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                <title>aerospace - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>aerospace RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>स्पेस मिशन को बड़ा झटका : फ्लोरिडा लॉन्च पैड पर परीक्षण के दौरान ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन रॉकेट में विस्फोट, कोई हताहत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के फ्लोरिडा लॉन्च पैड पर परीक्षण के दौरान जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन के 'न्यू ग्लेन' हेवी-लिफ्ट रॉकेट में विस्फोट हो गया। हॉटफायर टेस्ट के दौरान रॉकेट के निचले हिस्से में तेज रोशनी चमकी और धमाका हुआ। कंपनी ने "असामान्य घटना" की पुष्टि करते हुए सभी कर्मियों के सुरक्षित होने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/fatal-accident-in-america-blue-origins-new-glenn-rocket-explodes/article-155341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)103.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका में फ्लोरिडा लॉन्च पैड पर परीक्षण के दौरान ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन हेवी-लिफ्ट रॉकेट में विस्फोट हो गया। यह जानकारी लाइव प्रसारण पर दी गयी। फुटेज में रॉकेट के आधार पर एक तेज रोशनी चमकती हुई दिखाई दे रही है, जिसके बाद एक जोरदार धमाका हुआ। ब्लू ओरिजिन ने रॉकेट परीक्षण के दौरान हुई इस "असामान्य घटना" की पुष्टि की।</p>
<p>कंपनी ने कहा , "आज के हॉटफायर परीक्षण के दौरान हमें एक असामान्य घटना का सामना करना पड़ा। सभी कर्मी सुरक्षित हैं। जैसे ही हमें और जानकारी मिलेगी, हम अपडेट प्रदान करेंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:57:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया के तहत बड़ी वैज्ञानिक छलांग : आईआईटी जोधपुर ने रचा इतिहास, अल्ट्रा लाइट और स्ट्रॉन्ग सुपरमेटल बनाया</title>
                                    <description><![CDATA[आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने टीआईएआई-सीए नामक नई टाइटेनियम-एल्युमिनाइड मिश्र धातु विकसित की है, जो पारंपरिक सुपरएलॉय से आधी हल्की और उतनी ही मजबूत है। प्रो. एस.एस. नेने के नेतृत्व में बनी यह मिश्र धातु 900°C पर भी उच्च यील्ड स्ट्रेंथ रखती है और एयरोस्पेस व रक्षा क्षेत्र के लिए स्वदेशी सुपरमेटल साबित होगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/big-scientific-leap-under-make-in-india-in-aerospace-and/article-130947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के शोधकर्ताओं ने धातु विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के मटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने टीआईएआई-सीए नामक एक नई टाइटेनियम-एल्युमिनाइड मिश्र धातु विकसित की है, जो मौजूदा सुपरएलॉय की तुलना में आधी हल्की और उतनी ही मजबूत है। यह खोज एयरोस्पेस और रक्षा उपकरणों के लिए भारत में स्वदेशी रूप से विकसित एक सुपरमेटल साबित होगी। इस शोध का नेतृत्व प्रो. एसएस नेने ने किया, जिनके साथ शोधार्थी एआर बालपांडे और ए. दत्ता (एडवांस्ड मटेरियल्स डिजाइन एंड प्रोसेसिंग ग्रुप) जुड़े रहे। यह नई धातु 900 डिग्री तापमान पर भी गीगापास्कल स्तर की यील्ड स्ट्रेंथ बनाए रखती है और उच्च तापमान पर उत्कृष्ट ऑक्सीकरण प्रतिरोध प्रदर्शित करती है।</p>
<p>विशेष रूप से इस मिश्र धातु में बोरोन का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि नियोबियम, मोलिब्डेनम, टैंटलम, टंगस्टन और वैनाडियम जैसे धात्विक तत्वों का सटीक संयोजन किया गया है। इस वैज्ञानिक संयोजन ने टीआईएआई-सीएको बेहद मजबूत, हल्का और लचीला बनाया है। वजन के लिहाज से यह सुपरमेटल 4.13 जी/सीसी घनत्व रखता है, जबकि पारंपरिक निकेल-आधारित सुपरएलॉय की घनत्व 7.75 से 9.25 जी/सीसी होती है। इससे विमान इंजनों के वजन में उल्लेखनीय कमी, ऊर्जा की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी संभव होगी।</p>
<p><strong>अनेक विशेषताओं का है मिश्रण :</strong></p>
<p>वर्तमान में विमान इंजनों में प्रयुक्त धातुएं या तो बहुत भारी होती हैं या अत्यधिक तापमान पर अपनी मजबूती खो देती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि यह मिश्र धातु उच्च तापमान पर भी उत्कृष्ट ऑक्सीकरण प्रतिरोध बनाए रखती है जो एक बड़ा इंजीनियरिंग नवाचार है। टीआईएआई-सीए की विशेषता इसकी अनूठी संरचना में है।</p>
