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                <title>higher education - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>छात्रों के लिए राहत : हॉस्टल न मिलने पर अब किराया देगी सरकार, जून से नई योजना लागू होने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[उच्च शिक्षा ले रहे छात्रों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार किराया सहायता योजना शुरू कर रही है। छात्रावास न मिलने पर रायपुर में ₹3000 और अन्य संभागों में ₹2500 प्रति माह दिए जाएंगे। यह सुविधा SC, ST और OBC वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जून से लागू होगी, जिससे पढ़ाई का आर्थिक बोझ कम होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/if-relief-hostel-is-not-available-for-students-now-government/article-149823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vishnu-dev-sai.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू करने जा रही है। नई प्रस्तावित योजना के तहत ऐसे छात्रों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिन्हें कॉलेज या विश्वविद्यालय के छात्रावास में स्थान नहीं मिल पाता है। सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, विद्यार्थी अब अपने शिक्षण संस्थान के नजदीक किराये के मकान में रह सकेंगे और इसके लिए उन्हें प्रतिमाह निर्धारित राशि प्रदान की जाएगी। राजधानी रायपुर में रहने वाले पात्र छात्रों को 3 हजार रुपए प्रति माह, जबकि अन्य संभागीय मुख्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को 2500 रुपए मासिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए लागू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इसे आगामी शैक्षणिक सत्र, जो जून से प्रारंभ होगा, से ही लागू कर दिया जाए। दरअसल, राज्य में पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में सीमित सीटों के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में उन्हें या तो दूरस्थ छात्रावासों में रहना पड़ता है या निजी स्तर पर महंगे किराये के मकानों का सहारा लेना पड़ता है।</p>
<p>इसी समस्या के समाधान के रूप में राज्य सरकार ने पुरानी छात्रावास व्यवस्था में बदलाव करते हुए यह नई पहल शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे छात्र अपने कॉलेज के पास ही रहकर बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें और आर्थिक बोझ भी कम हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:39:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हंगामा: छात्रों ने कहा-अतिथियों के हाथों से नहीं दिलवाई जा रही डिग्रियां,  विद्यार्थियों के काफी विरोध के बाद आयोजन फिर से शुरू हुआ और डिप्टी सीएम डॉ. बैरवा ने डिग्रियां बांटी</title>
                                    <description><![CDATA[हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में भारी हंगामा हुआ। अतिथियों के हाथों डिग्री न मिलने से नाराज छात्रों ने उपमुख्यमंत्री प्रेमचन्द बैरवा का घेराव कर नारेबाजी की। हालांकि, 271 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, लेकिन भेदभाव के आरोपों ने उत्सव के रंग में भंग डाल दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/uproar-in-the-convocation-ceremony-of-haridev-joshi-journalism-university/article-147921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/hardev-joshi.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह बुधवार को आरआर्ईसी में हंगामी की भेंट चढ़ गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने अतिथियों के हाथों से डिग्रियां नहीं मिलने से नाराज  होकर विरोध कर दिया। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि ‘उन्हें डिग्रियां देने के लिए बुलाया गया, लेकिन अतिथियों के हाथों से डिग्रियां नहीं दी जा रही हैं। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी जब जाने लगे तो छात्रों ने उनसे आग्रह किया कि उनके साथ डिग्रियां देने में भेदभाव किया जा रहा है। </p>
<p>राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष का काफिला तो निकल गया, लेकिन विद्यार्थियों ने उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द्र बैरवा का घेराव कर नारेबाजी करने लगे। छात्र नेता विकास चौधरी, मनीष चौधरी, कोमल चौधरी सहित अन्य ने बताया कि हमें डिग्रियां देने के लिए बुलाया गया, लेकिन बाद में कहा कि विश्वविद्यालय से ले लेना।</p>
<p>271 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं: समारोह में 271 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राज्यपाल बागडे ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं बल्कि जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष देवनानी, विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने भी सम्बोधित किया। कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:07:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बेस्ट पुडुचेरी के लिए पीएम मोदी ने 2,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन और शिलान्यास, जनसभा को किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने पुडुचेरी में ₹2,700 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने 'BEST' (व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता, पर्यटन) का मंत्र देते हुए ई-बस सेवा, कैंसर सेंटर और करासुर औद्योगिक एस्टेट राष्ट्र को समर्पित किया। इन पहलों का लक्ष्य शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पुडुचेरी को मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/for-best-puducherry-pm-modi-inaugurated-development-projects-worth-rs/article-145081"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modib-22.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश उनके बेस्ट पुडुचेरी यानी व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता और पर्यटन पर केंद्रित के दृष्टि की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह पुडुचेरी के अछ्वुत लोगों के बीच आकर प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुईं परियोजनाएँ प्रदेश के लोगों के जीवन को सुगम बनाने और क्षेत्र में आर्थिक विकास को तेज करने में सहायक होंगी। उन्होंने कहा, जब मैं पहले यहाँ आया था, तब मैंने बेस्ट पुडुचेरी का मंत्र दिया था। बेस्ट का अर्थ व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता और पर्यटन है। पिछले साढ़े चार वर्षों में यह विजन फल दे रहा है। पुडुचेरी ने सुशासन और विकास देखा है। </p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण पहलों का उद्घाटन किया, जिनमें पीएम ई-बस सेवा पहल के तहत ई-बसों का शुभारंभ, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर, सिटीज (सीआईटीआईआईएस ) पहल के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास इकाइयाँ, तथा पुडुचेरी सरकार की प्रमुख सीवरेज और जल आपूर्ति परियोजनाएं शामिल हैं।</p>
