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                <title>cowshed - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>गौशाला में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव</title>
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                        <![CDATA[कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-medical-facilities-in-the-cowshed/article-125574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। यहां हजारों की संख्या में लावारिस हालत में पकड़कर लाए गए पशु रखे गए हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गौवंश के लिए गौशाला में अब तक पशु चिकित्सालय तक संचालित नहीं हो पाया है। कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>ग्रीनबेल्ट पर खर्च, जरूरी काम अधूरे</strong><br />सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की ओर से गौशाला में जो आवश्यक निर्माण कार्य हैं, वे तो अधूरे पड़े हैं। इसके उलट लाखों रुपए खर्च कर ग्रीनबेल्ट विकसित की गई है। लेकिन बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा और रहने के लिए शेड जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हुई हैं।</p>
<p><strong>निगम का पक्ष</strong><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिकारियों का कहना है कि गौशाला में निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही पशुओं के लिए शेड व अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।</p>
<p><strong>कायन हाउस की स्थिति और खराब </strong><br />सिंह ने बताया कि किशोरपुरा स्थित कायन हाउस की स्थिति तो और भी खराब है। वहां तो चिकित्सा केन्द्र तक मौजूद नहीं है। कम्पाउंडरों से ही काम चलाया जा रहा है। शहर में निजी स्तर पर करीब दो दर्जन पशु चिकित्सा केन्द्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन निगम की गौशालाओं में मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल रही है। इससे बीमार पशुओं की देखभाल में कठिनाई आती है।</p>
<p><strong>डॉक्टर आते हैं सप्ताह में एक-दो बार</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि यहां लाए जाने वाले अधिकांश गौवंश बीमार और कमजोर स्थिति में होते हैं। उन्हें लगातार चिकित्सा सुविधा की जरूरत रहती है। लेकिन निगम की ओर से यहां स्थायी पशु चिकित्सक तैनात नहीं है। बोरावास व मंडाना से सप्ताह में केवल एक-दो बार ही डॉक्टर आते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में समय पर उपचार न मिल पाने से कई बार गंभीर परेशानी खड़ी हो जाती है। फिलहाल एक रिटायर्ड डॉक्टर को निगम की ओर से नियुक्त किया गया है, जिनसे काम चल रहा है।</p>
<p><strong>टेंडर तक नहीं हुए</strong><br />समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि निगम अधिकारियों को कई बार कहा गया, लेकिन अब तक शेड लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। कई कार्यों के तो टेंडर तक जारी नहीं हुए हैं। इससे गौवंश की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong> बरसात व धूप में खुले में रहने को मजबूर पशु</strong><br />गौशाला परिसर में एक और बड़ी समस्या टीनशेड की कमी है। मानसून में भारी बारिश और गर्मी में तेज धूप से बचाने के लिए शेड जरूरी है, लेकिन निगम अभी तक यह काम भी शुरू नहीं कर पाया है। इस कारण अधिकतर पशु खुले में ही खड़े रहने को मजबूर हैं। बारिश में गीली जमीन पर खड़े रहने और धूप में तपते रहने से उनकी सेहत और बिगड़ रही है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:38:48 +0530</pubDate>
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                <title>निगम की गौशाला में गौवंश के लिए गर्मी से बचाव के नहीं हैं पुख्ता इंतजाम </title>
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                        <![CDATA[निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में दे चुके हैं लेकिन अधिकारी गौशाला में आकर व्यवस्थाएं देखना तक नहीं चाहते।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-are-no-proper-arrangements-for-the-cows-to-protect-them-from-the-heat-in-the-corporation-s-cowshed/article-110973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer80.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जहां गर्मी का पारा लगातार बढ़ रहा है और यह 40 डिग्री से अधिक हो गया है। ऐसे में इंसान ही नहीं पशु पक्षी भी इस गर्मी से त्रस्त है। नगर निगम की ओर से आमजन के लिए तो आश्रय स्थल, छाया व पानी की व्यवस्था की जा रही है। जबकि निगम की गौशाला में गौवंश को छाया तक नसीब नहीं हो रही है। शहरी क्षेत्र में ही इतनी अधिक गमी है तो ग्रामीण क्षेत्र में  पड़ रही गर्मी का इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। वहां शहर से अधिक तापमान रहता है। वहीं खुले स्थान पर गर्मी अधिक लगती है। इस गर्मी में जहां नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से आमजन के लिए जगह-जगह पर आश्रय स्थल बनाए गए हैं। छाया और पानी की व्यवस्था की गई है। लेकिन नगर निगम की ओर से गौवंश की सुध नहीं ली जा रही है।</p>
<p><strong>गिनती के गौवंश के लिए शेड़</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। उनमें से गिनती के गौवंश के लिए ही छाया की व्यवस्था है। नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में बहुत कम जगह पर शेड लगा हुआ है। साथ ही पिछले साल बचा हुआ ग्रीन नेट इस बार काम में लिया गया है। जिससे एक से तीन नम्बर के बाड़े में ही लगाया  है। जितने शेड व ग्रीन नेट लगी हुई है। उसमें गिनती के ही गौवंश रह पा रहे है। जबकि क्षमता से अधिक होने से उनके लिए पर्याप्त छाया तक की व्यवस्था नहीं है। सिंह ने बताया कि अधिकतर गौवंश को दिनभर खुले में धूप में ही रहना पड़ रहा है। जिससे पहले जहां सर्दी से वहीं अब गर्मी से गौवंश की मृत्यु दर बढ़ने लगी है।  </p>
