमी धीरेन्द्र धाकड़, पुष्पलता शामिल रहे। मालवीय, विधि आयाम प्रमुख दिनेश नाथावत, महिला आयाम प्रमुख भावना जैन, श्वेता विजय, कुंज बिहारी, गजेंद्र मेहता, सलोचना गुर्जर, अबरार खान सहित कई एडवोकेट व पदाधिकारी उपस्थित रहे।<br /> <br /><strong>इन छात्राओं ने बताया कोटा को पहली च्वॉइस</strong><br />कोटा को शिक्षा नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां आकर पढ़ाई करना मेरे गर्व की बात है। मैंने काउंसलिंग को प्रथम च्वॉइस बताया।<br /><strong>- खुशबू चौधरी, सीकर</strong></p>
<p>शिक्षा के मामले में कोटा क्षेत्र का काफी नाम है। यहां पढ़ाई के साथ माहौल भी अच्छा मिलता है। काउंसलिंग के दौरान मैंने कोटा को ही चुना।<br /><strong>- तान्या चौधरी, जयपुर</strong></p>
<p>मैं छावनी क्षेत्र कोटा की ही रहने वाली हूं। इसलिए मैंने कोटा को ही अपनी पहली च्वॉइस रखा।<br /><strong>- नसरा अली, छावनी</strong></p>
<p>इस महाविद्यालय में नंबर आना मेरे लिए अच्छा है। मैं कोटा क्षेत्र के बंसत विहार में रहती हूं। कम सीटों में भी मेरा चयन हुआ।<br /><strong>- श्रेया औदिच, कोटा</strong></p>
<p><strong>अब बैच नए भवन में संचालित </strong><br /><strong>नवज्योति को दिया धन्यवाद </strong><br />मैं दैनिक नवज्योति को धन्यवाद दे रहा हूं। उन्होंने छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर खबर को प्रकाशित किया था। बारिश के दौरान पुरानी बिल्डिंग में सीलन और पानी टपकने से छात्रों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही थी। कई बार कॉलेज प्रबंधन को समस्या से अवगत करवाने के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया। आखिरकार छात्रों ने 25 अगस्त को कोटा कलक्टर पीयूष समारिया को ज्ञापन सौंपा। कलक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरएसआरडीसी डायरेक्टर से चर्चा की और कॉलेज के लिए नए भवन में 10 कमरे आवंटित कराए। इसके बाद 1 सितंबर से महाविद्यालय को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अब बैच नए भवन में संचालित हो रहे हैं और विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण मिल रहा है। <br /><strong>- डॉ. नित्यानंद शर्मा, राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 16:24:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कम उम्र में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों के बीच उम्मीद की रोशनी, आयुर्वेद से भी होगा हृदय रोगों का उपचार</title>
                                    <description><![CDATA[आज की तेज रफ्तार जीवनशैली, मानसिक तनाव, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता से कम उम्र के लोग भी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ayurveda-will-also-treat-heart-diseases-amidst-increasing-heart-attack/article-122350"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आज की तेज रफ्तार जीवनशैली, मानसिक तनाव, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता से कम उम्र के लोग भी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। हार्ट अटैक के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही बल्कि 30 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं में भी इसका खतरा तेजी से बढ़ा है। अब तक हृदय रोगों का इलाज एलोपैथी में ही संभव था लेकिन अब आयुर्वेद में भी इसके इलाज को संभव बनाने पर तेजी से काम किया जा रहा है।</p>
<p>जयपुर के जोरावर सिंह गेट स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानद विश्वविद्यालय के काय चिकित्सा विभाग (इंटरनल मेडिसिन डिपार्मेंट) में कफज ह्द्रोग जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में क्रॉनिक स्टेबल एंजाइना कहा जाता है, पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शोध किया जा रहा है। संस्थान के काय चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर उदय राज सरोज के निर्देशन में एमडी छात्रा डॉ. लिट्टी मैथ्यू द्वारा कफज हृद्रोग पर विशेष अनुसंधान किया जा रहा है, जिसमें आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित औषधीय योगों के माध्यम से ह्दय की धमनियों में जमे वसा यानी कोलेस्ट्रॉल को घटाकर रक्त संचार को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p><strong>क्या है कफज हृद्रोग यानी क्रॉनिक स्टेबल एंजाइना ?</strong></p>
