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                <title>water crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>water crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>झीलों की नगरी में अघोषित वाटर इमरजेंसी : स्टोरेज के फेर में शहर के पानी पर कैंची, शहर में गहराया जल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[झीलों की नगरी उदयपुर इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही। शहर का वाटर मैनेजमेंट सिस्टम पूरी तरह लड़खड़ाता नजर आ रहा। विभाग ने पहले पुराने शहर के 18 वार्डों में दो दिन में एक बार जलापूर्ति की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन अब यही स्थिति लगभग पूरे शहर में अघोषित रूप से लागू। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/water-crisis-deepens-in-the-city-due-to-undeclared-water/article-155929"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)14.png" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। शहर का वाटर मैनेजमेंट सिस्टम पूरी तरह लड़खड़ाता नजर आ रहा है। विभाग ने पहले पुराने शहर के 18 वार्डों में दो दिन में एक बार जलापूर्ति की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन अब यही स्थिति लगभग पूरे शहर में अघोषित रूप से लागू हो गई है। हालात इतने खराब हैं कि कई इलाकों में पांच-पांच दिन बाद भी नलों से पानी की बजाय सिर्फ हवा निकल रही है। शहर के मीरा नगर क्षेत्र में लोग पिछले एक माह से टैंकरों के सहारे जीवनयापन कर रहे हैं, वहीं हिरणमगरी सेक्टर-3, 4, 5, 7 तथा सेक्टर-11, 12, 13 और 14 में अघोषित बिजली कटौती की तर्ज पर अघोषित जल कटौती से लोग परेशान हैं। जलापूर्ति कब होगी, कितनी देर होगी और कितने दबाव से होगी, इसकी कोई निश्चितता नहीं है। एक ओर नागरिक पानी के लिए भटक रहे हैं, दूसरी ओर विभाग भविष्य के संकट को देखते हुए जल भंडारण में जुटा हुआ है। इसी कारण वर्तमान में जलापूर्ति प्रभावित हो रही है और आगामी 15 दिनों तक स्थिति में विशेष सुधार की संभावना नहीं है। शहर के रघुनाथपुरा, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय परिसर और देबारी के कई इलाकों में भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। स्थिति यह है कि कई बोरवेलों से पानी के स्थान पर कीचड़ निकलने लगा है, जिससे संकट और गहरा गया है।</p>
<p><strong> खपत से कम हो रही जलापूर्ति</strong><br />शहर की दैनिक पेयजल आवश्यकता करीब 162 एमएलडी बताई जा रही है, लेकिन वर्तमान में इससे काफी कम मात्रा में जलापूर्ति हो रही है। इस समस्या को लेकर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने भी संयुक्त शासन सचिव से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जयसमंद से उदयपुर आने वाली पुरानी पाइपलाइन बार-बार क्षतिग्रस्त होने से सप्लाई प्रभावित होती है। शासन स्तर पर पाइपलाइन सुधार कर समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया गया है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता रवींद्र चौधरी के अनुसार, इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की आशंका के मद्देनजर जून और जुलाई के लिए 300 एमएलडी पेयजल भंडारण की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि आगामी भीषण गर्मी और संभावित जल संकट को देखते हुए अभी से व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं, जिससे शहर को भविष्य में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 13:10:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चार दिन से जलापूर्ति ठप, गहराया पेयजल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-supply-halted-for-four-days/article-155647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/char-din-se-jalapurti-thap.-gahraya-peyjal-sankat.-ramganjmandi.-dist.-kota.--01may2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। क्षेत्र के सातलखेड़ी कस्बे में पिछले चार दिनों से पेयजल आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहराने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने शीघ्र समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।सातलखेड़ी कस्बे में पिछले चार दिनों से नलों में पानी नहीं आने से जनजीवन प्रभावित हो गया है। घरों की टंकियां और मटके खाली हो चुके हैं तथा लोगों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य सड़क के आसपास रहने वाले कुछ लोग निजी टैंकरों से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन कस्बे के अंदरूनी मोहल्लों में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है। कई परिवारों को दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>समस्या का नहीं हो रहा स्थायी समाधान</strong><br />पानी की कमी के कारण घरेलू कार्य, साफ-सफाई और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई घरों में पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>चार दिनों से जलापूर्ति बंद होने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।<br /><strong>- ललित सिसोदिया, ग्रामीण</strong></p>
