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                <title>monkey - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मंकी पॉक्स के खिलाफ अत्यधिक सावधानी रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[ भारत में इस रोग के निदान और जांच की तैयारी चुस्त दुरुस्त कर दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकी पॉक्स को जनस्वास्थ्य के लिए एक आपात हालत बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/instructions-to-take-extreme-precautions-against-monkey-pox/article-88140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/monkeypox.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी हवाई अड्डों और बंदरगाहों को किसी अंतर्राष्ट्रीय यात्री में मंकी पॉक्स के संलक्षण पाए जाने पर तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली में तो तीन अस्पतालों को इस कार्य के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्ध कर दिया है। हालांकि हाल में इस रोग का कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन पूरे भारत में इस रोग के निदान और जांच की तैयारी चुस्त दुरुस्त कर दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकी पॉक्स को जनस्वास्थ्य के लिए एक आपात हालत बताया है।</p>
<p>दुनिया में वर्ष 2022 से अब तक इस रोग के 99हजार से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। एक न्यूज चैनल के अनुसार दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल, सफदरगंज अस्पताल और लेडी हार्डिंज अस्पताल को मंकी पॉक्स के मरीजों के एकांतवास, निदान और उपचार के लिए नामित कर दिया गया है। ये अस्पताल इस रोग के निदान और उपचार के लिए नोडल एजेंसी का काम भी करेंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Aug 2024 14:16:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>श्वान और बंदरों के काटने से लोग खुद ही करें बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकतर टेंडर खत्म होने से न बंदर पकड़े जा रहे ना श्वानों का हो रहा वैक्सीनेशन ।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-should-protect-themselves-from-dog-and-monkey-bites/article-73337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/shwan-or-bandarok-katne-s-log-khud-ki-hi-kre-hoha-bachaav...kota-news-21-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में यदि किसी को श्वान काट ले या बंदर काट ले तो नगर निगम की ओर से बचाने के लिए या बंदर व श्वान को पकड़ने के लिए कोई नहीं आने वाला है। लोगों को खुद ही अपने स्तर पर उनसे बचाव के प्रयास करने होंगे। यह स्थिति है नगर निगम कोटा दक्षिण में।  नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही से समय पर टेंडर ही नहीं किए गेए। जिससे बंदर पकड़ने से लेकर मवेशी पकड़ने तक के टेंडर समाप्त हो गए हैं। नए टेंडर के ठेके नहीं हुए हैं। इसी बीच लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई है। अब जून तक नए ठेके होने वाले भी नहीं है। ऐसे में जून तक करीब तीन महीने लोगों को श्वान व बंदरों से खुद को ही सुरक्षा व बचाव करना होगा। नगर निगम की ओर से बंदरों को पकड़ने का ठेका मथुरा के संवेदक को दिया हुआ था। उसके टेंडर की अवधि समाप्त हो गई है। लेकिन की ओर से समय पर दोबारा टेंडर नहीं किए गए। जिससे अब कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में बंदरों को नहीं पकड़ा जा रहा है। ऐसे में शहर में बंदर किसी को काटें या घरों में उत्पात मचाएं निगम अधिकारियों को कोई परवाह नहीं है। इसी तरह से मवेशी पकड़ने का ठेका पिछले साल की खत्म हो गया था। उसे कुछ समय के लिए बढ़ाया था वह भी पूरा हो गया। जबकि सड़कों पर आवारा मवेशियों का अम्बार लगा हुआ है। हादसों का खतरा बना हुआ है। लेकिन निगम अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। </p>