<p>ये परियोजनाएँ शहरी गतिशीलता में सुधार, नागरिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने और प्रौद्योगिकी आधारित शासन के माध्यम से बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गयी हैं। उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कराईकल में कॉम्पोजिट इंजीनियरिंग ब्लॉक, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ब्लॉक और गंगा छात्रावास का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने पांडिचेरी विश्वविद्यालय में नए एनेक्सी भवनों, व्याख्यान कक्षों और छात्रावासों का भी उद्घाटन किया।  </p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, एक मजबूत और सशक्त युवा हमारे देश की विकास की नींव है। हम उनके सपनों को समर्थन देने के लिए काम कर रहे हैं। एनआईटी कराईकल में नया डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग ब्लॉक और आधुनिक छात्रावास विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा हासिल करने में सहायक होगी। पांडिचेरी विश्वविद्यालय में अवसंरचना उन्नयन बेहतर शिक्षण वातावरण और अनुसंधान के अवसर पैदा करेगा।  </p>
<p>स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा अवसंरचना को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला। पीएम मोदी ने जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जिपमेर) में क्षेत्रीय कैंसर केंद्र के आधुनिकीकरण का उद्घाटन किया और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) के तहत तीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स की आधारशिला रखी।</p>
<p>उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए सुलभ, उपलब्ध और किफायती होनी चाहिए। आयुष्मान भारत योजना पहले से ही पूरे भारत में करोड़ों परिवारों के लिए इस दृष्टि को साकार कर रही है। उन्होंने कहा, मेरा दृढ़ विश्वास है कि पुडुचेरी एक चिकित्सा पर्यटन केंद्र बन सकता है। पुड्डुचेरी में पहले से ही नौ मेडिकल कॉलेज हैं। जिपमेर के क्षेत्रीय कैंसर केंद्र का आधुनिकीकरण स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को और विस्तार देगा।  </p>
<p>औद्योगिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल के तहत प्रधानमंत्री ने 750 एकड़ में फैले करासुर-सेदारापेट औद्योगिक एस्टेट को राष्ट्र को समर्पित किया। इस एस्टेट में एक फार्मा पार्क, कपड़ा पार्क, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पार्क, सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास का अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास केंद्र और जिपमेर की उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं केंद्र स्थापित किये जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र विनिर्माण, नवाचार और रोजगार सृजन का केंद्र बनेगा। उन्होंने कई अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी, जिनमें स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए जल आपूर्ति योजनाएँ, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 41 ग्रामीण सड़कों का निर्माण, और संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत विद्युत क्षेत्र की परियोजनाएँ शामिल हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि परियोजनाओं का यह व्यापक पैकेज अवसंरचना, शहरी सेवाओं, औद्योगिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास को मजबूत करने के लिए सरकार के समन्वित प्रयास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने पुडुचेरी की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की पूर्ण क्षमता को उजागर करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ निकटता से काम करना जारी रखेगा।  </p>
<p>उन्होंने कहा, ये विकास कार्य जीवन की सुगमता को बढ़ाएंगे और आर्थिक वृद्धि को गति देंगे। मिलकर, हम एक श्रेष्ठ पुडुचेरी का निर्माण करेंगे जो युवाओं के लिए अवसर सृजित करेगा, गरीबों को सशक्त बनाएगा और समग्र विकास का एक आदर्श बनेगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 17:39:29 +0530</pubDate>
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                <title>बजट 2026-27: वित्त मंत्री ने कहा-शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करना और युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर,  एसटीईएम को करेंगे मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[बजट 2026-27 में शिक्षा के लिए 1.39 लाख करोड़ रुपये आवंटित, एसटीईएम शिक्षा, छात्रावास, यूनिवर्सिटी टाउनशिप और शोध अवसंरचना मजबूत करने पर सरकार का जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/budget-2026-finance-minister-said-emphasis-on-strengthening-stem-to/article-141598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने बजट में शिक्षा को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में रखते हुये इस वर्ष 8.27 प्रतिशत से अधिक धनराशि का प्रावधान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश किया जिसमें शिक्षा को 1,39,289 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष की तुलना में 8.27 फीसदी अधिक है। वर्ष 2025-26 के बजट में कुल 128650  करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। सरकार का कहना है कि इस बजट का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करना और युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।</p>
<p>बजट में उच्च शिक्षा और खासतौर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (एसटीईएम) को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ बढ़े ही नहीं बल्कि स्थायी बने। इसी सोच के तहत देश के हर जिले में उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों से जुड़े लड़कियों के छात्रावास बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे दूर-दराज से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक तौर पर रहने की जगह मिलेगी।</p>
<p>इसके अलावा औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जाएगी। इन टाउनशिप का मकसद पढ़ाई और इंडस्ट्री को एक ही इकोसिस्टम में लाना है ताकि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इंडस्ट्री एक्सपोजर, इंटर्नशिप और नौकरी के मौके मिल सकें। रिसर्च और साइंस को बढ़ावा देने के लिए देश में चार बड़े टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सेंटर बनाए या अपग्रेड किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 17:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट 2026 : पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप के साथ बनेंगे राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, युवाओं काे मिलेंगे नए रोजगार के अवसर ; हर जिले में बनेगा एक महिला छात्रावास</title>
