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                <title>grass - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सूखी घास व कचरा, गर्मी में आग का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[हर साल हो रही आग लगने की घटनाएं,शहर में ट्रांसफार्मरों के पास लगा है कचरे का अम्बार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dry-grass-and-waste-pose-fire-hazard-during-summer/article-147989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)41.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा। आने वाले तीन महीने अप्रैल से जून में तापमान अधिक होने पर गर्मी भी भीषण पड़ती है। ऐसे में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं भी अधिक होती है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों में लगने वाली आग से आमजन अधिक प्रभावित होते हैं। हालत यह है कि ट्रांसफार्मरों के आस-पास कचरा व सूखी घास आग का बढ़ना कारण बनते हैं। शहर में आमजन की सुविधा के लिए बिजली कम्पनी ने एक निर्धारित दूरी पर ट्रांसफार्मर लगाए हुए हैं। वहीं आमजन को इसके खतरे से बचाने के लिए सभी ट्रांसफार्मर को जमीन से काफी ऊंचाई पर रखा गया है। साथ ही इनकी सुरक्षा के लिए उनके चारों तरफ लोहे की जाली की फेसिंग भी की हुई है। लेकिन हालत यह है कि अधिकतर ट्रांसफार्मर के आस-पास लोगों द्वारा कचरा डालने व वहां उगी सूखी घास गर्मी में आग लगने का बड़ा कारण बन रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">यहां है बुरी स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">शहर में वैसे तो सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर हैं। उनमें से कई जगह ऐसी हैं जहां ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरा व सूखी घास है। जिनमें थोक फल सब्जीमंडी के बाहर हो या फर्नीचर मार्केट शॉपिंग सेंटर, नई धानमंडी के पास मोटर मार्केट हो या किशोर सागर तालाब की पाल। बंगाली कॉलोनी छावनी समेत कई अन्य स्थानों पर यही हालत है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">मुख्य मार्गों पर लगा रही सीमेंट जाली</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों पर लगे ट्रांसफार्मरों पर तो सीमेंट की जाली लगाई जा रही है। जिससे न तो कोई उनमें आसानी से घुस सकेगा। साथ ही उन जालियों से कचरा भी अंदर नहीं फेका जा सकता। जिससे आग लगने का खतरा भी कम हो गया है। लेकिन कॉलोनियों व अंदरूनी क्षेत्रों के ट्रांसफार्मरों के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सभी जगह सुरक्षा, सफाई निगम का जिम्मा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निजी बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि सभी ट्रांसफार्मरों पर कम्पनी की ओर से लोहे की रैलिंग से सुरक्षा की हुई है। ट्रांसफार्मर भी जमीन से ऊपर हैं। जिससे करंट का खतरा भी नहीं है। लेकिन इनके आस-पास सूखी घास व कचरा लोग ही डाल रहे हैं। कई बार कचरे में आग लगने पर वह पैनल के माध्यम से ट्रांसफार्मर तक पहुंच जाती है। जिससे नुकसान का खतरा रहता है। कचरा व घास की सफाई का जिम्मा निगम कर्मचारियों का है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सफाई होने के बाद डाला जाता है कचरा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी मोतीलाल चौधरी ने बताया कि बरसात के समय में ट्रांसफार्मर के आस-पास घास उग जाती है। साथ ही कचरा भी लोग डाल देते हैं। हालांकि निगम की ओर से उसकी सफाई की जाती है। लेकिन कई बार तारों में करंट के चलते सफाई कर्मी ट्रांसफार्मर के नजदीक सफाई नहीं कर पाते। प्रयास करेंगे कि ट्रांसफार्मर के आस-पास भी अच्छी तरह सफाई हो और वहां कचरा एकत्र ही नहीं हो जिससे आग का खतरा बने।