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                <title>जटिल एवं विशाल सिर के ट्यूमर का सफल ऑपरेशन, एसएमएस मेडिकल कॉलेज की टीम ने रचा नया इतिहास </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों ने 30 वर्षीय महिला के सिर से 4 किलोग्राम का विशाल ट्यूमर निकालकर नया जीवन दिया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल थी क्योंकि ट्यूमर मस्तिष्क तक पहुँच चुका था। डॉ. आर.के. जैन और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा जगत में मिसाल कायम की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/successful-operation-of-complex-and-huge-head-tumor-sms-medical/article-152531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sms.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल करते हुए 30 वर्षीय मरीज कृष्णा के सिर से लगभग 4 किलोग्राम वजनी जटिल एवं विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने में सफलता प्राप्त की है। यह सर्जरी ट्यूमर के असाधारण आकार, जटिल स्थिति तथा मस्तिष्क एवं महत्वपूर्ण नसों से जुड़े होने के कारण अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। मरीज लंबे समय से सिर पर अत्यधिक बड़े ट्यूमर से पीड़ित थी, जिसका आकार सिर से लगभग दोगुना हो चुका था। </p>
<p>ट्यूमर के कारण उसे चलने-फिरने में भी कठिनाई हो रही थी तथा दुर्गंध के चलते उसकी दैनिक जीवनशैली गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी थी। जानकारी के अनुसार, मरीज ने कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन ट्यूमर की जटिलता—खोपड़ी की हड्डियों को पार कर मस्तिष्क तक पहुंचने—के कारण अधिकांश स्थानों पर ऑपरेशन से मना कर दिया गया। अंततः यह चुनौतीपूर्ण केस न्यूरोसर्जरी विभाग से प्लास्टिक सर्जरी विभाग को रेफर किया गया, जहां डॉ. आरके जैन (विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी) के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। </p>
<p>इस सर्जरी में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. अंकित गोयल, डॉ. सौरभ शर्मा, डॉ. दिलप्रीत, डॉ. अंकित एवं डॉ. संधू शामिल रहे। चूंकि ट्यूमर मस्तिष्क के भीतर तक पहुंच चुका था, इसलिए न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अशोक गांधी का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. राजीव शर्मा ने किया, जिसमें डॉ. रजनी एवं डॉ. गोपा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:03:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्रेन से निकला 12cm बड़ा ट्यूमर, रोगी पूर्णत स्वस्थ</title>
                                    <description><![CDATA[बेहोशी की हालत में महिला पहुंची हॉस्पिटल, तुंरत जांच और सर्जरी से बची जान ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/12cm-big-tumor-removed-from-brain-patient-completely-healthy/article-65413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/mmd-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सकों की टीम की ओर से 40 वर्षीय महिला की सर्जरी कर सिर से 12 से.मी. बड़ी गांठ निकाली गई। न्यूरो ऑन्कोलोजिस्ट डॉ नितिन द्विवेदी एंड टीम की ओर से की गई यह सर्जरी, गांठ के आकार और स्थान के कारण काफी चुनौतीपूर्ण थी। तीन घंटे चली इस सर्जरी के बाद रोगी पूर्ण रूप से स्वस्थ है और ऑपरेशन के दूसरे दिन से रोगी चलने में सक्षम हो पाया है। </p>
<p>डॉ द्विवेदी ने कहा कि विजयनगर निवासी भगवती बेहोशी की हालत में हॉस्पिटल पहुंची। घर के सदस्यों ने बताया कि सर में दर्द, उल्टी और चक्कर आने की परेशानी कुछ दिनों से चल रही थी। ऐसे में महिला की ब्रेन एमआरआई करवाई गई जिसमें ट्यूमर पाया गया। जिसमें दिखा कि ट्यूमर ब्रेन के अगले हिस्से में है और नाक एवं ब्रेन को जोडने वाली हड्डी में तक जा रहा है। ऐसे में तुंरत ऑपरेषन करने का निर्णय लेकर सर्जरी कर ट्यूमर को हटाया गया। सर के अंदर इतने बड़े ट्यूमर को हटाते हुए आस-पास की नसों को सुरक्षित रखना इस सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Dec 2023 14:52:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिमाग की सर्जरी के बाद मरीज को दौर आने हुए बंद</title>
