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                <title>revolution - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ऐतिहासिक रिकॉर्ड: पीएम मोदी ने लगातार 4398 दिन शासन कर नेहरू जी की बराबरी की, 12 वर्षों में बदला देश का स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार सर्वाधिक दिनों तक देश पर शासन करने के पंडित नेहरू के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। उनके 12 वर्षों के कार्यकाल में डिजिटल क्रांति, अनुच्छेद 370 का खात्मा, चंद्रयान-3 की सफलता और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से देश ने हर मोर्चे पर नए कीर्तिमान स्थापित किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/achievements-made-by-modi-ji-during-his-12-year-tenure/article-156930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jaipur1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आज एक जनसेवक को निगम द्वारा मोदी जी द्वारा किए गए 12 वर्ष के कार्यकाल के बारे में बताने का अवसर प्रदान किया। आज का दिन बेहद खास है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक बड़े और एतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है, चुनाव जीत कर लगातार देश प्रशासन करने के मामले में पीएम मोदी अब संयुक्त रूप से पंडित नेहरू के साथ आ गए हैं। 9 जून तक के कार्यकाल को देखें तो एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने लगातार 4398 दिनों तक शासन कर दिया जो कि नेहरू जी के कुल लगातार कार्यकाल के बराबर है। जो कि नेहरू जी के कुल और लगातार कार्यकाल के बराबर है। 10 जून के बाद पीएम मोदी ने इस रिकार्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। हाल ही में, 8 जून को पीएम मोदी ने देश की सत्ता में रहते हुए अपने 12 वर्षों में लंबे सफर के दौरान उनके नेतृत्व में देश में कई बड़े जमीनी, आर्थिक, रणनीतिक और कानूनी बदलाव देखने को मिले पिछले 12 वर्षों में अलग-अलग मोर्चा पर पीएम मोदी जी का सफर और उनकी प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार रही हैं। </p>
<p>आर्थिक सुधार और डिजिटल क्रांति:- जो साल 2014 के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम बनकर उभरा है। देश में करीब 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जा चुका है रेलवे का रिकॉर्ड स्तर परबिजलीकरण हुआ,और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनें भी चलाई गई हैं आत्मनिर्भर भारत पैकेज का पीअलआई योजना की शुरुआत भी इसी दौरान हुई जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स मोबाइल और डिफेंस सेक्टर में भी भारी निवेश आने से भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता भी बन चुका है कड़े कानून और ऐतिहासिक फैसला अगस्त 2019 में मोदी जी द्वारा एक बड़ा और कड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 को हमेशा के लिए हटा दिया इस ऐतिहासिक कदम के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख पूरी तरह से भारतीय संविधान के दायरे में आ गए इससे वहां विकास की मुख्य धारा और सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़े सुधार देखने को मिले हैं। </p>
<p>सामाजिक कल्याण और बुनियादी सुविधाएं इसमें आम जनता की सहूलत के लिए चलाई गई आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के करोड़ों गरीब और मध्यम वर्गी परिवारों को हर साल ₹500000 तक का मुख्य इलाज मिल रहा है वही जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में 15 करोड़ के अधिक घरों तक पाइपलाइन से साफ पानी पहुंचाया गया पीएम आवास योजना के तहत गरीबों को 4 करोड़ के अधिक पक्के मकान बनाकर स्वच्छता के मोर्चे पर 12 करोड़ से अधिक शौचालय का निर्माण कराया इसके अलावा योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त और रियायती दरों पर एलपीजी गैस कनेक्शन दिए गए। </p>