<p> तेज हवाओं के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे पानी की टंकी नहीं भर सकी और जलापूर्ति बाधित रही। समस्या के समाधान के लिए सभी वार्डों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है तथा जलापूर्ति को जल्द सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, कनिष्ठ अभियंता, पीएचईडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:38:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुकेत में गंदे पानी का संकट : टंकियों की सफाई नहीं, बीमारियों का बढ़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[2-3 साल से नहीं हुई जलाशयों की सफाई, मटमैले पानी से लोग परेशान।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dirty-water-crisis-in-suket--tanks-uncleaned--risk-of-disease-rises/article-153916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)55.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। नगरपालिका क्षेत्र सुकेत में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था बदहाल होती नजर आ रही है। जलदाय विभाग को ओवरहेड टंकियों और स्वच्छ जलाशयों की नियमित सफाई नहीं होने से लोगों को दूषित और बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में इससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जानकारी अनुसार विभागीय नियमों में हर छह माह में टंकियों की सफाई अनिवार्य है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई टंकियों की पिछले दो से तीन वर्षों से सफाई तक नहीं हुई। सुकेत कस्बे की मुख्य पानी की टंकी में काई जम चुकी है और पूर्व में मृत पक्षी मिलने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि नलों से आने वाला पानी मटमैला और दुर्गधयुक्त है।</p>
<p><strong>सीएचसी में बढ़ रहे मरीज</strong><br />सुकेत सीएचसी प्रभारी डॉ. जिंदल के अनुसार दूषित पानी के कारण डायरिया और पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। पिछले एक दिन में नियमित रूप से उल्टी-दस्त के 7 से 8 मरीज अस्पताल पहुंचे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी है। नगरवासियों ने कलेक्टर से टंकियों की सफाई की जांच कराने नियमित सफाई का बोर्ड लगाने और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p><strong>प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल</strong><br />नगरवासियों का आरोप है कि जलदाय विभाग केवल कागजों में सफाई और रखरखाव के दावे कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द टंकियों की सफाई और जल गुणवत्ता की जांच नहीं करवाई गई तो आंदोलन किया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मामले में हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की गई है। वहीं बढ़ती गर्मों के बीच दूषित पानी की समस्या ने आमजन की चिंता और परेशानी दोनों बढ़ा दी हैं।</p>
<p><strong>नगरवासियों में भारी आक्रोश</strong><br />स्थानीय निवासियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चे आए दिन उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं, इसलिए मजबूरी में वहीं गंदा पानी उपयोग करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>फिल्टर प्लांट बंद, क्लोरीन का अधिक उपयोग</strong><br />नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर फिल्टर प्लांट बंद पड़े हैं। ऐसे में पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन की अधिक मात्रा डाली जा रही है, जिससे पानी का स्वाद और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p>इसकी जानकारी जेईएन द्वारा दी जाएगी। यह कार्य मेरे स्तर का नहीं है।<br /><strong>- बच्चू सिंह मीणा, एईएन, जलदाय विभाग।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 14:24:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गर्मी में कई गांव प्यासे : दो माह से गहराया जल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[कलमोदिया पंचायत में पेयजल संकट से ग्रामीण परेशान। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/several-villages-thirsty-amidst-summer-heat--water-crisis-deepens-over-two-months/article-153689"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)45.png" alt=""></a><br /><p>सारथल। ग्राम पंचायत कलमोदिया के करीब आधा दर्जन गांवों में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है। पंचायत क्षेत्र के खेड़ी जागीर बंजारा बस्ती, कलमोदिया भील बस्ती, गोगाटोड़ी, चारपुरा, कालाटोल भील बस्ती, और सेकुड़ सहित कई गांवों में पिछले करीब दो माह से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण महिलाओं को दो से तीन किलोमीटर दूर जाकर पीने का पानी लाना पड़ रहा है। खेड़ीजागीर के ग्रामीणों देवलाल गुर्जर और अर्जुन सिंह ने बताया कि जल संकट को लेकर पंचायत प्रशासन, जलदाय विभाग और उपखंड प्रशासन को अवगत करा चुके है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ना पंचायत प्रशासन सुध ले रहा है और ना ही संबंधित विभाग है, पानी के टैंकरों की व्यवस्था कर रहा जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>समाजसेवी निजी खर्च पर कर रहे टैंकर जल सेवा</strong><br />भीषण गर्मी के बीच जल संकट से जूझ रहे कलमोदिया पंचायत के इन गांवों में कुछ समाजसेवी लोगों ने आगे आकर सहत पहुंचाने का कार्य शुरू किया है। मानवता की मिसाल पेश करते हुए समाजसेवी अपने निजी खर्च पर पिछले एक सप्ताह से इन गांवों में पानी के टैंकर पहुंचाकर लोगों और पशु-पक्षियों के लिए जल सेवा कर रहे हैं। ग्रामीणों ने ऐसे लोगों की सराहना करते हुए प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित</strong><br />जल संकट के कारण ग्रामीणों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। सुबह से ही महिलाएं और बच्चे पानी की तलाश में दूर-दराज क्षेत्रों की ओर निकल पड़ते हैं। कई स्थानों पर हैंडपंप और जल स्रोत सूख चुके हैं, जिससे लोगों को निजी साधनों और समाजसेवियों के सहयोग पर निर्भर रहना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में पानी की कमी से पशुधन भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पेयजल व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। समाजसेवियों द्वारा निजी खर्च पर पानी के टैंकर भेजे जाने से ग्रामीणों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>परेशानी भीषण गर्मी में पानी की समस्या ने ग्रामीणों की बढ़ा दी है। महिलाओं को रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर पानी भरना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक टैंकर सुविधा भी शुरू नहीं की गई।<br /><strong>-अमरलाल, ग्रामीण</strong></p>
<p>गांव में पिछले दो माह से पेयजल संकट बना हुआ है। कई बार प्रशासन और जलदाय विभाग को सूचना देने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।<br /><strong>- लल्लू सिंह, ग्रामीण</strong></p>
<p>गांवों में पानी की भारी किल्लत के कारण आमजन के साथ पशु-पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द स्थायी व्यवस्था करने और नियमित पानी के टैंकर भेजने की मांग की।<br /><strong>- अशोक मेहर, ग्रामीण</strong></p>
<p>पंचायत के इन गांव, बस्तीयों में पेयजल समस्या को लेकर एक सप्ताह पहले ही पानी टैंकर सुविधा लगाने को लेकर प्रस्ताव जलदाय विभाग को भेज रखा है।<br /><strong>- अनीता मीणा, सरपंच, कलमोदिया ग्राम पंचायत</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:24:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>देईखेड़ा में गहराया जल संकट : &quot;हर घर नल&quot; योजना फेल, लोगों को दूर-दराज से  लाना पड़ रहा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ हालत यह है कि डेढ़-डेढ़ लाख लीटर क्षमता वाली दो जल टंकियां होने के बावजूद भी लोगों को नियमित और पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक परेशानी रेलवे पार स्थित चक मालिकों की बस्ती के लोगों को उठानी पड़ रही है, जहां आज तक पेयजल पाइपलाइन ही नहीं पहुंच सकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-crisis-deepens-in-deikheda---har-ghar-nal---tap-in-every-home--scheme-fails/article-152876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के प्रमुख कस्बे देईखेड़ा में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। करीब 5 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में सरकार की ह्लहर घर नलह्व योजना के दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि डेढ़-डेढ़ लाख लीटर क्षमता वाली दो जल टंकियां होने के बावजूद भी लोगों को नियमित और पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक परेशानी रेलवे पार स्थित चक मालिकों की बस्ती के लोगों को उठानी पड़ रही है, जहां आज तक पेयजल पाइपलाइन ही नहीं पहुंच सकी है। इसके अलावा रेलवे कॉलोनी, रूप नगर, महादेव जी की बस्ती और देवनारायण मंदिर क्षेत्र सहित कई मोहल्लों में पानी का दबाव बेहद कम होने से सप्लाई बाधित रहती है।</p>
<p>भीषण गर्मी के बीच हालात और बिगड़ गए हैं। कई क्षेत्रों में लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>समाधान की आस में जनता</strong><br />अधिकारियों के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जमीनी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कस्बेवासी लंबे समय से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली है। ऐसे में सवाल बना हुआ है कि आखिर कब तक देईखेड़ा वासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।</p>
