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                <title>handpump - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एक हैंडपंप के सहारे पूरा गांव, पेयजल संकट से जूझ रहे झोटोली के ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[एक किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा पीने का, फ्लोराइडयुक्त जल से बढ़ी परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/entire-village-relies-on-a-single-handpump--villagers-in-jhotoli-grapple-with-drinking-water-crisis/article-154949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)23.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। क्षेत्र के झोटोली गांव में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। गांव के लोगों को पीने लिए करीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पूरे गांव की ननिर्भरता एकमात्र हैंडपंप पर होने के कारण ग्रामीणों को घंटों लाइन में खड़े रहकर पानी भरने  का इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल एसमस्या को लेकर पिछले विधानसभा चुनाव में गांव के लोगों ने मतदान - बहिष्कार का निर्णय लिया था। उस समय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की की ओर से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद कुछ लोगों ने मतदान किया। लेकिन कर करीब पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद या गांव में पेयजल संकट का स्थायी कर समाधान नहीं हो सका।</p>
<p><strong>दस वर्षों से बनी हुई है समस्या </strong><br />ग्रामीण मायाराम गोचर ने बताया कि गांव के अधिकांश हैंडपंपों का पानी फ्लोराइडयुक्त है, जो न तो पीने योग्य है और न ही भोजन बनाने के लिए मान उपयोगी। इसके चलते ग्रामीणों को बाबा शाह वली की दरगाह के समीप स्थित हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह समस्या पिछले करीब दस वर्षों से बनी हुई है।</p>
<p><strong>समय रहते समाधान जरूरी</strong><br />ग्रामीण रामप्रताप गोस्वामी ने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। एक ही हैंडपंप होने से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा दरगाह पर आनें वाले यात्रियों को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर</strong><br />ग्रामीण महिला रेनू गोचर ने बताया कि घर-परिवार के दैनिक कार्यों में पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में महिलाओं को रोजाना गांव से बाहर जाकर पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका काफी समय और श्रम खर्च होता है। उन्होंने कहा कि दिनभर की चिंता यही रहती है कि पीने के पानी की व्यवस्था कैसे होगी।</p>
<p><strong>कुआं भी नहीं रहा उपयोगी</strong><br />ग्रामीण परमानंद गोचर ने बताया कि पहले गांव के कुएं और हैंडपंपों का पानी पीने योग्य था, लेकिन समय के साथ पानी की गुणवत्ता खराब होती गई। फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से पानी पीने लायक नहीं रहा। गांव का पुराना कुआं भी गंदगी के कारण पेयजल के उपयोग में नहीं लिया जा सकता।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र समाधान के प्रयास किए जाएंगे।<br /><strong>- दीपक महावर, उपखंड अधिकारी, दीगोद </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:36:55 +0530</pubDate>
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                <title>हैण्डपम्प वेटिलेंटर पर, पेयजल संकट गहराया</title>
                                    <description><![CDATA[रास्ते से गुजरने वाले राहगीर खेतों पर आने जाने वाले किसान एवं स्कूल में पढ़ने जाने वाले छात्र छात्राओं को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/handpump-on-ventilator--drinking-water-crisis-deepens/article-108607"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(6)14.png" alt=""></a><br /><p>पनवाड़। खानपुर उपखंड की आकोदिया ग्राम पंचायत के गणेशपुरा गांव में ग्राम पंचायत की अनदेखी के कारण लगभग पांच वर्षों से हेडपंप मरम्मत के अभाव में खराब होकर जर्जर स्थिति में पड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों को स्वच्छ पेयजल के लिए तपती गर्मी चिलचिलाती धूप में पीने के पानी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए मोहल्लेवासियों ने कई बार ग्राम पंचायत को अवगत भी कराया लेकिन हेडपंप की मरम्मत नहीं हो पाई । गणेशपुरा गांव निवासी चौथमल प्रजापति,राकेश कुमार सहित अन्य लोगों का कहना है कि गणेशपुरा गांव से आकोदिया तक जाने वाली संपर्क सड़क पर पिछले कई वर्षों से सरकारी हेडपंप खराब पड़ा हुआ है। रास्ते से गुजरने वाले राहगीर खेतों पर आने जाने वाले किसान एवं स्कूल में पढ़ने जाने वाले छात्र छात्राओं को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। यही नहीं मोहल्ले के लोगों को भी पीने के पानी के लिए इधर उधर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती हैं। इसके लिए कई बार ग्राम पंचायत को भी अवगत कराया। मगर ग्राम पंचायत की उदासीनता के कारण हेडपंप मरम्मत के अभाव में दुर्दशा का शिकार हो रहा है। </p>