<p>रक्षा नीति और मजबूत निवेश आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रूप अपनाते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जिसके तहत सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे कई बड़े कदम उठाएं गए। अंतरिक्ष और विज्ञान में देश में स्पेस स्टार्टअप की संख्या 400 के पास पहुंच गई इसरो के साथ मिलकर भारत का चंद्रयान तीन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान बना मिशन आदित्य अल 1 ने भी वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया। करोना संकट के दौरान भी भारत ने स्वदेशी वैक्सीन बनाई बल्कि 220 करोड़ से अधिक मुफ्त वैक्सीन डोज का रिकॉर्ड अभियान चलाया और वैक्सीन मैत्री के तहत दुनिया के दर्जनों देशों को दवाइयां भेज कर दुनिया की मदद की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 10:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बाइट थेरेपी से मल्टीपल मायलोमा के इलाज में आई नई क्रांति, एक प्रकार की बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट तकनीक है बाइट थेरेपी</title>
                                    <description><![CDATA[मल्टीपल मायलोमा रक्त के प्लाज्मा कोशिकाओं का एक प्रकार का कैंसर है, जिसमें असामान्य कोशिकाएं बोन मैरो में बढ़ने लगती हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-new-revolution-in-the-treatment-of-multiple-myeloma-from/article-112191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(4)22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मल्टीपल मायलोमा रक्त के प्लाज्मा कोशिकाओं का एक प्रकार का कैंसर है, जिसमें असामान्य कोशिकाएं बोन मैरो में बढ़ने लगती हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को बाधित करती हैं। इस जटिल रोग के उपचार में एक नवीनतम तकनीक है बाय स्पेसिफिक टी-सेल एंगेजर यानी बाइट थेरेपी।</p>
<p><strong>कैसे काम करती है बाइट थेरेपी</strong><br />महावीर कैंसर हॉस्पिटल के सीनियर हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि बाइट थेरेपी एक बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट तकनीक है, जिसमें एक विशेष प्रकार का बाय-स्पेसिफिक एंटीबॉडी प्रयोग होती है। यह एंटीबॉडी एक साथ दो लक्ष्य साधती है। पहलाए यह शरीर की टी-कोशिकाओं यानी प्रतिरक्षा कोशिकाएं से जुड़ती है और दूसरा, यह कैंसर कोशिकाओं को पहचानती है। बाइट थेरेपी शरीर की टी-कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध इकट्ठा करती है। परिणामस्वरूप शरीर स्वयं अपनी रोग प्रतिरोधक सेना के बल पर मायलोमा कोशिकाओं को खत्म करने में सक्षम हो जाता है।</p>
<p><strong>बाइट थेरेपी के फायदे</strong><br />डॉ. शर्मा ने बताया कि बाइट थेरेपी के प्रमुख लाभों में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह उपचार सीधे रोग की जड़ पर प्रहार करता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं का नाश अधिक प्रभावी ढंग से होता है। अन्य पारंपरिक उपचारों की तुलना में इसमें स्वस्थ कोशिकाओं को कम क्षति पहुंचती है, जिससे मरीज की सामान्य प्रतिरक्षा शक्ति सुरक्षित रहती है। विशेष रूप से उन मरीजों में, जिनमें दवाओं के प्रति प्रतिरोधकता विकसित हो चुकी थी, बाइट थेरेपी ने सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं। इसके अलावा इस तकनीक से रोग के दोबारा लौटने की आशंका भी कम होती है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिलती है। डॉ. शर्मा ने बताया कि जिन रोगियों पर अब तक की दवाएं असफल हो गई थीं, उनके लिए बाइट थेरेपी एक वरदान सिद्ध हो रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Apr 2025 14:01:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>औद्योगिक क्रांति की तरफ बढ़ रहा है भारत : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी ने सभा को भी संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के भारत के विकास में विज्ञान उस ऊर्जा की तरह है, जिसमें हर क्षेत्र के विकास को हर राज्य के विकास को गति देने का सार्मथ्य है, जब भारत चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने की तरफ बढ़ रहा है, तो उसमें भारत की साइंस और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की भूमिका अहम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india--towards-industrial-revolution--says-modi/article-22374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/6546546541.