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                <title>water crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>water crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>धरती आभा योजना के बावजूद 100 घरों में पानी का संकट, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[दावे फेल, योजनाएं कागजों तक सीमित, निजी नलकूप पर लंबी कतारें 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-crisis-grips-100-households-despite--dharti-abha--scheme/article-151088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। रायथल तहसील के नंदपुरा गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावे धरातल पर फेल होते नजर आ रहे हैं। ह्यधरती आभाह्ण योजना में शामिल होने के बावजूद करीब 100 घरों की आबादी आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रही है। स्थिति यह है कि पूरे गांव की निर्भरता एक निजी नलकूप पर है,जहां सुबह-शाम लंबी कतारें लग रही हैं।</p>
<p><strong>एक कुआं, 25 मोटरें और गिरता जलस्तर</strong><br />गांव में पेयजल का मुख्य स्रोत एक पुराना कुआं है, जिसमें 25 से अधिक मोटरें लगी हुई हैं। अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर लगातार गिर रहा है और कुआं भी जवाब देने की स्थिति में पहुंच गया है। ऐसे में एकमात्र निजी नलकूप ही पीने योग्य पानी का सहारा बना हुआ है। <br />यहां पानी भरने के लिए महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>10 वर्षों से बंद पड़ा आरओ प्लांट</strong><br />पीएचईडी विभाग की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण गांव में स्थापित आरओ प्लांट है, जो पिछले 10 वर्षों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार शिकायत के बावजूद इसे चालू नहीं किया गया। पूर्व में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>अधिकारियों की अनदेखी पर ग्रामीणों में रोष</strong><br />ग्रामीण बनवारी लाल, दीनदयाल, मुकेश कुमार, सत्यनारायण, शिवराज और कैलाश ने बताया कि योजनाएं केवल कागजों में सीमित हैं। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।</p>
<p><strong>फ्लोराइड युक्त पानी से युवाओं के रिश्तों पर असर </strong><br />फ्लोराइड युक्त पानी पीने से ग्रामीणों के दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं इसका असर हड्डियों और जोड़ों पर पड़ रहा हैं जिससे युवाओं के रिश्ते करने में भी प्रभाव पड़ रहा हैं पीले दांतों को देखकर रिश्ते करने से कतराते हैं।<br /><strong>- बनवारी लाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>दफ्तर के लगाए चक्ककर, मिला केवल आवश्वासन, अब प्रदर्शन </strong><br />कई बार विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस प्लांट को चालू कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे #<br /><strong>- दिनदयाल मीणा, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong><br /> हऌड के अनुसार पीने के पानी मे फ्लोराइड की मात्रा 1.0-1.5 टॅ प्रतिलिटर होनी चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा वाला पानी पिने से बच्चों के दांतो मे सफ़ेद और भूरे रंग के धब्बे बन जाते है। दाँत कमजोर और ख़राब हो जाते है जिसे डेंटल फ्लूरोसीस कहते है। अगर फ्लोराइड युक्त पानी पिने से इसका असर हड्डियों और जोड़ो मे आ जाये तो उसे स्केलटल फ्लोरोसीस कहते है। इससे बचने के लिए आरओ का पानी पिए या डिफेंलोरीडेशन फ़िल्टर का उपयोग करें और कुएं और हैंडपम्प या बोर वेल के पानी की टेस्टिंग समय समय पर करवाएं। समय समय पर दंत रोग विशेषज्ञ से अपने दांतो का चेकअप करवाए।<br /><strong>- डॉ निर्मला मीणा, दंत रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बूंदी</strong><br /> <br />पूर्व एजेंसी का टेंडर 31 जनवरी 2026 में समाप्त हो गया था। आरओ पुनः चालू कराने हेतु स्वीकृति जयपुर भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही प्लांट चालू करवाया जाएगा, धरती आभा में ग्राम पंचायत ने कोई प्रस्ताव लेकर नहीं भेजा हैं इसकी जानकारी भी नहीं है और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए टीम भेज पानी के सैंपल लेकर पानी की व्यवस्था करवाते हैं ।<br /><strong>- सुनील शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जोधपुर में सियासी बयानबाज़ी तेज: मंत्री पटेल का गहलोत पर पलटवार, पेयजल संकट पर भी दिया बयान</title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर में मंत्री जोगाराम पटेल ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर न फेंकें। उन्होंने गहलोत पर पुत्र राजनीति के लिए दूसरों का हक मारने का आरोप लगाया। साथ ही, मारवाड़ में पेयजल किल्लत से निपटने हेतु कंटिनजेंसी प्लान और बार काउंसिल के विस्तार पर भी चर्चा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/political-rhetoric-intensified-in-jodhpur-minister-patel-hit-back-at/article-148338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jogaram-petal.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर।  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर प्रदेश की सियासत में गर्मी बढ गई है प्रदेश में गर्मी के मौसम के साथ ही राजनीति भी गरम होने से अब एक दूसरे पर हमला किया जा रहा है। जोधपुर प्रवास पर आए मंत्री जोगाराम पटेल ने गहलोत के बयान बोला कि पहले वो अपने बारे में सोचे। जिनके खुद के घर शीशे के होते है वो दूसरे के घरो पर पत्थर नही फेका करते है। राजनीति में किसी भी राजनेता को पुत्र आमतौर पर राजनीति एवं कार्य में हस्तक्षेप नही करता है लेकिन गहलोत साहब पहले स्वयं सोचे की अपने ही पुत्र के लिए कई लोगो का हक मारा ,कभी जोधपुर संसदीय क्षेत्र कभी जालौर सिरोही संसदीय क्षेत्र तो कभी किक्रेट कहा कहा हक नही मारा है यह गहलोत साहब को शोभा नही देता है फिर भी वो हमारे है।</p>