<p><strong>श्वानों का वैक्सीनेशन करने वाली फर्म डीबार</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में श्वानों का वैक्सीनेशन व बधियाकरण करने का काम पुणे की फर्म को दिया हुआ था। जिसके द्वारा श्वानों को जिस जगह से पकड़कर लाया जा रहा था। बधियाकरण व वैक्सीनेशन के बाद उसी जगह पर छोड़ा जा रहा था। लेकिन पिछले करीब डेढ़ माह से अधिक समय हो गया। श्वानों का वैक्सीनेशन व बधियाकरण नहीं किया जा रहा है।  नगर निगम कोटा दक्षिण अधिकारियों ने पुणे को उस फर्म को डीबार कर दिया है। जिससे अब श्वानों का वैक्सीनेशन भी नहीं हो रहा है। ऐसे  में यदि किसी बच्चे या महिला और पुरुष को श्वान काट ले तो निगम की ओर से उन्हें पकड़ने कोई नहीं आएगा। श्वानों से लोग अपनी सुरक्षा स्वयं करें। इस वाक्य को नगर निगम कोटा दक्षिण में सही साबित भी किया जा रहा है। </p>
<p><strong>निगम कार्यालय में ही श्वानों का डेरा</strong><br />शहर के मुख्य मार्ग व गली मौहल्लों में ही नहीं। नगर निगम कार्यालय तक में श्वानों का डेरा डला हुआ है। बुधवार को नगर निगम कार्यालय की दूसरी मंजिल तक श्वान बेसौफ घूम रहे थे। जिस तरह से श्वान निगम कार्यालय में घूम रहे थे। उससे तो ऐसा लगा रहा है कि उन्हें भी पता चल गया कि अब उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जिससे वे अब तो निगम कार्यालय तक पहुंच गए हैं। </p>
<p><strong>मवेशी मर जाए तो सड़ता रहेगा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से मुर्दा मवेशी उठाने का ठेका हर साल किया जाता है। लेकिन कुछ समय पहले इसका ठेका समाप्त हो गया। निगम की ओर से नया ठेका नहीं किया गया। जिससे अभी तक तो संवेदक मुर्दा मवेशी उठा रहे थे। लेकिन गत दिनों जिस तरह से नगर निगम अधिकारियों व न्यास दस्ते ने उनके कर्मचारियों के साथ व्यवहार किया। उसके बाद उन्होंने भी पहले की तरह काम करना बंद कर दिया है। ऐसे में यदि कहीं मवेशी मर भी जाए तो उसे कई दिन तक तो उठाने वाला कोई नहीं आएगा। लोगों को दुर्गंध में ही रहना पड़ सकता है।  यह हालत गत दिनों लोगों ने देखी भी है। एरोड्राम अंडरपास रोड पर कई दिन तक बकरी मरी पड़ी रही। न्यास कार्यालय के गेट पर कई दिन तक मृत गाय पड़ी रही। जिन्हें बड़ी मुश्किल से उठाया गया था। </p>
<p>निगम अधिकारियों पर बीतेगी तब पता चलेगा<br />इधर लोगों का कहना है कि नगर निगम अधिकारियों को पता है कि हर साल टेंडर करना होता है  तो समय रहने ठेके करने चाहिए। इस बार लोकसभा चुनाव की आचार सहिता से पहले ठेके करने चाहिए थे। दादाबाड़ी निवासी अनीस अहमद ने कहा कि लोगों के साथ श्वानों के काटने, बंदरों के हमले और मवेशियों से हादसों की घटनाएं हो रही है। इसी तरह की घटनाएं जब निगम अधिकारियों के साथ होंगी तब उन्हें पता चलेगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />नगर निगम में अधिकारियों की मनमानी चल रही है। वे कोई भी काम समय पर करना ही नहीं चाहते। श्वानों के वैक्सीनेशन व बधियाकरण के लिए बड़ी मुश्किल से पुणे की फर्म आई थी। जरा सी बात पर उसे डीबार कर दिया। जबकि कई संवेदक मनमानी कर रहे हैं। कार्यादेश की पालना नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। श्वान, बंदर व मवेशी शहर की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। उनका समाधान करना निगम अधिकारियों की जिम्मेदारी है लेकिन वे उन्हें ही सही ढंग से नहीं कर रहे हैं। <br /><strong>- पवन मीणा, उप महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>श्वान और मवेशियों की समस्या शहर  में काफी अधिक है। वार्ड में आए दिन श्वानों के काटने की घटनाएं हो रही है। लोग फोन कर रहे हैं लेकिन वर्तमान में श्वानों के वैक्सीनेशन व बधियाकरण करने वाली कोई फर्म ही नहीं है। मवेशी पकड़ने का ठेका खत्म हो गया है। अधिकारियों ने समय पर नए टेंडर नहीं किए हैं। