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                <title>Politics - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पेपर लीक मामला: केजरीवाल ने केंद्र सरकार को घेरा, जेन-जी से किया सड़कों पर उतरने का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[अरविंद केजरीवाल ने नीट पेपर लीक पर युवाओं (Gen-Z) से संवाद कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में बार-बार होते पेपर लीक पर सवाल उठाए और सीबीआई जांच को महज दिखावा बताया। केजरीवाल ने कहा कि जब पड़ोसी देशों के युवा सरकार बदल सकते हैं, तो भारत के युवा दोषियों को जेल क्यों नहीं भेज सकते?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/paper-leak-issue-kejriwal-cornered-the-central-government-and-called/article-153699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kejriwal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि कि पेपर लीक जैसे घिनौने खेल को बंद करने के लिए देश के जेन-जी को सड़कों पर उतर कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना पड़ेगा। केजरीवाल ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर बुधवार को देश के युवाओं (जेन-जी) से सीधा वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने जेन-जी का आह्वान करते हुए कहा कि बहुत हुआ पेपर लीक, अब इस घिनौने खेल को बंद करने के लिए देश के जेन-जी को सड़कों पर उतर कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना पड़ेगा। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए युवाओं से कहा कि जब वहां जेन-जी अपनी सरकार बदल सकते हैं तो हमारे देश का जेन-जी पेपर लीक कराने में शामिल मंत्रियों-नेताओं को जेल क्यों नहीं भिजवा सकता? हर बार पेपर लीक की जांच सीबीआई को सौंप दी जाती है, लेकिन आजतक किसी को सजा नहीं मिली। इस बार भी कुछ नहीं होने वाला है।</p>
<p>उन्होंने सवाल किया कि ज्यादातर पेपर लीक भाजपा शासित राज्यों में क्यों होते हैं, कुछ लोग सिस्टम फेल होने की बात करते हैं, लेकिन वे लोग ऐसा कहकर अनजाने में पेपर लीक में शामिल टॉप पर बैठे व्यक्ति को बचा रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह देश युवाओं का है। इन नेताओं को इस देश में कोई दिलचस्पी नहीं। इनके बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि देश के एक बड़े नेता ने कभी कहा था कि जरूरत पड़ी तो झोला उठाकर चला जाऊंगा, लेकिन हम कहां जाएंगे? हमारा परिवार तो इसी देश में रहता है। इसलिए हमें और युवाओं को मिलकर ही इस देश को बचाना होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, हर बार की तरह इस बार भी सीबीआई ने 10-15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हर बार की तरह इस बार भी सभी आरोपी तीन से चार महीने में जमानत पर बाहर आ जाएंगे और हर बार की तरह इस बार भी ये सारे जेल से छूटे हुए बदमाश फिर से अगले साल पेपर लीक करने की तैयारी शुरू कर देंगे। केजरीवाल ने कुछ उदाहरण देकर युवाओं को समझाते हुए कहा कि 2014 में जब से देश में केंद्र सरकार आई है, तब से लेकर अब तक 93 पेपर लीक हुए हैं। इसमें अधिकतर डबल और ट्रिपल इंजन की सरकारों में पेपर लीक हुए हैं। </p>
<p>इन 93 पेपर में देश के लगभग 6 करोड़ युवाओं का भविष्य बंद था। पेपर लीक होने से 6 करोड़ युवाओं का भविष्य बर्बाद हो गया। सबसे ज्यादा पेपर लीक राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में हुए हैं। इन चारों राज्यों में भाजपा शासित सरकार है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि इन चारों राज्यों और केंद्र में भाजपा की सरकार है और पेपर लीक हो गया। अभी जो नीट का पेपर लीक हुआ है, उसका केंद्र भी राजस्थान है। पेपर लीक में जिन दो-चार लोगों पर संदेह की सुई गई है, वो भी भाजपा के नेता हैं।</p>
<p>आप नेता ने कहा कि अगर नेपाल और बांग्लादेश का जेन-जी सड़कों पर उतर कर अपनी सरकारों को बदल सकता है तो हमारे देश का जेन-जी पेपर लीक कराने वाले मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकता? मुझे अपने देश के जेन-जी पर पूरा भरोसा है कि वह भी मंत्रियों को जेल भेज सकता है। यह देश युवाओं का है। इस देश के नेताओं को इस देश में कोई रूची नहीं है। इस देश के नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:23:10 +0530</pubDate>
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                <title>NEET पेपर लीक मामला : BJP युवा मोर्चा से जुड़ा नेता और भाई CBI गिरफ्त में, 15 लाख रुपये में बेचा था पेपर</title>
                                    <description><![CDATA[CBI ने जमवा रामगढ़ से दिनेश और मांगीलाल बिवाल को गिरफ्तार किया है। इन पर ₹15 लाख में नीट गेस पेपर खरीदने और सीकर के छात्रों को बेचने का आरोप है। एक ही परिवार के 5 सदस्यों का चयन भी संदेह के घेरे में है। इस गिरफ्तारी ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sikar/neet-paper-leak-case-leader-and-brother-related-to-bjp/article-153722"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jaipur2.png" alt=""></a><br /><p>राजस्थान। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने राजस्थान के जयपुर जिले के जमवा रामगढ़ से दो भाइयों दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों पर परीक्षा के कथित गेस पेपर खरीदने और उसे छात्रों तक पहुंचाने का आरोप है। राजस्थान SOG के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों को हरियाणा के एक व्यक्ति से NEET परीक्षा से जुड़े 120 सवालों का कथित गेस पेपर मिला था। बताया जा रहा है कि इसे करीब 15 लाख रुपये में खरीदकर सीकर के कई छात्रों को बेचा गया। SOG ने पहले दोनों भाइयों से पूछताछ की थी, जिसके बाद CBI ने कार्रवाई करते हुए उन्हें दिल्ली ले जाकर हिरासत में लिया।</p>