                                    <description><![CDATA[बजट 2026-27 में शिक्षा को बढ़ावा देते हुए सरकार ने पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप, नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, महिला छात्रावास और खगोल विज्ञान हेतु टेलीस्कोप सुविधाओं की घोषणा की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/budget-2026-27-announces-creation-of-national-institute-of-design-with/article-141552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप के साथ राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान बनाने की घोषणा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप खोले जायेंगे इन टाउनशिप में आवास, शोध सुविधाएं, स्टार्टअप स्पेस, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक ढांचा शामिल होगा, जिससे छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को एक बेहतर और जीवंत शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में शिक्षा एवं विकास को बढावा देने के लिए नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान खोले जायेंगे। इससे भारतीय डिजाइन उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हर जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जायेगा ताकि कामकाजी महिलाओं के सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध हो सके। खगोल भौतिकी और खगोल को बढावा देने के लिए चार टेलीस्कोप अवस्थापना सुविधाओं की स्थापना की जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 13:29:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब एक ही स्कूल में 12वीं तक पढ़ाई : प्रदेश में नई व्यवस्था- 31 अपर प्राइमरी सीधे सीनियर सैकेंडरी</title>
                                    <description><![CDATA[माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट के अनुसार फिलहाल इन 31 स्कूलों में नवीं व दसवीं ही शुरू हो सकेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-the-same-school-is-interested-in-12th-standard/article-123296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/shiksha-sankul.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षा विभाग ने सभी अपर प्राइमरी स्कूलों को सीधे सीनियर सैकेंडरी स्कूल में क्रमोन्नत करने का निर्णय लिया है। जिसके बाद एक ही स्कूल में बच्चाें को कक्षा एक से 12वीं तक तक पढ़ाई की जा सकेगी। अब एक भी नहीं रहेगी सैकेंडरी स्कूल : शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 31 सरकारी अपर प्राइमरी स्कूलों को सैकेंडरी स्कूल की जगह सीधे सीनियर सैकेंडरी स्कूल में क्रमोन्नत कर दिया है। शिक्षा विभाग के इन आदेशों के बाद अब राजस्थान में एक भी सरकारी सैकेंडरी स्कूल नहीं होगा। </p>
<p><strong>इसी सत्र में होंगे शुरू : </strong>माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट के अनुसार फिलहाल इन 31 स्कूलों में नवीं व दसवीं ही शुरू हो सकेंगी। अगले साल 11वीं और 12वीं कक्षाओं की पढ़ाई शुरू हो सकेगी। इससे बच्चों और अभिभावकों को आठवीं औ दसवीं कक्षा के बाद स्कूल बदलने की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने प्रदेश के सभी सैकेंडरी स्कूलों को एक ही आदेश में सीनियर सैकेंडरी कर दिया था। जिसके बाद सैकेंडरी स्कूलों में हैडमास्टर का पद खत्म हो गया था। ऐसे में भविष्य में जो भी अपर प्राइमरी स्कूल क्रमोन्नत होंगे, वो सीधे सीनियर सैकेंडरी में ही क्रमोन्नत होंगे। जाट के अनुसार सभी नव क्रमोन्नत स्कूल इसी सत्र में शुरू हो जाएंगे। इन स्कूलों की माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर से मान्यता के लिए जल्दी ही औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी। </p>
<p><strong>शिक्षक होंगे समायोजित : </strong>अपर प्राइमरी स्कूलों में वर्तमान में कार्यरत प्रधानाध्यापक, वरिष्ठ अध्यापकों, शारीरिक शिक्षकों को उनके विषय आधार पर उसी स्कूल में समायोजित किया जाएगा। इन स्कूल में कार्यरत लेवल वन और लेवल टू के शिक्षकों को फिलहाल इसी स्कूल में रखा जाएगा। वेतन भी इसी स्कूल से दिया जाएगा। </p>
<p><strong>ये स्कूल अपर प्राइमरी से सीनियर सैकेंडरी स्कूल बने :</strong> रूपपुरा-भिनाई अजमेर, नाथूहाला-पीसांगन अजमेर, मान्नका-उमरेन अजमेर, डामोर-आनन्दपुरी बांसवाड़ा, ओडामगरी-रायपुर ब्यावर, गुंडवा-सेवर भरतपुर, भैंसाकुंडल-सुवाना भीलवाड़ा, सांखलाें की ढाणी-कोलायत बीकानेर, तालावास-लालसोट दौसा, भागेला फला नवघरा-सागवाड़ा डूंगरपुर, चक एक चार केएसएम-अनूपगढ़ श्रीगंगानगर, कायमखानीबास-भादरा हनुमानगढ़, बस्ती शामियान-जयपुर पश्चिम जयपुर, हर्दरामपुरा-गोविन्दगढ़ जयपुर, झींझा-तूंगा जयपुर, भीमपुरा-भीनमाल जालोर, केरवी-सरनाऊ जालोर, बीलखेड़ी-डग झालावाड़, सालरपुर-तिजारा खैरथल, खेड़ी-तिजारा खैरथल, ढोली पहाड़ी-तिजारा खैरथल, पिपलंदा खुर्द-इटावा कोटा, धोरी-सुल्तानपुर कोटा, मालपुरा भाखारी-पाली, पुरोहितों की ढाणी धानेश्वर नगर-डेंचू फलौदी, पल्ली प्रथम लोहावट फलौदी, बस्सी जोयरा-सलूंबर, बटूका-जयसमंद सलूंबर, जयकामाबाद-टोडारायसिंह टोंक, और भलाई-खैरवाड़ा उदयपुर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 10:00:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आयुक्तालय का दोहरा मापदंड असमंजस के भंवर में फंसी उच्च शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के राजसेस कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर में 30 से 40% कोर्स अधूरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-stuck-in-confusion-due-to-double-standards-of-commissionerate/article-101400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/555466.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के दोहरे मापदंड के भंवर में उच्च शिक्षा ऐसी फंसी कि क्वालिटी एजुकेशन के सारे दावे हवा हो गए। असमंजस से भरी नीतियों ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को मझघार में लाकर छोड़ दिया। हाड़ौती के राजसेस कॉलेजों में एक तरफ 90 कलांश पूरे होने पर फर्स्ट इयर के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं कोर्स पूरा होने से पहले ही बंद करवा दी गई। जिसके पीछे  कॉलेज प्राचार्यों द्वारा आयुक्तालय के आदेश की पालना का हवाला दिया गया। जबकि, आरटीआई में पूछे सवाल के जवाब में आयुक्तालय ने कोर्स पूरा होने या विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा तिथि घोषित होने तक कक्षाएं जारी रखने की बात कही है। ऐसे में राजसेस कॉलेजों में न तो अभी तक कोर्स पूरा हुआ और न ही कोटा विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा तिथि घोषित की गई। इसके बावजूद प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद कर दी गई। सेमेस्टर कक्षाओं के संचालन में आयुक्तालय के दोहरे रवैये से विद्यार्थी व शिक्षक दोनों का ही भविष्य दांव पर लग गया। </p>
<p><strong>परीक्षा सिर पर + कोर्स अधूरा = तनाव में विद्यार्थी</strong><br />हाड़ौती के कई राजसेस कॉलेजों में यूजी प्रथम सेमेस्टर में 30 से 40 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। वहीं, फरवरी के प्रथम सप्ताह में सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही कक्षाएं बंद करवा देने से विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताने लगा है। विद्यार्थियों का कहना है कि 5 में अभी तक 3 यूनिट ही पूरी हो सकी है। दो यूनिट अभी भी अधूरी है, ऐसी स्थिति में विद्या संबल शिक्षकों को कक्षाएं लेने से मना कर दिया। परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे। यदि, अधूरे कोर्स में से ही परीक्षा में प्रश्न आ गए तो क्या लिखेंगे। इन दिनों विद्यार्थी इन्हीं सवालों के चलते तनाव से गुजर रहे हैं। </p>
