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                <title>शिक्षा का मतलब अर्थोपार्जन और डिग्रियां प्राप्त करना नहीं : इंदुमति </title>
                                    <description><![CDATA[कुलपति इंदुमति ताई काटदरे ने कहा कि शिक्षण में सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं तथा मनोवैज्ञानिक मुद्दों की समझ भी शामिल होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-does-not-mean-earning-money-and-getting-degrees-indumati%C2%A0/article-81712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(16)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पुनरुत्थान विश्वविद्यालय के कुलपति इंदुमति ताई काटदरे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल धन कमाना और डिग्रियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन का समग्र विकास होना चाहिए। वे अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या में आरंभ हुई तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शिक्षण में सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं तथा मनोवैज्ञानिक मुद्दों की समझ भी शामिल होनी चाहिए। आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति, डॉ. बिजेंद्र सिंह ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और पहलों पर प्रकाश डाला।</p>
<p>महासंघ के अखिल भारतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए संगठन के कार्य और उपलब्धियों को विस्तार से रखा। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख सुनील मेहता, महासंघ के संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री लक्ष्मण, महामंत्री शिवानंद सिंधनकेरा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jun 2024 11:38:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>खरीदे करोड़ों के वाहन, खर्चा निगम का, कमाई संवेदकों की</title>
                                    <description><![CDATA[शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा निभाने वाले नगर निगम ने करोड़ों रुपए के सफाई संसाधन  खरीदकर रख तो लिए। लेकिन उन्हें चलाने के लिए न तो चालक हैं और न ही मरम्मत करने की सुविधा। ऐसे में अधिकतर वाहनों को ठेके पर दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/buy-crores-of-vehicles--expenses-of-corporation--earning-of-applicants/article-19976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/kharide-karoro-ke-vahan,-kharcha-nigam-ka...kota-news-22.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा निभाने वाले नगर निगम ने करोड़ों रुपए के सफाई संसाधन खरीदकर रख तो लिए। लेकिन उन्हें चलाने के लिए न तो चालक हैं और न ही मरम्मत करने की सुविधा। ऐसे में अधिकतर वाहनों को ठेके पर दिया गया है। जिससे खर्चा तो नगर निगम का हुआ है और कमाई संवेदकों की हो रही है। कोटा में पहले एक ही नगर निगम था। जिसे कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में बांट दिया गया है। इसका कारण शहर को छोटे-छोटे वार्डों में बांटकर बेहतर सफाई का दावा किया जा रहा था। वार्डों और गली मौहल्लों में सफाई के नाम पर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी, निगम बजट व राज्य सरकार के बजट से करोड़ों रुपए के सफाई के वाहन व संसाधन खरीदे हैं। अधिकतर वाहन ऐसे हैं जिन्हें खरीदने के बाद से अभी तक उनका उपयोग तक नहीं किया गया है। निगम ने जो वाहन व मशीनरी खरीदी है