<p>कस्बे में दो टंकियां होने पर भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है।  स्थानीय प्रसासन का समस्या की गम्भीरता पर ध्यान नहीं दे रहा है ओर सरकार के दावे फेल नजर आ रहे है। जबकि अब मई जून में पानी की डिमांड बढ़ जाएगी। <br /><strong> -दिनेश व्यास देईखेड़ा व्यापार मंडल अध्यक्ष</strong></p>
<p>कस्बे के उच्च जलाशयों (टंकियों) को भरने के लिए चार बोरिंग हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो ही संचालित हैं। इसके कारण टंकियां पूरी तरह नहीं भर पातीं और जलदाब कम रहता है।  जिन बस्तियों में पाइपलाइन नहीं है, वहां ईआरसीपी परियोजना के तहत पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।<br /><strong>- महावीर कुमावत,कनिष्ठ अभियंता,जलदाय विभाग लाखेरी  </strong></p>
<p>सर्दियों में जल की खपत कम थी, लेकिन गर्मियों में मांग बढ़ने से समस्या बढ़ी है। पहले से दो बोरिंग चालू थे और बुधवार से तीसरा बोरिंग भी शुरू कर दिया जाएगा जिससे जलदाब की समस्या में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही नई पाइपलाइन बिछाने का प्रावधान भी ईआरसीपी परियोजना के तहत पस्तावित है। <br /><strong>- राहुल पारीक,पंचायत सचिव </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:32:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>धरती आभा योजना के बावजूद 100 घरों में पानी का संकट, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[दावे फेल, योजनाएं कागजों तक सीमित, निजी नलकूप पर लंबी कतारें 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-crisis-grips-100-households-despite--dharti-abha--scheme/article-151088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। रायथल तहसील के नंदपुरा गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावे धरातल पर फेल होते नजर आ रहे हैं। ह्यधरती आभाह्ण योजना में शामिल होने के बावजूद करीब 100 घरों की आबादी आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रही है। स्थिति यह है कि पूरे गांव की निर्भरता एक निजी नलकूप पर है,जहां सुबह-शाम लंबी कतारें लग रही हैं।</p>
<p><strong>एक कुआं, 25 मोटरें और गिरता जलस्तर</strong><br />गांव में पेयजल का मुख्य स्रोत एक पुराना कुआं है, जिसमें 25 से अधिक मोटरें लगी हुई हैं। अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर लगातार गिर रहा है और कुआं भी जवाब देने की स्थिति में पहुंच गया है। ऐसे में एकमात्र निजी नलकूप ही पीने योग्य पानी का सहारा बना हुआ है। <br />यहां पानी भरने के लिए महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>10 वर्षों से बंद पड़ा आरओ प्लांट</strong><br />पीएचईडी विभाग की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण गांव में स्थापित आरओ प्लांट है, जो पिछले 10 वर्षों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार शिकायत के बावजूद इसे चालू नहीं किया गया। पूर्व में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>अधिकारियों की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष</strong><br />ग्रामीण बनवारी लाल, दीनदयाल, मुकेश कुमार, सत्यनारायण, शिवराज और कैलाश ने बताया कि योजनाएं केवल कागजों में सीमित हैं। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।</p>
<p><strong>फ्लोराइड युक्त पानी से युवाओं के रिश्तों पर असर </strong><br />फ्लोराइड युक्त पानी पीने से ग्रामीणों के दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं इसका असर हड्डियों और जोड़ों पर पड़ रहा हैं जिससे युवाओं के रिश्ते करने में भी प्रभाव पड़ रहा हैं पीले दांतों को देखकर रिश्ते करने से कतराते हैं।<br /><strong>- बनवारी लाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>दफ्तर के लगाए चक्ककर, मिला केवल आवश्वासन, अब प्रदर्शन </strong><br />कई बार विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस प्लांट को चालू कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे #<br /><strong>- दिनदयाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong><br /> हऌड के अनुसार पीने के पानी मे फ्लोराइड की मात्रा 1.0-1.5 टॅ प्रतिलिटर होनी चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा वाला पानी पिने से बच्चों के दांतो मे सफ़ेद और भूरे रंग के धब्बे बन जाते है। दाँत कमजोर और ख़राब हो जाते है जिसे डेंटल फ्लूरोसीस कहते है। अगर फ्लोराइड युक्त पानी पिने से इसका असर हड्डियों और जोड़ो मे आ जाये तो उसे स्केलटल फ्लोरोसीस कहते है। इससे बचने के लिए आरओ का पानी पिए या डिफेंलोरीडेशन फ़िल्टर का उपयोग करें और कुएं और हैंडपम्प या बोर वेल के पानी की टेस्टिंग समय समय पर करवाएं। समय समय पर दंत रोग विशेषज्ञ से अपने दांतो का चेकअप करवाए।