<p><strong>असमंजस का पटाक्षेप करे आयुक्तालय</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा में कार्यरत विद्या संबल के सहायक आचार्य डॉ. हनीफ कहते हैं  एक तरफ तो आरटीआई के जवाब में आयुक्तालय द्वारा सेमेस्टर प्रणाली के तहत कोर्स पूरा होने या विवि द्वारा एग्जाम शेड्यूल जारी होने तक अध्यापन जारी रखने की बात कही जा रही है। वहीं, दूसरी ओर राजसेस कॉलेजों के प्राचार्यों को 90 कलांश पूरे होने का हवाला देकर प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवाई जा रही। जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। सेमेस्टर कक्षाओं के संचालन में आयुक्तालय के दोहरे नजरिए से असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में सभी राजसेस कॉलेजों के प्राचार्यों को कॉमन आदेश जारी कर छात्रहित में असमंजस का पटाक्षेप करना चाहिए। </p>
<p><strong>90 कलांश का प्रावधान नहीं, मनमर्जी चल रही</strong><br />राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी शैक्षिक महासंघ की प्रदेशाध्यक्ष डॉ. शर्मिला कुमारी ने बताया कि राजसेस कॉलेजों में 90 घंटे कक्षाएं संचालित किए जाने का कोई नियम नहीं है। बल्कि 24 सप्ताह या 28 फरवरी दोनों में से जो भी पहले हो, तब तक कक्षाएं संचालित किए जाने का प्रावधान है। आरटीआई में दिए सवाल के जवाब में आयुक्तालय ने 26 जून 2024 के नियमों का ही हवाला दिया है। जिसके तहत कोर्स पूरा होने अथवा विवि द्वारा परीक्षा तिथि घोषित होने तक कक्षाएं संचालित करने की बात कही गई है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन अपनी मनमर्जी चला रहे हैं और विद्या संबल शिक्षकों को प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं न लेने के निर्देश दिए हैं। जब आयुक्तालय परीक्षा शुरू होने तक अध्यापन करवाने की बात कह रहा है तो कॉलेज प्राचार्य किस आदेश पर प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवा रहे हैं, यह समझ से परे हैं। आयुक्तालय को विद्यार्थी हित में उचित निर्णय लेना चाहिए। </p>
<p><strong>आयुक्तालय के संयुक्त निदेशक ने आरटीआई में यह दिया जवाब </strong><br />राजकीय कन्या महाविद्यालय दतवास टोंक में विद्या संबल के सहायक आचार्य देवनारायण ने 20 दिसम्बर 2024 को आरटीआई लगाकर दो सवालों के जवाब मांगे थे। जिसमें दूसरा सवाल- सेमेस्टर प्रणाली में अध्यापन कब तक और किस आधार पर करवाया जाएगा? जिसके जवाब में कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के संयुक्त निदेशक प्रो. केशव शर्मा ने कहा, सेमेस्टर प्रणाली के तहत प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षा प्रारंभ होने अथवा पाठ्यक्रम पूर्ण होने तक ही अध्यापन कार्य करवाया जाना सुनिश्चित किए जाने के निर्देश है। इसके बावजूद कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवा दी गई। शिक्षक देव नारायण का कहना है कि आयुक्तालय के नियमों की कहीं भी पालना नहीं हो रही है। 90 कलांश का आयुक्तालय में कोई प्रावधान नहीं है। प्राचार्यों की मनमर्जी से विद्यार्थियों व शिक्षकों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। </p>
<p><strong>इन कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद</strong><br />विद्या संबल शिक्षकों के अनुसार, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा कोटा, राजकीय कला महाविद्यालय तालेड़ा एवं हिंडोली में प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की  कक्षाएं परीक्षा तिथि घोषित होने से पहले ही बंद करवा दी गई है। जबकि, सभी कॉलेजों में कोर्स अधूरे हैं। </p>
<p><strong>क्या कहतीं हैं छात्राएं</strong><br />प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं फरवरी में होनी है। अभी 20 से 25 दिन का समय है, ऐसे में अधूरे कोर्स पूरे करवाए जा सकते हैं। प्राचार्य को लिखित में शिकायत दी है। 90 कलांश पूरे होने का हवाला देकर कक्षाएं बंद करवा दी गई है, जबकि इन दिनों में कॉलेज में कई एक्टिविटियां हुई हैं, जिसकी वजह से क्लासें नहीं लगी हैं। छात्राएं आखिरी दो यूनिट अधूरी होने से परेशान हैं। ज्योग्राफी व ड्रॉइंग की फाइलें भी नहीं बनी हैं। ऐसे में कक्षाएं लगवाकर कोर्स पूरा करवाया जाए।  <br /><strong>- द्विवयांशी मुराड़िया, यूनिट प्रेसिडेंट एबीवीपी रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>हमारा आधा सिलेबस अभी बाकी है। कक्षाएं नहीं लगने से एग्जाम की तैयारी नहीं हो पा रही। यदि,अधूरी ईकाइयों से पेपर में प्रश्न आ गए तो क्या लिखेंगे। कॉलेज प्रशासन को छात्राओं के हित को देखते हुए कक्षाएं संचालित करवाई जानी चाहिए।<br /><strong>- लक्षमी मीणा, छात्रा बीए प्रथम सेमेस्टर, रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विद्या संबल पर शिक्षक लगाने, हटाने या कक्षाएं संचालित किए जाने से संबंधित निर्णय के लिए सर्वोधिकार निदेशालय कॉलेज शिक्षा को प्राप्त है लेकिन जिले स्तर पर नोडल प्राचार्य को यह अधिकार दिए गए हैं कि वह इन नियमों को राजसेस कॉलेजों की समयकाल परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकते हैं या करवा सकते हैं।  <br /><strong>- डॉ. राजेश चौहान, प्राचार्य रामपुरा कॉलेज </strong></p>
<p>21 जून 2024 के आयुक्तालय के दिशा-निर्देशानुसार  ही कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, नोडल प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p>आयुक्तालय से सीधे ही प्राचार्यों को दिशा -  जारी किए जाते हैं। सहायक निदेशक कार्यालय को इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। आयुक्तालय से बात कर विद्यार्थियों के हित में असमंजस की स्थिति को स्पष्ट किया जाएगा।<br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-stuck-in-confusion-due-to-double-standards-of-commissionerate/article-101400</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2025 14:46:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राइवेट कॉलेजों के साथ एमओयू कर सरकार देगी क्वालिटी एजुकेशन, निखारेगी प्रतिभाएं </title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा में 16 निजी महाविद्यालयों ने सरकार से एमओयू करने के प्रस्तावों पर दी मंजूरी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-government-will-provide-quality-education-and-enhance-talents-by-signing-mous-with-private-colleges/article-94531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/one-student-one-id.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राइजिंग राजस्थान के तहत सरकारी कॉलेजों के सूरतेहाल बदलने की तैयारी है। सरकार ने बड़ी पहल करते हुए प्राइवेट कॉलेजों के साथ एमओयू करने जा रही है। जिसका फायदा सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को साधन-संसाधनों की उपलब्धता के रूप में मिल सकेगा। वहीं, क्वालिटी एजुकेशन, रिसर्च वर्क, स्किल डवलपमेंट, पसर्नालटी डवलपमेंट को निखारने के संयुक्त प्रयास हो सकेंगे। शिक्षाविदें का मानना है, सरकार के इस प्रयास से संसाधनों व रिसोर्सेज से जूझते सरकारी महाविद्यालय को संजीवनी मिल सकती है, साथ ही छात्र-शिक्षकों के बीच मैं की जगह हम की भवना विकसित होगी।  </p>
