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                <title>earthen - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्वदेशी से सजा कोटा का बाजार : दीपावली पर रहेगी मेक इन इंडिया की चमक, मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग</title>
                                    <description><![CDATA[स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय  कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-s-markets-are-adorned-with-indigenous-products--the-make-in-india-glow-will-shine-this-diwali--with-increased-demand-for-earthen-lamps/article-129004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। त्योहारों के इस मौसम में जब बाजार विदेशी वस्तुओं से भरे पड़े हैं, तब कोटा में स्वदेशी उत्पादों की मांग ने नई दिशा दिखाई है। मेक इन इंडिया की भावना को आगे बढ़ाते हुए शहर के बाजारों में देसी वस्तुएं ग्राहकों की पहली पसंद बन चुकी हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर स्वदेशी दीयों, देशी लाइटों और हस्तनिर्मित सजावट सामग्री के साथ कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स तक में स्वदेशी को लोग   प्राथमिकता में रख रहे हैं। लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश में निर्मित वस्तुओं को अपनाने से स्थानीय उद्योगों को बल मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस दीपावली पर कोटा के बाजारों में विदेशी नहीं, स्वदेशी दीयों व लाइट की रोशनी ज्यादा चमकेगी।</p>
<p><strong>मिट्टी के दीयों की चमक बरकरार</strong><br />कोटा के कुम्हारों के मोहल्ले में दीपावली से पहले मिट्टी के दीये बनाने का काम जोरों पर है। धनराज प्रजापत, जो पिछले 35 वर्षों से यह काम कर रहे हैं, बताते हैं कि हर दिन 500 से 1000 दीये बिक जाते हैं। ग्राहकों में दीयों के प्रति उत्साह इतना है कि बूंदी और नेमवा से कच्चा माल मंगवाना पड़ रहा है। छोटे-बड़े हर आकार के दीये तैयार कर रहे हैं। साथ ही करवा, कलश और मटकियों की बिक्री भी बढ़ी है।</p>
<p><strong>स्वदेशी उत्पादों से लोगों को मिल रोजगार</strong><br /> स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। मिट्टी के दीये हो या हस्तनिर्मित तोरण और जैविक रंग—शहर के बाजारों में देसी उत्पादों की चमक बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी की स्वदेशी अपनाओ मुहिम से प्रेरित होकर लोग अब देश में बने उत्पादों को अपनाने में गर्व महसूस कर रहे हैं।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, व्यापार महासंघ </strong></p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में स्वदेशी उत्पादों का बोलबाला</strong><br />कोटा के इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में इन दिनों दीपावली की रौनक देखते ही बनती है। दुकानदारों के अनुसार ग्राहक अब मेड इन इंडिया टैग वाले उत्पाद ही मांग रहे हैं। हमारे पास देसी और विदेशी दोनों तरह की लाइटें हैं, लेकिन ग्राहक अब स्वदेशी लाइटों को प्राथमिकता देते हैं। अहमदाबाद और इंदौर से मंगवाई गईं देसी लाइटें टिकाऊ और मरम्मत योग्य हैं, इसलिए लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं।<br /><strong>-अभिषेक सोनी, इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी</strong></p>
<p><strong>पानी वाले दीयों की मांग बढ़ी</strong><br />इस बार पानी वाले दीये, थ्री चीप सीरिज, 8 एमएम सीरिज और मल्टी रोप लाइटों की भारी मांग है। ग्राहक दस गुणा दस झरना और डिस्को बल्ब जैसे आकर्षक मॉडल भी खरीद रहे हैं। बाजारों में दीपावली को लेकर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। <br /><strong>-घनश्याम आहुजा, व्यापारी</strong></p>
