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                <title>नहरें बन रही काल का गाल, हर महीने 3 से 4 लोगों की डूबने से हो रही मौत</title>
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                        <![CDATA[नहरों की चार दीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस एक : </strong>उद्योग नगर थाना क्षेत्र में डीसीएम स्थित नहर में नहाने गए दो युवक पानी के तेज बहाव में बह गए थे। जिनमें से एक को तो सुरक्षित निकाल लिया। जबकि दूसरे की डूबने से मौत हो गई। युवक की मौत से उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।</p>
<p><strong>केस दो:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में गत दिनों नहर में नहाते समय एक युवक का पैर फिसल गया था। जिससे वह पानी के तेज बहाव में बह गया। सूचना पर पुलिस व निगम के गोताखोर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है। युवक का शव तीन दिन बाद घटना स्थल से काफी दूर मिला।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>किशोरपुरा थाना क्षेत्र में गोविंद धाम के पास चम्बल नदी में हाथ-पैर धोने के लिए नदी किनारे गए युवक को झटका लगने से वह उसमें गिर गया। सूचना पर गोताखोर पहुंचे लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में तलाश करने पर उसका शव मिला।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं उन हालातों को बताने के लिए जिनका सामान शहर वासियों को रोजाना करना पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आए कोटा जैसे शहर में जो अब पर्यटन नगरी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला है। उस शहर के बीच रिहायशी इलाकों से नहर निकल रही है। वह भी दांयी और बांयी मुख्य नहर। इन नहरों की चार दीवारी या तो इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है या फिर नहरों की सुरक्षा दीवार ही कई जगह से टूटी हुई है। जिससे लोगों को नहाने की जगह आसानी से मिल रही है। ऐसे में हादसे अधिक हो रहे हैं।</p>
<p><strong>धुलंडी पर एक दिन की पाबंदी</strong><br />पिछले कुछ सालों में धुलंडी के दिन कई लोगों के नदी, तालाब व नहर में नहाने जाने के दौरान पैर फिसलने और पानी का बहाव तेज होने से लोगों के उनमें डूबने की घटनाएं हो चुकी है। कुछ समय पहले तो एक ही दिन में करीब आधा दर्जन लोगों की डूबने से मौत होगई थी। उसके बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से धुलंडी के दिन नहर और नदी तालाब में नहाने जाने पर ही पाबंदी लगा दी है। लेकिन हालत यह है कि यह पाबंदी सिर्फ एक ही दिन के लिए हो रही है। उसके बाद फिर से वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन गई है।</p>
<p><strong>अभी भी नहा रहे नहर पर</strong><br />धुलंडी के दिन तो नहरों में पानी का बहाव भी कम कर दिया गया था। पुलिस व प्रशासन का पहरा व सख्ती भी दिखी। लेकिन उसके बाद इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि अभी भी शहर में कई जगह पर नहरों में लोग विशेष रूप से युवा और बच्चे नहा रहे हैं। जिससे फिर से कभी भी कोई बड़ा हादसा या लोगों के डूबने से मौत की घटना होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि नवज्योति ने होली से पहले ही इस संबंध में चेताया था। उसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>हर साल 35 से 40 की डूबने से हो रही मौत</strong><br />एक तरफ तो कोटा व हाड़ौती के लिए चम्बल नदी बरदान है। वहीं दूसरी तरफ यह जानलेवा भी साबित हो रही है। चम्बल नदी, नहर व तालाब में हर साल डूबने से करीब 35 से 40 लोगों की मौत हो रही है।नगर निगम के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर महीने करीब 3 या उससे अधिक लोगों की यानि दसवें दिन एक व्यक्ति की डृबने से मौत हो रही है। हालांकि निगम के गोताखोरों की टीम ने कई डूबे हुए लोगों को सुरक्षित भी बाहर निकाला है।</p>
<p><strong>यह है स्थिति</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में कोटा शहर में 33 लोगों की डूबने से मौत हुई जबकि 4 को जीवित व सुरक्षित बाहर निकाला गया। वर्ष 2021-22 में 38 लोगों की डूबने से मौत हुई और 136 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2022-23 में 44 लोगों की डूबने से मौत हुई और 222 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2023-24 में 30 की डूबने से मौत हुई व 1 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं वर्ष 2024-25 में 34 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है और 9 को सुरक्षित निकाला गया है। उसके बाद भी आए दिन लोगों के डूबने व मौत की घटनाएं हो रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के बीच व रिहायशी इलाकों से नहर व चम्बल नदी गुजर रही है। नहरों की सुरक्षा दीवार इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए जा सकता है। नहर में पानी का बहाव अधिक होने