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                <title>weather change - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रदेश में बदले मौसम का दिखा असर :  तेज गर्मी और लू से राहत, आंधी के साथ बारिश होने की संभावना; जानें कब बरसेंगे बदरा</title>
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                        <![CDATA[जयपुर समेत राजस्थान के कई जिलों में मौसम बदल रहा। 14-15 मार्च को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, अजमेर और जयपुर में कहीं-कहीं आंधी, तेज हवाओं (30-50 Kmph) और हल्की बारिश/बूंदाबांदी की संभावना। 18-20 मार्च को नया विक्षोभ सक्रिय। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/weather-update-mercury-drops-relief-from-heat-chances-of-rain/article-146505"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में बदले मौसम का असर जयपुर सहित कई जिलों में देखने को मिल रहा है। तेज गर्मी और लू से राहत है, वहीं आंधी बारिश की भी संभावना है। मौसम विभाग केंद्र जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार एक नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आज 14 मार्च को गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू जिलों, शेखावाटी क्षेत्र, अजमेर, जयपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं मेघगर्जन, तेज हवाओं (30-40Kmph) के साथ हल्की बारिश/बूंदाबांदी होने की संभावना है। कल 15 मार्च को जयपुर, भरतपुर, संभाग व शेखावाटी क्षेत्र के जिलों के उत्तरी भागों तथा गंगानगर, हनुमानगढ़ जिलों व आसपास के क्षेत्र में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ हल्की आंधी-बारिश/बूंदाबांदी होने की संभावना है। इस दौरान कहीं-कहीं अचानक तेज हवाएं 40-50 Kmph तक दर्ज होने की संभावना है।</p>
<p>एक और नया पश्चिमी विक्षोभ 18-20 मार्च के दौरान सक्रिय होने और कहीं-कहीं तेज आंधी (40-50 Kmph) व बारिश हो सकती है। राज्य में आगामी एक सप्ताह अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से नीचे दर्ज होने व हीटवेव से राहत बने रहने की संभावना है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 16:45:56 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                <title>हीटवेव की आहट और खेती पर बढ़ता संकट</title>
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                        <![CDATA[मार्च का महीना सामान्यतः बसंत और हल्की गर्माहट का समय माना जाता है। यह वह दौर होता है, जब सर्दी धीरे-धीरे विदा लेती है और प्रकृति नए मौसम के स्वागत की तैयारी करती है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sound-of-heat-wave-and-increasing-crisis-on-farming/article-146182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)6.png" alt=""></a><br /><p>मार्च का महीना सामान्यतः बसंत और हल्की गर्माहट का समय माना जाता है। यह वह दौर होता है, जब सर्दी धीरे-धीरे विदा लेती है और प्रकृति नए मौसम के स्वागत की तैयारी करती है। लेकिन हाल के वर्षों में मौसम के मिजाज में जो बदलाव दिखाई दे रहा है, उसने इस प्राकृतिक संतुलन को चुनौती दे दी है। इस वर्ष भी मार्च के शुरुआती दिनों में ही तापमान ने कई स्थानों पर पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विशेष रूप से राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर जैसे इलाकों में पारा 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है, जो सामान्य से काफी अधिक है। यह स्थिति केवल मौसम का सामान्य उतार चढ़ाव नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन का संकेत भी मानी जा रही है। मार्च में ही इस तरह की गर्मी आम जनजीवन के लिए परेशानी का कारण बन रही है।</p>
<p><strong>मौसम विभाग के अनुसार :</strong></p>
