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                <title>Patanjali - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Patanjali RSS Feed</description>
                
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                <title>इम्यूनोग्रिट करेगा अजरता-अमरता के वरदान को सिद्ध : अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल Archives of Gerontology and Geriatrics में शोध प्रकाशित</title>
                                    <description><![CDATA[आयुर्वेद के अनुसार अष्टवर्ग जड़ी-बूटियां बलवर्धक, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली एवं आयु को बढ़ने से रोकने वाली विशेषताओं से निहित हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/immunogrit-will-give-ajrata-amtas-boon-to-siddha-international-research-journal/article-124724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer25.png" alt=""></a><br /><p>हरिद्वार। पतंजलि के वैज्ञानिकों ने पुनः सिद्ध कर दिया है कि हमारे पौराणिक ग्रंथों में वर्णित अष्टवर्ग जड़ी-बूटियों के द्वारा प्राप्त अजरता–अमरता का वरदान मात्र मिथ्या नहीं हैं, इसमें सत्यता भी निहित है। पतंजलि के वैज्ञानिकों ने अष्टवर्ग एवं अन्य प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से निर्मित औषधि इम्यूनोग्रिट पर किए गए शोध के द्वारा सिद्ध कर दिया है कि इस औषधि के द्वारा असमय आने वाले बुढ़ापे को प्रभावी रूप से धीमा किया जा सकता है। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि तनाव, चिंता, प्रदूषण और गलत जीवनशैली हमें असमय बुढ़ापे की ओर ले जा रही है। आजकल 35-40 वर्ष की आयु में चेहरे पर झुर्रियां, माथे पर लकीरे होना आम बात हो गई है। एलोपैथिक चिकित्सा और महंगे-महंगे इंजेक्शन द्वारा लोग इस समस्या का अस्थाई समाधान खोजने में लगे हैं। परन्तु इस समस्या का हल भी हमारे पौराणिक ग्रंथों में ही निहित है, हमने अष्टवर्ग जड़ी-बूटियों को वर्तमान युग के अनुरूप, वैज्ञानिक प्रमाणिकता के साथ इम्युनोग्रिट के रूप में प्रस्तुत किया है। आयुर्वेद के अनुसार अष्टवर्ग जड़ी-बूटियां बलवर्धक, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली एवं आयु को बढ़ने से रोकने वाली विशेषताओं से निहित हैं।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेद की शक्ति को आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। यह हमारी परंपरा और हमारे ऋषि-मुनियों का ज्ञान है। अब वह समय दूर नहीं जब भारत ही नहीं, पूरा विश्व आयुर्वेद को अपनी चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता देगा। इम्यूनोग्रिट औषधि विदारीकंद, मेदा, शतावरी, ककोली, क्षीरककोली, रिद्धि, वाराहीकंद, बला, सफ़ेद मूसली, शुद्ध कौंच, अश्वगंधा से बनी है जिन्हें हमारे आयुर्वेदिक ग्रंथों में बुढ़ापे को मंद करने वाला माना गया है। इस अवसर पर पतंजलि अनुसन्धान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि यह शोध उन लोगों के लिए एक आशा की किरण है जो बढ़ती आयु और उस कारण त्वचा पर असमय होने वाली झुर्रियों से चिंतित हैं। इम्यूनोग्रिट मात्र एक हर्बल सप्लीमेंट नहीं, अपितु एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित आयुर्वेदिक समाधान है, जो आने वाले वर्षों में एंटी-एजिंग उपचार की दिशा में बड़ी भूमिका निभाएगा।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि हमारा यह प्रयास पुष्टि करता है कि जब परंपरा और विज्ञान साथ आते हैं, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।