<p>यह रोग उस स्थिति को दर्शाता है जब शारीरिक परिश्रम या भावनात्मक तनाव के समय रोगी को छाती में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान, कमजोरी और घबराहट जैसी समस्याएं होती हैं। इसका मुख्य कारण ह्दय की रक्त वाहिनियों में वसा या प्लाक का जमा होना होता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है। आयुर्वेद के अनुसार यह रोग मुख्यतया कफ दोष के असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है।</p>
<p><strong>अब तक के शोध में सकारात्मक परिणाम मिले :</strong></p>
<p>कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने बताया कि इस शोध में रोगियों को विशिष्ट आयुर्वेदिक औषधियां देकर उनके कोलेस्ट्रॉल स्तर, रक्तचाप, धड़कन की गति, ईसीजी रिपोर्ट और संपूर्ण ह्दय कार्यप्रणाली की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। अब तक के परिणाम यह संकेत देते हैं कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से ह्दय की धमनियों में वसा का स्तर घटा कर रोगी को राहत देना संभव है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 11:42:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आयुर्वेद के भारतीय ज्ञान को युगानुकूल बनाते हुए इसका वैश्विक प्रसार हो : राज्यपाल</title>
                                    <description><![CDATA[पटेल ने कहा मार्च 2025 तक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 52000 पदों भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी, जिसमें आयुर्वेद विभाग के रिक्त पदों को भी भरा जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-making-the-indian-knowledge-of-ayurveda-relevant-to-the/article-96827"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/3.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा है कि आयुर्वेद के भारतीय ज्ञान को युगानुकूल बनाते हुए इससे जुड़ी दुर्लभ औषधियों का पेटेंट, प्रमाणीकरण और इससे जुड़े स्वास्थ्यवर्धक गुणों का अधिकाधिक प्रसार किया जाए। उन्होंने आयुर्वेदिक औषधियों पर पर शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ असाध्य रोगों में भी इनके उपयोग के परीक्षण और प्रसार की दिशा में कार्य करने आह्वान किया है। बागडे जोधपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 'आयुर्वेदिक औषधि मानकीकरण-चुनौतियां और समाधान विषयक अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों की ब्रांडिग और पैकेजिंग भी इस तरह से हो कि वह उपयोग के लिए आकर्षित करे। उन्होंने इनके विपणन की कारगर नीति पर भी कार्य करने पर जोर दिया। राज्यपाल ने प्राचीन भारतीय आयुर्वेद ज्ञान की चर्चा करते हुए आत्रेय, चरक, सुश्रुत आदि द्वारा प्रवर्तित चिकित्सा प्रणालियों के उपयोग और संभावनाओं पर कार्य करने पर जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारे आयुर्वेद के महान ज्ञान को सुनियोजित तरीके से देश से बाहर ले जाया गया। उस ज्ञान में कुछ हेर-फेर कर उसे अपना बनाने के प्रयास निरंतर हुए। इसलिए यह जरूरी है कि जो उपलब्ध ज्ञान हमारा है, आयुर्वेद की दुर्लभ औषधियां हैं-उनके पेटेंट की दिशा में निरंतर कार्य हो। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में आयुर्वेद के महान ज्ञान से जुड़ी किताबों की चर्चा करते हुए कहा कि बख्तियार खिलजी ने देश के उस महान ज्ञान को सदा के लिए समाप्त करने के लिए नालंदा पुस्तकालय में आग लगा दी। पर भारतीय ज्ञान को कोई मिटा नहीं सका है। उन्होंने आयुर्वेदाचार्यों से आग्रह किया कि वे प्राचीन भारतीय ज्ञान की धरोहर को जन-जन तक सुलभ कराएं। उन्होंने औषधीय प्रयोजनों के लिए जड़ी-बूटियों के उपयोग और लिखित ग्रंथों के महत्व पर भी कार्य करने पर जोर दिया। राज्यपाल ने इससे पहले विश्वविद्यालय के अंतर्गत बने होम्योपैथी महाविद्यालय के भवन का भी लोकार्पण किया। प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध— संसदीय कार्य मंत्री</p>
