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                <title>electricity crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>electricity crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर अखिलेश यादव का हमला: ‘प्रीपेड पीड़ित’ शब्द दिया नया नाम, बिजली कंपनियों और सरकार के बीच मिलीभगत का लगाया आरोप</title>
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                        <![CDATA[सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर की खामियों पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि खाते में पैसे होने के बावजूद बिजली गुल होना 'डिजिटल अन्याय' है। अखिलेश ने उपभोक्ताओं को 'उपभुगता' बताते हुए आरोप लगाया कि सरकारी मिलीभगत से जनता परेशान है। उन्होंने वादा किया कि सपा सरकार आने पर पारदर्शी बिजली व्यवस्था लागू होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadavs-attack-on-smart-prepaid-electricity-meters-new-name/article-149186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर के एकाउंट में पैसे होने के बावजूद बत्ती गुल होने को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश में ‘प्रीपेड पीड़ित’ नाम की एक नई श्रेणी पैदा हो गई है। रविवार को सोशल मीडिया के जरिए अखिलेश यादव ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने पहले से ही बिजली के लिए भुगतान कर दिया है, वे भी स्मार्ट मीटर की खामियों के चलते बिजली कटौती और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे हैं। </p>
<p>अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब बिजली कंपनियों को पहले ही पैसा मिल जाता है, तो फिर आम जनता को परेशान क्यों किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियों और सरकार के बीच तालमेल की कमी या मिलीभगत के कारण आम उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। इसके चलते लोग बार-बार शिकायत करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार में जनता ‘उपभोक्ता’ से ‘उपभुगता’ बन गई है, जिसे नीतियों की खामियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने ‘पीडीए’ (पीड़ित, दलित, अल्पसंख्यक) का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब ‘प्रीपेड पीड़ित’ भी इसमें शामिल हो गए हैं।</p>
<p>अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और आने वाले समय में स्थिति बदलेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार बनने पर बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हित में बनाया जाएगा, जिससे लोगों को राहत मिल सके।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 18:23:19 +0530</pubDate>
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                <title>प्रतिदिन 147 लाख यूनिट बिजली का बैंकिंग समझौता न होता तो आज प्रदेश में पर्याप्त बिजली होती : नागर</title>
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                        <![CDATA[बीकानेर में कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध में एईएन कार्यालय ड्रिप लगाकर पहुंचे और मरीज की तरह लेटकर विरोध जताया। प्रदेश में डिमांड और सप्लाई में 600 मेगावाट से अधिक अंतर बना हुआ है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/had-there-not-been-a-banking-agreement-for-147-lakh/article-79737"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/heera-lal-nagar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जारी बिजली संकट पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा है कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के पांच साल के कुप्रबंधन के कारण हमें जर्जर बिजली तंत्र मिला था। पूर्व सरकार में छोड़ी कमियों को दुरुस्त करने के लिए भजनलाल सरकार बेहतर प्रबंधन और एक्सचेंज से बिजली खरीदकर निर्बाध बिजली आपूर्ति के प्रयास कर रही है।</p>
<p>नागर ने कहा कि कांग्रेस सरकार में महंगी दरों पर एक्सचेंज से बिजली खरीदी गई। कुप्रबंधन के कारण बिजली कंपनियां 88,700 करोड़ के लोन के साथ दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई और बिजली कपंनियों पर एक लाख 30 हजार 200 करोड़ रुपए से अधिक कर्ज हो गया। समय पर लोन नहीं चुका पाने के कारण 300 करोड़ की पैनल्टी भी लगाई गई,जबकि वसुधंरा राजे सरकार(2013-2018) में बिजली कपंनियों के 62 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज अपने ऊपर लेकर कर्ज से मुक्ति दिलाई थी। हमारी सरकार ने वर्तमान में 31 हजार 825 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन की विभिन्न परियोजनाओं सहित ऊर्जा क्षेत्र विकास के लिए 1.60 लाख करोड़ निवेश के एमओयू किए हैं। पूर्ववर्ती सरकार ने बैंकिग व्यवस्था के तहत 2023 के सितम्बर में रबी सीजन में अन्य राज्यों से बिजली एग्रीमेंट किया, जिसके तहत अब हमें बिजली लौटानी पड़ रही है। गहलोत सरकार के खराब निर्णय के कारण रोजाना 147 लाख यूनिट बिजली लौटानी पड़ रही है। </p>