<br /><strong>- डॉ निर्मला मीणा, दंत रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बूंदी</strong><br /> <br />पूर्व एजेंसी का टेंडर 31 जनवरी 2026 में समाप्त हो गया था। आरओ पुनः चालू कराने हेतु स्वीकृति जयपुर भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही प्लांट चालू करवाया जाएगा, धरती आभा में ग्राम पंचायत ने कोई प्रस्ताव लेकर नहीं भेजा हैं इसकी जानकारी भी नहीं है और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए टीम भेज पानी के सैंपल लेकर पानी की व्यवस्था करवाते हैं ।<br /><strong>- सुनील शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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                <title>जोधपुर में सियासी बयानबाज़ी तेज: मंत्री पटेल का गहलोत पर पलटवार, पेयजल संकट पर भी दिया बयान</title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर में मंत्री जोगाराम पटेल ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर न फेंकें। उन्होंने गहलोत पर पुत्र राजनीति के लिए दूसरों का हक मारने का आरोप लगाया। साथ ही, मारवाड़ में पेयजल किल्लत से निपटने हेतु कंटिनजेंसी प्लान और बार काउंसिल के विस्तार पर भी चर्चा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/political-rhetoric-intensified-in-jodhpur-minister-patel-hit-back-at/article-148338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jogaram-petal.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर।  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर प्रदेश की सियासत में गर्मी बढ गई है प्रदेश में गर्मी के मौसम के साथ ही राजनीति भी गरम होने से अब एक दूसरे पर हमला किया जा रहा है। जोधपुर प्रवास पर आए मंत्री जोगाराम पटेल ने गहलोत के बयान बोला कि पहले वो अपने बारे में सोचे। जिनके खुद के घर शीशे के होते है वो दूसरे के घरो पर पत्थर नही फेका करते है। राजनीति में किसी भी राजनेता को पुत्र आमतौर पर राजनीति एवं कार्य में हस्तक्षेप नही करता है लेकिन गहलोत साहब पहले स्वयं सोचे की अपने ही पुत्र के लिए कई लोगो का हक मारा ,कभी जोधपुर संसदीय क्षेत्र कभी जालौर सिरोही संसदीय क्षेत्र तो कभी किक्रेट कहा कहा हक नही मारा है यह गहलोत साहब को शोभा नही देता है फिर भी वो हमारे है।</p>
<p>प्रदेश में गर्मी के मौसम की शुरूआत हो चुकी है लेकिन पेयजल को लेकर अभी से आमजनता परेशान होने लगी है । पेयजल की किल्लत शुरू होने के साथ प्रदेश सरकार के मंत्री जोगाराम पटेल ने भी स्वीकार किया है कि विशेषकर मारवाड पश्चिम राजस्थान में गर्मी के मौसम में पेयजल की किल्लत होती है। उन्होने कहा कि पेयजल कि किल्लत हर साल होती है लेकिन सरकार इसको लेकर पूरी तरह से तैयार है। उन्होने कहा कि पेयजल को लेकर कंटलजेंसी प्लान तैयार कर लिया है। ऐसे में गर्मी में जनता के पेयजल का ध्यान रखा जाएगा। बार कौंसिल ऑफ राजस्थान में सदस्यों की संख्या बढाने के मामले कहा कि बार कौंसिल ऑफ राजस्थान की स्थापना के समय जितने सदस्य थे आज भी उतने ही है। हम चाहते है कि बार व बेंच का सामजंस्य बना रहे लेकिन बार के सदस्यों की संख्या बढाने के लिए कोई प्रस्ताव नही आया है। हम तो प्रयास कर रहे</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 17:27:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जल दिवस पर विशेष...''बढ़ती मांग, घटते स्रोत, गहराता जल संकट'': डार्क जोन में डूबता प्रदेश, गर्मियों में टैंकर राज और सूखते स्रोत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल संकट विकराल हो गया है; राज्य के पास देश का मात्र 1.16% सतही जल है। 299 में से केवल 38 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं, जबकि भूजल दोहन 150% तक पहुँच चुका है। 'जल जीवन मिशन' से कनेक्शन तो बढ़े, लेकिन 350 करोड़ लीटर की भारी मांग और घटता जलस्तर भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-water-day-increasing-demand-decreasing-sources-deepening/article-147402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/world-water-day.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद जल संकट की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। भौगोलिक विषमताओं के कारण यहां जल संसाधन विरासत में ही सीमित मिले। राज्य के पास मात्र 1.16 प्रतिशत सतही जल उपलब्ध है। यही असंतुलन आज गहराते जल संकट की जड़ बन चुका है। लगातार सूखा, घटती वर्षा, बढ़ती आबादी और अनियंत्रित विकास ने हालात को विकराल बना दिया है। राज्य के अधिकांश ब्लॉक अब डार्क जोन में पहुंच चुके हैं, जहां भूजल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। 55 प्रतिशत ग्रामीण आबादी आज भी भूजल पर निर्भर है, लेकिन यह पानी भी कई जगह खारा और स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त हो चुका है। गर्मियों में 150 से अधिक शहरों और 15 हजार गांवों में पानी का संकट खड़ा हो जाता हैं। जलदाय मंत्री कन्हैया लाल के अनुसार सरकार की प्राथमिकता हर घर को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। </p>