<p>प्रदेश में गर्मी के मौसम की शुरूआत हो चुकी है लेकिन पेयजल को लेकर अभी से आमजनता परेशान होने लगी है । पेयजल की किल्लत शुरू होने के साथ प्रदेश सरकार के मंत्री जोगाराम पटेल ने भी स्वीकार किया है कि विशेषकर मारवाड पश्चिम राजस्थान में गर्मी के मौसम में पेयजल की किल्लत होती है। उन्होने कहा कि पेयजल कि किल्लत हर साल होती है लेकिन सरकार इसको लेकर पूरी तरह से तैयार है। उन्होने कहा कि पेयजल को लेकर कंटलजेंसी प्लान तैयार कर लिया है। ऐसे में गर्मी में जनता के पेयजल का ध्यान रखा जाएगा। बार कौंसिल ऑफ राजस्थान में सदस्यों की संख्या बढाने के मामले कहा कि बार कौंसिल ऑफ राजस्थान की स्थापना के समय जितने सदस्य थे आज भी उतने ही है। हम चाहते है कि बार व बेंच का सामजंस्य बना रहे लेकिन बार के सदस्यों की संख्या बढाने के लिए कोई प्रस्ताव नही आया है। हम तो प्रयास कर रहे</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 17:27:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जल दिवस पर विशेष...''बढ़ती मांग, घटते स्रोत, गहराता जल संकट'': डार्क जोन में डूबता प्रदेश, गर्मियों में टैंकर राज और सूखते स्रोत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल संकट विकराल हो गया है; राज्य के पास देश का मात्र 1.16% सतही जल है। 299 में से केवल 38 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं, जबकि भूजल दोहन 150% तक पहुँच चुका है। 'जल जीवन मिशन' से कनेक्शन तो बढ़े, लेकिन 350 करोड़ लीटर की भारी मांग और घटता जलस्तर भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-water-day-increasing-demand-decreasing-sources-deepening/article-147402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/world-water-day.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद जल संकट की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। भौगोलिक विषमताओं के कारण यहां जल संसाधन विरासत में ही सीमित मिले। राज्य के पास मात्र 1.16 प्रतिशत सतही जल उपलब्ध है। यही असंतुलन आज गहराते जल संकट की जड़ बन चुका है। लगातार सूखा, घटती वर्षा, बढ़ती आबादी और अनियंत्रित विकास ने हालात को विकराल बना दिया है। राज्य के अधिकांश ब्लॉक अब डार्क जोन में पहुंच चुके हैं, जहां भूजल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। 55 प्रतिशत ग्रामीण आबादी आज भी भूजल पर निर्भर है, लेकिन यह पानी भी कई जगह खारा और स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त हो चुका है। गर्मियों में 150 से अधिक शहरों और 15 हजार गांवों में पानी का संकट खड़ा हो जाता हैं। जलदाय मंत्री कन्हैया लाल के अनुसार सरकार की प्राथमिकता हर घर को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। </p>
<p>राज्य के 222 शहरों और कस्बों में पेयजल योजनाएं संचालित हैं। जयपुर जैसे बड़े शहर में ही सात लाख कनेक्शन हैं। 28 प्रतिशत शहरों को सतही जल और 50 प्रतिशत को भूजल से पानी मिल रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि 60 शहरों में रोजाना सिर्फ  एक बार पानी आता है, जबकि 30 से अधिक शहरों में दो दिन में एक बार सप्लाई हो रही है। गर्मी के दिनों में यह संकट और विकराल हो जाता है, जिससे आमजन को परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong></p>
<p>जल प्रबंधन विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में जल संकट केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रबंधन की विफलता भी है। यदि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और फसल चक्र में बदलाव जैसे उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।</p>
<p><strong>ग्रामीण उम्मीद: नल कनेक्शन बढ़े, पानी कहां से आएगा</strong></p>
<p>जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन तेजी से बढ़े हैं। 2019 से पहले जहां केवल 11 लाख घरों में नल थे, अब यह संख्या बढ़कर 58 लाख तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि दिखने में बड़ी है, लेकिन असली चुनौती पानी की उपलब्धता है। वर्तमान में विभाग के पास 130 करोड़ लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध है, जबकि भविष्य में 350 करोड़ लीटर की जरूरत होगी। </p>
<p>प्रदेश में 150 प्रतिशत भूजल दोहन हो रहा है। 214 ब्लॉक अतिदोहित है। 1984 में दोहन 35 प्रतिशत, 1995 में 58 प्रतिशत, 2004 में 125 प्रतिशत, 2013 में 139 प्रतिशत, 2020 में 150 प्रतिशत और 2023 में 149 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 1984 में 236 में से 203 ब्लॉक सुरक्षित थे, जो स्थिति 2023 में 299 में से 38 ब्लॉक ही सुरक्षित श्रेणी में रहे।</p>
<p><strong>जल आपूर्ति की स्थिति</strong></p>
<p><strong>श्रेणी                                              आंकड़े</strong><br />कुल शहर/कस्बे                                 222<br />कुल उपभोक्ता                                   35 लाख<br />जयपुर में उपभोक्ता                            07 लाख<br />ग्रामीण नल कनेक्शन                          11 लाख<br />(2019 तक)    <br />वर्तमान नल कनेक्शन                          58 लाख<br />वर्तमान जल उपलब्धता                       130 करोड़ लीटर प्रतिदिन<br />अनुमानित आवश्यकता                       350 करोड़ लीटर प्रतिदिन</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजमेर में जल संकट पर महिलाओं का प्रदर्शन: जलदाय विभाग पर अनियमित जलापूर्ति का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर के गुलाबबाड़ी क्षेत्र में पेयजल संकट से आक्रोशित महिलाओं ने जलदाय विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप है कि होली जैसे त्योहार पर भी पानी की सप्लाई नहीं हुई। अनियमित जलापूर्ति और कम प्रेशर से परेशान निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या नहीं सुलझी, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/women-protest-over-water-crisis-in-ajmer-alleging-irregular-water/article-145525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ajmer1.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वार्ड 56 के गुलाबबाड़ी संजय नगर व धानका बस्ती में पानी की समस्या को लेकर शुक्रवार को महिलाओं ने जलदाय विभाग दफ्तर पर जमकर प्रदर्शन किया। महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। होली पर्व के अवसर पर सप्लाई नहीं होने से लोग पेयजल को तरस गए। इधर विभाग के दफ्तर में इंजीनियर के नहीं मिलने से लोगों में गुस्सा दिखाई दिया।</p>
