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                <title>centres - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>केंद्र पर आना है तो बच्चों को बोतल घर से लाना होगा </title>
                                    <description><![CDATA[आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-children-have-to-come-to-the-centre--they-will-have-to-bring-bottles-from-home/article-121297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित शहर के विभिन्न वार्डों में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के पास ना तो अपने भवन और ना ही उनके पास सरकार ने किसी प्रकार की सुविधा केंद्र पर विकसित कर रखी हैं। केंद्र पर आने वाले बच्चे घर से ही पीने के पानी की बोतल लेकर आते हैं। वहीं अधिकतर केंद्र जर्जर हैं। जिससे बच्चों के साथ कभी भी हादसा हो सकता हैं। घोड़े वाले बाबा चौराहे बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में कार्यरत कार्यकर्ता माया नायक ने बताया कि केंद्र में वर्तमान में कुल 55 बच्चे नांमाकित है। जिनसे तीन से छह वर्ष तक के 20 बच्चे व जीरों से लेकर तीन वर्ष तक के 35 बच्चे हैं। आंगनबाड़ी  केंद्र एक किराये एक कमरे में चली रहे हैं। बच्चें पीने के लिए पानी की बोतल भी घर से साथ लेकर आते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठने के लिए कुर्सियां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने पर टीकाकरण के दिन आने वाले अभिभावको को बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। साथ ही जब कभी भी केंद्र की लाइट जाती है अंधेरा हो जाता है। बच्चों को अंधेरे में ही बैठा का पढ़ाई करनी पढ़ती है।</p>
<p><strong>आंगनबाड़ी केंद्र किराए के एक कमरें में संचालित</strong><br />शहर की अधिकतर आंगनबाड़ी किराये के घरों में मात्र एक या दो कमरों में संचालित होती हंै। जिसमें बच्चों को दिया जाने वाला खाना बनता हैं। और इसी कमरे में बच्चों को बैठकर पोषाहर खाना पड़ता  व  पोषाहर वितरण भी उसी में करना पड़ता हंै। <br /> <br /><strong>केंद्र के भवन जर्जर स्थिति में</strong><br />केंद्रों के भवन अधिकतर जर्जर व पुराने है जिससे बारिश के समय पर पानी टपकता हैं। और कमरों में सीलन आ रही हैं। साथ ही बारिश में कई बार केंद्र का रिकार्ड व पोषाहार भी बारिश में भीग जाता हैं। केंद्र की छातों से प्लास्टिक गिरता रहता हैं। बच्चों को बैठने में भी परेशानी आती है। साथ ही केंद्रों के भवनों में दरारें व सीलन आ रही है। </p>
<p><strong>बच्चों के खिलौने के नाम पर कुछ नहीं</strong><br />चाहे राज्य सरकार आंगनबाड़ी केंद्र पर खेल सुविधा के नाम पर कितनी वाहीं - वाही लूटे पर आंगनबाड़ी केंद्रों खेलने के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं हैं। वहीं खिलौने के नाम पर ना तो किचन सेट, रिंग, लेसिंग फे्रम, रंगीन मोम, पेंसिल, बड़ी गेंद, रस्सी, सब्जी फल, जानवरों के चित्र, राउंड टेबल, फिसलन पट्टी, सहित विभिन्न खिलौने होने चाहिए पर अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र मेें कुछ भी नहीं है। बच्चों को बैठने के लिए टेबल -कुर्सी की भी व्यवस्था नहीं है।</p>
