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                <title>सेवानिवृत्त प्रोफेसर के पक्ष में विधिक परामर्श, फिर भी धरना - 41 डिग्री तापमान में 8 घंटे तपाया</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुर सुखाड़िया विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रो. अनिल कोठारी ने बुधवार को 41 डिग्री से अधिक तापमान में 8 घंटे धरना दिया, उसके बाद उन्हें पेंशन जारी की गई। दरअसल, प्रो. कोठारी के पेंशन को लेकर सुविवि प्रबंधन ने विधिक परामर्श लेने का निर्णय लिया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/administration-battered-city-stricken-in-front-of-owners-of-breakdown-vehicles/article-11020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ww1.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रो. अनिल कोठारी ने बुधवार को 41 डिग्री से अधिक तापमान में 8 घंटे धरना दिया, उसके बाद उन्हें पेंशन जारी की गई। दरअसल, प्रो. कोठारी के पेंशन को लेकर सुविवि प्रबंधन ने विधिक परामर्श लेने का निर्णय लिया था। यह परामर्श प्रो. कोठारी के पक्ष में गया लेकिन कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह की अनुपस्थिति और कार्यवाहक कुलपति प्रो. पीके सिंह के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला होने से प्रो. कोठारी की पेंशन जारी करने से मना कर दिया गया। ऐसे में प्रो. कोठारी ने प्रशासनिक भवन के बाहर तपती धूप में धरना दिया। ऐसे में सुविवि प्रबंधन ने कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह से संपर्क साधा तो पहले तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया, उसके बाद उनके पुत्र से संपर्क कर बात की गई तो उन्होंने 45 मिनट में आदेश जारी करने की बात कही, लेकिन आदेश जारी नहीं किए। उसके बाद शाम 6.15 बजे यह आदेश जारी किए गए। जिसके बाद प्रो. कोठारी ने धरना समाप्त किया।<br /><br /><strong>न ऑनलाइन स्वीकृति दी और न मौखिक</strong><br />बता दें, कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह ने दस दिवसीय अवकाश लेने से पहले राजभवन को लिखे पत्र में कहा गया कि कार्यवाहक कुलपति प्रो. पीके सिंह सारी जिम्मेदारी देखेंगे, लेकिन विशेष मामलों में खुद कुलपति अमेरिका सिंह आॅनलाइन या मौखिक स्वीकृति देंगे। लेकिन प्रो. कोठारी के मामले में ऐसा नहीं हुआ। प्रो. कोठारी को आठ घंटे धूप में तपने के बाद मेल से स्वीकृति जारी की गई। ऐसे में धूप में धरने पर बैठे प्रो. कोठारी की तबियत भी खराब हो गई। इस बीच रजिस्ट्रार सीआर देवासी ने प्रो. कोठारी से समझाइश के काफी असफल प्रयास किए। रजिस्ट्रार ने इस संबंध में मुख्य सचिव, राजभवन और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मामले की सूचना दे दी है।  वहीं, पूर्व केंद्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष निखिलराज सिंह भी प्रो. कोठारी के समर्थन में उनके साथ धरने पर बैठे।<br /><br /><strong>यह है मामला</strong><br />प्रो. अनिल कोठारी की इसी साल सेवानिवृत्ति के बाद से ही इनके पेंशन परिलाभ जारी नहीं किए गए। ऐसे में प्रो. कोठारी ने कुछ दिनों पूर्व बेमियादी अनशन की चेतावनी दी थी, लेकिन उससे पहले कुलपति प्रो. सिंह के निर्देश पर उनके द्वारा नियुक्त कार्यवाहक कुलपति ने बातचीत कर मामला टालकर आश्वासन दिया कि विधिक परामर्श लेने के बाद पेंशन जारी कर दी जाएगी। ऐसे में विधिक परामर्श लिया गया, तो प्रो. कोठारी के पक्ष में निर्णय गया। प्रो. कोठारी ने इसकी सूचना पर सुविवि प्रबंधन से संपर्क साधा तो उन्हें यह कहकर स्पष्ट मना कर दिया कि जब तक कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह के आदेश प्राप्त नहीं होते हैं तब तक पेंशन जारी नहीं की जा सकती है। ऐसे में प्रो. कोठारी ने इस नियम का विरोध करते हुए प्रशासनिक भवन के बाहर धूप में धरना दिया।</p>