<p>क्षेत्रवासी लता देवी ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र में अनियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। निर्धारित एक घंटा भी पानी नहीं दिया जाता है। प्रेशर कम होने से क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है। कई बार विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। होली के दिन क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं होने से लोग परेशान रहे। जबकि होली पर्व के अवसर पर पानी की ज्यादा जरूरत होती है।</p>
<p>महिलाओं ने विभाग पर तंज कस्ते हुए कहा कि अगर विभाग पानी नहीं पिला सकता है तो कह दे, हम इसकी व्यवस्था अपने स्तर पर कर लेंगे। महिलाओं ने बताया कि पानी की सप्लाई का समय भी निश्चित नहीं है। कई बार रात में पानी दिया जाता है, ऐसे में महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। महिलाओं ने जल्द ही समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:57:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लापरवाही : गहराया पेयजल संकट, घर-घर नल फेल, जल जीवन मिशन योजना का नहीं मिल रहा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[डुंडी ग्राम में नल व्यवस्था को लेकर हो रही है समस्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--drinking-water-crisis-deepens--taps-fail-in-every-home--and-the-jal-jeevan-mission-scheme-is-not-providing-benefits/article-129012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(5)11.png" alt=""></a><br /><p> खानपुर।  खानपुर के पास स्थित ग्राम डुंडी में जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामवासियों के नल लगवाए गए थे। जिसमें भीमसागर से पानी आता है, लेकिन ग्रामीण वासियों का कहना है कि नल तो आता है लेकिन खातियो के मोहल्ले में पीछे की साइड पर नल में से एक बूंद भी नहीं टपकती है, इसके लिए खातियो के मोहल्ले वालों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। जल ही जीवन है इसके बिना कुछ नहीं है। व्यक्ति खाना खाकर जिंदा रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं रह सकता। जल जीवन मिशन योजना के तहत घर-घर नल लगे थे लेकिन उनका ग्रामीण वासियों को अभी कुछ फायदा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने जेईएन मुस्ताक अली को समस्या से अवगत कराया, उन्होंने समस्या को समझा और तुरंत इस पर एक्शन लेने के लिए कहा क्योंकि नल नहीं आने पर कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानी के लिए खातियों के मोहल्ले वालों को पानी लेने के लिए थाने की टंकी के पास आना पड़ता है और थाने की टंकी से पानी भरते हैं तो वहां से लगभग 2 किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पानी की समस्या का समाधान किया जाए। </p>
<p>जल जीवन मिशन योजना के तहत नल लगवाए गए थे लेकिन इन नलों में पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-पवन गौड़, कस्बेवासी </strong></p>
<p>पीने के पानी के लिए दूर दराज से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणो को पानी की समस्या के  समाधान की मांग की है। <br /><strong>-लेखराज मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>नलों में पानी नहीं आने से ग्रामीणों को ट्यूबवेल व कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>-हरिराम मेहता, कस्बेवासी </strong></p>
<p>ग्रामीणों की सुविधा के लिए नल तो लगवा दिए लेकिन पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-रमेश मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सुबह जल्द उठकर दूर दराज से पानी लाना पड़ता है काफी समस्या आती है। समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>-बिंदराज मेहरा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>पानी की समस्या को दिखाकर दो या तीन दिन में समस्या का निवारण कर दिया जाएगा और नल व्यवस्था सुचारू रूप से चालू हो जाएगी।<br /><strong>- सहायक अभियंता मुस्ताक अली, पी एच ई डी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:12:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सातलखेड़ी में 30 हजार की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरस रही, कभी 72 घंटे तक सप्लाई रहती है पूरी तरह ठप </title>
                                    <description><![CDATA[पीएचईडी विभाग की लापरवाही से हाहाकार। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-30-000-strong-population-of-satalkhedi-yearns-for-every-drop-of-water--with-the-supply-sometimes-completely-disrupted-for-72-hours/article-127980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(5)9.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। कोटा जिले का सातलखेड़ी कस्बा इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। करीब 30 हजार की आबादी वाला यह कस्बा पीएचईडी विभाग की लापरवाही के कारण बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है। स्थिति यह है कि यहां कभी 72 घंटे तक सप्लाई पूरी तरह ठप रहती है और कभी नलों से सिर्फ बूंदें टपककर रह जाती हैं। कस्बे की बड़ी आबादी रोजमर्रा के कामकाज के लिए पानी पर निर्भर है। लेकिन सप्लाई बाधित होने से महिलाएं और बच्चे दूर-दूर तक पानी के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। त्योहार और गर्मी के मौसम में हालात और गंभीर हो गए हैं।</p>