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">तापमान अधिक होने से लगती है आग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि अप्रैल से जून के तीन महीने में तापमान अधिक होने से गर्मी पड़ती है। ऐसे में कई बार सूखी घास व कचरे में आग लग जाती है। घास व कचरा ट्रांसफार्मर के नजदीक होने से उससे ट्रांसफार्मर में आग लग जाती है। जिससे लाइट बंद कर आग बुझाने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार लोग जलती वस्तु डाल देते हैं। जिससे भी आग लग जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:21:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नहर कचरे और घास से अटी पड़ी, टेल तक कैसे पहुंचेगा पानी?</title>
                                    <description><![CDATA[एक वर्ष होने पर भी पुलिया पर रैम्प नहीं बनाया 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-canal-is-filled-with-garbage-and-grass--how-will-water-reach-the-tail/article-94893"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। बाईं मुख्य नहर के हरीपुरा नंदपुरा डिस्ट्रीब्यूटर की सफाई के अभाव में कचरे का ढेर लगा हुआ है। नहर भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है।  एक दो दिन बाद में नहर में जल प्रवाह शुरू होने वाला है और अभी तक नहर की पर्याप्त सफाई नहीं हुई है। ऐसे में टेल तक पानी पहुंचना संभव नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि नरेगा के तहत नहर की सफाई के नाम पर औपचारिकता की गई और जेसीबी से सफाई की जा रही हैं। उससे सफाई के नाम पर खानापूर्ति हो रहीं हैं। अगर सफाई नहीं हुईं तो नहर ओवरफ्लो होने से खेतों में पानी भरने की आशंका बनीं हुई हैं जिससे किसानों को गेहूं की फसलों में नुकसान उठाना पड़ेगा और टेल क्षेत्र में समय पर पानी नहीं पहुंच पाएगा। किसानों को खेतों को रेलने में वैसे ही देरी हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पक्की नहर के निर्माण में घटिया निर्माण जा रहा हैं। काली बजरी काम में ले रहे हैं जिसमें बजरी से ज्यादा मिट्टी हैं। ठेकेदार और सीएडी प्रशासन की मिलीभगत से घटिया सामग्री लगाई जा रहीं हैं। सरकार के बड़े बड़े वादे होते हैं। किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए पक्की नहर का निर्माण किया जा रहा हैं। टेल क्षेत्र पर समय पर पानी पहुंच सके और पानी व्यर्थ न बहे लेकिन ठेकेदार निर्माण कार्य में खानापूर्ति कर देते हैं जिसकी वजह से निर्माण ज्यादा दिन नहीं चल पायेगा हैं और पूर्व में किया गया कार्य भी घटिया निर्माण के कारण उखड़ रहा हैं। नई पुलिया पर आवागमन सुचारू नहीं होने से क्षतिग्रस्त पुलिया से निकल रहे हैं। जिस पर कभी बड़ा हादसा होने की आशंका बनीं रहतीं हैं। एक वर्ष पूर्व में पुलिया निर्माण किया गया था लेकिन अभी तक पुलिया पर रैम्प नहीं बनाया गया हैं जिससे हर रोज 50 से ज्यादा किसानों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है। </p>
<p><strong>नहरों की नहीं हो रही सफाई, टेल तक पानी पहुंचना होगा मुश्किल</strong><br />किसान दीनदयाल मीणा नंदपुरा ने बताया हैं कि जिम्मेदार व्यक्ति ध्यान नहीं दे रहा हैं और समय पर सफाई नहीं होने से हमारे टेल क्षेत्र पर पानी नहीं पहुंच पाता हैं जिससे हमें डीजल इंजन से पानी पिलाना पड़ता हैं।</p>