                                    <description><![CDATA[एक युवक की दिमाग की सर्जरी की गई है। अजीत सिंह चौधरी, जो पिछले 6 साल से दिमाग के दौरे पड़ने की बीमारी से पीड़ित था। बीते 6 माह से मरीज को दिन में 15 से 20 बार दौरे पड़ते थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/jaipur-brain-surgery-of-one-youth/article-13705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/4546546513.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक युवक की दिमाग की सर्जरी की गई है। अजीत सिंह चौधरी, जो पिछले 6 साल से दिमाग के दौरे पड़ने की बीमारी से पीड़ित था। बीते 6 माह से मरीज को दिन में 15 से 20 बार दौरे पड़ते थे। इन 6 सालों में अजीत को परिजनों ने करीब 18 से 20 डॉक्टर्स को दिखाया। इस दौरान उसका ईलाज चलता रहा, लेकिन मरीज को कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद मरीज के परिजनों ने निजी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. राजवेंद्र सिंह चौधरी को दिखाया। डॉ. चौधरी ने एमआरआई और सीटी स्कैन के बाद मरीज की दिमाग की सर्जरी की।</p>
<p>चौधरी ने बताया कि मरीज को फोकल कॉर्टिकल डिस्पलेजिया बीमारी थी। यह अलग तरह की सर्जरी है। इस तरह की सर्जरी प्रदेश में नहीं की जाती है। सिर की गंभीर सर्जरी के बाद मरीज पर नजर रखी जानी जरुरी थी। दो महीने से मरीज की हर गतिविधि पर नजर रखी गई। अब मरीज को दौरे आने बंद हो गए है, मरीज स्वस्थ है। चौधरी के अनुसार यह जटिल सर्जरी है और कम मामलों में ही इस तरह की सर्जरी करनी पड़ती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 12:28:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी तकनीक बनी मरीजों के लिए वरदान </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/neurointervention-radiology-technology-became-a-boon-for-patients/article-13133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/open.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई है। जयपुर निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग को अचानक बोलने में तकलीफ हुई और वे बेहोश हो गए, उन्हें तुरंत इटरनल अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। यहां उनका एमआरआई और एंजियोग्राफी कराई, जिसमें दिमाग की बड़ी मुख्य नस में ब्लॉकेज मिला।</p>
<p>अस्पताल के न्यूरोइंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. मदनमोहन गुप्ता ने डीएसए और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी कर बिना चीरे टांके के कैथलेब में ले जाकर दिमाग की नस से क्लॉट निकाल दिया और मुख्य नस को भी खोल दिया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि मरीज को तीन दिन बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है। प्रोसीजर टीम में न्यूरोसाइंस विभाग के चेयरमैन डॉ. सुरेश गुप्ता, डॉ. सुरेन्द्र, डॉ. अरुण, डॉ. ताराचंद, आईसीयू के डॉ. अरुण शर्मा सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 12:28:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रेन डेड युवक ने अंगदान कर चार को दी नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[लिवर और एक किडनी महात्मा गांधी अस्पताल, एक किडनी और हार्ट एसएमएस में लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/brain-dead-youth-donated-organs-and-gave-new-life-to-four/article-12986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/doctor-with-patient.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> सवाईमानसिंह अस्पताल में शुक्रवार को चौथा हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। जयपुर के फोर्टिस हॉस्पिटल में ब्रेन डेड मरीज के अंगदान के बाद ये ट्रांसप्लांट किया गया। हार्ट के अलावा मरीज की दोनों किडनी और लिवर भी डोनेट किए गए, जिससे कुल चार लोगों की जिंदगी बचाई गई। प्रदेश में किया गया यह 11वां हार्ट ट्रांसप्लांट है। ब्रेनडेड 36 वर्षीय राजेन्द्र शिंदे मूलत: महाराष्टÑ के पुणे का रहना वाला था और यहां सीकर रोड पर गोविंदगढ़ में काम करता था। सड़क हादसे में घायल होने के बाद राजेन्द्र को फोर्टिस लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद डॉक्टर्स ने अंगदान के लिए राजेन्द्र की पत्नी से समझाइश की जो अंगदान के लिए तैयार हो गई। एक किडनी और हार्ट को ग्रीन कोरिडोर से ट्रांसप्लांट के लिए एसएमएस हॉस्पिटल में लाया गया जबकि एक किडनी व लिवर महात्मा गांधी हॉस्पिटल में जरूरत मंद मरीजों को लगाया गया।</p>