<p>संसदीय कार्य मंत्री ने कहा माननीय मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान को विकसित और समृद्ध प्रदेश बनाना है। साथ ही प्रदेश सरकार राजस्थान के विश्वविद्यालयों के सर्वांगीण विकास के प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। पटेल ने कहा आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली है जो शरीर, मन और आत्मा का संतुलन बनाए रखने में सहायक है।</p>
<p>आयुर्वेद रोगों की रोकथाम और व्याधि के उपचार के रूप में संपूर्ण विश्व में लोकप्रिय है। उन्होंने औषधीय पादप आक के आयुर्वेदिक गुणों के बारे जानकारी दी। पटेल ने कहा मार्च 2025 तक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 52000 पदों भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी, जिसमें आयुर्वेद विभाग के रिक्त पदों को भी भरा जाएगा। साथ ही इस वर्ष एक लाख एवं 5 वर्ष में 4 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य  प्रदीप कुमार प्रजापति, कुलसचिव प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल, पूर्व कुलपति प्रो बी एल गौड़, उत्तराखंड विश्वद्यालय के वाइस चांसलर अरुण कुमार त्रिपाठी, गुजरात आयुर्वेद विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ एस एस सावरीकर, एम्स जोधपुर के अध्यक्ष डॉ एस एस अग्रवाल, प्रबंध मंडल के सदस्य, अन्य निकायों के सदस्य, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 18:39:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आयुर्वेद और योग का परिवर्तनकारी प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले कुछ वर्षों के दौरान व्यक्तिगत अथवा सामुदायिक स्तर पर महज रोगों का प्रबंधन करने के बजाय जीवन पर्यन्त स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर दिए जाने के साथ निवारक स्वास्थ्य सेवा की अवधारणा मजबूती के साथ विकसित हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/transformative-effect-of-ayurveda-and-yoga/article-71609"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(5).jpg" alt=""></a><br /><p>पिछले 10 वर्षों के दौरान देश और दुनिया में आयुर्वेद एवं योग ने सभी हितधारकों-उपभोक्ताओं, बीमा क्षेत्र, नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों आदि के बीच जागरूकता, स्वीकृति, स्वीकार्यता और विश्वसनीयता के मामले में एक लंबी छलांग लगाई है। यह कोई छोटा-मोटा बदलाव नहीं है, क्योंकि इस दौरान सरकार ने आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए उसे पारंपरिक चिकित्सा की पूरक पद्धति के तौर पर एकीकृत करने और उसे मुख्यधारा में लाने पर काफी दृढ़ता से फोकस किया है। निम्नलिखित तथ्य भारत सरकार के परिणाम-केंद्रित दृष्टिकोण के ठोस प्रमाण हैं:-दिसंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र और डब्यूएचओ द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया और 2015 से हर साल 21 जून को उसे वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। अगस्त 2022 में जामनगर में पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र की स्थापना की गई। जनवरी 2023 में आईसीडी-11 टीएम-2 मानक में आयुष रोग कोड को शामिल किया गया। आईआरडीए के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ 2016 से आयुष बीमा के दायरे में फिर से लाने का कदम उठाया गया। उसके बाद 2020 और हाल में 2024 तक कई सकारात्मक कदम उठाए गए, जिससे आयुर्वेद चिकित्सा देखभाल के लिए पूरी तरह कैशलेस बीमा कवरेज उपलब्ध है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आयुष चिकित्सा सेवा को 2016 से ही सीजीएचएस योजना में