<p>हीट वेव या लू एक ऐसी स्थिति होती है जब किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है और लगातार कई दिनों तक बना रहता है। मौसम विभाग के अनुसार जब किसी क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री अधिक हो जाए या मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाएए तो उसे हीट वेव की स्थिति माना जाता है। भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में गर्मी का मौसम सामान्य बात है, लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है जब गर्मी असामान्य समय पर और अत्यधिक तीव्रता के साथ पड़ने लगे। मार्च में ही राजस्थान के पश्चिमी जिलों,बाड़मेर और जैसलमेर में 35 से 40 डिग्री तक तापमान पहुंचना इसी असामान्य प्रवृत्ति का उदाहरण है। यह बदलाव केवल स्थानीय कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान का असर है।</p>
<p><strong>तेजी से बढ़ता शहरीकरण :</strong></p>
<p>जंगलों की कटाई, औद्योगिक प्रदूषण, वाहनों से निकलने वाला धुआं और तेजी से बढ़ता शहरीकरण वातावरण के तापमान को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मार्च में इतनी जल्दी बढ़ी गर्मी का सीधा असर आम लोगों के दैनिक जीवन पर दिखाई देने लगता है। जहां पहले लोग इस समय तक आरामदायक मौसम का आनंद लेते थे,वहीं अब दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल होने लगा है। अत्यधिक गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित मजदूर, किसान, रिक्शा चालक और खुले में काम करने वाले लोग होते हैं। लगातार तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, थकान और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।</p>
<p><strong>गेहूं के उत्पादन को प्रभावित किया :</strong></p>
<p>इसके अलावा बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है क्योंकि लोग कूलर और एसी का उपयोग अधिक करने लगते हैं। इससे बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और कई स्थानों पर बिजली कटौती की समस्या भी सामने आती है। असामान्य गर्मी का सबसे गंभीर प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। मार्च का महीना रबी फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी समय गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलें पकने की अवस्था में होती हैं। जब तापमान अचानक बढ़ जाता है तो फसलों के दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते। इससे उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ जाती है। विशेष रूप से गेहूं की फसल पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है और पैदावार कम हो जाती है। मार्च और अप्रैल में पड़ने वाली असामान्य गर्मी ने गेहूं के उत्पादन को प्रभावित किया है।</p>
<p><strong>मौसम के पैटर्न में लगातार बदलाव :</strong></p>
<p>राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां बड़ी मात्रा में गेहूं की खेती होती है, वहां समय से पहले बढ़ती गर्मी किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। मार्च में ही बढ़ती गर्मी हमें यह संकेत देती है कि प्रकृति का संतुलन धीरे धीरे बिगड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में लगातार बदलाव हो रहा है। कभी अत्यधिक वर्षा, कभी लंबा सूखा और कभी असामान्य गर्मी,ये सभी इसी बदलाव के संकेत हैं। जलवायु संकट की यह कोई नई कहानी नहीं वैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट हैं। पिछले एक सौ वर्षों में पृथ्वी का तापमान बढ़ा है। भारत में यह वृद्धि कुछ क्षेत्रों में इससे भी अधिक रही है। औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन, वनों की अन्धाधुन्ध कटाई, शहरों में बढ़ता कंक्रीट का जंगल, इन सभी ने मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाया है जहां हीट वेव अब अपवाद नहीं।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता :</strong></p>
<p>यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में हीट वेव की घटनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं। इससे न केवल कृषि बल्कि जल संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। जल स्रोतों का तेजी से सूखना, भूजल स्तर का गिरना और वनस्पतियों पर बढ़ता दबाव इस संकट को और गहरा बना सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे। सबसे पहले पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, जंगलों की कटाई रोकना और प्रदूषण को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। कृषि क्षेत्र में भी बदलते मौसम के अनुरूप नई रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता है। प्रकृति का संतुलन बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का दायित्व भी है।</p>