<p><strong>बीमार व घायल को शेड</strong><br />जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गर्मी में छाया की सबसे अधिक आवश्यकता बीमार व घायल गौवंश को है। ऐसे में जो शेड व ग्रीन नेट लगी हुई है। उसमें इसी तरह के गौवंश को रखा हुआ है। जबकि अधिकतर को तो खुले में ही रहना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>पंखे लगे न नेट</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष ने बताया कि गौशाला में जितनी जगह है उसके हिसाब से खैल बनाई गई है। जहां गौवंश आसानी से चारा व पानी खा-पी सकते है। लेकिन दोनों निगमों की ओर से घेरा डालकर पकड़े गए मवेशियों के कारण यहां क्षमता से अधिक गौवंश हो गए हैं। जिनके लिए शेड पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि वे गौशाला में हरी नेट व 200 पंखे लगाने के लिए निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में दे चुके हैं लेकिन अधिकारी गौशाला में आकर व्यवस्थाएं देखना तक नहीं चाहते। जिससे अभी तक भी इस भीषण गर्मी में न तो वहां पंखे लगे हैं और न ही शेड व हरी नेट लगाई गई है। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में भी गौवंश तो क्षमता से अधिक है लेकिन वहां शेड पर्याप्त होने से इतनी अधिक समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि गौशाला में गौवंश के लिए पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में है। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि गौशाला समिति अध्यक्ष द्वारा पूर्व में जो भी काम बताए गए हैं वह सभी करवाए गए हैं। गत वर्ष गर्मी में गौशाला में हरी नेट भी लगाई गई थी। अब यदि आवश्यकता है तो उसे भी शीघ्र पूरा कर दिया जाएगा। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Apr 2025 15:14:52 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर अकाल मौत मर रहे गौवंश</title>
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                        <![CDATA[रोज दुर्घटना का शिकार हो रहे मवेशी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/cows-are-dying-premature-deaths-on-the-roads/article-87746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(4)11.png" alt=""></a><br /><p>देवरी। क्षेत्र के लोग लंबे समय से गौशाला बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं देने के कारण जानवर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्येक कस्बे में एक गोल साल का निर्माण कर दिया जाए तो सड़कों पर फैलने वाले आवारा मवेशियों को अकाल मौत नहीं मरना पड़ेगा। देवरी कस्बे सहित क्षेत्र के आसपास गोवंश के लिए गौशाला नहीं होने के कारण दुर्घटना से ग्रस्त जानवर सड़कों किनारे पड़े रहते है। जिनका रोज आर एस एस के लोग दुर्घटना से ग्रस्त जानवरों का इलाज कर रहे हैं।  गोलू पाल, मयंक सोनी,राहुल राठौर, लक्की सिंह ने बताया कि बारिश के दिनों में जानवरों के लिए अधिक समस्या हो रही है। खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर अति कृमियों ने अतिक्रमण कर रखा है। तो वहीं चारागाह भूमि पर भी अतिक्रमण होने के कारण जानवरों के लिए सड़कों के अलावा कोई स्थान नहीं है।  कस्बे के नेशनल हाईवे से लेकर सभी छोटे बड़े मार्गों पर वाहनों से गोवंश दुर्घटना का शिकार हो रहा है कई जानवर इलाज और देख-देख की आवाज में जान गवा रहे हैं कस्बे के आसपास दर्जनों गांव आते हैं लेकिन किसी भी गांव या कस्बे में गौशाला नहीं है जिसके चलते गोवंश की देखभाल नहीं हो पा रही है </p>
<p><strong>गौशाला बने तो मिले राहत</strong><br />बारिश में चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ होने के कारण जानवरों को बैठने तक के लिए स्थान नहीं होने के कारण सड़कों की शरण लेकर जानवर पड़े हुए हैं।  ग्रामीण लंबे समय से गौशाला बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन स्थानीय नेताओं की अनदेखी के कारण यह मांग यही तक सीमित रह जाती है। अगर जनप्रतिनिधि विधानसभा में इन मुद्दों को उठाएं तो बड़े सभी कस्बे में गौशाला निर्माण हो जाए तो गोवंश को अकाल मौत का शिकार होने से बचाया जा सकता है। </p>
<p><strong>रोज दुर्घटना का शिकार हो रहा गौवंश</strong><br />बीते एक माह से आए दिन इलाज करा कर जानवरों को राहत पहुंचाने का कार्य कस्बे के युवा कर रहे हैं। सोमवार को कस्बे में एक गाय की बछिया को अज्ञात बहन ने टक्कर मार दी जिसका इलाज डॉक्टर रिंकू मीणा से कराया गया। इससे पूर्व मुख्य बाजार में गे बीमारी से दो दिन तक रोड पर पड़ी रही जिसे कस्बे के युवाओं ने इलाज करा कर दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया। अगर क्षेत्र में सरकार द्वारा गौशाला का निर्माण कर दिया जाए तो सड़कों पर दुर्घटना का शिकार होने वाले जानवरों सही प्रकार से देखभाल हो सकेगी। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से गौशाला बनवाने की मांग की। </p>
<p>बीते कई दिनों से जानवर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। जिनका इलाज कस्बे के युवा अपने स्तर पर कराकर सड़कों से दूर जानवरों को कर देते हैं।  क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को इस बात को गंभीरता से लेते हुए गौशाला निर्माण करना चाहिए। <br /><strong>- गोलू पाल, कस्बेवासी।  </strong></p>
<p>चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है, जानवरों को बैठने के लिए भी स्थान नहीं बचा है।  अगर क्षेत्र में जानवरों को अकाल मौत से बचाना है तो गौशाला निर्माण करना चाहिए।<br /><strong>- लकी शक्तावत, ग्रामीण युवा</strong></p>
<p>बरसात के दिनों से लेकर बारह महीने ही गौवंश दुर्घटना का शिकार हो रहा है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं होने के कारण कई जानवर मौत का शिकार भी हो रहे हैं। दुर्घटना में घायल गोवंश का रोज निजी खर्चे पर इलाज कराया जा रहा है अगर गौशाला का निर्माण हो जाये तो राहत मिलेगी। <br /><strong>- राहुल राठौर, ग्रामीण युवा। </strong></p>
<p>गौवंश की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर गौशाला निर्माण करने के प्रयास किए जाएंगे। जिससे अकाल मौत मरने वाले गौवंश पर अंकुश लग सकेगा।  करण सहरिया, सरपंच, देवरी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 14 Aug 2024 18:21:09 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर सांड मचा रहे उधम, गौशाला में जगह नहीं</title>
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                        <![CDATA[कोटा उत्तर आयुक्त ने सभागीय आयुक्त व कलक्टर को लिखा पत्र।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls-are-creating-a-ruckus-on-the-roads--there-is-no-space-in-the-cowshed/article-84052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/121.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बरसात का सीजन शुरू होने के साथ ही शहर में मुख्य मार्गों पर जगह-जगह लावारिस पशुओं का जमघट लगा हुआ है। जबकि निगम की गौशालाओं में क्षमता से अधिक गौवंश होने से उन्हें रखने की जगह ही नहीं है। ऐसे में नगर निगम कोटा उत्तर के आयुक्त ने संभागीय आयुक्त व जिला कलक्टर को पत्र लिखकर लावारिस पशुओं को निजी गौशालाओं में रखने के लिए पाबंद करने को कहा है। शहर में वैसे ही सड़कों पर लावारिस मवेशियों का जमघट लगा रहता है। लेकिन बरसात होने पर यह संख्या अधिक दिखने लगी है। लेकिन हालत यह है कि नगर निगम की ओर से घेरा डालकर लावारिस पशुओं को पकड़ना लम्बे समय से बंद किया हुआ है। जिससे यह संख्या अधिक होती जा रही है। </p>
