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                <title>wild birds - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>उदपुरिया में उजड़ी जांघिल पक्षियों की बस्ती, दुर्दशा का शिकार हुआ तालाब</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार घटती पेड़ों की संख्या से जांघिलों ने पुश्तैनी घर छोड़ने को मजबूर हो गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/colony-of-wild-birds-destroyed-in-udpuriya--pond-becomes-victim-of-plight/article-58354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/kota-news3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में पेंटेर्ड स्टॉर्क बर्ड की जन्मस्थली कहलाने वाला उदपुरिया तालाब इन दिनों दुर्दशा का शिकार हो रहा है। पेड़ों की अवैध कटाई के कारण जांघिलों की बस्ती उजड़ गई। तालाब जलकुंभी से अटा पड़ा है तो पानी किनारे जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। कूड़े कचरे से उठती दुर्गंध से तालाब का मनोहारी वातारण दूषित हो गया। पूर्व में तालाब किनारे लगभग 50 पेड़ हुआ करते थे, लेकिन, स्थानीय पंचायत प्रशासन व पर्यटन विभाग की अनदेखी के चलते आज एक भी नहीं बचा। हालात यह हैं कि शाम ढलते ही तलाब किनारे नशेड़ियों की महफिल सजती है। यहां जगह-जगह शराब की खाली बोतलों का ढेर लगा हुआ है। यदि, पर्यटन विभाग ध्यान दे तो उदपुरिया तालाब हाड़ौती का कैलादेवी पक्षी विहार के रूप में उभर सकता है। </p>
<p><strong>2015 के बाद से नहीं बनाए घौंसले</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि पेंटर्न स्टोक बर्ड यानी जांघिल प्रवासी पक्षी हैं, इनका प्रवास अगस्त से फरवरी तक रहता है। पहली बार 1995 में जांघिलों ने उदपुरिया में दस्तक दी थी। वर्ष 2015 तक इन्होंने यहां लगातार बस्ती बसाई। इस दरमियानयहां 6 हजार के लगभग नन्हें मेहमान जन्मे थे। वहीं, कई सीजन में 250 से अधिक नीड़ बनाए और 600 बच्चों ने उदपुरिया में जन्म लिया था। लेकिन, 2015 के बाद से यहां मानवीय दखल व अतिक्रमण बढ़ने की वजह से इन्होंने यहां घौंसले नहीं बनाए और उदपुरिया छोड़ बारां जिले के सोरसन की तरफ रूख कर लिया। जबकि, वर्ष 2010 में इन्होंने उदपुरिया तालाब किनारे पेड़ों पर करीब 250 घौसलें बनाए थे। लेकिन, धीरे-धीरे पेड़ों की संख्या कम होती चली गई और घौंसलों की भी संख्या घटती चली गई। </p>
<p><strong>पर्यटन केंद्र बन सकता है उदपुरिया</strong><br />जैदी बताते हैं, प्रशासन व जिला पर्यटन विभाग ध्यान दे तो उदपुरिया तालाब कैलादेवी पक्षी विहार जैसा खूबसूरत पर्यटन केंद्र बन सकता है। उदपुरिया अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया। तालाब की पाल जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई। लगातार घटती पेड़ों की संख्या से जांघिलों ने पुश्तैनी घर छोड़ने को मजबूर हो गए। </p>
<p>इसी का नतीजा है, कि वर्ष 2015 से जांघिलों ने उदपुरिया से मुंह मोड़ लिया और बारां जिले के अमलसरा व सोरसन क्षेत्र के तालाबों को बस्तियां बनाकर आबाद किया। वहीं, गोदल्याहेड़ी गांव के राजपुरा तालाब किनारे पेड़ों पर अपना आशियाना बनाया। इसके अलावा मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व क्षेत्र, रामगंजमंडी, उंडवा, चित्तौड़, जोधपुर समेत व अन्य जगहों पर भी इनकी मौजूदगी है।  </p>
<p><strong>पर्यटन विभाग को ध्यान देने की जरूरत</strong><br />स्थानीय निवासी पक्षी प्रेमी श्याम जांगिड़ कहते हैं, यहां पक्षियों का आना अच्छा संकेत है। लेकिन, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से तालाब के आसपास सुरक्षित जगहों पर पेड़ों की संख्या बढ़ाने के लिए पौधरोपण करवाए जाना चाहिए। साथ ही इनकी पंसदीदा विलायती बबूल के पेड़ लगाए जाए ताकि, यहां पर्याप्त घोंसले बनाने के लिए इन्हें जगह मिल सके। वहीं, अतिक्रमण हटवाकर व जलकुंभी हटाकर तालाब की सफाई करवानी चाहिए।</p>
<p><strong>जांघिलों की विशेषताएं</strong><br />20 नीड़ बना लेते हैं एक पेड़ पर<br />20 से 25 बरस है औसत आयु<br />3 से 5 अंडे देते हैं एक बार में<br />2 वर्ष में बच्चे हो जाते हैं वयस्क<br />6 हजार बच्चे जन्मे 22 साल में<br />वर्तमान में  उदपुरिया में एक भी जाघिल नहीं है</p>