<p><strong>जिम्मेदारों के सिर्फ आश्वासन</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी हर बार सप्लाई दुरुस्त करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं होता। बैठकों में चर्चा होती है, लेकिन आमजन के घर तक पानी नहीं पहुंच पाता। पानी की किल्लत के चलते लोग गंदे स्रोतों से पानी भरने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>क्या बोले लोग</strong><br />अजय वाडिया ने कहा कि हमारा देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, लेकिन गांव और कस्बे तो बुनियादी सुविधाओं से ही वंचित हैं। सातलखेड़ी खैराबाद पंचायत समिति का बड़ा कस्बा है और यहां मजदूर वर्ग की संख्या अधिक है। नल सप्लाई 3-4 दिन में सिर्फ 40 मिनट आती है, जिससे लोग परेशान हैं। कई बार ज्ञापन देने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>
<p>ललित सिसोदिया ने बताया कि कस्बे में नलों से कई दिनों तक पानी नहीं आता। लोग दूर-दूर से हेडपंप से पानी भरकर ला रहे हैं। अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, समाधान कोई नहीं।</p>
<p><strong>विभाग की सफाई</strong><br />सातलखेड़ी में पानी की समस्या को दूर करने के प्रयास जारी हैं। कभी पंप खराब होने जैसी तकनीकी वजहों से सप्लाई बाधित होती है, लेकिन जल्द ही स्थिति सुधारी जाएगी।<br /><strong>- सोमेश मेहर, एक्शन, पीएचईडी विभाग। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 17:42:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 70 - पानी की मोटरें कर रही लोगों की जेब ढीली</title>
                                    <description><![CDATA[उधड़ी सडकें व गंदी नालियों से वार्डवासी परेशान है ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-70---water-motors-are-emptying-people-s-pockets/article-122058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/ne1ws8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के वार्ड 70 के रहवासी पेयजल संकट की समस्या से जुंझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश कॉलोनियों में पेयजल की पाइपलाइन में कम प्रेशर की वजह से पानी घरों में नहीं पहुंच पाता है। जिसके कारण हर घर में मोटर चलाकर पानी खींचना पड़ रहा है। पानी के लिए दिन-रात मोटर चलाना लोगों की अब मजबूरी बन गई है। मोटर चलने के कारण बिजली बिल का भार भी जेब पर पड़ रहा है। वार्डों की उधड़ी सड़कें, पानी की मारामारी और जगह-जगह खुले पड़े नालों के बीच वार्डों का विकास कोसो दूर नजर आ रहा है। यहां की कुछ गली में तो सीसी सड़क है तो किसी में सड़क का लेवल भी उबड़ खाबड़ है तथा सीवरेज की होदियों की ढक्कन सड़के से थोड़े उपर है। आने-जाने वाले राहगीरों को भी काफी परेशानी होती है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />एन एच-12की चम्बल पुलिया का निचला हिस्सा, रिद्धि राज टॉवर, बूंदी सिलिका, बीजासन माताजी का मंदिर, बालापुरा का सम्पूर्ण क्षेत्र, नगर निगम का सेक्टर कार्यालय, विजयवीर क्लब स्टेडियम, रोडवेज वर्कशाप, रजत सिटी ग्रुप, कंक्रेश्वर महादेव मंदिर, पुरानी कुन्हाड़ी से लेकर कुन्हाड़ी हवेली का क्षेत्र शामिल है। </p>
<p><strong>पानी की पाइप लाइन ही नहीं डली</strong><br />कंक्रेश्वर महादेव मंदिर मोहल्ले में पानी की पाइप गलत तरिके से डलने से लोगों को बोरिंग का पानी पीना पड़ता है। वहीं, जिन कॉलोनियों में पाइप लाइन हैं वहां जलापूर्ति धीमी गति से होती है। एक बाल्टी भरने में ही 30 मिनट का समय लग जाता है। ऐसे में दिन-रात मोटर चलाकर जरूरत का पानी एकत्रित करना पड़ता है। जिससे बिजली का बिल अधिक आ रहा है। पार्षद से शिकायत करते हैं तो सुनवाई नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।  <br /><strong>- मनु बाई, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>नालियों की नहीं हो रही सफाई</strong><br />वार्ड में कई कॉलोनियां है जहां सफाई नहीं होने से गंदगी से अटी पड़ी है। दुर्गन्ध के चलते सफाईकर्मी वार्ड के मुख्य मार्गों पर ही सफाई करते हैं लेकिन कॉलोनियों में नहीं आते। ऐसे में स्थानीय लोग को ही नालियों की सफाई करनी पड़ती हैं। सड़कों पर पानी जमा रहता है, जिनमें खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप ने का खतरा बना रहता है।  <br /><strong>- सरोज, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में दो साल पहले पाइपलाइन बदलने के बाद नई पाइपलाइन के कनेक्शनों में पानी का प्रेशर बहुत ही कम है जिसके कारण रोजाना मोटरें चलानी पड़ रही हैं। इसके चलते बिजली का बिल भी बढ़ रहा है। वहीं जनप्रतिनिधियों को भी कई बार अवगत करवाया है लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।<br /><strong>- अशोक कुमार, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड में नालों को लेकर काम चल रहा है। यहां बनी आंगनबाड़ी की बिल्डिंग जर्जर अवस्था को लेकर अधिकारियों को भी लिखित में दे रखा है। अधिकारी जनप्रतिनिधयों की बातों को नहीं सुन रहे हैं। <br /><strong>- बीरबल लोधा, पार्षद वार्ड 70</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 14:31:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>तापमान बढ़ोतरी के साथ ही गहराया पेयजल संकट, शहर और गांव में टैंकरों की बड़ी डिमांड </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में तापमान में एकदम से बढ़ोतरी के साथ ही पीने के पानी का संकट की बढ़ने लगा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-the-increase-in-temperature-the-deepened-drinking-water-crisis/article-116853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/jal-bhawan-jaipur.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में तापमान में एकदम से बढ़ोतरी के साथ ही पीने के पानी का संकट की बढ़ने लगा है। गांव व  शहरों में टैंकरों की डिमांड बढ़ने लगी है। 40 से अधिक शहरों और 6000 गांव में टैंकरों से पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है। जलदाय विभाग के अधिकारियों के अनुसार आने वाले 15 दिन तक पेयजल की डिमांड और बढ़ सकती है। ऐसे में विभाग स्तर पर पीने का पानी मुहैया करवाने के लिए फील्ड में तैनात अधिकारियों को निर्देशित किया गया है ताकि किसी भी स्थान पर पीने के पानी की समस्या आने के साथ ही उसका तुरंत समाधान किया जाए।</p>
