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                <title>veterinary hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान विधानसभा: मांडलगढ़ पशु चिकित्सालय को लेकर राज्य सरकार का पलटवार, जोराराम कुमावत ने कहा-नियमानुसार रिक्त पदों को भरने की होगी कार्यवाही</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को विधायक गोपाल लाल शर्मा ने मांडलगढ़ के पशु चिकित्सालयों में डॉक्टरों और कंपाउंडरों के रिक्त पदों पर सवाल उठाए। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने 'माल का खेड़ा' चिकित्सालय को क्रमोन्नत (Upgrade) करने का आश्वासन दिया और कहा कि नियमानुसार रिक्त पदों को भरने की आगामी कार्यवाही की जाएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-will-upgrade-mandalgarh-veterinary-hospital-as-per-rules/article-145328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jogaram-kumawat.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पशु चिकित्सालय के क्रमोन्नयन का सवाल उठा। विधायक गोपाल लाल शर्मा ने यह सवाल उठाया। सदन में गोपाल लाल ने पूछा कि आपने जितने अस्पताल खोले है, कहीं डॉक्टर नहीं कहीं कंपाउंडर नहीं, कब स्टाफ लगाया जाएगा। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने जवाब देते हुए कहा कि माल का खेड़ा पशु चिकित्सालय को क्रमोन्नत करने की कोशिश की जाएगी। नियमानुसार सरकार आगामी कार्यवाही करेगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:58:39 +0530</pubDate>
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                <title>डेढ़ दशक बाद भी बदहाली में देईखेड़ा पशु चिकित्सालय, न भवन, न चिकित्सक, एक कंपाउंडर के भरोसे चल रहा अस्पताल</title>
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                        <![CDATA[स्थानीय पंचायत द्वारा भूमि पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/deikheda-veterinary-hospital-remains-in-a-dilapidated-state-even-after-a-decade-and-a-half--with-no-building--no-doctor--and-a-single-compounder/article-132165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय इन दिनों बदहाली की स्थिति में है। स्थापना के डेढ़ दशक बीत जाने के बावजूद न तो अस्पताल को स्थाई भवन मिल पाया है, न ही पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध हैं। हालात यह हैं कि पूरा चिकित्सालय इन दिनों केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है, जबकि इस अस्पताल से करीब दर्जनभर गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में यह अस्पताल पूर्व में बंद हो चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन में अस्थायी रूप से चल रहा है। अब पंचायत प्रशासन इसे खाली पड़े पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में स्थानांतरित करने की तैयारी में है, जो करीब तीन दशक पुराना और जर्जर अवस्था में है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत द्वारा भूमि पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है।</p>
<p>गौरतलब है कि चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक कंपाउंडर और एक पशु परिचर के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल कंपाउंडर के सहारे ही अस्पताल संचालित हो रहा है। पशुपालकों ने बताया कि स्थाई भवन और संसाधनों के अभाव में मवेशियों के इलाज के लिए समुचित सुविधा नहीं मिल पाती। ग्रामीणों ने मांग की है कि शीघ्र ही स्थाई भवन हेतु भूमि पट्टा जारी कर निर्माण बजट स्वीकृत किया जाए तथा रिक्त पदों पर नियुक्ति की जाए।</p>
<p>अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों  के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव  उपचार किया जा रहा है भूमि आवंटन के लिये पँचायत को लिखा जा चुका है पँचायत द्वारा भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक तोर बोला गया  है समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है <br /><strong>- ओमप्रकाश नागर, पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा।</strong><br /> <br />पशु चिकित्सालय के अहाते में ही संचालित राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय में कमरों की कमी के कारण उसकी कुछ कक्षाओं को वँहा संचालित करने के लिये व्य्वस्था की निर्देश दिए गए है राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन में शिफ्ट होने से पुराना भवन खाली है पशु चिकित्सालय को वँहा संचालित करने के लिये लिखा है जल्द ही भूमि आवंटन कर दिया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा।</strong></p>