<p><strong>संभाग को मिले 44 निजी कॉलेज</strong><br />कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय से कोटा संभाग को 44 प्राइवेट कॉलेजों की सूची जारी हुई है, जिसके साथ एमओयू किया जाना है। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह एमओयू प्रदेश के हर जिले के नोडल कॉलेज की ओर से किए जाएंगे। हाड़ौती में 44 प्राइवेट कॉलेजों के लिए 17 सरकारी कॉलेजों को नोडल बनाया गया है, जो आयुक्तालय (उच्च शिक्षा विभाग) और प्राइवेट कॉलेजों के बीच समन्वयक की भूमिका निभाते हुए एमओयू करवाएंगे। इसके लिए सभी नोडल कॉलेजों द्वारा अपने अधीन प्राइवेट कॉलेजों से परिपत्र भरवाकर संस्था में उपलब्ध सुविधाएं व संसाधनों से जुड़ी जानकारियां एकत्रित की जा रही है। वहीं, निजी महाविद्यालयों को दो तरह के परिपत्र दिए जा रहे हैं, जिनमें पहला-वर्तमान का निवेश व दूसरा-भविष्य में निवेश। फिलहाल वर्तमान के निवेश पर काम किया जा रहा है। </p>
<p><strong>सबसे ज्यादा कॉमर्स को मिले निजी कॉलेज </strong><br />डॉ. गीताराम शर्मा ने बताया कि नोडल कॉलेजों में से सबसे ज्यादा 12 निजी कॉलेज राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय को मिले थे। इस पर कॉमर्स कॉलेज ने आयुक्तालय और इन महाविद्यालयों के बीच सामजंस्य बनाकर सरकार के साथ एमओयू के प्रपत्र साइन करवाकर सहमति प्राप्त कर ली है। उन्होंने बताया कि गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज को 1, कनवास को 1, सांगोद को 2, इटावा को 3 तथा रामगंजमंडी को 1 निजी महाविद्यालय का नोडल बनाया गया है। इनमें से रामगंजमंडी में स्थित निजी स्कूल ने एमओयू करने में रुचि नहीं दिखाई। </p>
<p><strong>विद्यार्थियों को यह होंगे फायदे</strong><br />छात्र कुणाल शर्मा, रुचिता गोस्वामी, शंकर तिवारी, इकबाल खान,महिमा रस्तोगी ने बताया कि इस एमओयू के जरिए राजकीय और प्राइवेट कॉलेज मिलकर एजुकेशन के नए आइडियाज, नवाचार और स्किल डवलपमेंट के क्षेत्र में काम करेंगे। वहीं, प्राइवेट कॉलेजों और राजकीय कॉलेजों में क्या-क्या सुविधाएं ऐसी हैं जो अलग हैं, इसे देखा जाएगा। ताकि, सभी कॉलेजों को एक दूसरे की मदद से विद्यार्थियों को नया सिखाने का मौका मिलेगा। एमओयू में कॉमन पहलू यह होंगे कि एजुकेशन के क्षेत्र में होने वाले नवाचारों, नए आइडियाज को एक-दूसरे से शेयर करके इस पर मिलकर काम किया जाएगा। एमओयू में शामिल कॉलेज अपने संसाधनों का उपयोग भी दूसरे को करने देंगे। सरकारी कॉलेज का विद्यार्थी भी उस कॉलेज में जाकर संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। स्किल डवलमेंट पर फोकस करके सभी कॉलेज क्वालिटी एजुकेशन का माहौल तैयार कर सकेंगे। इससे छात्रों को काफी फायदा होगा। </p>
<p><strong>20 में से 16 निजी कॉलेजों ने किया एमओयू</strong><br />क्षेत्रिय सहायक निदेशक डॉ. गीताराम शर्मा ने बताया कि कॉलेज आयुक्तालय से मिली 44 निजी महाविद्यालयों की सूची में कोटा जिले के 20 प्राइवेट कॉलेज शामिल हैं। सरकार के साथ एमओयू करवाने के लिए 6 राजकीय महाविद्यालयों को नोडल बनाया गया है। जिनमें गवर्नमेंट आटर्स कॉलेज कोटा, गवर्नमेंट कॉमर्स  कॉलेज, कनवास, सांगोद, इटावा, रामगंजमंडी शामिल हैं। जिन्हें तहसील स्तर पर कॉलेज आवंटित किए हैं। इनमें से 4 को छोड़कर अन्य सभी कॉलेजों ने अपने अधीन 16 कॉलेजों की  सरकार के साथ एमओयू करवाने की सहमति प्राप्त कर ली है और उनके प्रपत्र भी भरवाकर आयुक्तालय को भेज दिए गए हैं, अब आगे की कार्रवाई उच्च शिक्षा विभाग द्वारा की जाएगी। </p>
<p><strong>नियमों की पेचीदगी में देगी शिथिलता</strong><br />राजस्थान राइजनिंग के तहत कोई भी संस्था या समूह राज्य व शिक्षा के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकता है। संस्था, सरकार या सरकारी महाविद्यालय जिसके भी साथ एमओयू करना चाहती है तो कर सकती है। यदि, कोई संस्था सरकारी कॉलेजों में विकास कार्य करवाना चाहते हैं, स्किल डवलपमेंट व कम्प्यूटर ट्रैनिंग प्रोग्राम, स्पोकन इंग्लिश, लैब की सुविधा देना चाहते हैं तो इसमें एमओयू हो सकते हैं। वहीं, कोई प्राइवेट कॉलेज अपने कैम्पस में ही फैकल्टी बढ़ाकर कोई नया कोर्स शुरू करना चाहते हंै तो भी सरकार से एमओयू कर सकते है। सरकार, नियमों की पेचीदगी में शिथिलता प्रदान करेगी। लेकिन, इसके बदले हमारी अपेक्षा यही रहेगी कि इसका लाभ सरकारी कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी मिले, उनकी पढ़ाई में मदद करें।<br /><strong>- डॉ. सुनील भाटी, एडिशनल कमीशनर, कॉलेज आयुक्तालय जयपुर</strong></p>
<p>सरकार का यह सराहनीय कदम है। सरकार और निजी क्षेत्रों के संयुक्त निवेश, प्रयास और संसाधनों से कॉलेजों में उच्च शिक्षा का गुणवत्तापूर्ण परिवेश तैयार होगा। साथ ही सहयोग की भावना भी बढ़ेगी। वहीं, वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप विद्यार्थियों को साधन-संसाधनों की उपलब्धता के साथ क्वालिटी एजुकेशन मिल सकेगी। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Nov 2024 15:40:19 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल-इंजीनियरिंग ही नहीं कृषि  में भी बेटियां अव्वल</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभय कुमार व्यास ने बताया कि विश्वविद्यालय में लड़कियों का नामांकन लड़कों के मुकाबले कम हैं, इसके बावजूद 61 प्रतिशत गोल्ड मेडल पर बेटियों का ही कब्जा है। कृषि विज्ञान के प्रति छात्राओं का नजरिया बदला है और कृषि में उनका रूझान तेजी से बढ़ा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/daughters-top-not-only-in-medical-engineering-but-also-in-agriculture/article-39732"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/medical--engineering-hi-nahi-krishi-mei-bhi-betiya-awaal...kota-news..13.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल और इंजीनियरिंग के बाद अब कृषि में भी बेटियों ने कब्जा जमा लिया है। उच्च शिक्षा के हर क्षेत्र में बेटियां अपनी प्रतिभा के दम पर लौहा मनवा रहीं हैं। विज्ञान, कला, तकनीक और प्रोफेशनल में सिक्का जमाने के बाद कृषि शिक्षा में भी बालिकाएं ही सिरमौर साबित हुई हैं। दरअसल, कोटा कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुल 23 स्टूडेंटस को स्वर्ण पदक मिलेंगे, जिसमें से 14 गोल्ड पर बेटियों का कब्जा है। वहीं, कुलपति गोल्ड मेडल भी लड़कियों को ही नाम है। हायर एजुकेशन में नारी शक्ति ने दिमागी प्रतिस्पर्द्धा का एक नया बेंचमार्क स्थापित कर दिया है, जो सुनहरे भविष्य की परिकल्पना को साकार करती है।</p>
<p><strong>61 प्रतिशत बेटियांं के नाम गोल्ड</strong> <br />कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभय कुमार व्यास ने बताया कि विश्वविद्यालय में लड़कियों का नामांकन लड़कों के मुकाबले कम हैं, इसके बावजूद 61 प्रतिशत गोल्ड मेडल पर बेटियों का ही कब्जा है। कृषि विज्ञान के प्रति छात्राओं का नजरिया बदला है और कृषि में उनका रूझान तेजी से बढ़ा है। कृषि शिक्षा दिनोंदिन हाईटेक होती जा रही है। अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश हो रहा है और रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कम लागत में ज्यादा प्रोडक्शन और बढ़ते इनकम सोर्स से कृषि का स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है। इसी का नतीजा है, युवा करोड़ों का पैकेज छोड़ कृषि के क्षेत्र में स्टार्टअप अपनाकर न केवल अपनी आजीविका चला रहे हैं बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>कृषि में सम्पूर्ण विज्ञान का समावेश</strong><br />कृषि अपने आप में सम्पूर्ण विज्ञान है। खेती में न केवल ड्रोन का इस्तेमाल होने लगा है बल्कि कम्प्यूटर आधारित खेती भी होने लगी है। ड्रोन से फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेख, कीटनाशकों का छिड़काव में मदद मिलती है। कहां रोग लगा है, कीट लगे हैं। फसल में किस पोषक तत्व की कमी है। ऐसे कई खेती के कामों को ड्रोन के जरिए आसानी से पूरा किया जा सकता है। वहीं, कम्प्यूटर से आॅपरेट होने वाली मशीनों के जरिए खेतों में समान रूप से बीजों का वितरण सुनिश्चित किया जाता है। कृषि में विज्ञान की हर विद्या का समावेश है। इसमें बायोलॉजी, फिजिक्स, कैमेस्ट्री, जूलॉजी, मैथेमेटिक्स व इंजीनियरिंग लगती है। इसके अलावा आर्टिफिशल इंटेलीजेंस, इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी हो या रिमोट सेंसिंग के बढ़ते उपयोग से कृषि का पूरा परिदृश्य बदल दिया है। इसी का नतीजा है कि कृषि के प्रति विद्यार्थियों का नजरिया बदला है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Mar 2023 16:04:43 +0530</pubDate>