<p><strong>बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड की व्यवस्था नहीं</strong><br />केंद्र की दिवारों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को पढ़ने के लिए पहाड़ व गिनती लिख रखी है।  साथ ही केंद्र पर केंद्र पर बच्चों को पढ़ने के लिए विभिन्न चार्ट होने चाहिए जो कि नहीं हैं। दुर्गा बस्ती आंगनबाड़ी केंद्र द्वितीय में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र में कुल 28 बच्चें है जिसमें अभी एक से तीन वर्ष के 17 व तीन से छह वर्ष के 11 बजे नामांकित है किराये के एक कमरें चलता है। पिछले दिनों बारिश से उसमें रखी किताबें व स्टेशनरी भीग गई है। कार्यकर्ता सायरा मंसूरी ने बताया कि हम एक ही रूम में पोषाहर, बच्चों की पढ़ाई, खेल खेलना, टीकाकरण सहित सभी कार्य एक ही कमरें में करना पड़ता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि केंद्र पर जो सरकारी स्कूल में जो आंगनबाड़ी संचालित की जाती है उनको जो फर्नीचर, खेल के सामान, सुव्यवस्थित रूम सहित अन्य जो सुविधा दी जाती है वहां अन्य केंद्र को भी दी जानी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br /> जो आंगनबाड़ी केंद्र किरायें  के भवन में चले रहे उनके लिए सरकारी भवन देख रहे हैं।  जो केंद्र जर्जर  हैं उनको अन्य जगह पर शिफ्ट कर दिया जायेंगा। <br /><strong>- सीता शर्मा, उपनिदेशक बाल विकास विभाग कोटा </strong></p>
<p>वर्तमान में एक हजार रूपए जो किराया दिया जाता है उसको बढ़ाकर करीब तीन या चार हजार रूपए किए। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र पर सुविधाओं का विस्तार किया जाएं।<br /><strong>- शाहिदा खान, राज. आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी महासंघ</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 18:13:04 +0530</pubDate>
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                <title>कोविड वैक्सीनेशन सेंटरों को लगी लू, नौतपा में सूने पड़े केन्द्र</title>
                                    <description><![CDATA[मई माह में पड़ रही भीषण गर्मी का असर वैक्सीनेशन सेंटरों पर भी देखने को मिल रही है। नौतपा के आगे केन्द्र सूने हो गए है। 
पहले टीकाकरण केंद्रों पर लंबी कतारे लगा करती थी वहीं अब केंद्रों टीका लगवाने का इंतजार करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/covid-vaccination-centers-got-heat--centres-were-deserted-in-nautapa/article-11085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/covid-vaccine-center-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । मई माह में पड़ रही भीषण गर्मी का असर वैक्सीनेशन सेंटरों पर भी देखने को मिल रही है। नौतपा के आगे केन्द्र सूने हो गए है। <br />पहले टीकाकरण केंद्रों पर लंबी कतारे लगा करती थी वहीं अब केंद्रों टीका लगवाने का इंतजार करना पड़ रहा है। कोरोना की तीसरी लहर में  बेलगाम संक्रमण ने जिस कदर लोगों के जेहन में डर भरा और केंद्रों पर टीका लगवाने के लिए लंबी कतारे लगीं।  वह अब टीकाकरण केंद्रों पर नजर नहीं आती है।  यहां तक कि अब भी 18 वर्ष से अधिक उम्र के 14 लाख 64हजार 956 को टीका लगाने का लक्ष्य भी अभी पूरा नहीं हुआ है। टीकारण के प्रति घटते रूझान का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 1 मई से 31 मई के बीच 18 वर्ष आयु वर्ग में पूरे महीने में मात्र 709 युवाओं ने ही टीके प्रथम डोज लगाई। वहीं सैकंड डोज लगाने वालों की संख्या 3474 ही रही।   