<p><strong>बिजली संकट : कई जिलों में प्रदर्शन, कई विधायकों ने दी चेतावनी</strong><br />प्रदेश में जारी बिजली संकट पर लोगों में आक्रोश बरकरार है। कई जिलों में बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए तो कई जगह विधायकों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं काली सिंध थर्मल एक यूनिट शुरू होने के बाद दूसरी यूनिट में खराबी आने से संकट का हल नहीं निकल पाया है। कालीसिंध की सात दिन पहले बंद हुई एक थर्मल इकाई शुरू होने से कुछ राहत मिली तो इसी बीच दूसरी यूनिट से उत्पादन ठप हो गया। दौसा में पावर स्टेशन में आग लग जाने से कई इलाकों में बिजली सप्लाई बाधित हुई। नागौर में लाड़नूं विधायक मुकेश भाकर ने बिजली संकट पर लोगों की परेशानी देखते हुए प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। पाली में ट्रांसफॉर्मर में आग लगने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई। धौलपुर में दस से 12 घंटे कटौती से लोग बिजली अफसरों के पास शिकायत करने पहुंचे। कोटा में प्राइवेट बिजली कंपनी के खिलाफ आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन किया। बीकानेर में कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध में एईएन कार्यालय ड्रिप लगाकर पहुंचे और मरीज की तरह लेटकर विरोध जताया। प्रदेश में डिमांड और सप्लाई में 600 मेगावाट से अधिक अंतर बना हुआ है। </p>
<p><strong>बेनीवाल ने पीड़ा सरकार तक पहुंचाई</strong><br />राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी प्रमुख हनुमान बेनीवाल नागौर जिले सहित प्रदेश भर में बिजली संकट को लेकर राज्य सरकार के जिम्मेदारों से मुलाकात कर रहे हैं। बेनीवाल ने पिछले दो दिनों में मुख्य सचिव सुधांश पंत, राजस्थान डिस्कॉम चेयरमैन भानुप्रकाश एटरू, अजमेर डिस्कॉम एमडी केपी वर्मा से अघोषित बिजली कटौती के संबंध में चर्चा की। लोगों की पीडा का जल्दी निवारण नहीं हुआ तो आरएलपी सड़कों पर उतरकर विरोध जताएगी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 11:46:51 +0530</pubDate>
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                <title>जलदाय मंत्री जनता की पीड़ा का उड़ा रहे मजाक, भारत भ्रमण से निकलकर जनता की सुध ले सरकार : डोटासरा</title>
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                        <![CDATA[ राजस्थान में मुख्यमंत्री, मंत्री और नौकरशाही में समन्वय नहीं है। जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-responsible-water-supply-minister-is-making-fun-of-the/article-79647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(7)18.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के बालाजी वाले बयान पर हमला बोलते हुए कहा कि मंत्री ने जनता की पीड़ा का मजाक उड़ाया है। हमने बिजली, पानी, चिकित्सा और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर राज्यपाल से भी मुलाकात कर व्यवस्थाओं को सुधारने का आग्रह किया है। पीसीसी में मीडिया से बात करते हुए डोटासरा ने कहा कि लोकसभा का एक और आखिरी चरण बचा है। माहौल से तस्वीर साफ है कि देश में इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी। मोदी ने हर बार नए मुद्दे लाकर चुनाव लड़ने आते हैं, लेकिन इस बार जनता ने नकार दिया है। राजस्थान में मुख्यमंत्री, मंत्री और नौकरशाही में समन्वय नहीं है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।</p>
<p>प्रदेश में 55 डिग्री तापमान में जनता त्राहि कर रही है और मुख्यमंत्री, मंत्री भ्रमण कर रहे है। ऊलजुलूल जवाब दे रहे हैं। पानी बिजली है नहीं और जिम्मेदार मंत्री क्या बोल रहे हैं। जलदाय मंत्री ने जो बयान दिया, उन्होंने कैसे हवा में उड़ा दिया जनता की पीड़ा को, यह शर्म की बात है। लोगों की पीड़ा का निदान करने की जगह औचक निरीक्षण के अलावा कुछ आया नहीं है। यही कारण है कि राज्यपाल से मिलकर आग्रह किया है कि चुनी हुई सरकार तो भारत भ्रमण कर रही है। ऐसे में राज्यपाल इन परिस्थितियों में अपने हाथ में ले, क्योंकि 10 से 15 मौत हुई है और ये आपस में कह रहे कि 1 हुई 2 हुई हैं। राज्यपाल ने कहा है कि इस पर मुख्य सचिव से बात की है। अगर अब भी सरकार जनता की पीड़ा नहीं सुनती है, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।</p>