<p>ग्रामीण में पशुपालकों को सुविधाये मुहाये करना मात्र चुनावी वादा ही रहा है देईखेड़ा पशु चिकित्सालय को स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी क्रमोन्नत होना दूर स्थायी भवन संसाधन व पर्याप्त क्रमिक तक उपलब्ध नही करवाये जा रहे यह क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की संवेदन हीनता को दर्शता है। <br /><strong>- दिनेश व्यास, देईखेड़ा व्यापार मंडल,अध्यक्ष। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 16:14:36 +0530</pubDate>
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                <title>विभिन्न बीमारियों से तड़प रहे मवेशी, पंचायत समिति प्रधान को दिया ज्ञापन</title>
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                        <![CDATA[छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन पशुओं के इलाज की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/cattle-are-suffering-from-various-diseases--cattle-keepers-are-helpless/article-108292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/copy-of-news-(11).png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन पशुओं के इलाज की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे में प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय तो है लेकिन यह अत्याधुनिक सुविधाओं से वंचित है। पशुपालकों को किसी भी गंभीर स्थिति में अपने पशुओं को जिला मुख्यालय (बारां) या फिर कोटा ले जाना पड़ता है, जो कि 70 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित है। इस समस्या को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने इस चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय (पॉलिक्लिनिक) में क्रमोन्नत करने की मांग उठाई है।</p>
<p><strong>बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय... क्यों जरूरी?</strong><br />पशु चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। एक बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय  में निम्न सुविधाएं होती हैं। जैसे एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सुविधा, आपातकालीन सर्जरी और आॅपरेशन थियेटर,  पशुओं के लिए आईसीयू सुविधा, डेयरी उद्योग से जुड़े परीक्षण केंद्र, नियमित टीकाकरण और उपचार सेवाएं आदि है। <br /> <br /><strong>पंचायत समिति प्रधान को दिया ज्ञापन</strong><br />छीपाबड़ौद पंचायत समिति के प्रधान नरेश कुमार मीणा भी इस मांग को लेकर आगे आए और जयपुर पहुंचकर विधायक प्रताप सिंह सिंघवी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। रामबिलास मीणा, टीकमचंद, दिलीप मीणा और ललित मालव भी उनके साथ मौजूद रहे।  पशु चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की मांग रखी गई, ताकि पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और उन्हें अपने पशुओं को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों में न ले जाना पड़े।<br />   <br /><strong>कब होगी मांग पूरी?</strong><br />छीपाबड़ौद और आसपास के गांवों के सैकड़ों पशुपालकों ने प्रशासन से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की अपील की है। क्षेत्र में पशुपालन को बढ़ावा देने और पशुपालकों को राहत देने के लिए इस चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करना अत्यंत आवश्यक है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस गंभीर समस्या का समाधान करता है। क्या सरकार पशुपालकों की आवाज सुनेगी, या फिर यह मांग भी अन्य सरकारी फाइलों की तरह धूल खाती रह जाएगी? जब तक इस मांग को पूरा नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र के पशुपालक चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p><strong>इलाज के अभाव में दम तोड़ते मवेशी</strong><br />छीपाबड़ौद के आसपास के गांवों में हजारों की संख्या में दुधारू पशु, बैल, भेड़-बकरियां आदि हैं। लेकिन जब ये पशु बीमार पड़ते हैं, तो उनका इलाज समय पर नहीं हो पाता। कई मामलों में पशुपालकों को इलाज के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है, लेकिन फिर भी सुविधाओं के अभाव में उनके पशु असमय दम तोड़ देते हैं।</p>
<p>छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन करने वाले हजारों किसानों की आजीविका पशुओं पर निर्भर है, लेकिन यहां पशु चिकित्सा सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है। कई बार बीमार या घायल गायों और अन्य पशुओं को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती है।  सरकार को जल्द से जल्द इस मांग पर ध्यान देना चाहिए ताकि बेसहारा और जरूरतमंद पशुओं को उचित इलाज मिल सके और गो सेवा का कार्य और प्रभावी रूप से किया जा सके।"<br /><strong>- हेमराज नामदेव, सदस्य, राधव  माधव निराक्षित गौसेवा समिति।</strong></p>