<p>पूर्व में विकसित टीआईएआई मिश्र धातुओं में बोरोन या कार्बन जैसे तत्वों को जोड़ऩा पड़ता था, जिससे वे भंगुर और कठिन-संसाध्य हो जाती थीं। इस अल्ट्रा लाइट और अल्ट्रा स्ट्रॉन्ग सुपरमेटल का सफल विकास ईंधन-कुशल एयरोइंजन निर्माण के लिए एक बड़ा लाभ सिद्ध होगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 14:05:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चन्द्रमा पर 2040 तक मानव भेजने की तैयारी करने के अंतरिक्ष विभाग को मोदी ने दिये निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री  ने अंतरिक्ष विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में भारत की अब तक की सफलताओं की नींव पर अब देश को  नये महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए, उन्होंने इसी सन्दर्भ में 2035 तक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/modi-gave-instructions-to-the-space-department-to-prepare-to/article-59787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/बंदर-ली-अधिकारी-कि-जगह(12).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयान मिशन की तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें आने वाले समय में अंतरिक्ष में खोज के भारत के प्रयासों की रूपरेखा पर भी चर्चा की गयी। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारत 2035 तक अंतरिक्ष में अपना स्टेशन (केन्द्र) स्थापित करेगा और 2040 तक चंद्रमा पर मानव को पहुंचाएगा।</p>
<p>भारत इस समय मंगल और शुक्र ग्रहों के अध्ययन के अभियान में भी लगा हुआ है। आज की समीक्षा बैठक में अंतरिक्ष विभाग ने प्रधानमंत्री के समक्ष गगनयान मिशन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। विभाग ने इस दिशा में अब तक विभिन्न नयी प्रौद्योगिकियों के विकास में हुई प्रगति की जानकारी दी।</p>
<p>मनुष्य को अंतरिक्ष में ले जाने वाले में प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण वाहनों की प्रौद्योगिकी और उपयुक्त प्रणालियों के विकास में प्रगति शामिल है।बैठक में बताया गया कि अंतरिक्ष में मानव भेजने के तैयारियों के सिलसिले में बड़े परीक्षण किए जाएंगे, जिनमें तीन परीक्षण मनुष्यों की अंतरिक्ष यात्रा के लिए उपयुक्त प्रक्षेपणयान (एचएलवीएम3) के प्रक्षेपण की योजना है HLVM3 के तीन अभियान मानवर हित होंगे।</p>
<p>विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री  ने अंतरिक्ष विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में भारत की अब तक की सफलताओं की नींव पर अब देश को  नये महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए, उन्होंने इसी सन्दर्भ में 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक चाँद पर भारत का पहला मानव मिशन भेजने का लक्ष्य रखा। उल्लेखनीय है कि भारत ने चंद्रयान तीन मिशन और आदित्य एल वन मिशन के साथ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में लम्बी छलांग लगाई है। </p>
<p>विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के इस सपने को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष विभाग चन्द्रमा पर खोज कार्यों के लिए वृहद् योजना तैयार करेगा, इसके तहत कई चंद्रयान मिशन शुरू किये जाएंगे, एक नयी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) विकसित किया जरएगा, एक नया प्रक्षेपण मंच का निर्माण किया जाएगा और  मानव केंद्रित प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी तथा उनसे जुड़ी प्रौद्योगिकी का विकास किया जाएगा। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों को शुक्र की परिक्रमा करने वाले उपग्रह और मंगल पर उतरने वाले यंत्र 'मार्स लैंडर की तैयारी करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं पर  विश्वास जताया और कहा कि  भारत इस दिशा में नयी ऊचाइंयों को छूने के लिए प्रतिबद्ध है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 18:39:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पचास साल बाद 11 अगस्त को चंद्रमा के लिए उड़ान भरेगा रूस का यान</title>