<p>शेखावाटी विश्वविद्यालय से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे पर राज्यपाल से कहा है कि वह कुलाधिपति है, इसलिए इस मुद्दे को देखें। विश्वविद्यालय की परीक्षा है, कई विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री दे रहे है, लेकिन फर्जी डिग्री वाले नौकरी पा गए। ऐसे में मैंने आग्रह किया कि चाहे फर्जी डिग्री से अब बने हो या पहले बने हो। हमारे समय उसे नौकरी से बाहर करे। पानी बिजली के मुद्दे पर सरकार में ही नेताओं के अलग-अलग बयानों पर कहा कि सरकार से मांग करता हूं कि आपस में नीचा दिखाने की जो होड़ चल रही है, उसे 4 जून तक विराम दें और लोगो को बिजली पानी का प्रबंध करे। आचार संहिता का बहाना ना लें। सरकार कर्मचारियों को जबरन हटाने के आदेश पर कहा कि जब कानून और नियमो में प्रवधान है, तो कही राजनीतिक द्वेषता तो आदेश नहीं निकल रहे, ये शंका है। कोई व्यक्ति काम नहीं करता है तो नियम है उस पर कार्रवाई करे। ये दोबारा इस तरह की बात कर रहे है, तो लग रहा है कि कही कोई राजनीतिक द्वेषता तो नहींं है।</p>
<p>सीएम भजनलाल को भारत भ्रमण से लौटकर जनता के काम करने चाहिए। फोटो खिंचवाकर कुछ नहींं होगा। राजस्थान की जनता ने 5 साल का मौका दिया है, लेकिन वह काम तो करे, जो कन्टीनजेन्सी प्लान गर्मी से पहले बनना था। वह आपसी अंतर्कलह के चलते प्लान नहीं बना है। देश में एनडीए के माहौल पर कहा कि हिंदुस्तान की वर्तमान सरकार का ही मोरिया बोल रहा है। उनकी सरकार आ नहीं रही है। प्रधानमंत्री जो बयान दे रहे उससे पद की गरिमा तार-तार हुई है। राजस्थान में सरकारी प्रबंधन को लेकर कहा कि जब सरकार डबल जीरो लेकर घूम रही है, तो इनको नम्बर कंहा से दे। मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि ओबीसी आयोग ने जो रिकमंडेशन दे उस आरक्षण को वापस ले ले। मुस्लिमों को कोई धर्म के आधर पर आरक्षण नहींं दिया, आवश्यकता होने पर दिया है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 28 May 2024 19:15:21 +0530</pubDate>
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                <title>Electricity Crisis के लिए गहलोत सरकार जिम्मेदार : ऊर्जा मंत्री</title>
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                        <![CDATA[नागर ने कहा कि हर साल गर्मी में 10 से 12 प्रतिशत बिजली की डिमांड बढ़ती है, लेकिन इस बार भीषण गर्मी के चलते 20 प्रतिशत से ज्यादा डिमांड बढ़ी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gehlot-government-responsible-for-electricity-crisis-energy-minister/article-79007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/6633-copy55.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जारी बिजली संकट के बीच ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने संकट के लिए पूर्ववर्ती गहलोत सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पांच साल बिजली उत्पादन और वितरण ढांचा सुधारने पर ध्यान नहीं देने की वजह से संकट पैदा हुआ है। भाजपा सरकार आने पर प्राथमिकता से इसमें सुधार कर रहे हैं।</p>
<p>मीडिया से बात करते हुए नागर ने कहा कि हमने सुधार की प्रक्रिया प्राथमिकता से शुरू की है। अगले साल प्रदेश के लोगों को बिजली कटौती से पूरी तरह राहत मिल जाएगी। संकट से निपटने के लिए एक्सचेंज से बिजली खरीदने का प्रयास कर रहे हैं। पीक ऑवर्स में लोड बढ़ने के कारण बिजली डिमांड ज्यादा बढ़ गई है, जिस कारण थोड़ी कटौती करनी पड़ रही है।  </p>
<p><strong>15 साल की जरूरत का आंकलन किया</strong><br />नागर ने कहा कि सरकार बनने के बाद हमने सबसे पहले आगामी 15 साल की बिजली की जरूरतों का आंकलन किया है। हमने 32 हजार मेगावाट के एमओयू किए हैं, जिनकी लागत 225 लाख करोड़ रुपए आएगी।</p>
<p><strong>इस बार 20 प्रतिशत बढ़ी बिजली डिमांड</strong><br />नागर ने कहा कि हर साल गर्मी में 10 से 12 प्रतिशत बिजली की डिमांड बढ़ती है, लेकिन इस बार भीषण गर्मी के चलते 20 प्रतिशत से ज्यादा डिमांड बढ़ी है। संकट को देखते हुए डिस्कॉम अफसर और कार्मिकों को मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। नागर ने कहा कि कटौती इसलिए झेल रहे हैं कि गहलोत सरकार में बिजली उत्पादन, वितरण की लाइन और जीएसएस बढ़ाने पर जोर नहीं दिया गया। पिछली सरकार ने बिना सोचे समझे फैसले लिए। गहलोत सरकार ने इस गर्मी में बैकिंग की बिजली लौटाने का वादा किया था। अभी भी हमें 900 मेगावाट बिजली बैंकिग की लौटानी पड़ रही है। गहलोत छत्तीसगढ़ में आवंटित परसा खदान को चालू नहीं करवा पाए। पहले कोयला ही पूरा नहीं मिलता था। थर्मल पावर प्लांट को 22 से 24 रैक प्रतिदिन की तुलना में 12 से 15 रैक ही मिलता था। अब पूरा कोयला मिल रहा है, लेकिन थर्मल प्लांट की उत्पादन क्षमता बहुत ज्यादा नहीं बढ़ पाई है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 23 May 2024 12:08:45 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में गहराने लगा बिजली संकट, 10 बिजली उत्पादन यूनिट हो चुकी है बंद </title>