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अहमदाबाद में साइंस सिटी में आयोजित 2 दिवसीय केंद्र-राज्य विज्ञान सम्मेलन का उद्घाटन किया और कहा कि नया भारत, जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के साथ ही जय अनुसंधान का आह्वान करते हुए आगे बढ़ रहा है। मोदी ने सभा को भी संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के भारत के विकास में विज्ञान उस ऊर्जा की तरह है, जिसमें हर क्षेत्र के विकास को हर राज्य के विकास को गति देने का सार्मथ्य है, जब भारत चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने की तरफ बढ़ रहा है, तो उसमें भारत की साइंस और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की भूमिका अहम है। समाधान का, इवोलूशन का और इनोवेशन का आधार विज्ञान ही है। इसी प्रेरणा से नया भारत, जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के साथ ही जय अनुसंधान का आह्वान करते हुए आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>अगर हम पिछली शताब्दी के शुरुआती दशकों की बता करे, तो पाते है कि दुनिया में किस तरह तबाही और त्रासदी का दौर चल रहा था, लेकिन उस दौर में भी साइंटिस्ट अपनी खोज में लगे हुए थे। पश्चिम में आइन्स्टाइन, फर्मी, मैक्स प्लांक, नील्स बोर, टेस्ला साइंटिस्ट अपने प्रयोगों से दुनिया को चौंका रहे थे। उसी दौर में सीवी रमन, जगदीश चंद्र बोस, सत्येंद्रनाथ बोस, मेघनाद साहा और चंद्रशेखर समेत कई वैज्ञानिक अपनी नई-नई खोज सामने ला रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा आग्रह यही है कि हम अपने देश के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को सेलिब्रेट करे। हमारी सरकार साइंस बेस्ड डेवलपमेंट के साथ काम कर रही है। 2014 के बाद से साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट में काफी वृद्धि की गई है। </p>
<p>सरकार के प्रयासों से भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 46वें स्थान पर है, जबकि 2015 में भारत 81 नंबर पर था। इस अमृतकाल में भारत को रिसर्च और इनोवेशन का ग्लोबल सेंटर बनाने के लिए हमें एक साथ अनेक मोर्चो पर काम करना है। अपनी साइंस और टेक्नॉलॉजी से जुड़ी रिसर्च को हमें लोकल स्तर पर लेकर जाना है। इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकारों को ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक संस्थानों के निर्माण पर और प्रक्रियाओं को सरल करने पर बल देना चाहिए, जो उच्च शिक्षा के संस्थान है। उनमें इनोवेशन लैब्स की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। राज्यों में राष्ट्रीय स्तर के अनेक वैज्ञानिक संस्थान होते है। नेशनल लेबोरेटरीज भी होती है। इनके सार्मथ्य का लाभ, इनकी एक्सपर्टाइज का पूरा लाभ भी राज्यों को उठाना चाहिए। हमें अपने साइंस से जुड़े संस्थानों को सिलोस की स्थिति से भी बाहर निकालना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/india--towards-industrial-revolution--says-modi/article-22374</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Sep 2022 14:56:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान: समाज सुधार से सोशलिस्ट रिपब्लिक क्रांति के सपनों तक</title>
                                    <description><![CDATA[गोपालसिंह खरवा ने 2000 सशस्त्र सैनिक तैयार कर रखे थे। इसके अलावा 30 हजार से अधिक बंदूकें भी गोलियों के साथ थीं। खरवा ने इन्हें छुपाया लेकिन वे गिरफ्तार कर लिए गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/rajasthan-from-social-reform-to-the-dreams-of-socialist-republic/article-18808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/p-5.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर में जनजाग्रति की शुरुआत दयानंद सरस्वती के वैदिक यंत्रालय की स्थापना के साथ ही हो गई थी। यह 19वीं सदी का समय था। 1883 में यहीं दयानंद सरस्वती ने अंतिम सांस ली और उसके बाद क्षेत्र में धार्मिक पाखंडों, रूढ़िवादिता, अशिक्षा, बालविवाह, दलितों से भेदभाव सहित विभिन्न बुराइयों के खिलाफ अभियान शुरू हो गया था। लेकिन 1914-15 के आते-आते महाविप्लवी नायक रासबिहारी बोस की सशस्त्र क्रांति की शुरुआत हो गई। इस आंदोलन में महिलाओं ने व्यापकतौर पर भाग लिया। ये आम महिलाएं थीं। इनमें ज्यादातर आर्य समाज के समाज सुधारक आंदोलन से निकली थीं।