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                <title>लचर व्यवस्था के सीन चले और बन गई आरटीयू की डर्टी पिक्चर</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने यूडी आॅटोनॉमस रेगुलेशन को खंगाला तो कईं चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिसमें वर्ष 2019 से ग्रेड मोडरेशन कमेटी का निष्क्रय रहना सबसे बड़ा कारण रहा। यदि यह कमेटी सक्रिय रहती तो परमार जैसे मामले चाहकर भी नहीं हो सकते थे।   
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scenes-of-poor-system-went-on-and-became-dirty-picture-of-rtu/article-33728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/lachar-vyavastha-ke-seen-chale-aur-ban-gai-rtu-ki-dirty-picture...kota-news..30.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक गंदी मछली पूरा तालाब गंदा कर देती है, यह कहावत इन दिनों राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में चरितार्थ हो रही है। उच्च शिक्षा में प्रतिष्ठा रखने वाली यूनिवर्सिटी के दामन को ऐसी ही गंदी मछलियों ने दागदार किया। पहले, तत्कालीन कुलपति की काली करतूत ने विश्वविद्यालय की सांख को गहरा आधात पहुंचाया, अब प्रोफेसर की घिनौनी हरकत ने आरटीयू को शिक्षा जगत में शर्मसार कर दिया। राजस्थान की पहली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में शिक्षा के नाम पर गंदा खेल खेला जा रहा था, जिसकी किसी को कानों-कान खबर तक नहीं लगी। कोई परीक्षा में पास करने की एवज में छात्रा से अस्मत मांग रहा तो कोई महिला संविदाकर्मी से छेड़छाड़ व छात्रा से मारपीट के आरोप में घिरा। ऐसे दागी शिक्षक कैसे अपनी मनमानी चला रहे थे, रैकेट किसी की नजरों क्यों नहीं आए..., यूनिवर्सिटी का सिस्टम इतना लचर क्यों रहा, तमाम सवालों के जवाब तलाशने को दैनिक नवज्योति ने यूडी आॅटोनॉमस रेगुलेशन को खंगाला तो कईं चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिसमें वर्ष 2019 से ग्रेड मोडरेशन कमेटी का निष्क्रय रहना सबसे बड़ा कारण रहा। यदि यह कमेटी सक्रिय रहती तो परमार जैसे मामले चाहकर भी नहीं हो सकते थे।   </p>
<p><strong>नियमों के उल्लंघन से परमार का बढ़ा हौसला</strong><br />कोटा में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। ुिवश्वविद्यालय के यूजीसी ओटनोमस रेगुलेशन इतने मजबूत हैं कि यदि इन नियमों की सशर्त पालना होती तो परमार जैसी घटना चाहकर भी नहीं हो सकती थी। इन नियमों में बैच रोटेशन, सब्जेक्ट रोटेशन तथा ग्रेड मोडरेशन प्रमुख हैं। हालात यह हैं कि 4-5 साल तक एक ही शिक्षक बीटेक के प्रथम सेमेस्टर से चार सेमेस्टर तक एक ही बैच को एक ही टॉपिक पढ़ाता रहा तो कोई लंबे समय तक प्रोजेक्ट मैनेजर बना रहा। ऐसे में उन्हें मनमानी करने का मौका मिलता रहा। इतना ही नहीं, स्टूडेंटस के रिजल्ट पर नजर रखने वाली ग्रेड मोडरेशन कमेटी का भी गठन नहीं किया गया। जिसकी वजह से विद्यार्थियों को फेल पास करने का खेल पकड़ में नहीं आया। जबकि, इस कमेटी का मुख्य काम असीमान्य रिजल्ट की जांच कर गलतियां दुरस्त करने का है। </p>
<p><strong>सब्जेक्ट रोटेशन पॉलिसी</strong><br />यूडी आॅटोनॉमस रेगुलेशन में सब्जेक्ट रोटेशन की पॉलिसी है। जिसके तहत शिक्षक अपनी ब्रांच में किसी एक सब्जेक्ट को बार-बार नहीं पढ़ाए। एक विषय को अलग-अलग शिक्षक पढ़ाएं ताकि बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिले और शिक्षक बच्चों से ज्यादा कनेक्ट न हो पाएं। इसके बावजूद आरोपी परमार चार-पांच साल से एक ही सब्जेक्ट एक ही बैच को पढ़ा रहा था। उसने जो सब्जेक्ट पिछले साल पढ़ाया वहीं अगले साल उसी बैच के बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान परमार के बैच भी नहीं बदले गए। जिसकी वजह से उसे स्टूडेंटस पर अपनी तानशाही थोपने का अवसर मिलता रहा। यदि यह पॉलिसी अपनाई जाती तो इस तरह की घटना न होती। </p>
<p><strong>ये मजबूत नियम जिनकी नहीं हुई पालना </strong><br /><strong>बैच रोटेशन</strong><br />बैच रोटेशन के तहत एक टीचर जिसने एक साल प्रथम वर्ष के स्टूडेंटस के बैच को पढ़ाया तो वह अगले वर्ष में उस बैच को द्वितीय वर्ष में नहीं पढ़ाएगा। इसका फायदा यह है कि शिक्षक को बैच बदलकर मिलने से वह विद्यार्थियों से लंबे समय तक कनेक्ट नहीं हो पाएगा और सम्पर्क में भी नहीं रह पाएगा। इसके अलावा संबंधित टॉपिक को दूसरा शिक्षक बेहतर ढंग से पढ़ाएगा। जिससे शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ेगी। लेकिन आरोपी परमार इलेक्ट्रोनिक्स बीटेक प्रथम वर्ष के बच्चों को चौथे सेमेस्टर में भी पढ़ा रहा था। लंबे समय तक प्रोजेक्ट मैनेजर भी बना रहा। इसी वजह से वह विद्यार्थियों को फेल पास करने की धमकी देता रहा। </p>
<p><strong>ग्रेड मॉडरेशन</strong><br />आॅटोनॉमस रेगुलेशन में ग्रेड मॉडरेशन कमेटी गठित किए जाने का प्रावधान है। विभागाध्यक्ष इस कमेटी का गठन करता है, जिसमें तीन सदस्य मनोनीत किए जाते हैं। यह कमेटी विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम पर नजर रखती है, हर गतिविधियों की मॉनिटरिंग करती है। असमान्य परिणाम घोषित होने पर कमेटी द्वारा जांच की जाती है। यदि इसमें कॉपी चेक करने वाला शिक्षक दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर विभागाध्यक्ष को दी जाती है। लेकिन वर्ष 2019 के बाद से इस कमेटी का गठन नहीं किया गया। जिसकी वजह से आरोपी प्रोफेसर परमार द्वारा परीक्षा परिणाम में बरती गई मनमानी अंकुश नहीं लग सका। </p>
<p><strong>कैसे काम करती है ग्रेड मॉडरेशन कमेटी</strong><br />यूडी आॅटोनॉमी रेगुलेशन में ग्रेड मॉडरेशन पोलिसी होती है। विश्वविद्यालय में यह कमेटी खास तौर पर परीक्षा परिणाम की मॉनिटरिंग के लिए गठित की जाती है। उदारहण के लिए मान लिया जाए किसी सेमेस्टर में 40 विद्यार्थी हैं, परिणाम में सारे विद्यार्थियों को ए ग्रेड मिली हो या सभी को डी ग्रेड, आधे से ज्यादा विद्यार्थी फेल कर दिए गए तथा किसी भी तरह से परिणाम असमान्य लगने पर कमेटी सदस्य रिजल्ट की जांच करती है। इसके अलावा ऐसे विद्यार्थी जिसके 4 सब्जेक्ट में ए ग्रेड आई हो और 5वें सब्जेक्ट में डी या ई ग्रेड आ जाए तो भी यह कमेटी उस विद्यार्थी की कॉपी की जांच करेगी।  <br />फायदा : ग्रेड मॉडरेशन कमेटी का फायदा यह होता है कि परीक्षा परिणाम सही है या नहीं, इसकी जांच हो जाती है। साथ ही रिजल्ट में शिक्षक का विद्यार्थी के प्रति इन्टेंशन का भी पता लग जाता है। </p>