शामिल किया जा चुका है। रक्षा मंत्रालय, रेलवे, इसरो, डीएईए ईएसआईसी एवं अन्य सरकारी संगठनों द्वारा आयुष उपचार केंद्रों क्लिनिकों की स्थापना की गई और उसे मंजूरी दी गई है। हील-इन-इंडिया और हील-बाय-इंडिया जैसे प्रमुख कार्यक्रमों में आयुष को शामिल किया गया है ताकि आयुष आधारित स्वास्थ्य एवं कल्याण सेवाओं के जरिए सस्ती दर पर चिकित्सा यात्रा और विदेशी मुद्रा आय को बढ़ावा दिया जा सके। हल्के अथवा मध्ययम कोविड-19 रोग से बचाव और उसके उपचार के लिए हरेक आयुष पद्धति के लिए राष्टÑीय क्लीनिकल प्रबंधन प्रोटोकॉल तैयार किया गया। इससे आयुष ने कोविड-19 के प्रतिकूल प्रभाव, गंभीरता और मौतों की संख्या को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, कोविड के बाद उसके दीर्घावधि प्रभाव से निपटने में आयुष लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को हासिल करने में आयुष की उचित भूमिका के लिए भारत सरकार के नेतृत्व से लगातार समर्थन एवं प्रोत्सािहन मिल रहा है।<br /><br />पिछले कुछ वर्षों के दौरान व्यक्तिगत अथवा सामुदायिक स्तर पर महज रोगों का प्रबंधन करने के बजाय जीवन पर्यन्त स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर दिए जाने के साथ निवारक स्वास्थ्य सेवा की अवधारणा मजबूती के साथ विकसित हुई है। सभी उम्र के लोगों के लिए स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना और उनकी तंदुरुस्ती को बढ़ावा देना, संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी 3) है। एसडीजी 3 के 13 लक्ष्यों और 28 संकेतकों के तहत स्वस्थ जीवन एवं स्वस्थ जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं को कवर किया गया है। आयुर्वेद और योग सहज रूप से जीवन चक्र के परिप्रेक्ष्य के साथ निवारक, उपचारात्मक एवं प्रोत्साहक स्वास्थ्य उपायों पर जोर देते हैं, जो रोग के चरण, व्यक्ति, स्थान, समय आदि के लिहाज से उपयुक्त होते हैं। इसके अलावा, यह व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य वाले दृष्टिकोण को अपनाता है जो सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील है। आयुर्वेद और योग समाज के लिए एक व्यापक जीवन-चक्र स्वास्थ्य प्रबंधन ढांचा प्रदान करते हैं जो एसडीजी 3 के 13 लक्ष्यों में से कई को हासिल करने में मदद करता है।<br /><br />गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के कारण मौत का अनुपात (सभी मौतों के बीच) 1990 में 38 प्रतिशत से बढ़कर 2016 में 62 प्रतिशत हो गया। इससे बीमारी के बोझ में बदलाव के साथ महामारी का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। आयुर्वेद और योग स्वास्थ्य सेवा मूल्य श्रृंखला को पूरा करने और विशेष रूप से गैर-संचारी रोगों की प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीय स्तर पर रोकथाम करने में एक दमदार, पूरक और एकीकृत भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा आयुर्वेद और योग विभिन्न प्रकार की वैकल्पिक सर्जरी की जरूरतों को खत्म करते हुए अथवा टालते हुए आम लोगों की जेब पर खर्च के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। आयुर्वेद के उपयोग का एक अन्य  पहलू व्यक्ति की संपूर्ण देखभाल का मॉडल है जिसमें एक साथ कई बीमारियों से जूझ रहे लोगों को निजी तौर पर आहार, जीवनशैली, काउंसलिंग एवं चिकित्सा का नुस्खा प्रदान किया जाता है। इसके अलावा आयुर्वेद आधारित एकीकृत देखभाल एक उभरती हुई पद्धति है जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:-स्वास्थ्य की दृष्टि से सक्रिय (मन की स्थिति, नींद, आंत, भूख, पाचन, जीवन शक्ति आदि) और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए एलोपैथी के पूरक उपचार के रूप में आयुर्वेद एवं योग पर जोर। एडिमा, मायलोस्पप्रेशन, कैशेक्सिया, स्पैआस्मय/ क्रैप्से, मोबिलाइजेशन, म्यूकोसाइटिस, दस्त, चकत्ते, मतली और दर्द आदि के उपचार के लिए प्राथमिक एलोपैथी चिकित्सा के सहायक के रूप में आयुर्वेद का उपयोग। रोग की पुनरावृत्ति को रोकने और अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए तृतीयक/ क्वाटरनैरी एलोपैथी उपचार के बाद स्टेन डाउन केयर के लिए फिजिएट्री  (शारीरिक एवं चिकित्सीय पुनर्वास) के साथ-साथ आयुर्वेद और योग का उपयोग। आयुर्वेद और योग आधारित सेवाओं से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे क्योंकि उनका दायरा विभिन्न सेवा क्षेत्रों- चिकित्सरकीय तंदुरुस्ती आयुर्वेद अस्पताल/ आयुर्वेद चिकित्साव केंद्र/आयुर्वेद क्लीननिक, एकीकृत चिकित्सा केंद्र, अवकाश के दौरान तंदुरुस्ती, स्टेप डाउन केयर सेंटर तक विस्तृत हैं। आयुर्वेद अस्पताल विशेष तौर पर किसी गरीब देश में स्वास्थ्य सेवा के अर्थशास्त्र को बदलने की ताकत रखते हैं। आयुर्वेद एवं योग अत्यधिक पूंजी निवेश, कम समय तक ठहरने, तृतीयक/ क्वाटरनैरी देखभाल मॉडल के बजाय कम पूंजी निवेश, अधिक दिनों तक (3 से 5 गुना) ठहरते हुए रोगों के उपचार मॉडल के साथ एक स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था तैयार करते हैं जो आम लोगों के लिए सस्ती, सुलभ और स्वीकार्य है। ऐसी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था जो उच्च गुणवत्ता वाली तृतीयक/क्वाटरनैरी चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के अलावा प्रारंभिक से प्राथमिक और द्वितीयक से तृतीयक रोकथाम तक निवारक स्वास्थ्य सेवा के व्यापक दायरे का विस्तार करती है। पिछले 10 वर्षों में पहली बार आयुर्वेद एवं योग आधारित स्टार्टअप में उल्लोखनीय निवेश और वृद्धि हुई है। नवाचार का दायरा आयुर्वेदिक उत्पादों (फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य पदार्थ, न्यूट्रास्यूटिकल्स, सौंदर्य प्रसाधन, जीवन शैली उत्पाद), आयुर्वेद/ योग सेवाएं (अस्पताल, क्लीनिक, टेलीमेडिसिन, स्वास्थ्य प्रबंधन सेवाएं, चिकित्सा स्पाय प्रशिक्षण, अवकाश के दौरान तंदुरुस्ती) और आयुर्वेद सिद्धांतों पर आधारित नई चिकित्सा तकनीक तक फैला हुआ है। <br /><br />-राजीव वासुदेवन<br />एमडी एवं सीईओ, अपोलो आयुर्वेद हॉस्पिटल्स </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Mar 2024 12:49:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नाथद्वारा में खुलेगा आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा एकीकृत महाविद्यालय</title>
                                    <description><![CDATA[प्रस्ताव के अनुसार, राजसंमद के नाथद्वारा में आयुर्वेद, योग एवं नेचुरोपैथी महाविद्यालय एवं सम्बद्ध एकीकृत चिकित्सालय खोला जाएगा। जिसके निर्माण हेतु 38.60 करोड़ रुपए का व्यय होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ayurveda--yoga-and-naturopathy-integrated-college-will-open-in-nathdwara/article-53468"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/cm_ashok_gehlot.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजसमंद जिले के नाथद्वारा में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एकीकृत महाविद्यालय खोला जाएगा। इस हेतु मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 38.60 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। साथ ही, महाविद्यालय तथा चिकित्सालय के संचालन के लिए 125 नवीन पदों के सृजन के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। </p>
<p>प्रस्ताव के अनुसार, राजसंमद के नाथद्वारा में आयुर्वेद, योग एवं नेचुरोपैथी महाविद्यालय एवं सम्बद्ध एकीकृत चिकित्सालय खोला जाएगा। जिसके निर्माण हेतु 38.60 करोड़ रुपए का व्यय होगा। इस महाविद्यालय के संचालन हेतु 125 नवीन पदों का भी सृजन किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2023 18:05:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति: कलक्टर</title>