<br /><br />ब्यावर के सेठ दामोदरदास राठी, ठाकुर गोपालसिंह खरवा, भूपसिंह यानी विजयसिंह पथिक आदि ने मोर्चा संभाल रखा था और इसी बीच वहॉं शचींद्रनाथ सान्याल आए। उन्होंने 21 फरवरी 1915 को देश भर के साथ ही अजमेर से भी क्रांति शुरू करने का कार्यक्रम तय किया, लेकिन खबर लीक हो गई और ब्रिटिश सरकार ने धरपकड़ तेज करवा दी। गोपालसिंह खरवा ने 2000 सशस्त्र सैनिक तैयार कर रखे थे। इसके अलावा 30 हजार से अधिक बंदूकें भी गोलियों के साथ थीं। खरवा ने इन्हें छुपाया लेकिन वे गिरफ्तार कर लिए गए। <br />इसी दौरान जमनालाल बजाज ने राजपूताना मध्य भारत सभा का गठन किया। इसके माध्यम से अर्जुनलाल सेठी, केसरीसिंह बारहठ, गोपालसिंह खरवा आदि ने भाग लिया और आंदोलन तेज किया। इस समय देश में खिलाफत आंदोलन चला तो अजमेर भी अछूता नहीं रहा। यहॉं सेठ अब्बास अली, डॉ. अंसारी, मौलाना मौयुद्दीन सहित कई लोगों ने खिलाफत आंदोलन में भागीदारी ली। अजमेर की खिलाफत समिति में चांदकरण शारदा भी थे।<br /> <br />अक्टूबर 1920 में अर्जुनलाल सेठी केसरीसिंह बारहठ और विजयसिंह पथिक ने राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की। उस समय रामनारायण चौधरी वर्धा से अजमेर को क्रांतिकारियों का केंद्र बना चुके थे। वे राजस्थान केसरी निकालने लगे। मानहानि का मुकदमा चलाया गया और चौधरी को 3 माह की सजा हुई।<br /> <br />1926 में हरिभाऊ उपाध्याय ने अजमेर में राजनीति शुरू की। एक आश्रम की स्थापना की। नमक सत्याग्रह हुआ तो उपाध्याय, पथिक, सेठी चौधरी और असावा को गिरफ्तार कर लिया गया। 1932 के देशव्यापी सत्याग्रह में बहुत गिरफ्तारियां हो रही थी तो अजमेर में महिलाओं ने बड़ी तादाद में जेल जाकर अपनी साहसिकता और देशप्रेम का परिचय दिया। इसी साल रामचंदर नरहरी बापट ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी की शुरूआत की और इस दिन उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर में अजमेर के इंस्पेक्टर जनरल आॅफ जेल मिस्टर गिब्सन को गोली से उड़ाने की कोशिश की लेकिन उनका रिवाल्वर जाम हो गया और गिब्सन बच गया। बापट को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें 10 साल की सजा हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Aug 2022 11:32:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डिजिटल क्रांति के साथ ई-कचरा गंभीर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद ई-कचरे का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस कचरे का 95 प्रतिशत से अधिक अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/e-garbage-threat-with-digital-revolution/article-8421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46546546546534.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद ई-कचरे का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस कचरे का 95 प्रतिशत से अधिक अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ई-कचरे की अभूतपूर्व पीढ़ी डिजिटल क्रांति के लिए चिंता का विषय है। ई-कचरा इलेक्ट्रॉनिक-अपशिष्ट छोड़े गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। इसमें उनके उपभोग्य वस्तुएं, पुर्जे शामिल हैं। इसे दो व्यापक श्रेणियों के अंतर्गत 21 प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है जैसे सूचना प्रौद्योगिकी और संचार उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स। ई-कचरे के प्रबंधन के लिए कानून 2011 से भारत में लागू हैं। ई-कचरा प्रबंधन नियम में अधिनियमित किया गया था। घरेलू और व्यावसायिक इकाइयों से कचरे को अलग करने, प्रसंस्करण और निपटान के लिए भारत का पहला ई-कचरा क्लिनिक भोपाल, मध्य प्रदेश में स्थापित किया गया है। ई-कचरे की धारा में विविध पदार्थ होते हैं जिनमें सबसे प्रमुख रूप से खतरनाक पदार्थ जैसे सीसा, पीसीबी, पीबीबी पारा, पीबीडीई, ब्रोमिनेटेड फ्लेम रिटार्डेंट्स (बीएफआर) शामिल हैं। ई-कचरा जलने पर हानिकारक रसायन छोड़ता है, जो मानव रक्त, गुर्दे और परिधीय तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। जब इसे लैंडफिल में फेंका जाता है, तो रसायन भूजल में रीस जाते हैं, जो भूमि और समुद्री जानवरों दोनों को प्रभावित करते हैं। ई-कचरे के प्रबंधन के लिए कानून 2011 से भारत में लागू हैं। ई-कचरा (प्रबंधन) नियम 2016 -2017 में अधिनियमित किया गया था।</p>