उनकी मरम्मत व चलाने तक की व्यवस्था निगम के पास नहीं है। ऐसे में नगर निगम ने जितने भी वाहन क्रय किए हैं। उनमें से अधिकतर संवेदकों को मरम्मत व संचालन(ओ एण्ड एम) के नाम पर ठेके पर दे दिया है। जिस पर भी लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। रोड स्वीेपर का ही ठेका करोड़ों में,नहीं हो सका उपयोग नगर निगम में शहर की सफाई के नाम पर चार रोड स्वीेपर मशीनें राज्य सरकार द्वारा क्रय कर भेजी गई हैं। जिनमें से दो-दो मशीनें दोनों निगमों को दी गई है। जानकारी के अनुसार करीब 50 लाख रुपए की एक मशीन है। करीब दो करोड़ रुपए की इन मशीनों का आने के बाद से अभी तक ट्रायल के अलावा अधिक उपयोग तक नहीं हो सका है। जिससे ये मशीनें निगम के गैराज व दशहरा मैदान में धूल खा रही हैं। सूत्रों के अनुसार ये मशीनें दिल्ली की फर्म से क्रय की गई हैं। इन मशीनों के संचालन व मरम्मत का ठेका भी निगम ने संबंधित फर्म को ही दे दिया है। यह ठेका तीन साल के लिए दिया गया है। जिसमें प्रत्येक मशीन का तीन साल का ठेका 53 लाख रुपए का है। यानि 18 लाख रुपए सालाना और करीब डेढ़ लाख रुपए महीना। इस तरह से एक रोड स्वीपर मशीन को एक मशीने चलाने पर उसका खर्चा करीब डेढ़ लाख रुपए आएगा। जिसमें डीजल नगर निगम का होगा। जबकि मशीन के खराब होने पर उसकी मरम्मत व चालक संवेदक फर्म का होगा। सूत्रों के अनुसार दिल्ली की फर्म होने से इन मशीनों को चलाने के लिए चालक व मरम्मत की जरूरत होने पर मैकेनिकों की व्यवस्था कैसे होगी। यह बड़ा सवाल है।इसी तरह से नगर निगम कोटा उत्तर में सलपर सकर मशीन को भी ओ एण्ड एम पर लाखों रुपए महीने का ठेका किया गया है। लेकिन अभी तक भी उन मशीनों का उपयोग नहीं हुआ। जबकि निगम इन वाहनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुका है। कई अन्य वाहन भी उसी तरह से ठेके पर चलवाए जा रहे हैं। इसके बावजूद ये वाहन निगम की जमीन पर ही खड़े हो रहे हैं। उनकी न तो मरम्मत हो रही है और न ही उनका संचालन हो पा रहा है। सीवरेज मशीनें भी ठेके पर देने की योजना नगर निगम में अभी तक सीवरेज सफाई का काम मेनुअल हो रहा है। लेकिन अब डीएलवी व स्मार्ट सिटी के बजट से निगम में सीवरेज की मशीनें आ चुकी हैं। कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में करीब 20 से अधिक मशीनें हैं जिनकी क्षमता भी अलग-अलग है। सूत्रों के अनुसार अब इन मशीनों को भी ओ एण्ड एम के आधार पर चलाने की योजना है। जिसका भी टेंडर किया गया है। जिससे सीवरेज की सफाई मेनुअल की जगह इन मशीनों से होगी। कोटा दक्षिण में टिपर भी ठेके पर नगर निगम की हालत यह है कि घर-घर कचरा संग्रहण में लगे टिपरों को चलाने के लिए उनके पास चालक तक नहीं हैं। इस कारण से कोटा दक्षिण निगम के 80 वार्डों में दो-दो टिपरों के हिसाब से 160 टिपरों को ठेके पर चलाया जा रहा है। जिसमें टिपर निगम के हैं। जबकि उसके अलावा डीजल, मरम्मत व चालक संवेदकों के हैं। जिसकी एवज में निगम द्वारा संवेदकों को हजारों रुपए महीना संवेदक को भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं कोटा उत्तर निगम में टिपर संचालक का ठेका नहीं होने से उन्हें’ होमगार्ड व सिविल डिफेंस के जवानों से चलवाया जा रहा है। लेकिन ये टिपर दशहरा मैदान में खड़े हो रहे हैं। यूं हो रहा निगम को घाट मशीनें क्रय तो कर ली गई लेकिन इन्हें काम नहीं लिया जा रहा। ऐसे में प्रतिवर्ष इनका डेप्रिशियशन हो रहा है। इसके साथ इन्हें रखने को जगह नहीं होने से निगम की जमीन पर ही यह खड़ी हुई धीरे-धीरे कंडम हो जाएंगी। दशहरा मैदान में इन्हें रखा गया था । अब दशहरा मैदान के सुधार पर