<p>पशुपालकों को अपने बीमार या घायल पशुओं के इलाज के लिए 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है, जो आर्थिक और समय दोनों दृष्टि से मुश्किल भरा है। हमारी मांग है कि छीपाबड़ौद के प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय (पॉलिक्लिनिक) में क्रमोन्नत किया जाए। हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार इस विषय को गंभीरता से लेगी और जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाएगी।<br /><strong>- नरेश कुमार मीणा,  प्रधान, पंचायत समिति छीपाबड़ौद।</strong></p>
<p>छीपाबड़ौद क्षेत्र में पशुपालन करने वाले हजारों परिवारों के लिए मवेशी सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार का हिस्सा होते हैं। लेकिन जब ये पशु बीमार या घायल हो जाते हैं, तो यहां उचित चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में उनका इलाज नहीं हो पाता। कई बार पशुपालकों को मजबूरी में अपने मवेशियों को दूर जिला मुख्यालय तक ले जाना पड़ता है। जिससे समय और पैसे दोनों की बबार्दी होती है। <br /><strong>- सचिन नामदेव, समाजसेवी। </strong></p>
<p>छीपाबड़ौद में पशुपालकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उपलब्ध संसाधन और चिकित्सा सुविधाएं उनकी जरूरतों को पूरा करने में अपर्याप्त हैं। बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय की स्थापना होती है, तो न सिर्फ पशुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा। हम लंबे समय से इस मांग को लेकर प्रयासरत हैं और उम्मीद है कि जल्द ही यह मांग पूरी होगी। <br /><strong>- डॉ. रामप्रसाद नागर, चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सालय छीपाबड़ौद। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 15:47:31 +0530</pubDate>
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                <title>पशु चिकित्सालय: नि:शुल्क दवा, अभी तक हो रही हवा</title>
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                        <![CDATA[बीमार मवेशियों के लिए बाजार से खरीदनी पड़ रही महंगी दवा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/veterinary-hospital--free-medicines--still-a-rumour/article-83318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/pashu-chikitsalaye--ni-shulk-dwa-abhi-tk-ho-rhi-hawa...kota-news-01-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के पशु चिकित्सालयों में पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के लिए नि:शुल्क दवा नहीं मिलने से परेशान होना पड़ रहा है। जिले में बड़ी संख्या में पशुपालन होता है। पशुओं के बीमार होने पर सरकारी चिकित्सालय में नि:शुल्क दवा नहीं मिलने से पशुपालकों को बाजार से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।   बीमार पशुओं के उपचार में काम आने वाली दवाइयां पशु अस्पतालों में नि:शुल्क मिलती हैं, लेकिन काफी समय से अस्पतालों में इन दवाइयों का टोटा बना हुआ है। इस कारण पशुपालकों को इन दवाओं को मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। </p>
<p><strong>पशुपालकों ने इस तरह बताई पीड़ा</strong><br />कैथून क्षेत्र के पशुपालक मांगीलाल, नारायण गुर्जर व फूलचंद माली ने बताया कि कैथून में स्थित पशु चिकित्सालय में समीप के पचास से अधिक गांवों के पशुपालक अपने पशुओं का उपचार करवाने आते हैं। पिछले एक वर्ष से पशुओं की दवाओं की कमी चल रही है ऐसे में पशुपालन करने वालों के समक्ष महंगी दवा खरीदने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। स्थानीय अस्पताल में जब भी जाते हैं तो पशु चिकित्सक बाहर की दवाओं को लिख कर देते हैं। यह दवाइयां मेडिकल स्टोर पर काफी महंगी मिलती है। इससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>150 से अधिक तरह की दवा होना जरूरी</strong><br />सरकारी नियमों के अनुसार एक पशु चिकित्सालय पर 150 से अधिक तरह की दवा होनी आवश्यक है वहीं सब सेंटर पर 70 से अधिक तरह की दवा होना अनिवार्य है। परन्तु इसके विपरीत पशु चिकित्सालय पर पिछले एक वर्ष से पचास से कम तरह की दवा मिल रही है वही सब सेंटरो पर मात्र दस तरह की दवा मौजूद है। जो दवा सरकारी सेंटरों पर उपलब्ध है, उसमें से कुछ दवाओं का उपयोग तो कभी कभी होता है। रूटिंग में काम आने वाली दवाओं का हमेशा टोटा बना हुआ है। आधी से भी कम प्रकार की दवा ही अस्पतालों में मिल रही है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- जिले में कुल पशु                          6.40 लाख<br />- जिले में पशु चिकित्सा इकाइयां    180 <br />- प्रथम श्रेणी के पशु चिकित्सालय    16 <br />- पशु चिकित्सालय                             36 <br />- पशु चिकित्सा उप केंद्र                124 <br />- मोबाइल यूनिट संचालित                6 </p>