<br />इस अध्ययन में पाया गया कि इम्यूनोग्रिट बुढ़ापे के कारण त्वचा की कोशिकाओं में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करने में कारगर है। साथ ही, इम्यूनोग्रिट ने D-Galactose के कारण त्वचा कोशिकाओं में उत्पन्न Cellular Senescence और Oxidative Stress के प्रभाव को कम किया। इम्यूनोग्रिट ने बुढ़ापे की पहचान माने जाने वाले p16, p21, p53 और β-galactosidase बायोमार्कर को भी संतुलित किया, जिससे त्वचा में लचीलापन बना रहा। इम्यूनोग्रिट ने त्वचा में विद्यमान कोलेजन को टूटने से बचाया और उम्र बढ़ने से जुड़े MMP1 और MMP9 एंजाइम के स्तर को नियंत्रित किया। यह शोध जिसमें वृद्धावस्था को भी धीमा करने की शक्ति से निहित इम्यूनोग्रिट औषधि के बारे में बताया गया है, अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल Archives of Gerontology and Geriatrics में प्रकाशित हुआ है। इस शोध के बारे में विस्तृत रूप से जानने और हमारी बहुमूल्य जड़ी-बूटियों में छुपे अजरता–अमरता के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के बारे में पढ़ने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें:</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 17:41:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>30 वर्ष पूर्ण होने पर पतंजलि का संकल्प, योग क्रांति के बाद अब पञ्च क्रांतियों का शंखनाद : स्वामी रामदेव</title>
                                    <description><![CDATA[पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष स्वामी रामदेव महाराज व महामंत्री आचार्य बालकृष्ण की उपस्थित में पतंजलि संस्थान का 30वां स्थापना दिवस पतंजलि वैलनेस, हरिद्वार स्थित योगभवन सभागार में सम्पन्न हुआ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/patanjalis-resolution-on-completion-of-30-years-after-yoga-revolution/article-99804"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/555416.png" alt=""></a><br /><p>हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष स्वामी रामदेव महाराज व महामंत्री आचार्य बालकृष्ण की उपस्थित में पतंजलि संस्थान का 30वां स्थापना दिवस पतंजलि वैलनेस, हरिद्वार स्थित योगभवन सभागार में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर के पतंजलि योगपीठ संगठन के 6000 से अधिक प्रभारीगणों की उपस्थिति में स्वामी रामदेव जी महाराज ने विगत 30 वर्षों की सेवा, संघर्ष व साधना से परिचय कराया तथा पतंजलि योगपीठ की भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने योग क्रांति की सफलता के बाद पञ्च क्रांतियों का शंखनाद करते हुए कहा कि शिक्षा, चिकित्सा, आर्थिक, वैचारिक-सांस्कृतिक व रोगों-भोगों-ग्लानि-कुण्ठाओं से आजादी का बड़ा कार्य पतंजलि से प्रारंभ करना है। </p>
<p><strong>पहली क्रांति : </strong>शिक्षा की आजादी- उन्होंने कहा कि आज 50 से 90 और कहीं-कहीं तो 99 प्रतिशत पढ़े-लिखे बेरोजगार, नशेड़ी, चरित्रहीन निस्तेज बच्चे तैयार हैं जिनका बचपन, यौवन और हमारा कुलवंश खतरे में है। हमनें यह तय किया है कि पहले भारतवर्ष में और फिर पूरी दुनियां में नई शिक्षा व्यवस्था का शंखनाद करेंगे और उसका नेतृत्व भारत करेगा। पतंजलि गुरुकुलम्, आचार्यकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड अब नए प्रतिमान गढ़ेंगे। हमारा संकल्प है कि हम आगामी 5 वर्षों में 5 लाख विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ेगें। ये शिक्षा की अभिनव क्रांति होगी। </p>