लाभार्थियों में अब पहला और दूसरा टीका लगाने उत्साह कम होता जा रहा है। संक्रमण कम होने के साथ ही टीकाकरण का उत्साह ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। शहर के 31 मई को 18 वर्ष के 7 लोगों ने ही पहली डोज लगाई वहीं दूसरी डोज 66 लोगों ने लगाई। <br /><br /><strong>छुट्टियों से किशोरों का टीकाकरण पड़ा धीमा</strong><br />12 से 17 वर्ष आयु वर्ग के टीकाकरण मुहिम भी गर्मी की छुट्टियों की वजह से मंद पड़ गई है, स्कूलों में विशेष कैंप का प्रमाण भी घट गया है।  15 से 17 वर्ष आयु में 1 लाख 34 हजार918 लाभार्थी हैं, लेकिन इनमें 1 मई से 31 मई तक 328 ने पहला और 1540 दूसरा टीका लगाया। छुट्टियों के कारण किशोरो में टीकाकरण लगाने का उत्साह कम हो रहा है। टीकारण रफ्तार धीमी होने के साथ ही अब चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग की ओर से घर घर जाकर टीकाकरण करने का कार्यक्रम एक जून से शुरू किया है। <br /><br /><strong>टीकाकरण की मई माह की स्थिति</strong><br />टीकाकरण ग्रुप    टारगेट      पहली डोज    दूसरी डोज<br />18 वर्ष व ऊपर    1464956        709                 3474<br />15 से 17 वर्ष     134918        328       1540<br />12 से 14 वर्ष    76477       2636               9468<br />18 से 59 वर्ष     1222084     प्रीकॉशन डोज लगी    1131<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण टीकाकरण में कमी आई है। एक जून से अब घर घर जाकर टीकाकरण करने का अभियान शुरू किया है। किशोर वर्ग में टीकारण से छूटे सभी बच्चों को घर पर जाकर टीका लगाया जाएगा। <br /><strong>- डॉ. भुपेंद्र सिंह तंवर, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 15:41:47 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रैकर को ट्रैक करें तो बच सकती हैं लाडलियां</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने ,बाल लिंगानुपात में सुधार के लिए सोनोग्राफी सेंटरों की नियमित मॉनीटरिंग तो की जाती है लेकिन सोनोग्राफी सेंटर के एक्टिव ट्रैकर की सिर्फ लाल और हरी लाइन की ही जांच की जाती है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-you-track-the-tracker--then-girls-can-be-saved/article-9029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/tracker-sonography-kota-news-.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने ,बाल लिंगानुपात में सुधार के लिए सोनोग्राफी सेंटरों की नियमित मॉनीटरिंग तो की जाती है लेकिन सोनोग्राफी सेंटर के एक्टिव ट्रैकर की सिर्फ लाल और हरी लाइन की ही जांच की जाती है। किसी एक्टिव ट्रैकर में भू्रण लिंग परीक्षण किया तो लाल लाइट ऑन हो जाती है । वह जब तक चालू रहती है जब तक एक्टिव ट्रैकर को खोला नहीं जाए।  भ्रूण लिंग परीक्षण से जुड़े संदेह व्यक्ति एवं संस्थानों के चिह्नीकरण में स्वयंसेवी संस्थाओं संगठनों का सहयोग लेकर पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों की सख्ती से पालना गाइड लाइन बना रखी है लेकिन उसकी पालना कम होती है। उल्लेखनीय है कि  पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत राज्य शासन ने लिंग परीक्षण रोकने व नियमों में कड़ाई बरतने के उद्देश्य से सभी सोनोग्राफी सेंटर में लगे एक्टिव ट्रैकर सिस्टम के जांच करने के निर्देश दे रखे हंै। ताकि लिंग परिक्षण करने वाले सेंटरों को पकड़ा जा सके। इससे भ्रूण हत्या के मामलों में लगाम कसी जा सके। लेकिन सीपीएनडीटी समन्वयक एक्टिव ट्रैकर की लाल व हरी लाइट की जांच कर इतिश्री कर लेते हैं। प्रदेश में एक्टिव ट्रैकर को खोलने वाले प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी नहीं होने से लाल