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                <title>कलम का कुआ गांव में नवजीवन योजना के बाद नहीं हुआ विकास कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे में अभी से ही ग्रामीणों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है।केवल वोटिंग के समय जनप्रतिनिधि आते हैं तथा जीतने के बाद गांव की सुध तक नहीं लेते ऐसी स्थिति के चलते गांव में जगह-जगह टूटी हुई सड़कें तथा खरंजो पर भरा गंदला पानी पेयजल की अनुपलब्धता बेरोजगारी की समस्या नाली निर्माण छोटे बालकों के लिए आंगनबाड़ी भवन सामुदायिक भवन निर्माण चिकित्सा सुविधा की समस्या से सामना करना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kalam-ka-kua-village-did-not-have-development-work-after-navjeevan-yojana/article-31311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/kalam-ka-kua-gaon-mei-navjeevan-yojna-ke-baad-nahi-hua-vikas-karya...mandana-news-kota..2.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>मंडाना। विकास नही तो मतदान नहीं यह बात गुरुवार को कलम का कुआ गांव में ग्रामीणों ने कही। वर्ष 2014 में नवजीवन योजना के बाद कलम का कुआ गांव में न कि बराबर विकास कार्य हुआ, ग्रामीणों ने कहा आगामी चुनाव का  बहिष्कार करेंगे। ग्राम पंचायत कोलाना क्षेत्र के कलम का कुआं गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। वही ग्राम पंचायत प्रशासन व जनप्रतिनिधि भी उनकी सुध नहीं ले रहे हैं। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। जगह जगह टूटी हुई सड़कें, पेयजल की अनुपलब्धता व रोजगार की समस्या से ग्रामीण ग्रसित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मतदान के समय वोट लेने के लिए जनप्रतिनिधि चले आते तथा जीतने के बाद उनको समस्या बताते हैं तो उस पर कोई अमल नहीं होता केवल आश्वासन ही मिलता है परंतु गांव में कोई विकास कार्य नहीं होता ऐसी स्थिति के चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कोलाना पंचायत क्षेत्र के  कलम का कुआं गांव में लगभग 400 घरों की बस्ती है। यहां वर्ष 2014 में नवजीवन योजना के तहत सड़क निर्माण किया गया था परंतु अब सड़क की हालत यह है कि जगह-जगह इसमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं तथा सड़कें टूट गई है। ऐसी स्थिति में कई लोग इनमें गिरकर चोटिल हो रहे हैं। यहां तक की कुछ लोगों की मौत भी हो गई है।  </p>
<p>वही कस्बे में अभी से ही ग्रामीणों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिला प्रेम बाई, अनीता, गायत्री बाई, गीता नंदू बाई, मीराबाई बच्ची बाई सहित कई महिलाओं ने बताया कि यहां जलदाय विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुछ ही स्थानों पर पाइप लाइन बिछाई गई है परंतु उस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां तक कि सार्वजनिक पॉइंट्स में भी पानी तक नहीं आता तथा सुबह से शाम पेयजल जुटाने में बीत जाता है तथा दूर दराज से पेयजल लाकर काम चलाना पड़ रहा है। अभी सर्दी में भी पेयजल की समस्या गहरा रही है। दूरदराज से पानी लाते लाते पीठ में दर्द होने लगता है तथा मजदूरी छूट जाती है। ग्रामीणों ने विभाग से अविलंब इस योजना में पेयजल आपूर्ति की मांग की है अखिल भारतीय बंजारा उत्थान समिति कोटा संभाग के अध्यक्ष रूप सिंह बंजारा ने बताया कि कलम कुआं गांव के वाशिंदों की स्थिति ठीक नहीं है यहां केवल वोटिंग के समय जनप्रतिनिधि आते हैं तथा जीतने के बाद गांव की सुध तक नहीं लेते ऐसी स्थिति के चलते गांव में जगह-जगह टूटी हुई सड़कें तथा खरंजो पर भरा गंदला पानी पेयजल की अनुपलब्धता बेरोजगारी की समस्या नाली निर्माण छोटे बालकों के लिए आंगनबाड़ी भवन सामुदायिक भवन निर्माण चिकित्सा सुविधा की समस्या से सामना करना पड़ रहा है। बंजारा का कहना है कि