<p><strong>अपने खर्चे पर कर रहे पक्षियों की निगरानी</strong><br />हाड़ौती नेचुरल सोसाइटी के सदस्य श्याम जांगिड़ स्वयं के खर्चे पर उदपुरिया में जांघिल पक्षियों की देखभाल कर रहे हैं। साथ ही अवैध शिकार, संदिग्ध घुसपैठ रोकने के लिए निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा यहां आने वाले पर्यटकों को पाक्षियों की विशेषताएं, इतिहास से रूबरू करवाते हैं।  इसी तरह राजपुरा तालाब में मौजूद पेटेंर्ड स्टॉर्क बर्ड की सुरक्षा में सुरेश नागर तैनात हैं। नागर अपने स्तर पर ही इन पक्षियों की निगरानी करते हैं।</p>
<p><strong>जलकुंभी से अटा और गंदगी से दबा सौंदर्य</strong><br />शहर से करीब 30 किमी दूर दीगोद तहसील के गांव उदपुरिया का तालाब वर्तमान में अतिभेंट चढ़ चुका है। तालाब की पाल पर जगह-जगह ग्रामीणों ने मवेशियों के बाड़े व कच्चे बना लिए हैं। वहीं, तालाब किनारे पेड़ों की भी अवैध कटाई की जा रही है। तालाब पूरी तरह से जलकुंभी से अटा पड़ा है। जिसे साफ करवाने में स्थानीय प्रशासन भी सुध नहीं ले रहा। हालात यह हैं, पहले तालाब के बीचोंबीच करीब 50 पेड़ हुआ करते थे, जो आज एक भी नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Sep 2023 15:38:12 +0530</pubDate>
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                <title>बेज़ुबा परिंदो के लिए बांधे परिंडे,  ताकि इस भीषण गर्मी में वे ना रहें प्यासे</title>
                                    <description><![CDATA[वैशाली नगर के हनुमान नगर विस्तार कॉलोनी स्थित भौमिया पार्क में बेज़ुबा पक्षियों के लिए परिंडे बांधे गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--under-the-joint-aegis-of-dainik-navjyoti--rotary-club-jaipur-south-and-pratapsingh-charitable-trust--on-sunday--under-the-succa-hai-nal--aao-parinde-mein-water--campaign--birds-were-tied/article-8497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/harsh-chaudhary-.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दैनिक नवज्योति, रोटरी क्लब जयपुर साउथ एवं प्रतापसिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को ‘ सूखा है नल, आओ परिंडे में रखे जल’ अभियान के तहत वैशाली नगर के हनुमान नगर विस्तार कॉलोनी स्थित भौमिया पार्क में बेज़ुबा पक्षियों के लिए परिंडे बांधे गए। इस अवसर पर रोटरी क्लब जयपुर साउथ के पदाधिकारी, सदस्य एवं आसपास के निवासियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। शहर की विभिन्न एनजीओज भी इस अभियान से जुड़ रही हैं। गौरतलब है कि इस अभियान के तहत शहर के विभिन्न पार्कों, मंदिरो सहित अन्य जगहों पर क़रीब 600 से अधिक परिंडे बांधे जा चुके हैं। इस अभियान का रेडियो पार्टनर 91.1 रेडियो सिटी है।</p>
<p><strong>"पंछी बचाओ परिंडा लगाओ" अभियान के तहत 51 परिंडे लगाए गए</strong><br />रविवार को रोड नंबर 1 सीकर रोड स्थित स्मृति वन में हरिओम जन सेवा समिति राजस्थान के तत्वाधान में बेजुबान पक्षियों के लिए "पंछी बचाओ परिंडा लगाओ" अभियान के तहत 51 परिंडे लगाए गए। गर्मी में मनुष्य को पानी की व्यवस्था कर लेता है, लेकिन बेजुबान पक्षियों को पानी के लिए भटकना पड़ता है पानी की कमी से कई पक्षियों की मौत हो जाती है। गर्मी के सीजन में पानी की कमी के कारण किसी पक्षी की मौत नहीं हो इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए हरिओम जन सेवा समिति द्वारा पक्षी मित्र न्यायधीश शिवकुमार शर्मा , प्लास्टिक एसोसिएशन राजस्थान व अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कोषाध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी संजय सक्सेना के सानिध्य में परिंडे लगाकर परिंडा अभियान की शुरुआत की। हरिओम जन सेवा समिति के प्रदेशाध्यक्ष पंकज गोयल व समाजसेवी सक्सेना ने बताया कि पक्षी और प्रकृति हमारे जीवन के अभिन्न अंग है प्रकृति स्वस्थ है तो हम स्वस्थ हैं इसीलिए पक्षियों को बचाएं तथा सभी लोग अपने घरों के बाहर जहां पक्षियों की संख्या अधिक हो वहां पर परिंडे लगाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Apr 2022 15:07:26 +0530</pubDate>
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