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                        <![CDATA[ इनसे 4442 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद हो गया है। डिमांड और सप्लाई में 2500 मेगावाट से ज्यादा अंतर होने के कारण 10 जिलों में कटौती शुरू हो गई है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/electricity-crisis-in-state-10-unit-closed/article-21466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/46546546519.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में एक बार फिर से बिजली संकट गहराने लगा है। तकनीकी कारणों से अब 10 बिजली उत्पादन यूनिट बंद हो चुकी है। इनसे 4442 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद हो गया है। डिमांड और सप्लाई में 2500 मेगावाट से ज्यादा अंतर होने के कारण 10 जिलों में कटौती शुरू हो गई है। संकट बरकरार रहा, तो ग्रामीण इलाकों के बाद शहरी क्षेत्रों में भी कटौती हो सकती है। सूरतगढ़ की एक सुपर क्रिटिकल 660 मेगावाट क्षमता इकाई एक-दो दिन में शुरू होने की संभावना है। प्रदेश में फिलहाल पीक आवर्स में बिजली डिमांड 14,100 मेगावाट हो गई है और उपलब्धता 11595 मेगावाट के आसपास है। राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड बिजली किल्लत से निपटने के लिए महंगे दामों पर खरीद कर सप्लाई करने में जुटा हुआ है। एक्सचेंज में 12 रुपए रेट पर भी पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली खरीद के लिए इस महीने 500 मेगावाट बिजली शॉर्ट टर्म टेंडरिंग कराई, लेकिन उसमें भी रेट का ज्यादा अंतर होने से 305 मेगावाट ही मिल पा रही है। निगम हर घंटे के हालात देखते हुए बिजली खरीद रहा है। आगामी कुछ दिनों में बारिश आने की संभावनाओं से तापमान घटने और डिमांड कम होने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>स्थितियां शीघ्र सामान्य होने की उम्मीद: शर्मा</strong><br />विद्युत उत्पादन निगम सीएमडी राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि छबड़ा और सूरतगढ़ की दो इकाइयों में तकनीकी खांमी ठीक होने से 1320 मेगावाट बिजली बढ़ेगी। अडानी की 600-600 मेगावाट की दो यूनिट बंद होने से 1200 मेगावाट उत्पादन बंद हुआ है। कुछ यूनिट्स तकनीकी कारणों से बंद हैं, जिन्हें सही करने का प्रयास जारी है। एक-दो दिन में हालात सामान्य हो जाएंगे। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Sep 2022 11:20:27 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली संकट बढ़ने की आंशका, 6 उत्पादन इकाइयां ठप </title>
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                        <![CDATA[बिजली उत्पादन की 6 यूनिट में से 3 सुपर क्रिटिकल यूनिट हैं। विद्युत उत्पादन निगम की कुल 23 इकाइयों में से 17 इकाइयों(4890 मेगावाट) में उत्पादन जारी है, जबकि 6 इकाइयों(2690 मेगावाट) बंद हो गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/fear-of-increasing-electricity-crisis-6-production-units-closed/article-21322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/45465465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मानसून के बाद अब फिर से बिजली संकट बढ़ने की आंशका है। राजस्थान की 6 बिजली उत्पादन इकाइयां ठप होने से 2690 मेगावाट बिजली उत्पादन कम हो गया है। इसे देखते हुए बिजली कम्पनियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती शुरू करने की तैयारी कर ली है। बिजली उत्पादन की 6 यूनिट में से 3 सुपर क्रिटिकल यूनिट हैं। विद्युत उत्पादन निगम की कुल 23 इकाइयों में से 17 इकाइयों(4890 मेगावाट) में उत्पादन जारी है, जबकि 6 इकाइयों(2690 मेगावाट) बंद हो गई है। निगम अधिकारियों का कहना है कि 6 इकाइयों में से 1320 मेगावाट क्षमता की छबड़ा व सूरतगढ़ में एक-एक सुपर क्रिटिकल इकाइयों की तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए कुछ समय के लिए बंद किया है, जो एक-दो दिन में ठीक हो जाएगी। दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों से फिर से उत्पादन शुरू होने पर संचालित इकाइयों की संख्या 19 और उत्पादन क्षमता 6210 मेगावाट होगी। </p>
<p>शेष 1370 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयां बड़े फाल्ट के कारण लंबे समय से बंद हैं। सूरतगढ़ की दो 660 मेगावाट और 250 मेगावाट, छबड़ा की एक 250 मेगावाट और कोटा की एक 210 मेगावाट यूनिट इनमें शामिल है। इन इकाइयों को ठीक करने के प्रयास तेज कर दिए हैं, ये सितम्बर या अक्टूबर में शुरू हो सकती हैं।</p>