<p><strong>दुर्दशा का शिकार हैण्डपंप </strong><br />ग्रामीणों की सूचना पर नवज्योति टीम ने मौके पर पहुंच कर देखा तो हेडपंप दुर्दशा का शिकार हो रहा है। हेडपंप के आस पास झाड़ियां उगी हुई है, कचरे मिट्टी में दबा हुआ है। जो हेडपंप सड़क से 4 फीट की ऊंचाई पर था आज अनदेखी के कारण मात्र एक फीट ही दिखाई दे रहा है। जब हेडपंप की जानकारी मोहल्लेवासियों ली तो बताया कि लगभग पांच वर्षों से हेडपंप खराब पड़ा हुआ है इसके लिए ग्राम पंचायत को अवगत कराया था। जिसपर ग्राम पंचायत द्वारा मरम्मत करा दी गई थी, लेकिन वापिस खराब होने पर मेकेनिक द्वारा ठीक नहीं करके हेडपंप का हत्था खोल कर ले गए,इसकी शिकायत ग्राम पंचायत को दी गई थी। लेकिन समाधान कुछ नहीं हुआ और हैण्डपंप तब से कारण स्थिति में पड़ा हुआ है।</p>
<p> पेयजल समस्या को लेकर ग्रामीणों को दूर दराज से पानी लाना मजबूरी बना हुआ है। <br /><strong>- हरीश मेहता, ग्रामीण </strong></p>
<p>गर्मी ने दस्तक दे दी है लेकिन हैण्डपम्प की दुर्दशा देखकर ग्रामीणों में रोष है, ग्रामीणों ने हैण्डपम्प ठीक करवाने की मांग की है। <br /><strong>- नरेश मेहता, ग्रामीण </strong></p>
<p>पानी की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत करवाया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- राजेंद्र मेहता, ग्रामीण </strong></p>
<p>हैण्डपंप खराब होने की जानकारी नहीं थी,जल्द ही हैण्डपंप की मरम्मत करा दी जाएगी।  <br /><strong>- सुरेश कुमार वर्मा , सेकेट्री आकोदिया ग्राम पंचायत </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 17:28:07 +0530</pubDate>
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                <title>दो साल में 86 हजार हैंडपंप सूखे</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में वर्ष 2023 में अति दोहित ब्लॉक का प्रतिशत 71.52 प्रतिशत तक पहुंच गया। 302 ब्लॉक में से केवल 38 ब्लॉक में ही पीने योग्य पानी बचा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/86-thousand-hand-pumps-dried-up-in-two-years/article-77283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(1)24.png" alt=""></a><br /><p><strong>38 ब्लॉक में पीने योग्य पानी</strong><br />जयपुर। प्रदेश में लगातार गिरते जा रहे भूजल स्तर के कारण पेयजल के परंपरागत स्रोत भी सूखते जा रहे है। पिछले दो साल में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों के साथ ही हैण्डपंप भी ड्राई हो गए है। इससे जलदाय विभाग के लिए पेयजल आपूर्ति का नया संकट बनता जा रहा है। मौटे तौर पर देखा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के लिए हैण्डपंप मुख्य स्रोत था, जो सिफारिशों के आधार पर स्वीकृत होता था, लेकिन अब इसकी स्थिति भयावह होती जा रही है अर्थात दो साल में 86,847 हैण्डपंप ड्राई हो चुके हैं। यही हाल शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों का देखने को मिल रहा है अर्थात वर्ष 2022-23 में शहरी क्षेत्रों में नलकूपों की संख्या 789 थी, जो 2023-24 में घटकर 499 रह गई।</p>
<p><strong>राज्य में भूजल की स्थिति</strong><br />राजस्थान का भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। राज्य में वर्ष 2023 में अति दोहित ब्लॉक का प्रतिशत 71.52 प्रतिशत तक पहुंच गया। 302 ब्लॉक में से केवल 38 ब्लॉक में ही पीने योग्य पानी बचा है। 216 ब्लॉकों का तो अत्यधिक दोहन होने से पानी पीने के योग्य तक नहीं हैं। वर्ष 2022 में 219 ब्लॉक अति दोहित थे, जो वर्ष 2023 में उनकी संख्या 216 रह गई अर्थात तीन ब्लॉक का जल स्तर सुधरा है।</p>
<p><strong>क्या है नलकूपों की स्थिति</strong><br />शहरी क्षेत्रों में 2022-23 में नलकूपोंं की संख्या 789 थी, जो 203-24 में घटकर 499 रह गई। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों की संख्या वर्ष 2022-23 में 2460 थी, जो 2023-24 में घटकर 1832 रह गई। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में 2022-23 में हैण्डपंपों की संख्या 556 थी, जो घटकर 2023-24 में 382 रह गई। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में 2022-23 में हैण्डपंपों की संख्या 4766 थी, जो 2023-24 में बढ़कर 5686 हो गई।</p>