<p><strong>नहर निर्माण में घटिया सामग्री उपयोग का आरोप</strong><br /><strong>किसान ओम प्रकाश मीणा हरिपुरा </strong>ने बताया कि पक्की नहर का निर्माण किया लेकिन पुलिया पर एक साल होने पर रैम्प नहीं बनाया है। पुलिया टूटी हुई। इस वजह से ट्रैक्टर निकालने पर डर बना रहता हैं।</p>
<p><strong>भाजपा किसान मोर्चा मण्डल अध्यक्ष बलराम यादव</strong> ने बताया कि औंकारपुरा  पक्की नहर के निर्माण पर पक्के धोरों का निर्माण करना था लेकिन नाली रखकर खानापूर्ति कर रखीं हैं। बारिश में पुलिया तोड़कर बारिश का पानी ड्रेन में निकाला था जिसका निर्माण भी घटिया किया गया हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />ठेकेदार से बात करके निर्माण कार्य सुधार करवाएंगे। नहर की  सफाई जल्द करवाई जाएगी। <br /><strong>- मनीष कुमार, एईएन सीएडी विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Nov 2024 16:18:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - जलने वाली सूखी घास सफेद और उगने वाली हरी, कैसे?</title>
                                    <description><![CDATA[जिस घास में आग लगी वो प्लांटेशन की या बाहर से लाई गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---the-dry-grass-that-burns-is-white-and-the-one-that-grows-is-green--how/article-94578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वन मंडल के लाडपुरा रेंज में मेटिगेटिव मैजर्स के तीन प्लांटेशनों में मंगलवार को एक साथ लगी आग के मामले में बुधवार को संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जलने वाली घास प्लांटेशन की थी या बाहर से लाकर षड़यंत्रपूर्वक जलाई गई?, आग लगने के कारण, स्टाफ की तैनाती के बावजूद आग कैसे लगी? मंशा?  सहित अन्य कारणों की जांच सीसीएफ कार्यालय में कार्यरत डीएफओ से करवाई जाएगी।  हालांकि, पर्यावरणविदें का कहना है, तीनों प्लांटेशन में जिन घास में आग लगी, वह प्लांटेशन में उगी घास से बिलकुल भिन्न है। क्योंकि, जलने वाली सूखी घास डंठलनुमा सफेद रंग की है, जबकि इसी के पास प्लांटेशन में उगी घास कई जगहों पर हरी तथा कुछ जगहों पर पीले रंग की है, जो पानी की नमी के कारण होती है। ऐसे में सूखी घास को बाहर से लाकर साजिशन जलाए जाने की संभवना प्रतित होती है। </p>
<p><strong>मौके पर कटी पड़ी थी घास</strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि कुमार ने बताया कि दोपहर को  मुकुंदरा स्पेशल विहार कॉलोनी से सटे बरड़ा बस्ती प्लांटेशन में मौका देखने गए थे। जहां आग लगी वहां सफेद रंग की मोटे तने की सूखी घास का ढेर लगा हुआ था। यह घास कटी हुई थी। जबकि, इस प्लांटेशन में घटनास्थल के पास उगी घास हरे रंग की थी। वहीं, कुछ जगहों पर पीले रंग की घास उगी हुई थी। ऐसे में देखने से स्पष्ट होता है कि जलने वाली घास इस प्लांटेशन की नही होना प्रतित होती है। </p>
<p><strong>यहां उगती हैस्पीयर हैड घास </strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि का कहना है कि मेटिगेटिव मैजर्स के प्लांटेशन पथरीले व चट्टानी वनक्षेत्र है। ऐसे में यहां स्पीयर हैड, डायकेन्थियम अनुलटम घास, डिजिटेरिया डेकम्बेंस घास प्रजाति की घास उगती है, जो पतली नुकीली सूई जैसी होती है। इसके तने का व्यास काफी कम होता है। जबकि, मौके पर जलने वाली घास का ढेर मिला, उसका डंठल काफी मोटा और चौड़ा है। ऐसे में यह घास यहां की नहीं हो सकती। </p>