<p><strong>शहरों में कटौती</strong><br />मानसून कम होने के बाद तापमान में बढ़ोतरी से बिजली खपत इन दिनों बढ़ गई है। अब 6 उत्पादन इकाइयां यदि लम्बे समय तक बंद रही, तो निगम ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती शुरू करने की तैयारी में लगा हुआ है। जरूरत पड़ने पर कस्बों और शहरी क्षेत्रों में भी बिजली कटौती की जा सकती है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 10:08:24 +0530</pubDate>
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                <title>6 दिन का कोयला बचा, छत्तीसगढ़ खदान से कोयला मिलने पर अभी भी संशय</title>
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                        <![CDATA[प्रदेश में जारी बिजली संकट के बीच उत्पादन इकाइयों में कोयले की किल्लत बरकरार है। करीब आधा दर्जन उत्पादन इकाइयों के ठप रहने के बीच अधिकांश उत्पादन इकाइयों में छह से सात दिन का कोयला ही बचा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-coal-left-og-6-days-in-state--says-gehlot/article-12188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/electricity-d-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जारी बिजली संकट के बीच उत्पादन इकाइयों में कोयले की किल्लत बरकरार है। करीब आधा दर्जन उत्पादन इकाइयों के ठप रहने के बीच अधिकांश उत्पादन इकाइयों में छह से सात दिन का कोयला ही बचा है। छत्तीसगढ़ कोयला खदान से भी कई प्रयासों के बावजूद कोयला हासिल करने की उम्मीदें धुंधली हैं। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम की छत्तीसगढ़ से अपने हक का कोयला हासिल करने की चिंता बढ़ती जा रही है। इसके लिए सोशल मीडिया के जरिए ट्वीट वार भी छेड़ रखा है। आरपीयूएनएल कॉल ब्लॉक एकाउंट से छत्तीसगढ़ के नेताओं और स्थानीय विरोध वाले लोगों को राजस्थान की पीड़ा बताई जा रही है। उत्पादन निगम सीएमडी आरके शर्मा ने यह भी कहा है कि यदि जल्दी ही कोयला खनन शुरू नहीं हुआ तो राजस्थान के लिए आगामी दिनों में बड़ी परेशानी हो सकती है।</p>
<p><strong>छत्तीसगढ़ सीएम से दुबारा बात करने की सिफारिश</strong><br />ऊर्जा विभाग ने कोयला संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय को सिफारिश की है कि खदान शुरू कराने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल से बातचीत करें। बघेल से पहले भी कई बार बात हो चुकी, लेकिन समाधान नहीं हुआ है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा सेक्टर में कुछ एनजीओ और स्थानीय आदिवासियों के विरोध के कारण 841 हेक्टेयर भूमि खदान पर अब तक खनन शुरू नहीं हो पाया है। खदान के लिए केन्द्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। अब छत्तीसगढ़ सरकार से अनुमति मिलना बाकी है।</p>
<p><strong>सूरतगढ़, छबड़ा, झालावाड़ और कोटा में पांच इकाइयां ठप, बढ़ेगा बिजली संकट</strong><br />बिजली संकट के बीच करीब पांच थर्मल उत्पादन इकाइयां ठप पड़ी हैं। सूरतगढ़, छबड़ा, झालावाड़ और कोटा में ये उत्पादन इकाइयां ठप पड़ी हैं। कुल 23 में ठप इकाइयों के अलावा शेष इकाइयों में भी छह से आठ दिन का कोयला ही बचा है। कोयला संकट की वजह से ये उत्पादन इकाइयां भी अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल रही, लिहाजा ऊर्जा विभाग को अन्य राज्यों और निजी सेक्टर से महंगे दामों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 10:22:56 +0530</pubDate>
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                <title> फिर बिजली संकट</title>
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                        <![CDATA[आने वाले महीनों में कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट और गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार बिजली मंत्रालय का एक आंतरिक आंकलन दिखाता है कि सितंबर तिमाही में बिजली की कमी और बढ़ सकती है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/power-crisis-again/article-11588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/electricity-d-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>आने वाले महीनों में कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट और गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार बिजली मंत्रालय का एक आंतरिक आंकलन दिखाता है कि सितंबर तिमाही में बिजली की कमी और बढ़ सकती है। बिजली मंत्रालय के आंकलन के अलावा स्वतंत्र जांच संगठन सीआरईए ने भी बिजली संकट गहराने की संभावना बताई है। यदि ऐसा होता है, तो देश में उत्पादन प्रभावित होगा। इस संगठन के मुताबिक जुलाई-अगस्त में एक बार फिर बिजली संकट गहरा सकता है। रिपोर्ट बताती है कि देश के ताप विद्युत संयंत्रों में प्री-मानसून कोयला स्टॉक में कमी के कारण ये स्थिति आ सकती है। इस समय खदान  निकास पावर स्टेशनों में कोयले का स्टॉक 13.5 मिलियन टन है और देश के सभी बिजली संयंत्रों में 20.7 मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक है। सीआरईए के आंकड़ों के मुताबिक कोयले से संचालित होने वाले बिजली संयंत्र बिजली की मांग में मामूली वृद्धि को भी झेलने की स्थिति में नहीं हैं। संगठन के मुताबिक, भारत का बिजली संकट कोयला प्रबंधन के कारण पैदा हुआ संकट है। अब संगठन की राय है कि बिजली संकट से बचने के लिए कोयले के परिवहन पर ध्यान केन्द्रित करते हुए इसके परिवहन की कारगर योजना बनाने की जरूरत है।</p>