<p>उत्पादकों को ई-कचरे के संग्रह और उसके विनिमय के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। भारत में 95 प्रतिशत ई-कचरे को अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा पुनर्नवीनीकरण किया जाता है और स्क्रेप डीलर इसे अवैज्ञानिक रूप से एसिड में जलाकर या घोलकर इसका निपटान करते हैं। ई-कचरे में लेड, मरकरी, कैडमियम, क्रोमियम, पॉलीब्रोमिनेटेड बाइफिनाइल और पॉलीब्रोमिनेटेड डिपेनिल जैसे जहरीले तत्व होते हैं। मनुष्यों पर स्वास्थ्य प्रभावों में गंभीर बीमारियां जैसे फेफड़े का कैंसर, श्वसन संबंधी समस्याएं, ब्रोंकाइटिस,मस्तिष्क की क्षति आदि शामिल हैं, जो जहरीले धुएं के सांस लेने के कारण भारी धातुओं के संपर्क में आने और समान रूप से होती हैं। ई-कचरा एक पर्यावरणीय खतरा है, जिससे भूजल प्रदूषण और भूजल का प्रदूषण और प्लास्टिक और अन्य अवशेषों के जलने से वायु प्रदूषण होता है। भारत में ई.कचरे का संरचित प्रबंधन ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत अनिवार्य है। नियमों की कुछ मुख्य विशेषताओं में ई-अपशिष्ट वर्गीकरण और खतरनाक सामग्री वाले ई-कचरे के आयात पर प्रतिबंध शामिल हैं। भारत में ई-कचरे के 312 अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता हैं, जिनकी सालाना क्षमता लगभग 800 किलो टन है। हालांकि, औपचारिक पुनर्चक्रण क्षमता का कम उपयोग किया जाता है, क्योंकि 90 प्रतिशत से अधिक ई-कचरा अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भारत में लगभग दस लाख से अधिक लोग हस्तचालित पुनर्चक्रण कार्यों में शामिल हैं।</p>
<p>श्रमिक पंजीकृत नहीं हैं इसलिए श्रमिकों के अधिकार, पारिश्रमिक, सुरक्षा उपायों जैसे रोजगार के मुद्दों को ट्रैक करना कठिन है। मजदूर समाज के कमजोर वर्गों से हैं और उनके पास किसी भी प्रकार की सौदेबाजी की शक्ति नहीं है और वे अपने अधिकारों से अवगत नहीं हैं। इसका पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है क्योंकि श्रमिकों या स्थानीय डीलरों द्वारा किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है। स्थानीय स्तर पर पर्यावरण को होने वाले किसी भी नुकसान को रोकने के लिए निरंतर सतर्कता से हॉटस्पॉट क्षेत्र की पहचान करने और जिला प्रशासन के साथ समन्वय करने की आवश्यकता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन को कचरे की चुनौतियों से निपटने और कमियों को दूर करने के लिए जोड़ा जाना चाहिए। अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के साथ जुड़ने की रणनीति के साथ आने की आवश्यकता है क्योंकि ऐसा करने से न केवल बेहतर ई-कचरा प्रबंधन प्रथाओं में एक लंबा रास्ता तय होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी, मजदूरों के स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति में सुधार होगा और बेहतर प्रदान होगा। यह प्रबंधन को पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और निगरानी में आसान बना देगा। समय की मांग है कि रोजगार के साथ-साथ सहकारी समितियों की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने और इन सहकारी समितियों या अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए इ-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2016 के दायरे का विस्तार किया जाए। नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन ई-कचरे के प्रबंधन के लिए आगे का रास्ता है जिसे कम से कम 115 देशों में विनियमित किया जाना अभी बाकी है। प्रभावी जागरूकता सभी हितधारकों के लिए सही कदम होगा। पर्यावरण के अनुकूल ई-अपशिष्ट पुनर्चक्रण प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता है। जब तक हम इस नियम का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं करते हैं, तब तक देश कई अनौपचारिक प्रसंस्करण केंद्रों का निर्माण करेगा।                       </p>
<p><strong>- सत्यवान सौरभ</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Apr 2022 11:38:30 +0530</pubDate>
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