<p><strong>आठ घंटे चला ट्रांसप्लांट</strong><br />एसएमएस हॉस्पिटल के सीनियर प्रोफेसर और सिटी सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. राजकुमार यादव और आचार्य डॉ. रामगोपाल यादव ने बताया कि सुबह करीब 10.30 बजे हार्ट को एसएमएस हॉस्पिटल लाया गया और शाम 6.30 बजे तक सर्जरी चली। जहां अलवर निवासी 40 साल की महिला धोली देवी को हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। महिला की तबीयत अब ठीक है और उसे आईसीयू में रखा गया है। महिला को करीब चार साल से हार्ट की समस्या थी और पांच दिन पहले ही उसे कार्डियक अरेस्ट आया था। ऐसे में अब हार्ट ट्रांसप्लांट ही अंतिम उपाय था। जैसे ही शुक्रवार सुबह डोनर मिला तो महिला का आॅपरेशन करके उसे दूसरा हार्ट लगाया गया। इस दौरान सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने भी अपना सहयोग दिया। इस दौरान टीम में डॉ. रामस्वरूप सैन, डॉ. राजेन्द्र महावर, डॉ. देवी प्रसाद सैनी, डॉ. राजेश शर्मा के अलावा एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट से डॉ. रीमा मीणा, डॉ. अंजुम सैयद, डॉ. अरूण और नर्सिंग स्टाफ  संतोष, रोशन यादव, विश्वनाथ शर्मा समेत अन्य स्टाफ  मौजूद रहे!</p>
<p><strong>पहली बार पुरुष का हार्ट महिला को लगाया</strong><br />सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पुरुष का हार्ट महिला मरीज को लगाया गया है। एक पुरुष का हार्ट बड़ा होता है और महिला का छोटा और पुरुष के मुकाबले थोड़ा कमजोर होता है। ऐसे में पुरुष का हार्ट महिला को लगाए जाने से ट्रांसप्लांट के रिजल्ट अच्छे रहते हैं। <br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 12:38:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ब्रेन ट्यूमर को रोका नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में होने वाली असामान्य कोशिकाओं का एक संग्रह है, जब ट्यूमर बढ़ता है, तो इससे सिर के अंदर दबाव बढ़ सकता है। यह स्थिति मस्तिष्क को क्षति पहुंचाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/jaipur-brain-tumor-can-not-be-prevented/article-11601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/brain-tumor-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में होने वाली असामान्य कोशिकाओं का एक संग्रह है, जब ट्यूमर बढ़ता है, तो इससे सिर के अंदर दबाव बढ़ सकता है। यह स्थिति मस्तिष्क को क्षति पहुंचाती है। शरीर में अलग-अलग तरह के ब्रेन ट्यूमर होते हैं, जैसे कुछ ब्रेन ट्यूमर कैंसर रहित होते हैं तो कुछ कैंसर वाले होते हैं। वैसे तो ब्रेन ट्यूमर होने से रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते पता चल जाए तो आधुनिक तकनीकों से इलाज संभव है। बढ़ती आयु, रेडिएशन का दुष्प्रभाव, कैंसर का पारिवारिक इतिहास और एचआईवी होना ब्रेन ट्यूमर के कारणों में शामिल हैं।</p>
<p><strong>ब्रेन ट्यूमर कैसे और क्यों होता है</strong><br />नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. केके बंसल ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा ज्यादा होता है। वृद्ध लोगों में ब्रेन ट्यूमर आम है। हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर सिर्फ बच्चों में  ही होते हैं। जिन लोगों को आयोनिजिंग रेडिएशन का एक्सपोजर हुआ हो, उनमें ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है। आयोनिजिंग रेडिएशन का मतलब है कि सिर पर एक बड़ी मशीन से विकिरण चिकित्सा करवाना जैसा कैंसर के इलाज में होता है। यदि परिवार के किसी सदस्य को पहले कभी ब्रेन ट्यूमर रहा हो, तो मस्तिष्क में ब्रेन ट्यूमर होने की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर पीड़ित बच्चों को अपने बाद के जीवनकाल में ब्रेन ट्यूमर का अधिक खतरा रहता है। जिन वयस्कों को ल्यूकेमिया होता है, उनमें भी इसके होने का खतरा रहता है।  </p>