लाइन आॅन होने पर सोनोग्राफी के ट्रैकर खोलने का प्रावधान है। इसके लिए भी पहले कमेटी गठित कर उसकी निगरानी में खोला जाता है। ऐसे में लिंग परीक्षण हो रहा या नहीं इसका ठीक से पता नहीं चलता है। कारण जिले में मुखबीर योजना में आज तक एक भी व्यक्ति ने लिंग परीक्षण की सूचना नहीं दी है। <br /><br /><strong>एक्टिव ट्रैकर डाटा विश्लेषण नहीं होता</strong><br /> सोनोग्राफी मशीनों पर भ्रूण लिंग परीक्षण पर नजर रखने के लिए एक्टिव ट्रैकर (साइलेंट आब्जर्वर) लगाए गए थे। एक्टिव ट्रैकर से अभी तक एक भी भ्रूण लिंग जांच का केस पकड़ा नहीं गया जबकि दावा था कि इस तकनीक से लिंग जांच करते ही डॉक्टर पकड़ में आ जाएंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक एक्टिव ट्रैकर का डाटा विश्लेषण नहीं हो पाया है। अधिकारियों के पास यह रिकॉर्ड तक नहीं है कि सील की जा चुकी मशीनों में से कितनों का डाटा विश्लेषण किया गया। प्रदेश में अब तक लिंग जांच के सभी मामलों में डिकॉय आॅपरेशन के तहत ही कार्रवाई हुई है। इससे एक्टिव ट्रैकर ज्यादा उपयोगिता साबित नहीं हो रही है। <br /><br /><strong>इस तरह काम करता है ट्रैकर</strong> <br />पीसीपीएनडीटी समन्वय प्रमोद तंवर ने बताया कि यह बाहरी डिवाइस है जो मेमोरी चिप की तरह काम करती है। सोनोग्राफी मशीन में पोर्ट बनाकर इसे फिट कर दिया जाता है। मशीन जैसे ही चालू होती है ट्रैकर में रिकार्डिंग शुरू हो जाती है। सोनोग्राफी मशीन की स्क्रीन में जो भी दिखाई देता है वह सब ट्रैकर में स्टोर होता जाता है। ट्रैकर को इस तरह सील किया जाता है कि सोनोग्राफी संचालक इससे छेड़छाड़ ही नहीं कर सकते। ट्रैकर लगाने वाली कंपनी सेंटर संचालक को यूजर आईडी और पासवर्ड देती है, जिससे वह ट्रैकर की आॅनलाइन स्टेट्स देख सकता है। एक ट्रैकर की कीमत करीब 30 हजार है।<br /><br /><strong>समय पर  एक्टिव ट्रैकर की जांच होती रहे तो बच सकती है कई बेटियां</strong><br />राज्य व जिला स्तर पर बनी पीसीपीएनडीटी (प्री कॉसेप्शनल एंड प्री नैटल डायग्नोस्टिक टेक्निक) कमेटी के सदस्यों को सोनोग्राफी केंद्रों के ट्रैकर का डाटा परीक्षण कराने का अधिकार है। बड़ी बात है कि कितने ट्रैकरों का डाटा लेकर परीक्षण किया गया, इसका संबंधित अधिकारियों के पास कोई डाटा नहीं है। अगर जिला स्तर पर पीसीपीएनडीटी कमेटी के सदस्य एक्टिव होकर ट्रैकर का डाटा जांचते तो कई बेटियों को कोख में बचाया जा सकता है। गौरतलब है कि 15 जुलाई 2015 को सोनोग्राफी मशीनों पर ट्रैकर लगवाना अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन इनका डाटा आज तक  प्रदेश भर में कहीं विश्लेषण नहीं किया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />जिले में वर्तमान में 116 सोनोग्राफी सेंटर संचालित किया जा रहा है। जिसकी अनरवत जांच की जा रही है। शहर के सभी निजी व सरकारी सोनोग्राफी की सेंटरों की नियमित जांच और आॅनलाइन दस्तावेज की जांच की जा रही है। सोनो ग्राफी सेंटरों पर लगे एक्टिव ट्रैकर की लाल व हरी बती की जांच की जाती है। जिले में अभी तक किसी भी एक्टिव ट्रैकर में लाल लाइट नहीं जली है। सभी नियमों पालन कर रहे है। जिले में  किसी सोनोग्राफी मशीनों सील किया जाता है तो उसके एक्टिव ट्रैकर का डाटा विश्लेषण जयपुर से कराया जा सकता है।<br /><strong>-प्रमोद कंवर, पीसीपीएनडीटी समन्वयक कोटा</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 16:57:12 +0530</pubDate>
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