<p><strong>85 शहर सतही जल पर निर्भर</strong><br />राज्य के 85 शहर व कस्बें सतही जल स्रोत एवं 89 शहर भूगर्भीय जलस्रोत पर आधारित है। शेष 77 सतही एवं भूगर्भीय दोनों जलस्रोतों पर निर्भर हैं। सात प्रमुख शहर जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, भरतपुर, कोटा एवं उदयपुर में सतही जलस्रोत से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। राज्य का क्षेत्रफल देश का 10.4 प्रतिशत होने के बावजूद सतही जल की उपलब्धता मात्र 1.16 प्रतिशत ही है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 May 2024 10:12:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title> हैण्डपम्प -ट्यूबवेल बने शोपिस, दूरदराज से जुगाड़ कर ला रहे पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ राजपुर में आदिवासी अंचल क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में गर्मी की दस्तक शुरू होते ही पानी की समस्या लोगों को सिरदर्द बनती जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/handpump-tubewell-became-a-showpiece--fetching-water-from-far-away/article-8570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/tubewell-.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर। राजपुर में आदिवासी अंचल क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में गर्मी की दस्तक शुरू होते ही पानी की समस्या लोगों को सिरदर्द बनती जा रही है। पानी की समस्या के चलते लोगों को दूरदराज खेतों में लगी ट्यूबबैलों से पानी लाकर अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने में लोग लगे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हेडपंप सरकारी ट्यूबवेल है, प्रशासनिक कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नकारा और शोपिस बनी हुई हैं इनकी जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा ठीक तरीके से सार संभाल नहीं की जा रही है। गर्मी की शुरूआत होते ही पानी के लिए लोग इधर-उधर भटकने लगे हैं। गर्मी और दोपहरी में लोग पानी के लिए 2 से 3 किलोमीटर का सफर तय कर पानी का जुगाड़ कर रहे हैं। कई बार तो पानी भरने को लेकर हेडपंप ट्यूबवेल पर लड़ाई झगड़े की नौबत तक पैदा हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के हेड पंप ट्यूबवेल खराब पड़ी हुई है, इस संबंध में कई बार संबंधित कर्मचारियों को अवगत करा दिया है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते लोगों को पानी संकट से जूझना पड़ रहा है। लोगों को पानी की समस्या से नहीं जूझना पड़े इसलिए खराब पड़े हुए हेडपंप और ट्यूब बैलों को समय रहते प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी ठीक करवाएं ताकि लोगों को गर्मी के दिनों में पानी की समस्या से राहत मिल सके। <br /><br /><strong>पानी टंकी देखरेख के अभाव में पड़ी नकारा</strong><br />उपखंड क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाकों में पानी की टंकियां देखरेख के अभाव में नकारा बनकर रह गई हैं। इनमें जिम्मेदार लोगों द्वारा पानी नहीं भरा जाता है तथा साफ-सफाई नहीं होने के कारण पानी की टंकियां बदहाल पड़ी हुई है। लोग गर्मी के मौसम में दूरदराज क्षेत्र से पानी लाकर अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने में लगे हुए हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />उचावद गांव में पानी की समस्या बनी हुई हैं, खराब पड़ी ट्यूबबैलों को दुरस्त करवाकर पानी व्यवस्था करनी चाहिए।<br /><strong>-रमेश चन्द</strong><br /><br /> मामोनी गांव की सहरिया बस्ती में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है, समस्या के बारे में विभाग को अवगत कराने के बावजूद भी पानी व्यवस्था नहीं कराई गई है, लोग पानी की समस्या से त्रस्त हो रहे हैं।<br /><strong>-रामस्वरूप सहरिया</strong><br /><br /> उपखंड क्षेत्र में जिन स्थानों पर पानी की समस्या है, समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा। खराब पड़ी ट्यूबबैलों को दुरुस्त करा दिया जाएगा। सभी ग्राम पंचायत ग्राम सेवकों को हर पंचायत में पानी की समस्या को लेकर दिशा निर्देश दिए जाएंगे, ताकि किसी को कोई पानी की समस्या नहीं हो।<br /><strong>-महेश चंद शर्मा, विकास अधिकारी पंचायत समिति शाहाबाद</strong><br /><br /> कलोनिया गांव की सहरिया बस्ती में पानी की व्यवस्था के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है, पानी टंकी नकारा और सूखी पड़ी हुई है। लोग इधर उधर से गर्मी के मौसम में पानी लेने के लिए भागदौड कर रहे हैं। पंचायत प्रशासन को पानी टंकियों को दुरुस्त करवा कर ट्यूबबैलों से पानी भरवाना चाहिए।<br /><strong>-करण प्रजापत कलोनिया</strong><br /><br />किराड़ पहाड़ी की सहरिया बस्ती में पानी की टंकी बदहाल हैं। गर्मी के मौसम में पानी की समस्या परवान चढ़ती जा रही है। बिजली की समस्या भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है, ऐसे में पानी की समस्या बिगड़ी हुई है। पानी टंकियों को दुरुस्त कर इनमें ट्यूबवेलों की लाइन जोड़नी चाहिए, ताकि पानी मिल सके।<br /><strong>-इन्द्र लाल सहरिया, पूर्व वार्डपंच</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 15:52:53 +0530</pubDate>
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