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, नेता प्रतिपक्षनगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>दोबारा टेंडर किए लेकिन आचार सहिता लागू</strong><br />इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि श्वानों का वैक्सीनेशन करने वाली फर्म सही ढंग से काम नहीं कर रही थी। नोटिस देने के बाद भी सुधार नहीं हुआ। इस कारण से उसेडीबार कर दिया गया। बंदर व मवेशी पकड़ने के  दोबारा टेंडर किए लेकिन निविदा खुलने से पहले ही आचार संहिता लग गई। फिलहाल न तो श्वानों का वैक्सीनेशन हो रहा है और न ही बंदर पकड़े जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 17:05:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - पिंजरे में कैद हुआ महिलाओं को घायल करने वाला बंदर</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति में समाचार प्रकाशित होने के बाद निगम के अधिकारी हरकत में आए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/monkey-who-injured-women-captured-in-cage-kota-rajasthan-news/article-61287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/sizte--(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा क्षेत्र में आतंक मचाने व महिलाओं को घायल करने वाले बंदर को आखिरकार नगर निगम की टीम ने शुक्रवार को पिंजरे में कैद कर लिया। नगर निगम कोटा उत्तर के स्वास्थ्य अधिकारी तनुज शर्मा ने बताया कि संवेदक के माध्यम से सुबह बस स्टैंड के पास संजय कॉलोनी में पिंजरा लगाया गया। जिसके माध्यम से वहां पिछले कई दिन से उत्पात मचा रहे बंदर को पकड़ा। उसे पकड़कर जंगल में छोड़ा गया। नगर निगम कोटा उत्तर वार्ड 57 से पार्षद पति मनीष गुर्जर ने बताया कि निगम की टीम सुबह मौके पर पहुंच गई थी और बंदर को पकड़ लिया। इससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। एक बंदर पिछले कई दिन से यहां उत्पात मचा रहा था। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि नयापुरा की संजय कॉलोनी में बंदर के  काटने से महिलाओं के घायल होने की खबर दैनिक नवज्योति में प्रकाशित की थी। शुक्रवार के अंक में पेज 8 पर ‘महिलाओं पर हमला कर घायल कर रहे बंदर’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद निगम के अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने मौके पर पिंजरा लगवाकर बंदर को पकड़ा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 12:41:36 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में महिलाओं पर हमला कर घायल कर रहे बंदर</title>
                                    <description><![CDATA[बंदरों के आतंक से शहर के अधिकतर लोग परेशान व पीड़ित होने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/monkeys-are-attacking-and-injuring-women/article-61231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/mahilao-pr-hamla-kr-ghayal-kr-rhe-bandr...kota-news-03-11-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक बार फिर से बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बाग बगीचों से निकलकर अब ये घरोें से लेकर राह चलते लोगों तक पर हमला करने लगे हैं। नयापुरा क्षेत्र