<p>जांच के दौरान एजेंसियों को यह भी संदेह हुआ कि परिवार के पांच सदस्यों ने एक ही साल में NEET परीक्षा कैसे पास की। सभी फिलहाल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार दिनेश बिवाल भाजपा युवा मोर्चा से जुड़ा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। वहीं स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि दिनेश पहले संगठन से जुड़ा था, लेकिन लंबे समय से सक्रिय राजनीति में नहीं था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सीकर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:25:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>क्या अब अमेरिका का हिस्सा बनेगा वेनेजुएला? ट्रंप ने 51वां राज्य बताते हुए मानचित्र किया शेयर, दुनियाभर में बढ़ी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मैप साझा कर वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बताया है। हालांकि इसे एक मजाक माना जा रहा है, लेकिन वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रंप पहले भी वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण की इच्छा जता चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/will-venezuela-become-a-part-of-america-now-trump-shared/article-153639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक मानचित्र साझा किया है जिसमें वेनेजुएला को अमेरिका के 51वें राज्य के रूप में दिखाया गया है। ट्रंप ने मजाक में वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की ओर संकेत तब दिया जब उन्होंने मार्च में विश्व बेसबॉल क्लासिक सेमीफाइनल में इटली को हराने पर वेनेजुएला की राष्ट्रीय बेसबॉल टीम को बधाई दी थी। उन्होंने इस जीत का श्रेय वेनेजुएला के अमेरिका के साथ सहयोग को दिया।</p>
<p>वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सोमवार को इस दक्षिण अमेरिकी देश के अमेरिका का 51वां राज्य बनने की कभी भी संभावना को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के बाद अमेरिका और वेनेजुएला ने राजनयिक संबंधों को बहाल करना शुरू कर दिया था। ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण करने के अपने इरादे की भी घोषणा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 14:35:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पुडुचेरी में रंगास्वामी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ : 2 नए मंत्रियों ने भी ली पद और गोपनीयता की शपथ, कई दिग्गज रहे मौजूद</title>
                                    <description><![CDATA[एन. रंगास्वामी ने पांचवीं बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी ने AINRC-BJP गठबंधन की मजबूती को दर्शाया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में विकास के नए युग की उम्मीद जागी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ainrc-president-and-founder-n-rangaswamy-took-oath-as-the/article-153644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/puducherry1.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी । पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का नेतृत्व कर रहे एन आर कांग्रेस के संस्थापक-अध्यक्ष एन रंगासामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। लगातार दूसरी बार गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे रंगासामी के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। केन्द्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल एन कैलाशनाथन ने यहाँ लोक भवन में आयोजित साधारण शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री सहित नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>
<p>रंगासामी के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक दल के नेता और पूर्व गृह मंत्री ए नमशिवायम और एन आर कांग्रेस के विधायक मल्लाडी कृष्ण राव ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली। यह पांचवीं बार था जब रंगासामी ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पुडुचेरी पर्यवेक्षक मनसुख मंडाविया, भाजपा चुनाव प्रभारी निर्मल कुमार सुराना, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) और लक्षिया जननायक काची सहित गठबंधन सहयोगियों के नेता और क्षेत्रीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p>आज कार्यभार संभालने वाली नई कैबिनेट का आने वाले दिनों में और अधिक मंत्रियों को शामिल करके विस्तार किया जाएगा। कुल 30 सीटों में से एआईएनआरसी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 18 सीटें जीतीं, जिसमें अकेले एन आर कांग्रेस ने 12 सीटें, भाजपा ने चार और अन्नाद्रमुक तथा लक्षिया जननायक काची ने एक-एक सीट जीती, जबकि विपक्षी कांग्रेस- द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) गठबंधन ने छह सीटें जीतीं, जिनमें द्रमुक ने पांच और कांग्रेस ने एक सीट हासिल की। शेष छह सीटों पर टीवीके और उसके सहयोगियों तथा निर्दलीयों ने जीत दर्ज की।</p>