<p>हमें बच्चों को केवल शब्दबोध नहीं कराना है, शब्दबोध के साथ विषयबोध, आत्मबोध, सत्यपरक भारतबोध व अपने गौरव का बोध कराना है। हम हिन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत में पूरे विश्व की जानकारियों का समावेश करेंगे, पूरे विश्व के साथ अपडेट रखेंगे लेकिन उसमें भी 80 प्रतिशत कन्टेंट वेद, दर्शन, उपनिषद्, पुराणों का होगा, भारत के गौरव का होगा। उसमें अध्यात्म विद्या होगी, सनातन बोध होगा, भारत बोध होगा। यह मैकाले का एजुकेशन सिस्टम नहीं है। जब भारतीय शिक्षा बोर्ड से पहले एक लाख और बाद में 5 लाख स्कूल एफिलिएटिड हो जाएंगे तो भारत का बचपन और यौवन सुरक्षित हो जाएगा, यही शिक्षा की आजादी का संकल्प है। हम भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से विदेशी आक्रमणकारियों, अकबर, औरंगजेब या अंग्रेजों की झूठी महानता नहीं बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप व क्रांतिकारियों का सच्चा इतिहास पढ़ाएंगे।</p>
<p><strong>दूसरी क्रांति :</strong> चिकित्सा की आजादी- रोग हमारा स्वभाव नहीं, योग ही हमारा स्वभाव है। पूरी दुनिया में सिंथेटिक दवा, अलग-अलग प्रकार स्टेरॉयड, पेन किलर इत्यादि खा-खाकर लोगों के शरीर खराब हो रहे हैं। चिकित्सा की आजादी के लिए पतंजलि वैलनेस, योगग्राम, निरामयम, चिकित्सालयों एवं आरोग्य केन्द्रों से लेकर, आधुनिक रिसर्च के माध्यम से ऋषियों की विरासत और विज्ञान को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। हमने 5000 से अधिक रिसर्च प्रोटोकॉल्स व 500 से अधिक रिसर्च पेपर्स वर्ल्ड क्लास इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश करके असाध्य रोगों से मुक्ति का मार्ग दुनिया के सामने रखा है। हमारा संकल्प है कि हम लोगों को रोगी होने से बचायेंगे भी और रोग होने के बाद उन रोगों से योग-आयुर्वेद के माध्यम से लोगों को मुक्ति दिलाएँगे।</p>
<p><strong>तीसरी क्रांति : </strong>आर्थिक आजादी- आज पूरी दुनिया में कुछ चंद मुट्ठी भर लोगों ने अपने क्रूर पंजों में पूरे अर्थतंत्र को जकड़ रखा है। हमारा लक्ष्य है समृद्धि सेवा के लिए व अर्थ परमार्थ के लिए। अभी तक पतंजलि ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, चरित्र निर्माण, राष्ट्र निर्माण आदि में 1 लाख करोड़ रुपए की चैरिटी की है। 10 हजार से अधिक सेंटर्स के साथ 25 लाख से अधिक प्रशिक्षित योग शिक्षकों तथा 1 करोड़ कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ सेवा से यह सब राष्ट्र निर्माण व चरित्र निर्माण का सेवा कार्य हो रहा है। हमारा संकल्प है कि स्वदेशी का आंदोलन इतना बड़ा खड़ा हो कि आर्थिक लूट, गुलामी और दरिद्रता से भारत निकले तभी भारत परम वैभवशाली बनेगा। बीपी, शुगर, थायरॉइड, अस्थमा, आर्थराइटिस, स्ट्रैस, डिप्रेशन, नींद आदि बीमारियों की गोलियाँ छुड़वाकर हम देश के प्रतिवर्ष 100 से 200 लाख करोड़ रुपए बचाते हैं।</p>
<p><strong>चौथी क्रांति :</strong> वैचारिक और सांस्कृतिक आजादी- जिस भारत ने पूरी दुनियां को सर्वप्रथम संस्कृत विश्वारा का संदेश दिया वो भारत यदि वैचारिक और सांस्कृतिक गुलामी से गुजरे तो ठीक नहीं। आज भारतवर्ष हर बात पर दुनिया के उन दरिद्र देशों पर निर्भर रहता है जिनके पास केवल चंद कागज के टुकड़े, चंद डॉलर्स या पाउण्ड्स हैं। सच्चा व असली धन केवल पैसा नहीं है अपितु अच्छा स्वास्थ्य, सुखी घर-परिवार व चरित्र, योगधन व दैवीय सम्पद ही सच्चा धन है। हमें वैचारिक और सांस्कृतिक गुलामी से भारत को मुक्ति दिलानी है। इसलिए हम कहते हैं कि हमें इस सनातन धर्म को, वेदधर्म को, ऋषिधर्म को, योगधर्म को युगधर्म के रूप में बढ़ाना है। दुनियां के 500 करोड़ से ज्यादा लोग योग धर्म, सनातन धर्म में श्रद्धा रखते हैं। सब मिलकर साथ चलेंगे तो पूरी दुनिया से रिलिजियस टैरेरिजम, पॉलिटिकल टैरेरिजम और ये शिक्षा व चिकित्सा के नाम पर चल रहा आतंकवाद खत्म होगा। </p>
<p><strong>पाँचवी क्रांति : </strong>नशा, रोग-भोग वासनाओं से आजादी- दुनियां में चारों तरफ नशे का खतरनाक खेल चल रहा है। भारत में नशे के दलदल में धंसकर रोग, नशा व अश्लीलता में लोगों के जीवन तबाह हो रहा है। रोग, नशा, अश्लीलता से आजादी का हमारा संकल्प है। पतंजलि के 30 वर्ष पूर्ण होने पर यही है हमारा संकल्प है कि हम पूरे विश्व को योगमय बनायेंगे, चरित्र निर्माण करके आदर्श विश्व नागरिकों का निर्माण करेंगे। </p>