<p><strong>आरटीयू से संबद्ध कॉलेजों में यूं होती कॉपी चेक</strong><br />आरटीयू से मान्यता प्राप्त कॉलेजों में कॉपियां चेकिंग का नियम अलग है। इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का बंडल बनाया जाता है फिर कोडिंग की जाती है। इसके बाद ये बंडल कहीं भी जांचने के लिए भेज दिए जाते हैं। खास बात यह है कि विद्यार्थियों को पता नहीं होता कि उनकी कॉपियां कौन शिक्षक चेक कर रहा है। जबकि, आरटीयू में विद्यार्थियों को इसके बारे में पता होता है।  </p>
<p><strong>पेपर बनाने से लेकर कॉपियां जांचने तक काम क्लास शिक्षक पर</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय को आॅटोनॉमस है। जिसके तहत यूनिवर्सिटी में कार्यरत  शिक्षक अपने-अपने संकाय के परीक्षा पेपर खुद ही सेट करते हैं और कॉपियां भी खुद ही चेक करते हैं। इसके जहां फायदे हैं तो नुकसान भी हैं। जैसे, टीचर का स्टूडेंट्स पर दबाव, छात्रों को घरों पर बुलाकर कॉपियां भरवाना, परीक्षा से पहले प्रश्न विद्यार्थियों को बता देना फिर एन वक्त पर प्रश्न बदलकर बदले की भावना से छात्रों को फेल करना। इस तरह के नुकसान प्रो. परमार की वजह से स्टूडेंट्स को भुगतने पड़े। </p>
<p><strong>5 साल तक प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर बना रहा परमार</strong><br />शिक्षाविदों का कहना है कि वर्तमान में यूनिवर्सिटी में जो घटना घटी, उसके लिए आरटीयू का लचर सिस्टम जिम्मेदार है। आरोपी प्रो. परमार लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक विभाग के प्रथम सेमेस्टर से चतुर्थ सेमेस्टर तक विद्यार्थियों को पढ़ा रहा था। वहीं, पिछले 5 साल से बीटेक फाइनल ईयर का प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर भी रहा। ऐसे में स्टूडेंट्स को अपनी प्रोजेक्ट व इंडस्ट्रियल रिपोर्ट भी इसी को सबमिट करनी पड़ती थी। वह विद्यार्थियों पर दबाव बनाकर फेल करने की धमकी देता था। शिक्षा की आड़ में वह छात्र-छात्राओं को प्रताड़ित कर रहा था। इसके बावजूद आरटीयू प्रशासन आंखें मूंदे रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2022 15:23:06 +0530</pubDate>
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                <title>संविदा के पहियों पर चल रहे सरकारी कॉलेज, सैकड़ों पद खाली</title>
                                    <description><![CDATA[हायर एजुकेशन का हाल ये है कि सिर्फ नामांकन और परीक्षा तक ही छात्र सीमित  होकर रह गए हैं। वास्तव में यहां शिक्षा मिल नहीं रही है। कॉलेज डिग्री लेने का स्थान बन गया है। हम बात कर रहे हैं कोटा शहर के 8 राजकीय महाविद्यालयों की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-colleges-running-on-the-wheels-of-contract--hundreds-of-posts-vacant/article-18837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/samvida-ke-pahiyo-par-chal-rahe-sarkari-college..kota-news-12.8.2022-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी शिक्षा को मजबूत करने को लेकर सरकार लाख दावे कर ले, लेकिन इसकी हकीकत किसी से छुपी नहीं है। प्राइमरी शिक्षा हो या फिर हायर एजुकेशन सब की स्थिति खस्ताहाल है। हायर एजुकेशन का हाल ये है कि सिर्फ नामांकन और परीक्षा तक ही छात्र सीमित होकर रह गए हैं। वास्तव में यहां शिक्षा मिल नहीं रही है। कॉलेज डिग्री लेने का स्थान बन गया है। हम बात कर रहे हैं कोटा शहर के 8 राजकीय महाविद्यालयों की। जिनकी स्थापना हुए बरसों बीत गए। इनमें से कुछ कॉलेज तो 100 साल से भी पूराने हैं। महाविद्यालयों की स्थापना के साथ ही शहरवासियों को उम्मीद जगी थी कि अब गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा लेकिन वर्तमान सरकारी व्यवस्था ने उनके सपनों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। प्रोफेसरों के अभाव में कॉलेजों में क्वालिटी एजुकेशन मिलना दूर समय पर सिलेबस पूरा करवाना ही बड़ी बात है। आलम ये है कि 8 महाविद्यालयों में कुल 391 में से 169 प्रोफेसरों के पद रिक्त हैं। शिक्षा से दूर हो रही क्वालिटी विषयवार प्रोफेसरों के पद रिक्त होने से कॉलेजों में शिक्षा का माहौल खत्म होता जा रहा है। उच्च शिक्षा से क्वालिटी दूर होती जा रही है। हालात यह है, यहां बच्चे सिर्फ सालभर में चार बार ही कॉलेज जाते हैं, जिसमें पहली बार कॉलेज में नामांकन कराने, दूसरी बार परीक्षा फार्म भरने व तीसरी बार परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड लेने और चौथी बार परीक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। क्योंकि कॉलेज में विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई होती नहीं है।</p>
<p>लिहाजा विद्यार्थी कॉलेजों में दाखिला लेने के पहले ही माइंड सेट कर लेते हैं कि कोचिंग अथवा ट्यूशन के सहारे ही उन्हें पढ़ाई करनी है। फिर कॉलेज के माध्यम से परीक्षा देकर डिग्री हासिल कर लेना है। गवर्नमेंट आटर्स कॉलेज में 34 पद रिक्त शिक्षकों के रिक्त पदों के मामले में शहर के गवर्नमेंट आटर्स कॉलेज की स्थिति अन्य महाविद्यालयों की तुलना में बेहतर है। हालांकि, यहां भी विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। क्षेत्रीय कॉलेज आयुक्तालय से मिले आंकड़ों के अनुसार आटर्स कॉलेज में कुल 107 प्रोफेसरों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 73 कार्यरत हैं, जबकि 34 शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। प्राचार्य डॉ. संजय भागर्व का कहना है, यहां करीब 9 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, इनके मुकाबले शिक्षकों के पद रिक्त होने से शिक्षा प्रभावित होती है। यहां अंग्रेजी और लोकप्रशासन विषय में 50 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं।</p>
<p>ऐसे में दो या तीन सेक्शन को एक साथ बिठाकर पढ़ाना पड़ता है। सबसे बुरी स्थिति में कॉमर्स कॉलेज शहर के सभी महाविद्यालयों में से सबसे बुरी स्थिति जेडीबी व गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज की है। दोनों कॉलेजों को मिलाकर कुल 64 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 54 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। जेडीबी कॉमर्स की बात करें तो यहां 25 पदों में से मात्र 3 ही शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 22 पद खाली चल रहे हैं। इसी तरह राजकीय कॉमर्स कॉलेज में कुल 39 में मात्र 7 ही शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं, 32 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। प्रोफेसरों के नहीं होने से यहां नियमित कक्षाएं भी नहीं लग पाती और शैक्षणिक माहौल भी नहीं बन पाता। जिससे महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी नहीं रहती है। वहीं, कार्यरत शिक्षक परीक्षाएं करवाने, दस्तावेजों की जांच, एडमिशन प्रक्रिया सहित अन्य कार्यों में व्यस्त रहने से वे शिक्षा में गुणवत्ता के लिए नवाचार भी नहीं कर पाते। इसीतरह विधि महाविद्यालय में भी 2 प्रोफेसरों के पद रिक्त हैं।</p>