<p>नौ अप्रैल के चुनावों में रंगासामी ने दो सीटों से जीत हासिल की—अपने गढ़ थट्टनचावडी से, जहाँ उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और अपने प्रतिद्वंद्वी वी वैथिलिंगम को हराया, जो लोकसभा सांसद भी हैं, तथा मंगलम निर्वाचन क्षेत्र से भी उन्होंने जीत दर्ज की। अब मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद वह जल्द ही इनमें से एक सीट से इस्तीफा दे देंगे। रंगासामी अतीत में अपनी मूल पार्टी कांग्रेस में रहने के दौरान भी मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2008 में जब वह कांग्रेस शासन का नेतृत्व कर रहे थे, तब उनके और श्री वैथिलिंगम के बीच मतभेद उभर आए थे, जिसके कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।</p>
<p>दोनों के बीच प्रतिद्वंद्विता कांग्रेस में उनके साथ रहने के दिनों की है जब वैथिलिंगम ने रंगासामी के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था और सितंबर 2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में उनके उत्तराधिकारी बने थे। हालांकि, रंगासामी ने अपनी खुद की पार्टी एन आर कांग्रेस बनाई और 2011 में मुख्यमंत्री बने, इसके बाद 2016 में कांग्रेस से सत्ता हार गए, लेकिन 2021 में फिर से मुख्यमंत्री के रूप में वापसी की और लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए सत्ता बरकरार रखी और आज उन्होंने शपथ ली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:23:09 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु में विजय सरकार ने हासिल किया विश्वास मत: फ्लोर टेस्ट में टीवीके को मिले 144 वोट, विरोध में केवल 22 मत</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति की पार्टी (TVK) ने विधानसभा में भारी बहुमत से विश्वास मत हासिल कर लिया है। फ्लोर टेस्ट में सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल 22 रहे। कांग्रेस और वामदलों के समर्थन से विजय ने अपनी राजनीतिक ताकत साबित कर सूबे में मजबूत पकड़ बना ली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/vijay-government-wins-trust-vote-in-tamil-nadu-tvk-government/article-153642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)51.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने बुधवार को 234 सदस्यीय विधानसभा में सहयोगी दलों और अखिल भारतीय अन्न द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी विधायकों के समर्थन के साथ आसानी से विश्वास मत जीतकर बहुमत साबित कर दिया। विजय को यह सफलता तब मिली जब 59 सदस्यीय मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने सदन से बर्हिगमन किया, जबकि अन्नाद्रमुक की सहयोगी चार सदस्यीय पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।</p>
<p>सीएम विजय द्वारा अपनी सरकार में विश्वास व्यक्त करने का प्रस्ताव पेश करने और विभिन्न दलों के नेताओं के बोलने के बाद प्रस्ताव पर मतदान कराया गया। हालांकि दो विकल्प थे लेकिन अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने ध्वनि मत के बजाय सरकार का समर्थन करने वालों की गिनती करने का विकल्प चुना। सदन के 232 सदस्यों में से 171 सदस्य मौजूद रहे। विजय ने एक सीट से इस्तीफा दिया था और मद्रास उच्च न्यायालय ने एक टीवीके विधायक को विश्वास मत में भाग लेने से रोक दिया था। सदन में विजय ने अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों सहित 144 सदस्यों के समर्थन के साथ आसानी से शक्ति परीक्षण जीत लिया, जबकि इसके विरोध में 22 सदस्यों ने मतदान किया और पांच तटस्थ रहे।<br />प्रस्ताव का समर्थन करने वाले 144 विधायकों में टीवीके के 104 विधायक (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अदालत द्वारा रोके गए एक विधायक को छोड़कर), पांच समर्थक दलों के 13 सदस्य, अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) का एक और शेष अन्नाद्रमुक के बागी विधायक शामिल थे।</p>
<p>सीएम विजय के नेतृत्व वाली चार दिन पुरानी सरकार के लिए यह पहली और शानदार जीत है, जिनकी पार्टी 108 विधायकों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी लेकिन बहुमत से पीछे थी। राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर द्वारा सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद उन्होंने निर्देशानुसार आवश्यक संख्या जुटाकर अपनी शक्ति साबित की। विजय द्वारा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), विदुथलाई चिरूथैगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) सहित समर्थक दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री के पक्ष में बोलते हुए अपना समर्थन दिया ताकि भाजपा को दूर रखा जा सके।</p>
<p>अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी एएमएमके के निष्कासित एकमात्र विधायक कामराज ने कुछ बाधाओं के बीच विजय को अपना समर्थन देने का संकल्प लिया। इसके बाद एक अन्य सहयोगी पीएमके की नेता सौम्या अंबुमणि ने मुख्यमंत्री द्वारा दो सप्ताह के भीतर राज्य के स्वामित्व वाली 717 शराब दुकानों को बंद करने के आदेश सहित कुछ उपायों की सराहना की और घोषणा की कि पीएमके के चार विधायक मतदान से दूर रहे हैं।</p>
<p>विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम करने का आग्रह किया और कहा कि द्रमुक के 59 सदस्य विधानसभा से बाहर इसलिए बाहार जा रहे हैं कि 'मुझे पता है कि यह सरकार जीत जाएगी'। उन्होंने सरकार से जनता के विश्वास को पूरा करने का आह्वान किया और अपने पार्टी सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गए। विजय ने अपना संगठन बनाने के दो साल के भीतर चुनावी राजनीति में पहली बार 108 सीटें जीतकर शानदार प्रवेश किया, जिससे द्रविड़ क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई और द्रमुक तथा अन्नाद्रमुक के छह दशक पुराने वर्चस्व का अंत हुआ। अभिनेता से नेता बने विजय ने स्वयं दो सीटों पर जीत हासिल की थी।</p>