<p>कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि श्रद्धेय स्वामी के अखण्ड प्रचण्ड पुरुषार्थ से पतंजलि का योगदान आज पूरी दुनिया को प्रेरणा दे रहा है। पतंजलि में लोगों को स्वास्थ्य देने के लिए अर्थ से परमार्थ का अभियान चलाया है। पतंजलि का 100 प्रतिशत प्राफिट केवल चैरिटी के लिए है। पतंजलि के लिए भारत एक बाजार नहीं बल्कि परिवार है। पतंजलि में 500 से अधिक विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों की टीम लगातार रिसर्च करके रोगानुसार विविध प्रकार के रस, क्वाथ, वटियाँ, कैप्सूल, व्हीट ग्रास, एलोवेरा जूस, आँवला जूस, नीम रस, गिलोय रस आदि रिसर्च एवं एविडेंस बेस्ड दवाइयाँ पूरी दुनिया को उपलब्ध करा रहे हैं। भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा को आधुनिक विज्ञान का प्रयोग करके जन-जन तक पहुँचाने का कार्य भी सर्वप्रथम पतंजलि ने ही किया है। आज पतंजलि ने दुनिया के 200 देशों में करोड़ों लोगों तक योग को गुफाओं व कन्दराओं से निकालकर जन-जन तक पहुँचाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 14:53:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाबा रामदेव के खिलाफ अदालती कार्यवाही पर आईएमए अध्यक्ष के मीडिया में दिए बयान से सुप्रीम कोर्ट नाराज</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों से उत्पन्न अदालती कार्यवाही के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ आर वी अशोकन की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-angry-with-ima-presidents-statement-in-media-on/article-76318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/baba_ramdev.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों से उत्पन्न अदालती कार्यवाही के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ आर वी अशोकन की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया और मंगलवार को उसके अधिवक्ता से कहा कि आप यह कैसे तय करेंगे कि हमें अपनी कार्यवाही किस तरह से करनी चाहिए।</p>
<p> न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने मौखिक रूप से यह टिप्पणी करते हुए बाबा रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को इस मामले में वर्तमान आईएमए अध्यक्ष डॉ अशोकन द्वारा मीडिया के समक्ष दिए गए बयानों को अदालत के रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दी। पीठ ने आईएमए के वकील से मौखिक रूप से कहा, आप यह कैसे तय करेंगे कि हमें अपनी कार्यवाही किस तरह से करनी चाहिए। न्यायमूर्ति कोहली की पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए सात मई की तारीख मुकर्रर करते हुए श्री रोहतगी को दो दिनों के भीतर इस संबंध में (बयान) एक आवेदन दाखिल करने की अनुमति देते हुए कहा,''हम इस मुद्दे से अलग से निपटेंगे। इससे पहले पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रोहतगी ने आईएमए अध्यक्ष के हवाले वाली खबरों को सामने लाने लाने की मांग करते हुए कहा कि ये अदालती कार्यवाही पर दुर्भाग्यपूर्ण और परेशान करने वाली टिप्पणियां हैं। पीठ ने रोहतगी की दलील पर जवाब देते हुए आईएमए के अधिवक्ता से कहा, यह सबसे गंभीर बात होगी परिणामों के लिए तैयार रहें।</p>