<p><strong>गौशाला विस्तार के लिए जमीन का पत्र केडीए को</strong><br />आयुक्त ने पत्र में लिखा कि गौशाला विस्तार के लिए नवीन भूमि आवंटन का पत्र नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा पूर्व में ही नगर विकास न्यास के सचिव को लिखा जा चुका है।  गौरतलब है कि गौशाला विस्तार के लिए उसके पास ही करीब 25 बीघा भूमि आवंटित करने की डिमांड की जा रही है। </p>
<p><strong>अधिक गौवंश होने से मौत का खतरा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि गौशाला में वर्तमान में करीब 25 सौ और कायन हाउस में 300 से अधिक गौवंश है। यह पहले से ही क्षमता से अधिक है। ऐसे में बरसात के समय में यदि गौशाला व कायन हाउस में अधिक मवेशी रखे जाएंगे तो ये एक दूसरे से बचने के लिए भागते हैं। उस दौरान उनके फिसलकर गिरने का खतरा रहता है। जिससे उनके पैर में चोट लगने व बैठक लेने के बाद उनकी मौत होना निश्चित है। पूर्व में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। सिंह ने बताया कि शिकायतों पर सांड तो रोजाना पकड़े जा रहे हैं। निगम अधिकारियों को कई बार कहने के बाद भी पहले से कोई व्यवस्था नहीं की गई। 15 बीघा जमीन पर निर्माण कार्य का टेंडर तक नहीं किया गया। जिससे 15 सौ गौवंश को रखा जा सकता था। 25 बीघा जमीन मिले तो गौवंश को रखा जा सकता है। </p>
<p><strong>आयुक्त ने लिखा निजी गौशालाओं को करें पाबंद</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के आयुक्त अनुराग भार्गव ने दो दिन पहले संभागीय आयुक्त व जिला कलक्टर को पत्र लिखा है। जिसमें बताया कि नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के लिए किशोरपुरा स्थित कायन हाउस व बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला है। जिनमें लावारिस गौवंश को निरूद्ध कर रखा जा रहा है। कायन हाउस व गौशाला का संचालन व रखरखाव कोटा दक्षिण निगम द्वारा किया जा रहा है। आयुक्त ने पत्र में लिखा कि नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह द्वारा गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश होने का हवाला देते हुए सड़कों से गौवंश नहीं पकड़ने दिया जा रहा। ऐसी स्थिति में कोटा जिले की जिन निजी गौशालाअं के संचालन व रखरखाव के लिए सरकार द्वारा अनुदान राशि दी जाती है। उन गौशालाअं में निगम द्वारा अवाप्त गौवंश को छोड़ा जा सकता है। इसके लिए पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक को पाबंद किया जाए कि निगम द्वारा पकड़े गए गौवंश को निजी गौशालाओं में रखा जाए। </p>
<p><strong>निजी गौशालाओं को सौंपे 1100 गौवंश</strong><br />समिति अध्यक्ष सिंह ने बताया कि गौशाला में पहले काफी अधिक संख्या में गौवंश थे। पूर्व जिला कलक्टर के आदेश से करीेब 11 सौ मवेशियों को जिले की 11 निजी गौशालाओं में शिफ्ट किया गया था। </p>
<p>निगम की गौशाला में पहले से ही क्षमता से अधिक गौवंश है। उसके बाद भी लगातार सडणकों से मवेशी पकड़ रहे हैं। शनिवार को ही शहर से 70 मवेशी पकड़े हैं। कोटा उत्तर आयुक्त का कहना सही है कि गौशाला में जगह की कमी है। निजी गौशालाओं में लावारिस गौवंश को रखा जा सकता है। शीघ्र ही प्रयास करेंगे कि सड़कों से मवेशियों को पकड़कर गौशाला में या अन्य स्थानों पर रखा जाए। <br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 17:02:10 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गौशाला संचालकों को राहत, अनुदान की प्रशासनिक स्वीकृति जारी</title>
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                        <![CDATA[नवज्योति में समाचार प्रकाशित होने के बाद जिले के पशुपालन विभाग के अधिकारी हरकत में आए। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---relief-to-cowshed-operators--administrative-approval-of-grant-issued/article-83376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/asar-khabar-ka---goshala-sanchlalko-ko-rahat,-anudan-ki-prshasanik-svikruti-jari...kota-news-02-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार की ओर से जिले में संचालित गौशालाओं को अनुदान देने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। इसके तहत जिले की 23 गौशालाएं अनुदान की पात्र हैं। इन गौशालाओं द्वारा आॅनलाइन बिल सबमिट किए जा रहे हैं। बिल सबमिट करने वाली गोशालाओं का भौतिक सत्यापन भी तुरन्त किया जा रहा है। सत्यापन के बाद कई गौशालाओं को अनुदान राशि जारी भी कर दी गई है। फिलहाल सम्बंधित गौशालाओं को 50 लाख रुपए तक का अनुदान जारी किया गया है। सरकार की ओर से द्वितीय चरण के तहत नवंबर, दिसंबर 2023 व जनवरी, फरवरी, मार्च 2024 का बजट दिया गया है। </p>
<p><strong>बजट नहीं मिलने से हो रही थी दिक्कत</strong><br />गौरतलब है कि बजट समय पर नहीं मिलने के कारण गोशाला संचालकों के लिए गौ वंश का पेट भरना मुश्किल हो रहा था। दानदाताओं व भामाशाहों के सहयोग से इंतजाम चारे पानी का इंतजाम किया जा रहा था। जिले में वर्तमान में 23 गौशालाएं विभाग में पंजीकृत है। जिनको साल में दो चरणों में अनुदान दिया जाता है। प्रथम चरण का अनुदान पहले ही दिया जा चुका है। द्वितीय चरण का अनुदान अब दिया है। पूर्व में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के कारण गोशालाओं का द्वितीय चरण का अनुदान अटक गया था। अब अनुदान मिलने से गौशाला संचालकों को काफी राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया मामला तो हरकत में आया विभाग</strong><br />जिले की गौशालाओं को वर्ष 2023-24 के दूसरे चरण के अनुदान अटक गया था। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में गत 4 जून को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि गौशालाओं को अनुदान दो माह पहले ही मिल जाना चाहिए था, लेकिन अब तक नहीं मिला है। समय पर अनुदान नहीं मिलने से गायों के लिए चारे पानी की व्यवस्था करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। जैसे-तैसे जुगाड़ कर गौशालाओं का संचालन करना पड़ रहा था। समाचार प्रकाशित होने के बाद जिले के पशुपालन विभाग के अधिकारी हरकत में आए और बजट जारी करने के लिए जयपुर मुख्यालय पर रिमांडर भेजा था। इसके बाद अनुदान की प्रशासनिक स्वीकृति और बजट जारी कर दिया गया। </p>