<p>वर्तमान 107 विधायकों में से, विजय के एक सीट छोड़ने के बाद, मद्रास उच्च न्यायालय ने उनके एक विधायक श्रीनिवास सेतुपति को मतदान में भाग लेने से रोक दिया है। उनके निर्वाचन को पूर्व द्रमुक मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन ने चुनौती दी थी और डाक मतपत्रों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने हालांकि द्रमुक के सहयोगियों से संपर्क साधा था और पांच दल अपना समर्थन देने के लिए आगे आ गये थे। कांग्रेस ने द्रमुक से अलग होकर टीवीके के साथ गठबंधन किया और अपने पांच विधायकों का समर्थन दिया, जबकि भाकपा, माकपा, वीसीके और आईयूएमएल ने दो-दो विधायकों के साथ बिना शर्त बाहर से समर्थन दिया, जिससे संख्या 119 तक पहुंच गई।</p>
<p>इस संदर्भ में विजय की जीत की संभावनाओं को तब बड़ा बढ़ावा मिला जब अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन करने के अपने निर्णय की घोषणा की। अन्नाद्रमुक के कुल 47 विधायकों में से 22 सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया जबकि 25 बागी विधायकों ने इसका समर्थन किया, हालांकि दूसरे गुट का कहना था कि सभी विधायकों को पार्टी सचेतक के आदेश का पालन करना चाहिए।<br />तमिलनाडु के राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर ने इससे पहले उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हुए तीन दिनों के भीतर अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था। रविवार को उनके शपथ लेने के साथ ही 1967 के बाद पहली बार राज्य में गैर-द्रमुक और गैर-अन्नाद्रमुक शासन की शुरुआत हुई है।</p>
<p>कार्यभार संभालने के एक दिन बाद सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने सदन के सदस्यों के रूप में शपथ ली और अगले दिन अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए, जिसके बाद आज सदन में बहुमत साबित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव लाया गया। विश्वास मत से पहले सत्तारूढ़ टीवीके ने अपने विुगामबक्कम के विधायक आर. सबरीनाथन को सरकार का सचेतक चुना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:11:28 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल मुख्य सचिव नियुक्ति विवाद: बाबूलाल मरांडी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- नियुक्ति नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप</title>
                                    <description><![CDATA[बाबूलाल मरांडी ने बंगाल के मुख्य सचिव की नियुक्ति पर विपक्षी हंगामे को सियासी पाखंड करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि झारखंड में भी चुनाव के बाद अधिकारियों को अहम पद मिले, पर भाजपा ने कभी जनादेश पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने विपक्षी दलों को हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने वाली मानसिकता छोड़ने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-chief-secretary-appointment-controversy-babulal-marandi-made-a/article-153559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/marandi.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रहे अधिकारी को मुख्य सचिव बनाए जाने को लेकर उठे विवाद पर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। मरांडी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सीईओ रहे अधिकारी की मुख्य सचिव पद पर नियुक्ति को लेकर विपक्ष जिस प्रकार अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है, वह पूरी तरह राजनीतिक मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी की नियुक्ति चुनी हुई सरकार के विवेक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है। यदि नियुक्ति नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप हुई है, तो केवल राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं कहा जा सकता।</p>
<p>बाबूलाल मरांडी ने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2019 में जब कांग्रेस, झामुमो और राजद गठबंधन की सरकार बनी थी, उस समय विनय चौबे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में चुनाव प्रक्रिया का संचालन कर रहे थे। बाद में मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें प्रधान सचिव नियुक्त किया गया, लेकिन तब भाजपा ने कभी यह आरोप नहीं लगाया कि किसी अधिकारी की भूमिका के कारण जनादेश प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनता के जनादेश का सम्मान किया है।</p>