<p> समाचार रिपोर्ट में डाक्टर अशोकन के हवाले से कहा गया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय ने आईएमए और निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की प्रथाओं की भी आलोचना की।  उन्होंने दावा किया अस्पष्ट और सामान्यीकृत बयानों ने निजी डॉक्टरों को हतोत्साहित कर दिया है। खबरों में आईंएम अध्यक्ष के ये बयान, हम ईमानदारी से मानते हैं कि उन्हें (शीर्ष अदालत को) यह देखने की जरूरत है कि उनके सामने क्या सामग्री थी। उन्होंने शायद इस बात पर विचार नहीं किया कि यह वह मुद्दा नहीं था जो (अदालत में) उनके सामने था.) उच्चतम न्यायालय को इस पर विचार करना शोभा नहीं देता है, जिसने आखिरकार कोविड युद्ध के लिए इतने सारे लोगों की जान कुर्बान कर दी।  शीर्ष अदालत ने अवमानना कार्यवाही का सामना कर रहे बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को अपने आचरण के संबंध में की गई सार्वजनिक माफी को उजागर करने वाले समाचार पत्र दाखिल करने की अनुमति दी।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार के संयुक्त निदेशक (उत्तराखंड लाइसेंस प्राधिकरण) मिथिलेश कुमार की ओर से दायर एक हलफनामे पर भी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अदालत के 10 अप्रैल के आदेश के बाद बाबा रामदेव द्वारा स्थापित पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी के खिलाफ कार्रवाई की थी। पीठ ने स्पष्ट तौर पर कहा, आपने (उत्तराखंड लाइसेंस प्राधिकरण के संयुक्त निदेशक) ऐसा क्यों कहा है कि आप इस अदालत के निर्देश पर कार्रवाई कर रहे हैं। हमने आपसे कहा था कि यह आप स्वयं कार्रवाई करें। आप चतुराई से खेल रहे हैं। इसे हमारे कंधों पर न डालें।शीर्ष अदालत ने कहा हम विशेष रूप से इस बयान पर अपना असंतोष व्यक्त करते हैं कि अधिकारी 10 अप्रैल के आदेश के बाद कार्रवाई के लिए सक्रिय हो गये। वर्तमान अधिकारियों और उनके पांच पूर्ववर्तियों के अनुरोध पर पीठ ने उन्हें नए हलफनामे दाखिल करने की अनुमति दी।</p>
<p>पीठ ने कहा, हमें शब्दों के इस्तेमाल से दुख होता है जब आप जानते हैं कि आपके पास लडऩे के लिए कुछ नहीं और आप पहले से ही एक तरफ हैं। सावधान रहें! हर शब्द मायने रखता है। हमारे पास आपके दिल को मापने के लिए कोई मशीन नहीं है हम पक्षपाती नहीं होंगे न्यायालय पर भरोसा रखें।शीर्ष अदालत अवमानना मामले में अगली सुनवाई 14 मई को करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Apr 2024 16:10:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गांवों में उपलब्ध होगा पतंजलि दुग्धामृत पशुआहार</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यक्रम के दौरान सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक संजय राकेश और पतंजलि ग्रामोद्योग (न्यास) हरिद्वार के महामंत्री डॉ. यशदेव शास्त्री उपस्थित थे। पशुपालन भारतीय कृषि की रीढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/patanjali-dugdhamrit-animal-feed-will-be-available-in-villages/article-47366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/z-16.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पतंजलि ग्रामोद्योग (न्यास) और सीएससी एसपीवी के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए, समझौते के मुताबिक, देश के कोने-कोने में मौजूद साढ़े 5 लाख से अधिक केंद्रों के जरिए पतंजलि के संतुलित पशु आहार उत्पाद, फीड सप्लीमेंट्स एवं आयुर्वेदिक पशु औषधियों को न्यूनतम दरों पर देश के प्रत्येक किसानों तक उपलब्ध कराए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक संजय राकेश और पतंजलि ग्रामोद्योग (न्यास) हरिद्वार के महामंत्री डॉ. यशदेव शास्त्री उपस्थित थे। पशुपालन भारतीय कृषि की रीढ़ रहा है। भारत में खेतीबाड़ी के साथ पशुपालन सहायक व्यवसाय के रूप में पुराने समय से ही ग्रामीणों और किसानों की आजीविका का एक जरूरी हिस्सा है। ग्रामीण अंचल में पशुओं का लालन-पालन खेतीबाड़ी के अभिन्न हिस्से के तौर पर मौजूद है।  पतंजलि दुग्धामृत पशुआहार इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  सीएससी भागीदारी के बारे में विस्तार से बताते हुए, सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशकऔर सीईओ संजय राकेश ने कहा कि सीएससी ने हमेशा विभिन्न पहलों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया है।  