                                    <description><![CDATA[आरोग्य मेले के आयोजन का उद्देश्य ‘स्वास्थ्य सबके लिए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सस्ती सरल एवं सुलभ आयुष पद्धति की प्रभावशीलता के बारे में नागरिकों में जागरूकता उत्पन्न करना, आयुष पद्धति से जुड़े हुए लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान करने के लिए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/ayurveda-worlds-oldest-medical-system-collector/article-30494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/411.jpg" alt=""></a><br /><p>भरतपुर। कलक्टर आलोक रंजन की अध्यक्षता में रा य स्तरीय आरोग्य मेला के आयोजन के सम्बंध में कलेक्ट्रेट सभागार में प्रेसवार्ता आयोजित हुई। प्रेस वार्ता के दौरान जिला कलक्टर रंजन ने मीडियाकर्मियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भरतपुर में स्तरीय आरोग्य मेला दूसरी बार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से बचाव एवं रोकथाम में आयुर्वेद का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि इस चिकित्सा पद्धति में रोगी को दवाओं का कोई दुष्प्रभाव भी नही रहता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आमजन में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन पूर्ण प्रयास कर रहा है इसके साथ ही प्राइवेट कम्पनियां भी आगे आ रहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरोग्य मेले के आयोजन का उद्देश्य ‘स्वास्थ्य सबके लिए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सस्ती सरल एवं सुलभ आयुष पद्धति की प्रभावशीलता के बारे में नागरिकों में जागरूकता उत्पन्न करना, आयुष पद्धति से जुड़े हुए लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान करने के लिये उचित मंच उपलब्ध करवाना तथा आयुष पद्धतियों की रोगों से बचाव एवं उपचार में विशेषता से जनसामान्य को लाभान्वित कर निरोगी राजस्थान के पुनीत संकल्प में भागीदारी प्रदान करना है। बैठक में आयुर्वेद विभाग के निदेशक डॉ आनंद शर्मा ने बताया कि रा य स्तरीय आरोग्य मेला 24 से 27 नवम्बर तक प्रात: 11 बजे से रात्रि 8 बजे तक एमएसजे कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित किया जाएगा। जिसका शुभारम्भ पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह के मुख्य आतिथ्य एवं आयुष विभाग रा यमंत्री डॉ सुभाष गर्ग की अध्यक्षता में किया जाएगा। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Nov 2022 10:42:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर में 60 रोगी हुए लाभान्वित</title>
                                    <description><![CDATA[शिविर संयोजक डॉ. दयाशंकर जांगिड़ ने बताया कि यह शिविर आयुर्वेदिक इलाज करवाने वालो के लिये वरदान सिद्ध हो रहा है और हर माह की 24 तारीख को शिविर लगाया जाता व लगाया जायेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/60-patients-benefited-in-ayurvedic-medical-camp/article-27896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/nwh-03-photo-26-oct-2022.jpg" alt=""></a><br /><p>नवलगढ़। भारतीय सेवा समाज के संस्थापक स्वामी कृष्णानंदजी महाराज की प्रेरणा से अलायंस क्लब नवलगढ़ लार्ड कृष्णा, सामाजिक विकास हेरिटेज एण्ड वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन फाउण्डेशन, शारदा क्रोपकेम बंबई के आर्थिक सौजन्य से व श्रीरामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान चिड़ावा के सहयोग से जांगिड़ अस्पताल नवलगढ़ नि:शुल्क दमा, गठिया, मधुमेह रोगो का आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर लगाया गया। शिविर का शुभारम्भ समाजसेवी मुरारीलाल इंदोरिया के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। जिसमें 60 रोगियों की जांच कर निशुल्क एक्पोर्ट क्वालिटी की आयुर्वेदिक दवाइंया निशुल्क पूरे एक माह की दी गई। मुख्य अतिथि व अतिथियों द्वारा स्व. कृष्णानंदजी की फोटो पर पुष्प अर्पित किए गए। इसके पश्चात दिल्ली के डॉ. जोगेन्दर सिंह आयुर्वेद चिकित्सक जो डालमिया ट्रस्ट चिड़ावा में 22 वर्षो से लगातार हजारों शिविर लगाकर आयुर्वेद की चिकित्सा कर रहे है। नवलगढ़ में वे क्लब के माध्यम से सैकड़ो शिविर लगा चुके है। धन्वंतरी दिवस के उपलक्ष में सबके स्वास्थ्य के लिये अलायंस क्लब भी आयुर्वेदिक दवाइयां देकर भगवान धन्वंतरी को याद कर रहा है। सभी सुखी व स्वस्थ रहे की कामना के लिए क्लब हमेषा तत्पर रहता है। </p>