<p><strong>इतना मिलता है अनुदान</strong><br />पशुपालन विभाग के अनुसार बड़े गौवंश के लिए 40 रुपए की राशि प्रति गौवंश प्रतिदिन के हिसाब से देय है। जबकि तीन साल से कम उम्र के गोवंश को 20 रुपए प्रति गौवंश रोजाना के हिसाब से देय रहती है। इसमें किसी पशु के साथ अनहोनी की स्थिति होने पर गौशाला संचालकों को इसकी जानकारी विभाग को देनी पड़ती है। जांच के दौरान दर्शाई गई संख्या में पशु नहीं मिलने पर कार्रवाई भी होती है।</p>
<p>अनुदान समय पर नहीं मिलने से गौवंश के लिए चारा की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो जाता है। लोगों से कर्ज लेकर गौवंशों के लिए चारा लाना पड़ता है। गौशालाओं को दूसरे चरण का अनुदान मिलने में देरी हो गई है। गौशालाओं के सुचारू संचालन के समय पर अनुदान मिलना चाहिए। <br /><strong>- जानकीलाल, गौशाला संचालक</strong></p>
<p>पहले चरण में अप्रैल, मई, जून एवं जुलाई का अनुदान मिल चुका है। अब पांच माह यानि की नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी एवं मार्च के अनुदान की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। कुछ गौशालाओं को अनुदान जारी भी कर दिया है। <br /><strong>- डॉ. जेपी मीना, पशु चिकित्सक, पशुपालन विभाग कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 14:10:06 +0530</pubDate>
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                <title>पांच बीघा से अधिक जमीन पर गोबर का कब्जा</title>
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                        <![CDATA[गौशाला में करीब ढाई हजार से अधिक गौवंश है जिनसे रोजाना करीब 4 से 5 ट्रॉली गोबर निकल रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cow-dung-occupies-more-than-five-bighas-of-land/article-81838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/5-bigha-se-adhik-zameen-par-gobar-ka-kabja..kota-news...17.6.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में एक तरफ तो गोवंश को रखने की जगह तक नहीं है। वहीं दूसरी तरफ गौशाला में करीब 5 बीघा से अधिक जमीन पर गोबर का कब्जा हो रहा है। जिससे उस जगह का उपयोग ही नहीं हो पा रहा। निगम की गौशाला में शहर की सड़कों पर लावारिस हालत में घूमने वाली गायों, बछड़ों व सांड को  लाकर रखा जा रहा है। गौशाला में गौवंश की संख्या इतनी अधिक हो गई थी कि उन्हें रखने की पर्याप्त जगह तक नहीं है। ऐसे में निगम की ओर से घेरा डालकर गौवंश को पकड़ना ही बंद कर दिया। साथ ही गौशाला से बड़ी संख्या में गायों को निजी गौशालाओं में शिफ्ट किया गया। उसके बाद भी वर्तमान में करीब 25 सौ से अधिक गौवंश गौशाला में है। </p>
<p><strong>रोजाना निकल रहा कई ट्रॉली गोबर</strong><br />गौशाला में करीब ढाई हजार से अधिक गौवंश है। जिनसे रोजाना करीब 4 से 5 ट्रॉली गोबर निकल रहा है। उस गोबर को गौशाला में ही खाली जमीन पर डाला जा रहा है। जिससे गौशाला की जमीन पर गोबर के ढेर और ट्रेचिंग ग्राउंड पर कचरे के पहाड़ की तरह यहां गोबर के पहाड़  खड़े हो गए हैं। उसके बाद भी निगम अधिकारी उस गोबर को न तो नीलाम कर पा रहे हैं और न ही बेच पा रहे हैं। जिससे पहले से ही जगह की कमी से जूझ रही गौशाला में गोबर के ढेर से जगह रूकी हुई है। </p>
<p><strong>बरसात में होगी अधिक परेशानी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला  में पहले से ही 5 बीघा से अधिक जमीन पर गोबर पड़ा हुआ है। अब खाली पड़ी करीब 25 बीघा जमीन पर भी गोबर डाला जा रहा है। बरसात आने से वह गोबर फेल जाएगा। ऐसे में गौवंश के फिसलने का खतरा बना हुआ है। साथ ही वह गोबर बरसात के पानी में पास हे निकल रहे नाले में भी बहने का खतरा बना हुआ है। इस गोबर को बेचने के लिए अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन उनकीओर से प्रयास ही नहीं किए जा रहे। </p>
<p><strong>बायो गैस के लिए ताजा व शुद्ध गोबर चाहिए</strong><br />अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि पूर्व में देव नारायण आासीय योजना में लगे बायो गैस प्लांट  में गैस बनाने के लिए यहां से गोबर बेचने का प्रयास किया था। लेकिन प्लांट संचालकों का कहना था कि बायो गैस के लिए ताजा व शुद्ध गोबर की जरूरत होती है। ऐसे में गौशाला के गोबर का उपयोग गैस बनाने में नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह गोबर 40 रुपए क्विंटल में भी कोई नहीं ले रहा है। </p>
<p><strong>पुराना व भूसा मिला होने से नहीं बिक रहा</strong><br />समिति अध्यक्ष सिंह ने बताया कि गौशाला में एक तो लम्बे समय से पड़ा गोबर पुराना होने से सूख चुका है। दूसरा यहां गोबर में मिट्टी व भूसा मिला हुआ है। जिससे कोई भी इस गोबर को  नहीं खरीद रहा है।  पूर्व में इस गोबर की नीलामी के लिए 65 रुपए क्विंटल की दर तय की गई थी। लेकिन उस रेट में कोई गोबर लेने को तैयार नहीं हुआ।   इस पर गौशाला समिति की बैठक में इसकी दर को संशोधित कर 40 रुपए क्विंटल करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।</p>
<p><strong>दो लाख का गोबर बिका फिर लगाई रोक</strong><br />सिंह ने बताया कि पूर्व में 40 रुपए क्विंटल की रेट तय करने के बाद करीब 2 लाख रुपए का गोबर रामगंजमंडी की एक संस्था ने खरीदा था। वह राशि निगम में जमा करवा दी है। लेकिन बाद में आयुक्त ने उसकी बिक्री पर रोक लगवा दी। रेट कम होने का हवाला देकर गोबर नहीं बेचने दिया। ऐसे में गोबर के ढेर लग रहे हैं। बरसात में यह अधिक कष्ट दायक बनने वाले हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> गौशाला में रोजाना बड़ी मात्रा में गोबर निकल रहा है। पूर्व में यहां के गोबर को बेचा भी गया है। उसकी रेट को लेकर कोई इश्यू है। प्रयास किए जा रहे हैं कि शीघ्र ही गोबर की नीलामी की जा सके या उसे कहीं बेचा जा सके। जिससे जमीन खाली होने पर उसका उपयोग किया जा सके। <br /><strong>महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 17 Jun 2024 16:43:15 +0530</pubDate>
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                <title>तपने को मजबूर हो रहे मवेशी</title>