पर तैरने वाला जानकार भी कई बार बह जाता है। जिससे उसकी डूबने पर मौत हो जाती है। हालांकि किशोरपुरा से गुमानपुरा वाली नहर की सुरक्षा दीवार 8 फद्दीट करने से अब वहां घटनाएं कम हो रही है। सिचाई विभाग को चाहिए कि नहरों की सुरक्षा दीवार को इतना ऊंचा किया जाए या उन पर फेंसिंग की जाए कि लोग वहां से चढ़कर पानी तक नहीं जा सके। आत्म हत्या करने के अलावा हादसों के कारण भी लोगों की डूबने से मौत हो रही है। शहर में अधिकतर नहरों की सुरक्षा दीवार छोटी है। नगर निगम के पास पर्याप्त गोताखोर व स्कूबा डाइविंग सेट समेत नाव व अन्य संसाधन पर्याप्त हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की मौत का कारण सूचना देरी से मिलना होता है। देर से सूचना मिलने पर बहे लोग काफी आगे निकल जाते हैं। नहर में झाड़ झंकार में फंस जाते हैं। जिससे उनकी तलाश में देरी होने पर मौत अधिक होती है। वैसे तुरंत सूचना मिलने पर कई लोगों को जीवित व सुरक्षित भी निकाला गया।<br /><strong>- विष्णु श्रृंगी, गोताखोर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>समय-समय पर नहरों में पानी का जल प्रवाह कम करते रहते हैं। हालांकि कई जगह पर नहरों की दीवार को ऊंचा भी कराया गया है। लेकिन जहां भी सुरक्षा दीवार टूटी हुई है या फेंसिंग की जरूरत होगी उसे भी सही करवाने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- संजय कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई वृत्त सीएडी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:46:09 +0530</pubDate>
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                <title>सादेड़ा विद्यालय की जर्जर छत से विद्यार्थियों का शिक्षण प्रभावित,  बरसात में टपकती छत</title>
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                        <![CDATA[दीवारों और फर्श में सीलन की समस्या गंभीर हो गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-dilapidated-roof-of-sadeda-school-is-affecting-students--education--with-the-roof-leaking-during-the-rainy-season/article-129017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। सादेड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन जर्जर हालत में होने के कारण बरसात में कक्षाओं की छत से पानी टपकने लगा है। इससे विद्यार्थियों का शिक्षण प्रभावित हो रहा है और शिक्षक जोखिम भरे हालात में शिक्षा दे रहे हैं। रविवार रात की बारिश के बाद सोमवार को भी सात कक्षाओं की छत से पानी टपकता रहा, जबकि केवल एक कक्ष सुरक्षित है। लेकिन संबंधित विभाग के जिम्मेदार भवन की सुध नहीं ले रहा है। विद्यालय में कुल 12 कक्षाएं संचालित हैं, जिनमें 300 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। 7 कक्षा कक्ष की छत से पानी टपकने के कारण कई छात्र बरामदे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कुछ कक्षाओं की दीवारों में दरारें हैं और आरसीसी की छत के प्लास्तर टूटकर टेबल पर गिर रहा है। कई जगहों पर आरसीसी सरिया साफ दिखाई देने लगा है। बरसात के समय प्रार्थना स्थल भी उपयोग के योग्य नहीं रहता। छात्र-छात्राएं और शिक्षक टपकती छत के नीचे पढ़ाई और शिक्षण कर रहे हैं। दीवारों और फर्श में सीलन की समस्या गंभीर हो गई है। निरीक्षण टीम और संबंधित विभाग अब तक इस जर्जर स्थिति का कोई समाधान नहीं कर पाए हैं। ग्रामीण और विद्यालय परिवार चिंतित हैं कि जिम्मेदार हादसे का इंतजार कर रहे हैं। शालाओं में सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल मरम्मत आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से आग्रह किया है कि शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक सुधार किया जाए, ताकि विद्यार्थी और शिक्षक सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें।</p>
<p><strong>इधर निरीक्षण पर भी सवाल</strong><br />पंचायत समिति नैनवां से निरीक्षण पर आए संबंधित अधिकारियों के निरीक्षण पर भी सवाल उठ रहे है। आखिर निरीक्षण में असुरक्षित भवन को गंभीरता से क्यों नहीं देखा है। भवन के चौतरफा कक्षाकक्षों की सुरक्षा को लेकर साफ-सफाई के निर्देश क्यों नहीं दिए है। मौके पर आकर निरीक्षण नहीं किया या औपचारिकता पूर्ण की यह भी सवाल खड़े हो रहे है। ऐसे में शाला परिसर के खतरे के साएं में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर किया जा रहा है।</p>
<p><strong>शाला में देखरेख का अभाव</strong><br />शाला में जिम्मेंदार अधिकारी जागरूक नहीं होने से शाला में कक्षा-कक्षों के पिछली दीवारों में बड़े-बडेÞ पेड़-पौधों हो चूके है,जो कक्षाकक्षो की दीवारो को भी खतरा बढता जा रहा है। ऐसे लगाता है कि यह विद्यालय भवन नहीं जंगल में पेड़ पनपे हुए है।</p>