<p>कोयले का घरेलू उत्पादन बिजली की बढ़ती मांग के साथ तालमेल नहीं रख पा रहा है। खबरें हैं कि छोटे कारोबारी बिजली की सुनिश्चित उपलब्धता की कमी के कारण प्रभावित हैं। महामारी के कारण मची उथलपुथल से उबर रहा देश का उद्योग जगत अब बिजली की कमी नहीं झेल सकता। यदि बिजली की कमी लगातार बनी रही तो छोटे कारोबार ठप पड़ सकते हैं। उत्पादकों को कोयला आयात के लिए कहने के बाद बताया गया है कि अब सरकार ने यह तय किया है कि कोल इण्डिया भी विदेशों से कोयला खरीद कर बिजली उत्पादकों को देगी। अब यह देखना शेष है कि कोयले की उपलब्धता कितनी जल्दी सुधरती है, लेकिन इस क्षेत्र का संकट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति इस क्षेत्र के लिए ज्यादा चिंता का विषय है। ये कंपनियां अपना बकाया नहीं चुका पा रही हैं और यही कारण है कि केन्द्र सरकार को एक के बाद एक इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन पैकेज जारी करना पड़ रहा है। लेकिन फिर भी कोई ठोस बदलाव नहीं हो रहा है। बिजली संकट के कई कारण हैं, लेकिन फिलहाल तो व्यवस्था में कारगर सुधारों की जरूरत है।</p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 10:44:31 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur ]]>
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            <item>
                <title>बिजली संकट: डिमांड से दो हजार मेगावाट बिजली कम, शादियों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती से हल्की राहत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों शादियों का सीजन जारी है। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती  को लेकर डिस्कॉम पर दबाव बनाते जा रहे हैं। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--electricity-crisis--two-thousand-mw-less-electricity-than-demand--light-relief-from-cuts-in-rural-areas-due-to-weddings/article-9154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/el.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।प्रदेश में चल रहे बिजली के संकट के बीच एक तरफ डिमांड की तुलना में बिजली उपलब्धता करीब 2000 मेगावाट कम चल रही है वहीं दूसरी तरफ शहरी और ग्रामीण अंचलों में शादियों के सीजन के चलते कटौती समय में कमी कर उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है।</p>
<p><strong>नियमित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को राहत</strong></p>
<p>बिजली की मांग और उपलब्धता में आ रहे अंतर की कमी के चलते अब पूर्व घोषित नियमित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है। जयपुर में पिछले 4 दिनों से कहीं बिजली की कटौती या तो नहीं की गई है, या फिर समय से कम पावर कट हुए हैं।बिजली के संकट के बीच डिस्कॉम ने संभाग मुख्यालयों पर सुबह 7 बजे से 8 बजे तक, जिला मुख्यालयों पर 2 घंटे और नगर पालिका सहित 5000 से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में इससे अधिक बिजली की कटौती करने का एलान किया था, लेकिन पिछले दो दिनों में पवन ऊर्जा के माध्यम से मिली करीब ढाई हजार मेगावाट बिजली से डिस्कॉम को कुछ राहत मिली है। बुधवार को पवन ऊर्जा से मिलने वाली बिजली के जनरेशन में एकाएक कमी आई और यह 250 मेगावाट तक ही रह गई, जिसके बावजूद गुरुवार सुबह जयपुर सहित कुछ संभाग मुख्यालय पर सुबह 7 से 8 के बीच होने वाली बिजली की कटौती नहीं हुई।</p>
<p><br /><strong>एक्सचेंज में मिल रही सस्ती बिजली:</strong><br />ऊर्जा विभाग से जुड़े अधिकारीयों ने बताया कि इस दौरान एक्सचेंज के जरिए राजस्थान को कम रेट पर बिजली उपलब्ध हो गई, जिसके चलते पावर कट नहीं किया गया। प्रदेश में पीक आवर में प्रतिदिन मांग और उपलब्धता के बीच 1000 से 2500 मेगावाट तक का अंतर आ रहा है, जिसे विभिन्न इलाकों में पावर कट कर समायोजित किया जा रहा है।<br /><br /><strong>शादियों का सीजन, जनप्रतिनिधियों का दबाव:</strong><br />प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों शादियों का सीजन जारी है। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती  को लेकर डिस्कॉम पर दबाव बनाते जा रहे हैं। लिहाजा ऊर्जा विभाग ने अधिकांश ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती के समय में कमी कर दी है। जिला और संभाग मुख्यालय स्तर पर भी कटौती नाम मात्र की हो रही है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 13:05:39 +0530</pubDate>