<p><strong>गार्ड नहीं दे सका संतोषजनक जवाब</strong><br />पर्यावरणप्रेमी सतीश कुमार, बजरंग सिंह जादौन ने बताया कि बरडा बस्ती प्लांटेशन में चौकी बनी हुई है, जिस पर रैत्या चौकी नाका लिखा हुआ था। यहां तैनात सुरक्षा गार्ड से आगजनी की घटना के बारे में पूछा तो उसने अज्ञात दो लोगों द्वारा आग लगाना बताया। लेकिन, इस प्लांटेशन के मुख्य दरवाजे से घटनास्थल की दूरी करीब एक किमी है और वहां तक  पहुंचने से पहले 15 से 18 फीट गहरा विशाल खनन के गड्ढ़ों से होकर गुजरना पड़ता है। आसपास गड्ढ़ों में पानी भरा हुआ है। चौकी बनी हुई है, जहां स्टाफ तैनात रहता है, इसके बावजूद कथाकथित अज्ञात दो व्यक्तियों द्वारा प्लांटेशन में घुसकर आग लगाकर चले जाने की बात समझ से परे है। मौके के हालात देखकर जानबूझ कर आग लगाने या लगवाना प्रतित होता है। जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p>लाडपुरा रेंज के मेटिगेटिव मैजर्स के प्लांटेशनों में आग लगने के मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। डीएफओ स्तर के अधिकारी से जांच करवाई जाएगी। जिसमें सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जाएगी। जिसमें किसी वन कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Nov 2024 14:29:48 +0530</pubDate>
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                <title>घास तुरंत कटवाए, वरना अग्नि दुर्घटना की जिम्मेदारी आपकी होगी</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ रोड स्थित हवाई अड्डा परिसर में बार-बार सूखी घास व झाड़ियों में लग रही आग की घटनाओं को देखते हुए नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त ने हवाई अड्डा अधिकारी को पत्र लिखा है। जिसके बाद हवाई अड्डा प्रबंधन ने जेसीबी से घास कटाई शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/get-the-grass-cut-immediately--otherwise-you-will-be-responsible-for-the-fire-accident/article-8818"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/airport-grass-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । झालावाड़ रोड स्थित हवाई अड्डा परिसर में बार-बार सूखी घास व झाड़ियों में लग रही आग की घटनाओं को देखते हुए नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त ने हवाई अड्डा अधिकारी को पत्र लिखा है। जिसके बाद हवाई अड्डा प्रबंधन ने जेसीबी से घास कटाई शुरू कर दी है। हालांकि गुरुवार को भी दिन में फिर से वहां आग लगी थी। <br /><br />हवाई अड्डा परिसर में पिछले एक सप्ताह में  तीन बार सूखी घास व झाड़ियों में आग लग चुकी है। सबसे अधिक आग 23 अप्रैेल को दिन में लगी थी। जिस पर शाम तक काबू पाया गया था। उस दिन करीब डेढ़ किमी. क्षेत्र में आग फैल गई थी। जिसे काबू पाने में 2 लाख लीटर पानी काम में लिया था। उसके 24 घंटे बाद 25 अप्रैल को फिर से परिसर में आग लगी। दोनों बार आग परिसर की सूखी घास व  झाड़ियों में लगी थी। दूसरी बार कीे आग पेट्रोल पम्प के पीछे की तरफ लगी थी। जिसे बड़ी मुश्किल से काबू में किया गया था। लगातार दो बड़ी घटनाएं जल्दी-जल्दी होने पर नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त ने हवाई अड्डा अधिकारी को पत्र लिखा। पत्र में आयुक्त ने लिखा कि हवाई अड्डा परिसर में काफी समय से घास व सूखी झाड़ियां उगी हुई हैं। जिन्हें कटवाने के लिए पूर्व में कई बार पत्र लिखा जा चुका है। उसके बाद भी दो बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। एयरपोर्ट परिसर के आस-पास दुर्गा बस्ती, अभय कमांड सेंटर, दैनिक नवज्योति कार्यालय व पेट्रोल पम्प भी है। ऐसे में एयरपोर्ट परिसर में आग लगने व अधिक बढ़ने पर जान और माल का नुकसान भी हो सकता है। पत्र में लिखा कि एयरपोर्ट परिसर में अग्निशमन वाहनों में पानी भरने की व फायर उपकरणों को भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वे अविलम्ब एयरपोर्ट परिसर में उगी सूखी घास व झाड़ियों को कटवाएं। यदि भविष्य में कोई अग्नि दुर्घटना होती है तो उसकी समस्त जिम्मेदारी एयरपोर्ट प्रबंधन की होगी। <br /><br /><strong>बार-बार पत्र का भी नहीं हो रहा असर</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक राजोरा ने बताया कि एयरपोर्ट प्रबंधन को पिछले तीन साल से घास कटवाने के लिए पत्र लिखे जा रहे हैं। एक माह में दो बार पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन उन पर कोई असर नहीं हो रहा है। वे हर बार टेंडर होने के बात कहकर बचते रहते हैं। जबकि  एयरपोर्ट परिसर में आग लगने पर परेशानी प्रशासन को हो रही है। साथ ही जनता को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शहर के बीच होने से आग कभी भी फैली तो बड़ा हादसा हो सकता है। <br /><br /><strong>तीसरी बार फिर लगी आग, दो दमकल भेजी</strong><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के सहायक अग्निशमन अधिकारी देवेन्द्र गौतम ने बताया कि गुरुवार को दिन में भी एयरपोर्ट परिसर की झाड़ियों में आग लगने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर दो दमकलें मौके पर भेजी थी। हालांकि आग घोड़ा बस्ती के पीछे की तरफ लगी थी। समय रहते आग पर काबू पा लिया। जिससे आग अधिक नहीं फैल सकी। एयरपोर्ट परिसर में एक सप्ताह में यह तीसरी बार आग लगी है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />एयरपोर्ट परिसर में घास कटाई का ठेका किशनगढ़ से हो गया है। वह फाइनल स्वीकृति के लिए वित्त विभाग में गया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही शीघ्र ही परिसर से घास कटाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन उससे पहले अपने स्तर पर ही जेसीबी मशीन लगाकर पेट्रोल पम्प के पीछे की तरफ से घास कटाई का काम शुरू कर दिया है। <br /><strong>-नरेन्द्र मीणा, हवाई अड्डा अधिकारी </strong><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 13:28:07 +0530</pubDate>
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                <title>एयरपोर्ट परिसर की सारी घास जली, अब टेंडर का क्या फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[एयरपोर्ट प्रबंधन को पता है कि हर साल गर्मी शुरू होते ही परिसर की सूखी घास में आग लगती है तो उसकी कटाई के टेंडर काफी समय पहले ही कर देने चाहिए थे। लेकिन एयरपोर्ट अधिकारी की लापरवाही से घास कटाई का टेंडर करने में देरी की गई है। जिससे अप्रैल का महीना बीतने के बावजूद अभी तक टेंडर ही नहीं हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/all-the-grass-in-the-airport-complex-was-burnt--now-what-is-the-use-of-tender/article-8562"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/airport-.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । झालावाड़ रोड स्थित एयरपोर्ट परिसर में एक दिन पहले  सूखी घास में लगी भीषण आग से पूरी घास जलकर खाक हो गई है। अब एयरपोर्ट प्रबंधन जागा और उसके  द्वारा घास कटाई का टेंडर करने की प्रक्रिया शुरू करने की पहल की है। <br />एयरपोर्ट परिसर में चार दीवारी से भीतर चारों तरफ बड़ी मात्रा में सूखी घास उगी हुई है। उस घास में हर साल गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं होती है। वह भी एक दो बार नहीं कई -कई बार होती रही हैं। इस बार भी मार्च से अप्रैल के दो माह में करीब 10 बार आग लग चुकी है। हालांकि अधिकतर समय कम जगह पर आग लगने से उसे तुरंत बुझा लिया जाता है। लेकिन