में एक बंदर के हमले में तो कई महिलाएं चोटिल हो चुकी हैं। किसी के पैर में काटा तो किसी पर हमला करने से उनके गिरने पर पैर में फ्रेक् चर तक हो गया। स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल कोटा शहर में पहले जहां बंदर अधिकतर बाग बगीचों में ही पेड़ों पर नजर आते थे। अब ये बंदर वहां से निकलकर शहर के रिहायशी इलाकों में घुस गए हैं। पुराना शहर हो या नया कोटा हर जगह घरों पर बंदर ही बंदर नजर आने लगे हैं। घर की छत ही नहीं बॉलकनी हो या घर का दरवाजा। गली हो या सड़क। दिन ही नहीं अब तो रात के समय भी बंदर घरों पर हुडदंग करते हुए देखे जा सकते हैं। बंदरों के आतंक से शहर के अधिकतर लोग परेशान व पीड़ित होने लगे हैं। पहले जहां बंदर घरों में रखे खाने-पीने के सामान ही निकालकर खा रहे थे। वहीं अब ये लोगों पर हमले कर उन्हें घायल व चोटिल भी कर रहे हैं। </p>
<p><strong>निगम ने दे रखा ठेका, फिर भी कम नहीं हो रहे</strong><br />नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया हुआ है। मथुरा की फर्म द्वारा यहां टीम भेजी जाती है। पिंजरा लगाकर बंदरों को पकड़ा जा रहा है। इतना ही नहीं उन बंदरों को गाड़ी में भरकर शहर से दूर रावतभाटा व दरा के ज़गलों में छोड़ा जा रहा है। उसके बाद भी बंदरों की संख्या कम नहीं हो रही है। ह्य</p>
<p><strong>कई लोगों को कर  चुका घायल</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर वार्ड 57 की पार्षद मेघा गुर्जर ने बताया कि संजय कॉलोनी में एक बंदर कई महिलाओं पर हमला कर घायल कर चुका है। यह अधिकतर महिलाओं पर ही हमला कर रहा है। कई दिन से बंदर का आतंक  बना हुआ है। इस संबंध में गुरुवार को नगर निगम में शिकायत की है। निगम अधिकारियों ने उसे पकड़ने के लिए टीम भेजने को कहा है। </p>
<p><strong>रात के समय भी बंदर</strong><br />इधर लोगों ने बताया कि बंदर अब रात के समय भी घरों  पर आने लगे हैं। सरस्वती कॉलोनी निवासी राकेश भार्गव ने बताया कि रात के समय उनके मकान की छत पर कूदने की आवाज आती है। एक दिन उन्होंने छत पर जाकर देखा तो दो बंदर आपस में लड़ रहे थे। उनके बीच खाने की चीज को लेकर लड़ाई हो रही थी।  पाटनपोल निवासी घनश्याम शर्मा ने बताया कि बंदरों का इतना अधिक आतंक है कि घर में घुसकर फ्रिज से सामान निकालकर ले जाते हैं। घर में दिन के समय महिलाएं अकेली रहती हैं। उनके द्वारा बंदरों को भगाने पर वे उन पर हमला करने लगते हैं। जिससे सभी घर वाले डरे हुए हैं। ऐसे में अब बंदरों से बचने के लिए उन्होंने पूरे मकान को ही जाली से कवर करवा लिया है। </p>
<p><strong>नयापुरा में कई महिलाओं को किया घायल</strong><br />नयापुरा क्षेत्र में एक बंदर ने पिछले दो से तीन दिन में कई महिलाओं पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। बस स्टैंड पर रैन बसेरे के सामने स्थित संजय कॉलोनी में बंदर ने आतंक मचाया हुआ है।  कॉलोनी निवासी सीमा अग्रवाल ने बताया कि वह घर पर अकेली रहती है। तीन दिन पहले वे लघु शंका के लिए जा रहीे थी। इसी दौरान एक बंदर उनके घर में घुस गया। वह उन्हें देखकर उन पर हमला करने के लिए दौड़ा। जिससे बचने के लिए वे भागी तो फिसलकर गिर गई। जिससे उनके बाएं पैर में फ्रेक् चर हो गया। डिम्पल हाड़ा ने बताया कि वह एक दिन पहले छत पर कपड़े सुखाने गई थी। उस समय बंदर ने उन पर हमला कर दिया। उनके पैर में दो जगह पर काट लिया। जिससे वे इतनी ’यादा घबरा गई कि अब छत पर जाने से डर लगने लगा है। आशा बाई ने बताया कि वे घर से मंदिर जाने के लिए निकली थी। कुछ ही दूरी पर एक बंदर उनकी तरफ आया और उनके हाथ में प्रसाद की थैली देखकर उन पर झपटा। उन्होंने उसे बचाने का प्रयास किया तो उनके पैर में पंजे