<p>शिविर संयोजक डॉ. दयाशंकर जांगिड़ ने बताया कि यह शिविर आयुर्वेदिक इलाज करवाने वालो के लिये वरदान सिद्ध हो रहा है और हर माह की 24 तारीख को शिविर लगाया जाता व लगाया जायेगा। मधुमेह, गठिया, दमा आदि रोग लंबे समय तक चलते है गरीब लोग पैसे के अभाव में दवाई बंद कर देते है और रोग काबू के बाहर हो जाते है। उनके लिये एक्पोर्ट क्वालिटी की आयुर्वेदिक दवाइंया निशुल्क पूरे माह की दी जायेगी। इन दवाइंयों के साथ एलौपैथिक दवाइयां भी ली जा सकती है। उसके लिये रोगी मेरे से संपर्क कर सलाह ले सकते है। 66 रोगियों की जांच की कर निशुल्क दवाई दी गई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झुंझुनूं</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Oct 2022 12:44:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>IMA की रामदेव को खुली बहस की चुनौती, पूछा- कौनसे एलोपैथिक अस्पताल ने कोरोना के इलाज में दी पतंजलि की दवा</title>
                                    <description><![CDATA[आईएमए की उत्तराखंड शाखा ने पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव को 1000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजने के बाद अब खुली बहस की चुनौती दी है। आईएमए ने बयान जारी कर बाबा रामदेव से पूछा है कि कौन से एलोपैथिक अस्पतालों ने कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवाएं दी हैं। संगठन ने पैनल डिस्कशन के साथ बहस की सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ima-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%80--%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9B%E0%A4%BE--%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%B5%E0%A4%BE/article-501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/baba_ramdev.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच एलोपैथी और आयुर्वेद चिकित्सा को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आईएमए की उत्तराखंड शाखा ने पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव को 1000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजने के बाद अब खुली बहस की चुनौती दी है। आईएमए ने बयान जारी कर बाबा रामदेव से पूछा है कि कौन से एलोपैथिक अस्पतालों ने कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवाएं दी हैं। संगठन ने पैनल डिस्कशन के साथ बहस की सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है।<br /> <br /> बता दें कि बाबा रामदेव ने एक टीवी डिबेट में दावा किया था कि एलोपैथिक अस्पताल भी कोरोना इलाज के लिए पतंजलि की दवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। अब आईएमए ने इसे चुनौती देते हुए कहा है कि बाबा रामदेव खुले मंच पर इस दावे को साबित करें और आईएमए से पूरे विवाद पर बहस करें। इससे पहले बाबा रामदेव ने आईएमए को खुली चिट्ठी लिखकर कहा था कि वह आईएमए से 25 प्रश्नों पर जवाब चाहते हैं। रामदेव की ओर से भेजे पत्र पर जवाब देते हुए आईएमए ने कहा कि वह अपने पैनल के साथ इन 25 प्रश्नों के जवाब के लिए भी तैयार है। <br /> <br /> इससे पहले 26 मई को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन उत्तराखंड ने रामदेव को 1000 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया कि अगर रामदेव अगर 15 दिन के अंदर खंडन वीडियो और लिखित माफी नहीं मांगते हैं तो उनसे 1000 करोड़ रुपये की मांग की जाएगी। इसके अलावा रामदेव से 72 घंटे के अंदर कोरोनिल किट के भ्रामक विज्ञापन को सभी स्थानों से हटाने को कहा है, जहां यह दावा किया गया है कि कोरोनिल कोविड वैक्सीन के बाद होने वाले साइड इफेक्ट पर प्रभावी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 May 2021 16:16:50 +0530</pubDate>
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