                                    <description><![CDATA[ सोयुज-2.1बी रॉकेट फ्रेगेट ऊपरी चरण और स्वचालित स्टेशन के साथ अमूर ओब्लास्ट में स्थित वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से मास्कों के समय के अनुसार सुबह 2:10 बजे (अंतरराष्ट्रीय समय के अनुसार 10 अगस्त को रात 23.10 बजे) उड़ान भरेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/fifty-years-later-on-august-11-russias-vehicle-will-fly/article-53542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/12341.png" alt=""></a><br /><p>व्लादिवोस्तोक, लगभग 50 वर्षों बाद 11 अगस्त की सुबह रूस का पहला चंद्रयान लूना-25 चंद्रमा के लिए उड़ान भरेगा। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी आरआईए नोवोस्ती ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में लॉन्च की तारीख 11 अगस्त तय की है। </p>
<p>एजेंसी के मुताबिक सोयुज-2.1बी रॉकेट फ्रेगेट ऊपरी चरण और स्वचालित स्टेशन के साथ अमूर ओब्लास्ट में स्थित वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से मास्कों के समय के अनुसार सुबह 2:10 बजे (अंतरराष्ट्रीय समय के अनुसार 10 अगस्त को रात 23.10 बजे) उड़ान भरेगा। </p>
<p>इससे पहले रूस का पिछला चंद्रयान लूना-24 साल 1976 में लॉन्च किया गया था। इसका रिटर्न कैप्सूल लगभग 170 ग्राम चंद्र मिट्टी को पृथ्वी पर वापस लाया था। लूना-25 में रिटर्न कैप्सूल नहीं है। उम्मीद है कि यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला इतिहास का पहला स्टेशन बन जाएगा। मिशन का मुख्य कार्य सॉफ्ट लैंडिग की प्रौद्योगिकियों का परीक्षण और आंतरिक संरचना का अध्ययन तथा पानी सहित संसाधनों का पता लगाना है।</p>
<p>प्रक्षेपण और रॉकेट से अलग होने के बाद ऊपरी चरण स्वचालित स्टेशन को चंद्रमा की उड़ान के प्रक्षेप पथ पर भेजेगा। साढ़े चार दिनों के बाद स्टेशन चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करेगा और दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने से पहले कई बार अपनी कक्षा बदलेगा। स्टेशन का वैज्ञानिक कार्य एक वर्ष तक चलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/fifty-years-later-on-august-11-russias-vehicle-will-fly/article-53542</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2023 14:27:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस एस-500 मिसाइलों का बड़े पैमानों पर कर रहा उत्पादन</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन पर लगातार हमलों के बीच रूस अपने हथियारों के जखीरे को और तेजी से बढ़ा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/russia-is-producing-s-500-missiles-on-a-large-scale--defense-system-of-aerospace-will-get-strength/article-8644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/missile.jpg" alt=""></a><br /><p>मास्को, एएनआइ/स्पुतनिक।  यूक्रेन पर लगातार हमलों के बीच रूस अपने हथियारों के जखीरे को और तेजी से बढ़ा रहा है। रूस ने एस-500 मिसाइल के उत्पादन को तेज कर दिया है। इस मामले की जानकारी देते हुए रूसी रक्षा प्रोद्योगिकी कंपनी अल्माज-एंटे के प्रमुख यान नोविकोव ने कहा कि ये नवीनतम विमान भेदी मिसाइलें रक्षा प्रणाली एस -500 को बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। ये मिसाइलें रूसी एयरोस्पेस के रक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत करेंगी। नोविकोव ने रूसी पत्रिका नेशनल डिफेंस को बताया कि वर्तमान में घरेलू विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवीनतम उपलब्धियों के आधार पर एस-500 प्रणाली का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया गया है। सिस्टम की लड़ाकू क्षमताएं पहले से निर्मित एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम और काम्प्लेक्स की क्षमताओं से काफी आगे निकल गई हैं। रूसी एयरोस्पेस रक्षा प्रणाली का आधार बनने के लिए एस-500 बेहद सक्षम है। साथ ही उन्होंने कहा कि रूसी सैनिकों को इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त करा दिया जाएगा। बता दें कि एस-500 प्रोमेथियस जमीन की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।</p>
<p><br />जिसकी मारक क्षमता 600 किलोमीटर (370 मील) है। यह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों और विमानों को रोकने और नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई मिसाइल-विरोधी रक्षा क्षमता के साथ एक सार्वभौमिक उच्च ऊंचाई वाला अवरोधन परिसर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 12:38:17 +0530</pubDate>
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