के पास काट लिया। जिससे वे घबरा गई। उन्होंने बताया कि एक ही बंदर है जिसने क्षेत्र में आतंक मचाया हुआ है। वह ’यादातर महिलाओं को देखकर उन पर ही हमले कर रहा है। जिससे महिलाएं व क्षेत्र के लोग काफी डरे हुए हैं। अदालत परिसर तक में बंदर कैंटीन में दुकानों से सामान व लोगों के हाथ से खाने की चीजें छीनकर ले जा रहे हैं। किशोर सागर तालाब की पाल पर सुबह के समय तो बीच सड़क पर बंदरों का जमघट लगा रहता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया है। जहां से भी शिकायत आती है वहां पर तुरंत टीम भेजकर पिंजरा लगाया जाता है और बंदरों को पकड़कर शहर से दूर छोड़ा जा रहा है। कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में ही इस साल जनवरी से अक्टूबर तक दस माह में 1375 बंदरों को शहर से पकड़ा जा चुका है। नयापुरा क्षेत्र में एक बंदर के आतंक की पहले कोई शिकायत नहीं आई। गुरुवार को ही इस संबंध में स्थानीय पार्षद ने बताया है। वहां टीम भेजकर बंदर को पकड़ा जाएगा। <br /><strong>- तनुज शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Nov 2023 15:39:00 +0530</pubDate>
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                <title>दफ्तर में बंदर बना अधिकारी, खंगाली फाइलें</title>
                                    <description><![CDATA[बंदर खुद ही कार्यालय से बाहर निकल गया। बंदर की इस अजीबो गरीब हरकत की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/officer-became-a-monkey-in-the-office-and-searched-the/article-59615"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/बंदर-ली-अधिकारी-कि-जगह.png" alt=""></a><br /><p>बेहट। उत्तर प्रदेश के बेहट से ये अजीब मामला सामने आया है। एक बंदर करीब डेढ़ मिनट तक रजिस्ट्री कार्यालय में रहा। यह घटना बृहस्पतिवार की बताई गई है।</p>
<p>बंदर कहीं से आया और तहसील बेहट में पहुंचने के बाद काफी देर तक नायब तहसीलदार के कार्यालय के बाहर बैठा रहा। इसके बाद वह सीढ़ियों से दूसरी मंजिल पर रजिस्ट्री कार्यालय में पहुंच गया। कार्यालय में घुसते ही बंदर उछलकर एक बाबू की मेज के ऊपर बैठ गया और फाइलों को खोलकर उनके पन्ने पलटने लगा।</p>
<p>बंदर की हरकत देखकर लोग दंग रह गए। इस दौरान कार्यालय में कामकाज बंद हो गया। तहसील में चर्चा बनी रही, कि आज तो रजिस्ट्रार का काम बंदर ने किया है। इस दौरान लोग बंदर की इस हरकत की वीडियो बनाते रहे। बाद में बंदर खुद ही कार्यालय से बाहर निकल गया। बंदर की इस अजीबो गरीब हरकत की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Oct 2023 17:35:37 +0530</pubDate>
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                <title>घरों में घुस कर खाने-पीने की चीजें चुरा रहे बंदर</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए नगर निगम हर साल ठेका करता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/stealing-food-items-by-entering-homes/article-52210"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/gharo-me-ghus-k-chura-rhe-khadya-samgri...kota-news-19-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । <strong>केस 1 -</strong> कैथूनीपोल निवासी अजय सिंह के मकान में छत के रास्ते आए दिन बंदर घुृसकर फ्रिज से खाने-पीने के सामान चुरा रहे हैं। हालत यह है कि बंदरों को भगाने के लिए उन्होंने घर में लठ रखा हुआ है। </p>
<p><strong>केस 2 - </strong>कैथूनीपोल मोखापाड़ा निवासी राधेश्याम नागर के मकान में आए दिन बंदर बॉलकनी से अंदर घुसकर रसोईघर में से सब्जी व रोटी चोरी कर ले जाते थे। अब बंदरों से बचने के लिए उन्होंने मकान को जाली से कवर करवा दिया है। </p>