<p>उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना, भ्रष्टाचार मामलों में जांच एजेंसियों पर भेदभाव का आरोप लगाना और हर प्रशासनिक निर्णय को राजनीतिक रंग देना कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, झामुमो, आम आदमी पार्टी और उनके सहयोगी दलों की पुरानी प्रवृत्ति रही है। मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और उसे स्वीकार करना ही स्वस्थ राजनीतिक परंपरा की पहचान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 18:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फारूक अब्दुल्ला का बड़ा बयान : जम्मू-कश्मीर सरकार को लेकर कह दी बड़ी बात, संघर्ष बढ़ने पर गंभीर आर्थिक परिणामों की दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि यदि केंद्र सरकार राजस्व घाटे की भरपाई कर दे, तो जम्मू-कश्मीर में शराब पर प्रतिबंध तत्काल लग सकता है। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे के राजनीतिकरण का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने ईरान-अमेरिका तनाव से उपजे वैश्विक ईंधन संकट और ऑनलाइन शिक्षा की चुनौतियों पर भी गहरी चिंता जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-statement-of-farooq-abdullah-first-revenue-stuffing-then-liquor/article-153532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ff.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार राजस्व के नुकसान की भरपाई कर दे, तो राज्य सरकार दो मिनट में शराब पर प्रतिबंध लगा सकती है। शराब की दुकानों को लेकर चल रहे विवाद पर अब्दुल्ला ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से शराब का सेवन नहीं करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि जो लोग पीते हैं, वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न होने की स्थिति में इसे जम्मू-कश्मीर के बाहर से मंगवा लेंगे। </p>
<p>उन्होंने कहा, “मैं शराब नहीं पीता। जो पीते हैं, वे पिएंगे ही। अगर उन्हें यहां से नहीं मिलेगी, तो वे बाहर से लाएंगे। और जो लोग आवाज उठा रहे हैं, उनसे पूछिए कि शराब पीने वाले लोग कौन हैं।” साल 1977 की एक घटना को याद करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उनके पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला से राज्य में शराब की बिक्री बंद करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने उनसे कहा था कि अगर केंद्र हमें वह राजस्व दे दे, जो हम इससे कमाते हैं, तो हम इसे बंद कर देंगे। उसके बाद कुछ नहीं हुआ। ”</p>
<p>नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने तर्क दिया कि इस मुद्दे का विरोधियों द्वारा राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब पहले शराब की दुकानें खोली गयीं थी, तब विरोध क्यों नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “हमने शराब की दुकानें नहीं खोलीं। जिन्होंने खोलीं, तब किसी ने आवाज क्यों नहीं उठाई? हर गांव में दुकानें खुल रही थीं।” विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि वे केवल सरकार पर हमला करने के लिए इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे हर बात पर हमारी आलोचना करने के लिए तैयार रहते हैं...उन्हें लगता है कि हम उनसे डरते हैं, लेकिन हम उन्हें इस तरह हराएंगे कि वे याद रखेंगे।”</p>
<p>हाल ही में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शराब के सेवन पर दिये गये बयानों के बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक विवाद छिड़ गया था। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने उन पर मुस्लिम बहुल क्षेत्र की संवेदनशीलता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। उमर ने रविवार को कहा था कि किसी को शराब पीने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है और लोग अपनी मर्जी से शराब की दुकानों पर जाते हैं। आलोचना के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयानों को राजनीतिक विरोधियों द्वारा ‘मरोड़ा’ जा रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उपलब्ध शराब केवल उन अन्य धर्मों के मानने वालों के लिए है, जिनके यहां इसके सेवन की अनुमति है।</p>
<p>अब्दुल्ला ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच गहराते ईंधन और गैस संकट पर भी चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मितव्ययिता की अपील पर उन्होंने कहा कि बढ़ते संकट के कारण देश कठिन स्थिति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “ हम ईंधन और गैस संकट का सामना कर रहे हैं और हम तबाही की ओर बढ़ रहे हैं।” अबदुल्ला ने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ऑनलाइन शिक्षा एक व्यावहारिक विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, “यह दुखद है कि गरीब लोगों की ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच नहीं है। शिक्षा जरूरी है, लेकिन ऑनलाइन शिक्षा हर किसी के लिए संभव नहीं है।”</p>
<p>उन्होंने वैकल्पिक समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि शिक्षा, विशेष रूप से वंचित छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। संघर्ष बढ़ने पर गंभीर आर्थिक परिणामों की चेतावनी देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि इसके नतीजे विनाशकारी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है। अगर यह संकट खत्म नहीं हुआ, अगर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त नहीं हुआ, तो केवल ईश्वर ही जानता है कि हमारा क्या होगा।