<p>साइंस: थ्योरी के साथ प्रेक्टिकल भी प्रभावित प्रोफेसर की कमी से कॉलेज के छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है। लेकिन इस कमी को दूर करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग गंभीरता नहीं बरत रहा। राजकीय साइंस कॉलेज में कुल 93 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 57 ही कार्यरत हैं। जबकि, 36 प्रोफेसरों के पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। जिनमें भौतिक शास्त्र रसायन शास्त्र, वनस्पति व गणित के कई शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। प्राचार्य डॉ. जेके विजयवर्गीय ने बताया कि विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण संकाय में पदों का रिक्त होना चिंताजनक है। यहां करीब ढाई से तीन हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। थ्योरी के साथ प्रेक्टिकल पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। प्रोफेसर की कमी से बच्चों की समुचित पढ़ाई संभव नहीं हो पा रही। किस कॉलेज में कितने पद खाली कॉलेज स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त जेडीबी साइंस 47 24 23 जेडीबी आर्ट्स 63 43 20 रामपुरा आर्ट्स 7 0 0 गवर्नमेंट विधि 10 8 2 जल्द भरे जाएंगे रिक्त पद शहर के राजकीय महाविद्यालयों में प्रोफेसरों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। शिक्षक एडमिशन, एग्जाम व छात्रसंघ चुनाव सहित अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझे होने से क्वालिटी एजुकेशन पर काम ही नहीं कर पाते। हालांकि, सरकार विभिन्न विषयों के प्रोफेसरों के रिक्त पदों को भरने का प्रयास कर रही है।</p>
<p>आरपीएससी द्वारा साक्षात्कार चल रहे हैं। प्रदेश के कुछ महाविद्यालयों में चयनित प्रोफेसरों को पोस्टिंग दे दी है। वहीं, जहां रिक्त पदों की संख्या अधिक है वहां पदस्थापन व स्थानांतरण के माध्यम से खाली पदों को भरने के लिए आयुक्तालय व उच्च शिक्षा मंत्री तैयारी कर रहे हैं। जहां 60 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त है, वहां विद्या संबल योजना के तहत संविदा पर सहायक आचार्यों को नियुक्त किया जाएगा। इनकी योग्यता यूजीसी के मापदंड के अनुरूप ही होती है। - डॉ. रघुराज सिंह परिहार, सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा निदेशालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Aug 2022 15:16:31 +0530</pubDate>
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                <title>अब कॉलेजों में शुरू होगा सेमेस्टर सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[उच्च शिक्षा विभाग की ओर से राजस्थान के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में नई शिक्षा पॉलीसी लागू किए जाने की तैयारी की जा रही है। पॉलिसी के तहत एमए, एमएससी और एमकॉम पाठ्यक्रम में सेमेस्टर सिस्टम लागू हो सकता है। इसकी प्रकिया चल रही है। सेमेस्टर सिस्टम इसी शिक्षा सत्र 2022-23 में शुरू किए जाने की पूरी तैयारी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-semester-system-will-start-in-colleges/article-13151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ab-colleges-mei-shuru-hoga-semester-system.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से राजस्थान के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में नई शिक्षा पॉलीसी लागू किए जाने की तैयारी की जा रही है। पॉलिसी के तहत एमए, एमएससी और एमकॉम पाठ्यक्रम में सेमेस्टर सिस्टम लागू हो सकता है। इसकी प्रकिया चल रही है। सेमेस्टर सिस्टम इसी शिक्षा सत्र 2022-23 में शुरू किए जाने की पूरी तैयारी है।  <br /><br />विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार राजकुमार उपाध्याय ने बताया कि पहली बार स्थानाकोत्तर पाठ्यक्रम सेमेस्टर सिस्टम मोड पर संचालित किए जा सकते हैं। इससे पहले वार्षिक मोड ही पर चल रहे थे। नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत एमए, एमएससी और एमकॉम के विद्यार्थियों को 6-6 महीने में 2 बार परीक्षा देनी होगी। वहीं, डिग्री कम्पलीट करने के लिए दो साल में 4 बार परीक्षा देनी होगी। अब तक डिग्री के लिए 2 बार ही परीक्षा देनी होती थी। <br /><br /><strong>एआईएफयूसीपीओ संगठन जंतर-मंतर पर करेगा प्रदर्शन</strong><br />सेमेस्टर सिस्टम प्रणाली के विरोध में अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ की ओर से 3 अगस्त को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। एआईएफयूसीपीओ के जोनल सचिव डॉ. रघुराज सिंह परिहार ने बताया कि नई पॉलिसी से शिक्षा महंगी होगी साथ ही निजीकरण भी बढ़ेगा। गरीब वर्ग के बच्चों का कॉलेज में पढ़ना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि, दो साल की डिग्री के लिए 4 बार परीक्षा फॉर्म भरने में एक विद्यार्थी को 8 से 10 हजार का नुकसान होगा। कोटा संभाग से लाखों विद्यार्थी एमए, एमएससी व एमकॉम करते हैं। इस तरह उन्हें करोड़ों का नुकसान होगा। एआईएफयूसीपीओ संगठन सेमेस्टर प्रणाली का पुरजोर विरोध कर रहा है। <br /><br /><strong>एमएससी पाठयक्रम में पहले से ही चल रहा सेमेस्टर सिस्टम</strong><br />डॉ. परिहार ने बताया कि गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में एमएससी पाठ्यक्रम में पहले से ही सेमेस्टर सिस्टम चल रहा है। लेकिन उच्च विभाग इस बार एमए, एमकॉम में भी यह सेमेस्टर प्रणाली लागू करने जा रहा है, जो छात्रों के साथ कुठाराघात है। उन्होंने बताया कि कॉलेजों में साल में एक बार परीक्षाएं करवाने में ही तीन माह का समय लग जाता है, ऐसे में दो बार परीक्षाएं होने से विद्यार्थियों का अत्यधिक समय खराब होगा। <br /><br /><strong>सेमेस्टर प्रणाली के फायदे और नुकसान</strong><br />रजिस्ट्रार उपाध्याय ने बताया कि समेस्टर सिस्टर लागू होने से स्टूडेंट्स को जितने फायदे होंगे उतने ही नुकसान भी हैं। हर साल हाड़ौती के कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ जिलों से करीब सवा लाख विद्यार्थी यूनिवर्सिटी से जुड़ते हैं जो ग्रेज्युशन के बाद पोस्टग्रेज्युशन तक पहुंचते हैं। इस तरह एमए, एमएससी और एमकॉम में लाखों विद्यार्थी होते हैं, जिन्हें अब साल में दो बार परीक्षा फॉर्म भरना पड़ेगा। जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होगा। <br /><br /><strong>ये होंगे फायदे</strong> <br />-  कॉलेज और यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ेगी। <br />- सेमेस्टर सिस्टम से पेपर बढ़ेंगे तो स्टूडेंट्स की नॉलेज बढ़ोत्तरी होगी।<br />- परीक्षा में पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत भी बढ़ जाएगा। <br />- विद्यार्थियों की स्कील डवलप होगी। <br />- बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम होगी। <br /><br /><strong>ये होंगे नुकसान</strong><br />- 2 साल की डिग्री करने के लिए अब विद्यार्थियों को 4 बार परीक्षा फॉर्म भरने होंगे। जबकि, पहले 2 बार ही फॉर्म भरने होते थे। <br />- पहले परीक्षा फॉर्म की फीस करीब 2 हजार होती थी लेकिन सेमेस्टर सिस्टम लागू होते ही 4 हजार हो जाएगी। ऐसे में दो साल में लाखों विद्यार्थियों को 8 हजार रुपए का नुकसान भुगतना पड़ेगा। <br />- विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में जब दो-दो बार एग्जाम होंगे तो शेष अन्य विषयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो जाएगी। <br />- यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में एक साल में 2 माह का समय समर वैकेशन का होता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। <br />- साल में दो बार परीक्षा से शिक्षकों की ड्यूटी एग्जाम में लगेगी, जिससे विद्यार्थियों की क्लासें बंद हो जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 14:51:14 +0530</pubDate>
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