<p><strong>केस 3 -</strong> कैथूनीपोलसाबरमती कॉलोनी निवासी मनीष शर्मा के मकान में बंदरों का इतना अधिक आतंक है कि वे खाने का सामान तो उठाकर ले ही जाते हैं। उन्हें भगाने पर सामान तक तोड़ जाते थे। ऐसे में उन्होंने मकान में ऊपर की तरफ बाहर लगे एसी की मशीन तक को जाली से कवर करवा लिया है। </p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं। शहर में बंदरों के आतंक को बताने के लिए। शहर में ऐसे कई मकान हैं जहां लोगों ने बंदरों के आतंक से बचने के लिए न केवल पूरे मकान को ही जाली से पैक करवा लिया है। वरन् घरों में लठ रखे हुए हैं। किसी ने बाहर सामान रखना बंद कर दिया है। यहां तक कि बिना जाली के मकानों में तो लोग कपड़े तक बाहर नहीं सुखा पा रहे हैं। </p>
<p><strong>पुराने शहर में अब अधिक</strong><br />वैसे तो बंदर पूरे शहर में ही है। महावीर नगर हो या विश्वकर्मा नगरे। गणेश नगर हो या दादाबाड़ी। लेकिन वहां उनकी संख्या अपेक्षाकूत कम है। जबकि पुराने शहर के पाटनपोल, कैथूनीपोल, मोखापाड़ा, रामपुरा, सावरमती कॉलोनी में अधिक हैं। वहीं नयापुरा में सीबी गार्डन के अलावा मंदिरों में भी इनकी संख्या अधिक है। गोदावरी धाम, खड़े गणेशजी, नयापुरा स्थित पूर्व मुखी हनुमान मंदिर, रंगबाड़ी बालाजी मंदिर के अलावा किशोर सागर तालाब की पाल पर भी मंदिर नजर आ जाते हैं। यहां तो सुहब के समय लोग उन्हें केले और चलने खिलाते हुए देखे जा सकते हैं। यहां और गार्डन व मंदिरों में होने वाले आयोजनों के दौरान बंदर हाथ से खाने की चीजे छीनकर ले जाते हैं। आयोजनों के दौरान तो बंदरों को भगाने के लिए अलग से एक व्यक्ति लगाना पड़ता है। वह पटाखे चलाकर थोड़ी-थोड़ी देर में उन्हें भगाता रहता है। वरना वहां पंगत में खाना खाना ही मुश्किल हो जाता है। </p>
<p><strong>निगम हर साल पकड़वा रहा बंदर</strong><br />शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए नगर निगम हर साल ठेका करता है। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण की ओर से किए जा रहे टेंडर में मथुरा की फर्म द्वारा बंदरों को पकड़ा जा रहा है। हर साल 800 से अधिक बंदर पकड़कर शहर से दूर छोड़े जा रहे हैं। उसके बाद भी इनकी संध्या कम नहीं हो रही है। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार मथुरा का संवेदक शिकायत पर संबंधित क्षेत्र में पिंजरा लगाकर बंदरों को पकड़ रहे हैं। इस सत्र में अप्रेल से 15 जुलाई तक ही करीब 475 बंदर पकड़े जा चुके हैं। </p>
<p><strong>बाग-बगीचों से शहर में घुसे बंदर</strong><br />पीड़ित तमन्ना भाटिया ने बताया कि  बाग-बगीचे अधिक होने से बंदर अधिकतर वहीं रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे बाग बगीचे कम होने से बंदरों की संख्या भी  कम होने लगी थी लेकिन  अधिकतर बंदर शहर में प्रवेश कर गए और घरों में घुसने लगे  हैं।  उषा सिंह ने कहा कि बंदरों को खाने के लिए सामान नहीं मिल रहा है। जबकि घरों में उन्हें फल, सब्जी, खाना और मिठाई समेत कई तरह की वैरायटी खाने को मिल रही है। जिससे उनकी संख्या शहर में बढ़ गई है। </p>