<p><strong>-जयदेव राठी</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 11:39:52 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>मौसम में बदलाव की मार, जयपुर के अस्पतालों में उमड़ी मरीजों की भीड़</title>
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                        <![CDATA[मौसम परिवर्तन के साथ ही शहर के अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बदलते मौसम के कारण सर्दी, जुकाम, बुखार और वायरल संक्रमण से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-change-in-weather-crowd-of-patients-gathered-in/article-146021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मौसम परिवर्तन के साथ ही शहर के अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बदलते मौसम के कारण सर्दी, जुकाम, बुखार और वायरल संक्रमण से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। शहर के कांवटिया अस्पताल की ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की भीड़ दिखाई दी, जहां लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कई मरीज अपने परिजनों के साथ अस्पताल परिसर में बैठे दिखाई दिए। इसी तरह सवाई मान सिंह अस्पताल की ओपीडी में भी मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिली।</p>
<p>पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्ष तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। अस्पताल में जांच और उपचार के लिए आए लोगों के कारण पूरे परिसर में काफी भीड़ रही। गणगोरी अस्पताल में भी ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल और मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं, इसलिए लोगों को खान-पान और सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 09:30:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                <title>अब पराली बनी सियासत वाली</title>
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                        <![CDATA[ठंड की दस्तक के साथ ही धान की कटाई और पराली जलाने का दौर शुरू हो जाता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/now-stubble-has-become-the-subject-of-politics/article-130943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>ठंड की दस्तक के साथ ही धान की कटाई और पराली जलाने का दौर शुरू हो जाता है। हर साल की तरह इस बार भी दिवाली के आसपास प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंचा और इसकी जिम्मेदारी एक बार फिर पराली पर डाल दी गई। पंजाब और दिल्ली की सरकारें इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, एक-दूसरे पर आरोप, लेकिन समाधान कहीं नहीं। सवाल उठता है कि जब सच्चाई सबके सामने है, तो राजनीतिक बयानबाजी से आखिर प्रदूषण कैसे कम होगा। यह सच है कि पराली के धुएं ने पंजाब, दिल्ली और आसपास के कई राज्यों की हवा जहरीली कर दी है। पराली का धुआं केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि सांसों में महसूस हो रहा है। कोविड-19 के बाद लोगों की प्रतिरोधक क्षमता और भी घट गई है, जिससे प्रदूषण के प्रभाव अधिक गंभीर हो गए हैं।</p>
<p><strong>प्रदूषण के मामले :</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट पहले भी केंद्र और राज्य सरकारों को प्रदूषण के मामले में फटकार लगा चुका है। अदालत ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से पराली जलाने पर सख्ती से रोक लगाने को कहा था, लेकिन हालात में खास सुधार नहीं हुआ। 27 अक्टूबर तक के केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में प्रदूषण में कुछ गिरावट जरूर आई, लेकिन एक्यूआई 301 पर बना रहा,जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से लगभग 1900 प्रतिशत अधिक है। बहादुरगढ़, गुरुग्राम, गाजियाबाद जैसे एनसीआर शहरों में स्थिति और भी खराब रही, जहां एक्यूआई 380 के पार गया। वहीं, देश के 256 शहरों में से केवल 23 प्रतिशत में हवा साफ रही यानी 77 प्रतिशत शहरों की हवा प्रदूषित है। दिल्ली के मुकाबले पंजाब में स्थिति कुछ बेहतर जरूर है, पर वहां भी वायु गुणवत्ता गिर रही है।</p>