समस्याओं के बताने के बावजूद भी जनप्रतिनिधि हमारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। आगामी चुनाव में किसी भी पार्टी को मत नहीं दिया जाएगा बंजारा की सरकार से मांग है कि बंजारा समाज के लिए नवजीवन जैसी योजनाएं फिर से शुरू करें ताकि समाज के लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिले तथा बेरोजगार युवकों को रोजगार के अवसर प्रदान हो इस अवसर पर गोपाल सुरावत रमेश बंजारा बंटी बंजारा महेंद्र बंजारा सहित कई लोगों ने पंचायत प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से गांव में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।</p>
<p> ग्रामीणों के द्वारा कोई भी समस्या से अवगत नही कराया गया है फिर भी  गांव के लिए 15 लाख के विकास कार्य कराये जाएंगे व पेयजल व सड़क की समस्या का समाधान भी कराया जाएगा। <br /><strong>- नईमुद्दीन गुड्डू, प्रधान, लाडपुरा।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Dec 2022 14:32:13 +0530</pubDate>
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                <title>तरबूज के बंपर उत्पादन पर लगा मौसम का ग्रहण, एक माह फसल देरी से आने से नहीं मिल रहे दाम</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दो साल से कोरोना की मार झेल रहे किसानों को इस बार भी गर्मी में  तरबूज की फसल से लाभ होता नहीं दिखाई दे रहा है। कारण कि इस बार मौसम के बार- बार परिवर्तन होने से और भीषण गर्मी शुरू होने से कोटा, बूंदी, बारां में पेटा काश्त तैयार होने वाली तरबूज की फसल एक माह देरी से बाजार में आई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-eclipse-of-the-season-imposed-on-the-bumper-production-of-watermelon--the-price-is-not-available-due-to-the-delay-of-one-month-harvest/article-9222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/645654654.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । पिछले दो साल से कोरोना की मार झेल रहे किसानों को इस बार भी गर्मी में  तरबूज की फसल से लाभ होता नहीं दिखाई दे रहा है। कारण कि इस बार मौसम के बार- बार परिवर्तन होने से और भीषण गर्मी शुरू होने से कोटा, बूंदी, बारां में पेटा काश्त तैयार होने वाली तरबूज की फसल एक माह देरी से बाजार में आई। जिससे किसानों को अच्छे दामों से वंचित रहना पड़ रहा है। जहां पिछले साल बूंदी क्षेत्र के तरबूज 20 रुपए किलो तक बिके थे इस बार खुदरा में 8 से 10 रुपए किलो में बिक रहे है। वहीं होलसेल में लोकल तरबूज 4 से 5 रुपए किलो में बिक रहा है। ऐसे में किसानों के बंपर उत्पादन होने के बावजूद दाम नहीं मिल रहे है। <br /><br />जानकारी के अनुसार इन दिनों पेटा काश्त भूमि से प्रतिदिन 70 से 80 मेटाडोर व ट्रक में किसान तरबूज की फसल भरकर प्रदेश की विभिन्न मंडियों में ले जाकर बेच रहे हैं। बूंदी जिले में तरबूज की खेती कहार समाज के लोग ज्यादा करते है।  किसान भंवरलाल कहार ने बताया कि पिछले साल गर्मी में तरबूज के बंपर उत्पादन के साथ कोरोना की मार शुरू हो गई थी। जिससे उपज के अच्छे दाम नहीं मिले । इस बार कोरोना नहीं है तो मौसम की मार ने तरबूज को मार दिया । फसल एक माह देरी से आने से बाजार में अच्छे दाम नहीं मिल रहे।  माहे रमजान में फसल आ जाती तो अच्छी बिक्री होती लेकिन रमजान खत्म होने के बाद तरबूज की फसल मार्केट में आने से अब अच्छे दाम नहीं मिल रहे है। इस बार तरबूज देरी से पका इसलिए इसको स्टोर भी नहीं कर सकते है। इधर बाजार में खरबूज की अच्छी आवक हो रही है। जहां होलसेल में खबरबूज 15 से 20 रुपए किलों में बिक रहे वहीं खुदरा में 35  से 40 रुपए किलों में बिक रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 06 May 2022 16:10:27 +0530</pubDate>
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