ही लाखों रुपए खर्च होंगे। यदि यह संवेदक के स्थान पर होती तो निगम को यह खर्चा वहन नहीं करना पड़ता। दूसरा जब मशीनें काम ली जाएंगी तो एमओयू ज्यादातर बाहर की फर्मों के साथ है उस स्थिति में उसके चालक और आॅपरेटर आएंगे तभी वह चल सकेगी। खड़ी हुई मशीन की नियमित देखभाल भी संवेदक कंपनी नहीं कर रही है। वह तो ठेका लेकर चली गई है। ऐसे में कुल मिलाकर सारा घाटा निगम के हिस्से में आएगा। इनका कहना है निगम के वाहनों को ओ एण्ड एम पर देने का मकसद है कि वाहनों का संचालन व मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित संवेदक की होगी। जिसकी एवज में निगम उसे भुगतान करेगा। लेकिन वह भुगतान तभी होगा जब वाहन चलेगा। बिना वाहन चले कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। नगर निगम कोटा दक्षिण में पानी के टैंकर, जेटिंग मशीन व ट्रेैक्टर ट्रॉलियों की जरूरत है। जिन्हे क्रय करने का प्रयास किया जा रहा है। - राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:43:32 +0530</pubDate>
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                <title>तेल का खेल भूल अब तीर्थयात्रा से नगदी कमाने में जुटा सऊदी</title>
                                    <description><![CDATA[रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/forgetting-the-game-of-oil--now-saudi-is-busy-earning-cash-from-pilgrimage/article-13889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/d-12.jpg" alt=""></a><br /><p>रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है। मौजूदा समय में तेल की उच्च कीमतों के बावजूद सऊदी अरब यह जानता है कि दुनिया वैकल्पिक ऊर्जा की ओर तेजी से मुड़ रही है। ऐसे में सऊदी प्रशासन ने भविष्य के लिए राजस्व के अपने स्रोतों में विविधता लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। उन स्रोतों में से एक तीर्थयात्रा है, जिस पर पूरी तरह से सऊदी अरब का एकाधिकार है। इस्लाम के दो सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल मक्का और मदीना सऊदी अरब में हैं और दुनियाभर के करी दो अरब मुसलमान अपनी पूरी जिंदगी में एक न एक बार इन दोनों जगहों की यात्रा जरूर करना चाहते हैं।<br /><br /><strong>2015 में सऊदी ने लॉन्च किया मिशन तीर्थयात्रा</strong><br />2015 में किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज के सत्ता में आने के तुरंत बाद सऊदी अरब ने मक्का में ग्रैंड मस्जिद का विस्तार करने के लिए 21 बिलियन डॉलर की परियोजना शुरू की थी। इसके जरिए मस्जिद में 300000 अतिरिक्त श्रद्धालुओं को समायोजित किया जाना था। इसके एक साल बाद तत्कालीन डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने तीर्थयात्रा को 2030 तक सऊदी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की योजना के एक प्रमुख घटक के रूप में पहचान दी। बहरीन के डेरासैट थिंक टैंक के डॉयरेक्टर आॅफ रिसर्च उमर अल-उबैदली ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के विपरीत हज और उमराह के क्षेत्र में सऊदी अरब को एकाधिकार प्राप्त है।<br /><br /><strong>10 लाख मुसलमानों की अगवानी करेगा सऊदी</strong><br />कोविड -19 प्रतिबंधों के कारण दो साल के अंतराल के बाद वार्षिक हज यात्रा करने के लिए दुनिया भर के मुसलमान इस सऊदी अरब पहुंचना शुरू हो गए हैं। यह मुसलमानों के लिए जीवन भर के धार्मिक दायित्व को पूरा करने का अवसर है, लेकिन साथ ही सऊदी अरब के पवित्र शहरों की अर्थव्यवस्था को हैवी बूस्ट मिलने का मौका भी है। कोरोना महामारी के कारण 2020 में सिर्फ सऊदी अरब के 1000 तीर्थ यात्रियों ने ही हज किया था, लेकिन 2021 में यह बढ़कर लगभग 60,000 हो गई थी। लेकिन, इस साल सऊदी ने हज के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए हैं। ऐसा अनुमान है कि इस साल 10 लाख मुसलमान अलग-अलग देशों से सऊदी अरब पहुंचेंगे।