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                <title>36 प्रतिशत बढ़ी बिजली की मांग </title>
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                        <![CDATA[भीषण गर्मी और बिजली संकट के बीच शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में इस महीने कुल 36 प्रतिशत मांग बढ़ गई है। प्रदेश में पीक डिमांड 15,749 मेगावाट तक पहुंचने से सप्लाई देने में कम्पनियों के हाथ पैर फूलने लगे हैं, जबकि डिमांड की तुलना में करीब 1200 मेगावाट बिजली कम उपलब्ध है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-electricity-demand-increased-36-percent/article-8857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/el-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भीषण गर्मी और बिजली संकट के बीच शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में इस महीने कुल 36 प्रतिशत मांग बढ़ गई है। प्रदेश में पीक डिमांड 15,749 मेगावाट तक पहुंचने से सप्लाई देने में कम्पनियों के हाथ पैर फूलने लगे हैं, जबकि डिमांड की तुलना में करीब 1200 मेगावाट बिजली कम उपलब्ध है। इस महीने खपत साढ़े तीन हजार लाख यूनिट रोजाना तक पहुंच गई है। बिजली उत्पादन इकाइयों को कोयला संकट का अगले एक-दो सप्ताह में हल निकलने के आसार नजर नहीं आ रहे। संकट के बीच ऊर्जा विभाग को एक्सचेंज के तहत महंगे दामों में भी बिजली नहीं मिल पा रही।</p>
<p>कोयला हासिल करने के लिए केन्द्र से लगातार वार्ता की जा रही है। वहीं, करीब छह बिजली उत्पादन इकाइयों में दो से तीन दिन का कोयला ही बचा है। जयपुर शहर में 210 लाख यूनिट प्रतिदिन की बिजली की डिमांड है। हालांकि शहर में एक घंटे की घोषित और दिन में कई कई बार की जाने वाली अघोषित कटौती का आमजन दंश झेल रहा है, लेकिन बावजूद इसके विभाग के अधिकारी सप्लाई में किसी तरह का अंतर होने से इंकार कर रहे हैं। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Apr 2022 11:14:15 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में बिजली के साथ पानी का भी भीषण संकट</title>
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                        <![CDATA[बिजली संकट के साथ ही शहर के कई इलाकों में इन दिनों आमजन को पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां आमजन को पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है और रोजाना एक घंटे की घोषित कटौती के साथ ही दिन में कई-कई बार अघोषित कटौती का भी सामना करना पड़ रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-water-crisis-with-electricity-in-city/article-8856"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/water-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बिजली संकट के साथ ही शहर के कई इलाकों में इन दिनों आमजन को पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां आमजन को पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है और एक घंटे की घोषित कटौती के साथ ही दिन में कई-कई बार अघोषित कटौती का भी सामना करना पड़ रहा है। वहीं जरूरत के हिसाब से पानी भी नहीं मिल पा रहा है। जलदाय विभाग शहर में सभी स्रोत्रों से 67 करोड़ 50 लाख यानि 675 एमएलडी पानी सप्लाई कर रहा है लेकिन जरूरत और आबादी के हिसाब से यह नाकाफी साबित हो रहा है। पीएचईडी विशेषज्ञों के अनुसार जयपुर शहर में इन दिनों प्रति व्यक्ति पानी की मांग 150 लीटर तक है लेकिन भीषण गर्मी के इस दौर में बढ़ती पानी की मांग के अनुपात में प्रति व्यक्ति 100 से 120 लीटर पानी ही मिल पा रहा है। पानी सप्लाई का समय कम होने और कम प्रेशर से पानी आने की शिकायतें लगातार बढ़ रही है। कॉलोनी के अंतिम छोर पर रहने वाले लोगों की समस्या तो इतनी बढ़ गई है कि जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलने के कारण निजी टैंकर संचालकों से 400 से 500 रुपए तक महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है और ऐसे में निजी टैंकर संचालक इन दिनों चांदी कूटने में लगे हैं। वहीं जलदाय विभाग के अधिकारी शहर में मांग के अनुपात में पानी सप्लाई पर्याप्त होने का दावा कर रहा है।</p>