<p><strong>शाला स्तर पर दो बार ब्लॉक शिक्षाधिकारी को लिखित में अवगत</strong><br />शाला ने दो बार शाला के भवन को लेकर लिखित-पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। मरम्मत करवाने के नाम पर रेती व सीमेंट बिछा दी जाती है। दीवारो में सीलन आना जारी है। पट्टियों पर वजन बढ़ने से पट्टियों के टूटने का भी खतरा बढ़ रहा है। लेकिन सक्षम अधिकारी ने बारिश के समय मौके पर आकर स्थिति को नहीं जान रहे है। शाला के परिसर के मुख्य गेट पर बरसाती पानी जमा होने से कीचड़ की समस्या रहती है जिसको लेकर सादेड़ा ग्राम पंचायत को भी लिखित पत्र देकर समस्या से अवगत कराया जा चूका है। मगर समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। सोमवार को बारिश के पानी व कीचड़ भरी डगर से छात्र-छात्राएं गुजरते हुए नजर आए है। </p>
<p><strong>यह कहा वाइस प्रिंसिपल ने</strong><br />मैं सादेड़ा विद्यालय में नया आया हूँ। पहले क्या हुआ इसका मुझे पता नहीं है। इस समय बारिश चल रही है, जो एक कक्ष के अलावा सभी कक्ष की छत टपक रही है। छात्र-छात्राओं को बारिश से बचाने के लिए सामूहिक में कक्षाए रखनी पड़ती है। बारिश होते ही समस्या बढ जाती है, सभी कक्षाओं को एडजस्ट करना मुश्किल हो रहा है। <br /><strong>-हरनन्दा मीणा, वाइस प्रिंसिपल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सादेड़ा। </strong></p>
<p> सादेड़ा विद्यालय का निरीक्षण किया गया था। पहले मरम्मत की राशि आई थी, मार्च में जिस विद्यालय में राशि आई, वहां संबंधित ग्राम पंचायत ने मरम्मत की थी। जिसमें पिचेहतर प्रतिशत मरम्मत वाले विद्यालयों में छत टपकने की समस्या आ रही है। शाला का जल्द ही मौके पर आकर उच्च निरीक्षण करेंगे, मौके पर कमियां नजर आएंगी, तो उन्हें दुरूस्त करवाया जाएगा।<br /><strong>-अनिल जैन, सीबीईओ, नैनवां। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:15:18 +0530</pubDate>
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                <title>मोक्षधाम की दीवारों की पेटिंग बन रही चर्चा का विषय </title>
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                        <![CDATA[लोग ले रहे हैं सेल्फी, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर कर रहे है शेयर]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/sawaimadhopur-news---painting-of-the-walls-of-mokshadham-is-becoming-a-matter-of-discussion/article-8601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/swm.jpg" alt=""></a><br /><p>सवाई माधोपुर। जिला कलेक्टर सुरेश ओला के दिशा-निर्देशन में बदलेगा माधोपुर अभियान दिनोंदिन गति पकड़ रहा है। अभियान के तहत जिले को स्वच्छ बनाए जाने के साथ-साथ सीएसआर के माध्यम से सौंदर्य करण के कार्य को गति दी जा रही है। जिले के खेरदा स्थित मोक्षधाम की दीवारों पर सीएसआर ओबरॉय गु्रप की मदद से सुनहरी पेंटिंग का कार्य करवाया गया है जो यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए उत्साह था केंद्र बना हुआ है। विश्व विख्यात पेंटर एम डी पाराशर के प्रशिक्षित शिष्यों द्वारा मोक्ष धाम की दीवारों पर बनाई जा रही इस पेंटिंग में खास बात यह है कि इन दीवारों पर चित्रों को इस ढंग से उकेरा गया है कि मानो जंगल के बीच वन्य जीवों की अठखेलियों की जीवंत दशा का ही वर्णन बंया किया जा रहा हो। मोक्ष धाम की एक दीवार पर रणथंभौर अ•यारण में शिकार के लिए बाघ को हिरण के पीछे भागते हुए उकेरा गया है। वहीं दूसरी दीवार पर अभयारण्य में संध्या के समय तालाब के नजदीक मस्तमौला और बेफि क्र बाघों को विचरण करते हुए तथा उस समय की जंगल में प्राकृतिक छटा को उकेरा गया है। दीवारों पर उकेरी गई यह दोनों ही तस्वीर आते-जाते राहगीरों को रुककर निहारने पर विवश कर देती है।</p>
<p> </p>
<p>यह मोक्ष धाम टोंक रोड हाईवे पर स्थित होने के चलते यहां से गुजरने वाले राहगीरों एवं स्थानीय निवासियों के लिए खास चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग यहां पर रुक कर इन दीवारों की अपने मोबाइल से फोटो या विडियो लेना नहीं भूलते और लोगों द्वारा इसे सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल किया जा रहा है। जिले में रणथंभौर अभयारण स्थित होने के चलते पर्यटन की दृष्टि से इन दीवारों का एक खास महत्व समझा जा सकता है। इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज ने बताया कि बदलेगा माधोपुर अभियान के तहत कलक्टर सुरेश ओला के निर्देशन में सवाई माधोपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का कार्य किया जा रहा है। वित्तीय संसाधनों की पूर्ति के लिए कलक्टर द्वारा सीएसआर से बातचीत कर सहयोग के लिए निर्देशित किया जा रहा है। जिले में इस तरह की पेंटिंग का कार्य दूसरे स्थानों पर भी करवाया जाएगा। जिससे शहर की सुंदरता में चार चांद लग सके।</p>]]>
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                                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 19:08:37 +0530</pubDate>
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