<p><strong>टेण्डर प्रक्रिया का इंतजार</strong><br />पशु चिकित्सकों के अनुसार राज्य में मवेशियों के लिए नि:शुल्क दवा योजना चल रही है, लेकिन पूर्व में आचार संहिता की वजह से टेण्डर प्रक्रिया नहीं होने के कारण दवाइयां समय से नहीं खरीदी जा सकी। सरकार ने एक माह पूर्व जिला स्तर पर दवाइयों के लिए एक लाख का बजट जारी किया है, जो काफी कम है। इससे इमरजेंसी वाली दवाओं की भी खरीद नहीं हो सकेगी।  अब आचार संहिता समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार के स्तर पर जल्द ही टैंडर प्रक्रिया होने की संभावना है। इसके बाद  नि:शुल्क दवाइयों की मात्रा बढ़ जाएगी। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पशु अस्पतालों में दवाइयों का टोटा बना हुआ है। अस्पताल जाने पर वहां से चिकित्सकों द्वारा पशुपालकों को बैरंग लौटा दिया जाता है। इससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  एंटी रेबीज, एन्टोबायोटिक एनालजीन जैसी दवाएं भी पशु चिकित्सालयों में नहीं हैं। <br /><strong>- भवानी गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>पशुओं के लिए दवाओं की आपूर्ति कम मात्रा में हो रही है। इस कारण पशुपालक परेशान हैं। आगामी माह में पर्याप्त मात्रा में सभी सेंटरों पर दवा भेजी जाएगी। जयपुर मुख्यालय पर सभी तरह की दवाओं की डिमांड भेज रखी है। पूर्व में आचार संहिता के कारण टेण्डर प्रक्रिया नहीं होने से दवाओं की खरीद नही हो सकी थी। जल्द टेण्डर होने की उम्मीद है। <br /><strong>- डॉ. जयकिशन, पशु चिकित्सक, पशुपालन विभाग  </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 15:26:07 +0530</pubDate>
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                <title> 4.5 लाख की मशीन, मरम्मत का खर्चा 6.50 लाख</title>
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                        <![CDATA[जिला चिकित्सालय की एकमात्र सोनोग्राफी मशीन खराब  होने से पशुओं की नहीं हो पा रही सोनोग्राफी, पशुपालक परेशान।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/machine-worth-rs-4-5-lakh--repair-cost-rs-6-50-lakh/article-74950"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/4.5-lakh-ki-masheen,-marammat-ka-kharcha-6.50-lakh...kota-news..11.4.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में लगी सोनोग्राफी मशीन दो महीने से खराब है। इस कारण पशुओं की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। यहां पर लगी सोनोग्राफी मशीन में व्हाइटनेस की समस्या आ रही है। इसकी वजह से रिपोर्ट का सही आंकलन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बीमार पशुओं के उपचार में परेशानी हो रही है। पूरे जिले में सोनोग्राफी मशीन की सुविधा केवल मोखापाड़ा स्थित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय की पॉली क्लिनिक इकाई में हैं। ऐसे में जिले के पांच लाख से अधिक पशुओं की सोनोग्राफी की जांच का भार इसी मशीन पर है। इसके बावजूद अभी तक सोनोग्राफी मशीन को चालू नहीं किया गया है। </p>
<p><strong>4.50 लाख रुपए में खरीदी थी मशीन</strong><br />जिला मुख्यालयों पर संचालित होने वाले प्रत्येक राजकीय पशु चिकित्सालयों के लिए वर्ष 2017 में एक-एक सोनोग्राफी मशीन खरीदी गई थीं। उस समय एक मशीन की कीमत 4.50 लाख रुपए आई थी। उस समय जिस कंपनी को सोनोग्राफी मशीनें लगाने और देखभाल का जिम्मा दिया गया था, आज उस कंपनी का कोई अता-पता ही नहीं है। पशु चिकित्सालय के कर्मचारियों ने बताया कि सोनोग्राफी मशीन लगने के बाद बीमार पशुओं के उपचार में आसानी होने लगी थी। दो माह पहले यहां की मशीन अचानक खराब हो गई। जिससे जांच की सुविधा बंद हो गई। इस कारण बीमार पशुओं का उपचार कराने में पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ हा है।</p>