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                        <![CDATA[पहले अधिकतर मवेशी सर्दी में ठिठुरने को मजबूर हो रहे थे वहीं अब गर्मी में तपने को मजबूर हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-are-being-forced-to-heat-up/article-77204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/tapne-ko-majboor-ho-rhe-mavishi...kota-news-08-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से मौसम गर्म हो रहा है और तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच गया है। उस गर्मी में इंसान ही नहीं मवेशी भी तपने लगे हैं। इस गर्मी में निगम की गौशाला में मवेशियों के सिर पर न तो पर्याप्त शेड हैं और न ही हरी नेट। जिससे वे धूप में तपने को मजबूर हैं। निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां करीब 25 सौ से 3 हजार मवेशी हैं। जिनमें गाय, बैल, सांड व बछड़े सभी शामिल हैं। अधिकतर मवेशी लावारिस हालत में पकड़कर लाए गए हैं। उन मवेशियों को रखने के लिए गौशाला में अलग-अलग बाड़े तो बने हुए हैं लेकिन उन बाड़ों में रहने वाले मवेशियों में से अधिकतर के सिर ढकने की छत तक नहीं है। पहले अधिकतर मवेशी सर्दी में ठिठुरने को मजबूर हो रहे थे वहीं अब गर्मी में तपने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>शेड व नेट लगाए लेकिन पर्याप्त नहीं</strong><br />सर्दी में ठिठुरते मवेशियों को राहत देने के लिए नगर निगम की ओर से उस समय में निर्माण कार्य के टेंडर जारी कर कई बाड़ों में टीनशेड लगाए तो कई में हरी नेट लगाई थी। लेकिन उसके बाद पहले विधानसभा चुनाव और बाद में लोकसभा चुनाव आने से बार-बार आचार संहिता के चलते काम में व्यवधान उत्पन्न हुआ। यही कारण है कि अभी तक भी कई बाड़ों में न तो पर्याप्त शेड लगे हैं और न ही हरी नेट। जिससे उन बाड़ों में रहने वाले मवेशी भीषण गर्मी में तपने को मजबूर हैं। गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि निगम ने शेड व हरी नेट लगाने का टेंडर तो जारी कर दिया। लेकिन आचार संहिता के कारण उसका कार्यादेश जारी नहीं किया। जिससे कई बाड़ों में विशेष रूप से छोटे बछड़ों के साथ रहने वाली गायों के बाड़े में न तो शेड है और न ही हरी नेट। </p>
<p><strong>गौशाला में पशु चिकित्सक तक नहीं</strong><br />समिति अध्यक्ष सिंह ने बताया कि गौशाला में जहां करीब ढाई हजार से अधिक गौवंश है। वहां पिछले काफी समय से एक पशु चिकित्सक तक नहीं है। पूर्व में यहां डेपोटेशन पर एक चिकित्सक डॉ. नंदलाल बैरवा को लगाया हुआ था उन्हें भी यहां से हटाकर अनंतपुरा में लगमा दिया है। फिलहाल  यहां का पशु चिकित्सा केन्द्र कम्पाउंडरों के भरोसे है। सिंह का आरोप है कि गौशाला में लावारिस व बीमार हालत आने वाले मवेशियों को देखभाल की अधिक जरूरत है। उनमें से कई मवेशी बैठक लेने के बाद उठ नहीं पाते हैं। जिससे उनकी मौत हो जाती है। हालांकि सर्दी व बरसात की तुलना में फिलहाल यहां गौवंश की मृत्यु दर पहले से कम हुई है। फिर भी कभी 3 तो कभी 4 और कभी दो ही मौत हो रही है। लेकिन गर्मी में बचाव के इंतजाम नहीं किए गए तो यह मृत्यु दर अधिक भी हो सकती है। </p>
<p><strong>हरा चारा तक नहीं</strong><br />सिंह का आरोप है कि गौशाला में अधिकतर गौवंश हरा चारा खाते हैं। निगम ने उसका कार्यादेश भी जारी किया हुआ है। लेकिन संवेदक द्वारा कार्यादेश शर्तों के मुताबिक हरा चारा नहीं डाला जा रहा है। करीब एक माह से यहां हरा चारा तक नहीं आ रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निगम की गौशाला में डॉक्टर बैरवा के हटने के बाद उनके स्थान पर मंडाना के पशु चिकित्सा केन्द्र के डॉक्टर को  गौशाला का अतिरिक्त प्रभार दिया है। सप्ताह में दो या तीन बार वे गौशाला में विजिट करेंगे। इसके आदेश हाल ही में जारी हुए हैं। वहीं शेड व हरी नेट लगाने का काम चल रहा है। अधिकतर जगह तो लग चुके हैं। जहां बाकी हैं वहां भी जल्दी ही लगा दिए जाएंगे। <br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 May 2024 15:17:19 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गौशाला में कई दिन बाद पहुंचा 85 क्विंटल हरा चारा</title>
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                        <![CDATA[निगम की गौशाला में हरा चारा नहीं होने से आ रही समस्या को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---85-quintals-of-green-fodder-reached-the-cowshed-after-several-days/article-65790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/asar-khabar-ka1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में कई दिन बाद मंगलवार को 85 क्विंटल हरा चारा पहुंचा। जिससे गायों को भरपेट चारा मिला। नगर निगम द्वारा संवेदक को गौशाला व कायन हाउस में हरा चारा सप्लाई का ठेका दिया गया है। जिसके तहत संवेदक को दोनों जगह पर रोजाना पर्याप्त मात्रा में चारा सप्लाई करना है। साथ ही गौशाला के स्टोर में भी चारे का पर्याप्त स्टॉक रखना है। लेकिन पिछले कई दिन से गौशाला में संवेदक द्वारा चारा सप्लाई ही नहीं किया जा रहा था। जब भी सप्लाई किया गया तो उसकी मात्रा काफी कम थी। इसे लेकर निगम अधिकारियों को भी गौशाला समिति अध्यक्ष ने अवगत कराया था। साथ ही महापौर ने भी आयुक्त को यू ओ नोट लिखकर संवेदक को पाबंद करने व कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि संवेदक द्वारा गौशाला में मंगलवार को लोडिंग वाहनों से 85 क्विंटल हरा चारा भिजवाया गया। जिससे गौशाला में गायों को भरपेट चारा मिल सका। सिंह ने बताया कि संवेदक द्वारा बीच-बीच में गड़बड़ी कर पर्याप्त चारा नहीं दिया जाता। जिससे गौवंश को चारा नहीं मिल पाता। ऐसे में या तो उन्हें भूसे से ही काम चलाना पड़ता है। साथ ही दान दाताओं के सहयोग से हरा चारा लेकर  किशोरपुरा से बंधा धर्मपुरा गौशाला तक पहुंचाया गया था। जिससे इतने दिन से काम चल रहा था। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि निगम की गौशाला में हरा चारा नहीं होने से आ रही समस्या को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था। समाचार पत्र में 26 दिसम्बर के अंक में चार दिन से गौशाला में हरा चारा नहीं, भूसे से चलाना पड़ रहा काम’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। उसके बाद अगले ही दिन कोटा दक्षिण महापौर ने भी आयुक्त को यू ओ नोट लिखा था। गौशाला समिति अध्यक्ष ने दान दाताओं से सहयोग से हरा चारा पहुंचाया था। गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि अधिकारियों द्वारा संवेदक को पाबंद करने के बाद ही गौशाला में कई दिन बाद इतनी मात्रा में हरा चारा पहुंचा है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jan 2024 14:05:45 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गौशाला में पहुंचा 6 गाड़ी भूसा, हरे चारे के लिए भी किया संवेदक को पाबंद </title>