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:18:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महोबा में सियासी संग्राम: सपा सांसद लोधी पर मुकदमा दर्ज, पीएम मोदी पर की थी अमर्यादित टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[महोबा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने पर सपा सांसद अजेंद्र लोधी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का आरोप है। सांसद द्वारा पीएम को "देश विरोधी" कहने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंककर कड़ा विरोध जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-battle-in-mahoba-case-filed-against-sp-mp-lodhi/article-153516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sp-mp.png" alt=""></a><br /><p>महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी करने के आरोप में समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद अजेंद्र लोधी पर मुकदमा दर्ज किया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह ने मंगलवार को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला मीडिया प्रभारी सत्येंद्र गुप्ता की तहरीर पर सदर कोतवाली में सांसद अजेंद्र लोधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132, 189(2), 352 तथा 196(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि सांसद ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया तथा बिना अनुमति प्रदर्शन कर सड़क पर अवरोध उत्पन्न करते हुए यातायात और कानून-व्यवस्था को प्रभावित किया।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि सोमवार को समाजवादी पार्टी द्वारा बिजली के स्मार्ट मीटर समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर महोबा में प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें क्षेत्रीय सांसद अजेंद्र सिंह लोधी भी शामिल हुए थे। प्रदर्शन के बाद उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद मीडिया से बातचीत में सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। </p>
<p>सांसद का बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर बयान की व्यापक आलोचना हुई। इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा के नेतृत्व में महोबा नगर में प्रदर्शन किया और सांसद का पुतला फूंका। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सांसद की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अक्षम्य बताया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:02:10 +0530</pubDate>
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                <title>अभिषेक बनर्जी का केंद्र पर तीखा प्रहार: राज्य में हिंसा को राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जा रहा इस्तेमाल, खेजुरी आगजनी में शामिल होने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी ने खेजुरी में हुई आगजनी के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में विभाजनकारी राजनीति और हिंसा को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। बनर्जी ने केंद्रीय बलों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे कानून-व्यवस्था की विफलता और "डबल इंजन आपदा" करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abhishek-banerjees-sharp-attack-on-the-center-using-violence-as/article-153416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/abhishek-banerjeee.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार के कार्यकर्ताओं पर पश्चिम बंगाल के खेजुरी इलाके में कथित आगजनी की घटना में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि राज्य में हिंसा को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि खेजुरी में जोंका ग्राम पंचायत में कई दुकानों में आग लगा दी गई जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका को व्यापक नुकसान हुआ है। तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा कि बंगाल पहले से ही डबल इंजन आपदा देख रहा है। उन्होंने दावा किया कि "भाजपा के उपद्रवियों ने पुलिस के सामने ही रविवार रात लगभग 10 दुकानों को कथित रूप से आग लगा दी।" उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों की आजीविका नष्ट हो गयी है और नफरत एवं धमकी का उपयोग अब राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जा रहा है।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि विभाजनकारी राजनीति एवं हिंसा को खुलेआम बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, ''यह केंद्र सरकार द्वारा प्रचारित राजनीति का असली चेहरा है जिसमें विभाजन, भय एवं लक्षित हिंसा को पूरी छूट दी गई है।'' केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तृणमूल सांसद ने पूछा, "केंद्रीय बल अब कहां हैं? क्या उन्हें केवल तभी तैनात किया जाता है जब यह भाजपा के राजनीतिक एजेंडे के अनुकूल हो? क्या केंद्र सरकार चुपचाप देख रही हैं जबकि बंगाल जल रहा है?"</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है और अगर इसे नहीं रोका गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा, "अगर दुकानों को जलाया जा सकता है और दिनदहाड़े समुदायों को आतंकित किया जा सकता है तो कानून-व्यवस्था में क्या बचा है? जो संदेश भेजा जा रहा है वह जोरदार एवं खतरनाक है कि भाजपा की छाया में, हिंसा संरक्षित होती दिखाई दे रही है।" उन्होंने इस टिप्पणी के साथ अपनी पोस्ट को समाप्त किया, " वे कहते हैं कि सुबह बताती है कि दिन कैसा होगा।" पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है खासकर पूर्वी मिदनापुर जिले जैसे क्षेत्रों में जहां खेजुरी स्थित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:32:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अखिलेश यादव का केंद्र पर कटाक्ष: चुनाव खत्म होते ही सरकार को याद आया ‘संकट’; ऐसी अपीलों से बाजार में भय, घबराहट और मंदी की आशंका </title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की 'बचत अपीलों' को आर्थिक विफलता बताया है। उन्होंने तंज