<p>राज्य सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार जिलों के लिए आवंटित किए गए आवश्यक डिमांड राशि को भी आपात स्थिति में खर्च किया जा सकेगा ताकि लोगों को पीने का पानी मुहैया करवाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 16:19:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संकट मिटाने के लिए बदलाव जरूरी </title>
                                    <description><![CDATA[नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के अध्ययन  के मुताबिक भारत में विकास की रफ्तार बढ़ने के  साथ पानी का संकट लगातार बढ़ता जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/change-is-necessary-to-eradicate-water-crisis/article-112860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/36.png" alt=""></a><br /><p>नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के अध्ययन  के मुताबिक भारत में विकास की रफ्तार बढ़ने के  साथ पानी का संकट लगातार बढ़ता जाएगा, जिससे पानी को लेकर अनेक राज्यों में मारा-मारी  के हालात बने रह सकते हैं। जाहिर तौर पर पानी की खपत  पिछले 40-50 वर्षों में तेजी के साथ बढ़ी है। एक दशक  से पानी की मांग प्रति व्यक्ति 100 से 120 लीटर के बीच  रही है जो 2025 तक बढ़कर 125 लीटर हो गई है। अब  पानी की मांग 7900 करोड़ लीटर से ज्यादा हो गई है।  राष्ट्रीय जल आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 1997 में जल  की उपलब्धता 575 क्यूबिक किमी थी, लेकिन अब यह  लगभग 500 क्यूबिक किमी है जबकि मांग 800  क्यूबिक किमी के लगभग है। यानी उपलब्धता के एवज में  मांग बहुत ज्यादा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुमानों के  अनुसार वर्ष 2025 तक भूजल जलस्तर और घटकर  1,434 घन मीटर तथा वर्ष 2050 तक 1,219 घन मीटर  हो जाएगा। वर्ल्ड बैंक के इस आकलन पर हैरानी नहीं होनी  चाहिए कि अगले 20 सालों में भूजल के 60 फीसदी स्रोत  खतरनाक हालात में पहुंच जाएंगे। क्योंकि जल की हमारी  70 फीसदी मांग भूजल के स्रोतों से पूरी होती है।   </p>
<p>जाहिर है, तब न तो फसल उगाने के लिए पानी होगा  और न तो उद्योग-धन्धों के लिए ही। खेती-किसानी तो  बर्बाद होगी ही, देशा की बहुत बड़ी आबादी जल की  एक-एक बूंद के लिए तरस सकती है। ऐसे में पानी की  बर्बादी को रोकना जरूरी है। दुनिया में आज सबसे बड़ा  संकट आतंकवाद और पर्यावरण प्रदूषण है, लेकिन  2050 में पानी संकट सबसे बड़ा संकट होगा। भूवैज्ञानिक  मानते हैं कि 2025 तक दुनिया की आबादी 8 अरब और  2050 तक 9 अरब को पार कर जाएगी। एशिया,  अफ्रीका, यूरोप आदि में बसने वाले देशों की बड़ी आबादी  पानी की किल्लत से जूझ रही होगी। इन देशों में सब-सहारा,  कांगो, मोजांगिक, भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश,  श्रीलंका, नेपाल, मयम्मार, चीन, कोरिया, घाना, केन्या,  नामीबिया, अफगानिस्तान, अरब अमीरात, ईरान, ईराक,  सीरिया सहित तमाम मुल्क शामिल होंगे। 2050 में साढ़े  पांच अरब लोग पानी के संकट से जूझ रहे होंगे। जिस तरह  से विकासशील देशों में गांवों से शहरों की ओर पलायन हो  रहा है, उससे यह अनुमान लगाया गया है कि 2025 के  अंत तक दुनिया की आधी आबादी शहरों में रह रही होगी,  जिससे जल संकट और भी गहरा हो सकता है। केंद्रीय  भूजल बोर्ड के नए शोध के मुताबिक भारत के 700  जिलों में से 256 जिले पानी की अतिगंभीर समस्या से  जूझ रहे हैं। अतिदोहन की वजह से भूजल संसाधनों पर  दबाव बढ़ रहा है जिससे कुएं, पोखर, तालाब जैसे  परंपरागत जल स्रोत सूख रहे हैं। समस्या महज परंपरागत  जल स्रातों का सूखने तक नहीं है, बल्कि जो भूजल बचा  है वह प्रदूषित भी होता जा रहा है।   </p>
<p>यह समस्या इतनी विकट है कि इसका समाधान सरकार  भी नहीं कर पा रही है। साफ पानी जानवरों को पीने के लिए  न मिल पाने की वजह से जानवर बीमारियों के चपेट में  आकर मर रहे हैं, इससे देश के पशुधन पर असर हो रहा है।  घरेलू इस्तेमाल का पानी उन इलाकों में भी साफ नहीं मिल  पा रहा है, जहां तीस-चालिस साल पहले जल सदानीरा की  तरह बहता और मिलता था। इंटरनेशनल हाइड्रोलॉजिकल  प्रोग्राम के अनुमान के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के कारण  अगले 10 सालों में वाष्पीकरण की रफ्तार आज की  तुलना में दुगनी हो जाएगी। इसकी वजह से नदियों और  अन्य जल स्रोतों का पानी कम हो जाएगा। गर्मी बढ़ने से  ध्रूवों की बर्फ तेजी के साथ पिघलेगी। इससे मीठा पानी खारे  समुद्र में मिल जाएगा, जिससे मीठे पानी के जलस्रोत  सूखते चले जाएंगे। पानी की उपलब्धता इतनी कम हो  जाएगी कि दो-चार गिलास पानी से नहाने के लिए मजबूर  होना पड़ेगा। दूसरी समस्या जो सबसे विकराल रूप में  सामने आ सकती है वह है, जल के लिए पलायन की। ऐसे  स्थानों पर आबादी का विकट दबाव हो सकता है। इससे  आर्थिक, सामाजिक समस्याएं पैदा होंगी। निवासियों और  विस्थापितों के बीच एक संघर्ष की स्थिति बनेगी जो कई  नई समस्याओं को जन्म देगी।  </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार वर्ष 2030 तक 70 करोड़  लोगों को अपने क्षेत्रों से विस्थापित होने के लिए मजबूर  होना पड़ सकता है। केन्द्रीय मौसम विज्ञान के मुताबिक  देशभर में कुल वार्षिक बारिश 1,170 मिमी होती है, और  वह भी महज तीन महीने में। यदि बरसात के पानी को  संरक्षित करने की योजना पर अमल करें तो पानी की  किल्लत से ही निजात नहीं मिलेगी, बल्कि पानी को लेकर  होने वाली राजनीति से भी हमेशा के लिए छुटकारा मिल  जाएगा।  </p>