<p><strong>मशीन ठीक करने का खर्चा 6.50 लाख</strong><br />पशु चिकित्सालय के चिकित्सकों के अनुसार पशुपालन विभाग ने सात साल पहले पूरे प्रदेश में एक निजी कम्पनी से जिला मुख्यालयों के लिए सोनोग्राफी मशीनें खरीदी थी। उस समय प्रत्येक मशीन की लागत 4.50 लाख रुपए आई थी। नई मशीन होने से जिले में बीमार पशुओं को जांच की अच्छी सुविधा मिल रही थी। दो माह पहले अचानक से सोनोग्राफी मशीन खराब हो गई। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने मशीन को ठीक कराने के लिए टेक्नीशियन को बुलाया। उसने मशीन ठीक करने का खर्चा 6.50 लाख रुपए बताया। इस पर स्थानीय अधिकारियों ने पशुपालन निदेशालय से इसके लिए बजट मांगा, लेकिन वहां के उच्चाधिकारियों ने बजट ज्यादा बताकर देने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>बिना जांच कैसे पता चलेगी बीमारी </strong><br />मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में ही सोनोग्राफी मशीन लगी हुई। सोनोग्राफी जांच की सुविधा कोटा जिले में केवल यहीं पर ही हैं। इस मशीन के खराब होने के कारण अब बीमार पशुओं की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। नयागांव के पशुपालक दौलतराम मीणा व शोदान गुर्जर ने बताया कि सोनोग्राफी की जांच से ही पशुओं की बीमारी का पता चल पाता है। अब मशीन खराब होने से पशु चिकित्सक पशुओं की स्थिति देखकर दवाइयां लिख रहे हैं। जांच के बिना पशुओं की गम्भीर बीमारी का पता नहीं लग पा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />जिला मुख्यालय पर स्थित बहुउददेशीय पशु चिकित्सालय में पशुओं की सोनोग्राफी के लिए मशीन लगी हुई है। अब मशीन खराब होने के कारण बीमार पशुओं का उपचार कराने में परेशानी हो रही है। पशुओं के गंभीर बीमार होने पर पशु चिकित्सक सोनोग्राफी की सलाह देते हैं, लेकिन जिले में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं होने से उन्हें अन्य जिलों में जाकर सोनोग्राफी करवानी पड़ती है।<br /><strong>-कान्हा गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>जिला पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब है। इसे ठीक कराने के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है। मशीन को ठीक कराने पर 6.50 लाख रुपए का खर्चा आएगा। इतना बजट नहीं मिल रहा है। अब नई सोनोग्राफी मशीन लगाने के लिए डिमांड भेजी गई है। जल्द ही मशीन उपलब्ध होने की उम्मीद है।<br /><strong>डॉ. गिरिश सालफळे, उप निदेशक, पशुपालक विभाग कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Apr 2024 17:00:41 +0530</pubDate>
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                <title>सोरसन के पशु चिकित्सालय का एक साल बाद भी निर्माण अटका पड़ा</title>
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                        <![CDATA[बिल्डिंग के अभाव में पशुपालकों को समस्या से जूझना पड़ता है।  ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/construction-of-sorsan-s-veterinary-hospital-stuck-even-after-a-year/article-71460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(9)11.jpg" alt=""></a><br /><p>बारां। पशु चिकित्सालय सोरसन नोडल अंता के भवन निर्माण का कार्य लगभग एक वर्ष पूर्व कृषि विपणन बोर्ड संस्था ने चालू किया गया था, जो आज दिन तक भी पूरा नहीं किया गया है। बिल्डिंग का कार्य चार-पांच फीट उंची दीवार तक ही किया गया है और परिसर क्षेत्र में ईंटे, गिट्टी, सीमेंट के कटटे पडे हुए हैं। सीमेंट कटटे बरसात में भीगकर पत्थर हो चुके हैं। बिल्डिंग के अभाव में पशुपालकों को समस्या से जूझना पड़ता है।  वर्तमान में पशु चिकित्सालय ग्राम पंचायत के पुराने भवन के एक छोटे से कमरे में संचालित किया जा रहा है। यह स्थान भीड-भाड वाली जगह, ग्राम के मुख्य चौराहा पर होने के कारण इलाज के दौरान यहां पर पदस्थापित पशु चिकित्सा सहायक रामगोपाल रेगर को बडी समस्या का सामना करना पडता है। इस अस्पताल के क्षेत्र में इलाज के लिए आठ-दस गांव के पशुपालक आते हैं। ग्रामीण गिरिराज मेघवाल, लीलाधर, नरेश कुमार, विष्णु, राजमल, मोनू कुमार, प्रहलाद, रविन्द्र आदि ने अति शीघ्र नवीन भवन निर्माण की मांग की है।</p>
<p>सोरसन के पशुचिकित्सालय का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है। जिससे पशुओं के इलाज में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- जुगलकिशोर, पशुपालक। </strong></p>
<p>वर्तमान में पशु चिकित्सालय पुराने भवन के एक छोटे से कमरे में संचालित किया जा रहा है। अति शीघ्र नवीन भवन निर्माण कराया जाए। <br /><strong>- मनोज नागर, ग्रामीण। </strong></p>