<p><strong>ग्राहकी हुई दोगुनी</strong><br />कुन्हाड़ी रोड की 60 वर्षीय शायरादेवी बताती हैं कि दीपावली और करवा चौथ पर उनकी ग्राहकी दोगुनी हो गई है। बूंदी से तैयार माल मंगवाकर बेच रहे हैं। शाम को ग्राहकों की भीड़ रहती है। करवा की बिक्री भी जोर पर है। यह काम हमारी पुश्तैनी परंपरा का हिस्सा है।</p>
<p><strong>स्वदेशी लाइटों की डिमांड बढी</strong><br />शहर में दीपावली पर्व को लेकर मेक इन इंडिया के उत्पादों को क्रेज बढ़ रहा है। बाजार में इन दिनों चीनी उत्पाद भी मौजूद है जो काफी सस्ता है लेकिन आने वाले ग्राहक अधिकतर स्वदेशी उत्पाद को ही पसंद कर रहे है। पानी वाला दीया जो पानी से चलता है लोग काफी पसंद कर रहे है। वहीं मल्टी रोप लाइट को भी पसंद कर रहे है।<br /><strong>-मुकेश आहुजा, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:07:19 +0530</pubDate>
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                <title>घरों से दूर हो रही मटकियां व मिट्टी के बर्तन, मटकी के पानी के गुणों को नहीं समझ पा रहे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[भट्टी का यदि लोन मिल जाए तो हमारे व्यवसाय को अच्छी प्रकार से गति मिल सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/matkis-and-earthen-pots-are-going-away-from-homes/article-105185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)50.png" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। गर्मी के मौसम में लंबे समय से घरों में मटकी के पानी ही पीया जाता था। लेकिन आधुनिक समय में लोग मिट्टी से बनी मटकियों से दूरी बना रहे है। जिससे मटकों के व्यवसाय पर भी इसका असर पड़ रहा हैं। हमारे पूर्वज मटके के पानी के अनमोल गुण को अच्छी प्रकार से जानते थे लेकिन धीरे-धीरे समय बदला आज घरों में मटकी की जगह फ्रिज अपना स्थान बना रहा है लेकिन आमजन प्राकृतिक मटकी के ठंडे पानी के गुण एवं फ्रिज के पानी के अवगुणों को ठीक प्रकार से नहीं समझ पा रहे हैं वहीं अब मटकी का व्यवसाय करने वाले कमजोर पड़ने लग गए हैं । आज इस व्यवसाय को एवं मिट्टी के बर्तनों के लाभ को आमजन को बताने की सख्त आवश्यकता है । मटकी बना रहे विष्णु प्रजापत निवासी श्रीपूरा ने  बताया मटकी, घड़ा, कलश, दीपक बनाता हूं थोक के भाव से इसको बेचते भी हैं कोई ग्राहक सीधा हमारे पास आता है। उसको भी देते हैं  करीब 23 वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं। परिवार में मां, दो भाई और बच्चे भी हैं। आमजन में मिट्टी के बर्तन के गुणों की जानकारी के अभाव में धंधा कमजोर पड़ रहा है। केवल हमारा खर्चा पानी ही चलता है। सरकार से भी कोई किसी प्रकार का हमारे व्यवसाय को आगे बढ़ाने हेतु अभी तक कोई सहायता नहीं मिला है। भट्टी का यदि लोन मिल जाए तो हमारे व्यवसाय को अच्छी प्रकार से गति मिल सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना हैं</strong><br /> कोरोना काल से पूर्व सभी फ्रिज का पानी पीते थे लेकिन अब संपूर्ण परिवार सादा पानी पीता है। गर्मी के मौसम में मटकी का प्रयोग करते हैं वर्तमान समय में मिट्टी के बर्तनों की उपयोगिता आमजन को बताने की सख्त आवश्यकता हैं। <br /><strong>-  ग्रामीण नरेंद्र गौतम, अरनेठा </strong></p>
<p>घर में मटकी भी है और फ्रिज भी है। परिवार के कुछ सदस्य फ्रिज का ठंडा पानी पीते हैं और कुछ मटकी का ठंडा पानी पीते हैं। मैं बचपन से ही गर्मी के मौसम में मटकी का पानी ही पीता हूं। परिवार के अन्य सदस्यों को मटकी के पानी के गुण एवं फ्रिज के ठंडे पानी के अवगुण बता दिए हैं । भविष्य में हमारे घर में अब मटकी के पानी का ही प्रयोग होगा  । मिट्टी के बर्तन का पानी हमारे शरीर को बिना नुकसान किए ठंडक पहुंचता हैं । पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता हैं। <br /><strong>- महावीर राव ग्रामीण अरनेठा </strong></p>