कसा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को संकट याद आ गया। अखिलेश ने डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये और महंगाई पर घेराव करते हुए सत्तारूढ़ दल को ही देश के लिए सबसे बड़ा संकट करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadavs-sarcasm-on-the-center-as-soon-as-the/article-153419"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सोमवार को कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को “संकट” याद आ गया। उन्होंने कहा कि देश के लिए सबसे बड़ा संकट सत्तारूढ़ पार्टी ही है और केंद्र सरकार की हालिया अपीलें उसकी आर्थिक व नीतिगत विफलताओं को उजागर करती हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि यदि इतनी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं तो पांच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था कैसे बनेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ सरकार के हाथ से आर्थिक व्यवस्था की लगाम छूट चुकी है। डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर होता जा रहा है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने सोने की खरीद को लेकर सरकार की अपील पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जनता तो वैसे भी डेढ़ लाख तोले का सोना खरीदने की स्थिति में नहीं है, बल्कि सत्तापक्ष के लोग ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इसकी जानकारी “लखनऊ से लेकर गोरखपुर” और “अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी” तक ली जा सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि सारी पाबंदियां चुनाव खत्म होने के बाद ही क्यों याद आईं। अखिलेश ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान सत्तापक्ष के नेताओं ने हजारों चार्टर विमान यात्राएं कीं, महंगे होटलों में ठहरे और बड़े पैमाने पर संसाधनों का इस्तेमाल किया। ऐसे में जनता पर ही प्रतिबंध और अपीलें थोपना उचित नहीं है।</p>
<p>सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की इस तरह की अपीलों से बाजार में भय, घबराहट और मंदी की आशंका पैदा होगी। सरकार का काम संकट से उबारना होता है, न कि अफरातफरी का माहौल बनाना। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ सरकार विदेश नीति और गृह नीति दोनों मोर्चों पर विफल रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि सत्तापक्ष ने चुनावी राजनीति को प्रदूषित कर दिया है और समाज में नफरत फैलाकर सौहार्द को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दावा किया कि सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक हर क्षेत्र में सत्ता पक्ष की नीतियों से देश को नुकसान हुआ है। सपा प्रमुख ने कहा कि जनता अब सत्तापक्ष की नीतियों से परेशान हो चुकी है और वोट मिलते ही सत्तापक्ष का खोट सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब बदलाव चाहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:00:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु की राजनीति में नया दौर शुरू: 17वीं विधानसभा का पहला सत्र आरम्भ, विजय थलापति, उदयनिधि और ईपीएस ने ली सदस्य पद की शपथ, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधायक पद की शपथ ली। टीवीके नेता ने राजनीति में कदम रखने के दो वर्षों में 108 सीटें जीतकर द्रमुक-अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने वर्चस्व को खत्म किया। कांग्रेस और अन्य दलों के समर्थन से तमिलनाडु अब अपनी पहली गठबंधन सरकार की ओर बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-new-era-begins-in-the-politics-of-tamil-nadu/article-153389"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk-3.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को शुरू हुआ, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों को सदस्य के रूप में शपथ दिलाई गई। इस दौरान मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने भी सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली। पूर्वाह्न 9:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रोटेम स्पीकर एम. वी. करुप्पैया ने एक तिरुक्कुरल का पाठ किया और विधानसभा रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। जिन्हें रविवार शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शपथ दिलाई थी।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री, उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों, विपक्ष के नेता, डीएमके के उधयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पडी के. पलानीस्वामी और ओ. पन्नीरसेल्वम सहित अन्य सदस्यों को चुनाव प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया। अन्य विधायकों ने वर्णमाला क्रम में एक-एक कर शपथ ली। नौ नए मंत्रियों में से आठ ने शपथ ली, जबकि एकमात्र महिला विधायक एस. कीर्तन अपना प्रमाणपत्र लाना भूल गईं, इसलिए उन्हें बाद में शपथ दिलाई जाएगी।</p>
<p>234 सदस्यीय विधानसभा में 233 विधायकों ने शपथ ली। एक सीट खाली रही क्योंकि सीएम विजय ने दो सीटों से जीतने के बाद तिरुचि पूर्व सीट से इस्तीफा देकर पेरंबूर सीट बरकरार रखी। शपथ प्रक्रिया शाम तक जारी रहने के बाद सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। कार्यवाही मंगलवार को फिर शुरू होगी, जब स्पीकर और उपाध्यक्ष के चुनाव होंगे। इसके बाद 13 मई को मुख्यमंत्री विजय सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे, जैसा कि राज्यपाल ने सरकार गठन के समय निर्देश दिया था।</p>