<p>राज्य के 222 शहरों और कस्बों में पेयजल योजनाएं संचालित हैं। जयपुर जैसे बड़े शहर में ही सात लाख कनेक्शन हैं। 28 प्रतिशत शहरों को सतही जल और 50 प्रतिशत को भूजल से पानी मिल रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि 60 शहरों में रोजाना सिर्फ  एक बार पानी आता है, जबकि 30 से अधिक शहरों में दो दिन में एक बार सप्लाई हो रही है। गर्मी के दिनों में यह संकट और विकराल हो जाता है, जिससे आमजन को परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong></p>
<p>जल प्रबंधन विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में जल संकट केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रबंधन की विफलता भी है। यदि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और फसल चक्र में बदलाव जैसे उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।</p>
<p><strong>ग्रामीण उम्मीद: नल कनेक्शन बढ़े, पानी कहां से आएगा</strong></p>
<p>जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन तेजी से बढ़े हैं। 2019 से पहले जहां केवल 11 लाख घरों में नल थे, अब यह संख्या बढ़कर 58 लाख तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि दिखने में बड़ी है, लेकिन असली चुनौती पानी की उपलब्धता है। वर्तमान में विभाग के पास 130 करोड़ लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध है, जबकि भविष्य में 350 करोड़ लीटर की जरूरत होगी। </p>
<p>प्रदेश में 150 प्रतिशत भूजल दोहन हो रहा है। 214 ब्लॉक अतिदोहित है। 1984 में दोहन 35 प्रतिशत, 1995 में 58 प्रतिशत, 2004 में 125 प्रतिशत, 2013 में 139 प्रतिशत, 2020 में 150 प्रतिशत और 2023 में 149 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 1984 में 236 में से 203 ब्लॉक सुरक्षित थे, जो स्थिति 2023 में 299 में से 38 ब्लॉक ही सुरक्षित श्रेणी में रहे।</p>
<p><strong>जल आपूर्ति की स्थिति</strong></p>
<p><strong>श्रेणी                                              आंकड़े</strong><br />कुल शहर/कस्बे                                 222<br />कुल उपभोक्ता                                   35 लाख<br />जयपुर में उपभोक्ता                            07 लाख<br />ग्रामीण नल कनेक्शन                          11 लाख<br />(2019 तक)    <br />वर्तमान नल कनेक्शन                          58 लाख<br />वर्तमान जल उपलब्धता                       130 करोड़ लीटर प्रतिदिन<br />अनुमानित आवश्यकता                       350 करोड़ लीटर प्रतिदिन</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अजमेर में जल संकट पर महिलाओं का प्रदर्शन: जलदाय विभाग पर अनियमित जलापूर्ति का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर के गुलाबबाड़ी क्षेत्र में पेयजल संकट से आक्रोशित महिलाओं ने जलदाय विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप है कि होली जैसे त्योहार पर भी पानी की सप्लाई नहीं हुई। अनियमित जलापूर्ति और कम प्रेशर से परेशान निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या नहीं सुलझी, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/women-protest-over-water-crisis-in-ajmer-alleging-irregular-water/article-145525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ajmer1.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वार्ड 56 के गुलाबबाड़ी संजय नगर व धानका बस्ती में पानी की समस्या को लेकर शुक्रवार को महिलाओं ने जलदाय विभाग दफ्तर पर जमकर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। होली पर्व के अवसर पर सप्लाई नहीं होने से लोग पेयजल को तरस गए। इधर विभाग के दफ्तर में इंजीनियर के नहीं मिलने से लोगों में गुस्सा दिखाई दिया।</p>
<p>क्षेत्रवासी लता देवी ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र में अनियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। निर्धारित एक घंटा भी पानी नहीं दिया जाता है। प्रेशर कम होने से क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है। कई बार विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। होली के दिन क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं होने से लोग परेशान रहे। जबकि होली पर्व के अवसर पर पानी की ज्यादा जरूरत होती है।</p>