शनिवार को लगी आग ने विकराल रूप ले लिया था। हवा के साथ आग इतनी अधिक फैल गई थी कि उसे काबू करना ही मुश्किल हो रहा था। नगर निगम कीे 14 दमकलों ने करीब 2 लाख लीटर पानी डालकर आग पर काबू पाया था। करीब डेढ़ किमी. तक के क्षेत्र में उगी घास पूरी तरह से जलकर खाक हो गई है। <br /><br />एयरपोर्ट प्रबंधन को पता है कि हर साल गर्मी शुरू होते ही परिसर की सूखी घास में आग लगती है तो उसकी कटाई के टेंडर काफी समय पहले ही कर देने चाहिए थे। जिससे अप्रैल से पहले ही घास कट जाती तो शनिवार के दिन जैसी घटनाओं को टाला जा सकता था। लेकिन एयरपोर्ट अधिकारी की लापरवाही से घास कटाई का टेंडर करने में देरी की गई है। जिससे अप्रैल का महीना बीतने के बावजूद अभी तक टेंडर ही नहीं हुआ है। <br /><br />एयरपोर्ट अधिकारी नरेन्द्र मीणा का कहना है कि एयरपोर्ट परिसर में चार दीवारी के अंदर करीब 399 एकड़ भूमि पर सूखीे घास उगी हुई है। जिसे कटवाने का टेंडर किशनगढ़ अजमेर स्थित एयरपोर्ट के माध्यम से किया जा रहा है। सिविल व टेक् नीकल इंजीनियर किशनगढ़ में होने से टेंडर प्रक्रिया वहीं से फाइनल होगी। टेंडर की तकनीकी बिड खोली जा चुकी है और वित्तीय बिड सोमवार को खोली जाएग़ी। <br /><br />सूत्रों के अनुसार अभी वित्तीय बिड खुलने के बाद नेगोशिएशन होने व कार्यादेश जारी होने के बाद घास कटाई के टेंडर को फाइनल होने व काम शुरू होने में करीब एक सप्ताह से दस दिन का समय भी  लग सकता है। ऐसे में गर्मी अधिक होने से उससे पहले कभी भी फिर से आग लगने की घटना हो सकती है। हालांकि शनिवार को लगी भीषण आग में  एयरपोर्ट परिसर के डेढ़ किमी एरिया की घास तो जलकर खाक सो चुकी है। ऐसे में अब घास कटाई का टेंडर करने  का फायदा ही नहीं है। टेंडर तो पहले ही होना चाहिए था जिससे इस तरह की आग लगने की घटना से बचा जा सके। सूत्रों के अनुसार अब एयरपोर्ट पर घास कटाई का लाखों रुपए का टेंडर होगा जबकि वहां उतनी तो घास ही नहीं बची है। जबकि पिछले साल भी एयरपोर्ट प्रबंधन ने पिछले साल भी घास कटाई का टेंडर नहीं कर दैनिक मजदूरी पर ही जेसीबी से घास कटवाने का दावा किया जा रहा है।        <br /><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के सहायक अग्निशमन अधिकारी देवेन्द्र गौतम ने बताया कि हर साल गर्मी के मौसम से पहले प्रशासन के साथ होने वाली बैठक एयरपोर्ट प्रबंधन को घास कटवाने के लिए पाबंद करते रहे हैं। लेकिन उनके द्वारा हमेशा लापरवाही बरती जा रही है। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।  <br /><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण की आयुक्त कीर्ति राठौड़ ने बताया कि यदि नगर निगम की दमकलों से समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो आग एयरपोर्ट परिसर की चार दीवारी से निकलकर हवा के साथ बाहर रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाती तो उसे काबू करना तो मुश्किल होता ही साथ ही उससे जन धन की हानि होने की संभावना भी अधिक हो जाती। आयुक्त ने बताया कि एयरपोर्ट परिसर की पीछे की तरफ की चार दीवारी का छोटा सा हिस्सा टूटा हुआ है उसे बनाने के लिए तो एयरपोर्ट अधिकारी आए दिन शिकायतें करते हैं कि उस जगह से भैसें अंदर घुसकर परिसर को नुकसान पहुंचा देती है। जबकि एयरपोर्ट प्रबंधन का मुख्य काम सूखी घास को कटवाने का है वह उनसे हो नहीं रहा है। इधर एडीएम सिटी महेन्द्र लोढ़ा ने बताया कि एयरपोर्ट अधिकारी को सूखी घास शीघ्र कटवाने के लिए पाबंद किया हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 15:43:24 +0530</pubDate>
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