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                        <![CDATA[नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में संवेदक द्वारा नियमित रूप से भूसे की सप्लाई नहीं की जा रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---6-carts-of-chaff-reached-cowshed--sensor-banned-for-green-fodder-also/article-61434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/asar-khabar-ka.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में रविवार को 6 गाड़ी भूसा पहुंचा। वहीं हरा चारा सप्लाई करने के लिए भी संवेदक को पाबंद किया गया है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में संवेदक द्वारा नियमित रूप से भूसे की सप्लाई नहीं की जा रही है। जिससे वहां कुछ ही समय का भूसा बचा है। जबकि संवेदक को कार्यादेश शर्त के अनुसार भूसे की सप्लाई करनी है। </p>
<p>नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि संवेदक ने रविवार को 6 गाड़ी भूसे की गौशाला में भिजवाई है। हर गाड़ी में 40 से 45 क्विंटल भूसा आता है। एक साथ 6 गाड़ी आने से गोदाम में भूसे की पर्याप्त आपूर्ति हुई है। जिससे अगले कुछ दिन तक गौवंश को भूसा खाने को मिल सकेगा।  सिंह ने बताया कि संवेदक को नियमित रूप से भूसा सप्लाई करने को कहा गया है। लेकिन संवेदक का कहना है कि उसका लाखों रुपए का भुगतान निगम के स्तर पर अटका हुआ है। करीब दो माह से भुगतान नहीं होने से उसे आर्थिक परेशानी हो रही है। सिंह ने बताया कि इस संबंध में निगम में जानकारी करने पर पता चला कि निगम द्वारा बिल पास कर कोष कार्यालय में भेजे हुए हैं। वहीं से बिल पास नहीं होने से भुगतान अटका हुआ है। सिंह ने कहा कि संवेदकों को नियमित भुगतान होता रहेगा तो वे भी गौशाला में नियमित भूसे की सप्लाई करते रहेंगे। इधर निगम अधिकारियों ने हरा चारे के संवेदक को भी नोटिस जारी कर सोमवार तक गौशाला में हरे चारे की सप्लाई करने के लिए पाबंद किया है। यदि सोमवार तक चारा सप्लाई नहीं होता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएग़ी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि निगमकी गौशाला में भूसे की कमी होने का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में रविवार के अंक में पेज दो पर ‘निगम अधिकारियों पर हावी हो रहे संवेदक’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसके बाद अधिकारियों ने संवेदक को भूसे की सप्लाई करने के लिए पाबंद किया। उसके बाद संवेदक ने रविवार को गौशाला में 6 गाड़ी भूसा सप्लाई किया। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 12:17:45 +0530</pubDate>
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                <title>हर रोज 10 से 12 गायों की गौशाला में मौत</title>
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                        <![CDATA[गौ सेवकों का कहना है कि नगर निगम की और से गायों को पर्याप्त खाना और इलाज मुहैया नहीं कराने से उनकी मौत हो रही है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/every-day-10-to-12-cows-die-in-the-cowshed/article-51104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/har-roz-10-se-12-gaayo-ki-gausahala-me-maut...kota-news-07-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की और से संचालित बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में गौवंश के मरने का सिलसिला अनवरत जारी है। गौशाला में शहर में पकड़ लाई गई बीमार और प्लास्टिक खाई हुई प्रतिदिन 10 -12 गाये काल का ग्रास बन रही है। इसके पीछे नगर निगम के अधिकारियों का कहना है। गायों पेट में तीस से चालीस किलो प्लास्टिक है। यहां चारा और पानी की सुविधा होने से गाए भरपेट खाना खा रही जिससे उनका चारा पच नहीं रहा है। ऐसे रात के समय गाय बैठ जाती है तो फिर उठ नहीं पाती है उसकी मौत हो जाती है। गौ सेवकों का कहना है कि नगर निगम की और से गायों को पर्याप्त खाना और इलाज मुहैया नहीं कराने से उनकी मौत हो रही है। </p>
<p><strong>क्षमता से अधिक हैं पशु</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। क्षमता से अधिक गौवंश होने से वहां गायों को घूमने और फिरने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। दूसरा स्वस्थ्य और बीमार गायों को एक साथ रखा जाता है। जिससे स्वस्थ्य गाये भी बीमार हो रही है। वहां सभी गौवंश को बरसात से बचने के लिए पूरे शेड तक बने हुए नहीं हैं। ऐसे में बरसात होते ही अधिकतर गाय, बैल व बछड़े उससे बचने के लिए शेड की तरफ भागते हैं। शेड की संख्या कम होने से उसमें सीमित ही गौवंश आ पा रहे हैं। जिससे वे एक दूसरे को धक्का देकर बचने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे में उनके चोटिल होने के साथ ही गिरने से मौत हो रही है। </p>
<p><strong>पशु चिकित्सालय नहीं होने से समय पर नहीं मिलता इलाज</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गायों को पर्याप्त खाना पानी दिया जा रहा है। लेकिन गौशाला में प्लास्टिक खाई हुई गाए ज्यादा है। यहां खाना ज्यादा खाने के बाद गाये पानी पीती है और उनका पेट फूलने लगता है। पेट प्लास्टिक होने से उनकी पाचन क्षमता पहले से कमजोर हो चुकी है। ऐसे में उनके पेट फूल जाता है रात को खाना पचाने के लिए बैठती है तो फिर उठ ही नहीं पाती है उनकी मौत हो जाती है। गौशाला में रोज कभी 5 तो कभी 7 और अधिकतम 12 -14 गायों की ही मौत होती है।  बंधा धर्मपुरा गौशाला के पास पास पशु चिकित्सालय नहीं खुलेगा तब गायों की मौत को रोक पाना मुश्किल हम गायों की देखभाल कर सकते है इलाज के लिए तो डॉक्टर और कंम्पाउडर की जरूरत होती है। रात में गाये बैठती है तो सुबह उठती ही नहीं है। मौत हो जाती है। जब यहां 10 से 12 डॉक्टर और20 कम्पाउंटर वाला पशु चिकित्सालय नहीं खुलेगा गायों की मौत नहीं रोक पाएंगे। अधिकांश मौत रात के समय होती है। ऐसे 24 घंटे वाला अस्पताल की जरूरत है। </p>
<p><strong>दिन में स्वस्थ्य दिखती रात में हो जाती बीमार</strong><br />गौशाला में अधिकांश बीमार गाये आ रही है। उनके पेट में 25 से 30 किलो प्लास्टिक होता है। उनकी जांच और इलाज के लिए यहां पर्याप्त डॉक्टर और कंम्पाउंडर नहीं है। दिन में गाये स्वस्थ्य दिखती है। एक एक गाय को आधा आधा किलो आहार तो तौल कर नहीं खिला सकते है। गाये आवश्यकता से अधिक भूसा चारा खा जाती उसके बाद पानी पीते ही उनका अर्जीण होने लगता है। रात में जो गाय बैठती सुबह मरी मिलती है। गौशाला के कर्मचारी अनवृत गायों को उठाते लेकिन वो इतनी कमजोर होती है कि एक बार बैठ गई तो फिर नहीं उठती है। </p>
<p><strong>1100 गौवंश को किया शिफ्ट</strong><br />जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में कुछ समय पहले तक 4 हजार से अधिक गौवंश हो गया था। जिसे रखने की जगह तक नहीं थी। ऐसे में गौवंश की मृत्यु दर अधिक हो रही थी। जिला कलक्टर के निर्देश पर जिले की अन्य गौशालाओं को गौवंश शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। जिसकी पालना में वर्तमान में करीब 1100 गौवंश को अन्य निजी गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है।<br /><strong>- नगर निगम की गौशाला है या मौत शाला</strong></p>