पहले से ही हम किसानों को टेली-परामर्श, फसल बीमा, ई-पशु चिकित्सा, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान योजनाओं के जरिए विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। पतंजलि ग्रामोद्योग (न्यास) से समझौते के बाद हमारे वीएलईदेश भर के पशुपालकों और किसानों को संतुलित पशु आहार उत्पाद उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। पतंजलि ग्रामोद्योग (न्यास) के महामंत्री डॉ. यशदेव शास्त्री ने कहा कि पतंजलि के यूरिया मुक्त, शुद्ध सात्विक उत्पाद पशुओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने में मददगार हैं। सीएससी और पतंजलि ग्रामोद्योग के बीच इस समझौते के बादकिसानों की आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 10:36:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पतंजलि योगपीठ में एक दिवसीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती जागरूकता कार्यक्रम हुआ सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[पतंजलि योगपीठ के महामंत्री परम पूज्य आचार्य बालकृष्ण ने अपने संबोधन में बताया की विषमुक्त खेती जीवन का आधार एवं इससे होने वाले फायदों और  विषमुक्त अनाज की उपयोगिता के महत्व के बारे में बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/one-day-organic-and-natural-farming-awareness-program-completed-at/article-37060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/q-7.png" alt=""></a><br /><p>हरिद्वार।  हरिद्वार, पतंजलि विश्वविद्यालय सभागार में जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, यह आयोजन राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र, गाजियाबाद एवं पतंजलि जैविक अनुसन्धान संस्थान, हरिद्वार के सयुंक्त तत्वाधान से हुआ जिसमे हरिद्वार जनपद के विभिन्न गांवों से लगभग 500 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पतंजलि योगपीठ के महामंत्री परम पूज्य आचार्य बालकृष्ण ने अपने संबोधन में बताया की विषमुक्त खेती जीवन का आधार एवं इससे होने वाले फायदों और  विषमुक्त अनाज की उपयोगिता के महत्व के बारे में बताया एवं जनपद हरिद्वार एवं राज्य के सभी किसानों के आह्वान किया की वह कम से कम अपने खाने के लिए विषमुक्त खेती करे जिससे की खेती की लागत में कम आये एवं जिससे की उनके एवं उनके परिवार पर होने वाले स्वास्थ्य खर्च में कमी आए।</p>
<p>डॉ. गगनेश शर्मा निदेशक राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र, गाजियाबाद ने अपने संबोधन में बताया की जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने के साथ-साथ किसानों को गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए जैविक प्रमाणीकरण करवाना भी आवश्यक है जिससे की उन्हें जैविक एवं प्राकृतिक उपज का सही बाजार मूल्य मिल सके।</p>
<p>डॉ. एम.के. पालीवाल, उप निदेशक एनसीओ एन फने अपने संबोधन में जैविक एवं प्राकृतिक आदानों के  महत्व एवं खेती में इनकी उपयोगिता के बारे में बताया स पीजीएस प्रमाणन और विपणन  सम्बंधित जैविक खेती पोर्टल की जानकारी डॉ. सचिन वैध, एनसीओ एनएफ  ने किसानों को दी। ए.के. उपाध्यय संयुक्त निदेशक जैविक उत्तराखंड ने अपने संबोधन में विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी किसानों के साथ सांझा की।  