<br /><br /><strong>सऊदी के खजाने की चाबी बनेंगे मक्का-मदीना</strong><br />विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। सऊदी अरब हर दिन अरबों डॉलर का तेल बेचता है। वहीं, तीर्थयात्रा से होने वाला आर्थिक लाभ तेल की तुलना में बहुत कम है। लेकिन, यह ऐसा क्षेत्र है, जो आने वाले दिनों में सऊदी अरब के खजाने को भरने की चाबी बन सकता है। वॉशिंगटन में अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट के सीनियर स्कॉलर रॉबर्ट मोगिएलनिकी ने कहा कि सऊदी अरब में धार्मिक पर्यटन आने वाले कई दशकों तक तेल और गैस से होने वाली कमाई का मुकाबला नहीं कर सकता है। लेकिन, मक्का और मदीना का धार्मिक महत्व कभी भी खत्म नहीं होगा। ऐसे में ये दोनों शहर सऊदी पर्यटन क्षेत्र के निर्माण और स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।<br /><br /><br /><strong>तीर्थयात्रा से हर साल अरबों डॉलर कमा रहा सऊदी</strong><br />लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एसोसिएट प्रोफेसर स्टीफन हर्टोग ने बताया कि हज के जरिए सऊदी अरब के पर्यटन के क्षेत्र में विकास की अनगिनत संभावनाएं हैं। तीर्थयात्रियों को अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने या मनोरंजन के लिए आकर्षित किया जा सकता है। उमराह के दौरान भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर पर्यटन के बाजार को और मजबूत और साल भर प्रॉफिट देने वाला बनाया जा सकता है।  2018 में मक्का ने पर्यटकों के जरिए 20 बिलियन डॉलर का ट्रांजेक्शन किया था। यहां आंकड़ा दुबई के बाद दूसरे नंबर पर है। सऊदी अरब का तीर्थयात्रा राजस्व औसतन लगभग 30 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष था। तब 2022 तक सउदी के लिए 100,000 रोजगार पैदा करने का अनुमान लगाया गया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महामारी से पहले हर साल 10-दिवसीय हज और उमराह तीर्थयात्रा के दौरान सऊदी अरब में 2 करोड़ 10 लाख तीर्थयात्री हर साल पहुंचते थे। महामारी के दौरान तीर्थयात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन सरकार 2030 तक हर साल 3 करोड़ तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने की प्लानिंग कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 13:29:11 +0530</pubDate>
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                <title>फिर आम आदमी नाचेगा बिचौलियों की अंगुलियों पर</title>
                                    <description><![CDATA[गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया।  स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। 