<p>अधूरे निर्माण को शीघ्र ही पूरा कराया जाएगा। थोडा डिले हो गया। अभी छूट्टी पर हूं। जैसे ही आऊंगा टैंडर लगाकर काम चालू कर दिया जाएगा।<br /><strong>- रामप्रसाद,एक्सईएन, बारां कृषि विपणन बोर्ड</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Feb 2024 17:59:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाल-ए-पशु चिकित्सालय: नि:शुल्क दवा हो रही हवा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पशुपालकों ने बताया कि सर्दी के सीजन में पशुओं में मौसमी बीमारियां बढ़ रही है, लेकिन पशु अस्पतालों में जरूरी दवाएं तक नहीं है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hall-e-veterinary-hospital--free-medicine-is-available/article-67482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/hal-e-pashu.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार ने भले ही पशुओं के लिए नि:शुल्क दवा वितरण योजना लागू कर रखी है, लेकिन हकीकत में पशुपालकों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले के पशु अस्पतालों में कुछ समय से दवाओं का टोटा बना हुआ है। यहां पर पर्याप्त मात्रा में दवा की सप्लाई नहीं हो रही है। जिससे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पशु चिकित्सालय पर अधिकांश दवाएं खत्म हो गई है। पशुपालकों ने बताया कि सर्दी के सीजन में पशुओं में मौसमी बीमारियां बढ़ रही है, लेकिन पशु अस्पतालों में जरूरी दवाएं तक नहीं है। ऐसे में पशुपालकों को निजी मेडिकल स्टोर से पशुओं की दवा महंगे दामों पर खरीदनी  पड़ रही है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- जिले में पशु चिकित्सा इकाइयां     180 <br />- प्रथम श्रेणी के पशु चिकित्सालय    16 <br />- पशु चिकित्सालय                       36 <br />- पशु चिकित्सा उप केंद्र                 124 <br />- मोबाइल यूनिट संचालित             3 </p>
<p><strong>इन दवाइयों की किल्लत</strong><br />पशुपालकों का कहना है कि पशु चिकित्सालयों में पशुओं के लिए अधिकांश दवा नहीं मिलती है। पशुओं के लिए पशु चिकित्सालय में दस्त, पेट के कीड़ों, बुखार, भूख न लगने की दवा, दूध की कमी की दवा मिलनी चाहिए, लेकिन यह दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। एंटी रेबीज, एन्टोबायोटिक एनालजीन जैसी दवाएं भी पशु चिकित्सालयों में नहीं हैं। बाजार में इनके मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। इस समय पशुओं पर मौसमी बीमारियों के संक्रमण से उबारने के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। </p>
<p><strong>अस्पतालों से निराश लौट रहे पशुपालक   </strong><br />कैथून क्षेत्र के पशुपालक भवानीशंकर गुर्जर, श्योजीराम मीणा ने बताया कि नि:शुल्क इलाज की आस में बीमार पशु को लेकर अस्पताल आ रहे हैं लेकिन वहां चिकित्सक दवाएं नहीं होने के नाम से टरका देते हैं। मजबूरी में बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। दवाई नहीं होने के कारण पशुओं का भी इलाज नहीं हो रहा है। ऐसे में पशु चिकित्सा व्यवस्था फेल हो रही है। पशु अस्पतालों में दवाइयों का टोटा बना हुआ है। सर्दी के मौसम में अक्सर पशुओं को बुखार व नाक से पानी आने की शिकायत रहती है। पशुपालक अपने पशुओं को पशु चिकित्सालयों में तो लेकर जा रहे हैं, लेकिन परामर्श के अलावा उनको कुछ नहीं मिल रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पशु चिकित्सालय में दस्त, पेट के कीड़ों, बुखार, भूख न लगने की दवा, दूध की कमी की दवा मिलनी चाहिए, लेकिन यह दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। एंटी रेबीज, एन्टोबायोटिक एनालजीन जैसी दवाएं भी पशु चिकित्सालयों में नहीं हैं। ऐसे में बाजार में इनके मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। <br /><strong>- भवानीशंकर गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>राजकीय पशु चिकित्सालयों में दवाइयों का स्टॉक कम आया है। मुख्यालय में टेंडर प्रक्रिया में देरी होने की वजह से दिक्कतें आई हैं। पशुपालन विभाग ने दवाइयों की आपात खरीद की अनुमति दी है। पशु अस्पतालों से डिमांड मांगी गई है, जिन दवाओं की कमी है उनकी सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के हिसाब से खरीद कर व्यवस्था कराई जाएगी।<br /><strong>- डॉ. अनिल कुमार, नोडल अधिकारी पशुपालन विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jan 2024 19:08:45 +0530</pubDate>
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                <title>जहां पशु अधिक वहीं पशु चिकित्सालय नहीं</title>