इस अवसर पर सहारनपुर के प्रगतिशील किसान गोपाल शर्मा ने वर्मीकम्पोस्ट एवं जैविक एवं प्राकृतिक उर्वरकों के उत्पादन के  लिए आस पास की गोशालाओं से लाभ के बारे में बताया स ग्राम स्तर पर फपीओ/एफपीसी का गठन और मूल्यवर्धन की जानकारी हितेश चौधरी अमरोहा यूपी ने दी एवं उन्होंने अपने संबोधन में पतंजलि कृषक समृद्धि कार्यक्रम के अनुभवों को सांझा किया एवं महिलाशक्ति से जैविक प्राकृतिक खेती में आगे आने का आह्वान किया एवं अपनी प्रदर्शनी में अपने एफपीओ उत्पादों को बताया किसानों से वार्तालाप के क्रम में हरिद्वार के किसान खिलाराम आर्य, जय प्रकाश धीमान, संजय कुमार एवं अनिल पाण्डेय ने अपने अनुभव सांझा किए। डॉ. वी. वाई. देवघरे ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद् संबोधन दिया। इस अवसर पर विभिन्न प्रदर्शनियां भीलगाई गई जिनमें मुख्य रूप से खेत पर तैयार होने वाली प्राकृतिक खादों एवं कीटनाशकों की जानकारी तरुण शर्मा ने दी एवं अन्य प्रदर्शनियों में पतंजलि जैविक संस्थान के जैव-उत्पादों की जानकरी डॉ. आर. के. शुक्ला एवं टीम ने दी, पतंजलिमृदा परिक्षण किट (धरती का डॉक्टर) एवं मृदा परिक्षण मशीन की जानकरी शिवम कुमार ने दी, पतंजलि समृद्धि कार्ड की जानकरी। </p>
<p>अन्जय कुमार एवं टीम ने दी, पतंजलि स्टेशनरी की जानकरी पंकज स्वदेशी ने दी स इस कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के शोध छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया एवं कार्यक्रम का लाइव प्रसारण आस्था चैनल के माध्यम से किया गया एवं अंत में किसानों को वर्मीकम्पोस्ट भी वितरित किया गया। कार्यक्रम का संचालन पवन कुमार मुख्य महा प्रबंधक, पतंजलि जैविक अनुसन्धान संस्थान हरिद्वार  द्वारा किया गया सइस अवसर पर पतंजलि आर्गेनिक रिसर्च इंस्टिट्यूट की टीम से दीपक वशिस्ठ, तरुण शर्मा, शुभम पुण्डीर, अर्पण चौहान, आदित्य राणा, पियूष त्यागी, अपूर्वा तिवारी एवं नीमा सिंह भी उपस्थित थे जिन्होंने कार्यक्रम के संचालन में अपना योगदान दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Feb 2023 10:40:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पतंजलि फूड्स लिमिटेड की आय में 26.38% का इजाफा</title>
                                    <description><![CDATA[31 दिसंबर 2022 को समाप्त नौ महीने की अवधि के दौरान, कंपनी ने 23,858.50 करोड़ रु. की कुल आय और 622.73 करोड़ रु. का पीएटी हासिल किया जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में क्रमश: 35.50% और 8.89% अधिक था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/patanjali-foods-limiteds-income-increased-by-2638/article-36715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/q-172.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ठोस क्यू3 परिणाम देने के बाद पतंजलल फूड्स लिमिटेड- पीएफएल (जिसे पहले रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड) के नाम से जाना जाता था, ने व्यापार और वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में काम करना जारी रखा है। कंपनी ने 31दिसंबर2022 को समाप्त तिमाही के दौरान 7,963.75 करोड़ रु. की कुल आय हासिल की, जो क्यू3एफवाई22 में 6,301.19 करोड़ रु. की तुलना में, 26.38% की वृद्धि से दर्ज हुई।<br /> तिमाही के लिए पीएटी ने 139.73% क्यू-ओ-क्यू और 14.96% वाई-ओ-वाई की मजबूत वृद्धि दर्ज करते हुए 269.18 करोड़ अर्जित किए। 31 दिसंबर 2022 को समाप्त नौ महीने की अवधि के दौरान, कंपनी ने 23,858.50 करोड़ रु. की कुल आय और 622.73 करोड़ रु. का पीएटी हासिल किया जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में क्रमश: 35.50% और 8.89% अधिक था।</p>
<p>कंपनी वॉल्यूम ग्रोथ हासिल करने के लिए अपने मजबूत वितरण चैनल और कई मूल्य बिंदुओं पर उत्पाद की पेशकश का लाभ उठाना जारी रखे हुए है। इसने अक्टूबर महीने में 1.5 लाख मीट्रिक टन खाद्य तेलों और वनस्पति की अब तक की सबसे अधिक मासिक बिक्री हासिल की। इसके अलावा, कंपनी माध्यमिक बिक्री को ट्रैक करने और बिक्री टीम की दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटलीकरण को अपनाने के साथ-साथ अपने मल्टीचैनल वितरण नेटवर्क को बढ़ाने में निवेश करना जारी रखे हुए है।</p>