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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/then-the-common-man-will-dance-on-the-fingers-of-middlemen/article-11461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aam-aadmi-ko-milega-expensive-wheat.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया। स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। वर्तमान में कम दाम में खरीदे गेहूं को अधिक दाम में बेचकर व्यापारी भारी मुनाफा कमा रहे हैं।  हाड़ौती में हर साल गेहूं की बम्पर पैदावार होती है। हालांकि इस साल तेज गर्मी के कारण उत्पादन क्षमता में कुछ प्रभाव पड़ा था। इसके बावजूद बाजार में बिक्री के लिए गेहूं की आवक शुरू होते ही दामों में तेजी आ गई थी। अमूमन 1800 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाले गेहूं के दाम इस बार 2100 से 2200 के बीच बोले गए, जबकि समर्थन मूल्य पर गेहूं के दाम 2015 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किए गए थे। व्यापारी वर्ग ने इसका भरपूर फायदा उठाया और थोड़े दाम बढ़ाकर किसानों का सारा गेहूं खरीद लिया। इसका नतीजा यह रहा कि हाड़ौती क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई।<br /><br /><strong>और घटाना पड़ गया कोटा</strong><br />हर साल अधिकांश किसान अपनी उपज का उचित दाम प्राप्त करने के लिए सरकारी खरीद केन्द्र पर गेहूं बेचने की कोशिश करता था। इसकी प्रक्रिया काफी जटिल होने के बावजूद किसान का यही प्रयास रहता था कि उसका गेहूं सरकारी खरीद केन्द्र पर ही बिके, लेकिन इस बार गेहूं खरीद की गणित पूरी तरह से बिगड़ गई है। व्यापारी वर्ग ने पहले से ही अधिक दाम लगाकर किसानों का सारा माल खरीद लिया। ऐसे में सरकारी खरीद ठप हो गई। इसके चलते केन्द्र सरकार ने देश में गेहूं खरीद का कोटा घटाकर 195 लाख टन कर दिया, जो पिछले साल की तुलना में 55 फीसदी कम था। इससे व्यापारियों को भी फायदा हुआ। <br /><br /><strong>ऐसे हुई व्यापारियों की मौज</strong><br />गेहूं का उत्पादन और गुणवत्ता कमजोर होने का सीधा फायदा व्यापारियों को मिला। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की दर 2015 रुपए प्रति क्विंटल थी। इसी का फायदा व्यापारियों ने उठाया और किसानों से अच्छी गुणवत्ता वाला गेहूं भी 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीद लिया। उसके बाद अपने पास स्टॉक कर लिया। उस समय काफी मात्रा में गेहूं देश से बाहर निर्यात किया जा रहा था। ऐसे में व्यापारियों ने किसानों से खरीदा अधिकांश माल विदेशों में भेज दिया। इसका फायदा भी व्यापारियों को मिला। वहीं निर्यात के चलते स्थानीय स्तर पर गेहूं के दामों में और इजाफा हो गया, जिससे आमजन में हाहाकार मच गया। गेहूं के दामों पर लगाम के लिए केन्द्र सरकार को निर्यात पर प्रतिबंध तक लगाना पड़ा। इसके बावजूद दामों में ज्यादा कमी नहीं आई।<br /><br /><strong>मुनाफाखोरी का खेल</strong><br />कृषि उपजमंडी में किसानों का गेहूं 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीदा गया था। व्यापारियों ने सारा गेहूं खरीदकर अपने यहां स्टॉक कर लिया। उसके बाद मुनाफाखोरी का खेल शुरू कर दिया। व्यापारियों ने अपने स्तर पर गेहूं के दाम बढ़ा दिए और आमजन को 2500 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा। व्यापारी को एक क्विंटल पर ही करीब 400 रुपए का भारी मुनाफा हो गया। कृषिमंडी से निकला गेहूं आमजन तक पहुंचने तक 400 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हो गया। <br /><br /><strong>सफाई के नाम पर धोखा</strong><br />लोगों का कहना है कि बाजार में इस समय गेहूं 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा है। इतने अधिक दाम होने के बारे में व्यापारी बताता है कि किसानों से खरीदे गए गेहूं की क्वालिटी काफी खराब होती है, इसलिए उस गेहूं की सफाई करवाई जाती है। इसलिए अधिक दाम लगाने पड़ते है। लोगों का कहना है कि मशीन क्लीन गेहूं के नाम से लूटमार की जा रही है। गेहूं को क्लीन करने में इतना खर्चा नहीं आता है इसके बावजूद सफाई के नाम पर दाम अधिक लगाए जाते है।  <br /><br /><strong>इतना महंगा गेहूं कभी नहीं खाया</strong><br />परिवार के लिए हर साल आठ बोरी गेहूं लेते हैं। इस बार गेहूं के दामों ने सकते में ला दिया है। आठ बोरी गेहूं ही बीस हजार रुपए से अधिक के आ गए। इससे पूरे घर का बजट ही गड़गड़ा गया है। व्यापारी मशीन क्लीन के नाम पर लोगों से धोखा करते हैं। ज्यादा रुपए लेने के बाद भी गेहूं में कंकर व अन्य गंदगी मिली हुई थी।<br /><strong>- दुर्गाप्रसाद शर्मा, जयश्रीविहार</strong><br /><br />परिवार में दस सदस्य हैं, इसलिए सालभर का गेहूं एक साथ खरीद लेते हैं। इस साल तो  गेहूं काफी महंगा पड़ गया। कोरोना महामारी के चलते व्यवसाय पहले से ही ठप था। अब महंगे गेहूं की और स्थिति बिगाड़ दी। मजबूरी में गेहूं खरीदने की मात्रा कम करनी पड़ी। अगर आगे दाम कम होंगे तो और गेहूं खरीद लेंगे।<br /><strong>- रामभरोस सुमन, ग्रीन होम सोसायटी</strong><br /><br />भामाशाहमंडी में किसानों को इस बार गेहूं के दाम अधिक मिले थे। इससे किसानों को फायदा हुआ था। अधिकांश किसानों ने व्यापारियों को ही माल बेचा था। इसके बाद माल की दर व्यापारी अपने हिसाब से ही तय करता है।<br /><strong>- जवाहरलाल नागर, भामाशाहमंडी सचिव</strong><br /><br />गेहूं के दामों में इजाफा होने से इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई है।  कोटा संभाग में गेहूं खरीद के लक्ष्य तय किए गए थे, लेकिन बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक दाम होने से केन्द्रों पर खरीद नहीं हो पाई। <br /><strong>- सतीश कुमार, मण्डल प्रबंधक, एफसीआई कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jun 2022 15:42:59 +0530</pubDate>
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                <title> महिलाएं जब 10 हजार कमाने लगेगी, तब लगेगा काम कर रहे अधिकारी व सरकार : मीणा</title>
                                    <description><![CDATA[ ग्रामीण विकास व पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि राजीविका परियोजना के अंतर्गत जिले में बने हुए समूहों से जुड़ी प्रत्येक महिला जिस दिन दस हजार रुपए प्रति माह कमाने लग जाएगी तो हमें लगेगा कि राजस्थान में हमारी सरकार और अधिकारी काम कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--when-women-start-earning-10-thousand--then-it-will-take-working-officers-and-government--meena/article-8751"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/m4.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। ग्रामीण विकास व पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि राजीविका परियोजना के अंतर्गत जिले में बने हुए समूहों से जुड़ी प्रत्येक महिला जिस दिन दस हजार रुपए प्रति माह कमाने लग जाएगी तो हमें लगेगा कि राजस्थान में हमारी सरकार और अधिकारी काम कर रहे हैं।</p>
<p><br />वे बुधवार को यहां राजीविका परियोजना के तत्वावधान में गांधी ग्राउंड में आयोजित स्वयं सहायता समूहों के संबल संवाद कार्यक्रम में जिले भर से शरीक हुई करीब बारह हजार महिलाओं को संबोधित कर रहे थे। पंचायतीराज मंत्री मीणा ने कहा कि जिले की 658 ग्राम पंचायतों में से 651 ग्राम पंचायतों में राजीविका के सदस्य समूह बनाए जा चुके हैं। जिले के 2187 गांवों में 20 हजार 203 समूह काम कर रहे हैं। जिले सक्रिय इन समूहों से कुल दो लाख 46 हजार महिलाएं जुड़कर लाभांवित हो रही हैं। जिले में 10361 समूहों को बैंकों से ऋण मिल चका है। पंचायती राज मंत्री मीणा