<p><strong>सैटेलाइट तस्वीरें :</strong></p>
<p>नासा की सैटेलाइट तस्वीरें और चंडीगढ़ पीजीआई व पंजाब यूनिवर्सिटी के शोध बताते हैं कि भारतीय पंजाब ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी पंजाब में भी पराली जलाने की घटनाएं अधिक हैं। वहां की हवाएं भी भारत के सीमावर्ती इलाकों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में प्रदूषण के इस धुंए की सीमा केवल राजनीतिक नहीं, भौगोलिक भी है। हर साल यह सवाल उठता है कि आखिर किसान पराली क्यों जलाते हैं, सच्चाई यह है कि किसान अपराधी नहीं, मजबूर हैं। छोटे किसान संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। पराली न जलाने के लिए जो मशीनें जैसे हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम आदि चाहिए, वे महंगी हैं और किसानों को ऋण मिलना कठिन है। खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम समय होता है। यदि किसान पराली जलाए बिना खेत तैयार करे तो अगली फसल की बुवाई देर से होगी, जिससे पूरी फसल पर खतरा आ सकता है।</p>
<p><strong>जलाने को विवश :</strong></p>
<p>मौसम की अनिश्चितता और समय की कमी के कारण किसान मजबूरी में पराली जलाने को विवश हो जाते हैं। दिल्ली में प्रदूषण नया मुद्दा नहीं है। 1985 में भी यह समस्या गंभीर रूप में सामने आई थी, जब कीर्ति नगर क्षेत्र में एक फर्टिलाइजर संयंत्र से जहरीली गैस लीक हुई। उसके बाद अदालत ने प्रदूषणकारी इकाइयों पर प्रतिबंध लगाए और स्वच्छ वातावरण में रहने का अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया। लेकिन चार दशक बाद भी हालात में कितना सुधार हुआ योजनाएं बनती हैं, बैठकें होती हैं, फिर सबकुछ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में दब जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को लेकर कई घोषणाएं करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जागरूकता और संसाधन दोनों की भारी कमी है। सरकारें पराली के वैकल्पिक उपयोग जैसे बायो-फ्यूल, पशु चारा, कम्पोस्ट, कार्डबोर्ड, पेपर उद्योग में उपयोग पर गंभीर चर्चा नहीं करतीं।</p>
<p><strong>स्थायी समाधान नहीं :</strong></p>
<p>दिल्ली सरकार द्वारा क्लाउड सीडिंग जैसे प्रयोगों की बात करना प्रदूषण पर अस्थायी राहत तो दे सकता है, पर स्थायी समाधान नहीं। जरूरी यह है कि पराली को कचरा नहीं,संसाधन के रूप में देखा जाए। कई देशों ने इसी चुनौती को अवसर में बदला है। स्वीडन और फिनलैंड जैसे देशों ने कृषि अपशिष्ट से बिजली और ईंधन बनाकर न केवल प्रदूषण कम किया, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ाई। भारत में भी ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा सकता है, बशर्ते राजनीतिक इच्छाशक्ति हो। हर साल अक्टूबर-नवंबर में यह मुद्दा दोहराया जाता है। मीडिया, सरकारें, अदालतें सब सजग दिखते हैं, पर दिसंबर आते-आते मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जबकि सच यह है कि प्रदूषण किसी राज्य की सीमा नहीं जानता। न दिल्ली की हवा दिल्ली में रुकती है, न पंजाब का धुआं पंजाब में। जरूरत इस बात की है कि सभी राज्य मिलकर एक साझा नीति बनाएं।</p>
<p><strong>दीर्घकालिक समाधान :</strong></p>
<p>प्रदूषण का संकट केवल पराली का नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली, नीति-निर्माण और प्राथमिकताओं का भी आईना है। जब तक सरकारें राजनीतिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक समाधान पर ध्यान नहीं देंगी, तब तक हर साल सर्दियों में दिल्ली और उत्तर भारत की हवा दमघोंटू बनी रहेगी। पराली समस्या का समाधान असंभव नहीं है। यह तकनीकी, आर्थिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रश्न है। किसानों को दोषी ठहराने से बेहतर होगा कि उन्हें समाधान का हिस्सा बनाया जाए। सरकारें यदि पराली के व्यावसायिक उपयोगों को बढ़ावा दें, किसानों को उपकरणों के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण दें, और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाएं, तो आने वाले वर्षों में प्रदूषण की यह वार्षिक त्रासदी रोकी जा सकती है।</p>