<p><strong>दरा व रावतभाटा के जंगल में छोड़ रहे</strong><br />संवेदक इमामुद्दीन का कहना है कि कोटा में बंदरों की संख्या पहले से कम हुई है लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं हुए हैं। पहले रामपुरा व सीबी गार्डन से अधिक शिकायतें आती थी। लेकिन अब वहां से शिकायतें कम हुई है। साथ ही कई दिन पिंजरा लगाने पर भी गिनती के ही बंदर पकड़े जा रहे हैं। सीबी गार्डन की तरफ अधिक है। उन्होंने बताया कि बंदरिया साल में दो बार ही बच्चे को जन्म देती है। बंदरिया ढाई से तीन साल में ही फिर से बच्चे देने लगती है। उन्होंने बताया कि शहर से बंदर पकड़ने के बाद उन्हें 40 से 45 किमी. दूर दरा व रावतभाटा के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। जहां से वापस आना संभव नहीं है। बंदर 10 किमी. दूर से भी वापस नहीं आ सकता। बंदरों का बधियाकण भी नहीं हो रहा है। जिससे इनकी संख्या बढ़ रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए ही निगम द्वारा हर साल उन्हें पकड़ने का ठेका किया जाता है। जहां से भी शिकायतें अधिक आती हैं। वहां संवेदक के माध्यम से पिंजरा लगवाकर उन्हें पकड़ा जा रहा है। पकड़ने के बाद छोड़ा भी शहर से दूर जा रहा है। उसके बाद भी शहर में बंदर हैं लेकिन संख्या पहले से कम हुई है। चार महीने में ही 400 से अधिक बंदर पकड़े जा चुके हैं। <br /><strong>- रिचा गौतम, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 18:43:15 +0530</pubDate>
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                <title>मादा बंदर बच्चे को पेड़ पर ही छोड़ा </title>
                                    <description><![CDATA[जंतर-मंतर स्मारक में एक मादा बंदर बच्चे को जन्म देकर उसे पेड़ पर ही छोड़कर चली गई। इसके बाद स्मारक में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ और होमगार्ड्स ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को पेड़ से नीचे उतारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-monkey-left-the-child-on-tree/article-9254"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जंतर-मंतर स्मारक में एक मादा बंदर बच्चे को जन्म देकर उसे पेड़ पर ही छोड़कर चली गई। इसके बाद स्मारक में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ और होमगार्ड्स ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को पेड़ से नीचे उतारा। हुआ यूं कि दोपहर करीब 12 बजे एक मादा बंदर ने पेड़ पर बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद पेड़ से नीचे उतरी और बेसुध हो गई। उसकी यह हालत देखकर स्टाफ ने उसको रोटी खिलाई और परिंडे में पानी भरकर रख दिया। करीब एक से डेढ़ बजे के बीच मां अपने बच्चों को संभालने के बजाए नगर निगम हेरिटेज की बिल्डिंग की ओर भाग गई। बच्चा पेड़ की डाली पर लटक रहा, जिसे स्टाफ ने पेड़ के पास सीढ़ी लगाकर नीचे उतारने की कोशिश की। साथ ही ऐहतियात के तौर पर नीचे चद्दर पकड़कर होमगार्ड के जवान खड़े थे, ताकि अगर बच्चा पेड़ से नीचे गिरे तो उसे चोट ना लगे। जंतर-मंतर स्मारक के सहायक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि मादा बंदर के बच्चे को जन्म देने के बाद उसे पेड़ पर ही छोड़ गई थी। बच्चा पेड़ से नीचे ना गिरे, इसलिए उसे सावधानी से नीचे उतारा।</p>
<p><strong>बन गया आंखों का तारा</strong><br />मां के जाने पर स्टाफ ने इस बंदर के बच्चे को बोतल से पानी और दूध पिलाया। कुछ घंटों में ही वह स्टाफ की आंखों का तारा बन गया। उसे देखने वालों के चेहरों पर अजीब सी खुशी थी। होमगार्ड के जवान और स्टाफ ने बच्चे की मां को नगर निगम और बिजली बोर्ड की छत पर ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं दिखाई दी। वन्यजीवों के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं को भी इसकी सूचना दी गई। इस बीच मादा बंदर करीब 3 बजे आई और उसके पास थोड़ी देर बैठने के बाद उसे छोड़कर चली गई। अगर को मां नहीं आती है, तो बच्चे को जयपुर चिड़ियाघर छोड़ा जा सकता है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 May 2022 10:10:33 +0530</pubDate>
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