<p>सीएम विजय ने राजनीति में उतरने के महज दो वर्षों के भीतर 108 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की और तमिलनाडु की राजनीति में एक नया दौर शुरू किया। इससे द्रमुक और अन्नाद्रमुक के छह दशकों पुराने वर्चस्व का अंत हुआ। हालांकि टीवीके के पास तकनीकी रूप से 107 विधायक हैं और बहुमत से 11 सीटें कम थीं लेकिन द्रमुक के कुछ सहयोगी दलों के समर्थन से विजय ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया, जिससे एक सप्ताह से चला राजनीतिक गतिरोध समाप्त हुआ। कांग्रेस ने द्रमुक से अलग होकर टीवीके को समर्थन दिया और अपने पांच विधायकों का समर्थन दिया। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), वीसीके और आईयूएमएल ने बाहरी समर्थन दिया और सरकार में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया।</p>
<p>कांग्रेस के भी सरकार में शामिल होने की संभावना है और उसके दो विधायकों को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान शामिल किया जा सकता है। इससे तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन सरकार बनेगी। साथ ही, 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस राज्य की सरकार का हिस्सा बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 12:26:32 +0530</pubDate>
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                <title>केजरीवाल का केंद्र पर हमला: पंजाब को निशाना बना रही सरकार, संजीव अरोड़ा पर ईडी की रेड को लेकर सरकार को घेरा</title>
                                    <description><![CDATA[अरविंद केजरीवाल ने ईडी रेड को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि ED और CBI का उपयोग विपक्षी नेताओं को डराने और उन्हें BJP में शामिल करने के लिए किया जा रहा है। केजरीवाल ने संजीव अरोड़ा पर रेड को पंजाब के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतांत्रिक संस्थाओं का खुला दमन बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kejriwals-attack-on-the-centre-the-government-is-targeting-punjab/article-153270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/arvind-kejriwal1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार में जांच एजेंसियां दूसरी पार्टियों को तोड़ने, उनके नेताओं को डराने-धमकाने और उन्हें केंद्र सरकार में शामिल कराने का काम करती हैं। केजरीवाल ने आज यहां संवादाता सम्मेलन में कहा कि पंजाब सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर पर ईडी की रेड चल रही है। ईडी का काम है कि देश के अंदर अगर कहीं धन शोधन हो रहा है, तो उसको रोकना और उसकी जांच करना। अगर इस मकसद से ईडी अपनी कार्रवाई करे, तो हमें कोई परेशानी नहीं है। लेकिन सीबीआई भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम नहीं करती और न ईडी धन शोधन रोकने के लिए काम करती है। वे सिर्फ और सिर्फ दूसरी पार्टियों को तोड़ने, उनके नेताओं को डराने-धमकाने और उन्हें केंद्र सरकार में शामिल कराने का काम करती हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संजीव अरोड़ा के घर पर ईडी कोई धन शोधन की जांच करने नहीं आई है। उनके यहां पिछले एक महीने के अंदर ईडी की यह दूसरी रेड है। इससे पहले 17 अप्रैल को ईडी आई थी और संजीव अरोड़ा के गुड़गांव, लुधियाना व दिल्ली के सभी ठिकानों पर रेड की। ये रेड तीन दिन चली। उन तीन दिनों की रेड में ईडी को क्या नहीं मिला, जो आज ढूंढने आए हैं। उसी वक्त अशोक मित्तल के यहां रेड हुई थी। उनके यहां भी तीन दिन रेड चली और उस रेड के बाद अशोक मित्तल को केद्र सरकार में शामिल करवाया। इसके बाद उनके यहां रेड खत्म हो गई और उनका सारा मामला रफा-दफा हो गया।</p>
<p>केजरीवाल ने कहा कि संजीव अरोड़ा ने केंद्र सरकार की स्वामित्व स्वीकार नहीं की। उस दिन संजीव अरोड़ा पर काफी दबाव डाला गया कि पार्टी ज्वाइन कर लो। अगर वे उस दिन पार्टी ज्वाइन कर लेते, तो शायद आज ईडी की रेड नहीं होती। आज ईडी की रेड उनको सबक सिखाने के लिए हुई है कि उन्होंने भाजपा ज्वाइन क्यों नहीं की। या तो भाजपा ज्वाइन कर लो, नहीं तो गिरफ्तार कर लिए जाओगे। इसलिए आज ईडी की रेड हुई है। यह बहुत ही दुख की बात है कि मोदी राज के अंदर एजेंसियों का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार खासतौर पर पंजाब को निशाना बना रही हैं। पंजाब के लोगों के साथ धक्का, नाइंसाफी और अन्याय किया जा रहा है। पंजाब के लोगों को कुचलने की कोशिश की जा रही है। पिछले चार साल से ग्रामीण विकास का हजारों करोड़ रुपया, जिससे मंडियों और गांव-गांव की सड़कें बननी होती हैं। पंजाब की पंजाब यूनिवर्सिटी को टेकओवर करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को हरियाणा को ट्रांसफर करने और पंजाब से छीनने की कोशिश की जा रही है। पंजाब के पानी के ऊपर डाका डालने और बीबीएमबी को हथियाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे ना जाने कितने मामले हैं, जहां केंद्र सरकार पंजाब के लोगों के साथ धक्का कर रहे हैं। अब पिछले कुछ दिनों से रोज बस एक ही खबर है कि आज ईडी ने यहां रेड कर दी, आज वहां रेड कर दी। जैसे ही बंगाल के चुनाव खत्म हुए, दिल्ली से ईडी की पूरी की पूरी टीम पंजाब के अंदर आ गई है। इनका मकसद कोई काला पैसा या धन शोधन ढूंढना नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:30:27 +0530</pubDate>
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