<p><strong>-ऋतुपर्ण दवे</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 12:41:03 +0530</pubDate>
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                <title>आंधी...बारिश...ओले...ने उतारी पारे की ‘गर्मी’, हवा में उड़े टिन-टप्पर, मासूम सहित तीन की मौत </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जिलेभर में गुरूवार दिनभर सूरज की तपिश के बाद शाम को अचानक हुए मौसमी बदलाव के बाद तेज अंधड़ के साथ आई बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bhilwara/three-killed-in-the-heat-innocent-of-the-heat-innocent/article-115052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>भीलवाड़ा। जिलेभर में गुरूवार दिनभर सूरज की तपिश के बाद शाम को अचानक हुए मौसमी बदलाव के बाद तेज अंधड़ के साथ आई बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, जबकि सड़ास थाना क्षेत्र के भीलों का झोपड़ा ग्राम में तेज हवा और बारिश से दीवार ढहने से एक मासूम सहित वृद्धा की दबने से मौत हो गई। जबकि काछोला थाना क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में बैठे एक वृद्ध की पेड़ के नीचे दबने से मौत हो गई। वहीं सातोला का खेड़ा में बिजली लाइन पर पेड़ धराशाही होने से वहां विद्युत आपूर्ति बाधित रही। शहर के भीमगंज थाने का बोर्ड भी तेज हवा से नीचे गिर गया। आटूण-भीलवाड़ा बाईपास पर गढ़बोर आॅटो मोबाइल्स प्रा. लि. वर्कशॉप के टीन-टप्पर उड़ गए जिससे कर्इं वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं रामधाम के निकट होर्डिंग्स सड़क की ओर नहीं आकर दूसरी तरफ गिर गया। जिससे बड़ा हादसा टल गया। इसी तरह शास्त्री नगर में सोलर प्लांट मकान की छत से उड़कर सड़क पर आ गया। इसी तरह शहर सहित जिले में कई स्थानों पर टीन शेड उड़ गये और पेड़ धराशाही हो गए। शहर में सायं करीब छह बजे मौसमी पलटवार के चलते आये तेज अंधड़ व ओलो से कई स्थानों पर टीन टप्पर व होर्डिंग्स उड़ गये कुछ पेड़ भी धराशाही हो गए।  </p>
<p>इसी बीच गर्जना और आकाशीय बिजली की गड़गड़ाहट के साथ आसमां में छायी काली घटाओ से बरसी राहत की बूंदें जल्द ही तेज बरसात में तब्दील हो गयी। देखते ही देखते शहर की सड़कों पर पानी बह चला। वहीं अपर्याप्त सफाई के कारण नालियों में जमा कचरा सड़कों पर फैल गया। रोडवेज बस स्टेण्ड के सामने, नेहरू रोड, रामद्वारा मार्ग, छीपा बिल्डिंग के पीछे वाले मार्ग सहित पुराने शहर स्थित गली मोहल्लों में जलभराव सी स्थितियां व्याप्त हो गयी। लगभग एक घंटे तक चले आंधी-बारिश के दौर से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। इससे पूर्व दिनभर सूर्यदेव आग उगलते रहे। दोपहर में चरम पर पहुंची भीषण गर्मी से शहर के अधिकांश बाजारों, गली मोहल्लों में सन्नाटा पसरा रहा। शहर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चित्तौड़गढ़ जिले के साड़ास थाना क्षेत्र के भीलों का झोपड़ा ग्राम में तेज हवा चलने से दीवार गिर गई। जिसके नीचे दबने से शांतिदेवी उर्फ शायरी पत्नी मगनी राम व सूरज पिता सुरेश भील की मौत हो गई। जबकि रतन पिता कैलाश भील घायल हो गया। जिन्हें उपचार के लिए महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।  उधर जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी अंधड़ और बरसात से जनजीवन प्रभावित हो गया। बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में बंद हुई विद्युत आपूर्ति ने निगम द्वारा लम्बे समय से चलाये जा रहे रखरखाव कार्यो की पोल खोल कर रख दी। आमजन अघोषित विद्युत कटौती से पहले ही खासे परेशान है। ग्रामीण इलाकों में भी विद्युत आपूर्ति बाधित होने से जनजीवन प्रभावित हुआ। गंगापुर न्यूज सर्विस के अनुसार क्षेत्र में दिनभर तेज गर्मी और उमस के बाद शाम को बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भीलवाड़ा</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 May 2025 11:20:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रदेश में गर्मी का असर हुआ तेज, होली पर फिर बदलेगा मौसम </title>