<p>कोटा नगर निगम कोटा दक्षिण वैसे तो गौशाला को लेकर बड़े बड़े दावे करता हुआ आ रहा है पर सच्चाई कुछ और ही नजर आ रही है अव्यवस्थाओ का आलम ऐसा है की हर तरह गंदगी के साथ मरी हुई गाय नजर आ रही है व्यवस्था बनाने की बजाय अव्यवस्था ज्यादा फैलती हुई नजर आ रही है गायों को पोषाहार का कही कोई नामोनिशान नहीं है रोजाना 20 से 25 गायों की रोजाना मृत्यु हो रही है कारण सिर्फ सूखा भूसा ही खिलाना है। <br /><strong>- सुरेंद्र राठौर, पार्षद नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>गौशाला में गायों की पूरी देखभाल की जा रही है। प्लास्टिक खाई हुई और बीमार गायों की ही मौत हो रही है। गायों को डॉक्टर को दिखाकर इलाज भी कराया जा रहा है। <br /><strong>- दिनेश शर्मा, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा दक्षिण  </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2023 19:35:20 +0530</pubDate>
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                <title>मैथी का पाला मिला भूसा किया जा रहा गौशाला में सप्लाई</title>
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                        <![CDATA[गौशाला में सप्लाई होने वाले भूसे के मिलावटी होने व कम तोलने संबंधी गड़बड़ी पहले भी हो चुकीे है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fenugreek-mixed-with-straw-is-being-supplied-in-the-cowshed/article-49367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/methi-ka-pala-mila-bhusa,kiya-ja-rha-gaushala-me-supply...kota-news-19-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में एक बार फिर से मिलावटी भूसा सप्लाई करने का मामला सामने आया है। जिसमें संवेदक द्वारा मैथी का पाला मिला भूसा सप्लाई किया गया। कर्मचारियों द्वारा विरोध करने पर उन्हें डरा-धमकाकर भूसा गोदाम में खाली करवाया गया। शिकायत पर गौशाला समिति अध्यक्ष ने रविवार को भूसे का सैम्पल लिया है। नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में भूसा सप्लाई का ठेका कोटा की एक फर्म को दिया हुआ है। फर्म के संवेदक द्वारा यह काम अन्य साथियों के माध्यम से किया जा रहा है। संवेदक द्वारा गौशाला में 14 से 16 जून तक तीन ट्रॉली करीब 150 से 175 क्विंटल भूसा सप्लाई किया गया। वह भूसा मिलावटी होना पाया गया। </p>
<p>सिंह ने बताया कि उन्होंने गौशाला में आने वाले भूसे की जांच के लिए एक कमेटी बनाई हुई है। वह संवेदक द्वारा भूसा सप्लाई करने के दौरान उसकी जांच के बाद ही गोदाम में खाली करवाती है। भूसे में मैथी का पाला मिला होने की जानकारी पर कमेटी के सदस्यों और गौशाला कर्मचारियों ने जब संवेदक के साथियों का विरोध किया। उन्हें भूसे की ट्रॉली खाली करने से मना किया तो उन्होंने कर्मचारियों को डराया और धमकाया। जबरन भूसा गोदाम में खाली करवा दिया। सिंह ने बताया कि इसकी जानकारी जब शनिवार को उन्हें दी गई तो उन्होंने गौशाला प्रभारी दिनेश शर्मा को इससे अवगत कराया। उसके बाद शनिवार को आई भूसे की ट्रॉली को वापस लौटा दिया। </p>
<p><strong>समिति सदस्य पहुंंचे  सैम्पल लेने</strong><br />समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में भूसे में गड़बड़ी की शिकायत की जानकारी मिलने पर उन्होंने कार्यवाहक आयुक्त राजेश डागा को इस बारे में बताया। उसके बाद वे समिति सदस्य कुलदीप गौतम व एश्वर्य श्रृंगी के साथ गौशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोदाम में डाले गए अलग-अलग ढेरों से भूसे के सैम्पल लिए। सिंह ने बताया कि उस भूसे में मैथी के भूसे की सुगंध आ रही थी। उन सैम्पलों को लेकर सोमवार को कार्यवाहक आयुक्त से मिलेंगे। सैम्पल की जांच प्रयोगशाला में करवाई जाएगी। </p>
<p><strong>दो हजार क्विंटल स्टॉक</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष ने बताया कि निविदा शर्त के अनुसार गौशाला के गोदाम में हर समय 2 हजार क्विंटल भूसे का स्टॉक रखना आवश्यक है। साथ ही रोजाना 70 क्विंटल भूसा सप्लाई किया जाएगा। लेकिन हालत यह है कि पहले तो भूसे का इतना स्टॉक रखा ही नहीं जा रहा था। वर्तमान में एक साथ कई गुना भूसा सप्लाई कर उसका भुगतान भी कर दिया गया। </p>
<p><strong>पहले भी मिल चुकी है गड़बड़ी</strong><br />गौशाला में सप्लाई होने वाले भूसे के मिलावटी होने व कम तोलने संबंधी गड़बड़ी पहले भी हो चुकीे है। इसकी जानकारी मिलने पर नर निगम कोखा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल ने स्वयं गौशाला पहुंचकर गड़बडी को पकड़ा था। उसके बाद संवेदक के खिलाफ पेनल्टी लगाने समेत कई आदेश दिए थे। लेकिन उसके अगले ही दिन गौशाला के गोदाम में रखे भूसे में अचानक आग लग गई थी। उसके बाद वह मामला वहीं दबकर रह गया।  इधर गौशाला में भूसा सप्लाई को लेकर आए दिन विवाद की स्थिति बनती रही है। कभी गोदाम में भूसा ही नहीं रहता है तो कभी भूसे में मैथी का भूसा मिला रहता है। इस संबंध में पूर्व में भाजपा के पार्षदों ने भी निगम अधिकािरयों को कई बार शिकायत की। लेकिन हालत यह है कि नगर निगम कोटा दक्षिण के तत्कालीन आयुक्त ने उस समय एक आदेश जारी कर दिया। जिसमें लिखा कि बिना अधिकारी की अनुमति के कोई भी व्यक्ति गौशाला में नहीं जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष का फोन आया था। उन्होंने भूसे में गड़बड़ी होने की जानकारी दी है। सोमवार को इसकी जानकारी की जाएगी। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p><strong>कार्रवाई के साथ लगाएंगे पेनल्टी</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष ने फोन पर जानकारी दी है। सोमवार को इसकी जानकारी की जाएगी। यदि गड़बड़ी पाई गई तो संवेदक के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही उस पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी। पूर्व में पकड़ी गई गड़बड़ी में सिर्फ संवेदक बदल दिया गया था। गड़बड़ी करने वाले संवेदक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यदि उस समय कार्रवाई  हो जाती तो दोबारा कोई ऐसी हिम्मत नहीं करता। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 16:16:27 +0530</pubDate>
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                <title>गायों पर भारी पड़ रही गर्मी और बीमारी </title>