<p><br /><strong>इनका कहना है..</strong><br />सेवानिवृत्त प्रो. कोठारी की पेंशन को लेकर विधिक परामर्श लिया गया था, जो उनके पक्ष में आया। कार्यवाहक कुलपति द्वारा इसे विशेष मामले में रखते हुए अधिकार से बाहर होना बताया। कुलपति प्रो. सिंह ने बुधवार शाम 6.15 बजे मेल कर आदेश जारी किए। धूप में अकेले धरने पर बैठे प्रो. कोठारी से समझाइश भी की लेकिन वे नहीं माने। -<strong>सीआर देवासी, रजिस्ट्रार, सुविवि</strong></p>
<p> </p>
<p><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 13:17:57 +0530</pubDate>
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                <title> ब्रेकडाउन वाहनों के मालिकों के आगे प्रशासन पस्त-शहर त्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के विभिन्न वीआईपी और सामान्य मार्गों के किनारे पड़े ब्रेकडाउन वाहन सभी के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news-administration-battered-city-stricken-in-front-of-owners-of-breakdown-vehicles/article-8522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/car.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। शहर के विभिन्न वीआईपी और सामान्य मार्गों के किनारे पड़े ब्रेकडाउन वाहन सभी के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। प्रशासन इन वाहनों के मालिकों के आगे पस्त हो चुके हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व जिला प्रशासन और नगर निगम की पहल पर इन ब्रेकडाउन वाहन मालिकों को नोटिस देकर पंद्रह दिनों में इन वाहनों को हटाने के लिए पाबंद किया था, लेकिन ये नोटिस हवा हो गए। </p>
<p><br />प्रशासन की सख्ती के बावजूद शहर में कहीं से भी ब्रेकडाउन वाहन नहीं हटाए गए है। परिवहन विभाग और ट्रेफिक पुलिसकर्मी रोज यातायात समस्या से जूझते हैं, लेकिन उन्हें यातायात में बाधक बन रहे ये वाहन नजर नहीं आते हैं। इनमें से कई ब्रेकडाउन वाहन समाज कंटकों के अड्डे बन चुके हैं तो कई सार्वजनिक सुविधा का रूप ले चुके हैं। साथ ही इन वाहनों से आमजन परेशान हो रहा है। सड़कों पर किनारे पड़े इन वाहनों की आड़ में अतिक्रमण भी पनप रहे हैं। यह मुद्दा लम्बे समय से यातायात प्रबंधन समिति की बैठकों में चर्चा का विषय रहा है, लेकिन इस संबंध में हुए फैसलों पर अमल नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। <br /><br /><strong>नेता प्रतिपक्ष ने दिए थे निर्देश</strong><br />ब्रेकडाउन वाहनों को शहर से बाहर करने के खुद नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने नगर निगम को निर्देश दिया था। इसमें कहा गया था कि जो ब्रेकडाउन वाहन सड़क किनारे पड़े हैं, उनके मालिकों को नोटिस थमाओ और पंद्रह दिन के बाद इन वाहनों को परिवहन विभाग के साथ मिल कर जब्त किया जाए। परिवहन विभाग ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन समाप्त करने की कार्रवाई करे और नगर निगम इन वाहनों को कबाड में बेच दे। इस निर्देश पर निगम ने वाहन मालिकों को नोटिस तो थमा दिए, लेकिन आज दिन तक ये वाहन जब्त नहीं हो पाए हैं। <br /><br /><strong>बार बार लगता है जाम</strong><br />इन वाहनों के बेतरतीब सड़कों पर पड़े रहने के कारण बार बार जाम की स्थितियां बनती है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि इन ब्रेकडाउन वाहनों के कारण दोनों तरफ का ट्रेफिक जाम हो जाता है, ऐसे में इतना भी स्थान नहीं रहता है कि दोपहिया वाहन भी निकल जाए। इन जाम में कई बार बाल वाहिनियां और एंबुलेंस भी फंस जाती है। जो घंटों बाहर नहीं निकल पाती है। विशेष रूप से जब शहर में कोई बड़ी परीक्षा का आयोजन हो या पर्यटक सीजन हो तो यह ब्रेकडाउन वाहन सबसे बड़े ब्रेकरसाबित हो जाते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 16:52:49 +0530</pubDate>
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