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                        <![CDATA[प्रदेश में सर्दी अब लगभग विदा हो चुकी है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-effect-of-heat-in-the-state-will-change-the/article-107071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में सर्दी अब लगभग विदा हो चुकी है। गर्मी का असर तेजी से बढ़ रहा है। तापमान ज्यादातर इलाकों में 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, होली पर फिर मौसम बदलने की संभावना है। बीकानेर संभाग के 4 जिलों में एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल छा सकते हैं। कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी भी हो सकती है। लगातार बढ़ रही गर्मी के कारण अब पश्चिमी राजस्थान में कूलर-पंखे चलने शुरू हो गए।</p>
<p>जयपुर मौसम विज्ञान केन्द्र ने राजस्थान में 12 मार्च तक प्रदेश में मौसम ड्राय और तेज धूप रहने की संभावना जताई है। इस दौरान कई शहरों का पारा 33 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हो सकता है। 13 मार्च तक तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी होने की संभावना है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Mar 2025 18:24:51 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर सहित कई जिलों में छाए बादल, हुई मावठ की रिमझिम </title>
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                        <![CDATA[ जयपुर, कोटा, भरतपुर सहित कई जिलों में सुबह से बादल छाए हुए हैं, ऐसे में सर्दी और ठिठुरन का अहसास बढ़ गया है।
]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/many-districts-including-jaipur-are-covered-with-clouds-and-drizzle/article-98460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555440.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में सक्रिय हुए एक पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजधानी जयपुर सहित कई जिलों में मौसम बदल गया है। जयपुर में जहां सुबह से बादल छाए हुए हैं और रिमझिम बारिश हुई है, वहीं इसका असर राजस्थान के विभिन्न जिलों में दिखने लगा है। बीकानेर, श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ में रात से ही रुक-रुक कर बारिश हो रही थी। सीकर के फतेहपुर और चूरू में भी सुबह हल्की बरसात हुई है। जयपुर, कोटा, भरतपुर सहित कई जिलों में सुबह से बादल छाए हुए हैं, ऐसे में सर्दी और ठिठुरन का अहसास बढ़ गया है।</p>
<p>वहीं मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 24 दिसंबर को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के एरिया में कहीं-कहीं कोहरा छा सकता है और 26 दिसंबर से फिर से एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ प्रदेश में एक्टिव होगा, जिसके असर से 26-27 दिसंबर को राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में बादल छाने और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 15:49:41 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार मौसम अनुकूल होने से भिंडी के अच्छे मिल रहे भाव </title>
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                        <![CDATA[ गुड़ली भिंडी मंडी की का 5 साल का रिकॉर्ड आखातीज के दिन से ही 5 किलो तक की है भिंडी लेकिन इस बार भिंडी ने 5 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 20 से 30 किलो बिक रही है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/this-time-due-to-favorable-weather-okra-is-getting-good-prices/article-44334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/is-baar-mausam-anukool-hone-se-bhindi-ke-achche-mil-rahe-bhaav..gudli-news,-bundi-1.5.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>गुड़ली। राजस्थान के बाहर से आने वाली भिंड़ी मौसम में परिवर्तन होने के कारण इस बार समय पर  नहीं चल पाई है जिसके चलते गुड़ली गांव की भिंडी मंडी ने दिल्ली,गुड़गांव, हरियाणा, पंजाब, जयपुर आदि  बड़ी मंडियों में अपनी पकड़ बना रखी है इसलिए यहां से लगातार भिंडी की बंपर आवक के साथ व्यापारियों को भी फायदा हो रहा है। साथ ही किसानों को भी अच्छी रेट मिल रही है। किसान रामलाल, मनोज, राजदीप आदि का कहना है कि आखा तीज के समय हर साल कम से कम 2 से 5 किलो के हिसाब से भिंडी बिकती थी लेकिन इस बार भिंडी में रिकॉर्ड तोड़ दिया।