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                        <![CDATA[ गौशाला में पशु चिकित्सालय खोला जाए तो वहां पशु चिकित्सक रहेंगे जिससे पशुओं की देखभाल व उपचार सही ढंग से हो सकेगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/where-there-are-more-animals--there-are-no-veterinary-hospitals/article-48904"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/jaha-pashu-adhik-vhi-pashu-chikitsalya-nhi...kota-news-15-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गाय की गौमाता के रूप में पूजा तो की जती है लेकिन उसकी देखभाल व सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यही कारण है कि जहां पशु अधिक हैं वहीं पशु चिकित्सालय नहीं है। जिससे बीमार व घायल पशुओं के उपचार में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला है बंधा धर्मपुरा का। बंधा धर्मपुरा में जहां करीब 600 परिवारों के पास करीब 3 हजार गौवंश हैं। वहीं निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में करीब 4 हजार गौवंश है। साथ ही गायत्री परिवार की गौशाला में भी 600 से अधिक गायें हैं। ऐसे में बंधा धर्मपुरा में करीब 7 हजार से अधिक गौवंश होने के बावजूद विडम्बना है कि वहां बीमार व घायल पशुओं के उपचार के लिए एक पशु चिकित्सालय तक नहीं है। </p>
<p><strong>बोराबास  व मोखापाड़ा में है पशु चिकित्सालय</strong><br />कोटा शहर में मोखापाड़ा में और बोराबास में पशु चिकित्सालय है। नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि दोनों जगह पर पशु चिकित्सालय हैं। जबकि बोराबास में इतने अधिक पशु नहीं है। वहां के पशु चिकित्सक घायल व बीमार पशुओं का उपचार करने तक के लिए बंधा में नहीं आते हैं। मोखापाड़ा के पशु चिकित्सालय  में भी घायल पशुओं का उपचार कर उसे गौशाला भेज दिया जाता है। जिससे गौशाला में अलग से एक बीमार गायों का बाड़ा बनाना पड़ा है। जहां लावारिस हालत में पकड़ी जा रही बीमार व घायल गायों को रखा जा रहा है। वह एक बार बैठक लेने के बाद उठ नहीं पाती और उनकी मृत्युदर अधिक हो रही है। </p>
<p><strong>गौशाला में उप केन्द्र लेकिन पशु चिकित्सक नहीं</strong><br />जितेन्द्र सिंह ने बताया कि निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में मात्र एक पशु चिकित्सा उप केन्द्र है। जहां एक पशु चिकित्सक तक नहीं है। पशु पालन विभाग से रिटायर्ड उप निदेशक को पशु चिकित्सक के रूप में लगाया हुआ है। मात्र 5 कम्पाउंडर हैं। जिनके भरोसे पूरी गौशाला में गायों का उपचार व देखभाल की जा रही है। सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सालय की सबसे अधिक आवश्यकता बंधा धर्मपुरा गांव व गौशाला में है। जिससे वहां बीमार व घायल गायों का समय पर उपचार हो सके। यदि ऐसा नहीं हो सकता तो बीमार व घायल पशुओं को गौशाला की जगह पशु चिकित्सालय में ही रखा जाए। </p>
<p><strong>सबसे अधिक मौत बीमार बाड़े में</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि गौशाला में रोजाना जहां 10 से 15 गौवंश की मौत हो रही है। उनमें सबसे अधिक मौत बीमार गायों के बाड़े में हो रही है। हालांकि कुछ दिन से इसमें कमी आई है। एक दिन तो मात्र 3 ही पशुओं की मौत हुई थी जबकि अगले दिन यह संख्या बढ़कर 1 हो गई थी। सिंह ने कहा कि गौशाला में पशु चिकित्सालय खोला जाए तो वहां पशु चिकित्सक रहेंगे जिससे पशुओं की देखभाल व उपचार सही ढंग से हो सकेगा। जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक बोराबास के पशु चिकित्सकों की टीम को महीने में कुछ दिन बंधा में भेजा जाए। </p>
<p><strong>पशु पालन विभाग को लिखा पत्र</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल ने बताया कि गौशाला में पशु चिकित्सा उप केन्द्र है। जिससे गौशाला में बीमार व घायल पशुओं के उपचार में परेशानी आती है। गौशाला समिति के अध्यक्ष ने गौशाला में पशु चिकित्सालय खोलने की मांग की थी। जिसके आधार पर गौशाला के चिकित्सा उप केन्द्र को क्रमोन्नत करने के लिए पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक को काफी समय पहले ही पत्र लिखा जा चुका है। लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।  </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2023 14:18:12 +0530</pubDate>
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                <title>लाखों की लागत से बना पशु चिकित्सालय हो रहा जर्जर</title>
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                        <![CDATA[बरसात के दिनों में छतों से पानी टपकने लग जाता है। डॉक्यूमेंट, मेडिसिन व उपकरण भीगते हैं जिसके कारण पशु चिकित्सा कार्य प्रभावित होता है तथा पशुपालक को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/veterinary-hospital-built-at-the-cost-of-lakhs-is-getting-dilapidated/article-23636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/lakho-ki-lagat-se-bana-pashu-chikitsalay-ho-raha-jarjar..kawai-news-baran-20.