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                        <![CDATA[गौशाला में बंद गौवंश की तुलना में वहां छाया की भी पर्याप्त सुविधा नहीं है। गौशाला में वहां करीब 4 हजार से अधिक गौवंश है। वहां जगह की कमी के कारण उन्हें सही ढंग से घूमने की जगह तक नहीं मिल पा रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/heat-and-disease-overshadowing-the-cows/article-45365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/gaayo-par-bhari-pad-rhi-garmi-or-bimari...kota-news-12-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो गौमाता का पूजन किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ उनकी लावारिस हालत में अकाल मौत हो रही है। गर्मी और बीमारी गायों पर भारी पड़ रही है। जिससे नगर निगम की गौशाला में रोजाना 10 से 15 गायों की मौत हो रही है। शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए नगर निगम व नगर विकास न्यास की ओर से सड़कों पर लावारिस हालत में घूमने वाली गायों और सांडों को पकड़कर गौशाला में बंद किया जा रहा है। जिससे पहले जहां गौशाला में 2 से ढाई हजार ही गौवंश रहा करता था। वह वर्तमान में बढ़कर करीब 4 हजार से अधिक हो गया है। हालत यह है कि गौशाला में गायों को रखा तो जा रहा है लेकिन उनका सही ढंग से उपचार नहीं हो पा रहा है। जिससे अधिकतर बीमार गाय एक बार बैठक लेने के बाद उठ नहीं पाती और उनकी मौत हो रही है। वहीं गर्मी के कारण भी बैठक लेने वाली गायों की मौत हो रही है। हालत यह है कि वर्तमान में रोजाना 10 से 15 गायों की मौत हो रही है। जानकारी के अनुसार एक महीने में ही करीब 400 से अधिक गौवंश की मौत हो चुकी है। </p>
<p><strong>छाया की भी पर्याप्त सुविधा नहीं</strong><br />गौशाला में बंद गौवंश की तुलना में वहां छाया की भी पर्याप्त सुविधा नहीं है। चारे की खेलों वाली जगह पर ही शेड लगे हुए हैं। जबकि अधिकतर हिस्सा खुला है। ऐसे में गर्मी अधिक पड़ने से गौवंश को उससे बचाने की वहां सुविधा नहीं है। जितेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने गायों को धूप व गर्मी से बचाने के लिए हरा पर्दा लगाने का सुझाव दिया है। </p>
<p><strong>बैठक लेने वाली गायों को उठाने की व्यवस्था नहीं</strong><br />गौशाला में वहां करीब 4 हजार से अधिक गौवंश है। वहां जगह की कमी के कारण उन्हें सही ढंग से घूमने की जगह तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में पहले से ही बीमार गाय भर पेट चारा खाने के बाद एक बार बैठक ले लेती है तो उन्हें उठाने की गौशाला में व्यवस्था तक नहीं है। गौशाला के कर्मचारियों द्वारा प्रयास कर कुछ गायों को उठा भी दिया जाता है लेकिन सभी को ऐसा कर पाना संभव नहीं हो रहा है। जिससे अधिकतर गायों की मौत हो रही है। जिन गायों को उठाकर बीमार गायों के बाड़े में रखा जाता है तो वहां कुछ समय बाद उनकी भी मौत हो रही है। हालत यह है कि गौशाला में रोजाना कई जगह पर गाय सुबह के समय मृत मिल रही है। जिन्हें रोजाना मुर्दा मवेशी ठेकेदार द्वारा उठाया जा रहा है। </p>
<p><strong>काऊ लिफ्टिंग मशीन की दरकार</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेद्र सिंह ने बताया कि गौशाला में रोजाना बड़ी संख्या में गाय बैठक ले रही हैं। उन्हें समय पर फिर से खड़ा करने के लिए काऊ लिफ्टििंग मशीन की आवश्यकता है। करीब 20 से अधिक मशीनें चाहिए। निगम ने एक दो मशीनें तैयार करवाई हैं लेकिन उनमें पट्टे नहीं लगने से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस कारण गायों की मौत अधिक हो रही है। सिंह ने बताया कि गौशाला में गायों को चारा व पानी पर्याप्त मात्रा में दिया जा रहा है। लेकिन चारा खाने के बाद आफरा आने पर गाय जगह की कमी के कारण घूम नहीं पा रही जिससे उनकी मौत अधिक हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकर गाय बीमार हालत में और पॉलिथीन खाए हुए हैं जिससे वे चारा पचा नहीं पाती और अधिक खाने पर बैठक लेने से उनकी मौत हो रही है। </p>
<p><strong>सड़ा भूसा खिलाने से हो रही मौत</strong><br />धिर नगर निगम कोटा दक्षिण के भाजपा पार्षद सुरेन्द्र राठौर का आरोप है कि गौशाला में गायों को सड़ा हुआ भूृसा खिलाया जा रहा है। गायों की देखभाल के लिए मेडिकल स्टाफ तक नहीं है।  जिससे गायों की मौत अधिक हो रही है। हालत यह है कि कई बार तो एकदिन में 20 से 30 गायों तक की मौत हुई है। गायों की मौत होने पर उन्हें समय पर उठाया तक नहीं जा रहा है।</p>
<p><strong>गायों की दुर्दशा को रोकना होगा</strong><br />दादाबाड़ी निवासी राकेश शर्मा का कहना है कि गाय को गौमाता के रूप में पूजा जाता है। निजी गौशालाओं में जिस तरह से गायों की देखभाल हो रही है। उसी तरह से निगम की गौशाला में भी होनी चाहिए। तभी उनकी दुर्दशा को रोका जा सकेगा।  महावीर नगर निवासी संजय जैन का कहना है कि सरकार द्वारा गौरक्षा के नाम पर जनता से टैक्स वसूल किया जा रहा है। फिर गायों की सही ढंग से देखभाल क्यों नहीं की जा रही। गाय भले ही दूध नहीं दे लेकिन उसका गोबर, गौमूत्र समेत अन्य उत्पाद उपयोगी हैं। गायों की रक्षा होगी तभी ये उत्पाद मिल सकेंगे। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />गौशाला में गायों की अधिक मौत का कारण उनका बीमार हालत में और पॉलिथीन खाना है। गौशाला में गायों की देखभाल के लिए मेडिकल स्टाफ की कमी है। साथ ही गर्मी और बीमारी के कारण बैठक लेने से गायों की मौत अधिक हो रही है। उन्हें समय पर उठाने के लिए काऊ लिफ्टििंग मशीनों की आवश्यकता है। गौशाला में कभी अधिक तो कभी कम लेकिन रोजाना गायों की मौत हो रही है। हालांकि व्यवस्थाओं में पहले से सुधार हुआ है। <br /><strong>-जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, नगर निगम गौशाला समिति</strong></p>
<p>गौशाला में गायों की देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है। बीमार गायों के गौशाला में आने से उनकी मौत अधिक हो रही है। गौशाला में पहले की तुलना में गायों की मौत में कमी आई है। फिर भी 10 से 15 गायों की मौत रोजाना हो रही है। मृत्यु दर को कम करने के लिए गौवंश का वैक्सीनेशन व दवा पिलाने का काम किया जा रहा है। गौवंश को 500-500 के बाड़ों में शिफ्ट किया जा रहा है। <br /><strong>-दिनेश शर्मा, प्रभारी, नगर निगम गौशाला </strong></p>
<p>गौशाला में गायों की देखभाल व सुरक्षा पर पूरा फोकस है। वहां भूसे का गोदाम बनाने समेत खेलों की मरम्मत व अन्य निमाण कार्य करवाए जाएंगे। इसके लिए करीब दो करोड़ का टेंडर जारी किया है। गायों की मौत का कारण बीमारी और पॉलिथीन है। पहले जहां एक से डेढ़ फीसदी गायों की मौत हो रही थी उसकी तुलना में मृत्यु दर में कमी हुई है। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                <pubDate>Fri, 12 May 2023 14:53:36 +0530</pubDate>
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