<p>मतलब जल संरक्षण और जल के बेहतर इस्तेमाल से  पानी के संकट से देश को उबारा जा सकता है। जिन  इलाकों में बरसात बहुत कम होती है, वहां तो पाताल का  पानी ही एक मात्र स्रोत होता है, वहां कैसे पानी की किल्लत  से उबरा जाए, इस पर गौर करने की जरूरत है। ऐसे में  बरसात के पानी को संरक्षित करके ही इस संकट से उबरा  तो जा सकता है, लेकिन बहुराष्टÑीय कम्पनियों के जरिए  किए जा रहे पानी के मनमाना दोहन को रोकना भी बहुत  जरूरी है। पानी की बढ़ती किल्लत पर आम आदमी और  सरकारों का लापरवाही वाला रवैया चिंता जनक है। भविष्य में इसके गम्भीर परिणाम हो सकते हैं।  </p>
<p><strong>-अखिलेश आर्येन्दु   </strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 12:14:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>तपती दुपहरी, खाली बर्तन, आंखों में इन्तजार</title>
                                    <description><![CDATA[पार्षद बोले-डिमांड के अनुरूप नहीं मिल रहा पानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scorching-afternoon--empty-utensils--waiting-in-eyes/article-111991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(2)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही चंबल किनारे बसी आबादी में जल संकट गहरा गया। लोग पानी के इंतजार में तपती दोपहरी में इधर-उधर भटक रहे तो कहीं निजी ट्यूबवेलों से पानी खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। हालांकि, जलदाय विभाग भी पूरी क्षमता से टैंकरों के माध्यम से संकटग्रस्त इलाकों में पानी पहुंचा रहा है। 16 दिन में ही 5.55 लाख लीटर पानी की सप्लाई बढ़ाकर 15 लाख लीटर प्रतिदिन कर दी गई है। इसके बावजूद इन इलाकों में पानी की मारामारी मच रही है। वार्ड पार्षदों का तर्क है, टैंकर मात्र विकल्प है लेकिन स्थाई समाधान लाइनों से घर-घर पानी की सप्लाई से ही हो सकेगा। ऐसे में जलदाय विभाग को आंवली-रोजड़ी से बंधा धर्मपुरा इलाकों में स्थाई समाधान किया जाना चाहिए। हालांकि, जल अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही टैंकरों की संख्या में इजाफा किया जाएगा।  </p>
<p><strong>16 दिन में 21 से 47 हुई टैंकरों की संख्या</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नयागांव, रतकांकरा, आवंली, रोजड़ी सहित एक दर्जन इलाकों में पानी की डिमांड बढ़ने के साथ ही पिछले दिनों के मुकाबले  बुधवार तक 26 टैंकर बढ़ा दिए गए हैं। गत 9 अप्रेल को  21 टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही थी, जिसे बढ़ाकर 47 कर दी गई है। वहीं, 111 ट्रिप बढ़ाकर 387 कर दी गई है। इसके अलावा गर्मी में तेजी होने पर टैंकरों की संख्या में इजाफा किया जाएगा।  </p>
<p><strong>20 लाख लीटर पानी प्रतिदिन हो रहा सप्लाई </strong><br />अकेलगढ़ से इन दिनों 47 टैंकरों की मदद से संकटग्रस्त 9 इलाकों में 20 लाख लीटर शुद्ध पानी प्रतिदिन सप्लाई किया जा रहा है। जबकि, 16 दिन पहले 21 टैंकरों की मदद से 5.55 लाख लीटर पानी पहुंचाया जा रहा था। इधर, संकटग्रस्त इलाकों के पार्षदों ने जलदाय अधिकारियों से जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि सुबह से दोपहर तक प्रतिदिन बड़ी संख्या में वार्डवासी पानी न मिलने की शिकायत करते हैं। विभाग की जल वितरण व्यवस्था प्रभावी नहीं होने से लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा। </p>
<p><strong>निजी नलकूपों से खरीदना पड़ रहा पानी </strong><br />आंवली-रोझड़ी, बरड़ा व क्रेशर बस्ती के बाशिंदे जल संकट से जूझ रहे हैं। जलदाय विभाग की ओर से आने वाले टैंकरों से जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा। इसकी वजह से लोगों को निजी नलकूपों से टैंकर मंगवाकर पानी खरीदना पड़ रहा है। लोगों का कहना है, बस्ती को बसे वर्षों हो गए, लेकिन अब तक सरकार ने पानी के प्रबंध नहीं किए। हर साल गर्मी में पानी खरीदना पड़ता है। </p>
<p><strong>इन इलाकों में चल रहे टैंकर </strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के एक दर्जन से  अधिक इलाके हर साल जल संकट से जूझते हैं। जिसमें नयागांव, आवंली, रोजड़ी, दौलतगंज, सुभाष नगर, बरड़ा व क्रेशर बस्ती, जगपुरा, रानपुर, बंधा धर्मपुरा, जेके चौकी एरिया में टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। हालात यह हैं, नगर नगर के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक इन इलाकों में पाइप लाइन नहीं बिछी है। हर वर्ष यहां पानी के लिए मारामारी मचती है। गर्मियों में लोगों के लिए पानी का जुगाड़ करना किसी चुनौती से कम नहीं रहता। </p>
<p><strong>दिनभर टैंकर का इंतजार, आते ही लगती भीड़</strong><br />रतकांकरा, जगपुरा व बंधा धर्मपुरा के बाशिंदों का कहना है, भीषण गर्मी में भी घरों में कूलर नहीं चलते, क्योंकि यहां पीने को पानी नहीं मिल रहा तो कूलर में कहां से भरेंगे। दिनभर टैंकरों के आने का इंतजार करना पड़ता है। एक टैंकर 5 हजार लीटर क्षमता का होता है, जबकि इलाके की एक गली में ही 30 से ज्यादा परिवार रहते हैं। प्रत्येक घर में औसत 6 सदस्य हैं। ऐसे में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में सुबह ही खाली चरे, बाल्टियां लेकर पानी के जुगाड़ के लिए निकलना पड़ता है। </p>
<p><strong>न सड़क बनी न पाइप लाइन बिछी, हर बार पानी को तरसते </strong><br />बरड़ा बस्ती हो या क्रेशर बस्ती, दोनों जगह मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। दोनों बस्तियों के हजारों लोग गर्मियों में पानी के लिए दर-दर भटकते हैं। लेकिन, पाइप लाइन नहीं बिछाई जाती। टैंकर आता है तो आधे घंटे में ही खत्म हो जाता है, जो दो घंटे तक वापस नहीं आता। घर के जरूरत के कार्य भी पूरे नहीं हो पाते। सड़कें नहीं बनने से धूल के गुबार उड़ते हैं। <br /><strong>- रमेश लाल, राकेश मेहरा, शंभु बैरवा आवंली रोजड़ी </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं बाशिंदे</strong><br />हर साल गर्मी में पानी के लिए मारामारी रहती है। जलदाय विभाग द्वारा टैंकर तो भेजे जाते हैं लेकिन पानी जरूरत के मुताबिक नहीं मिल रहा। पानी का जुगाड़ करने में पूरा दिन निकल जाता है। टैंकर आते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। चंद मिनटों में ही टैंकर खाली हो जाता है। खाना बनाने व पीने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। पानी का जुगाड़ करने के चक्कर में मजदूरी तक छूट जाती है।  <br /><strong>- बनवारी, कुंज बिहारी गुर्जर, रोजड़ी</strong></p>