<p>महिलाओं ने विभाग पर तंज कस्ते हुए कहा कि अगर विभाग पानी नहीं पिला सकता है तो कह दे, हम इसकी व्यवस्था अपने स्तर पर कर लेंगे। महिलाओं ने बताया कि पानी की सप्लाई का समय भी निश्चित नहीं है। कई बार रात में पानी दिया जाता है, ऐसे में महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। महिलाओं ने जल्द ही समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:57:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लापरवाही : गहराया पेयजल संकट, घर-घर नल फेल, जल जीवन मिशन योजना का नहीं मिल रहा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[डुंडी ग्राम में नल व्यवस्था को लेकर हो रही है समस्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--drinking-water-crisis-deepens--taps-fail-in-every-home--and-the-jal-jeevan-mission-scheme-is-not-providing-benefits/article-129012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(5)11.png" alt=""></a><br /><p> खानपुर।  खानपुर के पास स्थित ग्राम डुंडी में जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामवासियों के नल लगवाए गए थे। जिसमें भीमसागर से पानी आता है, लेकिन ग्रामीण वासियों का कहना है कि नल तो आता है लेकिन खातियो के मोहल्ले में पीछे की साइड पर नल में से एक बूंद भी नहीं टपकती है, इसके लिए खातियो के मोहल्ले वालों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। जल ही जीवन है इसके बिना कुछ नहीं है। व्यक्ति खाना खाकर जिंदा रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं रह सकता। जल जीवन मिशन योजना के तहत घर-घर नल लगे थे लेकिन उनका ग्रामीण वासियों को अभी कुछ फायदा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने जेईएन मुस्ताक अली को समस्या से अवगत कराया, उन्होंने समस्या को समझा और तुरंत इस पर एक्शन लेने के लिए कहा क्योंकि नल नहीं आने पर कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानी के लिए खातियों के मोहल्ले वालों को पानी लेने के लिए थाने की टंकी के पास आना पड़ता है और थाने की टंकी से पानी भरते हैं तो वहां से लगभग 2 किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पानी की समस्या का समाधान किया जाए। </p>
<p>जल जीवन मिशन योजना के तहत नल लगवाए गए थे लेकिन इन नलों में पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-पवन गौड़, कस्बेवासी </strong></p>
<p>पीने के पानी के लिए दूर दराज से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणो को पानी की समस्या के  समाधान की मांग की है। <br /><strong>-लेखराज मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>नलों में पानी नहीं आने से ग्रामीणों को ट्यूबवेल व कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>-हरिराम मेहता, कस्बेवासी </strong></p>
<p>ग्रामीणों की सुविधा के लिए नल तो लगवा दिए लेकिन पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-रमेश मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सुबह जल्द उठकर दूर दराज से पानी लाना पड़ता है काफी समस्या आती है। समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>-बिंदराज मेहरा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>पानी की समस्या को दिखाकर दो या तीन दिन में समस्या का निवारण कर दिया जाएगा और नल व्यवस्था सुचारू रूप से चालू हो जाएगी।<br /><strong>- सहायक अभियंता मुस्ताक अली, पी एच ई डी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:12:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सातलखेड़ी में 30 हजार की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरस रही, कभी 72 घंटे तक सप्लाई रहती है पूरी तरह ठप </title>
                                    <description><![CDATA[पीएचईडी विभाग की लापरवाही से हाहाकार। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-30-000-strong-population-of-satalkhedi-yearns-for-every-drop-of-water--with-the-supply-sometimes-completely-disrupted-for-72-hours/article-127980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(5)9.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। कोटा जिले का सातलखेड़ी कस्बा इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। करीब 30 हजार की आबादी वाला यह कस्बा पीएचईडी विभाग की लापरवाही के कारण बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है। स्थिति यह है कि यहां कभी 72 घंटे तक सप्लाई पूरी तरह ठप रहती है और कभी नलों से सिर्फ बूंदें टपककर रह जाती हैं। कस्बे की बड़ी आबादी रोजमर्रा के कामकाज के लिए पानी पर निर्भर है। लेकिन सप्लाई बाधित होने से महिलाएं और बच्चे दूर-दूर तक पानी के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। त्योहार और गर्मी के मौसम में हालात और गंभीर हो गए हैं।</p>