ने खुलकर संवाद करते हुए जब पूछा कि पांडाल में उपस्थित महिलाओं में से कितनी महिलाएं बीस हजार रुपए कमाती हैं, तो कुछ ने ही अपने हाथ ऊपर खड़े किए। जब उन्होंने पूछा कि दस हजार रुपए कितनी महिलाएं कमाती हैं तो पहले से कुछ ज्यादा महिलाओं ने हाथ ऊपर किए। तीसरी बार पूछा कि पांच हजार रुपए कितनी महिलाएं कमाती हैं तो दूसरी बार से भी ज्यादा महिलाओं ने हाथ खड़े किए। इस पर मंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि पांडाल में उपस्थित सभी महिलाएं जब एक साथ हाथ ऊपर उठाएंगी तो और ज्यादा अच्छा लगेगा। उन्होंने कहा कि जब तक मिशन का सपना पूरा नहीं होगा वे राजीविका के अधिकारियों, विकास अधिकारी, जिला कलक्टर से कहना चाहते हैं कि जो समूह बना है उस समूह में प्रत्येक महिला लोन ले और प्रत्येक महिला अपना काम करने लग जाए।  सरकार महिला समूहों के लिए अब महिला बैंक बनाने जा रही है जिनका संचालन महिलाओं के हाथों में ही होगा। इसके लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया है। समस्याओं को दूर करने के लिए जल्द ही एक हेल्पलाइन शुरू की जाएगी।</p>
<p><br />राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेहाना रियाज चिश्ती ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों की सराहना की। वल्लभनगर विधायक प्रीति  शक्तावत ने कहा कि सरकार के प्रयासों से आज विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं विशेष मुकाम हासिल कर आत्मनिर्भर बनी है। देरी से पहुंचने की माफी मांगते हुए धरियावद विधायक नगराज मीणा ने कहा कि राजीविका के कार्यों से आदिवासी अंचल की महिलाएं आज आत्मनिर्भर हुई हैं। <br />राज्य मिशन निदेशक मंजू राजपाल ने कहा कि महिलाएं सुरक्षा सखी, सेवा सखी, संबल सखी और स्टार्टअप सखी बने। ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग के शासन सचिव केके पाठक ने  जिले में हो रही गतिविधियों को ब्रांड बनाकर आगे पहुंचाने का आव्हान भी किया। कलक्टर ताराचंद मीणा ने जिले में महिला समूहों को प्रोत्साहन देने के बारे में जानकारी दी। सेव द गर्ल चाइल्ड की ब्रांड एंबसेडर डॉ. दिव्यानी कटारा और पुलिस उपाधीक्षक चेतना भाटी ने भी  संबोधित किया। कार्यक्रम में पंचायत राज निदेशक ओम कसेरा, जिला परिषद सीईओ मयंक मनीष सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और महिलाएं मौजूद थी।</p>
<p><br /><strong>भावुक हुई भावना</strong> <br />महिला समूह की सदस्य भावना को मौका मिला तो भावुक हो उठी और कहा कि पहले घूंघट में रहते हुए मजबूरी में नरेगा में काम करना पड़ता था, लेकिन राजीविका के माध्यम से संबल मिला तो उस जैसी कई महिलाओं को संबल मिला और विशिष्ट पहचान के साथ सम्मान भी मिल रहा है।</p>
<p><br /><strong>माया ने कहा, कभी 20 नहीं गिने</strong><br />अन्य एक समूह की सदस्य माया देवी ने बताया कि पहले उसने अपने जीवन में कभी बीस रुपए नहीं गिने लेकिन आजीविका परियोजना के माध्यम से समूह से जुड़ी तो अब वह 20 हजार रुपए तक गिन लेती हैं।</p>
<p><br /><strong>अतिथियों ने सराहे उत्पाद</strong><br />आयोजन स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी में महिला समूहों द्वारा उत्पादित शहद, आचार, मशरूम, चप्पलें, अगरबतती व अन्य वनोपज सामग्री का अवलोकन करते हुए अतिथियों ने खूब सराहा। राजीविका द्वारा प्रकाशित पुस्तिका कदम: राजीविका से आजीविका की ओर का विमोचन भी किया गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Apr 2022 11:46:03 +0530</pubDate>
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