<p>आवंली रोजड़ी, दौलतगंज, नयागांव वाले इलाके में करीब 60 हजार से ज्यादा आबादी है। यहां 500 टैंकरों से प्रतिदिन  प्रतिदिन पानी की सप्लाई किए जाने की जरूरत है। जबकि, वर्तमान में 150 से 200 टैंकर चल रहे हैं। सुबह से शाम तक इलाके की दो दर्जन से अधिक महिलाएं पानी न मिलने की शिकायत करती हैं। लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा। मजबूरन उन्हें मोल खरीदना पड़ता है। महिलाएं पानी के लिए परेशान हो रहीं हैं। यह समस्या टैंकरों से खत्म होने वाली नहीं है। आबादी के लिहाज से यहां पानी की टंकी का निर्माण करवाकर पाइप लाइन बिछानी चाहिए ताकि बाशिंदों को सुचारू रूप से पानी मिल सके।<br /><strong>- धनराज गुर्जर, पार्षद वार्ड-29</strong></p>
<p>प्रभावित इलाकों में वास्तविक डिमांड के अनुरूप टैंकरों से नियमित पानी की सप्लाई की जा रही है। पिछले दिनों की अपेक्षा टैंकरों की संख्या के साथ ट्रिप भी बढ़ा दिए गए हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही टैंकरों की संख्या में और इजाफा किया जाएगा। हर परिवार को जरूरत के मुताबिक पानी मिले, इसके लिए जलदाय विभाग पूरी क्षमता से काम कर रहा है। लोगों से आग्रह है पानी व्यर्थ बहाने से बचाएं ताकि जरूरतमंद लोगों के घरों में पानी पहुंचा सकें।  <br /><strong>- प्रकाशवीर नाथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Apr 2025 14:58:09 +0530</pubDate>
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                <title>सहरिया बस्ती में 10 दिनों से जल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[पानी को लेकर बस्ती में तनाव का माहौल बनता जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-crisis-in-sahariya-colony-since-10-days/article-110553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)33.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। क्षेत्र की राजपुर ग्राम पंचायत स्थित सहरिया बस्ती के लोग बीते 10 दिनों से गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। इस बस्ती का एकमात्र सहारा सरकारी ट्यूबवेल पिछले 10 दिनों से खराब पड़ा है। जिससे बस्तीवासियों को पीने तक के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। अरविंद, नारायण लाल सहरिया,  काशीलाल गणेशलाल सहरिया, जानकीलाल, लखन सहरिया, राजेंद्र सहरिया,सहित अन्य स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जिम्मेदारों को इस समस्या की जानकारी दी लेकिन अब तक न तो कोई मिस्त्री आया और न ही ट्यूबवेल की मरम्मत के लिए कोई प्रयास किया गया। गर्मी के इस भीषण मौसम में जहां पारा तेजी से चढ़ रहा है, वहीं लोगों को अपनी बुनियादी जरूरत पानी के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। बस्ती के वासियों ने बताया कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग रोजाना एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर पीने, नहाने और खाना बनाने की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि पानी को लेकर बस्ती में तनाव का माहौल बनता जा रहा है।</p>
<p><strong>पंचायत की उदासीनता बनी परेशानी की वजह</strong><br />ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों को बार-बार सूचना देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न तो ट्यूबवेल की मरम्मत हुई और न ही वैकल्पिक जलापूर्ति की कोई व्यवस्था की गई है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की मांग</strong><br />बस्तीवासियों ने जिला प्रशासन और जलदाय विभाग से जल्द से जल्द इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर ट्यूबवेल की मरम्मत कराने और जब तक मरम्मत नहीं होती, तब तक टैंकर से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। यदि जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन की लापरवाही ग्रामीणों की नाराजगी का कारण बन सकती है।</p>
<p><strong>जल्द करें समाधान</strong><br />बस्तीवासियों को पीने तक के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। जल्दी ही समस्या का समाधान करवाया जाए।<br /><strong>- मुन्ना सहरिया, बस्तीवासी। </strong></p>
<p>समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदारों को अवगत करा चुके है लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। <br /><strong>-रवि सहरिया, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>पर्याप्त मात्रा में नहीं है पानी</strong><br />गर्मी में दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। जिसमें अधिक समय पानी लाने में निकल जाता है और पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है। <br /><strong>- बसंती बाई सहरिया, अनारी सहरिया, बस्तीवासी।     </strong></p>
<p><strong>जल्द करवाएंगे समाधान</strong><br />सहरिया बस्ती में पानी की समस्या की जानकारी मिली है। शाहाबाद विकास अधिकारी को अवगत करा दिया है। इस मामले को लेकर जल्दी समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- जबर सिंह, एडीएम, शाहाबाद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 15:41:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>21 टैंकरों से छह इलाकों में 5.55 लाख लीटर पानी प्रतिदिन सप्लाई, फिर भी डिमांड से कम </title>