अभी भी 20 से 30 किलो बिक रही है। जो एक अनोखा रिकॉर्ड है। व्यापारी व किसानों के लिए फायदा साबित हो रहा है। दूसरे गांवों के लोग भी गुडली मंडी में भिंडी बेचना पसंद कर रहे हैं। हमारी भिंडी मंडी राजस्थान के बाहर भी बड़ी मंडी में जा रही हैं। इस बार अच्छे रेट इसलिए चल रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश मेरठ से आने वाली भिंड़ी मौसम परिवर्तन होने के कारण समय पर नहीं चल पाएं। इसी समय पर गुड़ली की भिंडी मार्केट में अच्छी पकड़ बनाए हुए हैं। इसी को देखते हुए आगे रेट है। इसलिए हम भी किसानों से अच्छे रेट में खरीद कर ले जा रहे हैं। त्रिलोक सुमन, तुलसीराम सुमन, शंकर सुमन, रामचंद्र सुमन,  नरेंद्र सुमन सभी व्यापारियों का कहना कि इस बार मौसम में बहुत सारा परिवर्तन हुआ। एक कारण यह भी  है कि कभी गर्मी, कभी सर्दी, कभी धूप ,कभी छांव इसी के चलते भिंडी में अभी तक भी पीलापन नहीं आया है। अभी  भी हरी की हरी है। हरी भिंड़ी की मार्केट में बोली होती है रेट अच्छी मिलती है। इसे करने से गूगली भिंडी मंडी में इस समय भी रेट बरकरार है। किसानों को लाभ हो रहा है।</p>
<p> गुड़ली भिंडी मंडी की का 5 साल का रिकॉर्ड आखातीज के दिन से ही 5 किलो तक की है भिंडी लेकिन इस बार भिंडी ने 5 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 20 से 30 किलो बिक रही है। इस बार सोनू महावीर दीपक उपेंदर युधिस्टर सुरेंद्र आदि किसानों का कहना है कि आखातीज के समय से ही भिंड़ी तोड़ना बंद कर दिया जाता था क्योंकि 2 से 5 किलो के हिसाब से भिंड़ी बिकती थी लेकिन इस बार अलग ही नजारा देखने को मिला है 20 से 30 किलो तक बिक रही है। इससे किसानों को लाभ हो रहा है।</p>
<p>राजस्थान के बाहर के सभी राज्यों में इस बार मौसम परिवर्तन होने के कारण भिंडी का उत्पादन समय से नहीं चला है। सिर्फ गली में भिंडी चल रही है। इसी वजह से राजस्थान भारत की बड़ी मंड़ियों में गुड़ली भिंडी मंडी अपना दमखम दिखा रही है।<br /><strong>-तेजमल मेरोठा, कृषक मित्र ग्राम पंचायत गुडली</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2023 14:34:13 +0530</pubDate>
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                <title>मौसम में आए बदलाव से तापमान में गिरावट</title>
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                        <![CDATA[पश्चिमी विक्षोभ से मौसम में आए बदलाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज हुई, लेकिन गर्मी से अधिक राहत नहीं मिली। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-temperature-fell-due-to-change-in-weather/article-8422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4654564654652.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पश्चिमी विक्षोभ से मौसम में आए बदलाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज हुई, लेकिन गर्मी से अधिक राहत नहीं मिली। पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गर्मी अपेक्षाकृत अधिक रही। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में राज्य में कहीं आंधी बारिश दर्ज की गई। बारिश से राज्य के अनेक हिस्सों में तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। जयपुर में दिन का तापमान 39.0 और रात का तापमान 25.0 डिग्री दर्ज हुआ।</p>
<p><strong>अब बढ़ेगा तापमान</strong><br />राज्य में एक बार फिर से हीटवेव चलने व ज्यादातर स्थानों पर अधिकतम तापमान 43.45 डिग्री के आसपास दर्ज होने की संभावना है।</p>
<p><strong>कहां कितना दर्ज दिन का तापमान</strong><br />अजमेर 39.3, टोंक 40.8, अलवर 39.0, जयपुर 39.0, पिलानी 38.7, सीकर 39.2, कोटा 40.4, चित्तौड़गढ़ 39.6, बाड़मेर 40.9, जैसलमेर 40.5, जोधपुर 40.3, फलौदी 41.6, बीकानेर 40.3, चूरु 40.3, गंगानगर 39.3, धौलपुर 41.6, नागौर 40.3 डिग्री दिन का तापमान दर्ज किया गया। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Apr 2022 11:47:49 +0530</pubDate>
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