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कवाई। कवाई में थाने के पीछे लाखों रुपए की लागत से बना पशु चिकित्सालय को करीबन एक साल हो गया परंतु अनदेखी के चलते खाली पड़ा पशु चिकित्सालय जर्जर हो रहा है। पशुओं के इलाज को लेकर पशु चिकित्सकों सहित पशुपालकों को भी भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पशु चिकित्सा अधिकारी भरत मीणा पशुधन प्रसार अधिकारी लखन मीणा ने बताया कि प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय कवाई वर्षों से मात्र दो कमरों में चल रहा है। दस पशु चिकत्सा संस्थाओं का तरल नाइट्रोजन फीडिंग सेंटर और प्रथम श्रेणी होने के कारण उक्त जगह अपर्याप्त है। स्टाफ और उपकरणों के संधारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं है जो पुराना चिकित्सालय है, पूर्ण तरीके से जर्जर हो रहा है। बरसात के दिनों में छतों से पानी टपकने लग जाता है। डॉक्यूमेंट, मेडिसिन व उपकरण भीगते हैं जिसके कारण पशुचिकित्सा कार्य प्रभावित होता है तथा पशुपालक को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>कृषि विपणन बोर्ड द्वारा बनाए गए नए पशु चिकित्सालय भवन का निर्माण कार्य पूर्ण हुए एक साल होने के बावजूद अभी तक हस्तांतरित नहीं किया जा रहा। पशुचिकत्सा अधिकारी कवाई ने कई बार उच्चाधिकारियों, सहायक अभियंता व अधिशाषी अभियंता को इस  को लेकर कई बार करवाया लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अभियंता ठेकेदार को नई बिल्डिंग की कमियों को दुरुस्त करवा कर सुपुर्द करने बाबत रिमांइडर दे रहे हैं न ही ठेकेदार छुटपुट बचे कार्य को पूर्ण कर भवन की सुपुर्दगी में दिलचस्पी दिखा रहा है। अभी तक भवन के विद्युत कनेक्शन का डिमांड नोट भी कृषि विपणन बोर्ड द्वारा नहीं जमा किया है।  </p>
<p>पशु चिकित्सालय हमारी तरफ से कंप्लीट है। उसमें  करीबन एक लाख रुपए की चोरी हो गई थी। उसमें पंखे, कूलर वह कई अन्य सामानों की चोरी हो गए थे। जिसकी कवाई थाने में एफआइआर भी दर्ज कराई थी। पुलिस ने चोरों को पकड़ चोरों के कब्जे से दो पंखे ही जप्त किए अन्य सामान अभी तक जप्त नहीं हुए। उसमें अभी बिजली का कनेक्शन भी नहीं हुआ। इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होती। <br /><strong>- सुरेंद्र गुप्ता, ठेकेदार</strong></p>
<p>मैं दो बार लिखित में अवगत करा चुका हूं परंतु अभी तक  हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ। करीबन 1 साल हो गए इस बिल्डिंग को बने हुए ठेकेदार द्वारा कुछ काम बचा हुआ है। उसको स्वीकृत कर नहीं रहे जिससे हमें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी कुछ दिनों पहले थोड़ी सी बारिश हुई थी। जिसमें हमारे बैठने की तक जगह नहीं थी। <br /><strong>- भरत सिंह मीणा, पशु चिकित्सा अधिकारी, कवाई</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Sep 2022 15:34:44 +0530</pubDate>
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                <title>पशु चिकित्सालय में पशुओं की दवाओं का टोटा, 8 किमी दूर जाने की मजबूरी</title>
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                        <![CDATA[गामछ में संचालित पशु चिकित्सालय के पास अपना भवन भी होने से पंचायत के एक कमरे में ही अस्थाई रूप से पशु चिकित्सालय चल रहा है। लगभग डेढ़ माह से पशुओं के लिए भी दवाइयां नहीं मिल रही थी जिससे पशु पालकों को 8 किलोमीटर दूर से केशवरायपाटन जाकर जरूरी दवाइयां लाने को मजबूर होना पड़ रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/animal-medicine-shortage-in-veterinary-hospital--compulsion-to-go-8-km-away/article-8887"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/654654654652.jpg" alt=""></a><br /><p>गामछ ।  गामछ में संचालित पशु चिकित्सालय के पास अपना भवन भी होने से पंचायत के एक कमरे में ही अस्थाई रूप से पशु चिकित्सालय चल रहा है। लगभग डेढ़ माह से पशुओं के लिए भी दवाइयां नहीं मिल रही थी जिससे पशु पालकों को 8 किलोमीटर दूर से केशवरायपाटन जाकर जरूरी दवाइयां लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे बाहर बाजार से महंगी दवाइया खरीदने पर जेब पर भी भार पड़ता है। समय और पैसों की बर्बादी हो रही हैं। बीमार पशुओं की दवाइयां नही मिलने से पशु पालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। <br /><br />डेढ़ माह से दवाइयां खत्म हो गई थी जो हमारे पास आई है। एक दो दिन में गामछ पशु चिकित्सालय में दवाइया पहुंच जाएगी।  गामछ में पशु चिकित्सालय पंचायत के एक कमरे में चल रहा है। पशु चिकित्सालय के लिए आगे अधिकारियों को अवगत करवाया है। बजट आने के बाद ही पशु चिकित्सालय बन सकेगा। <br /><strong> -विजयश्री राव, नोडल अधिकारी तालेड़ा उपखंड</strong></p>]]>
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                <pubDate>Sat, 30 Apr 2022 16:13:38 +0530</pubDate>
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