<p><strong>जिम्मेदारों के सिर्फ आश्वासन</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी हर बार सप्लाई दुरुस्त करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं होता। बैठकों में चर्चा होती है, लेकिन आमजन के घर तक पानी नहीं पहुंच पाता। पानी की किल्लत के चलते लोग गंदे स्रोतों से पानी भरने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>क्या बोले लोग</strong><br />अजय वाडिया ने कहा कि हमारा देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, लेकिन गांव और कस्बे तो बुनियादी सुविधाओं से ही वंचित हैं। सातलखेड़ी खैराबाद पंचायत समिति का बड़ा कस्बा है और यहां मजदूर वर्ग की संख्या अधिक है। नल सप्लाई 3-4 दिन में सिर्फ 40 मिनट आती है, जिससे लोग परेशान हैं। कई बार ज्ञापन देने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>
<p>ललित सिसोदिया ने बताया कि कस्बे में नलों से कई दिनों तक पानी नहीं आता। लोग दूर-दूर से हेडपंप से पानी भरकर ला रहे हैं। अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, समाधान कोई नहीं।</p>
<p><strong>विभाग की सफाई</strong><br />सातलखेड़ी में पानी की समस्या को दूर करने के प्रयास जारी हैं। कभी पंप खराब होने जैसी तकनीकी वजहों से सप्लाई बाधित होती है, लेकिन जल्द ही स्थिति सुधारी जाएगी।<br /><strong>- सोमेश मेहर, एक्शन, पीएचईडी विभाग। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 17:42:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 70 - पानी की मोटरें कर रही लोगों की जेब ढीली</title>
                                    <description><![CDATA[उधड़ी सडकें व गंदी नालियों से वार्डवासी परेशान है ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-70---water-motors-are-emptying-people-s-pockets/article-122058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/ne1ws8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के वार्ड 70 के रहवासी पेयजल संकट की समस्या से जुंझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश कॉलोनियों में पेयजल की पाइपलाइन में कम प्रेशर की वजह से पानी घरों में नहीं पहुंच पाता है। जिसके कारण हर घर में मोटर चलाकर पानी खींचना पड़ रहा है। पानी के लिए दिन-रात मोटर चलाना लोगों की अब मजबूरी बन गई है। मोटर चलने के कारण बिजली बिल का भार भी जेब पर पड़ रहा है। वार्डों की उधड़ी सड़कें, पानी की मारामारी और जगह-जगह खुले पड़े नालों के बीच वार्डों का विकास कोसो दूर नजर आ रहा है। यहां की कुछ गली में तो सीसी सड़क है तो किसी में सड़क का लेवल भी उबड़ खाबड़ है तथा सीवरेज की होदियों की ढक्कन सड़के से थोड़े उपर है। आने-जाने वाले राहगीरों को भी काफी परेशानी होती है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />एन एच-12की चम्बल पुलिया का निचला हिस्सा, रिद्धि राज टॉवर, बूंदी सिलिका, बीजासन माताजी का मंदिर, बालापुरा का सम्पूर्ण क्षेत्र, नगर निगम का सेक्टर कार्यालय, विजयवीर क्लब स्टेडियम, रोडवेज वर्कशाप, रजत सिटी ग्रुप, कंक्रेश्वर महादेव मंदिर, पुरानी कुन्हाड़ी से लेकर कुन्हाड़ी हवेली का क्षेत्र शामिल है। </p>
<p><strong>पानी की पाइप लाइन ही नहीं डली</strong><br />कंक्रेश्वर महादेव मंदिर मोहल्ले में पानी की पाइप गलत तरिके से डलने से लोगों को बोरिंग का पानी पीना पड़ता है। वहीं, जिन कॉलोनियों में पाइप लाइन हैं वहां जलापूर्ति धीमी गति से होती है। एक बाल्टी भरने में ही 30 मिनट का समय लग जाता है। ऐसे में दिन-रात मोटर चलाकर जरूरत का पानी एकत्रित करना पड़ता है। जिससे बिजली का बिल अधिक आ रहा है। पार्षद से शिकायत करते हैं तो सुनवाई नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।  <br /><strong>- मनु बाई, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>नालियों की नहीं हो रही सफाई</strong><br />वार्ड में कई कॉलोनियां है जहां सफाई नहीं होने से गंदगी से अटी पड़ी है। दुर्गन्ध के चलते सफाईकर्मी वार्ड के मुख्य मार्गों पर ही सफाई करते हैं लेकिन कॉलोनियों में नहीं आते। ऐसे में स्थानीय लोग को ही नालियों की सफाई करनी पड़ती हैं। सड़कों पर पानी जमा रहता है, जिनमें खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप ने का खतरा बना रहता है।  <br /><strong>- सरोज, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में दो साल पहले पाइपलाइन बदलने के बाद नई पाइपलाइन के कनेक्शनों में पानी का प्रेशर बहुत ही कम है जिसके कारण रोजाना मोटरें चलानी पड़ रही हैं। इसके चलते बिजली का बिल भी बढ़ रहा है। वहीं जनप्रतिनिधियों को भी कई बार अवगत करवाया है लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।<br /><strong>- अशोक कुमार, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड में नालों को लेकर काम चल रहा है। यहां बनी आंगनबाड़ी की बिल्डिंग जर्जर अवस्था को लेकर अधिकारियों को भी लिखित में दे रखा है। अधिकारी जनप्रतिनिधयों की बातों को नहीं सुन रहे हैं। <br /><strong>- बीरबल लोधा, पार्षद वार्ड 70</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 14:31:53 +0530</pubDate>
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