<p>लंबे समय से सादा पानी पी रहा हूं । पहले पैरों में दर्द होता था जब से सादा पानी पी रहा हूं किसी प्रकार का कोई दर्द नहीं है। उसकी केवल फिल्टर करके पीते हैं । हम सभी को नॉर्मल पानी पीना चाहिए इससे स्वास्थ्य ठीक रहता है।  <br /><strong> - बजरंग लाल  मेघवाल, अरनेठा </strong></p>
<p>हम सभी को मिट्टी के बर्तन का पानी ही पीना चाहिए। इसके पानी से कब्ज, गैस की शिकायत नहीं होती है। पाचन क्रिया भी ठीक रहती है । इसके पानी से शरीर का पीएच लेवल भी ठीक रहता है । गला खराब नहीं होता है। अम्ल पित्त की समस्या भी नहीं होती है । शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं। सिरदर्द की समस्या दूर हो जाती है।  शरीर हमेशा ऊजार्वान बना रहता है। गर्मी में मिट्टी के बर्तन का  ,सर्दी और बारिश में तांबे या पीतल के बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए।<br /><strong> - डॉक्टर जय नारायण स्वामी आयुर्वैदिक औषधालय अरनेठा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 16:47:53 +0530</pubDate>
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                <title> मिट्टी की खदान ढहने से महिला की मौत, दूसरी गंभीर घायल</title>
                                    <description><![CDATA[पारसोली थाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव में मिट्टी की खदान में दबने से एक महिला की मौत हो गई जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसे उपचार के लिए जिला मुख्यालय पर रेफर किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/chittorgarh/woman-dies-due-to-earthen-mine-collapse--another-seriously-injured/article-8753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/m2.jpg" alt=""></a><br /><p>चित्तौड़गढ़/बस्सी। पारसोली थाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव में मिट्टी की खदान में दबने से एक महिला की मौत हो गई जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसे उपचार के लिए जिला मुख्यालय पर रेफर किया गया। जानकारी के अनुसार लाली पत्नी गणेश गुर्जर व बदाम पत्नी मांगी लाल गुर्जर सुबह घर के  नजदीक स्थित मिट्टी की खदान में मिट्टी लेने पहुंची जहां खुदाई करते वक्त खदान ढहने दोनों दब गई।    इस हादसे में लाली पत्नी गणेश गुर्जर की मौत हो गई। सूचना मिलते ही क्षेत्र में हडकंप मच गया। मौके पर सैकड़ों लोग पहुंच गए। सूचना पर एंबुलेंस की सहायता से दोनों को पारसोली सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया। हालत गंभीर होने पर बादाम गुर्जर को जिला मुख्यालय पर रेफर किया गया है। बता दें कि भुमाफियाओं द्वारा क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबार लंबे समय से धड़ल्ले से किया जा रहा है। जिससे खदानें गहरी हो गई है। बता दें कि महिलाएं खदान से मिट्टी खोद रही थी। 10 फीट गहरी खदान में खोदते समय अचानक मिट्टी ढह गई। जिससे दोनों महिलाएं नीचे दब गई। सूचना मिलने के बाद लोगों ने महिलाओं को खदान से बाहर निकाला। वहीं लाली गुर्जर की हालत ज्यादा गंभीर होने से चित्तौड़गढ़ से उदयपुर रेफर किया गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चित्तौड़गढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Apr 2022 11:53:11 +0530</pubDate>
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