<p><strong>लक्षण महसूस होते ही निदान जरूरी</strong><br />डॉ. सुरेन्द्र धायल ने बताया कि यदि ब्रेन ट्यूमर के किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस होते हैं तो तुरंत डॉक्टर के परामर्श से न्यूरोलॉजिक परिक्षण, एमआरआईए सीटी स्कैन, स्पाइनल टैप और जरूरत होने पर बॉयोप्सी करानी चाहिए। अलग-अलग मामलों में ब्रेन ट्यूमर के संकेत और लक्षण भी भिन्न हो सकते हैं। यह ब्रेन ट्यूमर के आकार, स्थान और बढ़ने की दर पर निर्भर करते हैं। कई बार बिना किसी लक्षण के भी व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर हो सकता है।</p>
<p><strong>नई तकनीकों से बेहतर इलाज</strong><br />सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. यशपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि अब एंडोस्कोपी तकनीक से भी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी होने लगी है। इसमें मरीज को बड़ा चीरा नहीं लगाना होता। की-होल सर्जरी से ही उसका ट्यूमर निकाल दिया जाता है। नई तकनीकों में नेविगेशन का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है, जिसमें दिमाग के प्रभावित हिस्से में पहुंच कर सटीकता से ट्यूमर निकाला जाता है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 11:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>ब्रेन एन्यूरिज्म किसी भी उम्र के लोगों को कर सकता है प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं के एन्यूरिज्म का चला पता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health--jaipur--brain-aneurysm-can-affect-people-of-any-age/article-9115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dr-dp-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ब्रेन एन्यूरिज्म किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। और 15 में से एक व्यक्ति में एक अनियंत्रित एन्यूरिज्म होता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी आपात स्थिति में व्यक्तियों को उचित देखभाल मिले, चेतावनी के संकेतों और लक्षणों के बारे में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। अधिकांश एन्यूरिज्म जब तक फट नहीं जाते, तब तक कोई लक्षण नहीं पैदा करते हैं और केवल दूसरे किसी कारण  के लिए परीक्षण के दौरान मिलते हैं। एन्यूरिजम के फटने से गंभीर सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, बोलने में परिवर्तन और गर्दन में दर्द से इन्सान पीड़ित हो सकता है। इन्ही कारणों की वजह से एन्यूरिज्म का सही समय पर निदान व इलाज सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्नत प्रणाली से एंडोवास्कुलर रास्ते से क्वॉइल अथवा फ्लो डायवर्टर डालने से एन्यूरिज्म में रक्त के बहाव को बंद किया जा सकता है। फट चुके एन्यूरिज्म में भी यह प्रणाली कारगर है पर रक्तस्त्राव के जोखिम बढ़ जाता है।<br /><br /><strong>मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं के एन्यूरिज्म का चला पता</strong><br />38 वर्षीय एक महिला रोगी को 15 दिनों से सिरदर्द की शिकायत थी, जिसके कारण का पता नहीं चल रहा था। जब वे जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग में आईं तो उसे तीन दिनों से बहुत तेज सिरदर्द था और कुछ नींद में थी। दिमाग के सीटी स्कैन में रक्तस्त्राव दिखा। आगे की जांच में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं के एन्यूरिज्म का पता चला।</p>
<p>प्रीऑपरेटिव मूल्यांकन और अनुकूलन के बादए डॉ. डी पी शर्मा ने एन्डोवास्कुलर तकनीक से क्वॉइल का उपयोग करके एन्यूरिज्म को बंद किया। ऑपरेशन के बादए रोगी को आईसीयू में रखा गया था और किसी भी कमजोरी के लक्षण के लिए बारीकी से देखा गया था। पोस्ट ऑपरेटिव सीटी स्कैन में कोई ताजा रक्तस्त्राव नहीं दिखा। एक सप्ताह के भीतर सिरदर्द ठीक होने और संतोषजनक स्थिति में बिना किसी शिकायत के वार्ड में भेजा गया व डिस्चार्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 May 2022 15:47:30 +0530</pubDate>
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