<p>पतंजलल फूड्स भारत की सबसे बड़ी आयल पाम प्लांटेशन कंपनियों में से एक है। कंपनी अपने पॉम आॅयल व्यवसाय का विस्तार करने पर अपना जोर जारी रखे हुए है और आयल पॉम प्रसंस्करण क्षमता को 160 टीपीएच तक बढ़ाने का कार्य कर रही है। कंपनी ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश, असम और मिजोरम सरकार के साथ मौजूदा समझौता ज्ञापनों के अलावा त्रिपुरा और नागालैंड सरकार के साथ समझौता ज्ञापन में प्रवेश किया है। नए उत्पाद विकास पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।  आगे बढ़ते हुए, कंपनी फूड वर्टिकल से महत्वपूर्ण योगदान के साथ टिकाऊ और लाभदायक विकास देने की अपनी आकांक्षाओं को बनाए हुए है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Feb 2023 11:09:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IMA की रामदेव को खुली बहस की चुनौती, पूछा- कौनसे एलोपैथिक अस्पताल ने कोरोना के इलाज में दी पतंजलि की दवा</title>
                                    <description><![CDATA[आईएमए की उत्तराखंड शाखा ने पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव को 1000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजने के बाद अब खुली बहस की चुनौती दी है। आईएमए ने बयान जारी कर बाबा रामदेव से पूछा है कि कौन से एलोपैथिक अस्पतालों ने कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवाएं दी हैं। संगठन ने पैनल डिस्कशन के साथ बहस की सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ima-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%80--%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9B%E0%A4%BE--%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%B5%E0%A4%BE/article-501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/baba_ramdev.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच एलोपैथी और आयुर्वेद चिकित्सा को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आईएमए की उत्तराखंड शाखा ने पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव को 1000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजने के बाद अब खुली बहस की चुनौती दी है। आईएमए ने बयान जारी कर बाबा रामदेव से पूछा है कि कौन से एलोपैथिक अस्पतालों ने कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवाएं दी हैं। संगठन ने पैनल डिस्कशन के साथ बहस की सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है।<br /> <br /> बता दें कि बाबा रामदेव ने एक टीवी डिबेट में दावा किया था कि एलोपैथिक अस्पताल भी कोरोना इलाज के लिए पतंजलि की दवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। अब आईएमए ने इसे चुनौती देते हुए कहा है कि बाबा रामदेव खुले मंच पर इस दावे को साबित करें और आईएमए से पूरे विवाद पर बहस करें। इससे पहले बाबा रामदेव ने आईएमए को खुली चिट्ठी लिखकर कहा था कि वह आईएमए से 25 प्रश्नों पर जवाब चाहते हैं। रामदेव की ओर से भेजे पत्र पर जवाब देते हुए आईएमए ने कहा कि वह अपने पैनल के साथ इन 25 प्रश्नों के जवाब के लिए भी तैयार है। <br /> <br /> इससे पहले 26 मई को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन उत्तराखंड ने रामदेव को 1000 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया कि अगर रामदेव अगर 15 दिन के अंदर खंडन वीडियो और लिखित माफी नहीं मांगते हैं तो उनसे 1000 करोड़ रुपये की मांग की जाएगी। इसके अलावा रामदेव से 72 घंटे के अंदर कोरोनिल किट के भ्रामक विज्ञापन को सभी स्थानों से हटाने को कहा है, जहां यह दावा किया गया है कि कोरोनिल कोविड वैक्सीन के बाद होने वाले साइड इफेक्ट पर प्रभावी है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 29 May 2021 16:16:50 +0530</pubDate>
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