<p><strong>बूस्टर लगाने के कारण लोगों तक पानी नहीं पहुंच रहा </strong><br />शहर में 400 से अधिक कॉलोनियां ऐसी हैं जहां पेयजल पाइप लाइन बिछी हुई है और बीसलपुर से पानी की सप्लाई भी है लेकिन गर्मियों में लो प्रेशर और अवैध बूस्टर लगाने के कारण टेल एंड पर रहने वाले लोगों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में पीएचईडी को इन कॉलोनियों में हर दिन टैंकरों के 900 से ज्यादा फेरे कर अतिरिक्त पानी भेजना पड़ रहा है। वहीं जो इलाके पेयजल लाइनों से अछूते हैं उनमें भी गर्मी बढ़ने के साथ ही मांग और बढ़ गई है।</p>
<p><strong>एक मई से 20 एमएलडी पानी और बढ़ेगा</strong><br />जलदाय विभाग से जुड़े अधिकारियों की माने तो बीसलपुर बांध से सितम्बर माह तक शहर को पानी की सप्लाई हो सकेगी। वहीं शहर में पानी की बढ़ती डिमांड और गर्मी के तेवर देखते हुए जलदाय विभाग मई और जून माह माह में बीसलपुर से 20 एमएलडी अतिरिक्त पानी और बढ़ाएगा। इसके बाद शहर में बीसलपुर से करीब 500 एमएलडी पानी मिल सकेगा।</p>
<p><strong>अगले साल तक सभी कॉलोनियों बीसलपुर से जुड़ेंगी</strong><br />जलदाय विभाग के अधिकारियों की मानें तो हरमाड़ा और आसपास, पृथ्वीराज नगर योजना जैसे कुछ इलाकों में बीसलपुर योजना का काम चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल तक सभी जगहों पर काम पूरा कर बीसलपुर योजना से सभी एरिया को जोड़ दिया जाएगा।<br />शहर में मांग के अनुपात में पानी की सप्लाई फिलहाल पर्याप्त है। मांग बढ़ने पर समय समय पर बीसलपुर से पानी की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। जहां पीएचईडी से पानी की सप्लाई नहीं है वहां टैंकरों के फेरे भी लगाए जा रहे हैं। जो कॉलोनियां बीसलपुर योजना से वंचित हैं उन्हें भी अगले साल तक जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।<br /><strong>- मनीष बेनीवाल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर क्षेत्र द्वितीय</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Apr 2022 11:08:09 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली संकट : कटौती का समय भी फिक्स नहीं</title>
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                        <![CDATA[बिजलीघरों में दो से छह दिन का कोयला ही बचा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--electricity-crisis--the-timing-of-the-cut-is-not-even-fixed/article-8819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/el.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। भीषण गर्मी में बिजली संकट के बीच तय कटौती के साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती भी शुरू हो गई है। बिजली की मांग में 36 फीसदी बढ़ोतरी के साथ ही मांग और आपूर्ति व्यवस्था की चुनौती के बीच बिजलीघरों में दो से छह दिन का कोयला ही बचा है।</p>
<p><br />तीनों डिस्कॉम में कटौती का समय फिक्स नहीं होने से दिन और रात में अघोषित कटौती जारी है। इसने ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के ज्यादा पसीने छुड़ा रखे हैं। कोयले की कमी से जूझ रहे थर्मल पावर प्लांट में कई यूनिटें अभी भी बंद हैं। हाड़ौती संभाग की थर्मल यूनिट्स में 65 से 70 फीसदी क्षमता से ही उत्पादन हो पा रहा है। कोटा थर्मल पावर, छबड़ा थर्मल, छबड़ा सुपर क्रिटिकल और कालीसिंध थर्मल में आगामी दो से छह दिन का कोयला ही बचा है। प्रदेश की कुछ इकाइयां तकनीकी कारणों से ठप पड़ी हैं।</p>
<p><br /><strong>जल्दी ही समस्या से उबर जाएंगे : भाटी</strong><br />ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने संकट को लेकर गुरुवार को भी अफसरों की बैठक ली। भाटी ने उपभोक्ताओं से संयमित उपभोग की अपील करते हुए कहा कि हम जल्दी ही इस संकट से उबर जाएंगे। हमने अघोषित बिजली कटौती रोकने और निर्माणाधीन ग्रिड सब स्टेशनों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। <br /><br /><strong>रात की शिफ्ट में बिजली से ज्यादा खुश नहीं किसान</strong> <br />ऊर्जा विभाग ने संभाग और जिला मुख्यालय, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में घोषित कटौती का समय तय कर दिया है, लेकिन कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती का समय फिक्स नहीं होने से अघोषित कटौती भी हो रही है। किसान भी रात शिफ्ट की बिजली से ज्यादा खुश नहीं है। वार्षिक और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों में व्यस्त विद्यार्थी भी खूब परेशान हो रहे हैं।</p>]]>
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                                            <category>Top-News</category>
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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 12:50:22 +0530</pubDate>
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