                                    <description><![CDATA[पार्षद बोले-डिमांड के अनुरूप नहीं मिल रहा पानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/5-55-lakh-liters-of-water-is-supplied-daily-in-six-areas-through-21-tankers--still-less-than-the-demand/article-110425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer50.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी के तेवर तीखे होने के साथ ही चंबल किनारे बसे इलाकों मे पानी के टैंकर दौड़ने लगे हैं। जल संकट से जूझ रहे 6 इलाकों में जलदाय विभाग की ओर से प्रतिदिन 5 लाख लीटर से ज्यादा पानी टैंकरों से सप्लाई किया जा रहा है। लेकिन, क्षेत्र की आबादी के हिसाब से पानी पर्याप्त नहीं है। लोग दिनभर पानी के लिए तेज धूप में भटक रहे हैं। कहीं टैंकरों के पीछे दौड़ते तो कहीं दूर दराज से नलकूपों से पानी जुटाने की मशक्कत करते नजर आ रहे हैं।  हालांकि, जल अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी के टैंकर बढ़ाए जाएंगे। </p>
<p><strong>कहां कितने टैंकरों से हो रही सप्लाई</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, टेल क्षेत्र बरड़ा व क्रेशर बस्ती और सुभाष नगर में कुल 5 टैंकरों से दिनभर में 28 बार पानी की सप्लाई की जा रही है। प्रत्येक टैंकर 5 हजार लीटर क्षमता का है। ऐसे में इन इलाकों में एक दिन में कुल 1 लाख 40 हजार लीटर टैंकरों के माध्यम से सप्लाई किया जा रहा है। इसी तरह नयागांव, आंवली रोजड़ी इलाके में 16 टैंकरों से 83 बार पानी पहुंचाया जा रहा है, यानी 4 लाख 15 हजार लीटर शुद्ध पानी प्रतिदिन लोगों को उपलब्ध करवाया जा रहा है। </p>
<p><strong>जल संकट से जूझ रहे यह इलाके</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के एक दर्जन से  अधिक इलाके हर साल जल संकट से जूझते हैं। जिसमें नयागांव, आवंली, रोजड़ी, दौलतगंज, सुभाष नगर, बरड़ा व क्रेशर बस्ती, जगपुरा, रानपुर, बंधा धर्मपुरा, हाड़ौती कॉलोनी, देवनारायण आवासीय योजना, सैनिक कॉलोनी सहित कई क्षेत्र शामिल हैं। हालात यह हैं, नगर नगर के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक इन इलाकों में पाइप लाइन नहीं बिछी है। हर वर्ष यहां पानी के लिए मारामारी मचती है। गर्मियों में लोगों की दिनचर्या पानी का जुगाड़ करने में बदल जाती है। </p>
<p><strong>आंख खुलते ही पानी की तलाश, टैंकर आते ही दौड़भाग</strong><br />आंवली, रोजड़ी व दौलतगंज के बाशिंदों का कहना है कि बूंद-बूंद पानी के लिए चिलचिलाती धूप में दौड़-भाग करनी पड़ती है। सुबह ही खाली चरे, बाल्टियां लेकर पानी के जुगाड़ के लिए निकलना पड़ता है। हालात यह है कि सुबह आंख खुलने ही पानी का जुगाड़ करने की चिंता सताने लगती है। 42 डिग्री के तापमान में भी कोसों दूर नलकूपों से पानी लाना पड़ता है। जलदाय विभाग हर साल पाइप लाइन बिछाकर नलों में पानी आने की बात कहता है लेकिन पिछले 6 साल से अब तक नल तो छोड़ा पाइप लाइन तक नहीं बिछी। जबकि, यह इलाके नगर निगम में आते हैं। इसके बावजूद इन क्षेत्रों का विकास तक नहीं हो पाया। </p>
<p>हमारे इलाके में जलदाय विभाग के टैंकर आते हैं लेकिन पानी का वितरण सही नहीं होने से जरूरतमंदों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। एक बार टैंकर आने के बाद दो घंटे तक टैंकर नहीं आता। पानी के लिए दिनभर टैंकर का इंतजार करना पड़ता है। घर के जरूरत के कार्य भी पूरे नहीं हो पाते। इंसान ही नहीं पशुओं के लिए भी पानी जुटाना मुश्किल हो गया है। इलाके में पाइप लाइन बिछाएं ताकि हमें नलों से पानी मिल सके। <br /><strong>- कैलाश, नरोत्तम गुर्जर, यादराम गुर्जर, आवंली रोजड़ी </strong></p>
<p>पानी का जुगाड़ करने में कई घंटे तो कभी पूरा दिन ही बीत जाता है। टैंकर आते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। चंद मिनटों में ही पांच हजार लीटर क्षमता का टैंकर खाली हो जाता है। खाना बनाने व पीने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। पानी का जुगाड़ करने के चक्कर में कई लोगों की मजदूरी तक छूट जाती है।  <br /><strong>- सूर्या कुमार, अशोक नागर, पवन सौलंकी, सुभाष नगर </strong></p>
<p>टैंकर तो आ रहे हैं लेकिन पानी पर्याप्त नहीं मिल रहा। अभी तीन टैंकर 35 बार पानी लेकर आता है लेकिन इलाका इतना बड़ा है कि एक गली में ही एक टैंकर खत्म हो जाता है फिर भी गली के पूरे बाशिंदों को पानी नहीं मिल पाता। मजबूरन निजी नलकूपों से मोल पानी भरकर लाना पड़ता है। परिवार में 6 सदस्य हैं, 300 लीटर ही पानी मिल पाता है, जो जरूरत के हिसाब से कम हैं।  <br /><strong>- शंभु दयाल गुर्जर, सुरेंद्र भील, नयागांव</strong></p>
<p><strong>पार्षद का कहना है</strong><br />आवंली रोजड़ी, रतकांकरा, दौलतगंज, नयागांव वाला इलाके में करीब 60 से 70 हजार की आबादी है। यहां पानी के लिए हर रोज संघर्ष करना पड़ता है। इलाके में जो टैंकर आ रहे हैं वो पर्याप्त नहीं है। लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा। मजबूरन उन्हें मोल खरीदना पड़ता है। महिलाएं पानी के लिए परेशान हो रहीं हैं। यह समस्या टैंकरों से खत्म होने वाली नहीं है। आबादी के लिहाज से यहां पानी की टंकी का निर्माण करवाकर पाइप लाइन बिछानी चाहिए ताकि बाशिंदों को सुचारू रूप से पानी मिल सके।<br /><strong>- धनराज गुर्जर, पार्षद वार्ड-29</strong></p>
<p>गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की डिमांड बढ़ती जा रही है। लेकिन जलदाय विभाग द्वारा टैंकरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। 60 हजार की आबादी वाले इलाके में 5 टैंकरों से 35 बार पानी की सप्लाई हो रही है, जो बिलकुल भी र्प्याप्त नहीं है। विभाग को टैंकरों व ट्रिप की संख्या में बढ़ोतरी करनी चाहिए। लोग पानी के लिए दिनभर परेशान हो रहे हैं। <br /><strong>- सोनू भील, पार्षद वार्ड-7</strong></p>
<p>प्रभावित इलाकों में वास्तविक डिमांड के अनुरूप टैंकरों से नियमित पानी की सप्लाई की जा रही है। गर्मी बढ़ने के साथ ही टैंकरों व ट्रिप की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। लोगों से अपील है कि पानी का महत्व समझे और सद्पुयोग करें। पानी व्यर्थ बहाने से बचाए ताकि जरूरतमंद लोगों के घरों में पानी पहुंचा सकें। जलदाय विभाग पूरी क्षमता के साथ जल संकट से प्रभावित इलाकों में पानी पहुंचा रहा है।<br /><strong>- प्रकाशवीर नथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 16:29:56 +0530</pubDate>
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